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दिसंबर के बाद नहीं बचेगी ममता बनर्जी की सरकार, BJP के संपर्क में TMC के 30+ MLA: अग्निमित्रा पॉल का दावा, मिथुन चकवर्ती ने 38 से बताए थे ‘अच्छे संबंध’

पश्चिम बंगाल में दिसंबर में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिलेगा- यह दावा राज्य की भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल (Agnimitra Paul) ने किया है। उन्होंने कहा है कि इस दिसंबर पश्चिम बंगाल में एक ‘खेला’ होगा। पॉल ने यह भी कहा है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के 30 से अधिक विधायक उनकी पार्टी के संपर्क में हैं।

उन्होंने कहा कि वे (30 विधायक) जानते हैं कि दिसंबर के बाद उनकी पार्टी का पत्ता साफ़ हो जाएगा। उनका अस्तित्व दाँव पर है।

पॉल ने फर्स्टपोस्ट से कहा, ”लगभग 30 टीएमसी विधायक हमारी पार्टी के सदस्य मिथुन चक्रवर्ती के संपर्क में हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता, विशेष रूप से विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी इस पर विचार करेंगे।”

बता दें कि इस साल जुलाई में भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने दावा किया था कि टीएमसी के 38 विधायक पश्चिम बंगाल में उनकी पार्टी के संपर्क में हैं। चक्रवर्ती ने कोलकाता में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा था, “क्या आप ब्रेकिंग न्यूज सुनना चाहते हैं? इस समय, 38 टीएमसी विधायकों के हमारे साथ बहुत अच्छे संबंध हैं, जिनमें से 21 प्रत्यक्ष रूप से हमारे संपर्क में हैं।”

अग्निमित्रा पॉल के अनुसार, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार में वित्तीय अनियमितताएँ हुई हैं। उन्होंने आगे कहा कि ममता बनर्जी के आधे नेता घोटाले के आरोपित हैं और अन्य आधे कथित भ्रष्टाचार के लिए जेल में हैं। पश्चिम बंगाल की भाजपा विधायक ने आगे आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पश्चिम बंगाल सरकार के पास अपने कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए पैसे नहीं हैं।

अग्निमित्रा पॉल ने कहा, “मैं एक साधारण नेता हूँ। हमारे शीर्ष नेतृत्व और विपक्ष के नेता का कहना है कि सरकार डीए नहीं दे पा रही है, लोगों को नौकरी नहीं मिल रही है। इस बारे में हमारे शीर्ष नेतृत्व और विपक्ष के नेता अपने राजनीतिक अनुभव से कह रहे हैं। हम जो सुन रहे हैं, उससे दिसंबर में कुछ हो सकता है।”

पॉल ने आगे आरोप लगाया कि टीएमसी केंद्र सरकार की परियोजना से पैसा चुरा रही है। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा की माँग है कि सीबीआई मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ-साथ उनके मंत्रियों से भी पूछताछ करे क्योंकि वह राज्य की प्रमुख हैं।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया था कि दिसंबर के बाद राज्य में तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार का अस्तित्व नहीं रहेगा और प्रदेश में विधानसभा के चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ 2024 में होंगे। उन्होंने कहा था, ”कुछ महीने रुकिए, यह सरकार पश्चिम बंगाल में सत्ता में नहीं रहेगी। मेरी बातों का गाँठ बाँध लीजिए, इस साल दिसंबर तक पश्चिम बंगाल में तृणमूल सरकार सत्ता में नहीं होगी।”

सऊदी अरब में 3 पाकिस्तानी सहित 12 को सजा-ए-मौत, तलवार से काटा: रिपोर्ट, प्रिंस सलमान ने किया था रोक का वादा

इस्लामिक देश सऊदी अरब में 12 लोगों को मौत की सजा दी गई है। रिपोर्टों के अनुसार 10 दिन के भीतर इनलोगों को सजा मिली है। तलवार से इनका गला काटा गया है। इसने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अंतरराष्ट्रीय समुदाय से किए गए वादे की भी पोल खोल दी है।

सलमान ने अहिसंक अपराधों पर मौत की सजा पर रोक लगाने की बात कही थी। लेकिन जिन लोगों को मृत्युदंड दिया गया है उन पर नशीली दवाओं से जुड़े अपराध में शामिल होने के आरोप थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बीते जिन 12 लोगों को मौत की सजा दी गई है उन्हें नशीली दवा रखने/ तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन लोगों के पास जो दवाएँ प्राप्त हुईं थीं वे हाई-लेवल ड्रग्स की श्रेणी में शामिल नहीं हैं। इसके बाद भी इन लोगों का गला काट दिया गया है। सऊदी अरब सरकार ने शरिया कानून के तहत तलवार से जिन लोगों का गला काटा है उनमें 3 पाकिस्तानी, 4 सीरियाई, सऊदी अरब के 3 और जॉर्डन के 2 नागरिक शामिल हैं।

बता दें कि सऊदी सरकार ने इसी साल मार्च में 81 लोगों को मौत की सजा दी थी। उस समय जिन 81 लोगों को सजा दी गई थी, उनमें 73 सऊदी, 7 यमन और 1 सीरियाई व्यक्ति था। इन लोगों पर बलात्कार, बच्चों के अपहरण, हत्या, हथियारों की तस्करी और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे। साथ ही कुछ लोग अलकायदा और ISIS जैसे इस्लामिक आतंकी संगठनों से जुड़े हुए थे।

सऊदी अरब में इस साल अब तक कुल मिलाकर 132 लोगों को मौत की सजा दी गई है, जो कि पिछले साल के मुकाबले कहीं ज्यादा है। साल 2021 में सऊदी सरकार ने 69 लोगों को मौत की सजा दी थी। वहीं, 2019 में 187 लोगों को यह सजा सुनाई गई थी।

गौरतलब है कि साल 2018 में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान ने कहा था कि प्रशासन ने मौत की सजा को कम करने की कोशिश की है। सिर्फ हत्या या हत्या के दोषी पाए गए लोगों को ही मृत्युदंड दिया जा रहा है। साथ ही उन्होंने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि सऊदी अरब में कानून के हिसाब से ही फैसले होते हैं।

औरंगजेब मर गया पर उस राठौड़ से जीत न पाया, इस्लामी सरदार देते थे टैक्स: मारवाड़ की वह अभेद्य दीवार जिससे टकरा मुगल हुए पस्त

भारत भूमि में हमेशा से वीरों की कमी नहीं रही है। बात मेवाड़-मारवाड़ की करें तो राजपूतों की बहादुरी के किस्से पूरे राजस्थान की आन-बान-शान हैं। इन्हीं वीरों में से दुर्गादास राठौड़ भी थे, जिन्होंने औरंगजेब की नाक में दम दिया। उन्होंने न सिर्फ मुगलों को कई बार धूल चटाई, बल्कि मेवाड़ और मारवाड़ में संधि करवा कर हिंदू एकता पर भी बल दिया। वो मारवाड़ के सेनापति थे। वहाँ के राजा अजीत सिंह के संरक्षण का जिम्मा भी उन्होंने ही उठाया था।

दुर्गादास राठौड़ का जन्म 16 अगस्त, 1638 को हुआ था। जबकि, सन् 1718 में 22 नवंबर को उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे उन्होंने अपने त्यागे। अपने अंतिम समय में वो मध्य प्रदेश में भगवान महाकाल की धरती पर निकल गए थे। उन्होंने अपने राजा जसवंत सिंह से एक वादा किया था, जिसे निभाने के बाद उन्होंने अंत समय में निश्चिंत होकर ईश्वर की शरण ली। 1988 में उनके सम्मान में भारत सरकार ने स्टांप जारी किए।

वहीं अगस्त 2003 में उनके सम्मान में सिक्के भी जारी किए गए थे। जब दुर्गादास राठौड़ का जन्म हुआ, उस समय दिल्ली की मुग़ल सल्तनत का बादशाह शाहजहाँ था। राठौड़ वंश के करणौत कुल में जन्मे दुर्गादास राठौड़ के पिता का नाम आसकरण थम जो जोधपुर के तत्कालीन महाराज जसवंत सिंह के करीबी थे। जब महाराज की मृत्यु हुई, उस समय उनकी गर्भवती पत्नी पेशावर में थीं। वहाँ से वो दिल्ली के लिए निकलीं, लेकिन रास्ते में ही उन्हें प्रसव पीड़ा होने लगी।

फिर उनके एक पुत्र का जन्म हुआ, जो जोधपुर के साम्राज्य का उत्तराधिकारी भी बना। महाराज की मृत्यु के बाद उस शिशु की रक्षा की जिम्मेदारी दुर्गादास राठौड़ ने उठाई। उस बालक का नाम अजीत सिंह था। उस समय औरंगजेब उक्त शिशु को अपने संरक्षण में रखना चाहता था, जबकि मारवाड़ पर उसका संपूर्ण कब्ज़ा हो जाए। हालाँकि, राजपूत सरदारों को ये कतई गँवारा न था। औरंगजेब के एक बेटे का नाम मुहम्मद अकबर था, जिसे दुर्गादास राठौड़ ने अपना करीबी बनाया।

ये दुर्गादास राठौड़ की कुशल कूटनीति ही थी कि अकबर ने अपने अब्बा के खिलाफ बगावत कर दिया। हालाँकि, बल और बुद्धि में कुशल न होने के कारण उसकी ये बगावत सफल न हो पाई। इसके बाद दुर्गादास राठौड़ ने उसे मराठा साम्राज्य के तत्कालीन अधिपति छत्रपति संभाजी महाराज के संरक्षण में पहुँचाया। शहजादा अकबर के पुत्र और पुत्री को उसके पीछे पालन-पोषण कर के दुर्गादास राठौड़ ने मित्र-धर्म भी निभाया।

जब वो बच्चे बड़े हो गए तो उन्हें औरंगजेब को सौंप दिया गया। औरंगजेब के विरुद्ध इस तरह का साहस उस समय बड़ी बात थी। शुरू में तो जसवंत सिंह और औरंगजेब के संबंध भी अच्छे थे। लेकिन, औरंगजेब के भाई दारा शिकोह और शुजा को जसवंत सिंह ने बगावत के वक्त समर्थन दिया था। शाहजहाँ भी दारा शिकोह को ही अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहता था। औरंगजेब ने जब सत्ता संभाली, तब मारवाड़ राज्य उसके प्रभाव में थे।

उसने जसवंत सिंह को कभी काबुल, कभी कंधार तो कभी दक्षिण में मोर्चों पर भेज कर दिल्ली से दूर रखने का भरसक प्रयास किया। तब भी महाराज जसवंत सिंह को दुर्गादास राठौड़ पर पूरा भरोसा था और उन्हें लगता था कि वो आगे जाकर कुछ अच्छा करेंगे। एक वाकया जमरूद का है, जहाँ शिकार के दौरान दुर्गादास राठौड़ बिछड़ गए तो एक पेड़ के नीचे थक कर सो गए थे। वहाँ पहुँचे महाराज ने अपने रूमाल से छाया कर के धूप को रोका।

उसी समय महाराज ने वहाँ मौजूद लोगों को कह दिया था कि इसी रूमाल की छाया की तरह कभी दुर्गादास राठौड़ संपूर्ण मारवाड़ की रक्षा करेंगे। जसवंत सिंह के पुत्र पृथ्वी सिंह भी अत्यंत शूरवीर थे, जिन्होंने औरंगजेब के सामने ही एक प्रतियोगिता में निहत्थे शेर को हरा दिया था। एक साजिश के तहत ज़हर देकर पृथ्वी सिंह की हत्या करा दी गई। कहा जाता है कि बेटे के मौत के गम में ही जसवंत भी चल बसे। ऐसे समय में न सिर्फ पूरे मेवाड़, बल्कि राजपूताना की नजर दुर्गादास राठौड़ पर थी।

दुर्गादास राठौड़ ने महारानी को सती होने से भी रोका। संग्राम सिंह आरूवा नामक सरदार ने इसके लिए रानी को मनाया। राठौड़ ने इसके बाद चालाकी से महाराज का शव स्वदेश ले जाने के लिए मुगलों को तैयार कराया। जनता को भी समझा दिया गया कि ऐसा कुछ भी न करे जिससे औरंगजेब को जरा भी शंका हो। उधर मुग़ल बादशाह मारवाड़ को हड़प लेने के फेर में था। इधर सरदारों ने एक शासन समिति बना कर सरकार चलाने की जिम्मेदारी सौंप दी।

औरंगजेब का एक सरदार सैयद अब्दुल्ला इसी बीच मारवाड़ पहुँचा, जिसने वापस जाकर बादशाह को बताया कि हिन्दू युद्ध की तैयारी में लगे हुए हैं। चूँकि औरंगजेब ने अजीत सिंह को शासक के रूप में मान्यता नहीं दी, इसीलिए इन वीरों ने युद्ध का निर्णय लिया। मुग़ल बादशाह ने खुद अजमेर में बैठ कर वहाँ की राजनीतिक परिस्थिति को समझा और फिर दिल्ली लौट आया। औरंगजेब की फ़ौज ने राजस्थान में तबाही मचानी शुरू कर दी।

सन् 1681 से लेकर 1687 तक दुर्गादास राठौड़ ने दक्षिण भारत में छिप कर अजीत सिंह की रक्षा की और उनके युवा होने पर उन्हें वापस लेकर लौटे। हालाँकि, औरंगजेब इससे खुश भी था कि दुर्गादास राठौड़ ने उसके पोते-पोती की शिक्षा-दीक्षा इस्लामी तौर-तरीकों से करवाई थी। सन् 1702 में औरंगजेब ने गुजरात के शासक को दुर्गादास राठौड़ की हत्या कराने का आदेश जारी कर दिया। दुर्गादास राठौड़ मारवाड़ लौट कर लगातार औरंगजेब के खिलाफ युद्ध का नेतृत्व करते रहे।

1707 में औरंगजेब की मौत होते ही दुर्गादास राठौड़ ने धावा बोल कर जोधपुर को मुगलों के प्रभाव से मुक्त कराया और वहाँ से इस्लामी शासकों की फ़ौज को खदेड़ा। जो वहाँ रह गए, उन्हें दुर्गादास राठौड़ को ‘चौथ’ देने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस्लामी शासकों ने जिन मंदिरों को ध्वस्त कर दिया था, दुर्गादास राठौड़ ने उनका पुनर्निर्माण करवाया। उज्जैन का चक्रतीर्थ, कहाँ दुर्गादास राठौड़ का निधन हुआ था, वो आज भी हिन्दुओं, खासकर राजपूतों के लिए एक पवित्र स्थल है। 1690 में उन्होंने अजमेर के युद्ध में मुगल सरदार शफी खान को हराया था।

दुर्गादास राठौड़ ऐसे थे कि उनकी देशभक्ति को खरीदने की कई कोशिश नाकाम रहीं। मुगलों ने उन्हें सोने-चाँदी से लेकर पद तक का लालच दिया, लेकिन वो मातृभूमि के साथ रहे। जब दुर्गादास राठौड़ मुगलों से लड़ रहे थे, उसी समय मेवाड़ के राणा राज सिंह की सेना ने गुजरात और मालवा में 32 मस्जिदों को धूल में मिला दिया था। राठौड़ को खासकर लोग इसीलिए करते हैं कि उन्होंने जसवंत सिंह की गर्भवती रानियों (जिनमें से एक के पुत्र की मौत हो गई) के साथ दिल्ली छोड़ते हुए औरंगजेब द्वारा बंदी बनाए जाने की साजिश को नाकाम किया और पीछा कर रही इस्लामी फ़ौज को हराया।

जिस जाकिर नाइक के लिए फुटबॉल हराम वह FIFA World Cup में कबूल, रेनबो टीशर्ट पहने पत्रकार को स्टेडियम में प्रवेश करने से रोका

कतर में फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup) चल रहा है। इस्लाम का हवाला देकर जिस तरह की पाबंदियाँ खिलाड़ियों और दर्शकों पर थोपी गई है, उससे फुटबॉल विश्व कप का रंग फीका है। इस बीच एक खेल पत्रकार को स्टेडियम में प्रवेश करने से केवल इसलिए रोक दिया गया, क्योंकि उन्होंने रेनबो कलर की टीशर्ट पहन रखी थी। वहीं भगोड़ा जाकिर नाइक (Zakir Naik) जो कभी फुटबॉल के खेल को हराम बता चुका है, वह इस आयोजन में दीनी तकरीर के लिए कतर बुलाया गया है।

फीफा विश्व कप के खास मेहमान नाइक का सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में उसने फुटबॉल खेलने को गैर इस्लामिक करार दिया है। यह वीडियो 1:25 मिनट का है। इसमें जाकिर नाइक कह रहा है, “फुटबॉल एक पेशे के रूप में हराम है।” वह इसमें कई बार इस बात को दोहराता नजर आ रहा है। इसके अलावा वह कहता है, “मैं लोगों को इस पेशे में जाने के लिए नहीं कह सकता। मैं ये भी नहीं चाहता कि मेरा बेटा भी कभी एक प्रोफेशनल फुटबॉल प्लेयर बने।”

मालूम हो कि ब्रिटेन ने भी साल 2010 में जाकिर नाइक को नफरत फैलाने के आरोपों के चलते बैन कर दिया था। भारत में उस पर मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद को बढ़ावा देने, अवैध धर्मांतरण, नफरत फैलाने सहित कई मामलों चल रहे हैं।

वहीं, कतर में सोमवार (21 नवंबर 2022) को एक पत्रकार को अमेरिका और वेल्स के बीच मैच के दौरान अहमद बिन अली स्टेडियम में रेनबो कलर की टी-शर्ट पहनने के कारण सुरक्षाकर्मियों ने हिरासत में ले लिया। यूएस बेस्ड ग्रांट वाहल के रूप में पहचाने जाने वाले पत्रकार ने जो टी-शर्ट पहनी थी, उसमें कुछ-कुछ रंग LGBTQ समुदाय के फ्लैग जैसा लग रहा था। इसके लिए उन्हें पहले एक सुरक्षा गार्ड ने रोका और फिर शर्ट उतारने को कहा, क्योंकि कतर में समलैंगिकता गैरकानूनी है।

हिरासत के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने पत्रकार से पूछताछ की कि क्या वह यूनाइटेड किंगडम से है। कथित तौर पर, न्यूयॉर्क टाइम्स के एक पत्रकार को भी कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था। वाहल ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, “सुरक्षा गार्डों में से एक ने मुझे बताया कि वे मुझे अंदर बैठे फुटबॉल प्रेमियों से बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जो इस टी-शर्ट को पहनने के लिए मुझे नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसके बाद फीफा के एक प्रतिनिधि ने बाद में मुझसे भी माफी माँगी।” पत्रकार ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा कि फीफा और यूएस सॉकर दोनों के प्रतिनिधियों ने मुझे बताया था कि सार्वजनिक रूप से टी-शर्ट और रेनबो कलर के झंडों से कतर विश्व कप में कोई समस्या नहीं होगी।

आखिरकार, लंबी पूछताछ के बाद अमेरिकी पत्रकार को रेनबो टी-शर्ट के साथ अहमद बिन अली स्टेडियम में प्रवेश की अनुमति दी गई। कहा जा रहा है कि एलजीबीटीक्यू अधिकारों, बोलने की स्वतंत्रता और अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी के बारे में बातें करने वाले वाहल ट्विटर पर इस घटना के बारे में बताकर गायब हो गए।

‘भौंकती थी, इसलिए मार दिया’: दिल्ली में गर्भवती कुतिया की हत्या में 4 गिरफ्तार, दावा- फादर के कहने पर 20 छात्रों ने किया हमला

दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (22 नवंबर 2022) को ओखला के जाकिर नगर स्थित डॉन बॉस्को टेक्निकल इंस्टीट्यूट के 4 छात्रों को गिरफ्तार किया। इन चारों पर न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी इलाके में एक गर्भवती कुतिया को पीट-पीट कर मार डालने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, ये चारों आरोपित कुतिया के भौंकने से परेशान थे।

छात्रों की इस दरिंदगी का एक वीडियो भी वायरल हुआ था। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, एक शिकायत के आधार पर दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी पुलिस स्टेशन में इनके खिलाफ IPC की धारा 429, 34 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 (1) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

दिल्ली बीजेपी प्रवक्ता तजिंदर बग्गा ने 19 नवंबर 2022 को इस घटना से संबंधित वीडियो और तस्वीरें शेयर की थीं। इसमें ये दरिंदे कुतिया को बेरहमी से घसीटते हुए ले जा रहे हैं।

फोटो साभार: तजिंदर बग्गा का ट्विटर अकाउंट

उन्होंने लिखा, “डॉन बॉस्को टेक्निकल इंस्टीट्यूट जाकिर नगर के 20 छात्रों के समूह ने एक गर्भवती कुतिया को मार डाला, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।”

इस घटना के सामने आए वीडियो में गर्भवती कुतिया टिन शेड के अंदर बैठी हुई है। इस कुतिया पर वहाँ मौजूद लड़के लगातार वार करते दिख रहे हैं। वीडियो में दिख रहा है की एक हाथ में रॉड लिए हुए एक लड़का टिन शेड के अंदर जाता है। इसके बाद, वहाँ मौजूद अन्य लोग कुतिया को मारने के लिए कहते हैं। इसके बाद लड़के कुतिया को घसीट कर मैदान के बाहर फेंकते हुए दिख रहे हैं।

पत्रकार श्रेया अग्रवाल ने सोमवार (21 नवंबर 2022) को इस घटना को लेकर सिलसिलेवार कई ट्वीट किए। उन्होंने बताया कि यह घटना 30 अक्टूबर 2022 की है। दिल्ली के जाकिर नगर इलाके में डॉन बॉस्को टेक्निकल इंस्टीट्यूट के 20 युवकों के एक समूह ने एक गर्भवती कुतिया को पीट-पीट कर मार डाला।

पत्रकार ने अपने ट्वीट में दावा किया है कि संस्थान के फादर अभय के निर्देश पर ऐसा किया गया था। जब मामले की गहराई से पड़ताल की तो ये चौंकाने वाले विवरण सामने आए। जबकि मुख्यधारा का मीडिया लिखता रहा है कि यह अपराध छात्रों के एक समूह द्वारा किया गया था।

प्राथमिकी में कहा गया है कि अंकित और उसके भाई जैरोम की उपस्थिति में यह अपराध किया गया था। इसमें आगे यह भी कहा गया है कि यह संस्थान के प्रमुख फादर अभय के निर्देश पर किया गया था। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि भाई अंकित और जैरोम स्टाफ सदस्य हैं न कि छात्र।

हालाँकि, किसी भी मीडिया रिपोर्ट में इसका जिक्र नहीं है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि लगभग 15-20 पुरुषों ने इस हत्या को अंजाम दिया है, लेकिन फादर ने केवल दो नामों का उल्लेख किया। इस मामले में संस्थान के प्रमुख और कर्मचारियों के सदस्यों की संलिप्तता के महत्वपूर्ण विवरण को छिपाकर जानबूझकर जाँच को गुमराह करने की कोशिश की।

बता दें कि हैदराबाद में भी ऐसा ही मामला सामने आया था, जहाँ आरोपित ने पहले तो कुत्ते के पिल्ले को रस्सी से बाँध कर पेड़ से लटका दिया। इसके बाद चौथी मंजिल से उसे नीचे फेंक दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस मामले में आरोपित की मानसिक हालत कमजोर बताई जा रही है। साथ ही कहा जा रहा है कि घटना के समय वह नशे में था। हालाँकि, पुलिस ने आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

जो हुआ गुस्से में हुआ, अब याद नहीं… श्रद्धा वालकर मर्डर पर कोर्ट में पलट गया आफताब, परिवार से मिलने की इजाजत भी मिली

श्रद्धा वालकर हत्याकांड के आरोपित आफताब को दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (22 नवंबर, 2022) को अदालत में पेश किया। ऐसा लग रहा है जैसे वो एक पेशेवर अपराधी की तरह जाँचकर्ताओं को गुमराह कर रहा हो। अदालत में आफ़ताब ने कहा कि ये घटना आवेश में आकर हो गई और उसे याद भी नहीं आ रहा है कि क्या-क्या हुआ था। जबकि पुलिस के सामने उसने कबूला था कि वो एक सप्ताह पहले से ही श्रद्धा की हत्या की साजिश रच रहा था।

आफताब को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मंगलवार (22 नवंबर, 2022) को साकेत कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान आफताब ने कोर्ट के सामने कहा कि उसने जो भी किया, वह आवेश में आकर किया। यह भी दावा किया कि वह जाँच में पुलिस की पूरी मदद कर रहा है। हालाँकि, उसने इस घटना के संबंध में कहा कि वो सब कुछ भूल गया है और याद करने की कोशिश कर रहा है।

अपनी प्रेमिका श्रद्धा की हत्या कर उसके शव के 35 टुकड़े करने वाले आफ़ताब की पुलिस रिमांड भी 4 दिनों के लिए बढ़ा दी गई है। आफताब के वकील के मुताबिक, अदालत ने इस बयान को अपने रिकॉर्ड पर नहीं लिया है, जिसमें उसने गुस्से में ‘घटना हो जाने’ की बात कही है। अदालत ने आफ़ताब को उसके परिवार से मिलने की इजाजत भी दे दी है। इसके लिए उसने कोर्ट से निवेदन किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, पालीग्राफी टेस्ट के लिए आफताब ने सहमति भी दे दी है। दिल्ली पुलिस ने आफताब का पॉलीग्राफिक टेस्ट कराने के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) से संपर्क किया है। इसकी तैयारी चल रही है। एएनआई के ट्वीट के मुताबिक, आफ़ताब का मंगलवार (22 नवंबर, 2022) को पॉलीग्राफिक टेस्ट हो सकता है।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस अब एक बार फिर इस मामले में उन जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाएगी, जहाँ आफताब ने शव के टुकड़ों को फेंका था। पुलिस सूत्रों की माने तो आफताब लगातार जाँच को भटकाने की कोशिश कर रहा है। वह लगातार अपने बयानों को बदल रहा है। वह कई बार श्रद्धा के शव के टुकड़ों, हथियार और श्रद्धा के मोबाइल को लेकर अपने बयान बदल चुका है।

वहीं मंगलवार (22 नवंबर, 2022) को ही दिल्ली हाई कोर्ट में उस याचिका पर सुनवाई होनी है जिसमें इस वीभत्स हत्याकांड की जाँच सीबीआई (CBI) से कराने की माँग की गई थी। सीबीआई जाँच की माँग से संबंधित याचिका सोमवार (21 नवंबर 2022) को दायर की गई थी।

ट्विटर ने ‘$8 वाली ब्लू टिक स्कीम’ पर लगाई रोक, अलग-अलग रंग से होगा वेरिफिकेशन: एलन मस्क का ऐलान, बोले- फर्जीवाड़ा रुकने तक नहीं करेंगे स्कीम लॉन्च

सोशल मीडिया साइट ट्विटर इन दिनों लगातार चर्चा में है। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क (Elon Musk) ने जब से इसे टेकओवर किया है, वह इसकी नीतियों में बदलाव कर रहे हैं। उन्होंने कुछ दिन पहले 8 डॉलर के बदले ब्लू टिक देने की स्कीम लॉन्च की थी। फिर फर्जी अकाउंट की समस्या के बाद इसे बंद कर दिया और बाद में सूचित किया कि वह इस सर्विस को नई तैयारी के साथ 29 नवंबर 2022 को रिलॉन्च करेंगे। हालाँकि अब खबर है कि मस्क ने ब्लू टिक वेरिफिकेशन प्रक्रिया के रिलॉन्च को अस्थायी रूप से रोक दिया है।

एलन मस्क ने मंगलवार (22 नवंबर 2022) को ट्वीट कर बताया कि फर्जी खातों की जाँच पड़ताल होने तक ब्लू टिक वेरिफिकेशन प्रक्रिया को रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि संभवतः व्यक्ति और संस्था को अलग-अलग कलर का वेरिफिकेशन टिक दिया जाएगा।

दरअसल ब्लू टिक खातों के वेरिफिकेशन के लिए शुल्क चुकाने के मस्क के फैसले को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली थी। कई लोगों ने इसे समानता की दिशा में उठाया गया कदम बताया था। वहीं इस नियम के तहत कई फर्जी अकाउंट भी वेरिफाइड हो गए थे। इसका सोशल मीडिया यूजर्स ने मजाक भी उड़ाया था।

मस्क के इस फैसले के बाद दुनिया की दिग्गज फार्मेसी कंपनी Eli Lilly (LLY) को 1.20 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो गया था। दरअसल कंपनी के नाम से एक फर्जी अकाउंट बना लिया गया था और केवल 8 डॉलर देकर उसे वेरिफाई करवा लिया गया था।

इसके बाद इस फेक अकाउंट से यह ट्वीट किया गया था कि ‘Insulin is Free Now’। कुछ निवेशकों ने इसे सच मानकर पैसे निकालने शुरू कर दिए थे। इस कारण कंपनी के शेयर्स एक दिन में 4.37 फीसदी तक गिर गए थे और कंपनी को लगभग 1.20 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो गया था।

इन्हीं सब वजहों से मस्क ने ब्लू टिक वेरिफिकेशन प्रक्रिया को रोक दिया था और इसे 29 नवंबर 2022 को रिलॉन्च करने की बात कही थी।

उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “ब्लू वेरिफाइड को 29 नवंबर 2022 से फिर से लॉन्च किया जा रहा है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह एकदम रॉक सॉलिड है।”

मस्क ने इसके साथ ही कहा था कि कोई शख्स सेलेब्रिटी है या नहीं, इसका फैसला यूजर्स पर छोड़ देना चाहिए। वहीं मस्क ने नए तरीके से ब्लू टिक दिए जाने के बारे में कहा कि नए नियमों के हिसाब से अगर आप अपने सत्यापित नाम को बदलते हैं तो आपको चेकमार्क का नुकसान हो सकता है। इसे तभी बहाल किया जाएगा जब यह ट्विटर के सेवा की शर्तों को पूरा कर लेगा।

डिप्रेशन में थी लड़की, मौलवी ने ‘जिन्न सवार है’ कह कर बना दिया निकाहनामा: फिरोज ने किया रेप, अश्लील वीडियो बना कर ऐंठे लाखों रुपए

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ फ़िरोज़ नाम एक एक व्यक्ति पर अपने पड़ोस में रहने वाली लड़की का निकाहनामा बनवाने के साथ रेप और ब्लैकमेल कर के पैसे ऐंठने का आरोप लगा है। इसी मामले में एक मौलवी द्वारा दिखाए गए जिन्न के डर की भी चर्चा हो रही है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला थाना बसंत विहार क्षेत्र का है। यहाँ पर काँवली इलाके में रहने वाली एक युवती ने पुलिस को शिकायत देते हुए बताया कि वो कोरोना काल में पढ़ाई और कैरियर को ले कर डिप्रेशन में थी। उसके पड़ोस में फ़िरोज़ नाम का एक व्यक्ति रहता था, जो मूल रूप से सहारनपुर का निवासी है। फ़िरोज़ ने पीड़िता को बातचीत के दौरान विश्वास में ले लिया। पीड़िता ने फ़िरोज़ को अपनी समस्या बताई तो उसने एक मौलवी का परिचय दिया और अपने साथ पीड़िता को ले कर गया।

आरोप है कि मौलवी ने पीड़िता पर जिन्न की सवारी होने का डर दिखाया। मौलवी ने पीड़िता को बताया कि अगर उसका निकाह जल्द नहीं हुआ तो जिन्न उसे मार डालेगा। इसी दौरान उसने लड़की को फ़िरोज़ से निकाह करने की सलाह भी दे डाली। पीड़िता को बताया गया कि केवल फर्जी निकाहनामा बनवाना है। जिन्न से डरी पीड़िता इस निकाहनामें के लिए तैयार हो गई। निकाहनामा तैयार करते समय कागजातों में 2 गवाह भी डाले गए। इसमें एक गवाह का नाम विकास और दूसरे का जुल्फिकार है। बताया जा रहा है कि यह निकाहनामा 27 अक्टूबर, 2020 को बनाया गया।

अपनी शिकायत में पीड़िता ने आगे बताया है कि 26 जनवरी, 2021 को फिरोज ने उसे अपने कमरे पर बुलाया। इस दौरान फ़िरोज़ ने युवती के साथ रेप किया और उसका अश्लील वीडियो भी बना डाला। बाद में इसी वीडियो का डर दिखा कर आरोपित ने पीड़िता से 2 लाख 70 हजार रुपए ऐंठ लिए। फ़िरोज़ पर आरोप है कि उसने पैसे लेने के बाद भी निकाहनामे की कॉपी लड़की के पड़ोसियों को भेज दिया। इस से लड़की के परिवार की मोहल्ले में काफी बदनामी हुई। बाद में फ़िरोज़ निकाहनामा और अश्लील वीडियो छिपाने के नाम पर पीड़ित परिवार से 5 लाख रुपए की और माँग करने लगा।

पुलिस के मुताबिक तहरीर के आधार पर फ़िरोज़ व उसके 2 साथी विकास और जुल्फिकार पर FIR दर्ज कर ली गई है। मामले की जाँच की जा रही है।

राम नाम की गूँज, मंत्रोच्चार और विशाल मूर्ति: दर्शकों को टीजर में भाए ‘हनुमान’ , बोले- आदिपुरुष के मेकर्स को सीखना चाहिए

तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर निर्देशक प्रशांत वर्मा की फिल्म ‘हनुमान’ का टीजर रिलीज होने के बाद से सोशल मीडिया पर इसकी काफी चर्चा है। दर्शकों को फिल्म के वीएफएक्स इतने कमाल के लग रहे है कि वो उसकी तारीफ करते नहीं थक रहे। 

खास बात बात यह है कि ‘हनुमान’ का टीजर आते ही एक बार फिर सोशल मीडिया पर ‘आदिपुरुष’ की चर्चा शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि टीजर बनाना अगर सीखना है तो हनुमान के मेकर्स से सीखना चाहिए।

बता दें कि हनुमान का टीजर ‘राम’ नाम की गूंज से शुरू होता है और फिर बैकग्राउंड में मंत्रोच्चारण सुनाई देता रहता है। पहले ही दृश्य में भगवान हनुमान की इतनी विशाल मूर्ति है कि किसी की भी नजर उसे एक बार देखने के बाद हट नहीं सकती। टीजर में आगे जब हीरो की एंट्री होती है तब भी उसके हाथ में गदा होता है और जब टीजर खत्म होने लगता है तब बर्फ के शिवलिंग में हनुमान जी की झलक देखने को मिलती है

एक ही दिन में हनुमान फिल्म के टीजर को 5.5 मिलियन लोगों द्वारा देखा जा चुका है। दर्शकों को इस टीजर में जो बात पसंद आ रही है वो यह कि अगर फिल्म का नाम हनुमान है तो उस नाम का कहीं मखौल नहीं उड़ाया गया। जबकि आदिपुरुष फिल्म में राम-सीता-हनुमान-रावण-लक्ष्मण का अभिनय करने वाले एक्टर की वेशभूषा पर सवाल खड़े हुए थे। यही वजह है कि दोनों फिल्मों की तुलना हो रही है।

कहा जा रहा है कि एक फिल्म 12 करोड़ रुपए लगाकर बनी और उसका टीजर इतना प्रभावशाली है। वहीं आदिपुरुष 600 करोड़ रुपए लगाकर बनी और इस तरह फिल्म में भावनाओं का मजाक उड़ा दिया गया। सोशल मीडिया रिएक्शन देख पता चल रहा है कि लोगों को आदिपुरुष से ज्यादा हनुमान फिल्म का इंतजार है। लोग इसे भारतीय सिनेमा की अगली बड़ी फिल्म के तौर पर देख रहे हैं।

एक यूजर लिखते हैं, “हनुमान का क्या सुंदर टीजर है। छोटे बजट में और सीमित संसाधनों में प्रशांत वर्मा ने क्या गजब काम किया है। वीएफएक्स और सीजेआई जब आदिपुरुष फिल्म से बेहतर है।”

उल्लेखनीय है कि प्रशांत वर्मा की फिल्म में तेजा सज्जा, अमृता अय्यर, वरलक्ष्मी सरथकुमार मुख्य किरदारों में हैं। इनके अलावा दीपल शेट्टी, विनय राय, सत्या भी होंगे। फिल्म का निर्देशन जहाँ प्रशांत वर्मा ने किया है। वहीं इसे प्रोड्यूस निरंजन रेड्डी ने किया है।

अब उमर खालिद ने ‘बहन की निकाह’ के लिए माँगी बेल: प्रेग्नेंसी पर सफूरा जरगर तो भतीजी की निकाह पर रिफाकत अली को मिल चुकी है जमानत

दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों (Delhi Anti Hindu Riots) के आरोपित उमर खालिद (Umar Khalid) को दिल्ली हाई कोर्ट ने अक्टूबर 2022 में नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया था। अब उसने अपनी ‘बहन की निकाह’ का हवाला देकर दो सप्ताह की अंतरिम जमानत माँगी है। इस संबंध में कड़कड़डूमा कोर्ट में 25 नवंबर को सुनवाई होनी है। वैसे इस तरह के आधार पर जमानत की गुहार लगाने वाला खालिद दिल्ली दंगों (Northeast Delhi Riots) का पहला आरोपित नहीं है। रिफाकत अली और सफूरा जरगर भी इस आधार पर राहत पा चुके हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक उमर खालिद ने यह याचिका 18 नवम्बर 2022 को कड़कड़डूमा कोर्ट में दाखिल की। मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत कर रहे हैं। याचिका पर न्यायालय ने अभियोजन पक्ष से जवाब माँगा है। खालिद ने कहा है कि उसकी छोटी बहन की निकाह 28 दिसंबर को है। 26 और 27 दिसंबर को निकाह से जुड़े अन्य रस्म हैं। लिहाजा उसे 20 दिसंबर 2022 से तीन जनवरी 2023 तक के लिए अंतरिम जमानत दी जाए।

18 अक्टूबर को भी उमर खालिद ने जमानत अर्जी दी थी जो अभियोजन पक्ष के विरोध के बाद ख़ारिज कर दी गई थी। दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे के मामले में पुलिस ने खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया था। दंगों में सक्रिय भूमिका के आरोप में उस पर UAPA के तहत केस दर्ज है। अप्रैल 2022 में भी दिल्ली हाई कोर्ट ने दंगों के मुख्य साजिशकर्ता उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट ने इस दौरान उसके बयान को भड़काऊ और आपत्तिजनक माना था।

गौरतलब है कि 23 जून 2020 को दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रेग्नेंट सफूरा जरगर को ‘मानवता के आधार’ पर जमानत दी थी। उससे पहले तीन बार उसकी जमानत याचिका खारिज की गई थी। इसी तरह सितम्बर 2021 में दिल्ली दंगों के एक अन्य आरोपित रिफाकत अली को भतीजी की निकाह के लिए दो सप्ताह की बेल दी गई थी। उसे जमानत कड़कड़डूमा कोर्ट के सेशन जज अमिताभ रावत ने दी थी जो खालिद की याचिका पर भी सुनवाई कर रहे हैं। उससे पहले अली को भी जमानत देने से अदालत ने इनकार किया था।