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BigB के नाम, आवाज और फोटो पर पहरा, अमिताभ बच्चन की इजाजत से ही हो सकेगा इस्तेमाल: जानिए क्या है पर्सनैलिटी का अधिकार

बॉलीवुड स्टार अमिताभ बच्चन (Bollywood Star Amitabh Bachchan) कि अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति उनकी आवाज, फोटो और नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। एक याचिका पर सुनवाई करने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने यह आदेश दिया है। इस फैसले से अमिताभ बच्चन के पर्सनैलिटी राइट्स के उल्लंघन पर रोक लग गई है।

दरअसल, अमिताभ बच्चन ने अपने पब्लिसिटी और पर्सनैलिटी को लेकर कुछ दिन पहले याचिका दायर की थी। उनकी, इस याचिका पर शुक्रवार (25 नवंबर 2022) को सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस नवीन चावला ने टेलीकॉम डिपार्टमेंट और अथॉरिटी को आदेश जारी करते हुए कहा है कि अमिताभ बच्चन का नाम, फोटो और उन पर्सनैलिटी ट्रेट्स को तुरंत हटाया जाए, जो पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं।

यही नहीं, कोर्ट ने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स से उन फोन नंबर्स के बारे में भी जानकारी देने को कहा है, जो अमिताभ बच्चन के नाम और आवाज का अवैध उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स से उन ऑनलाइन लिंक्स को भी हटाने को कहा है, जो अमिताभ की पर्सनैलिटी राइट्स को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

जस्टिस चावला ने कहा है कि इस बात में कोई दो राय नहीं है कि अमिताभ बच्चन एक प्रसिद्ध व्यक्ति हैं और कई विज्ञापनों में दिखाई देते हैं। इसलिए, उनकी अनुमति के बिना फोटो, नाम इत्यादि का उपयोग करने से उनकी छवि को नुकसान हो सकता है।

इससे पहले, अमिताभ बच्चन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने अदालत से कहा है कि बीते कुछ समय से अमिताभ बच्चन की पर्सनैलिटी का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस वजह से उन्हें अदालत आने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कोर्ट में व्हाट्सएप लकी ड्रॉ सहित अमिताभ के नाम से कई अन्य और विज्ञापनों का हवाला दिया।

उन्होंने उदाहरण देते हए कहा है कि मैसर्स स्वैग शर्ट्स, https://www.swagshirts99.com/ नामक वेबसाइट बनाकर टी-शर्ट बेच रहा है। इसमें अमिताभ बच्चन की फोटो लगी हुई है। इसी प्रकार ग्वालियर का एक पोस्टर विक्रेता अमिताभ बच्चन की फोटो वाले पोस्टर बेच रहा है।

क्या है मामला…

दरअसल, अमिताभ बच्चन का कहना था कि कई कम्पनियाँ उनके नाम, फोटो और आवाज का दुरुपयोग कर रही हैं। इसलिए, उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर कर बिना अनुमति के उनकी पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी का उपयोग करने पर रोक लगाने की माँग की थी।

उन्होंने यह भी कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके नाम से एक लॉटरी एड भी चल रहा है, जिसमें प्रमोशनल बैनर पर उनकी फोटो और KBC का लोगो लगा हुआ है। यह बैनर लोगों को सिर्फ भ्रमित करने के लिए बनाया गया है। इसमें कोई भी सच्चाई नहीं है।

फ्रॉड द्वारा भेजे गए व्हाट्सएप मैसेज का स्क्रीनशॉट

गौरतलब है कि सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों खासतौर से व्हाट्सएप पर अमिताभ बच्चन के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुकेश अंबानी के नाम का भी उपयोग कर फर्जी लॉटरी के चक्कर में लोगों को फँसाया जा रहा है।

ठगों द्वारा इस तरह की ठगी को लंबे समय से अंजाम दिया जा रहा है। इसमें यूजर्स को 15 लाख से लेकर 25 लाख रुपए तक की लॉटरी जीतने का दावा करने वाले मैसेज भेजे जाते हैं। इस तरह के मैसेज पूरी तरह से फर्जी होते हैं। इनमें शेयर किए गए लिंक्स और नंबर्स के माध्यम से लोगों के साथ ठगी की जाती है।

फ्रॉड द्वारा भेजे गए व्हाट्सएप मैसेज का स्क्रीनशॉट

इस तरह के मैसेज +92 309 7423840 और +1 914 6553526 जैसे गैर-भारतीय नंबरों से भेजे जाते हैं। इस तरह के मैसेज में लॉटरी जीतने का ऑफर होता है। इसके बाद, 7305563282 और 9644517195 जैसे नंबरों पर व्हाट्सएप कॉल करने के लिए कहा जाता है।

ठगों की चाल में फँसकर भोले-भाले लोग कभी अपनी बैंकिंग डिटेल देते हुए OTP (वन टाइम पासवर्ड) शेयर कर देते हैं तो कभी ठगों द्वारा भेजे गए अकाउंट डिटेल में अपनी मेहनत की कमाई भेज देते हैं। इसी तरह वे ठगी का शिकार हो जाते हैं।

62 साल पहले 3 बहनों ने तानाशाह के नाक में कर दिया दम, निर्ममता से हुई हत्या: 25 नवंबर की वो कहानी, जिससे उठी ‘उत्पीड़ित महिलाओं’ की आवाज

आज का दिन महत्वपूर्ण है और महत्वपूर्ण हो भी क्यूँ नहीं, क्योंकि आज ही के दिन महिलाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए पूरे विश्व में महिलाओं के प्रति हिंसा, शोषण एवं उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं के उन्मूलन हेतु संयुक्त राष्ट्र के द्वारा घोषित ‘इंटरनेशनल डे फॉर द एलिमिनेशन ऑफ वायलेंस अगेंस्ट वीमेन’ (International Day for the Elimination of Violence against Women) मनाया जाता है।

महिलाओं एवं लड़कियों के खिलाफ हिंसा किसी एक या दो देश कि कहानी नहीं है, बल्कि विश्वव्यापी है। माना जाता है कि पूरे विश्व में हर तीन में से एक महिला किसी न किसी तरह के उत्पीड़न/ हिंसा का शिकार होती है। समय की माँग है कि हम एक जागरूक नागरिक की भांति आत्ममंथन करें कि आखिर महिलाओं की स्थिति अभी तक ऐसी क्यों बनी हुई है? हमारे समाज में आखिर क्यूँ इनकी सुरक्षा का प्रश्न सदैव उठ खड़ा होता है?

3 बहनों ने किया तानाशाह के नाक में दम, आज ईरान में हो रहा विरोध

अतीत के पन्नों को पलटा जाए तो पता चलता है कि क्यों संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा इस दिन को ‘एक अंतरराष्ट्रीय दिवस’ के रूप में घोषित किया गया। बात उस समय की है जब डोमिनिकन गणराज्य के शासक राफेल ट्रुजिलो की तानाशाही अपने चरम पर थी, जिसका पुरजोर विरोध तीन मिराबल बहनों द्वारा किया गया था, जो वहाँ की राजनीतिक कार्यकर्ता थीं। इनका नाम पैट्रिया मर्सिडीज मिराबल, मारिया अर्जेंटीना मिनेर्वा मिराबल तथा एंटोनिया मारिया टेरेसा मिराबल था।

इनके विरोध के बढ़ते स्वर को देखते हुए तानाशाह ट्रुजिलो द्वारा 25 नवंबर 1960 को इन तीनों बहनों की निर्मम हत्या करवा दी गई। चूँकि इन बहनों का बलिदान बेकार न जाए एवं इससे प्रेरित महिला वर्ग के मनोबल को और संबल मिल सके, वर्ष 1981 से महिला अधिकारों के प्रबल समर्थकों द्वारा इनके स्मृति के रूप में इस दिवस को मनाने की शुरुआत की गई। आगे चलकर 7 फरवरी 2000 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव 54/134 को अपनाया और आधिकारिक तौर पर 25 नवंबर को महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया।

आज के परिदृश्य की बात करें तो एक साल पूर्व अफ़ग़ानिस्तान में हुए तख्तापलट वाली तालिबान सरकार में भी डोमिनिकन शासक राफेल ट्रुजिलो की तानाशाही शासन का रुख देखने को मिलता है, जहाँ आए दिन महिलाओं एवं लड़कियों को प्रताड़ित किया जा रहा है और उन्हें उनके मूल अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। परंतु वहाँ की महिलाएँ एवं लड़कियाँ भी हार नहीं मान रही हैं। वे लगातार तालिबान की तानाशाही सरकार के महिला विरोधी सोच एवं उनकी नीतियों का पुरजोर विरोध कर रही हैं।

हाल ही में, ईरान में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जहाँ कुछ महीने पहले महसा अमिनी नामक एक युवती की पुलिस हिरासत में मौत के बाद हिजाब समेत अन्य प्रतिबंधों के विरोध में वहाँ के महिला वर्ग ने आंदोलन छेड़ दिया जो कि थमने का नाम नहीं ले रहा है।

शारीरिक हिंसा और यौन उत्पीड़न सहती महिलाएँ

जगजाहिर है कि महिला का स्थान हर प्रकार से समाज में सबसे ऊपर होता है। इन्हें जग जननी कहते हैं। इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि हिंसा से प्रताड़ित बहुतायत महिलाएँ एवं लड़कियाँ परिवार और समाज को देखते हुए प्रतिष्ठा और शर्म के कारण उन पर हो रही हिंसा को अभिव्यक्त नहीं कर पाती हैं। परंतु समाज का एक तबका अपनी पुरुषवादी एवं पित्तृसत्तात्मक सोच से ऊपर नहीं उठ पा रहा है। फलतः महिलाएँ एवं लड़कियाँ आए दिन प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रताड़ित होती आ रही हैं। और ये कोई नई घटना नहीं है।

यूएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्व स्तर पर, अनुमानित 736 मिलियन महिलाओं में से लगभग तीन में से एक महिला अपने जीवन में कम से कम एक बार शारीरिक हिंसा या यौन उत्पीड़न का शिकार होती हैं। इसमें 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की 30 प्रतिशत महिलाएँ शामिल हैं।

वर्ष 2020 में पूरे विश्व में लगभग 81,000 महिलाओं एवं लड़कियों की हत्याएँ हुई। इनमें से लगभग 47,000 (58 प्रतिशत) की मृत्यु एक अंतरंग साथी (इंटीमेट पार्टनर) या परिवार के किसी सदस्य के हाथों हुई। वैश्विक स्तर पर, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा निम्न और निम्न-मध्यम-आय वाले देशों को विषमतापूर्वक रूप से प्रभावित करती हैं।

बात जब हिंसा/ उत्पीड़न के स्वरूप की करते हैं तो यह प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों रूप में हमारे समाज में विद्यमान है। महिला वर्ग पर हिंसा पब्लिक और प्राइवेट, हर जगह देखने एवं सुनने को मिलता है। इसमें शारीरिक हिंसा, मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार, व्याभिचार/ बलात्कार, नशीले पदार्थ के सेवन के लिए मजबूर करना, यौन हिंसा/ उत्पीड़न, मानव तस्करी, बाल विवाह, महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध इत्यादि शामिल है।

कोरोना में हुआ महिलाओं पर अत्याचार

पूरा विश्व जब कोरोना जैसे महामारी से त्रस्त था तब भी उस दौरान महिलाएँ प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से घरेलू हिंसा से प्रभावित थीं। संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कोरोना काल के दौरान महिलाओं पर बढ़ रही हिंसा पर चिंता जाहिर करते हुए कहा था, “लोगों को महिलाओं के महत्व को समझना होगा”। परंतु महिला वर्ग पर हिंसा आज तक नहीं रुका है, जो कि एक गम्भीर चिंता का विषय है।

यूएन द्वारा अनेकों प्रयास किए जा रहे हैं ताकि महिलाओं एवं लड़कियों पर हो रहे किसी भी तरह के उत्पीड़न या हिंसा का उन्मूलन किया जा सके। यूएन का ‘यूनाइट अभियान’ (UNITE Campaign) इसी तरह के मज़बूत प्रयास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

इस बात से कोई इनकार नही कर सकता कि हमारे समाज में व्याप्त असमानतावादी सोच नारी सशक्तिकरण के मार्ग में एक प्रमुख अवरोध है, चाहे इसे हम स्वीकार करें या ना करें। समाज में महिला की स्थिति प्रमुख है, और सदैव रहेगी। हम कब समझेंगे कि जिस परिवार एवं समाज में महिला वर्ग को उचित सम्मान नहीं मिलता है वह परिवार/ समाज गर्त की ओर जाता है। यहाँ एक श्लोक प्रासंगिक है-


“शोचन्ति जामयो यत्र विनश्यत्याशु तत्कुलम्।
न शोचन्ति तु यत्रैता वर्धते तद्धि सर्वदा।।”
 
अर्थात, जिस कुल या परिवार में स्त्रियाँ कष्ट भोगती हैं, वह कुल शीघ्र ही नष्ट हो जाता है और जहाँ स्त्रियाँ प्रसन्न रहती हैं, वह कुल या परिवार सदैव फलता-फूलता और समृद्ध रहता है।

आखिर हम कब इस बात को समझेंगें कि महिलाएँ हैं तो हमारा अस्तित्व हैं, ये नहीं तो हमारा अस्तित्व नहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठीक ही कहा है, “नारी सशक्तिकरण के बिना मानवता का विकास अधूरा है”। जरूरत है कि हम अपने मानस में उपरोक्त श्लोक के भाव को धारण करें और नारी सशक्तिकरण के मार्ग को प्रशस्त करें।

नोट: इस लेख को भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के वरिष्ठ सलाहकार डॉ मुकेश कुमार श्रीवास्तव द्वारा लिखा गया है। लेख में व्यक्त विचार उनके व्यक्तिगत हैं।

श्याम बनकर समीर रजा ने हिंदू लड़की को फँसाया, फोटो वायरल करने की धमकी दे करने लगा ब्लैकमेल: धर्मांतरण के बाद निकाह का दबाव, पैसे भी ठगे

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद (Muradabad, Uttar Pradesh) जिले के कटघर थाना क्षेत्र से लव जिहाद का फिर मामला सामने आया है। समीर रजा नाम के एक मुस्लिम युवक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म स्नैपचैट पर श्याम नाम से फेक आईडी बनाई। इसके बाद इलाके की एक हिन्दू लड़की को फँसाकर धर्मांतरण का प्रयास किया।

समीर रजा सोशल मीडिया पर हिंदू लड़की से दोस्ती करने के बाद उससे चैटिंग करने लगा। इस बीच उसने लड़की से कुछ तस्वीरें माँगी। इन्हीं तस्वीरों और चैटिंग का स्क्रीन शॉट घरवालों को दिखाने की धमकी देकर वह छात्रा को ब्लैकमेल करने लगा। आरोपित छात्रा पर ना सिर्फ धर्म परिवर्तन कर निकाह करने दबाव बना रहा था, बल्कि पीड़िता से 2000 रुपए भी ऐंठ लिए।

सच्चाई कैसे आई सामने ?

पीड़िता 12वीं की छात्रा है। उसके पिता ने पुलिस को बताया कि कुछ समय पहले बेटी के मोबाइल पर सोशल मीडिया ऐप स्नैपचैट पर श्याम नाम से एक मैसेज आया। उसने चैटिंग कर छात्रा को प्रेम के झूठे जाल में फँसा लिया। चैटिंग के दौरान आरोपित ने अपना नाम लक्की बताया।

आरोपित ने छात्रा से उसका मोबाइल नंबर भी ले लिया। फिर वाट्सएप कॉल करके बात करने लगा। बातचीत के दौरान पीड़िता को आरोपित पर शक हुआ। 16 नवंबर 2022 को आरोपित ने युवती को एक कैफे में मिलने के लिए बुलाया। वहाँ बातचीत के दौरान पीड़िता को पता चला कि उसके साथ बात करने वाला शख्स समीर रजा एक मुस्लिम है।

धर्म परिवर्तन का बनाया दबाव

सच्चाई सामने आने के बाद आरोपित ने पीड़िता पर धर्म परिवर्तन कर निकाह करने का दबाव बनाने लगा। आरोप है कि छात्रा के इनकार करने पर आरोपित ने उसे चैट के स्क्रीनशॉट और फोटो दिखाकर ब्लैकमेल किया। उसने लड़की को धमकी दी कि अगर उसकी बात नहीं मानी तो चैट का स्क्रीनशॉट और फोटो उसके घरवालों को दिखा देगा। ऐसा न करने के बदले उसने छात्रा से दो हजार रुपये भी ऐंठ लिए।

लड़की ने दिखाई समझदारी

समीर रजा लड़की से और पैसे माँगने लगा। बात हाथ से निकलता देख लड़की ने समझदारी दिखाई। उसने सारी बात अपने परिजनों को बता दी। इसके बाद परिजनों ने पैसे देने के बहाने आरोपित को बुलाया और धर दबोचा। इसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।

कटघर थाना के प्रभारी मनीष सक्सेना ने बताया कि बिलारी तहसील के एक गाँव का निवासी आरोपित समीर रजा के खिलाफ ब्लैकमेलिंग और धमकी देने का केस दर्ज किया गया है। आरोपित समीर रजा को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।

‘खड़े होंगे मुसलमान, देश जलेगा’: उत्तराखंड के मदरसों में ‘मॉर्डन शिक्षा’ से चिढ़ा मौलाना, कहा- प्राइवेट मदरसों में कुछ न करने देंगे

उत्तराखंड सरकार ने वक्फ बोर्ड के अंतर्गत आने वाले राज्य के सभी मदरसों में ड्रेस कोड और एनसीईआरटी की किताबें लागू करने की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद मौलाना साजिद रशीदी ने कहा है कि सरकार ने प्राइवेट मदरसों को छूने की हिम्मत की तो देश जलने लगेगा।

मौलाना साजिद रशीदी ने कहा है, “हर राज्य में एक मदरसा बोर्ड है जो सरकार के अधीन काम करता है। उन मदरसों में, सरकार ड्रेस कोड का आदेश दे सकती है। यही नहीं, फिल्में और गाने भी चला सकती है। इन मदरसों में सरकार जो चाहे वो कर सकती है और उसे कोई नहीं रोक रहा। लेकिन, सरकार यह सुन ले कि हम उन्हें प्राइवेट मदरसों में कुछ नहीं करने देंगे, क्योंकि भारतीय मुसलमान 4% बच्चों को प्राइवेट मदरसों से मौलवी और मौलाना बनने के लिए रखते हैं। अगर सरकार उन 4% मदरसों में हस्तक्षेप करने की कोशिश करती है, तो सभी भारतीय मुसलमान इसके खिलाफ खड़े होंगे और ऐसा नहीं होने देंगे।”

साजिद रशीदी ने आगे कहा है, “हम सरकार से कुछ नहीं लेते। ये वो मूर्ख लोग हैं जिन्होंने सरकार की आय के लिए अपने मदरसे सरकार को दे दिए और अब इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। इसलिए, हमारे बड़े मौलवी और उलेमा दूसरों को मदरसों के लिए सरकार से कोई पैसा नहीं लेने के लिए कहते हैं।”

दरअसल, गुरुवार (24 नवंबर 2022) को उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा था कि वक्फ बोर्ड के दायरे में आने वाले सभी 103 मदरसों को मॉडर्न बनाया जाएगा। मदरसों में ड्रेस कोड और एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने कहा था कि पहले चरण में 7 मदरसों को मॉडर्न बनाया जा रहा है। इसमें देहरादून, उधमसिंह नगर और हरिद्वार के दो-दो मदरसों एवं नैनीताल जिले के एक मदरसे को मॉडर्न स्कूल की तर्ज पर चलाने के लिए चुना गया है। इसके बाद इस व्यवस्था को अन्य मदरसों पर भी लागू कर दिया जाएगा।

सभी धर्म के बच्चों का होगा दाखिला

इन मदरसों में सभी धर्म के बच्चे शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। मदरसों में सुबह 6:30 से 7:30 बजे तक कुरान की तालीम दी जाएगी। इसके बाद सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक मदरसे सामान्य स्कूल की तरह चलेंगे, जबकि दो बजे के बाद फिर मदरसे के रूप में चलने लगेंगे। मदरसों को लेकर एक बड़ा फैसला यह भी हुआ है कि मदरसों को मदरसा बोर्ड से नहीं, बल्कि उत्तराखंड बोर्ड से पंजीकृत किया जाएगा।

मदरसों में स्मार्ट क्लास

मदरसों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की तरह संचालित किया जाएगा। मदरसों में स्मार्ट क्लास होगी ताकि इनसे पढ़कर निकलने वाले बच्चे डॉक्टर और इंजीनियर बन सकें। जिन मदरसों में क़ुरान पढ़ाया जाता है, वहाँ अब आधुनिक शिक्षा दी जाएगी।

मदरसों के सर्वे कराए जाने के बाद से ही राज्य सरकार मदरसों के आधुनिकीकरण को लेकर लगातार कोशिशें कर रही है। फ़िलहाल यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि मदरसों में ड्रेस कोड किस तरह का होगा, उसका कैसा रंग होगा? हालाँकि अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं आया है। बोर्ड अभी इन पर विचार कर रहा है।

जिस हिंदू घर में टाइल्स लगाने गया था फरमान अली, उसी घर की बच्ची को स्कूल से किया अगवा: रेप कर जान से मारने की दी धमकी

उत्तर प्रदेश के बरेली (Bareilly, UP) में मुस्लिम युवक फरमान अली द्वारा एक हिंदू किशोरी के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। किशोरी आठवीं की छात्रा है। फरमान अली कुछ दिन पहले अपने पिता अब्बास अली के साथ किशोरी के घर टाइल्स लगाने का काम करने गया था।

टाइल्स लगाने के दौरान फरमान किशोरी पर गंदी नजर रखने लगा। साथ ही स्कूल आने-जाने के दौरान भी वह उसका पीछा करता था। मौका देखकर आरोपित फरमान अली किशोरी को स्कूल से अगवा कर मंगलवार (22 नवंबर 2022) को किसी अज्ञात स्थान पर लेकर गया। इसके बाद पीड़िता को नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

घटना के बारे किसी को बताने पर पीड़िता को जान से मारने की धमकी देते हुए फरमान अली मौके से फरार हो गया। जब घटना के अगले दिन पीड़िता की तबीयत बिगड़ी तब जाकर उसके पिता को आरोपित के दुस्साहस की पूरी कहानी के बारे में पता चला।

किशोरी के पिता रिपोर्ट लिखवाने थाने जा रहे थे तो फरमान और उसके पिता अब्बास अली ने उन्हें शहीद गेट के पास रोक लिया और गाली-गलौच करते हुए जातिसूचक शब्द कहे। दोनों ने रिपोर्ट लिखवाने पर परिवार समेत जान से मारने की धमकी भी दी। बाद में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) नेताओं की मदद से किशोरी के पिता ने फरमान पर दुष्कर्म व पॉक्सो अधिनियम और उसके पिता अब्बास अली पर एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई।

इज्जतनगर इंस्पेक्टर अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। विहिप के महानगर अध्यक्ष दुर्गेश कुमार गुप्ता का कहना है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से घटना को अंजाम दिया है। इसके बाद पीड़ित परिवार ने हिंदू जागरण मंच के पास शरण ली तो उन्हें कार्रवाई का भरोसा मिला। गुरुवार को वह अन्य पदाधिकारियों के साथ पीड़ित किशोरी और उसके पिता को लेकर थाने पहुँचे और रिपोर्ट दर्ज कराई।

ग्रामीणों ने नैनीताल हाईवे पर लगाया जाम

इसी बीच रात आठ बजे के करीब अचानक से ग्रामीणों व हिंदू संगठनों में गुस्सा फैल गया। एकजुट होकर सभी ने नैनीताल हाईवे पर जाम लगा दिया। करीब एक घंटे जाम की स्थिति बनी रही। इज्जतनगर इंस्पेक्टर अरुण कुमार श्रीवास्तव ने लोगों को समझाया। आरोपित की 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी का आश्वासन दिया, तब जाकर लोगों ने जाम खोला।

जिस साल बलिदान हुए टंट्या भील, उस साल पैदा ही हुए थे RSS के संस्थापक: राहुल गाँधी निकले झूठे, कहा था- संघ ने फाँसी पर चढ़वाया

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान मध्यप्रदेश में दिया गया भाषण विवादों में है। अपने भाषण में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को घेरने के लिए कई बातें कहीं। इसी क्रम में वह आरएसएस पर भी बरसे और ऐसी बातें बोलते गए जो बिलकुल निराधार थीं।

राहुल गाँधी ने बोला कि जनजातीय समुदाय के क्रांतिकारी टंट्या मामा को अंग्रेजों ने फाँसी पर चढ़ाया और अंग्रेजों का साथ देने वाले आरएसएस थी। उन्होंने इस दौरान आदिवासी और वनवासी शब्द को भी मुद्दा बनाया। राहुल ने कहा कि वो लोग जनजातीय समुदाय के लोगों को देश का पहला नागरिक मानते हैं इसलिए आदिवासी कहते हैं जबकि भाजपा उन्हें जंगल में रहने वाला मानती है इसलिए वनवासी बुलाती है।

बता दें कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के इस बयान के बाद उनका जमकर मजाक उड़ रहा है। भाजपा के कुछ नेताओं ने उन्हें दोबारा से पप्पू कहना शुरू कर दिया है। इसका कारण है राहुल गाँधी का भाषण देते समय अर्जित किया गया अल्पज्ञान। 

उन्होंने मध्य प्रदेश में क्रांतिकारी टंट्या मामा की जन्मस्थली में भाषण देने के दौरान 24 मिनट 51 सेकेंड के स्लॉट पर कहा कि आरएसएस की मदद पाकर अंग्रेजों ने टंट्या मामा को फाँसी पर चढ़वाया। जबकि यदि तथ्यों पर गौर करें तो इस बात का हकीकत से दूर-दूर तक वास्ता नहीं है।

क्रांतिकारी टंट्या भील ने साल 1889 को बलिदान दिया था। वहीं संघ की स्थापना करने वाले डॉ केशव हेडगेवार उसी वर्ष जन्मे थे। उन्होंने टंट्या भील के बलिदान के 36 साल (1925) बाद जाकर राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ को स्थापित किया। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कैसे संघ ने अंग्रेजों की मदद की होगी।

इसी भाषण में राहुल गाँधी ने बिरसा मुंडे के बलिदान का उदाहरण देकर भी आरएसएस को कोसा…बिना ये बात जाने कि क्रांतिकारी बिरसा मुंडा का जन्म 1875 में हुआ था और उन्होंने बलिदान 1900 में दिया था।

राहुल गाँधी के भाषण की क्लिप अब सोशल मीडिया पर वायरल है। लोग उनका यह बयान ट्वीट करते हुए कह रहे हैं, “इसलिए लोग तुमको पप्पू कहते हैं।”

मरे लोगों को जिंदा करने का वादा, शिक्षा-स्वास्थ्य का लालच: छत्तीसगढ़ में 2 दर्जन हिंदुओं को ईसाई बनाने के लिए रात में चंगाई सभा, पादरी सहित 4 गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के जिला बलरामपुर में ईसाई धर्मान्तरण का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि बुधवार (23 नवम्बर 2022) को रात के अँधेरे में एक गाँव में कई ग्रामीणों का धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा था। इसके लिए लोगों को तमाम तरह के लालच भी दिए जा रहे थे, जिसमें मरे व्यक्ति को जिन्दा करने का दावा भी शामिल था। घटना की जानकारी जब गाँव वालों को हुई तो उन्होंने 4 आरोपितों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। धर्मान्तरण के विरोध में हिन्दू संगठनों ने सड़क जाम करके प्रदर्शन किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला बलरामपुर के राजपुर इलाके में आने वाले गाँव पहाड़खडवा का है। आरोप है कि घटना के दिन यहाँ रात में एक घर के अंदर 2 दर्जन से ज्यादा हिंदुओं को जमा किया गया था। उन्हें पैसे, स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रलोभन के साथ 2 दिन के अंदर मरे आदमी को भी जिन्दा कर देने का लालच दिया जा रहा था। इसके बदले वहाँ मौजूद लोगों से ईसाई मत स्वीकार करने को कहा जा रहा था।

इसी गाँव के रहने वाले राजेश यादव नाम के व्यक्ति ने युवा मोर्चा और सतर्कता समूह के सदस्यों को इसकी जानकारी दी। रात में ही कई लोग मौके पर पहुँच गए और कार्यक्रम को रोक दिया गया। बाद में थाना राजपुर पुलिस को बुलाकर 4 आरोपितों को पुलिस के हवाले कर दिया गया, जिसमें एक पादरी भी शामिल है। घटना से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल हो गया था। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। घटनास्थल से ईसाई साहित्य भी बरामद होने की सूचना है।

भाजपा नेता प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने इस कार्यक्रम का वीडियो शेयर किया है। वीडियो में कई महिलाएँ और पुरुष जमीन पर बैठे दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें एक व्यक्ति सम्बोधित कर रहा है। सम्बोधित करने वाले को विरोध करने वालों से उलझते सुना जा सकता है।

विरोध करने वालों ने जब आरोपित से परिचय पूछा तो लोगों ने उसको पादरी नाम से सम्बोधित किया। इस दौरान मकान मालिक को भी आरोपित की तरफ से बोलते सुना गया। बाद में विरोध करने पहुँचे लोगों ने गाँव वालों और बाहरी लोगों को अलग हो जाने के लिए कहा।

जूदेव ने यह कार्रवाई अपने द्वारा बनाई गई धर्म सैनिकों के सदस्यों द्वारा की गई बताई। प्रशासन से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग करते हुए उन्होंने हर गाँव में धर्म सैनिक नियुक्त किए जाने का एलान भी किया है। प्रबल प्रताप ने धर्मान्तरण में शामिल लोगों को विधर्मी की संज्ञा देते हुए उन्हें अपना बीमा करवा लेने की सलाह दी है।

जिन 4 लोगों के विरुद्ध पुलिस ने FIR दर्ज की है उनके नाम अनिल कुजुर, शिसन वशील तिग्गा, धरमलाल तिकी व जीवित लाल तिकी हैं। इन सभी पर IPC की धारा 295-A के तहत केस दर्ज हुआ है। इस घटना के विरोध में हिन्दू संगठनों ने प्रदर्शन किया।

उन्होंने आरोपितों पर कठोर कार्रवाई की माँग की। आरोप लगाया गया कि जिस व्यक्ति के घर में धर्मांतरण की कोशिश हो रही थी उस पर बयान बदलने का दबाव बनाया जा रहा है। SDPO रितेश चौधरी ने प्रदर्शनकारियों को जाँच कर के दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया है।

मोहम्मद आमिर के कोचिंग में पढ़ने जाती थी 15 साल की हिंदू छात्रा, बहला-फुसला ले भागा: दहशत में परिजन, बोले- श्रद्धा जैसा न कर दे हाल

बिहार के बेगूसराय में एक नाबालिग हिंदू छात्रा को शिक्षक मोहम्मद आमिर लेकर भा गया है। 15 साल की छात्रा आमिर के कोचिंग में कभी पढ़ने जाती थी। लड़की के परिजन इस घटना के बाद दहशत में हैं। श्रद्धा वालकर जैसी अनहोनी की आशंका जता रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, फुलवरिया थाना क्षेत्र की रहने वाली नाबालिग छात्रा 4 सालों से मोहम्मद आमिर के कोचिंग में पढ़ने जा रही थी। इस बीच घरवालों को पता चला कि आमिर ने उसे मोबाइल फोन दिया है। भनक लगते ही बच्ची के घरवालों ने उसका कोचिंग बंद करवा दूसरी जगह ट्यूशन लगा दिया। परिजनों का आरोप है कि 21 नवंबर 2022 को छात्रा पढ़ने जाने की बात कहकर घर से निकली थी, जिसके बाद वह वापस नहीं लौटी। खोजबीन के दौरान पता लगा कि घटना के बाद से आमिर का कोचिंग सेंटर भी बंद है। घरवालों ने आमिर पर छात्रा को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का आरोप लगाया है।

छात्रा के माता-पिता ने फुलवरिया थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। एफआईआर दर्ज करने के साथ ही पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। दूसरी तरफ छात्रा के परिजन दहशत में हैं। परिवारवालों का आरोप है कि उनकी बेटी कई दिनों से डरी-सहमी रहती थी। उन्हें इस बात का शक है कि आमिर लड़की को ब्लैकमेल तो कर रहा था। आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक नाबालिग छात्रा के माता-पिता ने रोते हुए पुलिस से बेटी को खोज देने की गुहार लगाई है। माता-पिता को इस बात का डर है कि आमिर उनकी बेटी की हत्या न कर दे। उन्हें डर है कि उनकी नाबालिग बेटी का हश्र भी श्रद्धा की तरह न हो।

फिलहाल आरोपित शिक्षक मोहम्मद आमिर पर धारा-366 ए के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस नाबालिग छात्रा की बरामदगी को लेकर छापे मार रही है और कॉल डिटेल के आधार पर जाँच-पड़ताल कर रही है।

‘लाचित बरपुखान’ को याद कर PM मोदी ने इतिहास से खिलवाड़ पर उठाया सवाल, पूछा- मुगलों से लड़ने वाले असम के हजारों बलिदानी का मोल नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने शुक्रवार (25 नवंबर 2022) को असम वीर लाचित बरपुखान की 400वीं जयंती में शामिल होकर लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि देश को भारत के सच्चे इतिहास की जानकारी दी गई और उसे छुपाया गया। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास उत्पीड़कों के खिलाफ वीरता प्रदर्शित करने, जीतने, बलिदान देने और महान परंपरा के बारे में है।

बता दें कि लाचित बरपुखान असम के अहोम साम्राज्य के महान सेनापति थे। सन 1671 ईस्वी में असम पर जब मुगलों का आक्रमण हुआ तो अहोम साम्राज्य के महाराजा चक्रध्वज सिंह ने लाचित बरपुखान के नेतृत्व में सेना भेजी। लाचित ने मुगलों को कड़ी टक्कर देते हुए सरायघाट की लड़ाई में उन्हें बुरी तरह हराया। इसके बाद मुगल कभी असम की तरफ दोबारा रूख नहीं किया।

लाचित बरपुखान की जयंती पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “सदियों से हमें यह बताने का प्रयास किया गया कि हम ऐसे लोग हैं जो हमेशा लूटे जाते हैं, पीटे जाते हैं और हारते रहे हैं। भारत का इतिहास केवल उपनिवेशवाद का नहीं, योद्धाओं का इतिहास है। भारत का इतिहास उत्पीड़कों के खिलाफ वीरता प्रदर्शित करने, जीत, बलिदान और महान परंपरा के बारे में है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी हमें वही इतिहास पढ़ाया गया, जो औपनिवेशिक काल में एक साजिश के तहत रचा गया था। आजादी के बाद हमें उपनिवेश बनाने वालों के एजेंडे को बदलने की जरूरत थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।”

पीएम ने कहा कि देश के कोने-कोने में भारत के वीरों ने उत्पीड़कों का सामना किया और अपने प्राणों की आहुति दी। यह इतिहास जानबूझकर छुपाया गया था। उन्होंने कहा, “क्या लाचित बरपुखान की वीरता महत्वपूर्ण नहीं है? क्या मुगलों के खिलाफ असम में हजारों लोगों की कुर्बानी महत्वपूर्ण नहीं है?”

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में जब भी कोई मुश्किल दौर आया, कोई चुनौती खड़ी हुई तो उसका मुकाबला करने के लिए कोई न को विभूति अवतरित हुई। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास जय का है, वीरता का है, बलिदान का है, महान परंपरा का है। उनका जीवन परिवारवाद से ऊपर उठकर देश के बारे में सोचने की प्रेरणा देता है।

कॉन्ग्रेस की नगमा का हाथ ऋचा चड्ढा के साथ, सेना के अपमान को बताया सही: MamaEarth की सफाई- हमें गलत मत समझो

भारतीय सेना का अपमान करने के बाद भी ऋचा चड्ढा को कॉन्ग्रेस का समर्थन मिल गया है। पार्टी की महिला नेता व पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री नगमा मोरारजी ने ऋचा के ट्वीट को जायज ठहराया है। उनके अलावा भारत के एक लीडिंग ब्रांड मामाअर्थ ने भी ऋचा के समर्थन में ट्वीट किया था, जिसे अब वह डिलीट कर चुके हैं, लेकिन इस ट्वीट के कारण उनके बॉयकॉट की माँग तेज हो गई है।

कॉन्ग्रेस की महिला नेता ने किया ऋचा चड्ढा का समर्थन

बॉलीवुड अभिनेत्री ऋचा ने सोशल मीडिया पर भारतीय सेना द्वारा POK लेने की बात पढ़कर उसका मजाक उड़ाया था और कहा था, “गलवान की तरफ से हाय।” इस ट्वीट के बाद कई लोगों ने उनका विरोध किया। जबकि नगमा मोरारजी उनका समर्थन करती नजर आईं।

दरअसल, कर्नल अशोक कुमार सिंह ने अभिनेत्री के ट्वीट पर लिखा था, “ऋचा चड्ढा के गलवान ट्वीट पर विवाद। मुझे नहीं लगता कि उन्होंने सैनिकों के बलिदान का मजाक उड़ाया है बल्कि वह चुनाव में बीजेपी को फायदा पहुँचाने के लिए एक सेवारत जनरल द्वारा दिए गए राजनीतिक बयान को निशाना बना रही थीं। जब सेना का राजनीतिकरण हो जाए तो आलोचना और उपहास के लिए भी तैयार रहें।” 

कर्नल के इसी ट्वीट को रीट्वीट करते हुए नगमा ने लिखा- “एकदम सही कहा।” कॉन्ग्रेस की महिला नेता का ऐसा ट्वीट देखने के बाद यूजर्स भड़क गए और पूछने लगे कि वो होती कौन हैं सेना के जवानों के बारे अनाप-शनाप बोलने वालीं।

ऋचा का समर्थन करने पर ट्रेंड हुआ #BoycottMamaearth

नगमा की तरह सोशल मीडिया पर कई लोग हैं जो ऋचा का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में कुछ यूजर्स ने उन ब्रांड को टैग करके भी सवाल किया जिनकी ऋचा चड्ढा ब्रांड अंबेसडर हैं। इनमें एक नाम मामाअर्थ (MamaEarth) का भी आया। वही मामाअर्थ जिसकी मालकिल गजल अलग शार्क टैंक में नजर आती थीं।

अक्षत देवरा नाम के यूजर ने मामाअर्थ को टैग करते हुए पूछा कि ऋचा चड्ढा को सेना का मजाक उड़ा रही हैं। उन जवानों का मजाक उड़ा रही हैं जो गलवान बॉर्डर पर जान बचाते हुए बलिदान हो गए।

इस ट्वीट पर मामाअर्थ का रिप्लाई आया। मामाअर्थ ने पहले लिखा, “हाय! मामाअर्थ ब्रांड हमारे बहादुरों का मजाक उड़ाने वालों का समर्थन नहीं करता। ये शब्द ‘गलवान की तरफ से हाय’ कहना निर्णायक नहीं है। हम मानते हैं कि ये एक केवल याद दिलाना था कि कैसे एक मुश्किल घड़ी में सेना डटी थी और पूरी झड़प पर भारी पड़ रही थी।’”

इस ट्वीट के बाद कई दिग्गजों ने मामाअर्थ को घेरा और ब्रांड ने अपने ये ट्वीट डिलीट करके ये लिख दिया, “ब्रांड मामाअर्थ हमारे देश या सेना के खिलाफ किसी भी आपत्तिजनक विचार या अपमानजनक टिप्पणी का समर्थन नहीं करता है।” हालाँकि पुराना ट्वीट अब भी वायरल हो रहा है। कंपनी के सह-संस्थापक इस पर पत्रकार शशांक शेखर झा के लिए लिखते हैं,

“सर जी गलत मत समझो। न ऋचा हमारी ब्रांड अंबेसडर हैं और न ही ब्रांड का मतलब कुछ नकारात्मक है। हम कट्टर देश प्रेमी हैं। शुद्ध रूप से भारत के लिए और भारत में निर्मित। हम हमेशा अपने बहादुरों का समर्थन करते हैं। माफी माँगते हैं अगर हमारी बात गलत ढंग से ली गई। हम इसमें सुधार कर रहे हैं।”