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AAP विधायक गुलाब सिंह को भीड़ ने दौड़ा-दौड़ाकर थप्पड़ मारे, बैठक छोड़ भागे: Video वायरल, दावा- MCD टिकट बेचने पर हुई धुनाई

दिल्ली नगर निगम चुनावों (Delhi MCD Election 2022) में पैसे लेकर टिकट बेचने के आरोपों को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) विवादों में है। इसी आरोप में सोमवार (21 नवंबर 2022) को ‘आप’ विधायक गुलाब सिंह यादव (Gulab Singh yadav) की पिटाई कर दी गई। इसका वीडियो वायरल है। वीडियो में विधायक को बैठकर छोड़कर भागते देखा जा सकता है।

बीजेपी दिल्ली ने यह वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है, “पिट गए AAP के विधायक जी। आम आदमी पार्टी विधायक गुलाब सिंह यादव को टिकट बेचने के आरोप में आप कार्यकर्ताओं ने दौड़ा-दौड़ा करके पीटा। केजरीवाल जी, ऐसे ही AAP के सभी भ्रष्टाचारी विधायकों का नंबर आएगा।”

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि विधायक खुद को बचाने के भाग रहे हैं, जबकि कुछ लोग उनका पीछा कर रहे हैं। इस दौरान कुछ लोगों ने धक्का-मुक्की की और आप विधायक के कॉलर पकड़कर थप्पड़ मारे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विधायक गुलाब सिंह यादव सोमवार को श्याम विहार में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे थे। बैठक के दौरान अचानक से विधायक के साथ कार्यकर्ताओं की बहस शुरू हो गई। इसके बाद गुस्से में आकर कार्यकर्ता ‘आप’ विधायक गुलाब सिंह के साथ धक्का-मुक्की करने लगे। गुलाब सिंह ने भागने की कोशिश की तो कार्यकर्ताओं ने उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर पीटना शुरू कर दिया।

बीजेपी नेता संबित पात्रा ने भी इस वीडियो को अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “मटियाला विधानसभा से AAP के विधायक गुलाब सिंह यादव द्वारा टिकट बेचने पर नाराज AAP के ही कार्यकर्ताओं के द्वारा उनकी पिटाई की यह वीडियो देख, कहीं अरविंद केजरीवाल जी की भी यादाश्त ना चली जाए, क्योंकि इन सभी भ्रष्टाचारियों के KINGPIN तो अरविंद केजरीवाल ही हैं।”

दिल्ली बीजेपी प्रवक्ता तजिंदर बग्गा ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “जिस सुमित शौकीन ने कल का कार्यक्रम किया, वह खुद कह रहा है कि उसने टिकट के लिए केजरीवाल और गुलाब को 1 करोड़ रुपए दिए थे। लेकिन केजरीवाल को शायद कोई बड़ा ग्राहक मिल गया और उसने इसकी टिकट काट दी।”

सोमवार रात आप विधायक ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, “भाजपा बौखला गई है। भाजपा टिकट बेचने के बेबुनियादी आरोप लगवा रही है। अभी में छावला थाने में हूँ। मैंने देखा भाजपा का निगम पार्षद और इस वार्ड से भाजपा का उम्मीदवार उन लोगों को बचाने थाने में मौजूद हैं। इससे बड़ा सबूत और क्या होगा। मीडिया यहाँ मौजूद है भाजपाई से जरूर पूछे।”

बता दें कि दिल्ली नगर निगम चुनाव के लिए 4 दिसंबर को वोट डाले जाएँगे। 7 दिसंबर को नतीजे घोषित किए जाएँगे। बीजेपी ने 21 नवंबर 2022 को एक स्टिंग के जरिए खुलासा किया था कि आप नेताओं ने पार्टी कार्यकर्ता बिंदू श्रीराम से एमसीडी चुनावों में टिकट देने के बदले 80 लाख रुपए की माँग की थी। आप विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी पर भी कमलानगर वार्ड नंबर 69 सीट से टिकट के बदले गोपाल खारी नाम के शख्स से 90 लाख रुपए लेने का आरोप है। इस मामले में ACB तीन लोगों को गिरफ्तार भी कर चुकी है।

तिहाड़ में सत्येंद्र जैन को मसाज देने वाला निकला ‘बलात्कारी’, Video लीक होने पर AAP ने बताया था- फिजियोथेरेपिस्ट: IAP चीफ ने भी लताड़ा

दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अरविंद केजरीवाल सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendar Jain) के मसाज मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। एक वायरल वीडियो में सत्येंद्र जैन को जिस शख्स से जेल में मसाज कराते हुए देखा गया था, वह नाबालिग से रेप का आरोपित है।

समाचार एजेंसी के मुताबिक, तिहाड़ जेल के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सत्येंद्र जैन की मालिश करने वाले कैदी का नाम रिंकू है। वह फिजियोथेरेपिस्ट नहीं है। रिंकू एक नाबालिग से बलात्कार के मामले में जेल में बंद है। उस पर पॉक्सो POCSO की धारा 6 और IPC की धारा 376, 506 और 509 के तहत केस दर्ज किया गया है।

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी इस मामले में ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, “सत्येंद्र जैन को मालिश और चंपी देने वाला शख्स असल में रेपिस्ट था। वह फिजियोथेरेपिस्ट नहीं बल्कि रेपिस्ट था। ‘आप’ ने किया इसका बचाव। उन्होंने सही मायने में तिहाड़ को थाईलैंड में बदल दिया।”

पिछले दिनों जेल में बंद सत्येंद्र जैन की मसाज का वीडियो सामने आया था। इसमें एक व्यक्ति उनकी मालिश करता हुआ दिख रहा था। आम आदमी पार्टी ने इस मामले पर अपनी सफाई दी थी। उन्होंने इसे सत्येंद्र जैन की बीमारी बताते हुए फिजियोथेरेपी बताया था। AAP के इस फिजियोथेरेपी वाले दावे को तिहाड़ जेल प्रशासन और भारतीय फिजियोथेरेपी एसोशिएशन ने सामूहिक रूप से नकार दिया था।

‘इंडियन एसोशिएशन ऑफ़ फिजियोथेरेपी’ के चीफ डॉक्टर संजीव झा ने उन दावों का खंडन किया था, जिसमें तिहाड़ के वायरल वीडियो में सत्येंद्र जैन की मालिश को उपचार बताया गया था। IAP इंडिया ऑफिसियल हैंडल से वीडियो जारी करते हुए संजीव झा ने बताया कि फुटेज में जो कुछ भी दिख रहा है उसे फिजियोथेरेपी नहीं कहा जा सकता। संजीव झा ने इस हरकत की निंदा करते हुए इसे फिजियोथेरेपी का अपमान बताया था। वीडियो में हो रही गतिविधि को फिजियोथेरेपी बताने वालों से डॉक्टर संजीव झा ने माफी माँगने के लिए कहा था।

गौरतलब है कि 19 नवंबर 2022 को शराब घोटाले के ​आरोपित और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सत्येंद्र जैन को लेकर ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था,”सत्येंद्र जैन के स्पाइन-इंजरी के दो ऑपरेशन हुए हैं। उनको डॉक्टर ने रेगुलर फिजियोथेरेपी बताई है। कोविड के बाद से उनके lungs में patch है, जो अभी ठीक नहीं हुआ है। किसी आदमी की बीमारी और उसको दिए जा रहे इलाज का मजाक बनाने की सोच ही बहुत घटिया है।”

‘जब नमाज पढ़ी जा सकती है तो मंत्र क्यों नहीं’: जिस ट्रेन में तीन बार पढ़ी गई नमाज, उसमें मंत्रोच्चार करने पर पूर्व सैनिक की पिटाई

दिल्ली से विशाखापट्ट्नम जा रही स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस में एक रिटायर्ड सैनिक की पिटाई का मामला सामने आया है। घायल पूर्व सैनिक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ट्रेन के पैंट्री कार मैनेजर और उसके साथियों पर मारपीट का आरोप है। इस संबंध में मध्य प्रदेश के GRP थाना में मामला दर्ज किया गया है। घटना रविवार (20 नवम्बर 2022) की है।

रिपोर्टों के अनुसार ट्रेन में मंत्रोच्चार करने पर पूर्व सैनिक विलास नाईक की पिटाई की गई। वे ट्रेन में रास्ता घेरकर नमाज पढ़ने के विरोध में मंत्रोच्चार कर रहे थे। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया, “रविवार को कुछ लोग सामूहिक रूप से नमाज पढ़ने के लिए ट्रेन के गलियारे में बैठ गए। तीन बार ऐसा किया गया। मैंने बाथरूम जाने के लिए रास्ता माँगा तो मुझे लौटा दिया।”

पूर्व सैनिक के अनुसार जब वे मंत्रोच्चार करने लगे तो नमाजियों ने उन्हें हटने को कहा। इसी दौरान पैंट्री कार वाले आए और उनके साथ विवाद करने लगे। जब उन्होंने पूछा कि जब नमाज पढ़ी जा सकती है तो मंत्रोच्चार क्यों नहीं हो सकता तो उनके साथ मारपीट करने लगे।

रिपोर्ट के मुताबिक घटना के दिन नाईक दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से विशाखापट्ट्नम की यात्रा पर थे। ट्रेन नंबर 12804 के स्लीपर क्लास S- 4 के जिस डिब्बे में वे सवार थे, उसमें कुछ मुस्लिम भी यात्रा कर रहे थे। नाईक का आरोप है कि इसी दौरान ट्रेन के डिब्बे में नमाज़ पढ़ी गई। उनके विरोध का नमाज़ियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। विरोध में उन्होंने मंत्रोच्चार शुरू किया तो पैंट्री कार के स्टाफ आ गए। आधे घंटे तक विवाद के बाद मामला हाथापाई तक पहुँच गया। पैंट्री मैनेजर हरवेश श्रीवास्तव ने अपने साथियों को बुला कर नाईक की पिटाई कर दी।

घटना पर सफाई देते हुए पैंट्री मैनेजर ने बताया है कि नाईक ने खुद ही खुद को चोट पहुँचाई। वहीं ट्रेन में यात्रा कर रहे मुजाकिर अहमद ने नमाज़ पढ़ने की बात कबूली है। उसने बताया कि जब नमाज़ पढ़ी जा रही थी तो नाईक टॉयलेट जाने की जिद कर रहे थे। इन सभी को बैतूल स्टेशन की चौकी जीआरपी पर उतार लिया गया। चौकी इंचार्ज एन एस ठाकुर के मुताबिक पैंट्री कार के मैनेजर व उनके साथियों के खिलाफ IPC  की धारा 294, 322, 34 के तहत FIR दर्ज कर जाँच की जा रही है।

रेलवे द्वारा घटना को लेकर दी गई जानकारी

रेल सुरक्षा बल नागपुर डिवीजन के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त ने एक प्रेस रिलीज जारी कर घटना की पुष्टि की है। बताया है कि इसके कारण बैतूल रेलवे स्टेशन पर ट्रेन करीब 18 मिनट तक रुकी रही। नाइक की शिकायत पर पैंट्री कार मैनेजर और उसके दो वेंडर पर मामला दर्ज किया गया है। मामले की जाँच की जा रही है।

रवीन्द्रनाथ टैगोर के पैतृक आवास में TMC ने बना लिया था दफ्तर, हाईकोर्ट ने दिया ध्वस्त करने का आदेश: कहा – कोई पार्टी कहीं जाकर बना लेगी ऑफिस?

कलकत्ता हाईकोर्ट ने जोरासांको ठाकुरबारी (Jorasanko Thakurbari) में अवैध रूप से बनाए गए तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के कार्यालय को लेकर नाराजगी जताई है। हाई कोर्ट ने विवादास्पद कार्यालय को गिराने का आदेश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति आर भारद्वाज की खंडपीठ ने सोमवार (21 नवंबर, 2022) को हेरिटेज बिल्डिंग के हिस्सों से पार्टी कार्यालय को हटाने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय ने कोलकाता नगर पालिका को निर्देश लागू करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 दिसंबर को है।

कोर्ट के आदेश के मुताबिक यूनिवर्सिटी की हेरिटेज कमेटी महर्षि भवन के पुराने स्वरूप को वापस लाएगी। हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि हेरिटेज विभाग की जिम्मेदारी है कि वह उस हिस्से के निर्माण को उसकी पूर्व स्थिति में लौटाए। जीर्णोद्धार के बाद कार्यालय की पहचान हेरिटेज बिल्डिंग के रूप में की जाए।

हाई कोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी

न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा कि हेरिटेज बिल्डिंग न भी हो तो क्या कोई कहीं जाकर पार्टी आफिस बना सकता है? यदि आपके पास कोई पजेशन पेपर नहीं है, तो इसे गैर-मौजूद निर्माण माना जाएगा। क्या आप में से किसी ने उस कमरे का इस्तेमाल किया है? याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि पार्टी कार्यालय अभी भी है। पुलिस वहां जाकर कार्यालय बंद करे और वह कमरा रवींद्र भारती को लौटा दे।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर के पैतृक घर ‘जोरासांको ठाकुरबारी’ के एक हिस्से को तृणमूल शिक्षाबंधु समिति के कार्यालय के रूप में अवैध रूप से तैयार करने का मामला सामने आया था। जानकारी के मुताबिक, जिस कमरे में रवीन्द्रनाथ टैगोर और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने पहली बार बातचीत की थी, उसे पूरी तरह से नया रूप दिया गया है।

बंगाली पुनर्जागरण के साक्षी रहे महर्षि भवन की दीवारों को हरे रंग से रंगा गया था। दरवाजे और खिड़की, फर्श से भी सत्ताधारी दल से जुड़े समिति द्वारा छेड़छाड़ की गई है।

ऐसा माना जाता है कि भारतीय राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के गीतकार बंकिम चंद्र चटर्जी और टैगोर पहली बार उसी कमरे में मिले थे। दीवारों पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की दो विशाल आकार की तस्वीरों को लगाया गया था।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि रवींद्र भारती यूनिवर्सिटी के जोरासांको परिसर में विरासत संरचनाओं के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई है। कलकत्ता हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि ठाकुरबारी के महर्षि भवन के कुछ कमरों को पार्टी भवन के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।

पॉलीग्राफ से लेकर नार्को टेस्ट तक, आफताब अमीन पूनावाला ऐसे उगलेगा सच: जानिए कैसे काम करती है झूठ पकड़ने वाली मशीन, कोर्ट में कितनी कारगर

श्रद्धा वालकर हत्याकांड में हर रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। हालाँकि, अब भी मामले की पूरी सच्चाई सामने आना बाकी है। पुलिस आफताब के खिलाफ अधिक से अधिक सबूत जुटाते हुए कोर्ट में पेश करना चाहती है। ऐसे में, पुलिस आफताब का नार्को टेस्ट करना चाहती थी। हालाँकि, अब उसके नार्को टेस्ट से पहले पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट किया जाएगा। आइए जानते हैं क्या है लाई डिटेक्टर और नार्को टेस्ट…

दरअसल, लाई डिटेक्टर मशीन झूठ पकड़ने वाली मशीन के नाम से भी जाना जाता है। इस मशीन को साल 1921 में कैलिफॉर्निया यूनिवर्सिटी के छात्र जॉन अगस्तस लार्सन ने बनाया था। इस मशीन का मकसद अपराधियों के झूठ का पर्दाफाश करना था। भारत में किसी भी व्यक्ति का पॉलीग्राफ टेस्ट या नार्को टेस्ट कराने से पहले अदालत की अनुमति जरूरत होती है। फिलहाल, आफताब के केस में पुलिस को पॉलीग्राफ टेस्ट करने की अनुमति मिल गई है।

कैसे होता है पॉलीग्राफ टेस्ट

पॉलीग्राफ टेस्ट करने से पहले जिस व्यक्ति की जाँच करनी होती है उसके शरीर के 4-6 पॉइंट्स को मशीन के तारों के माध्यम से जोड़ा जाता है। इसके बाद, उससे कुछ ऐसे सवाल पूछे जाते हैं जिनका केस से कोई संबंध नहीं होता। फिर, शुरू होता है असली टेस्ट और आरोपित से केस से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं।

सवालों के दौरान जब आरोपित जवाब देता है तो यदि वह झूठ बोलता है तो उस समय उसकी प्लस रेट, ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट बढ़ने या घटने लगता है। साथ उसके हाथ या माथे पर पसीने आने लगता है। यह पूरा टेस्ट विशेषज्ञों की निगरानी में किया जाता है। विशेषज्ञ मशीन के डिस्प्ले व आरोपित के हाथों और अन्य जगहों पर आ रहे मशीन को देखकर बताते हैं कि वह झूठ बोल रहा है या सच।

पॉलीग्राफ टेस्ट की विश्वनीयता

कई रिसर्च में यह सामने आया है कि पॉलीग्राफ टेस्ट को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। दरअसल, पेशेवर अपराधी खुद को इस टेस्ट के लिए ऐसे तैयार कर लेते हैं कि टेस्ट के दौरान मशीन में किसी भी प्रकार का संकेत नहीं दिखता है और यह जो बोल रहे होते हैं उसे ही सच मानना पड़ता है। हालाँकि, अब तक की जाँच में यह सामने नहीं आया है कि आफताब आदतन अपराधी नहीं है। इसलिए, इस टेस्ट में बहुत सारे सच सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

पॉलीग्राफ टेस्ट से कितना अलग है नार्को टेस्ट

पॉलीग्राफ टेस्ट की ही तरह नार्को टेस्ट भी किसी आरोपित की सच्चाई सामने लाने के लिए किया जाता है। हालाँकि, इस टेस्ट में किसी मशीन की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि ‘ट्रुथ सीरम’ नामक दवा का इंजेक्शन दिया जाता है। ‘ट्रुथ सीरम’ वास्तव में साइकोएक्टिव दवा होती है, जिसमें सोडियम पेंटोथोल, स्कोपोलामाइन और सोडियम अमाइटल जैसी दवाओं का उपयोग किया जाता है।

ये दवाएँ जैसे ही व्यक्ति के खून में मिलती है वैसे ही वह अर्धचेतन अवस्थ में पहुँच जाता है। साथ ही, यह उसके नर्वस सिस्टम को भी शिथिल कर देता है, जिससे आरोपित सभी सवालों के सही जवाब देना शुरू करता है।

अदालत की अनुमति मिलने के बाद, यह टेस्ट फॉरेंसिक एक्सपर्ट, जाँच एजेंसियों के अधिकारी, मनोवैज्ञानिक और डॉक्टरों की उपस्थिति में होता है। जिस व्यक्ति को ‘ट्रुथ सीरम’ का इंजेक्शन दिया जाता है वह व्यक्ति जब अर्धचेतन अवस्था में होता है तब उससे सवालों का सिलसिला शुरू होता है। चूँकि, व्यक्ति पूरी तरह होश में नहीं होता ऐसे में वह सब कुछ सच-सच बताने लगाता है।

चूँकि, नार्को टेस्ट के दौरान आरोपित अर्धचेतन अवस्था में होता है इसलिए वह बड़े सवालों को भूल सकता है। यही कारण है कि उससे छोटे-छोटे सवाल पूछे जाते हैं साथ ही सवालों को बार-बार दोहराया जाता है। इस पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाती है, जिसका उपयोग सबूत के तौर पर कोर्ट में किया जाता है।

नार्को टेस्ट प्रमाणिक नहीं

सुप्रीम कोर्ट के वकील अजय गौतम ने ऑपइंडिया को बताया कि नार्को टेस्ट कोर्ट में बहुत ज्यादा मायने नहीं रखता। उनके मुताबिक, कई बार अपराधी अपनी शारीरिक क्षमता से नार्को और लाई डिक्टेटर जैसे टेस्ट में बच निकलते हैं। लेकिन वे सजा से नहीं बच पाते। जैसे निठारी केस। उनके अनुसार, इसी तरह यदि आफताब नार्को टेस्ट में बच निकलता है तो भी इसकी गारंटी नहीं है कि कोर्ट भी उसे निर्दोष मान लेगा।

ईरान की फुटबॉल टीम भी हिजाब के विरोध में, FIFA वर्ल्ड कप में राष्ट्रगान गाने से किया इनकार: महिला प्रदर्शनकारियों का किया समर्थन

हिजाब के विरोध में ईरान में कई दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहा है। अब इस विरोध प्रदर्शन की आग कतर में चल रहे फीफा विश्व कप (FIFA World Cup Qatar 2022) तक जा पहुँची है। ईरान की फुटबॉल टीम के खिलाड़ियों ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सोमवार (21 नवंबर, 2022) को इंग्लैंड के खिलाफ विश्व कप के अपने पहले मैच में देश का राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, खलीफा इंटरनेशनल स्टेडियम में (Khalifa International Stadium) जब राष्ट्रगान बजाया गया तो सभी 11 खिलाड़ी खामोश खड़े रहे। इस दौरान वे काफी भावुक दिखाई दिए। वहीं, स्टैंड में जमा हुए ईरानी फैंस ने राष्ट्रगान बजते ही चिल्लाना शुरू कर दिया। इनमें से कुछ थम डाउन करने का इशारे करते हुए नजर आए।

दरअसल, ईरान में इस साल सितंबर में 22 साल की लड़की महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद से यहाँ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। महिलाएँ सड़कों पर उतरकर हिजाब उड़ा रही हैं। अपने बाल काट रही हैं। वहीं ईरान में प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए लाठीचार्ज किया जा रहा है। ईरान में 2 महीने से चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने 43 साल पहले 1979 में हुई उस क्रांति की यादें ताजा कर दी हैं, जिसने देश को पूरा बदलकर रख दिया था।

वहीं, ईरान ने लाइव टेलिकास्ट के दौरान मैच से पहले लाइन में लगे खिलाड़ियों के फुटेज को सेंसर कर दिया है, क्योंकि जिस वक्त राष्ट्रगान बजाया गया था, सभी खिलाड़ी खामोश थे।

मैच की पूर्व संध्या पर कप्तान एहसान हजसाफी (Ehsan Hajsafi) ईरान की टीम के पहले सदस्य थे, जिन्होंने विश्व कप के दौरान अपने देश में चल रहे विरोध प्रदर्शन पर बात की। उन्होंने कहा, “हम उनके साथ हैं। उनका समर्थन करते हैं। हमें उनसे सहानुभूति है।” उधर खिलाड़ी करीम अंसारीफर्ड और मुर्तजा पोरालीगंजी ने शुक्रवार (18 नवंबर, 2022) को ईरान में चल रहे महिलाओं के विरोध प्रदर्शन के बारे में किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया, जबकि डच क्लब फेयेनोर्ड (Dutch club Feyenoord) के मिडफील्डर अलीरेजा जहानबख्श ने कहा कि इस तरह के सवाल टीम को भ्रमित करने के लिए एक चाल है।

महसा अमिनी की हत्या

उल्लेखनीय है कि ईरान में सितंबर 2022 को पहले 22 साल की महसा को निर्ममता से पीट-पीट कर कोमा में पहुँचाया। कथिततौर पर महसा ने ईरान में रहकर सही से हिजाब नहीं पहना था इसलिए पुलिस ने उस पर हमला किया और उन्हें इतना मारा कि उनका पहले ब्रेन डेड हुआ, वो कोमा में गईं और उसके बाद उनकी मृत्यु हो गई। बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा, मंदाना करीमी और नेटफ्लिक्स की हिट सीरीज सेक्रेड गेम्स में काम कर चुकी एलनाज नोरौजी (Elnaaz Norouzi) ने हिजाब का विरोध करते हुए 11 अक्टूबर 2022 को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया था।

इस वीडियो को उन्होंने ‘मॉय बॉडी-मॉय चॉइस’ का नाम दिया था। इसमें वह कैमरे के सामने एक-एक करके अपने सारे कपड़े उतारती हुई नजर आ रही थीं।

होठों को ही नहीं सँवारती है लिपस्टिक, अर्थव्यवस्था का भी हाल है बताता: जानिए कॉस्मेटिक्स सेल और मंदी में क्या है रिश्ता

एक तरफ जहाँ ब्रिटेन मंदी के दौर से गुजर रहा है, वहीं अमेरिका के भी हालात अच्छे नहीं हैं। ब्रिटेन के वित्त मंत्री जेरेमी हंट ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि मंदी के कारण देश की अर्थव्यवस्था में सिकुड़न आ सकती है। इन सब के बीच ‘लिपस्टिक इंडेक्स’ की काफी चर्चा है। आइए इस रिपोर्ट में जानते हैं ‘लिपस्टिक इंडेक्स’ के बारे में। साथ ही आपको यह भी बताते हैं कि इसका मंदी से क्या संबंध है।

फ़ोर्ब्स की रिपोर्ट की मुताबिक, अमेरिका में बीते 1 साल की तुलना में इस साल फेस केयर आइटम की बिक्री में 2.1% की गिरावट आई है। भले ही डॉलर मजबूत है, अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्र लड़खड़ा रहे हैं। मेकअप के सामग्रियों की बिक्री और लिपस्टिक आमतौर पर मुद्रास्फीति के दबावों से प्रभावित नहीं होते हैं, बल्कि इसकी खरीदारी में बढ़ोतरी होती है। हालाँकि, अमेरिका में ‘लिपस्टिक इंडेक्स’ संकेत दे रहे हैं कि इसमें अब बदलाव हो रहा है।

क्या होता है ‘लिपस्टिक इंडेक्स’

मंदी के समय में लिपस्टिक इंडेक्स एक लंबे समय से आर्थिक संकेतक रहा है। आर्थिक मंदी के बावजूद लिपस्टिक की बिक्री बढ़ती है। इसके पीछे वजह यह है की उपभोक्ता, खासकर महिलाएँ तंगी की वजह से महँगी वस्तुओं पर खर्च कम कर देती हैं और खुद को अच्छा महसूस कराने के लिए कम महँगी चीजों को खरीदना पसंद करती हैं। दूसरी ओर कोरोना की वजह से मास्क की अनिवार्यता भी समाप्त हो गई है और लिपस्टिक की बिक्री बढ़ने लगी है।

ग्लोबल मार्केट ट्रैकिंग फर्म एनपीडी ग्रुप के डेटा में पाया गया कि लिपस्टिक और अन्य लिप मेकअप की बिक्री पिछले साल की तुलना में पहली तिमाही में 48% बढ़ी है। इसका मतलब है पिछले साल की तुलना में लिप मेकअप की बिक्री में 222 मिलियन डॉलर से अधिक की बिक्री हुई है।

कैसे आया चर्चा में

‘लिपस्टिक इफेक्ट’ पहली बार 2001 की मंदी के दौरान चर्चा में आया था। उस समय यह देखा गया था कि इकोनॉमी की खराब हालत के बावजूद लिपस्टिक की बिक्री बढ़ी है। 1929 और 1993 की महामंदी के दौरान भी ऐसा देखने को मिला था। इसे ‘लिपस्टिक इंडेक्स’ नाम दिया गया। इस थ्योरी के मुताबिक, इकोनॉमी की सेहत और कॉस्मेटिक्स की बिक्री के बीच विपरीत संबंध है।

वहीं 2008-09 की आर्थिक मंदी के दौरान ‘फाउंडेशन इंडेक्‍स’ का टर्म सामने आया था। जब महिलाओं ने ब्‍यूटी प्रोडक्‍ट पर ज्‍यादा पैसे खर्च करने के बजाए फाउंडेशन के जरिये अपनी त्‍वचा को चमकाने का राज खोजा। इस दौरान देखा गया कि मंदी के बावजूद बाजार में फाउंडेशन की बिक्री जबरदस्‍त रही और यह निष्‍कर्ष निकाला गया कि महिलाएं जब अन्‍य शौक की चीजों पर ज्‍यादा पैसे नहीं खर्च कर पा रहीं थी, तो फाउंडेशन के इस्‍तेमाल से खुद को खूबसूरत दिखाने की कोशिश की।

एनपीडी में ब्यूटी इंडस्ट्री एडवाइजर की सलाहकार लारिसा जेन्सेन ने बताया, “उपभोक्ता अर्थव्यवस्था के बारे में बुरा महसूस करते हैं तो वे अच्छा दिखना चाहते हैं। चूंकि वसंत और गर्मियों की शुरुआत में कंज्यूमर सेंटीमेंट गिर गया था, लिपस्टिक की बिक्री बढ़ गई। ‘लिपस्टिक इंडेक्स’ जीवित और अच्छी तरह से हमारे बीच है।”

‘खुद को हिन्दू बता रहा था आतंकी मोहम्मद शरीक, दिखाया था फर्जी आधार कार्ड’: पूरे मंगलुरु को दहलाने की थी साजिश, तमिलनाडु के कई इलाकों में घूमा था

शनिवार (19 नवंबर, 2022) को कर्नाटक के मंगलुरु में हुए बम धमाके को लेकर जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ रही है, नए खुलासे होते जा रहे हैं। एक ओर जहाँ पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद शरीक भीड़-भाड़ वाले इलाके को निशाना बनाना चाहता था लेकिन बम ऑटो में ही फट गया, वहीं, कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर ने कहा है कि मोहम्मद शरीक खुद को हिंदू बता रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलुरु बम ब्लास्ट में गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद शरीक को लेकर कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री के सुधाकर ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि शरीक ऑटो में बैठने के बाद खुद को हिंदू बता रहा था, ताकि उस पर किसी को शक न हो। इसके लिए, उसने एक आधार कार्ड दिखाया था, जिस पर हिंदू नाम था। उसने यह आधार कार्ड रेलवे कर्मचारी से चुराया था।

के सुधाकर ने यह भी कहा है कि पुलिस हर एंगल से मामले की जाँच कर रही है। यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मोहम्मद शारिक के संबंध अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों, बैन किए गए संगठनों या स्लीपर सेल से तो नहीं है। उन्होंने कहा है कि कर्नाटक की सीमा केरल से लगती है। इसलिए, स्लीपर सेल से जुड़े होने की भी आशंका है।

उन्होंने यह भी कहा है कि बीते महीने तमिलनाडु के कोयंबटूर में भी ऐसा ही बम धमाका हुआ था। तब भी आतंकियों ने मंदिर के पास ब्लास्ट करने की साजिश रची थी। पुलिस ने मोहम्मद शरीक के मूवमेंट को ट्रेस किया है, जिसमें सामने आया है कि उसने कोयंबटूर में एक व्यक्ति से मुलाकात की थी।

इस मामले में पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद शरीक ऑटो में बैठकर पंपवेल एरिया में जाना चाहता था। वहाँ वह अपने साथ लिए हुए कुकर बम (विस्फोटक) को नगौरी के भीड़-भाड़ इलाके में प्लांट करना चाहता था। हालाँकि, ऑटो में बैठने के थोड़ा देर बाद ही विस्फोट हो गया।

यही नहीं, शुरुआती जाँच के बाद पुलिस ने कहा है कि शरीक ने कोयंबटूर से किसी और के नाम पर एक सिम खरीदा था। इस सिम कार्ड के टावर लोकेशन की जाँच से सामने आया है कि वह तमिलनाडु के कई इलाकों में घूम रहा था। शरीक की फोन डिटेल निकाली जा रही है, जिससे उसके साथियों के बारे में जानकारी सामने आ सकेगी।

बता दें, मंगलुरु बम धमाके के आरोपित मोहम्मद शरीक के घर से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, एक मोबाइल फोन, दो फर्जी आधार कार्ड, एक पैन कार्ड, डेबिट कार्ड बरामद हुए हैं। विस्फोटक बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों में जिलेटिन पाउडर, सर्किट बोर्ड, छोटे बोल्ट, बैटरी, वुड पावर, एल्युमीनियम मल्टी मीटर, तार, मिक्सचर जार, प्रेशर कुकर आदि बरामद हुए हैं। पुलिस ने शरीक के जिस घर में छापेमारी की है, वह घर किराए पर लिया हुआ था।

एक रिपोर्ट के अनुसार, शरीक इस्लामिक स्टेट (ISIS) के हैंडलर अराफात अली के संपर्क में था। अराफात पहले ही दो मामलों में आरोपित है और अल-हिंद मॉड्यूल मामले के आरोपी मुस्सविर हुसैन के संपर्क में था। यही नहीं, शरीक दो तीन अन्य संदिग्धों के भी संपर्क में था। इन सभी की पहचान की जा रही है।

‘अगर सरदार पटेल भारत को एक कर पाए तो इसका श्रेय जगद्गुरु शंकराचार्य को जाता है’: बोले राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान – राजनीतिक रूप से बँटा रहा देश

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Arif Mohammed Khan) ने रविवार (20 नवंबर, 2022) को कहा कि अगर सरदार वल्लभभाई पटेल 1947 के बाद भारत को एकजुट कर पाए, तो इसका श्रेय वास्तव में ‘केरल के पुत्र’ शंकराचार्य को जाता है। उन्होंने 1000 साल से भी पहले लोगों को अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता से अवगत कराया था। विभिन्न विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति सहित कई मुद्दों पर राज्य सरकार का विरोध करने वाले खान ने ‘पीटीआई’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि केरल ‘ज्ञान की खोज करने वालों’ के लिए बहुत अनुकूल जगह है।

राज्यपाल के मुताबिक, भारत में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता है, लेकिन देश लंबे समय तक राजनीतिक रूप से बँटा रहा।

उत्तर प्रदेश के रहने वाले खान ने कहा कि केरल राज्य की एक महान परंपरा है और यह भारत के सबसे अच्छे राज्यों में से एक है। केरल के समाज, लोगों को श्रेय दिया जाना चाहिए। यह श्री नारायण गुरु जैसे लोग हैं। केरल में एक बहुत ही दमनकारी सामंती व्यवस्था थी। महिलाओं को ऊपरी वस्त्र तक पहनने की अनुमति नहीं थी… जब भी संकट की घड़ी आती है, तो कोई न कोई महान आत्मा सामने आती है।

राज्यपाल के अनुसार, “अगर सरदार पटेल 1947 के बाद भारत को एकजुट कर सके, हम सबसे बड़ा लोकतंत्र बन सके और एक राष्ट्र बन सके, तो इसका श्रेय वास्तव में केरल के बेटे शंकराचार्य को जाता है, जिन्होंने 1000 साल से भी अधिक समय पहले उनकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता के बारे में भारत के लोगों को जागरूक किया। मैं आपसे पहली बार नहीं कह रहा हूँ।”

बता दें कि शंकराचार्य को आदि शंकराचार्य के नाम से भी जाना जाता है। उनका जन्म 788 ईस्वी में केरल के कालडी में हुआ था। वे अद्वैत दर्शन के विद्वान, ऋषि और प्रतिपादक थे। देश के पहले गृहमंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप में सरदार पटेल को भारत की 560 से अधिक रियासतों के विलय का श्रेय दिया जाता है। केंद्र सरकार सरदार पटेल के जन्मदिन को 31 अक्टूबर को 2014 से ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मना रही है। पटेल का जन्म 31 अक्टूबर, 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था।

डर, दबाव और सब ठीक होने की उम्मीद…: आखिर क्यों कोई ‘श्रद्धा’ चाहकर भी नहीं छोड़ पाती किसी ‘आफताब’ को?

श्रद्धा मर्डर जैसे किसी भी सनसनीखेज अपराध से जुड़ी जानकारियाँ सुर्खियों में आते ही हमारे मन में तमाम तरह के सवाल उमड़ते हैं। हम सोचने लगते हैं कि आखिर पीड़िता पुलिस के पास क्यों नहीं गई होगी, उसने क्यों अपने पड़ोसियों को कुछ नहीं बताया गया, वो क्यों नहीं चिल्लाई होगी, उसने क्यों मदद नहीं माँगी होगी? ये सब सवाल अंतहीन है और इनके ऊपर दी जाने वाली जजमेंट एकदम निराधार।

इंसानी स्वभाव बेहद जटिल होता है। जब हम अखबारों और टीवी चैनलों में क्राइम के बारे में पढ़ते हैं हमें किसी के जीवन का बस एक पहलू पता होता है, वो भी या तो रिपोर्टर के नजरिए से या फिर उस जाँचकर्ता की नजर से, जिन्हें अपराध से पहले उस व्यक्ति के बारे में कुछ पता तक नहीं होता।

हाल का श्रद्धा वाकर केस ऐसा ही है। हत्या के बाद श्रद्धा के जीवन पर, उसके रिलेशनशिप पर, उसके अपने माता-पिता से संबंधों पर, उसकी पसंद-नापसंद पर काफी चर्चा है और इंसान होने के नाते हम लोग सारे उमड़ते सवालों पर काफी तेजी से प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं।

इन्हीं सवालों में से एक सवाल यह है कि आखिर श्रद्धा ने आफताब को समय रहते क्यों नहीं छोड़ा? इस प्रश्न पर हर क्षेत्र के लोग अपनी अपनी राय जोड़ रहे हैं। कुछ लोग नारीवाद को दोषी ठहरा रहे हैं तो कुछ श्रद्धा के पिता को कि उन्होंने अपनी बेटी को दोबारा क्यों नहीं स्वीकारा। कुछ लोगों की शिकायत आधुनिक समाज से है…जिसकी वजह से लड़कियाँ इतनी हिम्मत करती हैं कि वो बाहर निकल पाएँ, बंदिशों को तोड़कर प्रेमी के साथ रह पाएँ…।

इन सबके बीच श्रद्धा की वो तस्वीरें भी हैं जिसमें नजर आ रहे चेहरे पर तमाम निशान हैं और जो ये सवाल खड़ा कर रहे हैं कि आखिर उसने आफताब को क्यों नहीं छोड़ा होगा?

दरअसल, सच कभी एक नैरेटिव या सटीक व्याख्या नहीं हो सकता। आज श्रद्धा मर्डर केस भले ही मीडिया सुर्खियों में है, लेकिन ये भी वास्तविकता है कि उसकी हत्या के बाद ऐसे ही हिंसा के तमाम केस सामने आए हैं। हर मामला एक दूसरे से अलग है। फिर चाहे वो पीड़िता की मानसिकता के मामले में हो, उसकी परिस्थितियाँ के बारे में हो या फिर अपराधी के सोचने के ढंग पर हो।

सामाजिक दबाव

घरेलू हिंसा की पीड़िताएँ अक्सर मारपीट, भय और ग्लानि में जकड़ी होती हैं। उनके पास सोचने समझने की आजादी नहीं होती। उन्हें डर होता है कि अगर उन्होंने गलत के खिलाफ आवाज उठाई तो क्या होगा, समाज क्या कहेगा, उनपर क्या-क्या कलंक लगाएगा। एक शादीशुदा औरत से उम्मीद की जाती है कि वो सिर्फ सब कुछ सहे और बदले में कुछ न कहे, क्योंकि अगर कुछ कहा और कुछ गलत हुआ तो सारी गलती उसी की मानी जाएगी। कभी अच्छी पत्नी न होने के लिए उसे कोसा जाएगा, कभी अच्छी बहू न होने के लिए और कभी अच्छी माँ न होने के लिए…। हमारे देश में किसी न किसी माध्यम से हमेशा से ये बताया जाता रहा है कि घर की महिला के पास हर गलत को सही करने की ताकत होती है, लेकिन फिर भी अगर वो चीज गलत हो जाए तो उसके लिए जिम्मेदार औरत ही होती है।

रिश्ता चाहे शादी का हो या लिव-इन का… महिलाओं को हमेशा से प्रताड़ित किया गया। हाँ, ऐसे पुरूष भी हैं जो प्रताड़ित होते हैं, वो भी घरेलू हिंसा का शिकार होते हैं, लेकिन फिर भी जो घरेलू हिंसा सहने वालों की संख्या है वो महिलाओं में ज्यादा है और ऐसा सिर्फ भारत के नहीं बल्कि पूरे विश्व के आँकड़े कहते हैं। घर की बंदिशें औरतों को बोलने नहीं देतीं। शादी वाले में रिश्तों में महिलाओं की चिंता अपने बच्चे को लेकर होती है, उनके भविष्य को लेकर होती है और समाज में लांछन न लगे इस बात की होती है।

डर का फायदा

ऐसे रिश्तों में अपराधी के पास औरत का सारा कंट्रोल होता है और पीड़िता हर मायनों में अकेली रह जाती है। रिश्ता भयावह तब होता जाता है जब अपराधी जान जाए कि आखिर किस तरह से वो पीड़िता को सता सकता है या डरा सकता है। वो उन्हीं आधारों पर पीड़िता को प्रताड़ना देना शुरू करता है। वहीं पीड़िता भी कभी प्यार के नाम पर कभी कमजोरी में उसे सह लेती है और इस तरह अपराधी की हिम्मत और बढ़ जाती है।

रिश्ता चाहे शादी के बाद वाला हो या लिव-इन के दौरान का। अपराधी हमेशा पीड़िता की कमजोरी का फायदा उठाता है। श्रद्धा के केस में भी उसने अपने दोस्तों को मारपीट और गाली-गलौच के बारे में बताया था। आज उसके मैसेज वायरल हैं। जबकि भुवनेश्वर की उषाश्री परीदा के केस में हमें पता भी नहीं था कि उनका पति जिनके साथ उन्होंने दो बच्चों को जन्म दिया, जिनके साथ वह कई साल तक रहीं, वह उन्हें लगातार मारता था।

दरअसल ऐसे केसों में पीड़िताएँ अपनी सोचने-समझने की शक्ति खो देती हैं। उनके पास खुद को बचाने का तरीका नहीं बचता और न ही वो खुद इस विषय में सोच पाती हैं कि लगातार होती हिंसा से वह कैसे दूर हटें।

सब ठीक होने की उम्मीद

एक पीड़िता को नहीं पता चलता कि कब उसके साथ हदें पार कर दी गईं। अनुराग कश्यप की थप्पड़ मूवी में दिखाया गया कि कैसे एक थप्पड़ पड़ते ही महिला इस बात पर अड़ जाती है कि ये उसे अस्वीकार्य है और वो किसी कीमत पर उसके साथ नहीं रह सकती। हकीकत में ये सिर्फ फिल्मों में होता है। वास्तविक जीवन में औरतें केवल ये सोचती रह जाती हैं कि चीजें एक दिन ठीक हो जाएँगी। एक रिश्ते को 5 साल देने वाली महिला के लिए आसान नहीं होता कि वो एक पल में अपने रिश्ते में लगाई सारी उम्मीदें छोड़ दें।

हो सकता है श्रद्धा ने भी ये सब सोचा हो। उसे भी लगा हो कि आफताब के साथ सब चीजें सही हो जाएँगी। एक दिन सब ठीक हो जाएगा। समय सब ठीक कर देगा। आदि-आदि…। क्या ये सब सोचना हमें बचपन से नहीं सिखाया गया।

भविष्य का डर नहीं होने देता अलग

शोध बताते हैं कि शादीशुदा औरतें अपने रिश्ते में अपमान सहने के बावजूद उससे इसलिए नहीं निकल पाती क्योंकि उन्हें आर्थिक दिक्कतों के साथ-साथ बच्चों को खोने का डर होता है, उन्हें उनके भविष्य के लिए डर होता है। आज तमाम हेल्पलाइन नंबर हैं, पुलिस सहायता का आश्वासन है, एनजीओ हैं, लेकिन फिर भी तमाम महिलाएँ घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। दुर्भाग्य से वह लोग मानसिक रूप से सशक्त नहीं होतीं। उन्हें सिर झुकाकर मारपीट सहने की आदत हो जाती है। वो लोग जिनके लिए आज श्रद्धा हेडलाइन है वो ये जान लें कि ऐसी तमाम औरतें हैं जो अपनी आवाज नहीं उठा पा रहीं। उन औरतों को मारा भी नहीं गया फिर भी वो चुप हैं क्योंकि उन्हें उस माहौल में रहने की आदत हो गई है।

सोशल मीडिया पर जो राय निर्मित की जा रही है, लड़कियों को उसके कपड़ों के लिए शर्मसार किया जा रहा है, उन्हें पता होना चाहिए कि ऐसे हजारों द्वंद पीड़िता के भीतर चलते हैं। ये द्वंद भले ही समाज और राजनीति के कारण हमारे निजी विचारों से मेल न खाते हों लेकिन ये फिर भी पीड़िता के मन में चलते हैं। ऐसे में अगर हम कुछ नहीं कर सकते तो कम से कम इतना करें कि अगर कोई जरूरतमंद मदद माँगे तो दयालु बनकर उसके लिए आगे आएँ।

महिलाओं की मदद के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग ने हेल्पलाइन नंबर निकाला हुआ है। जो भी महिला घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं उनके लिए ऑल इंडिया हेल्पलाइन नंबर 181 और 1091 है। हर राज्य की अलग अलग हेल्पलाइन नंबर यहाँ देख सकते हैं।

नोट: ये लेख अंग्रेजी में लिखे गए लेख के अंशों पर आधारित है। आप मूल लेख इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।