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1 महीने में 136 विज्ञापन, फूँक डाले ₹2.37 करोड़: पंजाब के सरकारी खजाने से गुजरात में AAP का चुनाव प्रचार, दिल्ली की केजरीवाल सरकार का गुणगान

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल पर विज्ञापनों पर करोड़ों रुपए खर्च करने का आरोप लगता रहा है। आरटीआई समेत अन्य माध्यमों से इसके सबूत भी सामने आते रहे हैं। ऐसा ही आरोप पंजाब की AAP सरकार पर भी लगा है। सोशल मीडिया पर भाजपा नेताओं से लेकर सामान्य यूजर्स भी पंजाब सरकार पर विज्ञापनों के लिए फेसबुक को 2 करोड़ 27 लाख रुपए देने का आरोप लगा रहे हैं। बड़ी बात यह है कि यह खर्च बीते एक महीने में हुआ है, जिसमें से सबसे अधिक खर्च गुजरात के लोगों को टारगेट करते हुए किया गया है।

दरअसल, भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल प्रभारी अमित मालवीय ने भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब की आप सरकार पर वहाँ लोगों के पैसों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए कहा, “पिछले एक महीने में आप (AAP) द्वारा चलाए जा रहे पंजाब सरकार ने फेसबुक विज्ञापनों पर 2.27 रुपए खर्च किए हैं। इसमें से 1.58 करोड़ रुपए, यानी लगभग 69% पैसा गुजरात को टारगेट करते हुए खर्च किया गया है। पंजाब के लोगों को केजरीवाल के गुजरात चुनाव के लिए भुगतान क्यों करना पड़ रहा है। यह सरकारी धन का खुलेआम दुरुपयोग है।”

हालाँकि, यह दावा सिर्फ अमित मालवीय का नहीं था। बल्कि, सोशल मीडिया पर ऐसे हजारों पोस्ट और ट्वीट किए गए हैं। इसलिए ऑपइंडिया ने इस दावे की जाँच करने का फैसला किया। इसके लिए हमने, पंजाब सरकार के फेसबुक पेज पर मौजूद ‘विज्ञापन लाइब्रेरी’ में जाकर पंजाब सरकार द्वारा चलाए जा रहे विज्ञापनों की जानकारी जुटाते हुए तमाम तरह के दावों को वेरिफाई करने का फैसला किया।

पंजाब सरकार के फेसबुक पेज के ‘विज्ञापन लाइब्रेरी’ में दिखाया जा रहा है कि पंजाब सरकार ने 2 अक्टूबर से विज्ञापन चलाना शुरू किया। इसमें 30 दिनों में (29 सितंबर से 28 अक्टूबर के बीच) फेसबुक को सिर्फ विज्ञापन के लिए 2,37,35,527 रुपए (2 करोड़ 37 लाख 35 हजार 527 रुपए) का भुगतान किया है। जबकि, इस दौरान कुल 136 विज्ञापन चलाए गए हैं। इन विज्ञापनों का यदि औसत देखा जाए तो प्रत्येक विज्ञापन में कम से कम 1,74,000 (1 लाख 74 हजार) रुपए से अधिक खर्च किया गया है।

इसके बाद जब हमने बीते एक सप्ताह (22 अक्टूबर से 28 अक्टूबर) की जानकारी देखी तो पता चला कि भगवंत मान सरकार ने एक सप्ताह में 33 विज्ञापनों पर 91,38,039 (91 लाख 38 हजार 39) रुपए खर्च किए हैं।

ऑपइंडिया की अब तक की जाँच में, भाजपा नेताओं व अन्य लोगों द्वारा सोशल मीडिया में किए जा रहे दावे सही पाए गए थे। हालाँकि, इसके बाद भी हमने आगे की जाँच जारी रखी। इसके लिए हमने फिर से बीते 30 दिनों (29 सितंबर से 28 अक्टूबर के बीच) में राज्यों के हिसाब से किए गए खर्चों को लेकर जाँच की। इस जाँच में, सामने आया कि भगवंत मान सरकार ने कुल खर्च राशि का 68.5% केवल गुजरात को टारगेट करते हुए खर्च किया था। जबकि, पंजाब में 29.4%, महाराष्ट्र में 1.1%, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के लिए 0.9-0.9% पैसा खर्च किया गया है।

इसमें से गुजरात के लिए कुल 66 विज्ञापन, पंजाब के लिए 41, महाराष्ट्र के लिए 9 जबकि हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के लिए 20-20 विज्ञापन चलाए गए हैं। इसमें सबसे बड़ी बात यह रही कि विज्ञापन सिर्फ पंजाबी में नहीं, बल्कि हिंदी में भी चलाए गए थे। साथ ही, ऐसे 49 विज्ञापन रहे जिनका कैप्शन गुजराती में था। इसमें से अधिकांश विज्ञापनों में दिल्ली की केजरीवाल सरकार का ‘गुणगान’ किया गया है।

शुरुआती स्तर में यानी जब विज्ञापन शुरू किए गए तब 2 अक्टूबर को विज्ञापनों पर अलग-अलग कैटेगरी में 100 रुपए से लेकर 35-40 हजार रुपए तक खर्च किए गए थे। हालाँकि, इसके बाद 10 अक्टूबर को गुजराती भाषा में कैप्शन और गुजरात को टारगेट कर चलाए गए विज्ञापनों पर खर्च हुई राशि में तेजी से बढ़ोतरी हुई और यह 6-7 लाख रुपए से लेकर 10 लाख रुपए तक पहुँच गया।

इसी प्रकार आगे भी यह राशि घटती और बढ़ती रही। कभी टारगेट ऑडियंस गुजरात से लेकर हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली पंजाब यहाँ तक कि तमिलनाडु और असम जैसे राज्यों तक आम आदमी पार्टी के कार्यों के गुणगान के लिए पंजाब की जनता का पैसा खर्च किया गया है।

फिलहाल, पंजाब सरकार के पेज पर 13 विज्ञापन सक्रिय (एक्टिव) हैं। जिसमें से अधिकांश बार राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली को टारगेट करते हुए विज्ञापन चलाए जा रहे हैं। चूँकि, गुजरात चुनावों की घोषणा अभी तक नहीं हुई है इसलिए अब गुजरात को या तो टारगेट नहीं किया जा रहा है या कम किया जा रहा है।

यदि पेज के आँकड़ों को ध्यान से देखें तो 14 अक्टूबर तक गुजरात को टारगेट करते हुए ही ज्यादातर विज्ञापन चलाए जा रहे थे। लेकिन, 15 अक्टूबर को जब चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनावों की घोषणा की तो उसमें सिर्फ हिमाचल प्रदेश का ही नाम था। ऐसे में, पंजाब सरकार ने न केवल गुजरात को टारगेट करना बंद कर दिया बल्कि फेसबुक को दिए जा रहे विज्ञापन भी पूरी तरह से रोक दिए। 14 अक्टूबर को रुके हुए विज्ञापन 30 अक्टूबर से पुनः शुरू किए गए हैं।

शायद इसलिए ही भाजपा यह आरोप लगा रही है कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार यानी मुख्यमंत्री भगवंत मान अपनी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल के इशारे पर गुजरात चुनावों को देखते हुए आम आदमी पार्टी का प्रचार कर रही थी।

‘हिन्दू किन्नर हिन्दुओं के यहाँ माँगें, मुस्लिम किन्नर मुस्लिमों के यहाँ’: अलीगढ़ में हिन्दू किन्नरों पर धर्मांतरण और इस्लाम कबूलने का दबाव, कहा – गुंडे बुला पिटवाते हैं

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में किन्नरों के 2 गुटों में तनातनी की खबर है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र के विवाद के चलते दोनों गुट आमने-सामने आ गए। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर हालात को सँभाला। मिली जानकारी के मुताबिक, इस दौरान एक गुट ने जय श्रीराम का नारा लगाते हुए दूसरे गुट कर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने का भी आरोप लगाया। घटना शनिवार (29 अक्टूबर, 2022) की है।

घटना सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के मौरिस रोड की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग 59 साल पहले शहर में किन्नरों के इलाके बाँटे गए थे। अब शहर के हालात में काफी बदलाव आ गया है, इसलिए इलाके को ले कर दोनों गुटों में आपस में तनातनी रहती है। इस दौरान एक गुट ने खुद को हिन्दू समूह बताते हुए कहा कि मुस्लिम किन्नर मुस्लिमों के घर बधाई माँगे और हिन्दू किन्नर हिन्दुओं के घर। हिन्दू गुट का कहना है कि माँस खाने वाले किन्नरों द्वारा बच्चों को दी गई बधाइयाँ कबूल नहीं होंगी।

हिन्दू पक्ष के किन्नरों ने पुलिस स्टेशन में मीडिया से बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम पक्ष के किन्नर बाहर से गुंडे बुला कर उनकी पिटाई करवाते हैं। पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि घटना के दिन उन्हें रास्ते में रोक कर आरोपित नंगे हो गए और खुद को ब्लेड मार ली। पीड़ितों का आरोप है कि इस दौरान उनके पक्ष के 2 किन्नर घायल हुए हैं, जिसमें एक के बाल पकड़ कर खींचे गए और दूसरी की चेन भी छीन ली गई। हिन्दू पक्ष की प्रतिनिधि शिवा की शिवम किन्नर ने प्रशासन और अपने समाज से अपनी सुरक्षा की माँग करते हुए बताया कि एक बार उन पर गोली भी चल चुकी है।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, हिन्दू गुट ने आगे कहा कि विपक्षी किन्नर उन पर जबरन माँस खाने और नमाज़ पढ़ने का दबाव बनाते हैं। उनका आरोप है कि हिन्दू किन्नरों पर इस्लाम कबूलने का दबाव भी बनाया जाता है। हालाँकि पुलिस को दी गई शिकायत कॉपी में इन आरोपों का जिक्र नहीं है। इस दौरान हिन्दू पक्ष का आरोप है कि मुस्लिम किन्नरों ने उनके इलाके में घुस पर हिन्दुओं के घर बधाई माँगी। बताया जा रहा है कि किन्नरों का मुस्लिम पक्ष हिन्दू पक्ष की इन माँगों को मानने के लिए तैयार नहीं है।

कहा जा रहा है कि घटना के दिन भी इसी बात से शुरू हुआ था। बाद में जुबानी बहस मारपीट में बदल गई। इस दौरान पत्थरबाजी होने और लाठी-डंडे चलने का भी दावा किया जा रहा है। कई किन्नरों के नग्न हो कर सड़क कर हंगामे की वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई। घटना की सूचना मिलते ही अलीगढ़ पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग किया और समझाया-बुझाया। फ़िलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी माँगों पर अड़े हुए हैं।

ऑपइंडिया ने इस घटना पर पीड़ित शिवा की शिवम किन्नर से बात की। उन्होंने बताया कि विपक्षी किन्नरों द्वारा हमको ही प्रताड़ित किया गया और हम पर ही केस भी दर्ज कर दिया गया। शिवम किन्नर ने आगे बताया कि उनकी तरफ से भी विपक्षियों पर FIR दर्ज हुई है, लेकिन गंभीर धाराएँ हिन्दू पक्ष पर ही लगा दी गई हैं। हिन्दू पक्ष का कहना है कि उनके द्वारा हिन्दू बने रहने की ही लड़ाई लड़ी जा रही है। शिवम किन्नर के मुताबिक, अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है और वो इस मामले में उच्चाधिकारियों से मिलेंगी।

शिवम ने हमें बताया कि विपक्षी पक्ष के किन्नरों में वादी का नाम आरती है जो बस नाम की हिन्दू है लेकिन वो असल में मुस्लिम है। शिवम किन्नर का आरोप है कि विपक्षियों ने उनके गुट को फँसाने के लिए खुद से ही खुद को ब्लेड मर ली है।

ऑपइंडिया के पास दोनों पक्षों की FIR मौजूद है। इसमें शिवा की शिवम पक्ष की किन्नर की तहरीर पर दूसरे गुट पर IPC की धारा 323, 336, 352 और 294 के तहत हाजी शहजाद और अज्ञात आरोपित पर केस दर्ज किया गया है। वहीं दूसरे पक्ष की आरती हिजड़ा की तहरीर पर शिवा की शिवम किन्नर गुट पर IPC की धाराएँ 147, 148, 149, 323, 307 और 506 के तहत 19 आरोपितों पर केस दर्ज हुआ है।

‘आंबेडकर को हिन्दू राजा ने विदेश भेज कर पढ़ाया-लिखाया, आरक्षण के कारण फेल हो रहे 80-90% लाने वाले’: विवादित टिप्पणी का वीडियो, यूपी पुलिस ने शुरू की जाँच

उत्तर प्रदेश की प्रतापगढ़ पुलिस ने संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमिटी के अध्यक्ष रहे डॉ भीमराव अंबेडकर के​ खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने वाले एक शख्स के खिलाफ 30 अक्टूबर, 2022 को मामला दर्ज किया। आरोपित की पहचान प्रतापगढ़ जिले के जेठवाड़ा थाना क्षेत्र के माताफेर सिंह के रूप में हुई है। वह अवधी बोली में डॉ. भीमराव अंबेडकर को गरियाते हुए नजर आ रहा है। सोशल मीडिया पर उसका वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

प्रतापगढ़ पुलिस ने बताया आरोपित के खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। 55 सेकेंड के वीडियो में उस शख्स ने कहा था, “जिसने संविधान लिखा ससुर, भीमराव अंबेडकर। इसको किसने अफसर बनाया? एक हिंदू राजा। वह गुजरात का एक राजा था। एक क्षत्रिय।” तभी उसकी बात का जवाब देते हुए पृष्ठभूमि से एक व्यक्ति ने कहा कि अंबेडकर एक बैरिस्टर थे। माताफेर सिंह को जवाब देने वाले व्यक्ति का चेहरा वीडियो में नहीं दिख रहा है।

इस पर माताफेर ने कहा, “क्या वह पहले से ही योग्य था? क्या आप उसका इतिहास जानते हो? वह कभी बैरिस्टर नहीं था।” इसके बाद दूसरे शख्स ने कहा कि उनके पास डिग्री थी, जिस पर उस व्यक्ति ने कहा, “नहीं, उसके पास कोई डिग्री नहीं है। उसे गुजरात के क्षत्रिय राजा ने विदेश भेजा, पढ़ाया लिखाया और फिर यहाँ वापस बुलाया। जिसने उसका नामकरण किया वापस आने के बाद उसने सबसे पहले उन्हीं की पूँछ काट दी।”

आरक्षण व्यवस्था पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “आरक्षण मंडल-कमंडल के दुनिया भर के बच्चे सब कुछ पा रहे हैं और हमारे बच्चे 80%-90% नंबर लाकर भी फेल हो रहे हैं। यह कैसा संविधान है?” वह अपनी स्थानीय भाषा में अबंडेकर के लिए ‘ससुर’ और ‘साला’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहा है। दरअसल, बातचीत के दौरान प्रतापगढ़ में ऐसे शब्दों का प्रयोग आम बात है।

वहीं, दलित समुदाय के लोगों ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस वीडियो की कड़ी आलोचना की और उन्होंने उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। ऑपइंडिया से बात करते हुए, जेठवाड़ा पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि इस मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है और जाँच जारी है। मामले में अधिक जानकारी की प्रतीक्षा है।

‘दयालु बलात्कारी, बच्ची को ज़िंदा छोड़ दिया’: हाईकोर्ट ने अब गलती मानते हुए ‘दयालु’ शब्द हटाया, सज़ा घटाने का फैसला वैसा ही

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने चार साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में आरोपित की याचिका पर सुनवाई के दौरान दी अपनी अपनी विवादित टिप्पणी को सुधारने का काम किया है।

18 अक्टूबर को फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा था कि बलात्कारी ने दुष्कर्म के बाद जो बच्ची को जिंदा छोड़ा वो उसकी दयालुता थी। इस फैसले में हाईकोर्ट ने आरोपित को मिली आजीवन कारावास की सजा को घटाकर 20 साल कर दिया था जिसके कारण जगह-जगह आलोचना हो रही थीं।

अब इन्हीं आलोचनाओं पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने अपने फैसले से ‘दयालु शब्द’ को हटा दिया है। कोर्ट ने माना है कि उनसे फैसला देने में गलती हो गई। 27 अक्टूबर को कोर्ट ने अपना निर्णय में सुधार किया।

आदेश में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और सत्येंद्र कुमार सिंह की डबल बेंच ने कहा कि यह संज्ञान में लाया गया है कि इस अदालत की ओर से 18 अक्टूबर को दिए गए फैसले में अनजाने में गलती हुई। यह अदालत पहले ही अपीलकर्ता के कृत्य को राक्षसी मान चुकी है। ऐसी परिस्थिति में यह अदालत सीआरपीसी की धारा 362 के तहत प्रदत्त अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, उपरोक्त पैराग्राफ को संशोधित करती है।

उल्लेखनीय है कि कोर्ट ने अपने फैसले से ‘दयालु’ शब्द तो हटाया ही है। साथ ही दोषी की जो सजा घटाई गई थी उसमें बदलाव नहीं है।

मध्यप्रदेश कोर्ट का विवादित फैसला

बता दें कि 18 अक्टूबर को रेप दोषी की याचिका पर सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश कोर्ट ने फैसला दिया था। हाईकोर्ट ने आरोपित के लिए कहा था, “…उसमें इतनी दयालुता थी कि उसने बच्ची की हत्या नहीं की और बलात्कार के बाद उसे ज़िंदा छोड़ दिया, इसीलिए न्यायालय का विचार है कि आजीवन कारावास की सज़ा को घटा कर 20 वर्ष किया जा सकता है।” वहीं पुलिस का कहना था बलात्कारी दया का पात्र नहीं है और उसके मामले को ख़ारिज किया जाए।

हनुमान जी ने ऐसे बचाई गंगनहर में डूब रहे बंदर की जान: रात भर प्रतिमा से लिपट कर बैठा रहा, यूपी पुलिस ने रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला

जाको राखे साइयाँ, मार सके न कोय’, अर्थात् जिसके साथ ईश्वर होता है उसका कोई बाल भी बाँका नहीं कर सकता है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में एक ऐसा ही ‘चमत्कार’ देखने को मिला है। यहाँ एक बेजुबान बंदर को भगवान हनुमान की मूर्ति ने बचा लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला गाजियाबाद जिले में मुरादनगर गंगनहर का है। शनिवार (30 अक्टूबर 2022) शाम को गंगनहर में एक बंदर अचानक गिर गया। पानी के तेज बहाव के चलते वह काफी दूर तक निकल गया। इस दौरान उसने अपनी जान बचाने की लाख को​शिश की, लेकिन नहर के किनारे पर नहीं जा सका। इसी बीच गंगनहर के बीच में स्थापित हनुमान जी की मूर्ति बंदर के लिए सहारा बन गई।

बंदर इस मूर्ति के पास बैठ गया। बताया जा रहा है कि रात भर बंदर हनुमान जी की प्रतिमा से लिपटकर बैठा रहा। रविवार (31 अक्टूबर, 2022) सुबह होने पर यह दृश्य कुछ पुलिसकर्मियों ने देखा। इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से बंदर की जान बचाई गई।

मंदिर के महंत मुकेश गोस्वामी ने बताया कि गंगनहर में डूब रहे बंदर का हनुमान जी सहारा बने। यह दृश्य वास्तव में देखने लायक था। उन्होंने कहा कि सर्दी ज्यादा लगने से बंदर की तबीयत बिगड़ गई थी। लेकिन, इलाज के बाद अब वह पूरी तरह से ठीक हो गया है। सोशल मीडिया पर हनुमान जी की मूर्ति से चिपके हुए बंदर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। कोई इसे आस्था, तो कोई चमत्कार बता रहा है।

वहीं, मुरादनगर पुलिस स्टेशन के SO सतीश कुमार ने बताया कि बंदर कैसे गंगनहर में गिरा, इसका पता नहीं चला। लेकिन लोगों ने रविवार सुबह उसको गंगनहर के बीच पिलर पर स्थापित हनुमान मूर्ति को पकड़कर बैठे हुए देखा। बंदर ठंड के कारण काँप रहा था। थाने के हेड कांस्टेबल प्रमोद कुमार मोटरबोट लेकर पिलर तक गए और बंदर को सुरक्षित रेस्क्यू किया।

इमरान खान के कंटेनर की चपेट में आने से महिला पत्रकार की मौत, जुलूस में इंटरव्यू लेने पहुँची थी: पाकिस्तान के पूर्व PM ने किया मार्च रोकने का ऐलान

शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ ‘लॉन्ग मार्च’ निकाल रहे इमरान खान के जुलूस के दौरान एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आ रही है। उनका इंटरव्यू लेने पहुँची एक महिला पत्रकार की रविवार (30 अक्टूबर 2022) को उनके कंटेनर के नीचे दबकर मौत हो गई । मृतक पत्रकार की पहचान चैनल 5 की रिपोर्टर सदफ नईम के रूप में हुई है।

द डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक पत्रकार के अचानक गिरने के बाद खान का कंटेनर उसके ऊपर से गुजर गया। बताया जा रहा है कि वह इमरान खान का एक्सक्लूजिव इंटरव्यू लेने यहां पहुंची थीं। इस दौरान इमरान खान की यह रैली लाहोर में कमोके से जीटी रोड की तरफ जा रही थी।

इमरान खान ने इस घटना पर दुःख जताते हुए कार्यक्रम को स्थगित करने का एलान किया। अपने समर्थकों से बात करते हुए, खान ने कहा कि मार्च को कमोके, गुजरांवाला की ओर बढ़ना था। उन्होंने कहा कि हालाँकि दुखद घटना के कारण, हम मार्च को तुरंत रोक रहे हैं।

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ”हम इस घटना के कारण आज अपने सभी कार्यक्रम को बंद करने का फैसला लेते हैं। हमने आज इसे रोकने का निर्णय लिया है।” उन्होंने मृतक महिला पत्रकार के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि वह दिवंगत आत्मा के लिए प्रार्थना करते हैं।

वहीं पाकिस्तान की सूचना मंत्री मरियम औरंगजेब ने घटना पर दुःख जताया और उनकी मौत पर सवाल खड़े किए । उन्होंने कहा कि वह महिला पत्रकार को व्यक्तिगत रूप से जानती थी और वह काफी मेहनती पत्रकार थीं। मरियम ने कहा कि उनकी मौत इमरान खान के साक्षात्कार लेने के दौरान हो गई, यह काफी भयावह है।

प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने पत्रकार के परिवार के लिए 25 लाख रुपए की वित्तीय सहायता की घोषणा की और अधिकारियों को प्रक्रिया को तुरंत पूरा करने और राशि उनके परिवार को सौंपने का आदेश दिया।

जिस मुस्लिम बुजुर्ग को ‘बाबा’ बुलाता था हिन्दू बहुल गाँव, उसने ही दलित युवक से चटवाया थूक: वामपंथी MLA ने कहा – ये पंचायत का फैसला

बिहार के समस्तीपुर में रविवार (23 अक्टूबर, 2022) को एक दलित युवक को थूक चटाने का मामला प्रकाश ये आया था। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें एक मौलाना जैसे व्यक्ति ने पीड़ित को 5 बार थूक चाटने पर मजबूर किया था। 25 अक्टूबर, 2022 को जब ऑपइंडिया ने इस मामले में जिले के SP से जानकारी माँगी थी तब उन्होंने मामला संज्ञान से बाहर बताया था। अब इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज करते हुए अलाउद्दीन और फ़िरोज़ नाम के 2 आरोपितों को नामजद किया है।

अलाउद्दीन और फ़िरोज़ नामजद

वीडियो में मौलाना जैसी शक्ल का आरोपित अलाउद्दीन ही है। ऑपइंडिया ने मामले में अपडेट लेने के लिए चकहबीब गाँव के चौकीदार राम भरोसे से सम्पर्क किया। राम भरोसे ही इस मामले में शिकायतकर्ता हैं। उन्होंने हमें बताया कि उनके द्वारा दी गई शिकायत में अलाउद्दीन और फ़िरोज़ को नामजद करते हुए अन्य अज्ञात आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज करने की माँग की गई है। राम भरोसे ने हमें आगे बताया कि केस के विवेचक वीडियो के आधार पर अज्ञात लोगों की पहचान कर के आगे की कार्रवाई करेंगे।

अब्दुल जब्बार की बेटी से था प्रेम प्रसंग

राज चकहबीब के मुखिया डॉ राम सेवक शाह ने इस मामले में ऑपइंडिया से बात की। मुखिया ने इस घटना को बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा कि जिस लड़की को पीड़ित छोड़ने आया था, वो अब्दुल जब्बार की बेटी थी। वीडियो में दिख रहा मौलाना जैसी शक्ल का अलाउद्दीन, जब्बार का अब्बा है, यानी वो लड़की का बाबा है। जब्बार बिहार से बाहर कही कमाता है। मुखिया ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की आशा जताई।

कुछ लोगों के हिरासत में लिए जाने की खबर

राज चकहबीब गाँव के ही एक अन्य जनप्रतिनिधि राम नरेश राय ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि मामले में मुख्य आरोपित अब्दुल जब्बार अभी फरार है। राम नरेश के मुताबिक, घटना के बाद गाँव में पुलिस ने दबिश दे कर 2-3 लोगों को हिरासत में लिया है लेकिन उनके नामों की जानकारी उन्हें नहीं है। जब ऑपइंडिया ने अब तक हुई गिरफ्तारियों या कार्रवाई की जानकारी के लिए विभूतिपुर थाना प्रभारी को फोन किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। जब हमने इस मामले में समस्तीपुर के SP से भी बात करनी चाही तो उनका भी फोन नहीं उठा। पुलिस का वर्जन आने के बाद खबर को अपडेट किया जाएगा।

कभी अलाउद्दीन के बेटे को पकड़ने आई थी महाराष्ट्र पुलिस

घटना के मुख्य आरोपित अलाउद्दीन के बारे में जानकारी देते हुए चकहबीब गाँव के जन प्रतिनिधि राम नरेश राय ने आगे अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अलाउद्दीन कभी काफी गरीब हुआ करता था, लेकिन बाद में उसके बेटे बड़े हुए तो उसने न सिर्फ घर बनवाया बल्कि जमीनें भी खरीदीं। राम नरेश के अनुसार, अलाउद्दीन का एक बेटा कोलकाता और दूसरा मुंबई में काम करता है। वहीं हमें 2 अन्य बेटों के विदेश में खाड़ी देशों में काम करने की जानकारी दी गई।

इसी बातचीत में राम नरेश ने हमें बताया कि अलाउद्दीन का जो बेटा विदेश में है, वो कभी मुंबई में काम किया करता था। उन्होंने हमें बताया कि मुंबई में कुछ आपराधिक मामलों से शामिल होने के चलते उसे पकड़ने महाराष्ट्र पुलिस हमारे गाँव तक आई थी। राम नरेश ने हमें आगे बताया कि उसके बेटे को कुछ दिनों तक महाराष्ट्र की जेल में रहना पड़ा था जहाँ से छूट कर वो दुबारा मुंबई न जा कर सीधे विदेश चला गया है। हालाँकि, राम नरेश उस केस के बारे में हमें अधिक जानकारी नहीं दे पाए।

गाँव में 3 मस्जिदें और 1 मदरसा

चकहबीब गाँव के जनप्रतिनिधि राम नरेश राय ने हमें बताया कि उनका गाँव हिन्दू बहुल है। इस गाँव में हामिद मियाँ भी मुखिया पद की दावेदारी की ताल ठोंक चुके हैं। अपने गाँव के कुल वोटरों की संख्या लगभग 6 हजार बताते हुए उन्होंने मुस्लिमों वोटों को महज 10% होना बताया। राम नरेश के मुताबिक, औसतन 500 से 600 मुस्लिमों की आबादी वाले ग्राम पंचायत चकहबीब में कुल 3 मस्जिदें और एक मदरसा है।

उन्होंने हमें बताया कि बुजुर्ग होने के चलते थूक चटाने के मामले में आरोपित अलाउद्दीन को लोग बाबा कह कर बुलाते थे, इसीलिए जब उसने ये फैसला लिया तब किसी ने विरोध नहीं किया। हालाँकि राम नरेश के अनुसार, बाद में गाँव के बहुत लोगों को ये हरकत गलत लगी।

पीड़ित के पिता की 2 साल पहले हो चुकी है हत्या

आरोपित अलाउद्दीन ने भीड़ के आगे जिस दलित युवक से थूक चटवाया था, उसका नाम राजू पासवान बताया जा रहा है। राजू पासवान गाँव महिसारी का रहने वाला है। महिसारी गाँव घटनास्थल चकहबीब से लगभग 3 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है। महिसारी के सामाजिक कार्यकर्ता विजेंदर राम ने ऑपइंडिया से बताया कि राजू पासवान के पिता वीरेंद्र पासवान की लगभग 2 साल पहले ही हत्या हो चुकी थी। तब पिता के साथ राजू के भाई को भी गोली मारी गई थी, जिसमें वो बच गया था। बाद में वो भाई कहीं बाहर कमाने चला गया।

हमें बताया गया कि राजू का एक अन्य भाई दिल्ली में कहीं काम करता है। विजेंदर राम ने दावा किया है कि घटना के समय उनके गाँव के मुखिया श्रवण पासवान अपने परिवार के साथ मौके पर मौजूद थे। विजेंदर के मुताबिक, मुखिया ने अपने खुद के बेटे को बचाने के लिए राजू को बलि का बकरा बना दिया। उनका यहाँ तक दावा है कि मुखिया श्रवण खुद ही सारी घटना के चश्मदीद गवाह हैं लेकिन वो कार्रवाई से बच रहे हैं।

ऑपइंडिया ने इस मामले में पीड़ित राजू पासवान के गाँव के मुखिया श्रवण पासवान का पक्ष जानने के लिए उन्हें 2 बार फोन मिलाया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

भाजपा ने सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल

बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जयसवाल ने दलित युवक को थूक चटाने की घटना पर नितीश सरकार को घेरा है। उन्होने कहा कि आरोपित की शक्ल मौलाना से मिलने-जुलने के चलते सत्ता पक्ष से कोई इस मामले में बोल नहीं रहा है। संजय जायसवाल ने कथित दलित हित चिंतकों को भी कटघरे में खड़ा करते हुए पीड़ित के लिए न्याय की माँग की।

वामपंथी विधायक के मुताबिक थूक चटाने में दलित भी शामिल

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जयसवाल के बयान का जवाब देते हुए कम्युनिस्ट पार्टी से स्थानीय विभूतिपुर के विधायक कॉमरेड विधायक अजय कुमार ने कहा कि इस मामले में कम्युनल एंगल नहीं है। उन्होंने बताया कि जब ये घटना हुई है, तब खुद पीड़ित की जाति के कई लोग मौके पर मौजूद थे। वामपंथी विधायक के मुताबिक, थूक चटाने का निर्णय पंचायत के बाद लिया गया था।

₹3.5 लाख में 143 साल पहले मोरबी में हुआ था ‘इंजीनियरिंग का चमत्कार’, रेनोवेशन पर ₹2 करोड़ खर्च करने के बाद भी निकले झोल: रिपोर्ट्स

गुजरात के मोरबी में मच्छू नदी पर बने केबल ब्रिज हादसे से पूरा देश स्तब्ध है। 143 साल से भी ज्यादा पुराने इस पुल को 19वीं शताब्दी में वहाँ के शासक वाघजी ठाकोर ने बनवाया था। तब यूरोपीय तकनीक से बने इस पुल को ‘इंजीनियरिंग का चमत्कार’ माना जाता था। ‘झूलता पुल’ के नाम से मशहूर इस पुल की लंबाई लगभग 765 फीट है। बकौल न्यूज 18, इसकी नींव 20 फरवरी 1879 को मुंबई के तत्कालीन गवर्नर रिचर्ड टेंपल ने रखी थी। पुल को बनाने में करीब 3.5 लाख रुपए खर्च हुए थे। उस समय के हिसाब से यह एक बड़ी रकम थी।

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हादसे में 140 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अभी भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और कई लोग लोगों को बाहर निकाला जा रहा है। ये ब्रिज पिछले कई महीनों से बंद चल रहा था, जिसे रेनोवेशन कर 26 अक्टूबर 2022 को खोला गया था। छह महीने तक चले रेनोवेशन कार्य पर करीब 2 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। बताया जा रहा है कि ब्रिज पर क्षमता से अधिक लोगों के जुटने के कारण यह हादसा हुआ।

हादसे के पीछे पुल का रखरखाव करने वाली कंपनी और मोरबी नगरपालिका के बीच तालमेल की कमी भी सामने आई है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मोरबी नगरपालिका के मुख्य अधिकारी संदीप सिंह जाला ने पुल के रखरखाव और संचालन के लिए जिम्मेदार ओरेवा कंपनी (अजंता मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड) पर बिना सूचित किए पुल को लोगों के लिए खोलने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पुल मोरबी नगरपालिका की एक संपत्ति है, लेकिन हमने इसे कुछ महीने पहले 15 साल की अवधि के लिए रखरखाव और संचालन के लिए ओरेवा समूह को सौंप दिया था।

अधिकारी का कहना है कि इस ब्रिज पर असल में एक बैच में सिर्फ 20 से 25 लोगों को जाने की अनुमति रहती है। हमेशा से ही ऐसा होता आ रहा है। लेकिन रविवार को हुए हादसे की एक बड़ी वजह लापरवाही रही। अधिकारी बताते हैं कि एक साथ 400-500 लोगों को ब्रिज पर भेज दिया गया। इसी वजह से पुल टूटा। संदीप सिंह ने कहा कि उन्हें रिनोवेशन पूरा होने की भी जानकारी नहीं दी गई थी।

वहीं इस हादसे से पहले पुल से वापस आए एक परिवार ने दावा किया कि कुछ युवकों ने पुल को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया और वे दुर्घटना की आशंका से पुल से वापस आ गए। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक अहमदाबाद निवासी जय गोस्वामी और उनके परिवार के सदस्य आधे रास्ते से वापस आ गए। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पुल के कर्मचारियों को इसकी सूचना दी थी, लेकिन वे ‘कोई दिलचस्पी नहीं’ दिखा रहे थे। रिनोवेशन के लिए सात महीने तक बंद रहने के बाद अंग्रेजों के पुल को जनता के लिए महज चार दिन पहले (26 अक्टूबर ) को फिर से खोल दिया गया था।

‘सनातन धर्म बाहर से आया, भारत आकर हमारी सभ्यता नष्ट कर दी’: अकील खान ने TV पर हिंदुओं के खिलाफ उगला जहर, केजरीवाल का है ‘खास’

अकील खान का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वह सनातन धर्म के खिलाफ जहर उगलता दिखाई पड़ रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) समर्थक खान का वीडियो आज तक के शो ‘दंगल’ का है। आप नेताओं और उनके समर्थकों का हिंदू विरोधी रवैया पहले भी कई बार सामने आ चुका है।

अकील खान ने टीवी डिबेट के दौरान कहा, “इसमें किसी को कोई संदेह नहीं है कि सनातन धर्म के लोग बाहर से आए हैं, इन लोगों ने यहाँ आकर हमारी भारतीय सभ्यता को नष्ट किया है।” वीडियो में 4:32 से 4:46 के बीच आप अकील को कहते सुन सकते हैं, “केवल द्रविड़ ही भारत के ओरिजनल हैं, बाकी सब यहाँ बाहर से आए हुए हैं। ये हिस्टोरिकल फैक्ट है, इसमें किसी को डाउट नहीं है। सनातन धर्म के लोग बाहर से आए हैं, हर तरह के लोग बाहर से आए हैं। इन लोगों ने भारत आकर हमारी सभ्यता को नष्ट किया है।”

खान ने यह बात यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर चर्चा के दौरान कही। गुजरात में यूसीसी लागू करने को लेकर पिछले दिनों ही बीजेपी सरकार ने कमेटी का गठन किया है। इस दौरान खान ने एंकर को बोलने से रोकने की कोशिश भी की। इसको लेकर एंकर ने उन्हें फटकार भी लगाई।

अकील खान कौन है

अकील खान AAP के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाते हैं। टीवी चैनलों की डिबेट में आम आदमी पार्टी का पक्ष रखते हुए नजर आते हैं।

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद जय हिंद ने अकील खान की वीडियो क्लिपिंग को अपने ट्विटर हैंडल पर भी साझा किया है। उन्होंने लिखा, “आम आदमी पार्टी के संस्थापक नेता अरविंद केजरीवाल के करीबी अकील खान कहते हैं कि सनातन धर्म भारत में बाहर से आया है। भारत को सनातन और हिंदुओं की भूमि माना जाता है, लेकिन ‘आप’ कह रही है कि हिंदू बाहरी हैं। गोपाल इटालिया और राजेंद्र पाल के बाद अब यह?”

हनुमान जी ‘दंगाई’, स्वस्तिक को झाड़ू

बता दें कि आम आदमी पार्टी के नेता हिन्दू देवी-देवताओं और प्रतीक चिह्नों का भी अपमान कर चुके हैं। केजरीवाल ने एक ट्वीट किया था, जिसमें एक प्रतीकात्मक चित्र में झाड़ू लिया हुआ व्यक्ति ‘स्वस्तिक’ चिह्न को खदेड़ कर भगा रहा है।

इसी तरह उन्होंने हनुमान जी का अपमान करते हुए उन्हें ‘दंगाई’ के रूप में चित्रित किया था। उन्होंने रामायण में वर्णित लंका दहन की दर्ज पर एक कार्टून शेयर किया था, जिसमें पूँछ वाला एक व्यक्ति आग लगा कर आ रहा है और पीएम मोदी से कह रहा है कि काम हो गया, अब सबका ध्यान JNU पर ही हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने ‘Make In India’ का भी मजाक बनाया था, जिसे भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए लाया गया था।

हिंदू विरोधी शपथ

केजरीवाल सरकार में मंत्री रहे राजेंद्र पाल गौतम 5 अक्टूबर 2022 को दिल्ली में आयोजित एक धर्मांतरण कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इसमें 10 हजार हिंदुओं को बौद्ध धर्म में धर्मांतरित किया गया था। कार्यक्रम में गौतम समेत कई अन्य लोगों को शपथ लेते हुए दिखाया गया था। शपथ में कहा जा रहा था, “मैं हिंदू धर्म के देवी देवताओं ब्रह्मा, विष्णु, महेश, श्रीराम और श्रीकृष्ण को भगवान नहीं मानूँगा, न ही उनकी पूजा करूँगा। मुझे राम और कृष्ण में कोई विश्वास नहीं होगा, जिन्हें भगवान का अवतार माना जाता है।” इसके अलावा गुजरात के AAP अध्यक्ष ने भगवान श्रीकृष्ण की तुलना राक्षसों से की थी।

मोरबी घटना पर द लल्लनटॉप ने छठ पूजा को किया बदनाम, AAP नेताओं के संदिग्ध ट्वीट भी वायरल: BJP ने उठाई जाँच की माँग

गुजरात के मोरबी में हुए हादसे के बाद अब उस पर राजनीति होना शुरू हो गई है। छठ पूजा का नाम लेकर आम आदमी पार्टी अपना प्रोपगेंडा फैला रही है। दिल्ली से गुजरात तक के नेता इस घटना का राजनीतिकरण करने में लगे हैं। इस बीच द लल्लनटॉप ने प्रोपगेंडा को ये कहकर हवा दी कि हादसे के समय लोग छठ पूजा मनाने के लिए इकट्ठा हुए थे।

देख सकते हैं कि आप नेता नरेश बालियान ने द लल्लनटॉप का लिंक शेयर करते हुए झूठ फैलाया। इस पर उन्हें लोगों से लताड़ भी लगी। उन्हें गिद्ध भी कहा गया लेकिन ये ट्वीट उन्होंने अब भी डिलीट नहीं किया है। वहीं लल्लनटॉप अपनी हेडलाइन चुपचाप बदल चुका है।

गुजरात के मोरबी में हुई घटना पर द लल्लनटॉप ने जो पुरानी रिपोर्ट की उसके अर्काइव लिंक में देख सकते हैं कि कैसे इस घटना को छठ से जोड़कर दिखाया गया, जबकि सच ये है कि वहाँ लोग छठ पूजा के लिहाज से नहीं थे। फिलहाल न्यूज की हेडलाइन बदल चुकी है और पूरी खबर से छठ का नाम हटा दिया गया है। इस पूरी घटना में जिसमें 141 लोगों के मारे जाने की की खबर आ रही है उसे कई विपक्षी नेता भाजपा के विरुद्ध प्रयोग कर रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि इस घटना से एक दिन पहले ही आम आदमी पार्टी के नेताओं के कुछ ट्वीट आ रहे थे। ये ट्वीट बहुत संदिग्ध हैं। इसमें कहा जा रहा था, “कल भाजपा गुजरात की कब्र खोदी जाएगी” , “कल गुजरात की सियासत में 2 बड़े धमाके होंगे” , “कल भाजपा के पैर के नीचे से जमीन खिसकने वाली है।”

इन ट्वीट का अर्थ क्या है, इसे कोई समझ नहीं पा रहा है। लेकिन ये दिख रहा है कि आप नेताओं के लगातार ट्वीट के बाद ऐसी खबर आई और इसके बाद फौरन आम आदमी पार्टी भाजपा पर हमलावर भी हो गई। वहीं चश्मदीदों ने बातचीत में बताया कि शायद इस घटना को होने से रोका जा सकता था। मगर कुछ युवक पुल पर चढ़े और उन्होंने इसे हिलाने का प्रयास शुरू कर दिया। ऐसी हरकत देख कई परिवार आधे पुल से वापस लौट आए। भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस मामले में जाँच की माँग की है।

बता दें कि इस पूरी घटना में 400 के करीब लोग ब्रिज से नीचे गिरे। जिनमें लगभग 141 की मौत हो गई और करीब 200 लोग लापता बताए जा रहे हैं। राहत-बचाव की टीम लगातार लोगों को रेस्क्यू करने में जुटी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर घटना पर दुख जताया। वहीं मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा भी की जा चुकी है।