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अब तक 141 मौतें, BJP सांसद के 12 रिश्तेदारों की भी मौत: चश्मदीद का दावा- कुछ लोग हिला रहे थे मोरबी का हैंगिंग ब्रिज

गुजरात के मोरबी में हुए हादसे में अब तक 141 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। स्थानीय बीजेपी सांसद मोहनभाई कुंदरिया के 12 रिश्तेदार भी इनमें शामिल हैं। राहत और बचाव के काम चल रहे हैं। मच्छु नदी पर बना केबल पुल रविवार (30 अक्टूबर 2022) शाम टूट गया था।

अभी भी करीब 200 लोग लापता बताए जा रहे हैं। 140 साल पुराने इस पुल को रिनोवेशन के बाद कुछ दिन पहले ही खोला गया था। लेकिन अब यह तथ्य सामने आ रहा है कि ऐसा बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के ही कर दिया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना की जाँच के लिए 5 सदस्यों की SIT का गठन किया गया है। शुरुआती जाँच के मुताबिक घटना के समय पुल पर क्षमता से अधिक भीड़ मौजूद थी। साथ ही लोगों को रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। गुजरात के गृह मंत्री ने बताया कि पुलिस ने मामले में IPC की धारा 304, 308 और 114 के तहत FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। उन्होंने जानकारी दी है कि राहत और बचाव कार्यों के लिए NDRF, नेवी के साथ स्थानीय प्रशासन की टीमें सक्रिय हैं।

हिलाया जा रहा था पुल को

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा। एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि कुछ लोग पुल को हिलाने का प्रयास कर रहे है। इस दौरान किसी ने भी उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की। इसको लेकर दावा किया जा रहा है कि कुछ लोग पुल को हिलाने की कोशिश कर रहे थे। आपइंडिया इन दावों की पुष्टि नहीं करता। लेकिन एनडीटीवी ने विजय गोस्वामी नाम के एक प्रत्यक्षदर्शी के हवाले से ऐसा ही दावा किया है। विजय का कहना है कि युवकों द्वारा की गई इस हरकत को देख वे कर वो आधे पुल से परिवार सहित वापस लौट आए थे।

न फिटनेस, न ही अनुमति

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोरबी म्युनिसिपल चीफ अफसर संदीप सिंह झाला ने कहा है कि पुल को खोलने से पहले अनुमति नहीं ली गई थी। उन्होंने बताया कि पुल का फिटनेस सर्टिफिकेट भी नहीं था। उन्होंने बताया कि पुल पर सामान्य तौर पर एक साथ 20 से 25 लोगों को जाने की अनुमति ही दी जाती है। लेकिन हादसे के वक्त करीब 500 लोग पुल पर थे। इस पुल का ठेका ओरेवा के पास है।

177 को बचाया गया, 19 का इलाज जारी

एक रिपोर्ट के मुताबिक नदी में गिरे 177 लोगों को अब तक बचाया जा चुका है। 19 घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। गुजरात के CM भूपेन्द्र पटेल ने रविवार को मोरबी पहुँच घटनास्थल का निरीक्षण किया। अस्पताल में भर्ती घायलों और उनके परिजनों से मिले।

राज्य सरकार द्वारा मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपए और केंद्र सरकार द्वारा उन्हें 2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा हुई है। इसके अलावा घायलों के परिजनों को केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा 50-50 हजार रुपए की मदद दी जाएगी।

स्कूल के प्रोग्राम में बनना था भगत सिंह, घर में फाँसी का रिहर्सल करते समय 12 साल के छात्र की मौत: कर्नाटक का मामला

कर्नाटक (Karnataka) के चित्रदुर्ग जिले में भगत सिंह की फाँसी की रिहर्सल करते हुए एक 12 साल के बच्चे की मौत हो गई। यह घटना शनिवार (29 अक्टूबर 2022) शाम की है। 1 नवंबर 2022 को कन्नड़ राज्योत्सव के मौके पर बच्चे के स्कूल में प्रोग्राम होने वाला था। इस प्रोग्राम में मृत बच्चे को भगत सिंह बनना था।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृत बच्चे का नाम संजय गौड़ा है। वह सातवीं कक्षा में पढ़ता था। शनिवार को वह अपने घर में भगत सिंह की फाँसी की रिहर्सल कर रहा था। जैसे ही बच्चे ने रिहर्सल के दौरान फाँसी लगाई, फंदा उसके गले में फँस गया और उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि घटना के वक्त संजय गौड़ा घर पर अकेला था। उसके माता-पिता नागराज और भाग्यलक्ष्मी अपने होटल में गए हुए थे।

बडावने पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर केआर गीताम्मा ने टीओआई को बताया कि इस घटना के बारे में तब पता चला जब बच्चे की माँ रात करीब 9 बजे होटल से लौटी। उसने दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई नहीं आया। जब उसके पड़ोसियों ने खिड़की से अंदर देखा तो लड़के को पंखे से लटका पाया। लड़के की माँ ने तुरंत अपने पति नागराज को फोन किया, उन्होंने मास्टर चाबी से दरवाजा खोला। इसके बाद वे संजय को नजदीकी अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने बताया कि रिहर्सल करने के लिए लड़के ने अपने कमरे में पंखे से एक फाँसी का फंदा बनाया था। रिहर्सल के दौरान वह अपने सिर को हुडी से ढँककर पलंग से कूद गया, जिसके कुछ ही मिनटों के बाद उसकी मौत हो गई।

गौरतलब है कि जुलाई 2021 को एक ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले से भी सामने आया था, जहाँ 10 साल के शिवम ने इसी तरह भगत सिंह के फाँसी के सीन की रिहर्सल करते समय गलती से फाँसी लगा ली थी। बताया गया था कि बच्चा 15 अगस्त पर होने वाले देशभक्ति कार्यक्रम के लिए रिहर्सल की प्रैक्टिस कर रहा था, लेकिन गलती से उसका स्टूल खिसक गया, जिसके उसकी मौत हो गई थी।

खंभों पर लटकी लाशें, मुँह बाँध पहुँचीं इंदिरा-राहत और बचाव में लगे RSS कार्यकर्ता: 43 साल पहले जब मोरबी में टूटा था मच्छू बाँध

गुजरात के मोरबी में हुई घटना ने सबको हिला कर रख दिया है। कहा जा रहा है कि करीबन 141 लोग इस पुल टूटने के कारण मारे गए। वहीं 200 से ज्यादा लापता हुए। ये पहली बार नहीं है जब मोरबी में इतना बड़ा संकट आया। 43 साल पहले एक ऐसी ही घटना 11 अगस्त 1979 को घटी थी। उस दौरान मच्छू डैम बुरी तरह टूट गया था और देखते ही देखते पूरा शहर पानी में डूब गया था। हजारों लोग उस घटना में मारे गए थे। हर जगह बस मलबा ही मलबा और लाशें ही लाशें थीं।

पीएम मोदी ने भी इस घटना के बारे में बात करते हुए एक बार बताया था कि 11 अगस्त 1979 को लगातार तीन दिन बारिश होने के कारण मच्छू नदी का बाँध टूट गया था और हर जगह भीषण तबाही मची थी। उन्होंने साल 2017 में भी चुनाव के दौरान इस घटना को याद दिलाया था। उन्होंने कहा था कि जब इंदिरा गाँधी मुआएना करने आईं थी तो इलाके में नाक बंद करके आई थीं। वहीं आरएसएस के कार्यकर्ता कीचड़ में घुस-घुसकर लोगों की मदद कर रहे थे।

फोटो साभार: इंडिया टुडे

30 अक्टूबर 2022 को मोरबी में 140 साल पुराना पुल टूटने के कारण हुए हादसे के बाद लोग एक बार फिर से 43 साल पहले की उसी घटना को याद कर रहे हैं। कहते हैं कि जब इलाके से पानी निकला तो वहाँ का नजारा दर्दनाक था। खंबों पर न केवल घर के सामान लटके थे बल्कि उनके साथ इंसानों और जानवरों के शव भी वहीं लटके थे। हर जगह सिर्फ लाश ही लाश थी। कहीं इंसानों के शव सड़ रहे थे तो कहीं जानवरों के। 

जो टीमें राहत कार्य में जुटकर स्थिति सुधारने की कोशिश कर रही थीं, पता चला उन्हें भी बाद में बीमारी का शिकार होना पड़ा था। कई दिनों तक उन लोगों के शरीर में दर्द जैसी शिकायतें रहीं। वहीं वो दुर्गंध भी उनके दिमाग से उतरने का नाम नहीं ले रही थी। कहते हैं जब शवों को दाह संस्कार हुआ तो पूरा मोरबी श्मशान जैसा हो गया था।

फोटो साभार: दैनिक भास्कर

रिपोर्ट के अनुसार, हादसे में 1439 लोग मरे थे और 12,849 जानवर। वहीं विकिपीडिया का दावा है कि इस त्रासदी में 1800 से 25000 लोगों ने अपनी जान गँवाई थी और डैम टूटने से लगभग 100 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। पुरानी तस्वीरें देख साफ अंदाजा लगता है कि कैसे मात्र 15 मिनट में पानी के बहाव ने पूरी तबाही मचाई थी। लोगों के पास संभलने का भी मौका नहीं था। बहाव इतना तीव्र था कि न मकान बचे थे और न ही मजबूत इमारतें…।

फोटो साभार: दैनिक भास्कर

गुजरात के मोरबी में 140 साल पुराना पुल टूटने से 60 की मौत, प्राइवेट कंपनी ने मरम्मत के बाद खोल दिया था: राहत कार्य में लगाई गई NDRF की टीमें

गुजरात के मोरबी में रविवार (30 अक्टूबर 2022) शाम मच्छु नदी में बने केबल पुल टूटने से 400 लोगों के नदी में गिरने की खबर है। मोरबी के पूर्व भाजपा विधायक कांतिलाल अमृतिया ने कहा है कि इस भीषण हादसे में 60 लोगों की मौत हो गई है। जबकि, कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। हालाँकि, मरने वालों की संख्या को लेकर आधिकारिक आँकड़ा सामने नहीं आया है। इस हादसे की जानकारी लेने हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से बात की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हादसे के समय इस पुल में भारी संख्या में लोग मौजूद थे। इस कारण पुल पर बहुत अधिक वजन बढ़ जाने से पुल टूट गया और उसमें मौजूद लोग नदी में गिर गए। नदी में डूबे हुए लोगों को बचाने व मृतकों के शव निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन में स्थानीय लोग भी पुलिस और प्रशासन की मदद कर रहे हैं। साथ ही, आपदा से बचाव के लिए NDRF की दो टीमें में रवाना की गईं हैं।

140 साल पुराने इस पुल में बीते 7 महीनों से रिनोवेशन का काम किया जा रहा था। जिसके कारण इस पुल को बंद किया गया था। रिनोवेशन के बाद मंगलवार (25 अक्टूबर, 2022) को यानी 5 दिन पहले ही चालू किया गया था। पुल की लंबाई 200 मीटर व चौड़ाई 4-5 मीटर बताई जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस पुल के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी ‘ओरेवा ग्रुप’ नामक प्राइवेट कंपनी के पास है। इस ग्रुप ने मार्च 2022 से मार्च 2037, यानी 15 साल के लिए मोरबी नगर पालिका के साथ एक समझौता किया है। ग्रुप के पास ब्रिज की सुरक्षा, सफाई, रखरखाव, टोल वसूलने और स्टाफ मैनेजमेंट की जिम्मेदारी थी। रिनोवेशन के बाद भी इतना बड़ा हादसा होने पर ‘ओरेवा ग्रुप’ पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।

इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह व गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने दुःख जताया है। साथ ही, प्रधानमंत्री ने हादसे को लेकर गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल से बात की करते हुए बचाव अभियान के लिए टीमों को तत्काल जुटाने के लिए कहा है। पीएम मोदी ने स्थिति की बारीकी से और लगातार निगरानी करने और प्रभावित लोगों को हर संभव मदद देने के लिए भी कहा है।
 
घटना के तुरंत बाद गुजरात सरकार ने मृतकों के परिवार को 4 लाख और घायलों के परिवार को 50 हजार रुपए का मुआवजा देने का ऐलान किया है। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से हादसे में जान गँवाने वालों के परिवार को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया है।

अगली महामारी ग्लेशियरों के पिघलने से? 22000 फ़ीट की ऊँचाई पर तिब्बत के बर्फ में मिला 15000 साल पुराना वायरस, वैज्ञानिक बोले – अंदर और क्या-क्या है, नहीं पता

कुछ प्राचीन जीवों के लिए तिब्बत के ग्लेशियरों ने ‘कोल्ड स्टोरेज’ का काम किया है, जिससे वे अब तक जीवित हैं और दुनिया के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। कई विशेषज्ञ पहले ही चेता चुके हैं कि ग्लेशियरों के पिघलने से अगली महामारी आ सकती है। हाल ही में प्रकाशित एक शोध में खुलासा किया गया है कि तिब्बती पठार के गुलिया आइस कैप से कई खतरनाक वायरस और बैक्टीरिया मिले हैं। धीरे-धीरे बने इन ग्लेशियरों में प्राचीन काल में धूल के साथ-साथ वायरस भी दब गए थे।

ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजिस्ट मैथ्यू सुलिवन ने जानकारी दी है कि ये वायरस बेहद ही कठिन वातावरण में पनपे होंगे। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लेशियरों के पिघलने से ये वायरस वातावरण में सा सकते हैं, जो दुनिया के लिए बेहद ही खतरनाक साबित होगा। चीन के समुद्री तल से 22,000 फ़ीट (6.70 किलोमीटर) ऊँचाई पर ग्लेशियर से ये विषाणु मिले हैं। 33 में से 28 वायरस ऐसे हैं, जिन्हें आज तक कभी नहीं देखा गया।

इन वायरस के पास ऐसे जींस हैं, जो अत्यधिक ठण्ड में भी उन्हें किसी सेल में घुसपैठ करने की क्षमता प्रदान करते हैं। इसीलिए, ग्लेशियरों के पिघलने से सिर्फ मीथेन और कार्बन ही नहीं हवा को दूषित कर रहे हैं, बल्कि ऐसे वायरस भी इंसान को नुकसान पहुँचा सकते हैं। कोरोना वायरस संक्रमण के बाद इस तरह की आशंका और बलवती हो गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कई जवाब अभी भी अनसुलझे हैं और इन ग्लेशियरों में क्या है, सटीकता से किसी को नहीं पता।

वैज्ञानिक इन सवालों के जवाब ढूँढ रहे हैं कि जब हम मौजूदा गर्म माहौल से अचानक से बर्फ वाले युग में चले जाएँ तो हमारे साथ क्या होगा? ठीक ऐसे ही, पता लगाया जाना है कि ये वायरस क्लाइमेट चेंज पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं और उनमें क्या बदलाव आते हैं। इस संबंध में 20 जुलाई, 2021 में एक शोध सामने आया था, जिसमें कहा गया था कि इन वायरसों के अध्ययन से हमें प्राचीन काल के वातावरण के बारे में भी पता चल सकता है।

उधर अल-शबाब के खिलाफ बैठक कर रहे थे राष्ट्रपति-PM, इधर धमाका कर 100 लोगों को मार डाला: सोमालिया में इस्लामी आतंकियों ने मचाया कोहराम

पूर्वी अफ्रीकी देश सोमालिया के लिए शनिवार (29 अक्टूबर, 2022) काला दिन साबित हुआ। दरअसल, सोमालिया की राजधानी मोगादिशु में हुए दो कार बम धमाकों में 100 से अधिक लोग मारे गए हैं। जबकि, 300 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। राष्ट्रपति हसन शेख महमूद ने हमले की निंदा करते हुए इसे ‘कायरतापूर्ण’ कृत्य करार दिया है। इस्लामी आतंकी संगठन अल शबाब ने हमले की जिम्मेदारी ली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये बम धमाके सोमालिया की राजधानी मोगादिशु में स्थित शिक्षा मंत्रालय के पास स्थित एक व्यस्त चौराहे में हुए हैं। इस चौराहे में खाने-पीने के सामान से लेकर विदेशी मुद्रा सहित अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध रहती है। इसलिए, हमले के समय यहाँ भारी भीड़ थी। राजधानी मोगादिशु में ये हमले जब हुए जब राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस्लामी आतंकी संगठन अल-शबाब सहित अन्य आतंकवादी संगठनों से निपटने को लेकर किए जा रहे प्रयासों के बारे में बैठक कर रहे थे।

पहला धमाका स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब दो बजे हुआ। जबकि दूसरा धमाका एंबुलेंस के आने और पीड़ितों की मदद के लिए जुटे लोगों के बीच हुआ। बम धमाकों के बाद शिक्षा मंत्रालय को निशाना बनाकर गोलीबारी किए जाने की भी खबर सामने आयी है।

दोनों बम धमाके इतने घातक थे कि आसपास बने मकान और दुकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। यही नहीं, घटनास्थल में खड़े कई वाहनों को भी भारी नुकसान हुआ है। हमले में घायल हुए लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायलों में से कई लोगों की हालत बेहद गंभीर बनी हूई। ऐसे में, मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

इस हमले को लेकर सोमालिया के राष्ट्रपति हसन शेख महमूद ने कहा है कि राजधानी मोगादिशु में हुए दो कार बम धमाकों में कम से कम 100 लोग मारे गए हैं जबकि 300 घायल हैं। मरने वालों की संख्या में इजाफा हो सकता है। राष्ट्रपति ने इस हमले को ‘बेहद क्रूर और कायरतापूर्ण’ कृत्य करार दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है।

बता दें, इससे पहले 23 अक्टूबर को भी सोमालिया के सबसे बड़े शहरों में से एक किसमायो के तवाकल होटल पर हुए हमले में बम धमाका और गोलीबारी हुई थी। जिसमें 47 लोग घायल हुए थे जबकि 9 लोगों की मौत हो गई थी। हमला करने के लिए कार सवार एक आतंकी ने कार को होटल के गेट से टकरा दिया था जिससे उसमें विस्फोट हो गया था। बाद में, सुरक्षा बलों ने होटल में घुसे 3 आतंकियों को मार गिराया था। इस हमले की जिम्मेदारी भी इस्लामिक आतंकी संगठन अल शबाब ने ली थी।

मैं फिसल कर गिरने ही वाली थी, तभी… ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में अभिनेत्री का हाथ थामे दिखे राहुल गाँधी, विवेक अग्निहोत्री की फिल्म में कर चुकी है काम

हाल ही में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से राहुल गाँधी की एक तस्वीर सामने आई, जिसमें वो एक महिला का हाथ थामे हुए दिख रहे हैं। उक्त महिला तेलुगु और तमिल फिल्मों की अभिनेत्री पूनम कौर हैं, जो अब तक दो दर्जन से भी अधिक फिल्मों में दिख चुकी हैं। हैदराबाद में जन्मीं पूनम कौर ने बेगमपेट स्थित ‘हैदराबाद पब्लिक स्कूल’ से पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली स्थित ‘नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT)’ से स्नातक की डिग्री प्राप्त की।

उन्हें पहली बार 2006 में ‘मायाजालम’ नामक तेलुगु फिल्म में देखा गया था। इसके अगले ही साल उन्होंने ‘नेंजीरुक्कुम वराई’ के साथ तमिल सिनेमा में डेब्यू किया। 2008 में ‘बंधु बलागा’ के साथ उन्होंने कन्नड़ सिनेमा में भी कदम रखा। 2016 में आई विवेक अग्निहोत्री की ‘जुनूनियत’ उनकी पहली हिंदी फिल्म थी। वो ‘मिस तेलंगाना’ कार्यक्रम की ब्रांड एम्बेसडर भी रह चुकी हैं। इंस्टाग्राम पर उनके 3.82 लाख फॉलोवर्स हैं। वो राजनीति में भी सक्रिय हैं।

इससे पहले पूनम कौर ने चंद्रबाबू नायडू की ‘तेलुगुदेशम पार्टी (TDP)’ का दामन थामा था, लेकिन लेकिन अब वो कॉन्ग्रेस की सदस्य हैं। 2017 में जब चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री हुआ करते थे, तब उन्होंने पूनम कौर को स्टेट हैंडलूम का ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया था। पूनम कौर ने बताया है कि वो बुनकरों के साथ उनके मुद्दों पर चर्चा के लिए राहुल गाँधी से मिलने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में शामिल होने गई थीं, और राहुल गाँधी ने उनकी समस्याओं को ध्यान से सुना।

अब पूनम कौर ने बताया है कि राहुल गाँधी ने उनका हाथ क्यों पकड़ा था। अभिनेत्री की मानें तो वो फिसल कर गिरने ही वाली थीं कि राहुल गाँधी ने ने उनका हाथ पकड़ लिया। शुक्रवार (28 अक्टूबर, 2022) को राहुल गाँधी की यात्रा ने तेलंगाना में 23.3 किलोमीटर की दूरी कवर कर ली। उस दिन टीम ने महबूबनगर के धरमपुर में रात्रि विश्राम किया। 7 नवंबर को राज्य में 375 किलोमीटर की यात्रा के बाद महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ घुस जाएगी।

देश को मिला पहला प्राइवेट एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, वड़ोदरा में PM मोदी ने रखी आधारशिला: TATA को मिली है बड़ी जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वड़ोदरा में देश के पहले प्राइवेट एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की आधारशिला रखी। इसमें भारतीय वायुसेना के लिए C-295 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट्स का निर्माण किया जाएगा। यानी, अब भारत में ही मिलिट्री ट्रांसपोर्ट प्लेन्स का निर्माण होगा। ऐसे एयरक्राफ्ट्स बनाने की क्षमता दुनिया में सिर्फ एक दर्जन देशों के पास ही है। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स के निर्माण की दिशा में भी ये एक बड़ा कदम होगा।

एक पूर्व इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम वाला ये भारत का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है, जहाँ प्राइवेट सेक्टर को साथ लेकर मेक-इन-इंडिया के तहत ऐरोस्पेस प्रोग्राम चलाया जा रहा है। भारत की टाटा और यूरोप का एयरबस मिल कर इस फैक्ट्री को बना रहे हैं और बाद में इसका संचालन भी यही दोनों करेंगे। यहाँ एयरक्राफ्ट्स का निर्माण, असेम्ब्लिंग, टेस्ट, क्वालिफिकेशन, डिलीवरी और मेंटेनेंस – सब कुछ होगा। यानी, एक एयरक्राफ्ट का पूरा लाइफसाइकल के प्रबंधन की सुविधा यहाँ होगी।

करार के तहत सितंबर 2023 से लेकर अगस्त 2025 तक 16 C-295 एयरक्राफ्ट्स उड़ने की स्थिति में भारतीय वायुसेना को डिलीवर किए जाएँगे, वहीं 40 ऐसे एयरक्राफ्ट वड़ोदरा स्थित प्लांट में बनेंगे। एयरबस जो 96% कार्य स्पेन में करता है, वो अब भारत में करेगा। अर्थात, भारतीय प्लेन्स में स्वदेशी कंटेंट सबसे ज्यादा होंगे। प्राइवेट सेक्टर की कई अलग-अलग कंपनियाँ भी इस कार्य में सहयोग करेंगी और इस तरह डिफेंस इंडस्ट्री भारत में बढ़ेगी।

अमेरिका, यूके, रूस, फ़्रांस, इटली, स्पेन, यूक्रेन, ब्राजील, चीन और जापान के बाद अब भारत के पास ये तकनीक आ जाएगी। घरेलू एयरक्राफ्ट्स के निर्माण में वृद्धि आएगी। 2030 तक मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट इंडस्ट्री 45 अरब डॉलर (3.70 लाख करोड़ रुपए) तक पहुँच जाएगी। इसके अगले साल से भारत विदेशों में भी एयरक्राफ्ट्स की डिलीवरी करने लगेगा। एयरबस के साथ सितंबर 2021 में इसके लिए 21,000 करोड़ रुपए की डील हुई थी।

पीएम मोदी ने उद्घाटन के दौरान कहा, “बीते 8 वर्षों में जो Reforms हमारी सरकार ने किए हैं, उन्होंने भारत में मैन्युफैक्चरिंग का एक अभूतपूर्व वातावरण तैयार किया है। भारत में आज Economic Reforms की नई गाथा लिखी जा रही है। आज भारत में दुनिया का तेजी से विकसित होता एविएशन सेक्टर है। एयर ट्रैफिक के मामले में हम दुनिया के टॉप तीन देशों में पहुँचने वाले हैं। कोरोना और युद्ध से बनी परिस्थितियों के बावजूद, सप्लाई चेन में रुकावटों के बावजूद, भारत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का Growth Momentum बना हुआ है।”

दिल्ली की AAP सरकार ने प्रदूषण के लिए यूपी को ठहराया जिम्मेदार: पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं पर चुप्पी, दिवाली पर बैन किए थे पटाखे

दिल्ली की हवा लगातार खराब होती जा रही है। राज्य में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए केजरीवाल तमाम तरह के दावे करते रहे हैं। हालाँकि, प्रदूषण में लगाम नहीं लग सकी है। ऐसे में अब दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने रविवार (30 अक्टूबर, 2022) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य के प्रदूषण के लिए उत्तर प्रदेश की सरकारी बसों को जिम्मेदार ठहराया है। 

गोपाल राय ने कहा, “राज्य में उत्तर प्रदेश की सरकारी बसों के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया है कि दिल्ली के आनंद विहार और विवेक विहार में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) यूपी सरकार की बसों से निकलने वाले धुंए के कारण निम्न स्तर पर पहुँच गया है। इसलिए, उनकी यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील है कि वह इन बसों की जाँच कराएँ।”

उन्होंने यह भी कहा, “मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 1 नवंबर से हवा की गति 4-5 किमी प्रति घंटे होगी और यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 (गंभीर स्तर) को पार कर सकता है।”

गौरतलब है कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर गंभीर स्थिति की ओर बढ़ता दिख रहा है। रविवार (30 अक्टूबर, 2022) को भी दिल्ली की हवा ‘बेहद खराब’ स्थिति में रही और दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 350 था। दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए केंद्र सरकार के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने शनिवार (29 अक्टूबर, 2022) को आदेश जारी कर दिल्ली-एनसीआर में निर्माण और विध्वंस (अत्यावश्यक को छोड़कर) कार्यों पर बैन लगाने का निर्देश दिया था।

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार बीते कुछ वर्षों से दिल्ली के प्रदूषण के लिए पंजाब के किसानों द्वारा जलाई जाने वाली पराली को जिम्मेदार ठहराती थी। लेकिन, अब वहाँ भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार है। इसलिए, अब अरविंद केजरीवाल से लेकर AAP का कोई भी नेता दिल्ली के प्रदूषण के लिए पंजाब में जलाई जा रही पराली को दोषी नहीं ठहरा रहा है।

बता दें, दिल्ली में सिर्फ हवा ही नहीं बल्कि पानी भी बेहद प्रदूषित है। साल 2015 में सत्ता में आने के बाद से केजरीवाल लगातार यमुना नदी की सफाई को लेकर बड़े-बड़े वादे करते रहे हैं। लेकिन, प्रदूषण के स्तर में कमी नहीं दिखाई दी है। इसको लेकर भाजपा ने केजरीवाल सरकार पर निशाना भी साधा था।

दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने आरोप लगाते हुए कहा था कि केंद्र सरकार के 2500 करोड़ देने के बाद भी यमुना नदी में प्रदूषण नियंत्रण नहीं हुआ है। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “8 साल में 8 बार अरविंद केजरीवाल कह चुके हैं कि हम यमुना जी को इतना साफ कर देंगे की आप डुबकी लगा सको। लेकिन, इनकी नाकामी की वजह से आज भी यमुना जी मैली हैं और छठ घाट गंदे पड़े हैं। केंद्र सरकार के 2500 करोड़ देने के बाद भी दिल्ली सरकार ने यमुना जी की सफाई करवाने में हाथ खड़े कर दिए हैं।”

तेलंगाना सरकार की अनुमति के बिना राज्य में नहीं घुस पाएगी CBI: ममता-उद्धव की राह पर KCR, वापस ली आम सहमति

तेलंगाना सरकार ने रविवार (30 अक्टूबर 2022) को बताया कि उन्होंने केंद्रीय जाँच एजेंसी को अपनी ओर से दी आम सहमति वापस ले ली है। इस फैसले के बाद राज्य में सीबीआई बिन प्रदेश सरकार की अनुमति के जाँच नहीं कर पाएगी। यह जानकारी अतिरिक्त महाधिवक्ता ने उच्च न्यायालय को दी।

एएजी ने अदालत को बताया कि सरकार के गृह विभाग ने 30 अगस्त को एक आदेश जारी कर दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना कानून-1946 की धारा 6 के तहत दी गई पहले की सभी आम सहमति को वापस ले लिया।

तेलंगाना के गृह सचिव रवि गुप्ता ने अपने आदेश में कहा, 23 सितंबर 2016 को दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत जो सहमति दी गई थी, उसे वापस लिया जाता है। अब से सीबीआई को जाँच करने के लिए हर केस के लिए अलग से तेलंगाना सरकार से सहमति लेनी पड़ेगी।

उल्लेखनीय है कि शनिवार को तेलंगाना पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप था कि वो टीआरएस विधायकों को रिश्वत दे रहे थे। ऐसे में भाजपा ने अपील की कि इस केस को सीबीआई को दे दिया जाए। इस माँग के बाद ही राज्य सरकार ने अपना फैसला लिया है और सहमति वापस ले ली। तेलंगाना के अलावा पश्चिम बंगाल और मेघालय की कॉनरॉड संगमा की सरकार ने सीबीआई को प्रदान की गई आम सहमति वापस ली थी।

बता दें कि कुछ समय पहले महाराष्ट्र की उद्धव सरकार ने भी ऐसा निर्णय लिया था। लेकिन तख्ता पलट होने के बाद शिंदे सरकार ने वापस से कहा कि वो सीबीआई को किसी भी जाँच लिए आम सहमति देते हैं।