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‘The Wire’ के संस्थापक और संपादक के घर दिल्ली पुलिस का छापा, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की हो रही जाँच: फर्जी स्टोरी चला कर अमित मालवीय को किया था बदनाम

वामपंथी न्यूज वेबसाइट ‘‘The Wire’ भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय के खिलाफ अपनी फर्जी रिपोर्टिंग के लिए चौतरफा घिर चुकी है । इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच वेबसाइट के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन और एमके वेणु के घरों की तलाशी कर रही है। पुलिस उनके घरों में विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जाँच की जा रही है। वहीं समाचार एजेंसी एएनआई ने भी ट्वीट कर यह जानकारी दी है।

मालवीय ने मेटा रिपोर्ट (अब वापस ली गई) को लेकर एफआईआर दर्ज करवाई थी, जिसके बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है। मालवीय ने ‘The Wire’ के विरुद्ध शनिवार (29 अक्टूबर 2022) को दिल्ली पुलिस में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। ‘The Wire’ ने अमित मालवीय को निशाना बनाते हुए झूठी ख़बरें प्रकाशित की थीं, जिन्हें उसे वापस लेना पड़ा था।

इस शिकायत में ‘The Wire’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन, संपादक एमके वेणु और उप-संपादक जाह्नवी सेन का नाम लिखा था। साथ ही IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-420 (धोखाधड़ी), 468 (झूठे दस्तावेजों का इस्तेमाल कर के साजिश), 469 (झूठे दस्तावेजों के सहारे किसी की मानहानि करना), 471 (जानबूझ कर झूठे इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों का इस्तेमाल करना) और 500 (मानहानि) के अलावा 134B (आपराधिक साजिश) और (समान इरादे से सामूहिक अपराध) के तहत मामला दर्ज करने की माँग की गई थी।

अमित मालवीय ने खुद को भाजपा की ‘इन्फॉर्मेशन एवं टेक्नोलॉजी सेल’ का राष्ट्रीय संयोजक बताते ‘फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म’ नामक संगठन का नाम भी अपनी शिकायत में लिया था, जो ‘The Wire’ को चलाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने के लिए ठगी और धोखाधड़ी का सहारा लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स और फेक दस्तावेजों के सहारे उनकी मानहानि की गई है।

दरअसल वामपंथी वेबपोर्टल ने एक रिपोर्ट प्रकाशित किया, जिसमें दावा किया था कि अमित मालवीय इतने शक्तिशाली हैं कि फेसबुक या इंस्टाग्राम पर कोई पोस्ट अच्छा न लगने पर उसे तुरंत हटवा सकते हैं। हालाँक‍ि, ‘Meta’ के कम्युनिकेशंस हेड एंडी स्टोन ने इस पूरी खबर को बनावटी करार दिया था। उन्होंने कहा था कि बनावटी दस्तावेजों के आधार पर ‘The Wire’ ने इस रिपोर्ट को तैयार किया है। एक अज्ञात सूत्र के आधार पर ‘The Wire’ ने दावा किया था कि अमित मालवीय ने सोशल मीडिया से 705 पोस्ट्स हटवाएँ हैं।

जिस पर ₹82825000 घूस लेने का था आरोप, वो बना ब्राजील का राष्ट्रपति: मात्र 1.8% वोट के अंतर से हुआ फैसला, कभी सुनाई गई थी 10 साल जेल की सज़ा

ब्राजील में हुए राष्ट्रपति चुनाव में दो बार राष्ट्रपति रह चुके लूला डी सिल्वा (Lula da Silva) ने जीत हासिल की है। उन्होंने मौजूदा राष्ट्रपति बोल्सोनारो को बेहद कड़े और करीबी मुकाबले में हराया है। राष्ट्रपति चुनाव में जहाँ बोल्सोनारो को 49.1% वोट मिले। वहीं, लूला डी सिल्वा को 50.9% वोट मिले हैं। वह, 1 जनवरी 2023 को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। लूला डी सिल्वा की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत दुनिया भर के कई नेताओं ने उन्हें बधाई दी है।

लूला डी सिल्वा का राष्ट्रपति बनना न केवल ब्राजील के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के नजरिए से बहुत बड़ा उलटफेर माना जा रहा है। दरअसल, लूला डी सिल्वा पर साल 2018 में सरकारी तेल कंपनी पेट्रोब्रास के लिए भ्रष्टाचार और मनी लांड्रिंग का आरोप लगाया गया था। साथ ही, यह भी कहा गया था कि उन्होंने समुद्र तट पर अपार्टमेंट लेने के लिए 1 मिलियन डॉलर, यानी करीब 82825000 रुपए की घूस ली है।

जिसके बाद अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए करीब 10 साल की सजा सुनाई थी। साथ ही, उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद वह साल 2018 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में भी भाग नहीं ले सके थे। हालाँकि, इसके बाद साल 2021 में वहाँ की सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि पीठासीन अदालत के जज ने पक्षपात पूर्ण रवैया अपनाते हुए उन्हें दोषी ठहराया था।

लूला के राजनीतिक करियर की शुरुआत ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष बनने से हुई। इस दौरान उन्होंने 1970 के दशक में सैन्य तानाशाही के विरुद्ध की गई हड़तालों और आंदोलनों का नेतृत्व किया। इसी दौरान लूला डी सिल्वा की राजनीतिक इच्छा प्रबल हो गई थी। वह साल 1980 में बनी वर्कर्स पार्टी के संस्थापक भी सदस्य हैं। उन्होंने पहली बार 1982 में साओ पाउलो के राज्य इलेक्शन में भाग लिया था, लेकिन चुनाव हार गए थे। इसके बाद उन्होंने साल 1986 के चुनावों में सबसे अधिक वोटों के साथ कॉन्ग्रेस (ब्राजील की संसद) में सीट हासिल की थी।

इस पार्टी से ही लूला ने 1989 से लेकर 1998 तक तीन बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ा। लगातार 3 हार के बाद अंततः साल 2002 में उन्हें सफलता मिली और वह ब्राजील के 35वें राष्ट्रपति बने। इसके बाद, 2006 में हुए चुनावों में भी उन्हें जीत मिली। इस तरह से वह लगातार दो बार ब्राजील के राष्ट्रपति रहे। इस बार यह उनका छठवाँ राष्ट्रपति चुनाव था। वह ब्राजील के 39वें राष्ट्रपति होंगे।

‘अल्लाह-हु अकबर, क़यामत आने वाली है’: सऊदी अरब में हैलोवीन पार्टियों से गुस्सा हुए मुस्लिम, शैतान के वेश में मजे में घूमते दिखे शेख

कभी अपने कट्टर फैसलों और इस्लामी कानून के लिए दुनिया भर के मुस्लिमों का चहेता सऊदी अरब आज अपने ही कौम के लोगों की आँखों में खटकने लगा है । वजह भी कुछ ऐसी है जिससे मुसलमानों का चौकना स्वभाविक है । अपने रूढ़िवादी स्टैंड के लिए पहचाने जाने वाले इस देश में पश्चिमी देशों के वीभत्स त्यौहार हैलोवीन मनाया जा रहा है । दुनिया भर के मुस्लिम एक तरफ आश्चर्य और गुस्से में है, इसीलिए मुस्लिम समाज में सऊदी के इस कदम की चौतरफा आलोचना भी शुरू हो गई है।

दरअसल, मोहम्मद बिन सलमान के क्राउन प्रिंस बनने के बाद से ही सऊदी अरब अपनी मान्यताओं को लेकर काफी नरम हुआ है। ये बात और है कि कुछ साल पहले तक सऊदी अरब में ऐसे उत्सवों के बारे में सोचना भी किसी बड़े गुनाह से कम नहीं था।

वन इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब वही देश है जहाँ 2018 में एक पार्टी में पुलिस ने छापा मार कर हैलोवीन मना रहे कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन आश्चर्य है कि वहाँ सार्वजनिक रूप से हैलोवीन मनाया जा रहा है। सऊदी सरकार ने इसकी अनुमति भी दी है। राजधानी रियाद के कई इलाकों में यह फेस्टिवल मनाया गया। इस दौरान सड़कों पर दूर-दूर तक शैतान के रूप में घूम रहे लोग नजर आए । हालाँकि लोगों को सऊदी सरकार का यह फैसला पसंद नहीं आ रहा है।

एक ट्विटर यूजर तैय्यब ने हैलोवीन पार्टी का वीडियो का शेयर करते हुए लिखा, ”रियाद (नजद) सऊदी अरब में हैलोवीन। अल्लाह हू अकबर । निश्चित ही कयामत के दिन आने वाले हैं।”

एक यूजर रमजान आइजोल ने ट्वीट कर कहा, “ये तस्वीरें रियाद में ली गई हैं। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ‘सुधारवाद’ के नाम पर सऊदी अरब में हैलोवीन समारोह की अनुमति देना शुरू कर दिया है। यह सुधारवाद या नवाचार नहीं, बल्कि अपमान और पतन है। हम इसे स्वीकार नहीं करते हैं।”

एक यूजर डालिया जियादा ने कहा, “SaudiArabia और Egypt की ओर से हैलोवीन की शुभकामनाएँ। यह देखना वाकई दिलचस्प है कि इस तरह का विशुद्ध अमेरिकी हॉलिडे मध्य पूर्व के देशों से यहाँ आ गया और मनाया जा रहा है! संयुक्त राज्य अमेरिका अभी तक मध्य पूर्व से वापस नहीं आया है!”

मोरबी पुल हादसे में 9 गिरफ्तार: कानून के शिकंजे में ठेकेदार, मैनेजर, सिक्योरिटी गार्ड और टिकट विक्रेता भी, Oreva के साथ हुआ था 15 साल का करार

गुजरात के मोरबी में रविवार (30 अक्टूबर, 2022) को पुल गिरने की घटना में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने गिरफ्तारियाँ शुरू कर दी हैं। अब तक इस घटना में कुल 9 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं पुलिस द्वारा कुछ अन्य आरोपितों को हिरासत में ले कर पूछताछ किए जाने की खबर है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, हादसे में मरने वालों की संख्या 150 हो चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिरफ्तारआरोपितों में ओवेरा कम्पनी के 2 मैनेजर, इसी कम्पनी से जुड़े 2 ठेकेदार, 2 टिकट विक्रेता और 3 सिक्योरिटी गार्ड शामिल हैं। अभी तक मिल रही जानकारी के मुताबिक, अजंता ओरेवा के मुखिया जयसुख पटेल को हिरासत में नहीं लिया गया है।

दावा किया जा रहा है कि मोरबी के मच्छू स्थित यह ब्रिटिशकालीन पुल पिछले 7 माह से बंद था। इसकी मरम्मत करने का ठेका एक प्राइवेट फर्म को दिया गया था। ‘इंडिया टुडे’ का दावा है कि मोरबी म्युनिसिपल कार्पोरेशन ने पुल को अजंता ओरेवा कम्पनी को 15 साल तक चलाने और मरम्मत के लिए दिया था। कार्पोरेशन और कम्पनी के बीच यह कॉन्ट्रैक्ट 2022 से शुरू हो कर 2037 तक वैलिड था।

गौरतलब है कि अभी तक इस पुल के टूटने की वजह जरूरत से ज्यादा वजन होना बताया जा रहा है। आपदा से बचाव के लिए NDRF की दो टीमें में रवाना की गईं हैं। 43 साल से भी ज्यादा पुराने इस पुल को 19वीं शताब्दी में वहाँ के शासक वाघजी ठाकोर ने बनवाया था। तब यूरोपीय तकनीक से बने इस पुल को ‘इंजीनियरिंग का चमत्कार’ माना जाता था। ‘झूलता पुल’ के नाम से मशहूर इस पुल की लंबाई लगभग 765 फीट है। 

घड़ी, बल्ब और ई-बाइक्स बनाने वाली कंपनी, जिसने बिना अनुमति खोल दिया मोरबी पुल: जानिए कौन है मालिक, 200 एकड़ में फैली है फैक्ट्री

गुजरात के मोरबी पुल पर हुए हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। हादसे में अबतक लोगों की 143 लोगों की मौत हो चुकी है। घटना के बाद से ही सबसे बड़ा सवाल यह उभरकर सामने आ रहा है कि आखिर इस दर्दनाक हादसे का जिम्मेदार कौन है। शुरुआती जानकारी से पुल के मेंटेनेंस के लिए जिम्मेदार ओरेवा ग्रुप की भूमिका संदिग्ध नज़र आ रही है। मोरबी नगरपालिका के अधिकारी संदीप सिंह जाला ने साफ़ कहा है की कंपनी ने बिना फिटनेस सर्टिफिकेट लिए आनन-फानन में पुल खोल दिया।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, ओरेवा नाम की एक निजी कंपनी को सरकारी टेंडर मिलने के बाद पुल के नवीनीकरण का जिम्मा सौंपा गया था। मार्च 2022 में मोरबी नगर निगम और अजंता ओरेवा कंपनी के बीच अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे और यह 2037 तक वैध है। मच्छू नदी पर ‘झूलता पुल’ के नाम से मशहूर पुल को मरम्मत के लिए सात महीने पहले बंद कर दिया गया था और 26 अक्टूबर को गुजराती नव वर्ष के दिन फिर से खोला गया था, जिसके बाद यह हादसा रविवार (30 अक्टूबर 2022) को हुआ।

अजंता ओरेवा समूह का मालिक कौन है ?

स्वर्गीय ओधवजी भाई आर. पटेल ने अजंता मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड (ओरेवा ग्रुप) कंपनी को दीवार घड़ियों के निर्माता के रूप में शुरू किया था। ओरेवा अजंता समूह कंपनी के लिंक्डइन पेज पर विवरण के अनुसार, “दुनिया की सबसे बड़ी घड़ी निर्माण कंपनी’ बन गया है। ओरेवा के व्यवसाय जैसे घड़ी बनाना, किसानों के लिए पानी की कटाई, बिजली की बचत करने वाले कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लैंप और विट्रिफाइड टाइलों का कारोबार 45 देशों में फैला हुआ हैं। ओरेवा समूह का करीब 800 करोड़ रुपए का कारोबार है। फ़िलहाल जयसुख भाई ओरेवा कंपनी के सर्वेसर्वा हैं।”

ओरेवा समूह के बायो में कंस्ट्रक्शन बिजनेस का कोई उल्लेख नहीं

‘फ्री प्रेस जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, अपनी वेबसाइट पर अपने प्रोफाइल में, ओरेवा समूह का दावा है कि वह 6000 से अधिक लोगों को रोजगार देता है लेकिन उसके कंस्ट्रक्शन बिजनेस का कोई उल्लेख नहीं है। इसमें लिखा है कि ओरेवा की इंडस्ट्री में पहचान लागत लाभ के लिए है और यह देश भर में फैले 55,000 चैनल भागीदारों के माध्यम से अपने उत्पाद बेचता है।

गुजरात में 200 एकड़ भूमि में फैला हुआ है विनिर्माण संयंत्र

ओरेवा ग्रुप गुजरात के कच्छ जिले के समाखियाली में भारत के सबसे बड़े विनिर्माण संयंत्रों में से एक का संचालन करता है, जो 200 एकड़ भूमि में फैला हुआ है। वॉल क्लॉक सेगमेंट में अग्रणी कंपनी ने अब डिजिटल क्लॉक सेगमेंट में प्रवेश किया है। ओरेवा ग्रुप ने ई-बाइक टेक्‍नोलॉजी में भी इनवेस्‍ट कर रखा है।

कंपनी पर लापरवाही का आरोप

हादसे के बाद जिला प्रशासन और पालिका प्रशासन से जो आधिकारिक बयान सामने आए हैं, उसके हिसाब से ओरेवा कंपनी की लापरवाही साफ दिख रही है। कंपनी ने पालिका से फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं लिया और इसे जल्दबाजी में शुरू कर दिया। जानकारी के अनुसार, उन्होंने जिंदल ग्रुप की मदद से इस पुल को कुछ रेनोवेट किया और इसका नाम ओरेवा झूलतो पुल रखा। वहीं हादसे को लेकर अब पुलिस एक्शन में आ गई है और इस सिलसिले में 9 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है।

2024 में चुनाव लड़ूँगा, सब पर मानहानि केस करूँगा: जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर ने बताया फ्यूचर प्लान, कहा- जैकलीन को अपनी पसीने की कमाई से दिए तोहफे

200 करोड़ रुपए की ठगी के आरोपित सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrashekhar) ने जेल में बैठकर अंग्रेजी में तीन पन्नों का एक खत लिखा है। इस खत को उसने अपने वकील अनंत मलिक को भेजा। साथ ही संदेशा भेजा है कि इस खत को मीडिया और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों को भेज दिया जाए।

आज तक के मुताबिक, खत की शुरुआत वह डियर मीडिया फ्रेंड से करता है। अपने खत में सुकेश ने उन लोगों को गलत ठहराया है, जो खुद को पीड़ित और ठगा हुआ बता रहे हैं। सुकेश के मुताबिक, इतने पढ़े लिखे रसूखदार और ऊँची पहुँच वाले लोगों को कोई इतनी आसानी से कैसे अपना शिकार बना सकता है। ये कोई छोटे बच्चे नहीं हैं।

उसने आगे कहा, “मेरे खिलाफ जितने भी आरोप लगाए गए हैं, वो सिर्फ इल्जाम ही हैं और जैसा मैंने पहले भी कहा, ये सारा केस बदले की भावना से किया गया है। हर कोई मुझे जालसाज या ठग कहकर मजे ले रहा है, लेकिन ये भी सच है कि मेरे खिलाफ लगा एक भी इल्जाम साबित नहीं हो सका है। मैं उन सबके खिलाफ मानहानि का केस करूँगा, जो मुझे जालसाज या फरेबी कहकर मुझे बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।”

महाठग सुकेश ने कहा, “बड़े ही अफसोस और दुर्भाग्य की बात है कि जैकलीन फर्नांडिस को पीएमएलए (PMLA) केस में आरोपित बनाया जा रहा है। मैं और जैकलीन फर्नांडिस (Jacqueline Fernandez) रिलेशनशिप में हैं। मैंने उसे और उसके परिवार के लोगों को तोहफे दिए हैं। इसमें उसका क्या कसूर? उसने मुझसे कभी कुछ नहीं माँगा सिवाय प्यार के। उसे और उसके परिवार को मैंने एक-एक पाई अपने गाढ़े खून पसीने की कमाई से दी है। मैं इसे कानूनी तौर पर साबित कर दूँगा कि उसके और उसके परिवार के लोगों के खिलाफ जो भी इल्जाम हैं वो सब गलत हैं। जैकलीन बेकसूर है और वो अपने प्यार के साथ हमेशा खड़ा रहेगा।”

उसने आगे कहा, “मेरे इर्द-गिर्द जो कुछ भी चल रहा है, वो सब कुछ सियासी बदले की कार्रवाई है। बल्कि ये भी कहा जा सकता है कि ये शायद देश की सबसे बड़ी साजिश भी है और यही सबसे बड़ी वजह भी है। इसीलिए मुझे और मेरे परिवार के साथ-साथ मेरे प्यार और उसके परिवार, दोस्तों को इस पचड़े में घसीटकर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।”

सुकेश चंद्रशेखर ने अपने फ्यूचर प्लान के बारे में बताते हुए दावा किया कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसके सामने कितनी मुसीबतें हैं। वो 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ेगा और जीतेगा भी। उसकी जीत एकतरफा होगी।

बता दें कि सुकेश चंद्रशेखर जहाँ कह रहा है कि उसने अपनी प्रेमिका को अपनी पसीने की कमाई से तोहफे दिए। वहीं जैकलीन ईडी को यह बता चुकी हैं कि उसे हर हफ्ते सुकेश से लिमिटेड एडिशन के परफ्यूम, हर दूसरे दिन फूल, डिजाइनर बैग, डायमंड इयररिंग्स आदि मिलते थे। वहीं, ईडी ने अपनी चार्टशीट में इस बात का जिक्र किया था कि सुकेश चंद्रशेखर ने अभिनेत्री को महँगे तोहफे देना कबूल किया है।

हँसी अचानक चीख में बदली, देखा तो सब डूब रहे थे : मोरबी हादसे में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बचाई 170+ लोगों की जान, तुरंत नदी में कूदे

गुजरात के मोरबी में रविवार (30 अक्टूबर 2022) को मच्छू नदी पर बने केबल पुल के टूटने से भीषण हादसा हो गया। इस हादसे में 141 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हैं। अचानक हुए इस हादसे से जहाँ एक ओर चीख-पुकार मची हुई थी। वहीं, दूसरी ओर मौके पर मौजूद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने नदी में छलांग लगाते हुए कई लोगों की जान बचाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब यह हादसा हुआ तब वहाँ बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता मौजूद थे। इन कार्यकर्ताओं ने पुल टूटने के बाद मची चीख-पुकार के बीच 170 लोगों को नदी में डूबने से बचाया है।

दिव्य भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस हादसे के वक्त वहाँ मौजूद बजरंग दल के कार्यकर्ता चिराग परमार ने कहा है कि पुल टूटते ही चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई थी। उन्होंने कहा है “पुल टूटने से पानी में गिरने के बाद कई लोग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे। यह देखने के बाद हम लोग तुरंत ही बचाव कार्य में लग गए। इस दौरान, महिलाओं और छोटे बच्चों के डूबने का दृश्य दिल दहला देने वाला था।”

इस भीषण हादसे को लेकर बात करते हुए उन्होंने यह भी कहा है कि हर रविवार की तरह सब कुछ ठीक चल रहा था। हर कोई बेहतरीन टाइम बिताने के लिए यहाँ आया था। लेकिन, हँसी की आवाजों के बीच अचानक ही दहशत से भरी हुई चीखें सुनाई देने लगीं। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, 500 लोग नदी में गिर गए। फिलहाल 141 लोगों के शव निकाले जा चुके हैं जबकि 2 अब भी लापता हैं। पिछले 12 घंटे से नौसेना, वायुसेना और भारतीय सेना के जवान बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।

इस हादसे के बाद से मोरबी जिले में मातम छाया हुआ है। दिवाली के लिए लगाई गई सभी लाइटें बुझा दी गई हैं। बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए स्वयंसेवक घटनास्थल पर पहुँच गए हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, गृह मंत्री हर्ष संघवी समेत कई नेताओं ने अपने कार्यक्रम रद्द करते हुए घटना स्थल का जायजा लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (1 नवंबर 2022) को मोरबा जाएँगे।

घटना के तुरंत बाद गुजरात सरकार ने मृतकों के परिवार को 4 लाख और घायलों के परिवार को 50 हजार रुपए का मुआवजा देने का ऐलान किया है। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से हादसे में जान गँवाने वालों के परिवार को 2 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया है।

दरअसल, मच्छू नदी पर बना केबल पुल 140 साल पुराना है। इस पुल के टूटने से पहले के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। पुल के टूटने को लेकर विशेषज्ञों ने इस बात की आशंका जताई है कि इसमें इस्तेमाल किए गए केबल पुराने हो चुके थे। साथ ही, पुल में क्षमता से अधिक वजन हो गया था। इसलिए, केबल अधिक वजन नहीं सह सके और टूट गए। जिससे यह हादसा हो गया। हादसे पर संज्ञान लेते हुए पुलिस ने पुल के मेंटनेंस करने वाली कंपनी के मैनेजर समेत लोगों को हिरासत में लिया है। इन सभी से पूछताछ की जा रही है।

ईरान के हिजाब विरोध में शामिल हुए मशहूर शेफ की निर्मम हत्या: फोर्स ने पीट-पीटकर मारा, परिवार को कहा- सबको हार्ट अटैक बताना

ईरान के हिजाब विवाद के बीच वहाँ एक सेलेब्रिटी शेफ महरशाद शाहिदी की हत्या का मामला प्रकाश में आया है। खबरों के मुताबिक उन्हें कुछ दिन पहले हिजाब के विरुद्ध किए जा रहे प्रदर्शन में शामिल होने पर गिरफ्तार किया गया था। इसते बाद खबर आई कि वहाँ कि रेवोल्यूशनरी गार्ड फोर्स ने उन्हें पीट-पीट कर मार डाला। कथिततौर पर शाहिदी की हत्या उनकी 20वें जन्मदिन से एक दिन पहले हुई।

घटना से नाराज सैंकड़ों लोग सड़कों पर आए और शाहिदी की अंतिम यात्रा में शामिल हुए। रिपोर्ट्स के अनुसार, शाहिदी ईरान में बहुत मशहूर शेफ थे। उन्हें ईरान का जेमी ओलिवर कहा जाता था। लेकिन कुछ दिन पहले उन्हें एक प्रदर्शन में शामिल होने पर पकड़ा गया और फिर उनके ऊपर ताबड़तोड़ लाठियाँ चलाई गईं।

रिपोर्ट्स की मानें तो शाहिदी की मौत सिर दिमाग पर चोट आने से हुई। परिवार का कहना है कि उन पर ये कहने के लिए दबाव बनाया गया कि उनका लड़का हार्ट अटैक से मरा है। ईरानी टीवी पर दिए इंटरव्यू में महरशाद के परिजन ने कहा, “हमारे बेटे ने सिर पर चोट आने के कारण अपनी जिंदगी खो दी। लेकिन हम पर दबाव बनाया गया कि वो हार्ट अटैक से मरा है।”

ईरानी प्रशासन का शेफ की मौत में अपना हाथ होने से साफ मना किया है। उनका कहना है कि उसके हाथ, पाँव, दिमाग में कोई फ्रैक्चर नहीं था। जबकि सामान्य जन इस घटना के लिए ईरानी प्रशासन को ही कोस रहे हैं। सैंकड़ों शाहिदी के लिए सड़कों पर हैं। हिजाब उतारकर आजादी के नारे लग रहे हैं।

शेफ की मौत पर ईरानी अमेरिकी लेखक डॉ नीना अंसारी ने कहा, “वह एक प्रतिभाशाली शेफ थे। उन्हें ईरान की सेना ने निर्ममता से मारा। अगले दिन उसका जन्मदिन था। हम ये न कभी भूलेंगे और न ही कभी माफ करेंगे।”

हिन्दुओं की शोभायात्रा पर मुस्लिम भीड़ का हमला, पत्थरबाजों में महिलाएँ भी: नेपाल पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई के आरोप, 20 लोगों का फट गया सिर

नेपाल के महोत्तरी जिले में हिन्दुओं की शोभायात्रा पर हमले की खबर है। इस हमले का आरोप मुस्लिम भीड़ पर लगा है। घटना के बाद जिले में तनाव चल रहा है। आरोप है कि झंडा लगाने के विवाद में हिन्दुओं पर पथराव किया गया है। हालात को संभालने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज के साथ आँसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े हैं। हिंसा में स्थानीय लोगों के साथ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस के मुताबिक अब हालात नियंत्रण में हैं। घटना गुरुवार (27 अक्टूबर 2022) की है।

नेपाली मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक जिला प्रशासन ने हालात को काबू में रखने के लिए कर्फ्यू लगा दिया है। हालात को बिगड़ता देख कर पुलिस ने मोर्चा संभाला। आरोप है कि पत्थरबाजों ने पुलिस पर हमला किया। स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाता देख कर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आँसू गैस के गोले छोड़े। पुलिस के सख्त एक्शन के बाद भीड़ तितर-बितर हुई।

सुदर्शन न्यूज़ पर हिन्दू सम्राट सेना के अध्यक्ष राजेश यादव ने घटना को विस्तार से बताया। इस दौरान राजेश यादव घायल दिख रहे थे और उनके सिर पर पट्टी बँधी थी। राजेश ने बताया कि पररिया मुस्लिम बहुल है, जिसमें शोभा यात्रा पहुँचते ही पथराव शुरू हो गया। उन्होंने बताया कि पत्थर मारने वालों में पुरुषों के साथ महिलाएँ भी शामिल थीं। राजेश के अनुसार, पथराव के चलते हिन्दू समाज के लगभग 20 लोगों का सिर फटा है।

राजेश ने बताया कि ये हमला पहला नहीं है और इस से पहले भी हिन्दू शोभा यात्राओं पर हमले हुए हैं। हिन्दू सम्राट सेना के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि उनके द्वारा लड़ी जा रही लड़ाई में उनका साथ उनके ही समाज के लोग नहीं देते हैं। इसी के साथ उन्होंने नेपाली मीडिया की भी आलोचना करते हुए उसे नेपाली नेताओं की पिछलग्गू बताया।

घटना के बाद महोत्तरी जिले के कई हिस्सों में धार्मिक जुलूस पर रोक लगा दी गई है। बताया जा रहा है कि भंगहा नगर पालिका क्षेत्र में नेपाल के हिन्दू संगठन हिन्दू सम्राट सेना ने देवी माता का विसर्जन जुलूस निकाला था। इस दौरान मुस्लिम बहुल इलाका कहे जाने वाले क्षेत्र में एक स्थान पर झंडा लगाने को ले कर उनकी मुस्लिम पक्ष से जुबानी बहस होने लगी। आरोप है कि इसी बीच मुस्लिम समुदाय के लोग घरों और छतों से पत्थरबाजी करने लगे।

‘हिन्दू सम्राट सेना’ के पदाधिकारी धीरज मंडल ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश यादव की हत्या की तैयारी मुस्लिमों द्वारा की गई है। धीरज ने हमें एक ग्रुप में कुछ मुस्लिमों की बातचीत का दावा करते हुए वीडियो भी भेजी। इस वीडियो में बाकायदा इस्लामी परिधान पहने कुछ लोग राजेश यादव का नाम ले रहे हैं। धीरज मंडल ने हमें घटना के दिन की वीडियो भी भेजी। इस वीडियो में कई औरतों को छतों से पत्थरबाजी करते देखा जा सकता है।

दीरज के मुताबिक, उनके जिले में मुस्लिमों की तादाद लगभग 15% हो गई है। धीरज ने नेपाल के शासन और प्रशासन पर भी आरोप लगाते हुए बताया कि हर मामले में पहली सुनवाई केवल मुस्लिमों की होती है। ‘हिन्दू सम्राट सेना’ के बारे में मंडल ने बताया कि उनकी कोई सुनवाई नहीं है और न ही कोई समर्थन। धीरज मंडल ने ऑपइंडिया को एक और वीडियो भेजा है। इस वीडियो में सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम युवकों को हाथों में लाठियाँ ले कर दौड़ते देखा जा सकता है।

थोड़ी देर बाद वो सभी युवक एक जगह रुक कर नारेबाजी करने लगे थे। उनमे से कुछ के हाथों में हरे रंग के झंडे भी दिखाई दे रहे हैं। धीरज के मुताबिक, वीडियो घटना के दिन का ही है। उन्होंने कहा, “उस दिन मुस्लिमों हिन्दुओं को घेर लिया गया था और हमारे मुखिया राजेश की हत्या की तैयारी थी। अगर कुछ स्थानीय लोगों ने हमारा साथ न दिया होता तो हमारे लीडर की हत्या तय थी।”

नेपाल की ‘हिन्दू सम्राट सेना’ की महिला पदाधिकारी मंजू मंडल ने भी ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि हमारे ही लोगों पर हमला हुआ और हमारे ही लोगों पर केस भी दर्ज हो गया है। उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रशासन ने राजेश यादव के ही नाम का अरेस्ट वारंट जारी कर रखा है। मंजू मंडल ने नेपाल के प्रशासन की कार्रवाई को पूरी तरह से एकतरफा बताया है।

बॉयकॉट से डरे ‘आदिपुरुष’ के निर्माता, अब सक्रांति पर रिलीज नहीं होगी फिल्म! किरदारों के चित्रण को लेकर हुआ था जबरदस्त विरोध, अब आएगी नई रिलीज डेट

500 करोड़ के बजट में बनी फिल्म ‘आदिपुरुष’ (Adipurush) में भगवान राम, हनुमान और रावण के गलत चित्रण को लेकर उसके बहिष्कार की माँग हो रही है। इसी बीच खबर है कि डायरेक्टर ओम राउत की फिल्म की रिलीज डेट टल सकती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘आदिपुरुष’ पहले 12 जनवरी 2023 को मकर संक्रांति के मौके पर रिलीज होने वाली थी। लेकिन अब चर्चा है कि मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट आगे बढ़ा दी है। कहा जा रहा है कि प्रभास (Prabhas), सैफ अली खान (Saif Ali Khan) और कृति सेनन (Kriti Sanon) स्टारर ‘आदिपुरुष’ के काफी विरोध के बाद मेकर्स इसके वीएफएक्स और कंप्यूटर जेनरेटेड ग्राफिक्स में बदलाव कर रहे हैं।

हालाँकि, फिल्‍म के पोस्‍टपोन होने की एक अन्य बड़ी वजह दक्षिण की दो बड़ी फिल्मों चिरंजीवी की ‘वाल्टेयर वीरैया’ (Waltair Veerayya) और एनबीके (नंदकुमारी बालाकृष्‍ण) की ‘वीरा सिम्हा रेड्डी’ (Veera Simha Reddy) का संक्राति के मौके पर रिलीज होना है।

कुछ अन्य रिपोर्टों की मानें तो ‘आदिपुरुष’ 2023 की गर्मियों में सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। हालाँकि, अभी तक फिल्म की नई रिलीज डेट को लेकर मेकर्स की तरफ से कोई आध‍िकारिक घोषणा नहीं हुई है।

मालूम हो कि संक्रांति लंबे समय से फिल्म निर्माताओं की पसंदीदा रिलीज डेट रही है। हाल ही में, यह घोषणा की गई थी कि इसी दिन तमिल फिल्‍मों के सुपरस्‍टर विजय थलपति की ‘वरिसु’ भी सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इसके अलावा संक्रांति 2023 पर ‘वीरा सिम्हा रेड्डी’ के साथ चिरंजीवी और रवि तेजा की फिल्में भी रिलीज होने की कतार में हैं।

बता दें कि ‘आदिपुरुष’ फिल्म का टीजर 2 अक्टूबर, 2022 को रिलीज हुआ था। टीजर रिलीज होने के बाद से ही इस फिल्म का विरोध हो रहा है। लोगों को ‘आदिपुरुष’ के टीजर में VFX इफेक्ट्स और दशानन बने सैफ अली खान का लुक बिल्कुल भी पसंद नहीं आया। सोशल मीडिया पर भी रावण के किरदार को लेकर यूजर्स ने आपत्ति जताई थी। यूजर्स का कहना था कि रावण को शिव भक्त के रूप में देखा गया है, जबकि सैफ रावण के लुक में मुगलों के खूँखार शासकों से इंस्पायर्ड नजर आ रहे हैं।

सैफ के लुक्स को लेकर यूजर्स उन्हें औरंगजेब , तैमूर, अल्लाउद्दीन खिलजी, बाबर, मोहम्मद गजनी और कई मुस्लिम आक्रमणकारियों के नामों के टैग भी दिए थे। लोगों का कहना है कि सैफ रावण से ज्यादा खिलजी की तरह दिख रहे हैं। एक ने कहा, “सैफ को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे रामायण के रावण ने धर्म-परिवर्तन कर इस्लाम को अपना लिया हो।”

इसके अलावा अयोध्या के राम मंदिर के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने 5 अक्टूबर 2022 को कहा था कि भगवान राम, हनुमान और रावण का चित्रण महाकाव्य के अनुसार नहीं है। ये फिल्म उनकी गरिमा के खिलाफ है। फिल्म बनाना कोई अपराध नहीं है, लेकिन उन्हें सुर्खियों में लाने के लिए जानबूझकर विवाद पैदा करने के लिए नहीं बनाया जाना चाहिए।