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‘EX-BF’ एलन मस्क के ट्विटर खरीदते ही एंबर हर्ड ने डिलीट किया अकॉउंट, नेटीजन्स ने मजे लेते हुए कहा- ‘ब्लू टिक के पैसे नहीं होंगे’

सोशल मीडिया साइट ट्विटर (Twitter) के स्वामित्व में बदलाव होेने के बाद साथ कई तरह के परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। ट्विटर का स्वामित्व टेस्ला (Tesla) के मालिक एलन मस्क (Elon Musk) के हाथों में जाते ही उनकी पूर्व प्रेमिका एवं हॉलीवुड की अभिनेत्री एम्बर हर्ड (Amber Heard) ने अपने अकाउंट को डिलीट कर दिया है।

‘That Umbrella Guy’ नाम के एक ट्विटर यूजर ने एम्बर के ट्विटर अकाउंट की एक तस्वीर साझा की है, जिसमें लिखा है ‘यह अकाउंट मौजूद नहीं है’। स्क्रीनशॉट में कैप्शन दिया गया है, ‘एम्बर हर्ड ने अपना ट्विटर डिलीट कर दिया है’।

कई लोगों ने उनके ट्विटर हैंडल को डिलीट करने के बारे में अपने कयास लगाए। यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने ट्विटर क्यों छोड़ा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने लिखा, “बहुत खुशी है कि वह अपना ख्याल रख रही है।” दूसरे व्यक्ति ने टिप्पणी की, “पूर्व प्रेमी एलोन ने उसे हटाने के लिए कहा।” तीसरे व्यक्ति ने लिखा, “वह अब अपना चेकमार्क रखने के लिए मासिक शुल्क नहीं ले सकती।”

बता दें कि एम्बर हर्ड हाल ही में अपने पूर्व पति जॉनी डेप (Johnny Depp) के खिलाफ मानहानि का मुकदमा हार गईं। इसके बाद उन्हें जॉनी को लगभग 10.35 मिलियन डॉलर (लगभग 84.82 करोड़ रुपए) का भुगतान करना था। जॉनी और एम्बर साल 2010 में ‘द रम डायरीज़’ की शूटिंग के दौरान मिले थे।

लगभग पाँच साल तक रिलेशन में रहने के बदा साल 2015 में इस जोड़े ने शादी कर ली। हालाँकि, यह शादी लंबी नहीं चली और दोनों अगले ही साल 2016 में अलग हो गए। इसके बाद उनके तलाक को साल 2017 में अंतिम रूप दिया गया था। जॉ

इसके पहले जॉनी यूके में एक मानहानि का मुकदमा हार चुके हैं। दरअसल, एक प्रकाशक ने उन्हें ‘वाइफ-बीटर’ बताया था, जिससे भड़ककर जॉनी ने प्रकाशक के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। हालाँकि, अदालत ने आरोपों को काफी हद तक सही पाया था।

जॉनी से अलग होने के बाद एम्बर ने साल 2016 से एलन मस्क को डेट करना शुरू कर दिया। हालाँकि, यह रिश्ता भी ज्यादा लंबा नहीं चला और एक साल की डेटिंग के बाद दोनों साल 2017 में अलग हो गए। साल 2018 में दोनों एक बार फिर दोनों एक-दूसरे के नजदीक आए, लेकिन अज्ञात कारणों से दोनों कुछ महीनों के बाद फिर अलग हो गए।

बता दें कि ट्विटर की कमान एलन मस्क के हाथ में जाते ही नहीं एक तरफ कंपनी के कर्मचारियों की छँटनी हो रही है तो दूसरी तरफ हॉलीवुड के सेलिब्रेटीज इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अलविदा कह रहे हैं। हाल ही में सारा बरेली, केन ओलिन, टोनी ब्रेक्सटन जैसी कई हॉलीवुड हस्तियों ने ट्विटर छोड़ दिया है। अब एलन की पूर्व प्रेमिका के ट्विटर छोड़ने की खबर है।

‘हरे रामा… हरे कृष्णा’ का जाप और बिकनी में नाचती लड़कियाँ: तेलुगू संगीतकार DSP के खिलाफ FIR, अभिनेत्री कल्याणी बोलीं- हिंदुओं के अपमान पर माफी माँगें

DSP के नाम से प्रसिद्ध तेलुगू फिल्मों के संगीतकार देवी श्री प्रसाद (Musician Devi Sri Prasad or DSP) के खिलाफ तेलंगाना की हैदराबाद पुलिस (Hyderabad Police) हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है उन्होंने अपनी गीत ‘ओ परि’ (O Pari) में हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाया है।

इस गाने को लेकर तेलुगू फिल्मों की जानी-मानी अभिनेत्री कराटे कल्याणी (Karate Kalyani) ने हैदराबाद के साइबर क्राइम स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई है। अपनी शिकायत में कल्याणी ने आरोप लगाया है कि प्रसाद के गाने के बोल ‘बेहद आपत्तिजनक’ और ‘धार्मिक भावनाओं को आहत’ करने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि गाने के वीडियो में कम कपड़े पहनी महिलाओं को धार्मिक मंत्र वाले संगीत पर नाचते हुए दिखाया गया है। गाने के बोल में ‘बोलो राम.. राम हरे… बोलो कृष्णा… कृष्णा हरे…’ शामिल है। इस गाने को YouTube पर 20 मिलियन (2 करोड़) से अधिक बार देखा जा चुका है। गाने के बोल रकीब आलम ने लिखे हैं।

कल्याणी ने कहा, “अगर कोई भगवदगीता या किसी अन्य पवित्र भजन के पूर्ण श्लोकों को नहीं कह सकता है तो हम उसे ‘हरे राम हरे कृष्ण‘ का जाप करने के लिए कहते हैं। यहाँ तक ​​कि ये श्लोक भी इतने ही शक्तिशाली हैं। ऐसी हिंदू धर्म की समृद्ध संस्कृति, हिंदू धर्मग्रंथ हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “वह व्यक्ति जो ‘ऊ अंतवा ऊ ऊ अंतवा’ जैसे आइटम गीत का संगीतकार है, अब एक ऐसी रिलीज़ के साथ आया है जिसमें बिकनी पहनी महिलाओं को इन छंदों का जाप कर हिंदू लोगों की भावनाओं को आहत करते हुए दिखाया गया है। ऐसे लोग एक बार भी सोचते हैं कि इस तरह के उत्तेजक चित्रण करने वाले गीत को प्रदर्शित करने से हम सभी को कितना दुख होगा?”

कल्याणी बोलीं, “यदि आप हिंदू धर्म के बचे हुए को बचाने में सक्षम नहीं हैं तो कम-से-कम इसे अपमानित न करें। यही हम अनुरोध कर रहे हैं। हम इसके लिए आपसे माफी की माँग कर रहे हैं। हम माँग करते हैं कि गीत को हटा दिया जाए। यदि आवश्यक हो तो हम उसे सुनने के लिए उनके स्टूडियो में भी जाएँगे।”

शिकायत मिलने के बाद हैदराबाद साइबर क्राइम ब्रांच के ACP प्रसाद ने कहा, “2 नवंबर को हमें ललित कुमार और अभिनेत्री कराटे कल्याणी से संगीत निर्देशक देवी श्री प्रसाद के गाने के बारे में शिकायत मिली थी। हम इस मामले की जाँच करेंगे, क्योंकि यह एक कानूनी मुद्दा है।” पुलिस ने शिकायत के आधार पर IPC की धारा 153 (ए) और 295 (ए) के तहत मामला दर्ज किया है।

उधर, आंध्र प्रदेश भाजपा के महासचिव एस विष्णुवर्धन रेड्डी ने कहा, “मैं माँग करता हूँ कि संगीत निर्देशक DSP हिंदुओं का अपमान करने और गाने में भगवान राम और कृष्ण का अपमान करने के लिए हिंदू समुदाय से माफी माँगें। हिंदू देवी-देवी और देवताओं का बार-बार अपमान करना फिल्म उद्योग में कुछ लोगों की आदत बन गई है।”

दिल्ली में MCD चुनाव की तारीखों का ऐलान: 250 सीटों में से आधी महिलाओं के लिए आरक्षित, प्रत्याशी खर्च कर सकेंगे 8-8 लाख रुपए

चुनाव आयोग ने शुक्रवार (4 नवंबर 2022) को दिल्ली नगर निगम चुनाव (MCD Election) की तारीखों का ऐलान किया है। एक ओर जहाँ दिल्ली में हुए परिसीमन के बाद वार्ड की संख्या कम हो गई है। वहीं दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने आधी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी हैं। इन चुनावों के लिए 7 नवंबर से 14 नवंबर तक नामांकन दाखिल किए जाएँगे। नामांकन दाखिल वापस करने की आखिरी तारीख 19 नवंबर है। वोटिंग 4 दिसंबर को होगी और नतीजे 7 दिसंबर को सामने आएँगे।

दिल्ली MCD चुनाव में 22 वार्ड कम हो गए हैं। यहाँ अब तक कुल 272 वार्ड थे लेकिन परिसीमन के बाद वार्ड की संख्या घट कर 250 रह गई है। परिसीमन के कारण कई वार्डों के क्षेत्र में भी बदलाव हुआ है। कई वार्डों का क्षेत्र बढ़ गया है जबकि कुछ के क्षेत्रों में कमी आई है। इसी प्रकार वोटर्स की संख्या में भी बदलाव हुआ है।

उल्लेखनीय है कि पहले दिल्ली नगर निगम को तीन भागों में विभाजित किया गया था। उत्तरी दिल्ली, दक्षिण दिल्ली और पूर्वी दिल्ली। बीते 15 सालों से तीनों ही जोन या नगर निगम में भाजपा का ही कब्जा रहा है। इसी साल मई में केंद्र सरकार ने तीनों नगर निगम क्षेत्रों (MCD) को मिलाकर एक कर दिया था। इसका मतलब यह है कि अब दिल्ली में तीन की जगह केवल एक ही महापौर (मेयर) होगा। यानी अब तीन की जगह एक ही मेयर पूरी दिल्ली को चलाएगा।

गौरतलब है, दिल्ली विधानसभा में 70 सीटें हैं लेकिन नगर निगम चुनाव सिर्फ 68 सीटों में ही होगा। दिल्ली केंट और दिल्ली विधानसभा को नगर निगम क्षेत्र से बाहर रखा गया है। नगर निगम की निर्धारित 250 सीटों में से आधी महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं। वहीं, 42 सीटें अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व रखी गई हैं। चुनाव आयोग ने प्रत्येक प्रत्याशी द्वारा किए जाने वाले खर्च के दायरे में भी बढ़ोतरी की है। इससे पहले हुए चुनाव में प्रत्याशी 5.75 लाख रुपए तक खर्च कर सकते थे। हालाँकि, अब इसे बढ़ाकर 8 लाख रुपए किया गया है।

महाकाल लोक के बाद ओंकारेश्वर से लेकर चित्रकूट तक को सँवारने की तैयारी: 2 साल में 5 धर्मस्थलों पर ₹3000 करोड़ खर्च करेगी शिवराज सरकार

मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार प्रदेश में मंदिरों का कायाकल्प करने के लिए तैयार है। अभी हाल ही में भाजपा ने उज्जैन में बाबा महाकाल के दरबार में महाकाल लोक का निर्माण कराकर एक कीर्तिमान स्थापित किया है। वहीं मंदिर को भव्य बनाने के लिए दूसरे चरण का काम भी शुरू होने वाला है।

इसके साथ ही राज्य सरकार की अब प्रदेश के अन्य मंदिरो का कायकल्प करने की योजना है। शिवराज सरकार जल्द ही प्रदेश के पाँच और मंदिरों को सँवारने जा रही है।

शिवराज सरकार अगले 2 सालों में राज्य के पाँच प्रमुख मंदिरों को सँवारेगी। इसके लिए सरकार 3000 करोड़ रूपए खर्च होंगे। महाकाल लोक के बाद प्रदेश सरकार खंडवा जिले के ओंकारेश्वर मंदिर, सीहोर का सलकनपुर मंदिर, दतिया जिलें का पीताम्बरा मंदिर, चित्रकूट के शनिश्चरा मंदिर और सतना जिले के मैहर मंदिर का कायाकल्प करेगी।

मध्य प्रदेश सरकार राज्य के जिन मंदिरों का विस्तारीकरण करवाने जा रही है उसमें दूसरे ज्योर्तिलिंग ओंकारेश्वर मंदिर का काम सबसे पहले आ सकता है। यहाँ 108 फीट की शंकराचार्य की प्रतिमा भी बनेगी।

इसके अलावा महाकाल लोक की तरह अलग-अलग चरणों में 2141.85 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट के तहत यह काम होगा। बताया जा रहा है कि यहाँ आदि शंकराचार्य की जो प्रतिमा तैयार होगी, वह 500 साल तक सुरक्षित रहेगी। प्रदेश सरकार ने इन मंदिरों के विस्तारीकरण के लिए पर्यटन मंत्रालय को जिम्मा सौंपा है।

मंदिरों के विस्तारीकरण पर दैनिक भास्कर की रिपोर्ट

महाकाल : दूसरे चरण के कई इलाकों का विकास होगा

उज्जैन में महाकाल परिसर को विकसित करने पर 850 करोड़ खर्च होंगे। पहले चरण का काम हो गया है। दूसरा चरण 2023 में पूरा होगा। इसमें महाराज परिसर का विकास, रुद्रसागर जीर्णोद्धार, पार्किंग व पर्यटन सूचना केंद्र, महाकाल द्वार एवं प्राचीन मार्ग का विकास किया जाएगा।

सलकनपुर : 45 करोड़ का काम शुरू किया

अगस्त से पहले सलकनपुर का स्वरूप भी बदल जाएगा। दो हिस्सों में काम पूरा होगा। राज्य सरकार ने 45 करोड़ में काम शुरू कर दिया है। केंद्र के पास 55 करोड़ का प्रस्ताव भेजा है। यह दूसरे चरण में होगा।

ओंकारेश्वर- 108 फीट की शंकराचार्य प्रतिमा बनेगी

अलग-अलग चरण में 2141.85 करोड़ रुपए पूरे प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे। धातुओं के मिश्रण से तैयार हो रही आदि शंकराचार्य की 108 फीट की प्रतिमा 198.25 करोड़ में बनेगी। इसे बनाने में सुपर स्टेनलेस स्टील का उपयोग हो रहा है। 500 साल तक इसे नुकसान नहीं होगा।

वहीं मैहर 30 करोड़ रुपए के काम किए जाएँगे। माई के स्थान (पहाड़ी पर) के आसपास सुविधाओं के साथ पहुँचने का मार्ग और श्रद्धालुओं के लिए 30 करोड़ रुपए के काम होंगे।

दतिया: भक्तों को ज्यादा सुविधाएँ मिलेंगी

सिद्धपीठ पीतांबरा माई में अन्य सुविधाओं और कामों के लिए 25 करोड़ का प्रोजेक्ट है। केंद्र की प्रसाद योजना के तहत इसे सैद्धांतिक सहमति मिल गई है। डीपीआर का काम शुरू हो गया है। आने-जाने के साथ श्रद्धालुओं के रुकने के साधन बनेंगे। शारदीय नवरात्र में बड़ी संख्या में लोग पहुँचते हैं। लिहाजा वहाँ पहुँचने का मार्ग भी ठीक होगा।

शनिश्चरा: सबसे बड़ा शनि धाम बनेगा

30 करोड़ रुपए में मंदिर का काम होगा। यह मप्र का सबसे बड़ा शनि धाम होगा। चूँकि यह प्राचीन मंदिर है, लिहाजा इसके मुख्य द्वार को भव्य बनाया जाएगा। ग्वालियर से 18 किमी दूर होने के कारण मंदिर के आसपास पहुँच मार्ग को बेहतर बनाया जाएगा।

चित्रकूट: स्वदेश और राम दर्शन की थीम

राम वनपथ गमन के साथ पूरे चित्रकूट का विकास 100 करोड़ में होगा। यह स्वदेश और राम दर्शन की थीम पर बनेगा। श्रेष्ठ स्थान बनाने के लिए डीपीआर पर काम शुरू हो चुका है। उत्तर प्रदेश के हिस्से का काफी काम हो गया है। सतना से इसका रास्ता है। चित्रकूट पहुँचने से पहले रास्ते में सुविधाएँ विकसित होंगी।

एलन मस्क ने Twitter इंडिया के लगभग सभी कर्मचारियों को निकाला: दुनिया भर में कहीं पूरी टीम, तो कहीं आधे स्टाफ की छुट्टी

टेस्ला (Tesla) और स्पेसएक्स (SpaceX) के मालिक एलन मस्क (Elon Musk) ने ट्विटर (Twitter) के अधिग्रहण के बाद इसमें बड़े पैमाने पर छँटनी की है। इसका सीधा प्रभाव भारतीय कर्मचारियों पर पड़ा है। मस्क ने ट्विटर के भारत के लगभग सभी कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया है।

इस सोशल मीडिया के अधिग्रहण के दौरान अप्रैल में कर्मचारियों ने जो आशंका व्यक्त की थी, उसे एलन मस्क सही साबित कर रहे हैं। भारतीय मूल के सीईओ पराग अग्रवाल को हटाने और पूरे बोर्ड के भंग करने के बाद कंपनी में कर्मचारियों की उन्होंने बड़े पैमाने पर छंटनी शुरू कर दी है।

CNBC-TV18 ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ट्विटर के भारत में 200 से अधिक कर्मचारी हैं। इनमें से अधिकांश के निकाल दिया गया है। जिस टीम में सबसे अधिक छँटनी की गई है, उनमें इंजीनियरिंग टीम शामिल है। इनमें सबसे अधिक भारत से हैं।

भारत स्थित ट्विटर के कम्युनिकेशन टीम को हटा दिया गया है। ऐसी ही कुछ स्तिथि भारत में स्थित ट्विटर की मार्केटिंग टीम की है। हालाँकि, भारत के कितने कर्मचारियों को हटाया गया है, इसकी सही जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

शुक्रवार (4 अक्टूबर 2022) को जब ट्विटर के कर्मचारी सोकर उठे तो उनका दिन पहले की भाँति नहीं था। उन्हें कंपनी की ओर से एक भयावह मेल मिला। मेल का सारांश यही था कि अगर ट्विटर कर्मचारी ऑफिस आने की सोच रहे हैं तो पहले चेक कर लें कि आपकी नौकरी बची है या नहीं।

कंपनी के सूत्र के अनुसार, मस्क ने ट्विटर मोमेंट्स फीचर के लिए कंटेंट को क्यूरेट करने वाली क्यूरेशन टीम के लोगों को निकाल दिया है। इसके अलावा, इस छँटनी से प्रभावित टीमों में संचार, वैश्विक सामग्री भागीदारी, बिक्री एवं विज्ञापन राजस्व, इंजीनियरिंग और उत्पाद शामिल हैं। इनमें से किसी टीम के सभी और किसी-किसी टीम के 50% कर्मचारियों को हटा दिया गया है।

स्टेटिस्टा की जुलाई की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्विटर ने दिसंबर 2021 तक लगभग 7,500 लोगों को रोजगार दिया था, जो पिछले वर्ष में 5,500 लोगों से दिए गए रोजगार से अधिक है।ब्लूमबर्ग और रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्विटर के नए मालिक और सीईओ मस्क ने ट्विटर में कर्मचारियों की संख्या को आधा करने की योजना बनाई है।

पंजाब में सर्वे करने गए थे पटवारी, किसानों ने गुस्से में बंधक बनाया: कहा- ‘हमारे पास पराली जलाने के सिवा कोई विकल्प नहीं, सरकार ठीक से काम नहीं करती’

पंजाब के फरीदकोट जिले में पराली जलाए जाने की सूचना मिलने पर जाँच करने गए पटवारी को गाँव के किसानों ने बंधक बनाया है। एसडीएम से लेकर डीएसपी के पहुँचने के बाद भी पटवारी किसानों के कब्जे में हैं। किसानों ने पराली जलाने पर चालान न हो, इसका लिखित आश्वासन देने की माँग की है। साथ ही कहा है कि माँग पूरी होने के बाद ही पटवारी को छोड़ेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फरीदकोट के जीवन वाला गाँव में गुरुवार (3 नवंबर 2022) की सुबह 9 बजे नोडल अधिकारी की सूचना के बाद पटवारी सुखदीप सिंह सोढ़ी पराली जलाए जाने की घटनाओं का सर्वे करने के लिए पहुँचे थे। इसके बाद, उन्होंने सर्वे रिपोर्ट तैयार करनी शुरू की थी। जहाँ, किसानों ने उन्हें घेर लिया और फिर किसानों की संख्या बढ़ने लगी। यही नहीं, कुछ समय बाद किसान यूनियन के कुछ नेता भी वहाँ पहुँच गए जिसके बाद किसानों ने पटवारी को बंधक बना लिया।

पटवारी को बंधक बनाए जाने की सूचना मिलने पर ब्लाक खेतीबाड़ी अधिकारी डॉ. गुरप्रीत सिंह जीवन वाला गाँव पहुँचे और किसानों से बातचीत की। लेकिन किसानों का गुस्सा देखकर उन्होंने एसडीएम जय अमनदीप गोयल को सूचना दी जिसके बाद वह और डीएसपी कोटकपूरा भी वहाँ पहुँच गए।

तमाम अधिकारियों से बात होने के बाद भी किसानों ने पटवारी को छोड़ने से इनकार कर दिया। किसान नेताओं का कहना है कि वह अपनी माँगे पूरी होने तक पटवारी को नहीं छोड़ेंगे। मीडिया से बात करते हुए एक किसान ने कहा है, “एसडीएम ने वादा किया था कि मशीनें उपलब्ध कराई जाएँगी। लेकिन, कुछ भी नहीं किया गया। हम पराली जलाते हैं क्योंकि कोई दूसरा विकल्प नहीं है।”

वहीं, किसान नेताओं का कहना है कि सरकार द्वारा उचित प्रबंध न होने के कारण किसान पराली जलाने के लिए मजबूर हैं। सरकार अपना काम सही ढंग से करने की जगह किसानों की जमीनों को लाल लकीर में दर्ज करने की धमकी दे रही है। किसानों की माँग है कि गुरुवार को पटवारी द्वारा सर्वे कर दर्ज किए नामों व उससे पहले एक अन्य अधिकारी द्वारा किए गए सर्वे को रद्द किया जाए। साथ ही पराली जलाने पर चालान नहीं होगा इस बात का लिखित आश्वासन मिलने के बाद पटवारी को छोड़ दिया जाएगा।

इस मामले में फरीदकोट के तहसीलदार अनिल कुमार का कहना है “हमारे नोडल अधिकारी ने पराली जलाने की रिपोर्ट दी थी। इसका पता लगाने के लिए पटवारी यहाँ आए थे। इस बात की भनक ग्रामीणों को लग गई और उन्होंने उसे बंधक बना लिया। हम किसानों से उनकी रिहाई के लिए बात कर रहे हैं।”

सर्वे में गुजरात में खिला ‘रिकॉर्ड कमल’: मिशन 150 के करीब दिख रही BJP, कॉन्ग्रेस को तगड़ा नुकसान- AAP का खुल सकता है खाता

गुजरात विधानसभा चुनाव (Gujarat Assembly Election 2022) के लिए तारीखों का एलान हो चुका है। राज्य में एक और पाँच दिसंबर को मतदान होगा। ऐसे में सामने आए ओपिनियन पोल में सामने आए नतीजों में भाजपा (BJP) की सत्ता में वापसी तय मानी जा रही है। वहीं, कॉन्ग्रेस (Congress) को पछाड़कर आम आदमी पार्टी (AAP) मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में आ सकती है।

एबीपी न्यूज और सी-वोटर के सर्वे में गुजरात के 56 प्रतिशत लोगों ने सत्ताधारी भाजपा के पक्ष में मतदान किया। वहीं, 20 प्रतिशत लोगों का मानना है कि चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत होगी। सिर्फ 17 प्रतिशत लोगों का कहना है कि कॉन्ग्रेस की जीत होगी। सर्वे में 2 प्रतिशत लोगों का कहना है कि इन पार्टियों को छोड़कर अन्य की जीत हो सकती है। 

सर्वे के अनुसार, सर्वे में शामिल लोगों में से 1 प्रतिशत लोगों ने मानना है कि राज्य में त्रिशंकु सरकार बनेगी। इन सबसे अलग, 4 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि राज्य में किसकी सरकार बनेगी। अक्टूबर महीने में किए गए इस सर्वे में 22,807 लोगों ने हिस्सा लिया है।

ऑपइंडिया (हिंदी) के डिप्टी एडिटर अजीत झा पहले ही अपने चुनावी विश्लेषण में बता चुके हैं, गुजरात में अब जनता भाजपा को सबसे अधिक पसंद करती है और इस विधानसभा चुनाव में भी उसकी वापसी हो सकती है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस जमीनी स्तर पर नदारद दिख रही है, जबकि आम आदमी पार्टी को अभी भी जमीन की तलाश है।

गौरतलब है कि गुजरात में बीजेपी ने इस बार ‘मिशन 150’ का लक्ष्य तय कर रखा है। वैसे यही लक्ष्य पार्टी ने 2017 के विधानसभा चुनावों में भी तय कर रखा था, लेकिन इस लक्ष्य को इस बार हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के दिग्गज नेता जनता को साधने की कोशिश कर रहे हैं।

ऑपइंडिया (गुजराती) के संपादक सिद्धार्थ छाया का मानना है कि पिछले 5 सालों में काफी चीजें बदल गई हैं। इसलिए इस बार सीटों के लिहाज से बीजेपी विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड बना सकती हैं। इसके पीछे उन्होंने भाजपा और कॉन्ग्रेस के बीच मुकाबले में आम आदमी पार्टी की एंट्री बताया।

सिद्धार्थ छाया कहते हैं, “साल 2017 के चुनावों में पाटिदार आंदोलन के बाद कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने के लिए बीजेपी ने 150 सीटों का यह लक्ष्य रखा था। अब तक गुजरात में कॉन्ग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला होता रहा है। इस बार उस तरह की स्थिति नहीं है। AAP की मौजूदगी से बीजेपी विरोधी वोटों के बँटने की भी संभावना है और इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा।”

सिद्धार्थ के अनुसार इस चुनाव में AAP की भूमिका ‘वोटकटवा’ की है। वे कहते हैं, “सवाल यह नहीं है कि गुजरात का चुनाव कौन जीतेगा। बीजेपी की जीत तय है। कॉन्ग्रेस का दूसरे नंबर पर रहना भी तय है। सवाल यह है कि कॉन्ग्रेस को AAP कितना नुकसान पहुँचाएगी। यदि नुकसान ज्यादा हुआ तो बीजेपी 150 तक के अपने निर्धारित लक्ष्य तक भी पहुँच सकती है।”

मोरबी नगरपालिका के चीफ ऑफिसर सस्पेंड, हादसे के बाद बताया था- बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के खोल दिया गया था पुल

गुजरात के मोरबी में हुए केबल पुल हादसे में 130 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी । हादसे के बाद नगरपालिका और पुल को मरम्मत करने वाले ओरेवा ग्रुप के बीच तालमेल की साफ़ कमी देखी गई थी।

कंपनी की लापरवाही तो शुरुआत में ही सामने आ गई थी, और इस सिलसिले में 9 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था। हालाँकि अब मोरबी नगरपालिका के मुख्य अधिकारी संदीप सिंह झाला पर गाज गिरी है। उन्हें निलंबित कर दिया गया है ।

मोरबी के जिला अधिकारी जी. टी. पंड्या ने कहा, ”राज्य शहरी विकास विभाग ने मोरबी नगर पालिका के मुख्य अधिकारी संदीप सिंह झाला को निलंबित कर दिया है।” उन्होंने बताया कि मोरबी के रेजिडेंट अपर कलेक्टर को अगले आदेश तक मुख्य अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

इस हादसे के बाद पीएम नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के सीएम भूपेंद्र सिंह पटेल समेत मोरबी के आला अधिकारियों के साथ एक हाई लेवल मीटिंग की थी। पीएम ने इस मीटिंग में हादसे में मारे गए लोगों के प्रति दुख जताते हुए अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने को कहा था।

वहीं खबर यह भी आ रही है कि गुजरात के मोरबी पुल हादसे में गिरफ्तार किए गए 9 लोगों का कोई भी स्थानीय वकील केस नहीं लड़ेगा। ‘मोरबी बार एसोसिएशन’ और ‘राजकोट बार एसोसिएशन’ ने इन लोगों का मामला हाथ में नहीं लेने और अदालत में उनका प्रतिनिधित्व नहीं करने का फैसला लिया है।

‘मोरबी बार एसोसिएशन’ के सीनियर एडवोकेट एसी प्रजापति ने बताया कि ओरेवा कंपनी के 9 आरोपित मोरबी ब्रिज हादसे में गिरफ्तार किए गए हैं। दोनों बार एसोसिएशनों ने यह प्रस्ताव पारित किया है कि कोई भी वकील इनका मामला हाथ में नहीं लेगा।

उल्लेखनीय है कि ब्रिज पिछले कई महीनों से बंद चल रहा था, जिसे रेनोवेशन कर 26 अक्टूबर 2022 को खोला गया था। छह महीने तक चले रेनोवेशन कार्य पर करीब 2 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। बताया जा रहा है कि ब्रिज पर क्षमता से अधिक लोगों के जुटने के कारण यह हादसा हुआ। मोरबी नगरपालिका के मुख्य अधिकारी(अब निलंबित) संदीप सिंह झाला ने पुल के रखरखाव और संचालन के लिए जिम्मेदार ओरेवा कंपनी (अजंता मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड) पर बिना सूचित किए पुल को लोगों के लिए खोलने का आरोप लगाया था ।

यूपी के आजमगढ़ में BSP के जुलूस में लगे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, नगर पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी पप्पू खान सहित दो हिरासत में

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ (Azamgarh, UP) जिले में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के जुलूस में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने की घटना सामने आयी है। इसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद पुलिस ने संज्ञान लेते हुए मुकदमा दर्ज किया है। इस मामले में पुलिस ने बसपा प्रत्याशी समेत दो लोगों को हिरासत में लिया है। घटना गुरुवार (3 नवंबर 2022) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आजमगढ़ जिले के जहानागंज थाना अंतर्गत एक कस्बे में आगामी निकाय चुनावों को लेकर बहुजन समाज पार्टी के नेताओं द्वारा बैठक आयोजित की गई थी। इसमें बीएसपी के कई नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए थे। इस बैठक में नगर पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी पप्पू खान भी पहुँचे थे। बैठक के बाद उन्होंने अपने समर्थकों सहित जुलूस निकाला था।

इस जुलूस से जुड़े वीडियो में बसपा प्रत्याशी पप्पू खान जुलूस की अगुवाई करते नजर आ रहे हैं, जबकि हाथों में बीएसपी का झंडा लेकर चल रहे उनके समर्थक ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारेबाजी करते हुए दिखाई दे रहे हैं। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, मुबारकपुर के बीएसपी के पूर्व विधायक गुड्डू जमाली भी इस जुलूस में शामिल थे।

इस मामले में आजमगढ़ के एसपी अनुराग आर्य ने कहा है कि सोशल मीडिया के माध्यम से एक वीडियो संज्ञान में आया है। इसमें आपत्तिजनक नारे लगाए जाने की शिकायत कुछ लोगों द्वारा की गई है।

उन्होंने कहा कि वीडियो की जाँच कर पप्पू खान और नारा लगाने वाले व्यक्ति खुर्शीद अहमद पुत्र शिब्ली पहलवान को हिरासत में लिया गया है। साथ इन दोनों के मोबाइल जब्त करते हुए मूल वीडियो रिकवर करने के बाद फॉरेंसिक जाँच कराई जाएगी।

एसपी ने यह भी कहा है कि इस मामले में जो भी आरोपित पाए जाएँगे उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस जुलूस की परमिशन थी या नहीं व इसमें शामिल हुए लोगों की जानकारी जुटाकर एफआईआर में धाराएँ बढ़ाई जाएँगी।

फ्री नील मुकुट हलाल, पैसा लगे तो कुफ्र… नीला (ब्लूटिक) मिला तो मिला, मगर मुफ्त न मिला तो क्या मिला

ट्विटर जगत में हाय तौबा मची हुई है। जो ट्विटर लिबरल-वामपंथियों की नई लंका लगभग बन ही चुका था, अचानक एक पूंजीपति ने खरीद लिया। अधिग्रहण की खबर आते ही दक्षिणपंथियों को लगने लगा था कि पवनसुत ही हैं जो मस्क का रूप धर कर वामपंथियों की लंका जलाने निकल पड़े हैं।

“मस्क” समान रूप कपि धरी।

लंकहि चलेउ सुमिरि नरहरी॥

पूंजीवादी के हाथ में आते ही उसने कमाई के साधन ढूँढने शुरू कर दिए। मुफ्त न रहने से दुखी तो सभी नील मुकुटधारी हुए, लेकिन चंदे की उगाही से धंधे की कमाई के बारे में सोचते ही ट्विटर के वामपंथी कर्मचारियों के हाथ पाँव फूल गए। रिसेशन में जाते अमेरिका में ट्विटर के वामपंथी और झुके कर्मचारी चाहकर भी नौकरी छोड़कर नहीं जा सकते। हाँ उन्हें निकाला जरूर जा सकता है। कुछ निकाले भी गए , कुछ पर नकेल भी कसी गई। कुल मिला कर पूंजीपति मस्क के हाथ में आते ही ट्विटर पर वामपंथियों की टाँय-टाँय ऐसे शुरू हो गई जैसे उनके टें बोलने के दिन आ गए हों। सबसे अधिक दुःख तो पत्रकारों को हुआ।

कल तक जो नील मुकुट “लिबरल प्रिवलेज” हुआ करता था, अचानक अब आठ डॉलर का हो गया। भारत ही नहीं दुनिया भर के नील मुकुटधारी जो इसको अपना विशेषाधिकार समझते हुए इतराते थे अचानक बिलबिला उठे। आठ डॉलर केवल नील मुकुट के?

‘केवल नील मुकुट’, अगर अर्थहीन है तो चाहिए ही क्यों? अगर चाहिए ही है तो मूल्य देकर क्यों नहीं ले सकते? लिबरल प्रिवलेज था भाई, चुन-चुन कर दिया जाता था, अब कोई भी ऐरा-गैरा आठ डॉलर में ले लेगा। फिर विशेष वाली बात रह कहाँ जाएगी? लेने को तो वामपंथी जहर का भी चंदा इकठ्ठा कर के ही लेते हैं, सो ये आठ डॉलर भी कहीं न कहीं से चंदा इकठ्ठा करके जुटा ही लेंगे। उनके लिए तो कल भी पैसे पप्पू देगा वाली बात थी, आगे भी रहेगी। कल तक पाँच रूपए माँगते थे, अब छह माँग लेंगे। क्राउड फंडिंग से लेकर लिंगपरिवर्तन से लेकर विदेश यात्राओं तक के लिए पैसा जमा करने वालों के लिए यह कौन सी नई बात होगी? उन्हें कौन सा अपनी जेब से देना है, लेकिन समस्या आठ डॉलर नहीं है, समस्या है जो इस नील मुकुट के साथ जुड़ी हुई प्रतिष्ठा थी अब उतनी नहीं रह जाएगी।

ऊपर से नील मुकुट देखकर यह तो पता चल ही जाएगा कि किसके पास पैसा है। फिर किस मुँह से वो गरीबी वाली कहानियाँ बनाएँगे? किस मुँह से टमाटर आलू के भाव पर रोना रोएँगे? उससे बड़ी बात तो ये कितने ऐसे महानुभाव होंगे जो मुफ्त न होने की वजह से अपना नील मुकुट त्याग पाएँगे? त्याग देंगे तो अपने उठने बैठने वालों को क्या मुँह दिखाएँगे? क्या कहेंगे अपने चेले चपाटों से जिन्हें अपना नील मुकुट दिखा कर रौब दिखाते थे?

जैसे मध्यम वर्ग में कोई वस्तु बजट से बाहर और आवश्यकता न होने पर भी लेना पड़ती है, क्योंकि पडोसी उसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना देते हैं, वैसे ही क्या अब नील मुकुट हो जाएगा? क्या इसी होड़ में ये आज के नील मुकुटधारी पैसे देकर भी अपना नील मुकुट बचाएँगे?

बचाएँ न बचाएँ, हज़ारों सरकारी और निजी संस्थाओं से तो ट्विटर की कमाई तो भरपूर हो ही जानी है।

एक भूतपूर्व पत्रकार टाइप आवेदक नील मुकुट न मिलने से परेशान थे, लेकिन अब अचानक पैसे की बात आने से सोच में डूब गए हैं – लें, कि न लें? कहते फिर रहे हैं षड्यंत्र के तहत हमारा अकाउंट वेरीफाई नहीं किया जा रहा।

उधर ट्विटर के आधुनिक मंडल जी बिफर पड़े हैं। कह रहे हैं इसमें EWS को कोई छूट तो देनी थी? वैसे मस्क किस्मतवाले हैं कि वो भारत में न हुए। हुए होते तो उन्हें न जाने कितनों को नील मुकुट बस इसलिए देना पड़ता कि उनकी कम्पनी चल पाए। नहीं तो लोग ‘छीन के लेंगे’ पर उतर आते। सरकार इसमें भी आरक्षण लागू कर देती। हो सकता है कोई नील मुकुट सेस लगाकर गरीबों, पिछड़ों, दलितों अल्पसंख्यकों के साथ मंत्रियों, संतरियों के नील मुकुट का खर्चा निकाल लेती।

केजरीवाल मुफ्त बिजली के साथ मुफ्त नील मुकुट का वादा चुनाव में कर देते। या हैंडसम सिसोदिया जी एक बोतल ब्लू लेबल के साथ ब्लू-टिक मुफ्त की योजना निकाल देते। बंगाल में नील मुकुट के नाम पर कोई चिटफंड शुरू हो जाता। तृणमूल सरकार बांग्लादेशियों को चुन चुन कर आधार कार्ड, राशन कार्ड के साथ नील मुकुट भी देने लगती। पंजाब वाले सरकार से नील मुकुट पर न्यू.स.मू माँगने धरने पर बैठ जाते। दक्षिण भारत में चुनाव में कोई द्रमुक पार्टी घर घर जाकर नील मुकुट घर घर लगा आती। पास्टर लोग प्रार्थना सभा में नील मुकुट ऐसे दिलवाते जैसे व्हीलचेयर से लंगड़ों को उठाकर चला देते हैं।

उत्तर प्रदेश वाले कहते सिर्फ अयोध्या, काशी मथुरा को नील मुकुट दे दो बाकि सब भाड़ में जाओ। बिहार में कोई नील मुकुट दिलवाने के लिए कोचिंग सेंटर शुरू हो जाता। मध्य प्रदेश में मामाजी नील मुकुट को समग्र कार्ड से जोड़ देते। पटवारी परीक्षा में नील मुकुट अनिवार्य कर दिया जाता।

कोई न कोई गुजराती मस्क से कोई डील कर के डीलरशिप ले लेता और नील मुकुट दिलवाने का बिजनेस डाल देता।

ब्लू-टिक न मिलने पर आत्मदाह की धमकी देने वालों की ख़बरें अखबारों में आतीं। ऐसी भी ख़बरें आती कि फलाँ मास्टर के लड़के ने पंचर की दूकान पर काम करके पैसे जोड़े और ब्लू-टिक लिया।

उधर पाकिस्तानी अपनी आदत के अनुसार ब्लू-टिक जिहाद शुरू कर देते। मौलवी बताने लगते कि जेहाद में मरने के बाद हूरों के साथ ब्लू-टिक भी मिलता है। नील मुकुट मुफ्त होने पर हलाल और पैसे लगने पर कुफ्र घोषित कर दिया जाता। JNU में एडमिशन के साथ नील मुकुट दिया जाने लगता। कोई दावा करता की ब्लू-टिक में जो ब्लू है वो बाबा साहब के कोट का ब्लू है, इसलिए ब्लू-टिक पर पहला अधिकार मूलनिवासियों का है।

हो सकता है कुछ नव बौद्ध यह दावा कर डालते कि नील मुकुट को बौद्ध धर्म से चुराया गया है। चालीस हज़ार साल पहले की किसी बौद्ध मूर्ति में पहले से लगा हुआ नील मुकुट वाली तस्वीरें वायरल हो रही होती। दो चार दन्त कथाएँ भी किसी ग्रन्थ में निकल आतीं। जैसे कहीं बुद्ध प्रवचन दे रहे थे तभी अचानक एक कुत्ता आ गया, कुत्ता प्रवचन सुनने लगा। प्रवचन सुनते सुनते ही उसे ब्लू-टिक प्राप्त हो गया और वह वेरिफाइड कुत्ता घोषित हो गया।

प्राचीन काल में अंगुलिमाल उन सबकी उँगलियाँ काट लेता था जिनके पास ब्लू-टिक होता था। क्योंकि वे उस समय भी फिल्दी-रिच लोग होते थे। बाद में वही अंगुलिमाल ने थ्रेड लिखना शुरू कर दिया और लेखक बन गया।

कोई यह दावा भी कर ही देता कि ब्लू-टिक दरअसल मुगलों की देन है। तैमूर भारत को लूटने नहीं ब्लू-टिक देने ही भारत आया था। ब्लू-टिक बाबर ऊँट पर लादकर अफगानिस्तान से लेकर आया था और अकबर दरबार लगाकर लोगों को ब्लू-टिक बाँटता था। औरंगजेब के पास खुद के ब्लू-टिक थे।

कुछ आधुनिक इतिहासकार इसका श्रेय नेहरू, गाँधी या राजीव जी को दे देते। राजीव जी कम्प्यूटर लाए थे इसलिए आज ब्लू-टिक मिल रहा है,लेकिन उनके योगदान को वर्तमान सरकार आदर नहीं देती। हालाँकि उनका लड़का खुद को कोड़े मारता घूम रहा है। जो सबसे ज्यादा कोड़े खाएगा राहुल जी अपने हाथ से उसे ब्लू-टिक देंगे। खुद को कोड़े मारने से तो ब्लू-टिक मिलता है ऐसा सुनते ही कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं में खुद को कोड़े मारने की होड़ लग जाती।

ईद पर बचकर मुहर्रम पर नाचने की बात करने वाले ताज़ा-ताज़ा अध्यक्ष बने खड़गे जी यह सोचकर प्रसन्न होते कि मुहर्रम के जुलूस में ऐसे ही खुद हो कोड़े मारते हुए सभी कॉन्ग्रेसी निकलेंगे। ब्लू आइस वाले थरूर की बाँहें खिल जातीं। दिग्विजय सिंह सोचते कैसे जुलूस में दस्तखत करके हाजिरी लगाई जाए और बिना कोड़े खाए ब्लू-टिक लिया जाए।

वैसे तो पुलिस और प्रशासन के लोग ट्विटर के दफ्तर पर दबिश देकर हर महीने पूरे स्टाफ के लिए ब्लू-टिक ले ही आते। बाकी सरकारी संस्थाओं को डर के मारे खुद ही दे दिया जाता। न देने पर अगर सुप्रीम कोर्ट संज्ञान लेकर केस दर्ज न करता तो कोई न कोई वीर पीआईएल डाल ही देता कि जहाँ अस्सी करोड़ लोगों के पास खाने के पैसे नहीं हैं उनके पास ब्लू-टिक के लिए पैसे कहाँ से आएँगे? जिसपर कोर्ट आदेश देता कि जब तक मामला कोर्ट में है तब तक किसी से आठ डॉलर न वसूले जाएँ। मामला कोर्ट में एक बार जाता तो सालों तक न सुलझता और ब्लू-टिक से कमाई की योजना धरी रह जाती।

फिलहाल तो स्थिति यह है कि जहाँ दुनिया भर के लोग तरह तरह की बात कर रहे हैं, वहीं मस्क हर बात पर विनोदपूर्ण उत्तर देते हुए कुशल व्यापारी की तरह कह रहे हैं मुफ्त कुछ नहीं – लाओ मेरा आठ डॉलर।