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कोयम्बटूर में मंदिर उड़ाना चाहता था आत्मघाती हमलावर, ईस्टर सीरियल ब्लास्ट के आतंकियों से मुलाकात भी फिरोज इस्माइल ने कबूली: रिपोर्ट्स

तमिलनाडु के कोयम्बटूर कार ब्लास्ट (Coimbatore Car Blast) की जाँच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार आत्मघाती हमलावर मंदिर उड़ाने की फिराक में था। इस मामले में गिरफ्तार किए गए छह लोगों में से एक फिरोज इस्माइल ने पूछताछ में श्रीलंका में ईस्टर पर हुए सीरियल ब्लास्ट में संलिप्त आतंकियों से मुलाकात की बात भी मानी है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने इस मामले में पहली एफआईआर भी दर्ज कर ली है।

कोयम्बटूर के कोट्टई ईश्वरम मंदिर के 23 अक्टूबर 2022 की सुबह करीब 4 बजे ब्लास्ट हुआ था। इस ब्लास्ट में 25 साल का जमिशा मुबीन मारा गया था। NIA ने मुबीन के आत्मघाती हमलावर होने की आशंका जताई है। उसके घर से बड़ी मात्रा में विस्फोटक भी बरामद हुआ था। माना जा रहा है कि विस्फोटकों के इस्तेमाल में नौसिखिया रहने के कारण वह अपने मिशन को अंजाम देने में सफल नहीं हो पाया।

इस मामले की जाँच कर रहे अधिकारियों ने बताया कि हमले से एक दिन पहले यानी 22 अक्टूबर 2022 को मुबिन और उसके दो साथियों मोहम्मद अजहरुद्दीन और अफसर खान को सीसीटीवी फुटेज में कार में दो एलपीजी सिलेंडर के साथ पोटेशियम नाइट्रेट से भरे तीन स्टील के ड्रम, एल्युमिनियम पाउडर, सल्फर, चारकोल और कीलें इत्यादि रखते हुए देखा गया था। एक अन्य फुटेज में मुबिन और उसके साथी हमले से पहले रेकी करते हुए भी दिख रहे है। तीनों ने बिग बाजार गली स्थित कोनियम्मन मंदिर और पुलियाकुलम मुंधी विनयागर मंदिर की भी रेकी की थी।

इस मामले में गिरफ्तार आरोपितों ने पूछताछ में बताया है कि मुबिन ने सोचा था कि उसके सुसाइड बॉम्बिंग मिशन से इलाके में 50 से 100 मीटर के दायरे में तबाही मच जाएगी और मंदिर समेत कुछ घर भी इसकी जद में आएँगे। फिरोज इस्माइल ने पूछताछ के दौरान यह बात भी कबूल की है कि वह आईएस आतंकी मोहम्मद अजहरुद्दीन और राशिद अली से मिला था। दोनों श्रीलंका में ईस्टर पर हुए सीरियल ब्लास्ट में शामिल थे और केरल की जेल में बंद हैं।

बता दें कि ब्लास्ट के अगले दिन ही पुलिस ने पाँच लोगों को को गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान मोहम्मद थलका (25), मोहम्मद असरुद्दीन (25), मोहम्मद रियाज (27), फिरोज इस्माइल (27) और मोहम्मद नवाज इस्माइल (27) के रूप में हुई थी। वहीं मुबीन के रिश्तेदार अफसर खान को 27 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था।

NIA ने अपनी एफआईआर में कहा, ”मृतक जमिज़ा मुबीन के परिसरों की तलाशी में 109 वस्तुएँ जब्त की गईं, जिनमें पोटेशियम नाइट्रेट, काला पाउडर, नाइट्रोग्लिसरीन, पीईटीएन पाउडर, एल्युमिनियम पाउडर, सल्फर पाउडर, स्टेराइल सर्जिकल, जिहाद के बारे में विवरण के साथ नोटबुक आदि शामिल हैं।”

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार कोयम्बटूर में 1998 में हुए सीरियल ब्लास्ट से भी इसके लिंक मिल रहे हैं। कार ब्लास्ट के बाद पकड़े गए लोगों में मोहम्मद थलका भी शामिल है। वह नवाब खान का बेटा है, जो 1998 सीरियल ब्लास्ट में जेल में बंद है। सीरियल ब्लास्ट के लिए जिम्मेदार आतंकी संगठन अल-उमाह का मुखिया उसका चाचा सैयद अहमद बाशा ही है।

साहेबंगज में माँ काली के विसर्जन जुलूस पर मुस्लिम बहुल इलाके में पथराव: घरों और छतों से किए गए हमले में कई लोग घायल, पुलिस बल इलाके में तैनात

झारखंड इस्लामी कट्टरपंथियों का चारागाह बन चुका है। आए दिन यहाँ से लव जिहाद से लेकर देश विरोधी और समाज गतिविधियों की खबर आती रहती है। शुक्रवार (28 अक्टूबर 2022) को प्रदेश के साहेबगंज में कट्टरपंथियों की भीड़ ने माँ काली की शोभायात्रा पर पथराव कर दिया, जिसमें कई लोगों को गंभीर चोट आई है।

हालात को देखते हुए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और वाटर कैनन का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा। हालाँकि, मामला अभी शांत है, लेकिन तनाव बना हुआ है। इसको देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है।

लोगों का कहना है कि शुक्रवार (28 अक्टूबर 2022) की रात को बम काली की प्रतिमा का विसर्जन गंगा नदी के बिजली घाट करने के लिए लेकर जा रहे थे। जैसे ही महिलाओं और पुरुषों की शोभायात्रा मुस्लिम बहुल इलाके एलसी रोड के बादशाह चौक पर पहुँचा, आसपास के घरों की छतों से जुलूस पर पथराव कर दिया गया।

इतना ही नहीं, इस दौरान महिलाओं को अपशब्द कहे जाने की बात कही जा रही है। इस पथराव में कई लोगों को गंभीर रूप से चोट लगी है। इनमें महिलाएँ भी शामिल हैं। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना की जानकारी मिलते ही कई थानों की पुलिस मौके पर पहुँची और वाटर कैनन का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर किया है और स्थिति को संभाला। इसके बाद पुलिस की उपस्थिति में जुलूस वहाँ से आगे बढ़ा और विसर्जन के लिए गया। लॉकडाउन से पहले विसर्जन जुलूस में भी इसी स्थान पर पथराव किया गया था।

एसडीओ राहुल आनंद ने बताया कि दो गुटों में किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। विवाद बढ़ा तो मारपीट होने लगी। युवकों का दूसरा गुट एलसी रोड इलाके का ही था। उसके पक्ष में कुछ अन्य लोग भी आ गए थे। लोगों को समझाकर शांत किया गया है।

वहीं, कोतवाली थाने के पुलिस अधिकारी रुपल कुमार ने ऑपइंडिया को बताया कि मामला दो समुदायों के बीच का है। पथराव के बाद बिगड़े हालात को नियंत्रित कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी गिरफ्तारी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि घटना में शामिल लोगों के पहचान की कोशिश की जा रही है।

न अंग्रेजी आती है, न टैटू है-न गर्लफ्रेंड… हार के बाद वायरल हुआ पाकिस्तानी का दर्द: Video देख नेटिजन्स ले रहे Pak क्रिकेट टीम के मजे

टी-20 वर्ल्ड कप में भारत और जिम्बाब्वे से हारने के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ियों को अपने ही लोगों की आलोचना झेलनी पड़ रही है। इसी बीच एक वीडियो सामने आई है जिसमें पाकिस्तानी युवक ये बता रहा है कि आखिर उनके क्रिकेटर मैच में क्यों हार जाते हैं।

युवक कहता है, “हमारे जो लड़के हैं न, बाकी टीमें खेलती हैं आईपीएल, बीबीएल और सब बोलते हैं आपस में अंग्रेजी। उनकी आपस में बातचीत होती है। मैक्सवेल और हार्दिक पांड्या आपस में दोस्त हैं क्योंकि उन्हें अंग्रेजी बोलनी आती है, उनके हाथ में टैटू है, वो लड़कियों से बात करते हैं, आपस में पार्टी करते हैं।”

युवक आगे कहता है, “साड्डे लौंडे, न उन्हें किसी से गल (बात) करनी आती है, न उन्हें अंग्रेजी आती है, न उनके कोई टैटू है, न उन्हें पार्टी करनी आती है, तो जब दुनिया के सारे खिलाड़ी इकट्ठा होते हैं, चिलिंग कर रहे होते हैं, तब हमारे लड़के इनसिक्योर हो जाते हैं, उन्हें अंग्रेजी बोलनी नहीं आती। इंडिया का बच्चा-बच्चा अंग्रेजी बोल रहा है। अब हमारा बंदा जाता है पिच पर। देखता है कि उसके तो टैटू भी है, ग्राउंड में चार गर्लफ्रेंड भी है, उसने तो बाली भी लगाई हुई है, अंग्रेजी भी बोल रहा है। हमारे चूजे- हेलो ब्वॉय डिड वेरी वेल, सर वेरी गुड, आई एम ओके।”

उल्लेखनीय है कि ये वीडियो कब की है, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। लेकिन मेजर सुरेंद्र पुनिया द्वारा इसे शेयर किए जाने के बाद लोग इस पर जमकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। पाकिस्तानी युवक की यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर की जा रही है। लोग युवक की बातें सुनकर कह रहे हैं कि इसका मतलब पाकिस्तान की हार के पीछे खिलाड़ियों का गवार होना है। कोई कह रहा है कि अंग्रेजी कितनी जरूरी है ये बात सुन लो।

दिलचस्प बात ये है कि इस पाकिस्तानी का रिएक्शन सुनने के बाद जहाँ एक तरह कुछ यूजर ये कह रहे हैं कि क्रिकेटर होने के लिए ये सब जरूरी नहीं, तो वहीं कुछ यूजर्स ऐसे भी है जो इस पाकिस्तानी की बातें सुन कह रहे हैं कि इसे तो एक्सपर्ट होना चाहिए था। एक यूजर ने कहा कि यानी कि टैटू, अंग्रेजी बोलना, 4-4 गर्लफ्रेंड बनाना ही एक खिलाड़ी को महान क्रिकेटर बनाता है।

वहीं कुछ यूजर कह रहे हैं कि अगर इसी तरह मजहबी स्कूलों में लड़कों को पढ़ाया जाएगा तो वो अंग्रेजी कहाँ से सीखेंगे। लड़कों के दिमाग में गलत बातें भरकर उन्हें आतंकवाद की राह में ढकेल दिया जाता है। 

नौकरी गई पर ट्विटर से खाली हाथ नहीं जाएँगे पराग, गड्डा और सेगल: मिलेंगे ₹1004 करोड़, शेयर के लिए एलन मस्क को अलग से देने होंगे ₹535 करोड़

ट्विटर के अधिग्रहण की अंतिम घोषणा के साथ ही सोशल मीडिया साइट ट्विटर के नए मालिक एलन मस्क ने इसके शीर्ष तीन अधिकारियों को उनके पद से हटा दिया है। अब इन अधिकारियों को मुआवजे के रूप में $12.20 करोड़ (लगभग 1004 करोड़ रुपए या 10.04 अरब रुपए) देना होगा।

एलन मस्क ने शुक्रवार (28 अक्टूबर 2022) को कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पराग अग्रवाल, मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) नेड सेगल और नीति एवं कानूनी मामलों की प्रमुख गड्डे को कंपनी से हटा दिया था। मस्क ने इन लोगों पर ट्विटर प्लेटफॉर्म पर फर्जी अकाउंट की संख्या को लेकर उन्हें और निवेशकों को गुमराह करने का आरोप लगाया था।

एजीक्यूटिव के पैकेज और मुआवजे पर शोध करने के लिए विख्यात कंपनी इक्विलर (Equilar) ने पराग अग्रवाल का ‘गोल्डन पैराशूट’ मूल्यांकन $57.40 मिलियन (472.5 करोड़ रुपए), सेगल का $44.5 मिलियन (लगभग 366.18 करोड़ रुपए) और गड्डे का $20 मिलियन (लगभग 165 करोड़ रुपए) है।

‘गोल्डन पैराशूट’ कंपनी और शीर्ष अधिकारियों के बीच एक एग्रीमेंट होता है, जिसमें उन्हें कंपनी से हटने के लिए मजबूर करने पर मुआवजे के तौर पर बड़ी राशि का भुगतान करने की जानकारी दी जाती है। इसके तहत को कंपनी से निकाले जाने वाले अधिकारी को कम-से-कम एक साल के वेतन का हकदार माना जाता है।

अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इस पे आउट में एक कार्यकारी के वार्षिक मूल वेतन का 100%, स्वास्थ्य बीमा का प्रीमियम और इक्विटी शामिल है। इक्विटी हिस्सेदारी के रूप में पराग अग्रवाल, सेगल और गड्डे को $65 मिलियन (लगभग 535 करोड़ रुपए) ट्विटर में उनके शेयर के बदले दिए जाएँगे।

इसमें गड्डे का हिस्सा सबसे अधिक $34.8 मिलियन (लगभग 286.36 करोड़ रुपए) है। उसके बाद का $22 मिलियन (लगभग 181 करोड़ रुपए) और सबसे कम पराग अग्रवाल का $8.4 मिलियन (करीब 69.12 करोड़ रुपए) है।

बता दें कि पिछले साल नवंबर में जैक डोर्सी के इस्तीफे के बाद पराग अग्रवाल कंपनी का CEO बने थे। राजस्थान के अजमेर के रहने वाले पराग CEO बनने से पहले ट्विटर के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर थे। साल 2021 में उन्हें सैलरी और दूसरे भत्तों के रूप में 3.04 करोड़ डॉलर मिले थे। CEO के रूप में अग्रवाल का वेतन सालाना 1 मिलियन डॉलर यानी 9 करोड़ 24 लाख रुपए बताया गया था।

अलवर के मंदिर में घुसे 4 मुस्लिम लड़के, तोड़फोड़ कर गोवर्धन पूजा का प्रसाद फेंका: कॉन्ग्रेस MLA पर आरोपितों को बचाने का आरोप

राजस्थान के अलवर के भिवाड़ी जिले से गोवर्धन पूजा वाले दिन मंदिर में तोड़फोड़ करने का मामला प्रकाश में आया है। खबर है कि वहाँ शेखपुरा थाना क्षेत्र स्थित हमीराका गाँव के शिव मंदिर में दलित समाज के लोग अन्नकूट प्रसाद वितरण कार्यक्रम कर रहे थे, तभी मुस्लिम समुदाय के 4 लड़कों ने आकर मंदिर पर हमला किया और तोड़फोड़ के बाद सारा प्रसाद फेंक दिया। जिन लोगों ने इन्हें ऐसा करने से रोका उनके साथ मारपीट भी की गई। 

जानकारी के मुताबिक पूरी घटना 26 अक्टूबर की है। दलित समाज के लोग गोवर्धन पूजा वाले दिन अन्नकूट प्रसाद वितरण का काम कर रहे थे कि तभी वहाँ मुबारिक, मुफीद, तालिम, जोम खान आए और तोड़फोड़ करने के बाद प्रसाद जमीन में गिरा दिया। मंदिर में मौजूद अन्य लोग जब उन्हें रोकने आगे बढ़े तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और मंदिर में आरती तक नहीं होने दी। पीड़ित पक्ष अपनी शिकायतें लेकर शेखपुर थाने गया। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

नाराज भीड़ ने थाने के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान भिवाड़ी नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन संदीप दायमा, पूर्व विधायक ममन सिंह यादव, भाजयुमो जिला अध्यक्ष अभय सिंह सहित कई भाजपा नेता व कार्यकर्ता भी मामले की जानकारी होने पर मौके पर पहुँचे। पुलिस ने मामला की गंभीरता देख कई अधिकारियों को शेखपुरा भेजा। जिसके बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए दो लोग गिरफ्तार किए गए। एएसपी विपिन शर्मा ने बचे आरोपितों को 24 घंटे में गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट बताती है कि इस पूरी घटना के बाद जब प्रदर्शनकारी आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग कर रहे थे, तब वहाँ तिजारा विधायक संदीप यादव भी पहुँच गए। उन्हें देख भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि वो आरोपित पक्ष को बचाने आए हैं। इसके बाद विधायकों के समर्थकों और बीजेपी के लोगों के बीच बहस हुई। बात हाथा-पाई तक पहुँच गई। पुलिस ने किसी तरह दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया। 

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में सिर्फ गोवर्धन पूजा वाले दिन हिंदू समुदाय के लोगों पर मुस्लिम समुदाय ने हमला नहीं किया। दीवाली वाले दिन में कैथवाड़ा में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हिंदुओं के पटाखा फोड़ने पर आपत्ति जताते हुए उनसे मारपीट की थी। घटना में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था। लेकिन भरतपुर पुलिस ने पटाखे फोड़ने की वजह से मारपीट को साफ नकार दिया था।

‘मुझे बदनाम करने के लिए रची थी आपराधिक साजिश’: द वायर की मेटा रिपोर्ट पर BJP नेता का बयान, कहा- उन पत्रकारों पर FIR करवाऊँगा

‘द वायर’ (The Wire) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय (Amit Malviya) को मेटा (Meta) से ताकतवर बताने वाली र‍िपोर्ट छापी थी, जिसे भारी फजीहत होने के बाद कंपनी ने अपनी वेबसाइट से हटा लिया है। इसके बाद उसने देश की छवि को बदनाम करने के बाद माफी माँगने का दिखावा कर नौटंकी भी की। हालाँकि, अब इस मामले में अमित मालवीय ने कहा है कि वह ‘द वायर’, उसके मैनेजमेंट और पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए कानूनी कार्यवाही करेंगे।

अमित मालवीय ने कहा है कि वह द वायर के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी की साजिश, प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के लिए साजिश रचने, मानहानि और आपराधिक साजिश सहित अन्य संबंधित धाराओं के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कराएँगे। इसके अलावा, वह द वायर और उसके सहयोगियों द्वारा उन्हें हुए नुकसान के लिए दीवानी कार्रवाई भी करेंगे।

‘द वायर’ द्वारा मेटा से अधिक ताकतवर बताए जाने और तमाम तरह के आरोप लगाए जाने के बाद अमित मालवीय ने इस मुद्दे पर खुलकर बोलते हुए कहा कि यह स्पष्ट है कि द वायर और कुछ अज्ञात व्यक्ति उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के इरादे से आपराधिक साजिश में शामिल थे।

उल्लेखनीय है कि द वायर ने अपनी ‘फेक’ रिपोर्ट के लिए अपने पाठकों से माफी माँग ली है, लेकिन अभी तक मेटा, अमित मालवीय और अन्य लोगों से माफी नहीं माँगी है। इस बारे में अमित मालवीय ने कहा, “स्टोरी वापस लेने के बाद भी द वायर ने मेरी प्रतिष्ठा को खराब करने और मेरे पेशेवर करियर को गंभीर नुकसान पहुँचाने के बावजूद मुझसे माफी नहीं माँगी है।” 

मालवीय ने कहा, “द वायर की मेटा स्टोरी ने माहौल को खराब कर दिया है और मेरी जिम्मेदारी के कार्यों को पूरा करने के लिए वर्षों से बनाए गए रिश्तों और विश्वास को बुरी तरह से प्रभावित किया है।” उन्होंने यह भी कहा है कि इस बारे में उनके पास द वायर और उसके प्रबंधन/रिपोर्टरों के खिलाफ उचित कानूनी करने अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

‘द वायर’ ने मेटा पर अम‍ित मालवीय के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था

वामपंथी वेबपोर्टल ने एक रिपोर्ट प्रकाशित किया, जिसमें दावा किया था कि अमित मालवीय इतने शक्तिशाली हैं कि फेसबुक या इंस्टाग्राम पर कोई पोस्ट अच्छा न लगने पर उसे तुरंत हटवा सकते हैं। हालाँक‍ि, ‘Meta’ के कम्युनिकेशंस हेड एंडी स्टोन ने इस पूरी खबर को बनावटी करार दिया था।

उन्होंने कहा था कि बनावटी दस्तावेजों के आधार पर ‘The Wire’ ने इस रिपोर्ट को तैयार किया है। एक अज्ञात सूत्र के आधार पर ‘The Wire’ ने दावा किया था कि अमित मालवीय ने सोशल मीडिया से 705 पोस्ट्स हटवाएँ थे।

भारी फजीहत के बाद स्‍टोरी हटाई

‘द वायर’ ने भारी फजीहत के बाद स्‍टोरी को वेबसाइट से हटाने के बाद कहा था कि वो अब मेटा के खिलाफ रिपोर्ट बनाने के लिए इस्तेमाल हुए हर दस्तावेज और सूत्र की आंतरिक समीक्षा करेगा। इसमें दस्तावेजों, सूचनाओं, स्रोत सामग्री, तकनीक और क्रॉस-चेक की जाँच की जाएगी।

डोमेन एक्सपर्ट्स और इंडिपेंडेंट रिसर्चर्स ने स्टोरी खारिज की

वामपंथी वेबसाइट ने अपने संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन की बाइलान वाली इस स्टोरी पर ऐसा एक्शन तब लिया, जब डोमेन एक्सपर्ट्स और इंडिपेंडेंट रिसर्चर ने उसकी स्टोरी को खारिज कर दिया। इसके साथ ही ये भी बताया कि शायद इस स्टोरी को गढ़ने के लिए फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग हुआ है।

एक्सपर्ट्स के ऐसे दावे के बाद ही वायर ने अपने प्लेटफॉर्म से स्टोरी हटाई और आंतरिक समीक्षा की बात कहकर अप्रत्यक्ष रूप से मान लिया कि मेटा पर की गई उसकी स्टोरी कितनी गलत थी। इस दौरान उसने पाठकों से माफी माँगने का ढोंग भी किया।

प्राइवेसी र‍िसर्चर ने द वायर पर लगाया फर्जीवाड़े का आरोप

वी आनंद नाम के एक प्राइवेसी र‍िसर्चर ने 20 अक्टूबर को ट्विटर पर इस दावे को खारिज कर दिया था कि उन्होंने मेटा विवाद में ‘द वायर’ के देवेश कुमार के काम का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था, “मैं वास्तव में लगातार धोखाधड़ी से थक गया हूँ। यह वास्तव में हतप्रभ करने वाला है कि ये सब अब स्पष्ट रूप से एक मृत कहानी पर विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए हो रहा है। इस बारे में सिद्धार्थ वरदराजन को सूचित कर दिया है।”

माहौल बिगाड़ने के लिए वो बन सकते हैं किराएदार: बम धमकियों के बीच मुंबई में मकान मालिकों के लिए पुलिस ने जारी किया आदेश, 15 दिन धारा 144 लागू रहेगी

मुंबई पुलिस ने शुक्रवार (28 अक्टूबर 2022) को आदेश जारी कर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए सभी मकान मालिकों को नए किराएदारों की जानकारी पुलिस के साथ शेयर करने को कहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई पुलिस ने पुलिस ने इस आदेश में कहा है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने के लिए कुछ लोग किराए पर घर ले सकते हैं। इसलिए, नए किराएदारों की जानकारी देना आवश्यक है।

नए किराएदारों की जानकारी पुलिस के साथ शेयर करने और मकान मालिकों के काम को आसान बनाने के लिए मुंबई पुलिस ने एक लिंक भी शेयर किया है। जिसमें मकान मालिक किराएदारों की जानकारी आसानी से अपलोड कर सकते हैं।

बता दें, इससे पहले मुंबई पुलिस ने शुक्रवार (21 अक्टूबर 2022) को 1 नवंबर से 15 नवंबर तक पूरे शहर में धारा 144 लागू करने का आदेश जारी किया था। शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए संभावित खतरे के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया था।

मुंबई पुलिस का आदेश (फोटो क्रेडिट-टाइम्स नाउ)

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 144 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर पाँच से अधिक लोगों के समूह को इकट्ठा होने की इजाजत नहीं होती है। धारा 144 लागू करने का आदेश महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 10 (2), 37 (3) के तहत जारी किया गया था।

पुलिस कमिश्नर ने आदेश में कहा था, ”हमें शहर की कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए संभावित खतरे के मद्देनजर कुछ जानकारियाँ मिली है, जिसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक संपत्ति और मानव जीवन का नुकसान हो सकता है।”

पाँच से अधिक लोगों के सार्वजनिक समारोहों को प्रतिबंधित करने के अलावा, आदेश में यह भी कहा गया है कि शहर में जुलूस निकालने और पटाखों को जलाने पर प्रतिबंध रहेगा।

मुंबई पुलिस का आदेश (फोटो क्रेडिट-टाइम्स नाउ)

हालाँकि, मुंबई पुलिस ने शादी समारोहों और अंतिम संस्कार के अवसर पर लोगों के इकट्ठा होने की अनुमति दी है। प्रतिबंध से शैक्षणिक स्थानों, कार्यालय की बैठकों, सामान्य समाज की बैठकों, सिनेमा हॉल और व्यापारिक गतिविधियों बाहर रखा गया है। जुलूस के दौरान लाउडस्पीकर और संगीत बैंड के उपयोग पर भी प्रतिबंध रहेगा।

आदेश के अनुसार, ”अगर कोई भी इन आदेशों का उल्लंघन करता हुआ पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”

महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 2 (6), 10 (2), और 37 (1) के तहत जारी एक अन्य आदेश में, कमिश्नर ने 3 नवंबर से 2 दिसंबर तक तक किसी भी हथियार के उपयोग या परिवहन पर रोक लगा दी है।

आदेश के अनुसार, ”कोई व्यक्ति पुलिस की पूर्व मंजूरी के बिना किसी भी हथियार, गोला-बारूद या विस्फोटक का भंडारण या परिवहन नहीं कर सकता है।”

मुंबई पुलिस आयुक्त का आदेश (फोटो क्रेडिट-फ्री प्रेस जनरल)

यह आदेश लोगों कोआग्नेयास्त्रों को प्रक्षेपित करने में सक्षम पत्थरों या अन्य वस्तुओं को इकट्ठा करने, परिवहन करने या रखने से भी रोकता है। आदेश के अनुसार पुतलों के प्रदर्शन या उसे जलाने के कार्य को भी गैरकानूनी घोषित किया गया है। ऐसी किसी भी स्थिति को उत्‍पन्‍न करने की मनाही है, जिससे राज्‍य में कानून-व्‍यवस्‍था की स्‍थ‍ित‍ि बिगड़े।

मुंबई पुलिस को मिली बम धमाके की धमकी

उल्लेखनीय है बीते दिनों मुंबई पुलिस को एक धमकी आई थी। इस धमकी में कहा गया था कि मुंबई में बम धमाके होने वाले हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई पुलिस के कंट्रोल रूम में धमकी भरा फोन कॉल आया था। जिसमें अंधेरी के इनफिनिटी मॉल, जुहू के पीवीआर और सांताक्रुज स्थित सहारा के 5 सितारा होटल को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। यह धमकी भरा कॉल आते ही शहर की पुलिस अलर्ट हो गई थी और सभी जगह सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।

‘भारत को मजबूत राष्ट्र के रूप में नहीं उभरने देना चाहते थे ब्रिटिश’: महाराजा के विलय प्रस्ताव को स्वीकारने में नेहरू ने देरी की, पाकिस्तान ने J&K में चला दिया ‘ऑपरेशन गुलमर्ग’

26 अक्टूबर 2022 को जम्मू-कश्मीर रियासत के भारतीय अधिराज्य में अधिमिलन के 75 वर्ष पूरे हो गये हैं। उल्लेखनीय है कि तत्कालीन जम्मू-कश्मीर रियासत के भारतीय संघ में अधिमिलन के सम्बन्ध में तथाकथित इतिहासकारों और लेफ्ट-लिबरल बुद्धिजीवियों द्वारा तथ्यों और ऐतिहासिक घटनाओं को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जाता रहा है। इसी साजिश का परिणाम है कि भारत का सिरमौर जम्मू-कश्मीर भारतवासियों का सिरदर्द बन गया।

अधिमिलन दिवस की 75 वर्ष पूरे होने पर इतिहास की इन विकृतियों का पर्दाफाश करना आवश्यक है। जम्मू-कश्मीर के सन्दर्भ में अब तक जो मैकॉले-मार्क्स पुत्रों द्वारा औपनिवेशिक और वामपंथी नैरेटिव पढ़ाया-सुनाया जाता रहा है, उसके बरक्स राष्ट्रवादी पाठ को जानना-समझना जरूरी है।

जम्मू-कश्मीर के अधिमिलन में हुई देरी और उसके दुष्परिणामों के दोष से तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को बरी करने के लिए महाराजा हरिसिंह को कठघरे में खड़ा किया जाता रहा है। बार-बार यह बताया जाता है कि महाराजा हरिसिंह अपनी रियासत जम्मू-कश्मीर को भारतीय अधिराज्य या पाकिस्तानी अधिराज्य में शामिल न करके स्वतंत्र राष्ट्र बनाने की संभावनाएँ टटोल रहे थे।

हालाँकि, तथ्य यह है कि भारत स्वतंत्रता अधिनियम-1947 में तमाम रियासतों के राजाओं-नवाबों के पास दो ही विकल्प थे- या तो वे अपनी रियासत को भारतीय अधिराज्य में शामिल कर सकते थे या फिर पाकिस्तानी अधिराज्य में शामिल हो सकते थे। अपनी रियासत को स्वतंत्र राष्ट्र बनाने जैसा कोई तीसरा विकल्प किसी भी रियासत के पास नहीं था।

महाराजा हरिसिंह का भारत-प्रेम सन् 1931 में लन्दन में आयोजित गोलमेज सम्मेलन में जगजाहिर हो गया था। उस सम्मेलन में उन्होंने तमाम रजवाड़ों के प्रतिनिधि के तौर पर भारत की स्वतंत्रता और एकता-अखंडता की पुरजोर वकालत की थी।

इस सम्मेलन में अंग्रेजों के विरोध में और भारत के पक्ष में दिए गए अपने राष्ट्रवादी भाषण के परिणामस्वरूप वे अंग्रेजों के निशाने पर आ गए थे। इससे पहले भी वे जम्मू-कश्मीर रियासत में किये जा रहे अनेक लोकतान्त्रिक और प्रगतिशील कामों के कारण अंग्रेजों की आँख की किरकिरी बने हुए थे।

इसी तरह अधिमिलन काल के एक अन्य मिथ्या प्रवाद की सच्चाई जानना आवश्यक है। 22 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर पर हुए आक्रमण को आजतक कबाइली हमला लिखा-पढ़ा जाता रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि ‘ऑपरेशन गुलमर्ग’ पाकिस्तानी सेना द्वारा कबाइलियों के वेश में अंजाम दिया गया था।

पाकिस्तानी और अंग्रेज जान-समझ रहे थे कि महाराजा हरिसिंह अपनी रियासत को हर-हाल में भारत में ही शामिल करेंगे। वे ऐसा होने से पहले ही उसे छीन लेना चाहते थे। जम्मू-कश्मीर के जल-स्रोतों, प्राकृतिक संसाधनों और भू-रणनीतिक स्थिति पर पाकिस्तान की नज़र गड़ी हुई थी।

इसी प्रकार द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद शीतयुद्ध की छाया में पनपी ‘द ग्रेट गेम’ की राजनीति के तहत अमेरिका और ब्रिटेन भारत को एक सशक्त राष्ट्र के रूप में नहीं उभरने देना चाहते थे। इसलिए वे किसी भी तरह पाकिस्तान को मजबूत करते हुए उसे भारत के सामने खड़ा करना चाहते थे। पाकिस्तानी सेना के तत्कालीन मेजर जनरल अकबर खान ने अपनी पुस्तक ’रेडर्स इन कश्मीर’ में और हुमायूँ मिर्जा ने अपनी पुस्तक ‘फ्रॉम प्लासी टू पाकिस्तान’ में इसका खुलासा किया है।

अकबर खान ने लिखा है कि तत्कालीन भारतीय नेतृत्व द्वारा जम्मू-कश्मीर के भारत में अधिमिलन में की जा रही देरी के मद्देनज़र पाकिस्तानी प्रधानमंत्री लियाकत अली सहित शीर्ष राजनीतिक और अंग्रेजी सैन्य नेतृत्व ने अगस्त-सितम्बर माह में ही उसे सैन्य-शक्ति द्वारा हड़पने की रणनीति बनाने का काम सौंप दिया था।

इस योजना को उसने अपने साथियों लेफ्टिनेंट कर्नल मसूद, ज़मान कियानी, खुर्शीद अनवर और एयर कमोडोर जंजुआ के साथ मिलकर सर्दियाँ शुरू होते ही 22 अक्टूबर 1947 को अमलीजामा पहनाया। दरअसल, नेहरू अपने मित्र शेख अब्दुल्ला को जम्मू-कश्मीर की बागडोर सौंपने के लिए महाराजा हरिसिंह पर दबाव बनाने के कारण अधिमिलन में देरी कर रहे थे।

यह वही शेख अब्दुल्ला था, जो सन् 1931 से ही जम्मू-कश्मीर में साम्प्रदायिकता का बीज बोकर प्रजावत्सल और प्रगतिशील महाराजा हरिसिंह के ख़िलाफ़ मुहिम चला रहा था। वह खुद वजीरेआजम बनने का ख्वाब देख रहा था। उसकी क्रमशः बढ़ती इस्लामपरस्ती और पाकिस्तानपरस्ती के कारण अंततः नेहरू को ही अपनी ‘मित्रता और मुस्लिम तुष्टिकरण’ की नीति का परित्याग करके उसे जेल में डालना पड़ा, लेकिन तब तक अपूरणीय क्षति हो चुकी थी।

1947 के अपने आक्रमण के दौरान पाकिस्तानी सेना ने पुंछ, राजौरी, मीरपुर और मुजफ्फराबाद जैसे क्षेत्रों में क्रूरतम नरसंहार किया। इस आक्रमण में हजारों निर्दोष लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी। लाखों लोगों को अपना घर-द्वार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। हजारों माताओं-बहनों का शीलभंग हुआ। लाखों की संख्या में घर उजड़ गये। उनके बाशिंदे दर-दर की ठोकरें खाने को विवश हुए।

जम्मू-कश्मीर की सरकारों ने भी प्रायः इन पीड़ितों की उपेक्षा की। इसलिए वे देश के अलग-अलग स्थानों पर कैम्पों में रहने को अभिशप्त हुए। उनके बच्चे अपनी घर वापसी चाहते हैं। नागरिक अधिकार, सम्मान और सुरक्षा चाहते हैं। लेकिन, लम्बे समय तक उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। इस ऐतिहासिक अपराध का जिम्मेदार कौन है? जम्मू-कश्मीर के अधिमिलन में जान-बूझकर देरी क्यों की गयी?

पाकिस्तानी सेना ने आक्रमण करके भारत के लाखों वर्ग किलोमीटर भू-भाग को हड़प लिया और आजतक उस पर कब्ज़ा जमाये बैठा हुआ है। हमारे आस्था के केंद्र, अनेक उपासना-स्थल और तीर्थ-स्थान आजतक पाकिस्तान के कब्जे में हैं। उसकी जिम्मेदारी किसकी है? पाक अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर और चीन अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर के बाशिंदों के साथ आज भी भेदभाव और जुल्मो-सितम हो रहे हैं।

उनके पास शिक्षा, स्वास्थ्य, रोटी-रोज़गार जैसी आधारभूत सुविधाएँ तक नहीं हैं। वे भारत की नागरिकता की गुहार लगा रहे हैं। अधिमिलन-पत्र में उल्लेखित सम्पूर्ण जम्मू-कश्मीर को भारत में शामिल करने की माँग कर रहे हैं, इसलिए उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उनके इस दमन और उत्पीड़न का जिम्मेदार कौन है? उनकी इस पीड़ा की समाप्ति कब और कैसे होगी? अधिमिलन दिवस की 75 वीं वर्षगाँठ के अवसर पर इन प्रश्नों को पूछा जाना चाहिए और इनके उत्तर ढूंढे जाने चाहिए।

केंद्र की वर्तमान सरकार ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35 ए जैसे संक्रमणकालीन और अस्थायी संवैधानिक प्रावधानों की समाप्ति करके जम्मू-कश्मीर के एकीकरण की प्रक्रिया को पूर्ण करते हुए भारत की एकता, अखंडता और प्रभुसत्ता का उद्घोष किया। पिछले तीन साल में जम्मू-कश्मीर में अनेक सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं।

जम्मू-कश्मीर में नयी औद्योगिक नीति, प्रेस नीति, फिल्म नीति, भाषा नीति और शिक्षा नीति लागू की गयी है। त्रि-स्तरीय पंचायती राज-व्यवस्था की शुरुआत करके लोकतंत्र का सशक्तिकरण और सत्ता का विकेंद्रीकरण किया गया है। विधानसभा का परिसीमन करके क्षेत्रीय असंतुलन को समाप्त किया गया है। आरक्षण नीति के माध्यम से वंचित वर्गों और क्षेत्रों के साथ न्याय सुनिश्चित किया गया है। 225 से अधिक नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन करके प्रशासन को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया गया है।

आतंकवादियों और अलगाववादियों की नकेल कसी गयी है। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस जैसे अलगाववादी और आतंकी संगठनों की हवाला फंडिंग बंद करने से जम्मू-कश्मीर एक टेररिस्ट हॉटस्पॉट की जगह टूरिस्ट हॉटस्पॉट बन रहा है। इस वर्ष रिकॉर्ड 22 लाख से अधिक पर्यटक जम्मू-कश्मीर आये हैं। पर्यटकों की आमद क्रमशः बढ़ रही है।

साल 2019 से पहले के लगभग 70 वर्षों में जम्मू-कश्मीर में कुल 15 हजार करोड़ का निजी निवेश हुआ था, जबकि उसके बाद के तीन साल में 56 हजार करोड़ का निजी निवेश हुआ है। आज स्थानीय नौजवानों के हाथ में पत्थर और बंदूक की जगह किताब-कलम, मोबाइल और लैपटॉप हैं। आतंकियों और उनके आकाओं की कमर तोड़ी जा जा रही है। उनके सहयोगियों की पहचान करके उन्हें नौकरी से बर्खास्त किया जा रहा है और भारतीय दंड संहिता के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है।

एंटी करप्शन ब्यूरो और कैग जैसी संस्थाएँ भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चला रही हैं। इससे गुपकार गैंग और आतंकी बौखलाए हुए हैं। इसलिए वे उलजलूल बयानबाजी कर रहे हैं। निर्दोष और निरीह नागरिकों की टारगेट किलिंग कर रहे हैं। यह दीये के बुझने से पहले की फड़फड़़ाहट है। स्थानीय समाज भी उनकी इन कायराना हरकतों के खिलाफ सुरक्षा बलों के साथ खड़ा हो रहा है।

पिछले दिनों पूर्णकृष्ण भट्ट की हत्या के खिलाफ कैंडल मार्च और शांति रैलियाँ निकाली गईं, तिरंगा लहराकर हिन्दुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए गए। यही नहीं, पिछले तीन दशक से आतंकी और अलगाववादी गतिविधियों के केंद्र रहे श्रीनगर के राजबाग स्थित हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कार्यालय का होर्डिंग तोड़ डाला गया।

इतना ही नहीं, उसके गेट को पोतकर उस पर सफ़ेद रंग से ‘इण्डिया’ लिख दिया गया। दीवार पर ‘आखिर कब तक?’ का बैनर लगाया गया। यह कश्मीर में हो रहे बदलाव की बानगी है। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का बेसुरा राग छेड़कर स्वयं आतंक और अशांति के हिमायती के रूप में बेनकाब हो रहा है।

अभी 22 फरवरी 1994 को भारत की संसद में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव को पूरा किया जाना शेष है। इस प्रस्ताव के अनुसार, सम्पूर्ण जम्मू-कश्मीर राज्य (अधिमिलन-पत्र में उल्लेखित) भारतीय संघ का अविभाज्य अंग था, है और रहेगा। यही भारतीय जनमानस की सामूहिक और संगठित आकांक्षा है। इस प्रस्ताव को फलीभूत करने के लिए भारतवासियों को अपने साहस, संगठन और संकल्प का सामूहिक शंखनाद करना होगा।

(लेखक जम्मू केन्द्रीय विश्वविद्यालय में अधिष्ठाता, छात्र कल्याण हैं।)

जिस केमिकल से हो सकती है खुजली-जलन, छठ से पहले उसे यमुना में डलवा रही केजरीवाल सरकार: BJP सांसद ने उठाए सवाल, अधिकारी को फटकारते हुए Video वायरल

दिल्ली की केजरीवाल सरकार के ऊपर छठ पर्व से पहले यमुना में केमिकल छिड़काव करवाने का आरोप लग रहा है। भाजपा ने इन रसायनों को जहरीला कहते हुए दिल्ली सरकार पर हमला बोला है। इस बीच भाजपा सांसद की जल विभाग के अधिकारियों से उलझते हुए एक वीडियो भी सामने आई है।

वीडियो में वह अधिकारी पर इस बात को लेकर गुस्सा हो रहे हैं कि आखिर छठ से पहले नदी में केमिकल क्यों डाला जा रहा है जबकि सब जानते हैं कि छठ में लोग यहाँ आकर डुबकी लगाते हैं।

प्रवेश वर्मा की वीडियो आने के बाद जहाँ इस बात पर सवाल हो रहे हैं कि वह अधिकारी के साथ क्यों उलझे। उन्होंने उससे क्यों कहा- ‘केमिकल तुम्हारे सिर पर डाल दूँ’। वहीं दूसरी ओर प्रवेश वर्मा का मामले को लेकर कहना है,

“आज यमुना के पास छठ घाट का दौरा करने पर हमें वहाँ जहरीले केमिकल के कंटेनर मिले। इस केमिकल को नदी में डाल दिया जाएगा। वहाँ मौजूद अधिकारी से पूछा कि लोगों को नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार होगा?”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने उनसे बार-बार कहा कि यमुना नदी में केमिकल न डालें। अगर अधिकारी इस मामले में मेरी बात नहीं सुनते हैं तो मैं क्या मैं गुस्सा नहीं हो सकता? दिल्ली की जनता के भले के लिए अगर मुझे इस तरह से बात करनी पड़ रही है तो यही सही, मुझे इसमें कोई दिक्कत नहीं है।”

सिलिकॉन डिफॉर्मर का इस्तेमाल कर रही केजरीवाल सरकार

दरअसल, दिल्ली सरकार हर वर्ष यमुना की सफाई को लेकर बड़े-बड़े दावे करते रही है। हालाँकि, प्रदूषण कभी कम होता नहीं दिख। लेकिन, इस साल अपनी छवि सुधारने के लिए उन्होंने सिलिकॉन डिफॉमर नामक केमिकल का उपयोग करने का निर्णय लिया। इस केमिकल को लेकर जानकरों का मानना है कि इससे नदी साफ होने की बजाय और भी अधिक दूषित हो जाएगी। साथ ही इस केमिकल के संपर्क में आने वाले व्यक्ति को खुजली, आँखों में जलन समेत कुछ अन्य समस्याएँ भी हो सकती हैं।

मनोज तिवारी ने उठाए थे सवाल

बता दें कि केजरीवाल सरकार पर इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद मनोज तिवारी ने भी सवाल खड़े किए थे। उन्होंने कहा था, “दिल्ली सरकार यमुना नदी में जहरीले केमिकल का छिड़काव करके यमुना को साफ करने में अपनी विफलता को छिपाने की कोशिश कर रही है।”

इसके अलावा उन्होंने दावा करते हुए कहा था, “यमुना की प्रदूषण की स्थिति का जायजा लेने के लिए कालिंदी कुंज क्षेत्र का दौरा किया। हमें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि झाग को छिपाने के लिए एक बहुत ही जहरीले केमिकल का छिड़काव किया जा रहा था। जो लोग छिड़काव कर रहे थे वह हमें देखकर तुरंत भाग गए। हमने शिकायत दर्ज कराई है।”

दिल्ली भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष आदेश गुप्ता ने आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार के 2500 करोड़ देने के बाद भी यमुना नदी में प्रदूषण नियंत्रण नहीं हुआ है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “8 साल में 8 बार अरविंद केजरीवाल कह चुके हैं कि हम यमुना जी को इतना साफ कर देंगे की आप डुबकी लगा सको। लेकिन इनकी नाकामी की वजह से आज भी यमुना जी मैली है और छठ घाट गंदे पड़े हैं। केंद्र सरकार के 2500 करोड़ देने के बाद भी दिल्ली सरकार ने यमुना जी की सफाई करवाने में हाथ खड़े कर दिए हैं।”

आतंकी मुबीन के घर मिलीं 109 विस्फोटक चीजें, जिहाद वाली नोटबुक भी बरामद: कोयम्बटूर सिलिंडर ब्लास्ट में NIA की FIR से खुलासा

तमिलनाडु के कोयम्बटूर में रविवार (23 अक्टूबर 2022) को कोट्टई ईश्वरम मंदिर के सामने एक कार में हुए सिलिंडर ब्लास्ट में आतंकी जमिज़ा मुबीन मारा गया था। मुबीन के घर से बड़ी मात्रा में विस्फोटक भी बरामद हुआ था। आशंका इस बात की भी जताई जा रही थी कि घटना दीवाली के दौरान मंदिर को निशाना बनाने की साजिश थी। वहीं NIA द्वारा घटना के संबंध में की गई एफआईआर से मुबीन के घर से अन्य संवेदनशील चीजों के बरामद होने की जानकारी मिली है।

NIA ने अपनी एफआईआर में कहा, ”मृतक जमिज़ा मुबीन के परिसरों की तलाशी में 109 वस्तुएँ जब्त की गईं, जिनमें पोटेशियम नाइट्रेट, काला पाउडर, नाइट्रोग्लिसरीन, पीईटीएन पाउडर, एल्युमिनियम पाउडर, सल्फर पाउडर, स्टेराइल सर्जिकल, जिहाद के बारे में विवरण के साथ नोटबुक आदि शामिल हैं।”

मुबीन से 2019 में आईएसआईएस से लिंक को लेकर पूछताछ की गई थी। हालाँकि पुलिस का दावा है कि जमिज़ा मुबीन का कोई पुराना आतंकी या आपराधिक रिकार्ड नहीं पाया गया है। शुरुआती जाँच में पुलिस को मुबीन की गाड़ी में लोहे की कीलें मिली थीं, जिसे गाड़ियों को पंचर करने में प्रयोग किया जाता है। उसकी गाड़ी से मार्बल भी बरामद हुए थे। विस्फोट में उसकी मारुति 800 कार के भी परखच्चे उड़ गए थे। यह अंदेशा भी जताया जा रहा है कि वह जहरान हाशिम नेटवर्क से जुड़ा था। जहरान हाशिम ईस्टर पर श्रीलंका में हुए सीरियल ब्लास्ट का मास्टरमाइंड है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार कोयम्बटूर में 1998 में हुए सीरियल ब्लास्ट से भी इसके लिंक मिल रहे हैं। कार ब्लास्ट के बाद पकड़े गए लोगों में मोहम्मद थलका भी शामिल है। वह नवाब खान का बेटा है, जो 1998 सीरियल ब्लास्ट में जेल में बंद है। सीरियल ब्लास्ट के लिए जिम्मेदार आतंकी संगठन अल-उमाह का मुखिया उसका चाचा सैयद अहमद बाशा ही है।

रिपोर्ट के अनुसार मुबीन उक्कडम में रहता था। यह इलाका हमेशा से संवेदनशील रहा है। खासकर 1998 के सीरियल ब्लास्ट के बाद से। यही कारण है कि विस्फोट के बाद जब मुबीन के घर के तलाशी ली जा रही थी, उसी समय अल-उमाह से जुड़े लोगों के घर पर भी दबिश दी गई। इनमें से एक घर नवाब खान का भी था। इसके बाद नवाब खान के बेटे थलका से पूछताछ की गई और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

23 अक्टूबर को हुए ब्लास्ट की पड़ताल में जिस तरह से चीजें सामने आ रही हैं, उससे लगता है कि 1998 के सिलसिलेवार धमाकों की तरह ही बड़ी साजिश रची गई थी। लेकिन किन्हीं कारणों से 24 साल बाद आतंकी उसी तरह की घटना को अंजाम देने में विफल रहे।