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‘वो लव जिहाद करवाना चाहती थी’: अलीगढ़ के कॉलेज में अंजान लड़के के संग घुसी मुस्लिम छात्रा, मंदिर के पास बैठी हिंदू लड़की से मिलवाया, बोली- कोई पूछे तो इसे भाई बता देना

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में कॉलेज में पढ़ने वाली एक छात्रा ने अपने साथ लव जिहाद की शिकायत की है। पीड़िता ने एक अन्य मुस्लिम छात्रा पर ही इस घटना का मास्टरमाइंड होने का भी आरोप लगाया है। आरोप है कि कॉलेज में बाहरी मुस्लिम लड़कों को बुला कर हिन्दू लड़कियों से दोस्ती करवाने की कोशिश की जा रही है। कॉलेज के ही अन्य छात्रों ने आरोपित लड़के को पुलिस के हवाले कर दिया है। हालाँकि पुलिस लव जिहाद के एंगल को नकार रही है। घटना शुक्रवार (21 अक्टूबर 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला अलीगढ़ के धर्म समाज महाविद्यालय का है। यहाँ BSC फर्स्ट ईयर की छात्रा ने आरोप लगाया कि घटना के दिन वो क्लास रूम के बाहर मंदिर के पास बैठी थी। तभी उसी कॉलेज की एक मुस्लिम छात्रा वहीं पर एक मुस्लिम लड़के के साथ पहुँची और उस से बात करने लगी। मुस्लिम युवक अलीगढ़ के ही दिल्ली गेट इलाके के शाह जमाल का निवासी बताया जा रहा है।

इसी दौरान कॉलेज में पढ़ने वाले कई हिन्दू छात्र वहाँ आ गए। उन्होंने बाहरी लड़के से परिचय पूछा तो वो कुछ सही से बता नहीं पाया। छात्रों ने आरोपित मुस्लिम लड़के की पिटाई कर दी और उसे कॉलेज प्रशासन को सौंप दिया। वहाँ से उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। उसी कॉलेज के छात्र नेता अमित गोस्वामी के मुताबिक इस से पहले भी डी एस कॉलेज में लव जिहाद की घटनाएँ हुईं हैं जिसमें पुलिस महज 151 शांतिभंग की धाराओं में कार्रवाई कर के खानापूर्ति करती है।

पीड़ित छात्रा का आरोप है कि उसे मुस्लिम लड़के से दोस्ती करवाने की कोशिश चल रही थी। बताया जा रहा है कि मुस्लिम छात्रा ने पीड़िता से ये भी कहा कि अगर प्रॉक्टर पूछेंगे तो लड़के को अपना भाई बता देना। पीड़ित छात्रा का कहना है कि शायद मुस्लिम लड़की उसके साथ लव जिहाद करवाने की कोशिश कर रही थी। छात्र नेता ने कॉलेज प्रशसन की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा है कि आखिर बाहरी लड़के कॉलेज परिसर में घुस कैसे जाते हैं।

बताया जा रहा है कि बाहरी लड़के को कॉलेज में बुलाने वाली मुस्लिम छात्रा को कॉलेज से निलंबित कर दिया गया है। वहीं पुलिस ने इस घटना में लव जिहाद के एंगल से इंकार किया है। DSP शिव कुमार के मुताबिक जाँच के दौरान लड़का और लड़की एक ही समुदाय के निकले हैं। उन्होंने बताया कि आरोपित छात्र का शांति भंग 151 की धारा में चालान किया गया है।

‘वह सुभाषचंद्र बोस ही थे या नहीं’: गृह मंत्रालय ने ‘गुमनामी बाबा’ की DNA रिपोर्ट की जानकारी देने से किया मना, देश की संप्रभुता और अखंडता का दिया हवाला

‘गुमनामी बाबा’ ही महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाषचंद्र बोस (Subhash Chandra Bose) थे या नहीं, यह रहस्य ही रहेगा। गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) ने गुमनामी बाबा के DNA सैंपल की रिपोर्ट के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया है। देश की संप्रभुता और अखंडता का हवाला देते हुए CFSL ने इस पर RTI का जवाब देने से मना कर दिया।

जवाब के लिए दाखिल की गई RTI के जवाब में CFSL ने कहा कि जिसके बारे में जानकारी देने से देश की संप्रभुता एवं अखंडता और राष्ट्र की सुरक्षा, रणनीतिक, आर्थिक हित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसके कारण इलेक्ट्रोफेरोग्राम रिपोर्ट साझा नहीं किया जा सकता है।

दरअसल, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(ए), (ई) और 11(1) का हवाला देते हुए पश्चिम बंगाल स्थित हुगली के कोन्नगर निवासी सयाक सेन ने 24 सितंबर 2022 अर्जी दायर की थी। नेताजी बोस पर शोध करने वाले सेन से गुमनामी बाबा के DNA सैंपल की रिपोर्ट माँगी थी।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, सयाक सेन ने कहा कि इस आधार पर CFSL ने उनकी RTI को खारिज कर दिया। सेन ने RTI में यह भी पूछा कि उत्तर प्रदेश के सुदूर इलाके में रहने वाला एक व्यक्ति भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए इतना मायने क्यों रखता है कि अगर उसका इलेक्ट्रोफेरोग्राम सार्वजनिक किया जाता है तो देश में हलचल मच जाएगी।

सेन ने आगे बताया, “ये स्पष्ट संकेत है कि गुमनामी बाबा एक आम आदमी से कहीं अधिक और विशेष थे। मेरा मानना ​​है कि वह मेरे सभी निष्कर्षों के अनुसार गुमनामी बाबा के रूप में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ही थे।”

बता देें कि यह दावा किया गया है कि सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताइवान में एक विमान दुर्घटना में हो गई थी। हालाँकि, लोगों के एक वर्ग का दावा है कि नेताजी बोस विमान दुर्घटना में बच गए थे और तत्कालीन ब्रिटिश सरकार से बचने के लिए गुमनामी बाबा के वेश में छिप कर रहते थे।

जिस राजीव गाँधी फाउंडेशन को मनमोहन सिंह देना चाहते थे ₹100 करोड़, उसका FCRA लाइसेंस गृह मंत्रालय ने रद्द किया: विदेशी फंडिंग में धांधली का आरोप

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गाँधी परिवार के गैर-सरकारी संगठन राजीव गाँधी फाउंडेशन (RGF) का FCRA (विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम) लाइसेंस रद्द कर दिया है। आरोप है कि ये ट्रस्ट विदेशी फंडिंग कानून का उल्लंघन करता पाया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2020 के जुलाई में गृह मंत्रालय द्वारा गठित मंत्रालय की समिति की जाँच की रिपोर्ट पर यह निर्णय लिया गया है। समिति की जाँच मुख्य रूप से इस पर थी कि क्या संगठनों ने आयकर दाखिल करते वक्त दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की या विदेशों से प्राप्त धन का शोधन किया। जाँच पूरी होने के बाद गृह मंत्रालय ने अपना निर्णय लिया।

मालूम हो कि राजीव गाँधी फाउंडेशन के साथ राजीव गाँधी चैरिटेबल ट्रस्ट का लाइसेंस भी कैंसिल कर दिया गया है।

बताया जा रहा है कि राजीव गाँधी फाउंडेशन का लाइसेंस रद्द करने की सूचना उनके पदाधिकारियों को भेज दी गई है। संगठन ने अभी इस मामले पर अपनी कोई टिप्पणी नहीं दी है।

चीन से मिला संगठन को फंड, गाँधी परिवार ने खुद डील की

साल 2020 में इसी संगठन को लेकर सामने आया था कि कैसे आरजीएफ को चीनी सरकार से 2006 और बाकी सालों में पैसे मिले। 2008 में कॉन्ग्रेस पार्टी और चीन की कन्युनिस्ट पार्टी के बीच मेमोरेंडम भी साइन हुआ ता कि वो हर विकास मुद्दे पर एक दूसरे की राय लेंगे। खास बात ये थी कि इसे राहुल गाँधी ने साइन किया था जो 2020 में चीन विवाद के बाद मोदी सरकार पर सवाल उठाते मिले थे।

बता दें कि इस संगठन की अध्यक्ष सोनिया गाँधी हैं। वहीं ट्रस्टियों में अशोक गांगुली, बंसी महता, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, पी चिदंबरम, और राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी का नाम शामिल है। राजीव गाँधी फाउंडेशन की शुरुआत साल 1991 में हुई थी। कथिततौर पर यह संगठन साल 1991 से 2009 तक स्वास्थ्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, महिलाओं और बच्चों, विकलांग सहायता आदि सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम करने का दावा करता था।

हालाँकि कुछ समय पहले यह संगठन विवादों में आ गया। ये भी खुलासा हुआ था कि इस संगठन को 1991-1992 में कॉन्ग्रेस सरकार में वित्त मंत्री रहते हुए मनमोहन सिंह ने 100 करोड़ रुपए बजट से देने की कोशिश की थी। मगर विपक्ष के हंगामे के बाद इस पैसे को फाउंडेशन को नहीं दिया जा सका।

वित्त मंत्री रहते हुए RGF को 100 करोड़ देना चाहते थे मनमोहन सिंह

1991-92 में भारतीय संसद की केंद्रीय बजट की चर्चा के संग्रहीत अभिलेख के एक सेक्शन में देखा जा सकता है कि जब तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने राजीव गाँधी फाउंडेशन को 100 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की थी, जिसपर विपक्षी दलों ने भारी हंगामा करते हुए सवाल खड़ा दिया था।

मनमोहन सिंह द्वारा बनाए गए 1991-92 के केंद्रीय बजट दस्तावेज में एक और प्रावधान भी था। इसमें कहा गया कि 5 साल की अवधि में राजीव गाँधी फाउंडेशन को 100 करोड़ रुपए की राशि दान की जाएगी। यह राशि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास, साक्षरता के प्रचार, पर्यावरण की सुरक्षा, सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने, दलितों के उत्थान के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग से संबंधित अनुसंधान और कार्रवाई कार्यक्रमों की पहल करने, महिलाओं और विकलांग व्यक्तियों, प्रशासनिक सुधार और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका के लिए बताई गई थी।

मेहुल चोकसी ने दिया दान

इसके अलावा राजीव गॉंधी फाउंडेशन (RGF) को मिले दान को लेकर एक खुलासा ये हुआ था कि इसे दान देने वालों में एक नाम मेहुल चोकसी का भी था। मेहुल चोकसी वही शख्स है जो पंजाब नेशनल बैंक के हज़ारों करोड़ रुपए के घोटाले में अभियुक्त है। पीएनबी घोटाले के तहत नीरव मोदी और मेहुल चोकसी पर 13 हज़ार करोड़ रुपए के ग़बन का आरोप है।

‘कांतारा में दिखाई गई ‘भूत कोला’ परंपरा हिंदू धर्म के अस्तित्व से पहले की’: अभिनेता चेतन के बयान पर कर्नाटक में FIR, हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का आरोप

कन्नड़ फिल्म ‘कांतारा’ की सफलता के बाद इसकी हर तरफ चर्चा है। फिल्म में ‘भूत कोला’ नाम की एक पुरानी परंपरा को दिखाया गया है। इस परंपरा को लेकर कन्नड़ फिल्मों के अभिनेता चेतन ने बयान दिया है। उनके बयान पर कर्नाटक पुलिस ने लोगों की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने के लिए FIR दर्ज किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े हिंदू जागरण वेदिका ने आरोप लगाया था कि फिल्म कांतारा में इस्तेमाल किए गए ‘भूत कोला’ की परंपरा पर बयान देते हुए एक्टर चेतन ने अपमानजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद वेदिका ने शिकायत में देते हुए कहा कि अभिनेता चेतन के बयान से हिंदुओं की भावना आहत हुई है।

चेतन ने कहा था कि भूत कोला की परंपरा हिंदू धर्म का हिस्सा नहीं है और यह हिंदू धर्म के अस्तित्व में आने से पहले भी मौजूद थी। कांतारा की रिलीज के बाद चेतन ने सोशल मीडिया पर लिखा था, “जैसे हिंदी भाषा को थोपा नहीं जा सकता, वैसे ही लोगों पर हिंदुत्व नहीं थोपा जा सकता। भूत कोला भूमि के मूल निवासियों की परंपरा है। यह हिंदू धर्म के तहत नहीं आएगा।”

फिल्म कांतारा 1847 के कालखंड की कहानी है। इसमें कर्नाटक के तटीय क्षेत्र में एक काल्पनिक गाँव की कहानी को दिखाया गया है। फिल्म में ऋषभ शेट्टी लीड रोल में हैं। 30 सितंबर को रिलीज हुई इस फिल्म को शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है।

वहीं, कांतारा फिल्म का तमिल, हिंदी, तेलुगु और मलयालम वर्जन भी बढ़िया कमाई कर रहा है। इसे 14 अक्टूबर को रिलीज किया गया। फिल्म समीक्षकों के मुताबिक, कांतारा ने दुनिया भर में अब तक 170 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई की है।

देश छोड़ कर फरार होने की फिराक में थी जैकलीन फर्नांडिस, मोबाइल से मिटाए सबूत: ED का खुलासा, ₹200 करोड़ ठगी मामले में कोर्ट से राहत

200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग केस में फँसी हुई जैकलीन फर्नांडिस शनिवार (22 अक्टूबर, 2022) को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुई। इस मामले की सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जैकलीन की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा है कि वह देश छोड़कर भागने की फिराक में थी। साथ ही जैकलीन ने कभी भी जाँच में सहयोग नहीं किया और सबूतों से छेड़छाड़ की है। हालाँकि, इसके बाद भी, कोर्ट ने जैकलीन की अंतरिम जमानत 10 नवंबर तक बढ़ा दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट में कहा है कि जैकलीन कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। बल्कि एक बॉलीवुड अभिनेत्री हैं, जिसके पास बहुत पैसा है और उनका कद प्रभावी और काफी ऊँचा है। इसलिए वह सबूतों और गवाहों को नुकसान पहुँचाकर जाँच को प्रभावित कर सकती हैं।

ईडी ने यह भी कहा है कि जैकलीन ने देश छोड़कर भागने की भी प्लानिंग की थी। हालाँकि, उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी कर दिया गया था जिसके बाद वह भागने में सफल नहीं हो पाईं।

ईडी ने जैकलीन की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए यह भी कहा है कि जैकलीन फर्नांडिस ने कभी भी जाँच में सहयोग नहीं किया। सबूत सामने आने पर ही उस बारे में बताया है। साथ ही, अपने फोन से कुछ सबूत भी डिलीट किए थे। ईडी ने यह भी कहा है कि महाठग सुकेश चन्द्रशेखर से मुलाकात के 10 दिन के अंदर ही जैकलीन को उसके आपराधिक इतिहास के बारे में जानकारी मिल गई थी। लेकिन, वह उससे दूर नहीं हुईं।

जैकलीन ने महाठग सुकेश चन्द्रशेखर से लिए थे करोड़ों के गिफ्ट

बता दें कि ₹215 करोड़ की ठगी के इस मामले में ईडी जैकलीन फर्नांडिस पर लगातार शिकंजा कस रही है। ईडी जैकलीन की 7.27 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर चुकी है। जैकलीन ने यह रकम फिक्स डिपॉजिट के रूप में अपने पास रखी हुई थी।

रिपोर्ट्स की मानें तो सुकेश ने जैकलीन की माँ को लग्जरी कार मासेराती और पॉर्श कार, बहन को उसने 1.50 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.20 करोड़ रुपए) लोन के रूप में दिए थे। वहीं, जैकलीन के भाई को भी 15 लाख रुपए भी दिए गए थे। जैकलीन की बहन अमेरिका में जबकि भाई ऑस्ट्रेलिया में रहता है।

इसके अलावा, महाठग सुकेश ने जैकलीन को डिजाइनर गुच्ची, चैनल एवं वाईएसएल बिर्किन के महँगे बैग व महँगे झुमके गिफ्ट किए थे। वाईएसएल, लुई वुइटन और गुच्ची के जूते, कार्टियर चूड़ियाँ तथा हेमीज़ एवं टिफ़नी के कंगन दिए। इसके अलावा रोलेक्स, रोजर डुबुइस और फ्रेेंक मूलर की लग्जरी घड़ियाँ गिफ्ट की थी।

यही नहीं, सुकेश जैकलीन पर इतना मेहरबान था कि उसने BMW (5) और मिनी कूपर कार भी जैकलीन को गिफ्ट की थी। इसके अलावा, गुच्ची के दो जिमवियर, 52 लाख रुपए का अरबी घोड़ा एस्पुएला, 9-9 लाख रुपए की तीन फारसी बिल्लियाँ भी दी थी। हालाँकि, जैकलीन फर्नांडिस ने बार-बार यह दावा किया है उसने कई सारी चीजें सुकेश चन्द्रशेखर को लौटा दी थी। इस मामले में महाठग सुकेश चन्द्रशेखर फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।

‘गुजरात में AAP को 98 सीटें’: ‘आज तक’ के नाम पर वायरल हो रहे ओपिनियन पोल को चैनल ने बताया फर्जी, नेता ने कहा – पार्टी ग्रुप से मिला स्क्रीनशॉट

इस साल के अंत तक गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों को लेकर सत्ताधारी भाजपा से लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और कॉन्ग्रेस एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। हालाँकि, अभी गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन, इससे पहले ही ओपिनियन पोल आने लगे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर कुछ फेक पोल भी शेयर किए जा रहे हैं। ऐसा ही एक पोल AAP कार्यकर्ता द्वारा शेयर किए जाने के बाद आज तक ने ट्वीट कर पोल को फर्जी बताया है।

यह पोल आम आदमी पार्टी, टोंक के पूर्व जिला उपाध्यक्ष हनुमान सेन द्वारा शुक्रवार (14 अक्टूबर, 2022) को फेसबुक पर शेयर किया गया था। इस पोल में आम आदमी पार्टी को गुजरात में भारी बहुमत के साथ सरकार बनाते हुए दिखाया गया है।

इंडिया टुडे और एक्सिस माई इंडिया के लोगो के साथ शेयर किए इस पोल में हेडिंग के रूप में लिखा हुआ है “गुजरात में बन सकती है ‘आप की सरकार’।” यही नहीं, इसमें, आम आदमी पार्टी को 94-98 सीटें, भाजपा को 67-71 सीटें, कॉन्ग्रेस को 7-11 सीट और अन्य को 0-2 सीट हासिल करते हुए दिखाया गया है।

इस पोल के सामने आने के बाद ‘आज तक’ ने ट्वीट कर इसे फर्जी बताया है। आज तक ने ट्वीट में लिखा है, “ये पोल फर्ज़ी है, हमारी ‘आप’ से अर्ज़ी है, अफवाहें न तो फैलाएँ, न ही इन्हें फैलने दें। इंडिया टुडे ग्रुप ने अभी ऐसा कोई सर्वे नहीं कराया है।”

वहीं, एक्सिस माई इंडिया ने भी फर्जी पोल को लेकर बयान जारी किया है। एक्सिस माई इंडिया ने कहा है “एक्सिस माई इंडिया-इंडिया टुडे ग्रुप ने हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 के लिए किसी भी तरह की ओपिनियन पोल या प्री-पोल नहीं किया है। एक्सिस माई इंडिया-इंडिया टुडे ग्रुप के नाम से फर्जी प्रेडिक्शन और फर्जी ओपिनियन पोल प्रसारित किए जा रहे हैं। हम ऐसी किसी भी फेक जानकारी के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।

एक्सिस माई इंडिया-इंडिया टुडे ग्रुप ईसीआई दिशानिर्देशों के अनुसार मतगणना के दिन से 2-3 दिन पहले हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए एग्जिट पोल प्रेडिक्शन जारी करेगा।”

जब हमने इस पोल को शेयर करने वाले ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ टोंक के पूर्व जिला उपाध्यक्ष हनुमान सेन से बात की तो उन्होंने कहा है कि उन्हें यह स्क्रीनशॉट पार्टी से ग्रुप से मिला था, जिसे उन्होंने फेसबुक पर शेयर कर दिया था। जब हमने उनसे आज तक द्वारा उनके इस पोस्ट को शेयर किए जाने को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

इस फेक पोल को लेकर ट्विटर यूजर मोहित प्रसाद ने लिखा “महा बेशर्म पार्टी है आम आदमी पार्टी, अब आज तक भी बोल रहा है।”

वहीं, अश्विनी वर्मा नामक ट्विटर यूजर ने कहा “इसका नेता फर्जीवाल उसका काम तो फ़र्ज़ी होगा ही। 50 आदमियों की सभा बुलाता है उसमें अपने 5 आदमी दिखाकर उन्हीं से सवाल पूछ कर जवाब लेता है। सब कुछ ठीक से हो रहा है, और वह बोलते हैं हाँ नेताजी हमें तो सब मिल गया। सारा काम अच्छा है। एजेंडा वाला प्रचार मंत्री।”

कुबेर कश्यप नामक ट्विटर यूजर ने तो आम आदमी पार्टी को लोकतंत्र के लिए खतरा बता दिया। उन्होंने लिखा “आम आदमी पार्टी लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है।”

‘उसने इतनी दया तो दिखाई कि पीड़िता को ज़िंदा छोड़ दिया’: हाईकोर्ट ने घटाई बलात्कारी की सज़ा, 4 साल की बच्ची का किया था रेप

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर बेंच ने एक बलात्कारी की सज़ा आजीवन कारावास से बदल कर 20 साल की जेल कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि कम से कम उसमें इतनी दया तो थी कि उसने पीड़िता को ज़िंदा छोड़ दिया। उक्त अपराधी ने मात्र 4 साल की बच्ची का निर्मम बलात्कार किया था। जस्टिस सुबोध अभयंकर और जस्टिस एसके सिंह की पीठ ने ये फैसला सुनाया। पीठ ने कहा कि दोषी करार दिए जाने में कोई गलती नहीं है, लेकिन सज़ा घटाए जाने की माँग भी सही है।

हाईकोर्ट ने कहा, “ऐसी परिस्थितियों में हम ट्रेल कोर्ट द्वारा सबूतों को देख कर सुनाई गई इस सज़ा में कोई खोट नहीं देखते हैं। याचिकाकर्ता ने एक शैतानी घटना को अंजाम दिया ऐसा लगता है कि एक महिला की प्रतिष्ठा के प्रति उसके मन में कोई सम्मान नहीं है। उसने 4 साल की बच्ची का बलात्कार कर के अपनी प्रवृत्ति दिखाई। अतः, हम इस सज़ा को उसके द्वारा अब तक भोगी गई सज़ा की अवधि तक नहीं घटा सकते हैं।”

लेकिन, अदालत ने आगे कहा कि चूँकि उसमें इतनी दयालुता थी कि उसने बच्ची की हत्या नहीं की और बलात्कार के बाद उसे ज़िंदा छोड़ दिया, इसीलिए न्यायालय का विचार है कि आजीवन कारावास की सज़ा को घटा कर 20 वर्ष किया जा सकता है। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसने इस मामले में झूठा फँसाया गया है। उसने दावा किया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट को रिकॉर्ड में नहीं प्रस्तुत किया गया और ये ऐसा मामला नहीं है कि उसे सज़ा मिले।

हालाँकि, पुलिस ने कहा कि बलात्कारी दया का पात्र नहीं है और उसके मामले को ख़ारिज किया जाए। हालाँकि, FSL रिपोर्ट को रिकॉर्ड में न पेश किए जाने को अदालत ने पुलिस की घोर लापरवाही करार दिया। हालाँकि, हाईकोर्ट ने माना कि बाक़ी सभी सबूत बताते हैं कि उस व्यक्ति ने इस अपराध को अंजाम दिया है। इस मामले में प्रत्यक्षदर्शी गवाह के अलावा मेडिकल सबूत भी उसके खिलाफ पाए गए। हाईकोर्ट ने कहा कि बिना किसी शक के अपराध साबित होता है।

नर्स के हाथ-पाँव बाँध कर 5 लोगों ने बारी-बारी से किया रेप, 2 घंटे तक करते रहे ज्यादती: छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के एक सरकारी अस्पताल में एक नर्स के हाथ-पाँव बाँध कर पाँच लोगों ने बारी-बारी से रेप किया। पुलिस ने इस मामले में 4 को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक आरोपित फरार चल रहा है। अंबिकापुर जिले से 2 आरोपितों को पकड़ा गया। घटना झाग्राखण्ड पुलिस थाना की है। पीड़िता परदोल गाँव की रहने वाली है। ये इलाका कोरिया जिले के महेंद्रगढ़ तहसील के अंतर्गत पड़ता है।

झाग्राखण्ड के थानाधिकारी दीपेश सैनी ने ‘इंडिया टुडे’ को बताया कि ये घटना शुक्रवार (22 अक्टूबर, 2022) को एक हेल्थ सेंटर में हुई। दिवाली के कारण उस दिन दोपहर को ही अस्पताल बंद कर दिया गया था। नर्स यहाँ से अपने घर जाने ही वाली थी, तभी 5 लोग आए और उसे बंधक बना लिया। पीड़िता ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया है कि उसके हाथ-पाँव बाँध दिए गए, जिसके बाद तीनों ने बारी-बारी से उसके साथ बलात्कार किया।

उस दिन तक़रीबन शाम के 5 बजे पीड़िता को छोड़ा गया। बलात्कारियों ने उसे धमकी दी कि वो इस घटना के बारे में किसी को भी न बताए। हालाँकि, घर आने के बाद उसने परिवार वालों को अपने साथ हुई क्रूरता के बारे में बताया। इसके बाद वो पुलिस के पास पहुँचे। इसके तुरंत बाद ही दो आरोपित धर-दबोचे गए। तीसरे की तलाश जारी है। पीड़िता का कहना है कि आरोपितों ने गैंगरेप का वीडियो भी बना लिया है। पीड़िता के गाँव में कुछ जवानों को तैनात किया गया है, ताकि स्थिति न बिगड़े।

फ़िलहाल आरोपितों के नाम भी पुलिस ने सार्वजनिक नहीं किए हैं। इस घटना के बाद राज्य में विपक्षी पार्टी भाजपा ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पार्टी की महिला मोर्चा ने जिले में विरोध प्रदर्शन किया। जिस उप-स्वास्थ्य केंद्र में ये घटना हुई है, उसी परिसर में माध्यमिक पाठशाला, आंगनबाड़ी और ग्राम पंचायत भवन भी है। मुख आरोपित 17 साल का नाबालिग बताया जा रहा है। 2 घंटे से भी ज्यादा समय तक वो ज्यादती करते थे रहे।

आतंकी को पनाह देने वाला अजमेर का तौसीफ चिश्ती गिरफ्तार, अब्बा हैं दरगाह के खादिम: कन्हैया लाल के हत्यारे के तार भी यहाँ से जुड़े थे

नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल तेली का गला रेत दिया गया था। इस मामले में हत्यारों के तार अजमेर स्थित ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती दरगाह से जुड़े थे। अब एक और आतंकवादी घटना के तार अजमेर से जुड़े हैं। पंजाब पुलिस की स्पेशल टीम ने शुक्रवार (21 अक्टूबर, 2022) को कार्रवाई करते हुए स्थानीय ‘अंजुमन कमिटी’ के जॉइंट सेक्रेटरी के बेटे तौसीफ चिश्ती को गिरफ्तार किया है।

उस पर आतंकवादी को पनाह देने के आरोप लगे हैं। ये मामला मोहाली के CID मुख्यालय पर गोलीबारी से जुड़ा हुआ है। हमलावरों को अजमेर में पनाह मिली थी। क्लॉक टॉवर थाना पुलिस की मदद से डिग्गी बाजार स्थित एक कैफे में तलाशी के बाद पंजाब पुलिस ने तौसीफ चिश्ती को गिरफ्तार करने में कामयाबी पाई। उसने 5 महीने पहले हुई घटना के हमलावर चरत सिंह को छिपाया था। उसने ही गिरफ़्तारी के बाद तौसीफ चिश्ती का नाम कबूला था।

पंजाब पुलिस तौसीफ चिश्ती को लेकर पंजाब गई है, जहाँ उससे पूछताछ की जा रही है। उसका अब्बा अजमेर दरगाह के खादिमों में से एक है। चरत सिंह को हाल ही में मुंबई से गिरफ्तार किया गया था। चिश्ती को अदालत में पेश करने के बाद पुलिस ने 5 दिन के रिमांड पर लिया है। चरत सिंह की निशानदेही पर पाकिस्तान से मँगाए गए हथियार भी बड़ी संख्या में बरामद हुए थे। 9 मई को चलती कार से मोहाली में हमला किया गया था।

इससे पहले पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्‍या में आरोपित दीपक टीनू राजस्थान के अजमेर से ही दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया था। दिल्ली पुलिस ने ये कार्रवाई की थी। वो मनसा से पुलिस की हिरासत से भाग निकला था। 1 अक्टूबर को सीआईए इंचार्ज टीनू को उसकी गर्लफ्रेंड से मिलाने के लिए सरकारी आवास पर लेकर गए थे। यहीं वह मौका देख फरार हो गया। पुलिस ने उसकी बहुत तलाश की। एयरपोर्ट पर आने-जाने वाले यात्रियों का पता लगवाया। लेकिन कुछ पता नहीं चला। राजस्थान में उसके छिपे होने की खबर आने पर पुलिस ने ये कार्रवाई की।

OYO के कमरे में गुप्त कैमरा, प्रेमी जोड़ों के वीडियो बना कर करते थे ब्लैकमेल: यूपी पुलिस ने अब्दुल सहित वसूली गिरोह के 4 को दबोचा, जामताड़ा से कनेक्शन

उत्तर प्रदेश की नोएडा पुलिस ने ओयो (OYO) होटल्स के कमरों में गुप्त कैमरे लगाकर वीडियो बनाने और फिर ब्लैकमेल कर पैसे वसूलने वाले गिरोह के चार लोगों को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीते दिनों एक लड़का अपनी महिला मित्र के साथ ओयो होटल में रुका था। इसके कुछ दिन बाद उसे होटल रूम का पर्सनल वीडियो भेजा गया। वीडियो भेजने वाले लोगों ने उससे पैसों की माँग की। जब लड़के ने पैसे भेजने से मना कर दिया तो इन लोगों ने वीडियो वायरल करने की धमकी दी थी। इसके बाद, लड़के ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

इस मामले में नोएडा सेंट्रल के एडीसीपी साद मियाँ खान ने कहा, “फेज 3 पुलिस स्टेशन में सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति अपनी महिला मित्र के साथ एक होटल में रुका था। लेकिन कुछ समय बाद उसे होटल में रुकने का वीडियो मिला और उससे रंगदारी की माँग की गई।”

उन्होंने आगे कहा कि इस मामले की जाँच करते हुए पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया था। इन आरोपितों ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया कि वे कुछ दिन पहले उसी होटल के कमरे में रुके थे और वहाँ कैमरा लगाया था। बाद में जब ये पीड़ित लड़का और उसकी दोस्त वहाँ गए तो इन लोगों ने वीडियो रिकॉर्ड कर पैसे की माँग की।”

पुलिस ने जानकारी दी कि इसके अलावा, गिरफ्तार आरोपितों ने एक गिरोह के बारे में भी बताया जो बैंक पासबुक, सिम, एटीएम और अन्य बैंक सुविधाओं से युक्त किट उपलब्ध कराता है। इसमें किट बेचने वाले रैकेट के दो व्यक्ति शामिल पाए गए हैं, जिनमें से एक को गिरफ्तार कर लिया गया है। इनके संबंध जामताड़ा से भी पाए गए हैं।”

एडीसीपी साद मियाँ खान ने खुलासा करते हुए कहा है कि इन लोगों ने हाल ही में एक कॉल सेंटर चलाने वाले अनुराग को एक किट बेची थी। अनुराग 3 अवैध कॉल सेंटर चला रहा था और ड्यूटी-फ्री आईफोन बेच रहा था जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है। अनुराग के लास लैपटॉप सहित विभिन्न सामग्री जब्त की गई है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपितों की पहचान खोड़ा निवासी अब्दुल वहाव, विष्णु सिंह निवासी गढ़ी चौखंडी, पंकज कुमार निवासी नोएडा और अनुराग कुमार निवासी विजय नगर गाजियाबाद के रूप में की है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि आरोपितों के खिलाफ नोएडा फेज 3 पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) 386 (मौत/गंभीर चोट के डर से रंगदारी) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने इन लोगों से 11 लैपटॉप, सात सीपीयू, 21 मोबाइल, 22 एटीएम कार्ड और अन्य कंप्यूटर सामग्री भी जब्त की है।