दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार (18 अक्टूबर, 2022) को दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के मामले में जेएनयू (JNU) के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद (Umar Khalid) की जमानत याचिका खारिज कर दी। जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस रजनीश भटनागर की खंडपीठ ने फरवरी 2020 में हुए दंगों को लेकर यह फैसला सुनाया है। उमर खालिद के खिलाफ इस घटना को लेकर बड़ी साजिश रचने का आरोप है। इसके साथ ही उस पर IPC के साथ-साथ UAPA के तहत भी मामला चल रहा है।
अदालत ने कहा, “हमें जमानत याचिका में कुछ ऐसा खास नहीं दिखता, जिसके दम पर जमानत दी जाए। इसलिए, इस याचिका को खारिज किया जाता है।”
दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे के मामले में पुलिस ने खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा है कि उसने फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों की व्यापक साजिश से जुड़े यूएपीए मामले में जमानत की माँग की थी। सुनवाई के दौरान खालिद की ओर से कोर्ट में यह दलील दी गई कि इस हिंसा में उनकी कोई आपराधिक भूमिका नहीं थी और न ही इस मामले के किसी भी आरोपित के साथ उसका कोई आपराधिक संबंध है।
कोर्ट ने 9 सितंबर 2022 को वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पैस और स्पेशल प्रॉसिक्यूटर अमित प्रसाद की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। खालिद की ओर से त्रिदीप पैस और दिल्ली पुलिस की ओर से अमित प्रसाद पेश हुए थे। हाई कोर्ट में दलीलें 20 दिनों से अधिक समय तक चलीं। मार्च 2022 में दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत के जमानत देने से इनकार करने पर JNU के पूर्व छात्र नेता ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। तब से वह जेल में ही है।
इसके बाद अप्रैल 2022 में खालिद की जमानत पर बहस शुरू हुई थी। उमर खालिद की अमरावती में दी गई स्पीच को दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने भड़काऊ और आपत्तिजनक माना था। साल 2020 के दिल्ली दंगों के मुख्य साजिशकर्ता की जमानत याचिका को न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने खारिज कर दिया था। उन्होंने सवाल किया था कि जब खालिद ‘इंकलाब’ और ‘क्रांतिकारी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहा था, तब उसके लिए इसका क्या मतलब था।
अदालत ने कहा था, “क्या ये कहना कि जब आपके पूर्वज अंग्रेजों की दलाली कर रहे थे, गलत नहीं है? अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला देकर ऐसे भड़काऊ बयान नहीं दिए जा सकते। लोकतंत्र में इसकी इजाजत नहीं है।” पीठ ने पूछा था, “क्या आपको नहीं लगता कि इस्तेमाल किए गए ये भाव लोगों भड़काने वाला है? यह पहली बार नहीं है जब आपने अपने भाषण में ऐसा कहा है। आपने यह कम से कम पाँच बार कहा। यह लगभग ऐसा है जैसे कि भारत की आजादी की लड़ाई केवल एक समुदाय ने लड़ी थी।”
पीठ ने सवाल उठाया कि क्या गाँधी जी या शहीद भगत सिंह जी ने कभी इस भाषा का इस्तेमाल किया था?
रोजर बिन्नी को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) का नया अध्यक्ष चुन लिया गया है। मुंबई में मंगलवार (18 अक्टूबर 2022) को बीसीसीआई की वार्षिक आम बैठक (AGM) में यह फैसला लिया गया। अब रोजर बिन्नी बीसीसीआई के 36वें अध्यक्ष के तौर पर पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली की जगह लेंगे। उनके अलावा जय शाह को लगातार दूसरी बार सर्वसम्मति से बोर्ड का सचिव चुना गया। इन दोनों के अलावा जिन अन्य पदाधिकारियों को निर्विरोध चुना गया, उनमें कोषाध्यक्ष आशीष शेलार, उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला और संयुक्त सचिव देवजीत सैकिया शामिल हैं।
नए अध्यक्ष एंग्लो-इंडियन
रोजर बिन्नी अपने जमाने में ऑलराउंडर खिलाड़ी रह चुके हैं। उन्होंने भारत को 1983 में वर्ल्ड कप खिताब भी जिताया है। क्रिकेट बोर्ड के नए अध्यक्ष एंग्लो-इंडियन हैं। उनका पूरा नाम रोजर माइकल हम्फ्री बिन्नी (Roger Michael Humphrey Binny) है। उनका जन्म भारत में हुआ है और वह यही पले-बढ़े। उनका परिवार मूल रूप से स्कॉटलैंड का रहने वाला है, जो बाद में भारत में आकर बसे थे। बेंगलुरु में रहने वाले रोजर बिन्नी कई पदों पर रहे हैं।
वह एक ऑलराउंडर होने के साथ शानदार आउट स्विंगर गेंदबाज भी रहे हैं। उनके बेटे स्टुअर्ट बिन्नी भी भारत के लिए इंटरनेशन मैच खेल चुके हैं। वहीं, उनकी बहू मयंती लैंगर भी स्पोर्ट्स एंकरिंग का बड़ा नाम हैं। बीसीसीआई के नए अध्यक्ष ने अपने दोस्त की बहन से शादी की। उनकी तीन संतान है। लॉरा, लीसा बेटियाँ हैं और स्टुअर्ट बिन्नी बेटे, जिन्हें क्रिकेट को जानने वाला हर कोई जानता है।
बेटे स्टुअर्ट के चयन को लेकर विवाद
तीन साल तक बीसीसीआई (BCCI) में सेलेक्टर के पद पर रहे रोजर अपने बेटे स्टुअर्ट के चयन को लेकर विवादों में आए थे। उस वक्त उन्होंने कहा था कि जब उनके बेटे का नाम चयन समिति के पास आया था, तब वह मीटिंग से बाहर चले गए थे। हालाँकि, दूसरी ओर यह भी कहा गया कि स्टुअर्ट बिन्नी का क्रिकेटिंग करियर तब तक ही रहा, जब तक उनके पिता रोजर चयन समिति में शमिल रहे। उस समय संदीप पाटिल चीफ सेलेक्टर थे।
बात करें रोजर बिन्नी के रिकॉर्ड की तो इंटरनेशनल स्तर पर 1979-87 के दौरान भारत के लिए उन्होंने 27 टेस्ट और 72 वनडे इंटरनेशनल मैचों में भाग लिया था। 1979 में पाकिस्तान के खिलाफ बेंगलुरु टेस्ट से उन्होंने इंटरनेशनल मैच में अपना डेब्यू किया था। बताया जाता है कि बिन्नी ने अपने टेस्ट करियर में 3.63 के औसत से 47 विकेट लिए हैं। वहीं, वनडे इंटरनेशनल में उनके नाम पर 29.35 के एवरेज से 77 विकेट दर्ज हैं। इसके अलावा बैटिंग में भी उनका कोई जवाब नहीं है।
उनके नाम पर टेस्ट में 830 और वनडे इंटरनेशनल में 629 रन दर्ज हैं। बता दें कि बिन्नी को गोल्फ खेलना, प्रकृति से प्रेम करना और खाली समय में अपने खेतों में जाकर समय बिताना बेहद पसंद है।
मंगलवार (18 अक्टूबर, 2022) को सुबह से ही #Halal_Free_Diwali (हलाल फ्री दिवाली) ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है। ऐसा कहा जा रहा है कि ‘हलाल’ प्रोडक्ट का सहारा लेकर करोड़ों रुपए जुटाए जा रहे हैं और इसका उपयोग मजहबी विस्तार और देश विरोधी गतिविधियों में किया जा रहा है।
दरअसल, वर्तमान समय में सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का सबसे बेहतरीन माध्यम है। ऐसे में, हिन्दू अपने पवित्र त्योहार दिवाली के पहले ट्विटर पर #Halal_Free_Diwali कैम्पेन चला रहे हैं। इस कैम्पेन के जरिए लोग अपने त्योहार को ‘हलाल’ का प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाले उत्पादों से दूर रखना चाहते हैं।
हलाल फ्री दिवाली कैम्पेन में फूड चैन और डिलीवरी एप्स चलाने वाली कंपनियों को भी निशाना बनाते हुए ट्वीट्स किए गए हैं। इन कम्पनियों से पूछा जा रहा है कि आखिर हिंदुओं पर हलाल प्रोडक्ट क्यों थोपा जा रहा है?
हलाल फ्री दिवाली को लेकर अभियान चला रहे हिन्दू संगठन ‘हिंदू जनजागृति समिति’ ने भी हिंदुओं से हलाल उत्पादों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है। संगठन ने दावा किया है कि इस साल की दिवाली ‘हलाल’ फ्री होगी।
बेंगलुरु में ‘हलाल फ्री दिवाली ‘ को लेकर हिंदू जनजागृति समिति ने किया आंदोलन
इस अभियान को लेकर हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदे ने कहा है कि हलाल उत्पादों का विरोध और इसका बहिष्कार महाराष्ट्र और कर्नाटक में शुरू हो गया है और धीरे-धीरे यह पूरे देश में फैल जाएगा। समिति ने बेंगलुरु में केएफसी और मैकडोनाल्ड रेस्टॉरेंट्स के बाहर ‘हलाल प्रोडक्ट’ के खिलाफ प्रदर्शन किया है।
उन्होंने यह भी पूछा कि दिवाली अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने वाला त्योहार है, ऐसे में क्या हम इस त्योहार अपने देश और धर्म को अंधेरे में लेकर जाएँगे? उन्होंने बताया कि कैसे जिस तरह से चीन भारत में अपनी वस्तुएँ बेचकर हमारे देश और जवानों के खिलाफ षड्यंत्र कर रहा है, उसी प्रकार हलाल इकोनॉमी भारत के खिलाफ जिहाद को बढ़ावा दे रही है। साथ ही कहा कि आज इसी हलाल इकॉनमी के बल पर देश में आतंकवादियों का काम चल रहा है।
इस वर्ष ‘हलाल मुक्त दीपावली’ मनाएं ! – @Ramesh_hjs
रमेश शिंदे ने सवाल किया है कि पिज्जा हट, केएफसी या मैकडॉनल्ड्स जैसे फूड आउटलेट केवल हलाल खाना ही क्यों परोसते हैं? उन्होंने सवाल दागा कि हिंदू ग्राहकों को हलाल खाना ही खाने के लिए मजबूर क्यों किया जा रहा है। जहाँ हलाल खाना परोसा जाता है, वहाँ पोर्क और पेपरोनी पिज्जा नहीं परोसा जाता है, आखिर ऐसा भेदभाव क्यों?
बैंगलोरमें ‘हलाल फ्री दिवाली ‘ को लेकर हिंदू जनजागृति समिति ने किया आंदोलन
उन्होंने यह भी कहा है कि सभी मानदंड केवल हिंदुओं के लिए ही क्यों हैं। हिंदू देश की आबादी का 80 प्रतिशत है फिर भी उनके लिए ये हलाल मानदंड हैं। उन्होंने आगे कहा कि हलाल सर्टिफिकेट देना अवैध है। उन्होंने कहा कि इसे हटाने के लिए हमें संघर्ष करना होगा और सरकार की ओर से ऐसा कोई सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि सरकार के केवल दो विभाग जो खाद्य लाइसेंसिंग करते हैं, वे एफएसएसएआई और एफडीए हैं और यह हलाल सार्टिफिकेट अवैध है। हलाल सार्टिफिकेट केवल मांस के निर्यात के लिए है, न कि देश में हो रहे अन्य खाद्य उत्पादों के लिए।
वहीं, एक अन्य हिन्दू संगठन ‘श्री राम सेना’ के प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने ‘हलाल फ्री दीपावली’ उत्सव का आह्वान करते हुए कहा है कि मुस्लिम व्यापारियों और विक्रेताओं से ‘पूजा सामग्री’ खरीदना शास्त्रों के खिलाफ होगा।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम विक्रेताओं से ‘पूजा सामग्री’ खरीदना हिंदू संस्कृति और परंपरा के खिलाफ होगा। हम हिंदुओं से पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे गन्ना, फूल, फल और केले के पौधे मुस्लिम विक्रेताओं से नहीं खरीदने का आग्रह करेंगे। हिन्दू, पूजन सामग्री हिन्दू व्यापारियों से ही खरीदें।
हलाल सर्टिफिकेशन को बड़ा घोटाला बताते हुए प्रमोद मुतालिक ने कहा कि इसे सरकारी मान्यता नहीं होने के बस भी इसे हिंदुओं पर थोपा जा रहा है। मुस्लिम संगठन ‘जमात-ए-उलेमा-हिंद हलाल ट्रस्ट’ दवाओं, भोजन और अन्य वस्तुओं पर हलाल सर्टिफिकेट जारी कर रहा है। हल्दीराम जैसी बड़ी कंपनी के भी 140 से अधिक प्रोडक्ट हलाल सार्टिफिकेट के अंतर्गत हैं।
झटका Vs हलाल मीट
बता दें कि ‘झटका‘ हिन्दुओं, सिखों आदि भारतीय, धार्मिक परम्पराओं में ‘बलि/बलिदान’ देने की पारम्परिक पद्धति है। इसमें जानवर की गर्दन पर एक झटके में वार कर रीढ़ की नस और दिमाग का सम्पर्क काट दिया जाता है, जिससे जानवर को मरते समय दर्द न्यूनतम होता है। इसके उलट हलाल में जानवर की गले की नस में चीरा लगाकर छोड़ दिया जाता है, और जानवर खून बहने से तड़प-तड़प कर मरता है।
इसमें भी बड़ी बात यह है कि किसी मांसाहारी प्रोडक्ट के हलाल होने का मतलब यह होता है कि जानवर को मुस्लिमों द्वारा ही काटा जाना चाहिए। यदि किसी और के द्वारा काटा जाता है तो इसे मुस्लिम गैर-हलाल बताते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि हलाल और गैर-हलाल मांस के चलते लगभग सभी बूचड़खानों में केवल मुस्लिमों को ही नौकरी में रखा जाता है। इसका कारण यह है कि कोई भी हलाल और गैर-हलाल के लिए अलग-अलग बूचड़खाने खोलना अपेक्षाकृत महंगा साबित होगा।
‘हलाल उद्योग’ कोई छोटा-मोटा उद्योग नहीं है। वास्तव में, यह 3 अरब डॉलर से अधिक की कमाई वाला उद्योग है, जहाँ सिर्फ हलाल माँस के लिए मुस्लिमों को काम पर रखा जाता है। इसी हलाल के चलते ऐसे लाखों लोग खासतौर से दलित वर्ग के लोग जो परंपरागत रूप से ‘कसाई’ का काम करते आ रहे हैं, वह बेरोजगार हो चुके हैं।
‘Dr. झटका’ और ‘King of झटका revolution’ कहे जाने वाले रवि रंजन सिंह ने ऑपइंडिया से बात करते हुए ‘हलाल’ के आर्थिक पहलू की बात की थी। उन्होंने समझाते हुए कहा था कि किसी भी भोज्य पदार्थ, चाहे वे आलू के चिप्स क्यों न हों, को ‘हलाल’ तभी माना जा सकता है जब उसकी कमाई में से एक हिस्सा ‘ज़कात’ में जाए- जिसे वे जिहादी आतंकवाद को पैसा देने के ही बराबर मानते हैं।
दिक्कत ये है कि हमारे पास यह जानने का कोई ज़रिया नहीं है कि ज़कात के नाम पर गया पैसा ज़कात में ही जा रहा है या जिहाद में। और जिहाद काफ़िर के खिलाफ ही होता है- जब तक यह इस्लाम स्वीकार न कर ले! ‘हलाल इंडिया’ के एक उच्चाधिकारी ने शाकाहारी खाद्य पदार्थों को ‘हलाल सर्टिफिकेट’ देने की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कहा था कि उनके अधिकारी फैक्ट्रियों तक जाते हैं और ये भी पता करते हैं कि रॉ-मैटेरियल्स कहाँ से आते हैं।
दिल्ली के शादीपुर इलाके में नितेश चौधरी नाम के युवक की 3 मुस्लिम आरोपितों द्वारा हत्या के बाद 16 अक्टूबर, 2022 को हिन्दू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस पूरे घटनाक्रम पर हम अपनी पिछली ग्राउंड रिपोर्ट में बता चुके हैं कि मृतक के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर असंतोष जताया है। इसी के साथ उन्होंने इलाके में मुस्लिमों द्वारा अपनी बहन-बेटियों को छेड़ने की भी जानकारी दी। इसी कड़ी में हमसे बात करते हुए स्थानीय वार्ड पार्षद ने बताया कि देश भर में सोची समझी साजिश के तहत ऐसी हत्याएँ हो रहीं हैं।
इसी के साथ उन्होंने वहाँ के हिंदुओं को धर्मनिरपेक्ष बताते हुए ऐसी घटना उम्मीद के परे होना बताया।
‘हम उनके घरों में ईद की सेवईं खाते थे पर उन्होंने ये क्या किया \?’
ऑपइंडिया से बात करते हुए रंजीत नगर के वार्ड नंबर 96 से पार्षद तेजराम ने कहा कि उन्होंने अपना जीवन भाईचारे के सिद्धांत पर चल कर बिताया। तेजराम के मुताबिक, उन्होंने मुस्लिम बस्तियों में जा कर उनके साथ ईद मनाई है और मुस्लिमों के तमाम बच्चों को खुद पढ़ाया है। पार्षद ने कहा कि वो लोग एक साथ क्रिकेट भी खेलते थे और मुस्लिमों के स्कूल पढ़ने गए बच्चों को घर छोड़ कर आते थे। उन्होंने कहा कि पहले की पीढ़ी में इतना जहर नहीं था, लेकिन अब मुस्लिमों में जो नई पीढ़ी निकल रही है उसमें नफरत कौन भर रहा है – इसकी बाकायदा जाँच होनी चाहिए।
पाकिस्तान के शरणार्थी बसाए गए थे यहाँ
पार्षद तेजराम के अनुसार, आज़ादी के समय 1947 में हुए विभाजन के बाद पटेल नगर में पाकिस्तान से आए कई सिख और हिन्दू शरणार्थियों को सरकार द्वारा बसाया गया था। उन्होंने कहा कि बाद में यहाँ मुस्लिम परिवार आए, पर हिन्दुओं या सिखों ने कभी उनसे बैर-भाव नहीं रखा। तेजराम ने आगे बताया कि अगर छोटा-मोटा विवाद हुआ भी था तो उस पर नितेश की मार हत्या करना बहुत ही गलत काम हुआ है।
‘हमारे ही बच्चे मारे गए और उन्हीं को जेल भी भेजा’
पिछले साल की घटना का जिक्र करते हुए पार्षद तेजराम ने कहा कि डॉक्टर सिद्दीकी के क्लिनिक के पास बवाल किया गया था। उन्होंने कहा कि तब हमारे ही बेटों को हमलावरों ने पीटा था और पुलिस ने पीड़ितों को ही जेल भी दिया था, जिसे हमने बर्दाश्त कर लिया था। तेजराम ने ये भी बताया कि जिस से विवाद हुआ वो उनके ही गाँव में दुकान चलाता है लेकिन फिर भी उसे कुछ नहीं कहा गया, क्योकि हिन्दू शांतिप्रिय लोग हैं। हालाँकि, तेजराम ने आगे पूरी दिल्ली और उदयपुर सहित भारत का जिक्र करते हुए बताया कि अब हर कहीं चुन-चुन कर मारा जा रहा है।
लड़कियों के साथ होने वाले छेड़छाड़ के आरोप पर हुए सवाल का पार्षद तेजराम ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो 6 फीट के जवान लड़के की हत्या कर सकते हैं, उनके लिए लड़कियाँ छेड़ना और उन्हें परेशान करना कोई बड़ी बात नहीं है। इसी के साथ तेजराम ने आगे कहा कि अगर ऐसे ही एकतरफा घटनाएँ होती रहेंगी तो आगे का समय बहुत मुश्किल होने वाला है। पार्षद ने अपनी सबसे पहली प्राथमिकता को शांति और सुरक्षा को बताया।
अमन कमेटी की मीटिंग में करते हैं अच्छी-अच्छी बातें
पार्षद तेजराम ने कहा कि अमन कमेटी में दूसरी तरफ के जनप्रतिनिधि बहुत अच्छी-अच्छी बातें करते हैं। हालाँकि, उन्होंने कहा कि ऐसा होगा किसी ने सोचा भी नहीं था। पार्षद के तौर पर तेजराम ने कहा कि उन्होंने जो भी विकास कार्य करवाए हैं, उसमें कभी हिन्दू या मुस्लिम नहीं देखा – फिर भी ऐसी घटना होना कहीं न कहीं चिंता का विषय है। देश भर में एक जैसी हो रही घटनाओं को तेजराम ने सोची समझी साजिश का हिस्सा होने का शक जताया।
ब्रिटिश इंडिया के आखिरी वायसराय रहे लॉर्ड लुइस माउंटबेटन (Lord Mountbatten) पर 1970 के दशक में उत्तरी आयरलैंड के बेलफास्ट में बॉयज होम में दो बार 11 वर्षीय लड़के का यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया गया था। पीड़ित की पहचान आर्थर स्मिथ के रूप में की गई है। उसने आरोप लगाया था कि यह घटना 1977 में किनकोरा बॉयज होम में हुई थी। स्मिथ के अनुसार, 2 साल बाद 1979 में उसे आरोपित के बारे में पता चला।
लॉर्ड लुइस माउंटबेटन ब्रिटिश शाही परिवार के सदस्य और मौजूदा प्रिंस चार्ल्स III के चाचा थे। स्मिथ अब 56 साल के हैं और ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं। उन्होंने किनकोरा में बच्चों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने में विफल रहने पर पुलिस सहित स्थानीय निकायों के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। याद हो कि लॉर्ड माउंटबेटन की पत्नी एडविना के साथ अक्सर जवाहरलाल नेहरू का नाम जोड़ा जाता है और एडविना की सिगरेट जलाते हुए उनकी तस्वीर भी वायरल होती है।
केआरडब्ल्यू लॉ-एलएलपी के केविन विंटर्स अदालत में पीड़ित का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने कहा, “मैं इस मामले को सबके सामने लाने के लिए आर्थर की बहादुरी की सराहना करता हूँ। अधिकतर मामलों में यौन उत्पीड़न के शिकार कई लोग खामोश रहना ही पसंद करते हैं। उन्होंने कहा, “पुलिस और स्थानीय निकायों के असंवेदनशील रवैये के कारण उसमें आक्रोश है। यही कारण है कि आर्थर ने इस तरह से अपनी पहचान उजागर की है। उसके निर्णय को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।”
Though allegations have long circulated, this is the first time accusations of paedophile abuse against Lord Mountbatten—King Charles’ great-uncle—will be aired in court.
विंटर्स ने कहा, “वह अच्छी तरह से समझता है कि इस मामले में कई लोगों की कलई खुलेगी। यह अपराधियों, संस्थानों या अन्य एजेंसियों को उजागर करने सहित कई कारणों से लिया गया निर्णय है, जिन्होंने सच्चाई को दबाने में मदद की। हमारे मुवक्किल ने अपने साथ हुए घृणित कार्य को सबके सामने लाने के लिए काफी कुछ सहा है। उसने पूरे आत्मविश्वास के साथ इसे सार्वजनिक मंच पर लाने का निर्णय लिया है।”
इस साल सितंबर में बेलफास्ट हेल्थ एंड सोशल केयर ट्रस्ट, बिजनेस सर्विसेज ऑर्गनाइजेशन, यूके सेक्रेटरी ऑफ स्टेट, पीएसएनआई के चीफ कांस्टेबल और स्वास्थ्य विभाग सहित कई संस्थानों को इस मामले में पूर्व कार्रवाई को लेकर पत्र जारी किए गए थे।
लॉर्ड माउंटबेटन की कमजोरी थे युवा लड़के: एफबीआई
अगस्त 2019 में ‘द डेली मिरर’ ने डीक्लासिफाइड फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) फाइलों का हवाला देते हुए बताया था कि ब्रिटिश इंडिया के पूर्व वायसराय युवा लड़कों के साथ समलैंगिक रिश्ते बनाने के लिए काफी आतुर रहते थे। कथित फाइलों का पता इतिहासकार एंड्रयू लोनी ने लगाया था, जिन्होंने अपनी पुस्तक ‘द माउंटबेटन्स: देयर लाइव्स एंड लव्स’ के लिए शोध सामग्री एकत्रित करने के लिए सूचना की स्वतंत्रता कानून का इस्तेमाल किया था।
‘द डेली मिरर’ ने लॉर्ड माउंटबेटन को यह कहते हुए कोट किया था, “(हमने) अपना सारा विवाहित जीवन दूसरे के बिस्तर पर बिताया।” लोनी की किताब के अनुसार, लॉर्ड माउंटबेटन की पसंदीदा जगह एक एक ऐसा वेश्यालय था, जहाँ समलैंगिक संबंध बनाए जाते थे। यहाँ नौसेना के अधिकारी अक्सर आते-जाते रहते थे। लॉर्ड माउंटबेटन, जिनकी 1979 में प्रोविजनल आयरिश रिपब्लिकन आर्मी (IRA) द्वारा हत्या कर दी गई थी, की अमेरिका द्वारा 3 दशकों से अधिक समय तक जासूसी की गई थी।
मिरर की रिपोर्ट का स्क्रीनग्रैब
एंथनी डेली का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया, “सेना की वर्दी में सुंदर युवा पुरुष और स्कूल की वर्दी में सुंदर लड़के – माउंटबेटन को ये आकर्षित करते थे।” 1944 में एक साक्षात्कार में अमेरिकी लेखक एलिजाबेथ डे ला पोएर बेरेसफोर्ड ने कहा था, “लॉर्ड लुइस माउंटबेटन और उनकी पत्नी को बेहद निम्न मानसिकता वाला व्यक्ति माना जाता है।” FBI ने उन्हें यह कहते हुए कोट किया, “लॉर्ड लुइस माउंटबेटन को युवा लड़कों के साथ समलैंगिक रिश्ते बनाने के लिए जाना जाता था। इसके चलते वह किसी भी प्रकार के सैन्य अभियानों को निर्देशित करने के लिए एक अयोग्य व्यक्ति थे।”
एक अन्य संघीय दस्तावेज के अनुसार, मई 1968 में लॉर्ड लुई माउंटबेटन की समलैंगिकता को लेकर एक राजनयिक एंथनी न्यूटिंग और पूर्व ब्रिटिश पीएम एंथनी ईडन के साथ चर्चा की गई थी। हाल के दिनों में, इतिहासकार एंड्रयू लोनी ने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और एडविना माउंटबेटन के बीच साझा किए गए व्यक्तिगत पत्रों का पता लगाने की कोशिश की थी, हालाँकि वे असफल रहे।
बेलफास्ट में लड़कों का घर
2017 में, हिस्टोरिकल इंस्टीट्यूशनल एब्यूज इंक्वायरी द्वारा की गई एक जाँच में पाया गया कि किनकोरा बॉयज होम में उसके मालिक विलियम मैकग्राथ द्वारा 39 लड़कों का यौन शोषण किया गया था। यह जाँच सेवानिवृत्त न्यायाधीश एंथनी हार्ट द्वारा की गई थी। उनके अनुसार, पुलिस (रॉयल अल्स्टर कांस्टेबुलरी) इस मामले की जाँच करने में पूरी तरह से नाकाम रही। उन्होंने कहा कि अगर उचित जाँच की गई होती तो कई पीड़ितों को बचाया जा सकता था।
कथित तौर पर, बॉयज होम के तीन पूर्व कर्मचारी, मैकग्राथ, रेमंड सेम्पल और जोसेफ मेन्स को 1981 में कुल 11 लड़कों का यौन शोषण करने के आरोप में गिरफ्त में लिया गया था। इस होम को Protestant Paramilitary Organisation के एक सदस्य द्वारा चलाया जा रहा था। हालाँकि, न्यायाधीश ने इन दावों को खारिज कर दिया था कि किनकोरा बॉयज होम में एक समलैंगिक वेश्यालय संचालित किया जा रहा था और ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियाँ रसूखदार नेताओं की जासूसी करने के लिए आरोपित पीडोफाइल को ब्लैकमेल कर रही थीं।
उन्होंने कहा, “हमारी जाँच में यह दिखाने के लिए कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिला है कि किनकोरा में स्थानीय लोगों के यौन शोषण में दूसरों लोगों की संलिप्तता के बारे में वर्षों से लगाए गए आरोपों का कोई आधार है, या फिर सुरक्षा एजेंसियों की इसमें कोई मिलीभगत थी।”
जम्मू-कश्मीर में शांति आतंकवादियों को बर्दाश्त नहीं होती। वे कुछ न कुछ करके अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश करते हैं। हाल के दिनों में यहाँ टारगेट किलिंग की घटनाएँ बढ़ सी गई हैं। आतंकवादी कश्मीर के बाहर के गरीब मजदूरों को और यहाँ रह रहे कश्मीरी पंडितों को अपना निशाना बनाते हैं। अभी पिछले हफ्ते ही आतंकवादियों ने पूरन कृष्ण भट्ट नाम के कश्मीरी पंडित की हत्या कर दी थी और अब दो मजदूरों पर हरमन इलाके में ग्रेनेड से हमला किया गया।
हमले में दोनों मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालाँकि, दोनों को बचाया नहीं जा सका। ‘इंडिया डॉट कॉम‘ की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों (मनीष कुमार और राम कुमार) उत्तरप्रदेश के कन्नौज के रहने वाले थे और कश्मीर के शोपियाँ स्थित हरमन इलाके में रहते थे।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी), कश्मीर, विजय कुमार ने एक ट्वीट में कहा, “लश्कर का एक ‘हाइब्रिड’ आतंकवादी, जिसने ग्रेनेड फेंका था उसे तलाशी अभियान के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया।” उन्होंने कहा कि गिरफ्तार आतंकवादी की पहचान हरमन के इमरान बशीर गनी के रूप में हुई है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने कहा कि मामले के संबंध में आगे की जाँच और तलाशी जारी है।
‘जी न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बयान दिया है। उन्होंने कहा, “कन्नौज के दो मजदूरों की कश्मीर में हत्या हुई है। उसको लेकर केंद्र सरकार और गृह मंत्री लगातार काम कर रहे हैं, यूपी से ही देश के प्रधानमंत्री भी हैं। उत्तर प्रदेश के लोग सुरक्षित रहे, इसको लेकर केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार दोनों काम कर रही हैं।”
वहीं बीते सप्ताह कश्मीरी पंडित पूरन कृष्ण भट्ट की हत्या को लेकर भी लोगों में काफी रोष है। लोगों ने सोमवार को हत्या के विरोध में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कार्यालय के बाहर धरना भी दिया था।
तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक प्लस (OPEC Plus) ने प्रतिदिन 20 लाख बैरल तेल कटौती की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद से ऐसा कहा जा रहा था कि अमेरिका और सऊदी अरब के संबंध और भी अधिक खराब होने जा रहे हैं। ओपेक प्लस के इस फैसले के बाद अमेरिका ने कहा भी था कि सऊदी अरब ने यह काम रूस को फायदा पहुँचाने के उद्देश्य से किया है। इस बीच सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के चचेरे भाई प्रिंस सऊद अल शालान ने अमेरिका का नाम लिए बिना पश्चिमी देशों को ‘जिहाद’ की धमकी दी है।
प्रिंस सऊद अल शालान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में शालान ने किसी का भी नाम नहीं लिया है। हालाँकि, इसे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के खिलाफ धमकी के रूप में देखा जा रहा है। वीडियो में, सऊद अल सलमान ने कहा, “पश्चिम के देशों को मैं यह कहना चाहता हूँ कि यदि कोई भी सऊदी अरब और शाही परिवार के अस्तित्व को चुनौती देगा तो हम सभी जिहाद और शहादत के लिए ही बने हैं। ये उन सभी के लिए है जिन्हें लगता है कि वे हमें धमका सकते हैं।”
सऊदी अरब के मानवाधिकार वकील अब्दुल्लाह अलाउध के अनुसार, प्रिंस साऊद अल शालान कबीलाई नेता हैं और वह सऊदी अरब के संस्थापक रहे किंग अब्दुल अजीज के पोते हैं। शालान का यह बयान तब सामने आया है जब अमेरिका सऊदी अरब द्वारा तेल उत्पादन में कटौती करने को लेकर लगातार जुबानी हमले बोल रहा है।
बता दें कि सऊदी अरब तेल का सबसे बड़ा निर्यातक है। ऐसे में आगे आने वाले समय में अमेरिका और सऊदी अरब के संबंध खराब होते हैं अमेरिका में तेल और गैस के दाम आसमान छू सकते हैं। जिसका असर न केवल अमेरिका बल्कि अन्य देशों पर भी पड़ेगा। यही नहीं, सऊदी अरब द्वारा तेल उत्पादन में कमी करने के फैसले से भी दुनिया भर में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है।
गौरतलब है कि अमेरिका राष्ट्रपति जो बाइडन ने सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में सऊदी अरब पर रूस का सहयोग करने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी कहा था कि अमेरिका सऊदी अरब के साथ अपने संबंधों पर ‘पुनर्विचार’ कर रहा है। सऊदी सरकार ने रूस के साथ जो किया है उसके नतीजे उन्हें भुगतने होंगे।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने आदेश में भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले के आरोपियों में से एक ज्योति जगताप को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि दिसंबर 2017 की एल्गार परिषद घटना प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के वृहत एजेंडे के भीतर एक छोटी साजिश थी।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस एएस गडकरी और मिलिंद जाधव की पीठ ने सबूतों के आधार पर कहा कि जगताप 2018 के केस में सीपीआई (माओवादी) के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अन्य सभी सह-आरोपितों के साथ सक्रिय संपर्क में थी। इसी आधार पर पीठ ने ज्योति जगताप (34) की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
हाईकोर्ट ने कहा, ”हमारी राय में एनआईए का केस प्रथम दृष्ट्या सही लगता है। इसलिए यह अपील खारिज की जाती है।” इससे पहले फरवरी 2022 में जगताप की जमानत अर्जी को एनआईए की विशेष अदालत ने खारिज कर दी थी, जिसके बाद उसने हाईकोर्ट का रूख किया था। जगपात के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।
‘अमर उजाला’ की रिपोर्ट के अनुसार, जगताप को एलगार परिषद के पुणे सम्मेलन में भड़काऊ नारे लगाने के आरोप में सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। वह तब से मुंबई की भायखला महिला जेल में बंद है। एनआईए के जाँचकर्ताओं के अनुसार 31 दिसंबर, 2017 को एलगार परिषद के सम्मेलन में भड़काऊ भाषण दिए गए थे। इसके बाद 1 दिसंबर 2018 को भीमा-कोरागांव हिंसा हुई थी। बकौल दैनिक भास्कर, जगताप पर आरोप है कि उसने एल्गार परिषद के लिए दलित समुदाय के लोगों को एकत्रित करने की कोशिश की थी, ताकि सरकार के खिलाफ नफरत फैलाई जा सके।
Kabir Kala Manch Incited Hatred By Ridiculing Phrases Acche Din, Demonetization In Plays At Elgar Parishad: Bombay HC In Jyoti Jagtap Bail Order @CourtUnquotehttps://t.co/zrMav4tTJZ
पीठ ने अपने आदेश में कहा, ”भाकपा (माओवादी) ने हमारे देश की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को उखाड़ फेंकने के अपने उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार की और जगताप और अन्य सह-आरोपी प्रथम दृष्टया सक्रिय रूप से इसकी रणनीति बना रहे थे। एनआईए द्वारा हमारे सामने पेश किए गए सबूत से पता चलता है कि एल्गार परिषद के आयोजन का इस्तेमाल प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन भाकपा (माओवादी) के साथ उसके कार्यकर्ता के माध्यम से भूमिगत संपर्क स्थापित करने के लिए किया गया था, जिसमें अपीलकर्ता (जगताप) भी शामिल है। यह देखा गया है कि उक्त कार्यक्रम के अनुसरण में, बड़े पैमाने पर हिंसा हुई जिसके परिणामस्वरूप अशांति हुई और एक व्यक्ति की मौत हो गई।”
पीठ ने कहा ”कबीर कला मँच के शब्दों/प्रदर्शन में कई ऐसे संकेत हैं जो सीधे लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार के खिलाफ हैं, सरकार को उखाड़ फेंकने की कोशिश करने के लिए, सरकार का उपहास करने के लिए हैं। केकेएम ने एल्गार परिषद के आयोजन में उपरोक्त एजेंडे पर प्रदर्शन करके घृणा को उकसाया। इस प्रकार निश्चित रूप से केकेएम और सीपीआई (माओवादी) द्वारा एल्गार परिषद की साजिश के भीतर एक बड़ी साजिश है।”
पीठ ने कहा कि एनआईए द्वारा पेश किए गए सबूतों से पता चलता है कि जगताप की शुरुआत से ही एल्गार परिषद के आयोजन में उनकी सक्रिया भूमिका थी। जगताप कबीर कला मँच से जुड़ी हुईं थीं । एनआईए के मुताबिक कबीर कला मँच प्रतिबंधित आतंकी संगठन भाकपा (माओवादी) का अग्रणी समूह है। जबकि जगताप ने दलील दी थी कि मँच एक सांस्कृतिक समूह था, जिसने संगीत और कविता के माध्यम से सांप्रदायिक सद्भाव और धर्मनिरपेक्षता के प्रसार का प्रयास किया था।
देश की राजधानी दिल्ली के शादीपुर इलाके में 12 अक्टूबर, 2022 को 2 पक्षों में विवाद हुआ था। इस विवाद में अदनान, अबदास और उफीजा पर नितेश चौधरी नाम के युवक को पीट-पीट कर मार डालने का आरोप लगा है। हत्या के विरोध में 16 अक्टूबर, 2022 को हिन्दू संगठनों ने मृतक के परिजनों के साथ पटेल नगर मुख्य सड़क पर जाम लगाया। हालाँकि, पुलिस ने घटना में सांप्रदायिक एंगल होने से इनकार किया है। ऑपइंडिया की टीम ने सोमवार (17 अक्टूबर, 2022) को नितेश के घर पहुँच कर जमीनी जानकारी जुटाने का प्रयास किया।
दोपहर में लगभग 2 बजे हम पटेल नगर पहुँचे। वहाँ सड़क पर तमाम दुकानदार सामान्य रूप से अपना काम कर रहे थे, लेकिन वो इस हत्याकांड से वाकिफ थे। सड़क के किनारे एक पान की दुकान चलाने वाले व्यक्ति ने हमसे गलियाँ संकरी होने की जानकारी देते हुए पैदल जाने की सलाह दी। हमने पटेल नगर मेट्रो के पास एक पार्किंग में अपने वाहन को खड़ा किया और पैदल ही निकल पड़े। रास्ते में हमने दुकानदार के कहने के मुताबिक गलियाँ वास्तव में संकरी ही मिलीं।
संकरी गलियों में लोगों के घर और किराने आदि की दुकानें खुली थीं, जो सामान्य रूप से अपना काम कर रहे थे। गली में एक जगह बोर्ड लगा दिखा जिसमें लिखा था, “कब-कब बँटा भारत”।
रंजीत नगर की संकरी गलियाँ और उसमें लगा बोर्ड
नितेश के घर पर पुलिस और पैरामिलिट्री तैनात
उन्हीं संकरी गलियों से हम आगे बढ़े और पटेल नगर मेट्रो स्टेशन से लगभग 1 किलोमीटर अंदर चलते हुए उस जगह पहुँच गए, जहाँ नितेश चौधरी का घर है। नितेश के घर के लगभग 50 मीटर पहले दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री के जवान तैनात दिखे। हालाँकि, किसी के भी आने-जाने पर कोई रोक-टोक नहीं दिखी। घर के बाहर कुछ हिन्दू संगठन और मीडिया के लोग जमा थे। घर के मुहाने पर हमें एक व्यक्ति खड़े मिले, जिन्होंने अपना परिचय मृतक नितेश के चाचा के तौर पर बताया।
नितेश के घर पर तैनात पैरामिलिट्री
घरों से झाँक रहे थे पड़ोसी
गेट पर हमें अंदर भीड़ बता कर कुछ देर रुकने के लिए कहा गया। हमने इंतज़ार किया और आसपास देखा तो माहौल सामान्य लगा। अन्य घरों से लोग ताक-झाँक करते दिखाई दिए। नितेश का घर एक सामान्य घर की तरह ही है। घर के आगे बिजली के कई तार एक-दूसरे में उलझे हुए लटके दिखाई दिए। अंदर से कुछ महिलाओं के बीच-बीच में रोने की आवाजें आ रहीं थी।
नितेश के घर पर जमा हिन्दू संगठन और मीडियाकर्मी
पिता की मौत के बाद नितेश ही था सहारा
ऑपइंडिया ने नितेश चौधरी की माँ बबिता चौधरी से बात की। उन्होंने बताया कि नितेश के पिता पहले ही दुनिया से जा चुके थे, जिसके बाद नितेश जिम ट्रेनर का काम कर के घर का खर्च चला रहा था। उन्होंने बताया कि उनकी प्राथमिकता में आर्थिक नहीं बल्कि न्यायिक सहयोग है और वो अपने बेटे के कातिलों को फाँसी पर जल्द से जल्द लटकता देखना चाहती हैं। इस दौरान नितेश की माँ ने अपने परिवार को संयुक्त बताया और दुःख की घड़ी में सबके एकजुट होने की बात कही।
यहाँ के हिन्दुओं ने मुस्लिमों को किराए पर दिए हैं अपने घर
अपने मोहल्ले का जिक्र करते हुए नितेश की माँ ने उसे जाट बहुल बताया और कहा कि कई हिन्दुओं ने अपने घर मुस्लिमों को किराए पर दिए हैं। अपनी बात बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारे परिवार में कभी किसी मुस्लिम को किराए पर नहीं रखा गया। हमें बताया गया कि हमारे जाटों के इलाके में कई मुस्लिम हैं लेकिन मुस्लिमों के इलाके में एक भी जाट नहीं। बबिता चौधरी के मुताबिक, उनके घर में सभी सदस्य न सिर्फ धार्मिक सोच के हैं बल्कि विभिन्न हिन्दू संगठनों से भी जुड़े हुए हैं।
नितेश चौधरी की माँ
इलाके के मुस्लिमों से पुलिस भी डरती है: नितेश की माँ
नितेश की माँ ने हमें बताया कि जहाँ पर उनके बेटे की हत्या हुई थी, वहाँ से मुस्लिमों का इलाका शुरू हो जाता है। उन्होंने कहा कि वहाँ पर एक मस्जिद है, और मस्जिद वाले मोहल्ले से निकली 2 दर्जन लोगों की भीड़ ने नितेश की हत्या की। पुलिस पर सही और संतोषजनक कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने बताया कि पुलिस भी रंजीत नगर के मुस्लिमों से डरती है, इसीलिए वो कभी कम्युनल एंगल नकार रही तो कभी उनके ही बेटे को क्रिमिनल बता रही।
नितेश की माँ ने हमें आगे बताया कि जिस स्थान पर नितेश को भीड़ ने मार डाला, वहाँ पर एक पूरा मोहल्ला मुस्लिमों का है। उनके मुताबिक, उस क्षेत्र में बहन-बेटियों के साथ मुस्लिम खुलेआम छेड़छाड़ करते हैं जिस से उधर लड़कियाँ जाने से कतराती हैं। उन्होंने हमें आगे बताया कि शाम होते ही इस तरफ हिन्दू अपनी दुकानें समय से बंद कर देते हैं, लेकिन मुस्लिम बहुल क्षेत्र में पूरी रात दुकानें खुली रहती हैं जहाँ खास-तौर पर माँस और मछली बिकती है। हमें आगे बताया गया कि रात होने पर उसी इलाके से बाइकों से कई लोग बाहर निकल कर गलत काम करते हैं, जिन्हें रोकने वाला कोई नहीं होता।
हमसे आगे बात करते हुए नितेश की माँ रोने लगीं और घर की अन्य महिलाओं ने उन्हें संभाला।
नितेश चैधरी हत्याकांड: क्या कहना है दिल्ली पुलिस का
हालाँकि, नितेश चौधरी हत्याकांड के मामले में दिल्ली पुलिस का कुछ और ही कहना है। सेन्ट्रल दिल्ली की डीसीपी श्वेता चौहान ने कहा कि जिनको इन्होंने मारा है, वो खुद ही अपराधी प्रवृत्ति के थे। ‘ABP News’ से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस की जाँच में सामने आया है कि नितेश और उसका दोस्त आलोक खुद ‘Aggressors (आक्रामक)’ हैं और उन पर पहले से ही आपराधिक मामले दर्ज हैं। उनका कहना है कि यहीं दोनों ने पहले आरोपितों को पीटने की कोशिश की, लेकिन खुद ज्यादा पिट गए।
पुलिस ने इसे ‘लड़कों के दो समूह का झगड़ा’ करार दिया है। चौहान ने कहा कि दोनों लड़कों ने सामने से आने वाली बाइक को रोका, उस पर सवार लोगों को गिरा दिया और पीटना शुरू कर दिया। पुलिस की वर्जन की मानें तो इसके बाद दूसरे वाले समूह ने झगड़ा करते-करते उन्हें पीट दिया। पुलिस का कहना है कि उन्होंने बताया कि कोई चश्मदीद न मिलने और आलोक द्वारा बयान न दिए जाने के कारण धारा-308 के तहत 13 अक्टूबर को FIR दर्ज की गई थी।
पुलिस ने नितेश चौधरी की मौत के बाद कहा कि ज्यादा चोट लगने के कारण उनकी मौत हो गई, जिसके बाद हत्या का मामला दर्ज किया गया और आरोपितों की तलाश शुरू की गई।
अनिल फिरोजिया (Anil Firojiya) मध्य प्रदेश के उज्जैन से बीजेपी के सांसद हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के एक चैलेंज को स्वीकार कर उन्होंने अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए करीब 2300 करोड़ रुपए हासिल किए हैं।
फिरोजिया ने केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) की चुनौती स्वीकार करते हुए अपना 32 किलो वजन कम किया है। इस साल फरवरी में गडकरी ने उन्हें वजन घटाने की चुनौती दी थी। उनसे कहा था कि एक किलो वजन कम करने पर उनके क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए 1000 करोड़ रुपए मिलेंगे।
जब फिरोजिया को यह चुनौती दी गई थी तब वे 130 किलो के थे। अब उनका वजन 98 किलो है। वजन घटाने के उन्होंने लिए क्या-क्या किया इसके बारे में भी बताया है। सांसद ने कहा, “मैं सुबह 5.30 बजे जग जाता हूँ और फिर मॉर्निंग वॉक पर जाता हूँ। मॉर्निंग वॉक में दौड़, एक्सरसाइज और योग शामिल हैं। मैं आयुर्वेदिक डाइट चार्ट फॉलो करता हूँ और हल्का नाश्ता लेता हूँ। लंच और डिनर में सलाद, हरी सब्जियाँ, मिक्स अनाज की एक रोटी शामिल होती है। कभी-कभी गाजर का सूप और ड्राइफ्रूट्स भी खा लेता हूँ।”
भाजपा सांसद ने बताया कि उन्होंने वजन घटाने के बाद 14 अक्टूबर 2022 को नितिन गडकरी से मुलाकात की। केंद्रीय मंत्री उनके वजन घटाने की बात से बहुत खुश हुए। वादे के मुताबिक, उन्होंने उज्जैन के लिए 2300 करोड़ रुपए के विकास कार्यों को मंजूरी दे दी है।
Madhya Pradesh | I accepted the challenge and I have lost almost 32 kgs. I met Union Minister Nitin Gadkari and told him and he was very happy to know about it. As promised, he has approved development plans worth Rs 2,300 crores for the region: Ujjain MP Anil Firojiya (17.10) https://t.co/0Xxv3P0rgopic.twitter.com/CJe0BOpsvv
गडकरी की चुनौती मिलने के तीन महीने के भीतर ही फिरोजिया ने 12 किलो और सात महीने में 32 किलो वजन कम किया है। सांसद के अनुसार, वजन घटाने में उनकी पत्नी और बेटी का बड़ा योगदान रहा। उन्होंने न केवल उनकी डाइट का ख्याल रखा, बल्कि उन्हें लगातार वर्कआउट के लिए भी प्रेरित किया। वह कहते हैं, “मैं पहले इतना मोटा नहीं था। राजनीति के चक्कर में खानपान का सिस्टम गड़बड़ा गया। इसके चलते मैं अपने शरीर पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे पाया। विधायक रहते देर रात खाना खाकर सो जाता था। वजन बढ़कर 130 किलो हो गया। इस दौरान जब नितिन गडकरी से चैलेंज मिला तो और क्षेत्र के विकास की बात आई तो मैंने वजन कम करने का प्रण लिया।”