Home Blog Page 2317

‘अल्लाह की लानत हो तुम पर’ : धनतेरस पर रुबिका लियाकत की तस्वीरें देख भड़के कट्टरपंथी, बोले- इससे बढ़िया किसी के घर के बर्तन साफ कर

धनतेरस का त्योहार मनाने के कारण एबीपी की एंकर रुबिका लियाकत को एक बार फिर कट्टरपंथी गाली दे रहे हैं। कट्टरपंथियों की परेशानी यही है कि आखिर रुबिका ने मुसलमान होकर हिंदू त्योहार को क्यों मनाया।

दरअसल 23 अक्टूबर 2022 को रुबिका ने अपने ट्विटर पर कुछ तस्वीरों को पोस्ट किया, जिसमें वो बर्तन खरीदते दिख रही थीं। रुबिका ने अपने अपने ट्वीट में लिखा था, “रामलला ने बुलाया और हम हाज़िर… धनतेरस पर अयोध्या में हुई बर्तनों की खरीदारी.. पहले माँ फ़ोन कर याद दिलाती थी इस बार बहन अंजुम लियाकत ने कहा- कोई धातु जरूर खरीदना।”

रुबिका का यही ट्वीट देख कई कट्टरपंथी भड़क उठे। अलीफा तौसीफ ने लिखा, “डिस्काउंट में बर्तन खरीदना था तो खरीद लेती! इतना ड्रामा करने की जरूरत क्या थी।”

मोहम्मद अली सिद्दीकी ने लिखा, “कितना मिलता होगा खुश करने के लिए।”

जमीर शेख ने लिखा, “कभी मुस्लिम बन जाती हो तो कभी हिंदू बन जाती हो, ये चल क्या रहा है।”

राशिद हाशमी कहते हैं, “अल्लाह की लानत हो तुम पर, नौकरी के लिए इमान को खराब करना सही है क्या?”

सफर ने कहा, “दलाली का जरूर थोड़ा बहुत फायदा तो मिला होगा आपको।”

हबीब ने लिखा, “कितनी लाचार होगी तुम ये सब करना पड़ रहा है। इससे अच्छा तुम घर पर किसी के बर्तन साफ करलो पर ऐसे गुलामी ठीक नहीं है।”

बता दें कि रुबिका लियाकत को मिलने वाली ऑनलाइन गालियाँ कोई नई नहीं है। उन्होंने जब जब हिंदू त्योहारों को लेकर अपनी राय रखी, तब हर बार उन्हें ऐसी ही ट्रोल किया गया। उनकी तरह अन्य हस्तियाँ भी हिंदू त्योहारों को मनाने की वजह से कट्टरपंथियों के निशाने पर रहते हैं।

‘वो सिर्फ मेरा प्यार चाहती थी’: जैकलीन को बचाने के लिए महाठग ने जेल से लिखा पत्र, कहा – उसे जबरन फँसाया जा रहा, उसे निर्दोष साबित करवाऊँगा

महाठग सुकेश चंद्रशेखर ने 200 करोड़ रुपए के घोटाले के मामले में अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस का बचाव करने के लिए दिल्ली के जेल से ही एक पत्र जारी किया है। इस मामले की जाँच ED (प्रवर्तन निदेशालय) कर रहा है। महाठग का कहना है कि इस पूरी घटना में जैकलीन फर्नांडिस का कोई किरदार नहीं है। उसने अपने वकील को पत्र में लिखा कि सभी वित्तीय लेनदेन, जिनमें गिफ्ट्स और कार भी शामिल हैं, वो इसीलिए दिए गए थे क्योंकि वो दोनों रिलेशनशिप में थे।

उसने दावा किया कि ‘RanBaxy’ कंपनी के पूर्व मालिक को जेल से छुड़ाने के लिए लॉबिंग के लिए उसे 200 करोड़ रुपए दिए गए थे। उसने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के इस केस में जैकलीन फर्नांडिस को फँसाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उसने कहा कि वो पहले भी बता चुका है कि दोनों रिलेशनशिप में थे और उसने अभिनेत्री को फैमिली गिफ्ट्स दिए। उसने पूछा कि उन लोगों की गलती क्या है? उसने कहा, “जैकलीन सिर्फ मेरा प्यार चाहती थीं, वो चाहती थीं कि मैं हमेशा उनके लिए खड़ा रहूँ।”

सुकेश चंद्रशेखर ने पत्र में लिखा, “जैकलीन फर्नांडिस और उनके परिवार पर खर्च किया गया एक-एक पैसा मेरी वैध तरीके से अर्जित की गई कमाई का हिस्सा था और अदालत की सुनवाई में ये बहुत जल्द साबित हो जाएगा।” सुकेश ने दावा किया कि उसका इंडोनेशिया में कोयला खदान कारोबार के साथ-साथ न्यूज़ चैनलों और होटलों में भी हिस्सेदारी थी, जिसे वो बेच चुका है। उसने आर्म्स और डिफेंस डील्स के लिए लॉबिंग की बात भी कबूली है।

सुकेश चन्द्रशेखर ने पत्र में लिखा है, “मुझे विश्वास है कि मैं एक दिन जैकलीन को वो सब कुछ लौटा दूँगा जो उसने खोया है, साथ ही उसे निर्दोष साबित करवाऊँगा। जो सब कुछ मेरे खिलाफ चल रहा है, वह सिर्फ एक राजनीतिक साजिश है। उसके और उसके परिवार की कोई गलती नहीं। उन्हें जबरदस्ती घसीटा जा रहा है। ED ने जैकलीन की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा है कि वह देश छोड़कर भागने की फिराक में थी। साथ ही जैकलीन ने कभी भी जाँच में सहयोग नहीं किया और सबूतों से छेड़छाड़ की है। कोर्ट ने जैकलीन की अंतरिम जमानत 10 नवंबर तक बढ़ा दी है।

‘कॉल पर निकालते थे गंदी आवाज’: सोना तस्करी वाली स्वप्ना सुरेश ने केरल के 3 पूर्व मंत्रियों पर लगाए संगीन इल्जाम, कहा- ‘मुझसे सेक्स के लिए कहते थे’

केरल के कुख्यात गोल्ड स्मगलिंग (Kerala Gold Smuggling) मामले की मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश (Swapna Suresh) ने राज्य के तीन वरिष्ठ माकपा नेताओं (CPM Leaders) पर यौन दुराचार का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि माकपा के दो पूर्व मंत्रियों और एक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने उनसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए कहा था।

स्वप्ना ने कहा कि माकपा नेता और पूर्व मंत्री कदकमपल्ली सुरेंद्रन और विधानसभा के पूर्व स्पीकर पी श्रीरामकृष्णन ने उनसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए कहा था। स्वप्ना ने यह भी कहा कि पूर्व वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने भी उनसे परोक्ष रूप में यही माँग की थी। स्वप्ना के इन आरोपों पर सत्ताधारी पार्टी की ओर से किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं आई है।

स्वप्ना ने टाइम्स नाऊ से बात कहते हुए कहा, “ये लोग बेहद नीच, असामाजिक और संस्कारहीन लोग हैं। संयुक्त अरब अमीरात के दूतावास में बेहद उच्च पद पर रहने के बावजूद इन लोगों ने शारीरिक संबंध बनाने की माँग की, क्योंकि ये सोचते थे कि ये बेहद ताकतवर लोग सोचते थे कि ये मंत्री हैं और सरकार में हैं तो कोई भी लड़की आसानी से तैयार हो जाएगी।”

सुरेंद्रन को लेकर स्वप्ना ने कहा, “कुमारापुरम के एक उद्घाटन समारोह में हमारी पहली मुलाकात हुई थी। अगले दिन सुबह-सुबह सीधा मंत्री जी ने अपने पर्सनल फोन से मुझे कॉल किया कि कहा कि वे सुरेंद्रन बोल रहे हैं और वे मंत्री हैं। उन्होंने दूतावास की बात की और फिर अपने बेटे को UAE में कहीं सेट करने के लिए कहा। इसके बाद फोन पर ही वे सेक्सुअल अडवांसमेंट की बात करने लगे और फोनो-सेक्स की तरह गंदी आवाजें निकालने लगे। इसके बाद मैंने फोन रख दिया।”

रामाकृष्णन को लेकर स्वप्ना ने बताया, “दूतावास में इफ्तार पार्टी के दौरान उनसे मुलाकात हुई थी। वे UAE के लिए वीसा आदि के बारे में जानकारी हासिल कर रहे थे। वे लगातार मुझे कॉल करते रहे। इसके बाद हम दोस्त बन गए, लेकिन वे अक्सर मुझे अपने सरकारी आवास पर बुलाते थे।”

स्वप्ना ने आगे बताया, “वे कहते थे कि अपने परिवार के साथ मेरे आवास पर आओ, मुझे कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन, उनके आने से 10 मिनट पहले अकेले आना, ताकि में तुम्हारे साथ कुछ क्वालिटी टाइम बीता सकूँ। वे बच्चों जैसी हरकतें और किसी कॉलेज स्टूडेेंट जैसा व्यवहार करते हुए मुझे आई लव यू का मैसेज और चुम्मा भेजते थे। एक दिन उन्होंने मुझे अपने फ्लैट पर बुलाया और मुझे इस्तेमाल करने की कोशिश की।”

स्वप्ना के नए आरोपों के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। कॉन्ग्रेस और भाजपा ने वामपंथी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। केरल कॉन्ग्रेस के अध्यक्षके सुधाकरन और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीसन ने कहा कि इन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जाँच कराने की माँग की।

वहीं, भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन ने कहा कि स्वप्ना सुरेश ने मीडिया के सामने जो खुलासे किए हैं, उन्हें कानूनी सबूत के तौर पर मान्यता देते हुए केरल सरकार आरोपित नेताओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करे। हालाँकि, पार्टी या सरकार की तरफ से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बता दें कि इससे पहले स्वप्ना ने कहा था कि सोना तस्करी में सीएम विजयन और उनका परिवार शामिल है। इसके साथ ही एक आरोपित का अपहरण करने का आरोप लगाया था। स्वप्ना ने यह भी कहा था कि केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने आतंकियों को भगाने में यूएई वाणिज्य दूतावास की मदद की थी। चार जुलाई 2017 को यूएई के एक नागरिक को सीआईएसएफ ने कोच्चि हवाई अड्डे पर भारत में प्रतिबंधित थुरया सैटेलाइट फोन के साथ पकड़ा था।

3 फ़िल्में, ₹2900 करोड़… यूँ ही कोई ‘बाहुबली’ और ‘डार्लिंग’ नहीं बन जाता: कहानी उस अभिनेता की, जिसके चाचा गोहत्या के खिलाफ संसद में बिल लेकर आए

उप्पलपति वेंकट सूर्यनारायण प्रभास राजू – ये उस अभिनेता का पूरा नाम है, जिसे आज दुनिया प्रभास के नाम से जानती है। वही, ‘बाहुबली’ वाले प्रभास। रविवार (23 अक्टूबर, 2022) को वो अपना 43वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। रामायण पर आधारित उनकी फिल्म ‘आदिपुरुष’ भी संक्रांति 2023 के मौके पर रिलीज होने वाली है, लेकिन टीजर विवादों में फँसी हुई है। हालाँकि, बॉक्स ऑफिस पर कलेक्शंस के लिए प्रभास का नाम ही काफी होता है।

देश के पहले पैन-इंडिया स्टार कहलाए ‘बाहुबली’ प्रभास

2015 में आई ‘बाहुबली’ ने प्रभास को तेलुगु राज्यों में सुपरस्टार्स की उस पंक्ति से भी ऊपर खड़ा कर दिया, जिसमें वहाँ के बाकी के अभिनेता थे। 650 करोड़ रुपयों का कलेक्शन पूरी साउथ फिल्म इंडस्ट्री से न किसी ने किया गया, न ही सोचा था। तमिल अभिनेता रजनीकांत ने ज़रूर 2010 में अपनी फिल्म ‘रोबोट’ से तहलका मचाया था, लेकिन इसके लिए उन्हें 35 वर्षों का इंतजार करना पड़ा। हिंदी सिनेमा में वो जाना-पहचाना नाम थे ही।

लेकिन, प्रभास ने जो किया वो उस समय के फिल्म विशेषज्ञों की समझ से भी परे था। ‘बाहुबली’ फिल्म से निर्देशक एसएस राजामौली ने अपनी जादुई दुनिया पूरे भारत को दिखाई, लेकिन मुख्य अभिनेता के रूप में प्रभास के अभिनय, व्यक्तित्व और उनकी मेहनत ने इसमें जान डाल दी। अपने अधिकतर स्टंट्स उन्होंने खुद किए थे और इस कारण उन्हें शरीर पर ऐसे घाव भी मिले, जिसके दाग आजीवन उनके साथ रहेंगे। प्रभास को पैन-इंडिया प्रसिद्धि यहीं से मिल गई थी।

‘बाहुबली’ फिल्म को लोगों ने टीवी पर बार-बार देखा और ‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा’ सवाल एक ‘राष्ट्रीय प्रश्न’ सा बन गया। OTT से लेकर टीवी पर हिंदी भाषी दर्शक भी इस क्रेज का ऐसा हिस्सा बने कि 2017 में आए ‘बाहुबली’ के दूसरे हिस्से ने 1800 करोड़ रुपए से भी अधिक का कारोबार कर भारत की पिछली सभी फिल्मों को कोसों पीछे छोड़ दिया। देश को एक ऐसा सुपरस्टार मिल चुका था, जिसके लिए तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और हिंदी सहित सभी भाषाओं के दर्शक देख रहे थे।

फिल्म ने 1800 करोड़ रुपए का कारोबार किया। इस फिल्म ने हिंदी बॉक्स ऑफिस पर साउथ की फिल्मों के ले दरवाजा खोल दिया। आज हम ‘RRR’, ‘पुष्पा’ और ‘KGF’ सीरीज जैसी फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाते हुए देखते हैं, उसकी शुरुआत बाहुबली सीरीज ने ही की। प्रभास भारत के सबसे महँगे स्टार्स में से एक बन गए और उनके पास ऑफर्स की ढेर लग गई। लेकिन, पिछले 5 वर्ष उनके लिए उतने अच्छे नहीं रहे।

‘बाहुबली 2’ के बाद अच्छे नहीं रहे 5 साल, ‘आदिपुरुष’ भी नहीं दोहरा पाएगी वो कामयाबी

‘बाहुबली 2’ के बाद उनकी 2 फ़िल्में आईं, जो बॉक्स ऑफिस पर बाहुबली वाले कमाल को दोहरा न सकीं। 2019 में आई उनकी एक्शन फिल्म ‘साहो’ को समीक्षकों ने नकार दिया, लेकिन फिर भी दुनिया भर में ये फिल्म 430 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार करने में सफल हुई। हालाँकि, 300 करोड़ रुपए के बजट के कारण इसे हिट का तमगा नहीं मिला। 2022 में आई ‘राधे श्याम’ मुश्किल से 200 करोड़ रुपए का कारोबार कर पाई और विजुअली ग्रैंड होने के बावजूद समीक्षकों द्वारा भी औसत ही ठहराई गई।

इन दो फिल्मों के औसत से नीचे के प्रदर्शन ने ये चर्चाएँ शुरू कर दीं कि क्या प्रभास की फ़िल्में तभी पैन-इंडिया पर धमाल मचाएँगी, जब उसका निर्देशन एसएस राजामौली करेंगे? आखिर 2500 करोड़ रुपए के कलेक्शन बाहुबली सीरीज की दोनों फिल्मों से ही तो आए। इससे पहले 2005 में ‘छत्रपति’ में वो एसएस राजामौली के निर्देशन में काम कर चुके थे। प्रभास को लेकर इन चर्चाओं पर ‘आदिपुरुष’ विराम लगा सकती थी, जिसमें रामायण की कहानी दिखाई गई है।

लेकिन, इस फिल्म में सैफ अली खान को ‘रावण’ के किरदार में लिए जाने के बाद विवाद बढ़ गया। लोगों ने पूछा कि ऐसे व्यक्ति को इस किरदार में क्यों लिया गया, जो अंग्रेजों से पहले भारत का अस्तित्व ही नहीं मानता। सैफ ने ये तक कह दिया कि ‘आदिपुरुष’ में सीता हरण की घटना को जायज ठहराया जाएगा। हिन्दुओं की भावनाएँ आहत थीं ही, रही-सही कसर फिल्म के टीजर ने पूरी कर दी। VFX नक्सली लगे और दृश्य हॉलीवुड से कॉपी-पेस्ट।

प्रभास के कंधे पर चढ़ कर फिल्म अच्छी ओपनिंग तो ले सकती है, लेकिन अब इसे ‘वर्ड ऑफ माउथ’ की परीक्षा से गुजरना होगा। ये ‘बाहुबली’ के पहले हिस्से के कलेक्शन को भी पार कर जाए तो बहुत बड़ी बात होगी। फिल्म के बजट को देखते हुए इसके हिट होने की संभावना कम ही है। हालाँकि, ‘KGF’ के निर्देशक द्वारा बनाई जा रही ‘सालार’ और दीपिका पादुकोण के साथ प्रभास की ‘प्रोजेक्ट के’ से काफी उम्मीदें हैं। उनके पास फिल्मों की लाइन लगी है, उनकी प्रतिभा और मेहनत को देखते हुए लगता है कि अपने ब्रांड को वो पुनः स्थापित करेंगे।

कुछ इस तरह तेलुगु दर्शकों के ‘डार्लिंग’ बने थे प्रभास

2002 में आई ‘ईश्वर’ प्रभास की पहली फिल्म थी। हालाँकि, ये फिल्म उन्हें लोकप्रियता नहीं दिला पाई। प्रभास के चाचा कृष्णम राजू खुद एक बड़े अभिनेता हुआ करते थे, जो अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में 4 साल केंद्रीय राज्यमंत्री भी रहे। वो काकीनाड़ा और नरसापुर से 2 बार लोकसभा सांसद रहे थे। वो 1967 से ही तेलुगु फिल्मों में सक्रिय थे। गोहत्या को प्रतिबंधित कराने के लिए वो संसद में बिल लेकर आए थे। उन्हें ‘राधे श्याम’ के तेलुगु वर्जन में प्रभास के गुरु के किरदार में देखा गया था।

उन्हें लोकप्रियता मिली 2004 में आई ‘वर्षम्’ से, लेकिन 2005 में आई एसएस राजामौली की ‘छत्रपति’ ने उन्हें तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में बतौर स्टार स्थापित कर दिया। 2012 में जब ‘रिबेल’ आई, तब तक उनकी फैन फॉलोविंग काफी बढ़ चुकी थी। मैं अपनी बात करूँ तो मैंने 2012 में उनकी दो फ़िल्में ‘चक्रम (2005)’ और ‘Mr. परफेक्ट (2011)’ देखी थी, जिसने मेरे मन पर गहरी छाप छोड़ी थी। उसी समय मुझे लगा था कि ये अभिनेता आगे जाकर कुछ बहुत बड़ा करने वाला है।

प्रभास के बारे में ये भी कहा जाता है कि वो ब्रांड्स के एंडोर्समेन्ट में दिलचस्पी नहीं रखते और 2020 में उनके द्वारा 150 करोड़ रुपयों के विज्ञापन ठुकराने की बात सामने आई थी। 2015 में उन्हें पहली बार महिंद्रा के विज्ञापन में टीवी पर देखा गया था। 2013 में आई ‘मिर्ची’ फिल्म भी उनकी सुपरहिट रही थी। उनका परिवार वेस्ट गोदावरी जिले के मोगलतुरु से ताल्लुक रखता है। उन्होंने हैदराबाद के नालंदा कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। कला की पढ़ाई उन्होंने विशाखापत्तनम स्थित ‘सत्यानंद फिल्म इंस्टिट्यूट’ से की।

रॉड नहीं, प्राइवेट पार्ट में खुद घुसाई थी जिभिया: गाजियाबाद में फर्जी गैंगरेप केस दर्ज कराने वाली गिरफ्तार, 3 साजिशकर्ता भी पकड़े गए

गाजियाबाद में 5 लड़कों के खिलाफ फर्जी गैंगरेप केस दर्ज कराने के आरोप में लड़की को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया है। इससे पहले पुलिस ने लड़की के साथ मिलकर पूरी साजिश रचने वाले 3 अन्य लोगों को पकड़ा था।

गाजियाबाद की एसपी निपुन अग्रवाल ने बताया कि आरोपित लड़की को दिल्ली से पुलिस ने पकड़ लिया है। उसे कुछ दिन पहले दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

बता दें कि 18 अक्टूबर की सुबह करीब साढ़े तीन बजे नंदग्राम थाने को सूचना मिली कि आश्रम रोड पर एक महिला पड़ी है। पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और महिला को अस्पताल ले गई। महिला ने दावा किया था कि उसे 5 लोगों ने अगवा किया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया, जिन्हें वह जानती है।

इस मामले में पुलिस ने शाहरुख, शाहरुख के भाई जावेद, औरंगजेब, जहीर उर्फ ढोला और दीनू के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज किया था। उसके बयान के आधार पर पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार भी किया था।

हालाँकि जाँच के बाद सामने आया कि महिला के साथ कोई दुष्कर्म नहीं हुआ, बल्कि संपत्ति विवाद में उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर यह साजिश रची और सारे लड़को को फँसाया। महिला के पकड़े जाने से पहले उसके दोस्त आजाद, गौरव और अफजल को गिरफ्तार किया था।

ये बात भी सामने आई कि उसके प्राइवेट पार्ट में रॉड नहीं घुसाई गई, हकीकत यह थी कि महिला ने साजिश के तहत अपने प्राइवेट पार्ट के अंदर टंग क्लिनर डाली थी। गाजियाबाद एसएसपी मुनिराज के मुताबिक जिभिया का साइज 5 से 6 सेंटीमीटर था।

कोई पूछे तो कहना चोट लगी है: उन्नाव में 5 साल के हिन्दू लड़के का मौलवी ने किया खतना, दादी मदरसे में पढ़ने भेजती थी

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक मौलवी द्वारा 5 साल के हिन्दू बच्चे के जबरन खतना किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप असलम नाम के एक मौलवी पर लगा है जिसके खिलाफ परिजनों ने पुलिस में शिकायत दी। मामले की जानकारी होते के बाद हिन्दू संगठनों ने नाराजगी जताई है। पुलिस ने मदरसे में पढ़ाने वाले मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है। घटना में बच्चे की दादी की भी संलिप्तता का आरोप लगा है। शनिवार (22 अक्टूबर 2022) को पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक मामले में जाँच चल रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार घटना थानाक्षेत्र गंगाघाट के शुक्लागंज की है। यहाँ चम्पा पुरवा में 5 साल का एक हिन्दू बच्चा अपने पिता और दादा-दादी के साथ रहता है। बच्चे की माँ का देहांत हो चुका है। उसके पिता मजदूरी कर के उसे पालते हैं। बताया जा रहा है कि बच्चे को गाँव के ही एक मदरसे में पढ़ने के लिए भेजा जाता था। आरोप है कि यहाँ पढ़ाने वाले मौलवी असलम ने बच्चे को बहला-फुसला कर गाँव से बाहर ले जा कर उसका खतना कर दिया।

बताया जा रहा है कि पहले तो बच्चे के परिजनों को इसकी जानकारी नहीं हुई। बाद में उन्हें लगा कि बच्चे को चोट लगी है। इसके बाद बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाया गया जहाँ उन्हें बच्चे के खतना होने की जानकारी मिली। बच्चे ने इसे मौलवी असलम की करतूत बताया। घटना की जानकारी जब हिन्दू संगठन के सदस्यों को हुई तो उन्होंने पुलिस से असलम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की।

पुलिस ने पीड़ित परिजनों की तहरीर पर मौलवी असलम के खिलाफ केस दर्ज कर के उसे गिरफ्तार कर लिया। उन्नाव पुलिस के DSP के मुताबिक धर्मान्तरण के इस मामले में आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि मामले में अभी जाँच जारी है और जो भी तथ्य निकल कर सामने आएँगे उस पर नियमनुसार कार्रवाई की जाएगी।

बच्चे की दादी पर भी आरोप

वहीं मामले से जुड़े एक अन्य वीडियो में शशि नाम की महिला बच्चे को अपनी जेठानी के बड़े लड़के का बेटा बता रही है। शशि के मुताबिक वो लोग हिन्दू हैं लेकिन न जाने बच्चे के दादा-दादी को क्या सूझी कि उन्होंने खुद से ही बच्चे का धर्मान्तरण करवा दिया। धर्मान्तरण में बच्चे की दादी को भी शामिल बताते हुए शशि ने कहा कि ये सब किसी के इशारे पर हुआ है लेकिन धर्मान्तरण उसी बच्चे के घर पर ही हुआ है। शशि ने आगे बताया कि बच्चे की दादी तीनों बच्चो को मदरसे में पढ़ने के लिए भेजती हैं।

शशि को कहते सुना जा सकता है कि कोई भी देख सकता है कि बच्चे के साथ क्या हुआ है। बताया जा रहा है कि असलम ने बच्चे से कहा था कि अगर कोई पूछे तो बता देना कि कहीं गिरने से ये चोट आई है।

‘पंजाब की जगह केरल को ड्रग कैपिटल बना रही वामपंथी सरकार’: राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ने कहा- राज्य में अज्ञानियों का शासन, शराब-लॉटरी को दे रहे बढ़ावा

केरल (Kerala) सरकार की शराब नीति को लेकर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Arif Mohammad Khan) ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन (Pinarayi Vijayan) पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि केरल ‘ड्रग्स कैपिटल’ (Drugs Capital) के रूप में पंजाब (Punjab) की जगह लेता जा रहा है।

कोच्चि में एक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में राज्यपाल खान ने कहा कि केरल सरकार द्वारा राज्य में शराब की बिक्री को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, “सभी शराब पीने के खिलाफ अभियान चलाते हैं। यहाँ शराब पीने को बढ़ावा दिया जा रहा है। कितने शर्म की बात है।”

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खाने ने आगे कहा, “हमने तय किया है कि हमारे (केरल के) विकास के लिए लॉटरी और शराब ही काफी है। शत-प्रतिशत साक्षरता वाले राज्य के लिए यह कितनी शर्मनाक स्थिति है।”

उन्होंने कहा, “राज्य का प्रमुख होने के नाते मुझे शर्मिंदगी महसूस होती है कि मेरे राज्य में राजस्व के दो मुख्य साधन- लॉटरी और शराब हैं। लॉटरी क्या है? यहाँ बैठे आप लोगों में से कभी किसी ने लॉटरी टिकट खरीदी है? सिर्फ बेहद गरीब लोग लॉटरी टिकट खरीदते हैं। आप उन्हें लूट रहे हैं। आप हमारे लोगों को शराब का आदी बना रहे हैं।”

लोगों को संबोधित करते हुए राज्यपाल खान ने कहा, “केरल सरकार के कानून मंत्री कहते हैं कि वे मेरी कार्रवाई की समीक्षा करेंगे। मैं राज्यपाल के रूप में उनके कार्यों की समीक्षा करने के लिए यहां हूँ। वे मेरे द्वारा नियुक्त किए गए हैं। वे संविधान के प्रावधानों से परिचित नहीं हैं, क्योंकि मेधावी लोग बाहर चले गए हैं और ये अज्ञानी राज्य पर शासन कर रहे हैं।”

वित्त मंत्री केएन बालागोपाल पर निशाना साधते हुए राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा, “वित्त मंत्री, जिसके राजस्व का मुख्य स्रोत अल्कोहल और लॉटरी है, वह पूछ रहा है कि यूपी के आए गवर्नर को केरल के एजुकेशन सिस्टम की क्या समझ है।”

उन्होंने कहा कि ऐसा कहकर सुप्रीम कोर्ट के बारे में भी ऐसी टिप्पणी ना करें, क्योंकि कल कोर्ट ने भी केरल केरल तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति की सरकार द्वारा की गई नियुक्ति के खिलाफ फैसला दिया है।

बता दें कि केरल में कुलपतियों की नियुक्तियों को लेकर विजयन सरकार और राज्यपाल के बीच अक्सर खींचतान होती रही है। राज्यपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि कुलपतियों की नियुक्ति राज्यपाल की जिम्मेदारी है।

वहीं, इस साल सितंबर में भी शराब और लॉटरी के राजस्व का मुख्य स्रोत बनने को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री विजयन के बीच कहासुनी हुई थी। राज्यपाल खान ने इसके लिए केरल की वामपंथी सरकार की बहुत आलोचना भी की थी।

‘जान बचा कर भागा, कार का शीशा फोड़ कर खींचा गया’: इमरान खान पर अब जानलेवा हमले का केस, चुनाव लड़ने पर पहले ही लग चुकी है रोक

चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित होने के बाद अब पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलों में और इजाफा हुआ है। इमरान के खिलाफ इस्लामाबाद में एक FIR दर्ज हुई है। इस FIR में उन पर हत्या के प्रयास का आरोप लगाया गया है। यह केस पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज़ नामक संगठन के नेता मोहसिन शाहनवाज़ राँझा ने रज करवाया है। एक दिन पहले मोहसिन पर चुनाव आयोग के ऑफिस के बाहर हमला हुआ था। ये FIR शनिवार (21 अक्टूबर, 2022) को दर्ज हुई है।

शिकायतकर्ता रांझा के मुताबिक, इमरान खान को जिस तोशाखाना मामले में 5 साल के लिए पद के अयोग्य घोषित किया गया है, वो उसी केस में वादी हैं। पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में राँझा ने बताया कि 21 अक्टूबर, 2022 को उनके समर्थक और PTI (पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ) पार्टी के कार्यकर्ता इस्लामाबाद में चुनाव आयोग के ऑफिस पर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दिन उनकी चुनाव आयोग में बतौर वादी पेशी थी। जब वो चुनाव आयोग के ऑफिस से बाहर निकल रहे थे, तभी उन पर इमरान खान के समर्थक टूट पड़े।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहसिन शाहनवाज़ राँझा का दावा है कि अपनी जान बचा कर वो वो जैसे-तैसे कार तक पहुँचे पर वहाँ भी उनका पीछा नहीं छोड़ा गया। उनका दावा है कि इस दौरान उनके कार के शीशे फोड़ कर उन्हें बाहर खींचने का प्रयास किया गया। इस हमले के बाद उन्होंने इमरान खान के खिलाफ इस्लामाबाद के सचिवालय पुलिस थाने में FIR दर्ज करवाई है। अपनी शिकायत में रांझा ने लिखा है कि हमले के दौरान उनकी हत्या हो सकती थी।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में पुलिसकर्मियों को हलमावारों से उलझते भी देखा जा सकता है। आखिर में जैसे-तैसे पुलिस शाहनवाज राँझा को वहाँ से निकालने में सफल रही।

अपनी शिकायत में रांझा ने इमराना खान को मुख्य साजिशकर्ता बताया है। उन्होंने कहा है कि इमरान के ही इशारे पर उनके समर्थकों ने उन पर हमला किया था।

गौरतलब है कि इमरान खान पर आरोप है कि वो विदेशों से मिले उपहार को बेच दिया करते थे। पाकिस्तानी कायदों के मुताबिक उसे तोशाखाना (सरकारी ख़ज़ाने) में जमा किया जाता है। इन आरोपों की पुष्टि होने के बाद इमरान खान को 5 वर्षों के लिए पद के अयोग्य घोषित कर दिया गया। यह निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त सिकंदर सुल्तान रजा की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय पीठ ने सुनाया था।

अफगानिस्तान में बच्चों के हाथ लगा मोर्टार बम, खेल-खेल में दागा: धमाके में 2 की मौत, 2 घायल

अफगानिस्तान के पूर्वी प्रान्त में ब्लास्ट की खबर है जहाँ मोर्टार के गोले से 2 बच्चों की मौत हो गई है। इसी ब्लास्ट में 2 अन्य लोग घायल हुए हैं जिनको अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। बताया जा रहा है कि यह ब्लास्ट बच्चों द्वारा खेल-खेल में किया गया है। तालिबान प्रशासन इस बात की जाँच कर रहा है कि जिन्दा मोर्टार बच्चों के पास कैसे पहुँचा। घटना शनिवार (22 अक्टूबर 2022) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला पूर्वी प्रान्त के ज़ाज़ी जिले के पक्तिका का है। तालिबान के आधिकारिक प्रवक्ता ओमर बदरी के मुताबिक बच्चों ने खेल-खेल में ही मोर्टार को आग लगा दी जिस से धमाका हो गया। इस घटना के बाद आस-पास चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने इधर-उधर भागना शुरू कर दिया था। खामा प्रेस के मुताबिक घायलों का इलाज गार्दिज अस्पताल में किया जा रहा है।

लड़कियों के स्कूल बंद करने पर प्रदर्शन

इसी पक्तिका इलाके में बुधवार (19 अक्टूबर 2022) को स्थानीय निवासियों ने तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारी लड़कियों के स्कूलों को बंद करने से काफी नाराज थे। वो तालिबान से अपना फैसला वापस लेने और स्कूलों को दुबारा खोलने की माँग कर रहे थे।

लड़कियों की पढ़ाई रोकने के तालिबानी फरमान की उन्ही के देशवासियों द्वारा काफी आलोचना हो रही है।

पत्रकार और एक्टर को लिया हिरासत में

अफगानी पत्रकार बिलाल के मुताबिक तालिबान ने कांधार इलाके में पत्रकार और अभिनेता को हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए लोगों में सांगा रेडियो के पत्रकार शीर अहमद नूरी, एक स्थानीय अभिनेता अताउल्लाह ज़ार और एक अन्य व्यक्ति बिस्मिल्लाह को हिरासत में लिया है। ऐसा किसलिए किया गया है ये जानकारी अभी तक सामने नहीं आ पाई है।

लगातार तीसरी बार चीन के राष्ट्रपति बने शी जिनपिंग, तोड़ा 40 साल पुराना नियम: जनता ने विरोध किया तो दूतावास को जेल बनाकर कुचली आवाज

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के 20वें अधिवेशन के समापन के बाद रविवार (22 अक्टूबर 2022) को शी जिनपिंग (Xi Jinping) को एक बार फिर राष्ट्रपति चुन लिया गया। इससे पहले उन्हें बंद कमरे में हुई वोटिंग में लगातार तीसरी बार पार्टी का महासचिव चुना गया।

बता दें कि चीन में इस पद पर चुने जाने वाला नेता ही देश का राष्ट्रपति होता है। इसके साथ ही वह चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) का कमांडर भी बन गए हैं। इस तरह साल शी जिनपिंग 1949 में पार्टी की स्थापना करने वाले माओत्से तुंग के बाद सबसे अधिक समय तक इस पद पर रहने वाले नेता बन गए है।

शीन जिनपिंग को इस अधिवेशन में कम्युनिस्ट पार्टी के केंद्रीय सैन्य आयोग का अध्यक्ष भी नामित किया गया था। इसके बाद वह चीन की सेना के प्रमुख भी बन गए हैं। पार्टी के महासचिव पद पर उन्हें अगले पाँच सालों के चुना गया है।

शी जिनपिंग ने चीन के नेता के रूप में ऐतिहासिक तीसरा कार्यकाल हासिल करने के बाद उन्होंने ‘कठिन परिश्रम से काम’ करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, “आपने हम पर जो भरोसा जताया है, उसके लिए मैं पूरी पार्टी का दिल की गहराइयों से धन्यवाद देता हूँ। हमारे लोगों लोगों ने जिस तरह से मुझ पर विश्वास जताया, उसको साबित करने के लिए अपने कर्तव्यों का पूरे लगन से पालन करूँगा।”

जिनपिंग के तीसरी बार चीन के राष्ट्रपति बनने के साथ ही पार्टी का लगभग चार दशक पुराना नियम टूट गया। पार्टी के संस्थापक माओत्से तुंग लगभग तीन दशक तक पार्टी प्रमुख थे। इसके बाद साल 1980 में इस सर्वोच्च पद के लिए अधिकतम 10 साल के कार्यकाल का नियम बनाया गया था।

बता देें कि अधिवेशन के दौरान चीन के राष्ट्रपति रह चुके 80 वर्षीय हू जिंताओ को जबरन मीटिंग से निकाल दिया गया था। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बगल में बैठे हू जिंताओ को दो सुरक्षाकर्मियों ने कुर्सी से उठाया और मीटिंग हॉल से बाहर ले गए। इसका वीडियो भी सामने आया था।

वीडियो में दिख रहा है कि हू जिंताओ इस दौरान शी जिनपिंग से कुछ कहते नजर आए। इस दौरान वे वापस कुर्सी पर बैठने की कोशिश भी किए, लेकिन दो मार्शल उनकी बाँह में हाथ डालकर बाहर लेकर चले गए।

इसके अलावा, शी जिनपिंग ने चीन के पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले प्रधानमंत्री ली केकियांग को भी पार्टी के वरिष्ठ पद से हटा दिया है। उनके साथ-साथ तीन और शीर्ष नेताओं को हटाया गया है। अब ये चारों नेताओं को दोबारा कम्युनिस्ट पार्टी के सबसे ताकतवर पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य के रूप में दोबारा नियुक्त नहीं किया है और उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। 

पार्टी में पोलित ब्यूरो के 25 सदस्य और स्टैंडिंग कमेटी के 7 सदस्यों की वोटिंग की प्रक्रिया पूरी हो गई है। ये लोग कौन होंगे, इसका ऐलान आज हो सकता है। CCP की नई टीम से जिनपिंग ने अपने सारे विरोधियों को हटा दिया है। माना जा रहा है कि उन्होंने अपने भरोसेमंद लोगों को इसमें शामिल किया है। इससे उनके आजीवन राष्ट्रपति बने रहने का रास्ता साफ हो जाएगा। 

उल्लेखनीय है कि चीन का तीसरी बार राष्ट्रपति बनने से पहले शी जिनपिंग को जनता का काफी विरोध झेलना पड़ा। उनके खिलाफ पोस्टर लगे, नारेबाजी हुई। लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी ने सबकी आवाजें दबाने के लिए दूतावासों को ही जेल में बदल दिया और उन लोगों पर कार्रवाई शुरू कर दी जो उनके विरोध में बोल रहे थे।