Home Blog Page 2343

‘खड़ी हो जाओ और अपना टॉप उठाओ’: ‘दीया और बाती हम’ की अभिनेत्री ने याद की साजिद खान की करतूत, कहा – भारत आने में भी लग रहा डर

‘कलर्स टीवी’ पर आ रहे शो ‘बिग बॉस 16’ में फिल्म निर्देशक साजिद खान के आने के बाद से विवाद शुरू हो गए हैं। ‘Me Too’ अभियान के तहत कई महिलाओं ने उनके खिलाफ यौन शोषण के आरोप लगाए थे। उन्हें इस शो से निकाल बाहर करने की माँग हो रही है। इसी बीच एक अन्य अभिनेत्री कनिष्का सोनी ने साजिद खान को लेकर नया खुलासा किया है। ‘दीया और बाती हम’ की अभिनेत्री ने बताया कि कैसे साजिद खान ने उनसे टॉप उठा कर अपना पेट दिखाने को कहा था।

कनिष्का सोनी ने बताया कि ये घटना 2008 की है, जब साजिद खान ने उन्हें अपने घर बुलाया था। एक फिल्म में रोल देने के बहाने उनसे ऐसा करने को कहा गया था। अभिनेत्री ने कहा कि पिछले महीने इंटरव्यूज में ये खुलासा करने के बाद वो डरी हुई हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री के ऐसे लोग किसी की भी हत्या करा सकते हैं। कनिष्का सोनी ने कहा कि उन्हें भारतीय कानून में भरोसा नहीं है, लेकिन िश्व में विश्वास है और वही न्याय करेंगे।

उन्होंने ‘बिग बॉस 16’ के होस्ट सलमान खान से पूछा कि क्या वो इस शो में आने वाले प्रतिभागियों के चुनाव नहीं देखते हैं? कनिष्का सोनी ने बताया कि वो हॉलीवुड में नई शुरुआत कर रही हैं और इस खुलासे के बाद भारत नहीं आएँगी। इससे पहले कनिष्का सोनी ने कहा कि उन्होंने ऐसे लोगों का नाम न लेने का निर्णय लिया था, जिन्होंने उनसे ‘Give And Take’ की डिमांड रखी, लेकिन उसी में से एक डायरेक्टर-प्रोड्यूसर को अब ‘बिग बॉस 16’ में लाया गया है।

कनिष्का सोनी ने बताया, “2008 के समय मैंने 2 रियलिटी शो किए थे। इसके पेमेंट्स नहीं मिलते थे, इसीलिए घर चलाने के लिए मैंने बतौर रिपोर्टर भी काम किया। उसी दौरान साजिद खान से मेरा संपर्क हुआ। मैं उस समय बड़े लोगों के इंटरव्यूज लेती थीं। साजिद नाडियावाला के बंगले पर उन्होंने मुझे बुलाया था। मैंने उनसे बताया कि मैं अभिनय करने आई हूँ और क्या आप मुझे मौका दे सकते हैं। एकाध बार बात करने के बाद जुहू के फ्लैट में उन्होंने मुझे मिलने बुलाया।”

कनिष्का सोनी ने बताया कि वो शर्मीली किस्म की लड़की थीं, ऐसे में उन्हें किसी से अकेले मिलने में डर लगता था। लेकिन, साजिद खान ने बताया कि वो अपनी माँ के साथ रहते हैं और घर में काम करने वाले लोग भी हैं। कनिष्का ने बताया कि उन्होंने सोचा कि रिस्क लेना पड़ेगा और वो अपनी पोर्टफोलियो की फाइल लेकर उनके घर गईं। साजिद खान ने अपने कमरे में अपना पोर्टफोलियो चेक किया और अचानक से उन्हें खड़े होने को कहा।

बकौल कनिष्का सोनी, साजिद खान ने उनकी फिगर देखी और कहा कि ये अच्छा है। वो उस समय अपने बिस्तर पर आराम से बैठे हुए थे। उन्होंने इसके बाद उनका पेट देखने की डिमांड कर डाली। बकौल कनिष्का, उन्हें इन चीजों की आदत नहीं थी और साड़ी के अंदर से भी उनका पेट दिख जाता था तो वो असहज हो जाती थीं। उन्होंने साजिद खान से मना कर दिया। फिर साजिद खान ने उनकी पोर्टफोलियो बंद कर के कहा कि वो उन्हें फिल्म में नहीं ले सकते।

15000 से अधिक लोग खुलेआम करेंगे सेक्स, ऑनलाइन दर्ज करवा लिया है नाम-नंबर: पुतिन के परमाणु धमकी के विरोध में यूक्रेन के लोगों का जवाब

रूस और यूक्रेन में भीषण युद्ध जारी है। इस साल फरवरी में शुरू हुई इस जंग को आठ महीने होने वाले हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की धमकी के बीच खबर है कि यूक्रेन ने भी स्टीमी सेक्स पार्टी (Steamy Sex Party) की योजना बनाई है।

न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन द्वारा परमाणु हमला शुरू करने की स्थिति में टेलीग्राम ग्रुप पर ऑर्गी ऑन शेकेविस्त्सा: ऑफिशियल (Orgy on Shchekavystsa: Official) के लिए 15000 से अधिक लोगों ने साइन अप किया है। इसका हिंदी में मोटा-मोटी मतलब यह हुआ कि 15000 से अधिक लोग सामूहिक तौर पर सेक्स करेंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन की राजधानी कीव के बाहर एक पहाड़ी पर होने वाले कार्नल एक्ट्रावागांजा (Carnal Extravaganza) में भाग लेने वालों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने हाथों को धारियों से सजाएँ, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे किस तरह की गतिविधियों में रुचि रखते हैं। एनल सेक्स में रुचि रखने वालों को तीन धारियाँ, जबकि ओरल सेक्स पसंद करने वालों को चार धारियाँ बनाने के लिए कहा गया।

फोटो साभार: v_serduchka

एक महिला ने रेडियो चैनल से बात करते हुए कहा, “यह निराशा के विपरीत है। सबसे खराब स्थिति में भी लोग कुछ अच्छा खोजेंगे। लेकिन यह यूक्रेन के लोगों का मेगा-आशावाद है।” वहीं एक अन्य आदमी ने कहा, “यह दिखाने का प्रयास है कि जितना अधिक वे हमें डराने की कोशिश करेंगे, उतना ही हम इसे किसी और चीज में बदल देंगे।”

रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच सामूहिक सेक्स को लेकर अपडेट टेलीग्राम चैनल पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से खेरसॉन में जवाबी कार्रवाई को रूसियों को दिखाने के लिए बीडीएसएम जैसी सेक्स पार्टियाँ हैं। अफवाह है कि पुतिन यूक्रेन की सीमा के पास परमाणु परीक्षण की तैयारी कर रहे हैं और कीव में अधिकारी एहतियात के तौर पर पहले से ही पोटेशियम आयोडाइड की गोलियाँ दे रहे हैं।

बता दें कि यूक्रेन से जंग के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में धमकी देते हुए कहा था कि वह रूस सीमा की रक्षा करने के लिए हर तरह की ताकत का इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने पश्चिमी देशों के चेताते हुए कहा था कि वो इस बात को गीदड़ भभकी नहीं समझें।

पुतिन की इस धमकी को सीधा परमाणु हमले की धमकी से जोड़कर देखा जाने लगा। अमेरिका ने रूसी राष्ट्रपति के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि अगर पुतिन ने इस युद्ध में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया तो उसका विनाशकारी परिणाम होगा।

उत्तराखंड में ₹50000 के ईनामी को पकड़ने गई UP पुलिस को बना लिया बंधक, दोनों तरफ की फायरिंग में उप-प्रमुख की पत्नी की मौत, 5 पुलिसकर्मी भी घायल

अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका उदाहरण उत्तराखंड में देखने को मिला। एक मामले में 50 हजार के ईनामी के यहाँ छापेमारी करने गई यूपी पुलिस को उत्तराखंड में बंधक बना लिया गया। इस दौरान गोलीबारी में उप-प्रमुख की पत्नी की मौत हो गई।

मामला खनन से जुड़ा है। उत्तर प्रदेश की पुलिस उत्तराखंड के काशीपुर के एक गाँव में बुधवार (12 अक्टूबर 2022) को छापेमारी करने पहुँची थी। दो गाड़ियों में पहुँची पुलिस टीम सादी वर्दी में थी। गाँव में पहुँची पुलिस टीम पर हमला कर लोगों ने बंधक बना लिया।

पुलिस के अनुसार, मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा थाने से पुलिस टीम काशीपुर थाना क्षेत्र के भरतपुर गाँव गई प्रमुख गुरताज भुल्लर के घर पहुँची। इस दौरान स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। मामला बढ़ा तो दोनों ओर से फायरिंग होने लगी। इस फायरिंग में उप-प्रमुख की पत्नी गुरप्रीत कौर की मौत हो गई।

घटना के बाद ग्रामीणों सड़क पर जाम लगा दिया है। वहीं, स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँचकर लोगों को समझाने का प्रयास कर रही है। वहीं, मुरादाबाद के एसएसपी हेमंत कुटियाल ने बताया कि डंपर चालक के कुंडा थाने में छिपे होने की सूचना पर टीम ने दबिश दी थी। दबिश के दौरान हुई फायरिंग में पाँच जवान भी घायल हुए हैं।

बताया जा रहा है कि जिस डंपर चालक को पकड़ने पुलिस पहुँची थी, वह 50 हजार रुपए का ईनामी है। बता दें कि लगभग एक महीना पहले ठाकुरद्वारा क्षेत्र में भी खनन माफियाओं ने पुलिस से चार डंपर छुड़वा लिए थे। इसको लेकर 150 लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ था।

आमिर खान को किसी की भावनाएँ आहत करने की इजाजत नहीं… भारतीय परंपराओं को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने से भावनाएँ आहत: नरोत्तम मिश्रा

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान अपने नए विज्ञापन को लेकर विवादों में हैं। इस विज्ञापन में उनके साथ अभिनेत्री कियारा आडवाणी भी हैं। सोशल मीडिया पर इसका जमकर विरोध हो रहा है। इसी बीच मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस विज्ञापन को लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला बताया है। उन्होंने आमिर खान को भारतीय परंपराओं को ध्यान में रखकर विज्ञापन करने की सलाह दी है।

नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) ने बुधवार (12 अक्टूबर 2022) को कहा, “मैंने भी आमिर खान को एक निजी बैंक का विज्ञापन करते हुए देखा। इसके बारे में शिकायत मिलने के बाद ही मैंने इसे देखा। आमिर खान के इस तरह के भारतीय परंपरा, रीति-रिवाजों और देवी-देवताओं को लेकर विज्ञापन लगातार सामने आते रहे हैं। मैं इसे ठीक नहीं मानता हूँ।”

उन्होंने आगे कहा, “विज्ञापनों और फिल्मों में भारतीय परंपराओं और रीति-रिवाजों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने से धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं। फिल्म अभिनेता आमिर खान जी को भारतीय परंपराओं और रीति-रिवाजों को ध्यान में रखकर विज्ञापन करना चाहिए। उन्हें किसी की भी भावनाएँ आहत करने की इजाजत नहीं हैं।”

जिस विज्ञापन पर बवाल चल रहा है, अब उसकी बात। एक बैंक के विज्ञापन में दिखाया गया है कि एक गाड़ी में दूल्हा (आमिर खान) और दुल्हन (कियारा आडवाणी) बिदाई के बाद घर जा रहे हैं। इस दौरान आमिर खान कहते हैं कि ये पहली बिदाई है, जिसमें लड़की नहीं रोई।

इसके बाद विज्ञापन का अगला सीन गृह प्रवेश का है। यहाँ आमिर पूछते हैं अंदर पहले कौन जाएगा? कियारा जवाब देती हैं कि जो नया है वो। आमिर कहते हैं यानी ‘मैं’। आगे गृह प्रवेश होता है और लड़की की जगह आमिर को घर में प्रवेश करते दिखाया जाता है।

आखिर में संदेश दिया जाता है – “सदियों से जो प्रथा चलती आ रही है, वो चलती है क्यों? तभी तो हम सवाल पूछते हैं बैंकिंग की हर प्रथा से ताकि आपको मिले बेस्ट सर्विस- AU बैंक- बदलाव हमसे है।”

इसको लेकर सोशल मीडिया पर यूजर्स ने पूछा कि आखिर ऐसे विज्ञापन निकाह और हलाला जैसे मुद्दों पर क्यों नहीं बनाए जाते? हिंदू धर्म के रीति-रिवाजों को गलत दिखाने की क्या होड़ है? आमिर खान तीन तलाक और हलाल में बदलाव पर कब बात करेंगे?

हनुमान जी को नोटिस, 10 दिन के भीतर मंदिर खाली करने का आदेश… वरना कानूनी कार्रवाई: झारखंड में रेलवे का कारनामा

झारखंड के धनबाद से अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहाँ ईस्ट सेंट्रल रेलवे ने 7 अक्टूबर 2022 को भगवान हनुमान को जमीन खाली करने के लिए नोटिस भेज दिया। उन्होंने कहा कि अगर हनुमान जी ने 10 दिन के भीतर इस जमीन को खाली नहीं किया, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला बेकारबांध इलाके की खटीक बस्ती का है। रेलवे ने खटीक बस्ती में अपनी जमीन खाली कराने के लिए हनुमान भगवान के नाम पर एक नोटिस भेजा है। रेलवे ने नोटिस को मंदिर के बाहर लगाया है। इसमें लिखा गया है:

“आपको सूचित किया जाता है कि आपने रेल की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है, जो कि अपराध है। आपको निर्देश दिया जाता है कि नोटिस मिलने के 10 दिनों के अंदर रेलवे की जमीन से मंदिर हटा लें और इसे हमारे हवाले कर दें। यदि आपने ऐसा नहीं किया तो आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसे अति आवश्यक समझें।”

इसके अलावा रेलवे ने मंदिर के आसपास की अवैध झुग्गी-झोपड़ियों को भी हटाने को कहा है। यह मामला सामने के बाद यहाँ के लोगों में काफी ​आक्रोश है।

यहाँ के स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से रेलवे की जमीन पर रह रहे हैं। ऐसे में उन्हें परेशान करने के लिए नोटिस भेजा जा रहा है। हनुमान मंदिर पर नोटिस चस्पा करने पर उन्होंने कहा कि रेलवे की जमीन पर अन्य धर्मों के स्थान भी हैं, लेकिन नोटिस सिर्फ इसी मंदिर को ही जारी किया गया है।

उधर, हनुमान भगवान को नोटिस भेजकर अपनी किरकिरी करा चुके रेलवे के अधिकारियों ने कहा, “ये मानवीय भूल है। नोटिस में गलती से हनुमान जी का नाम लिख दिया गया। इसमें सुधार किया जाएगा। आगे से ऐसी गलती ना हो, इसका भी ध्यान रखा जाएगा। किसी की भावनाओं को आहत करना हमारा मकसद नहीं था, हमें बस जमीन से अतिक्रमण हटाना था।”

बता दें कि इस इलाके में 20 सालों से खटीक समुदाय के 300 से ज्यादा परिवार रहते हैं, जो यहाँ फल, सब्जी बेचने जैसे छोटे कारोबार करके अपना जीवनयापन कर रहे हैं। रेलवे उनसे यह जमीन खाली करवाना चाहती है।

मंदिर की ₹500 करोड़ की जमीन पर अवैध कब्जा, आंध्र प्रदेश में 60 साल की कानूनी लड़ाई के बाद 29.71 एकड़ जमीन कराया गया मुक्त: रिपोर्ट

आंध्र प्रदेश के विजग (Vizag, Andhra Pradesh) में लगभग 60 वर्षों की कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद राज्य सरकार की बंदोबस्ती विभाग ने एक मंदिर की जमीन (Temple Land) को बरामद कर लिया गया है। इस जमीन की कीमत 500 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है।

विजग के अनकापल्ली में अम्बिका बाग मंदिर स्थित है। इसे फूलबाग मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की 29.71 एकड़ जमीन पर लोगों ने अतिक्रमण कर लिया था। जब मंदिर प्रशासन ने इस जमीन से लोगों को हटाने की कोशिश की तो वे कोर्ट में चले गए। अब अतिक्रमण हटाकर यहाँ बोर्ड लगा दिया गया है।

यह जमीन अनकापल्ली में माँ नुकलम्मा मंदिर के पास स्थित है। इस जमीन को चेमुदु रियासत की महारानी विरिचेरला चद्रमणि पट्टा महादेवी ने जगदंबा जंक्शन के पास स्थित विजग के अम्बिका बाग रामालयम् मंदिर के रख-रखाव के लिए दान में दिया था। महारानी ने यह दान 20 जुलाई 1957 को पंजीकृत वसीयत द्वारा किया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, विजग के रामालयम् मंदिर का जमीन लंबे समय से कानूनी पचड़े में पड़ा था। हालाँकि, साल 2007 में बंदोबस्ती विभाग ने इस कानूनी लड़ाई को जीत लिया और मंदिर का पुनर्निर्माण कराया।

वहीं, कुछ लोगों ने दावा किया कि अनकापल्ली स्थित रामालयम मंदिर की जमीन अपनी संपत्ति है। इसके बाद ईनम की ट्रिब्यूनल ने बंदोबस्ती विभाग के पक्ष में निर्णय दिया, लेकिन लोग बार-बार विभिन्न अदालतों में मुकदमा दायर करते रहे। हालाँकि, यहाँ भी लोगों को निराशा हाथ लगी।

मंदिर के कार्यकारी अधिकारी एवं सहायक आयुक्त ने राजस्व विभाग और पुलिस के सहयोग से जमीन को अतिक्रमण से मुक्त करा लिया और वहाँ पर बोर्ड लगवा दिया कि यह जमीन मंदिर की है।

‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की दयाबेन को हुआ गले का कैंसर… क्योंकि अलग तरह की आवाज निकालती थीं – फैक्ट चेक

‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) की दयाबेन यानी दिशा वकानी (Disha Vakani) को कैंसर हो गया है – ऐसी खबर सोशल मीडिया पर चल रही है। लोग शेयर कर रहे हैं कि उन्हें गले का कैंसर हो गया है।

दयाबेन का किरदार निभाने वाली दिशा वकानी को ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में अलग तरह की आवाज निकालने के चलते गले का कैंसर हो गया है, सोशल मीडिया में ऐसे तर्क दिए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह खबर खूब वायरल हो रही है, जिससे दयाबेन के फैंस परेशान हो गए हैं।

कुछ मीडिया हाउस ने तो इसको लेकर खबर भी चला दी

अभी तक इसको लेकर दिशा वकानी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनके भाई मयूर वकानी (Mayur Vakani) ने हालाँकि इस खबर पर रिएक्ट किया है।

‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) में सुंदर लाल की भूमिका निभा रहे मयूर ने दिशा वकानी को गले का कैंसर होने की खबर को अफवाह बताते हुए मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी बहन पूरी तरह से स्वस्थ हैं, उन्हें किसी भी तरह का कोई भी कैंसर नहीं हुआ है।

मयूर वकानी ने इसके साथ ही लोगों से अनुरोध किया है कि वह ऐसी अफवाहों पर ध्यान ना दें। इस अफवाह को दूर करने के लिए दिशा वकानी (Disha Vakani) के भाई ने मीडिया से बात भी की। उनके अलावा ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में काम करने वाले अन्य कलाकारों ने भी मीडिया से बात की।

दिशा पूरी तरह से स्वस्थ है: मयूर वकानी

मयूर वकानी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, “ऐसी बहुत सारी अफवाहें आती रहती हैं। इसमें कोई सच्चाई नहीं है। दिशा पूरी तरह से स्वस्थ हैं। वह जब से इस शो को छोड़कर गई हैं, तब से हर दिन उनके बारे में ऐसी खबरें सुनने को मिलती रहती हैं, लेकिन दिशा के फैंस को ऐसी किसी भी खबरों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।”

ऐसी खबरों पर ध्यान न दें: दिलीप जोशी

वहीं इस शो में जेठालाल का किरदार निभाने वाले दिलीप जोशी इस खबर को लेकर कहते हैं, “मुझे सुबह से लगातार कॉल्स आ रहे हैं। मुझे लगता है कि इस तरह की अफवाह को बढ़ावा देने की जरूरत नहीं है। मैं बस इतना कहूँगा कि ये सब अफवाह है। आप सब लोग इस पर ध्यान न दें।”

ये सिर्फ अफवाहें हैं: जेनिफर मिस्त्री

इस शो में रोशन सिंह सोढ़ी की वाइफ की भूमिका निभा रही जेनिफर मिस्त्री बंसीवाल ने कहा, “मैं लगातार दिशा के संपर्क में हूँ। मुझे नहीं लगता कि यह खबर सच है। अगर ऐसा कुछ होता तो पता चलता। मैंने उनसे अगस्त के अंत में ही बात की है। हम दोनों आसपास रहते हैं। मैंने उनसे अपनी बेटी की कथक क्लास के बारे में बात की थी। उस वक्त वह मुझे बिल्कुल ठीक लग रही थीं। मुझे लगता है कि ये सिर्फ अफवाहें हैं।”

‘नेहरू ने महाराजा हरि सिंह के विलय के प्रस्ताव को स्वीकारने में देर की थी’: केंद्रीय मंत्री ने सरकारी रिकॉर्ड दिखाया, दशकों पुराना कॉन्ग्रेसी प्रोपेगेंडा हुआ फुस्स

कॉन्ग्रेस और कॉन्ग्रेसी जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह द्वारा भारत में शामिल होने को लेकर अक्सर झूठ बोला जाता है। वे अक्सर तर्क देते हैं कि महाराजा हरि सिंह भारत में तब तक शामिल होना नहीं चाहते थे, जब तक पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण नहीं कर दिया। इस तर्क कॉन्ग्रेसी महाराजा के प्रति पंडित जवाहरलाल नेहरू की घृणा और शेख अब्दुल्ला के प्रति अगाध प्रेम को छुपाने का प्रयास करते हैं। महाराजा हरि सिंह और शेख अब्दुल्ला के बीच अनबन भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण क्रम है।

कॉन्ग्रेस के इसी तर्क को एक बार फिर कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने दिया है। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) पर निशाना साधने के चक्कर में इस पर एक बार फिर बहस छेड़ दी, जिसका जवाब केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने दिया।

जयराम रमेश ने ट्वीट की सीरीज में पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए कहा, “पीएम ने एक बार फिर असली इतिहास को छिपा दिया है। वह केवल जम्मू-कश्मीर पर नेहरू की आलोचना करने के लिए निम्नलिखित तथ्यों की अनदेखी करते हैं। यह सब राजमोहन गाँधी की सरदार पटेल की जीवनी में अच्छी तरह से उल्लेखित है। ये तथ्य जम्मू-कश्मीर में पीएम के नए शख्स को भी पता हैं।”

जयराम रमेश ने पहला तर्क दिया, “महाराजा हरि सिंह ने विलय करने में आनाकानी की। उनके आजादी के सपने थे, लेकिन जब पाकिस्तान ने आक्रमण किया तो हरि सिंह भारत में शामिल हो गए।”

जयराम ने अगले बिंदु में बताया, “शेख अब्दुल्ला ने नेहरू के साथ अपनी मित्रता और गाँधी के प्रति सम्मान के कारण भारत में विलय का समर्थन किया।” उन्होंने आगे लिखा, 13 सितंबर 1947 तक, “जब जूनागढ़ के नवाब पाकिस्तान में शामिल हो गए, तब तक सरदार पटेल जम्मू-कश्मीर के पाकिस्तान में शामिल होने को लेकर परेशान नहीं थे।”

जयराम रमेश के इस ट्वीट का केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने खंडन किया और इसके संदर्भ में उन्होंने भी कई ट्वीट कर इसके संदर्भ दिए। केंद्रीय मंत्री ने ट्वीट किया, “यह ‘ऐतिहासिक झूठ’ कि महाराजा हरि सिंह ने कश्मीर के भारत में विलय के प्रस्ताव को टाल दिया था, जवाहरलाल नेहरू की संदिग्ध भूमिका को छिपाने के लिए बहुत लंबे समय तक चला है। जयराम रमेश के झूठ का पर्दाफाश करने के लिए मैं खुद नेहरू को उद्धृत करता हूँ।”

उन्होंने आगे लिखा, “24 जुलाई 1952 को (शेख अब्दुल्ला के साथ समझौते के बाद) नेहरू लोकसभा में यह बात बताई है। आजादी से एक महीने पहले पहली बार महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय के लिए नेहरू से संपर्क किया था। यह नेहरू थे, जिन्होंने महाराजा को फटकार लगाई थी।”

जयराम रमेश के प्रोपेगेंडा की हवा निकालते हुए किरन रिजिजू आगे तर्क देते हैं, “यहाँ नेहरू के अपने शब्दों में कहा गया है कि ये महाराजा हरि सिंह नहीं थे, जिन्होंने कश्मीर के भारत में विलय में देरी की, बल्कि ये स्वयं नेहरू थे। महाराजा ने अन्य सभी रियासतों की तरह जुलाई 1947 में ही संपर्क किया था। अन्य राज्यों के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया, लेकिन कश्मीर को भारत में शामिल करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था।”

जयराम रमेश संबोधित करते हुए वे आगे कहते हैं, “नेहरू ने न केवल जुलाई 1947 में महाराजा हरि सिंह के विलय के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया, बल्कि नेहरू ने अक्टूबर 1947 में भी टालमटोल किया। यह तब हुआ, जब पाकिस्तानी आक्रमणकारी श्रीनगर के एक किलोमीटर के दायरे में पहुँच गए थे। ये भी नेहरू के अपने शब्दों में है।”

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आगे, मूल ये है: (1) महाराजा जुलाई 1947 में ही भारत में शामिल होना चाहते थे, (2) यह नेहरू थे जिन्होंने हरि सिंह के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था, (3) नेहरू ने कश्मीर के लिए ‘विशेष’ मामला गढ़ा और वे विलय से ‘बहुत अधिक’ चाहते थे। वह विशेष मामला क्या था? वोट बैंक की राजनीति?”

केंद्रीय मंत्री पंडित नेहरू की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए जयराम रमेश से पूछा, “नेहरू द्वारा कश्मीर को ही एकमात्र अपवाद क्यों बनाया गया, जहाँ रियासत के शासक भारत में शामिल होना चाहते थे और फिर भी नेहरू ‘और भी बहुत कुछ’ चाहते थे? इतना अधिक क्या था? सच तो यह है कि भारत अभी भी नेहरू की मूर्खता की कीमत चुका रहा है।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस अब तक यही कहते रही है कि कश्मीर समस्या जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन महाराजा हरि सिंह की वजह से उत्पन्न हुआ है। कॉन्ग्रेसियों का तर्क रहा है कि महाराजा हरि सिंह जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय करना चाहते थे, बल्कि वे स्वतंत्र रहना चाहते थे।

कॉन्ग्रेसी कहते रहे हैं कि जब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण किया तो हरि सिंह ने भारत में विलय का प्रस्ताव रखा था। यही बात अब तक कॉन्ग्रेसी कहते रहे हैं। जयराम रमेश भी नेहरू की गलतियों को छिपाने के लिए यही प्रोपेगेंडा का बखान कर रहे थे। हालाँकि, केंद्रीय मंत्री ने उनकी प्रोपेगेंडा को सार्वजनिक रूप से ध्वस्त कर दिया।

मूसा कुरैशी तेलंगाना से धराया: IB अफसर अंकित शर्मा को 400+ बार चाकुओं से गोदने में इसका भी नाम, दिल्ली हिंदू-विरोधी दंगों के बाद था गायब

दिल्ली में हुए हिंदू-विरोधी दंगों में IB अफसर अंकित शर्मा की हत्या के आरोपितों में से एक मुंतजिम उर्फ मूसा कुरैशी (Muntajim or Musa Qureshi) को गिरफ्तार कर लिया गया है। मूसा कुरैशी तेलंगाना में छिपा हुआ था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने इसे तेलंगाना में ही धर दबोचा।

मूसा कुरैशी एक शातिर अपराधी है। यह पहले भी अपहरण और बलात्कार के मामले में जेल जा चुका है। दिल्ली हिंदू-विरोधी दंगों में IB अफसर अंकित शर्मा की हत्या के आरोप में अरविंद केजरीवाल वाली आम आदमी पार्टी के तत्कालीन पार्षद ताहिर हुसैन को भी गिरफ्तार किया गया था।

दिल्ली दंगा और अंकित शर्मा हत्या

दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के अनुसार अंकित शर्मा की हत्या चाँदबाग में 10 लोगों ने मिल कर की थी। इनमें ताहिर हुसैन के साथ-साथ हलील सलमान और समीर नामक आरोपित भी थे। नाजिम और कासिम नाम के दो कुख्यात अपराधी भी इस जघन्य हत्याकांड में शामिल थे।

पोस्टमॉर्टम के मुताबिक उनके शरीर का एक भी हिस्सा ऐसा नहीं था, जिसमें चाकू के गहरे घाव न हों। डॉक्टर ने लिखा है कि 400 से ज़्यादा बार उन्हें चाकुओं से गोदा गया। उनकी आँत को शरीर से बाहर निकाल दिया था। फोरेंसिक डॉक्टरों ने कहा कि इस तरह से यातना का शिकार और क्षत-विक्षत बॉडी उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा।

अंकित शर्मा हत्या मामले में गिरफ्तारियाँ

दिल्ली हिंदू-विरोधी दंगों के दौरान आइबी कॉन्सटेबल अंकित शर्मा की जघन्य हत्‍या के मामले में मूसा कुरैशी से पहले दिल्‍ली पुलिस ने सलमान नाम के शख्‍स को गिरफ्तार किया था। सलमान नाम के आरोपित को पाँच नामों से जाना जाता है, जो मोमिन उर्फ सलमान उर्फ हसीन उर्फ मुल्ला उर्फ नन्हें है।

सलमान से पहले अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस ने तत्कालीन पार्षद ताहिर हुसैन को भी गिरफ्तार किया था। ताहिर हुसैन का नाम एफआईआर में भी दर्ज है।

‘साल भर से अधिक समय से रहने वाले लोग दे सकेंगे वोट’: जम्मू प्रशासन का निर्देश, घबराए महबूबा-फारूक बोले- डेमोग्राफी में बदलाव किया जा रहा

विशेष दर्जा वाला अनुच्छेद 370 हटने के बाद सामान्य हालात को देखते हुए केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में अगले साल विधानसभा चुनाव होंगे। इसको लेकर जम्मू प्रशासन ने राज्य में एक साल से अधिक समय से रहने वाले लोगों को आवास प्रमाण पत्र जल्दी जारी करने का निर्देश दिया है, ताकि वे वोटर लिस्ट में अपने नाम को जोड़वा सकें। इसको लेकर वहाँ की पार्टियों ने इसका विरोध किया है और कहा कि सरकार राज्य का जनसांख्यिकीय बदलाव कर रही है।

विरोध करने वालों में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के सुप्रीमो फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) प्रमुख हैं। इसके अलावा, भाजपा विरोधी गुप्कार (Gupkar) में शामिल पार्टियों ने इसका विरोध करते हुए इसे साजिश बताया है।

दरअसल, जम्मू के जिला मजिस्ट्रेट अवनी लवासा ने मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) को एक नोटिफिकेशन जारी कर सभी तहसीलदारों को एक वर्ष से अधिक समय से जम्मू में रहने वाले लोगों को निवास का प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। यह बात सामने आई थी कि आवास प्रमाण सहित दस्तावेजों के अभाव में कुछ लोगों को वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल कराने में दिक्कत आ रही है।

यदि किसी भारतीय नागरिक के पास घर नहीं है और वह बेघर है तो ऐसे में तहसीलदार एक अधिकारी को नामित करेगा, जो उसकी फिल्म वेरीफिकेशन करने के निवास प्रमाण जारी करने के लिए अनुशंसा करेगा। इसके आधार पर प्रशासन द्वारा निवास प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा, ताकि वह मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सके।

बता दें कि 15 सितंबर से जम्मू-कश्मीर में मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया शुरू हुई है। वहीं, विधानसभा सीटों का परिसीमन करने के बाद वहाँ विधानसभा सीटों को 83 से बढ़ाकर 90 कर दिया गया है। इस जम्मू में 6 सीटों और कश्मीर में एक सीट की बढ़ोतरी की गई है। जम्मू प्रशासन की तर्ज पर अन्य जिलों में भी इस तरह के आदेश जल्दी जारी किए जा सकते हैं।

महबूबा-फारूक का विरोध

प्रशासन के इस निर्णय का जम्मू-कश्मीर की पार्टियों ने विरोध किया है। गुप्कार के नाम से भाजपा विरोधी मंच बनाए जम्मू-कश्मीर की पार्टियों ने आरोप लगाया है कि भाजपा अपने वोटरों को जोड़ रही है। इन पार्टियों ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जम्मू-कश्मीर की डेमोग्राफिक बदलाव कर रही है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में पीपुल्स अलायंस फॉर गुप्कार डिक्लेरेशन (PAGD) ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार बाहरी लोगों के जरिए चुनाव में धांधली करना चाहती है। पिछले हफ्ते जम्मू में अपनी बैठक में, पीएजीडी ने संशोधित मतदाता सूची में गैर-स्थानीय लोगों के “हेरफेर और समावेश” के खिलाफ लड़ने के लिए 14 सदस्यीय समिति के गठन की घोषणा की थी।

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने ट्वीट किया, “सरकार जम्मू-कश्मीर में 25 लाख गैर-स्थानीय मतदाताओं को जोड़ने की अपनी योजना के साथ आगे बढ़ रही है और हम इस कदम का विरोध करना जारी रखेंगे। बीजेपी चुनाव से डरी हुई है और जानती है कि वह बुरी तरह हारेगी। जम्मू-कश्मीर के लोगों को इन साजिशों को बैलेट बॉक्स में हराना चाहिए।”

उधर, PDP की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर कहा, “नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए चुनाव आयोग के नवीनतम आदेश से यह स्पष्ट होता है कि जम्मू में भारत सरकार की औपनिवेशिक बसावट वाली परियोजना शुरू की गई है। वे डोगरा संस्कृति, पहचान, रोजगार और व्यवसाय को पहला बर्बाद कर देंगे।”

महबूबा ने आगे कहा, “जम्मू और कश्मीर के बीच धार्मिक और क्षेत्रीय विभाजन पैदा करने के भाजपा के प्रयासों को विफल किया जाना चाहिए, क्योंकि चाहे वह कश्मीरी हो या डोगरा, हमारी पहचान और अधिकारों की रक्षा तभी संभव होगी जब हम सामूहिक लड़ाई लड़ेंगे।