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हिजाब पर सुप्रीम कोर्ट बँटी: एक ने कहा- इस्लाम में अनिवार्य नहीं, दूसरे ने बताया चॉइस का मामला; अब CJI लेंगे फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने हिजाब मामले में ‘Split Verdict’, अर्थात बँटा हुआ फैसला दिया है। कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब में अनुमति के सम्बन्ध में दो जजों की पीठ सुनवाई कर रही थी, जिनकी राय अलग-अलग रही। जहाँ जस्टिस सुधांशु धुलिया ने कर्नाटक हाईकोर्ट के जजमेंट को ख़ारिज करते हुए इसके खिलाफ याचिकाओं को अनुमति दे दी, वहीं जस्टिस हेमंत गुप्ता ने हिजाब बैन वाले कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया।

अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया गया है, जो एक बड़ी बेंच का गठन करेंगे। यही बेंच इस मामले की सुनवाई कर के फैसला देगी। जस्टिस हेमंत गुप्ता ने हिजाब पर प्रतिबंध के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को खारिज करने का प्रस्ताव रखा। वहीं सुधांशु धुलिया ने कहा कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने गलत रास्ता चुना और ये पूरा मामला मजहब में अनिवार्यता का न होकर व्यक्तिगत पसंद का है, अनुच्छेद 14 और 19 का है।

उन्होंने कहा कि उनके मन में सबसे बड़ा सवाल लड़कियों की शिक्षा का था कि क्या हम उनके जीवन को बेहतर बना रहे हैं? उन्होंने कर्नाटक सरकार द्वारा 5 फरवरी,2022 को जारी किए गए आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब में क्लासरूम में आने की अनुमति नहीं दी गई थी। जस्टिस सुधांशु धुलिया ने कहा कि वो इन प्रतिबंधों में ढील देने के पक्षधर हैं। 10 दिनों की सुनवाई के बाद 22 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में ऑर्डर रिजर्व कर लिया था।

जस्टिस सुधांशु धुलिया ने कहा कि कई क्षेत्रों में लड़कियाँ स्कूल जाने के अलावा घर के कामकाज भी करती हैं, ऐसे में क्या हिजाब पर प्रतिबंध लगा कर हम उसके जीवन को बेहतर बना रहे हैं? वहीं जस्टिस हेमंत गुप्ता ने माना कि हिजाब पहनना इस्लाम मजहब का अनिवार्य हिस्सा नहीं है और राज्य सरकार का आदेश शिक्षा तक पहुँच की भावना के लिहाज से सही है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को सही ठहराया था, जिसमें स्कूल-कॉलेज के प्रबंधनों को यूनिफॉर्म के रूप में हिजाब को बैन करने का अधिकार मिल गया था। मुस्लिम लड़कियाँ इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँची थीं

अपने ही जाल में उलझी AAP, पुराने हाल में कॉन्ग्रेस: यह मत पूछिए गुजरात कौन जीतेगा, यह जानिए कि BJP को सीटें कितनी

एक पुराना जोक है। एक पुत्र अपने पिता से कहता है कि वह 100 मीटर की रेस में तीसरा आया है। प्रफुल्लित ​पिता पूछते हैं कि कुल कितने लोग दौड़ रहे थे? बेटे ने जवाब दिया- 3। लेकिन गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले केवल एक ही पार्टी दौड़ती दिख रही है। अन्य पार्टियों को देखकर ऐसा लगता है कि उन्होंने रेस से पहले ही सरेंडर कर दिया है या फिर रेस शुरू होने से पहले ही उनका दम उखड़ने लगा है।

हालिया घटनाक्रमों को देखें तो दूर से बैठकर ऐसा लगता है कि गुजरात विधानसभा से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) फोकस में है। लेकिन जमीन पर देखें तो पता चलता है कि आप को जो फोकस मिला है, वह अत्यंत नकारात्मक वजहों और सामान्य गुजरातियों के गुस्से के कारण ही आया है। आप की को​शिश रही है कि वह यह संदेश दे सके कि मुकाबला उसके और बीजेपी के बीच होना है। लेकिन इस फेर में उसने खुद को ही फँसा लिया है।

वहीं कॉन्ग्रेस अभी तक रेस शुरू भी नहीं कर सकी है। गुजरात कॉन्ग्रेस चुनावी मूड में आने का प्रयास शुरू ही कर रही थी कि उसके प्रभारी अशोक गहलोत ने आलाकमान के विरुद्ध बिगुल फूँक दिया और उनका सारा ध्यान अपनी कुर्सी बचाने में लग गया। गुजरात में कॉन्ग्रेस कैसे जीते, उसकी रणनीति तैयार करना उनकी प्राथमिकता में कहीं नहीं है। वैसे गुजरात कॉन्ग्रेस के लिए यह कोई नई बात नहीं है। बीते तीन दशक से वह रेस में होने का सिर्फ़ दिखावा करती है और परिणाम आने के बाद ‘हम मनोमंथन करेंगे’ कहकर प्रदेश प्रमुख और अन्य के इस्तीफे लेकर पार्टी अगली पराजय की तैयारियों में लग जाती है।

गुजरात विधानसभा में कुल 182 सीटें है। चुनाव नवंबर के अंत या दिसंबर की शुरुआत में संभावित है। 2017 में पाटीदार आंदोलन के चलते भाजपा केवल 99 सीटों पर सफल हो सकी थी। यह बहुमत से केवल 7 सीट ज़्यादा थी। लेकिन चुनाव के बाद कई कॉन्ग्रेसी MLA भाजपा में शामिल हो गए। आज विधानसभा में बीजेपी बल 111 का है, जबकि कॉन्ग्रेस सिमटकर 62 पर रह गई है।

यदि इतिहास की बात करें तो गुजरात में कॉन्ग्रेस ने संपूर्ण सत्ता का स्वाद अंतिम बार 1985 में चखा था, जब KHAM थ्योरी के दम पर माधव सिंह सोलंकी मुख्यमंत्री बने थे। कॉन्ग्रेस ने तब 149 सीटों पर जीत हासिल की थी। मजे की बात यह है कि माधव सिंह सोलंकी के इस रिकॉर्ड को उनसे कई गुना लोकप्रिय होने के बावजूद नरेंद्र मोदी कभी भी नहीं तोड़ सके।

1995 में भाजपा गुजरात में पहली बार पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने में कामयाब हुई। लेकिन शंकर सिंह वाघेला के खजुराहो कांड के चलते करीब डेढ़ साल में ही सत्ता हाथ से चली गई। वाघेला ने पहले अपनी पार्टी बनाई और फिर कॉन्ग्रेस में विलीन हो गए। 1998 के मध्यावधि चुनावों में बीजेपी ने फिर से पूर्ण बहुमत हासिल किया। उसके बाद से गुजरात की सत्ता में बीजेपी मजबूती से बनी हुई है।

अब फिर से मौजूदा स्थिति पर लौटते हैं। भले आप खुद को बीजेपी से मुकाबिल दिखाने की भरसक कोशिश कर रही हो, लेकिन जमीन पर इस बार भी मुख्य मुकाबला बीजेपी और कॉन्ग्रेस के बीच ही होता दिख दिख रहा है। हाँ, बीजेपी विरोधी जो वोट अब तक एकमुश्त कॉन्ग्रेस को मिलते रहे हैं, उसका कुछ हिस्सा इस बार AAP भी ले जा सकती है। मुस्लिम बहुल सीटों पर ओवैसी की AIMIM भी है। फिलहाल जो स्थिति दिख रही उसमें आप और ओवैसी, दोनों कॉन्ग्रेस को नुकसान करते दिख रहे हैं। इसके कारण इस बार कॉन्ग्रेस के 40 के आसपास सिमटने का अनुमान लगाया जा रहा है।

2017 के चुनावों में स्थिति अलग थी। पाटीदार अनामत आंदोलन की मायावी आड़ लेकर कॉन्ग्रेस चुनाव लड़ी थी। इसके कारण वह बीजेपी को टक्कर देती दिख रही थी। 2017 में यदि पाटीदार आंदोलन का असर न होता तो बीजेपी की विधानसभा में कमोबेश उतनी ही सीटें होती, जितनी फिलवक्त विधानसभा में उसकी संख्या बल है। लेकिन इस बार बीजेपी की सरकार के विरुद्ध ऐसा कोई अंडर करंट नहीं दिख रहा है जो उसे दो तिहाई बहुमत मिलने से रोक सके।

वहीं आम आदमी पार्टी की बात करें तो ऐसा लगता है कि गोपाल इटालिया को गुजरात प्रदेश प्रमुख बना कर अरविंद केजरीवाल ने बहुत बड़ी गलती कर दी है। इटालिया भले एकाध साल से ही आप के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष हैं, किन्तु सोशल मीडिया पर उनका इतिहास काफी लंबा और दागदार है। उनकी भाषा और हिंदू धर्म विरुद्ध उनकी टिप्पणियाँ AAP के लिए आत्मघाती साबित हो रही हैं। एक सामान्य गुजराती जो धार्मिक है, उसके मन में इटालिया के प्रति बहुत रोष दिखता है।

वैसे तो आधिकारिक तौर पर गुजरात के विधानसभा का चुनावी शंखनाद नहीं हुआ है। पर चौसर बिछने शुरू हो चुके हैं। अभी जो माहौल है और जिस तरह से गोटी फेंकी जा रही उससे लगता है कि बीजेपी यदि 120 से लेकर 140 सीटों तक नहीं ला पाती है तो यह एक तरह से उसके लिए असफलता ही होगी। 2017 के उलट इस बार माहौल बीजेपी के पक्ष में उसी तरह है, जैसे नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुआ करती थी।

‘बकरीद पर बचेंगे तो मुहर्रम पर नाचेंगे’: राहुल गाँधी की PM उम्मीदवारी पर खड़गे का गोलमोल जवाब, BJP ने बताया मुस्लिमों का अपमान

राज्यसभा में कॉन्ग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे अब पार्टी का अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। उन्होंने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है और उन्हें गाँधी परिवार का समर्थन भी हासिल है। 2024 लोकसभा चुनाव में राहुल गाँधी की प्रधानमंत्री उम्मीदवारी को लेकर जब उनसे सवाल पूछा गया, तब उन्होंने गोलमोल जवाब दिया। मल्लिकार्जुन खड़गे भोपाल में प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे, तब उनसे ये सवाल पूछा गया था।

उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा, “बकरीद में बचेंगे तो मुहर्रम में नाचेंगे।” इस कहावत को कहने के पीछे उनका अर्थ था कि पहले संगठन के चुनाव हो जाएँ, फिर इस पर सोचा जाएगा। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गाँधी की प्रधानमंत्री उम्मीदवारी पर संशय है? या फिर पार्टी इसके लिए भी अध्यक्ष पद की तरह किसी वफादार नेता को आगे करेगी? राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे नेता प्रतिपक्ष थे, जिससे उन्हें इस्तीफा दे दिया है।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद के लिए उनका सामना केरल के नेता शशि थरूर से है। मध्य प्रदेश में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उनसे उनके पक्ष में वोट डालने की अपील की। उन्होंने कहा कि वो सामूहिक नेतृत्व में भरोसा रखते हैं। उन्होंने दावा किया कि गाँधी परिवार में किसी के अध्यक्ष बनने के लिए तैयार न होने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं की सलाह पर उन्होंने ये जिम्मेदारी उठाई है।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उनकी पार्टी लोगों के अधिकारों के लिए लड़ेगी। शशि थरूर के सम्बन्ध में उन्होंने कहा कि दोनों में कोई अंतर नहीं है और सब मिल कर भाजपा के विरुद्ध लड़ेंगे। खड़गे के बकरीद-मुहर्रम वाले बयान को भाजपा ने मुस्लिमों का अपमान करार दिया है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि मुहर्रम कोई जश्न नहीं है, बल्कि मातम है। सोमवार (17 अक्टूबर, 2022) को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव है और 19 को परिणाम जारी किए जाएँगे।

रेप, प्राइवेट पार्ट पर चाकू से वार… यौन सुख के लिए हत्या करता था मोहम्मद शफी, वामपंथी कार्यकर्ता के सामने ही उसकी बीवी से करता था सेक्स

केरल के कोच्चि में काले जादू के नाम पर दो महिलाओं की कुर्बानी के मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस मामले में मुख्य आरोपित 52 साल का मोहम्मद शफी उर्फ रशीद है। इन हत्याओं में उसका साथ देने वाला CPI (M) कार्यकर्ता भगवल सिंह और उसकी बीवी लैला को भी पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। मामले की जाँच के लिए कोच्चि के डीसीपी एस शशिधरन के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शफी यौन विकृति का शिकार है। वह यौन सुख के लिए किसी भी हद तक जा सकता था। वह रेप के बाद महिलाओं के प्राइवेट पार्ट पर चाकू से वार करता था। उनकी हत्या तक कर देता था। यह भी कहा जा रहा है कि वह भगवल के सामने ही लैला के साथ सेक्स करता था। दोनों भगवंत की हत्या की भी प्लानिंग कर रहे थे।

पुलिस के मुताबिक शफी उन उम्रदराज महिलाओं को झाँसे में लेता था, जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती थी। उन्हें वह मदद का भरोसा देता था। विश्वास में लेने के बाद उनकी हत्या कर देता था। वह अपनी यौन संतुष्टि के लिए महिलाओं को तकलीफ देता था, भले ही इसमें उनकी जान ही क्यों न चली जाए।

एक रिपोर्ट के मुताबिक शफी ने छठी तक पढ़ाई की है। वह 2 बेटियों का अब्बा है। उसने एक फर्जी फेसबुक एकाउंट बना रखा था। इसके जरिए आर्थिक परेशानी से जूझ रहे लोगों से सम्पर्क करने की अपील की थी। खुलासे के मुताबिक वह चीखों और खून को देखकर काफी उत्तेजित होता था। पुलिस के मुताबिक वह भगवल और उनकी पत्नी लैला के सम्पर्क में पिछले 3 सालों से था। भगवल सिंह 68 जबकि लैला 59 साल की है।

एक अन्य रिपोर्ट में शफी के पड़ोसी ने बताया कि उसका कोई घर नहीं है। वह किराए के मकान में रहता था। लेकिन उसके पास कई गाड़ियाँ है। शफी के दोस्त बिलाल के मुताबिक उसके पास एक प्राइवेट बस और स्कार्पिओ भी है। शफी का एक होटल भी बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि शफी का नशे के कारोबार से भी कनेक्शन है। शफी पर कुल 10 केस पेंडिंग हैं। इनमें से एक 75 साल की महिला से रेप और उसके प्राइवेट पार्ट पर चाकुओं से वार करने का भी है।

‘खड़ी हो जाओ और अपना टॉप उठाओ’: ‘दीया और बाती हम’ की अभिनेत्री ने याद की साजिद खान की करतूत, कहा – भारत आने में भी लग रहा डर

‘कलर्स टीवी’ पर आ रहे शो ‘बिग बॉस 16’ में फिल्म निर्देशक साजिद खान के आने के बाद से विवाद शुरू हो गए हैं। ‘Me Too’ अभियान के तहत कई महिलाओं ने उनके खिलाफ यौन शोषण के आरोप लगाए थे। उन्हें इस शो से निकाल बाहर करने की माँग हो रही है। इसी बीच एक अन्य अभिनेत्री कनिष्का सोनी ने साजिद खान को लेकर नया खुलासा किया है। ‘दीया और बाती हम’ की अभिनेत्री ने बताया कि कैसे साजिद खान ने उनसे टॉप उठा कर अपना पेट दिखाने को कहा था।

कनिष्का सोनी ने बताया कि ये घटना 2008 की है, जब साजिद खान ने उन्हें अपने घर बुलाया था। एक फिल्म में रोल देने के बहाने उनसे ऐसा करने को कहा गया था। अभिनेत्री ने कहा कि पिछले महीने इंटरव्यूज में ये खुलासा करने के बाद वो डरी हुई हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री के ऐसे लोग किसी की भी हत्या करा सकते हैं। कनिष्का सोनी ने कहा कि उन्हें भारतीय कानून में भरोसा नहीं है, लेकिन िश्व में विश्वास है और वही न्याय करेंगे।

उन्होंने ‘बिग बॉस 16’ के होस्ट सलमान खान से पूछा कि क्या वो इस शो में आने वाले प्रतिभागियों के चुनाव नहीं देखते हैं? कनिष्का सोनी ने बताया कि वो हॉलीवुड में नई शुरुआत कर रही हैं और इस खुलासे के बाद भारत नहीं आएँगी। इससे पहले कनिष्का सोनी ने कहा कि उन्होंने ऐसे लोगों का नाम न लेने का निर्णय लिया था, जिन्होंने उनसे ‘Give And Take’ की डिमांड रखी, लेकिन उसी में से एक डायरेक्टर-प्रोड्यूसर को अब ‘बिग बॉस 16’ में लाया गया है।

कनिष्का सोनी ने बताया, “2008 के समय मैंने 2 रियलिटी शो किए थे। इसके पेमेंट्स नहीं मिलते थे, इसीलिए घर चलाने के लिए मैंने बतौर रिपोर्टर भी काम किया। उसी दौरान साजिद खान से मेरा संपर्क हुआ। मैं उस समय बड़े लोगों के इंटरव्यूज लेती थीं। साजिद नाडियावाला के बंगले पर उन्होंने मुझे बुलाया था। मैंने उनसे बताया कि मैं अभिनय करने आई हूँ और क्या आप मुझे मौका दे सकते हैं। एकाध बार बात करने के बाद जुहू के फ्लैट में उन्होंने मुझे मिलने बुलाया।”

कनिष्का सोनी ने बताया कि वो शर्मीली किस्म की लड़की थीं, ऐसे में उन्हें किसी से अकेले मिलने में डर लगता था। लेकिन, साजिद खान ने बताया कि वो अपनी माँ के साथ रहते हैं और घर में काम करने वाले लोग भी हैं। कनिष्का ने बताया कि उन्होंने सोचा कि रिस्क लेना पड़ेगा और वो अपनी पोर्टफोलियो की फाइल लेकर उनके घर गईं। साजिद खान ने अपने कमरे में अपना पोर्टफोलियो चेक किया और अचानक से उन्हें खड़े होने को कहा।

बकौल कनिष्का सोनी, साजिद खान ने उनकी फिगर देखी और कहा कि ये अच्छा है। वो उस समय अपने बिस्तर पर आराम से बैठे हुए थे। उन्होंने इसके बाद उनका पेट देखने की डिमांड कर डाली। बकौल कनिष्का, उन्हें इन चीजों की आदत नहीं थी और साड़ी के अंदर से भी उनका पेट दिख जाता था तो वो असहज हो जाती थीं। उन्होंने साजिद खान से मना कर दिया। फिर साजिद खान ने उनकी पोर्टफोलियो बंद कर के कहा कि वो उन्हें फिल्म में नहीं ले सकते।

15000 से अधिक लोग खुलेआम करेंगे सेक्स, ऑनलाइन दर्ज करवा लिया है नाम-नंबर: पुतिन के परमाणु धमकी के विरोध में यूक्रेन के लोगों का जवाब

रूस और यूक्रेन में भीषण युद्ध जारी है। इस साल फरवरी में शुरू हुई इस जंग को आठ महीने होने वाले हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की धमकी के बीच खबर है कि यूक्रेन ने भी स्टीमी सेक्स पार्टी (Steamy Sex Party) की योजना बनाई है।

न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन द्वारा परमाणु हमला शुरू करने की स्थिति में टेलीग्राम ग्रुप पर ऑर्गी ऑन शेकेविस्त्सा: ऑफिशियल (Orgy on Shchekavystsa: Official) के लिए 15000 से अधिक लोगों ने साइन अप किया है। इसका हिंदी में मोटा-मोटी मतलब यह हुआ कि 15000 से अधिक लोग सामूहिक तौर पर सेक्स करेंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन की राजधानी कीव के बाहर एक पहाड़ी पर होने वाले कार्नल एक्ट्रावागांजा (Carnal Extravaganza) में भाग लेने वालों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने हाथों को धारियों से सजाएँ, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे किस तरह की गतिविधियों में रुचि रखते हैं। एनल सेक्स में रुचि रखने वालों को तीन धारियाँ, जबकि ओरल सेक्स पसंद करने वालों को चार धारियाँ बनाने के लिए कहा गया।

फोटो साभार: v_serduchka

एक महिला ने रेडियो चैनल से बात करते हुए कहा, “यह निराशा के विपरीत है। सबसे खराब स्थिति में भी लोग कुछ अच्छा खोजेंगे। लेकिन यह यूक्रेन के लोगों का मेगा-आशावाद है।” वहीं एक अन्य आदमी ने कहा, “यह दिखाने का प्रयास है कि जितना अधिक वे हमें डराने की कोशिश करेंगे, उतना ही हम इसे किसी और चीज में बदल देंगे।”

रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच सामूहिक सेक्स को लेकर अपडेट टेलीग्राम चैनल पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से खेरसॉन में जवाबी कार्रवाई को रूसियों को दिखाने के लिए बीडीएसएम जैसी सेक्स पार्टियाँ हैं। अफवाह है कि पुतिन यूक्रेन की सीमा के पास परमाणु परीक्षण की तैयारी कर रहे हैं और कीव में अधिकारी एहतियात के तौर पर पहले से ही पोटेशियम आयोडाइड की गोलियाँ दे रहे हैं।

बता दें कि यूक्रेन से जंग के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में धमकी देते हुए कहा था कि वह रूस सीमा की रक्षा करने के लिए हर तरह की ताकत का इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने पश्चिमी देशों के चेताते हुए कहा था कि वो इस बात को गीदड़ भभकी नहीं समझें।

पुतिन की इस धमकी को सीधा परमाणु हमले की धमकी से जोड़कर देखा जाने लगा। अमेरिका ने रूसी राष्ट्रपति के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि अगर पुतिन ने इस युद्ध में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया तो उसका विनाशकारी परिणाम होगा।

उत्तराखंड में ₹50000 के ईनामी को पकड़ने गई UP पुलिस को बना लिया बंधक, दोनों तरफ की फायरिंग में उप-प्रमुख की पत्नी की मौत, 5 पुलिसकर्मी भी घायल

अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका उदाहरण उत्तराखंड में देखने को मिला। एक मामले में 50 हजार के ईनामी के यहाँ छापेमारी करने गई यूपी पुलिस को उत्तराखंड में बंधक बना लिया गया। इस दौरान गोलीबारी में उप-प्रमुख की पत्नी की मौत हो गई।

मामला खनन से जुड़ा है। उत्तर प्रदेश की पुलिस उत्तराखंड के काशीपुर के एक गाँव में बुधवार (12 अक्टूबर 2022) को छापेमारी करने पहुँची थी। दो गाड़ियों में पहुँची पुलिस टीम सादी वर्दी में थी। गाँव में पहुँची पुलिस टीम पर हमला कर लोगों ने बंधक बना लिया।

पुलिस के अनुसार, मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा थाने से पुलिस टीम काशीपुर थाना क्षेत्र के भरतपुर गाँव गई प्रमुख गुरताज भुल्लर के घर पहुँची। इस दौरान स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। मामला बढ़ा तो दोनों ओर से फायरिंग होने लगी। इस फायरिंग में उप-प्रमुख की पत्नी गुरप्रीत कौर की मौत हो गई।

घटना के बाद ग्रामीणों सड़क पर जाम लगा दिया है। वहीं, स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँचकर लोगों को समझाने का प्रयास कर रही है। वहीं, मुरादाबाद के एसएसपी हेमंत कुटियाल ने बताया कि डंपर चालक के कुंडा थाने में छिपे होने की सूचना पर टीम ने दबिश दी थी। दबिश के दौरान हुई फायरिंग में पाँच जवान भी घायल हुए हैं।

बताया जा रहा है कि जिस डंपर चालक को पकड़ने पुलिस पहुँची थी, वह 50 हजार रुपए का ईनामी है। बता दें कि लगभग एक महीना पहले ठाकुरद्वारा क्षेत्र में भी खनन माफियाओं ने पुलिस से चार डंपर छुड़वा लिए थे। इसको लेकर 150 लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ था।

आमिर खान को किसी की भावनाएँ आहत करने की इजाजत नहीं… भारतीय परंपराओं को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने से भावनाएँ आहत: नरोत्तम मिश्रा

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान अपने नए विज्ञापन को लेकर विवादों में हैं। इस विज्ञापन में उनके साथ अभिनेत्री कियारा आडवाणी भी हैं। सोशल मीडिया पर इसका जमकर विरोध हो रहा है। इसी बीच मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस विज्ञापन को लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला बताया है। उन्होंने आमिर खान को भारतीय परंपराओं को ध्यान में रखकर विज्ञापन करने की सलाह दी है।

नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) ने बुधवार (12 अक्टूबर 2022) को कहा, “मैंने भी आमिर खान को एक निजी बैंक का विज्ञापन करते हुए देखा। इसके बारे में शिकायत मिलने के बाद ही मैंने इसे देखा। आमिर खान के इस तरह के भारतीय परंपरा, रीति-रिवाजों और देवी-देवताओं को लेकर विज्ञापन लगातार सामने आते रहे हैं। मैं इसे ठीक नहीं मानता हूँ।”

उन्होंने आगे कहा, “विज्ञापनों और फिल्मों में भारतीय परंपराओं और रीति-रिवाजों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने से धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं। फिल्म अभिनेता आमिर खान जी को भारतीय परंपराओं और रीति-रिवाजों को ध्यान में रखकर विज्ञापन करना चाहिए। उन्हें किसी की भी भावनाएँ आहत करने की इजाजत नहीं हैं।”

जिस विज्ञापन पर बवाल चल रहा है, अब उसकी बात। एक बैंक के विज्ञापन में दिखाया गया है कि एक गाड़ी में दूल्हा (आमिर खान) और दुल्हन (कियारा आडवाणी) बिदाई के बाद घर जा रहे हैं। इस दौरान आमिर खान कहते हैं कि ये पहली बिदाई है, जिसमें लड़की नहीं रोई।

इसके बाद विज्ञापन का अगला सीन गृह प्रवेश का है। यहाँ आमिर पूछते हैं अंदर पहले कौन जाएगा? कियारा जवाब देती हैं कि जो नया है वो। आमिर कहते हैं यानी ‘मैं’। आगे गृह प्रवेश होता है और लड़की की जगह आमिर को घर में प्रवेश करते दिखाया जाता है।

आखिर में संदेश दिया जाता है – “सदियों से जो प्रथा चलती आ रही है, वो चलती है क्यों? तभी तो हम सवाल पूछते हैं बैंकिंग की हर प्रथा से ताकि आपको मिले बेस्ट सर्विस- AU बैंक- बदलाव हमसे है।”

इसको लेकर सोशल मीडिया पर यूजर्स ने पूछा कि आखिर ऐसे विज्ञापन निकाह और हलाला जैसे मुद्दों पर क्यों नहीं बनाए जाते? हिंदू धर्म के रीति-रिवाजों को गलत दिखाने की क्या होड़ है? आमिर खान तीन तलाक और हलाल में बदलाव पर कब बात करेंगे?

हनुमान जी को नोटिस, 10 दिन के भीतर मंदिर खाली करने का आदेश… वरना कानूनी कार्रवाई: झारखंड में रेलवे का कारनामा

झारखंड के धनबाद से अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहाँ ईस्ट सेंट्रल रेलवे ने 7 अक्टूबर 2022 को भगवान हनुमान को जमीन खाली करने के लिए नोटिस भेज दिया। उन्होंने कहा कि अगर हनुमान जी ने 10 दिन के भीतर इस जमीन को खाली नहीं किया, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला बेकारबांध इलाके की खटीक बस्ती का है। रेलवे ने खटीक बस्ती में अपनी जमीन खाली कराने के लिए हनुमान भगवान के नाम पर एक नोटिस भेजा है। रेलवे ने नोटिस को मंदिर के बाहर लगाया है। इसमें लिखा गया है:

“आपको सूचित किया जाता है कि आपने रेल की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है, जो कि अपराध है। आपको निर्देश दिया जाता है कि नोटिस मिलने के 10 दिनों के अंदर रेलवे की जमीन से मंदिर हटा लें और इसे हमारे हवाले कर दें। यदि आपने ऐसा नहीं किया तो आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसे अति आवश्यक समझें।”

इसके अलावा रेलवे ने मंदिर के आसपास की अवैध झुग्गी-झोपड़ियों को भी हटाने को कहा है। यह मामला सामने के बाद यहाँ के लोगों में काफी ​आक्रोश है।

यहाँ के स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से रेलवे की जमीन पर रह रहे हैं। ऐसे में उन्हें परेशान करने के लिए नोटिस भेजा जा रहा है। हनुमान मंदिर पर नोटिस चस्पा करने पर उन्होंने कहा कि रेलवे की जमीन पर अन्य धर्मों के स्थान भी हैं, लेकिन नोटिस सिर्फ इसी मंदिर को ही जारी किया गया है।

उधर, हनुमान भगवान को नोटिस भेजकर अपनी किरकिरी करा चुके रेलवे के अधिकारियों ने कहा, “ये मानवीय भूल है। नोटिस में गलती से हनुमान जी का नाम लिख दिया गया। इसमें सुधार किया जाएगा। आगे से ऐसी गलती ना हो, इसका भी ध्यान रखा जाएगा। किसी की भावनाओं को आहत करना हमारा मकसद नहीं था, हमें बस जमीन से अतिक्रमण हटाना था।”

बता दें कि इस इलाके में 20 सालों से खटीक समुदाय के 300 से ज्यादा परिवार रहते हैं, जो यहाँ फल, सब्जी बेचने जैसे छोटे कारोबार करके अपना जीवनयापन कर रहे हैं। रेलवे उनसे यह जमीन खाली करवाना चाहती है।

मंदिर की ₹500 करोड़ की जमीन पर अवैध कब्जा, आंध्र प्रदेश में 60 साल की कानूनी लड़ाई के बाद 29.71 एकड़ जमीन कराया गया मुक्त: रिपोर्ट

आंध्र प्रदेश के विजग (Vizag, Andhra Pradesh) में लगभग 60 वर्षों की कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद राज्य सरकार की बंदोबस्ती विभाग ने एक मंदिर की जमीन (Temple Land) को बरामद कर लिया गया है। इस जमीन की कीमत 500 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है।

विजग के अनकापल्ली में अम्बिका बाग मंदिर स्थित है। इसे फूलबाग मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की 29.71 एकड़ जमीन पर लोगों ने अतिक्रमण कर लिया था। जब मंदिर प्रशासन ने इस जमीन से लोगों को हटाने की कोशिश की तो वे कोर्ट में चले गए। अब अतिक्रमण हटाकर यहाँ बोर्ड लगा दिया गया है।

यह जमीन अनकापल्ली में माँ नुकलम्मा मंदिर के पास स्थित है। इस जमीन को चेमुदु रियासत की महारानी विरिचेरला चद्रमणि पट्टा महादेवी ने जगदंबा जंक्शन के पास स्थित विजग के अम्बिका बाग रामालयम् मंदिर के रख-रखाव के लिए दान में दिया था। महारानी ने यह दान 20 जुलाई 1957 को पंजीकृत वसीयत द्वारा किया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, विजग के रामालयम् मंदिर का जमीन लंबे समय से कानूनी पचड़े में पड़ा था। हालाँकि, साल 2007 में बंदोबस्ती विभाग ने इस कानूनी लड़ाई को जीत लिया और मंदिर का पुनर्निर्माण कराया।

वहीं, कुछ लोगों ने दावा किया कि अनकापल्ली स्थित रामालयम मंदिर की जमीन अपनी संपत्ति है। इसके बाद ईनम की ट्रिब्यूनल ने बंदोबस्ती विभाग के पक्ष में निर्णय दिया, लेकिन लोग बार-बार विभिन्न अदालतों में मुकदमा दायर करते रहे। हालाँकि, यहाँ भी लोगों को निराशा हाथ लगी।

मंदिर के कार्यकारी अधिकारी एवं सहायक आयुक्त ने राजस्व विभाग और पुलिस के सहयोग से जमीन को अतिक्रमण से मुक्त करा लिया और वहाँ पर बोर्ड लगवा दिया कि यह जमीन मंदिर की है।