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‘जब CM अस्पताल में थे तब आदित्य स्विट्जरलैंड के पब में मस्ती कर रहे थे’: ठाकरे गुट पर भड़के शिवसेना सांसद, कहा- युवराज के साथ महिला MP भी थीं

महाराष्ट्र (Maharashtra) की महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार में मंत्री रहे पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के बेटे आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) को लेकर एक सांसद ने सनसनीखेज आरोप लगाया है। सांसद ने कहा कि जब उद्धव ठाकरे अस्पताल में भर्ती थे, तब आदित्य स्विट्जरलैंड (Switzerland) में एक महिला सांसद के साथ सैर कर रहे थे।

लोकसभा सांसद राहुल शेवाले (Rahul Shewale) ने आदित्य ठाकरे को ‘युवराज’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरण पर बात करके आदित्य ठाकरे इंडस्ट्री संबंधी विदेश दौरा किया और वहाँ अपने साथ एक महिला सांसद को भी ले गए थे।

सांसद शेवाले ने कहा, “जब सीएम (उद्धव ठाकरे) को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तब युवराज (आदित्य ठाकरे) घूम रहा था और स्विट्जरलैंड के पब में आनंद ले रहा था। उन्होंने पर्यावरण के बारे में बात की, लेकिन उनका यह विदेश दौरा उद्योग से संबंधित था।”

बता दें कि महाराष्ट्र के पूर्व पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे 22 मई 2022 को विश्व आर्थिक मंच (WEF) में महाराष्ट्र पैवेलियन का उद्घाटन करने के लिए स्विट्जरलैंड गए थे। दरअसल, शिवाले का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब शिवाजी पार्क में दशहरा रैली के दौरान उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (CM Eknarh Shinde) पर निशाना साधा था।

रैली में सीएम शिंदे पर निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा था, “मुझे केवल एक चीज पर गुस्सा आता है कि जब मुझे अस्पताल में भर्ती कराया गया तो जिन लोगों को मैंने (राज्य की) जिम्मेदारी दी, वे ‘कटप्पा’ बन गए और हमें धोखा दिया। वे सोच रहे थे कि मैं अस्पताल से कभी नहीं लौटूँगा।”

उधर खुद को कटप्पा बताए जाने पर दशहरा रैली में अपने समर्थकों को संबोधित करने वाले शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर भी पलटवार किया था। सीएम शिंदे ने कहा था, “वे मुझे कटप्पा कह रहे हैं। यहाँ तक कि कटप्पा का आत्म-सम्मान था और आपकी (उद्धव) तरह दोहरा मापदंड नहीं था।” इस रैली में बाल ठाकरे (Bal Thackeray) के बेटे जयदेव ठाकरे (Jaidev Thackeray) भी मंच पर उपस्थित थे।

गौरतलब है कि इस साल जून में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के 40 विधायक उद्धव ठाकरे से अलग हो गए थे। इसके बाद उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद से शिंदे गुट दावा करता है कि असली शिवसेना का नेतृत्व उनके पास है, जबकि उद्धव ठाकरे अपने गुट को असली शिवसेना बता रहे हैं।

‘रावण के खिलजी जैसा दिखने में बुराई नहीं, वह तिलक भी लगाता है’: मनोज मुंतशिर ने ‘आदिपुरुष’ में सैफ अली खान के लुक का किया बचाव

निर्देशक ओम राउत की फिल्म ‘आदिपुरुष’ (Adipurush) रिलीज होने से पहले ही विवादों में है। फिल्म के टीजर में भगवान राम, हनुमान और रावण के गलत चित्रण को लेकर इसका विरोध किया जा रहा है। अयोध्या के राम मंदिर के मुख्य पुजारी ने इस फिल्म को बैन करने की माँग की है। इस बीच ‘आदिपुरुष’ फिल्म के डायलॉग राइटर और गीतकार मनोज मुंतशिर (Manoj Muntashir) की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने आज तक को दिए इंटरव्यू में ​कहा, “हर युग की बुराई का अपना चेहरा होता है। अलाउद्दीन खिलजी इस दौर की बुराई का चेहरा है। हमने ‘आदिपुरुष’ के रावण को जानबूझकर ऐसा नहीं बनाया है।”

मनोज मुंतशिर अपने ट्विटर हैंडल पर भी इस इंटरव्यू का एक क्लिप शेयर किया है। इसमें उनके साथ फिल्म के डायरेक्टर ओम राउत भी नजर आ रहे हैं। रावण की खिलजी से तुलना पर मनोज मुंतशिर ने कहा, “हमने जो 1 मिनट 35 सेकंड का टीजर देखा है, उसमें रावण ने त्रिपुंडी लगाया हुआ है। जो देखा है उतने की बात कर रहा हूँ, बाकी तो बहुत कुछ मेरे पास दिखाने को है, जो लोगों ने देखा नहीं है। बड़ी ही विनम्रता से कह रहा हूँ कि जब फिल्म आएगी तो वो सब देखेंगे। कौन सा खिलजी त्रिपुंडी लगाता है। कौन सा खिलजी तिलक धारण करता है। कौन सा खिलजी जनेऊ पहनता है और कौन सा खिलजी रुद्राक्ष धारण करता है। हमारे रावण ने ये इसी 1 मिनट 35 सेकंड के टीजर में किया हुआ है।”

उन्होंने कहा, “दूसरी बात कि हर युग की बुराई का अपना चेहरा होता है। रावण मेरे लिए बुराई का चेहरा है, अलाउद्दीन खिलजी इस दौर के बुराई का चेहरा है और अगर वो मिलता-जुलता भी है, हमने इंटेंशनली ऐसा नहीं किया है, लेकिन अगर मिल भी गया तो मुझे लगता नहीं कि कोई ऐतराज की बात है। अलाउद्दीन खिलजी तो कोई नायक ही नहीं है, वो बुरा है और अगर रावण का चेहरा उससे मिलता है और उससे इसलिए ज्यादा नफरत है, क्योंकि वो खिलजी जैसा दिखता है तो कोई बुराई नहीं है इसमें।”

बता दें कि सोशल मीडिया पर आदिपुरुष (Adipurush) का काफी विरोध हो रहा है। लोग कह रहे हैं फिल्म में ‘रामायण’ के रावण का इस्लामीकरण हो गया है। यूजर्स का यह भी कहना है कि रावण को शिव भक्त के रूप में देखा गया है, जबकि सैफ रावण के लुक में बर्बर इस्लामी शासकों से इंस्पायर्ड नजर आ रहे हैं। सैफ के लुक्स को लेकर यूजर्स औरंगजेब , तैमूर, अल्लाउद्दीन खिलजी, बाबर, मोहम्मद गजनी और कई मुस्लिम आक्रमणकारियों के नामों के टैग दे रहे हैं।

मंदिर में नमाज गंगा-जमुनी तहजीब, कर्नाटक के बीदर में पारंपरिक दशहरा पूजा मस्जिद-मुस्लिमों पर हमला: इस्लामी प्रलाप कब तक भोगते रहेंगे हिंदू

कर्नाटक के बीदर में हिंदू एक बार फिर ​इकोसिस्टम की ​दोगलई के शिकार हुए हैं। 9 लोगों पर एफआईआर हुई है। चार की गिरफ्तारी भी हो गई है। इन पर महमूद गेवान मदरसा और मस्जिद में ताला तोड़कर प्रवेश करने तथा पूजा करने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि मस्जिद में प्रवेश करने के लिए ताला नहीं तोड़ा गया। साथ ही बताया है कि निजाम के जमाने से ही यहाँ दशहरा पूजा की परिपाटी रही है। फिर सवाल उठता है कि 9 लोगों पर एफआईआर क्यों हुई? उनकी गिरफ्तारी किस अपराध में की जा रही है?

इस सवाल का जवाब वह इस्लामी प्रलाप है, जिससे हिंदू पीड़ित हैं। जब किसी मंदिर के द्वार नमाज और इफ्तार के लिए खोले जाते हैं, जब कुछ विधर्मी मंदिर में घुस नमाज पढ़ते हैं, जब विधर्मी छेड़छाड़ की नीयत से हिंदुओं के धार्मिक आयोजनों में घुसपैठ करते हैं, तो इकोसिस्टम के लिए यह गंगा-जमुनी तहजीब हो जाता है। उसे इसमें हिंदू-मुस्लिम एकता दिखती है। भारत की विविधता से उसका साक्षात्कार होता है। शिवलिंग का अपमान उसे अभिव्यक्ति की आजादी लगता है, लेकिन इसके जवाब में उनके ही मजहबी पुस्तकों का उल्लेख कर टिप्पणी करना ईशनिंदा हो जाता है। उनके लिए नारा ए तकबीर अधिकार है, लेकिन जय श्रीराम उन्माद का परिचायक है। जब हिंदू घुसपैठ करने वाले विधर्मियों के खिलाफ बोलता है तो वह भगवा गुंडई हो जाता है। जब वह सालों से चली आ रही परंपरा के अनुसार पूजा करता है तो वह मस्जिद और मुस्लिमों पर हमला हो जाता है। कर्नाटक के बीदर में नौ लोगों पर एफआईआर इकोसिस्टम की इसी दोगली मानसिकता से निकला है।

बीदर की मस्जिद में पूजा क्यों?

बीदर के गेवान मदरसा और मस्जिद में हिंदुओं की पूजा का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है। यह घटना दशहरा के दिन 6 अक्टूबर 2022 को हुई थी। मुस्लिमों का आरोप है कि हिंदुओं ने कथित तौर पर मस्जिद के ताले तोड़े और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। मुस्लिमों ने चेताया है कि आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने पर वे जुमे पर प्रदर्शन (अमूमन इसकी आड़ में इस्लामवादी हिंसा करते हैं) करेंगे। रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने चार हिंदुओं को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य की तलाश की जा रही है।

जिस घटना को लेकर मुस्लिम कार्रवाई का दबाव बना रहे हैं, उसके बारे में पुलिस अधीक्षक डी किशोर बाबू ने बताया, “दशहरा पूजा की ये परिपाटी निजाम के दौर से चली आ रही है। मस्जिद परिसर में एक मीनार है। अमूमन 2-4 लोग इस जगह पर जाकर पूजा करते रहे हैं। इस बार यह संख्या ज्यादा थी। ताला तोड़कर कोई भी अवैध तरीके से मस्जिद में दाखिल नहीं हुआ है। हमने एफआईआर दर्ज कर ली है और आरोपितों की गिरफ्तारी की जा रही है।”

गुलबर्गा के पुलिस महनिरीक्षक ने भी कहा है कि हर साल विजयादशमी के मौके पर मस्जिद के पास हिंदू पूजा करते रहे हैं। यह कोई नई परंपरा नहीं है। कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र का भी कहना है कि विजयादशमी पर यहाँ सालों से पूजा होती रही है।

लेकिन इस घटना को इस तरह से पेश किया जा रहा है जैसे हिंदुओं ने मस्जिद में जबरन पूजा की एक नई परिपाटी शुरू करने का काम किया है। जाहिर है इसका मकसद मुस्लिमों को पीड़ित दिखाना है। यही कारण है कि जब पुलिस इस पूजा को पुरानी परिपाटी बता रही है, एआईएमआईएम के मुखिया सांसद असदुद्दीन ओवैसी जैसे सोशल मीडिया में इसे मस्जिद और मुस्लिमों पर हमले की तरह पेश कर रहे हैं।

बीदर पहला मामला नहीं है, जब हिंदुओं की परंपराओं को इस्लाम पर हमले की तरह पेश किया गया है। यह आखिरी मामला भी नहीं होने जा रहा है। सवाल यह है कि इस दोगलई के दबाव में सिस्टम आखिर कब तक हिंदुओं को प्रताड़ित करता रहेगा और खुद हिंदू कब तक ऐसी प्रताड़नाओं को खामोशी से सहते रहेंगे? आखिर सिस्टम कब समझेगा कि परम्पराएँ, भावनाएँ बहुसंख्यकों की भी होती है।

घर में सो रही 9 साल की बच्ची को उठा ले गया मोहम्मद सगीर, बलात्कार किया: पेड़ से बाँध ग्रामीणों ने मारा, अस्पताल के रास्ते में ही मर गया

बिहार के कटिहार में 9 साल की बच्ची के साथ दुष्‍कर्म (Rape) के आरोपित मोहम्मद सगीर को ग्रामीणों ने पीट-पीटकर मार डाला। घटना हसनगंज थाना क्षेत्र के हसनगंज बाजार की है। पिटाई का वीडियो वायरल है। इसमें ग्रामीण उसे पेड़ से बाँधकर पीटते दिख रहे हैं। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने सगीर को भीड़ से छुड़ाया। इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाते समय रास्ते में हो वह मर गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हसनगंज बाजार की एक 9 वर्षीय मासूम को उसी गाँव के रहने वाले मोहम्मद सगीर ने बुधवार (5 अक्टूबर 2022) को अपनी हवस का शिकार बनाया। इस घटना के बाद से गाँव में तनाव का माहौल है। पीड़िता की माँ ने स्थानीय थाना में मामला दर्ज कराया है। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया, “बुधवार की रात बच्ची मेरे साथ घर के बरामदे में सोई थी। देर रात जब मेरी नींद खुली तो वह नहीं थी। घर के लोग उसकी तलाश करने लगे। हसनगंज बाजार में गैस गोदाम के पास मेरी बेटी और मोहम्मद सगीर हमें बिना कपड़ों के मिले।”

बच्ची ने घर पहुँचकर अपने परिजनों को पूरी घटना के बारे में बताया। इसके बाद आक्रोशित परिजनों और गाँव वालों ने मोहम्मद सगीर को पकड़कर गाँव के चौराहे पर एक खजूर के पेड़ से बाँध दिया। फिर उसे पीटा। ग्रामीणों ने पिटाई का वीडियो बना उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

हसनगंज थाना प्रभारी रामचंद्र मंडल ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुँची और आरोपित को किसी तरह ग्रामीणों के चंगुल से छुड़ाया। उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन उसने रास्ते में दम तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि इस घटना में जो भी दोषी हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। बता दें कि आरोपित मोहम्मद सगीर के खिलाफ पहले से भी बलात्कार का केस चल रहा था।

अमेरिकी यूनिवर्सिटी में भारतीय मूल के छात्र वरुण की हत्या, हिरासत में कोरियाई रूममेट: घटना के समय ऑनलाइन गेम खेल रहा था मृतक, दोस्तों ने सुनी थी चीखें

अमेरिका के इंडियाना स्थित एक यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रह रहे भारतीय मूल के 20 वर्षीय छात्र की उसके रूममेट ने हत्या कर दी। इस मामले में कोरियाई छात्र को हिरासत में ले लिया गया है। मृतक के शरीर पर कई घातक चोट पाए गए हैं।

मृतक छात्र का नाम वरुण मनीष छेड़ा है। इंडियानापोलिस का रहने वाला वरुण परड्यू यूनिवर्सिटी (Purdue University) में डेटा साइंस (Data Science) की पढ़ाई कर रहा था और वह यूनिर्सिटी के हॉस्टल मैक्चियॉन हॉल में कोरियाई रूममेट के साथ रहता था।

परड्यू यूनिवर्सिटी की पुलिस प्रमुख लेस्ले वीटे ने बताया कि कोरियाई छात्र जी मिन ‘जिमी’ शा ने मंगलवार रात 12.45 बजे 911 सेवा पर फोन कर पुलिस को बताया कि वरुण की मौत हो गई है। यह कोरियाई छात्र यूनिवर्सिटी में साइबर सुरक्षा विषय की पढ़ाई कर रहा है।

वीटे के अनुसार, 911 सेवा पर कॉल आने के कुछ देर बाद 22 वर्षीय जिमी को हिरासत में ले लिया गया। उससे आगे की पूछताछ की जा रही है। वरुण की हत्या परड्यू यूनिवर्सिटी के परिसर में बीते आठ वर्षों से भी अधिक समय में हुई पहली हत्या है। विश्वविद्यालय के अध्यक्ष मिच डैनियल्स ने कहा कि वरुण की मौत परिसर में घटी एक बेहद दुखद घटना है, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती।

अमेरिकी चैनल ‘एनबीसी न्यूज’ से वरुण के दोस्त अरुणाभ सिन्हा ने बताया कि मंगलवार की रात वरुण अपने दोस्तों के साथ ऑनलाइन गेम खेल रहा था। उस उसके दोस्तों ने वरुण के चीखने की आवाज सुना था। अरुणाभ ने बताया कि अगले दिन मनीष की मौत की खबर आई।

पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट में पता चला है कि वरुण की मौत ‘कई घातक चोटों’ के कारण हुई है। पुलिस ने उसकी हत्या की आशंका जाहिर की है। गेम खेलने के दौरान ऐसा क्या हुआ कि कोरियाई छात्र ने वरुण की हत्या कर दी, इसका अभी तक पता नहीं चला है। इसका खुलासा आगे की जाँच के बाद होने की संभावना है।

शौच के लिए गई दलित लड़की से मुस्लिम लड़कों ने की बदसलूकी, हल्ला होने पर बाईक छोड़ भागे: अब्दुल अजीज समेत 3 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर जिले में एक नाबालिग दलित लड़की से छेड़खानी के आरोप में मुस्लिम समुदाय के 3 आरोपित गिरफ्तार हुए हैं। आरोपितों के नाम लालबाबू, अब्दुल अजीज और एक अन्य है जो नाबालिग बताया जा रहा है। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। इन पर पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

घटना बलरामपुर के सदुल्लानगर थानाक्षेत्र के गाँव गंधाउर नगर फ़िरोज़पुर में रविवार (2 अक्टूबर 2022) को घटी। इस घटना पर स्थानीय महंत ने राष्ट्रीय SC/ST आयोग को पत्र लिख कर केस को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की माँग की है।

पीड़िता के पिता ने घटना की शिकायत दर्ज कराते हुए कहा घटना के दिन उनकी 2 नाबालिग बेटियाँ शौच के लिए खेतों की तरफ गईं थीं। एक बेटी की उम्र लगभग 14 वर्ष और दूसरी की उम्र लगभग 10 वर्ष है। इसी दौरान बाइक से हबीबपुर के रहने वाले लालबाबू, अब्दुल अज़ीज़ और एक अन्य नाबालिग लड़का वहाँ पहुँच गए।

पीड़ित पिता ने शिकायत में आगे बताया कि तीनों आरोपितों ने उनकी बड़ी बेटी का हाथ पकड़ लिया। आरोप है कि इस दौरान पीड़िता को खींचने की कोशिश करते हुए उसके साथ छेड़खानी की गई। पीड़िता की बहन यह सब देख कर डर गई और जोर-जोर से रोने लगी।

रोने की आवाज सुन कर आस-पास से गुजर रहे लोग मौके पर पहुँचे। लोगों को आता देख कर तीनों आरोपित अपनी बाईक छोड़ कर भाग गए। मिली जानकारी के मुताबिक तीनों आरोपितों की उम्र क्रमशः लगभग 30, 20 और 14 वर्ष है।

शिकायत के मुताबिक दोनों नाबालिग लड़कियों ने अपने घर पहुँच कर सारी बात बताई। बाद में उनके परिजनों ने इसकी शिकायत पुलिस में की। पुलिस ने अगले दिन सोमवार (3 अक्टूबर 2022) को तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि नाबलिग आरोपित की जमानत पहले ही दिन हो गई और बाकी दोनों आरोपितों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के साथ SC/ST एक्ट और IPC की धारा 354 के तहत कार्रवाई की है।

स्थानीय महंत ने की फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चलाने की माँग

इस घटना के बाद बलरामपुर जिले के ही हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत महेंद्र दास ने राष्ट्रीय SC/ST आयोग को पत्र लिखा है। अपने पत्र में उन्होंने आयोग से घटना का संज्ञान लेने और आरोपितों का केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की माँग की है। महंत महेंद्र दास ने पीड़िता को ‘बलरामपुर की बेटी’ कह कर सम्बोधित किया है।

महंत महेंद्र दास के पत्र को हिंदी खबर की पत्रकार आँचल यादव ने ट्वीट किया है। इस ट्वीट पर बलरामपुर पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच DSP स्तर के अधिकारी कर रहे हैं और साथ में जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

नेपाल बॉर्डर की रिपोर्ट में ऑपइंडिया ने की थी सदुल्लानगर की चर्चा

गौरतलब है कि यह घटना जिस सादुल्लानगर थानाक्षेत्र की है उसका जिक्र ऑपइंडिया ने नेपाल बॉर्डर से जुडी अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में किया था। तब हमने बताया था कि नेपाल से सटे बलरामपुर जिले के सादुल्लानगर थानाक्षेत्र के कई गाँवों में मुस्लिम आबादी हिन्दुओं से अधिक हो गई है।

राजस्थान में छाया बिजली संकट: 23 थर्मल स्टेशनों में से 11 बंद, प्रदेश में बचा है सिर्फ 4 दिन का कोयला

राजस्थान में बिजली संकट का खतरा बढ़ता जा रहा है। कोयले की आपूर्ति न होने के कारण प्रदेश में 23 थर्मल स्टेशनों में से 11 ने बिजली उत्पादन करना बंद कर दिया है। कई जिले में तो कई घंटों बिजली गायब होती है। स्थानीय शिकायत देते हैं लेकिन अधिकारी कोई सुनवाई नहीं करते। राज्य के ऐसे हालातों को देख डर है कि कहीं दीवाली तक राजस्थान में अंधेरा न छा जाए।

राजस्थान में बिजली घरों की 11 यूनिट बंद

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में कोयला आपूर्ति न होने पर बिजली घरों की जिन 11 यूनिस्ट को बंद किया गया है उनमें 4 तो सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट की हैं। वहीं 3- कोटा थर्मल पावर प्लांट की और 3 राजवेस्ट की हैं। इसी तरह छबड़ा थर्मल पावर प्लांट और रामगढ़ की 1-1 यूनिट को भी बंद किया गया है।

इन 11 यूनिट के बंद होते ही राज्य में 2400 मेगालाट कैपेसिटी बिजली का उत्पादन थम गया है। अधिकारी बता रहे हैं कि हर दिन करीब 30 हजार मीट्रिक टन से अधिक कोयले की आपूर्ति में कमी आने के कारण ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हुई है। कोयला खत्म होने के पीछे विभागीय अधिकारियों की लापरवाही की बात भी सामने आई है।

कितनी बिजली की आवश्यकता, कितनी शेष

खबर में राजस्थान ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड की असेसमेंट रिपोर्ट का हवाला देकर कहा गया है कि साल 2022-23 के पीक आवर्स में बिजली की डिमांड 17757 मेगावाट पहुँच सकती है जबकि उपलब्ध कैपेसिटी मात्र 12847 रह पाएगी। ऐसे में राजस्थान के लोगों को कोयला सप्लाई और बिजली प्रोडक्शन के रुकने के चलते लंबे पावर कट की परेशानी को झेलना पड़ सकता है।

फिलहाल, हालातों को सुधारने के लिए दीवाली मेंटेनेंस के नाम पर रोज 4 घंटे बिजली कटौती कई ब्लॉक में की जा रही है। पिछले कई दिनों से ऐसा प्रदेश में चल रहा है। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में यदि छोड़ दें तो पावर कट की समस्या शहरी इलाकों में भी बनी हुई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य में 1 करोड़ 47 लोग राज्य में बिजली उपभोक्ता हैं। सभी को बिजली की समस्या से जूझना पड़ रहा है। अधिकारी बता रहे हैं कि उनके पास 4 दिन का कोयला बाकी बचा है जो कि केंद्र की गाइडलाइंस का उल्लंघन है। केंद्र द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, प्रदेश के पास कम से कम 26 दिन का स्टॉक होना ही चाहिए।

छत्तीसगढ़ में माइनिंग के काम पर लगी रोक

बता दें कि राजस्थान में बिजली और कोयले को लेकर ये जो सारी परेशानियाँ सामने आ रही हैं, इसके पीछे की जड़ छत्तीसगढ़ है। दरअसल राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को कोयला आपूर्ति के लिए छत्तीसगढ़ में ‘पारसा ईस्ट एंड कांटा बासन कोल ब्लॉक’ नामक माइंस अलॉट हो रखी है। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने सरजुगा में 841 हेक्टेयर के एक्सटेंशन ब्लॉक में माइनिंग पर रोक लगा रखी है।

यहाँ माइनिंग की शुरुआत न हो पाने का कारण- आदिवासियों से लेकर स्थानीय नेताओं और गैर सरकारी संगठनों का विरोध, जल-जंगल-जमीन से जुड़े आंदोलन और छत्तीसगढ़ सरकार में ही चल रहे अंदरूनी कलह है। इन्हीं कारणों से न कोयला निकल पा रहा है और न ही राजस्थान के पावर प्लांट तक पहुँच पा रहा है।

कॉन्ग्रेस सरकार (छत्तीसगढ़) नहीं सुन रही कॉन्ग्रेस सरकार (राजस्थान) की गुहार

राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार होने के बावजूद मंत्री इस संबंध में छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार से बात करके समस्या का समाधान खोजने का प्रयास नहीं कर रहे। वे केंद्र से गुहार लगा रहे हैं कि उनकी मदद की जाए। केंद्र ने भी इस संबंध में हालात देखते हुए उनकी कुछ माँगों को माना है। जैसे 3 रैक कोयले की मदद देते हुए उन्होंने राजस्थान सरकार से कहा है कि वह छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार से बात करके मामले को सुलझाएँ।

जानकारी के मुताबिक राजस्थान के सभी पावर प्लांट्स को चलने के लिए 37 रैक (1 रैक में 4000 मीट्रिक टन) कोयले की प्रतिदिन सप्लाई चाहिए लेकिन कुछ दिन पहले वह घटकर केवल 20 रैक रह गया था और अब वह और कम होकर 14 हो गया है।

खाँसी की सिरप पीने के बाद अफ्रीका में 66 बच्चों की मौत: WHO ने 4 दवाओं को लेकर जारी की चेतावनी, भारत ने सैंपल जाँच को भेजे

अफ्रीकी देश गांबिया (African country Gambia) में कथित रूप से खाँसी की सिरप पीने के बाद 66 बच्चों की मौत के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसके लिए भारत की दवा निर्माता कंपनी को जिम्मेवार बताया है। WHO की चेतावनी के बाद दिल्ली स्थित केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (DCGI) ने दवा कंपनी द्वारा बनाए जाने वाले इन कफ सिरप की जाँच का आदेश दिया है।

वहीं, हरियाणा सरकार भी अपनी तरफ से इसकी जाँच कर रही है। इन दवाओं को बनाने वाली सोनीपत की कंपनी से सैंपल लेकर हरियाणा सरकार ने जाँच के भेजा है। हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज (Haryana Health Minister Anil Vij) ने कहा कि जिन चार कफ सिरपों के लेकर विवाद हुआ है, उनके सैंपल लेकर कोलकाता स्थित सेंट्रल ड्रग लेबोरेटरी (CDL) में जाँच के लिए भेजा गया है।

मंत्री अनिल विज ने बताया कि सोनीपत की दवा कंपनी मेडेन फार्मास्यूटिकल लिमिटेड (Maiden Pharmaceuticals Limited) से ये नमूने भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGA) और हरियाणा के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की एक टीम ने एकत्र किए गए हैं। बता दें कि जिन चार कफ सिरप को लेकर WHO चेतावनी जारी की है, वे हैं- प्रोमेथाजिन ओरल सॉल्यूशन (Promethazine Oral Solution), कोफेक्समालिन बेबी कफ सिरप (Kofexmalin Baby Cough Syrup), मकॉफ बेबी कफ सिरप (Makoff Baby Cough Syrup) और मैग्रीप एन कोल्ड सिरप (Magrip N Cold Syrup)।

अनिल विज ने आगे कहा, “फार्मा कंपनी द्वारा निर्मित कफ सिरप को निर्यात के लिए मंजूरी दी गई थी। यह देश में बिक्री या विपणन के लिए उपलब्ध नहीं है। सीडीएल की रिपोर्ट आने के बाद जो भी कार्रवाई करनी होगी, वह की जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद ही हम इस बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुँच सकते हैं कि गांबिया में हुई मौतें इन दवाओं के कारण हुई हैं या किसी अन्य कारण से।”

दरअसल, गांबिया में 29 सितंबर 2022 को 66 बच्चों की मौत पर WHO ने बुधवार (5 अक्टूबर 2022) को एक रिपोर्ट में कहा कि खाँसी की दवा डाइथेलेन ग्लाइकोल और इथिलेन ग्लाइकोल इंसान के लिए जहर की तरह हैं। WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयेसुस ने कहा कि बच्चों की मौत का संबंध चार दवाओं से है। इन सिरप के सेवन से उनके गुर्दों को क्षति पहुँची।

WHO ने कहा कि इन मौतों के लिए अब तक खाँसी की चार दवाओं की पहचान की गई है। इसके लिए दुनिया के बाकी देशों को भी चेतावनी जारी की गई है। दोयम दर्जे के ये उत्पाद असुरक्षित हैं और खासकर बच्चों की मौत का कारण बन सकते हैं। WHO का कहना है कि इसके 23 नमूनों में से 4 नमूनों में डायथाइलीन ग्लाइकॉल/एथिलीन ग्लाइकॉल की अस्वीकार्य मात्रा पाई गई है, जो इंसान के लिए जहर के समान है।

WHO ने कहा कि आज तक इस कंपनी ने इन उत्पादों की सुरक्षा और गुणवत्ता की गारंटी नहीं दी है। डायथाइलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल के प्रभाव से पेट दर्द, उल्टी, दस्त, पेशाब न होना, सिरदर्द, बदली हुई मानसिक स्थिति, और किडनी की समस्या हो सकती है और जान भी जा सकती है। WHO ने कहा उत्पादों के सभी बैचों को तब तक असुरक्षित माना जाना चाहिए, जब तक कि संबंधित राष्ट्रीय नियामक द्वारा उनकी सही से जाँच नहीं हो जाती।

इस मामले को लेकर ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) ने कहा है कि यह कंपनी अपने उत्पाद सिर्फ निर्यात करती है, फिर भी इस बारे में ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) कोई दिशा निर्देश देगा तो उसका पालन किया जाएगा। 

अरविन्द केजरीवाल ने ‘पत्नी और लव लेटर’ से कसा तंज, BJP के कपिल मिश्रा ने दिलाई ‘बाप’ की याद

भाजपा नेता मनोज तिवारी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के उस बयान की आलोचना की है, जिसमें उन्होंने राज्यपाल पर तंज कसा है। मनोज तिवारी ने केजरीवाल की भाषा को छिछोरापन बताया है। अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली के राज्यपाल वीके सक्सेना के लिए अपने ट्वीट में कहा था कि LG साहब जितना उन्हें डाँटते है, उतना तो उनकी पत्नी भी नहीं डाँटतीं। गुरुवार (6 अक्टूबर 2022) को किए गए इसी ट्वीट में उन्होंने लव लेटर का भी जिक्र किया।

अरविन्द केजरीवाल ने आज शाम दिल्ली के राज्यपाल वीके सक्सेना को सम्बोधित करते हुए ट्वीट किया। उन्होने लिखा, “LG साहिब रोज़ मुझे जितना डाँटते हैं, उतना तो मेरी पत्नी भी मुझे नहीं डाँटतीं। पिछले 6 महीनों में LG साहिब ने मुझे जितने लव लेटर लिखे हैं, उतने पूरी ज़िंदगी में मेरी पत्नी ने मुझे नहीं लिखे। LG साहिब, थोड़ा chill करो। और अपने सुपर बॉस को भी बोलो, थोड़ा chill करें।”

भाजपा ने बताया छिछोरापन

भाजपा नेता मनोज तिवारी ने अरविन्द केजरीवाल के इस बयान की निंदा की है। उन्होंने अरविन्द केजरीवाल के ट्वीट पर लिखा, “ये छिछोरेपन की भाषा बताती है कि केजरीवाल जी की मानसिक स्तर क्या है। 7 साल में एक भी विभाग न सम्भाला, एक भी फाइल साइन न की आज तक आपने। आपकी रुचि सिर्फ़ लूट और झूठ में है, जो अब इस निम्न स्तर पर आ गई है।”

वहीं भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने तंज का जवाब तंज से ही दिया है। उन्होंने लिखा, “पति शराबी-कबाबी हो या निकम्मा, एक समय के बाद पत्नियाँ डाँटना छोड़ देती हैं। बाप नहीं छोड़ता।”

चिट्ठी से उठा विवाद

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ दिन पहले दिल्ली के राज्यपाल ने केजरीवाल सरकार को पत्र लिख कर इस बात पर नाराजगी जताई थी कि गाँधी जयंती पर उनका कोई भी नेता या मंत्री राजघाट या विजय चौक नहीं गया। पत्र में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर की समाधि पर दिल्ली सरकार के किसी भी मंत्री के न जाने की बात लिखी थी। इसके अलावा पूर्व में राज्यपाल वीके सक्सेना ने केजरीवाल सरकार द्वारा दी जा रही बिजली सब्सिडी में अनियमितता बताते हुए जाँच के भी आदेश दे रखे हैं।

लंदन में दिनदहाड़े अज्ञात हमलावर ने 3 लोगों को घोंप दिया चाकू, प्रशासन घटना को ‘आतंकवाद’ से अलग बताने में जुटा: पिछले माह भी 2 पुलिसकर्मी पर हुआ था हमला

बीते दिनों इंग्लैंड से आई हिंसक खबरों के बाद अब सेंट्रल लंदन से तीन लोगों पर धारदार हथियार से हमला करने का मामला सामने आया है। इस वारदात को लिवरपूल स्ट्रीट स्टेशन के पास गुरुवार (6 अक्टूबर 2022) की सुबह अंजाम दिया गया, जबकि चौथे शख्स को धक्का मार सड़क पर गिरा दिया गया।

सूचना मिलने के बाद लंदन पुलिस (London Police) और एम्बुलेंस सुबह 9.51 बजे घटनास्थल पर पहुँची। तीनों घायलों को LAS अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने कहा कि इस मामले की जाँच जारी है। इसे आतंक से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। घटनास्थल की कुछ तस्वीरें और वीडियो भी सामने आई हैं। यहाँ भारी पुलिस बल तैनात है। घटनास्थल पर बिखरा हुआ सामान भी देखा जा सकता है।

सिटी ऑफ लंदन पुलिस के प्रवक्ता ने कहा, “हमें आज सुबह 9.46 बजे बिशपगेट पर तीन लोगों को चाकू मारने और एक व्यक्ति को सड़क पर धक्का मारकर गिराने की सूचना मिली। अधिकारी 9.51 बजे घटनास्थल पर पहुँचे। तीन घायलों को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया है। यह घटना आतंकवाद से संबंधित नहीं है।”

वहीं, एक प्रत्यक्षदर्शी ने माय लंदन को बताया, “मैंने इस घटना को यहाँ से बस में जाते हुए देखा था। काफी मात्रा में खून दिखाई दे रहा था, लेकिन हमले में कितने लोग घायल हुए, यह पता नहीं चल पाया। यहाँ काफी पैरामेडिकल स्टाफ था। मैंने बस इतना ही देखा।”

बताया जा रहा है कि बाइक पर सवार यह हमलावर फोन चोरी कर रहा था, जब लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की, तो उसने उन पर हमला कर दिया। टेलीग्राफ यूके के मुताबिक, यह चोरी की घटना थी। एक बाइक सवार चोर ने एक व्यक्ति का फोन लूटने की कोशिश की थी, जब उसने चोर को ऐसा करने से रोका तो उसने उस पर हमला कर दिया। बीच-बचाव करने आए राहगीरों को भी उस चोर ने चाकू मार घायल कर दिया। हालाँकि, पुलिस ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है।

बता दें कि सिटी ऑफ लंदन पुलिस इस घटना को चोरी से जोड़कर देख रही हैं और आतंकवाद से इसका लिंक होने से मना कर रही है। लेकिन याद दिला दें कि इससे पहले भी दो पुलिसकर्मियों पर लंदन पर चाकू से हमला हुआ था। उस समय पहले पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। तब भी पुलिस ने कहा था कि यह घटना आतंकवाद से संबंधित नहीं लगती है।