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पाकिस्तान के गुरुद्वारे में बेअदबी, जूते पहन कर घुसे मुस्लिम कलाकारों ने शूट की फिल्म: सिर ढकने वाले नियम को भी धता बताया, विरोध करने पर उलझे

पाकिस्तान के हसन अब्दाल इलाके में स्थित पंजा साहिब गुरुद्वारे में बेअदबी का मामला सामने आया है। भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा (BJP leader Manjinder Singh Sirsa) ने इस घटना का वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें फिल्म के क्रू मेंबर्स गुरुद्वारे में जूते पहने हुए नजर आ रहे हैं। मनजिंदर सिंह सिरसा का कहना है कि इस घटना ने भारत में सिख समुदाय को भी आहत किया है। उन्होंने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की माँग की है।

मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, “पाकिस्तान में ईशनिंदा कार्रवाई जारी है। गुरुद्वारा पंजा साहिब (Panja Sahib) में बेअदबी का एक वीडियो शेयर कर रहा हूँ। यहाँ फिल्म की स्टारकास्ट एवं टीम को गुरुद्वारा परिसर में शूटिंग की अनुमति दी गई थी। इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि शूटिंग करने आए लोग और फिल्म की स्टारकास्ट जूते पहनकर गुरुद्वारे के अंदर पहुँची है।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ‘लाहौर-लाहौर ए’ के दर्जन भर मुस्लिम कलाकार पगड़ियाँ बाँधकर गुरुद्वारे में फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। जब गुरुद्वारा साहिब में आई संगत ने फिल्म के क्रू मेंबर्स को जूतों सहित अंदर देखा तो उन्होंने इसका विरोध किया। एक सिख (संगत) ने इनका वीडियो भी बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो में गुरुद्वारा साहिब के सेवादार फिल्म की स्टारकास्ट को सिख धर्म के बारे में बता रहे हैं। उन्होंने बताया गया कि पंजा साहिब सिख कौम के लिए विशेष महत्व रखता है।

बताया जा रहा है कि सिखों की वेशभूषा में गुरुद्वारे में मौजूद मुस्लिम कलाकार जूते पहनकर अंदर गए थे। इनमें से कई लोगों ने तो सिर भी नहीं ढका हुआ था। जबकि गुरुद्वारे में प्रवेश करने वाले पुरुष, स्त्री और यहाँ तक की बच्चों के सिर ढँककर जाने की परंपरा है। सिखों के विरोध के बाद मुस्लिम कलाकार ने कहा कि हम आपके मेहमान हैं। इस पर वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने कहा कि मेहमान भी गुरुद्वारे में मर्यादा में आएँ, तो उनका स्वागत है।

उक्त व्यक्ति ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब को शूटिंग स्थल नहीं बनाया जा सकता और ऐसा करने वाले लोगों को सिखों के सिद्धांतों व मर्यादा की जानकारी नहीं है। इस दौरान मुस्लिम कलाकारों में से एक ने सिखों से उलझने का भी प्रयास भी किया। इन कलाकारों ने पगड़ी तक गलत तरीके से पहनी हुई थी।

सिर्फ 3 दिन में ₹230 करोड़ के पार पहुँची PS-1, ‘सुपर 30’ से भी कम रहा ऋतिक रोशन की ‘विक्रम वेधा’ का कलेक्शन

बॉलीवुड फिल्मों से हर दिन आगे निकलने वाली साउथ फिल्में बड़े पर्दे पर धुआँधार कमाई कर रही हैं। तमिल फिल्म पोन्नियिन सेल्वन-1 इसका सबसे ताजा उदहारण है। ये फिल्म ऋतिक रौशन और सैफ अली खान की ‘विक्रम वेधा’ के साथ पर्दे पर आई थी। लेकिन मात्र तीन दिनों में ही इसने ₹230 करोड़ से ज्यादा का बिजनेज कर लिया है।

वहीं ऋतिक रौशन की ‘विक्रम वेधा’ बॉक्स ऑफिस (Vikram Vedha Box Office Collection) पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पा रही है। फिल्म ने अब तक 50 करोड़ रुपए का आँकड़ा भी पार नहीं किया है।

ट्रेंड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक, 30 सितंबर 2022 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई ऋतिक रोशन की फिल्म ‘विक्रम वेधा’ ने 3 दिन में 36.94 करोड़ रुपए ही कमाएँ हैं। फिल्म ने धीमी शुरुआत के साथ शुक्रवार को ₹10.58 करोड़, शनिवार को ₹12.51 करोड़ और रविवार को ₹13.85 करोड़ का बिजनेस किया।

ऋतिक रौशन की पुरानी फिल्मों के रिकॉर्ड

2019 की सबसे बड़ी हिट फिल्म ‘वॉर’ देने वाले ऋतिक के खाते में ‘विक्रम वेधा’ एक कमजोर फिल्म बनकर शामिल हुई है। फिल्म अभी तक ₹50 करोड़ रुपए का आँकड़ा भी पार नहीं कर पाई है। जबकि बात करें ऋतिक रोशन की पिछली फिल्मों की तो, ‘विक्रम वेधा’ की तुलना में बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कलेक्शन करने में कामयाब रही हैं।

2 अक्टूबर 2022 को रिलीज हुई ‘वॉर’ ने पहले 3 दिनों में रिकॉर्ड कमाई करते हुए बॉक्स ऑफिस पर शतक (100.15 करोड़ रुपए) लगाया था। 2014 में गाँधी जयंती पर रिलीज हुई ‘बैंग बैंग’ ने भी वीकेंड पर ₹70 करोड़ से अधिक का कलेक्शन किया था। ‘कृष 3’ (Krrish 3) भी उनके लिए मील का पत्थर साबित हुई थी। इस फिल्म ने ₹72.80 करोड़ की कमाई की थी।

इसके अलावा ‘अग्निपथ’ ने ₹67.50 करोड़ का कलेक्शन किया था। बात करें ‘सुपर 30’ की तो इस फिल्म ने भले ही धीमी शुरुआत की हो, लेकिन इसने बॉक्स ऑफिस पर बाद में रफ्तार पकड़ी और 3 दिन में ₹50.76 करोड़ का कलेक्शन किया था। वहीं, काबिल ने ₹38.87 करोड़ रुपए ही कमाए थे। ‘विक्रम वेधा’ के मामले में दशहरे की छुट्टी कुछ हद तक मदद कर सकती है, लेकिन वह अपनी पिछले फिल्मों का रिकॉर्ड तोड़ पाएँगे। यह कह पाना मुश्किल होगा।

बता दें कि ‘विक्रम वेधा’ तमिल फिल्म का हिंदी रीमेक है। दोनों वर्जन को पुष्कर गायत्री ने ही डायरेक्ट किया है। तमिल में आर माधवन और विजय सेतुपति ने लीड रोल निभाया था। वहीं हिंदी में ऋतिक और सैफ मुख्य किरदार में हैं।

कॉन्स्टेबल रतन लाल का हत्यारा वसीम अलीगढ़ से धराया, दिल्ली दंगों के बाद मोबाइल तोड़ कर हो गया था फरार: छत पर कांच की बोतलें जमा करने की बात कबूली

दिल्ली पुलिस ने साल 2020 में हुए राष्ट्रीय राजधानी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में हुए दंगों के मुख्य आरोपितों में से एक मोहम्मद वसीम उर्फ बबलू उर्फ सलमान को गिरफ्तार कर लिया गया है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एक टीम उसकी तलाश में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ गई थी। वहाँ वह एक ताला बनाने वाले कारखाने में काम करता था। मोहम्मद वसीम पर दिल्ली दंगों के दौरान हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की हत्या का आरोप है। दंगों के बाद ही वह फरार हो गया था।

दरअसल, फरवरी 2022 में नागरिकता संसोधन कानून (CAA) के विरोध में दिल्ली में दंगे हुए थे। इस दौरान नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, घोंडा, चांदबाग, शिव विहार, भजनपुरा और यमुना विहार जैसे इलाकों में मुस्लिम भीड़ ने हिंसा की थी। इस दौरान हुई हिंसा में कई कट्टरपंथियों ने मिलकर हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की बेरहमी से हत्या कर दी थी। इस हिंसा में भीड़ ने डीसीपी अमित शर्मा और गोकल पुरी के तत्कालीन एसीपी अनुज कुमार समेत कई पुलिसकर्मियों पर भी जानलेवा हमला किया था।

दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की हत्या के आरोप में दिल्ली हिंसा की जाँच के लिए गठित की एसआईटी ने 17 लोगों को गिरफ्तार किया था। चार्जशीट में पुलिस ने 17 लोगों को आरोपित बनाया था। इस मामले में पुलिस के पास करीब 50 से ज्यादा गवाहों की सूची भी है, जिसकी चर्चा चार्जशीट में की गई थी। चूँकि अब वसीम की भी गिरफ्तारी हो गई है, इसलिए पुलिस नए तरीके से चार्जशीट बनाने पर विचार कर रही है।

इस मामले में क्राइम ब्रांच कमिश्नर रवींद्र यादव का कहना है कि मोहम्मद वसीम को हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या करने के मामले में भगोड़ा घोषित किया गया था। फिलहाल आरोपित से पूछताछ की जा रही है। वसीम के नए बयान भी रिकॉर्ड किए जाएँगे। इन बयानों के आधार पर ही अब चार्जशीट तैयार कर कोर्ट में पेश की जा रही है। फिलहाल, यह यह भी जाँच की जा रही है कि दिल्ली दंगों के दौरान या उससे पहले वह देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त या ऐसे लोगों के संपर्क में था या नहीं।

गिरफ्तारी के बाद आरोपित मोहम्मद वसीम ने पूछताछ में पुलिस से कहा है कि फरवरी 2020 में वह कई असामाजिक तत्वों के संपर्क में आ गया था। घटना (हिंसा) वाले दिन उसने अपने साथियों के साथ मिलकर कांच की बोतलों में थिनर भरकर एक घर की छत पर रख दिया था। इसके बाद इन बोतलों को दंगों के दौरान पुलिस अधिकारियों पर फेंका गया था। घटना के बाद उसने अपना मोबाइल फोन तोड़ दिया था और पिछले दो वर्षों से अपने रिश्तेदारों के संपर्क में भी नहीं था

मुस्लिम प्रेमिका के अब्बू ने काटा था दीपक त्यागी का सिर, 7 दिन बाद गन्ने के खेत में गड़ा मिला: मेरठ पुलिस ने फैमीद और आरिफ को गिरफ्तार किया

उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुए दीपक त्यागी हत्याकांड की गुत्थी सोमवार (3 अक्टूबर 2022) को पुलिस ने सुलझा ली। पड़ताल में पुलिस ने पाया कि दीपक की हत्या उसकी मुस्लिम प्रेमिका के अब्बू ने अपने साथी के साथ मिलकर की थी।

27 सितंबर को दीपक की सिर कटी लाश मेरठ के परीक्षितगढ़ इलाके में सीमेंट की बोर से मिली थी। मृतक के परिजनों की शिकायत पर मामला अज्ञात लोगों पर दर्ज हुआ था। पुलिस हत्यारों की तलाशी में जाँच आगे बढ़ा ही रही थी कि उन्हें पता चला कि घटना को अंजाम दीपक की प्रेमिका के अब्बू फैमीद ने ही दिया।

फैमीद ने अपने साथी आरिफ के साथ मिल दीपक को मारने की साजिश रची और कुछ दिन पहले मौका देख उसपर तलवार से वार कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फैमीद और आरिफ ने दीपक का सिर कलम किया। उसके बाद उसे खेत में ले जाकर गाड़ दिया।

पुलिस ने पड़ताल में पाया कि फैमीद की बेटी शादीशुदा है जिसके दीपक त्यागी से संबंध थे। फैमीद ने उसे दीपक संग आपत्तिजनक स्थिति में देखा था। इसी के बाद वह भड़का। उसने दीपक का सिर जहाँ गन्ने के खेत में गाड़ा। वहीं शेष शव को सीमेंट के बोरे में भरकर फेंक दिया ।

पुलिस ने सिर ढूँढने में 7 दिन काफी मशक्कत की। कुएँ से लेकर गाँव का कोना-कोना छाना। लेकिन हकीकत तब खुली जब आरोपित पकड़े गए।

पूरी घटना पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ का कहना है कि दीपक की हत्या तलवार से की गई थी। जहाँ उसका शव मिला था उससे करीब लगभग पाँच किलोमीटर दूर एक जगह पर उसका सिर मिला है। आरोपितों ने इस इरादे से अपराध को अंजाम दिया था कि जाँच अधिकारी बॉडी की पहचान नहीं कर पाएँगे।

उन्होंने यह भी कहा, “हत्या के समय दीपक त्यागी नशे में था। उस रात वह गाँव के एक ट्यूबवेल के पास आराम कर रहा था, तभी आरोपितों ने उस पर हमला कर दिया। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार किया है। उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया है।”

बता दें, दीपक त्यागी का शव मिलने के बाद से पुलिस लगातार उसके सिर का ढूँढ़ रही थी। जहाँ से उसका शव मिला था उस खेत में व नाले में जेसीबी लगाकर खुदाई की गई थी। लेकिन, पुलिस के हाथ कुछ नहीं लग रहा था। इस दौरान, तमाम हिन्दू संगठनों से लेकर त्यागी समाज के लोग रोड जामकर धरना प्रदर्शन कर रहे थे।

‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद, हिदुस्तान मुर्दाबाद’: पंजाब में सरकारी विभाग के ऑफिस पर ही लिख दिया खालिस्तानी नारा, SFJ के पन्नू ने वीडियो से धमकाया

पंजाब में खालिस्तान समर्थक एक बार फिर सिर उठा रहे हैं। यहाँ के बठिंडा में वन विभाग के कार्यालय की दीवार पर खालिस्तान के समर्थन में नारे लिखे गए हैं। कहा जा रहा है ये नारे रात में लिखे गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार (2 अक्टूबर 2022) को बठिंडा के डिविजनल फोरेस्ट ऑफिस की दीवार पर खालिस्तान समर्थक और भारत विरोधी नारे लिखे गए हैं। इस दीवार पर ‘खालिस्तान जिंदाबाद, पाकिस्तान जिंदाबाद’ ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ लिखा गया है। हालाँकि, जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस द्वारा इन नारों को मिटा दिया गया है।

इस मामले में, बठिंडा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जयबालन ई. ने कहा है कि खालिस्तान समर्थित नारे लिखे जाने की सूचना मिली है। इस मामले की जाँच शुरू कर दी गई है। जाँच के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इन नारों के पीछे प्रतिबंधित खालिस्तान समर्थक आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस (SFJ)’ का हाथ सामने आया है। ये दावा खुद इस संगठन के सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू ने किया है। पन्नू ने इसकी जिम्मेदारी लेते हुए वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में पन्नू ने कहा है कि बठिंडा में ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद खालिस्तान- पाकिस्तान जिंदाबाद’ और सिख, मुस्लिम भाई-भाई’ लिखा गया है। उसने यह भी कहा है कि 26 जनवरी 2023 से पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में खालिस्तान पर जनमत संग्रह (रेफरेंडम) शुरू हो रहा है।’

गुरपतवंत सिंह पन्नू ने इस वीडियो में यह भी कहा है कि जून 1984 में श्री दरबार साहिब पर हमले के बाद सिखों और हिंदुस्तान के बीच एक बड़ी लाइन खिंच गई है। उसने दावा किया कि तब तब 100,000 से ज्यादा खालिस्तान समर्थक सिखों ने स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। उसने ऐलान किया कि टोरंटो में 6 नवंबर को वोटिंग के साथ सिख फॉर जस्टिस का ग्लोबल खालिस्तान जनमत संग्रह पंजाब को भारतीय कब्जे से मुक्त करने की दिशा में एक जरूरी कदम है।

गुरपतवंत सिंह के इस नए वीडियो से यह एक बार फिर साफ हो गया है कि खालिस्तानी आतंकी पूरी तरह से पाकिस्तान के इशारे पर काम कर रहे हैं। बता दें कि खालिस्तानी आतंकी एक अलग देश बनाने की माँग करते हुए भारत से ‘कथित सिख लैंड’ को अलग कराने की साजिश रहते रहे हैं। इसी सिलसिले में खालिस्तान समर्थक नारे व पोस्टर जगह-जगह लगाए जाते रहे हैं

शाहीन बाग में PFI के खिलाफ UAPA का केस दर्ज, 3 दफ्तरों को पुलिस ने सील किया: SDPI का अहमद बेग बोला- ट्रेनिंग में लड़कों को देते हैं लग्जरी सुविधा

द‍िल्‍ली पुल‍िस के शाहीन बाग (Shaheen Bagh Police Station) पुलिस स्टेशन में प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (Popular Front of India) के खि‍लाफ मामला दर्ज क‍िया गया है। पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत यह मामला दर्ज करते हुए पीएफआई की तीन प्रापर्टी भी सील कर दी हैं। पुलिस का दावा है कि इन तीनों दफ्तरों में पीएफआई से जुड़े लोग संदिग्ध और खतरनाक गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।

पुलिस ने पीएफआई के तीन दफ्तरों (जैद अपार्टमेंट के ग्राउंड फ्लोर, अबू फजल एन्क्लेव जामिया नगर में हिलाल हाउस के ग्राउंड फ्लोर और टिहरी मंजिल जामिया) को यूएपीए की धारा 8 के तहत सील कर दिया है। बीते दिनों दर्ज की गई प्राथमिकी के अनुसार, पीएफआई ने इन कार्यालयों से संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम दिया था। पुलिस ने यह कार्रवाई इन दफ्तरों की तलाशी के बाद की है।

वहीं, ऑल इंडिया उलेमा काउंसिल के अध्यक्ष व एसडीपीआई के सक्रिय सदस्य मो. अहमद बेग नदवी ने पुलिस रिमांड के दूसरे दिन पूछताछ में यह बात कबूल की है कि पीएफआई से युवकों को जोड़ने के लिए उसके सदस्य कई तरह की लग्जरी सुविधाएँ देते थे। प्रशिक्षण के दौरान और बाद में घूमने-फिरने का भी पूरा इंतजाम किया जाता था। ताकि अन्य युवक भी तेजी से उनके साथ जुड़ें।

इसके अलावा प्रशिक्षण ले रहे युवकों से अपने दोस्तों के सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सुविधाओं के फोटो भेजने के निर्देश भी रहते थे। इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारियों को उसने बताया कि उसके उन्मादी भाषण भी यूटयूब के जरिए प्रशिक्षण ले रहे युवकों को सुनाए जाते थे। इससे उनका ब्रेनवॉश करने की कोशिश जाती थी।

बता दें कि केंद्र सरकार ने PFI के 300 से अधिक नेताओं को गिरफ्तार करने के बाद इस पर 5 साल का बैन लगाने का निर्णय लिया था। PFI को देश विरोधी और गैर कानूनी गतिविधियों में संलिप्त पाया गया था। अपने आदेश में मोदी सरकार ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) और उससे जुड़ी 8 संस्थाओं को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। गृह मंत्रालय ने 27 सितम्बर 2022 को यह निर्णय लिया था।

6ठी पास शाहिद से बैंक मैनेजर सुरभि ने की थी शादी… 8 साल बाद फंदे पर लटकी मिलीं: नोट में लिखा- ‘मेरा इस्तेमाल स्वार्थ के लिए हुआ’

राजस्थान के जयपुर में 6वीं पास मुस्लिम लड़के शाहिद से लव मैरिज करने वाली MBA होल्डर महिला ने फाँसी लगा कर आत्महत्या कर ली। मृतिका सुरभि कुमावत पंजाब नेशनल बैंक में मार्केटिंग मैनेजर पद पर कार्यरत थीं। सुसाइड नोट में उन्होंने आत्महत्या के कारण में बताया कि उनका पति और उनकी बेटी उनसे नफरत करते थे। सुरभि के मुताबिक उनका इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने शव को कब्ज़े में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना जयपुर के मुहाना मंडी में 1 अक्टूबर 2022 (शनिवार) की है। यहाँ 30 वर्षीया सुरभि कुमावत अपने 38 वर्षीय पति शाहिद और 5 साल की बेटी मसयारा के साथ इस्कॉन रोड के नारायण सरोवर में रहती थीं। घटना की रात सुरभि के पति और बेटी सोसाइटी के ही एक कार्यक्रम में गए थे। दोनों के 11 बजे लौट कर आने के बाद सुरभि दूसरे कमरे में सोने चली गईं।

अगले दिन रविवार को जब सुबह शाहिद सो कर उठे तब उन्होंने सुरभि को बुलाया। लेकिन कोई आवाज नहीं आई। उसने जा कर देखा तो सुरभि चुन्नी का फंदा बना कर पंखे से फाँसी पर लटकी हुई दिखीं। उसने फ़ौरन पुलिस को घटना की सूचना दी और पुलिस ने आकर जरूरी कार्रवाई की। इस दौरान मृतिका के शव के पास एक सुसाइड नोट भी मिला। उस नोट में लिखा था, “मेरे पति और मेरी बेटी मुझ से नफरत करते हैं। मैं इस दुनिया से परेशान हूँ और जा रही हूँ।”

इसी सुसाइड नोट में आगे लिखा था, “मुझे कोई नहीं समझता। हर कोई दुःख देना चाहता है। मैं सिर्फ खुश रहना चाहती हूँ। मैं किसी की जिंदगी में परेशानी भी नहीं बनना चाहती। मेरा खुद का पति मुझे छोड़ने की धमकी देता है। मेरा इस्तेमाल स्वार्थ के लिए किया गया।। मुझे दुख है कि बेटी कि मैं तुझे नहीं देख पाऊँगी।”

कथिततौर पर सुरभि के कमरे का सामान बिखरा हुआ था। उनके पति शाहिद ने बताया कि जब वो कमरे में गए तब सुरभि का शव घुटने पर बैठी हालात में मिला। शाहिद के मुताबिक उन्होंने ही फंदे को काट कर सुरभि को बिस्तर पर लिटा दिया था।

सुरभि की मौत के बाद घटनास्थल पर ही उनके ससुराल और मायके पक्ष के लोगों के बीच नोकझोंक होने लगी। पुलिस ने हालात को संभाला और पोस्टमार्टम के बाद शव को मायके पक्ष वालों को सौंप दिया। प्रशासन द्वारा पूरी घटना की वीडियो रिकार्डिंग करवाई गई और घटनास्थल का FSL परीक्षण भी करवाया गया। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

मूल रूप से सुरभि राजस्थान के टोंक जिले की रहने वाली थीं लेकिन उनका परिवार पिछले 25 वर्षों से जयपुर में रहता था। लगभग 8 वर्ष पहले इंग्लिश स्पीकिंग की क्लास में शाहिद की एक अन्य हिन्दू गर्लफ्रेंड ने सुरभि को शाहिद से मिलवाया था। शाहिद बासबदनपुरा का रहने वाला था जो पानी की सप्लाई का काम करता था। सुरभि MBA की पढ़ाई कर चुकी थीं जबकि शाहिद क्लास 6 तक ही पढ़ा था। बाद में सुरभि और शाहिद में नजदीकियाँ बढ़ीं।

साल 2015 में सुरभि की नौकरी पंजाब नेशनल बैंक में लग गई। नौकरी पाने के बाद 2016 में दोनों ने गाजियाबाद जा कर वहाँ के आर्य समाज संस्थान में शादी कर ली। लगभग 5 साल पहले सुरभि ने एक बेटी को जन्म दिया जिसका नाम मसायरा रखा गया। सुरभि नौकरी कर के घर चलाती थी जबकि शाहिद बच्ची को सँभालने के नाम पर घर में ही रहता था। जून 2021 में सुरभि ने जयपुर के इस्कॉन रोड मुहाना स्थित अपार्टमेंट के फ्लैट खरीदा और अपने पति शाहिद और बेटी के साथ रहने लगीं। सुरभि के पास कार थी जबकि शाहिद बाइक से चलता था। सुरभि बुलेट बाईक लेना चाहती थीं जिसके लिए कुछ दिन पहले वो शोरूम पर भी गईं थीं।

बच्चों का इस्तेमाल सैनिकों के रूप में कर रहा ईरान, हिजाब विरोधी प्रदर्शनकारियों को एंबुलेंस से किया जा रहा गिरफ्तार: चुपचाप दफनाए जा रहे शव

ईरान में हिजाब विरोधी प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है, जिससे यह कहना गलत नहीं होगा कि ईरान अब गृह युद्ध की स्थिति में पहुँच चुका है। इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हिजाब न लगाने के कारण गिरफ्तार की गई 22 वर्षीय महसा अमीनी की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद हुई थी। इसके बाद से अब तक विरोध प्रदर्शन के दौरान करीब 100 लोग मारे चुके हैं। इनमें से एक निका शकरामी का शव ईरानी सुरक्षाकर्मियों ने उसके घर वालों को सौंप दिया है।

एक ईरानी महिला ने बताया कि पिछले 43 वर्षों से इस्लामी मुल्क में पिता या पति की इजाजत के बिना महिलाओं को देश से बाहर जाने तक का अधिकार नहीं है। ऑनर किलिंग भी यहाँ आम बात रही है। महिलाओं ने बताया कि पुलिस प्रदर्शनकारियों की हत्या कर के चुपचाप शव दफना रही है, उनके परिवार तक को लाश नहीं दी जा रही। एंबुलेंस का प्रयोग कर के गिरफ्तारियाँ की जा रही हैं और बच्चों का इस्तेमाल सैनिकों के रूप में किया जा रहा है।

निका शकरामी महज 17 साल की थी। वह हिजाब विरोधी प्रदर्शन में महसा अमीनी की आवाज बनकर प्रदर्शन कर रही थी। लेकिन, वहाँ की कट्टरपंथी सरकार ने उसका हश्र महसा अमीनी की तरह कर दिया। निका तेहरान के केशरवेज़ बुलेवॉर्ड में हिजाब विरोधी प्रदर्शन में शामिल थी। इस जगह पर हजारों ईरानी लड़कियाँ अपने हक की लड़ाई लड़ रहीं थीं।

ईरान पुलिस उसे यहीं से उठाकर ले गई थी। इसके बाद उसे कहाँ रखा गया, उसके क्या किया गया कोई खबर नहीं थी। नौ दिनों तक जब लड़की वापस नहीं आई तो घरवालों ने हर जगह खोजा मगर उसकी कोई खबर नहीं थी। जिसके बाद 29 सितंबर को पुलिस द्वारा घरवालों को सूचना देते हुए कहा गया कि निका शकरामी जैसे दिखने वाली एक लड़की मिली है।

इसके बाद, जब घरवाले निका को देखने गए तो उन्हें उसका चेहरा तक नहीं देखने दिया गया। ईरान पुलिस की ओर से कहा गया कि निका किसी ऊँची जगह से गिर गई है जिससे उसकी मौत हो गई है। हालाँकि, घरवालों को आरोप है कि ईरानी प्रशासन की ओर से कहा गया कि इस बारे में किसी को कुछ न बताएँ और इसका अंतिम संस्कार भी सामान्य तरीके से ही होना चाहिए।

निका शरकामी के चाचा का कहना है कि उन्हें जब निका को दिखाया गया तो सब कुछ बेहद आसामान्य लग रहा था। उसका शव ऐसा था जैसे उसके साथ बर्बरता की गई हो। उसकी नाक कटी हुई थी। उसका सिर भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त था। जैसे किसी भारी चीज से उसके सिर पर सैकड़ों वार किए गए हों।

गौरतलब है कि 16 सितंबर से शुरू हुए यह आंदोलन अब विकराल रूप धारण करता जा रहा है। प्रदर्शनकारी हिजाब की बाध्यता दूर करने की माँग को लेकर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वह अंतिम सांस तक अपने अधिकारों के लिए लड़ते रहेंगे। यब प्रदर्शन अब ईरान के सभी 31 प्रांतों के 164 शहरों में फैल गया है। इस प्रदर्शन के दौरान, अब तक 15000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जबकि, करीब 132 लोगों की मौत हो चुकी है।

‘क्वारंटाइन सेंटरों में कैद किए जा रहे तिब्बत के लोग, कइयों ने कर ली आत्महत्या’: तिब्बती समाज ने कहा – चीन मिटा रहा हमारी संस्कृति

चीन के अत्याचारों से परेशान तिब्बत के लोग विश्व के कोने-कोने में अपनी आवाज उठा रहे हैं। इसी क्रम में यूरोप में रहने वाले तिब्बतियों ने भी इटली के मिलानो में अपनी तीसरी बैठक की है। इस बैठक में चीन द्वारा तिब्बत में लागू किए जा रहे शिक्षा तंत्र, जीरो कोविड पॉलिसी जैसे मुद्दों को उठाया गया।

बोर्डिंग स्कूल में बच्चों को डाल रहा चीन

यूरोप में बसे तिब्बतियों ने यह बैठक 1-2 अक्टूबर को की थी। प्रेस रिलीज के मुताबिक यूरोपीय देशों से आए समुदाय के तमाम प्रतिनिधि (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव) इस बात से चिंतिंत हैं कि चीनी सरकार तिब्बत में बोर्डिंग स्कूल का सिस्टम लागू कर रही है जिसमें 4 साल से कम उम्र वाले बच्चे जबरन डाले जा रहे हैं। स्कूल में उन्हें चीनी भाषा सिखाई जा रही है और राष्ट्रवादी शिक्षा के नाम पर तिब्बती भाषा, संस्कृति और सभ्यता को मिटाया जा रहा है।

कोविड और DNA के नाम पर तिब्बतियों पर अत्याचार

बैठक में उन वीडियोज पर भी चर्चा हुई जो हाल फिलहाल में चीन से आईं। इनमें दिख रहा है कि कैसे जीरो-कोविड पॉलिसी के नाम पर तिब्बतियों को क्वारंटाइन सेंटरों में बिन टेस्ट के कैद किया गया, उन्हें सड़ा खाना दिया गया। लोग इतने तंग हो गए कि कुछ ने आत्महत्या तक की। उस रिपोर्ट पर भी चिंता जाहिर की गई जो बताती है कि 2016 से 2022 के बीच में चीन ने 10 लाख से ज्यादा तिब्बतियों के डीएनए कलेक्ट किए हैं। इनमें महिला बच्चे भी शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाने का आह्वान

बैठक में चीन द्वारा लागू किए जा रहे शिक्षा तंत्र को रोकने के लिए, जीरो कोविड पॉलिसी के नाम पर तिब्बतियों को प्रताड़ित करने के खिलाफ, मास डीएनए कनेक्शन के खिलाफ आवाज उठाने को कहा गया।

इसके साथ ही यूरोपीय देशों की सरकारों, सांसदों और यूरोपियन संघ के साथ यूएन से अपील की गई कि वो लोग चीन को ये सब करने से रोकें। बैठक में शामिल तिब्बत समुदाय के प्रतिनिधियों ने शपथ ली कि वो तिब्बतियों के बद्तर हालातों के बारे में लोगों को बताएँगे और खासकर इन तीन मुद्दों पर तिब्बत के लिए ताकत जुटाएँगे।

बता दें कि तिब्बतियों पर चीन के अत्याचार लगातार बढ़ रहे हैं। इसी गुस्से में पिछले दिनों दिल्ली में भी उन्होंने चीन दूतावास के सामने प्रदर्शन किया था।

‘रावण ने इस्लाम कबूल कर लिया?’: ‘आदिपुरुष’ में सैफ अली खान के लुक को लोगों ने बताया तैमूर-औरंगजेब जैसा, VFX को भी कह रहे घटिया

दक्षिण भारतीय अभिनेता से पैन इंडिया स्टार बन चुके प्रभास (Prabhas), सैफ अली खान (Saif Ali Khan) और कृति सेनन (Kriti Sanon) स्टारर ‘आदिपुरुष’ फिल्म का टीजर 2 अक्टूबर, 2022 को रिलीज हो चुका है। टीजर रिलीज से पहले दर्शकों में जितना उत्साह देखा जा रहा था, वह रिलीज होने के बाद फीका पड़ गया है। ‘आदिपुरुष’ के टीजर में VFX इफेक्ट्स और दशानन बने सैफ अली खान का लुक दर्शकों को बिल्कुल भी रास नहीं आ रहा है।

सोशल मीडिया पर भी रावण के किरदार को लेकर यूजर्स ने आपत्ति जताई है। यूजर्स का कहना है कि रावण को शिव भक्त के रूप में देखा गया है, जबकि सैफ रावण के लुक में मुगलों के खूँखार शासकों से इंस्पायर्ड नजर आ रहे हैं। सैफ के लुक्स को लेकर यूजर्स उन्हें औरंगजेब , तैमूर, अल्लाउद्दीन खिलजी, बाबर, मोहम्मद गजनी और कई मुस्लिम आक्रमणकारियों के नामों के टैग दे रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि रावण एक विद्वान ब्राह्मण था, जबकि इस फिल्म में सैफ मॉडर्न हेयरकट और लंबी दाढ़ी के साथ नजर आ रहे हैं।

लोगों का कहना है कि वह खिलजी की तरह दिख रहे हैं। एक ने कहा, “सैफ को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे रामायण के रावण ने धर्म-परिवर्तन कर इस्लाम को अपना लिया हो।”

सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, “क्या मैं अकेला हूँ, जो सोचता है कि सैफ ‘आदिपुरुष’ में रावण की तुलना में एक मुस्लिम आक्रमणकारी की तरह दिखता है?”

गायत्री लिखती हैं, “रावण ब्राह्मण था। एक विद्वान जिसने शिव तांडव की रचना की थी। उसे वेदों का ज्ञान था और वह एक महान ज्योतिषी भी था। सैफ अली खान की यह तस्वीर कहीं से भी रावण की नहीं लगती है। उस समय एक दक्षिण भारतीय ब्राह्मण अपने माथे पर कुमकुम लगाता था। यह बर्बर आक्रमणकारी तैमूर की तस्वीर है।”

अमित एस. राजपूत लिखते हैं, “मैंने अभी-अभी ‘आदिपुरुष’ का टीजर देखा। यह बहुत ही निराशाजनक है। कहीं से भी रामायण की तरह नहीं दिखता है। बहुत ही साधारण वीएफएक्स, ज्यादातर हॉलीवुड फिल्मों से कॉपी किया गया। रावण के रूप में सैफ सबसे खराब, स्पाइडर मैन के खलनायक की तरह अभिनय करते हैं।”

एक ने पूछा, “आदिपुरुष में सैफ औरंगजेब का किरदार निभा रहे हैं?”

महादेव मुंडे लिखते हैं, “यह फिल्म रामायण का अपमान है? सबसे पहले रावण और हनुमान ने मुकुट क्यों नहीं पहना है? सैफ को किस तरह का हेयरकट दिया गया है? वह खिलजी की तरह दिख रहा है। रावण सबसे बुद्धिमान ब्राह्मणों में से एक था। कृपया हमारी भावनाओं को आहत करना बंद करें।”

बता दें कि ‘आदिपुरुष’ को बॉलीवुड फिल्म ‘तानाजी’ के डायरेक्टर ओम राउत ने डायरेक्ट किया है। ‘आदिपुरुष’ (Adipurush) में प्रभास भगवान श्री राम, सैफ अली खान रावण और कृति सेनन माता सीता के किरदार में नजर आएँगी। 1 मिनट 46 सेकंड के टीजर में भगवान राम (प्रभास) समुद्र की गहराई में ध्यान लगाए बैठे हुए हैं। दशानन (सैफ अली खान) को बर्फ में बैठे हुए देखा जाता है। वह एक बड़े पक्षी को अपना वाहन बनाए कहीं जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। माता जानकी (कृति सेनन) को झूले में चित्रित किया गया है।