कन्हैया लाल हत्याकांड (Kanhaiya lal murder) के मुख्य गवाह राजकुमार शर्मा की हालत गंभीर है। उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया है। राजस्थान के उदयपुर में मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने 28 जून 2022 को दुकान में घुसकर कन्हैया लाल का गला काट डाला था। राजकुमार जब उन्हें बचाने आए तो उन पर भी हमला किया गया जो खाली चला गया।
हत्याकांड के मुख्य चश्मदीद राजकुमार शर्मा (Rajkumar Sharma) का उदयपुर के एमबी अस्पताल में सोमवार (3 अक्टूबर 2022) रात ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन करीब पाँच घंटे तक चला। डॉक्टरों के मुताबिक, राजकुमार को होश में आने में कम से कम 2 दिन का समय लग सकता है। इस बीच राजकुमार शर्मा की पत्नी ने बताया है कि कन्हैयालाल की हत्या के बाद से ही उनके पति सदमे में चल रहे थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार को राजकुमार शर्मा की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें एमबी अस्पताल लाया गया। वहाँ जाँच में राजकुमार के ब्रेन हेमरेज होने की जानकारी सामने आई। राजकुमार शर्मा की पत्नी पुष्पा शर्मा ने बताया, “कन्हैयालाल की हत्या के बाद से मेरे पति तनाव में थे। तीन महीने बाद मेरी बेटी की शादी होनी है। प्रशासन की ओर से प्राइवेट नौकरी लगवाई गई, लेकिन बहुत कम वेतन दिया गया। मेरे पति को इस हत्याकांड का मुख्य गवाह बनाया गया, लेकिन पिछले 3 महीने में हमारे परिवार पर क्या बीती है, वह सिर्फ हम ही समझ सकते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “हत्याकांड से पहले राजकुमार को किसी तरह की कोई बीमारी नहीं थी। वह सिर्फ एक गवाह बन कर रह गए हैं। एक पिता और पति नहीं बन पाए। वह कड़ा परिश्रम और मेहनत करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे, लेकिन अब नहीं कर पा रहे हैं। उनके ऊपर परिवार की जिम्मेदारियाँ है। इन हालातों में बेटी की शादी कैसे होगी यही सोचकर वह अंदर ही अंदर परेशान रहते थे। इस हत्याकांड के बाद से उनकी हालत बिगड़ती चली गई और ब्रेन हेमरेज हो गया। प्रशासन की तरफ से इस मामले के बाद में हमें सुरक्षा मिली हुई है, लेकिन उससे हमारा पेट नहीं भरता। सरकार को हमारी मदद करनी चाहिए। हमारे बच्चों को सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता देनी चाहिए।”
उदयपुर में कन्हैयालाल की हत्या
उदयपुर में 28 जून 2022 को मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद कपड़ा सिलवाने के बहाने से कन्हैया लाल की दुकान में घुसे और उनकी बर्बर तरीके से हत्या कर दी। कन्हैया लाल के टेलर शॉप में राजकुमार आठ साल से काम कर रहे थे। हमले में उनका एक साथी ईश्वर घायल भी हो गया था। हत्या के बाद राजकुमार ने आजतक को बताया था कि घटना से पहले भी कन्हैया लाल को मौत की धमकियाँ दी जा रही थी। हत्या से कुछ दिन पहले बुर्का पहनी एक महिला और एक आदमी दुकान पर आए थे। उन्होंने कन्हैया लाल को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी।
जम्मू-कश्मीर के डीजी जेल हेमंत कुमार लोहिया (DG HK Lohiya) की हत्या कर दी गई है। उनकी हत्या ऐसे समय में की गई है, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) केंद्रशासित प्रदेश के दौरे पर हैं। आतंकी संगठन पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट (PAFF) ने हत्या की जिम्मेदारी ली है। पुलिस लोहिया के नौकर यासिर अहमद की तलाश कर रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना जम्मू के बाहरी इलाके उदयवाला की है। लोहिया की हत्या सोमवार (3 अक्टूबर 2022) को की गई। वे 1992 बैच के अधिकारी थे। उनकी उम्र 57 वर्ष थी।
कमरे में आग देखकर सुरक्षाकर्मियों को हत्या की भनक लगी। शुरुआती जाँच में पाया गया है कि उनके शरीर पर तेल लगा हुआ है। उनके पैर में सूजन थी। ऐसा लगता है कि पहले लोहिया की हत्या की गई। फिर केचप की बोतल से गला काटा गया। शरीर पर जलने के निशान हैं। इससे लग रहा है कि हत्या के बाद शव को जलाने की भी कोशिश की गई थी।
Forensic teams and crime teams are on spot. Investigation process has begun.Senior officers are on spot.J&K police family expressss grief and deep sorrow over the death of its senior officer.
PAFF ने मंगलवार सुबह इस हत्या की जिम्मेदारी ली। बयान में कहा है कि उसके विशेष दस्ते ने जम्मू के उदयवाला में खुफिया ऑपरेशन को अंजाम देते हुए डीजी पुलिस जेल एचके लोहिया की हत्या कर दी। यह हाई प्रोफाइल ऑपरेशन्स की शुरुआत है। यह हिंदुत्व शासन और उसके सहयोगियों को चेतावनी है कि हम कहीं भी किसी पर भी हमला कर सकते हैं। यह गृह मंत्री को उनके दौरे से पहले छोटा सा गिफ्ट है। हम भविष्य में भी ऐसे ऑपरेशन्स जारी रखेंगे।
Shocking. Terror group Lashkar e Tayyiba’s front TRF claims responsibility for the murder of Jammu & Kashmir Director General Prisons Hemant Lohia yesterday. Murder happened on the day Home Minister Amit Shah began his J&K visit. pic.twitter.com/yhJwfNghAC
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्री शाह सोमवार से जम्मू-कश्मीर के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। हत्या के बाद से फरार यासिर अहमद पिछले 6 माह से लोहिया के साथ था। DGP दिलबाग सिंह के मुताबिक हत्या से पहले यासिर ने पूरी प्लानिंग की थी। PAFF का नाम पिछले कुछ दिनों में हुई कई आतंकी गतिविधियों में सामने आया है। इसमें गैर कश्मीरी लोगों की हत्या की घटनाएँ भी शामिल हैं।
गाजियाबाद के मसूरी क्षेत्र के इकला मंदिर से एक संदिग्ध को पकड़ा गया है। उसके पास से पिस्टल, चाकू सहित अन्य धारदार हथियार मिले हैं। संदिग्ध की पहचान आस मोहम्मद के तौर पर हुई है। बताया जा रहा है कि वह महामंडलेश्वर स्वामी प्रबुद्ध आनंद गिरि जी की हत्या करने के इरादे से मंदिर में घुसा था।
आरोप है कि आस मोहम्मद अपनी पहचान छिपा कर मंदिर में घुसा था। उसने अपना नाम समीर शर्मा बताया था। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। घटना सोमवार (3 अक्टूबर 2022) की है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इकला मंदिर में जब आस मोहम्मद घुसा था, उस समय महामंडलेश्वर प्रबुद्ध आनंद गिरी जी भी मंदिर में ही थे। महामंडलेश्वर ने बताया कि आस मोहम्मद अपना नाम समीर शर्मा बताकर मंदिर में आया था। जब सेवादारों ने उसके सामान की जाँच की तो पिस्टल, चाकू और ब्लेड कटर मिला। सेवादारों और महामंडलेश्वर का दावा है कि आस मोहम्मद हत्या करने के मकसद से यहाँ आया था। उसने महामंडलेश्वर की एक लाख रुपए की सुपारी ली थी।
आनंद गिरी जी ने कहा है, “इससे पहले भी मेरी हत्या की साजिश की जा चुकी है। अगर सेवादारों ने उस संदिग्ध को नहीं पकड़ा होता, तो वह मुझे मार ही देता। पुलिस को इस मामले की सही तरीके से जाँच-पड़ताल करनी चाहिए।”
#GhaziabadPolice | थाना मसूरी क्षेत्रांतर्गत ग्राम इकला स्थित मंदिर से एक संदिग्ध व्यक्ति के आपत्तिजनक सामान के साथ मिलने की सूचना प्राप्त हुई थी। पुलिस द्वारा सन्दिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
पुलिस ने इस मामले में खुफिया विभाग को भी सूचित कर दिया है। एसपी ग्रामीण ने बताया कि इकला मंदिर में एक संदिग्ध व्यक्ति के पास आपत्तिजनक सामान मिलने की सूचना प्राप्त हुई थी। पुलिस उसे हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। अभी तक उसके मंदिर में आने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर आने वाले सभी श्रद्धालुओं की चेकिंग की जाएगी। बिना चेकिंग के किसी को भी मंदिर के अंदर प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि गाजियाबाद के ही डासना मंदिर में अगस्त 2021 में सोए हुए साधुओं पर चाकुओं से हमला हुआ था। उससे पहले जून 2021 में इसी मंदिर में हिंदू बनकर घुसे कासिफ और उसके साथी को पकड़ा गया था। इनके पास से सायनाइड और हथियार मिले थे। इस घटना से ठीक पहले 17 मई 2021 को जान मोहम्मद डार उर्फ़ जहाँगीर को दिल्ली पुलिस ने पहाड़गंज के एक होटल से दबोचा था। उसके पास से भगवा कपड़ा व पूजा-पाठ की सामग्रियाँ बरामद हुई थी। जम्मू कश्मीर का ये आतंकी महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या की सुपारी लेकर आया था। उसके पास से एक पिस्टल और 2 मैगजीन के अलावा 15 कारतूस भी मिले थे। जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी आका आबिद ने उसे ट्रेनिंग देकर भेजा था।
गुजरात के एक कॉलेज में आयोजित गरबा के दौरान विवाद को लेकर हिंदू छात्रों पर हमला किया गया। छह छात्र घायल हो गए। घटना वडोदरा के सावली स्थित बीके पटेल आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज का है।
हमले का आरोप अमीन गुलाब नबी, निजामी मोईन नूर मोहम्मद, फिरोज भाई और हनीफ पर है। हमले के लिए लोहे की रॉड और पत्थरों का प्रयोग किया गया। विवाद गरबा में DJ पर इस्लामी गाना बजाने से शुरू हुआ। पुलिस ने चारों आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। घटना शनिवार (1 अक्टूबर 2022) की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीके पटेल आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज में शनिवार को गरबे का आयोजन किया गया था। इसमें 100-150 छात्र भाग ले रहे थे। ब्रेक में आरोपितों ने DJ पर इस्लामी गाने बजाने की माँग की।
बताया जा रहा है कि DJ वाले ने उनके दबाव में इस्लामी गाने बजाने शुरू कर दिए। इस पर अन्य छात्रों ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि नवरात्रि के अवसर पर गरबे में इस प्रकार के गाने कॉलेज परिसर में उचित नहीं है। इसी आरोपित नाराज हो गए। उन्होंने न सिर्फ विरोध कर रहे हिन्दू छात्रों को गंदी-गंदी गालियाँ दीं, बल्कि उनको देख लेने की धमकी भी दे डाली। उस समय कॉलेज के प्रिंसिपल और अन्य स्टॉफ ने आकर बीच-बचाव किया।
गरबा खत्म होने के बाद घर लौट रहे BA अंतिम वर्ष के छात्र विश्वजीत सिंह को अमीन गुलाब नबी, निज़ामी मोईन नूर मोहम्मद, फ़िरोज़ भाई और हनीफ़ ने रोक लिया। विश्वजीत के साथ 5 अन्य छात्र भी मौजूद थे, जिनके नाम युवराज वाघेला, हरपाल जाधव, योगेश, ऋतिक सिंह और घनशयाम सिंह हैं। अमीन, नूर मोहम्मद, फ़िरोज़ और हनीफ़ के हाथों में पत्थर और लोहे की रॉड थीं। उन्होंने सभी 6 हिन्दू छात्रों पर हमला कर दिया।
घटना के बाद हमलावर फरार हो गए। मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई है। सभी हमलावर सावली के ही रहने वाले हैं। पुलिस आरोपितों की तलाश कर रही है।
राहुल गाँधी की तथाकथित ‘भारत जोड़ो’ यात्रा एक बार फिर विवादों में घिर गई है। कर्नाटक नव निर्माण समिति समेत कई कन्नड़ समर्थक संगठनों ने कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी को चेतावनी दी है। इन संगठनों ने कहा है किसी को भी कर्नाटक के झंडे का दुरुपयोग करने का अधिकार नहीं है। कॉन्ग्रेस इसमें राहुल गाँधी की फोटो लगा रही है यह बेहद शर्मनाक है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार (2 अक्टूबर 2022) को मैसूर में राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो’ यात्रा का अयोजन किया गया था। इस यात्रा के दौरान कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता पार्टी के झंडों के साथ ही ‘कर्नाटक के झंडे’ भी लहराते हुए दिखाई दिए। इन झंडों में राहुल गाँधी की तस्वीरें छपी हुई थीं।
कॉन्ग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी के इस कृत्य पर (झंडो में तस्वीर छापने पर) कन्नड़ समर्थक संगठनों ने माफी की माँग की है। दरअसल, अनौपचारिक रूप से पीले और लाल रंग की पट्टी को कर्नाटक का झंडा माना जाता है। इसे ही कन्नड़ और कर्नाटक का प्रतीक भी माना जाता है। कर्नाटक में वोट बैंक की राजनीति के चलते कॉन्ग्रेस ने इन्हीं झंडों में राहुल गाँधी की तस्वीर छाप दी थी।
इस मामले में, कर्नाटक के राजस्व मंत्री आर अशोक का कहना है, “मैं कन्नड़ ध्वज पर फोटो छापने की निंदा करता हूँ। जब कॉन्ग्रेस नेता नेता सिद्धारमैया सत्ता में थे, उन्होंने कर्नाटक के ध्वज को बदल दिया था। उस समय सभी कन्नडिगों ने इसका विरोध किया था फिर उन्होंने इसे बदल दिया। अब, झंडे पर राहुल गाँधी की तस्वीर कॉन्ग्रेस के लिए शर्म की बात है।”
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए, कर्नाटक बीजेपी ने ट्वीट किया, “यह एक और उदाहरण है कि कॉन्ग्रेस कन्नड़ ध्वज के मुद्दे को सुलझने नहीं देगी। पहले वे झंडा बदलने गए। अब उन्होंने झंडे पर राहुल गाँधी की तस्वीर का इस्तेमाल किया है। कॉन्ग्रेस कन्नड़ लोगों से नफरत क्यों करती है?”
सोमवार (3 अक्टूबर 2022) को भारतीय वायुसेना मेक इन इंडिया के तहत भारत में निर्मित लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (LCH) को शामिल किया गया है। इन लड़ाकू हेलीकॉप्टरों से भारतीय वायुसेना की ताकत पहले से और अधिक बढ़ गई है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी की उपस्थिति में जोधपुर एयरबेस में आयोजित एक कार्यक्रम में इन हेलिकॉप्टरों को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया है। इस हेलीकॉप्टर को ‘प्रचंड’ नाम दिया गया है।
भारत में बने लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर यानी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ दुश्मनों के लड़ाकू विमानों को ध्वस्त करने, आतंकवाद विरोधी अभियानों को अंजाम देने, कॉम्बैट सर्च और बचाव कार्यों में सक्षम हैं। सरकारी रक्षा कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा डिजाइन और तैयार किए गए इस हेलीकॉप्टर को भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से तैयार किया गया है।
‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर 16,400 फीट तक की उड़ान भरने में सक्षम है। इसके वजन की बात करें तो यह करीब 5800 किलो यानी 5.8 टन है और 268 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ते हुए दुश्मन के हौसले पस्त कर सकता है।
यूँ तो भारतीय सेना के पास सबसे ताकतवर हेलीकॉप्टर अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर है, लेकिन ‘प्रचंड’ को जिस तरह से तैयार किया गया है उससे वह संकट की स्थिति में एक अलग भूमिका में नजर आएगा। ‘प्रचंड’ को पहाड़ी क्षेत्रों या ऊँचाई वाले स्थानों में युद्ध के दौरान उपयोग किए जाने के लिए ही विकसित किया गया है।
यही नहीं, इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि प्रचंड हेलीकॉप्टर कितनी भी अधिक गर्मी में रेगिस्तान के ऊपर या बर्फीले पहाड़ों और खराब मौसम में भी दुश्मनों पर हमला करने का माद्दा रखता है। इसकी कैनन से हर मिनट में 750 गोलियाँ दागी जा सकती हैं। यह एंटी टैंक मिसाइल और 70 मिमी रॉकेट सिस्टम, हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस है।
इसके अलावा, इस हेलीकॉप्टर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे भारत में ही बनाया गया है इसलिए यदि कभी भी इसमें किसी भी प्रकार का बदलाव करना होगा तो इसके लिए किसी दूसरे से मंजूरी लेनी की आवश्यकता नहीं होगी। साथ ही, इसके पार्ट्स और मेंटनेस के लिए भी किसी और पर निर्भर नहीं रहना होगा।
वायुसेना के 143 हेलीकॉप्टर यूनिट, जिसे धनुष स्क्वाड्रन भी कहा जाता है, के फ्लाइट कमांडर विंग कमांडर सौरभ शर्मा ने प्रचंड हेलीकॉप्टर उड़ाने के बाद कहा, “मैं एक प्रसिद्ध मुक्केबाज, मोहम्मद अली के कोट के साथ केवल इतना कह सकता हूँ कि यह मशीन (हेलीकॉप्टर) तितली की तरह उड़ती है और मधुमक्खी की तरह डंक मारती है।”
फर्जी खबर फैलाने के मामले में अपनी पहचान बना चुके वामपंथी पोर्टल ‘द क्विंट’ में लिखने वाली कथित एक्टिविस्ट शालिन मारिया लॉरेंस (Shalin Maria Lawrence) ने ट्विटर पर विवादित पोस्ट किया है। उन्होंने ब्राह्मणों पर निशाना साधते हुए लिखा, “एक ब्राह्मण पड़ोसी नहीं चाहती कि उसके घर से मेरा वाईफाई कनेक्शन चले। उसने केबल के साथ छेड़छाड़ करना शुरू कर दिया, जिससे मेरे वाईफाई ने काम करना बंद कर दिया। उसने एयरटेल इंडिया को फोन किया और मेरी शिकायत के बाद उसे ठीक करने के लिए बॉक्स को शिफ्ट करने के लिए कहा।”
इसके बाद वह एक और ट्वीट करती हैं। अपने दूसरे ट्वीट में वह कहती हैं, “यह साफ तौर पर उल्लंघन है। मैं उस पर एससी/एसटी का मामला दर्ज कर सकती हूँ, जो उसने मेरे खिलाफ वर्षों से किए हैं। लेकिन मैं नहीं कर सकती, क्योंकि मैं एक ईसाई दलित हूँ। मैं एससी/एसटी पीओए के अंतर्गत नहीं आती हूँ।”
‘द क्विंट’ में लिखने वाली पत्रकार ने अपना ट्वीट वायरल होने के बाद इसे डिलीट कर दिया है। लेकिन, ट्विटर पर @iMac_too नाम के यूजर ने इसका स्क्रीनशॉट ले लिया। ब्राह्मणों को लेकर उनकी नफरत इस पोस्ट में साफ दिखाई दे रही है। इसको लेकर वह सोशल मीडिया पर यूजर्स के निशाने पर आ गई हैं। एक यूजर ने लिखा, “इन दिनों मेरा इंटरनेट बहुत स्लो चल है। मुझे मेरे गृहनगर में 5G भी नहीं मिलता है। यह एक स्पष्ट उल्लंघन है।”
These days my internet is too laggy, I don’t even get 5g in my hometown
एक और यूजर ने लिखा, “नरेंद्र मोदी। यही कारण है कि ईसाइयों/मुस्लिमों को कभी भी अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए। वे उत्पीड़ित नहीं हैं, बल्कि हिंदू विरोधी/मूर्ति पूजा विरोधी हैं। अब तक मैंने आपके लगभग सभी ‘मास्टरस्ट्रोक’ पर आपका समर्थन किया है, लेकिन कृपया मुझे इसे बदलने के लिए न कहें।”
@narendramodi this is exactly why Christians/Muslims must never be given SC/ST status,they’re not the oppressed but are Anti-Hindu/Pagan/Heathen oppressors! ps: So far I’ve supported you on almost all your ‘Masterstrokes’ but please don’t make me change it https://t.co/2HBHbDl15o
यूजर्स के निशाने पर आने के बाद शालिन मारिया लॉरेंस ने अपने दोनों ट्वीट डिलीट कर दिए हैं। उन्होंने अपने नए ट्वीट में लिखा, “मैंने अपने पिछले ट्वीट डिलीट कर दिए हैं। मैं वास्तव में ब्राह्मणों और आरएसएस समर्थक शूद्रों द्वारा दी जा रही जातिवादी गाली और धमकियों को बर्दाश्त नहीं कर सकती हूँ। यह भयावह है कि कास्ट (जाति) नेटवर्क कैसे काम करते हैं। मैं यह साबित करने के लिए अपने आपको मानसिक रूप से परेशान नहीं करूँगी। मैं सही हूँ यह काफी है। मैं कानूनी रूप से इसका सामना करूँगी।”
देश की राजनीति में हासिए पर खड़ी कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता अब भी अजोबोग़रीब बयान दे रहे हैं। ऐसे कॉन्ग्रेस नेताओं की लंबी लिस्ट है जो अपने गलत बयानों के चलते चर्चा में बने रहते हैं। इस सूची में महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले का भी नाम शामिल है। नाना पटोले ने सोमवार (3 अक्टूबर, 2022) को बेहद हास्यास्पद बयान दिया। उन्होंने कहा है कि देश में फैले हुए लंपी वायरस के लिए नाइजीरिया से आए चीते जिम्मेदार हैं। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है।
महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने अपने इस बयान में भारत में लाए गए चीतों को नाइजीरिया का बताया है। जबकि सच्चाई यह है कि केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार के अथक प्रयासों के बाद सभी 8 चीते अफ्रीकी देश नामीबिया से लाए गए हैं।
#WATCH | “This lumpy virus has been prevailing in Nigeria for a long time and the Cheetahs have also been brought from there. Central government has deliberately done this for the losses of farmers,” says Maharashtra Congress chief Nana Patole pic.twitter.com/X3DrkFyMPw
नाना पटोले ने लंपी वायरस को लेकर दिए बयान में कहा है, “लंपी रोग (वायरस) नाइजीरिया नामक एक देश में है। वहाँ पर ये कई सालों से था। ये चीता जो लाया गया है ये भी वहीं से लाया गया है। चीते के चिट्टे (चीते के शरीर पर धब्बे) और गाय के चिट्टे (लंपी वायरस से गायों पर होने वाला प्रभाव) एक समान होते हैं। केन्द्र की सरकार ने जानबूझकर किसानों का नुकसान करने के लिए ये व्यवस्था बनाई है।”
महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले के इस बयान से यह तो साफ है कि उन्हें भारत में नामीबिया से लाए गए चीतों और त्वचा जनित रोग लंपी वायरस के बारे में कोई जानकारी नहीं है। साथ ही, यह कहना गलत नहीं होगा कि उन्होंने यह बयान सिर्फ केन्द्र सरकार को निशाने पर लेने के उद्देश्य से ही दिया है।
दरअसल, भारत लाए गए सभी 8 चीते गत माह यानी सितंबर में भारत लाए गए हैं। जबकि लंपी वायरस जुलाई से ही देश के कुछ हिस्सों में फैल रहा है। इसके अलावा, लंपी एक प्रकार का त्वचा रोग है जिसमें गायों व अन्य जानवरों के शरीर पर गाँठ बनना शुरू हो जाती है। जिसके बाद इस वायरस के चलते ही उनकी मौत हो जाती है।
नाना पटोले के इस हास्यास्पद बयान पर भाजपा नेता और विधायक राम कदम ने कहा है कि कॉन्ग्रेस को नामीबिया से लाए गए चीतों पर लंपी वायरस प्रकोप के सिद्धांत के लिए नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए। रामकदम ने कहा है, “यह हास्यास्पद है। वह महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद से सुर्खियों में हैं। उन्होंने जो आरोप लगाए हैं वे पूरी तरह से निराधार हैं और अगर कॉन्ग्रेस नेतृत्व के पास इस तरह का तर्क है, तो पूरी कॉन्ग्रेस पार्टी को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जाना चाहिए।”
भाजपा नेता रामकदम ने यह भी कहा कि हम अपने देश में चीतों को लाए, यह कितना गर्व का क्षण था और यह सराहना करने के बजाय कॉन्ग्रेस नेतृत्व इसे लम्पी (वायरस) से जोड़ रहा है, इससे क्या संबंध है? उन्होंने कहा कि लोगों को गुमराह करने के लिए ये लोग ऐसी बातें कर रहे हैं जो निराधार हैं और इसलिए उनका कहना है कि कॉन्ग्रेस नेताओं को आगे आकर माफी माँगनी चाहिए।
वहीं, भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने नाना पटोले का महाराष्ट्र का राहुल गाँधी करार दिया है। पूनावाला ने ट्वीट कर कहा है, “नाना पटोले, जो महाराष्ट्र के राहुल गाँधी हैं, वे कहते हैं कि लंपी वायरस की उत्पत्ति नाइजीरिया में हुई थी। यह भारत में इसलिए आया क्योंकि क्योंकि मोदी जी चीते लाए थे। चीते नामीबिया से आए थे। क्या वह जानते हैं कि नाइजीरिया और नामीबिया अलग-अलग देश हैं। कॉन्ग्रेस ने हमेशा ऐसे झूठ और अफवाहें फैलाई हैं।”
उन्होंने अपने अगले ट्वीट में कॉन्ग्रेस पर तंज कसते हुए कहा, “क्या आपको वह झूठ याद है जो उन्होंने कोविड मैनेजमेंट और टीकों के बारे में फैलाया था? सच में उन्होंने लोगों को कोविड-19 के सुरक्षित टीके लेने से डरा दिया था। क्या यह फेक न्यूज के जरिए पूरी तरह से अराजकता फैलाने की चाल नहीं है? क्या कॉन्ग्रेस उन पर कार्रवाई करेगी? क्या उन्होंने राहुल गाँधी के व्हाट्सएप को सब्सक्राइब किया है?”
Nana Patole who is Rahul Gandhi of Maharashtra says Lumpy Virus originated in Nigeria & it came because Modi ji brought Cheetahs! Cheetahs came from Namibia
Does he know Nigeria & Namibia are different nations? Congress has always spread such lies & rumours 1/n
अपने अगले ट्वीट में शहजाद पूनावाला ने पूछा “आटा कहाँ किलो की बजाए लीटर में मापा जाता है? फेक न्यूज का चलन कहाँ है? फर्जी खबरों और झूठ का सबसे बड़ी वाहक कॉन्ग्रेस है।”
Where atta is measured in litres instead of kilos? Where fake news is the norm?
Congress is the biggest vector of fake news and lies
मेरे पिता को ठगा गया। बेवकूफ बनाया गया। इस बात को मैंने जिस दिन समझा उसी दिन मेरा मन इससे (ईसाई) उचट गया। मैंने प्रण किया है कि जिस सरना को इन्होंने (कैथोलिक संस्था) अपवित्र किया, वह इनसे वापस लूँगा और वहीं अपने पुरखों के धर्म में लौटूँगा। देखता हूँ आखिर कब तक इनसे लड़ पाता हूँ।
यह कहना है 56 साल के क्लेमेंट लकड़ा का। लकड़ा पिछले 30 साल से जशपुर की कैथेलिक संस्था से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। यह लड़ाई लड़ते-लड़ते उनके पिता 2000 में दुनिया छोड़कर चले गए। इन सालों में लकड़ा के पक्ष में अदालत से फैसला भी आया। लेकिन उनकी जमीन छोड़ने की बजाए कैथोलिक संस्था उनके पूरे परिवार को प्रताड़ित करने में जुटी है।
दो बेटियों के पिता क्लेमेंट अपने परिवार के साथ छत्तीसगढ़ की कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र के दुलदुला में रहते हैं। उनकी पत्नी सुषमा लकड़ा दुलदुला की सरपंच हैं। उनके घर की दीवारों पर लगी तस्वीरें बताती हैं कि यह परिवार धर्मांतरित होकर ईसाई बन चुका है। लेकिन घर के कोने में एक टेबल पर पड़ी दस्तावेजों में वह दर्द अंकित है, जिसे धर्मांतरण के बाद इस परिवार ने भोगा है।
क्लेमेंट की करीब 10 एकड़ जमीन पर कैथोलिक संस्था का कब्जा है। इस जमीन पर चर्च है। स्कूल है। फादर और नन के रहने के लिए घर बने हुए हैं। खाली पड़ी जमीनों पर संस्था के ही लोग खेती करते हैं। यह जमीन क्लेमेंट के पिता भादे उर्फ वशील उरांव ने ईसाई बनने के बदले खोई थी।
क्लेमेंट लकड़ा ने ऑपइंडिया को बताया कि उनके पिता का धर्मांतरण 1957-58 में हुआ था। एक पादरी ने उनसे सरना पूजा छोड़कर ईसाई बनने को कहा था। यह वह समय था जब उनके पिता की पहली पत्नी की मृत्यु हुई थी। क्लेमेंट के अनुसार फादर ने उनसे कहा था, “आप धर्मांतरित हो जाओ। यहाँ चर्च बैठने दो। आपके सरना में क्रुस गाड़ देंगे। प्रभु आपके घर में आशीष देगा। घर में बरकत आएगा। घर से भूत-प्रेत भागेगा।” वे कहते हैं, “पिता जी अपनी पत्नी की मौत के बाद से डरे हुए थे और उनकी बातों में आ गए।”
इसके बाद भादे की दूसरी शादी हुई, जिससे क्लेमेंट पैदा हुए। क्लेमेंट के अनुसार जमीन के बदले उनके पिता को कोई पैसा नहीं मिला था। उस समय उन्हें कुछ अनाज दिया गया था और भविष्य के लिए प्रलोभन दिए गए। भूत-प्रेत को भगाने का वादा किया गया, जिसके कारण उनके पिता संकट में थे। वे कहते हैं, “सबसे दुख की बात है कि हमारे सरना को अपवित्र किया गया। उसे काटकर क्रूस गाड़ दिया गया।”
क्लेमेंट के अनुसार शुरुआत में उनकी जमीन एक स्थानीय फादर थेदोर लकड़ा के नाम से की गई। उसके बाद इसे कैथेलिक संस्था ने अपने नाम कर लिया। यह भू राजस्व कानून की धारा 170 (ख) का स्पष्ट उल्लंघन है। इस कानून के बारे में हम अपनी पिछली रिपोर्ट में आपको विस्तार से बता चुके हैं।
1992 में अविभाजित मध्य प्रदेश की सरकार ने अनुसूचित जनजाति वर्ग की जमीनों से कब्जा हटाने के लिए सर्वे करवाया। भादे की जमीन पर कब्जे का मामला भी उसी समय सामने आया था। फिर यह मामला कोर्ट में गया। कुनकुरी एसडीएम की अदालत ने भादे के पक्ष में फैसला सुनाया। कैथोलिक संस्था को खाली जमीन लौटाने और जिस जमीन पर निर्माण हो चुका था, उसके बदले मुआवजा देने का निर्देश दिया। इस आदेश के खिलाफ कैथोलिक संस्था ने सिविल कोर्ट में अपील की। लेकिन वहाँ भी फैसला लकड़ा परिवार के पक्ष में ही आया। अदालती आदेशों की कॉपी ऑपइंडिया के पास हैं।
क्लेमेंट लकड़ा का कहना है कि प्रताड़नाओं के कारण वे अपने पुरखों के धर्म में लौटना चाहते हैं
क्लेमेंट ने ऑपइंडिया को बताया कि अदालत के आदेश के बाद जब जमीन उन्होंने अपने नाम पर करवाने की कोशिश की तो कैथोलिक संस्था अतिरिक्त जिला सत्र न्यायालय चली गई। अपना पक्ष कमजोर देख संस्था ने बाद में याचिका वापस ले ली और लकड़ा परिवार पर अलग-अलग तरह से दबाव बनाने लगा। इसके बाद जनवरी 2022 में जमीन अपने नाम करवाने के लिए क्लेमेंट तहसलीदार कोर्ट गए। जवाब में कैथोलिक संस्था ने दोबारा उसी सिविल कोर्ट में सूट दायर कर दिया जो पहले ही लकड़ा के पक्ष में फैसला सुना चुकी है।
कानूनी लड़ाई से इतर क्लेमेंट का दावा है कि कैथोलिक संस्था के अधिकारी और उनके साथी उनके परिवार को प्रताड़ित कर रहे हैं। दुलदुला पंचायत के विकास कार्यों में रोड़ा अटकाया जा रहा है। उनकी पत्नी से कहा जाता है कि अपने पति से केस वापस लेने के लिए कहो। ऐसी ही एक घटना का जिक्र करते हुए क्लेमेंट ने ऑपइंडिया को बताया, “फरवरी 2022 में चर्च में एक मीटिंग बुलाई गई। इस मीटिंग में मुझसे कहा गया कि यदि केस वापस नहीं लोगे तो तुम्हें समाज से बाहर कर देंगे। फिर तुम्हारी बेटियों से कौन शादी करेगा।”
वे कहते हैं, “एक आदिवासी के लिए उसकी जमीन ही सब कुछ है। भले वह छोटा टुकड़ा हो या बड़ा। हमलोग खेती-बाड़ी करने वाले लोग हैं। खेती से ही परिवार पालते हैं। जब हमारी जमीन ही नहीं रहेगी तो धर्म से क्या मतलब।” क्लेमेंट के कहना है कि उनकी इस लड़ाई में दिवंगत दिलीप सिंह जूदेव, अखिल भारतीय जनजातीय सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत जैसे लोगों और हिंदुवादी संगठनों ने काफी मदद की है। अपने समाज में अलग-थलग पड़ने के बाद भी इनलोगों की मदद से ही वे इस लड़ाई को लड़ पा रहे हैं।
ऐसा भी नहीं है कि ईसाई संस्था से प्रताड़ित क्लेमेंट इकलौते हैं। ऐसे कई और क्लेमेंट ईसाई मिशनरियों से लड़ रहे हैं, जिनके पुरखों को पहले प्रलोभन देकर धर्मांतरित किया गया और बाद में उन्हें उनकी जमीन से बेदखल कर दिया गया। पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईसाई मिशनरियों से प्रताड़ित इनलोगों को आखिर न्याय कब मिलेगा? कब वे अपनी जमीनों पर लौट पाएँगे?
करोड़ों के घोटाले की आरोपित और वाशिंगटन पोस्ट की स्तंभकार राना अय्यूब (Rana Ayyub) एक बार फिर से गलत सूचनाएँ फैलाने के कारण चर्चा में हैं। वह एक फेक अकाउंट को आरएसएस का ट्विटर हैंडल बता रही हैं। उन्होंने गृह मंत्रालय (HMO India) और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO India) को टैग करते हुए ट्वीट किया है। राना अपने ट्वीट में लिखती हैं, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वे महात्मा गाँधी की हत्या का जश्न मना रहे हैं। वे खुद को आरएसएस की आर्थिक शाखा कहते हैं। आपकी चुप्पी और गृह मंत्रालय द्वारा इन देशद्रोही और आतंकी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई में कमी आपका खुला समर्थन है।”
Prime minister Narendra Modi, they are celebrating the assassination of Mahatma Gandhi, they call themselves the economic wing of the RSS. Your silence, the lack of action against these seditious and terror elements by you and @HMOIndia is an open endorsement @PMOIndiapic.twitter.com/tNHdK5TCbE
अपने ट्वीट के साथ राना ने एक स्क्रीनशॉट भी साझा किया है। यह स्क्रीनशॉट स्वदेशी जागरण मंच (Swadeshi Jagran Manch) नाम का एक फेक अकाउंट है। इसी ट्विटर हैंडल को वह RSS का हैंडल बता रही हैं। इसमें लिखा है, “रूबी क्रॉसिंग कोलकाता भारत में ‘अखिल भारत हिंदू महासभा’ द्वारा आयोजित माँ दुर्गा पूजा, जहाँ गाँधी में बुराई का प्रतीक महिषासुर है और यतो धर्मस्तो जय सुनिश्चित करने के लिए मारा गया है। जहाँ धर्म है, वहाँ जीत होगी। हर हर महादेव।”
दरअसल, राना अय्यूब द्वारा किया जा रहा दावा झूठ साबित हुआ, क्योंकि यह RSS का ट्विटर हैडल नहीं है। यह एक फेक अकाउंट है। RSS से सम्बद्ध ‘स्वदेशी जागरण मंच‘ का अपना वेरिफाइड ट्विटर हैंडल है।
फोटो साभार: स्वदेशी जागरण मंच
‘स्वदेशी जागरण मं’च के वेरिफाइड अकाउंट पर इस तरह का कोई भी पोस्ट शेयर नही किया गया है। हालाँकि, यह पहला मामला नहीं है, जब राना अय्यूब का झूठ बेनकाब हुआ हो। इससे पहले भी वह कई बार झूठ बोलते हुए पकड़ी गई हैं।
झूठ पर 4 मिनट कायम नहीं रह पाईं
इससे पहले राना ने अपने एक इंटरव्यू में इतने झूठ बोले कि वो खुद आँकड़ों में कन्फ्यूज हो गईं थी। उन्होंने इंटरव्यू में शुरुआत में कहा था कि 100 हिंदुओं ने एक मुस्लिम लड़की को घेरा और इंटरव्यू के आखिर में वो बोलती नजर आईं कि ये संख्या 200 थी। उन्होंने कहा था, “ये वो भारत नहीं है, जिस पर हमें कभी गर्व होता था। ये दक्षिणपंथी आतंकियों का भारत है।”
धोखाधड़ी करने पर जब्त हुई 1.77 करोड़ रुपए की संपत्ति
बता दें कि झूठ फैलाने में माहिर राना अय्यूब वित्तीय धोखाधड़ी की आरोपित हैं। उनकी 1.77 करोड़ रुपए की संपत्ति ईडी द्वारा जब्त की गई थी। कथित तौर पर ये सारा पैसा उन्होंने कीटो पर फंड इकट्ठा करने का नाम पर एकत्रित किया था। मगर, सारे पैसे का इस्तेमाल किए बिना उन पैसों को अय्यूब ने अपने अकॉउंट में रखे रखा। जब विवाद बढ़ा तो उन्होंने खुद को बेगुनाह बताया।