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माँ कामाख्या की धरती पर लोक परंपराओं को मिला मंच, नृत्य-संगीत से लेकर उत्तर-पूर्व के खानपान तक का अनुभव एक जगह: ‘प्रज्ञा प्रवाह’ के प्रयास से जुटे 3700+ प्रतिनिधि

भारत में जितनी भी लोक परंपराएँ प्रचलित रही हैं, उन सभी परंपराओं में आस्था और ज्ञान सबसे महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। पिछले दिनों मुझे आस्था और ज्ञान के संगम ‘लोकमंथन 2022’ के आयोजन में माँ कामाख्या के पावन स्थल गुवाहाटी जाने का अवसर प्राप्त हुआ, जहाँ संपन्न हुए 4 दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन के द्वारा समाज में व्याप्त विष को अमृत में बदलने का बौद्धिक प्रयास देखने को मिला। यह कार्यक्रम भारतीय विरासत के जड़ों को जानने, समझने और भविष्य के लिए संरक्षित करने का सफल प्रयास कहा जाना चाहिए।

इसे अकादमिक जगत के लिए आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के इस अमृत काल में भारत के अगले 25 वर्षों की शिक्षा, शोध, ज्ञान एवं संवाद की परंपरा के रूपरेखा के तौर पर भी देखा जाना चाहिए। ‘प्रज्ञा प्रवाह’ और असम सरकार के संयुक्त तत्वाधान में 21 से 24 सितम्बर को गुवाहाटी में हुए लोकमंथन कार्यक्रम, ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना से परिपूर्ण विचारकों एवं कर्मशील व्यक्तियों के लिए लोकमंच के रूप में उभर कर आया, जिसके द्वारा ‘भारत की लोक परंपराएँ’ और राष्ट्र की सामूहिक प्रज्ञा को एकीकृत कर उत्सव के रूप में मनाया गया।

भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए देश की गौरवशाली परंपराओं और विशिष्ट राष्ट्रीय चरित्रों को प्रदर्शित किया गया। वास्तव में कहे तो इस राष्ट्रीय विमर्श के द्वारा भारतीय अपेक्षाओं, सामाजिक व्यवस्था की परंपरा तथा समता के आधार पर समकालीन मुद्दों को साझा किया गया। इस बौद्धिक विमर्श में नए भारत की नींव के लिए लोक के समस्त आयामों को अंतर्निहित करने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम के विभिन्न व्याख्यान सत्रों में लोक आस्था और विज्ञान की परंपरा, शक्ति की अवधारणा, पाक परंपरा, वंशावली लेखन का महत्व, शिक्षा में कहानी कहने की परंपरा, संगीत वाद्ययंत्र, धार्मिक यात्राएँ एवं अन्नदान की परंपरा, संस्कार और कर्तव्य, भारत की औद्योगिक जातियाँ, पर्यावरण और जैव-विविधता, जल संरक्षण आदि विषयों पर वैचारिक मंथन हुआ।

वहीं आयोजन के दूसरे हिस्से में कई लोक परंपराओं का प्रदर्शन किया गया, जिनमें असम के माँ कामख्या मंदिर की झाँकी विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रही। इसके साथ ही भारत के विभिन्न क्षेत्रों के प्रचलित वैवाहिक लोक परंपराओं, नृत्य-संगीत का प्रदर्शन, पारंपरिक जादू, मंत्र, टोटके, उत्तर-पूर्व के जनजातीय समुदाय के पारंपरिक खान-पान, परिधान और आर्थिक उपार्जन के प्राकृतिक स्रोतों को करीब से देखने एवं अनुभव करने का अवसर मिला।

कार्यक्रम की शुरुआत 21 सितम्बर को प्रदर्शनी उद्घाटन से हुआ, लेकिन वैचारिक सत्र की वास्तविक शुरुआत भारत के उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के वक्तव्य से, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे नंदकुमार की उपस्थिति में हुआ। आम जनमानस के बीच जहाँ एक ओर राजनीतिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति एवं उनके भाषण सुनने को मिले, वही दूसरी ओर पद्मश्री डॉ कपिल तिवारी, सोनल मानसिंह, गिरीश प्रभुणे जैसे भारत के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे कई पद्म विभूषण, पद्मश्री जैसे राजकीय सम्मानों से सम्मानित विद्वानों के साथ-साथ प्रतिष्ठित कर्मशील व्यक्तियों को मंच पर बराबर का स्थान प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सहकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले एवं केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के वक्तव्य से हुआ, जो पूरे कार्यक्रम के संक्षिप्त निष्कर्ष के रूप में प्रतिनिधियों के सामने आया, जिसे उन्होंने भारत बोध के कई आयामों के रूप में व्याख्यायित किया। इस राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में 3700 से अधिक प्रतिनिधियों का एक स्थान पर एकत्र हो पाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, जिसने असम और पूर्वोत्तर की संस्कृति के विभिन्न पहलुओं के लिए जिज्ञासा को प्रेरित किया है।

कार्यक्रम की सफलता संख्या बल की भागीदारी के साथ-साथ आम जनमानस पर उसके प्रभाव से भी आँका जाता हैं। ऐसे में एक बड़ी जिम्मेदारी है कि आयोजक इन एकत्र हुए प्रतिनिधियों से निष्कर्ष प्राप्त कर इसे देश हित के विकास कार्यों में सम्मिलित कर सकें। इस कार्यक्रम के जरिए विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित नीति-निर्माताओं और अनुभवी विद्वानों के साथ बौद्धिक विमर्शों में भाग लेने वाले कर्मशीलों की उपस्थिति ने, अकादमिक जगत के लिए नए मापदंड तय कर दिए हैं।

ऐसे में उम्मीद हैं कि अभिजात्य वर्ग के तथाकथित पाश्चात्य बुद्धिजीवियों की बजाए जमीनी वास्तविकताओं से परिचित लोगों को राष्ट्रीय मंच देने की माँग तेज होगी। भारत की लोक परंपरा सदैव ही ज्ञान आकांक्षी, प्रयोग आधारित और अनुभवजनित रही हैं। यहाँ सूक्ष्म से स्थूल और स्थूल से गूढ़ तक के लिए देश, काल और परिस्थिति के अनुरूप वैज्ञानिक तर्क मौजूद रहे हैं। ऐसे में जितने भी परंपराओं में परिवर्तन आवश्यक हुआ उनमें एक व्यापक संवाद परंपरा के बाद ही बदलाव संभव हो सके।

आज जिस पॉपुलर कल्चर के चश्मे से फोकलोर के दायरे में हम भारतीय लोक परंपराओं को देख रहे हैं निश्चय ही उसके संकीर्ण परिभाषाओं को बदलने की जरूरत हैं। जरूरत यह भी हैं कि भारतीय जनमानस अपने लोक परंपराओं को अपने यहाँ के लोक प्रयोगधर्मियों के द्वारा नजदीक से अनुभव करें न कि म्यूजियम या वार्षिक दिवसों में बदल कर एक दिन इकट्ठे हो ताली बजाएँ। भारतीय लोक के अनेक पहलुओं पर सांस्कृतिक और वैचारिक मंथन से यह भी उम्मीद बढ़ती हैं कि लोकमंथन जैसे सफल आयोजन देश भर के विभिन्न क्षेत्रों में शोध कर रहे शोधार्थियों, सांस्कृतिक कलाकारों एवं राष्ट्र प्रज्ञा के लिए तैयार हो रहे युवाओं के लिए नए लक्ष्य स्थापित करेगी।

साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेशन को विस्तार देगी। किसी भी राष्ट्र की समृद्ध लोक परंपराओं को अनुभव करके ही वास्तविक रूप से समझा जा सकता हैं और लोकमंथन 2022 के गुवाहाटी संस्करण का आयोजन इसी समृद्ध परंपरा को जीवंत कर राष्ट्रीय मंच पर लाने का एक सफल अनुभवजनित प्रयास रहा है।   

(लेखिका संगीता केशरी दिल्ली विश्वविद्यालय की शोधार्थी और ‘होप फाउंडेशन’ की मिडिया कंसल्टेंट् हैं।)

‘दबाव महसूस करते हो तो IPL मत खेलो’: कपिल देव ने आज के क्रिकेटरों को सुनाई खरी-खरी, कहा – पैशन है तो प्रेशर कैसा?

भारत के पूर्व दिग्गज क्रिकेट खिलाड़ी कपिल देव (Ex-Cricketer Kapil Dev) ने कहा कि आजकल के खिलाड़ी कहते हैं कि वे IPL खेल रहे हैं, इसलिए बहुत प्रेशर है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी अगर दबाव महसूस करते हैं तो उन्हें IPL नहीं खेलना चाहिए। उन्होंने कहा कि पैशन वाले खिलाड़ी को प्रेशर नहीं होता।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान 63 वर्षीय कपिल देव ने यह बात एक टीवी शो के दौरान कही। कपिल देव ने कहा, “आजकल मैं टीवी पर बहुत सुनता हूँ कि IPL खेलते हैं… बहुत प्रेशर है। मैं एक ही चीज कहना चाहता हूँ कि मत खेलो। प्रेशर क्या होता है? खिलाड़ी को अगर पैशन है तो प्रेशर नहीं होना चाहिए। हम एंजॉय करने के लिए खेलते हैं और एंजॉयमेंट में प्रेशर हो ही नहीं सकता है।”

कप्तान के रूप में साल 1983 में विश्वकप जीतने वाले कपिल देव ने आगे कहा, “ये अमेरिकन वर्ड आ जाते हैं ना… कि मेरे को प्रेशर है… डिप्रेशन है… ये मेरे समझ में नहीं आता। मैं तो एक किसान हूँ और हम तो एंजॉय करने के लिए खेलते हैं और एंजॉयमेंट में प्रेशर हो ही नहीं सकता। हम तो कहते थे कि भगवान आज बारिश मत करना, हमें खेलना है। तो ये प्लेजर है, प्रेशर नहीं है।”

उन्होंने छात्रों का उदाहरण देते हुए कहा, “हम पढ़ाई करने वाले बच्चों को भी बोलते हैं। मैं एक स्कूल में गया तो 10वीं-11वीं के बच्चे बोले कि बहुत प्रेशर है। मैंने कहा कि अच्छा! आपको भी प्रेशर है? AC स्कूल में पढ़ते हो, माँ-बाप फीस देते हैं, टीचर आपको हाथ नहीं लगा सकता और आपको प्रेशर है! हमारे टाइम में पूछो प्रेशर क्या है। टीचर पहले थप्पड़ मारता था, फिर पूछता था कि कहाँ हो। मैं उन्हें बोलता हूँ कि इसको प्लेजर में चेंज कर लो, फन में चेंज कर लो। प्रेशर नहीं होना चाहिए।”

कपिल देव का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने कहा कि इस कठिन समय के बीच क्रिकेट के ऑल फॉरमेट में खेलना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। पिछले महीने शार्लोट डीन के रन आउट होने के बाद भारत मैच जीत गया था, लेकिन इस रन आउट से विवाद खड़ा हो गया था। तब कपिल ने कहा था, “ऐसी स्थिति में मुझे लगता है कि हर बार तीखी बहस के बजाय एक सामान्य नियम होना चाहिए। बल्लेबाजों को उनके रन से वंचित करना। इसे शॉर्ट रन माना जाना चाहिए।”

‘ये आज के जमाने का रावण है, हमने फिल्म में कुछ भी गलत नहीं किया’: ‘आदिपुरुष’ के निर्देशक ने कहा – इतिहास से नहीं की कोई छेड़छाड़

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की शौर्य गाथा पर आधारित फिल्म ‘आदिपुरुष’ को लेकर फैंस को काफी उम्मीदें थीं। हालाँकि, फिल्म का टीजर आने के बाद से ‘आदिपुरुष’ विवादों से घिरी रही है। कई हिन्दू संगठनों से लेकर राजनेताओं व आम जनता तक ने इस फिल्म के किरदारों को लेकर सवाल उठाए हैं। साथ ही, सोशल मीडिया पर भी फिल्म को लगातार ट्रोल किया जा रहा है। इन तमाम विवादों के बीच, आदिपुरुष के प्रोड्यूसर-डायरेक्टर ओम राउत ने बयान देकर विवाद को रोकने की कोशिश की है।

ओम राउत ने कहा है कि उन्हें फिल्म को लेकर कई तरह की सलाह मिल रही हैं। वह इन सभी को नोट कर रहे हैं। जब फिल्म आएगी तब सब कुछ अच्छा रहेगा। हम किसी को निराश नहीं होने देंगे। हालाँकि, उन्होंने यह नहीं बताया है कि वह फिल्म में बदलाव करने जा रहे हैं या नहीं।

‘आदिपुरुष’ के डायरेक्टर ओम राउत ने कहा, “हम पर विश्वास रखें। हमारे लिए, हमारी ऑडियंस सबसे पहले है। हमें जिस तरह का फीडबैक मिल रहा है, उसे हम नोट कर रहे हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि जब यह फिल्म 12 जनवरी, 2023 को रिलीज होगी तो हम किसी को निराश नहीं करेंगे। हम पर विश्वास करें, हम इसे पूरा करेंगे।”

सोशल मीडिया पर हो रही फिल्म की ट्रोलिंग को देखते हुए जब ओम राउत से पूछा गया कि क्या वह फिल्म में बदलाव करेंगे। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “अभी लोगों ने सिर्फ 95 सेकेंड्स का टीजर ही देखा है। मैं दोबारा कह रहा हूँ कि हम सभी चीजों को नोट कर रहे हैं। मैं यकीन दिलाता हूँ कि कोई निराश नहीं होगा।”

उन्होंने यह भी कहा, “मैं भगवान राम को बहुत मानता हूँ। फिल्म में मैंने कुछ भी गलत नहीं किया। हमने इतिहास से कोई छेड़छाड़ नहीं की। मैं इस इतिहास को अपनी प्राउड हिस्ट्री मानता हूँ। जब मैंने रामानंद सागर की रामायण दूरदर्शन पर देखी तो इसका मुझ पर काफी असर हुआ। रामायण के उस वर्जन में भी मॉडर्न टेक्नॉलजी थी, जिससे दर्शक इम्प्रेस हुए। एक तीर चलता था उससे 10 तीर निकलते थे, फिर 100 तीर निकलते थे। हमने ऐसा पहले कभी नहीं देखा था।”

रावण के विवादित लुक को लेकर ओम राउत ने कहा कि रावण एक राक्षस है, वह निर्दयी था तो उसको मूँछ वाला लुक दिया गया था। उन्होंने कहा कि उसे उस वक्त के राक्षस के रूप में दिखाया गया था, यह उसे चित्रित करने का तरीका था। बकौल ओम राउत, ‘आदिपुरुष’ का रावण आज के वक्त का राक्षस है और उनके नजरिए में एक राक्षस ऐसा भी दिख सकता है।

ओम राउत से जब यह पूछा गया कि लोग टीजर की इतनी आलोचना कर रहे हैं तो क्या वह फिल्म में कुछ बदलाव करेंगे? इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें सबका आशीर्वाद चाहिए। क्योंकि यह एक फिल्म नहीं है, वह इसे फिल्म की तरह से ट्रीट नहीं कर रहे, यह उनके लिए मिशन है। यह भक्ति का प्रतीक है।

शिवसेना के ट्विटर हैंडल पर अब भी उद्धव गुट का कब्ज़ा, नए चुनाव चिह्न के लिए दिए गए ये विकल्प: अब होंगे दो अलग दल, अलग-अलग नाम-चिह्न

चुनव आयोग द्वारा शिवसेना के चुनाव चिह्न धनुष-बाण को फ्रीज करने के बाद उद्धव ठाकरे गुट ने दूसरे विकल्प खोजने शुरू कर दिए हैं। इसके लिए उन्होंने त्रिशूल, सूर्य और मशाल जैसे विकल्प चुनाव आयोग को दिए हैं। बताया जा रहा है कि यह गुट आने वाले अँधेरी उपचुनाव में ठाकरे गुट या असली शिवसेना नाम से मैदान में उतारा जा सकता है। अगली रणनीति बनाने के लिए ठाकरे गुट ने आज रविवार (9 अक्टूबर 2022) को एक मीटिंग बुलाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ठाकरे गुट अब ‘शिवसेना बालासाहेब ठाकरे’ दूसरे विकल्प के तौर पर ‘शिवसेना उद्धव बाला साहेब ठाकरे’ और तीसरे विकल्प के तौर पर ‘शिवसेना प्रबोधन ठाकरे’ नाम से चुनावी मैदान में उतर सकता है। चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे गुट से भी अपने समूह के 3 नाम और 3 ही चुनाव चिह्न देने के लिए कहा है। चुनाव आयोग अब दोनों गुटों के अलग-अलग नाम देते हुए उन्हें अलग-अलग चुनाव चिह्न बाँटेगा। इसके लिए चुनाव आयोग ने दोनों को मौजूद विकल्पों की लिस्ट भी सौंपी है।

शिवसेना का आधिकारिक ट्विटर हैंडल अभी भी उद्धव गुट के पास

गौरतलब है कि शिवसेना का आधिकारिक ट्विटर हैंडल फिलहाल उद्धव गुट ही प्रयोग कर रहा है। ‘@ShivSena’ नाम का ये हैंडल वेरिफाइड है, और इस पर लगभग 8.14 लाख फॉलोवर्स हैं। इस हैंडल की प्रोफ़ाइल फोटो में अभी भी तीर कमान का चित्र बना हुआ है और कवर पर उद्धव ठाकरे की फोटो लगी हुई है। 6 अक्टूबर 2022 को इस हैंडल से बाकायदा ट्वीट भी किया गया है जिसमें, किसी पर इशारा करते हुए आज के 50 हाथों वाला रावण बताया गया है।

गौरतलब है कि शिवसेना को तीर-कमान का सिंबल अक्टूबर 1989 में मिला था। इस स पहले शिवसेना रेल इंजन, नारियल पेड़, कप-प्लेट, ढाल-तलवार और मशाल जैसे निशानों पर चुनाव लड़ चुकी है।

केजरीवाल ने श्रीकृष्ण से की खुद की तुलना… हाथ जोड़कर माफी माँगें: दिल्ली CM के ‘कंस की औलाद’ वाले बयान पर भड़के BJP प्रवक्ता, बोले- पूरा यादव समाज आहत हुआ

आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। इस दौरान वे लगातार बेतुकी बयानबाजी भी कर रहे हैं। इसी सिलसिले में शनिवार (8 अक्टूबर 2022) को आयोजित एक रैली में केजरीवाल ने उनके पोस्टर लगाने वालों को ‘कंस की औलाद’ कहा था। उनके इस बयान को लेकर बीजेपी लगातार हमलावर है। बीजेपी-ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री और बिहार बीजेपी के प्रवक्ता निखिल आनंद ने केजरीवाल से माफी की माँग की है।

निखिल आनंद ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल को ‘कंस के औलादों’ वाला बयान वापस लेते हुए देश भर के कृष्णवंशियों-यदुवंशियों से माफी माँगनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा है कि केजरीवाल का ‘कंस की औलादों का सर्वनाश’ वाला बयान बेहद निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है।

बिहार बीजेपी के प्रवक्ता निखिल आनंद का कहना है कि केजरीवाल ने कहा है कि वह जन्माष्टमी के दिन पैदा हुए थे तो क्या वे खुद को भगवान श्रीकृष्ण या उनके वंशज घोषित कर देंगे या फिर खुद को भगवान श्रीकृष्ण की औलाद समझने लगे हैं। भगवान श्रीकृष्ण के नाम पर राजनीति करने की केजरीवाल की घटिया मानसिकता निंदनीय है। केजरीवाल के इस बयान ने देश के यादव समाज के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाया है।

उन्होंने यह भी कहा कि केजरीवाल द्वारा खुद की तुलना भगवान श्रीकृष्ण से करने की भावना और मंशा निराशजनक है। केजरीवाल को अपने इस बयान के लिए पूरे यादव समाज से मंच लगाकर हाथ जोड़कर माफी माँगनी चाहिए। यदि वह ऐसा नहीं करते हैं तो देशभर के यादव समाज के लोग आम आदमी पार्टी का राजनीतिक विरोध करेंगे। केजरीवाल को यह पता होना चाहिए कि भगवान श्रीकृष्ण ने कंस के शासन में हो रहे अत्याचार के कारण ही उसका वध किया था। श्रीकृष्ण ने कभी भी कंस की औलादों या उनके खानदान के लोगों के समूल नाश करने की बात नहीं की और न ही यह बात कहीं लिखी हुई है।

निखिल आनंद ने केजरीवाल की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि श्रीकृष्ण तो खुद कंस के भांजे थे और माता देवकी कंस की बहन थीं। देशभर में जितने भी यदुवंशी हैं वे कृष्ण-कंस-बलराम सहित तमाम यादव समाज के लोगों और राजाओं की ऐतिहासिक परंपरा और परिवार की विरासत से ही आते हैं। केजरीवाल ने भगवान श्रीकृष्ण से खुद को फर्जी तरीके से जोड़ कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की है। उनकी यह घटिया मानसिकता बेहद निंदनीय है।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसा करने वाले केजरीवाल इस बात का भी जवाब दें कि मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर परिसर को अतिक्रमण मुक्त कराने और वहाँ भगवान श्रीकृष्ण के भव्य मंदिर की स्थापना को लेकर उनकी व्यक्तिगत राय क्या है? क्या केजरीवाल श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन की मुहिम का समर्थन करते हैं?

बता दें, केजरीवाल ने गुजरात के दाहोद में आयोजित के रैली में उनके पोस्टर लगाने वालों पर टिप्पणी करते हुए कहा था, “मैं एक धार्मिक आदमी हूँ। हनुमान जी का कट्टर भक्त हूँ, मेरा गुजरात आना तय हुआ तो इन लोगों ने पूरे गुजरात में मेरे खिलाफ हर जगह पोस्टर लगा दिए। ये कंस की औलाद हैं जो भगवान का इस तरह से अपमान करते हैं। अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा था कि मेरा जन्म श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन हुआ था। भगवान ने मुझे एक विशेष काम, कंस की औलादों ल को खत्म करने के लिए भेजा है।”

कर्नाटक में बनेगी 112 फीट ऊँची शिव की प्रतिमा, नवग्रह मंदिर के लिए भी ईशा फाउंडेशन का काम जारी: सद्गुरु के साथ कर्नाटक CM ने ‘नाग मंडप’ का उद्घाटन किया

ईशा फाउंडेशन (Isha Foundation) के प्रमुख सद्गुरु जग्गी वासुदेव (Sadguru Jaggi Vasudev) ने कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर (Chikkaballapur, Karnataka) में नाग मंडप का अनावरण किया। यहाँ ‘आदियोगी शिव’ की 112 फीट ऊँची प्रतिमा और नवग्रह मंदिर के निर्माण का काम जारी है। इसका निर्माण कार्य अगले साल पूरा तक हो सकता है और इसे लोगों के लिए मकर संक्रांति तक खोला जा सकता है।

राजधानी बेंगलुरु से 70 किलोमीटर दूर अगलागुरकी गाँव में यह ईशा फाउंडेशन का दूसरा सेंटर है। इसका उद्घाटन कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने चिक्कबल्लापुर के विधायक डॉ के सुधाकर की उपस्थिति में ‘श्लोकों’ के जाप और स्थापना अनुष्ठान से किया।

100 एकड़ में फैले और चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरे इस जगह पर ईशा फाउंडेशन की आधुनिक सुविधा 2-3 वर्षों में पूरी तरह शुरू हो जाएँगी। ईशा फाउंडेशन के अधिकारियों का कहना है कि चिक्कबल्लापुर केंद्र कोयंबटूर परिसर की प्रतिकृति होगा, जिसमें 112 फीट की आदियोगी शिव प्रतिमा, 8 नवग्रह मंदिर और एक अद्वितीय भैरवी मंदिर शामिल हैं।

यह सेंटर पूर्ण आध्यात्मिक केंद्र होगा और यहाँ योग और कलारीपयट्टू (केरल से मार्शल आर्ट का एक पारंपरिक रूप) को ‘ईशा संस्कृति’ के नाम से पढ़ाया जाएगा। इसके अलावा ध्यान, व्यक्तित्व एवं नेतृत्व विकास को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।

इस अवसर पर सीएम बोम्मई ने कहा, “सद्गुरु कर्नाटक के एक वैश्विक गुरु हैं। वह महान रचनात्मकता वाले व्यक्ति हैं जो एक पत्थर को सुंदर बना सकते हैं और इस पैमाने का एक केंद्र स्थापित कर सकते हैं जो राज्य और किसानों के लिए भी नए रास्ते खोलेगा। वह वह है जो समय के खिलाफ दौड़ता है और जीतता भी है।”

मौलाना छूता था बच्ची के प्राइवेट पार्ट, शिकायत के बाद केस दर्ज: MP के मदरसे में 15 साल की छात्रा का यौन शोषण, विरोध करने पर परिजनों को भी ‘हथौड़ी’ से पीटा गया

मध्यप्रदेश के इंदौर के चंदन नगर के एक मदरसे में 15 साल की बच्ची का 50 साल के मौलाना ने यौन शोषण किया। बताया जा रहा है मौलाना लड़की को अकेले कमरे में ले जाकर उसके प्राइवेट पार्ट्स छूता था। जब लड़की ने इस संबंध में परिजनों को बताया तो मौलाना ने उन्हें भी पिटवाने का काम किया। पुलिस ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली है।

घटना रानीपुरा सिरपुर स्थित आले रसूल मदरसा की है। मौलाना की पहचान हजरत अहमद हुसैन के तौर पर हुई है। लड़की ने एक-डेढ़ महीने पहले ही मदरसा जाना शुरू किया था। इसके बाद मौलाना लड़की पर गलत नजर रखने लगा। वह लड़की को कमरे में ले जाकर उसके साथ अश्लील हरकतें करता था। 5 अक्टूबर को उसने लड़की का हाथ पकड़ लिया। लड़की घबराकर रोते हुए जब घर आई तो उसने परिजनों को इस संबंध में बताया। परिजन जब शिकायत देकर मदरसा गए तो वहाँ मौलाना के बेटे रजा ने लड़की मामा/चाचा पर हथौड़ी से वार किया।

समाचार एजेंसी एएनआई को एडीसीपी इंदौर प्रशांत चौबे ने बताया, 15 साल की लड़की ने चंदन नगर थाने में 50 साल के मदरसे टीचर के खिलाफ शिकायत दी है। उसने बताया है कि मौलाना उसका शोषण करने के लिए उसे मदरसे के कमरे में ले जाता था वहाँ वह उसके प्राइवेट पार्ट्स से छेड़खानी करता था। लड़की का एडमिशन इस मदरसे में सितंबर में ही हुआ था।

एडीसीपी इंदौर के अनुसार, जब लड़की के अम्मी-अब्बू ने इस संबंध में मौलाना से बात की, तो उसने उनसे गाली-गलौच की, उन्हें पिटवाया। पुलिस ने इस केस को पॉक्सो समेत तमाम धाराओं में दर्ज कर लिया है। आरोपित को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

चंदन नगर थाने के निरीक्षक अभय नेमा ने भी इस संबंध में बताया कि उन्होंने मौलाना के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 और यौन अपराधों अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। मौलाना पर आरोप है कि उसने 5 अक्टूबर को छुट्टी के समय पीड़िता का हाथ पकड़ उसे गलत ढंग से छुआ और विरोध करने पर लड़की के अब्बा और चाचा को लोहे की रॉड से पिटवाया। अब पुलिस इस मामले में तीन आरोपितों को तलाश रही है।

मेक्सिको के कम-से-कम 57 बच्चों को दिया गया ‘जहर’: पिछले दो सप्ताह में इस तरह की तीसरी घटना, 3 दिन पहले बंदूकधारियों ने मेयर सहित 18 को भून दिया था

अमेरिका (America) के पड़ोसी देश मेक्सिको (Mexico) में तीन दिन पहले फायरिंग कर मेयर सहित 18 लोगों की हत्या करने के बाद अब वहाँ के एक स्कूल में बच्चों को जहर देने का मामला सामने आया है। मेक्सिको के इस स्कूल के कम-से-कम 57 बच्चों में जहर वाले लक्षण पाए गए हैं।

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, घटना दक्षिणी मैक्सिको के चियापास प्रांत के एक ग्रामीण माध्यमिक विद्यालय में की है। पिछले दो हफ्ते में चियापास के स्कूलों में सामूहिक रूप से जहर देने की यह तीसरी घटना है। इन घटनाओं से विद्यार्थी और उनके परिजनों में दहशत का माहौल है।

मैक्सिकन सोशल सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट ने शुक्रवार (7 अक्टूबर 2022) को कहा कि बोचिल के ग्रामीण समुदाय के 57 किशोर छात्र जहर के लक्षणों के साथ स्थानीय अस्पताल पहुँचे थे। इनमें एक छात्र की हालात है और उसे राज्य की राजधानी के एक अस्पताल में रेफर कर दिया गया है। वहीं, बाकी छात्रों की हालत स्थिर है।

फिलहाल इस मामले पर अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। वहीं, स्थानीय मीडिया का कहना है कि कुछ लोगों का मानना है कि दूषित खाना और पानी के कारण बच्चों के बीमार पड़े हैं। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें बच्चों को लेकर अस्पताल जाते लोग चिल्ला रहे हैं।

वीडियो में एक व्यक्ति ने कह रहा कि उसकी बेटी को जहर दिया गया है और एक निजी प्रयोगशाला द्वारा की गई जाँच में उसकी बेटी सहित अन्य बच्चों में कोकीन देने के सबूत मिले हैं। इससे पहले 23 सितंबर को तपचुला शहर में सामूहिक विषाक्तता के दो मामले सामने आए थे, जिनमें दर्जनों छात्र प्रभावित हुए थे।

मेक्सिको संगठित अपराध के लिए दुनिया भर में कुख्यात है। वहाँ ड्रग्स और हथियार माफियाओं का बोलबाला है। 6 अक्टूबर 2022 को मेक्सिको में संगठित अपराध से जुड़े बंदूकधारियों ने अंधाधुंध गोलीबारी करके शहर के मेयर सहित कुल 18 लोगों की हत्या कर दी थी।

मोहम्मद अनवर ने 8 साल की बच्ची के सिर पर पहले किया वार, फिर गला घोंट डाला: नरेला की झाड़ियों में लाश मिली, CCTV देख हुई गिरफ्तारी

देश की राजधानी दिल्ली के नरेला में एक 8 साल की बच्ची की हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि इस घटना को अंजाम बच्ची के पड़ोसी ने ही दिया है। उसका नाम मोहम्मद अनवर है। घटना की वजह मृतका के भाई से आरोपितों द्वारा बदला लेने की सोच को बताया जा रहा है।

दिल्ली महिला आयोग ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। मृतका के परिजनों ने घटना के विरोध में सड़क को जाम किया और न्याय की माँग की। पीड़िता शुक्रवार (7 अक्टूबर 2022) को घर से लापता हो गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार घटना नरेला क्षेत्र की है। मृतका 5 भाई-बहन हैं। उनके पिता की मृत्यु हो चुकी है। घटना की पुलिस में शिकायत पीड़िता की बड़ी बहन ने दर्ज करवाई है। शिकायत में बताया गया है कि आरोपित ने पीड़िता को कुछ खाने का लालच देकर अपहरण कर लिया था।

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाति मालीवाल द्वारा जारी पत्र के मुताबिक आरोपित ने गिरफ्तारी के बाद बताया कि उसने अपहरण कर के बच्ची को मार डाला है।

स्वाति मालीवाल द्वारा जारी पत्र के मुताबिक लड़की का शव एक लालबत्ती के पास झाड़ियों से बरामद हुआ था। पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 363 के तहत FIR दर्ज की थी। अब बच्ची की हत्या हो जाने के बाद केस में 302 IPC बढ़ाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपित की दुश्मनी बच्ची के भाई से थी जो हत्या की वजह बनी। आरोपित को रात 11 बजे पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर गिरफ्तार कर लिया था।

एक रिपोर्ट के मुताबिक घटना में मृतका के परिवार वालों ने बच्ची के साथ रेप होने का भी आरोप लगाया। हालाँकि मेडिकल रिपोर्ट से पीड़िता के साथ रेप की पुष्टि नहीं हुई है। मृतका के सिर पर किसी चीज से वार कर के फिर गला घोंट कर हत्या की गई है।

पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद मोहम्मद अनवर ने पुलिस को गुमराह करने के लिए राजा बाबू नाम के एक अन्य व्यक्ति को भी इस घटना में अपना साथ देने का दावा किया था जो बाद में जाँच में झूठा साबित हुआ।

इस घटना के विरोध में जमा हुए लोगों ने इलाके पर पुलिस की जानकारी में नशे का बड़ा कारोबार चलने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकरियों के मुताबिक उस क्षेत्र में छोटे-छोटे बच्चे भी नशे के आदी बनते जा रहे हैं। विरोध कर रही एक महिला ने नशे का कारोबार चलाने वालों में सोनिया, शबनम, इमरान और फारुख आदि के नाम लिए।

18 विधानसभा सीटों पर हमारा अधिकार, कम से कम 11 टिकट तो लेंगे: गुजरात में कॉन्ग्रेस के मुस्लिम विधायकों ने उठाई माँग, चुनाव से पहले 10% आबादी का वास्ता दिया

कॉन्ग्रेस के मुस्लिम विधायकों (Muslim MLAs) ने गुजरात विधानसभा चुनावों (Gujarat Assembly Election) में मुस्लिम आबादी के अनुपात में टिकट की माँग की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाले पार्टी के तीन विधायकों ने राज्य की विधानसभा चुनावों में मुस्लिमों के लिए 10 से 11 टिकटों की माँग की है।

बता दें कि पिछले विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस ने जिन 7 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, उनमें से इमरान यूसुफभाई खेड़ावाला, साबिर काबलीवाला और शेख ग्यासुद्दीन हबीबुद्दीन ने भी जीत हासिल की थी।

देश गुजरात न्यूज ने कॉन्ग्रेस विधायक शेख ग्यासुद्दीन हबीबुद्दीन के हवाले से कहा कि मुस्लिम उम्मीदवारों के लिए 18 टिकट ‘उनका अधिकार’ है, क्योंकि गुजरात में मुस्लिमों की आबादी 10 प्रतिशत है और राज्य में विधानसभा सीटों की कुल संख्या 182 है।

उन्होंने दरियापुर, जमालपुर खड़िया, वाकानेर, सूरत पूर्व, अबदासा, जामनगर पूर्व, ढोलका, मांडवी, वेजलपुर सहित 18 विधानसभा सीटों के लिए टिकटों की माँग की है। हबीबुद्दीन का कहना है कि चुनावों में हर समुदाय को उनका प्रतिनिधित्व मिलता है। इसलिए मुस्लिमों को भी मिलना चाहिए।

शेख हबीबुद्दीन ने कहा, “पूरे गुजरात का मुस्लिम समुदाय जानता है कि यहाँ 182 सीटें हैं और मुस्लिम समुदाय की आबादी 10 फीसदी है। इसे देखते हुए 18 सीटों पर हमारा अधिकार है, लेकिन मुस्लिम समुदाय ने 18 सीटों पर दावा नहीं किया है। हम दरियापुर, जमालपुर खड़िया, वाकानेर, सूरत पूर्व, गोधरा, अहमदाबाद में वेजलपुर, कच्छ, जामनगर पूर्व में ढोलका, अबदासा और मांडवी सहित 10 से 11 सीटों की माँग करते हैं।”

शेख ग्यासुद्दीन हबीबुद्दीन ने आगे कहा, “हम तीन मौजूदा विधायक- इमरान खेड़ावाला, जावेद पीरजादा और मेरे अलावा कॉन्ग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं को लगता है कि टिकट वहीं का दिया जाना चाहिए, जहाँ सक्षम उम्मीदवार हों।”

उन्होंने कहा कि पिछले चुनाव के दौरान 7 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए गए थे, लेकिन उन्हें कम-से-कम 10 सीटें दी जानी चाहिए थीं। शेख ने राज्य में मुस्लिम उम्मीदवारों को एक भी टिकट नहीं देने के लिए भाजपा (BJP) और आम आदमी पार्टी (AAP) पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा, “हालत माकूल हैं और मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है। बीजेपी हमें एक भी टिकट नहीं देती है। आप पार्टी ने इतने उम्मीदवारों की घोषणा की, लेकिन अभी तक किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है।”

उन्होंने आगे कहा, “कॉन्ग्रेस हमेशा सभी धर्मों और जातियों को लेकर चलती है, चाहे वह पाटीदार, ब्राह्मण, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी या मुस्लिम हों। हमें विश्वास है कि पार्टी (कॉन्ग्रेस) हमारी माँग पर गंभीरता से विचार करेगी और टिकट देगी। हमें आलाकमान पर भरोसा है।”