एक शादीशुदा मुस्लिम महिला ने खुद को अविवाहित बता सुकान्त से दोस्ती की। धर्म परिवर्तन कर हिंदू बनी। सुकान्त से शादी भी की। बाद में पता चला कि उसने ऐसा सुकान्त की प्रॉपर्टी हड़पने की नीयत से किया है। मामला उत्तराखंड की राजधानी देहरादून का है। कोर्ट के आदेश के बाद केस दर्ज कर पुलिस मामले की जाँच कर रही है।
बताया जा रहा है कि महिला हिंदू युवक को झूठे केस में फँसाने की धमकी भी दे रही थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना राजपुर थानाक्षेत्र की है। 2018 में सुकान्त की मुलाकत शोरेन नाम की मुस्लिम महिला से हुई। उसने खुद को अविवाहित बताया। साथ ही सुकान्त को बताया कि वह होटल मैनेजमेंट का कोर्स भी कर चुकी है।
इस बीच सुकान्त को पता चला कि शोरेन व्हाट्सएप पर किसी लड़के से लगातार बात करती हैं। शोरेन ने उसे अपना पुराना दोस्त बताते हुए भरोसा दिलाया कि अब ऐसा नहीं करेगी। 29 सितम्बर 2019 को उसने सुकान्त के साथ शादी भी कर ली।
शादी के लिए शोरेन ने हिन्दू धर्म अपनाया। मंदिर में विवाह किया। सुकान्त के अनुसार शादी के बाद शोरेन अपनी मर्जी से अपने मायके और कभी-कभार दिल्ली भी आती-जाती थी। उसका आरोप है कि शादी के बाद भी शोरेन का किसी और लड़के से मिलना-जुलना जारी रहा। कुछ समय बाद सुकान्त को पुणे के एक होटल में नौकरी मिल गई। शोरेन को भी वह अपने साथ ले गया।
रिपोर्ट के मुताबिक पुणे में सुकान्त ने एक अन्य होटल में शोरेन की नौकरी की बात की। तब पता चला कि उसने कोई होटल मैनेजमेंट का कोर्स नहीं किया है। सुकान्त ने और पड़ताल की तो यह बात सामने आई कि शोरेन 10वीं पास भी नहीं है। अपना भेद खुलने के बाद शोरेन ने सुकान्त से कहा कि वह देहरादून की सम्पत्ति बेचकर उसे 3-4 करोड़ रुपए दे। ऐसा नहीं करने पर झूठे केस में फँसाने की धमकी दी।
सुकान्त का आरोप है कि शोरेन ने उसकी सम्पत्ति हड़पने के लिए झूठ बोलकर शादी की। इस साजिश में शोरेन के अम्मी-अब्बू को भी शामिल बताया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।
गुजरात (Gujarat) में तापी जिले के सोनगढ़ तालुका के एक गाँव में प्राचीन हिंदू मंदिर को ध्वस्त कर उस स्थान पर स्थानीय ईसाइयों ने चर्च (Church) बना दिया है। उस चर्च का नाम उन्होंने मरियम माता का मंदिर (Mariam Mata’s Temple) रखा है। रविवार (2 अक्टूबर, 2022) को कुछ हिंदुओं ने उस स्थान पर पहुँचकर पूजा-अर्चना करने की कोशिश की, तो ईसाइयों ने हंगामा कर उन्हें वहाँ से जाने को कहा।
यह मामला सोनगढ़ तालुका के नाना बंदरपाड़ा गाँव का है। यहाँ गिधमाड़ी आया डूंगर माता (Gidhmadi Aya Dungar Mata ) का एक मंदिर था, जहाँ स्थानीय हिंदू प्रतिदिन पूजा करने के लिए जाया करते थे। मंदिर पहाड़ी की चोटी पर स्थित था। लेकिन, समय के साथ इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ती ईसाई आबादी के कारण इस पहाड़ी पर लोगों की आवाजाही धीरे-धीरे कम होती गई, जिसके बाद ईसाई मिशनरियों ने इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया और इस स्थान पर एक चर्च बना दिया, जिसे मरियम माता का मंदिर कहा जाता है।
तापी में मंदिर तोड़कर बनाया चर्च। (फोटो साभार:ऑपइंडिया)
नवरात्रि पर्व में जब हिंदू पूजा करने के लिए अपने प्राचीन मंदिर पहुँचे, तो उस समय ईसाइयों की भीड़ भी वहाँ पहुँच गई और हंगामा कर दिया। यही नहीं, उन्होंने हिंदुओं को पहाड़ी पर भी जाने से रोका। इस हंगामे के बाद बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुँचा।
ईसाई समुदाय के लोग लाठी और पत्थर लेकर गए
ऑपइंडिया से बात करते हुए स्थानीय हिंदू नेता दिनेशभाई गामित ने कहा, “हम पूजा करने आए थे, क्योंकि माँ का त्योहार चल रहा है। लेकिन, यहाँ रहने वाले ईसाइयों ने हमें ऊपर जाने की अनुमति नहीं दी और यह कहकर हंगामा करने लगे कि आपके लिए ऊपर कोई जगह नहीं है।” उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में आए ईसाई अपने साथ लाठियाँ और पत्थर भी लेकर आए थे। दिनेशभाई ने आगे कहा कि झड़प के दौरान पूजा के लिए आए हिंदू पुजारी को थप्पड़ मारा गया। इस बीच माँ के भोग के लिए तैयार की गई थाली को भी नुकसान पहुँचाने का भी प्रयास किया गया। हालाँकि, पुलिस ने मौके पर पहुँचकर स्थिति को नियंत्रित कर लिया।
गाँव में 98 फीसदी ईसाई
स्थानीय हिंदुओं के अनुसार, वे सैकड़ों वर्षों से इस स्थान पर पूजा कर रहे थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बढ़ते धर्मांतरण के कारण इस जगह के आसपास के अधिकांश क्षेत्र में हिंदू ईसाई हो गए हैं, जिसके कारण इस पहाड़ी पर आवाजाही कम हो गई है। ऑपइंडिया से बात करते हुए एक स्थानीय ने कहा कि गाँव में लगभग 98 प्रतिशत लोग ईसाई बन गए हैं और हिंदू अल्पसंख्यक हो गए हैं। इस वजह से वे आवाज नहीं उठा सके। उन्होंने यह भी कहा कि सालों से गाँव में सरपंच आदि पदों पर भी ईसाई समुदाय का ही दबदबा रहा है
हिंदू मंदिर के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव हुआ था पारित
तापी जिले के सोनगढ़ तालुका की बंदरपाड़ा ग्राम पंचायत ने साल 2019 में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था। इसमें कहा गया था कि गिधमाड़ी आया डूंगर माता के मंदिर की कई वर्षों से पूजा की जाती रही है। लंबे समय से श्रद्धालुओं द्वारा किए जा रहे आंदोलन को देखते हुए इसके जीर्णोद्धार की आवश्यकता है। इसमें चर्च या किसी अन्य पूजा स्थल का कोई उल्लेख नहीं था।
स्थानीय ग्राम पंचायत द्वारा पारित किया गया प्रस्ताव। फोटो साभार: ऑपइंडिया
स्थानीय हिंदुओं ने आरोप लगाया है कि पंचायत ने ‘गिधमाड़ी आया डूंगर माता’ के मंदिर के नाम पर एक प्रस्ताव पारित किया, अनुदान प्राप्त किया और एक ईसाई जगह बनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया। देवी के मंदिर को तोड़ा गया। इसके कई अवशेष भी मिले हैं।
फोटो साभार: ऑपइंडिया
आक्रोशित हिंदुओं ने की मंदिर के जीर्णोद्धार की माँग
हिंदू संगठनों ने उस स्थान पर फिर से माता का मंदिर बनाने की माँग की है। हिंदू नेताओं ने कहा कि वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और आने वाले दिनों में कलेक्टर को आवेदन देंगे।
ईरान से यात्रियों को लेकर चीन के लिए उड़ाने भरने वाले हवाई जहाज को भारतीय एयरस्पेस से गुजरते वक्त बम धमाके की धमकी मिलने की खबर सामने आई है।
समाचारा एजेंसी एएऩआई ने बताया कि चीन जा रहे ईरानी पैसेंजर जेट को भारतीय हवाई स्पेस में बम धमकी मिली है। सूचना पाते ही IAF फौरन मदद के लिए पहुँच चुका है। विमान को चीन की ओर ले जाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार विमान की मूवमेंट पर पर नजर बनाए हुए हैं।
‘Bomb threat’ onboard Iranian passenger jet over Indian airspace, with final destination in China, triggers alert, IAF jets scrambled. The passenger jet is now moving towards China. Security agencies monitoring the plane: Sources pic.twitter.com/5Up2fHURxW
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के तेहरान से प्लेन चीन में ग्वांगझू जा रहा था कि तभी महान एयरलाइन्स के विमान पायलट ने दिल्ली एयरपोर्ट एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि उनके प्लेन को बम धमकी मिली है और वह तत्काल लैंडिंग चाहते हैं। इसके बाद दिल्ली एटीसी ने प्लेन को फौरन जयपुर उतारने का सुझाव दिया लेकिन प्लेन पायलट ने उनकी नहीं सुनी और जहाज भारतीय हवाई स्पेस से निकल ले गया।
On way from Tehran, Iran to Guangzhou in China, Mahan Air contacted Delhi airport ATC after the airline received a bomb threat for an immediate landing at Delhi. Delhi ATC suggested the aircraft to go to Jaipur but the aircraft pilot refused & left Indian airspace: ATC sources
इस बीच भारतीय हवाई सेना के फाइटर जेट पंजाब और जोधपुर एयरबेस से प्लेन की मदद के लिए पहुँचे। आगे इस मामले में यही जानकारी है कि प्लेन चीन के लिए आगे बढ़ रहा है। सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी बनाई हुई है। फिलहाल बम धमकी कैसी थी इसका पता नहीं चल सका है। कुछ रिपोर्ट्स कह रही हैं कि ये लाहौर से आई थी।
उत्तर प्रदेश के भदोही में एक दुर्गा पूजा पंडाल में आग लगने से 5 लोगों की मौत हो गई। रिपोर्टों में बताया गया है कि जेनरेटर की स्पार्किंग से निकली चिंगारी से आग ली। यह पंडाल माता जी की गुफा जैसा था। मामले की जाँच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।
मृतकों में 3 बच्चे और 2 महिलाएँ हैं। 62 लोग झुलस गए हैं। उनका इलाज चल रहा है। आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए जिला प्रशासन ने SIT का गठन किया है। घटना रविवार (2 अक्टूबर 2022) की है।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में पहले पंडाल के एक कोने में आग पकड़ती दिखाई दे रही है। कुछ ही देर में आग पूरे पंडाल में फ़ैल जाती है। वीडियो में कुछ महिलाओं को चीखते सुना जा सकता है। वीडियो के एक हिस्से में घायलों को ले जाती एम्बुलेंस दिखाई दे रही है।
भदोही में हुआ दर्दनाक हादसा।दुर्गा पूजा पंडाल में आग लगने से 64 लोग झुलसे, पांच की मौत, 33 घायलों को वाराणसी किया गया रेफर।भदोही में पूजा पंडाल में आग की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। जिस वक्त पंडाल में आग लगी वहां करीब 150 मौजूद थे। pic.twitter.com/tUcW3oZLph
भदोही के DM गौरांग राठी ने बताया है कि घटना औराई थानाक्षेत्र के गाँव नरथुआ की है। यहाँ बाल एकता क्लब में दुर्गा पूजा का आयोजन किया गया था। रात लगभग 8:55 पर श्रद्धालुओं से भरे पंडाल में आग लग गई। घटना की सूचना पर पुलिस, फायर ब्रिगेड और जिला प्रशासन की टीमें तत्काल मौके पर पहुँची।
DM ने बताया है कि कुल 67 झुलसे लोगों में से इलाज के दौरान 5 की मौत हो गई है। इनके नाम 8 वर्षीय हर्षवर्धन, 10 वर्षीय नवीन, 12 वर्षीय अंकुश, 45 वर्षीया जया देवी और 48 वर्षीय आरती हैं। घायलों का इलाज सीनियर अधिकारियों की देखरेख में विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।
अपडेट-सुबह8:30बजे तक
भदोही:औराई में दुर्गापूजा पंडाल आगजनी घटना कुल भर्ती मरीज-64 औराई-18 वाराणसी-42 प्रयागराज-04
जिलाधिकारी भदोही के मुताबिक आग लगने के कारणों की जाँच के लिए विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि 4 सदस्यों के इस जाँच दल में ADM, एडिशनल SP, जिला फायर ब्रिगेड अधिकारी और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को शामिल किया गया है। DM के अनुसार मृतकों और घायलों को मुआवजा दिलाने की भी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
स्थानीय अख़बारों और कुछ मीडिया संस्थानों ने घटना की वजह जेनरेटर से निकली चिंगारी को बताया है। कमिश्नर योगेश्वर राम मिश्र ने कहा है कि घटना में जो भी दोषी होगा जाँच के बाद उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
अपडेट: PIB ने स्पष्ट किया है कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को ख़त्म करने का केंद्र सरकार का कोई इरादा नहीं है। सरकारी मीडिया एजेंसी ने अपने फैक्ट-चेक में कहा कि इस मंत्रालय को ख़त्म करने या इसे किसी और मंत्रालय के साथ मिलाने की कोई योजना नहीं है।
केंद्र की मोदी सरकार यूपीए सरकार द्वारा बनाए गए अल्पसंख्यक मंत्रालय (Ministry of Minority Affairs) को समाप्त करने का विचार कर रही है। ऐसा दावा डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से किया गया। इसके मुताबिक अगर ऐसा हुआ तो सरकार इस मंत्रालय का विलय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) के साथ करेगी। वहीं मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही स्कीम वैसी की वैसी ही चलती रहेंगी।
The Govt is likely to scrap the ‘Ministry of Minority Affairs’ established by the UPA government in 2006 and merge it with the ‘Ministry of Social Justice and Empowerment’..! pic.twitter.com/H8AkuaM2mK
— Satya Swara ( Voice of Truth ) (@Satya_Swara) October 3, 2022
खबर में कहा गया है कि मंत्रालय के अधिकारियों ने अभी इस मामले पर कुछ भी बताने से मना कर दिया है। लेकिन सूत्र ने कहा है, “भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का मानना है कि अल्पसंख्यक मामलों के लिए अलग से मंत्रालय की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक ये मंत्रालय सिर्फ यूपीए (मनमोहन सरकार) की तुष्टिकरण की राजनीति के चलते (साल 2006 में) बना। अब मोदी सरकार इसे दोबारा से सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय के अंतर्गत लाना चाहती है।”
The Centre will likely scrap the Ministry of Minority Affairs established by the UPA government in 2006 and merge it with the Ministry of Social Justice and Empowerment.
बता दें कि मंत्रालय समाप्त किए जाने को लेकर अभी कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है। मगर कॉन्ग्रेस ने और मुस्लिम संगठनों ने अभी से अपनी नाराजगी को व्यक्त करना शुरू कर दिया।
कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सदस्य सैयद नसीर हुसैन ने कहा है कि भाजपा ऐसा करके समजा को बाँटना चाहती है। ऐसा मंत्रालय कॉन्ग्रेस वाली यूपीए सरकार इसलिए लाई ताकि अल्पसंख्यक मुख्यधारा में आएँ और उनका विकास हो। मगर भाजपा सरकार तो हर अवसर को अल्पसंख्यकों के खिलाफ ही प्रयोग करती है।
वहीं जमात-ए-इस्लामी के सचिव सैयद तनवीर अहमद ने कहा कि ये सब संविधान की आत्मा के खिलाफ है इसके मानव विकास रुकेगा। सरकार को तो ज्यादा से ज्यादा पैसा देकर मंत्रालय को मजबूत करना चाहिए ताकि अल्पसंख्यकों का कल्याण हो।
उल्लेखनीय है कि अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम की धारा 2 (ग) के तहत छह समुदाय को केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यक के तहत अधिसूचित कर रखा है। ये हैं- मुस्लिम, ईसाई, जैन, बौद्ध, पारसी और सिख। लेकिन इस मंत्रालय के गठन के समय से ही ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ की सोच झलकती रही है, चाहे वह योजनाओं का क्रियान्वयन हो या फंडिंग या फिर उनका नामकरण।
हैदराबाद पुलिस ने तीन आतंकियों को गिरफ्तार किया है। तीन आतंकी फरार हैं। ये आतंकी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर काम कर रहे थे। भीड़-भाड़ वाले इलाके में ग्रेनेड फेंक कर सांप्रदायिक तनाव भड़काने की जिम्मेदारी इन्हें दी गई थी।
गिरफ्तार आतंकियों की पहचान अब्दुल जाहिद, माज हसन फारुख और मोहम्मद समीउद्दीन के तौर पर हुई है। इनकी गिरफ्तारी रविवार (2 अक्टूबर 2022) को हुई। अब्दुल जाहिद पहले भी आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा है। उसका संबंध लश्कर-ए-तैय्यबा से बताया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस को खुफिया सूत्रों से जानकारी मिली थी कि ज़ाहिद को 4 ग्रेनेड दिए गए हैं। वह हैदराबाद में आतंकी हमले की तैयारी कर रहा है। पुलिस को जाहिद के साथियों के बारे में भी इनपुट मिले थे। जाहिद पर पूर्व में भी एक सार्वजनिक समारोह में ग्रेनेड फेंकने का आरोप है। लिहाजा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मलकपेट इलाके की घेराबंदी की और तीन आतंकियों को धर दबोचा।
Police arrested 3 people identified as Abdul Zahed, Mohd Sameeuddin & Maaz Hasan Farooq for conspiring to hurl grenades at public gatherings.Abdul Zahed was previously involved in several terror-related cases &was in regular touch with Pakistani ISI-LeT handlers: Hyderabad Police pic.twitter.com/CW5GkIbbod
हैदराबाद पुलिस के मुताबिक जाहिद पाकिस्तानी आकाओं से निर्देश ले रहा था। वह हैदराबाद में कट्टरपंथ का प्रसार कर स्थानीय युवाओं की भर्ती में भी लगा था। जाहिद साल 2002 में हैदराबाद के दिलसुख नगर स्थित साईबाबा मंदिर, मुंबई के घाटकोपर बम विस्फोट, 2005 में मुंबई टास्क फोर्स ऑफिस और हैदराबाद के बेगमपेट में हमले में भी शामिल रहा है। उसने साल 2004 में सिकंदराबाद के गणेश मंदिर के पास भी विस्फोट करने की कोशिश की थी।
जाहिद के साथ गिरफ्तार हुए आतंकी माज हसन और समीउद्दीन भी हैदराबाद के ही निवासी हैं। मोहम्मद समीउद्दीन व्यापारी है। जाहिद ने बताया कि उसने ही इन दोनों की भर्ती की थी। पुलिस को अब इस आतंकी नेटवर्क से जुड़े सिद्दीकी बिन उस्मान उर्फ रफीक उर्फ अबू हमजाला, अब्दुल मजीद उर्फ छोटू, फरहतुल्ला गोरी उर्फ एफजी की तलाश है।
पुलिस ने गिरफ्तार आतंकियों के पास से 4 हैंड ग्रेनेड बरामद किए हैं। इनके पास से करीब 5.40 लाख रुपए कैश भी मिले हैं। साथ ही 5 मोबाइल फोन और एक बाइक भी बरामद की गई है।
कनाडा के ब्रैम्पटन में श्री भगवद गीता पार्क के साइन बोर्ड को नुकसान पहुँचाने का मामला सोशल मीडिया से प्रकाश में आया है। कुछ तस्वीरें शेयर हो रही हैं जिसमें एक तरफ पार्क का पूरा साइन बोर्ड दिख रहा है और दूसरी जगह खाली बोर्ड है जिस पर से पार्क का नाम उजाड़ दिया गया है।
ट्विटर पर इस घटना का जिक्र कनाडा स्थित भारतीय उच्चायोग @HCI_Ottawa) द्वारा किया गया है। उन्होंने ये दोनों तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा,
“हम ब्रैम्पटन में श्री भगवद गीता पार्क में घृणा अपराध (हेट क्राइम) की निंदा करते हैं। साथ ही कनाडाई अधिकारियों से और पील पुलिस से आग्रह करते हैं कि वो इस मामले की जाँच करें और आरोपितों के विरुद्ध पर्याप्त कार्रवाई की जाए।”
बता दें कि भारतीय उच्चायोग ने अकेले पार्क के साइन बोर्ड क्षतिग्रस्त होने की जानकारी नहीं दी। उनके अलावा मेयर पैट्रिक ब्राउन ने भी इसका जिक्र किया था। साथ ही आश्वासन दिया था कि पुलिस इस पूरे मामले को सुलझाने में प्रयासरत है। हालाँकि जब जाँच पूरी हुई तो पील पुलिस ने बोर्ड क्षतिग्रस्त किए जाने की बात को पूरी तरह नकार दिया।
पुलिस ने नकारा दावा
पील पुलिस के ट्विटर से ट्वीट किया गया कि ब्रैम्पटन के श्री भगवद गीता पार्क के पर्मानेंट साइन पर शब्द लिखे जाने अभी बाकी हैं। ऐसे कोई प्रमाण नहीं मिले हैं कि वहाँ पर पर्मानेंट साइन को या पार्क के स्ट्रक्चर को क्षतिग्रस्त किया गया है। वो अस्थायी पार्क साइन बोर्ड था जिसे नामकरण दिन पर इस्तेमाल किया गया था।
– Shri Bhagavad Gita Park, #Brampton – Permanent sign is still waiting for the lettering to be applied – There was no evidence of vandalism to the permanent sign or any park structure – It was a temporary park sign used in the park naming ceremony – PR22035311
उल्लेखनीय है कि कनाडा के श्री भगवद गीता पार्क का नाम पिछले ही हफ्ते बदला गया था। पहले इसे ट्रॉयर्स पार्क (Brampton’s Troyers Park) के नाम से जाना जाता था। पार्क 3.75 एकड़ में फैला है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन की रथ के साथ मूर्ति है। इसके अलावा अन्य देवी-देवताओं की भी मूर्ति लगी हुई है। इस पार्क का नाम श्री भगवद गीता पार्क होने से हिंदू समुदाय में खुशी थी। मगर कुछ ही दिन में ऐसी खबर आ गई जिसने हिंदुओं को आहत किया।
स्वामीनारायण मंदिर को खालिस्तानियों ने निशाना बनाया
इससे पूर्व कनाडा स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर को टोरंटो में निशाना बनाया गया था। वहाँ खालिस्तानी तत्वों ने मंदिर के दरवाजों पर हिंदुस्तान मुर्दाबाद और खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लिखे थे।
Unprovoked defacement of #HinduTemple in Canada. Can @PierrePoilievre assure his Conservatives wouldn’t indulge in identity-politics? Can his deputy @TimUppal condemn this act unequivocally & assure that he’d not overlook Khalistan extremism when in power?pic.twitter.com/g5lyOILl4Y
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले का कवर्धा (Kawardha) पहली नजर में भारत के अन्य छोटे शहरों जैसा ही दिखता है। ऐसे शहरों की अपनी एक विशिष्ट गति होती है। महानगरों सी आपधापी नजर नहीं आती। इसी शहर में है, धर्म ध्वजा चौक जहाँ 108 फीट ऊँचा भगवा ध्वज लहरा रहा है। इस जगह से उन डॉ. रमन सिंह का भी संबंध है जो 22 साल पुराने राज्य में लगातार 15 साल मुख्यमंत्री रहे हैं।
यह शहर 2021 के अक्टूबर में राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था। कारण था करमा माता मंदिर पर लगे भगवा ध्वज को कुछ मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा फाड़कर फेंक देना। इसका विरोध करने वाले हिंदू युवक दुर्गेश देवांगन की बेरहमी से पिटाई करना। यह घटना 3 अक्टूबर 2021 को हुई थी। इसके बाद करीब 15 दिन तक कवर्धा में कर्फ्यू रहा। इंटरनेट बंद था। एक तरह से प्रशासन ने सेंसर लगा रखा था कि कवर्धा की स्थिति के बारे में रिपोर्ट बाहर न जाए। प्रशासन पर हिंदुओं पर एकतरफा कार्रवाई के भी आरोप हैं। इसी घटना के बाद 10 दिसंबर 2021 को कवर्धा में 108 फीट ऊँचा भगवा ध्वज लगाया गया था। इस जगह को धर्म ध्वजा चौक का नाम दिया गया है। करमा माता मंदिर भी इससे सटा ही हुआ है।
सालभर बाद भी कवर्धा में हिंदू डरे हुए
3 अक्टूबर की घटना के सालभर बाद भी कवर्धा का प्रशासन सवालों के घेरे में हैं। विश्व हिंदू परिषद के कबीरधाम जिले के कार्यकारी अध्यक्ष कैलाश शर्मा ने ऑपइंडिया को बताया, “उस घटना के बाद से आज भी हिंदू डरे हुए हैं। शहर के अंदर दहशत का माहौल है। पुलिस सहयोग नहीं कर रही। हम इस मामले में कार्रवाई से असंतुष्ट हैं। साल भर में पुलिस ने ऐसा कुछ नहीं किया है जिससे हिंदुओं को संतुष्टि मिले। उनके भीतर का डर खत्म हो।” इस स्थिति के लिए वे प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार और कवर्धा के विधायक मोहम्मद अकबर (Mohammad Akbar) को दोषी बताते हैं। मोहम्मद अकबर बघेल सरकार में मंत्री भी हैं।
कवर्धा बवाल में मंत्री मोहम्मद अकबर की भूमिका पर सवाल
दुर्गेश के पिता संतोष देवांगन ने भी ऑपइंडिया से बातचीत में इस घटना के लिए मोहम्मद अकबर को ही जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा, “विधायक का करनी है पूरा। जब मेरा लड़का मार खाया तो पीटने वालों के साथ अकबर (विधायक मोहम्मद अकबर) का लड़का भी था।” संतोष देवांगन भी इस मामले में अब तक हुई पुलिसिया कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उनका यह भी दावा है कि आरोपित उन पर राजीनामे का दबाव बना रहे हैं।
इस मामले में मोहम्मद अकबर की भूमिका को लेकर बीजेपी के प्रदेश महामंत्री और स्थानीय जिला पंचायत के सभापति विजय शर्मा भी सवाल उठाते हैं। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “दुर्गेश को 3 अक्टूबर को दोपहर के करीब 2 बजे सरेआम चौक पर पीटा गया। लेकिन उसकी एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही थी। रात के 11 बजे हमलोग एफआईआर दर्ज करने की माँग को लेकर थाने गए। थाने में पुलिस और प्रशासन के वरीय अधिकारी भी मौजूद थे। बावजूद एफआईआर दर्ज करने में टालमटोल हो रहा था। इस बीच हिंदुओं पर दो बार लाठीचार्ज किया जा चुका था। यह सब मोहम्मद अकबर के इशारे पर हो रहा था।”
बीजेपी के प्रदेश महामंत्री विजय शर्मा, विहिप के जिला कार्यकारी अध्यक्ष कैलाश शर्मा और बघेल सरकार के मंत्री मोहम्मद अकबर
कवर्धा में सुनियोजित था हिंदुओं पर हमला?
कैलाश शर्मा की माने तो 3 अक्टूबर को जो कुछ हुआ वह सुनियोजित था। उन्होंने ऑपइंडिया से कहा, “भगवा ध्वज का अपमान पूर्व नियोजित था। उसके पहले से कवर्धा में ऐसी घटनाएँ घट रहीं थी, जिससे बहुसंख्यक समुदाय अपने आप को प्रताड़ित महसूस कर रहा था। उस दिन सुनियोजित तरीके से पुलिस-प्रशासन के सहयोग से करमा माता मंदिर के ऊपर लगे भगवा ध्वज को फाड़ा गया। भगवा ध्वज को जमीन पर फेंक पैरों से कुचला गया। इसका विरोध करने पर दुर्गेश देवांगन को जान से मारने की कोशिश पुलिस की मौजूदगी में हुई। उसके बाद शक्ति प्रदर्शन करते हुए 300-350 विधर्मी तलवार लेकर सड़कों पर निकल गए। थाने के सामने भी उन्होंने पथराव किया। पत्थरबाजी के बाद हिंदुओं को जान बचाकर भागना पड़ा।”
पुलिस के सामने दुर्गेश की पिटाई होने का दावा विजय शर्मा भी करते हैं। उन्होंने बताया कि कवर्धा के तत्कालीन थानेदार और उनके मातहतों की मौजूदगी में चौक पर पिटाई की गई थी। साथ ही वे यह भी बताते हैं एक दुकान का शटर गिराकर दुर्गेश की जान भी पुलिसवालों ने ही बचाई थी। दुर्गेश के पिता संतोष देवांगन का कहना है कि जब यह घटना हुई थी वे घर में नहीं थे। लेकिन उनका यह भी कहना है कि हिंदुवादी संगठनों के साथ जुड़ाव के कारण आरोपित पहले भी उनके बेटे के साथ विवाद कर चुके थे।
हिंदुत्व के प्रति समर्पित है दुर्गेश देवांगन का परिवार
हिंदुत्व को लेकर देवांगन परिवार का समर्पण उनकी दुकान को देखकर भी साफ झलकता है। इस परिवार की आलू, प्याज और मसालों की दुकान है। दुकान के साइनबोर्ड पर राम का नाम अंकित है तो शटर पर हनुमान विराजमान हैं। हम भी जब इस दुकान पर पहुँचे तो दुर्गेश की माँ ने ‘जय श्रीराम’ के साथ हमारा अभिवादन किया। उस दिन दुर्गेश शहर में मौजूद नहीं था।
दुर्गेश देवांगन की दुकान पर उनके माता-पिता
दुर्गेश के पिता ने ऑपइंडिया से बातचीत करते हुए कहा, “3 अक्टूबर को पिटाई होने के बाद हमारा बेटा कहाँ और किस हाल में था, इसकी हमको खबर नहीं थी। यहाँ कर्फ्यू लगा दिया गया। मेरे घर के बाहर भी फोर्स थी। पुलिस से बेटे के बारे में पूछता तो वे कहते कि मिल जाएगा। बाद में रायपुर से उसे गिरफ्तार किए जाने की खबर आई।” उनका दावा है कि पुलिस ने दुर्गेश को बुरी तरह पीटा था। गौरतलब है कि दुर्गेश की गिरफ्तारी के समय भी इस तरह की खबर आई थी। उस समय राजनांदगांव से भाजपा सांसद संतोष पांडेय ने ऑपइंडिया को बताया था, “मुझे थाने में दुर्गेश देवांगन के साथ पुलिस द्वारा मारपीट करने की जानकारी मिली थी। इसके बाद मैं 19 तारीख (19 अक्टूबर 2021) की रात में ही थाने पहुँच गया। लेकिन मुझे दुर्गेश से मिलने नहीं दिया गया।”
सालभर बाद भी कवर्धा में पुलिसिया कार्रवाई पर असंतोष
इस घटना के सालभर बाद भी पुलिसिया कार्रवाई को लेकर असंतोष साफ है। विजय शर्मा भी उन हिंदुओं में थे, जिनकी उस समय गिरफ्तारी हुई थी। वे कहते हैं, “प्रशासनिक जाँच पर हमें भरोसा नहीं है। जब एसपी हाथ में डंडा लेकर लोगों को मार रहा हो तो उनका अधीनस्थ इसकी जाँच कैसे करेगा। हम उस समय भी न्यायिक जाँच की माँग कर रहे थे। आज भी यही कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि इस बात की जाँच हो कि एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की जा रही थी? लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया? हिंदुओं की गिरफ्तारी किसके कहने पर हुई? ऐसे हिंदुओं को कैसे आरोपित बनाया गया जो घटना के दिन कवर्धा में मौजूद ही नहीं थे? हिंदुओं पर फर्जी धाराएँ किसके कहने पर लगाई गई?” उनका यह भी दावा है कि प्रशासन ने कर्फ्यू यह संदेश देने के लिए लगाया था कि लोगों को लगे कि बीजेपी और विहिप जैसे हिंदूवादी संगठन माहौल बिगाड़ रहे हैं।
कवर्धा में विहिप का अभियान
कैलाश शर्मा ने बताया, “प्रशासनिक उदासीनता से पूरे कबीरधाम जिले की स्थिति विस्फोटक होती जा रही है। इसे देखते हुए विहिप ने निर्णय लिया है कि कबीरधाम में जितने भी मंदिर हैं उनमें विधर्मी और गौ मांस खाने वालों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसके लिए हम मंदिरों में जाकर बैनर लगा रहे हैं। हम चाहते हैं कि हिंदू समाज के बीच जागृति आए और वे विधर्मियों से लड़ने के लिए तैयार रहें।” मंदिर में बैनर लगाने के विहिप के इस अभियान से दुर्गेश देवांगन भी जुड़े हुए हैं। उनके नेतृत्व में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने 25 सितंबर 2022 को स्थानीय माँ दंतेश्वरी मंदिर, माँ चंडी मंदिर, माँ परमेश्वरी मंदिर, माँ सिंह वाहिनी मंदिर, खेड़ापति दादा हनुमान मंदिर, माँ काली मंदिर में ये बैनर लगाए।
माँ सिंह वाहिनी मंदिर में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ बैनर लगाने पहुँचे दुर्गेश देवांगन
तलवार लेकर कवर्धा में कौन घूम रहे थे?
ऐसा लगता है कि 3 अक्टूबर 2021 को कवर्धा में हिंदुओं का जो सरकारी दमन शुरू हुआ था, वह सिलसिला सालभर बाद भी थमा नहीं है। विजय शर्मा इसके लिए कॉन्ग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति को जिम्मेदार बताते हैं। वे कहते हैं, “पूरे प्रदेश में जब से कॉन्ग्रेस आई है इस्लामी कट्टरपंथ का उभार हो रहा है। कवर्धा में यह हालात मोहम्मद अकबर के चुने जाने के बाद ही बने हैं। यदि ऐसा नहीं है तो वीडियो होने के बाद भी आज तक उनलोगों की पहचान क्यों नहीं हुई, उन लोगों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई जो 3 अक्टूबर 2021 को पुलिस के साथ तलवार लेकर सड़कों पर घूम रहे थे? आखिर कौन थे वे लोग?” यह वह सवाल है, जिसका जवाब केवल कवर्धा ही नहीं हर हिंदू जानना चाहता है।
इस साल के अंत में देश के दो राज्यों गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों की तारीखों का ऐलान किसी भी दिन हो सकता है। 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों की दृष्टि से देखें तो दोनों ही राज्यों के चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं। खासतौर से भाजपा के लिए ये चुनाव इसलिए भी बेहद खास हैं क्योंकि दोनों ही जगह भाजपा की सरकार है। ऐसे में भाजपा सरकार में वापसी की कोशिश करेगी। इन चुनावों से पहले एबीपी सी-वोटर (ABP C-VOTER) ने दोनों राज्यों में ओपिनियन पोल किया है। इसके आँकड़े सामने आ गए हैं।
इस सर्वे के लिए एबीपी सी-वोटर ने दोनों राज्यों गुजरात और हिमाचल प्रदेश में कुल 65,621 लोगों से बात की है। सर्वे में मार्जिन और एरर प्लस माइनस 3 से प्लस माइनस 5 प्रतिशत का रखा गया है।
ABP और C-VOTER के ओपिनियन पोल के अनुसार, गुजरात में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की सीटों में बड़ी बढ़त देखने को मिल रही है। फिलहाल, गुजरात की कुल 188 सीटों में से भाजपा के पास 99 हैं। वहीं, इस ओपिनियन पोल के हिसाब से भाजपा 135 से 143 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूम में सामने आएगी। यानी गुजरात मे भाजपा को 40 सीटों का लाभ होता दिख रहा है। जबकि कॉन्ग्रेस 36-44 सीट और आम आदमी पार्टी 0-3 सीट मिलने का अनुमान है।
गुजरात में प्रत्येक पार्टी के वोट शेयर की बात करें तो भाजपा को 63%, कॉन्ग्रेस को 9%, आप को 19% और अन्य को 2% वोट मिलने का अनुमान है। वहीं, हिमाचल प्रदेश की बात करें तो एबीपी सी-वोटर के ओपिनियन पोल के अनुसार, यहाँ की कुल 68 सीटों में से सत्तारूढ़ भाजपा 37 से 45 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आ सकती है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 44 सीटें मिलीं थीं। यहाँ कॉन्ग्रेस को 21 से 29 सीटें मिल सकती हैं। हिमाचल प्रदेश में भी आप (AAP) का खाता खुलने का अनुमान लगाया जा रहा है।
गौरतलब है कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश दोनों ही राज्यों के चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दल एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से लेकर पीएम मोदी तक रैली करते नजर आ रहे हैं। आप सुप्रीम अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के कई नेता भी लगातार रैली कर रहे हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष के चुनाव पूरा करने और राजस्थान में मचे सियासी घमासान को निपटाने में जुटी हुई है।
ईरान में महिलाओं का हिजाब विरोधी प्रदर्शन थमता नहीं दिख रहा है। इस्लामी मुल्क में अब एक और 17 वर्षीय लड़की को प्रताड़ित करने के बाद पुलिस ने उसकी हत्या कर दी है। ये विरोध प्रदर्शन 22 वर्षीय महासा अमीनी की हिजाब न पहनने के कारण हुई गिरफ़्तारी और पुलिस कस्टडी में उसकी हत्या के बाद शुरू हुए थे। अब तक 92 लोग मारे जा चुके हैं। अब 17 वर्षीय लड़की निका शकरामी को ईरान की पुलिस ने मार डाला है।
इसके बाद लड़की का शव उसके परिवार वालों को सौंप दिया गया। वो लड़की 9 दिन से गायब थी, जिसके बाद पुलिस ने उसका शव लौटाया है। परिजनों का कहना है कि उसके शव पर उसे टॉर्चर किए जाने के निशान हैं। उक्त लड़की हिजाब विरोधी प्रदर्शनों में शामिल थी और इसी दौरान गायब हुई थी। वो ईरान की राजधानी तेहरान स्थित केशरवेज़ बुलेवार्ड में विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई थी। उसके दोस्तों का कहना है कि वो एक निडर लड़की थी।
साथ ही उसने ईरान के इस विरोध प्रदर्शन में जम कर नारेबाजी भी की थी। निका शकरामी की डेड बॉडी पर उसकी नाक कुचले जाने के निशान हैं। साथ ही ऐसा प्रतीत होता है कि उसके सिर पर बार-बार किसी चीज से वार किया गया था। महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस हत्याकांड के बाद कहा है कि ईरान किशोरियों को सामान्य जीवन नहीं जीने देना चाहता। निका ने अपनी एक दोस्त को फोन कॉल कर के कहा था कि वो पुलिस से बच कर छिप रही है।
परिवार ने उसकी खोजबीन जेलों से लेकर हर जगह की, लेकिन 9 दिन बाद पुलिस ने एक शव मिलने का दावा किया और उसे परिवार को सौंप दिया। प्रशासन ने उसके ऊँचाई से गिरने की बात कही, लेकिन परिवार का आरोप है कि उन्हें लड़की का चेहरा तक नहीं देखना दिया गया। साथ ही उस लड़की का मेमोरियल भी आयोजित न करने की धमकी दी गई है। कई मृतकों के परिवारों को वहाँ की सरकार ने ऐसी ही धमकियाँ दी हैं।
निका के सिर पर चोट के 29 निशान होने की बात कही जा रही है। ईरान में अब तक 15,000 प्रदर्शनकारी गिरफ्तार किए गए हैं या हिरासत में लिए जा चुके हैं। ईरान में शरिया के तहत 7 साल से बड़ी किसी भी लड़की या महिला को बाल खोलकर बाहर निकलने की अनुमति नहीं है। ईरान में हिजाब पहनना 1979 की ‘इस्लामी क्रांति’ के बाद से ही अनिवार्य कर दिया गया था। 7 साल से ऊपर की आयु वाली सभी महिलाओं को सार्वजनिक रूप से ढीले-ढाले कपड़े और एक हेडस्कार्फ़ पहनना आवश्यक है।