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कॉन्ग्रेस को चाहिए हिंदू वोट… इसलिए राहुल गाँधी की रैली मुस्लिम एरिया से नहीं गुजरी, दिख जाते टोपी वाले: पत्रकार का खुलासा, वीडियो वायरल

गुजरात में 2022 के अंत में विधानसभा का चुनाव होना वाला है। इससे पहले पत्रकार मौसमी सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कॉन्ग्रेस पार्टी के सॉफ्ट हिंदुत्व की रणनीति का खुलासा किया गया है।

वीडियो में इंडिया टुडे की पत्रकार को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “मुझे याद है कि एक बार राहुल गाँधी का गुजरात में रोड शो था और उस समय, कॉन्ग्रेस खुद को एक ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ पार्टी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही थी।”

मौसमी सिंह ने इसके बाद जो कहा, वो मजेदार है, कॉन्ग्रेस के असल चरित्र को दर्शाता है:

“उनके (राहुल गाँधी के) रोड शो को डायवर्ट किया गया, उसे मुस्लिम बहुल इलाके से नहीं गुजारा गया। क्योंकि यह पहले से ही तय किया गया था कि राहुल गाँधी का अभी हिंदुत्व वाला प्रोग्राम चल रहा है, ऐसे में मुस्लिम बहुल क्षेत्र से जाएँगे तो टोपी वाले नजर आ जाएँगे।”

मौसमी सिंह ने इस साल 27 अगस्त को लल्लनटॉप के एंकर सौरव द्विवेदी के साथ बातचीत के दौरान कहा था कि यह पहले से तय होता है कि किसे इंटरव्यू देना है और किसे नहीं या फिर कौन सा पत्रकार इंटरव्यू लेगा। उनके मुताबिक, कॉन्ग्रेस हिंदुत्व पर विशेष ध्यान और अपनी मुस्लिम तुष्टिकरण पहचान से छुटकारा पाना चाहती थी।

इंडिया टुडे की पत्रकार के अनुसार, मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में जानबूझकर न जाने की रणनीति राहुल गाँधी की सुरक्षा टीम का हिस्सा रहे केबी बायजू ने बनाई थी। कथित तौर पर, बायजू पहले स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) का हिस्सा थे, जो राहुल गाँधी के महासचिव बनने के बाद उनकी टीम में शामिल हो गए।

बायजू के पास कॉन्ग्रेस में कोई औपचारिक पद नहीं है, लेकिन पार्टी में उनका कद लगातार बढ़ता गया। पार्टी के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद ने अपने इस्तीफे में उनका जिक्र तक किया था। आजाद ने कहा था कि अब सोनिया गाँधी नाममात्र की नेता रह गई हैं, क्योंकि फैसले राहुल गाँधी के ‘सिक्योरिटी गार्ड और निजी सहायक’ लेते हैं।

राहुल गाँधी और उनका मंदिर जाना

नवंबर 2017 में, कॉन्ग्रेस पार्टी ने एक घोषणा की थी। क्या? यही कि राहुल गाँधी ‘जनेऊ धारी’ हिंदू हैं।

आउटलुक की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

कॉन्ग्रेस के इस दावे पर सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाए थे। तब लोगों ने कॉन्ग्रेस के वंशज के संभावित कैथोलिक मूल की ओर इशारा किया था। एक साल बाद राहुल गाँधी ने पुष्कर में एक पुजारी से कहा था कि वह ‘कश्मीरी ब्राह्मण’ हैं और उनका गोत्र ‘दत्तात्रेय’ है।

ET की रिपोर्ट का Screengrab

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसको लेकर कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, “बीजेपी को हमेशा हिंदुत्व समर्थक पार्टी के रूप में देखा गया है और अगर कोई हमारी नकल करना चाहता है, तो मुझे कोई शिकायत नहीं है।”

बता दें कि यूपी और लोकसभा चुनावों के दौरान खुद को ब्राह्मण बताकर राहुल गाँधी बाह्मण वोट को साधना चाहते थे। आजादी के बाद से एक दशक पहले तक ब्राह्मणों और दलितों के समीकरण पर सत्ता-सुख भोगने के बावजूद कॉन्ग्रेस को इन चुनावों में कुछ खास लाभ नहीं हुआ।

अब, कर्नाटक में विधानसभा चुनाव देखकर राहुल गाँधी ब्राह्मण से लिंगायत में दीक्षित हो गए हैं। वे इस समुदाय के संस्थापक बसवन्ना को फॉलो कर रहे हैं और उनके बारे में पढ़ रहे हैं, जिन्होंने ब्राह्मणों का विरोध किया था।

खूंखार पिटबुल ने अब गाय के जबड़े पर मारा झपट्टा, लहूलुहान करके छोड़ा: जो मालिक सैर कराने लाया, उससे भी नहीं हुआ कंट्रोल; Video वायरल

बीते दिनों कई जगहों से ऐसी घटनाएँ सामने आई थीं जब पिटबुल डॉग ने कभी अपने मालिक की माँ तो कभी पार्क में खेलते बच्चे पर हमला किया। कई जगह लोग सिर्फ घायल हुए तो कहीं इन हमलों के चलते मौत भी हो गई। अब इसी क्रम में कानपुर के सरसैया घाट से एक वीडियो और सामने आई है। इस वीडियो में खूंखार पिटबुल डॉग एक गाय पर हमला कर रहा है।

वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे एक पिटबुल डॉग ने गाय पर जानलेवा हमला किया। डॉग ने अपने मुँह से गाय का जबड़ा दबोच लिया, जिससे वह दर्द से कराह गई। उसने खुद को कुत्ते से बचाने की काफी कोशिश की, लेकिन पिटबुल ने गाय का जबड़ा नहीं छोड़ा। इसके बाद घाट के किनारे मौजूद लोगों ने मिलकर गाय को डॉग के चंगुल छुड़ाया। हालाँकि, इस दौरान गाय लहूलुहान हो गई।

हैरानी इस बात की है कि कुत्ते का मालिक जो उसे घाट किनारे सैर कराने लाया था, वो खुद भी कुत्ते को कंट्रोल नहीं कर पाया। गाय को छुड़ाने में कुत्ते के मालिक को काफी मशक्कत करनी पड़ी। अंत में कुत्ते को लोहे की रॉड से पीटा गया, जिसके बाद उसने गाय को छोड़ा।

पिटबुल के हमले से जुड़ा यह पहला मामला नहीं है, जब किसी पालतू कुत्ते ने हमला किया हो। इस महीने की शुरुआत में (3 सितंबर 2022) गाजियाबाद से पालतू कुत्तों के हमले के दो मामले सामने आए थे। पहला मामला पार्क का था। यहाँ एक लड़की अपने पालतू कुत्ते को घुमाने लाई थी, लेकिन वह उसके हाथ से अपना पट्टा छुड़ाकर वहाँ खेल रहे बच्चे के पास गया और उन्हें काट लिया। कुत्ते के इस हमले में 10 साल का मासूम बच्चा घायल हो गया था। उसके शरीर पर 150 टाँके लगे थे।

दूसरा मामला गाजियाबाद की एक सोसाइटी का है। सोसाइटी की लिफ्ट में एक पालतू कुत्ते ने एक बच्चे को काट लिया था। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था, जिसमें देखा गया था कि कुत्ते के काटने के बाद पीड़ित बच्चा काफी देर तक लिफ्ट में ही रोता रहा, लेकिन कुत्ते की मालकिन चुपचाप वहीं खड़ी देखती रही।

इस घटना को देखने के बाद गाज‍ियाबाद नगर निगम ने पालतू कुत्‍तों को ल‍िफ्ट में लाने- ले जाने को लेकर सख्‍त आदेश जारी क‍िए थे। साथ ही कुत्ते की मालकिन पूनम चंदोक पर 5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था। लखनऊ नगर निगम भी अब एक घर में दो से ज्‍यादा पालतू कुत्ते पालने पर रोक लगाने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही निगम पालतू कुत्तों का लाइसेंस शुल्क भी बढ़ाने की तैयारी है। 

बता दें कि इन दोनों घटनाओं से पहले इस साल जुलाई में लखनऊ से ऐसी ही घटना सामने आई थी। लखनऊ में एक जिम ट्रेनर के पालतू पिटबुल कुत्ते ने उसकी माँ को नोच कर मार डाला था।

‘PFI को बैन कर दो, ये ISIS के लिए आतंकी भर्ती करता है ‘ : NIA की ताबड़तोड़ कार्रवाई का मुस्लिम संगठनों ने किया समर्थन, PM मोदी को पत्र भेज उठाई माँग

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के खिलाफ गुरुवार (22 सितंबर 2022) को हुई ताबड़तोड़ कार्रवाई का तमाम मुस्लिम संगठनों ने भी समर्थन किया है। इन संगठनों में सूफी खानकाह एसोसिएशन व ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज भी शामिल हैं। सूफी खानकाह एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कौसर हसन मजीदी ने तो पीएम मोदी को पत्र लिखकर PFI को बैन करने की माँग की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूफी खानकाह के राष्ट्रीय अध्यक्ष कौसर हसन मजीदी के पत्र में पीएम मोदी से कहा गया कि पीएफआई देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त है इसलिए उसे बैन कर देना चाहिए। उन्होंने, आरोप लगाते हुए कहा है पीएफआई देश के नौजवानों को भटका कर आतंकी बना रहा है और पिछले दो सालों से देश के खिलाफ युद्ध लड़ने के लिए ISIS (आईएसआईएस) के लिए लड़ाकों की भर्ती कर रहा है।

कौसर हसन मजीदी ने यह भी कहा कि PFI (पीएफआई) की विचारधारा देशहित में नहीं है। यह लगातार देश में जहर घोलने का काम कर रहा है। जिस संगठन की विचारधारा देश के खिलाफ हो उसे बैन कर देना ही अच्छा है। उन्होंने यह भी कहा, बैन करना पुरानी माँग रही है लेकिन केवल बैन करने से कुछ नहीं होगा बल्कि ऐसी विचारधारा के खिलाफ कुछ ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। जब तक ऐसी विचारधारा के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाए जाएँगे तब तक ऐसे संगठन सामने आते रहेंगे।

वहीं, ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष परवेज हनीफ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा, “भारत सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर ही उसके खिलाफ मामला दर्ज किया है और इसके कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज छापा मारने के सरकार के फैसले से सहमत है। यह मानते हुए कि यह देश के सर्वोत्तम हित में है। हमारा संगठन भारतीय संविधान का पूर्ण समर्थन करता है।”

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा है “पीएफआई खुद को इस्लाम के रक्षक के रूप में पेश करके देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। हमने उसकी नीतियों का बार-बार विरोध किया है और उस पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया है।”

गौरतलब है कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पीएफआई पर टेरर फंडिंग, आतंकियों को ट्रेंड करने, दंगा भड़काने समेत कई प्रकार की देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने का आरोप लगता रहा है। इसी सिलसिले में एनआईए और ईडी ने 93 जगहों पर छापेमारी करते हुए पीएफआई के 106 सक्रिय कार्यकर्ताओं व नेताओं को गिरफ्तार किया है। इससे पहले रविवार (18 सितंबर 2022) को भी एनआईए ने पीएफआई के 23 ठिकानों में छापेमारी करते हुए 4 लोगों को गिरफ्तार किया था।

ऐसी आशंका जताई जा रही है कि गत रविवार व उससे पहले एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए गए पीएफआई के नेताओं से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर देश भर में एक साथ छापेमारी की है। इस छापेमारी को जाँच एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता कहा जा रहा है।

शाकाहारी डॉक्टरों को धोखे से पिलाया नॉन-वेज सूप, सच खुलने पर हंगामा: मोहम्मद आजम पर गंभीर आरोप, होटल ने माफी माँगी

यूपी के बरेली में स्वर्ण टावर होटल के भीतर खाना खाने गए शाकाहारी डॉक्टरों को धोखे से नॉनवेज सूप पिलाने का मामला सामने आया है। डॉक्टरों ने इस पूरी लापरवाही के लिए होटल में फूड सर्व देख रहे मोहम्मद आजम को जिम्मेदार ठहराया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ डॉक्टर्स इस होटल में सेलिब्रेशन करने आए थे, लेकिन खाने के बाद जब सूप मँगवाया गया तो कुछ शाकाहारी डॉक्टरों को भी नॉनवेज सूप परोसा गया। सूप पी लेने के बाद डॉक्टरों को इस बात का पता चला, जिसके बाद तमाम डॉक्टर्स ने वहाँ हंगामा किया और घटना का एक वीडियो भी बनाकर उसे वायरल कर दिया।

इस वीडियो को इंडो-एशियन न्यूज़ सर्विस के सहायक संपादक अतुल कृष्ण ने अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया। उन्होंने लिखा, “बरेली के स्वर्ण टॉवर होटल में डॉक्टर फैमिली को वेजिटेबल की जगह नॉनवेज सूप पिलाया। इसका पता चलने पर हंगामा। फूड सर्व देख रहे मोहम्मद आजम पर गंभीर आरोप हैं। होटल प्रबंधन ने माफी माँगी।”

वीडियो में डॉक्टर्स होटल के लोगों से सवाल करते दिखाई दे रहे हैं। इनमें से वीडियो बना रहे एक व्यक्ति ने बताया कि यहाँ पर एक सूप रखा गया और उसको लेकर यह नहीं बताया गया कि ये एक नॉनवेज सूप है। जो शाकाहारी हैं, उन्हें भी वेजिटेरियन सूप बताकर इसे परोसा गया। सबने उसको पी भी लिया।

वीडियो में दिख रहे व्यक्ति ने कहा कि सूप पीने के बाद पता चलता है कि ये सूप नॉनवेज है। उन्होंने आगे कहा कि क्या आप सोच सकते हैं? जो लोग 40-50 सालों से कभी भी नोनवेज टेस्ट तक नहीं किया है, वो लोग भी अब ये नॉनवेज सूप पी लिए हैं। उन्होंने बताया कि यहाँ हर जगह पर टैग है वेज और नॉनवेज का, लेकिन सिर्फ सूप पर नहीं है।

गौरतलब है कि डॉक्टर्स ने अभी तक इस मामले में कोई FIR दर्ज नहीं करवाई है। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को सबक सिखाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा किसी होटल या रेस्टोरेंट में न हो। डॉक्टरों ने पूछा कि किसी के धर्म या आस्था से इस तरह खिलवाड़ कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है?

बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद कई डॉक्टर्स तो शर्मिंदगी के कारण खुलकर सामने भी नहीं आ पा रहे हैं कि उन्होंने गलती से नॉनवेज सूप पी लिया है। डॉक्टरों ने कहा कि सिर्फ माफी माँग लेने से बात खत्म नहीं हो जाती। बता दें स्वर्ण टॉवर होटल बरेली का एक मशहूर होटल है।

‘जिस जमीन पर हों मजहबी काम, उन्हें वक्फ के नाम कर दो’ : योगी सरकार ने रद्द किया कॉन्ग्रेस का 33 साल पुराना आदेश, संपत्तियों के सर्वे का दिया आदेश

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने वक्फ बोर्ड से जुड़े राजस्व विभाग के 33 साल पुराने (7 अप्रैल 1989 के) आदेश को रद्द कर दिया। इस आदेश के साथ ही, सरकार ने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का सर्वे कर एक महीने के अंदर रिकॉर्ड मेंटेन (राजस्व अभिलेखों में दर्ज) करने का भी आदेश दिया।

दरअसल, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने तत्कलीन सरकार द्वारा साल 1989 में जारी किए गए आदेश पर आपत्ति दर्ज करते हुए इसे निरस्त करने का एक प्रतिवेदन भेजा था। इस प्रतिवेदन को स्वीकार करते हुए प्रदेश सरकार ने एक नया आदेश जारी किया है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने नए आदेश में कहा है कि 7 अप्रैल 1989 से लेकर अब तक वक्फ बोर्ड की जो बंजर, ऊसर या अन्य जमीन जिनका रिकॉर्ड नहीं दर्ज है उनकी जानकारी जुटाई जाएगी। साथ ही, उत्तर प्रदेश वक्फ अधिनियम 1960 को लागू करते हुए वक्फ बोर्ड की सभी संपत्तियों को रजिस्टर्ड किया जाएगा।

वास्तव में, सरकार यह जानना चाहती है कि वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड में कब्रिस्तान, मस्जिद, ईदगाह जैसी संपत्तियाँ सही स्थिति में दर्ज हैं या नहीं।

कॉन्ग्रेस सरकार का आदेश

उत्तर प्रदेश की तत्कलीन कॉन्ग्रेस सरकार ने 7 अप्रैल 1989 को आदेश जारी कर कहा था कि यदि राज्य में सामान्य संपत्ति बंजर, भीटा, ऊसर आदि जमीन का इस्तेमाल वक्फ (मस्जिद, कब्रिस्तान, ईदगाह इत्यादि) के रूप में किया जा रहा हो तो उसे वक्फ संपत्ति के रूप में ही दर्ज कर दिया जाए। इसके बाद, उसका सीमांकन किया जाए।

कॉन्ग्रेस सरकार के इस आदेश के चलते ही उत्तर प्रदेश की लाखों हेक्टेयर बंजर, भीटा, ऊसर जमीन वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज की गई थी। यानी कि कॉन्ग्रेस सरकार के आदेश ने करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन को सीधे वक्फ बोर्ड के नाम कर दिया गया था।

आदेश के बाद क्या आई दिक्कत

गौरतलब है कि वक्फ बोर्ड देश का तीसरा सबसे बड़ा जमीन का मालिक है। उत्तर प्रदेश समेत देश के हर राज्य में हजारों एकड़ जमीन समेत करोड़ों की संपत्तियाँ वक्फ बोर्ड के कब्जे में हैं। इनमें से कई ऐसी संपत्तियाँ भी हैं जिनमें गैर कानूनी तरीके से कब्जा किया गया है।

यही नहीं, ऐसी भी शिकायतें सामने आई हैं कि कॉन्ग्रेस सरकार के 33 साल पुराने इस आदेश के चलते पहले सरकारी जमीनों को वक्फ बोर्ड के नाम पर दर्ज करवाया गया। इसके बाद, इन जमीनों को बेचकर आवासीय कॉलोनी तक विकसित कर दीं गईं।

1989 से लेकर अब तक की सभी वक्फ संपत्तियों का सर्वे

अब चूंकि, उत्तर प्रदेश में साल 1989 से लेकर अब तक की सभी वक्फ संपत्तियों का सर्वे किया जाना है। ऐसे में, इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि यदि इस सर्वे में किसी जमीन पर गैर कानूनी कब्जा या फिर वक्फ बोर्ड के नाम पर रजिस्टर कराने के बाद जमीन को बेचने की बात सामने आती है तो फिर उस पर योगी सरकार कार्रवाई कर सकती है।

राज्य सरकार के इस फैसले पर अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा है कि यह एक सामान्य विभागीय प्रक्रिया है। इस सर्वे का अन्य वक्फ संपत्तियों से कोई लेना-देना नहीं है।

‘हिंदुओं, तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े कर देंगे’ : UK के जिस पत्रकार ने खोली ‘लेस्टर के कट्टरपंथियों’ की सच्चाई, ट्विटर ने उसके ट्वीट डिलीट किए

इंग्लैंड के लेस्टर (Leicester) शहर में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा हिंदुओं और उनके मंदिरों पर किए गए हमले मामले में अब तक कुल 50 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एक हफ्ते पहले शुक्रवार (16 सितंबर 2022) को कट्टरपंथियों ने अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए हिंदुओ पर हमले की शुरुआत की थी।

कट्टरपंथियों की भीड़ इतनी बेकाबू थी कि वो लाठी, डंडों, काँच की बोतल जैसी चीजों से हमला कर रहे थे। संपत्तियों को पूरा नष्ट किया जा रहा था। इन्हीं हमलों की कुछ वीडियोज लंदन के एक पत्रकार वसीक अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किए थे। इसमें उन्होंने हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलने वालों का पर्दाफाश किया था। लोग इसे देख लेस्टर की जमीनी हकीकत जान पा रहे थे, लेकिन ट्विटर ने इन वीडियोज को डिलीट कर दिया।

पत्रकार वसीक वसीक (ट्विटर हैंडल @WasiqUK) के ट्विटर पर ऐसे तमाम वीडियोज थे जो कट्टरपंथी हमलों की पुष्टि कर रहे थे। उनसे पता चल रहा था कि कैसे इस्लामवादियों द्वारा हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला गया, भड़काऊ स्पीच दी गई और हिंसा के लिए लोगों को उकसाया गया। वसीक की पोस्ट की सहायता से स्थानीय पुलिस आरोपितों को पकड़ने की कोशिश कर रही थी, लेकिन तभी ट्विटर ने अपनी कार्रवाई की।

गुरुवार (22 सितंबर 2022) को वसीक ने हिंदुओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाला एक और वीडियो साझा किया, जिसमें एक व्यक्ति कह रहा था, “हर शाकाहारी, शाकाहारी हिंदू के लिए। तुम इस्लाम की एकता नहीं जानते। हम तुम्हें तोड़कर तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े कर देंगे।”

फोटो साभार: वसीक का ट्विटर

देख सकते है कि ये ट्वीट केवल हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने वालों, नफरत फैलाने वालों और जहर उगलने वालों को बेनकाब कर रहा है। लेकिन ट्विटर ने इसे अपने सामुदायिक दिशानिर्देशों का उल्लंघन बताया और वीडियो को हटा दिया। संभव है कि इनका ट्विटर को लॉक भी किया गया हो, लेकिन ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं करता है।

ट्विटर की ऐसे एक्शन को जानने के बाद लोग हैरान हैं कि ऐसी वीडियोज जिससे पुलिस हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों का पता लगा रही थी उसे ट्वीट ने डिलीट कैसे और क्यों कर दिया।

भारतीय उच्चायोग ने की कड़ी कार्रवाई की माँग

लंदन में भारतीय उच्चायोग (Indian High Commission in London) ने भी 19 सितंबर 2022 को लेस्टर में हिंदुओं खिलाफ हुई हिंसा की कड़ी निंदा की थी। उन्होंने अपने बयान में हिंदुओं और मन्दिरों में तोड़फोड़ की ओर भी इशारा किया था। इसके साथ ही यूके के अधिकारियों से हमलों में शामिल कट्टरपंथियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की थी।

लेस्टर में हिंदू विरोधी हिंसा

बता दें कि इंग्लैंड के लेस्टर (Leicester) में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा हिंदू लोगों पर हमला करने के मामले में एडम यूसुफ (Adam Yusuf) नाम के शख्स को एक साल की सजा सुनाई गई है। 18 सितंबर 2022 को लेस्टर में हिंदू लोगों पर हमले (मेनस्ट्रीम मीडिया इसे प्रदर्शन बता रही) में चाकू ले जाने का जुर्म कबूल करने के बाद लेस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उसे एक साल की जेल की सजा दी है। इससे पहले 20 वर्षीय ऐमॉस नोरोन्हा (Amos Noronha) को प्रतिबंधित हथियार रखने का दोषी पाया गया था। ऐमॉस नोरोन्हा को सोमवार (20 सितंबर 2022) को 10 महीने जेल की सजा सुनाई गई थी।

‘तुम्हें नया मालिक मिल गया न’ : अडानी से चिढ़ में राहुल गाँधी ने किया NDTV की महिला पत्रकार का अपमान, सवाल का जवाब तक नहीं दिया

वायनाड लोकसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान गुरुवार (22 सितंबर 2022) को मीडिया संस्थान एनडीटीवी की एक महिला पत्रकार का अपमान किया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब सांसद से अध्यक्ष पद को लेकर पत्रकार ने सवाल किया तो उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि आपके पास एक नया मालिक है।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 22 सितंबर 2022 को कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी केरल के एर्नाकुलम में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मीडिया से रूबरू हुए। इसी दौरान एनडीटीवी की एक महिला पत्रकार ने उनसे पूछा कि जब वे भारत जोड़ो यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं, तो कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष पद हेतु अपनी दावेदारी क्यों नहीं रखते?

इस सवाल के बाद राहुल गाँधी ने जवाब देने के बजाए मुस्कुराना शुरू कर दिया। वे मुस्कुराते हुए बोले, “मुझे विश्वास है कि आपके पास एक नया मालिक है।” उनकी इस बात को नजरअंदाज करते हुए पत्रकार ने अपना सवाल दोबारा पूछा। फिर भी राहुल गाँधी उनसे एक ही बात पूछते रहे, “आपके पास एक नया मालिक है?”

आगे राहुल गाँधी ने अपनी बात संभालते हुए कहा, कि स्वामित्व बिल्कुल भी मायने नहीं रखता है। सांसद के मुताबिक समाचार पत्रों का स्वामित्व परिभाषित करता है कि समाचार पत्र क्या करते हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने इस बात की तरफ भी इशारा किया कि अडानी ग्रुप द्वारा एनडीटीवी को खरीदा जाने के बाद एनडीटीवी का संपादकीय रुख बदल जाएगा।

राहुल गाँधी ने कहा, “यह यात्रा कॉन्ग्रेस के लाखों कार्यकर्ताओं की है और वह सिर्फ इसका एक हिस्सा हैं। मगर उनके जैसे पत्रकार सिर्फ उन्हीं पर फोकस कर रहे हैं।” इस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गाँधी ने एनडीटीवी के पत्रकार पर भारत जोड़ो यात्रा से ध्यान हटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

सांसद राहुल गाँधी ने कहा, “मैं उम्मीदवार हूँ या नहीं, इस बारे में आपका सवाल कि हम जो कर रहे हैं उसे ध्यान भटकाने के लिए बनाया गया है। और मैं उस जाल में नहीं पड़ने वाला।” इसके बाद कॉन्ग्रेस के एक अन्य नेता ने तमाम पत्रकारों से पार्टी अध्यक्ष पद के बारे में कोई भी सवाल नहीं करने की बात कही।

एक ही जगह 4 अगल-अलग सभ्यता के निशान: पत्थर के औजार, रोम की सुराही, सोने के गहने और भगवान की मूर्तियाँ: चेन्नई का यह गाँव ASI के लिए खास

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की एक टीम ने चेन्नई के पास से 12,000 साल पुरानी कलाकृतियाँ और कुछ प्राचीन पत्थर के औजार खुदाई से निकाले हैं। आश्चर्य यह कि इसी जगह से चार अलग-अलग सभ्यताओं के निशान मिले हैं। ASI का मानना है कि ये चारों सभ्यता एक-दूसरे से सैकड़ों वर्ष पुराने हैं।

प्राप्त जानकारियों के मुताबिक ASI की टीम को चेन्नई के बाहरी इलाके ओरगदम (Oragadam) से 5 किलोमीटर दूर वडक्कुपट्टू (Vadakkupattu) गाँव में कई प्राचीन पत्थर और धार्मिक कलाकृतियाँ मिली हैं। बताया जा रहा है कि इन कलाकृतियों में हाथ वाली कुल्हाड़ी, खरोंचने वाले औजार, फोड़ने वाले औजार और छुरी के आकार के काटने लायक औराज भी शामिल हैं।

पत्थर के औजार से लेकर सोने के गहने और भगवान की मूर्तियाँ भी (फोटो साभार: टाइम्स ऑफ इंडिया)

इस खोज में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने 10mx10m के एक गड्ढे की ऊपरी परत से संगम युग (2000 वर्ष से भी पहले) की कलाकृतियों को निकाला। इसमें नक्काशी किए गए बर्तन, दुहत्थी रोमन सुराही के टुकड़े और काँच की मोतियाँ भी मिलीं। इससे साबित होता है कि उस समय रोमन साम्राज्य के साथ यहाँ के व्यापारिक रिश्ते थे।

इनके अलावा ASI की टीम को सोने के गहने, टेराकोटा के खिलौने, मोती, चूड़ियों के टुकड़े, बर्तन के टुकड़े और सिक्के भी मिले। इसी जगह के आस-पास के क्षेत्र में जमीन की ऊपरी सतह पर ASI की टीम ने पल्लव युग की शुरुआत (275 ईसवी) से पल्लव वंश के आखिरी राजाओं (897 ईसवी) तक की मूर्तियों को भी खोजा है।

एक ही जगह 4 अलग-अलग सभ्याताओं के निशान (फोटो साभार: टाइम्स ऑफ इंडिया)

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने वडक्कुपट्टू (Vadakkupattu) गाँव में जब खुदाई शुरू की तो जमीन से कुछ ही सेंटीमीटर नीचे सोने के गहने, टेराकोटा के खिलौने, मोती, चूड़ियों के टुकड़े, बर्तन के टुकड़े और सिक्के आदि मिले। इससे थोड़ी और खुदाई के बाद नक्काशी किए गए बर्तन, दुहत्थी रोमन सुराही के टुकड़े और काँच की मोतियाँ मिलीं। इसके बाद जमीनी सतह से करीब 75 सेंटीमीटर नीचे दबे मिले पत्थरों वाले औजार – हाथ वाली कुल्हाड़ी, खरोंचने वाले औजार, फोड़ने वाले औजार और छुरी के आकार के काटने लायक औराज।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण टीम के एक सदस्य का कहना है कि यह एक ऐसी जगह की तरह दिखता है, जहाँ प्राचीन लोग शिकार करने वालों के लिए पत्थर के औजार बनाते थे। आपको बता दें कि वडक्कुपट्टू गाँव से 1 किलोमीटर दूर एक गाँव है – गुरुवनमेदु। यहाँ एक प्राचीन स्थल है, जो पहले के जमाने में मृतकों को दफनाने के काम आती थी। उस जगह की पहचान पुरातत्वविदों ने 1922 में की थी।

राज्य पुरातत्व विभाग से सेवानिवृत्त हुए पुरातत्वविद के श्रीधरन ने मीडिया को बताया कि इस खोज से ऐसा प्रतीत होता है कि वडक्कुपट्टू (Vadakkupattu) गाँव में कई हजार वर्षों से निरंतर इंसानों का निवास रहा है। यहाँ मिले नए प्रमाणों से यह भी पता चलता है कि यह एक सांस्कृतिक और पुरातात्विक रूप से महत्वपूर्ण स्थल भी है।

बस ड्राइवर की आँख फोड़ी, पुलिस वालों पर हमला किया: केरल में हर जगह PFI का उपद्रव, BJP-RSS कार्यालयों पर फेंके गए पेट्रोल बम

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के कई लोग गिरफ्तार होने के बाद अब उनके समर्थक सड़कों पर हंगामा कर कर रहे हैं।

कहीं सार्वजनिक वाहनों को जलाया जा रहा है, तो कहीं पुलिसकर्मियों पर हमला हो रहा है। इस बीच भाजपा कार्यालय और आरएसएस दफ्तर में भी बम फेंके जाने की खबर हैं। हालात इतने बेकाबू हैं कि छात्रों की परीक्षाएँ स्थगित हो चुकी हैं, पुलिसकर्मी घायल हो रहे हैं।

बता दें कि टेरर फंडिंग मामले में हुई ताबड़तोड़ छापेमारी के खिलाफ PFI के लोगों ने शुक्रवार (23 सितंबर 2022) सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 तक ‘केरल बंद’ का आह्वान किया था। इसी बीच ये लोग जगह-जगह उपद्रव कर रहे हैं।

पत्थर और पेट्रोल बम फेंकने की घटना

केरल बंद के ऐलान के बीच राज्य के विभिन्न हिस्सों से पथराव और हिंसा की घटनाएँ सामने आई हैं। तिरुवनंतपुरम, कोट्टम में बंद का समर्थन कर रहे PFI के उपद्रवियों ने तोड़फोड़ की और सरकारी बसों, ऑटो-रिक्शा और एक कार को क्षतिग्रस्त कर दिया।

अलाप्पुझा में केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) की दो बसों और दो लॉरियों के शीशे तोड़ दिए गए। कोल्लम, पठानमथिट्टा, अलाप्पुझा, एर्नाकुलम, कोझीकोड और वायनाड जिलों में भी वाहनों पर पथराव किया गया।

कोझीकोड सिविल स्टेशन के पास KSRTC बस पर पथराव के दौरान उसके ड्राइवर की आँख में चोट लग गई, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया है।

तमिलनाडु के कोयंबटूर में भाजपा कार्यालय में तोड़फोड़ की घटना घटी है। वहाँ कुछ लोगों ने ऑफिस में पेट्रोल बम भी फेंके। इनके अलावा कन्नूर के मट्टनूर में दो लोगों द्वारा आरएसएस के ऑफिस पर पेट्रोल बम फेंकने की खबर आई है।

आज होने वाली परीक्षाएँ स्थगित

केरल विश्वविद्यालय, एमजी विश्वविद्यालय और कन्नूर विश्वविद्यालय ने हड़ताल के कारण शुक्रवार को होने वाली सभी परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है। केरल यूनिवर्सिटी ने बीएड स्पॉट अलॉटमेंट को 25 सितंबर तक के लिए टाल दिया है।

2 पुलिसकर्मियों पर हमला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोल्लम में बाइक सवार PFI आतंकियों ने 2 पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया। उनका इलाज चल रहा है। PFI के प्रदर्शन को देखते हुए राज्य सरकार ने पुलिस बलों की अतिरिक्त तैनाती की है। केरल हाई कोर्ट ने राज्य में बंद का आह्वान करने के लिए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के नेताओं के खिलाफ स्वत: संज्ञान लिया है। हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, कोई भी राज्य में बिना अनुमति के बंद का आह्वान नहीं कर सकता है।

‘PFI के खिलाफ कार्रवाई जुल्म’

इस पूरे घटनाक्रम के बीच, पीएफआई के खिलाफ NIA के एक्शन पर समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क का बयान सामने आया है। शफीकुर्रहमान बर्क ने PFI के खिलाफ कार्रवाई जुल्म बताया है। बर्क ने कहा,

“पीएफआई (पापुलर फ्रंट आफ इंडिया) एक संस्था है। एनआईए छापेमारी करके उन पर जुल्म कर रही है। उनका क्या जुर्म है, वह मुस्लिमों के मसीहा हैं।। वह एक पार्टी है, जो एक संस्था चला रहे हैं। उनका पैसा और पार्टियाँ उनका प्रोग्राम चलाती हैं तो उनका जुर्म क्या है। उनको क्यों गिरफ्तार किया जा रहा है?”

उल्लेखनीय है कि 22 सितंबर 2022 को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का राष्ट्रीय अध्यक्ष ओएमएस सलाम और इसी संगठन के दिल्ली अध्यक्ष परवेज अहमद को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने गिरफ्तार किया था। पीएफआई के लोग छापेमारी के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन करने उतर गए। इसको देखते हुए दिल्ली में एनआईए ऑफिस की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

कोलकाता में ‘वेटिकन सिटी’ जैसा बना माँ दुर्गा का पंडाल, चारों ओर जीसस की तस्वीरें: नाराज लोग बोले- ‘अगले साल काबा थीम पर भी बन सकता है’

कोलकाता में इस बार श्रीभूमि दुर्गा पूजा पंडाल ‘वेटिकन सिटी’ के थीम के मुताबिक आयोजित हो रहा है। इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। पूरे पंडाल को बिलकुल उसी ढंग में बनाया गया है। बाहर से ये किसी चर्च जैसा लग रहा है। अंदर जीसस की तस्वीरें, मदर मेरी की फोटो लगी हुई हैं। बीच में जाकर दुर्गा माँ की मूर्ति लगाई गई हैं।

ये तस्वीरें देखने के बाद लोगों में नाराजगी है। उनका पूछना है कि आखिर दुर्गा पंडाल को इस तरह सजाने का क्या अर्थ? क्या कभी वेटिकन में क्रिसमस का त्योहार दुर्गा पूजा थीम पर मनाया जाता है?

एक यूजर ने गुस्से में लिखा है, “ये कुछ भी नहीं है। इससे ज्यादा का इंतजार करो। शायद काबा के हिसाब से पूजा पंडाल लगे और चंडीपाठ की जगह आजान सुनाई दे। वोक बंगाल में हर चीज संभव हैं खासकर कोलकाता में। ये लोग अखंडता दिखाने के लिए माँ दुर्गा को हिजाब पहना सकते हैं। बात जब कोलकाता के बंगालियों की आती है तो कुछ भी हैरान नहीं करता।”

कीर्ति कुमार कासत लिखते हैं, “ये क्या है? अपने आपको सेकुलर दिखाने के लिए इतनी जद्दोजहद क्यों? वेटिकन का आर्किटेक्ट समझ लूँ एक बार पर फिर ये ईसाई धर्म की तस्वीरें क्यों? क्रिसमस पर चर्च चले जाओ। वहाँ भी तुम्हें हिंदू से ईसाई बना व्यक्ति बताने लगेगा कि जीसस ही असल रक्षक हैं।”

बता दें कि इससे पहले साल 2021 में श्रीभूमि दुर्गा पूजा पंडाल बुर्ज खलीफा की थीम पर आयोजित हुआ था। बुर्ज खलीफा दुनिया की सबसी ऊँची इमारत है। भारी तादाद में लोग उस पंडाल को देखने आए थे। इसमें इतनी लेजर लाइट थी कि इसके खिलाफ पॉयलटों ने शिकायत की थी कि उन्हें उड़ान भरने में समस्या हैं।

अब वाला पंडाल वैसा नहीं है लेकिन इस बार विवाद इसलिए हो रहा है क्योंकि पूजा स्थल के भीतर ईसाई धर्म से जुड़ी तस्वीरें हैं। टीवी 9 की खबर के मुताबिक श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब 50 साल से पूजा पंडाल लगा रहा है। इस बार स्वर्ण जयंती है इसलिए इसका थीम वेटिकन सिटी रखा गया है। इसके आयोजकों में राज्य के दमकल मंत्री और टीएमसी के विधायक सुजित बसु हैं। खुद ममता बनर्जी ने पंडाल का उद्घाटन किया है।