उत्तर प्रदेश के अयोध्या से जबरन धर्मांतरण (Religious Conversion) का मामला सामने आया है। यहाँ शाहनवाजपुर हलकारा का पुरवा निवासी जगबीर कोरी को इस्लाम कबूल ना करने पर सिर कलम कर देने की धमकियाँ मिल रही हैं। उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस महानिरीक्षक से इसकी शिकायत की। कार्रवाई न होने पर उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अयोध्या निवासी जगबीर कोरी के एक रिश्तेदार को 12 वर्ष पहले रेलवे स्टेशन पर एक लड़की रोती हुई मिली थी। उस लड़की ने नाम पूजा बताया था। जिसके बाद परिवारवालों ने जगबीर कोरी से उसकी शादी करवा दी। 9 वर्षों तक सब कुछ ठीक रहा, लेकिन इतने सालों बाद उसे पता चला कि जिसे वह अपनी हिंदू पत्नी समझ कर उसके साथ रह रहा था, वह पूजा नहीं, बल्कि हसीना बानो है।
इस बात का खुलासा तब हुआ, जब लड़की के रिश्तेदार बन कर आए राजू ने जगबीर कोरी के परिवार में प्रवेश किया। कुछ दिनों तक सब कुछ ठीक चलता रहा, लेकिन बाद में पता चला कि खुद को ठाकुर बताने वाला राजू हिंदू नहीं मुस्लिम है। उसका नाम निसार है।
इसके बाद अचानक लड़की के अम्मी-अब्बू भी जगबीर के घर पर आ गए और उन्होंने धीरे-धीरे उस पर इस्लाम कबूल करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने इस्लाम अपनाने से इनकार करने पर उसे सिर कलम करने की भी धमकी दी।
एक अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विरोध करने पर मुस्लिम पत्नी पक्ष के सभी लोग हमलावर हो गए और उसे गलियाँ दीं। उन्होंने उससे कहा कि वह अपनी जमीन और मकान बेचकर सारे पैसे उनकी बेटी को देकर उन लोगों के साथ भेज दे, नहीं तो उनके मजहब के लोग उसका (जगबीर कोरी) सिर कलम कर देंगे। इसके बाद सभी लोगों ने उससे कीमती सामान, बैंक कागजात आदि छीन लिए।
पत्नी के मुस्लिम घर वालों के जाने के बाद जब जगबीर कोरी ने घर में रखे बक्से की तलाशी ली, तो उसमें पुराने कागज मिले। इन मिले कागजात में उसकी पत्नी का नाम पूजा नहीं, बल्कि हसीना बानो पुत्री अमानतुल्ला निवासी बुढ़नपुर जिला आजमगढ़ लिखा हुआ था।
जगबीर कोरी के मुताबिक, उनका एक बेटा और एक बेटी है। उन लोगों ने जबरन उसके बेटे को इस्लाम कबूल करवा कर उसका खतना करवा दिया है। अब पूजा उर्फ हसीना बानो के परिजन जगबीर कोरी को लगातार परेशान कर रहे हैं, जिसकी शिकायत जगबीर ने पुलिस में की है। बीते दिनों निसार उर्फ राजू को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है।
राना अयूब (Rana Ayyub) को मुस्लिमों ने इस्लाम से खारिज कर दिया है… कम से कम सोशल मीडिया वाले मुस्लिमों ने तो जरूर। चौंकिए मत। नीचे सारे प्रमाण हैं। हुआ यह कि वो हिजाब या बुरके को लेकर ज्ञान बाँट रही थीं। ट्विटर पर मौजूद मुस्लिमों ने कुरान का हवाला देकर राना अयूब की बत्ती लगा दी।
वित्तीय धोखाधड़ी की आरोपित और वाशिंगटन पोस्ट में लेख लिख कर पैसे कमाने वाली राना अयूब ने बुधवार (22 सितंबर 2022) को सूरा बकराह की आयत का मतलब अंग्रेजी में ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “मजहब में कोई मजबूरी नहीं है।” दरअसल यह ईरान में चल रहे हिजाब या बुरके के विरोध-प्रदर्शन से संबंधित था।
इस तरह का ट्वीट लिख राना अयूब यह दिखाना चाह रही थी कि वो विकासशील मानसिकता की महिला है। ट्विटर पर मौजूद मुस्लिम यूजरों ने उनको अच्छे ढंग से समझा दिया कि विकासशील मानसिकता अपनी जगह है, कुरान की अपनी जगह।
राना अय्यूब का ट्वीट
इस ट्वीट को लेकर हिंदुओं का मजाक उड़ाने वाली राना अयूब सोशल मीडिया पर मुस्लिम यूजर्स के निशाने पर आ गईं। बिंट नूह नाम के यूजर ने लिखा:
“मुखौटा उतर चुका है, हकीकत सबके सामने है। इसके बावजूद बड़े हैंडल राना अय्यूब पर अभी भी चुप क्यों हैं… जाहिर है कि वह आयत से जुड़े संदर्भ को जानती हैं, बावजूद इसमें कोई संदेह नहीं है कि गुस्ताख लोगों के भले की कामना करने वाली यह महिला इस्लाम के कट्टर दुश्मनों में से एक है। हमें उन लोगों को समझना-जानना होगा, जो अभी भी इस्लामी विरोधी नैरेटिव में इस महिला का समर्थन करते हैं। राना अय्यूब एक फिल्टर है!”
बिंट नूह का ट्वीट
सनिफ सुल्तान लिखते हैं, “यह आयत गैर-मुस्लिमों के लिए है। मुस्लिमों को मजहब के तौर पर इस्लाम का अनुसरण करने और चुनने की आजादी नहीं है। अपने दोहरे मापदंड के लिए संदर्भ से बाहर इस आयत का इस्तेमाल एक मुस्लिम नहीं कर सकता।”
सनिफ सुल्तान का ट्वीट
एक और मुस्लिम यूजर ने राना अय्यूब को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “यह पूरी आयत है (सूरा बकराह, आयत-256, कुरान)। देश भर में और विश्व स्तर पर हाल की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए, मुझे लगता है कि मुस्लिमों को कुरान का हवाला देते समय सावधान रहना चाहिए।”
ZAyesha का ट्वीट
इसके अलावा कई मुस्लिम यूजर्स ने राना को ट्विटर पर जमकर लताड़ा है। एक ने लिखा, “मुशरिक के ओपिनियन की जरूरत नहीं।” एक ने उन पर तंज कसते हुए कहा, “ये मुस्लिमों की संरक्षक है।”
3 अलग-अलग ट्विटर यूजर्स का राणा अयूब को जवाब
नयमारा नाम की यूजर ने भी अपने ट्विटर हैंडल पर राना के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर हुए उन्हें इस्लाम, अल्लाह और कुरान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने सवाल किया, “क्या तुम कुरान की आयत को नकार रही हो? क्या तुम मुस्लिम भी हो।”
नयमारा नाम की ट्विटर यूजर ने धोया राणा अयूब को
राना अयूब (Rana Ayyub) को लताड़ने वाले सभी ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
झूठ पर 4 मिनट कायम नहीं रह पाईं
इससे पहले राना अयूब ने अपने एक इंटरव्यू में इतने झूठ बोले कि वो खुद आँकड़ों में कन्फ्यूज हो गईं थी। उन्होंने इंटरव्यू में शुरुआत में कहा था कि 100 हिंदुओं ने एक मुस्लिम लड़की को घेरा और इंटरव्यू के आखिर में वो बोलती नजर आईं कि ये संख्या 200 थी। उन्होंने कहा था, “ये वो भारत नहीं है, जिस पर हमें कभी गर्व होता था। ये दक्षिणपंथी आतंकियों का भारत है।”
धोखाधड़ी करने पर जब्त हुई 1.77 करोड़ रुपए की संपत्ति
बता दें कि झूठ फैलाने में माहिर राना अयूब वित्तीय धोखाधड़ी की आरोपित हैं। उनकी 1.77 करोड़ रुपए की संपत्ति ईडी द्वारा जब्त की गई थी। कथित तौर पर ये सारा पैसा उन्होंने कीटो पर फंड इकट्ठा करने का नाम पर एकत्रित किया था। मगर, सारे पैसे का इस्तेमाल किए बिना उन पैसों को अयूब ने अपने अकॉउंट में रखे रखा। जब विवाद बढ़ा तो उन्होंने खुद को बेगुनाह बताया।
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA ) और आतंकवाद रोधी दस्ते (ATS) ने गुरुवार (22 सितंबर 2022) को कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI के कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस छापेमारी अभियान में संगठन के कुछ पदाधिकारियों को भी गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद अब सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने इस पर आपत्ति जताई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क (Shafiqur-Rahman Burke) पीएफआई के पक्ष में आ खड़े हुए हैं। बर्क ने मीडिया के सामने कट्टरपंथी संगठन पर हो रही कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए और इस मामले में कई गंभीर आरोप भी लगाए।
Samajwadi Party MP Shafiqur Rahman Barq questions multi-agency raids against PFI, asks what is their crime and why people associated with it are being arrested
मीडिया से बातचीत करते हुए बर्क ने कहा कि आखिर उसका (PFI) जुर्म क्या है। वह देश की तमाम संस्थाओं की तरह एक संस्था है, जैसे दूसरी संस्थाएँ अपने कार्यक्रम चलाती हैं, वैसे ही पीएफआई भी अपने कार्यक्रम संचालित करता रहता है। बर्क ने यह भी कहा कि यह संस्था देश के मुसलमानों की समस्याओं से लड़ रही है।
PFI के लोगों की गिरफ़्तारी जारी
गुरुवार (22 सितंबर 2022) को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने भारत के कुल 15 राज्यों में कट्टरपंथी संगठन के ठिकानों पर छापेमारी की हैं।
NIA ने गुरुवार पीएफआई के 93 स्थानों पर रेड मारी। इसमें से केरल में 39, तमिलनाडु में 16, कर्नाटक में 12, आंध्र प्रदेश में 7, तेलंगाना में 1, उत्तर प्रदेश में 2, राजस्थान में 4, दिल्ली में 2, असम में 1, मध्य प्रदेश में 1, महाराष्ट्र में 4, गोवा में 1, पश्चिम बंगाल में 1, बिहार में 1 और मणिपुर में 1 स्थान पर रेड मारे जाने की खबर है।
बताया जा रहा है कि इन राज्यों से अभी तक कुल 106 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। कट्टरपंथी संगठन PFI और उससे जुड़े लोगों के ऊपर टेरर फंडिंग, आतंकी ट्रेनिंग गतिविधियों और लोगों को संगठन से जोड़ने के आरोप हैं।
प्राप्त जानकारियों के हवाले से बताया यह भी जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA ) की रेड को लेकर NSA, गृह सचिव, डीजी एनआईए सहित अधिकारियों के साथ बैठक भी की है।
दिल्ली अध्यक्ष परवेज अहमद को किया गिरफ्तार
रेड के दौरान पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का राष्ट्रीय अध्यक्ष ओएमएस सलाम (OMS Salam) और इसी संगठन का दिल्ली अध्यक्ष परवेज अहमद (Parvez Ahmed) को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने गिरफ्तार किया। इस बीच PFI के लोग छापेमारी के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन करने पर उतर आए। इसको देखते हुए दिल्ली में एनआईए ऑफिस की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई।
मुस्लिम महिलाओं के कपड़ों पर विवादित टिप्पणी करने वाले मौलाना जरजिस को वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बलात्कार के एक मामले में 10 साल सख्त सजा सुनाई है। इसके साथ-साथ मौलाना पर 10 हजार रुपए तक का जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं मौलाना के अधिवक्ता ने हाई कोर्ट जाने की बात कही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मौलाना जरजिस को एक महिला को निकाह का झाँसा देकर के उसके साथ बलात्कार करने के मामले में कोर्ट ने ये सजा सुनाई है। मौलाना को वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बुधवार (21 सितंबर 2022) को दोषी माना। उस पर आरोप था कि उसने महिला के साथ बलात्कार किया और उसके बाद उसकी वीडियो बनाकर उसे धमकी दी।
ये है पूरा मामला
पीड़ित महिला जैतपुरा थाना क्षेत्र की रहने वाली हैं। उसने मौलाना जरजिस के खिलाफ आरोप लगाया था कि साढ़े छह साल मौलाना ने महिला को निकाह का झाँसा देकर उसका दुष्कर्म किया और बाद में उसे धमकियाँ देने लगा। महिला ने बताया कि मौलाना ने बलात्कार के दौरान उसके अश्लील वीडियो भी बना लिए थे और उसी के आधार पर उसे ब्लैकमेल भी करता था।
पूरी घटना की जानकारी देते हुए महिला ने कहा कि मौलाना जरजिस हमेशा बनारस में तकरीर करने के लिए आता रहता था। उसी दौरान वह एक होटल में रुकता था। एक तकरीर के दौरान ही महिला का परिचय वर्ष 2013 में मौलाना से हुआ था। उसके बाद कई बार उससे मुलाकात हुई। इसके बाद जब भी मौलाना जरजिस बनारस आता तो महिला को होटल में बुलाता था।
पीड़िता के अनुसार निकाह के झाँसे के कारण वह होटल भी चली जाती थी। मौलाना ने महिला को कई बार होटल में बुलाकर बलात्कार किया और उसका अश्लील वीडियो भी बनाया। महिला ने बताया कि वीडियो के बाद तो वह जब भी बनारस आता तो वीडियो वायरल करने की धमकी देकर बलात्कार करता। यही नहीं 19 नवंबर 2015 को मौलाना महिला के घर जा पहुँचा और उसे एक कमरे में ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया।
उसकी धमकियों से परेशान होकर आखिरकार पीड़िता ने मौलाना जरजिस के खिलाफ दिसंबर 2015 को जैतपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराई।
बता दें कोर्ट में पेशी के दौरान मौलाना हँसता हुए अदालत परिसर में दिखाई दिया था, लेकिन सजा के बाद उसके चेहरे से हँसी गायब हो गई और मायूस होकर बैठ गया।
चेहरा दिखाने वाली लड़कियों पर फूटा था गुस्सा
गौरतलब है कि मौलाना जरजिस ने पिछले साल एक संबोधन दौरान चेहरा नहीं ढकने वाली लड़कियों के खिलाफ जहर उगला था। उसने इस दौरान लड़कियों के बेपर्दा घूमने पर पूरी कौम को मरा हुआ और आईसीयू में पड़ा बता रहा है। मौलाना के इसी संबोधन का एक वीडियो भी सामने आया था। इस वीडियो में मौलाना ने पीएम मोदी और सीएम योगी पर भी विवादित टिप्पणी की।
जिसमें मौलाना कहता है कि जलसों में लड़कियाँ ऐसे सज-धज के आती हैं, जैसे इनकी शादी हो और लड़के इसलिए आते हैं कि पसंद कर सकें किससे शादी करेंगे। मौलाना ने कहा कि ये सब देख उसे ऐसा लगता है, जैसे एक कु%$ के पीछे दस दस कु%& लगे हों। उसने कहा कि कितनी बार बताया जाए कि जिसकी बेटी, जिसकी बहन जिसकी माँ बेपर्दा घूमती है वह भड़** है।
हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल भारत बॉर्डर पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की 20वीं रिपोर्ट:
नेपाल और भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसंख्या और इबादतगाहों की संख्या में बढ़ोत्तरी के मुद्दे पर हमने बलरामपुर जिले में आस्था के प्रमुख केंद्र हनुमान गढ़ी मंदिर के महंत महेंद्र दास से बात की। यह मंदिर हनुमान गढ़ी नाम से है, जिसके वर्तमान महंत महेंद्र दास हैं। उन्होंने हमें अपना जवाब अपने आधिकारिक लेटर हेड पर लिख कर दे दिया। उन्होंने खुद के मंदिर के एक हिस्से को बदरुद्दीन नाम के एक अवैध कब्जेदार के कब्ज़े में बताया।
यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
रामजन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष का मंदिर भी लैंड जिहाद का शिकार
ऑपइंडिया से बात करते हुए हनुमान गढ़ी मंदिर, वीर विनय चौराहा बलरामपुर के प्रबंधक नरेश कुमार ने बताया कि यह मंदिर श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के महंत नृत्यगोपाल दास का मंदिर है। नरेश के मुताबिक वर्तमान में यहाँ के महंत महेंद्र दास है। उन्होंने बताया कि इस मंदिर के बड़ी हिस्से पर कुछ मुस्लिमों ने कब्ज़ा कर रखा है, जिसको वो लोग थोड़ा-थोड़ा करके कई वर्षों से छुड़वा रहे हैं।
मंदिर से सटी वो जमीन, जिस पर है बदरुद्दीन द्वारा कब्ज़े का आरोप
अदालतों का आदेश… फिर भी पुलिस-प्रशासन बेबस
महंत महेंद्र दास द्वारा ऑपइंडिया को दिए लिखित जवाब में कहा गया है कि नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर में अवैध कब्जेदार कोर्ट का भी आदेश नहीं मानते। इस नाफरमानी के पीछे महेंद्र दास ने प्रशासन के कुछ अधिकारियों को भी जिम्मेदार बताया।
उन्होंने लिखा कि हिन्दू मंदिर के महंत होने के नाते इस बात का वो स्वयं गवाह और भुक्तभोगी हैं कि इसी मंदिर की जमीन पर कुछ मुस्लिमों द्वारा अवैध कब्ज़ा हुआ है, जिसे कोर्ट के आदेश के बाद भी प्रशासन नहीं हटा पा रहा।
महंत नृत्य गोपाल दास द्वारा कब्जेदारी के विरोध में दायर केस
जमीनों पर कब्ज़े के लिए फिलिस्तीनी मॉडल
महंत महेंद्र दास के मुताबिक उनके मंदिर की जमीन पर कब्ज़ा कायम रखने के लिए फिलिस्तीनी मॉडल अपनाया गया है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार से फिलिस्तीन में औरतों और बच्चों को आगे कर दिया जाता है, वैसे ही मंदिर की जमीन पर कब्जा बनाए रखने के लिए फिलिस्तीनी सिस्टम अपनाया गया।
हनुमान गढ़ी मंदिर के महंत महेंद्र दास ने लिखित तौर पर बताया कि जब कई वर्षों की कागजी और कानूनी लड़ाई के बावजूद मुस्लिम पक्ष मंदिर की जमीन पर कब्ज़ा नहीं कर पाए, कोर्ट में हार गए तो उसी जगह पर औरतें और बच्चों को बिठा दिया। इसके पीछे इनका मकसद वही है – बच्चों से हत्या करवा कर नाबालिग कार्ड खेला जाए या औरतों से चारित्रिक लाँछन लगवा दिए जाएँ। नतीजतन मंदिर की जमीन पर मंदिर का पूर्ण कब्जा अभी तक नहीं हो पाया है।
महंत महेंद्र दास द्वारा ऑपइंडिया को भेजा गया पत्र
कब्जेदारी के फिलस्तीनी मॉडल में पत्रकार और प्रशासनिक लोग शामिल
महंत महेंद्र दास ने हमें बताया कि बलरामपुर में जमीनों पर कब्ज़े के फिलिस्तीनी मॉडल में औरतों और बच्चों के पीछे कुछ पत्रकार और प्रशासनिक लोग भी खड़े हैं। हमें दिए पत्र में उन्होंने लिखा है कि नेपाल बॉर्डर पर श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र में अवैध कब्ज़े में जितनी भी इबादतगाहें मौजूद हैं, वो उन्हें मुक्त करवाने का अभियान चलाएँगे। उन्होंने यहाँ तक कहा कि इस कार्य के लिए भले ही कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।
बलरामपुर पुलिस ने दिया था कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई का भरोसा
महंत महेंद्र दास ने हमें बताया कि ऑपइंडिया की ही पिछली प्रकाशित एक खबर में बलरामपुर पुलिस ने आधिकारिक ट्वीट करके कहा था कि अवैध कब्ज़ों पर कोर्ट के आदेशों का पालन करवाया जाएगा। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि ऐसे में नेपाल सीमा से कुछ ही दूरी पर मौजूद मंदिर पर दशकों से अवैध कब्ज़े को हटाने के मामले में वो इतनी टाल मटोल क्यों कर रही है?
बलरामपुर में हनुमानगढ़ी मंदिर का प्रबंधन देखने वाले नरेश कुमार ने ऑपइंडिया को बताया कि कोर्ट में केस जीतने के बाद खुद महंत नृत्य गोपाल दास ने बलरामपुर प्रशासन से मंदिर की जमीन पर अवैध कब्ज़े को हटवाने की माँग की। नरेश कुमार सहरावत के अनुसार इस माँग पर उच्चाधिकारीयों ने अधीनस्थों को निर्देश भी दिया।
इसके बाद नरेश ने हैरानी जताते हुए कहा कि जिस पत्र पर प्रशासनिक अधिकारी 17 सितम्बर 2022 को कब्ज़ा हटाने पर कार्रवाई को लेकर दस्तखत करते हैं, उसी के 2 दिन बाद उस कब्ज़े वाली जगह पर कई औरतों और बच्चों को शाहीन बाग़ जैसे अंदाज़ में बिठा दिया जाता है।
अवैध कब्ज़े पर कार्रवाई का पत्र
नरेश कुमार ने शक जताया कि प्रशासन के ही अंदर के किसी व्यक्ति ने कार्रवाई की ये सभी सूचना बदरुद्दीन पक्ष को लीक की होगी।
‘पिछली सरकारों में हुए कब्ज़े, हम करवाएँगे कार्रवाई’
ऑपइंडिया ने बलरामपुर शहर और नेपाल सीमा पर अवैध कब्ज़ों की शिकायत के मामले में बलरामपुर शहर के भाजपा विधायक पलटूराम से बात की। उन्होंने बताया कि जो भी अवैध कब्ज़े दिखाई दे रहे हैं, वो पिछली सरकारों की तुष्टिकरण की नीतियों के चलते हुए हैं। उनके अनुसार वर्तमान सरकार संजीदगी से कार्रवाई करवा रही है।
उन्होंने हमें बताया कि वो नेपाल सीमा के हालातों की जानकारी को शासन और प्रशासन तक अपने स्तर से पहुँचाऐगे और जल्द से जल्द इसके समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे। विधायक पलटू राम ने मीडिया में नेपाल सीमा से आ रही रिपोर्टों को चिंताजनक बताया।
गुजरात से आम आदमी पार्टी के एक नेता जगमाल वाला की वीडियो वायरल हो रही है। इस वीडियो में वह मंच पर खड़े होकर दारू की बातें कर रहे हैं। गुजरातियों को AAP नेता बता रहे हैं कि दारू कोई बुरी बात नहीं है। अगर शरीर में ताकत है तो इसे पी लेना चाहिए।
दारू का बखान करने वाले जगमाल वाला आम आदमी पार्टी की ओर से सोमनाथ विधानसभा सीट के प्रत्याशी बताए गए हैं। उनकी यह वीडियो बुधवार (21 सितंबर 2022) को हुई एक जनसभा की है जो 22 सितंबर तक वायरल हो गई।
वीडियो में वह गुजरातियों को कहते हैं कि दारू तो बड़े-बड़े डॉक्टर, आईएएस-आईपीएस अफसर भी पीते हैं। इनके अलावा इसका आनंद पूरी दुनिया उठाती है। सिर्फ गुजरातियों पर ही प्रतिबंध लगा दिया गया है।
वायरल क्लिप में उन्हें कहते सुना जा सकता है,
“दुनिया में 800 करोड़ लोग हैं और 196 देश हैं। 196 देशों में शराब बेचने की अनुमति है। भारत में भी 130-140 करोड़ लोग हैं। उन्हें दारू पीने की अनुमति है। ये शराबबंदी सिर्फ गुजरात में हैं जहाँ की आबादी 6.5 करोड़ हैं। इससे साबित होता है कि शराब बुरी चीज नहीं है। दिक्कत बस ये है कि शराब हमें न पीए। अगर हम शराब को पीएँ तो ये गलत नहीं है। लेकिन शराब हमको पीए तो ये गलत है। अगर आपमें ताकत है तो शराब पियो। ये बिलकुल गलत नहीं है। बड़े-बड़े डॉक्टर, आईपीएस अधिकारी, आईएएस अधिकारी शराब पीते हैं।”
जगमाल के ऐसे बयान के बाद भाजपा ने इस पर सवाल खड़े किए हैं और आम आदमी पार्टी नेता से माफी माँगने को कहा है। भाजपा की माँग है कि ऐसे गुजरात को बदनाम न करें और दारू को बढ़ावा न दें।
बॉलीवुड अभिनेत्री तापसी पन्नू पिछले दिनों अपनी फिल्म ‘दोबारा’ की आलोचनाओं के बाद अब एक बार फिर सुर्खियों में आ गई हैं। इस बार वे अपनी किसी फिल्म के कारण नहीं बल्कि अपने बर्ताव के कारण चर्चा में हैं। दरअसल, एक वीडियो सामने आई है जिसमें वे दिवंगत कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव को लेकर पूछे गए एक सवाल पर भड़कती दिख रही हैं।
अभिनेत्री तापसी पन्नू का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे पैपराजी कैमरामैन पर भड़कती नजर आ रही हैं। जब उनसे कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “अरे भाई साहब, आप एक मिनट, आप एक मिनट, आप हटिए, आप ऐसे मत करिए, थोड़ा हटिए, थोड़ा हटिए, पीछे हटिए।”
इसके बाद वे बिना जवाब दिए आगे बढ़ गईं। उनकी इस तरह की प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों को लगता है कि वे घमंडी हो गई हैं और कुछ लोगों को उन पर दवा आ रही है। एक यूजर ने तो यहाँ तक कह दिया कि अभिनेत्री तापसी पन्नू पूरी तरह से पागल हो गई हैं।
कुछ कट्टरपंथीयों ने भी मनाया जश्न
गौरतलब है कि कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव की मौत बुधवार (21 सितंबर 2022) को हुई। उनके निधन पर पीएम मोदी और सीएम योगी सहित कई दिग्गजों ने दुख जताया, लेकिन कुछ कट्टरपंथीयों ने जश्न मनाया। कई लोगों ने तो सोशल मीडिया पर उनको लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ भी की थीं।
‘मुल्ला इब्राहिम’ नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “राजू श्रीवास्तव एक धर्मांध व्यक्ति थे। वो एक नस्लवादी थे, इस्लाम विरोधी थे।” वहीं वसीम अकरम नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “अपने जीवन के अंतिम चरण में राजू श्रीवास्तव ने मुस्लिमों को गालियाँ दी। कॉमेडी के चेहरे के पीछे एक शैतान छिपा हुआ था।”
इसी क्रम में एक अन्य यूजर ने लिखा, “राजू श्रीवास्तव ने नए स्टैंड अप कॉमेडियनों को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हमने कुछ नहीं खोया है। Fu%k Him. उन्हें कॉमेडी की भावना के बारे में कुछ नहीं पता था, भले ही उन्होंने एकाध अच्छे चुटकुले मारे होंगे।”
तेलंगाना के वारंगल में राज्य सरकार के बंदोबस्त विभाग (Endowment Department) के एक अटपटे आदेश से हंगामा मच गया। दरअसल, अपने कार्यालय के तीन मंजिला निर्माण के लिए बंदोबस्त विभाग के अतिरिक्त आयुक्त ई श्रीनिवास राव (E Srinivas Rao) ने तीन मंदिरों को एक-एक करोड़ रुपए का योगदान देने को कहा है।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक, आदेश में वारंगल में भद्रकाली मंदिर, काजीपेट टाउन के मदिकोंडा गाँव में श्री सीतारामचंद्र स्वामी मंदिर और मुलुगु जिले के मेदारम गाँव के सम्मक्का-सरलम्मा जतारा आयोजकों का उल्लेख किया गया है। तीनों संस्थाओं को बंदोबस्त विभाग के उपायुक्त के नाम से एक ज्वॉइन्ट बैंक अकाउंट खोलने और उसमें राशि जमा करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही प्रत्येक मंदिर से एक करोड़ का योगदान करने को कहा गया है।
वहीं, भद्रकाली सेवा समिति के आयोजकों (Bhadrakali Seva Samithi Organizers) बी सुनील और बी वीरन्ना ने बंदोबस्त विभाग के फैसले का कड़ा विरोध किया। इसी तरह मेट्टू गुट्टा विकास समिति के सदस्यों ने भी राज्य सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई। इनके अलावा जनजातीय नेताओं ने वारंगल में बंदोबस्ती कार्यालय की तीन मंजिलों के निर्माण के लिए मंदिर के फंड से राशि माँगे जाने को गलत ठहराया है।
कई बार लूटा गया भद्रकाली मंदिर
जहाँ तक भद्रकाली मंदिर का सवाल है, पिछली शताब्दियों में बहुत लूटपाट और क्षति का सामना करने के बाद, मंदिर को 1950 के दशक में एक उत्साही भक्त और कुछ परोपकारी संपन्न व्यापारियों द्वारा बहाल किया गया था। बताते हैं कि 1950 में, गुजराती बिजनेस मैन श्री मगनलाल के साथ देवी उपासक श्री गणेश राव शास्त्री द्वारा भद्रकाली मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था।
वारंगल के भद्रकाली मंदिर को दक्षिण भारत के स्वर्ण मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। वहीं मंदिर की चालुक्य शैली की वास्तुकला भी प्रशंसनीय है। मंदिर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय एक सुनहरा रंग धारण करता है, इसलिए, इसे ‘दक्षिण भारत का स्वर्ण मंदिर’ भी कहा जाता है।
इंग्लैंड के हडर्सफ़ील्ड से एक 15 साल के स्कूली छात्र की हत्या का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि छात्र को चाकू से गोदा गया, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले में जाँच शुरू कर दी है। यह घटना नॉर्थ हडर्सफ़ील्ड ट्रस्ट स्कूल की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस अधिकारियों को बुधवार (21 सितंबर 2022) को दोपहर के लगभग 3 बजे के आस-पास एक फोन कॉल के माध्यम से घटना के बारे में पता चला। प्राथमिक सूचना में पुलिस को बताया गया कि वुडहाउस हिल, फारटाउन में एक बच्चे पर हमला हुआ है, वह गंभीर रूप से घायल है।
पुलिस का कहना है कि जब उनकी टीम घटनास्थल पर पहुँची तो पीड़ित छात्र की हालत बेहद गंभीर थी। उन्होंने इमरजेंसी में सर्जरी के लिए उसे सरकारी अस्पताल ‘लीड्स जनरल इंफरमरी (Leeds General Infirmary)’ भर्ती करवाया, मगर अस्पताल में इलाज के दौरान उसे मृत घोषत कर दिया गया।
नहीं हुई कोई गिरफ़्तारी
इस मामले में वेस्ट यॉर्कशायर पुलिस जाँच में जुट चुकी है। लेकिन मृत लड़के की पहचान को गुप्त रखा गया है। वहीं इस हत्या के संदर्भ में पुलिस द्वारा कोई गिरफ़्तारी भी नहीं की गई है। वरिष्ठ जाँच अधिकारी डीएस मार्क बोवेस (DS Marc Bowes) इस हत्या की जाँच कर रहे हैं।
बोवेस ने इस मामले में बताया कि उन्होंने कई गवाहों की पहचान की है। वह हर उस व्यक्ति की भी बात सुनेंगे, जिसके पास कोई जानकारी है। उन्होंने कहा, “हमारी जाँच अभी तक शुरुआती चरण में हैं और हम इस घटना के आसपास की पूरी परिस्थितियों को स्थापित करने के लिए व्यापक पूछताछ करेंगे।”
डीएस मार्क बोवेस ने कहा, “हम किर्कलीस जिले में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।” वहीं पुलिस ने इस मामले में सहयोग करने या जानकारी देने वाले किसी भी व्यक्ति को 101 या ऑनलाइन अपराध संदर्भ 13220521713 के माध्यम से एचएमईटी जासूसों से संपर्क करने के लिए कहा है।
इंग्लैंड के लेस्टर (Leicester) में हिंदुओं पर हमले के बीच इस्लामी स्कॉलर मोहम्मद हिजाब (Mohammed Hijab) को हिंदू धर्म का मजाक उड़ाते और मुस्लिमों को हिंदुओं पर हमला करने के लिए उकसाते हुए देखा गया। सोशल मीडिया इसका वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में वह नकाबपोश कट्टरपंथी मुस्लिमों के साथ बातचीत करते हुए दिखाई दे रहा है।
मोहम्मद हिजाब (Mohammed Hijab) अपने चाहने वालों के लिए यूट्यूब वीडियो भी बनाता है। काफी फेमस भी है वो कट्टरपंथियों के बीच। लेस्टर (Leicester) में हिंदुओं पर हमले के भड़कावे के लिए उसने ‘हिंदुत्व’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी किया।
स्थानीय हिंदुओं को सबक सिखाने के लिए और उन पर हमला करने के लिए यह मोहम्मद हिजाब ही था, जिसने कट्टरपंथी मुस्लिमों को उकसाया। उसके उकसावे के बाद वीडियो के अंत में सभी को जोर-जोर से अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाते हुए देखा जा सकता है।
Muslim fundamentalist Mohammed Hijab who previously had led violence against Jews in London, is now in #Leicester with a mob of masked men and planning similar assault on local Hindu community. We demand arrest of Mohammed Hijab immediately.@leicspolicepic.twitter.com/Nl8kmupY5b
वर्ल्ड हिंदू काउन्सिल (World Hindu Council) नाम के ट्विटर हैंडल पर इस वीडियो को शेयर किया गया है। उन्होंने लिखा, “मुस्लिम कट्टरपंथी मोहम्मद हिजाब ने इससे पहले लंदन में यहूदियों के खिलाफ कट्टरपंथियों को हिंसा के लिए उकसाया था। वह अब लेस्टर में नकाबपोश लोगों की भीड़ के साथ है और स्थानीय हिंदुओं पर हमले की योजना बना रहा है। हम मोहम्मद हिजाब की तुरंत गिरफ्तारी की माँग करते हैं।”
मोहम्मद हिजाब (Mohammed Hijab) की भड़काऊ भीड़ वाले वीडियो में आप एक कट्टरपंथी इस्लामी को सुन सकते हैं, “जब हम उनके पास होते हैं, तो वे (हिंदू) हमसे डरते हैं।” इस पर हिजाब ने कहा, “वे जानते हैं कि हम सच्चाई से अच्छे से वाकिफ हैं। इज्जत चाहिए तो इज्जत करना सीखो।”
भीड़ की सनक को देखते हुए मोहम्मद हिजाब ने इसके बाद धमकी देते हुए कहा, “हिंदुत्व (हिंदू), आप गैंगस्टर की तरह काम करने की कोशिश कर रहे हैं… फिर कभी उस तरह से बाहर न आएँ (लेस्टर में हिंदुओं के विरोध का जिक्र करते हुए)। क्या आप समझे? क्या वे फिर से बाहर आने वाले हैं?”
इसके बाद भीड़ अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाने लगती है। तभी मोहम्मद हिजाब फिर कहता है, “अगर हिंदुओं ने उनके साथियों (कट्टरपंथी मुस्लिमों) द्वारा की गई हिंसा का विरोध करने की कोशिश की तो वह और उनके समर्थक वहाँ मौजूद होंगे।”
एक इंस्टाग्राम पोस्ट में भी हिजाब को नकाबपोश इस्लामी कट्टरपंथियों की एक उन्मादी भीड़ का नेतृत्व करते हुए देखा गया था। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा था, “लेस्टर में गश्त के दौरान मुस्लिम।”
यहाँ भी मोहम्मद हिजाब (Mohammed Hijab) ने नास्तिकों और मजहब का त्याग करने वालों को हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ भड़काया। उसने कहा कि उन्हें हिंदुओं पर निशाना साधते हुए उन पर मजाक का एक पूरा वीडियो बनाना चाहिए।
मोहम्मद हिजाब के ट्वीट का स्क्रीनग्रैब
आपको बता दें कि सामुदायिक सुरक्षा ट्रस्ट (सीएसटी) ने मोहम्मद हिजाब को 2021 में एक प्रभावशाली इस्लामी यूट्यूबर बताया था। वह इससे पहले लंदन में इजरायल विरोधी प्रदर्शन का हिस्सा था, जिसमें उसने कुत्तों और यहूदियों को मारने की धमकी दी थी।
This video features Mohammed Hijab who tells a police inspector that if they don’t put the dogs away, he’ll kill them. Members of the march call for the blood of Jews.
एक वीडियो में मोहम्मद हिजाब एक पुलिस निरीक्षक से कहता है कि अगर वे कुत्तों को दूर नहीं रखेंगे, तो वह उन्हें मार डालेगा।
बता दें कि एशिया कप 2022 में भारत-पाकिस्तान मैच के बाद लेस्टर शहर में अशांति फैलाने के आरोप में 28 अगस्त से अब तक 47 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से दो लोगों को शनिवार (17 सितंबर 2022 ) और रविवार (18 सितंबर 2022) को गिरफ्तार किया गया था। लेस्टर पुलिस ने सोमवार (19 सितंबर 2022) को ट्वीट कर यह जानकारी दी थी।