‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गाँधी की वायरल होती तमाम तस्वीरों के बीच हाल में उनकी एक फोटो एक लड़की को गले लगाते हुए सामने आई। सोशल मीडिया पर लोगों ने उसे देख दावा किया कि ये तो वही लड़की (अमूल्या लियोना) है जिसने साल 2020 में असदुद्दीन ओवैसी के सामने सीएए के विरोध प्रदर्शनों में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए थे।
देख सकते हैं कि कैसे व्हॉट्सएप पर राहुल गाँधी की तस्वीर और अमूल्या की 2020 की तस्वीर को शेयर करके ये बताया जा रहा है कि राहुल गाँधी उस लड़की को गले लगा रहे हैं जो पाकिस्तान जिंदाबाद कह रही थी, जिसके खिलाफ देशद्रोह की धारा में मुकदमा दर्ज हुआ था।
दोनों तस्वीरों में लड़की का ‘हेयर स्टाइल’ एक जैसा होने की वजह से फोटो देख कर लड़की को अमूल्या ही मान लिया गया और देखते ही देखते ये तस्वीरें ट्विटर पर घूमने लगीं।
#WATCH Ruckus erupts at the protest rally against CAA&NRC in Bengaluru where AIMIM Chief Asaddudin Owaisi is present. A woman named Amulya at the protest rally says "The difference between Pakistan zinadabad and Hindustan zindabad is…". pic.twitter.com/FPh5Ccu3HD
हालाँकि सच क्या है? इसे पता लगाने के लिए ऑपइंडिया ने तस्वीर की छानबीन की। पड़ताल में ऑपइंडिया ने पाया कि हकीकत में राहुल गाँधी अमूल्या से नहीं मिले। उन्होंने जिसे भारत जोड़ो यात्रा के दौरान गले लगाया वो केसीयू की नेता मीवा एंडरेलियो (Miva Andreleo) हैं।
मीवा ने अपनी यह तस्वीर दो दिन पहले इंस्टाग्राम पर डाली थी। उन्होंने लिखा था कि ये दिन उनकी जिंदगी का सबसे अच्छा दिन था क्योंकि उनकी मुलाकात राहुल गाँधी से हुई।
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने राहुल गाँधी के साथ वाली वीडियो भी साझा की। इसमें वे उनके साथ चलते, उन्हें गले लगाते, उन्हें चूमते दिख रही हैं।
इन वीडियोज और तस्वीरों से ये साफ होता है कि राहुल गाँधी की मुलाकात यात्रा के दौरान अमूल्या से नहीं हुई बल्कि मीवा से हुई। वह उस केरल स्टूडेंट यूनियन की छात्र नेता हैं जो कि कॉन्ग्रेस की छात्र ईकाई है। केसीयू की स्थापना 1957 में हुई थी।
हिंदूफोबिक पादरी से राहुल गाँधी की मुलाकात
बता दें कि राहुल गाँधी अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान इससे पहले हिंदूफोबिक पादरी जॉर्ज पोन्नैया से मिले थे। वहाँ उनके मुँह पर पादरी हिंदू धर्म को अपमानित करता रहा, लेकिन उन्होंने एक शब्द नहीं कहा। ऐसे में जब सोशल मीडिया पर फेक दावा होना शुरू हुआ कि ये लड़की अमूल्या है तो लोगों को ज्यादा हैरानी नहीं हुई। लोग मान बैठे कि जब हिंदूफोबिक पादरी से राहुल धर्म का ज्ञान ले सकते हैं तो फिर देशविरोधी नारेबाजी करने वाली लड़की को लगाना अचंभित करने वाला नहीं है।
कट्टरपंथी संगठन PFI के निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे। बिहार की राजधानी पटना में उनकी रैली पर हमले की साजिश रची जा रही थी। ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ के गिरफ्तार सदस्यों से पूछताछ के दौरान ये खुलासा हुआ है। 12 जुलाई, 2022 (मंगलवार) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार विधानसभा के शताब्दी समरोह में पहुँचे थे। उस समय राज्य में नीतीश कुमार की जदयू और भाजपा के गठबंधन की सरकारी थी।
ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने PFI नेता सफीके पाएथ से पूछताछ के बाद ये खुलासा किया है। संगठन ने इसके लिए एक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया था, जिसमें ट्रेनिंग दी गई थी कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में कैसे हिंसा करनी है। साथ ही पोस्टरों-बैनरों के साथ कार्यक्रम को बाधित करने के लिए भी साजिश रची गई थी। आतंक की फंडिंग के लिए संगठन ने पिछले कुछ वर्षों में 120 करोड़ रुपए जुटाए थे, जिनमें से अधिकतर रकम कैश में थी।
इस रकम से देश भर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया जाना था। कई राज्यों और यहाँ तक कि विदेश से भी इसके लिए धन आया था। 15 राज्यों के 93 ठिकानों पर छापेमारी के बाद पुलिस और जाँच एजेंसियाँ इस संगठन की कमर तोड़ने में लगी हुई है। ED के साथ-साथ ‘राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA)’ और कई राज्यों की पुलिस इसमें शामिल है। अब तक इसके 106 कार्यकर्ता गिरफ्तार किए जा चुके हैं। NIA ने आतंकी गतिविधियों को लेकर संगठन के खिलाफ 5 मामले दर्ज किए हैं।
अक्टूबर 2013 में भाजपा के तत्कालीन प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की पटना में हुई रैली के दौरान बिहार की राजधानी में हुए सिलसिलेवार बम ब्लास्ट की घटनाएँ आज भी लोगों के जेहन में ताज़ा हैं। ‘इंडियन मुजाहिद्दीन’ और सिमी के आतंकियों ने इसे अंजाम दिया था। सिमी के कई लोग आज PFI में शामिल हैं। दिल्ली से संगठन के नेताओं परवेज अहमद, मोहम्मद इलियास और अब्दुल मुकीत को गिरफ्तार किया गया है। कट्टरपंथी संगठन के खिलाफ 2018 से ही मनी लॉन्ड्रिंग का मामला चल रहा है।
उत्तराखंड के ऋषिकेश की चिल्ला नहर से अंकिता भंडारी का शव बरामद हो गया है। पुलिस ने इस मामले में 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा पुलकित आर्य भी शामिल है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। उनके कहने पर पुलकित आर्य के रिजॉर्ट पर कल रात बुलडोजर भी चला।
समाचार एजेंसी एएनआई ने देर रात रिजॉर्ट पर हुई कार्रवाई की वीडियो शेयर की है। वहीं सीएम पुष्कर सिंह धामी के विशेष प्रधान सचिव अभिनव कुमार के हवाले से बताया कि अंकिता भंडारी की कथित तौर पर हत्या करने वाले पुलकित आर्य के स्वामित्व वाले ऋषिकेश के वनतारा रिजॉर्ट को उत्तराखंड सीएम पुष्कर सिंह धामी के आदेश पर तोड़ा जा रहा है।
#WATCH | Uttarakhand: Demolition underway on orders of CM PS Dhami, at the Vanatara Resort in Rishikesh owned by Pulkit Arya who allegedly murdered Ankita Bhandari: Abhinav Kumar, Special Principal Secretary to the CM
इस कार्रवाई के अलावा सीएम धामी ने उत्तराखंड के सभी रिजॉर्ट की जाँच करने के निर्देश दिए। उनके ट्विटर पर बताया गया कि मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जो रिजॉर्ट अवैध बने हैं या अवैधानिक रूप से संचालित हैं उनके विरुद्ध तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही प्रदेश में बने हर होटल, रिजॉर्ट, गेस्ट हाउस में काम करने वाले कर्मचारियों से उनकी स्थिति के बारे में पूछा जाए और शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए।
मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि प्रदेश भर में स्थित Hotel/Resort/Guest House आदि में कार्य करने वाले कर्मचारियों से भी उनकी स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की जाए। उससे संबंधित शिकायतों को गम्भीरता से लिया जाए।
बता दें कि उत्तराखंड के ऋषिकेश की रहने वाली अंकिता भंडारी पिछले 5 दिनों से लापता थीं। वह पुलकित आर्य के रिजार्ट में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी करती थीं। कथिततौर पर यहाँ उन्हें एक्स्ट्रा सर्विस देने को कहा गया था लेकिन जब उन्होंने बात नहीं मानी तो उनकी हत्या कर दी गई। इस हत्या मामले में पुलिस ने अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें रिजॉर्ट के संचालक पुलकित आर्य, प्रबंधक सौरभ भास्कर और सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ट्वीट कर कहा कि इस हृदय विदारक घटना से मन अत्यंत व्यथित है। उन्होंने आगे कहा, “दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने हेतु पुलिस उपमहानिरीक्षक पी रेणुका देवी जी के नेतृत्व में SIT का गठन कर इस गंभीर मामले की गहराई से जाँच के भी आदेश दे दिए हैं।”
आज प्रातः काल बेटी अंकिता का पार्थिव शव बरामद कर लिया गया। इस हृदय विदारक घटना से मन अत्यंत व्यथित है।
दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने हेतु पुलिस उपमहानिरीक्षक पी. रेणुका देवी जी के नेतृत्व में SIT का गठन कर इस गंभीर मामले की गहराई से जांच के भी आदेश दे दिए हैं।
उत्तर प्रदेश में महिलाओं पर हो रहे गंभीर अपराधों पर रोक लगाने के लिए प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने यूपी विधानसभा में एक विधेयक पास किया है। इस विधेयक के तहत अब इस तरह के आरोपितों को अग्रिम जमानत नहीं दी जाएगी जो महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार करते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सीएम योगी आदित्यनाथ की पहल पर यूपी विधानसभा में पेश किए गए इस बिल में महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराध करने वाले आरोपितों की अग्रिम जमानत खत्म करने का प्रस्ताव है। विधेयक सीआरपीसी (दंड प्रक्रिया संहिता) के प्रावधानों में बदलाव व संशोधन करना चाहता है।
बता दें कि इस विधेयक को योगी सरकार ने गुरुवार (22 सितंबर 2022) को विधानसभा में पेश किया था। विधेयक के मुताबिक, संशोधन के बाद यह प्रावधान होगा कि महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराध जैसे बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, यौन दुराचार के आरोपितों को अग्रिम जमानत नहीं मिल सकेगी। पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज आरोपितों को भी अग्रिम जमानत नहीं दी जाएगी।
जानकारी के अनुसार संशोधन विधेयक दंड प्रक्रिया संहिता और पॉक्सो अधिनियम की धारा 438 में बदलाव करने का प्रयास है। यूपी सरकार ने संशोधन विधेयक का प्रस्ताव देते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होते अपराधों में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत यह कदम उठाया गया है।
विधेयक में कहा गया, “महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होते अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के अनुसरण में यौन अपराधों में सबूतों का त्वरित संग्रह सुनिश्चित करने के लिए, ऐसे सबूतों को नष्ट होने से रोकने के लिए, सबूतों के विनाश की संभावना को कम करने और आरोपित को पीड़ित/गवाहों में भय पैदा करने से रोकने के लिए, दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 438 में संशोधन करने का निर्णय लिया गया है।”
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया, “महिलाओं से दुष्कर्म और बच्चों पर यौन हमलों वाले गंभीर अपराधों के प्रति वर्तमान कानून को और ज्यादा सख्त कठोर कर दिया गया है। दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के मकसद से इससे संबंधित अपराध की धाराओं में संशोधन किया गया है। अब ऐसे अपराधों में लिप्त अपराधियों की अग्रिम जमानत की व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है।”
गुजरात में विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश कॉन्ग्रेस का ट्विटर अकॉउंट हैक हो गया। इस बात की जानकारी पार्टी ने खुद अकॉउंट ठीक होने पर ट्वीट करके दी। गुजरात कॉन्ग्रेस के ट्विटर हैंडल से बताया गया कि किसी ने राजनैतिश मंशा से उनके अकॉउंट को हैक किया था। लेकिन तकनीकी टीम की मेहनत से अकॉउंट को दोबारा प्राप्त कर लिया गया है।
We Are Back !! કોઈએ રાજકીય કિનાખોરી રાખીને ગુજરાત કોંગ્રેસનું ટ્વીટર એકાઉન્ટ હેક કર્યું હતું. પરંતુ અમારી ટેક્નિકલ ટીમની મહેનતથી ગુજરાત કોંગ્રેસનું ટ્વિટર એકાઉન્ટ ફરી શરૂ થઇ ગયું છે. સડક,સંસદ અને સોશિયલ મીડિયા પર અમે લોકોનો અવાજ બુલંદ કરતા હતા અને કરતા રહીશું. pic.twitter.com/vUPezILw4Y
गुजरात कॉन्ग्रेस ने ट्विटर अकॉउंट सही होने के बाद लिखा- “We are back (हम वापस आ गए हैं)।” आगे बताया गया, “किसी ने राजनीतिक मंशा से गुजरात कॉन्ग्रेस का ट्विटर अकाउंट हैक कर लिया था। लेकिन हमारी तकनीकी टीम की मेहनत से गुजरात कॉन्ग्रेस का ट्विटर अकाउंट फिर से शुरू हो गया है। हम सड़कों पर, संसद में और सोशल मीडिया पर लोगों की आवाज उठाते रहे हैं और उठाते रहेंगे।”
Someone had hacked the Twitter account of @INCGujarat with political intent. But with the hard work of our technical team, our Twitter account has started again.
We have been and will continue to RAISE THE VOICE of the people ON THE STREETS, IN PARLIAMENT and ON SOCIAL MEDIA. pic.twitter.com/i1lQY2t5Zk
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, गुजरात कॉन्ग्रेस का ट्विटर हैक किए जाने के बाद अलग-अलग ट्वीट भी किए गए थे जिसे अकॉउंट ठीक होने के बाद हटा दिया गया। कथिततौर पर अकॉउंट 24 घंटों से ज्यादा के लिए हैक था। इस बीच पार्टी ने इस मसले को खूब भुनाया और शिकायत करने की धमकी भी दी।
कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया अध्यक्ष केयूर शाह ने इस प्रकार अकॉउंट हैक किए जाने को लेकर कहा कि गुजरात में कॉन्ग्रेस सोशल मीडिया के जरिए अच्छा प्रदर्शन कर रही है। इसलिए आवाज को रोकने के लिए ऐसा किया गया है। अगर जाँच में कोई राजनैतिक कोण निकल कर आया तो इसकी शिकायत की जाएगी।
मध्य प्रदेश के इंदौर में 7 साल की मासूम के साथ हैवानियत का मामला सामने आया है। वहाँ, सद्दाम नामक व्यक्ति ने मासूम बच्ची को चाकुओं से गोदकर मौत के घाट उतार दिया। स्थानीय लोगों ने आरोपित को पकड़कर पुलिस के हवाले किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर के आजाद नगर में रहने वाली 7 साल की मासूम बच्ची अपनी माँ की मौत के बाद नाना के यहाँ रह रही थी। पड़ोस में रहने वाला सद्दाम शुक्रवार (23 सितंबर 2022) की सुबह उसको उठाकर अपने घर ले गया था। इस दौरान, जब वह काफी देर तक नहीं दिखी तब उसके घरवालों ने खोजना शुरू किया।
बच्ची की तलाश कर रहे परिजनों को मोहल्ले वालों ने बताया कि बच्ची को सद्दाम के साथ देखा था। इसके बाद, बच्ची के परिजन समेत कई लोग सद्दाम के घर पहुँच गए। काफी देर तक आवाज लगाने के बाद भी सद्दाम घर का गेट खोलने के लिए तैयार नहीं हुआ।
घरवाले चिल्लाते रहे- ‘सद्दाम बच्ची को छोड़ दो।’ लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी। आखिर में स्थानीय लोगों ने मिलकर सद्दाम के घर का गेट तोड़ा तो उन्होंने देखा कि बच्ची खून से लथपथ है। सद्दाम उसकी हत्या कर चुका है।
घटना के बाद जब शव को पोस्टमार्टम के बाद घर लाया जा रहा था तब गुस्साए लोगों ने आजाद नगर थाने के बाहर पथराव कर दिया। भारी भीड़ के चलते लोगों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज तक करना पड़ा। लोग जाने को तैयार नहीं थे तब पुलिस के समझाने और कार्रवाई का आश्वासन देने के बाद लोग शांत हुए।
मासूम बच्ची की हत्या के आरोपित सद्दाम की गिरफ्तारी के बाद नगर निगम भी सक्रिय नजर आया और 5 घण्टे के अंदर ही आरोपित का घर तोड़ दिया गया है।
इस मामले में एडीसीपी जोन-1 जयवीर सिंह भदौरिया का कहना है कि आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित के परिजनों का कहना है कि सद्दाम विक्षिप्त है। हालाँकि, अभी तक पुलिस को उसका मेडिकल प्रमाण पत्र नहीं मिला है। पुलिस की पूछताछ में आरोपित सद्दाम बहकी हुई बात कर रहा है। वो कभी कहता है कि 5 साल की वो छोटी बच्ची उसे अच्छी लगती थी, तो कभी कहता है कि उसको नहीं पता कि उसने बच्ची को क्यों मारा।
हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल भारत बॉर्डर पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की 21वीं रिपोर्ट:
भारत नेपाल बॉर्डर पर हमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की सीमा जागरण मंच शाखा से जुड़े कुछ लोग मिले। हमने उनसे बॉर्डर के इस पार और उस पार के हालातों पर बात की। डेमोग्राफी बदलाव और इससे उपजी समस्याओं के विभिन्न मुद्दों पर हमने प्रान्त युवा प्रमुख विद्याभूषण और बलरामपुर जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश से बात की।
यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
विद्याभूषण और ओम प्रकाश दोनों ने सामूहिक रूप से स्वीकार किया कि नेपाल-भारत सीमा पर न सिर्फ मस्जिद, मदरसे और इबादतगाहों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है बल्कि एकतरफा मुस्लिम जनसंख्या भी तेजी से बढ़ी है।
नेपाल बॉर्डर पर अधिकतर गाँव मुस्लिम बहुल
प्रान्त युवा प्रमुख विद्याभूषण ने हमसे बात करते हुए कहा कि नेपाल बॉर्डर पर अधिकतर गाँव मुस्लिम बहुल हैं। इस लिस्ट में उन्होंने टंडवा, बालापुर, कनईडीह, रनियापुर, मोहकमपुर, चैनपुर का नाम लिया।
हवाला से आ रहे पैसे
विद्याभूषण ने बताया कि बॉर्डर इलाकों में हवाला के जरिए पैसे आ रहे हैं, जिसका एक बड़ा हिस्सा अपराध में लग रहा। उन्होंने बताया कि इससे जो हिस्सा बच जाता है, वो नल (UAE के मुहर लगी हुई) लगवाने जैसे समाजिक कार्यों में अपराधों को दबाने और छिपाने के लिए किया जा रहा है। विद्याभूषण के मुताबिक इस इलाके के लोग सऊदी ही नहीं बल्कि ईराक और ईरान में भी कमाने गए हैं।
5 KM भारत और इतने ही नेपाल के अंदर साजिश की पट्टी
भारत की सीमा से 5 किलोमीटर अंदर और इतना ही नेपाल का इलाका एक खास साजिश का शिकार हो रहा है – विद्याभूषण ने ही हमें इसके बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इसी 10 किलोमीटर में मुस्लिम आबादी बढ़ रही है। मदरसों, मस्जिदों और मज़ारों को विद्याभूषण ने ठिकानों के तौर पर सम्बोधित किया। उन्होंने ये माना कि यहाँ के मदरसों में बाहरी लोग भी भरे पड़े हैं।
बॉर्डर पर साजिश, प्रशासन मौन
विद्याभूषण के अनुसार जब कोई बाहरी व्यक्ति यहाँ आता है, तो बाकायदा साजिश के साथ उनके ID और अन्य कागजात बनवा दिए जाते हैं। उन्होंने इसको साजिश करार देते हुए ऐसे मामलों में प्रशासन की भूमिका मौन रहने वाली बताई।
विद्याभूषण के अनुसार प्रशासन तभी जागता है, जब कोई घटना घट जाती है। उन्होंने बताया कि अगर कोई प्रशासनिक अधिकारी बॉर्डर पर सब सही और सामान्य होना बता रहा, इसका मतलब है कि वो सच नहीं बोल रहा।
देश भर के अपराधियों का शेल्टर
विद्याभूषण ने हमें बताया कि देश के किसी भी हिस्से में अपराध करने वालों को नेपाल सीमा पर अक्सर शरण मिल जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए भी होता है कि विषम हालात में वो सीमा पार करके नेपाल में घुस जाते हैं। विद्याभूषण ने दावा किया कि दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में अपराध करने वाले कई अपराधी नेपाल सीमा पर शरण लिए हुए हैं।
सरकार एक्टिव न हो इसलिए ख़ामोशी
नेपाल सीमा पर साम्प्रदायिक तनाव न के बराबर होने का कारण विद्याभूषण ने एजेंसियों को उस तरफ से दूर रखने की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर छिपे असामाजिक तत्व इसलिए ख़ामोशी से पड़े हैं क्योंकि वो नहीं चाहते कि उन पर किसी सुरक्षा एजेंसी की नजर जाए। विद्याभूषण ने कहा कि वो जानते हैं कि जैसे ही कोई बड़ा कांड करेंगे, वैसे ही इस तरफ सरकार की नजर चली जाएगी और उनका भांडा फूट जाएगा।
मुस्लिम बाहुल्य होने की कगार पर बलरामपुर
विद्याभूषण के अनुसार जनसंख्या के पुराने रिकॉर्ड चेक किए जा सकते हैं कि कैसे इस पूरे इलाके में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है। पड़ोसी जिले सिद्धार्थ नगर को विद्याभूषण ने मुस्लिम बाहुल्य बताया। इसी के साथ उन्होंने कहा कि जिला बलरामपुर भी लगभग मुस्लिम बाहुल्य होने की कगार पर हैं।
विद्याभूषण
20 वर्षों से नगर निगम चुनाव का विजेता मुस्लिम
विद्याभूषण ने हमें आगे बताया कि अगर किसी को जमीनी स्तर पर मुस्लिम आबादी बढ़ने की जानकारी लेनी हो तो वो बलरामपुर नगर निगम के चुनावों से ले सकता है। उन्होंने 20 वर्ष पहले का उदाहरण देते हुए बताया कि कभी यहाँ हिन्दू विजेता हुआ करता था लेकिन पिछले 20 वर्षों से यहाँ नगर निगम का चुनाव केवल मुस्लिम ही जीत रहा।
लव जिहाद और मानव तस्करी
विद्याभूषण ने हमें बताया कि अगर सुरक्षा और ख़ुफ़िया एजेंसियाँ ठीक से जाँच करेंगी तो बॉर्डर इलाकों से बहुत कुछ निकल कर सामने आएगा। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं और ख़ास कर सीमा पर बसे थारू समुदाय की लड़कियों के साथ मानव तस्करी का अपराध चल रहा है।
विद्याभूषण के अनुसार तस्करी की शिकार होने वाली अधिकतर लड़कियाँ लव जिहाद से तस्करों के हाथों में फँस कर बाहरी देशों में बिक रहीं हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इसके अलावा पशुओं को नेपाल के रास्ते बांग्लादेश तक कटाई के लिए भेजा जा रहा है।
SSB के दम पर रुके सीमापार के कई अपराध
विद्याभूषण और एक अन्य स्थानीय नागरिक ने हमें बताया कि SSB और स्थानीय पुलिस की कार्यशैली में जमीन-आसमान का अंतर है। उन्होंने कहा कि SSB की तैनाती के बाद से सीमापार के कई अपराध रुके हैं। इसी के साथ उन सभी ने SSB का अपने प्रति व्यवहार मिलनसार और पारिवारिक जैसा बताया।
अधिकतर इबादतगाहें मानकों के विपरीत
विद्याभूषण ने हमें बताया कि बॉर्डर पर बन रहीं तमाम नई इबादतगाहें प्रशासनिक अधिकारियों की नजर में हैं लेकिन वो उन पर कोई कार्रवाई नहीं करते। उनका दावा है कि अधिकतर इबादतगाहें मानकों के विपरीत हैं और उनका नक्शा आदि पास ही नहीं हुआ है। विद्याभूषण ने सरकार से अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलने की आशा जताई।
संकट काल के लिए साजिश हैं इबादतगाहें
विद्याभूषण ने दावा किया कि बॉर्डर पर बन रहीं नई इबादतगाहों के पीछे भविष्य की बहुत बड़ी साजिश है। उन्होंने कहा कि साजिशकर्ताओं को भविष्य में देश के अंदर किसी गृहयुद्ध की उम्मीद है। उन्होंने ये भी बताया कि रेलवे स्टेशन के पास तक बनी मज़ारों से ये साजिशकर्ता भविष्य में किसी संकट काल में यातायात के संसाधनों पर हमला कर सकते हैं, जिसमें रेलवे स्टेशन को बम से उड़ाने जैसी साजिश भी हो सकती है।
इसी के साथ उन्होंने रोडवेज बस अड्डे के पास भी ऐसे साजिशकर्ताओं को सक्रिय बताया। विद्याभूषण के मुताबिक हाइवे के पुलों के पास बने अवैध इबादतगाह भविष्य में संकट काल में आवागमन रोकने की साजिश हैं।
पिछली सरकारों में तेजी से हुआ असंतुलन
सीमा जागरण मंच के जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि पिछली सरकारों की नीतियाँ काफी हद तक जिम्मेदार रहीं हैं सीमा के वर्तमान हालातों के लिए। उन्होंने कहा कि सीमा जागरण मंच का दायित्व देखते हुए वो प्रयास कर रहे हैं कि नेपाल सीमा पर मौजूद हिन्दू समाज को और सशक्त और सामर्थ्यवान बनाया जाए।
ओम प्रकाश ने हमें आगे बताया कि वो लोग सीमा पर रहने वाली थारू जनजाति को सेना और पुलिस में भर्ती करवाने के लिए विशेष ट्रेनिंग भी दिला रहे हैं।
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश और विद्याभूषण ने कहा कि सरकार को नेपाल बॉर्डर पर हो रही हरकतों पर विशेष चौकसी बरतनी चाहिए। उन्होंने इतिहास के कुछ उदारहण दिए कि कैसे वहाँ पर मिर्जा दिलशाद बेग और रिज़वान ज़हीर जैसे अपराधी पनप गए थे और मंगरे सिंह जैसे हिंदूवादी नेता कत्ल कर दिए गए।
दोनों ने हालाँकि यह भी माना कि योगी सरकार के आने के बाद काफी कुछ बदला है लेकिन उन्होंने सुरक्षा के लिहाज से और अधिक सक्रियता की आशा जताई। इन दोनों के अलावे इनके आस-पास मौजूद स्थानीय लोगों ने भी कहा कि वर्तमान सरकार में चीजें बदली हैं लेकिन और सुधार की जरूरत है।
पाकिस्तानी एक्टर फवाद खान (Fawad Khan) अपनी आगामी फिल्म ‘द लीजेंड ऑफ मौला जट्ट’ के प्रमोशन में जुटे हुए हैं। फवाद ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया है कि वह क्रिश्चियन बेल (Christian Bale) और आमिर खान (Aamir Khan) को कॉपी कर बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन (शारीरिक बदलाव) करना चाह रहे थे। हालाँकि, ऐसा करना उन्हें बहुत भारी पड़ा और उन्हें हॉस्पिटल तक में भर्ती होना पड़ा।
समथिंग हॉत (Something Haute) को दिए एक इंटरव्यू में फवाद ने खुलासा किया कि बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन ने उन्हें उनकी आगामी फ़िल्म ‘द लीजेंड ऑफ मौला जट्ट’ में काफी मदद की। लेकिन, अब वह दोबारा कभी भी इस बारे में नहीं सोचेंगे। उन्होंने कहा, “मैंने अपने साथ जो किया वह सही नहीं था। अब मैं कभी भी ऐसा नहीं करूँगा। मैंने कुछ ऐसी चीजें कीं जिनका मुझ पर बुरा प्रभाव पड़ा।”
उन्होंने यह भी कहा, “लोगों को पता होना चाहिए जब कोई भी बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन करने का प्रयास करता है तब इसके साइड इफेक्ट्स होते हैं। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ। मेरी किडनी ने काम करना बंद कर दिया था। जिसके बाद मुझे 10 दिन के लिए हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ा।”
फवाद ने यह भी बताया है कि उन्हें हॉस्पिटल से जल्दी ही छुट्टी मिल गई थी। लेकिन, पूरी तरह ठीक होने में उन्हें 3 महीने लग गए थे। उन्होंने यह भी कहा, “मुझे डायबिटीज था इसलिए वजन बढ़ाने की मेरी प्लानिंग ने मुझे बुरी तरह से बीमार कर दिया। फिल्म से पहले मेरा वजन लगभग 73-75 किलोग्राम था लेकिन फिर मेरा वजन 100 किलोग्राम हो गया था।”
फवाद का मानना है कि जो कुछ भी हुआ उसके पीछे उनकी सोच थी। वह क्रिश्चियन बेल और आमिर खान की नकल करना चाहते थे। जिस तरह दोनों स्टार्स अपनी फिल्म के लिए बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन करते हैं वैसा ही फवाद भी करना चाह रहे थे। लेकिन, उनका यह सोचना उन पर भारी पड़ गया।
उन्होंने आगे कहा, “मुझे कम चलने और टेंशन फ्री रहने के लिए कहा गया था। जिस तरह से मैंने किया वह सही तरीका नहीं था। चूँकि मेरे पास टाइम बहुत कम था इसलिए जो कुछ भी हुआ परिस्थितियों के कारण हुआ। मैं क्रिश्चियन बेल या आमिर खान नहीं हूँ। लेकिन मैंने कोशिश की है कि उन्होंने जैसा किया वैसा मैं भी करूँ। जैसा मैंने किया है इस तरह किसी को भी नहीं करना चाहिए।”
गौरतलब है कि, ब्रिटिश एक्टर क्रिश्चियन बेल ने अपनी फिल्म ‘वाइस’ में डिक चेनी का रोल निभाने के लिए करीब 18 किलो (40 पाउंड) वजन बढ़ाया था। यही नहीं, वह अपने रोल के लिए मेकअप रूम में घंटों वयस्त रहते थे। इस फिल्म में उनकी बेहतरीन एक्टिंग के लिए उन्हें ऑस्कर अवार्ड दिया गया था। वहीं, आमिर खान ने ‘दंगल’ के लिए 30 किलोग्राम वजन बढ़ाया था।
एक्टर अखिल अय्यर (Akhil Iyer) ने कॉन्ग्रेस पार्टी के ‘राजनीतिक स्वार्थ’ के लिए उनकी फोटो का उपयोग किए जाने पर नाराजगी जताई है। साथ ही, उन्होंने कहा है कि वह कॉन्ग्रेस के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। दरअसल, कॉन्ग्रेस कर्नाटक में भाजपा सरकार के खिलाफ ‘40% सरकार’ अभियान चला रही है। इसी अभियान के लिए जारी पोस्टर में कॉन्ग्रेस ने अखिल अय्यर की फोटो का उपयोग किया है।
अखिल अय्यर ने कॉन्ग्रेस द्वारा उनकी फोटो का उपयोग करने पर विरोध जताते हुए ट्वीट किया, “मैं यह देखकर हैरान हूँ कि मेरे चेहरे का उपयोग गैर-कानूनी तरीके और मेरी अनुमति के बिना ‘40% सरकार’ के लिए किया जा रहा है। कॉन्ग्रेस के इस अभियान से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। मैं इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करूंगा।”
इसके साथ ही उन्होंने, राहुल गाँधी, सिद्धारमैया और कर्नाटक कॉन्ग्रेस के ट्विटर हैंडल को टैग करते हुए इस पोस्टर को देखने के लिए कहा है।
I am appalled to see that my face is being used illegally and without my consent for “40% Sarkara” – an @INCIndia campaign that i have nothing to do with.
कॉन्ग्रेस द्वारा जारी किए गए अखिल अय्यर की तस्वीर वाले इस पोस्टर में लिखा है, “40% सरकार की लालच ने 54,000 से अधिक युवाओं के करियर को खराब कर दिया है।” इस पोस्टर में ‘40% सरकार’ अभियान से जुड़ने और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने को भी कहा गया है।
अखिल अय्यर की जिस तस्वीर को कॉन्ग्रेस ने उनकी अनुमति के बिना अपने पोस्टर में उपयोग किया है, उस तस्वीर को अखिल के फेसबुक पेज से लिया गया है। अखिल ने इस फोटो को जुलाई 2014 में अपलोड किया था। चूँकि, यह फोटो अखिल अय्यर की है, इसलिए किसी भी राजनीतिक कार्य या प्रचार में उपयोग करने से पहले उनसे अनुमति लेनी चाहिए थी। कॉन्ग्रेस तो लेकिन कॉन्ग्रेस है, अनुमति लेना उचित नहीं समझा।
बता दें कि कर्नाटक कॉन्ग्रेस ने इस महीने की शुरुआत में बसवराज बोम्मई सरकार के खिलाफ राज्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए ‘40% सरकार’ कैम्पेन शुरू किया था। इस दौरान, कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया ने राज्य सरकार को “लुटेरों और घोटालेबाजों” से भरी ‘40% सरकार’ करार दिया था।
40% ಸರ್ಕಾರದ ಭ್ರಷ್ಟಾಚಾರ ಬಯಲು ಮಾಡಲು ನಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಕೈಜೋಡಿಸಿ.
844-770-40-40 ಗೆ ಕರೆ ಮಾಡಿ ಭ್ರಷ್ಟಾಚಾರದ ಬಗ್ಗೆ ದೂರು ನೀಡಿ https://t.co/n5QTYaDmz7 ಗೆ ಭೇಟಿ ನೀಡಿ ನಿಮ್ಮ ದೂರನ್ನು ದಾಖಲು ಮಾಡಿ.
इस कैम्पेन के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी की ओर से एक वेबसाइट 40percentsarkara.com भी लॉन्च की गई है। साथ ही, राज्य के लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए कहा है। इसके अलावा, उन्होंने भ्रष्टाचार के बारे में सूचित करने के लिए फोन नंबर 8447704040 भी लॉन्च किया है।
गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस सरकार का ‘40% सरकार’ अभियान विवादों से घिरा रहा है। इससे पहले कॉन्ग्रेस ने अपने पोस्टर में मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई की फोटो के साथ ‘PayCM’ लिखे हुए पोस्टर चिपकाए थे। इस पोस्टर में सीएम बोम्मई की फोटो QR कोड (क्यूआर) के रूप में दिखाई गई। इस क्यूआर कोड को स्कैन करने के बाद यूजर 40percentsarkara.com वेबसाइट पर पहुँच जाता है। पोस्टर में PayCM शब्द ऑनलाइन पेमेंट वॉलेट Paytm के लोगो (Logo) की तरह लिखा गया है। पोस्टर सामने आने के बाद कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई ने इसे लेकर जाँच के आदेश भी दिए हैं।
बेंगलुरु नगर निगम ने इन पोस्टरों के संबंध में बेंगलुरु पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इसके बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ पोस्टर लगाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। PayCM पोस्टर्स को लेकर मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा है कि कॉन्ग्रेस का उद्देश्य उनकी और राज्य की छवि खराब करना है।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के गंगापार इलाके से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में कुछ बदमाशों को एक युवती के साथ जबरन छेड़छाड़ करते देखा गया। वीडियो वायरल होते ही क्षेत्र के एसएसपी ने फौरन इस वीडियो की जाँच के आदेश दिए। पड़ताल के बाद पुलिस ने आरोपितों का पता लगाया।
कथिततौर पर, छेड़छाड़ का यह वीडियो 2 दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में एक युवती अपने होने वाले पति के साथ कहीं जा रही थीं, लेकिन बीच में कुछ बदमाशों ने उन्हें रोक लिया और युवती के साथ अश्लील हरकतें करने लगे।
प्रयागराज में मंगेतर के सामने ही युवती से छेड़छाड़
– 2 दबंगों ने पकड़कर जबरदस्ती की, पीड़िता गिड़गिड़ाती रही| पर दबंग छेड़ते रहे।
– युवती ने ये भी कहा कि मेरे पापा से बात कर लो, मेरी सगाई हो चुकी है।
वीडियो में दिखाई दे रहा है कि सुनसान जगह पर युवती से जब ये बदमाश छेड़छाड़ कर रहे थे, तब उसका मंगेतर बदमाशों के पैरों में गिरकर अपनी होने वाली पत्नी के लिए भीख माँग रहा है। फिर भी मनचले नहीं माने। युवती भी अपने आप को छुड़ाने के लिए भीख माँगती दिखाई दे रही हैं। तभी एक बदमाश युवती के दुपट्टे को छीनने लगता है।
युवती की हो चुकी है सगाई
बताया जा रहा है कि युवती मऊआइमा थाना क्षेत्र की रहने वाली है और उसकी सगाई सोरांव के रहने वाले युवक के साथ हुई है। इंटरनेट पर वायरल हो रहे वीडियो में भी युवती बदमाशों से कहती हैं, “हमारी सगाई हो चुकी है, चाहे घर में पता कर लो…” लेकिन ये सुनने के बाद भी मनचलों युवती से बदतमीजी करते रहे।
वसीक, जिकरिया और मासूक हैं आरोपित
पुलिस ने इस मामले में महिला से अभद्रता करने का केस दर्ज किया है। वहीं एसपी गंगापार अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि केस दर्ज करने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अभियुक्तों की पहचान कर ली हैं। आरोपितों के नाम वसीक, जिकरिया और मासूक हैं।
पुलिस का मानना है कि इस मामले में एक आरोपित शायद मुंबई भाग गया है। उसके अलावा 1 अन्य आरोपित अभी फरार है। 1 को पकड़ लिया गया है उसका नाम मासूक है। पुलिस मामले की जाँच में सक्रिय है और लगातार छानबीन कर रही हैं। एसपी गंगापार अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि किसी भी सूरत में आरोपितों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।