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‘ट्रैफिक जाम था, दौड़कर कोर्ट आई हूँ’ : अदालत पहुँचने में लेट हुईं महिला वकील, जज ने ट्रैफिक SP से जवाब माँगा

इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक महिला वकील केस की सुनवाई के दौरान ट्रैफिक जाम के कारण लेट हुईं तो न्यायाधीश ने ऑर्डर दिया कि इस मामले में ट्रैफिक एसपी आकर अदालत को जवाब दें। मामला बुधवार (22 सितंबर 2022) का है। अदालत ने ट्रैफिक एसपी से कोर्ट में 23 सितंबर को पेश होने को कहा है।

जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की खंडपीठ ने प्रयागराज के ट्रैफिक एसपी से ट्रैफिक जाम से निजात पाने के लिए योजनाएँ बनाकर लाने को कहा। उन्होंने पूछा कि ट्रैफिक जाम से शहर को बचाने के लिए क्या इंतजाम हैं? इतना ट्रैफिक क्यों लगता है? महिला वकील को 1 घंटे इस ट्रैफिक में क्यों फँसना पड़ा?

बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में बुधवार को तैयबा नाम की महिला के केस की सुनवाई चल रही थी। तैयबा ने अपने शौहर से गुजारा भत्ते की माँग पहले निचली अदालत में की थी। इसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की। केस में तैयबा की वकील सहर नकवी हैं। बुधवार को केस की तीसरी सुनवाई हाई कोर्ट में जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की बेंच के समक्ष होनी थी। लेकिन नकवी समय से कोर्ट पहुँचने में लेट हो गई। जिसकी वजह उन्होंने ट्रैफिक जाम को बताया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार को वकील सहर नकवी को उच्च न्यायालय के पास ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा। उन्हें अपनी कार उच्च न्यायालय के गेट से लगभग 1 किमी दूर खड़ी करनी पड़ी। वहाँ से उन्हें दौड़ कर कोर्ट तक आना पड़ा। शाम 4 बजे से पहले कोर्ट नहीं पहुँचने के कारण अदालत ने यह केस खारिज कर दिया। महिला वकील को केस खारिज होने की जानकारी मिली, तो उन्होंने अदालत से इस मामले की सुनवाई आगे करने की गुहार लगाई।

उन्होंने (नकवी) अदालत को जानकारी दी कि वह नोटिस की कॉपी व दूसरे दस्तावेज अपने साथ लाई हैं। उन्हें कोर्ट पहुँचने में सिर्फ इसलिए देरी हुई क्योंकि डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट तक जबरदस्त जाम लगा हुआ था। वह करीब एक घंटे तक जाम में फँसी रहीं। जाम से निकलने की उम्मीद खत्म होने पर वह अपनी कार बीच रास्ते में छोड़कर पैदल ही कोर्ट आई हैं।

जेलर पर तानी पिस्तौल, जान से मारने की धमकी दी: 19 साल पुराने केस में मुख्तार अंसारी को 7 साल की जेल, जुर्माना साथ में

माफिया मुख्तार अंसारी को 19 साल पुराने एक केस में 7 साल की जेल हुई है। बहुजन समाज पार्टी से विधायक रह चुके अंसारी पर आरोप था कि उसने साल 2003 में एक जेलर से गाली-गलौच की, उनके ऊपर पिस्तौल तानी और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। कथिततौर पर उसने जेलर एसके अवस्थी को कहा था- ‘आज जेल से बाहर निकलो, तुमको मरवा दूँगा’

मालूम हो कि इस पूरे मामले में पहले निचली अदालत ने अंसारी को बरी कर दिया था। हालाँकि बाद में राज्य सरकार की अपील को मंजूर करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने मामले को सुना और इस पुराने केस पर अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने अंसारी को आईपीसी की धारा 253, 504, 506 के तहत दोषी पाया।

कोर्ट ने मुख्तार को पाया दोषी, 7 साल की सजा

कोर्ट ने मुख्तार अंसारी को धारा 353 के तहत दोषी करार देते हुए 2 साल की सजा दी, 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। धारा 504 के तहत उसे दो साल की सजा दी गई, 2000 रुपए जुर्माना लगाया गया। इसके साथ आईपीसी की धारा 506 के तहत अंसारी को 7 साल की सजा व 25000 का फाइन लगाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सारी धाराओं में मिली सजाएँ अंसारी पर एक साथ चलेंगी।

19 साल पहले जेलर को दी धमकी

साल 2003 में लखनऊ की डिस्ट्रिक्ट जेल में बंद मुख्तार अंसारी से कुछ लोग मिलने आए थे, उस समय एस के अवस्थी वहीं तैनात थे। अपनी ड्यूटी निभाते हुए अवस्थी ने सबकी तलाशी करवाई और उन्हें अंसारी से मिलने को मना कर दिया। अंसारी इस बात पर भड़का। उसने अपने सहयोगी की बंदूक को निकाला। जेलर को गाली दी, उनपर रिवॉल्वर तानी और धमकाते हुए कहा- “आज तुम जेल से बाहर निकलो तुम्हें मरवा दूँगा।”

जेल ने बाद में इस संबंध में एफआईआर दर्ज करवाई। आगे इस मामले में विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर हुई। इसके बाद इस मामले को निचली अदालत में सुना गया। जहाँ कोर्ट ने अंसारी को बरी कर दिया। लेकिन राज्य सरकार की अपील पर यह मामला दोबारा खुला। हाईकोर्ट को बताया गया कि कैसे अंसारी राज्य में बाहुबलियों में शामिल नाम है। उसके नाम से सामान्य जन तो क्या सरकारी अधिकारी भी काँपते थे।

इसी पूरे केस पर हाई कोर्ट ने फिर से मामले को सुना और पाया कि जेलर ने पहले अपने पहले बयान (2003) में मुख्तार पर यही आरोप लगाए थे। लेकिन बाद में वह मुकर गए क्योंकि उनका अगला बयान दर्ज ही 10 साल बाद (2014) हुआ। इस अंतराल में वह रिटायर भी हो चुके थे और उन्हें अंसारी के आपराधिक इतिहास का भी अच्छे से मालूम चल चुका था, जिसके कारण उन्हें अपनी व अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता होना लाजिमी था।

मुख्तार अंसारी पर केस और एक्शन

मुख्तार अंसारी के खिलाफ 55 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। इनमें से 40 तो गाजीपुर के एक ही थाने में दर्ज हैं। उसके ऊपर दंगा भड़काने, हत्या, डकैती, अपहरण जैसे संगीन मामले दर्ज हैं। अधिकांश मामलों में ट्रायल चल रहा है। योगी सरकार लगातार उसके विरुद्ध कार्रवाई कर रही है। अब तक उसकी 527 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति पर शिकंजा कसा है। उसके करीबियों की 246 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति जब्त हो चुकी है।

300 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया विप्रो ने… ‘मूनलाइटिंग’ करके कमा रहे थे एक्स्ट्रा पैसे

सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी विप्रो लिमिटेड (Wipro Limited) ने अपने 300 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। कंपनी ने दावा किया है कि ये तमाम कर्मचारी विप्रो की प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के लिए चोरी छुपे काम किया करते थे। बता दें कि पिछले कुछ समय में ‘मूनलाइटिंग (moonlighting)’ के खिलाफ ये किसी कंपनी की सबसे बड़ी कार्रवाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बुधवार (21 सितंबर 2022) को अखिल भारतीय प्रबंधन संघ (एआईएमए) के राष्ट्रीय सम्मेलन में विप्रो के चेयरमैन ऋषद प्रेमजी (Rishad Premji) ने इस मामले पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि विप्रो कंपनी के पास ऐसे किसी भी कर्मचारी के लिए कोई जगह नहीं है, जो विप्रो से सैलरी लेते हुए प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के साथ भी काम करते रहते हैं।

विप्रो के चेयरमैन ऋषद प्रेमजी ने कहा:

“कर्मचारी अपने दूसरे या सप्ताहांत के काम के बारे में संगठन के साथ पारदर्शी ढंग से बातचीत कर सकते हैं। हमने लेकिन 300 ऐसे कर्मचारियों की खोज की, जो प्रत्यक्ष प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के लिए काम कर रहे थे।”

बता दें कि यदि कोई कर्मचारी एक समय में एक से अधिक कंपनी में कार्य करता है तो उसे ‘मूनलाइटिंग’ कहा जाता है।

क्या है मूनलाइटिंग?

मूनलाइटिंग (moonlighting) यानी एक समय में एक से अधिक कंपनी के लिए काम करना। वर्क फ्रॉम होम के कारण (जो कोविड के दिनों के बाद से इंटरनेट आधारित कंपनियों के लिए सुचारू ढंग से काम चलाते रहने का एक आदर्श सा बन गया) बहुत सारे कर्मचारी मूनलाइटिंग के पक्ष में रहते हैं। कंपनी से मिलने वाली सैलरी के अलावे वो एक्स्ट्रा काम करके कुछ अधिक कमाने की सोच रखते हैं।

विप्रो के चेयरमैन ऋषद प्रेमजी (Rishad Premji) ने हाल ही में इसको लेकर एक ट्वीट भी किया। ‘मूनलाइटिंग’ की तुलना उन्होंने धोखाधड़ी से की। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “तकनीक उद्योग में मूनलाइटिंग करने वाले लोगों के बारे में बहुत सारी बकवास है। सादा और सरल भाषा में यह धोखा है।”

ऋषद प्रेमजी से उलट टेक महिंद्रा के सीईओ सीपी गुरनानी ने ‘मूनलाइटिंग (moonlighting)’ का समर्थन किया और लिखा, “समय के साथ बदलते रहने के लिए मूनलाइटिंग जरूरी है।” विप्रो के चेयरमैन ने यह भी बताया कि मूनलाइटिंग को धोखाधड़ी का नाम देने के बाद उन्हें बहुत सारे हेट मेल भी प्राप्त हुए हैं, लेकिन इसके बाद भी वे अपनी बात पर अडिग हैं।

‘मुझको मेरी बीवी से एक बार मिलवा दो’ : कन्हैयालाल का गला रेतने वाला रियाज NIA के सामने गिड़गिड़ाया, रोते हुए पूछा- घरवाले क्यों नहीं मिलने आ रहे

राजस्थान के उदयपुर में 28 जून 2022 को टेलर कन्हैयालाल की बेरहमी से हत्या करने वाले मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद अब अपने परिवार से मिलने के लिए तड़प रहे हैं। रियाज राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के अधिकारियों से बार-बार यही बात पूछ रहा है कि क्या उनके परिवार से कोई उनसे मिलने नहीं आया? रियाज ने रोते हुए कहा कि वह अपनी बीवी से एक बार मिलना चाहता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 16 सितंबर 2022 को पहली बार NIA की टीम दोनों को उदयपुर लेने पहुँची। कड़ी सुरक्षा के बीच देर रात उन्हें भूपालपुरा थाने में लाया गया। थाने में अधिकारियों ने रियाज और गौस से व्हाट्सएप समेत पाकिस्तान कनेक्शन और पीएफआई संगठन से जुड़े कई सवाल पूछे।

96 घंटे की पूछताछ के बाद 20 सितंबर 2022 को NIA टीम ने हत्यारों को जयपुर से अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में शिफ्ट कर दिया। यहाँ दोनों को अलग अलग बैरक में रखा गया है।

इस दौरान रियाज एनआईए के अधिकारियों के सामने रियाज काफी रोया और उनसे मिन्नतें कीं कि उसे एक बार उसकी बीवी से मिला दिया जाए। उसने कहा कि अब तक जेल में क्यों उससे मिलने परिवार का कोई सदस्य नहीं आया? क्या वह एक बार भी अपने करीबी रिश्तेदारों से मिलने का अधिकार नहीं रखता?

बता दें कि कन्हैयालाल की हत्या मामले में गिरफ्तार 9 आरोपितों में से केवल गौस मोहम्मद के परिजन ही उससे मिलने आए हैं बाकी किसी के परिजनों ने उनसे मुलाकात नहीं की।

उदयपुर में कन्हैयान लाल की हत्या

गौरतलब है कि उदयपुर के कन्हैयालाल ने इस साल 15 जून को पुलिस में शिकायत दी थी और सुरक्षा की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है। इसके बाद 28 जून 2022 को मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद कपड़ा सिलवाने के बहाने से कन्हैयालाल की दुकान में घुसे थे और उनकी हत्या को अंजाम दिया गया था।

इस दौरान एक उनका वीडियो बना रहा था, जबकि दूसरा अपना नाप देने का नाटक कर रहा था। वीडियो में दिख रहा था कि दोनों ने कन्हैया को निशाना तब बनाया जब वह नाप लेने में व्यस्त हो गए। इसके बाद ही इन्होंने अचानक से उनके ऊपर हमला किया। कन्हैया चीखते रहे, लेकिन आरोपितों ने दबोच कर उनका सिर कलम कर दिया। खून से लथपथ कन्हैया ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। दुकान में मौजूद 2 कर्मचारियों ने कन्हैयालाल को बचाने की कोशिश की थी। लेकिन उन दोनों पर भी हमला कर दिया गया। इस दौरान एक कर्मचारी ईश्वर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए।

जैसे कश्मीर से भगाया, वैसे ही लेस्टर से ‘हिंदू कुत्तों’ का सफाया करो: 9 परिवारों का पलायन, कट्टरपंथियों के आतंक के कारण घरों से हिंदू-प्रतीक गायब

इंग्लैंड के लेस्टर (Leicester) शहर में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा हिंदुओं और मंदिरों पर हमला करने के बाद से वहाँ डर का माहौल है। इस बात का खुलासा हेनरी जैक्सन रिसर्च फेलो शार्लोट लिटिलवुड (Charlotte Littlewood) ने GB News से बातचीत में किया है। उन्होंने बताया कि लेस्टर में हिंदू परिवार दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं। 9 हिंदू परिवारों ने पलायन कर लिया है। वहाँ कट्टरपंथी मुस्लिमों के आतंक से वे अपने घरों के बाहर हिंदू-प्रतीक तक नहीं लगा सकते।

लिटिलवुड ने एंकर को बताया कि लेस्टर में हिंदू डर के साए में जी रहे हैं। उन्हें उनके घरों के बाहर हिंदू-प्रतीक तक नहीं लगाने दिया जा रहा है। डर की वजह से 9 हिंदू परिवारों ने पलायन कर लिया है। लिटिलवुड ने 5.22 मिनट के वीडियो में (50 सेकंड से 1.51 मिनट तक) कहा, “हमने देखा कैसे कट्टरपंथी लोगों ने हिंदुओं के खिलाफ सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की। हिंदू भारतीयों के खिलाफ इतनी बड़ी संख्या में इन लोगों ने प्रोटेस्ट किया। इससे हिंदू बेहद डरे हुए हैं।”

इस मामले से जुड़ी जानकारी देते हुए उन्होंने न्यूज चैनल को (4.05 से 5.10 मिनट के बीच) बताया, “लेस्टर में हमने जो सड़कों पर हिंसा देखी, उसके लिए कट्टरपंथियों का आह्वान किया गया था। हमने खुद 30 से 200 लोग सड़कों पर उतरे देखे। इनमें आधे से ज्यादा लेस्टर के बाहर से बुलाए गए थे।”

लिटिलवुड ने आगे कहा, “सोशल मीडिया की बात करें तो विभिन्न सोशल मीडिया अकॉउंट्स से हजारों पोस्ट किए गए थे। इनमें हिंदुओं को काटने के लिए, उनका सफाया करने के लिए कहा गया था। पोस्ट में कहा जा रहा था, ‘जैसे हमने हिंदुओं का कश्मीर से सफाया किया वैसे ही यहाँ भी करो।’ इसके अलावा पोस्ट में लिखा था, इन (हिंदू) कुत्तों को कुचलो/दबाओ।

लिटिलवुड ने कहा कि इस तरह के संदेशों का बार-बार दिखना बेहद दुखद है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस्लामी कट्टरपंथी समूह द्वारा ये सब निस्संदेह सुनियोजित ढंग से किया गया। इन सबका नेतृत्व उन कट्टरपंथी इन्फ्लुएंसरों ने किया जिनके यूट्यूब पर लाखों सब्सक्राइबर हैं। ये लोग अपने समुदाय के लोगों को लेस्टर बुला रहे थे। इनका अगला टारगेट लंदन में स्थित भारत उच्चायोग हो सकता है।

लेस्टर में हिंदू विरोधी हिंसा

बता दें कि इंग्लैंड के लेस्टर (Leicester) में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा हिंदू लोगों पर हमला करने के मामले में एडम यूसुफ (Adam Yusuf) नाम के शख्स को एक साल की सजा सुनाई गई है। 18 सितंबर 2022 को लेस्टर में हिंदू लोगों पर हमले (मेनस्ट्रीम मीडिया इसे प्रदर्शन बता रही) में चाकू ले जाने का जुर्म कबूल करने के बाद लेस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उसे एक साल की जेल की सजा दी है। इस मामले में 2 दिन में सुनाई गई यह दूसरी सजा है।

इससे पहले 20 वर्षीय ऐमॉस नोरोन्हा (Amos Noronha) को प्रतिबंधित हथियार रखने का दोषी पाया गया था। ऐमॉस नोरोन्हा को सोमवार (20 सितंबर 2022) को 10 महीने जेल की सजा सुनाई गई थी। शहर में अशांति फैलाने के आरोप में 28 अगस्त से अब तक 47 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से दो लोगों को शनिवार (17 सितंबर 2022 ) और रविवार (18 सितंबर 2022) को गिरफ्तार किया गया था।

हिंदू लड़की हो लेकिन मदरसे में पढ़ो, इस्लामी कपड़े पहनो… वरना उठा लूँगा: UP पुलिस ने 6 को दबोचा, लड़कियों ने डर के मारे छोड़ दिया था स्कूल जाना

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में मुस्लिम युवकों द्वारा परेशान करने पर हिन्दू समाज की 3 नाबालिग बहनों ने पढ़ाई छोड़ दी। आरोप है कि इन तीनों बहनों पर मदरसे में पढ़ने का दबाव बनाया जा रहा था। इसी के साथ उन्हें स्कूल की यूनिफॉर्म पहनने पर भी टोका जाता था। पीड़िताओं ने आरोपितों पर छेड़छाड़ करने और गंदे मैसेज भेजने का भी आरोप लगाया है। पुलिस ने FIR दर्ज करके 6 आरोपितों को जेल भेज दिया है।

यह मामला उन्नाव जिले के थानाक्षेत्र मौरांवां के गाँव लच्छी खेड़ा का है। यहाँ पीड़िता के पिता ने पुलिस ने तहरीर देकर खुद को 3 बेटियों का पिता बताया है, जो राजवाड़ा स्कूल में पढ़ती हैं। पीड़ित पिता के मुताबिक वो गाँव में लगभग 4 साल से रहता है और तब से मुस्लिम समुदाय के जीशान, गुड्डू, अतीक, राजा और 4-6 अन्य लड़के उनकी बेटियों को परेशान करते हैं। शिकायत में बताया गया है कि उनकी नाबालिग लड़की से 15 सितम्बर को ट्यूशन से आते समय न सिर्फ अश्लील हूटिंग की गई बल्कि शिकायत करने पर आरोपित मारपीट पर भी आमादा हो गए।

पीड़िता के पिता ने दावा किया है कि उनकी बेटियों के मोबाइल में आरोपितों द्वारा भेजे गए अश्लील मैसेज मौजूद हैं। उनका ये भी कहना है कि आरोपित पक्ष उन्हें झूठे केस में भी फँसाने की धमकी देता रहता है। अपनी शिकायत में पीड़ित पिता ने पुलिस से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने IPC की धारा 354 (ग), 506 व IT एक्ट की धारा 67 के तहत केस दर्ज कर लिया है। इस FIR में नामजद आरोपितों जीशान, राजा और अतीक के अलावा 4 अन्य अज्ञात दर्ज हैं। ऑपइंडिया के पास इस मामले की FIR कॉपी मौजूद है। इन मामले में अब तक पुलिस 6 को गिरफ्तार कर चुकी है।

एक वायरल वीडियो में लड़की आरोप लगा रही है कि उसे अलग-अलग नम्बरों से मैसेज और धमकियाँ आती हैं। लड़की ने कहा कि आरोपित उससे कहते हैं कि जैसे वो कहें, वैसे रहो क्योंकि उसे अपनी मर्जी से नहीं रहने दिया जाएगा। पीड़िता ने ये भी कहा कि उसे जिले के SP और DM से भी मिलने नहीं दिया गया।

पीड़ित लड़कियों के अनुसार आरोपित युवक हर दिन उनका रास्ता रोक कर – मुस्लिमों वाले कपड़े पहनो, मदरसे में पढ़ने जाओ नहीं तो तुम लोगों को घर से उठा लेंगे – जैसी धमकियाँ देते थे। पीड़ित तीनों बहनें 11वीं कक्षा, कक्षा 8 और कक्षा 6 में पढ़ती हैं।

हैदराबाद से ‘दबाव’ वाला फोन

ऑपइंडिया ने पीड़ित पिता से बात की। उन्होंने बताया कि उनका गाँव मुस्लिम बहुल हैं, जहाँ लगभग 60% मुस्लिम और 40% हिन्दू हैं। इसी के साथ उन्होंने बताया कि FIR के बाद पुलिस ने कई गिरफ्तारियाँ की हैं। इस कारण से उनके ऊपर काफी दबाव आ रहा है। पीड़िता के पिता ने कैफ नाम के एक आरोपित के पक्ष में हैदराबाद से भी फोन आने की जानकारी दी और कहा कि पुलिस ने उनके घर के आगे सुरक्षाकर्मी लगा रखे हैं।

‘मौलवी नहीं चाहते महिलाओं को अधिकार मिले’ : ईरान में उग्र हुआ हिजाब विरोधी प्रदर्शन, पुलिस ने 8 को गोली मारी, हजारों गिरफ्तार

इस्लामी मुल्क ईरान में हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन ने गुरुवार (21 सितम्बर 2022) तक देशव्यापी रूप ले लिया। उग्र हो चला ये प्रदर्शन अब 15 अलग-अलग शहरों में फैल चुका है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और जनता के बीच भिड़ंत भी हो रही है। बताया जा रहा है कि अब तक कुल 8 प्रदर्शनकारी पुलिस की गोली का शिकार हो चुके हैं। वहीं दूसरी ओर हजारों लोगों की गिरफ्तारी की भी खबर है। प्रदर्शनकारी ईरान सरकार से हिजाब को अनिवार्य के बजाए वैकल्पिक बनाने की माँग कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक 1 हजार से अधिक प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए हैं। प्रदर्शनकारी मौलवियों के खिलाफ नारे बुलंद करते हुए उन पर आँख मूँद कर बैठने का आरोप लगा रहे हैं। सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरे लोगों ने चेतावनी दी है कि सरकार मौलवियों के भरोसे ज्यादा दिन नहीं टिकने वाली। इसी प्रदर्शन में ये भी कहा जा रहा है कि मौलवी नहीं चाहते कि ईरान की महिलाओं को उनका अधिकार मिले।

पुलिस के विरोध में ईरान में गरशाद ऐप लॉन्च

हिजाब विरोधी प्रदर्शन में महिलाओं की भारी तादाद है। उनका कहना है कि हिजाब के कारण उन्हें जान क्यों गँवानी पड़े ? प्रदर्शनकारी महिलाओं के समर्थन में ईरान के युवाओं ने गरशाद नाम का एक ऐप भी शुरू किया है। इस ऐप में मोरल पुलिसिंग का विरोध किया गया है। मात्र 5 दिनों में ये ऐप 10 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड हो चुका है।

बताया जा रहा है कि इसी ऐप के तहत प्रदर्शनकारी सीक्रेट मैसेज भेज रहे हैं। ईरान सरकार ने राजधानी तेहरान में इंटरनेट बंद करवा दिया है और इसी के साथ वहाँ इन्स्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब को भी ब्लॉक कर दिया गया है। फिलहाल इस पूरे हंगामे पर ध्यान न देते हुए ईरान के सबसे बड़े मजहबी नेता अयातुल्लाह अयातुल्ला खामेनेई ने बुधवार (21 सितम्बर 2022) को अपनी सभा में हिजाब का जिक्र तक नहीं किया।

ईरान में महसा अमिनी की हत्या

गौरतलब है कि ईरान में हिजाब न पहनने के कारण पुलिस हिरासत में ली गई एक महिला महसा अमिनी की मौत हो गई थी, जिसके बाद हजारों की संख्या में महिलाएँ विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। इन महिलाओं ने इस्लामी मुल्क के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को तानाशाह बताते हुए उसकी मौत की भी दुआ की और इससे संबंधित पोस्टर लहराए।

बिहार के बेगूसराय में फिर से चली गोलियाँ: अपराधी थाने के आगे फायरिंग कर फरार, पुलिस कह रही – तलाशी में छापेमारी कर रहे

बिहार के बेगूसराय जिले में एक बार फिर से गोलीबारी की घटना होने की सूचना है। इस बार पुलिस स्टेशन के आगे गोली चलाई गई है। बताया जा रहा है कि गोली चला कर आरोपित हथियार लहराते हुए मौके से निकल गए।

मिली जानकारी के मुताबिक इस बार कुल 3 अलग-अलग जगहों पर गोलियाँ चली हैं। बेगूसराय जिले की पुलिस हालाँकि बस एक जगह फायरिंग होने की जानकारी दे रही है। घटना बुधवार (21 सितम्बर 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना के दिन दोपहर लगभग 2:30 पर 4 आरोपितों ने फायरिंग की घटना को अंजाम दिया। गोलियाँ शाम्हो-बेगूसराय मार्ग पर चलाई गई थीं। ये सभी बदमाश स्कूटी और बाइक पर सवार थे।

बताया जा रहा है कि गोलियाँ चलाने वाले बदमाश नशे में थे। इसी के साथ दावा ये भी किया जा रहा है कि बदमाशों ने मटिहानी पुराना थाना चौक से 100 मीटर उत्तर से हवाई फायरिंग की। कहा जा रहा है कि उस दौरान उनके हाथों में हथियार दिख रहे थे। आरोप है कि बदमाशों ने किसी अंडा बेचने वाले को निशाना बनाया था।

मिली जानकारी के अनुसार बेगूसराय के ही मटिहानी प्रखंड के सामने स्थित केएल उच्च विद्यालय के मुख्य द्वार पर गोली चला कर आरोपित बेगूसराय की तरफ भाग निकले। कहा ये भी जा रहा है कि पुलिस ने आरोपितों का पीछा किया लेकिन उन्हें पकड़ने में नाकाम रही।

थाना प्रभारी मटियानी के अनुसार गोली चलाने वाले स्थानीय निवासी हैं, जिनकी तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है। गोलीबारी के चश्मदीदों के अनुसार आरोपितों ने लगभग छह राउंड गोलियाँ चलाई हैं। वहीं जिले के पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने एक स्थान पर गोली चलने की बात कह कर आरोपितों को चिन्हित करने और कार्रवाई जारी होने की जानकारी दी है।

गौरतलब है कि इससे पहले बेगूसराय में 13 सितंबर 2022 को बाइक सवार दो बदमाशों ने 40 किलोमीटर के दायरे में 11 लोगों को गोली मारी थी। इनमें से चंदन कुमार नाम के एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि अन्य कई लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने इन दोनों बदमाशों को साइको बताया था। पुलिस के मुताबिक आरोपित अपना दबदबा बनाने के लिए भय फैलाना चाहते थे।

हाजीपुर में भी हुई थी फायरिंग

बेगूसराय की तरह बिहार के ही हाजीपुर जिले में 18 सितंबर 2022 की रात बाइक सवार दो बदमाशों ने कई राउंड फायरिंग करके फरार हो गए थे। इस घटना के बाद लोग दहशत में आ गए थे और वे अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे थे।

कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI का राष्ट्रीय और दिल्ली अध्यक्ष गिरफ्तार: 11 राज्यों में छापेमारी, दबोचे गए 100 से ज्यादा

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने टेरर फंडिंग और आतंकी गतिविधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जाँच एजेंसियों ने गुरुवार (22 सितंबर 2022) सुबह 11 राज्यों में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के टॉप लोगों के घरों और दफ्तरों पर छापेमारी की।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का राष्ट्रीय अध्यक्ष ओएमएस सलाम और इसी संगठन के दिल्ली अध्यक्ष परवेज अहमद को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने गिरफ्तार कर लिया है। पीएफआई के लोग छापेमारी के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन करने उतर गए हैं। इसको देखते हुए दिल्ली में एनआईए ऑफिस की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, जाँच एजेंसियों ने राज्यों में प्रदेश पुलिस के साथ मिलकर 100 से ज्यादा PFI कैडर्स को गिरफ्तार किया है।

एजेंसियों ने केरल के मलप्पुरम जिले से पीएफआई के चेयरमैन ओएमएस सलाम को उठाया। पार्टी के लोग सलाम के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।

इस कार्रवाई के बाद कर्नाटक, केरल में पार्टी के लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्नाटक पुलिस ने मंगलुरु में एनआईए की छापेमारी का विरोध कर रहे पीएफआई और एसडीपीआई के लोगों को हिरासत में ले लिया है।

वहीं, असम पुलिस ने राज्य भर में पीएफआई से जुड़े 9 लोगों को हिरासत में लिया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने एएनआई को बताया कि कल (21 सितंबर 2022) रात असम पुलिस और एनआईए ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए गुवाहाटी के हाटीगाँव इलाके में पीएफआई से जुड़े राज्य भर में 9 लोगों को हिरासत में लिया।

इसके अलावा NIA ने तमिलनाडु में कोयंबटूर, कुड्डलोर, रामनाद, दिंडुगल, थेनी और थेनकाशी समेत कई जगहों पर PFI से जुड़े बड़े लोगों के आवास पर रेड की है। छापेमारी के खिलाफ पीएफआई के 50 से ज्यादा लोग पार्टी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे।

बता दें कि इससे पहले 18 सितंबर 2022 को एनआईए (NIA) ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के 23 ठिकानों पर छापेमारी की थी। जाँच एजेंसी ने ये छापेमारी कराटे प्रशिक्षण केंद्र के नाम पर संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) द्वारा ट्रेनिंग कैंप चलाए जाने के मामले में की थी।

एनआईए ने तब आंध्र प्रदेश के कुरनूल, नेल्लोर, कडपा, गुंटूर और तेलंगाना के निजामाबाद में संदिग्धों के घर व बिजनेस परिसरों की तलाशी भी ली थी। जाँच एजेंसी को इन तमाम जगहों पर संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर ही छापेमारी की गई थी।

पीएफआई और आतंक का इतिहास

पीएफआई का हिंसा फैलाने का काफी पुराना इतिहास है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के मद्देनजर दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों और देश भर में दंगे की जाँच के दौरान पीएफआई की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। साथ ही, पीएफआई के कई सदस्यों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार भी किया गया था।

इसके अलावा, नवंबर 2020 में कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने देश के विभिन्न हिस्सों में दंगे और हिंसा उकसाने के आरोपित किसानों के सरकार विरोधी प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया था। उसने प्रदर्शनकारियों को संविधान के संरक्षण के लिए संघर्ष करने के लिए कहा था।

‘गाय काटना मजहबी अधिकार’ पर सुप्रीम कोर्ट में हारा था मुस्लिम पक्ष, अब स्कूल में बुर्का/हिजाब पर कर्नाटक AG ने कहा – आर्टिकल 25 के तहत यह अधिकार नहीं

कर्नाटक बुर्का विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा कि यूनिफॉर्म की अनिवार्यता किसी भी छात्र या छात्रा के धार्मिक/मजहबी अधिकारों का हनन नहीं है। कर्नाटक सरकार के महाधिवक्ता (AG: Advocate General) ने कोर्ट को यह भी बताया कि ऐसे कदम से शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी प्रकार के मज़हबी कपड़े पहन कर आने से रोक लगेगी, जिसमें हिजाब भी शामिल है। उच्चतम न्यायालय में यह सुनवाई बुधवार (21 सितम्बर 2022) को हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये सुनवाई जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच कर रही है। इसी सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) प्रभुलिंग नवदगी ने दलील देते हुए कहा कि हिजाब समर्थक तमाम छात्राएँ इसे स्कूल के बाहर पहन सकती हैं। समान यूनिफॉर्म को कर्नाटक सरकार के महाधिवक्ता ने एकता और अनुशासन के लिए बेहद जरूरी बताते हुए कहा कि इससे पढ़ाई का अच्छा माहौल तैयार होता है।

वहीं हिजाब के समर्थन में बहस कर रहे वकीलों ने आर्टिकल 25 का उल्लेख करते हुए कोर्ट को बताया कि इसे पहनना मुस्लिम छात्राओं का ‘मज़हबी अधिकार’ है। इन्हीं वकीलों ने हिजाब की माँग को भी आर्टिकल 19 के तहत ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ करार दिया।

‘मज़हबी अधिकार’ या ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ वाली दलील के जवाब में कर्नाटक सरकार के महाधिवक्ता ने साल 1958 में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का हवाला देते हुए बताया कि कैसे तब बकरीद में गाय की कुर्बानी को जायज ठहराने की माँग उठाते हुए उसे मजहबी अधिकार बताया गया था, जिसे मुख्य न्यायाधीश सहित 5 जजों की बेंच ने ख़ारिज कर दिया था।

कर्नाटक सरकार के महाधिवक्ता ने अपनी दलील में आगे बताया कि साल 1958 के बाद सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न मौकों पर धार्मिक/मजहबी अधिकारों के स्वतंत्रता की व्याख्या की है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ये बता चुका है कि हर मज़हबी गतिविधि को धार्मिक/मजहबी अधिकारों की स्वतंत्रता के नाम पर लागू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

महाधिवक्ता ने कहा कि शिक्षा में समानता स्थापित करने के लिए क्लास 10 तक के सभी बच्चों को मुफ्त में यूनिफॉर्म देने का फैसला किया है। इसी मामले में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने दलील देते हुए कहा कि क्या इसी को धार्मिक/मजहबी अधिकारों की स्वतंत्रता कहा जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट में ही मुस्लिम नमाज़ और हिन्दू हवन करना शुरू कर दें? उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक/मजहबी अधिकारों को मिलाने का विरोध भी किया।

उडुप्पी के जिस संस्थान से बुर्का विवाद की शुरुआत हुई थी, वहाँ के शिक्षकों ने इसी सुनवाई के दौरान अपने वकील आर वेंकटरमानी के माध्यम से कहा कि स्कूल में धार्मिक/मजहबी प्रतीकों की लड़ाई से वहाँ पढ़ाई का माहौल खराब होता है। अध्यापकों का पक्ष रखते हुए एक अन्य वकील डी शेषाद्रि नायडू ने कहा कि धर्म/मजहब बच्चों के दिल में होना चाहिए और उन्हें धार्मिक/मजहबी विवादों से दूर रह कर सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में 8 दिनों से चल रही यह सुनवाई अब अपने अंतिम दौर में है। इन 8 दिनों में 6 दिनों तक हिजाब समर्थक वकीलों ने अपना पक्ष कोर्ट में रखा था। बाकी 2 दिनों में कर्नाटक सरकार ने अपने पक्ष से सुप्रीम कोर्ट को अवगत करवाया है।