अमेरिकी स्पेस एजेंसी नेशनल ‘एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA)’ का ‘डार्ट (Double Asteroid Redirection Test – DART)’ मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। डार्ट मिशन को यह निर्धारित करने के लिए तैयार किया गया था कि क्या एक अंतरिक्ष यान पृथ्वी की ओर तीव्र गति से आ रहे एस्टेरॉयड की दिशा को बदलने में सक्षम है। सवाल था कि क्या आगे भी इस तकनीक से अपने ग्रह को बचाया जा सकता है?
इतिहास में यह पहली बार है, जब प्लैनेटरी डिफेंस टेस्ट (Planetary Defense Test), यानी DART मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। अब भविष्य में किसी भी एस्टेरॉयड को खत्म करने में किया जा सकेगा, क्योंकि पृथ्वी को सबसे ज्यादा खतरा एस्टेरॉयड से है। डार्ट मिशन के तहत मंगलवार (27 सितंबर, 2022 ) सुबह 4.45 मिनट पर एस्टोरायड डिडिमोस (Didymos) के चंद्रमा जैसे पत्थर डाइमॉरफोस (Dimorphos) से टकरा कर टेस्ट पूरा किया गया। नासा ने अपने ट्विटर हैंडल पर इसका वीडियो भी शेयर किया है।
IMPACT SUCCESS! Watch from #DARTMIssion’s DRACO Camera, as the vending machine-sized spacecraft successfully collides with asteroid Dimorphos, which is the size of a football stadium and poses no threat to Earth. pic.twitter.com/7bXipPkjWD
NASA के मुताबिक, DART ने एस्टोरायड के चंद्रमा जैसे पत्थर डाइमॉरफोस को निशाना बनाया। डिडिमोस (Didymos) का कुल व्यास 2560 फीट (780 मीटर) है। डाइमॉरफोस इसके चारों ओर चक्कर लगाता हुआ दिख रहा है। उसका व्यास 530 फीट (160 मीटर) का है। खास बात यह है कि इन दोनों से ही पृथ्वी को कोई खतरा नहीं था। इस बात की पुष्टि इस मिशन में स्पेस एजेंसी की वन वे ट्रिप ने की है। उनके अनुसार, एस्टेरॉयड का रास्ता बदलने के लिए उससे स्पेसक्राफ्ट को टकराया जा सकता है। इस तकनीक को ‘कायनेटिक इम्पैक्ट’ कहा जाता है।
बता दें कि इस मिशन को अंजाम देने से पहले स्पेसक्राफ्ट करीब 10 महीने स्पेस में रहा। इस मिशन में टकराव का असर देखने के लिए जेम्स वेब स्पेस और हबल समेत कई टेलीस्कोप और कैमरा स्पेसक्रॉफ्ट को ट्रैक कर रहे थे। NASA के अनुसार, प्लैनेटरी डिफेंस स्ट्रेटेजी के हिस्से के रूप में एस्टेरॉयड डाइमॉरफोस के साथ DART का प्रभाव पृथ्वी की ओर आ रहे डाइमॉरफोस से गृह को सुरक्षित करने की तकनीक को दिखाता है।
मुंबई में एक मुस्लिम पति ने अपनी हिंदू पत्नी की हत्या इसलिए कर दी क्योंकि मृतका ने बुर्का पहनने से इनकार कर दिया था। पुलिस की रिपोर्ट में जो आरोप लगाया गया है, उसके अनुसार पत्नी रुपाली ने इस्लामी रीति रिवाज़ से रहने से इनकार कर दिया था।
बताया जा रहा है कि आरोपित पति मोहम्मद इकबाल शेख ने पहले अपनी पत्नी रुपाली का गला रेता फिर मौके से फरार हो गया। केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने इक़बाल शेख को गिरफ्तार कर लिया है। घटना सोमवार (26 सितम्बर 2022) की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना तिलक नगर इलाके की है। रुपाली से पहले भी इकबाल ने एक शादी की थी, जिससे उसको बच्चे नहीं हुए। इस वजह से इकबाल ने अपनी पहली पत्नी को छोड़ दिया था। इसके बाद इकबाल ने रुपाली से लव मैरिज की, जिससे उसे एक बेटा हुआ। बेटा होने के बाद रुपाली और इकबाल में अक्सर झगड़े होने लगे और कुछ दिनों बाद दोनों अलग-अलग रहने लगे।
जब घटना घटी तो पुलिस में शिकायत मृतका की बहन ने दी। मृतका की बहन का कहना है कि इक़बाल और उसका परिवार अक्सर रुपाली पर बुर्का पहनने और इस्लामी तौर-तरीकों से रहने का दबाव बनाया करता था, जिसका रुपाली विरोध करती थी।
बताया जा रहा है कि दोनों के बीच मनमुटाव की वजह भी यही थी। अलग रहने के दौरान भी हालाँकि दोनों फोन पर बात किया करते थे। सोमवार को इकबाल ने रुपाली को फोन करके अपने घर मिलने के लिए बुलाया था।
आरोप है कि घर पर मिलने के थोड़ी देर के बाद ही दोनों में फिर से झगड़ा शुरू हो गया। इस दौरान रुपाली ने नाराज होकर इकबाल शेख से तलाक लेने की इच्छा जताई। तलाक की बात सुन कर इक़बाल रुपाली को घर से खींच कर गली में ले गया। बताया जा रहा है कि इस दौरान इक़बाल ने रुपाली का गला छुरे से रेत दिया।
रुपाली की चीखें सुन कर आस-पास के लोग जमा हुए पर तब तक इकबाल फरार हो चुका था। रुपाली की मौके पर ही मौत हो गई थी। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने इकबाल को कुछ ही देर में गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में इकबाल ने बताया कि वो अपनी बीवी को मना रहा था लेकिन वो झगड़ा कर रही थी, जिससे नाराज होकर उसने रुपाली को मार डाला। पुलिस इंस्पेक्टर विलास राठौर के मुताबिक मृतका रुपाली की उम्र 23 साल थी। उन्होंने कहा कि घटना रात 10 बजे की है, जिसके बारे में गिरफ्तार आरोपित से पूछताछ चल रही है।
महाराष्ट्र के पूर्व उप-मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता छगन भुजबल (NCP leader Chhagan Bhujbal) ने माँ सरस्वती को लेकर विवादित बयान दिया है। छगन भुजबल ने स्कूलों में माँ सरस्वती की फोटो लगाने और पूजा करने पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि माँ शारदा और सरस्वती ने मात्र 3 प्रतिशत लोगों को ही शिक्षा दी है। उनके इस बयान पर भाजपा ने सवाल उठाए हैं।
दरअसल छगन भुजबल सोमवार (26 सितंबर, 2022) को यशवंतराव चव्हाण सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि स्कूलों में माँ सरस्वती और शारदा माता की तस्वीर लगाई जाती है, जिन्हें हमने कभी देखा ही नहीं और ना ही उन्होंने कुछ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि माँ सरस्वती ने अगर पढ़ाया भी होगा तो सिर्फ 3 प्रतिशत आरएसएस के लोगों को ही शिक्षा दी होगी, हमें शिक्षा से दूर रखा।
उन्होंने आगे कहा, “स्कूलों से माँ सरस्वती की तस्वीरें हटा देनी चाहिए। उनकी पूजा क्यों करनी है? स्कूलों में सावित्रीबाई फुले, महात्मा ज्योतिबा फुले, भीमराव अंबेडकर, छत्रपति शाहू महाराज और कर्मवीर भाऊराव पाटिल की तस्वीरें लगाई जानी चाहिए। इन हस्तियों की वजह से हमें शिक्षा और अधिकार मिले हैं। इसलिए, इनकी पूजा कीजिए। ये आपके देवता हैं। इनके विचारों की पूजा होनी चाहिए। बाकी देखेंगे बाद में।”
छगन भुजबल के इस बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) हमलावर है। भाजपा विधायक राम कदम ने इस बयान पर छगन भुजबल से माफी माँगने को कहा है। राम कदम ने कहा है कि अभी भुजबल ने स्कूलों में देवी-देवताओं की तस्वीरें हटाने की बात कही है, आगे जाकर वह कह सकते हैं कि मंदिरों की जरूरत क्या है। उन्होंने कहा कि भुजबल के देवी-देवताओं का अपमान किया है, इसलिए उन्हें माफी माँगनी चाहिए।
राम कदम ने आगे कहा कि जब चुनाव का समय आता है तो यही नेता हिंदू देवी-देवताओं के मंदिरों में माथा टेकने का नाटक करते हैं और अब कह रहे हैं कि देवी देवताओं की तस्वीरों की क्या जरूरत है, उन्हें हटा दिया जाए। भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि सभी महापुरुषों के लिए हमारे मन में सम्मान है, लेकिन इस तरह देवी-देवताओं का अपमान नहीं कर सकते।
गौरतलब है कि एक समय छगन भुजबल शिवसेना के फायरब्रांड नेता माने जाते थे। उस दौरान वह हिंदुत्व के मुद्दे पर जमकर बयान देते थे। हालाँकि, बाद में तत्कालीन शिवसेना सुप्रीमो बाला साहेब ठाकरे से अनबन के बाद उन्होंने शरद पवार से हाथ मिला लिया और एनसीपी में शामिल हो गए। उद्धव ठाकरे की सरकार में भी उन्हें मंत्री बनाया गया था।
समाज में कट्टरता किस कदर हावी हो रही है, इसका उदाहरण तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद (Hyderabad, Telangana) में देखने को मिला। यहाँ दो मुस्लिम महिलाओं (Muslim Women) ने नवरात्रि के दौरान दुर्गा पूजा पंडाल (Puja Pandal) में घुसकर माता दुर्गा (Durga Mata) की प्रतिमा को खंडित कर दिया। पुलिस ने दोनों मुस्लिम महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया है।
घटना हैदराबाद के खैरताबाद का है। यहाँ माँ दुर्गा की पूजा पंडाल लगाया गया है। इसमें अचानक काले बुर्के पहने दो मुस्लिम महिलाएँ घुस आईं और मूर्ति में तोड़-फोड़ करने लगी। उन्होंने प्रतिमा के कई हिस्सों को खंडित कर दिया है। इसके बाद लोगों ने महिलाओं को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया।
Durga idol vandalised in Hyderabad, two Muslim women held. @swastikadas95 with details
हैदराबाद के सेंट्रल जोन के DCP राजेश कुमार ने घटना को लेकर बताया, “आज सुबह दो मुस्लिम महिलाओं ने खैरताबाद स्थित एक पंडाल में घुसकर देवी दुर्गा माता की मूर्ति के एक हिस्से में तोड़फोड़ की। एक महिला को स्पैनर ले जाते हुए भी देखा गया था।”
DCP ने आगे बताया कि प्रतिमा पर हमला करने के दौरान एक व्यक्ति ने महिलाओं को रोकने की कोशिश की तो उस पर हमला किया गया। हालाँकि, महिलाओं के कट्टरपंथी रवैए को देखते हुए स्थानीय लोग जुट गए और उसे पकड़ लिया। लोगों ने पुलिस को सूचना देकर उन्हें सैदाबाद पुलिस के हवाले कर दिया।
पुलिस इस मामले की गहना जाँच कर रही है। पुलिस इस एंगल से भी जाँच कर रही है कि महिलाओं ने नवरात्रि में भड़काऊ काम करके कहीं हिंसा फैलाने की कोशिश तो नहीं है। आखिर ये महिलाएँ कौन हैं और इनका किस संगठन से ताल्लुक है। पुलिस उनकी मानसिक स्थिति को लेकर भी जाँच करेगी।
पिछले साल भी कुछ अज्ञात लोगों ने हैदराबाद के कुकटपल्ली में स्थित एक हिंदू मंदिर पर भी हमला कर दिया था। इस हमले में कट्टरपंथियों ने माता दुर्गा की मूर्ति को हटा दिया था। बता दें कि हैदराबाद भी संदिग्ध समाजविरोधी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का गढ़ बन गया है।
मंगलवार (27 सितंबर 2022) को भी राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने देश के विभिन्न राज्यों के शहरों में PFI के सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। इसके पहले हैदराबाद से PFI के कई सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। उन पर UAPA के तहत कार्रवाई जारी है।
सोमवार (26 सितंबर, 2022) को सूचना और प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) ने आईटी अधिनियम 2021 के तहत 10 यूट्यूब (YouTube) चैनलों के 45 वीडियो को ब्लॉक करने का फैसला किया था। आईटी अधिनियम 2021 सरकार को यह अधिकार देता है कि वो उन डिजिटल सामग्री को ब्लॉक कर सके जो देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरा हों या जिनसे कानून-व्यवस्था बिगड़ने का डर हो। ऑपइंडिया ने सोमवार (26 सितंबर) को एक रिपोर्ट में बताया था कि 45 वीडियो की उस लिस्ट में शामिल यूट्यूबर ध्रुव राठी के एक वीडियो पर यूट्यूब ने सरकार के आदेश का पालन नहीं किया।
ध्रुव राठी को ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ समर्थक के तौर पर जाना जाता है। उन पर अपने वीडियो से झूठी सूचना फैलाने और दुष्प्रचार का आरोप है। भारत सरकार की ब्लॉक लिस्ट में शामिल उनके वीडियो में राठी ने भारत का एक आधा-अधूरा नक्शा दिखाया था। इस नक्शे में कश्मीर का कुछ हिस्सा पाकिस्तान में और विवादित के तौर पर दिखाया गया था। भारतीय कानून में ऐसा नक्शा दिखाना दंडनीय अपराध है।
भारत सरकार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के उन वीडियो को ब्लॉक करने की जानकारी साझा की थी लेकिन कॉन्फ्रेंस के कुछ समय बाद तक भी ध्रुव राठी का वीडियो यूट्यूब पर ऑनलाइन रहा। NDTV के पत्रकार अखिलेश शर्मा ने ट्वीट कर के ध्रुव राठी के उस वीडियो का स्क्रीनशॉट शेयर किया था। इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर यूट्यूब द्वारा भारत सरकार का आदेश न मानने की चर्चा छिड़ गई थी। हालाँकि बाद में ऑपइंडिया की रिपोर्ट और लोगों के विरोध को देखते हुए यूट्यूब ने ध्रुव राठी के उस वीडियो को भारत में प्रतिबंधित कर दिया था।
अब राठी के इस वीडियो लिंक पर क्लिक करने पर यूट्यूब भारत सरकार द्वारा कानूनी शिकायत के बाद वीडियो के भारत में उपलब्ध न होने की जानकारी दे रहा है।
ध्रुव राठी के ब्लॉक वीडियो का स्क्रीनशॉट
ध्रुव राठी ने यह विवादित वीडियो 11 अप्रैल, 2022 को अपलोड किया था। तब उन्होंने इसे पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार गिरने के मुद्दे से जोड़ा था। इसी वीडियो के 4:41 मिनट पर राठी ने भारत का विकृत मानचित्र दिखाया था। इस मानचित्र में भारत के कुछ हिस्से पाकिस्तान में दिख रहे थे। यही इस वीडियो के भारत सरकार के ब्लॉक लिस्ट में होने की वजह बनी थी। ध्रुव राठी कई मुद्दों पर वीडियो बनाते हैं, जिसमें राजनीति, विज्ञान, यात्रा और फिल्म जैसे विषय भी शामिल हैं। राठी पेड प्रमोशन भी करते हैं।
इस पूरी उठा-पटक में ये बात खास रही कि यूट्यूब द्वारा वीडियो बैन करने से पहले ध्रुव राठी ने अपने वीडियो को एडिट कर के बचने की कोशिश की थी। इस एडिटिंग में उन्होंने विवादित मानचित्र वाले हिस्से को धुंधला किया था। हालाँकि, राठी की एडिटिंग काम नहीं आई और अंततः यूट्यूब को उस वीडियो को ब्लॉक करना पड़ा। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि उन्हें इस बात का संदेह है कि यूट्यूब अंदर ही अंदर ध्रुव राठी की मदद कर रहा है।
ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी ने बताया, “आमतौर पर यूट्यूब वीडियो अपलोड करने वाले को कानूनी आदेश की जानकारी एक संदेश भेज कर देता है। इन संदेशों में आपत्तिकर्ता से सम्पर्क कर के मामले को सुलझाने की सलाह भी होती है। यूट्यूब के उन संदेशों में कुछ अतिरिक्त और विशेष जानकारी शामिल नहीं होती, जिसमें आपत्ति का बिंदु आदि बताना शामिल हो। ऐसा लग रहा है कि जैसे किसी ने राठी को सरकार की आपत्ति वाला बिंदु बता कर उसके समाधान की सलाह दी हो। ऐसी जानकारी साझा करना नियमों के विरुद्ध है।”
सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों ने यह भी खुलासा किया कि मंत्रालय के सवाल के बाद भी ध्रुव राठी ने किसी प्रकार की जानकारी देना भी मुनासिब नहीं समझा। उन्होंने सूचना देने की जहमत भी नहीं उठाई, जैसा कि मंत्रालय ने माँगी थी। हालाँकि, पूर्व में ऑपइंडिया सहित कई कंटेंट क्रिएटर्स और तमाम डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स ने किसी भी आपत्ति पर सरकार द्वारा माँगी सूचना पर उन्हें विधिवत रूप में जानकारी दी है।
यहाँ ये बात भी गौर करने योग्य है कि यूट्यूब द्वारा भारत सरकार के आदेश पर राठी के वीडियो को बैन करने से पहले ही वीडियो का विवादित हिस्सा एडिट कर दिया गया था। यहाँ ये सवाल उठता है कि बिना किसी आंतरिक सूत्र के आखिर राठी को कैसे पता चला कि सरकार उसके वीडियो के किस हिस्से पर आपत्ति दर्ज करवाने वाली है। यहाँ दूसरा सवाल ये उठता है कि सरकार की लिस्ट में शामिल सभी वीडियो को बैन करने वाले यूट्यूब ने ध्रुव राठी का भी वीडियो उसी समय बैन क्यों नहीं किया था। इस से कहीं न कहीं शक उठता है कि यूट्यूब के अंदर कोई राठी की अंदरूनी मदद कर रहा है।
आखिरकार यूट्यूब ने अपवाद बनाने के बाद भारत सरकार के आदेशों का पालन किया। इस चिंता के विषय पर भारत सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए कि कैसे बड़ी-बड़ी टेक्निकल कंपनियों द्वारा उनके आदेशों की नाफरमानी की जाती है।
देश की राजधानी दिल्ली में एक एयर होस्टेस के साथ रेप और अप्राकृतिक कुकर्म की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि रेप से पहले पीड़िता को शराब पिलाई गई थी। आरोपित का नाम हरजीत यादव है, जो कॉन्ग्रेस पार्टी का नेता बताया जा रहा है। पुलिस ने एयर होस्टेस की तहरीर पर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। घटना रविवार (25 सितम्बर, 2022) की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना महरौली इलाके की है। दक्षिणी दिल्ली के DCP चन्दन चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को डायल 112 पर घटना की जानकारी खुद पीड़िता ने दी थी। पुलिस कुछ ही समय में मौके पर पहुँच गई। पीड़िता एयर होस्टेस ने बताया कि वह आरोपित हरजीत यादव से लगभग डेढ़ माह से परिचित है। लड़की ने हरजीत पर अपने साथ दुष्कर्म का आरोप लगाया।
पीड़िता के अनुसार, हरजीत ने रेप से पहले उसको शराब पिलाई थी। वह महरौली के फ्रीडम फाइटर एन्क्लेव में एक घर में किराए का कमरा ले कर रहती थी। हरजीत उसके घर में आया और उसे अकेला पा कर उसके साथ दुष्कर्म किया। हरदीप पर पीड़िता से अप्राकृतिक कुकर्म का भी आरोप लगा है। बाद में लड़की ने हरजीत को किसी तरह कमरे में बंद कर दिया और पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस के मौके पर पहुँचने पर हरजीत नशे की हालत में पाया गया था। हरजीत यादव शादीशुदा है और उसकी पत्नी भी कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़ी हुई बताई जा रहीं हैं।
पुलिस का कहना है कि आरोपित को हिरासत में ले लिया गया है। मामले में जाँच की जा रही है। पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि एयर होस्टेस और हरजीत में दोस्ती कैसे हुई। आरोपित के अन्य नेटवर्क भी खँगाले जा रहे हैं। हरजीत कॉन्ग्रेस पार्टी का ब्लॉक प्रमुख है, जो दिल्ली के खानपुर इलाके में रहता है। उस पर एयर होस्टेस के शरीर को नुकसान पहुँचाने का भी आरोप लगा है। पुलिस ने हरजीत यादव पर IPC की धारा 323, 506, 376 और 377 के तहत कार्रवाई की है।
गौरतलब है कि इसी महीने तमिलनाडु कॉन्ग्रेस नेता लेफ्टिनेंट सीडीआर गोकुल चंद्रन ने खुद ही एक महिला को अश्लील मैसेज भेजने की बात स्वीकार कर ली थी, जब उस महिला ने उनके द्वारा भेजे गए आपत्तिजनक संदेशों को वायरल कर दिया था।
आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में अरविंद केजरीवाल मुकेश अंबानी के घर को वक्फ बोर्ड की जमीन पर बना बताए और कहा कि अगर महाराष्ट्र में उनकी सरकार होती तो उनके घर को तोड़ डाला गया होता।
मुस्लिमों को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल इस वीडियो में कह रहे हैं, “कभी भी जरूरत पड़े आपको… तन, मन, धन से केजरीवाल और दिल्ली सरकार पूरी तरह से वक्फ बोर्ड के साथ है। बंबई के अंदर इस देश का जो सबसे अमीर आदमी है, बताते हैं उसका घर वक्फ बोर्ड (Wakf board) की प्रोपर्टी पर बना हुआ है।” इसके बाद वह वहाँ मौजूद से लोगों से पूछते हैं, “मैं गलत तो नहीं कह रहा?”
अम्बानी का घर भी वक़्फ़ बोर्ड की प्रॉपर्टी हैं , हमारी सरकार होती अम्बानी का घर तुड़वा देती । pic.twitter.com/BO3sWVnZ4C
केजरीवाल अपनी बात को जारी रखते हुए आगे कहते हैं, “वहाँ की सरकार की हिम्मत नहीं है, जो उसको कुछ कर दे। हमारी सरकार अगर वहाँ होती, तो उसकी प्रोपर्टी तुड़वा देती। वक्फ बोर्ड को जब भी किसी चीज की जरूरत होगी। दिल्ली सरकार वक्फ बोर्ड के साथ है।”
अरविंद केजरीवाल का जो वीडियो अभी वायरल हो रहा है, वो दरअसल 2019 का है। इस वीडियो में मुकेश अंबानी, वक्फ बोर्ड की जमीन और एंटिलिया को तुड़वा देने वाली तानाशाही मानसिकता टाइप बातें आप 3:35 के बाद सुन सकते हैं।
3 साल पुरानी बात आखिर सोशल मीडिया पर अभी क्यों वायरल हो रही है? इसके पीछे वक्फ बोर्ड को लेकर चल रहा बवाल है। जहाँ मन होता है, ये किसी की भी जमीन को अपना बना लेते हैं। हिंदू बहुल गाँव से लेकर हिंदू मंदिर तक को वक्फ बोर्ड ने अपनी संपत्ति बता दी है।
बात अगर मुकेश अंबानी के घर की करें तो बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनके निवास स्थान ‘एंटीलिया’ को लेकर वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी किया था 2017 में ही। हाई कोर्ट ने वक्फ बोर्ड को अंबानी के घर पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा था। प्रोपर्टी को गैर कानूनी तरीके से बेचने को लेकर दायर याचिका के बाद यह नोटिस जारी किया गया था।
साल 2005 में यह प्रोपर्टी अंबानी के स्वामित्व वाली कंपनी मफिन-एंटीलिया कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड ने खरीदी थी। यह जमीन पहले करीमभॉय इब्राहिम खोजा अनाथालय ट्रस्ट की थी, जिसमें अनाथ मुस्लिम बच्चों की मदद की जाती थी। इस मामले में इस याचिका के अलावा विभिन्न मुकदमे दायर किए गए थे, जिस पर बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।
जालना निवासी अब्दुल मतीन (Abdul Mateen) ने अखबारों में प्रोपर्टी की बिक्री के बारे में पढ़ा था और 2007 में एक याचिका दायर की थी। उनकी याचिका को उसी मुद्दे पर 66 अन्य याचिकाओं के साथ टैग किया गया था, जिस पर उस समय बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejriwal) की आम आदमी पार्टी (AAP) बनाम उप-राज्यपाल की लड़ाई में दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (27 सितंबर 2022) को अंतरिम आदेश जारी कर दिया। अपने आदेश में हाईकोर्ट ने हुए उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना (LG Vinai Kumar Saxena) को राहत देते हुए AAP नेताओं को LG के खिलाफ अमर्यादित पोस्ट को हटाने के लिए कहा है।
Delhi High Court passes ad interim injunction order in favour of Delhi Lieutenant Governor Vinai Kumar Saxena’s and against @AamAadmiParty and its leaders with regard to their corruption allegations against him. pic.twitter.com/5gwhZvc6H0
बता दें कि दिल्ली के उप-राज्यपाल VK सक्सेना ने उनके और उनके परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले संजय सिंह (Sanjay Singh), सौरभ भारद्वाज (Saurabh Bhardwaj), आतिशी (Atishi), दुर्गेश पाठक (Durgesh Pathak) सहित कई AAP नेताओं के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। इस मामले में LG ने AAP के 5 नेताओं के खिलाफ सोमवार (26 सितंबर 2022) को लीगल नोटिस भी भेजा था।
उप-राज्यपाल वीके सक्सेना ने AAP नेताओं को भविष्य में उनके और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ सोशल मीडिया पर मानहानि वाली बयानबाजी से रोकने की दिल्ली हाईकोर्ट से अपील की थी। इसी मामले में कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश देते हुए आम आदमी पार्टी के नेताओं को LG और उनके परिवार के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट हटाने के लिए कहा है।
संजय सिंह सहित आम आदमी पार्टी के नेताओं ने उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना पर भ्रष्टाचार और घोटाले के आरोप लगाए हैं। AAP नेताओं का कहना है कि खादी ग्रामोद्योग (KVIC) के अध्यक्ष रहते हुए उप-राज्यपाल वीके सक्सेना ने अपनी बेटी शिवांगी सक्सेना को मुंबई में खादी लाउंज डिजाइन करने के लिए 80 करोड़ रुपए का ठेका दिलाया था।
AAP नेता संजय सिंह ने ये भी आरोप लगाया है कि उप-राज्यपाल वीके सक्सेना ने KVIC के चेयरमैन रहते हुए नोटबंदी के दौरान 1400 करोड़ रुपए की हेराफेरी सहित कई घोटाले किए। पार्टी के नेताओं ने उप-राज्यपाल को उनके पद से बर्खास्त करने की माँग की है। AAP विधायक दुर्गेश पाठक ने एलजी को ‘भ्रष्ट’ बताया था और उनके खिलाफ CBI और ED की जाँच की माँग की थी। इसको लेकर AAP नेताओं ने पोस्टर-बैनर के साथ सदन के अंदर और बाहर प्रदर्शन भी किया था।
देश भर में कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) पर कार्रवाई चल रही है। जहाँ पहले राउंड की छापेमारी में इसके 100 के करीब कार्यकर्ताओं/नेताओं को गिरफ्तार किया गया था, दूसरे राउंड की रेड में 8 राज्यों से 170 लोग हिरासत में लिए गए हैं। न्यूज़ चैनलों पर भी यही मामला छाया हुआ है। ‘प्राइम टीवी’ नाम के न्यूज़ चैनल पर इस कार्रवाई को लेकर हो रही बहस में एक अजीबोगरीब वाकया देखने को मिला।
बहस के दौरान भाजपा के प्रवक्ता शफ़ाअत हुसैन ने जब ‘मुस्लिम स्कॉलर’ आमिर साबरी से पूछा कि वो कहाँ से पैदा हुए हैं, तो उन्होंने जवाब दिया – “तुम्हारी गाँ# से”। दरअसल, शफ़ाअत हुसैन कह रहे थे कि आतंकियों का कोई धर्म का मजहब नहीं होता, ऐसे में देशद्रोहियों को ए-मौत देनी चाहिए और उन्हें कब्रिस्तानों में जगह नहीं देनी चाहिए, उनका जनाजा पढ़ाने वाले मौलवियों को भी उनसे जुड़ा हुआ माना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इनके सारे रुपए जब्त कर लिए जाएँ।
हालाँकि, आमिर साबरी की राय इससे अलग थी। उन्होंने इस कार्रवाई को एक षड्यंत्र बताते हुए कहा कि मूल मुद्दों से भटकाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। जब भाजपा प्रवक्ता ने पूछा कि ये मूल मुद्दे कौन से हैं, तो साबरी ने कहा कि हमने आपको बर्दाश्त किया, अब आप बर्दाश्त कीजिए। शफ़ाअत को इस दौरान आमिर ने ‘सबसे बड़ा आतंकवादी’ भी करार दिया। उन्होंने दावा किया कि PFI के खिलाफ सबूत नहीं हैं। जब शफ़ाअत ने पूछा कि क्या तुम्हारे पास मदरसे की डिग्री है, तो आमिर भड़क गए।
पिता जी : न्यूज़ चैनल लगाओ पता नहीं क्या देखते रहते हो सारा दिन थोड़ा जनरल नॉलेज बढ़ेगी
इसके बाद उन्होंने गाली बकी, जिसे न्यूज़ चैनल द्वारा अपलोड किए गए वीडियो में बीप के साथ रिप्लेस कर दिया गया है, लेकिन ट्विटर पर एक यूजर ने इसे अपलोड कर दिया। ‘प्राइम टीवी’ के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए गए इस वीडियो में बहस के इस अंश को 20 मिनट के बाद आप देख सकते हैं। एंकर गौरव श्रीवास्तव ने इसके बाद शब्दों की मर्यादा रखने की अपील की। आमिर साबरी इसके बाद तू-तड़ाक पर उतर आए और पूछा कि तुमने कितनी कुरान पढ़ी है? आमिर ने शफ़ाअत को ‘सबसे बड़ा बदतमीज’ भी बता दिया। साथ ही उन्हें ‘भाजपा की जूतियाँ चाटने वाला’ बताया।
शफ़ाअत हुसैन ने आमिर साबरी पर सार्वजनिक रूप से गाली देने का आरोप लगाते हुए कहा कि वो FIR दर्ज कराएँगे। उन्होंने आमिर को फर्जी स्कॉलर बताते हुए कहा कि ये लोग टीवी पर आकर मुस्लिमों को बदनाम करते हैं। उन्होंने अरबी में एक आयत पढ़ी और इसका अर्थ आमिर से बताने को कहा, अगर वो इस्लामी स्कॉलर हैं। हालाँकि, आमिर ऐसा नहीं कर पाए और कहा – “तुम ही करो। तुम बहुत बड़े विद्वान हो। हम भी तुमसे पूछेंगे। तुम्हें एक याद है, मुझे 500 पता हैं।”
देश भर में पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के खिलाफ चल रही छापेमारी के बीच मंगलवार (27 सितम्बर 2022) तक कुल 170 सदस्यों को हिरासत में लिया गया है। ये गिरफ्तारियाँ 8 अलग-अलग राज्यों में हुई हैं। केरल वाली स्थिति को देखते हुए दिल्ली के शाहीन बाग में अर्ध सैनिक बलों को गश्त करवाया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये छापेमारी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, गुजरात, कर्नाटक, दिल्ली और महाराष्ट्र में हुई है। अकेले कर्नाटक से 45 गिरफ्तारियाँ होने की सूचना है। मध्य प्रदेश के शाजपुर के साथ दिल्ली के शाहीन बाग़, निजामुद्दीन और जामिया इलाकों में भी NIA ने छापेमारी की है।
मध्य प्रदेश के शाजपुर से 2 और दिल्ली के जामिया और शाहीन बाग़ इलाके से लगभग 1 दर्जन संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने की सूचना है। महाराष्ट्र के औरंगाबाद और नांदेड़ में भी ATS की छापेमारी के दौरान लगभग 14 संदिग्धों को हिरासत में लेने की खबर है। पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ और बुलंदशहर में भी छापेमारी की सूचना है।
मिल रही जानकारी के मुताबिक PFI का रिश्ता प्रतिबंधित SIMI, भगोड़े ज़ाकिर नाईक और आतंकी संगठन ISIS से पाया गया है। बताया ये भी जा रहा है कि PFI ने भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए न सिर्फ पाकिस्तान बल्कि मिडिल ईस्ट के लोगों का भी सहारा लिया है।
न्यूज़ 18 के मुताबिक PFI ने देश भर में हिंसा की बड़े स्तर प्लानिंग की थी। इसका राष्ट्रीय अध्यक्ष अब्दुल रहमान कभी SIMI का राष्ट्रीय सचिव हुआ करता था। इसके साथ इसी समूह का एक अन्य पदाधिकारी अब्दुल हमीद भी कभी सिमी से जुड़ा हुआ था।
आरोप है कि PFI को उसकी आतंकी हरकतों को संचालित करने के लिए मध्य-एशिया से पैसे आते थे। इसे भारत में पहुँचाने में पाकिस्तान मध्यस्तता किया करता था। इस नेटवर्क के संचालन में PFI की राष्ट्रीय टीम में शामिल मोहम्मद शाकिब का अहम रोल है।
रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि पाकिस्तान से पैसे उगाही करने के लिए PFI भारत की जेलों में बंद पाकिस्तानियों की पैरवी का हवाला दिया करता था। आपको याद दिला दें कि ISIS की हरकतों को भारत में एक्टिव रखने के लिए मोहिदीन ने 8 जनवरी 2021 में कन्याकुमारी में कालियाकविलाई चेकपॉइंट पर ऑन ड्यूटी सब इंस्पेक्टर विल्सन की हत्या की थी। PFI के मोहम्मद शाकिब ने बाद में अपने साथियों सहित सब इंस्पेक्टर विल्सन के कातिलों के लिए इस केस पर काम किया था।