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केरल में नाबालिग से गैंगरेप, मजदूरी करने यूपी से आए थे इकरार, एजाज, शकील और इरशाद: लॉज में ले जाकर किया सामूहिक बलात्कार

केरल के कोझीकोड (Kozhikode) जिले से शनिवार (24 सितंबर 2022) को एक नाबालिग से बलात्कार करने के आरोप में चार मजदूरों को गिरफ्तार किया गया। 16 वर्षीय पीड़िता उत्तर प्रदेश की रहने वाली है। वहीं, चारों आरोपित इकरार आलम (18), अजाज (25), शकील शाह (42) और इरशाद भी उत्तर प्रदेश के रहने वाले बताए जा रहे हैं। ट्रेन में सफर के दौरान पीड़िता की मुलाकात इन आरोपितों से हुई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता अपनी बहन से मिलने के लिए वाराणसी से चेन्नई जा रही थी, तभी उन चारों से उसकी मुलाकात हुई थी। इस दौरान उन्होंने उसे बहकाया और अपने साथ उतरने के लिए कहा। इसके बाद लड़की उनके साथ पलक्कड़ स्टेशन पर उतर गई और वहाँ से सड़क के रास्ते कोझीकोड चली गई। बताया जा रहा है कि आरोपितों में से एक ने पहले लड़की को प्रेमजाल में फाँसा था। इसके बाद आरोपित उसे पलयम के एक लॉज में ले गया, जहाँ चारों ने उसके साथ दुष्कर्म किया।

अगले दिन चारों इस उम्मीद से उसे रेलवे स्टेशन पर वापस छोड़ने गए कि वह उनका विरोध किए बिना चेन्नई अपनी बहन के पास चली जाएगी, लेकिन लड़की ने उनका विरोध किया। इस दौरान उनके बीच काफी बहस हुई। रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों उन्हें झगड़ते हुए देखा तो सभी को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के दौरान वारदात की जानकारी सामने आई। इसके बाद रेलवे सुरक्षा बल (Railway Protection Force) ने चारों को कसाबा पुलिस के हवाले कर दिया।

लड़की ने आरोप लगाया है कि शादी का झाँसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पुलिस को जल्द ही उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारियों से सूचना मिली कि वाराणसी के पास गाजीपुर जिले के बिरनो पुलिस स्टेशन में किसी शख्स के गुमशुदा होने का मामला दर्ज कराया गया है। वह गुमशुदा शख्स कोई और नहीं, बल्कि यह लड़की थी। इस मामले में बलात्कार के अलावा यौन अपराधों से ‘बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO)’ के तहत भी मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस लड़की के परिजनों से बात करने के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।

हाई प्रोफाइल स्कूल में पढ़ता था हिन्दू छात्र, मुस्लिम बच्चों की संगत में इस्लाम कबूला: किताबों में लिखी मिली मुगलों की तारीफ, अजमेर जाते पुलिस ने पकड़ा

उत्तर प्रदेश के कानपुर में धर्मान्तरण का मामला सामने आया है। यहाँ पर एक हाई प्रोफ़ाइल स्कूल में पढ़ने वाले कक्षा 11 के हिन्दू छात्र के धर्म परिवर्तन कर लेने की खबर है। आरोप है कि उसी के साथ पढ़ने वाले 3 अन्य छात्रों ने इस धर्मान्तरण में बड़ी भूमिका निभाई है। छात्र की कॉपी में इस्लामी बातें लिखी पाई गईं हैं। परिजनों के मुताबिक छात्र ने नमाज़ भी पढ़ना शुरू कर दिया था। गुरुवार (22 सितम्बर 2022) को छात्र ट्रेन से अजमेर के लिए निकल गया था जिसे जयपुर में पुलिस ने बरामद कर लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला कानपुर के संजय गाँधी नगर का है। यहाँ रहने वाले राकेश कुमार गुप्ता ने अपने बेटे का एडमिशन शहर के एक बड़े स्कूल में करवाया था। पीड़ित परिवार का कहना है कि इस बीच छात्र की दोस्ती अपने ही क्लास के कुछ मुस्लिम बच्चों से हुई। बताया जा रहा है कि इसके बाद उस छात्र पर संगति का ऐसा असर पड़ा कि वो धीरे-धीरे इस्लामी तौर-तरीके अपनाने लगा। आरोप है कि वो अपने दोस्तों के साथ मुस्लिम इबादतगाहों में भी जाने लगा था। छात्र की उम्र 18 साल बताई जा रही है।

मिल रही जानकारी के अनुसार, लापता छात्र ने अपनी कॉपियों में अकबर और जहाँगीर जैसे कई मुगल बादशाहों की तारीफें लिख डालीं थीं। उसकी कॉपियों में इसके अलावा हजरत अली और अल्लाह-हू-अकबर भी लिखा पाया गया। घर वालों की मानें तो वो उन्हें एक बार नमाज़ भी पढ़ता मिला था जिस पर उसे डाँट पड़ी थी। घर वालों के अनुसार गुरुवार (22 सितम्बर) को वो अपने घर से निकलने के बाद शाम तक लौट कर नहीं आया तो परेशान घर वालों ने खोजबीन शुरू की।

जब परिजनों को उनके व्यक्तिगत प्रयासों से लापता छात्र नहीं मिला तो मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। पुलिस की पड़ताल में पता चला कि लड़का अजमेर के लिए निकला है। इसके बाद वो तुरंत उसकी तलाश में निकल गए। इधर मामले की जानकारी हिन्दू संगठन से जुड़े लोगों को जैसे ही हुई वैसे ही उन्होंने पुलिस से लापता छात्र के मुस्लिम सहपाठियों पर कार्रवाई करने की माँग की। बजरंग दल के पदाधिकारी ने आरोप लगाया है कि छात्र के साथ पढ़ने वाले उसके साथियों ने ही उसका ब्रेनवाश किया।

पुलिस ने छात्र की लोकेशन के हिसाब से मथुरा रेलवे पुलिस से बात कर के उसे बरामद कर लिया। छात्र को वापस उसके घर लाया गया है। पुलिस का कहना है कि छात्र सोशल मीडिया पर इस्लाम से जुडी चीजें अक्सर देखा करता था जिस से उसका झुकाव उस तरफ हुआ। छात्र के परिजनों ने एक मौलाना को भी मामले में आरोपित किया था लेकिन पुलिस को अभी तक मौलाना के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं। पुलिस का कहना है कि छात्र परिजनों की डांट से नाराज हो कर घर से निकला था।

‘भारत माता की जय’ नारे के साथ गुलाम नबी ने बनाई नई पार्टी, ‘डेमोक्रेटिक आज़ाद पार्टी’ रखा नाम: कहा- वापस नहीं आ सकता अनुच्छेद-370

कॉन्ग्रेस (Congress) से अलग होकर अपना रास्ता तय वाले जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद (J&K Ex-CM Ghulam Nabi Azad) ने सोमवार (26 सितंबर 2022) को अपनी नई राजनीतिक पार्टी के नाम और झंडे का ऐलान कर दिया। गुलाम नबी के नए राजनीतिक दल का नाम ‘डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी’ (DAP) है।

जम्मू में ‘भारत माता की जय’ के नारों के साथ नई पार्टी की घोषणा करते हुए आजाद ने कहा कि उनकी पार्टी की विचारधारा उनके नाम की तरह होगी और इसमें सभी धर्मनिरपेक्ष लोग शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि नई पार्टी के एजेंडे में जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा और भूमि व नौकरियों के अधिकार स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षित करने का संघर्ष शामिल है।

पार्टी के नाम को लेकर पत्रकारों से बात करते हुए गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पार्टी के नाम के लिए उन्हें जम्मू-कश्मीर से 1500 से अधिक सुझाव भेजे गए थे। इनमें उर्दू से लेकर संस्कृत तक के नाम शामिल थे। उन्होंने कहा कि सब यही चाहते थे कि पार्टी का नाम लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और स्वतंत्र हो। इसीलिए इसका नाम ‘डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी’ रखा गया।

पार्टी में आजाद शब्द के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि यह उनके नाम से नहीं जुड़ा है। इसका मतलब स्वतंत्रता से है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी स्वतंत्र लोकतांत्रिक पार्टी होगी, जो आम लोगों से जुड़ी होगी। उन्होंने कहा कि राजनीति में कोई दुश्मन नहीं होता, बल्कि नीतियों पर मतभेद होते हैं।

बता दें कि गुलाम नबी आजाद जम्मू-कश्मीर से हटाए गए अनुच्छेद 370 पर अपनी राय पहले ही दे चुके हैं। वे कह चुके हैं कि यह अनुच्छेद फिर से वापस नहीं आ सकता, क्योंकि इसके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत चाहिए। वे कश्मीरी विस्थापितों के पुनर्वास की बात भी कह चुके हैं।

गौरतलब है कि इसी साल 26 अगस्त को वे पार्टी के साथ अपने पाँच दशक पुराने रिश्ते को तोड़ लिया था। पार्टी से इस्तीफा देते हुए उन्होंने कॉन्ग्रेस की दुर्दशा के लिए राहुल गाँधी को जिम्मेदार बताया था। गुलाम नबी आजाद को इसी साल मार्च में पद्मभूषण सम्मान से भी सम्मानित किया गया था।

साल 1973 में डोडा जिले के भलेसा ब्लॉक कॉन्ग्रेस कमेटी के सचिव के रूप में राजनीति की शुरुआत करने वाले गुलाम नबी आजाद आगे चलकर युवा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बने और साल 1980 में पहली बार संसदीय चुनाव महाराष्ट्र से लड़कर जीते। साल 1982 में वे केंद्रीय मंत्री बने और फिर 2005 में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री भी बने।

‘अखिलेश यादव की शह पर आजम खान ने किए अपराध, उसका परिवार चोर-डकैतों का’: CM योगी के मुरीद हुए कॉन्ग्रेस नेता, कहा – वो दिला रहे इंसाफ

एक ओर जहाँ कानूनी रूप से समाजवादी पार्टी नेता और रामपुर विधायक आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पूर्व मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता नवाब सैय्यद मोहम्मद काजिम अली खान उर्फ नावेद मियाँ ने आजम खान पर निशाना साधा है। नावेद मियाँ ने कहा है समाजवादी पार्टी की सरकार में अखिलेश यादव की शह पर आजम खान ने अपराध किए हैं।

नावेद मियाँ ने आरोप लगाते हुए कहा है कि यदि समाजवादी सरकार में आजम खान को अपराध करने का लाइसेंस नहीं दिया गया होता तो आज उन्हें बचाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को राजभवन में गुहार नहीं लगानी पड़ती। उन्होंने आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी में हुई खुदाई को लेकर कहा कि अभी तो बहुत सी चीजें बरामद होंगी। उन्होंने कहा कि ये शिकायतें 2017 से हो रही हैं और उन्हें लगता है कि प्रशासन के पास सारे सबूत थे, तभी आजम खान के खिलाफ जाँच शुरू हुई है।

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ़ करते हुए कहा कि राज्य सरकार का बहुत अच्छा रोल रहा है और सबसे अच्छा काम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रहा, जिन्हें वो उन्हें खासतौर से बधाई देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने आखिरकार हमें इंसाफ दे ही दिया। नावेद मियाँ यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि आजम खान के साथ जो रहा है, वह इंसाफ है और हमें इस इंसाफ की कई सालों से जरूरत थी। बकौल नावेद मियाँ, लोगों की आँखों मे जो पट्टी बंधी हुई थी वह अब उतर गई होगी। उन्होंने कहा कि आजम खान और इसका परिवार सबसे बड़ा चोर और डकैत है, ये अब सबके सामने आ गया है।

उन्होंने आजम खान की करतूतों के लिए तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि सपा शासन में रामपुर में लोकतंत्र नहीं, तानाशाही का दौर था और यहाँ जुल्म ढाए जा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों से रोजगार छीना जा रहा था और सरकारी जमीन पर कब्जा करने के अलावा झूठे मुकदमों में चरस के साथ लोगों को जेल भेजा जा रहा था। उन्होंने कहा कि तब यहाँ की जनता की चीखें अखिलेश यादव नहीं सुन रहे थे और उन्हें लोगों की आँखों के आँसू नहीं दिख रहे थे।

पूर्व मंत्री नावेद मियाँ ने आगे कहा कि अब आजम खान और उनके परिवार को गुनाहों की सजा मिल रही है तो अखिलेश यादव उनके बचाव में उतर आए हैं। उन्होंने इसका कारण बताया कि जुर्म अखिलेश यादव ने कराए हैं, इसलिए वो भी बराबर के जिम्मेदार हैं और उन्हें आजम खान और उनके परिवार का बचाव नहीं करना चाहिए।

इसके अलावा, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रेशमा अफरोज द्वारा रामपुर की तिजोरी बरामद करने को लेकर मुरादाबाद कमिश्नर को पत्र लिखे जाने के मामले में नावेद मियाँ ने कहा, “रेशमा अफरोज ने कमिश्नर को सही पत्र लिखा है। तिजोरी चोरी होने के मामले में साल 2005 में मुकदमा दर्ज हुआ था। लेकिन, आजम खान ने अपनी सत्ता के उपयोग से मामला रफा-दफा कर दिया। जो तिजोरी चोरी हुई थी उसमें रखे साढ़े ग्यारह लाख रुपए और कारतूस आजम लेकर गया है।”

उन्होंने यह भी कहा कि अगर आजम खान के घर की कुर्की होती है तो उन्हें लगता है कि यूनिवर्सिटी से भी ज्यादा चोरी का सामान उसके घर में मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि नगर पालिका का बहुत सारा चोरी हुआ सामान आजम खान के घर में ही मिलेगा। बता दें कि बीते दिनों आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी में हुई खुदाई के दौरान नगरपालिका की चोरी हुई करोड़ों रुपए की मशीन और राजकीय ओरिएंटल कॉलेज की लाइब्रेरी से चोरी हुई कई ऐतिहासिक किताबें मिली थीं। इसके बाद से आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ चोरी के कई मामलों में मुकदमा दर्ज कर जाँच की जा रही है।

‘दुपट्टा तक सिर पर नहीं है, पाकिस्तान को लूटकर खा गई’ : लंदन में PAK मंत्री मरियम के पीछे पड़ी भीड़, लगे- ‘चोरनी-चोरनी’ के नारे; Video

पाकिस्तान की सूचना मंत्री मरियम औरंगजेब (Marriyum Aurangzeb) का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो लंदन का है, जिसमें पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) के समर्थक मरियम के खिलाफ नारा लगा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मरियम लंदन के एक कॉफी शॉप में गईं थीं कि तभी पाकिस्तानियों ने उन्हें वहाँ घेर लिया और उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। देख सकते हैं कि चारों ओर से घिरीं मरियम को लोग चोरनी तक बोल रहे हैं, लेकिन पाक मंत्री नारेबाजी का कोई जवाब नहीं देतीं। वह अपना फोन चलाती रहती हैं और वीडियो भी बनाती हैं।

इस घटना के बारे में पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन‘ ने रिपोर्ट को प्रकाशित किया है, जिसमें उन्होंने मरियम की तारीफ करते हुए लिखा कि मंत्री ने बहुत ही शांति व संयम से इस स्थिति को संभाला। इसके अलावा घटना की वीडियो पाकिस्तानी पत्रकार सैयद तलत हुसैन ने भी शेयर की है।

एक अन्य वीडियो में मरियम को बीच सड़क पर ‘चोरनी, चोरनी’ कहते हुए सुना जा सकता है। ये वीडियो मरियम के कॉफी हाउस में घुसने से पहले की है। इसमें दिख रहा है कि मरियम के आगे-पीछे उग्र भीड़ उनका पीछा कर रही है। वहीं एक महिला उनको कह रही है,

“देखो ये मरियम औरंगजेब है, जो टेलीविजन पर बैठ कर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन इसके सिर पर दुपट्टा नहीं है। ये चोरों की सरदारनी है। चोरनी, चोरनी। पाकिस्तान को लूटकर खा गए। पाकिस्तानियों का पैसा खाकर सेंट्रल लंदन में घूम रही है। पाकिस्तानियों का खून चूसकर, यहाँ फिर रहे हैं ये। लानत है इस पर।”

इसके बाद मरियम के पीछे आ रही भीड़ ने उनके खिलाफ चोर-चोर के नारे लगाए।

वहीं, इस घटना को लेकर मरियम ने कहा, “इमरान खान की नफरत और विभाजनकारी राजनीति का हमारे भाइयों और बहनों पर जहरीला प्रभाव पड़ा है, यह देखकर काफी दुख हुआ।” हम इमरान खान की जहरीली राजनीति का मुकाबला करने और लोगों को एक साथ लाने के लिए अपना काम जारी रखेंगे।”

बताया जा रहा है कि लंदन में मरियम के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लोग पाकिस्तान में बाढ़ के कारण मची तबाही से बेहद दुखी थे। इसी कारण उन्होंने पाकिस्तान की आलोचना की और वहाँ कि सरकार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया।

जैकलीन फर्नांडिस को अदालत से मिली अंतरिम जमानत, ₹200 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का है मामला: अब कोर्ट ने ED से माँगा जवाब

बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस (Jacqueline Fernandez) को महाठग सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrashekhar) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में अंतरिम जमानत मिल गई है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सोमवार (26 सितंबर, 2022) को 50,000 रुपए के निजी बॉन्ड पर यह मंजूर की। जैकलीन 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) मामले में आरोपित के तौर पर अदालत में पेश हुई थीं। एक्ट्रेस को 26 सितंबर, 2022 को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश होने के लिए समन भेजा गया था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र मलिक ने जैकलीन की जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जवाब माँगा है। जब तक ईडी अपना जवाब दाखिल नहीं करती, तब तक उनकी नियमित जमानत के लिए याचिका अदालत में लंबित रहेगी। इस मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर, 2022 को होगी।

इससे पहले 200 करोड़ रुपए की ठगी के मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 14 सितंबर, 2022 को जैकलीन फर्नांडिस (Jacqueline Fernandez) से लगभग 8 घंटे तक पूछताछ की थी। एजेंसी को एक्ट्रेस के बयान में कई तरह की खामियाँ मिली थीं। दिल्ली पुलिस ने जैकलीन और पिंकी ईरानी के जवाबों में कई तरह की खामियाँ पाई थीं। पिंकी ईरानी वही है, जिसने जैकलीन को सुकेश से मिलवाया था। इसके लिए उसे करोड़ों रुपए दिए गए थे।

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय ने 17 अगस्त, 2022 को सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जैकलीन फर्नांडिस को आरोपित बनाया था। ED ने कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल की थी। इससे पहले जैकलीन ने कहा था कि महाठग सुकेश ने खुद को सन टीवी के मालिक और चेन्नई के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार का सदस्य बताया था। जैकलीन ने ईडी को यह भी बताया था कि उसे हर हफ्ते सुकेश से लिमिटेड एडिशन के परफ्यूम, हर दूसरे दिन फूल, डिजाइनर बैग, डायमंड इयररिंग्स आदि मिलते थे। वहीं, ईडी ने अपनी चार्टशीट में इस बात का जिक्र किया था कि सुकेश चंद्रशेखर ने अभिनेत्री को महँगे तोहफे देना कबूल किया है।

गहलोत कैंप को स्वीकार नहीं सचिन पायलट, राजस्थान में कॉन्ग्रेस पर छाया ‘मुख्यमंत्री’ का संकट: टूटेगी पार्टी या बचे हैं ये विकल्प?

कॉन्ग्रेस (Congress) एक समस्या से निकलने की कोशिश करती है तो दूसरे में फँस जाती है। राजस्थान में भी यही देखने को मिल रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर एक समस्या का समाधान खोजा जा रहा था तो प्रदेश में सीएम पद को लेकर दूसरी समस्या शुरू हो गई है।

राजस्थान के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) को प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री बनाए की सुगबुगाहट के बीच अशोक गहलोत गुट के विधायकों ने इसका विरोध किया है। विधायकों की माँग है कि कॉन्ग्रेस विधायक दल द्वारा नया मुख्यमंत्री चुना जाए।

सचिन पायलट को अशोक गहलोत का उत्तराधिकारी बनाए जाने के विरोध में गहलोत समर्थक माने जाने वाले 92 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को विरोध में अपना इस्तीफा भी सौंप दिया है। हालाँकि, पायलट समर्थकों का मानना है कि केंद्रीय प्रवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन की रिपोर्ट के बाद पार्टी आलाकमान सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कोई ना कोई रास्ता निकालेगी।

राज्य की वर्तमान हालात को देखते हुए पार्टी हाईकमान के पास वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पार्टी अध्यक्ष के साथ-साथ राज्य का मुख्यमंत्री पद भी दे सकती है। जब राज्य के राजनीतिक हालात में सुधार देखने को मिलेगा तो उस पर किसी तरह की बदलाव का विचार कर सकती है। कहा जा रहा है कि अशोक गहलोत भी पार्टी अध्यक्ष बनने के बजाय मुख्यमंत्री बने रहना पसंद कर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस के पास दूसरा रास्ता है कि पार्टी हाईकमान अशोक गहलोत के बजाय पार्टी अध्यक्ष के लिए किसी अन्य उम्मीदवार को चुने। इससे राजस्थान की कमान अशोक गहलोत के पास ही रहेगी और पार्टी में किसी तरह की टूट या विरोध को टाला जा सकेगा। हालाँकि, पार्टी के पास इसके लिए नए सिरे से विचार करना होगा।

हाईकमान के पास तीसरा विकल्प है कि सचिन पायलट को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाए और अशोक गहलोत को अपने खेमे के विधायकों को पायलट का समर्थन करने के लिए मनाए। हालाँकि, इसकी संभावना कम है, क्योंकि बीते समय में दोनों को बीच तल्ख रिश्ते अलग आयाम ले चुके हैं।

वहीं, हाईकमान किसी तीसरे ऐसे व्यक्ति को प्रदेश का मुख्यमंत्री चुन सकता है, जो अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों को स्वीकार हों। कहा जा रहा है कि केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने इसको लेकर पार्टी के विधायकों के समक्ष कुछ नामों पर चर्चा की थी, लेकिन पायलट गुट इसके लिए तैयार नहीं दिखा। वहीं, बैठक में गहलोत गुट के विधायक भी नहीं पहुँचे।

दरअसल, अशोक गहलोत समर्थक विधायकों का कहना है कि जो व्यक्ति एक बार पार्टी तोड़ने की कोशिश कर चुका है, उसे मुख्यमंत्री नहीं बनाया जा सकता और यदि पार्टी हाईकमान ऐसा करता है तो उन्हें यह स्वीकार नहीं होगा। माना जा रहा है कि इस पूरे गेम के पीछे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का ही हाथ है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अशोक गहलोत पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद भी सीएम पद की कुर्सी अपने पास रखना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि वे खुद बने रहें या फिर अगला सीएम बनने का अधिकार उनके पास हो और वे अपनी पसंद के विधायक को इस कुर्सी पर बैठा सकें।

बता दें कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नाम पार्टी अध्यक्ष के लिए आगे बढ़ चुका है। वे 28 या 29 सितंबर को अपना नामांकन दाखिल भी कर सकते हैं। ऐसे में पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी के सामने दुविधा खड़ी हो गई है।

राहुल गाँधी भी ‘भारत जोड़ो’ अपनी यात्रा के दौरान कह चुके हैं कि पार्टी में एक व्यक्ति एक पद का फॉर्मूला रहेगा। ऐसे में अशोक गहलोत के लिए भी संकट खड़ा हो गया है। अगर गहलोत कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनते हैं तो उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी होगी।

ऐसे में अशोक गहलोत के धुर विरोधी और लंबे समय से सीएम पद की कुर्सी पर टकटकी लगाए बैठा सचिन पायलट का खेमा इस मौके पर चुकना नहीं चाहता है। पायलट गुट चाहता है कि अशोक गहलोत को अध्यक्ष बनाए जाने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी सचिन पायलट को मिले। अशोक गहलोत समर्थक सचिन को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। अगला निर्णय अब पार्टी पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर निर्भर करता है।

PFI का अब्दुल माजिद लखनऊ से धराया, ISIS से जुड़े दस्तावेज बरामद: यूपी के 86 व्हाट्सएप्प ग्रुप रडार पर, 2 साल में बदल गई कट्टरपंथियों की लाइफस्टाइल

कट्टरपंथी इस्लामी संगठन ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI)’ के खिलाफ चल रही राष्ट्रव्यापी कार्रवाई के बीच उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF) ने PFI से जुड़े मोहम्मद अब्दुल माजिद को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी लखनऊ से रविवार (25 सितम्बर, 2022) को हुई है। अब्दुल माज़िद PFI के प्रदेश अध्यक्ष वसीम अहमद का करीबी बताया जा रहा है। माज़िद NIA की छापेमारी के दौरान भाग निकला था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब्दुल माज़िद लखनऊ के ही काकोरी क्षेत्र का रहने वाला है। NIA की छापेमारी से बच कर वो लखनऊ के ही गोमती नगर इलाके में छिपा हुआ था। STF ने उसकी तलाशी ली तो उसके पास से 3 मोबाइल फोन और PFI से जुड़े कागज़ात मिले हैं। माजिद डेढ़ साल पहले असामाजिक हरकतों के चलते उत्तर प्रदेश ATS द्वारा गिरफ्तार किया गया था, जो फिलहाल जमानत पर चल रहा था। माजिद के पास ISIS से जुड़ा साहित्य भी बरामद हुआ है। पुलिस ने उस पर UAPA एक्ट के तहत कार्रवाई की है।

मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस को अभी लखनऊ के मदयगंज से गिरफ्तार मोहम्मद अहमद बेग के फरार चल रहे 3 साथियों की तलाश है। आरोपित मोहम्मद अहमद बेग विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुका है। उस पर PFI के लिए यूपी में फंडिग जुटाने का भी आरोप है। बेग के 3 फरार साथियों पर उसका पासपोर्ट बनवाने में मदद का आरोप है। बेग पर कई युवाओं का ब्रेनवाश करने और उन्हें देश विरोधी हरकतों में शामिल करने का आरोप है। फिलहाल STF अहमद बेग को रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है।

इस पूरे नेटवर्क को खंगालते हुए सुरक्षा एजेंसियों को सोशल मीडिया पर एक्टिव 250 ऐसे एकाउंट मिले हैं, जिन्हें संदिग्ध माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इन ग्रुपों में चरमपंथ को ले कर बातें की गईं हैं और आपत्तिजनक मज़हबी सामग्री डाली गई है। अकेले पश्चिम UP के 86 व्हाट्सएप ग्रुप सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर हैं। लखनऊ में PFI द्वारा फंडिंग जुटा कर आतंक की पाठशाला चलाने की बात भी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि CAA के नाम पर हुई हिंसा के बाद इस पूरे रैकेट पर नजर रखी जा रही थी। कुल 108 लोगों को चिह्नित कर के उनके सम्पर्क के लगभग 500 संदिग्धों की हरकतें जाँची जा रही थीं। इसी दौरान ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी मज़हबी तकरीरें और बहस करने वालों पर भी नजर रखी गई थी। जाँच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे कई मामले दिखे जिसमें गाँव में रहने वाले कइयों की जीवन शैली बस 2 साल में ही बदल गई थी।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने टेरर फंडिंग और आतंकी गतिविधियों के खिलाफ गुरुवार (22 सितंबर 2022) को 11 राज्यों में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के टॉप लोगों के घरों और दफ्तरों पर छापेमारी की थी। इस दौरान PFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओएमएस सलाम और इसी संगठन के दिल्ली अध्यक्ष परवेज अहमद को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने गिरफ्तार कर लिया गया था।

2 नाबालिग लड़कियों का धर्मांतरण, 3 बच्चों की माँ से निकाह: पाकिस्तान में पुलिस नहीं कर रही हिंदुओं की सुनवाई, मामले को दबाने में जुटी

पाकिस्तान में एक बार फिर से हिंदू लड़कियों के जबरन धर्मान्तरण का मामला सामने आया है। इस बार धर्म परिवर्तन की शिकार 1 महिला और 2 नाबालिग लड़कियाँ हुई हैं। आरोप है कि दोनों नाबालिग लड़कियों का जबरदस्ती मुस्लिमों से निकाह भी करवाया गया। वहीं एक अन्य हिंदू महिला के पति ने पड़ोसी अहमद पर आरोप लगाया कि अहमद ने उसकी बीवी को इस्लाम कबूल करवाकर निकाह कर लिया है। इन सभी मामलों में पुलिस द्वारा ढिलाई दिखाने का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला सिंध प्रान्त का है। अपहरण हुई पहली नाबालिग लड़की का नाम मैना मेघवाल (बदला नाम) है जिसकी उम्र 14 साल है। दलित समुदाय की लड़की नसरपुर इलाके में रहती थी। वहीं दूसरी हिंदू लड़की मीरपुर खास इलाके में रहती है जिसका अपहरण बाजार से घर लौटते समय कर लिया गया। इनके परिजनों का आरोप है कि पीड़िताओं का जबरन धर्मान्तरण और मुस्लिमों से निकाह करवाया जा रहा है।

तीसरा मामला भी मीरपुर ख़ास का है। यहाँ पर रवि कुर्मी नाम के एक हिंदू युवक ने अपने पड़ोसी अहमद के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी। पीड़ित के मुताबिक अहमद ने उसकी पत्नी जो 3 बच्चों की माँ भी है, को इस्लाम कबूल करवा के जबरदस्ती अपने साथ अपहरण कर के ले गया है। पीड़ित पति का आरोप है कि पुलिस उसकी सुनवाई नहीं कर रही है और मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान पुलिस के अधिकारी ने रवि कुर्मी की बात का खंडन किया है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक रवि की पत्नी राखी ने अपनी मर्जी से अहमद के साथ रहने का बयान दिया है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के अपहरण के बाद उनके साथ दुष्कर्म और जबरन धर्मान्तरण करवा कर निकाह की इस से पहले कई घटनाएँ घट चुकी हैं। 28 अगस्त 2022 को सिंध के ही शाहदादपुर इलाके की एक 8 साल की लड़की को खालिद और दिलशेख नाम के आरोपितों ने बाढ़ राहत चीजें दिलाने के नाम पर अपहरण किया था और उसके साथ दुष्कर्म किया था। इसके अलावा जून 2022 में सिंध की ही रहने वाली करीना नाम की हिंदू लड़की का अपहरण कर लिया गया था। बाद में करीना ने कोर्ट में खलील नाम के व्यक्ति से जबरन निकाह का बयान देते हुए अपने परिवार के साथ रहने की इच्छा जताई थी।

‘तालिबान ने हमें जेल में ठूँस दिया, काट डाले बाल’: अफगानिस्तान से भारत लौटा 55 सिखों का जत्था, मदद के लिए PM मोदी का जताया आभार

अफगानिस्तान में अल्पसंख्यकों (हिंदुओं-सिखों) पर तालिबान का कहर अब भी जारी है। यही कारण है कि तालिबान की सत्ता आने के एक साल बाद भी अफगानिस्तान से अल्पसंख्यकों का पलायन जारी है। खबर है कि अफगानिस्तान (Afghanistan) से एक बार फिर 55 सिखों को दिल्ली (Delhi) लाया गया है। इन्हें ‘शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGMC)’ एक विशेष विमान (Special Flight) से दिल्ली लेकर आया गया है। सिखों से भरा ये विमान रविवार (25 सितंबर, 2022) को ‘इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA)’ पर पहुँचा।

समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, जो 55 अफगान सिख भारत लौटे हैं, उनमें से एक ने अफगानिस्तान में अल्पसंख्यकों की दयनीय स्थिति के बारे में बताया। बलजीत सिंह ने सिखों पर तालिबान के अत्याचारों का खुलासा करते हुए एएनआई को बताया, “अफगानिस्तान में हालात ठीक नहीं हैं। मुझे चार महीने की कैद हुई थी। तालिबान ने हमें धोखा दिया है, उन्होंने जेल में हमारे बाल तक काट दिए।” बलजीत सिंह ने आगे कहा, “मैं भारत और अपने धर्म में वापस लौटने के बाद बहुत खुश हूँ। 11-12 लोग जो नहीं आ पाएँ हैं, मुझे उम्मीद है वह भी जल्द ही लौट आएँगे।”

अफगानिस्तान से भारत लौटने वाले सिख मनसा सिंह वहाँ के काबुल गुरुद्वारे में एक सेवादार थे। उन्होंने भारत लौटने में मदद करने के लिए पीएम मोदी (PM Modi) का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “मैं भारत सरकार और पीएम मोदी को ई-वीजा की सुविधा के लिए धन्यवाद देना चाहता हूँ, जिन्होंने भारत लौटने में हमारी मदद की।”

एक अन्य सिख सुखबीर सिंह खालसा ने कहा, “हम भारत सरकार को धन्यवाद देना चाहते हैं कि उन्होंने हमें तत्काल वीजा दिया और हमें यहाँ पहुँचने में हमारी मदद की। हम में से कई लोगों के परिवार अभी भी वहाँ छूट गए हैं। अफगानिस्तान में अभी भी उनके लगभग 30-35 लोग फँसे हुए हैं।”

वहीं, पंजाब से राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ट्वीट कर भारत सरकार को धन्यवाद दिया है। उन्होंने लिखा, “काबुल, जलालाबाद में फँसे 55 परिवार आज सुरक्षित दिल्ली पहुँच गए हैं। मैं ई-वीजा की सुविधा के लिए भारत सरकार का आभारी हूँ। एसजीपीसी को भी धन्यवाद। हम ‘मेरा परिवार मेरी जिम्मेदारी’ कार्यक्रम के तहत उनका पुनर्वास करेंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि उनका संगठन ‘मेरा परिवार मेरी जिम्मेदारी’ कार्यक्रम चला रहा है, जिसके तहत 543 अफगान सिखों और हिंदू परिवारों को सभी सुविधाएँ प्रदान करके पश्चिमी दिल्ली में उनका पुनर्वास किया गया है।

बता दें कि इससे पहले 3 अगस्त, 2022 को 28 सिखों को भारत लाया गया था। यहाँ आकर उन्होंने अफगानिस्तान में गैर मुस्लिमों के भयावह हालातों के बारे में बताया था। अफगानिस्तान से आए तरण सिंह ने बताया था कि तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद उनके बच्चे डर से स्कूल नहीं जा रहे थे। उनके परिवार वाले जिस प्रकार से दिल्ली में स्वतंत्र हो कर घूम रहे हैं, ऐसा अफगानिस्तान में संभव ही नहीं था।