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‘इस्लामी देशों में ही हो रहा विरोध, फिर हिजाब अनिवार्य कैसे?’: सुप्रीम कोर्ट में BJP सरकार का तगड़ा ‘बाउंसर’, कहा – उपद्रव के पीछे PFI

मंगलवार (20 सितंबर, 2022) को हिजाब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 8वें दिन सुनवाई हुई। इस सुनवाई में कर्नाटक सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हिजाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। उन्होंने ईरान का उदाहरण देते हुए बताया कि ऐसे इस्लामी देश भी हैं, जहाँ हिजाब का विरोध हो रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिन छात्राओं ने हिजाब बैन के खिलाफ याचिका दायर की है, वे कट्टरपंथी संगठन ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI)’ के प्रभाव में ऐसा कर रही हैं।

हिजाब बैन मामले में कर्नाटक सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, “कुछ ऐसे देश हैं जो संवैधानिक रूप से इस्लामी प्रकृति के हैं। लेकिन वहाँ भी महिलाएँ हिजाब का विरोध कर रही हैं।” इस पर कोर्ट ने पूछा कि आप किस देश की बात कर रहे हैं? इसके जवाब में सॉलिसिटर जनरल ने कहा, “ईरान, इसका मतलब यह है कि हिजाब धार्मिक रूप से अनिवार्य नहीं है। कुरान में केवल उल्लेख होने से इसे अनिवार्य नहीं कहा जा सकता।”

तुषार मेहता ने यह भी कहा कि सरकार का आदेश छात्रों के लिए नहीं, बल्कि संस्थानों के लिए है। उन्होंने समझाया कि सरकार ने कभी नहीं कहा कि लड़कियाँ इसे (हिजाब) नहीं पहनेंगी। उन्होंने बताया कि सरकार का आदेश पूरी तरह से जेंडर न्यूट्रल है और ऐसा नहीं है कि एक समुदाय एक विशेष को परिधान पहनने से रोका जाएगा। सभी छात्रों को निर्धारित यूनिफॉर्म पहननी चाहिए।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस हेमंत गुप्ता और सुधांशु धूलिया की बेंच को यह भी बताया कि 29 मार्च, 2013 को उडुपी के सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी गर्ल्स कॉलेज ने प्रस्ताव पास करके यूनिफॉर्म निर्धारित की थी। उन्होंने बताया कि यूनिफॉर्म निर्धारण के समय हिजाब को यूनिफॉर्म का हिस्सा नहीं बनाया गया था और उस समय किसी भी लड़की को इस यूनिफॉर्म से परेशानी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने भी जब 2021 में इस कॉलेज में एडमिशन लिया, तो उन्होंने भी यूनिफॉर्म के नियमों का पालन किया था।

उन्होंने यह भी कहा, “साल 2022 में PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) ने सोशल मीडिया पर एक कैंपेन चलाया था। इस कैंपेन का मकसद लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करके उपद्रव फैलाना था। ऐसा नहीं है कि कुछ बच्चियों ने अचानक से तय किया कि वे हिजाब नहीं पहनेंगी। ये सब सुनियोजित षड्यंत्र के तहत हुआ है। ये बच्चे वही कर रहे थे, जो PFI (पीएफआई) उनसे करवा रही थी।”

तुषार मेहता ने आगे कहा, “अगर राज्य सरकार ने 5 फरवरी को नोटिफिकेशन जारी करके छात्राओं को ऐसे कपड़े पहनने से न रोका होता जो शांति, सौहार्द और कानून व्यवस्था को नुकसान पहुँचा सकते थे। यदि ऐसा होता तो यह कर्तव्य के प्रति लापरवाही होती।”

गौरतलब है कि इसी वर्ष 15 मार्च को कर्नाटक हाई कोर्ट ने उडुपी के सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी गर्ल्स कॉलेज की कुछ मुस्लिम छात्राओं की क्लास में हिजाब पहनने की माँग वाली याचिका खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट कोर्ट ने अपने पुराने आदेश को बरकरार रखते हुए कहा था कि हिजाब पहनना इस्लाम की जरूरी प्रैक्टिस का हिस्सा नहीं है। इसे संविधान के आर्टिकल 25 के तहत संरक्षण देने की जरूरत नहीं है। कोर्ट के इसी फैसले को चुनौती देते हुए कुछ लड़कियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिस पर सुनवाई हो रही है।

गुजरात में मोदी-मोदी के नारों से हुआ अरविंद केजरीवाल का स्वागत, हाथ जोड़ कर मुस्कुराते रहे दिल्ली CM: एयरपोर्ट से निकलते ही करना पड़ा सामना

AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल मंगलवार (20 सितंबर, 2022) को एक दिवसीय दौरे पर गुजरात के वडोदरा पहुँचे, लेकिन यहाँ के एयरपोर्ट पर उनका स्वागत ‘मोदी-मोदी’ के नारों से हुआ। सोशल मीडिया पर इसका एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। जिसमें दिखाई दे रहा है कि सीएम केजरीवाल जैसे ही वडोदरा एयरपोर्ट से एग्जिट हुए, तभी परिसर ‘मोदी-मोदी’ के नारों से गूँज उठा।

प्राप्त जानकारियों के मुताबिक, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal) का स्वागत करने के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ता एयरपोर्ट पर ही उनका इंतजार कर रहे थे। जैसे ही वे एग्जिट गेट से बाहर निकले, तभी वहाँ अचानक ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगना शुरू हो गए। इसकी प्रतिक्रिया में सीएम केजरीवाल बस हाथ जोड़कर मुसकुराते रहे।

बताया जा रहा है कि सीएम केजरीवाल वडोदरा के ‘टाउन हॉल’ कार्यक्रम को संबोधित करने वाले हैं। सीएम केजरीवाल ने नारों को लेकर अपने एक बयान में कहा, “वडोदरा एयरपोर्ट पर मैं उतरा तो वहाँ 30-40 लोगों ने मेरे सामने मोदी-मोदी के नारे लगाए। गुजरात में ऐसा माहौल बन गया है कि बीजेपी को बहुत तकलीफ होने वाली है।”

अपने बयान को जारी रखते हुए सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, “कहते थे कि 66 सीटें ऐसी हैं अर्बन इलाकों में जहाँ बीजेपी कभी नहीं हारी है, इस बार इन सीटों पर भी काफी तकलीफ होने वाली है। जाहिर तौर पर ये मेरे खिलाफ नारे तो लगवाएँगे ही। दूसरी चीज यह है कि जब भी राहुल गाँधी गुजरात आए तो इन्होंने उसके सामने नारे नहीं लगाए। बीजेपी और कांग्रेस वाले इकट्ठे होकर केजरीवाल के खिलाफ नारे लगाते हैं। दोनों मिलकर गाली देते हैं।”

बुधवार को मनीष सिसोदिया भी पहुँचेंगे गुजरात

बताया जा रहा है कि ‘AAP’ की राज्य इकाई के अध्यक्ष गोपाल इटालिया ने बताया कि दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया बुधवार (21 सितंबर, 2022) को अहमदाबाद का दौरा करने वाले हैं। इस दौरान वे उत्तरी गुजरात में पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करने से सबसे पहले साबरमती आश्रम जाएँगे।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले ही सीएम केजरीवाल गुजरात दौरे पर अहमदाबाद पहुंचे थे। खबर है कि यहाँ उन्होंने पुलिस कर्मियों के साथ सिक्योरिटी को लेकर बदसलूकी की थी। जब सीएम एक ऑटो में बैठकर डिनर के लिए जा रहे थे, अभी पुलिस ने सुरक्षा के कारणों से उन्हें रोक तो वे भड़क गए।

इस दौरान AAP प्रमुख ने कहा, “आप मुझे जबरदस्ती सुरक्षा दे रहे हैं। आपको शर्म आनी चाहिए। आपके ऊपर धब्बा है, ये गुजरात की सिक्योरिटी के ऊपर धब्बा है। मुझे नहीं चाहिए ये सिक्योरिटी।” वहीं इस घटना के बाद पार्टी द्वारा इसका दोष भाजपा को दिया गया, पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर लिखा गया कि ‘तानाशाह’ BJP ने अरविंद केजरीवाल को ऑटो ड्राइवर के घर डिनर पर जाने से रोका।

मदरसों के बाद अब वक्फ संपत्तियों का होगा सर्वे, योगी सरकार की बड़ी तैयारी: देश का तीसरा सबसे बड़ा जमीन मालिक बन कर बैठा है

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) सरकार ने मदरसों के बाद अब वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का भी सर्वे करवाने का आदेश जारी किया है। मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग के वर्ष 1989 के शासनादेश को निरस्त करते हुए एक महीने के भीतर सर्वे पूरा करवाने और वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने को कहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सर्वे का उद्देश्य वक्फ सम्पत्तियों पर अवैध कब्जे और बिक्री को रोकना है। इस दौरान प्रदेश के सभी जिलों में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों की जाँच होगी। वहीं, 75 जिलों में जितनी भी जमीनें हैं, उन्हें वक्फ के नाम से अभिलेखों में दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है।

उप सचिव शकील अहमद सिद्दीकी ने जिले के सभी कमिश्नर और डीएम को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में कहा है, “वक्फ अधिनियम 1995 और उत्तर प्रदेश मुस्लिम वक्फ अधिनियम 1960 में वक्फ की संपत्ति को पंजीकरण कराने के प्रावधान के बावजूद नियमों की अनदेखी की गई है। वक्फ संपत्तियों को सुव्यवस्थित ढंग से राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने के लिए सात अप्रैल 1989 को शासनादेश भी जारी किया गया था। 1989 के शासनादेश के तहत पाया गया कि वक्फ की संपत्तियाँ अधिकतर बंजर, उसर और भाटी में दर्ज हैं। लेकिन, वह वक्फ की हैं। इसलिए इन भूमि को सही तरह से राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने और उनका सीमांकन कराने की जरूरत है।”

बता दें कि वर्ष 1989 के बाद से राजस्व अभिलेखों में दर्ज वक्फ संपत्तियों को नियमानुसार दुरुस्त करने को कहा गया है। देश भर में वक्फ बोर्ड के पास भारतीय सेना और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा भूमि है। वक्फ बोर्ड को देश का तीसरा सबसे बड़ा भूमि मालिक बताया जा रहा है। वक्फ मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया के मुताबिक, देश के सभी वक्फ बोर्डों के पास कुल मिलाकर 8 लाख 54 हजार 509 संपत्तियाँ हैं, जो 8 लाख एकड़ से ज्यादा भूमि में फैली हुई हैं।

एक तरफ आतंक के खिलाफ लड़ाई की बातें, दूसरी तरफ UN में ₹40 करोड़ के इनामी आतंकी को बचा रहा चीन: कसाब को उसने ही दी थी ट्रेनिंग

उज़्बेकिस्तान के शहर समरकंद में शुक्रवार (16 सितंबर, 2022) को ‘शंघाई सहयोग संगठन (SCO)’ का शिखर बैठक संपन्न हुआ। ‘शंघाई सहयोग संगठन’ दुनिया का सबसे बड़ा अंतर-सरकारी संगठन है, जो कि राजनीति, अर्थशास्त्र, विकास और सेना के मुद्दों पर केंद्रित है। वर्तमान में इस संगठन में 8 सदस्य देश शामिल हैं। इन देशों की सूची में भारत, पाकिस्तान और उज्बेकिस्तान सहित 4 पर्यवेक्षक देश (Observer Countries) और 6 संवाद भागीदार (Dialogue Partners) देश शामिल हैं।

इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना, सीमा मुद्दों को हल करना, आतंकवाद और धार्मिक अतिवाद का समाधान करना और क्षेत्रीय विकास को बढ़ाना है।

चीन ने शिखर सम्मेलन में क्या कहा?

इस बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि सभी देश अपनी सुरक्षा और विकास के लिए क़दम उठाते हैं, सदस्य देशों को इसमें एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए। चीन ने अगले पाँच सालों तक एससीओ सदस्य देशों के 2000 सुरक्षाकर्मियों को प्रशिक्षण देने और आतंकवाद के विरोध लड़ाई में मदद के लिए एक ट्रेनिंग बेस बनाने का भी आश्वासन दिया। लेकिन, हाल ही में जब संयुक्त राष्ट्र में लश्कर-ए-तैय्यबा के आतंकी साजिद मीर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के लिए भारत और अमेरिका ने प्रस्ताव लाया, तब चीन ने उस प्रस्ताव को ब्लॉक कर दिया।

पिछले तीन महीनों में यह तीसरी बार है, जब चीन ने पाकिस्तान के ज़मीन पर पलने वाले आतंकी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 सूची में शामिल होने से रोका है। चीन का यह कदम चीन के दोहरे रवैये को साफ़-साफ़ दर्शाता है। चीन एक तरफ़ ‘आपसी विश्वास’ और ‘आपसी सहयोग’ की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ़ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय हितों को हानि पहुँचाता है। यह चीन के ‘दोहरे चरित्र’ का परिचय देता है।

साजिद मीर भारत के लिए मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों में से एक है। वह 26/11 के मुंबई आतंकी हमले में शामिल था। मीर ने अजमल कसाब सहित कई हमलावरों को भर्ती किया और उन्हें प्रशिक्षित किया। वह ऑस्ट्रेलियाई सैन्य प्रतिष्ठान पर हुए हमलों जैसे कई आतंकवादी वारदातों में भी शामिल था अमेरिका ने उस पर 50 लाख डॉलर (39.88 करोड़ रुपए) का इनाम रखा हुआ है।

चीन: पुराना धोखेबाज़

चीन ने हमेशा भारत को पीठ में छुरा घोपा है। यह ऐसी पहली घटना नहीं है, जब चीन ने पीछे से धोखा दिया हो। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और उस समय के चीनी प्रधान जोउ इनलाई ने पंचशील समझौता किया था। उसके कुछ ही वर्षों बाद चीन ने भारत पर हमला किया और पंचशील समझौते के सिद्धांतों की धज्जियाँ उड़ा दी। कश्मीर के मुद्दे को ले कर भी चीन अपनी दोहरी रणनीति का परिचय देते आया है।

पहले भी चीन ने अपने और पाकिस्तान के हितों को ध्यान में रखते हुए कई आतंकियों को सूची 1267 में शामिल होने से रोका है। चीन द्वारा अपने P-5 दर्जे का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसके खिलाफ मुक़ाबला करने के सामूहिक प्रयासों को भी वो बाधित करता है। इस तरह का कदम अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को बढ़ावा देता है और वैश्विक स्तर पर आम सहमति के विपरीत है। अपने विस्तारवादी नीतियों को आगे रखते हुए चीन ने ‘नियम आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था (Rule based International order)’ को हमेशा चुनौती दी है।

एससीओ के शिखर सम्मेलन में शुक्रवार को चीन ने आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई की जरूरत की बात कही और दूसरे दिन जब उस पर अमल करने की बारी आई तो चीन ने भारत सहित दुनिया को धोखा दे दिया। साजिद मीर जैसे आतंकवादी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 सूची में डालना क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता था। लेकिन, चीन ने अपने वीटो पावर (Veto Power) का इस्तेमाल कर के न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व को धोखा दिया है।

ऐसे कदम एससीओ जैसे क्षेत्रीय संगठनों के सदस्यों में अविश्वास पैदा करते हैं, जो कि सामूहिक क्षेत्रीय विकास और वैश्विक विकास के लिए ख़तरा है।

मोहब्बत ये नहीं तो क्या है… पाकिस्तानी अभिनेता के साथ अमीषा पटेल का रोमांटिक वीडियो, चर्चा – दोनों रिलेशनशिप में, एक-दूसरे को कर रहे डेट

बॉलीवुड एक्ट्रेस अमीषा पटेल अपनी बोल्डनेस को लेकर चर्चा में बनी रहती हैं। इस बार वह अपनी पर्सनल-लाइफ को लेकर सुर्खियों में हैं। अमीषा पटेल जहाँ अब तक सिंगल लाइफ इंजॉय कर रहीं थीं वहीं अब ऐसी खबरें हैं कि वह पाकिस्तानी एक्टर और सिंगर इमरान अब्बास को डेट कर रहीं हैं। दरअसल, अमीषा पटेल और इमरान अब्बास ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो अपलोड किया है। इस वीडियो में दोनों ही बेहद रोमांटिक अंदाज में नजर आ रहे हैं।

इस वीडियो के बैकग्राउंड में ‘क्रांति (2001)’ फिल्म का गाना ‘मोहब्बत ये नहीं तो क्या है…’ चल रहा है। इस पर अमीषा और इमरान लिपसिंक कर रहे हैं।

इस वीडियो के कैप्शन में इमरान अब्बास ने लिखा, “अपनी दोस्त अमीषा पटेल के साथ अपने फेवरेट टिपीकल बॉलीवुड ट्यून्स पर फिल्मी होकर मजा आया।” वहीं, अमीषा ने कैप्शन में लिखा, “पिछले हफ्ते बहरीन में अपने सुपरस्टार दोस्त इमरान अब्बास के साथ काफी मस्ती की। बॉबी देओल के साथ मेरी फिल्म ‘क्रांति’ का ये गाना इमरान और मेरे फेवरिट गानों में से एक है।” अमीषा की इंस्टाग्राम पोस्ट पर इमरान ने कमेंट भी किया है। इस कमेंट में उन्होंने लिखा, इस वीडियो को शूट करने में काफी मजा आया। वे फिर से अमीषा से मुलाकात होने का इंतजार कर रहे हैं।

इस वीडियो के सामने आने के बाद से अब तक इसे 98 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। वहीं, सोशल मीडिया पर उनके फैंस इन दोनों को साथ देखने के बाद उनकी जोड़ी को हिट बता रहे हैं। यही नहीं, दोनों को एक साथ किसी मूवी में देखने की भी डिमांड कर रहे हैं।

गौरतलब है, अमीषा पटेल और इमरान अब्बास की रिलेशनशिप को लेकर कई खबरें सामने आती रहतीं हैं। हालाँकि, इन दोनों ने कभी भी खुलकर रिलेशनशिप की बात स्वीकार नहीं की है। चूँकि, इन दोनों का यह रोमांटिक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, इसलिए इनके फैंस इनके रिलेशनशिप की सच्चाई जानने के लिए आतुर दिखाई दे रहे हैं।

‘शिमला बनेगी खालिस्तान की राजधानी’: आतंकी संगठन का ऐलान, ब्रिटेन के बाद अब कनाडा में जनमत संग्रह, कहा – 26 जनवरी को भारत में रेफरेंडम

पंजाब को अलग देश बनाने की नापाक साजिश रच रहे खालिस्‍तानी आतंकियों ने ब्रिटेन के बाद अब कनाडा में जनमत संग्रह कराया है। कनाडा के ओंटारियो शहर में यह जनमत संग्रह (Referendum) कराया है। सिख आतंकवादी संगठन का दावा है कि इसमें 1,10,000 सिखों ने हिस्सा लिया है। सिख फॉर जस्टिस के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्‍नू ने कहा, “हम हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला को खालिस्‍तान (Khalistan) देश की राजधानी बनाएँगे।”

इसके साथ ही पन्‍नू ने ऐलान किया कि अगले साल 26 जनवरी को भारत के 74वें गणतंत्र दिवस पर पंजाब में खालिस्‍तान के समर्थन में जनमत संग्रह शुरू होगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कनाडा लगभग दस लाख सिखों का घर है। इनमें से अधिकतर खालिस्‍तान के कट्टर समर्थक हैं। उनमें से ज्यादातर मूल रूप से पंजाब के निवासी हैं। खालिस्‍तान समर्थकों को लेकर भारत और कनाडा के बीच अक्‍सर तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। कनाडा की ट्रूडो सरकार ने इसे ‘शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रक्रिया’ बताते हुए ओंटारियो में जनमत संग्रह पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

मालूम हो कि इससे पहले 23 जून 1985 को कनाडा के सिख आतंकवादियों ने एयर इंडिया फ्लाइट 182 पर बमबारी की थी, जो अटलांटिक महासागर के ऊपर 31,000 फीट (9,400 मीटर) की ऊँचाई पर मॉन्ट्रियल से लंदन के बीच हवा में किया गया विस्‍फोट था। इसमें सभी 329 यात्री मारे गए थे। इस फ्लाइट का मलबा अटलांटिक महासागर में आयरलैंड के तट पास 190 किमी की दूरी पर गिरा था। मारे गए लोगों में 268 कनाडा के, 27 ब्रिटेन और 24 भारतीय नागरिक थे। 11 सितंबर के अमेरिका पर हमले के बाद यह दुनिया में सबसे खतरनाक हवाई आतंकी हमला माना जाता है।

बता दें कि पाकिस्तान की बदनाम खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के सहयोग से पन्नू खालिस्तानी आतंकियों को फिर से जिंदा करने की कोशिश करने में लगा हुआ है। उसकी देश विरोधी गतिविधियों को देखते हुए साल 2019 में भारत सरकार ने ‘सिख फॉर जस्टिस’ संगठन को बैन कर दिया था। पन्नू भी भारत में वांछित आतंकी है।

खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के पिता की मौत बहुत पहले हो गई थी। भारत में रहने वाली अपनी माँ को उसने बताया था कि वह कनाडा में बहुत बड़ा वकील है। कुछ वर्ष पहले उसकी माँ की भी मौत हो गई। अब भारत में उसके परिवार का कोई सदस्य नहीं रहता।

‘भगवंत मान ने दारू पीने के बाद कहा… ओये, आज प्लेन मैं चलाऊँगा’ – AAP नेता ने कही दिल की बात, अब पड़ रही गाली

कॉमेडियन और AAP नेता श्याम रंगीला ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर ट्विटर पर एक टिप्पणी की, जो अब उन पर ही भारी पड़ रही है। दरअसल, पंजाब के सीएम भगवंत मान को जर्मनी में फ्लाइट से उतारे जाने पर कॉमेडियन ने ट्वीट कर लिखा, “जहाँ तक मुझे लगता है, भगवंत मान ने केवल दारू ही नहीं पी, बल्कि पीने के बाद ‘ओये, आज प्लेन मैं चलाऊँगा’ वाली ज़िद भी की होगी, तभी उतारने तक बात गई है।”

श्याम रंगीला का ये ट्वीट AAP नेताओं और समर्थकों को पसंद नहीं आया। इसके बाद वो सोशल मीडिया पर उन्हें खरी-खोटी सुनाने लगे। जाहिद नामक यूजर ने लिखा, “अबे शक्ल से चरसी तो तू दिखता है। आधे किलो का गोश्त नहीं है शरीर में और बातें कर रहा है।”

AAP कार्यकर्ता सुजीत सचान ने लिखा, “मुझे लग रहा है श्याम रंगीला जी ने अपनी ID भाजपा कार्यालय में जमा कर दी है।”

एक अन्य AAP कार्यकर्ता संजय राठी ने लिखा, “क्या आम आदमी पार्टी छोड़ दी है या पार्टी में रह कर पार्टी की वाट लगा रहे हों।”

एमसुथार यूजरनेम वाले एक एक AAP समर्थक ने लिखा, “सीएम पद का मजाक ना बनाएँ। खबर की बिना पुष्टि के आप आलोचना कर सकते हैं, लेकिन झूठी बातें नहीं फैला सकते।”

वहीं एक और यूजर और आम आदमी पार्टी के समर्थक ने लिखा, “पॉलिटिक्स में आने से पहले हँसी-मजाक ठीक था। पॉलिटिक्स में आकर ये सब करना है, तो गलत पार्टी में आ गए हो। कॉन्ग्रेस में जाओ। सारे जोकर वहीं हैं।”

संजय शर्मा नाम के यूजर ने भी कॉमेडियन की ट्वीट की रिप्लाई करते हुए लिखा, “सस्ता नशा कर लिया है आज तूने, खबर सच्ची है या झूठी एक बार ये पता कर लेता? अब बस मिमिक्री करते रहना जिंदगी भर, तेरा कुछ नहीं हो सकता।”

एक यूजर ने लिखा, “कॉमेडी में में टाइमिंग का बहुत महत्व होता है श्याम जी। झूठ के पक्ष में कॉमेडी करना, वो भी जब सच्चाई पता लग गई हो तो घटिया कॉमेडी ही होगी।”

मासन नामक यूजर ने सीएम केजरीवाल पर निशाना साधते हुए लिखा, “लगता हैं ये केजरीवाल की ही स्क्रिप्ट हैं। ऐसी ही स्क्रिप्टों के सहारे केजरीवाल ने अपने पार्टी के बड़े बड़े नेताओं को निपटा दिया! पहले ख़बरें प्लांट करवाओ, फिर जब उस  आदमी का नेगेटिव इमेज बन जाए तो उसको लात मार कर बाहर निकाल दो, ये केजरीवाल का बहुत पुराना हथियार हैं! नेक्स्ट मान।”

कॉमेडियन ने भी दी प्रतिक्रिया

गौरतलब है कि इन सभी आलोचनाओं के बाद कॉमेडियन रंगीला ने भी ट्वीट कर सफाई दी। उन्होंने लिखा, “मैंने किसी भी प्रकार से ये प्रूव नहीं किया की ख़बर सही है, मैं सबसे पहले हास्य कलाकार हूँ और इसलिए ऊपर साफ़-साफ़ मज़ाक़ में लिखा की ‘मुझे लगता है’,  हर किसी की फ़ेक न्यूज़ बनती और उस पर मज़ाक़ बन जाता है, इसे केवल मज़ाक़ में लें। धन्यवाद।”

आपको बताते चलें कि कॉमेडियन रंगीला ने इसी साल मई महीने की शुरुआत में आम आदमी पार्टी को जॉइन किया था। उन्होंने इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा था, “राजस्थान को भी ‘काम की राजनीति’ की आवश्यकता है, और हम ‘काम की राजनीति’ और ‘आप’ के साथ है। धन्यवाद।”

₹800 करोड़ की लागत से बन कर तैयार हुआ महाकाल कॉरिडोर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से 4 गुना बड़ा: देश का पहला नाइट गार्डन भी

महाकाल की नगरी उज्जैन में शिवराज सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट महाकाल कॉरिडोर बनकर तैयार हो गया है। इस कॉरिडोर के निर्माण के बाद महाकाल मंदिर पहले से कहीं अधिक अधिक भव्य दिखाई दे रहा है। महाकाल कॉरिडोर शुरू होने के बाद यहाँ दर्शनार्थियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 11 अक्टूबर को इस कॉरिडोर का लोकार्पण करेंगे।

मध्य प्रदेश के सबसे बड़े तीर्थ स्थलों में से एक उज्जैन में इस कॉरिडोर के बनने के बाद महाकाल मंदिर परिसर दस गुना अधिक बड़ा हो गया है। पहले यह सिर्फ 2 हेक्टेयर में फैला हुआ था लेकिन अब यह 20 हेक्टेयर में फैल चुका है। उत्तर प्रदेश का काशी विश्वनाथ कॉरिडोर 5 एकड़ में बना हुआ है, यानी महाकाल कॉरिडोर उससे 4 गुना अधिक बड़ा है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार (19 सितंबर, 2022) को बताया कि इस महाकाल कॉरिडोर का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होना है। मुख्यमंत्री ने ट्वीट करते हुए बताया था, “आज हमने जो काम देखा है, उस से मैं संतुष्ट हूँ। 11 अक्टूबर को माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाकाल महाराज की नगरी पधारेंगे और प्रथम चरण के कार्यों का लोकार्पण करेंगे। हम आज से ही तैयारियाँ प्रारंभ कर रहे हैं।”

बता दें कि महाकाल कॉरिडोर का निर्माण पौराणिक सरोवर रुद्रसागर के किनारे हुआ है। ऐसी मान्यता है कि रुद्रसरोवर के दर्शन मात्र से 7 जन्मों की चिंताएँ दूर हो जातीं हैं। इस परिसर को शिव, शक्ति समेत अन्य धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी करीब 200 मूर्तियों और भित्ति चित्र (म्यूरल्स) के माध्यम से सजाया गया है।

यही नहीं, इस कॉरिडोर में सप्त ऋषि मण्डल, नवग्रह मण्डल, कमल ताल में विराजित शिव, 108 स्तम्भों में शिव के आनंद तांडव का अंकन, त्रिपुरासुर वध, शिव स्तम्भ के साथ ही प्रवेश द्वार पर विराजित नंदी की विशाल प्रतिमाएँ हैं। इसके अलावा, यहाँ पहला नाइट पार्क भी बनाया गया है।

महाकाल कॉरिडोर प्रोजेक्ट की कुल लागत 793 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इस प्रोजेक्ट के पहले चरण के कामों को फाइनल टच दिया जा चुका है। पहले चरण में महाकाल पथ, महाकाल वाटिका, रुद्रसागर तालाब के किनारे का डेवलपमेंट समेत मुख्य द्वार, नाइट पार्क व अन्य विस्तार शामिल हैं। यह प्रोजेक्ट महाकाल मंदिर की तस्वीर की पूरी तरह बदल देगा। इस प्रोजेक्ट के दर्शनार्थियों को दो लाभ होने वाले हैं – पहला यह कि दर्शन बेहद आसान होंगे और दूसरा, दर्शन के साथ ही धार्मिक पर्यटन भी किया जा सकता है।

‘शादी केवल शारीरिक सुख और संतुष्टि के लिए नहीं होती, इसका मुख्य उद्देश्य बच्चे पैदा करना’: मद्रास HC की टिप्पणी

मद्रास हाई कोर्ट ने शादी को लेकर बड़ी टिप्पणी की है। बच्चे की कस्टडी के एक मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा है कि शादी सिर्फ शारीरिक सुख पाने के लिए नहीं होती है, बल्कि शादी का उद्देश्य संतानोत्पत्ति, अर्थात परिवार को आगे बढ़ाना भी है। कोर्ट ने कहा कि संतान ‘जोड़ों को जोड़ने वाली कड़ी’ होती है।

दरअसल, मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस कृष्णन रामास्वामी दंपति के बीच बच्चे की कस्टडी के विवाद के मामले की सुनवाई कर रहे थे। इस सुनवाई में जस्टिस रामास्वामी ने कहा कि दंपति के बीच संबंध खत्म हो सकते हैं, लेकिन उनका बच्चों के साथ माता-पिता के रूप में संबंध बना रहता है।

उन्होंने कहा, “अदालत वैवाहिक बंधन में बंधे व्यक्तियों को यह बताना चाहती है कि विवाह की अवधारणा केवल शारीरिक सुख की संतुष्टि के लिए नहीं है, बल्कि यह मुख्य रूप से प्रजनन के उद्देश्य के लिए है, जो पारिवारिक श्रृंखला के विस्तार के लिए आवश्यक है। विवाह से पैदा हुआ बच्चा दो व्यक्तियों को वाली कड़ी होता है।”

जस्टिस ने कहा, “पति-पत्नी के बीच विवाह समाप्त हो सकता है, लेकिन पिता और माता के रूप में उनके बच्चों के साथ उनका रिश्ता कभी नहीं। प्रत्येक बच्चे के लिए, पिता और माता शाश्वत हैं, भले ही माता-पिता में से कोई भी किसी अन्य व्यक्ति से दोबारा शादी कर सकता है।”

रिपोर्ट के अनुसार, पत्नी ने शिकायत की थी कि उनका पति उन्हें बच्चे से नहीं मिलने दे रहा है और इस तरह से वह कोर्ट के आदेश का भी पालन नहीं कर रहा है। इसलिए, पत्नी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए पेरेंटल एलिएनेशन (पतिपत्नी में किसी एक द्वारा बच्चे को दूसरे से दूर रखने के लिए भड़काना या खिलाफ करना) का आरोप लगाया था।

इस सुनवाई के दौरान माता-पिता के अलगाव को अमानवीय और बच्चे के लिए खतरा बताते हुए जस्टिस रामास्वामी ने कहा कि एक बच्चे को माता-पिता के खिलाफ करना बच्चे को अपने खिलाफ करना है। उन्होंने कहा कि एक बच्चे को कम से कम वयस्क होने तक माता और पिता, दोनों को पकड़ने के लिए दो हाथों की सख्त जरूरत होती है।

मद्रास हाई कोर्ट के जज ने कहा, “कानून अहंकार को संतुष्ट कर सकता है, लेकिन इससे बच्चे की आवश्यकताओं को पूरा नहीं किया सकता। कानून के निर्माता केवल बच्चे के कल्याण के प्रति जागरूक थे। उन्हें इस तरह की मानसिक उथल-पुथल के बारे में नहीं पता था कि बच्चों को इस तरह की स्थिति का भी सामना करना पड़ेगा।”

सुरेश रैना के परिवार वालों के हत्यारे शाहजान और उसके साथी तालिब को UP पुलिस ने पैर में मारी गोली, नहीं पकड़ पाई थी पंजाब पुलिस

उत्तर प्रदेश की मुज़फ्फरनगर पुलिस ने क्रिकेटर सुरेश रैना के रिश्तेदारों सहित 3 लोगों की हत्या में शामिल आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपित का नाम शहजान है, जिसके साथ उसका साथी तालिब भी गिरफ्तार हुआ है। मुठभेड़ में दोनों आरोपितों के पैर में गोली लगी है।

UP पुलिस से हुई इस मुठभेड़ के बाद वायरल हो रहे वीडियो में दोनों आरोपित (शहजान और तालिब) पुलिस के आगे हाथ जोड़ते नजर आए। घटना 19-20 सितम्बर रात की है।

मीडिया रिपोर्ट्स में मुजफ्फरनगर के SSP विनीत जायसवाल के हवाले से बताया गया है कि मुखबिर ने दोनों आरोपितों के किदवई नगर में होने की सूचना दी थी। सूचना में ये भी बताया गया था कि दोनों किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के मकसद से घूम रहे हैं। पुलिस ने इस सूचना पर स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) विंग के साथ मिल कर अभियान चलाया और शहजान और तालिब को घेर लिया।

खुद को घिरा देख कर दोनों बदमाशों ने गय्यूर के ऑफिस के पास पुलिस पर गोलियाँ बरसानी शुरू कर दीं। इसका जवाब पुलिस ने गोली से ही दिया। मुठभेड़ के दौरान दोनों आरोपितों के पैर में गोली लगी और वो घायल हो गए। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के दौरान वायरल हुए वीडियो में दोनों को कराहते सुना जा सकता है। वीडियो में एक आरोपित पुलिस के आगे हाथ भी जोड़ रहा है। दोनों आरोपित छपमार गैंग के सदस्य बताए जा रहे हैं। आरोपितों के पास से अवैध हथियार और एक बाइक भी बरामद हुई है।

गौरतलब है कि 19 अगस्त 2020 को पंजाब के पठानकोट में स्थित गाँव थारयाल में छयमार गैंग ने सुरेश रैना के फूफा अशोक कुमार के घर में डाका डाला था। इस दौरान विरोध करने पर डकैतों ने अशोक कुमार के साथ उनके बेटे कौशल को भी मार डाला था। इसके अलावा एक अन्य मौत भी इस दौरान हुई थी जबकि रैना की बुआ गंभीर रूप से घायल हो गईं थीं।

इस मामले में पंजाब पुलिस ने SIT का गठन किया था और 15 सितम्बर 2020 को 3 संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। हालाँकि पंजाब पुलिस शहजान को गिरफ्तार नहीं कर पाई थी, वो फरार चल रहा था।