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बिहार में जिस आदित्य की दिनदहाड़े चाकू घोंपकर हुई हत्या, उसके परिजनों को पकड़ने में लगी पुलिस: भाई का आरोप, JDU नेता ने कहा- दहशत रहना जरूरी

बिहार के छपरा में 21 सितम्बर 2022 को आदित्य तिवारी नाम के एक नाबालिग लड़के की चाकू मार कर हत्या कर दी गई थी। परिजनों का आरोप है कि हत्या में कुल 7 लोग शामिल थे। FIR के मुताबिक इन 7 आरोपितों में 6 मुस्लिम समुदाय से हैं। अब तक 4 आरोपितों की गिरफ्तारी की सूचना है।

इस बीच मृतक के परिजनों ने बिहार पुलिस पर बड़ा आरोप लगाया है। आदित्य के भाई ने दावा किया है कि जाँच में जुटी पुलिस आरोपितों के बजाए उनके शुभचिंतकों और रिश्तेदारों को प्रताड़ित करने और कस्टडी में लेने में लगी है। वहीं मृतक के घर पहुँचे JDU नेता ने पुलिस की इस कार्रवाई का समर्थन किया है।

एक स्थानीय समाचार चैनल को दिए गए इंटरव्यू में मृतक आदित्य तिवारी के भाई ने कहा कि वह भारतीय सेना में हैं और वर्तमान में राजस्थान बॉर्डर पर तैनात हैं। उन्होंने बिहार सरकार से सवाल किया कि जब उनका ही घर और परिवार देश के अंदर सुरक्षित हैं है तो वो बॉर्डर पर किसके भरोसे जाएँ?

मृतक के सैनिक भाई ने बताया कि हत्या के बाद उनके कई रिश्तेदार और शुभ चिंतक न्याय की आवाज उठाने के लिए उनके घर आ रहे थे जिन्हें पुलिस ने कस्टडी में लेना शुरू कर दिया, जिससे अब लोग उनके घर आने से भी कतराने लगे हैं।

मृतक आदित्य के फौजी भाई का ये बयान जनता जागृति न्यूज़ द्वारा फेसबुक पर पोस्ट की गई वीडियो में 7:00 मिनट से 12:20 मिनट के बीच सुना जा सकता है। इसी वीडियो में उन्होंने कहा है कि अब यहाँ लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने में डर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अब वही घटना किसी और के साथ न हो जाए।

प्रशासन की दहशत जरूरी

आदित्य के भाई द्वारा पुलिस पर लगाए गए गंभीर इल्जामों के बीच इस मामले पर जेडीयू नेता का चौंकाने वाला बयान आया है। दरअसल, मृतक के परिजनों से मिलने पहुँचे JDU नेता गौतम सिंह ने पीड़ित के शुभचिंतकों पर प्रशासनिक कार्रवाई का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन अपना काम कर रहा है और अगर वो सख्ती नहीं करेगा तो मामला बहुत आगे बढ़ जाएगा। गौतम सिंह के मुताबिक प्रशासन लोगों के बीच में दहशत कर रहा है जिस से चिंतित नहीं होना है।

JDU नेता ने ‘फ्री इंडिया-फ्री माइंड’ नाम के यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में यह बातें 1:15 मिनट से 1:34 मिनट के बीच कही है। इस इंटरव्यू में आगे आदित्य की हत्या के दौरान टीचरों के मूकदर्शक बने रहने को भी गौतम सिंह ने समर्थन दिया और बोले कि उस समय कोई भी होता तो डर से मदद न कर पाता। हालाँकि उन्होंने आगे माना कि मौके पर मौजूद लोगों द्वारा घायल बच्चे को अस्पताल पहुँचाने में देरी की गई है।

जाँच के लिए SIT का गठन

बिहार पुलिस ने आदित्य हत्याकांड में अब तक कुल 4 आरोपितों की गिरफ्तारी की जानकारी देते हुए SIT का गठन किया है। इस जाँच टीम में 1 एडिशनल SP, 3 DSP सहित कुल 20 पुलिसकर्मी शामिल किए गए हैं। पुलिस ने आमजनों के लिए एक मोबाईल नंबर जारी करते हुए घटना से संबंधित किसी भी जानकारी को खुद तक पहुँचाने की अपील की है।

पुलिस प्रेसनोट

‘मलद्वार में घुसाई रॉड, ईंट से मारा’: दिल्ली के सीलमपुर में 12 साल के लड़के का गैंगरेप, आरोपितों में ‘भाई’ भी शामिल, 2 हिरासत में

दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाके सीलमपुर से एक 12 साल के लड़के के गैंगरेप का मामला प्रकाश में आया है। घटना 18 सितंबर 2022 की है। पीड़ित लड़के की माँ ने इस संबंध में शिकायत देते हुए बताया कि 4 लड़कों ने उनके 12 साल के बेटे के मलद्वार में रॉड घुसाई और उसे ईंट-डंडों से भी मारा। आरोपितों में तीन उसके दोस्त और एक उसका कजन भाई है।

जी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर पूर्वी दिल्ली के डीसीपी संजय कुमार सेन ने कहा कि इस घटना की जानकारी होने पर पुलिस टीम फौरन अस्पताल गई थी, लेकिन परिजनों ने कुछ भी कहने से मना कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें काउंसर मुहैया करवाया। माँ की काउंसलिंग करते हुए उनसे पूरी घटना के बारे में जानकारी ली गई।

पुलिस ने इस केस को आईपीसी की धारा 377 और 34 में दर्ज किया है। लड़का दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती है। उसकी हालत गंभीर है। लड़के का यौन शोषण करने वाले उसके पड़ोस के दोस्त और उसका एक भाई है। सब एक ही समुदाय के हैं।

महिला आयोग ने लिया संज्ञान

बताया जा रहा है कि दिल्ली के सीलमपुर में हुई इस घटना को दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल द्वारा सामने लाया गया। माँ ने दिल्ली महिला आयोग में शिकायत देते हुए बताया था कि उनके बेटे के साथ 18 सितंबर को यह सब हुआ जिसका पता उन्हें अपने बेटे से 22 सितंबर को चला।

अब महिला आयोग ने इस संबंध में आरोपितों की जानकारी जुटाने के लिए पुलिस से लेटेस्ट एफआईआर माँगी है और ये भी पूछा कि अब तक इस केस में कितने गिरफ्तार हुए हैं।

इस बीच इस पूरे पर नॉर्थ ईस्ट के डीसीपी संजय सेन ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि यौन शोषण मामले में पुलिस ने पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है और अब तक 2 नाबालिग गिरफ्तार हो चुके हैं। पुलिस तीसरे को तलाश कर रही है।

दंगों से लेकर काँवड़ियों पर फेंकने के लिए चर्चा में आया सीलमपुर

बता दें कि दिल्ली का सीलमपुर इलाका उन्हीं इलाकों में से एक है जहाँ साल 2020 में दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों को अंजाम दिया गया था। दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी वहीं 400 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

दिल्ली दंगों के बाद ये इलाका कुछ दिन पहले फिर चर्चा में आया था जब सावन महीने की शुरुआत हुई थी। उस समय एक काँवड़िया काँवड़ लेकर सीलमपुर इलाके से गुजर रहा था लेकिन तभी उसकी काँवड़ के ऊपर मांस फेंक दिया गया। इस घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया था। हिंदुओं का कहना था कि ये हरकत जान बूझकर हुई है। हर राज्य में उनका फूलों से स्वागत हुआ लेकिन दिल्ली में इस हरकत के बाद उनकी काँवड़ खंडित हो गई।

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के लिए मंदिर जा रहे 24 हिंदू श्रद्धालुओं की मौत, कई लापता: नाव बीच रास्ते में पलटी, सवार थे 70+ लोग

बांग्लादेश में रविवार (25 सितंबर 2022) को हिंदू श्रद्धालुओं को बोदेश्वरी मंदिर (Bodeshwari Temple) ले जा रही एक नाव के पलट जाने से महिलाओं और बच्चों सहित कम से कम 24 लोगों की मौत हो गई है। वहीं एक दर्जन से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, कम से कम 10 लोगों को बचा लिया गया है और उन्हें अस्पताल भेजा गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना बांग्लादेश के पंचगढ़ जिले के बोडा की है। श्रद्धालु महालया (दुर्गा पूजा उत्सव की शुरुआत) के मौके पर नाव में सवार हो कर सदियों पुराने बोदेश्वरी मंदिर की तरफ जा रहे थे, लेकिन यह नाव कोरोटा नदी में पलट गई।

स्थानीय पुलिस अधिकारी शफीकुल इस्लाम (Shafiqul Islam) ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ज्यादातर महिलाएँ और बच्चे हैं। उन्होंने समाचार एजेंसी एएफपी (AFP) को बताया कि दमकलकर्मी और गोताखोर लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।

पुलिस ने कहा कि मृतकों में 8 नाबालिग बच्चे और 12 महिलाएँ शामिल हैं। पंचगढ़ के बोडा उप-जिले के प्रशासनिक प्रमुख सोलेमान अली ने बताया कि नाव में 70 से 80 यात्रियों के सवार होने का अनुमान है। पंचगढ़ के उपायुक्त जहूरुल हक ने कहा कि नाव यात्रियों को अपनी क्षमता से अधिक ले जा रही थी।

बांग्लादेश में हर साल हजारों हिंदू बोदेश्वरी मंदिर जाते हैं। दुर्गा पूजा में ये भीड़ बढ़ जाती है। राष्ट्रपति अब्दुल हामिद और प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के दौरान रविवार को हुई घटना पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने बयान जारी कर स्थानीय अधिकारियों को जीवित बचे लोगों के इलाज और मृतकों के मुआवजे के लिए कदम उठाने को कहा गया।

बता दें कि दुर्गा पूजा बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में सबसे बड़ा हिंदू त्योहार है। बांग्लादेश कई नदियों से घिरा हुआ है। यही कारण है कि यहाँ हर साल सैकड़ों लोग नाव दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं। इस साल मई में भी एक नाव के पद्मा नदी में पलट जाने से 26 लोगों की मौत हो गई थी।

अलीगढ़ में असलम ने बेच दी मस्जिद, गैर-कानूनी ढंग से चंदा माँगकर बनवाई थी: खुलासा होने पर फरार, इलाके में हड़कंप

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में एक मस्जिद को बेचने का मामला सामने आया है। आरोप है कि 4 साल पहले इस मस्जिद का निर्माण चंदे से हुआ था। यह मस्जिद मोहम्मद असलम के खेतों में बनी हुई थी। मस्जिद के निर्माण में नियमों की अनदेखी और जमीन में स्टाम्प चोरी का भी आरोप है। प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए जाँच और करवाई के आदेश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला थानाक्षेत्र अकराबाद का है। बताया जा रहा है कि यहाँ के पिलखना नगर पंचायत क्षेत्र में रहने वाले मोहम्मद असलम ने पहले तो लोगों से मस्जिद के नाम पर चंदा जुटाया फिर अपने सड़क के किनारे पड़े खेत में मस्जिद बनवाई। आरोप है कि कुछ दिनों के बाद असलम मस्जिद बेच कर फरार हो गया। यह मामला तब खुला जब पिलखना नगर पंचायत में हुए एक बैनामे में जाँच के दौरान स्टाम्प चोरी का मामला प्रकाश में आया।

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मस्जिद की बाकायदा रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्री करवाई गई है। रजिस्ट्री में इसको खरीदने और बेचने में भागीदार गारंटरों के नाम भी दर्ज हैं। आरोप यह भी है कि इस मस्जिद के निर्माण शासन-प्रशासन की अनुमति भी नहीं ली गई थी। मामले के सामने आते ही प्रशासन ने जाँच और मस्जिद बेचने वालों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अलीगढ़ के ADM अमित कुमार भट्ट के मुताबिक इस बेहद गंभीर मामले में SDM को जाँच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जाँच के उपरान्त जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ नियमानुसार एक्शन लिया जाएगा।

बिना हिजाब निकलने वाली महिलाओं को Prostitute बना देता था अकबर, जिस पर नजर पड़ गई उसे तलाक दिला कर ले आता था: हरम में चलती थी दारू-ड्रग्स की पार्टी

मुगलों को अक्सर भारत में बिरयानी और मुरब्बा लाने से लेकर हर चीज के लिए श्रेय देने की वामपंथियों में एक होड़ सी मची रहती है। खासकर अकबर को तो ये वामपंथी गिरोह ‘राष्ट्रपिता’ ही मानता है। अब जब हिजाब को लेकर भारत में कट्टर इस्लामी गिरोह सुप्रीम कोर्ट से लेकर सड़क तक उपद्रव कर रहा है, हमें इस संबंध में अकबर का एक कानून याद करने की आवश्यकता है। मुग़ल आक्रांता अकबर ने हिजाब के पक्ष में एक सख्त कानून बना रखा था।

असल में अकबर का कानून कुछ यूँ था कि सड़कों पर या बाजारों में अगर कोई महिला बिना हिजाब के पाई जाती है तो उसे वेश्याओं वाली जगह पर भेज दिया जाता था। अगर कोई महिला सार्वजनिक स्थानों पर अपना हिजाब या बुरका हटाती है तो उसके लिए भी यही कानून था, उसे भी Prostitute का काम करने को मजबूत किया जाता था। किसी महिला का अपने शौहर से लड़ाई-झगड़ा हुआ हो, तो भी यही सज़ा मिलती थी।

महिलाओं को लेकर अकबर ने ये कानून भी बनाया था कि अगर कोई महिला अपने शौहर से 12 साल बड़ी है तो वो उसके साथ नहीं रह सकेगी। मुग़ल बादशाह के इस क्रूर और अजीबोगरीब नियम-कानूनों का जिक्र ‘मुन्तखाब-उत-तवारीख‘ नामक पुस्तक में फ़ारसी मूल के 16वीं शताब्दी के इतिहासकार अब्दुल कादिर बदायूंनी ने किया है। इस पुस्तक में शुरुआती मुग़ल दौर के इतिहास का जिक्र है। इसे 16वीं शताब्दी के अंतिम दशक में लिखा गया था।

एक और कानून के बारे में जान लीजिए, जिसकी तर्ज पर आज भी ‘लव जिहाद’ जैसे कारनामे अंजाम दिए जाते हैं। असल में मुग़ल बादशाह अकबर के समय कानून था कि अगर कोई हिन्दू महिला को किसी मुस्लिम व्यक्ति से ‘प्यार’ हो जाता है तो फिर उसे जबरन उसके पति से छीन कर मुस्लिम व्यक्ति को सौंप दिया जाता था। एक और कहानी जान लीजिए। उस समय शेख बदाब आगरा का सरदार हुआ करता था, जिसे अकबर ने ही नियुक्त किया था।

उसकी एक बहू थी, जो काफी सुंदर थी। एक बार अकबर की नजर उस पर पड़ी। मुगलों के समय नियम था कि अगर किसी भी महिला की तरफ बादशाह की नजर पड़ जाती है और वो बादशाह को पसंद आ जाती है, तो उसके शैहर को अपनी बीवी को तलाक देकर बादशाह को सौंपना होता था। अकबर ने भी उस महिला के ससुर और पति से इस संबंध में बात की। उसके शौहर को अपनी बीवी को तीन तलाक देकर दक्कन जाना पड़ा और उस महिला को मुगलों के हरम में भेज दिया गया।

अकबर इतना सनकी था कि उसने अपने बेटियों के निकाह तक पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा था कि मुग़ल लड़कियों से शादी करने लायक कोई है ही नहीं, इसीलिए उन्हें कुँवारी ही रहना चाहिए। असल में उसे डर रहा कि अगर उसकी बेटियों ने निकाह किया तो दामाद लोग भी गद्दी के लिए दावेदारी करने लगेंगे। वो हर साल अपने हरम पर एक बड़ी रकम खर्च करता था। हरम तो उसके अब्बा हुमायूँ और दादा बाबर के समय भी थे, लेकिन उस हरम में महिलाओं की संख्या अकबर के समय चक्रवृद्धि दर से बढ़ी।

अकबर के इन्हीं नियमों के कारण मुग़ल वंश की लड़कियों और महिलाओं का जीवन नरक बन गया और कइयों को बुढ़ापे तक कुँवारी ही रहना पड़ा। अकबर प्रत्येक दिन 6 घंटे अपने हरम में ही महिलाओं के साथ ही गुजारता था। उसके हरम में 5000 से भी अधिक महिलाएँ थीं। साथ ही हरम की सुरक्षा के लिए नपुंसक लोगों को ही रखा जाता था, ताकि महिलाओं के साथ कोई सम्बन्ध न बना पाए। हर युद्ध के साथ अकबर के हरम में महिलाओं की संख्या बढ़ती ही चली गई।

अकबर के हरम का कुछ ऐसा था हाल

अकबर को बड़ा ही मजहबी बताया जाता है, लेकिन डेविड अब्राम की पुस्तक ‘The Rough Guide to India‘ में इसका जिक्र है कि वो शराब के साथ-साथ गाँजा और अफीम का सेवन भी करता था। वो पर्सियन वाइन का शौक़ीन था। उसके जनानखाने में अक्सर ऐसी पार्टियाँ होती थीं, जिसमें नशे का भरपूर इस्तेमाल किया जाता था। इसमें महिलाओं को सेक्सुअल एक्ट्स करने के लिए कहा जाता था। अकबर के हराम में ड्रग एडिक्शन चरम पर था।

मुगलों के हरम में ‘पर्दा’ करना अनिवार्य था, अर्थात महिलाओं को हिजाब और बुर्के में ही रहना होता था। आज भारत में इसी बुर्के और हिजाब की वकालत की जा रही है, जबकि ईरान जैसे इस्लामी मुल्कों में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस्लामी मुल्क की महिलाएँ ही आज हिजाब से आज़ादी चाहती हैं, लेकिन भारत में इस्लामी शासन स्थापित करने की दिशा में इसे औजार बनाया जा रहा है। हिजाब शुरू से महिलाओं को कैद रखे जाने और दोयम दर्जे का समझने का प्रतीक रहा है।

महिला ने क्लब के बाउंसरों पर लगाया कपड़े फाड़ने और मारपीट का आरोप, CCTV में तोड़फोड़ करते नज़र आई: क्लब मालिक ने कहा – वो नशे में थी

एक महिला ने आरोप लगाया है कि दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन स्थित ‘द कोड क्लब’ के बाउंसरों ने क्लब में प्रवेश को लेकर उसके साथ बदसलूकी की है। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। घटना 18 सितंबर, 2022 (रविवार) की बताई जा रही है।

दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए महिला ने आरोप लगाया कि ‘द कोड क्लब’ में उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उसके कपड़े फाड़े गए। साथ ही महिला ने दो बाउंसरों पर शारीरिक शोषण करने व उसके दोस्त को पीटने का भी आरोप लगाया है।

हालाँकि, इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी अब सामने आ गया है। इस फुटेज में महिला हंगामा करती नजर आ रही है। वीडियो में देखा जा सकता है कि वह बाउंसरों पर भड़कते हुए फर्नीचर को तोड़ रही है। उसकी चाल से भी ऐसा लग रहा है कि घटना के समय वह नशे में थी। क्लब के मालिक ने भी ऐसे ही दावा किया है। सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद महिला ने कोई बयान नहीं दिया है।

वहीं, क्लब के मालिक ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए महिला द्वारा किए गए सभी दावों को खारिज कर दिया है। यही नहीं, क्लब के मालिक ने दिल्ली पुलिस पर ‘जबरन वसूली’ के पैसे न देने के कारण गलत तरीके से फँसाने का आरोप लगाया है।

क्लब के मालिक ने यह भी कहा, “हम पुलिस अधिकारियों से सीसीटीवी कैमरों का उपयोग करके जाँच करने के लिए रिक्वेस्ट करते रहे। चूँकि हमारा क्लब पूरी तरह से कैमरों से ढका हुआ है, इसलिए पूरी घटना रिकॉर्ड की गई है। इसके बाद भी पुलिस ने उनके कर्मचारियों को 22 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा और उनकी बेल्ट-डंडों जूतों से पिटाई की है।”

क्लब के मालिक ने यह भी आरोप लगाया है कि 23-24 सितंबर को, पुलिस उनके क्लब में आई थी, जहाँ रंगदारी देने से मना करने पर पुलिस ने 2,53,000 रुपए के उपकरणों को जब्त किया है। वहीं, पुलिस उपायुक्त चंदन चौधरी ने कहा, “दक्षिण एक्सटेंशन के ‘दा कोड’ क्लब में एक महिला के साथ दुर्व्यवहार और कपड़े फाड़ने की घटना के बारे में केएम पुर पुलिस स्टेशन में एक पीसीआर कॉल आई थी। जिसके बाद पुलिस घटना स्थल पर पहुँची और शिकायतकर्ता महिला से मिली।”

डीसीपी के मुताबिक, जब पुलिस मौके पर पहुँची तो उन्होंने देखा कि महिला कपड़े खराब हो चुके हैं। जब उससे पूछताछ की गई तो उसने बताया कि उसके कपड़े दो बाउंसरों और क्लब के मैनेजर ने फाड़ दिए हैं। डीसीपी ने कहा, “उसने आगे खुलासा किया कि उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया था, और शारीरिक रूप से मारा गया था। महिला और बाउंसरों के बीच हुई बहस के बाद बाउंसर ने उसे गलत तरीके से छुआ था।”

हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन कर रही थी 20 साल की युवती, ईरान की पुलिस ने दाग दी 6 गोलियाँ: वीडियो में बाल बाँधती दिखी थी, और उग्र हुआ विरोध

बिना हिजाब के ईरान (Iran) में हिजाब विरोधी प्रदर्शनों (Anti Hijab Protests) की अगुवाई कर रही हदीस नजफी (Hadis Najafi) की सुरक्षाबलों ने गोली मारकर हत्या कर दी। हदीस नजफी सिर्फ 20 साल की थीं और ईरान की राजधानी तेहरान के पास कराज शहर में हिजाब का विरोध कर रही थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हदीस नजफी को 6 गोलियाँ मारी गईं हैं। ये गोलियाँ सीने, चेहरे और गर्दन में लगी हैं। हदीस ईरान में हिजाब विरोध प्रदर्शन का प्रतीक बनने वाली लड़कियों में से एक थीं। जब उनका पुलिस से सामना हुआ तो वह बिना हिजाब का विरोध कर रही थीं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में हदीस नजफी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से पहले अपने बालों को रबर बैंड से बाँधते हुए दिखाई दे रही हैं।

हदीस की मौत से पहले ईरानी पत्रकार मसीह अलीनेजाद (Masih Alinejad) ने ट्वीट किया था, “यह ईरानी महिला सुरक्षाबलों के सामने आमने-सामने खड़े होने को तैयार हो रही है। ईरानी शासन के पास बंदूकें और गोलियाँ हैं, लेकिन वे हमारे बालों से डरते हैं। उन्होंने थोड़े से बालों के लिए महसा अमीनी को मार डाला। आइए बाल क्रांति करें। हमारे बाल इस्लामी तानाशाहों को गिरा देंगे।”

हालाँकि, इसके बाद ईरानी पत्रकार को हदीस नजफी से जुड़ा एक ट्वीट करना पड़ा। यह ट्वीट हदीस की मौत से जुड़ा हुआ था। पत्रकार ने लिखा, “21 साल की हदीस नजफी लड़की महसा अमिनी की तरह एक और प्रतीक बनना चाहिए, क्योंकि वह अत्याचार के सामने चुप नहीं रहीं। महसा की क्रूर मौत का विरोध करने के लिए उन्हें मार दिया गया। मैं दुनिया से हदीस नजफी की आवाज बनने का आह्वान करती हूँ। रियल हीरो।”

बता दें कि 13 सितंबर को हिजाब न पहनने की वजह से महसा अमीनी को मोरल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन्हेें पीट-पीट कर कोमा में पहुँचा दिया गया था। गिरफ्तारी के दिन बाद यानी 16 सितंबर को महसा की मौत हो गई थी। इसके बाद से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए, जो कि सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण हिंसक होते चले गए।

ईरान के लगभग हर शहर में महिलाएँ मोरल पुलिसिंग और हिजाब कानून के खिलाफ सड़कों पर उतर गई हैं। ईरान में महिलाएँ सरकार के लिए मुश्किल का सबसे बड़ा सबब बन गई हैं। न तो वो हिजाब पहनने को तैयार हैं और न ही बाल ढँकने को तैयार हैं।

हिजाब विरोधी प्रदर्शन से ईरान में अब तक चार महिलाओं समेत करीब 50 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शनों से घबराई इब्राहिम रईसी सरकार दमन पर उतारू है। कट्टरपंथी इस्लामिक विचारधारा वाली सरकार ने कुछ दिन पहले ईरान में इंटरनेट भी बंद कर दिया था। इसके कारण वहाँ से काफी कम जानकारी सामने आ रही है।

राजद नेता ने PFI के ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ नारे का किया समर्थन, बताया विरोध का तरीका: कार्रवाई का भी किया विरोध

एक तरफ राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो कॉन्ग्रेस प्रमुख सोनिया गाँधी से मिलकर भाजपा को हटाने की कोशिश कर रहे हैं तो दूसरी तरफ पार्टी के नेता शिवानंद तिवारी ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ कहने वाले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) जैसे संगठनों का बचाव कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जिंदाबाद कहना विरोध का तरीका है।

राजद के वरिष्ठ नेता तिवारी ने कहा, “पाकिस्तान जिंदाबाद का जो नारा है, वो एक प्रोटेस्ट का इजहार है। ऐसा नहीं है कि वो (नारे लगाने वाले) पाकिस्तानी हो गए हैं। यह प्रोटेस्ट का इजहार है कि हाँ भाई चिढ़ा रहे हैं आपको… विरोध कर रहे हैं कि नहीं भाई साहब, जो आप कर रहे हैं उसका हम समर्थन नहीं कर रहे हैं… हम उसका विरोध कर रहे हैं और विरोध के स्वरूप पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा दिया। ऐसा नहीं है कि वो पाकिस्तान जाने के लिए तैयार है और कह दीजिए तो वह चला जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा, “इस बात को भी समझना चाहिए। आप उसका जवाब क्या दे रहे हैं कि चुन-चुन कर मारेंगे। इसका का प्रोटेस्ट है ये। आप चुन-चुन कर मार रहे हैं। क्या हालत हो गई है भाई?”

RJD के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तिवारी ने यह बात पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के प्रदर्शन और नारेबाजी पर कही। उन्होंने कहा कि उनका प्रोटेस्ट करने का अपना तरीका है। उन्होंने कहा कि चुन-चुन मारने जैसी टिप्पणी के कारण ही दूसरे देशों में भारतवंशियों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। जिन-जिन देशों में भारत के लोग हैं, उनके खिलाफ नफरत का इजहार होने लगा है।

शिवानंद के इस बयान पर बिहार में उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने ही विरोध किया है। JDU के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि तिवारी का यह बयान देश के मान-सम्मान को ठेस पहुँचाने वाला है। कुशवाहा ने कहा कि आरजेडी का इस तरह का बयान कहीं से सही नहीं है और जब देश की बात आती है तो इसकी एकता-अखंडता के लिए एकजुट हैं।

राजद नेता शिवानंद तिवारी के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी उन्हें लोग खरी-खोटी सुना रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि अब शिवानंद तिवारी का भी पाकिस्तान के लिए टिकट कटवा देना चाहिए तो कुछ लोग इसे तुष्टिकरण की चरम सीमा बता रहे हैं।

गोवा में रह कर अवैध कारोबार कर रहे 20 बांग्लादेशी धराए, अब होगा प्रत्यर्पण: इससे पहले असम में पकडे गए थे 17 बांग्लादेशी, इस्लाम का कर रहे थे प्रचार

गोवा के आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) ने अवैध कारोबार कर रहे करीब 20 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इस बात की जानकारी गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने दी है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अवैध कारोबार चलाने वाले 20 से अधिक बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया गया है। इन लोगों के पास भारतीय पते या वोटर आईडी कार्ड नहीं थे।

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा, “गोवा के अलग-अलग हिस्सों में अवैध कारोबार चलाने वाले 20 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। इन लोगों के पास भारतीय पता या वोटर आईडी कार्ड नहीं थे। ऐसे और लोगों की तलाश कर रहे हैं। इन लोगों को बांग्लादेश डिपोर्ट कर दिया जाएगा। गृह मंत्रालय को इससे अवगत कराया गया है।”

मुख्यमंत्री ने राज्य के लोगों से किराएदारों के पुलिस सत्यापन और उनके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करने के बाद ही मकान किराए पर देने के लिए कहा है। उन्होंने कहा, “मैं लोगों से अपने किराएदारों के विवरण सत्यापित करने का आह्वान करता हूँ। सभी लोग किराएदारों से जानकारी लें कि वे कहाँ से आए हैं और उनका उद्देश्य क्या है। ऐसे कई लोग हैं जो राज्य में रह रहे हैं और आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हैं। अगर कमरे किराए पर देने हैं तो पुलिस वेरिफिकेशन जरूर कराएँ।”

बता दें, हाल ही में गोवा एटीएस (ATS) ने 22 बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की थी। एटीएस की ओर से बीते दो महीनों में किराएदारों और विदेशियों के सत्यापन अभियान के दौरान इन सभी की पहचान हुई थी।

बांग्लादेश के नागरिकों की पहचान को लेकर एटीएस पुलिस अधीक्षक शोभित सक्सेना ने कहा कि ये लोग फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पिछले 4-5 साल से गोवा में अवैध रूप से रह रहे हैं। उनके पास से नकली दस्तावेज मिले, जो अन्य राज्यों और बांग्लादेश कार्डों में बनाए गए थे। उन्हें विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय में पेश किया गया है। इन सभी की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।

बता दें, इससे पहले गत 19 सितंबर को असम के बिश्वनाथ जिले के बाघमरी इलाके से 17 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया था। इन सभी पर भारतीय वीजा नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में पुलिस महानिदेशक भास्कर ज्योति महंत ने कहा था कि ये सभी आरोपी पर्यटक वीजा पर भारत आए थे, लेकिन मजहबी प्रचार कर रहे थे। बता दें कि असम से गिरफ्तार हुए 17 बांग्लादेशी नागरिक इस्लाम का प्रचार कर रहे थे। इन लोगों ने इस्लाम का प्रचार करते हुए करीब 500 लोगों को अपना शागिर्द बनाया था।

अरबाज ने दलित युवती को फँसाया, फिर शाहनवाज और फारूक संग मिल कर किया गैंगरेप: तीनों राजस्थान पुलिस की पहुँच से बाहर

राजस्थान के चुरू जिले (Churu, Rajasthan) में एक दलित युवती को प्रेमजाल में फँसाने और फिर अपहरण कर साथियों के साथ मिलकर उसका गैंगरेप करने का मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने अरबाज और उसके साथियों सहित तीन लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज खोजबीन कर रही है।

चुरू शहर के अग्रसेन नगर निवासी 22 साल की दलित युवती से गैंगरेप के मामले में पुलिस ने अरबाज धोबी, उसके दोस्त शहनवाज खत्री और फारूक खत्री के खिलाफ गैंगरेप में मामला दर्ज किया है। आरोपितों के खिलाफ पुलिस ने ST-SC एक्ट भी लगाया है। सारे आरोपित फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

चूरू महिला थाना प्रभारी सुखराम चोटिया के अनुसार, मुख्य आरोपित अरबाज ने युवती को शादी का झाँसा देकर अपने प्रेमजाल में फँसा लिया था। 19 सितंबर 2022 को अरबाज ने युवती को बुलाया और जान से मारने की धमकी देकर उसे अपनी कार में अपहरण कर लिया।

आरोपित अरबाज युवती को पहले झुंझुनूं लेकर गया, वहाँ उसने शादी का वास्ता देकर उसका रेप किया। इसके बाद अपने घरवालों से मिलवाने की बात कहकर वह युवती को बस में बैठाकर सीकर लेकर चला गया। सीकर में वह अपने दोस्त शहनवाज और फारूक को बुला लिया और युवती को लेकर एक होटल में गया। वहाँ तीनों ने युवती के साथ गैंगरेप किया।

अगले दिन 20 सितंबर 2022 को युवती किसी तरह आरोपियों के चंगुल से निकलकर अपने घर पहुँची। वहाँ पीड़िता ने अपनी माँ को पूरी घटना बताई। इसके बाद पीड़िता परिजनों के साथ थाने पहुँची और आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कराया।

पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने तीनों आरोपितों के खिलाफ IPC (भारतीय दण्ड संहिता) की धारा 376(2) (एन), 376D, 366 और SC-ST एक्ट की धारा 3(2)(v) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। पीड़िता का मेडिकल करवाने के बाद पुलिस आरोपितों की तलाश में जुटी है।