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‘सच्चाई छिपा रहा मैनेजमेंट, जब कुछ नहीं हुआ तो 2 दिन के लिए यूनिवर्सिटी बंद क्यों किया?’: MMS कांड के बाद विरोध प्रदर्शन, प्रशासन से सहमत नहीं छात्राएँ

पंजाब के मोहाली स्थित चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में छात्राओं के नहाने का वीडियो वायरल होने का मामला बढ़ता जा रहा है। इस मामले में, रविवार (18 सितंबर, 2022) को यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किए हैं। इस विरोध प्रदर्शन में छात्र-छात्राओं ने साथ आकर वीडियो लीक मामले में यूनिवर्सिटी से स्पष्टीकरण माँगते हुए मामले की सच्चाई छिपाने को लेकर कई सवाल पूछे हैं। इस मामले में, पुलिस ने आरोपित छात्रा और उसके बॉयफ्रैंड सन्नी को गिरफ्तार किया है।

दरअसल, यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट बार-बार यह कहता नजर आ रहा है कि आरोपित छात्रा ने सिर्फ अपना वीडियो शूट करके अपने प्रेमी (बॉयफ्रेंड) को भेजा था। इसके अलावा किसी अन्य छात्रा का वीडियो रिकॉर्ड नहीं किया गया है।

यूनिवर्सिटी के इस दावे पर छात्राओं ने कई सवाल खड़े किए हैं। छात्राओं का सबसे बड़ा सवाल यह है कि किया है कि यदि किसी अन्य छात्रा का वीडियो नहीं बना है और कुछ भी नहीं हुआ है तो यूनिवर्सिटी को दो दिन के लिए बंद क्यों किया गया है। बता दें, यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने दो दिन पढ़ाई बंद करने का ऐलान करते हए बकायद 2 दिन नॉन टीचिंग डे घोषित किया है।

इसके अलावा, छात्राएँ सवाल कर रही हैं कि जब उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन किया तो उनके खिलाफ बल प्रयोग क्यों किया गया? छात्रों का दावा है कि पुलिस की कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए हैं। यही नहीं, यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने आरोपित छात्रा के खिलाफ दर्ज एफआईआर की कॉपी सार्वजनिक करने की भी माँग की है।

छात्राओं का आरोप है कि आत्महत्या (सुसाइड अटेम्प्ट) करने की कोशिश के मामले छुपाए जा रहे हैं। छात्राओं का कहना है कि आत्महत्या की कोशिश करने वाली छात्राएं कौन है, ये सामने आना चाहिए। साथ ही, यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि यूनिवर्सिटी अपनी साख बचाने में जुटी हुई है। इसलिए वह किसी भी प्रकार का सच सामने नहीं आने देना चाहती।

हालाँकि, इन तमाम सवालों के बीच यूनिवर्सिटी की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। पुलिस प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक सभी ने उच्च स्तरीय जाँच का भरोसा दिलाया है। लेकिन, यूनिवर्सिटी के छात्र सच जानना चाहते हैं।

संकट से जूझ रहे श्रीलंका का सबसे बड़ा मददगार बना भारत, कर्ज देने में चीन को पीछे छोड़ा: अकेले इस साल दिए ₹3000 करोड़ के कर्ज

राजनीतिक एवं आर्थिक संकट का सामना कर रहे पड़ोसी देश श्रीलंका के लिए भारत सबसे बड़ा मददगार बनकर सामने आया है। हाल ही में सामने आयी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि संकट के समय भारत ने श्रीलंका को सबसे अधिक कर्ज देकर आर्थिक समस्याओं से उबारने का प्रयास किया है।

श्रीलंकाई थिंक टैंक ‘वेराइट रिसर्च’ ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि साल 2022 में भारत ने श्रीलंका को 37.7 करोड़ डॉलर (3002.82 करोड़ रुपए) का कर्ज दिया है। इस दौरान, एशियाई विकास बैंक (एडीबी) श्रीलंका को 36 करोड़ डॉलर का कर्ज देने दूसरा बड़ा कर्जदाता रहा है। इतना ही नहीं, भारत ने श्रीलंका को 65,000 टन उर्वरक की खेप भी भेजी थी।

भारत और एडीबी, दोनों ने मिलकर इस साल जनवरी से अप्रैल के बीच श्रीलंका को दिए गए कुल कर्ज में 76 प्रतिशत का योगदान दिया है। साल के पहले चार महीनों में श्रीलंका को विभिन्न सरकारों एवं संस्थानों से कुल 96.8 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया गया था। बता दें कि 2017 और 2021 के बीच पिछले 5 वर्षों में चीन श्रीलंका का शीर्ष ऋणदाता रहा है। चीन ने 9.47 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया था। इसमें से 8.09 मिलियन डॉलर चीन विकास बैंक से बाजार उधार के रूप में।

गौरतलब है, इस साल की शुरुआत से ही श्रीलंका वित्तीय संकट से जूझ रहा था। विदेशी मुद्रा की कमी के चलते वह जरूरी खानपान एवं ईंधन सामग्री भी नहीं खरीद पा रहा था। ऐसे समय में भारत ने पड़ोसी देश होने के नेता उसे ईंधन खरीदने और आर्थिक तंगी से उबारने के लिए कर्ज दिया था।

ज्ञात हो, श्रीलंका में वस्तुओं की कीमत में लगातार बढ़ोतरी होने के कारण आंतरिक अशांति पैदा हो गई थी। इसके बाद व्यापक स्तर पर हुए हिंसक प्रदर्शनों के चलते तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को देश छोड़कर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा था। हालाँकि, इसके बाद रानिल विक्रमसिंघे की अगुवाई में मौजूदा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के साथ 2.9 अरब डॉलर का एक ऋण समझौता किया है। इसके बाद से आर्थिक विश्लेषक श्रीलंका की आर्थिक स्थिति में सुधार के कयास लगा रहे हैं।

दुर्घटना या दंगा होते ही पुलिस के पास पहुँच जाएगी सूचना, AI की मदद से उज्जैन के बच्चे ने किया कमाल: सम्मानित करेगी मोदी सरकार

मध्य प्रदेश के उज्जैन में रहने वाले 13 साल के बच्चे ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिससे सड़कों, चौराहों या भीड़ वाले इलाकों पर होने वाली आतंकी घटनाएँ, दंगा, अपराध और एक्सीडेंट की जानकारी सीधे कमांड सेंटर या पुलिस के पास पहुँचेगी। इस मॉडल को तैयार करने वाले बच्चे का नाम राजवीर चौहान है। वह कक्षा 8वीं का छात्र है।

राजवीर ने यह मॉडल आर्टिफिशियल इंटिलिजेंट्स के आधार पर बनाया है। इस बेहतरीन इनोवेशन के लिए देश के 50 बच्चों में उज्जैन के राजवीर को भी शामिल किया गया है। साथ ही केन्द्र सरकार राजवीर को सम्मानित भी करेगी। राजवीर अपने माता-पिता के साथ फिलहाल दिल्ली में ही हैं। वह सरकार द्वारा मिलने वाले सम्मान के लिए ही दिल्ली आया हुआ है।

दरअसल, डिजिटल इंडिया के अंतर्गत विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने युवा इनोवेटर्स के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर एक प्रतियोगिता आयोजित की थी। इस प्रतियोगिता में देशभर के 200 छात्रों का सलेक्शन हुआ था। ट्रेनिंग के बाद 50 बच्चों को उनके आइडिया पर काम करने के लिए मेंटर दिए गए थे।

अपने इस मॉडल को लेकर राजवीर चौहान का कहना है कि उन्होंने अटैक डिटेक्टर मॉडल तैयार किया है। यह मॉडल पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तहत काम करेगा। इसके लिए शहर के प्रत्येक चौराहे पर लगे कैमरों को सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा।

इन कैमरों में जैसे ही आतंकी घटना में गन या कोई अन्य हथियार, खून या एक्सीडेंट या फिर महिला अपराध की घटना के संकेत मिलेंगे, सॉफ्टवेयर तुरंत ही उनकी पहचान कर सिग्नल या अलार्म भेजा देगा। यह अलार्म सीधा कमांड सेंटर या संबंधित पुलिस स्टेशन में बजेगा। जिसके बाद थाने से सुरक्षा बल और अस्पताल से एम्बुलेंस जल्द से जल्द भेजी जा सकेगी। इसको ना सिर्फ चौराहे पर बल्कि भीड़ भरे बाजारों, सड़कों, अस्पताल, कोर्ट, मंदिर, या कहीं भी लगाया जा सकेगा।

राजवीर का कहना है कि उन्होंने दो वर्ष पहले ‘रेड बटन’ के नाम से एक मॉडल बनाया था, जिसमें चौराहे पर होने वाली घटना को लेकर कोई भी व्यक्ति बटन दबाकर पैनिक स्थिति में कंट्रोल रूम को खबर कर सकता था। ऐसे ही मॉडल अभी उज्जैन स्मार्ट सिटी के तहत लगाये जा चुके हैं। हर चौराहे पर रेड बटन (इमरजेंसी बटन) को लगाया गया है। इस मॉडल के लिए राजवीर को 10 हजार का इनाम भी मिला था।

’10 km में 20 गाँव मुस्लिम बहुल, हिन्दू दब कर मनाते हैं अपने त्योहार’: नेपाल सीमा के ग्राम प्रधान ने बताया – गरीब दिखने वाले मुस्लिमों के पास भी बहुत पैसे: UP-नेपाल बॉर्डर से OpIndia Ground Report

हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल-भारत सीमा पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की 16वीं रिपोर्ट:

अपनी 15वीं रिपोर्ट में हमने नेपाल सीमा तुलसीपुर-हर्रैया मार्ग से कुछ ही दूरी पर समांतर बने तुलसीपुर-हर्रैया मार्ग पर मौजूद इबादतगाहों को प्रेम नगर तक दिखाया था। तब हमें न सिर्फ सुनसान में बनी मस्जिदें दिखीं थीं, बल्कि सड़कों के किनारे मदरसे और मज़ारें भी दिखाई पड़ी थीं। इस बार हमने उस राह पर मिले वहाँ के स्थानीय लोगों से बात की। उन्होंने हमें अपने गाँव और आस-पास के हालातों से परिचित करवाया।

उन्हीं लोगों में से एक हैं बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत अहलादडीह के ग्राम प्रधान हरीश चंद्र शर्मा। हमने उनसे सीमावर्ती क्षेत्रों के बारे में विस्तार से जानकारी ली। शर्मा के परिवार में प्रधानी लगभग 20 साल से है।

यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

20 साल में बढ़ी आबादी और साथ में दबदबा भी

प्रधान हरीश चंद्र शर्मा ने हमें बताया कि उनके क्षेत्र में आबादी का असंतुलन तेजी से बढ़ रहा है और ये असंतुलन पिछले 20 सालों में बहुत ज्यादा गति से हुआ। प्रधान का दावा है कि उन्हीं के गाँव में कई बाहरी लोग आ कर बसे हुए हैं। इसी के साथ उन्होंने ये भी बताया कि मुस्लिमों के घर ज्यादा बच्चे पैदा होना अभी असंतुलन की एक वजह है। हरीश चंद्र के मुताबिक, उनके क्षेत्र में सिर्फ मुस्लिमों की आबादी ही नहीं बल्कि उनका राजनीतिक और आर्थिक दबदबा भी बढ़ा है। उन्होंने बताया कि बड़ी आबादी के बाद वो दंगा भी फैलाते हैं।

रिश्तेदार बता कर बाहरियों को बुलाते हैं स्थानीय मुस्लिम

अहलादडीह के ग्राम प्रधान के मुताबिक, जब वो किसी बाहरी के आने पर सवाल करने जाते हैं तो स्थानीय मुस्लिम उनको अपना रिश्तेदार बता कर आगे आ जाते हैं। उन्होंने बताया कि तब कोई बेटी और कोई दामाद का रिश्ता बताने लगता है और बाद में उन्हें यहीं के लोगों की जमीन को खरीद कर के बसा दिया जाता है। हरीश चंद्र के अनुसार, कई बार तो कुछ लोग पहले से ही जमीनें ले कर रख लेते हैं। उनके मुताबिक जमीन बेचने वालों में हिन्दू भी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्थानीय मुस्लिम बाहरी लोगों के लिए पूरी तैयारी पहले से ही कर के रखते हैं।

बाहर से गरीब दिखने वाले मुस्लिम असल में सम्पन्न

जमीन खरीदने के लिए मुस्लिमों द्वारा खर्च की जा रही बड़ी रकम के मुद्दे पर प्रधान हरीश चंद्र ने कहा कि अक्सर यहाँ वो लोग दिखेंगे जो शक्ल से बेहद गरीब लगेंगे लेकिन, असल में उनके पास काफी पैसे हैं। उन्होंने बताया कि ये पैसे मुंबई जैसे बड़े शहरों में कमा कर जुटाए गए हैं। प्रधान के अनुसार, वो वर्तमान में 55 साल के हैं और उनके बचपन में लगभग 70% हिन्दू और 30% मुस्लिम हुआ करते थे जो अब बदल कर 50-50 प्रतिशत के अनुपात में आ गए हैं।

हाईवे और चौराहों की जमीनों पर विशेष नजर

प्रधान हरीश चंद्र ,के अनुसार अगर किसी मुस्लिम के पास कमरा या जमीन है तो उनका प्रयास रहता है कि वो किसी मुस्लिम को ही उसे दे। इसी के साथ उन्होंने बताया कि उनकी तरफ के मुस्लिमों की ये कोशिश हमेशा रहती है कि वो हाईवे और चौराहों की जमीनें खासतौर पर खरीद लें। प्रधान ने सरकार से अपने क्षेत्र की विशेष निगरानी की अपील की। उन्होंने कहा कि अभी तक उनकी जानकारी में कोई भी ठोस प्रशासनिक कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है।

बॉर्डर पर कई गाँव मुस्लिम बाहुल्य

प्रधान हरीश चंद्र ने अपने गाँव के आस-पास मौजूद रेहरा गाँव और खपरी जैसे गाँवों को टोटल मुस्लिम बहुल वाला बताया। उन्होंने कहा कि इनके बीच हिन्दुओं के कुछ दलित परिवार ही रह गए हैं। हरीश चंद्र ने बताया कि इन गाँवों में कई हिन्दू अपना घर बेच कर कहीं और बस चुके हैं। प्रधान ने नजदीकी बाजार तुलसीपुर में भी जनसंख्या में तेजी से बदलाव होना बताया।

ग्राम प्रधान हरीश चंद्र

मेरे गाँव में 2 मस्जिद और 2 मदरसे

हरीश चंद्र ने अपने गाँव का जिक्र करते हुए बताया कि वहाँ पर 2 मदरसे और 2 मस्जिदें बनी हैं। उन्होंने बताया कि एक मस्जिद तो पुरानी है, लेकिन दूसरी उनके ही आगे बनी है। इसी के साथ उन्होंने यह भी बताया कि उनके गाँव के दोनों मदरसे भी उनके ही आगे 20 सालों के अंदर बने हैं। प्रधान ने कहा कि ये मदरसे सरकारी नहीं हैं बल्कि उन्हें कमेटी बना कर चलाया जा रहा है।

हिन्दू त्योहारों में डाला जाता है व्यवधान

प्रधान हरीश चंद्र ने बताया कि उनके क्षेत्र में हिन्दू त्योहारों में मेल-जोल नहीं दिखाई देता। उन्होंने कहा कि उनका पुरवा हिन्दू बहुल होने के चलते वहाँ कोई उत्पात नहीं हो पाता, लेकिन पड़ोस में खैरा जैसे गाँवों में हिन्दू अपने त्योहारों को खुल कर नहीं मना पाता। खैरा गाँव को उन्होंने लगभग 90% मुस्लिम आबादी वाला बताते हुए अपने गाँव से 1 किलोमीटर दूर होने की जानकारी दी।

बढ़ती इबादतगाहों पर प्रशासन नहीं लेता एक्शन

प्रधान हरीश चंद्र के अनुसार, जिस तेजी से उनके क्षेत्र में मुस्लिमों की आबादी बढ़ी है उसी तेजी से वहाँ इबादतगाहें भी बढ़ी हैं। उन्होंने बताया कि मज़ारों, मस्जिदों और इबादतगाहों की संख्या में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है जो सड़कों तक के किनारे बन चुकी हैं। प्रधान के मुताबिक, इन हरकतों पर उनके यहाँ का शासन और प्रशासन कोई एक्शन नहीं लेता।

कोई भी जुड़वा लेता है वोटर लिस्ट और राशन कार्ड में नाम

प्रधान हरीश चंद्र ने हमें बताया कि उनकी तरफ कोई भी बाहरी आसानी से अपना नाम वोटर लिस्ट या राशन कार्ड में जुड़वा लेता है जो बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी नया नाम कड़ी जाँच के बाद ही जुड़े तो इस क्षेत्र के लिए अच्छा रहेगा। प्रधान ने इसके नुकसान बताते हुए कहा कि इसके चलते बाहरी लोगों को भी सरकार की सभी योजनाओं का फायदा मिलने लगता है। बाहरी लोगों की हरकतों की चर्चा करते हुए ग्राम प्रधान ने बताया कि बाहर से आए लोग पहले तो किसी परिवार के साथ जुड़ कर सरकारी कागजों में अपना नाम लिखवा लेते हैं और कुछ दिन बाद अपना परिवार अलग कर लेते हैं।

10 किलोमीटर में 20 गाँवों में 70% आबादी मुस्लिमों की

प्रधान ने गुडारिया, रजवापुर, खपरीपुर जैसे गाँवों को मुस्लिम बाहुल्य बताया। इसी के साथ उन्होंने कहा कि उनके आस-पास लगभग 10 किलोमीटर की परिधि में 20 गाँव ऐसे हैं जहाँ मुस्लिमों की आबादी 70% या उस से अधिक है। हरीश चंद्र के मुताबिक, वहाँ के प्रधान व बाकी अन्य पद मुस्लिमों के ही होते है और हालात तो ऐसे हैं वहाँ कि हिन्दू लड़ाई में ही नहीं होता। प्रधान ने कुछ गाँवों का नाम भी लिया जहाँ कोई हिन्दू चुनाव ही नहीं लड़ता।

पढ़ें पहली रिपोर्ट : कभी था हिंदू बहुल गाँव, अब स्वस्तिक चिह्न वाले घर पर 786 का निशान: भारत के उस पार भी डेमोग्राफी चेंज, नेपाल में घुसते ही मस्जिद, मदरसा और इस्लाम – OpIndia Ground Report

पढ़ें दूसरी रिपोर्ट : घरों पर चाँद-तारे वाले हरे झंडे, मस्जिद-मदरसे, कारोबार में भी दखल: मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ ही नेपाल में कपिलवस्तु के ‘कृष्णा नगर’ पर गाढ़ा हुआ इस्लामी रंग – OpIndia Ground Report

पढ़ें तीसरी रिपोर्ट : नेपाल में लव जिहाद: बढ़ती मुस्लिम आबादी और नेपाली लड़कियों से निकाह के खेल में ‘दिल्ली कनेक्शन’, तस्कर-गिरोह भारतीय सीमा पर खतरा – OpIndia Ground Report

पढ़ें चौथी रिपोर्ट : बौद्ध आस्था के केंद्र हों या तालाब… हर जगह मजार: श्रावस्ती में घरों की छत पर लहरा रहे इस्लामी झंडे, OpIndia Ground Report

पढ़ें पाँचवीं रिपोर्ट : महाराणा प्रताप के साथ लड़ी थारू जनजाति बहुल गाँव में 3 मस्जिद, 1 मदरसा: भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी का ये है ‘पैटर्न’ – OpIndia Ground Report

पढ़ें छठी रिपोर्ट : बौद्ध-जैन मंदिरों के बीच दरगाह बनाई, जिस मजार को पुलिस ने किया ध्वस्त… वो फिर चकमकाई: नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी – OpIndia Ground Report

पढ़ें सातवीं रिपोर्ट : हनुमान गढ़ी की जमीन पर कब्जा, झारखंडी मंदिर सरोवर में ताजिया: नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी, असर UP के बलरामपुर में – OpIndia Ground Report

पढ़ें आठवीं रिपोर्ट : पुरातत्व विभाग से संरक्षित जो जगह, वहाँ वक्फ की दरगाह-मजार: नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी, मुसीबत में बौद्ध धर्मस्थल – OpIndia Ground Report

पढ़ें नौवीं रिपोर्ट : 2 मीनारों वाली मस्जिदें लोकल, 1 मीनार वाली अरबी पैसे से… लगभग हर गाँव में मदरसे: नेपाल बॉर्डर के मौलाना ने बताया इसमें कमीशन का खेल – OpIndia Ground Report

पढ़ें दसवीं रिपोर्ट : SSB बेस कैंप हो या सड़क, गाँव हो या खेत-सुनसान… हर जगह मस्जिद-मदरसे-मजार: UP के बलरामपुर से नेपाल के जरवा बॉर्डर तक OpIndia Ground Report

पढ़ें 11वीं रिपोर्ट : हिंदू बच्चों का खतना, मंदिर में शादी के बाद लव जिहाद और आबादी असंतुलन के साथ बढ़ते पॉक्सो मामले: नेपाल बॉर्डर पर बलरामपुर जिले में OpIndia Ground Report

पढ़ें 12वीं रिपोर्ट : गाँवों में अरबी-उर्दू लिखे हुए नल, UAE के नाम की मुहर: ज्यादा दाम देकर जमीनें खरीद रहे नेपाली मुस्लिम – OpIndia Ground Report

पढ़ें 13वीं रिपोर्ट : नए बने ओवरब्रिज के नीचे मज़ार-कर्बला, सड़क किनारे मस्जिद-मदरसे-दरगाह: नेपाल के बढ़नी बॉर्डर हाइवे पर ‘हरा रंग’ हावी – OpIndia Ground Report

पढ़ें 14वीं रिपोर्ट : 4 और 14 वाली नीति से एकतरफा बढ़ रही आबादी… उस गाँव में मस्जिद बनाने की कोशिश, जहाँ नहीं एक भी मुस्लिम’ : UP-नेपाल बॉर्डर से OpIndia Ground Report

पढ़ें 15वीं रिपोर्ट: फ़ारसी में ‘गरीब नवाज स्कूल’ का बोर्ड, उस पर बने चाँद-तारे… घरों-दुकानों में लहरा रहे इस्लामी झंडे, सड़क से सटी हुई मजारें: UP-नेपाल बॉर्डर से OpIndia Ground Report

इंग्लैंड में फिर से हिन्दुओं पर हमला, भगवा ध्वज को नीचे गिरा दिया: भारत-Pak मैच के बाद भी भड़की थी हिंसा, कार्रवाई की माँग कर रहे थे हिन्दू

एशिया कप 2022 में हुए भारत-पाकिस्तान मैच के बाद पूर्वी इंग्लैंड के लीसेस्टर शहर में हिंसा भड़क गई थी। इसके विरोध में कार्रवाई की माँग लेकर प्रदर्शन कर रहे हिंदुओं के समूह पर कट्टरपंथियों के द्वारा फिर से हमला कर दिया गया। इसके अलावा भगवा ध्वज का भी अपमान कर उसे नीचे गिरा दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सप्ताह के अंत में लीसेस्टर शहर में एक बार फिर से हिंदुओं पर हमला किया गया। बताया जा रहा है कि सैकड़ों कट्टरपंथियों ने हिंदुओं और उनके आसपास के घरों पर हमला किया। घटना शुक्रवार (16 सितंबर, 2022) देर रात की बताई जा रही है। मामले को शांत करवाने के लिए पुलिस ने भी भारी बल प्रयोग किया।

28 अगस्त को भारत-पाक मैच के बाद इसी इलाके से हिंदुओं पर हिंसक हमले की खबर सामने आई थी। इसके खिलाफ हिंदुओं का एक समूह कार्रवाई की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहा था। इसी दौरान उन पर हमला किया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसा में बदलने का प्रयास किया गया।

स्थानीय पुलिस ने दिया ये बयान

वहीं इस मामले में स्थानीय प्रशासन के द्वारा कहा गया है कि पुलिस बल बड़ी संख्या में घटना स्थल पर पहुँचे और इलाके में वापस शांति बनाने का प्रयास किया। पुलिस द्वारा बड़ी संख्या में लोगों की तलाशी ली गई और दो लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें से एक पर हिंसक अव्यवस्था की साजिश की आशंका भी जताई जा रही है और दूसरे के पास ब्लेड जैसी वस्तु रखने के कारण उसे गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पुलिस को पूर्वी लीसेस्टर क्षेत्र के कुछ हिस्सों में अव्यवस्था फैलने की कई खबरें मिली हैं। प्रशासन का कहना है कि सूचना के बाद हिंसा पर काबू पाने के लिए फोर्स भेजी गई। वहीं शहर में इस तरह परिस्थिति पैदा होने पर पुलिस ने भी अफसोस जताया है।

बता दें कि इस घटना को लेकर विश्लेषक अंशुल सक्सेना ने ट्वीट के माध्यम से हिंसा से जुड़े विवरण को शेयर किया। उन्होंने इस ट्वीट के जरिए यह दिखाया कि कैसे इंग्लैंड के शहर में हिंदुओं पर हमला करने की योजना बनाई गई थी। उन्होंने बताया कि कैसे कट्टरपंथी और इस्लामवादी सोशल मीडिया पर भड़काऊ चीजें शेयर कर रहे थे और हिंदुओं पर हमला करने की योजना बना रहे थे।

लीसेस्टर शहर में पहले भी हुआ हिंदुओं पर हमला

गौरतलब है कि इससे पहले भी ब्रिटेन के लिसेस्टर शहर से हिंदुओं पर हमले की कई वीडियोज सामने आए थे। वीडियो में देखा जा सकता था कि इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ इकट्ठा करके हिंदुओं के घरों को निशाना बना रहे थे। उनके हाथों में हथियार और मुँह पर हिंदुओं के लिए गालियाँ थीं। सड़कों से पुलिस नदारद दिखाई दे रही थी। कोई उन्हें नहीं रोक रहा था। वहीं उस दौरान सोशल मीडिया पर वामपंथी हिंदुओं को ही इन हमलों का दोषी बताया।

सामने आई एक वीडियो में दिख रहा था कि कट्टरपंथी भारी तादाद में सड़कों पर जुटे हुए थे। हिंदू लोग अपने घरों से उनकी वीडियो बना रहे थे और यह देख हैरान हो रहे थे कि आखिर क्यों पुलिस इनको नहीं रोक पा रही। वीडियो में हिंदुओं से मारपीट, उनके घरों में तोड़फोड़, घर के बाहर लगे भगवा झंडे को उखाड़ना साफ तौर पर दिखा। वीडियो बनाने वाले आपस में कह रहे हैं कि ये उपद्रव करने वाले मुस्लिम हैं और इनके हाथों में चाकू जैसे धारदार हथियार हैं।

शिया मुस्लिमों के जुलूस पर पत्थर और पिस्तौल से हमला, मस्जिद के पास से गुजरने पर हुआ बवाल: पाकिस्तान में कट्टरपंथियों की करतूत

पाकिस्तान में शिया मुस्लिमों की हालत बेहद खराब है। उन्हें आए दिन हमले और ईशनिंदा के आरोप झेलने पड़ते हैं। शनिवार (17 सितंबर, 2022) को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में कट्टरपंथी इस्लामी संगठन के कार्यकर्ताओं ने शिया मुसलमानों के जुलूस पर हमला कर दिया। इसमें 13 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है। कुछ लोग गंभीर रूप से घायल भी बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिया मुसलमानों का जुलूस इमाम हुसैन के चेहल्लुम के सिलसिले में सियालकोट के इमामबारगाह जा रहा था। इस दौरान, पिस्तौल, पत्थर समेत अन्य हथियारों से लैस लोगों ने चेहल्लुम जुलूस पर हमला कर दिया। बता दें कि चेहल्लुम शिया मुसलमानों का मजहबी त्यौहार है। शिया मुस्लिम इसे पैगंबर मुहम्मद के पोते इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाते हैं। उनका मानना है कि इमाम हुसैन मुहर्रम के 10वें दिन शहीद हुए थे।

स्थनीय पुलिस अधिकारी के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इस जुलूस के रास्ते को लेकर ‘तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी)’ और शिया मुसलमानों के बीच पिछले कई दिनों से तनाव चल रहा था। टीएलपी के स्थानीय नेता चाहते थे कि शिया जुलूस उनकी मस्जिद सह मदरसा के सामने से न गुजरे। जबकि, स्थानीय शिया मुस्लिम हर साल उसी रास्ते से इमामबारगाह जाते हैं।

पुलिस ने यह भी कहा है कि पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों के साथ बातचीत की थी और टीएलपी नेता इस बात पर सहमत थे कि वे जुलूस के रास्ते पर आपत्ति नहीं करेंगे। इस हमले के बाद सियालकोट पुलिस के प्रमुख फैसल कामरान ने कहा कि घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस बल मौके पर पहुँच गया था। लेकिन, हमलावर तब तक भाग चुके थे। इस मामले में 30 संदिग्धों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

बता दें, रविवार (17 सितंबर, 2022) को ट्विटर पर #ShameOnTLP और #SialkotJuloosAttack पाकिस्तान में टॉप ट्रेंड पर थे। इस हमले की लगातार निंदा की जा रही है। साथ ही घटना में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए टीएलपी पर प्रतिबंध लगाने की भी माँग की जा रही है।

‘फ्यूचर जनरेशन को बर्बाद कर रहे ये’: रात का समय, रेस्टॉरेंट के बाहर लड़खड़ाती सारा अली खान का वीडियो देख बोले लोग – ‘पूरे नशे में है’

अभिनेत्री सारा अली खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो लड़खड़ाती हुई नज़र आ रही हैं। वीडियो को देखने के बाद लोग कह रहे हैं वो अभिनेत्री पूरे नशे में हैं, इसीलिए उनके पाँव लड़खड़ाते दिख रहे हैं। ये रात के समय का वीडियो है, जिसमें सारा अली खान को सड़क पर अपनी एक दोस्त का सहारा लेकर चलते हुए देखा जा सकता है। इसका सहारा लेकर लोग बॉलीवुड को ‘ड्र्रगीवुड’ भी बता रहे हैं।

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि फोटोग्राफर ‘सारा जी, रुकिए न’ की रट लगा रहे हैं, हालाँकि सारा अली खान इस दौरान हाथ दिखा कर अस्पष्ट भाषा में कुछ कहते हुए आगे बढ़ जाती हैं। इस दौरान वो एक क्लब में घुसती हुई दिखाई देती हैं, जहाँ पहले से ही कुछ लड़कियाँ होती हैं। अंदर जाते समय सारा अली खान ने सिक्योरिटी गार्ड का हाथ जिस तरह से टच किया, उसे लेकर भी लोग उन पर नशे में होने का आरोप लगा रहे हैं।

सारा अली खान इस दौरान अपने एक दोस्त शर्मिल शहगल के साथ थीं। उन्होंने नीले रंग का जंपशूट पहन रखा था। ये वीडियो मुंबई के ‘Bastion’ रेस्टॉरेंट का है, जो शुक्रवार (16 सितंबर, 2022) का है। वरुण कपूर नाम के एक यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “लोग पूछते हैं कि बॉलीवुड के बॉयकॉट का अभियान क्यों चलाया जा रहा है। यहाँ एक अन्य कारण है – ‘ड्रगीवुड’ हमारे बच्चों-युवाओं को बर्बाद कर रहा है।”

उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा कि फ्यूचर जनरेशन के लोग सारा अली खान जैसी हस्तियों का अनुसरण करते हैं, इसीलिए वो बर्बाद हो रहे हैं। एक व्यक्ति ने लिखा कि अगर यहाँ पर कैमरा नहीं होता तो इस घटना के लिए उसकी ही नौकरी चली जाती। लोगों ने सारा अली खान के इस वीडियो पर ‘पी रखी है’, ‘टल्ली है’, ‘ओवरलोड ड्रंकन’, ‘नशे में धुत्त’ और ‘बेवड़ी’ जैसे कमेंट्स किए। सारा अली खान ‘गैसलाइट’ नामक फिल्म में नजर आने वाली हैं।

‘हॉस्टल मैनेजर कह रही लड़की ने कबूल किया गुनाह, पुलिस ने कहा – सिर्फ 1 वीडियो मिला’: MMS कांड पर महिला आयोग भी सक्रिय, शिमला से युवक गिरफ्तार

पंजाब के चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (Chandigarh University) के हॉस्टल में रहनी वाली छात्राओं के नहाने के वीडियोज वायरल होने की खबर सामने आने के बाद बवाल मचा हुआ है। इस मामले में यूनिवर्सिटी से लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग व मुख्यमंत्री भगवंत मान तक का बयान सामने आ चुका है। हालाँकि, इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि हॉस्टल मैनेजर और पुलिस के बयान अलग-अलग हैं, जिससे मामला सुलझने के बजाय उलझता जा रहा है। फिलहाल, आरोपित छात्रा को गिरफ्तार कर लिया गया है।

ऐसे सामने आया वायरल वीडियो कांड

इस मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार, शनिवार (17 सितंबर, 2022) दोपहर कुछ लड़कियों ने हॉस्टल वार्डन राजविंदर कौर से शिकायत करते हुए कहा कि एक लड़की वॉशरूम में 6 लड़कियों का वीडियो बना रही थी। इसके बाद वार्डन राजविंदर कौर ने लड़की से पूछताछ की और फिर गर्ल्स हॉस्टल मैनेजर रीतू को इसकी जानकारी दी गई।

इस दौरान, हॉस्टल मैनेजर के सामने आरोपित छात्रा ने फोटो या वीडियो बनाने से इनकार कर दिया। हालाँकि, हॉस्टल मैनेजर का कहना है कि जब उसने आरोपित छात्रा के मोबाइल की जाँच की थी तो उसमें से कई फोटो और वीडियो डिलीट किए हुए मिले। छात्रा ने शिमला में जिस युवक सन्नी को वीडियो भेजने का दावा किया था, उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

यही नहीं, आरोपित छात्रा के मोबाइल पर लगातार कॉल और मैसेज आ रहे थे, जिसके बाद मैनेजर को उस पर शक हो गया। मैनेजर ने आरोपी छात्रा को कॉल उठाने को कहा और स्पीकर ऑन करवा लिया। मैनेजर ने छात्रा को कहा कि वह कॉल करने वाले लड़के को कहे कि उसके पास जो फोटो और वीडियो हैं, वह उसे भेजे। यह सुनकर लड़के ने उसे अश्लील वीडियो का स्क्रीनशॉट भेज दिया। मैनेजर ने सख्ती की तो आरोपित छात्रा ने वीडियो बनाने और शेयर करने की बातें कबूल लीं। आरोपित छात्रा ने बताया उसका दोस्त सन्नी शिमला में है उसने उसे ही ये वीडियो भेजे थे।

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने वीडियो वायरल होने की बात से किया इनकार

इस पूरे घटनाक्रम में सफाई देते हुए चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (CU) की ओर से कहा गया है, “ऐसी अफवाहें हैं कि सात लड़कियों ने आत्महत्या कर ली है, जबकि सच यह है कि किसी भी लड़की ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है। घटना में किसी लड़की को अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया है। छात्राओं के आपत्तिजनक वीडियो शूट करने की सभी अफवाहें पूरी तरह से झूठी और निराधार हैं। एक लड़की ने अपना खुद का वीडियो शूट किया और उसे अपने प्रेमी के साथ शेयर किया था।

मीडिया से बात करते हुए चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने यह भी कहा, “कुछ लड़कियाँ आंदोलन के दौरान बेहोश हो गईं, और उन छात्राओं को अस्पताल ले जाया गया था। विश्वविद्यालय ने खुद मामले के बारे में पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस मामले की जाँच कर रही है और आईटी अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। विस्तृत जाँच के बाद पुलिस जानकारी उपलब्ध कराएगी।”

पुलिस ने भी किया ऐसा ही दावा

इस मामले में मोहाली के एसएसपी विवेक सोनी ने कहा, “अभी तक की जाँच में हमें पता चला है कि सिर्फ एक ही वीडियो है। आरोपित ने किसी और का कोई वीडियो रिकॉर्ड नहीं किया है। यहाँ तक ​​कि आरोपित छात्रा ने भी खुद से यह नहीं कहा कि उसने किसी और का वीडियो बनाया है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और मोबाइल फोन को कब्जे में ले लिया गया है और आज ही फोरेंसिक जाँच के लिए भेजा जा रहा है।”

मीडिया से बात करते हुए एसएसपी सोनी ने यह भी कहा कि आत्महत्या का प्रयास या मौत नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि एम्बुलेंस में ले जाई गई एक छात्रा बीमार थी और हमारी टीम उसके संपर्क में है। पुलिस का कहना है कि एक छात्रा के वीडियो के अलावा कोई और वीडियो हमारे संज्ञान में नहीं आया है। हालाँकि, कुछ पीड़ित लड़कियों का कहना है कि आरोपित लड़की ने फोटो-वीडियो डिलीट किए हैं। हॉस्टल के मैनेजर का कहना है कि लड़की ने गुनाह कबूल किया है और उसके दोस्त युवक ने उसे स्क्रीनशॉट भी भेजा था।

वीडियो के आधार पर दावा: आरोपित छात्रा ने स्वीकार की थी वीडियो बनाने और शेयर करने की बात

वायरल वीडियो में आरोपित छात्रा वीडियो बनाने और अपने दोस्त को शेयर करने की बात स्वीकार करती नजर आ रही है। जबकि पुलिस और यूनिवर्सिटी, दोनों ने ही छात्रा पर लगे इस तरह के आरोपों से इनकार किया है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि मामला सामने आने के बाद जब यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट और पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही थी, तब छात्राओं ने यूनिवर्सिटी परिसर में हंगामा करना शुरू किया था। उनका कहना है कि न केवल चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी बल्कि पुलिस प्रशासन की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है।

महिला आयोग ने लिया संज्ञान

वीडियो वायरल होने से जुड़ी घटना पर अब ‘राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)’ ने संज्ञान लिया है। आयोग ने पंजाब पुलिस महानिदेशक (DGP) को चिट्ठी लिखकर इस मामले में दोषियों के खिलाफ तेज और सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

वहीं पंजाब राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष मनीषा गुलाटी ने कहा कि छात्राओं के कथित आपत्तिजनक वीडियो के लीक और वायरल होने के बाद चंडीगढ़ विश्वविद्यालय की छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी छात्राओं ने इस घटना से संबंधित लोगों की जान जाने और घायल होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पुलिस के बयान का इंतजार है। साथ ही कहा कि यह गंभीर मामला है, यह बहुत दुखद है, और इस मामले की जाँच की जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा, “मैं सभी छात्राओं के माता-पिता को आश्वस्त कर रहीं हूँ कि आरोपित को बख्शा नहीं जाएगा। जिस लड़की ने ये वीडियो वायरल किया, उस पर अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए धारा 354(C) आईटी के तहत मामला दर्ज़ कर लिया है। कड़ी कार्रवाई होगी। अगर ये सब पहले से चल रहा था तो मैं आपको आश्वासन देती हूँ कि ये गहन जाँच का विषय है और इस मामले पर मेरी नजर रहेगी।”

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दिए जाँच के आदेश

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि उन्होंने इस मामले में उच्चस्तरीय जाँच के आदेश दिए हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बारे में सुनकर दु:ख हुआ। बेटियाँ हमारा सम्मान हैं। घटना की उच्च स्तरीय जाँच के आदेश दिए गए हैं। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मैं प्रशासन के संपर्क में हूँ। मैं सभी से अफवाहों से बचने की अपील करता हूँ।”

‘पहले चारपाई से हाथ-पाँव बाँधे, फिर हँसिया से गला रेता’: शौहर से तंग आ चुकी थी शमा, मौका देख मौत के घाट उतारा

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में 14 अगस्त 2022 को हुई भावुद्दीन उर्फ़ नहना की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। आरोपित कोई और नहीं बल्कि खुद भावुद्दीन की बीवी शमा निकली। शमा के मुताबिक उनका शौहर आए दिन उन्हें परेशान करता था इसलिए उसने अपने शौहर का गला रेत दिया। पुलिस ने शमा को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। पुलिस ने यह खुलासा शनिवार (17 सितम्बर 2022) को किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला अकराबाद थानाक्षेत्र के कस्बा कोडियागंज का है। भावुद्दीन की हत्या के बाद अगस्त 2022 में उनके भाई फखरुद्दीन ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाते हुए लिखवाया था कि अज्ञात लोगों द्वारा उनके भाई की गला रेत कर हत्या कर दी गई। घटना लगभग आधी रात की थी जब तमाम लोग सो रहे थे। इसके बाद पुलिस ने IPC की धारा 302 और 328 में FIR दर्ज कर के आरोपित की तलाश शुरू की।

इसी मामले की तफ्तीश करते हुए पुलिस को जानकारी मिली कि भावुद्दीन और उसकी बीवी शमा के बीच आए दिन झगड़े होते थे। पुलिस ये एंगल जानकर इसकी छानबीन शुरू की और मृतक की बीवी शमा से पूछताछ हुई। पूछताछ में शुरू में तो शमा इधर-उधर की बातें करती रही लेकिन थोड़े ही समय में उन्होंने सब कुछ सच-सच उगल दिया। शमा ने अपनी प्रताड़ना के चलते अपने शौहर को मारने की बात कबूल कर ली। अरोपिता ने यह भी बताया कि उसने कत्ल से पहले अपने शौहर के हाथों और पैरों को चारपाई से बाँध दिया था।

अलीगढ़ पुलिस के मुताबिक प्रकरण पुराना है और आरोपित को जेल भेजा जा चुका है। पुलिस ने शमा से वो हँसिया (फसल काटने वाला धारदार हथियार) भी बरामद कर लिया जिसका प्रयोग भावुद्दीन की गर्दन रेतने के लिए हुआ था। शमा को जेल भेज दिया गया है। DSP अभय पांडेय ने बताया कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। बताया जा रहा है कि शमा का कस्टडी रिमांड भी हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

‘भीड़ वाले दरवाजे पर करना चाहते थे तगड़ा ब्लास्ट’ : बंगाल में स्कूल की छत पर बम फेंकने वाले सादिक, रेहान समेत 4 गिरफ्तार, पूछताछ में किए खुलासे

बंगाल के नॉर्थ परगना-24 के टीटागढ़ में स्कूल बिल्डिंग की छत पर बम फेंकने वाले 4 लड़कों को गिरफ्तार किया गया है। इनकी उम्र 18-19 साल की है। पुलिस ने इन्हें शनिवार (17 सितंबर 2022) देर रात गिरफ्तार किया। ये चारों टीटागढ़ के रहने वाले हैं। इनकी पहचान मोहम्मद अरियान, शेख बबलू, सादिक और रेहान के तौर पर हुई है। पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार करके बैरकपुर कोर्ट में पेश किया।

पूछताछ में इन लोगों ने बताया है कि शुरुआत में ये बड़ा तगड़ा क्रूड बम स्कूल के दरवाजे पर फेंकना चाहते थे क्योंकि वहाँ ज्यादा भीड़ हथी। लेकिन बाद में इन्होंने अपना प्लॉन बदला और बराबर की छत पर चढ़कर स्कूल की छतों पर बम फेंक दिए। पुलिस को छानबीन में ये भी पता चला कि इनमें से तीन लड़कों ने उसी स्कूल में पढ़ाई की थी। इसलिए पुलिस को लग रहा है कि किसी निजी दुश्मनी के कारण ऐसा कदम उठाया गया।

पुलिस बम फेंकने वालों से और पूछताछ कर रही है ताकि पता चल सके कि कहीं घटना के पीछे कोई और कारण तो नहीं था। पुलिस को उनमें से एक आरोपित के घर से 10 क्रूड बम बरामद हुए हैं।

स्कूल के ऊपर फेंके गए बम

गौरतलब है कि बंगाल के टीटागढ़ में 17 सितंबर को 11 बजे साउथ स्टेशन पर स्थित फ्री इंडिया हाईस्कूल की छत पर बम फटा था। इस स्कूल में 1300 छात्र-छात्राएँ हैं। यहाँ कल जिस समय स्कूल में विस्फोट हुआ, उस समय स्कूल में सेकेंड पीरियड चल रहा था। विस्फोट में स्कूल की छत का एक हिस्सा उड़ गया। इसके बाद स्कूल में भगदड़ मच गई।

जैसे ही विस्फोट हुआ स्कूल के शिक्षक छत की ओर भागे। उन्होंने देखा कि हर तरफ बम के टुकड़े फैले हुए हैं। इस घटना के बाद छात्र और अभिभावक दहशत में आ गए। हालाँकि, घनी आबादी में स्थित होने के बावजूद गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं आई।

स्कूल के शिक्षक खालिद तैयब ने बताया था, “धमाका बहुत जोरदार था। उस वक्त हम स्टाफ रूम में बैठे थे। पहले तो हमें लगा कि बाहर कोई बम मारा है। इसके बाद बाहर निकल कर देखा तो स्कूल से धुँआ निकल रहा है। उसके बाद हम छत पर आए तो देखा कि चारों ओर बम के छींटे बिखरे हुए थे। अगर टिफिन के दौरान विस्फोट होता तो बड़ा हादसा हो सकता था।”