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1000 DTC बसों के घोटाले में फँसी केजरीवाल सरकार, LG ने सौंपी CBI को पूरी जाँच: AAP ने सफाई में कहा- ‘हमने तो बस खरीदी ही नहीं’

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना (Delhi Lieutenant Governor VK Saxena) ने आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा की गई बस खरीद मामले से जुड़ी घोटाले की जाँच सीबीआई (CBI) को दे दी है। इसके बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) और उनकी पार्टी से जुड़े नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

मामला दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के लिए खरीदी गईं 1,000 लो-फ्लोर बसों की खरीद से जुड़ा है। इसके पहले LG ने दिल्ली में हुए शराब घोटाले की जाँच भी CBI को सौंप दी थी। इस मामले में जाँच एजेंसी ने दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर पर छापेमारी भी की थी।

उपराज्यपाल वीके सक्सेना बस खरीद घोटाले की जाँच CBI को सौंपने का फैसला राज्य के मुख्य सचिव की रिपोर्ट मिलने के बाद ली है। एलजी के इस फैसले के बाद राजनीति भी शुरू हो गई है। भाजपा (BJP) और आदम आदमी पार्टी (AAP) एक दूसरे पर आरोप लगा रही है।

उपराज्यपाल के इस फैसले पर आम आदमी पार्टी ने कहा कि बसों की कभी खरीद हुई ही नहीं, क्योंकि उसका टेंडर ही रद्द कर दिया गया था। आम आदमी पार्टी की सरकार ने कहा कि दिल्ली को और शिक्षित उपराज्यपाल की जरूरत है, क्योंकि वर्तमान एलजी को पता नहीं नहीं कि वे किस चीज पर हस्ताक्षर कर रहे हैं।

दिल्ली सरकार ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ निराधार शिकायत के बाद अब चौथे मंत्री की शिकायत की जा रही है। इस तरह की जाँचों का कोई नतीजा नहीं निकला है।

दिल्ली सरकार ने आरोप लगाया उपराज्यपाल खुद गंभीर भ्रष्टाचार में फँसे हुए हैं, इसलिए लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें सबसे पहले अपने ऊपर भ्रष्टाचार के लगे आरोपों पर जवाब देना चाहिए। AAP ने कहा कि खादी ग्रामोद्योग का अध्यक्ष रहते हुए वर्तमान उपराज्यपाल ने 1400 करोड़ रुपए का घोटाला किया और बिना टेंडर निकाले अपनी बेटी को ठेका दिया था।

उधर, भाजपा ने मामले की जाँच सीबीआई से कराने के उपराज्यपाल के फैसले का स्वागत किया है। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का भ्रष्टाचारी चेहरा सामने आ गया है। वहीं, हरीश खुराना ने कहा कि दिल्ली सरकार के मंत्रियों को बर्खास्त किया जाना चाहिए।

गुलाम अली को ‘गुलाम नबी’ समझ बैठीं ‘2 BHK पत्रकार’, कॉन्ग्रेसी नेता भी कन्फ्यूज: लोगों ने लताड़ा, अब दोनों के ट्वीट डिलीट

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) द्वारा शनिवार (10 सितंबर 2022) को जम्मू-कश्मीर के गुर्जर मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाले गुलाम अली को राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने के बाद कॉन्ग्रेसी नेता और वामपंथी पत्रकार कन्फ्यूज हो गए। उन्हें लगा कि ये गुलाम अली कोई और नहीं बल्कि कॉन्ग्रेस छोड़ने वाले गुलाम नबी आजाद हैं। इसी कन्फ्यूजन में उन्होंने अपने ट्वीट भी किए और अपनी फजीहत भी करवाई।

जैसे मीडिया गिरोह की पत्रकार रोहिणी सिंह ने भी गुलाम अली को, गुलाम नबी आजाद समझ लिया और उन पर आरोप लगाते हुए कहा, इस्तीफा देने से लेकर अब तक जो भी हुआ है यह सब दिल्ली में बंगला हासिल करने के लिए था। रोहिणी सिंह ने ट्वीट किया, “जाहिर तौर पर यह नाटक और छोटे-मोटे नखरे इसके लिए ही थे। क्लासिक लुटियंस दिल्ली के बीचों-बीच एक बंगले के बिना एक दिन भी नहीं रह सकते हैं।”

रोहिणी सिंह के इस ट्वीट से साफ पता चल रहा है कि उन्होंने अपनी कुंठा निकालने की हड़बड़ी में तथ्य नहीं जाँचे। उनके ट्वीट के बाद यूजर्स उनका मजाक उड़ाने लगे। उन्हें बताया गया कि वो गुलाम नबी नहीं, गुलाम अली हैं। बीजेपी मुंबई के प्रवक्ता सुरेश नाखुआ ने चुटकी लेते हुए कहा “2BHK पत्रकार गुलाम अली को गुलाम नबी आजाद समझ लेते हैं।”

कॉन्ग्रेस नेता अजय माकन का ट्वीट

इसी तरह कॉन्ग्रेस नेता अजय माकन ने भी इस संबंध में ट्वीट किया और गुलाम अली को गुलाम नबी कहते हुए लिखा कि अब समझ आ गया है कि उनका इस्तीफा किसने लिखा था।

अजय माकन ने ट्वीट करते हुए लिखा, “आखिर खबर आ ही गई है आजाद साहब, राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत। तो अब यह तय हो ही गया कि गुलाम नबी आजाद का इस्तीफा किसने लिखा था। आजाद साहब के समर्थक एवं उनके साथ संपर्क रखने वाले भी संज्ञान लें कि डोर किसी और के हाथों में है। जो न समझे वो अनाड़ी है।”

अजय माकन के इस ट्वीट पर बीजेपी मुंबई के प्रवक्ता सुरेश नाखुआ ने फिर जवाब दिया। नाखुआ ने कॉन्ग्रेस नेताओं को पप्पू का पपलू बताते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस नेताओं का आईक्यू लेवल 2BHK पत्रकारों के जैसा है।

सुरेश नाखुआ ने ट्वीट किया “कॉन्ग्रेस नेताओं उर्फ पप्पू का पपलू का आईक्यू लेवल 2BHK पत्रकारों से मेल खाता है।”

हालाँकि, सुरेश नाखुआ के जवाब देने के बाद 2BHK पत्रकार रोहिणी सिंह और कॉन्ग्रेस नेता अजय माकन दोनों ने ही अपना ट्वीट डिलीट कर दिया है। अब लोग दोनों के ट्वीट के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए इन्हें लताड़ लगा रहे हैं और समझा रहे हैं कि नतीजों पर इतनी जल्दी नहीं पहुँचना चाहिए।

गुलाम नबी आजाद से क्यों चिढ़ी है कॉन्ग्रेस?

बता दें, गत माह गुलाम नबी आजाद ने कॉन्ग्रेस को अनपढ़ों की जमात बताते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। साथ ही उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाने का भी ऐलान किया था। हालाँकि, उनकी पार्टी का नाम और चिन्ह क्या होगा यह अब तक सामने नहीं आया है। लेकिन, उनके पार्टी से इस्तीफा देने के बाद जिस तरह से कॉन्ग्रेस के हजारों कार्यकर्ताओं और कई बड़े नेताओं ने उनके समर्थन के लिए कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दिया है। उससे, यह स्पष्ट है कि देशभर में कमजोर हो चुकी कॉन्ग्रेस को गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे के बाद बड़ा झटका लगा है। इसी क्रम में उनके इस्तीफे के बाद कई कॉन्ग्रेसी नेताओं और प्रवक्ताओं ने उन पर अपमानजनक टिप्पणी की थी।

रोहिणी सिंह को क्या 2BHK पत्रकार कहते हैं?

बता दें, रोहिणी सिंह विवादों में इसलिए रहती हैं क्योंकि साल 2010 में, कॉन्ग्रेस के शासनकाल के दौरान, एक घोटाला सामने आया था जिसमें पत्रकार बरखा दत्त और एमके वेणु (जो द वायर के संस्थापक संपादक हैं, जहाँ अब रोहिणी सिंह काम करती हैं) कॉर्पोरेट लॉबिइंग नीरा राडिया के साथ सम्पर्क थे। एमके वेणु को कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया से अनुरोध करते हुए सुना गया था कि वो रोहिणी सिंह को अपने (लॉबीस्ट के) सर्कल (राजनेताओं, व्यापारियों, लॉबिस्टों आदि) में इंट्रोड्यूज़ करें। यही नहीं, नीरा राडिया के बारे में पता चला था कि वो यूपीए सरकार से अपने कॉर्पोरेट ग्राहकों के लिए अनुकूल सौदे करने के लिए पत्रकारों का इस्तेमाल कर रही थीं।

रोहिणी सिंह वर्तमान में द वायर में ही काम कर रही हैं। उनको 2BHK पत्रकार इसलिए कहा जाता है क्योंकि उत्तर प्रदेश चुनावों से पहले, यह अफ़वाह थी कि रोहिणी सिंह को समाजवादी पार्टी द्वारा 2BHK अपार्टमेंट प्राप्त हुआ था। इस तरह की अफ़वाह इसलिए उड़ी थी क्योंकि रोहिणी सिंह ने अपने लेख में ऐसा ज़िक्र किया था कि आने वाले समय में प्रदेश में समाजवादी पार्टी सत्ता में आएगी। इसके बाद, चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद, वह अचानक गायब हो गई थीं और महीनों तक सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी थी। हालाँकि, ये आरोप केवल आरोप ही बने रहे और इन आरोपों को पुष्टि करने का कोई सबूत अभी तक सामने नहीं आया है।

कॉन्स्टेबल कादिर की मार से बचने के लिए कुएँ में कूदा हिन्दू युवक, डूबने से मौत: पुलिस ने आत्महत्या बताया, परिजन कर रहे FIR की माँग; Video

पाकिस्तान के हैदराबाद में पुलिस के डर से भाग रहे एक दलित समुदाय के हिन्दू युवक की कुएँ में गिर कर मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि मृत व्यक्ति का नाम आलम कोहली था जिसे कादिर नाम का पुलिस वाला पीटने के लिए दौड़ा रहा था। पीड़ित तैर नहीं पाता था इसलिए कुएँ में कूदने के बाद उसकी डूब कर मौत हो गई। आलम के पीड़ित परिवार ने आरोपित पुलिसकर्मी पर कार्रवाई की माँग की है। घटना गुरुवार (8 सितम्बर 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला सिंध के टंडो मोहम्मद खान इलाके का है। पीड़ित हिन्दू परिवार का कहना है कि घटना के दिन आलम कोहली और पुलिस के सिपाही कादिर के बीच सरकारी अस्पताल में झगड़ा हुआ था। यह झगड़ा बाद में नोकझोंक में बदल गया और सिपाही ने मृतक को मारने के लिए दौड़ा लिया। भाग रहे आलम को जब बचने का कोई रास्ता नहीं मिला तब वह एक कुएँ में कूद गया जहाँ डूबने से उनकी मौत हो गई।

35 वर्षीय आलम कोहली के परिवार वालों ने बताया कि मृतक को 2 दिनों से बुखार था जिसकी वो दवा लेने अस्पताल में जा रहा था। आलम की मौत के विरोध में पीड़ित परिवार ने हैदराबाद-सुजवल रोड को जाम कर दिया और आरोपित पुलिसकर्मी पर FIR के साथ अन्य कार्रवाई की माँग करने लगे। इस घटना का CCTV फुटेज भी वायरल हो रहा है जिसमें एक जगह पर सिपाही आलम को मारने दौड़ता दिखाई दे रहा है। वहीं वीडियो के एक अन्य हिस्से में कुछ लोग कुएँ में उतर कर आलम की लाश तलाश रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक आलम की मौत को पुलिस ने आत्महत्या में दर्ज किया है। इसी वीडियो में आलम के परिजनों को रोते सुना जा सकता है। वो आलम की मौत को पुलिस द्वारा की गई हिंसा बताया है।

‘आत्महत्या करने वाले ASI के परिवार में 2 बीवी और 10 बच्चे’: ANI की खबर पर भड़का मोहम्मद जुबैर, लोगों ने पूछा- मजहब की बात पर शर्म कैसी?

प्रोपेगेंडा वेबसाइट ऑल्ट न्यूज (ALTNews) के को-फाउंडर और हिंदुओं की धार्मिक भावना उकसाने के आरोपित एवं कथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर (Mohammad Zubair) ने एक बार फिर घृणा का प्रदर्शन किया है। यह घृणा है न्यूज एजेंसी के खिलाफ मुस्लिम पुलिसकर्मी की खबर को लेकर।

दरअसल, 10 सितंबर 2022 (शनिवार) को दिल्ली पुलिस के ASI यूनुस खान ने अपने घर पर आत्महत्या कर ली थी। इसी खबर को ANI ने ट्वीट कर दी थी। अपने ट्वीट में ANI ने लिखा, “दिल्ली पुलिस के एक ASI यूनुस खान मीरदर्द रोड स्थित अपने आवास पर मृत पाए गए। उनके शरीर पर कोई चोट नहीं थे। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। अपराध शाखा, कमला मार्केट में तैनात यूनुस के परिवार में 2 पत्नियाँ और 10 बच्चे हैं।”

इस ट्वीट को देखकर जुबैर भड़क उठे। उन्होंने ANI को प्रोपेगेंडा साइट तक बता दिया। ANI की इस खबर को शेयर करते हुए जुबैर ने लिखा, “उनकी (ASI की) की मौत के बारे में रिपोर्ट करने के बजाय प्रोपेगेंडा न्यूज एजेंसी उनकी पत्नियों और बच्चों की संख्या के बताने में अधिक रुचि रखती है। जैसा कि इस तरह टिप्पणियों और कोट अपेक्षित था।”

दरअसल, जब न्यूज एजेंसी ने इस खबर को ट्वीट किया तो सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान मृतक की पत्नी और बच्चों पर गया। लोगों ने देखा कि एक ASI स्तर का अधिकारी दो-दो पत्नियाँ रखा है और सरकार द्वारा परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के बावजूद वह 10 बच्चों का पिता है।

इसके बाद न्यूज एजेंसी के इस ट्वीट पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रिया देने लगे। लोगों ने कटाक्ष करना शुरू कर दिया और बताया कि अब सरकार को मृतक की इतने बड़े परिवार का ध्यान रखना चाहिए। इन टिप्पणियों को देखकर ही जुबैर दरअसल असहज महसूस करने लगे, जिसका जिक्र उन्होंने अपने ट्वीट में भी किया है। अंत में उन्होंने खबर को लेकर न्यूज एजेंसी पर ही सवाल उठा दिया।

दरअसल, किसी के मरने की खबर को लेकर मीडिया में ये बताने की रवायत है कि मृतक के बाद उसके परिवार में अब कौन है। ANI भी अपने पहले हर ट्वीट में इस तरह ही खबरों को पेश किया है। आमतौर पर किसी आदमी के मरने के बाद खबर को बताने का यही स्टैंडर्ड तरीका भी है।

इस खबर को लेकर जुबैर द्वारा सवाल उठाने पर सोशल मीडिया उन्हें ही घेरने लगे हैं। साथ ही जुबैर की इस एकतरफा सोच पर कटाक्ष भी करने लगे हैं। गोविंद द्विवेदी नाम के यूजर ने जुबैर से पूछा, “आप कैसे कह सकते हैं कि ANI गलत है। वे इसे सरकार के सामने रखना चाहते हैं, ताकि सरकार उनकी (ASI की) मृत्यु के बाद उनके बड़े परिवार के लिए कुछ कर सके।”

foolmanual नाम के एक ट्विटर हैंडल ने सवाल किया, “आपका धर्म जिस चीज की पुरजोर वकालत करता है उस पर आपको शर्म क्यों आती है? अब इतनी हीन भावना क्यों?”

‘मैं बदला लेने लौटा हूँ’ : KRK ने जेल से रिहा होने के बाद किया ट्वीट, बेटे ने कहा था- ‘अब्बा को जान का खतरा है’

जेल से रिहा होने के बाद फिल्म समीक्षक KRK (कमाल राशिद खान) ने एक ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने लिखा कि वह बदला लेने के लिए वापस आए हैं। यह ट्वीट केआरके ने रविवार (11 सितम्बर 2022) को सुबह 08:11 बजे किया है। कमाल खान को 29 अगस्त 2022 को दिवंगत ऋषि कपूर और इरफान खान के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मुंबई की बोरिवली कोर्ट ने बुधववार (7 सितम्बर 2022) को जमानत दे दी थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक खान को युवा सेना के सदस्य राहुल कनाल की शिकायत पर गिरफ्तार किया गया था। यह शिकायत अप्रैल 2020 में दर्ज करवाई गई थी। केआरके ने बेटे फैसल कमाल ने 8 सितम्बर 2022 ट्विटर पर गुहार लगाते हुए अपने अब्बा की जान को खतरा बताया था। फैसल ने बताया कि जेल में उनके अब्बा को प्रताड़ित किया जा रहा है जहाँ उनके साथ कुछ भी हो सकता है। अपने ट्वीट में केआरके के बेटे ने रितेश देशमुख, अभिषेक बच्चन और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मदद माँगी थी।

सोशल मीडिया पर कई हैंडलों ने साल 2020 में की गई शिकायत पर केआरके की अब गिरफ्तारी होने पर सवाल खड़े किए हैं। उनके मुताबिक ऐसा बॉलीवुड अभिनेताओं और डॉयरेक्टरों को चिढ़ाने के चलते किया गया। हाल ही में KRK ने आमिर खान की बेहद फ्लॉप रही फिल्म लाल सिंह चड्ढा पर तंज कैसा था। इसी के साथ उनकी गिरफ्तारी को करण जौहर और रणबीर कपूर की नई रिलीज़ ब्रह्मास्त्र से भी जोड़ा गया।

कई ट्विटर यूजर्स का मानना है कि ब्रह्मास्त्र की रिलीज से पहले ही केआरके को जेल में इसलिए डाल दिया गया क्योंकि करण जौहर अपनी फिल्म के KRK द्वारा संभावित सटीक आँकलन से डर रहे थे। फिलहाल लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि रिहा होने के बाद कमाल खान ब्रह्मास्त्र का अपने अंदाज़ में रिव्यू करेंगे या नहीं। कुछ लोगों का केआरके के लौटने पर कहना है- ‘लीजेंड इज बैक।’ कुछ कह रहे हैं कि उन्हें ब्रह्मास्त्र फिल्म के रिव्यू का इंतजार है।

कार्टून में भेड़िये से लड़ते भेड़, हॉन्गकॉन्ग के 5 डॉक्टरों को देशद्रोह की सजा: चीन को भेड़िये के रूप में दिखाने का आरोप

हॉन्गकॉन्ग के पाँच स्पीच थैरेपी डॉक्टरों को देशद्रोही कंटेंट वाले बच्चों की किताबें प्रकाशित करने की साजिश रचने के आरोप में 19 महीने की जेल की सजा सुनाई गई है। इन किताबों में भेड़ और भेड़ियों के कार्टून थे। इन कार्टून को सरकार विरोधी माना गया और उन पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया।

इन डॉक्टरों पर आरोप है उन्होंने तीन ऐसी किताबें प्रकाशित करवाईं, जिनमें भेड़ों को भेड़ियों से लड़ने वाले कार्टून दिखाए गए थे। इन किताबों में साल 2019 में शहर में बड़े पैमाने पर हुए लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख किया गया है।

इसके अलावा इन किताबों में साल 2020 की उस घटना का भी उल्लेख है, जिसमें 12 लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारी स्पीडबोट से भागकर हॉन्गकॉन्ग जा रहे थे, लेकिन उन्हें चीन के तटरक्षक बलों ने पकड़ लिया था और उनके बोट को अपने कब्जे में ले लिया था।

एक किताब में दिखाया गया है कि भेड़िये एक गाँव पर कब्जा करना चाहते हैं और भेड़ों को खाना चाहते हैं। इससे बचने के लिए गाँव के भेड़ उन आक्रमणकारी भेड़ियों से लड़ना शुरू कर देते हैं। इसमें बीजिंग को भेड़िये और हॉन्गकॉन्ग को भेड़ों के गाँव के रूप में प्रदर्शित किया गया है।

इस मामले को लेकर जिला न्यायालय के न्यायाधीश क्वोक वाई किन ने कहा कि प्रतिवादियों को प्रकाशन या शब्दों के कारण नहीं, बल्कि बच्चों के दिमाग को नुकसान पहुँचाने की कोशिश के कारण दंडित किया गया। ये डॉक्टर पिछले 13 महीनों से जल में बंद हैं।

क्वोक ने कहा, “प्रतिवादियों ने 4 साल और उससे अधिक उम्र के बच्चों के साथ जो किया है, वह वास्तव में बहुत छोटी उम्र की बच्चों को उनके विचारों और मूल्यों को स्वीकार करने के लिए ब्रेन वॉशिंग का प्रयास था।” इसके बाद के 26 से 29 की आयु के लोरी लाई, मेलोडी येउंग, सिडनी एनजी, सैमुअल चैन और मार्को फोंग को दोषी ठहरा दिया गया।

साल 2019 के विरोध और 2020 में बीजिंग द्वारा हॉन्गकॉन्ग पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू करने के बाद से पहली बार है जब किसी पर देशद्रोह का मामला चला। इस केस को अधिकारियों ने देश में स्थिरता बहाल रखने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

चीन की यह कार्रवाई साल 2020 में हॉन्गकॉन्ग में लागू की गई नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू के विरोध एवं असंतोष के दमन के तहत की गई है। बीजिंग का कहना कि शहर में स्थिरता के लिए यह कानून जरूरी। वहीं, आलोचकों का कहना है कि असंतोष का दमन करने और हॉन्गकॉन्ग की स्वायत्तता को कमजोर करने के लिए इस कानून को लाया गया है।

बता दें कि हॉन्गकॉन्ग चीन का एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र है और इसमें ‘एक देश, दो प्रणाली‘ सिद्धांत लागू है। इसके तहत शहर को कुछ स्वतंत्रता हासिल है। इन डॉक्टरों के वकीलों को उम्मीद है कि इन्हें एक महीने के भीतर रिहा किया सकता है, क्योंकि वे एक साल से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं।

कोरोना वैक्सीन कंपनी वाले अदार पूनावाला का वॉट्सऐप मैसेज – 10101554 रुपए जल्दी भेजो, ऑनलाइन ट्रांसफर के बाद मैनेजर को पता चला फर्जीवाड़ा

कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड बनाने वाली सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) से एक करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी का मामला सामने आया है। इस मामले की शिकायत महाराष्ट्र के पुणे जिले में की गई है। बताया जा रहा है कि जालसाजों ने कंपनी के सीईओ अदार पूनावाला के नाम से फर्जी मैसेज भेज कर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा था। घटना बुधवार और गुरुवार (7-8 सितम्बर) के बीच की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना की FIR बुंडगार्डन थाने में हुई है। पुलिस अधिकारी इंस्पेक्टर प्रताप मानकर ने बताया कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और अदार पूनावाला से संबंधित फर्जीवाड़ा मामले की शिकायत अज्ञात लोगों के खिलाफ IT एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में दर्ज हुई है।

कम्पनी के फाइनेंस मैनेजर द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के डॉयरेक्टरों में से एक सतीश देशपांडे को एक व्यक्ति ने व्हाट्सएप मैसेज भेज कर खुद को अदार पूनावाला बताया। शिकयत में आगे कहा गया है कि मैसेज करने वाले ने देशपांडे से तुरंत पैसे ट्रांसफर करने के लिया कहा। इसके लिए कुछ बैंक खाते दिए गए।

शिकायत में आगे बताया गया है कि अज्ञात व्यक्ति के मैसेज को कम्पनी के सीईओ का आदेश मान कर सीरम इंस्टिट्यूट के आधिकारियों ने तुरंत दिए गए खाते में 1,01,01,554 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। जानकारी के मुताबिक बाद में कम्पनी के सीईओ अदार पूनावाला ने पैसे के लिए कोई भी मैसेज भेजने से इनकार किया, तब इस केस में हुई धोखाधड़ी का पता चला। पुलिस के मुताबिक मामले की जाँच की जा रही है।

गौरतलब है कि सीरम इंस्टिट्यूट का पुणे के पास एक प्लांट है, जहाँ कोविशील्ड टीकों का निर्माण चल रहा है। कुछ ही दिन पहले सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने जानकारी दी थी कि वो अपने ग्लोबल पार्टनर Novavax के साथ मिलकर मंकीपॉक्स की mRNA वैक्सीन बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

आफताब ने पुष्पेंद्र बन की शादी, गर्भवती होने पर मुहर्रम के दिन खुला मुस्लिम होने का राज: दुधमुँही बच्ची ले पूजा सिंह माँग रहीं न्याय

झारखंड के गढ़वा में लव जिहाद का एक नया मामला सामने आया है। यहाँ पूजा सिंह नाम की लड़की ने आफताब अंसारी नाम के युवक पर खुद को पुष्पेंद्र नाम से धोखे में रख कर शादी करने और 3 साल बाद बेसहारा करने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने अपने पति और उसके परिजनों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत शनिवार (10 सितम्बर 2022) को दर्ज करवाई गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला श्री बंशीधर नगर प्रखंड का है। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के चोपन थानाक्षेत्र के गुरमा गाँव की मूलनिवासी हैं पूजा। उन्होंने बताया कि उसके पड़ोस में दवा की दुकान पर आफ़ताब अंसारी रहता था। बताया जा रहा है कि वकील अंसारी का बेटा आफ़ताब पूजा सिंह से अपना नाम पुष्पेंद्र बताता था। इस दौरान दोनों की मुलाकात होने लगी और धीरे-धीरे ये मुलाक़ात प्यार में बदल गई। आफ़ताब मूल रूप से झारखंड के गढ़वा मेराल थाना क्षेत्र के सोहबरिया गाँव का रहने वाला है।

पीड़िता द्वारा दी गई शिकायत के मुताबिक आफ़ताब से मुलाकात के 6 माह बाद दोनों ने शादी कर ली थी और पड़ोस के ही जिले मिर्जापुर के लालगंज में जाकर दोनों एक साथ रहने लगे। यहाँ दोनों एक किराए के मकान में लगभग 2 साल साथ रहे। इस बीच साल 2020 में पूजा गर्भवती हुई तो आफ़ताब उससे दूरी बनाने लगा। पूजा के मुताबिक इस दौरान जुलाई 2021 में उसने एक बेटी को जन्म दिया। आरोप है कि इस बीच दोनों के बीच आए दिन झगड़े भी होने लगे थे।

आफ़ताब के मुस्लिम होने की जानकारी पर पूजा ने कहा कि एक बार उसके गाँव में किसी की मौत पर दोनों साथ झारखंड गए थे। वहाँ मृतक के मुस्लिम तौर तरीकों से हो रहे अंतिम संस्कार पर उसे शक हुआ तो उसने आफ़ताब से इस बावत सवाल किया। आरोप है कि इस सवाल के जवाब में पुष्पेंद्र बने आफ़ताब ने खुद को हिन्दू ही बताया। पूजा के अनुसार आफताब उसे फिर से मुहर्रम में अपने घर लाया, तब उसे आफ़ताब के मुस्लिम होने की जानकारी हुई। बताया जा रहा है कि इसके चलते दोनों में काफी झगड़ा हुआ था।

पूजा ने बताया कि धर्म छिपा कर की गई शादी की पोल खुलने के बाद आफ़ताब के गाँव में पंचायत हुई। पंचायत में आफ़ताब ने पूजा को अपने साथ रखना स्वीकार किया। इस पंचायत के बाद आफ़ताब पूजा को फिर से लेकर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर चला आया। आरोप है कि मिर्जापुर में आफ़ताब ने लगातार पूजा को प्रताड़ित किया और सप्ताह भर में ही वो पूजा को छोड़ कर फरार हो गया।

उसी के बाद पूजा आफ़ताब को खोजते हुए शुक्रवार को उसके गाँव पहुँची। पूजा के मुताबिक आफताब के गाँव में उसके ससुराल वालों ने उनके साथ बेहद दुर्व्यवहार किया और मारपीट कर घर से निकाल दिया। बताया जा रहा है कि तब से पूजा अपनी अबोध बच्ची के साथ दर-दर भटक रही है। मामले की शिकायत पुलिस में की गई है, जिस पर जाँच की जा रही है। बताया जा रहा है कि झारखंड पुलिस ने पूजा को उत्तर प्रदेश में शिकायत करने की सलाह देकर भेज दिया है।

‘आतंकवादी के नमाज-ए-जनाजा में शामिल होना देशविरोधी गतिविधि नहीं’: आजादी के लिए भड़काने वाले इमाम सहित अन्य को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने दी जमानत

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि मारे गए (Jammu-Kashmir High Court) माना जा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि एक आतंकी के जनाजे की नमाज में शामिल होना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दी गई व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधीन है।

जस्टिस अली मोहम्मद माग्रे और एमडी अकरम चौधरी की पीठ ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार सबसे कीमती है। पीठ ने कहा कि कानून के तहत स्थापित प्रक्रिया के अनुसार किसी को भी इससे वंचित नहीं किया जा सकता है। इसके आधार पर कोर्ट ने UAPA के तहत गिरफ्तार इमाम को जमानत दे दी।

पीठ ने कहा, “मारे गए आतंकवादी के जनाजे की नमाज में बड़ी संख्या में लोगों का शामिल होना, जिनमें गाँव के बुजुर्ग लोग बताए गए हैं, को उस हद तक राष्ट्र विरोधी गतिविधि नहीं माना जा सकता है कि उन्हें भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दी गई उनकी उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित किया जा सके।”

कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में मेनका गाँधी बनाम भारत संघ में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता में कटौती की जा सकती है, जिसके तहत किसी व्यक्ति को आपराधिक आरोप का सामना करना पड़ता है या दोषी ठहराए जाने के बाद कारावास की सजा सुनाई जाती है।

दरअसल, हिजबुल मुजाहिदीन के एक स्थानीय आतंकवादी को सुरक्षा बलों ने एनकाउंटर में मार गिराया था। इसके बाद उस आतंकी को दफन करने के लिए आयोजित जनाजे में भारी संख्या में लोग जुटे थे। नमाज आयोज करने वाले इमाम सहित कुछ लोगों पर UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया था।

प्राथमिकी में कहा गया था कि मस्जिद शरीफ के इमाम जाविद अहमद शाह ने अंतिम संस्कार का आयोजन किया था और इस दौरान जनाजे की नमाज आयोजित की गई थी। नमाज के बाद लोगों की भावनाओं को उकसाया गया था और उन्हें आजादी तक संघर्ष जारी रखने का आग्रह किया गया था।

इस मामले में निचली अदालत ने मस्जिद के इमाम एवं अन्य लोगों को जमानत पर्याप्त सबूत का अभाव बताया था। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के जमानत देने के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि निचली अदालत ने आवेदन पर फैसला करते समय आदेश में की गई अपनी टिप्पणियों में सही कहा था।

इस मामले में मस्जिद के इमाम सहित 10 लोगों के खिलाफ साल 2021 में UAPA के तहत कुलगाम के देवसर थाने में FIR दर्ज की गई थी। प्राथमिकी कहा गया था कि आतंकी के मारे जाने के बाद उसके गाँव के मोहम्मद यूसुफ गनई ने लोगों को जनाजे की नमाज के लिए उकसाया था। इसमें इमाम ने भड़काऊ भाषण दिए थे।

क्रिश्चियन स्कूल की वॉर्डन हॉस्टल की लड़कियों को ईसाई बनने के लिए कर रही थी मजबूर, मारा-पीटा और बनाया बंधक: धर्मांतरण के दबाव में लावण्या ने खाया था जहर

तमिलनाडु (Tamil Nadu) में ईसाई मिशनरियों (Christian Missionary) का धर्मांतरण रैकेट संस्थागत रूप से ले चुका है। वहाँ की शिक्षण संस्थाओं में धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने की घटनाएँ आ रही हैं। घटना सामने आने के बाद बवाल हो गया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) जैसी संस्थाओं को आगे आना पड़ा है।

मामला राज्य की राजधानी चेन्नै (Chennai) की एक नामी-गिरामी स्कूल का है। रोयापेट्टा स्थित सीएसआई मोनहन गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल की छात्रों ने आरोप लगाया है कि उन पर ईसाई रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। स्कूल के धर्मांतरण व्यवस्था की जाँच की जा रही है।

NCPCR की राज्य इकाई ने इस मामले में स्कूल का दौरा किया है और वहाँ की हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों से बातचीत की है। NCPCR को पता चला कि स्कूल के हॉस्टल में गरीब परिवार की लड़कियाँ रहती हैं। इन लड़कियों को ईसाई बनने के लिए दबाव डाला गया।

आयोग के पैनल को हॉस्टल की लड़कियों ने लिखित शिकायत दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके साथ मारपीट की गई है और बुरी तरह प्रताड़ित किया गया। लड़कियों ने आरोप लगाया कि हॉस्टल की वॉर्डन ने उन सिर्फ उनके साथ गाली-गलौच की, बल्कि उन्हें बंधक बनाकर रखा और ईसाई में धर्मांतरण करने के लिए मजबूर किया।

इस धर्मांतरण का पता तब चला, जब आयोग की टीम राज्य भर के स्कूलों से जुड़े छात्रावासों का निरीक्षण कर रही थी। इस स्कूल से जुड़े हॉस्टल में जब आयोग की टीम पहुँची तो छात्राएँ रोने लगीं और उनसे खुद को बचाने का आग्रह किया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस हॉस्टल का पंजीकरण नहीं है। इसमें छात्राओं के लिए किसी तरह की सुविधा भी नहीं दी गई है।

स्कूल का दौरा करने वाले पैनल ने पाया कि पूरे हॉस्टल में जगह-जगह गंदगी फैली हुई थी। हॉल में बिस्तर लगाए हुए थे, जो बहुत ही गंदे थे। सभी पलंगों के पास बाइबल रखी हुई थी और दीवारों पर ईसा मसीह के चित्र लगे थे। लड़कियों को बालों में फूल लगाने और बिंदी-कान में बाली पहनने पर पाबंदी लगी थी।

आयोग इस संबंध में तमिलनाडु के मुख्य सचिव वी इराई अंबू और डीजीपी सिलेंद्र बाबू को पत्र लिखा है और लड़कियों को जबरन ईसाई बनाने के लिए इस स्कूल के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है। आयोग ने इस संबंध में राज्य सरकार को पत्र लिखकर लड़कियों को वहाँ से निकालने का भी आग्रह किया था, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया है।

बता दें कि इसी साल जनवरी में तमिलनाडु के एक स्कूल द्वारा ईसाई धर्म में धर्मांतरण के लिए डाले जा रहे दबाव से तंग आकर लावण्या नाम की 12वीं की छात्रा ने आत्महत्या कर ली थी। लड़की के परिजनों ने आरोप लगाया था कि हॉस्टल की वॉर्डन द्वारा उसे मारा-पीटा और प्रताड़ित किया जाता था, क्योंकि उसने ईसाई धर्म में कन्वर्ट होने से इनकार कर दिया था।

प्रताड़ना से तंग आकर लावण्या ने 9 जनवरी 2022 को ही जहर खा लिया था। वह 10 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रही और आखिरकार 19 जनवरी 2022 को दम तोड़ दिया। इस मामले में राज्य सरकार ने लीपापोती करने की खूब कोशिश की थी।