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जुबिन नौटियाल को खालिस्तानी ने शो में बुलाया, ISI एजेंट ने की तारीफ: पोस्टर देख भारतीय भड़के, उठाई सिंगर को गिरफ्तार करने की माँग

मशहूर प्लेबैक सिंह जुबिन नौटियाल की गिरफ्तारी की माँग सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो गई है। लोग उनसे नाराज हैं क्योंकि वो जय सिंह नाम के खालिस्तानी के बुलाने पर टेक्सास के ह्यूस्टन में आयोजित एक म्यूजिकल कार्यक्रम में जाने वाले थे। वहीं पाकिस्तान का ISI एजेंट इस शो की खबर सुनकर जुबिन की तारीफ कर रहा था।

सोशल मीडिया पर कार्यक्रम से जुड़ी यही सारी जानकारी होने पर लोग #Arrestjubinnautiyal टैग के साथ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। लोगों का पूछना है कि क्या जुबिन आतंकियों के साथ काम करने लगे हैं।

बता दें कि जुबिन के कार्यक्रम का पोस्टर खालिस्तान समर्थक जय सिंह ने अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया था। यह पोस्ट अब हर जगह वायरल हो रहा है। इस पोस्ट को रेहान सिद्दीकी नाम के एक पाकिस्तानी ISI एजेंट ने भी शेयर किया था।

रेहान ने लिखा था, “मेरा फेवरेट सिंगर ह्यूस्टन आ रहा है। अच्छा शो इंतजार करने के लायक होता है। आइए, इस शो की आधिकारिक तौर पर शुरुआत करें। बहुत अच्छा काम जय सिंह। आपकी शानदार प्रस्तुति का इंतजार रहेगा।”

क्यों हो रहा जय सिंह के बुलावे पर विवाद?

बताया जा रहा है कि जुबिन नौटियाल के इस कार्यक्रम का आयोजक जय सिंह पिछले 30 सालों से फरार है। जनवरी 2019 में, द क्विंट ने बताया था कि जय सिंह भारत से भाग गया है और अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रांत के फेरमोंट शहर में रह रहा है। ड्रग्स की तस्करी और चोरी के गंभीर आरोपों में चंडीगढ़ पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

बता दें, जय सिंह, पंजाब के प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन से जुड़ा था और फेरमोंट से सिख अलगाववादी आंदोलनों को आवश्यक सामग्री भेजता रहा है। इसके अलावा, जय जिस गुरुद्वारे में रुका था वहाँ पर भी पैसे की धोखाधड़ी करने का आरोप उस पर लगाया गया था।

दूसरी ओर, रेहान सिद्दीकी एक पाकिस्तानी ISI एजेंट है। जून 2020 में, गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने बताया था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ह्यूस्टन में भारत के कॉन्सलेट जनरल की सिफारिशों पर रेहान सिद्दीकी समेत तीन लोगों को ब्लैकलिस्ट किया है।

जी किशन रेड्डी ने कहा था, “वाशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास और ह्यूस्टन में भारत के कॉन्सलेट जनरल से भी अनुरोध किया गया है कि वे प्रमुख व्यक्तियों, सांस्कृतिक निकायों और बॉलीवुड से जुड़े हुए स्थानीय संस्थाओं से संपर्क करें ताकि भारतीयों को इस बारे में जानकारी हो सके। साथ ही, अभिनेता और कलाकार ऐसे राष्ट्रविरोधी तत्वों से खुद को दूर रख सकें।”

हालाँकि, सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल होने और भारतीयों द्वारा विरोध किए जाने के बाद ISI एजेंट रेहान सिद्दीकी ने अपना फेसबुक पोस्ट डिलीट कर दिया। साथ ही, जिस कार्यक्रम में जुबिन नौटियाल आगामी 23 सितंबर को परफॉर्म करने वाले थे, उस कार्यक्रम के टिकट की भी ऑनलाइन बिक्री रोक दी गई है।

फिलहाल, इस पूरे मामले में विवादों से घिरे हुए जुबिन नौटियाल का कोई भी बयान अब तक सामने नहीं आया है। गत, 19 जुलाई का एक ट्वीट अभी भी उनके ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर है। इस ट्वीट में उन्होंने, यूएसए और कनाडा के अपने कार्यक्रमों के बारे में बताया था। इस ट्वीट में जुबिन ने कथित खालिस्तानी चरमपंथी जय सिंह का फोन नंबर भी शेयर किया था। ताकि, लोग इस कार्यक्रम के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।

जुबिन नौटियाल के ट्वीट का आर्काइव्ड वर्जन यहाँ देख सकते हैं।

अयोध्या में बाबरी ढाँचे के नीचे खोजा राम मंदिर, रामायण से जुड़े स्थलों का उत्खनन किया: 101 साल की उम्र में पद्म विभूषण प्रो. BB Lal का निधन

बीबी लाल के नाम से प्रसिद्ध पुरातत्वविद् ब्रज बसी लाल का 101 साल की उम्र में निधन हो गया है। सन 1921 में जन्मे और पद्म विभूषण से सम्मानित बीबी लाल ने बाबारी मस्जिद के नीचे राम मंदिर को खोजा था। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टीज के निदेशक के रूप में भी कार्य किया।

भाजपा सरकार के मंत्री जी किशन रेड्डी ने पुरातत्वविद के निधन पर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने लिखा, “प्रो बीबी लाल जी के निधन से हमने उन प्रतिभाशाली दिमागों में से एक को खो दिया है, जिन्होंने 4 दशकों से अधिक समय तक हमारे पुरातात्विक उत्खनन और प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।”

लाल 1968 और 1972 के बीच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक थे और उन्होंने अयोध्या में रामजन्मभूमि स्थल पर खुदाई का नेतृत्व किया था। उनके नेतृत्व में ASI ने साइट पर एक प्राचीन मंदिर के अस्तित्व को साबित किया था।

वयोवृद्ध पुरातत्वविद् ने रामायण में संदर्भ वाले कुछ स्थलों की जाँच के लिए 1975 और 1976 के बीच रामायण के पुरातत्व नामक एक परियोजना की अगुआई की की थी। टीम में नौ सदस्य थे, जिनमें से पाँच पुरातत्वविद प्रोफेसर लाल, डॉ केपी नौटियाल, एसके श्रीवास्तव, आरके चतुर्वेदी और केएम अस्थाना जीवाजी विश्वविद्यालय से थे।

इस टीम में महदावा एन कटी, एलएम वहल और एमएस मणि नाम के तीन सदस्य एएसआई से थे और हेम राज नामक एक सदस्य पुरातत्व विभाग, उत्तर प्रदेश से थे। प्रोफेसर लाल के अनुसार, रामायण से जुड़े पाँच स्थलों अयोध्या, नंदीग्राम, श्रृंगवेरापुर, भारद्वाज आश्रम और चित्रकूट में खुदाई की गई थी।

उन्होंने बाबरी ढाँचे के ठीक दक्षिण में क्षेत्र की खुदाई करते समय स्तंभ मिलने के प्रमाण दिए थे। उन्होंने बाबरी ढाँचे के पास स्तंभ आधारों की खोज के बारे में सात पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट लिखी थी। हालाँकि, खोज के बाद क्षेत्र से सभी तकनीकी सुविधाओं को वापस ले लिया गया और परियोजना को रोक दिया गया था।

प्रोफेसर लाल के बार-बार अनुरोध के बावजूद इसे फिर से शुरू नहीं किया गया और 10-12 साल तक बंद रहा। अंतिम रिपोर्ट कभी प्रस्तुत नहीं की गई थी, लेकिन उनकी प्रारंभिक रिपोर्ट भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद द्वारा 1989 में रामायण और महाभारत की ऐतिहासिकता पर अपने खंड में प्रकाशित की गई थी।

एक प्राचीन मंदिर के अवशेषों में बबडी संरचना का पता लगाने में बीबी लाल का बड़ा योगदान था, जो राम मंदिर के समर्थन में एक प्रमुख तर्क था। बाद में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मंदिर के पक्ष में ही फैसला सुनाया। उनके कार्यों को देखते हुए 9 नवंबर 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रोफेसर बीबी लाल को भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया। वर्ष 2000 में उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

जिस नूँह में DSP पर चढ़ाया गया डंपर, वहाँ फिर पुलिस टीम पर खनन माफियाओं ने किया हमला: 50 के खिलाफ FIR, 1 कॉन्स्टेबल चोटिल

हरियाणा के मेवात क्षेत्र में अपराधियों में पुलिस का कोई खौफ नहीं है। डीएसपी की हत्या के बाद अब खनन माफियाओं ने शुक्रवार (9 सितंबर 2022) को नूँह में पुलिस टीम पर हमला कर दिया इस हमले एक जवान घायल हो गया। पुलिस ने इस मामले में पाँच नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

दरअसल, पुलिस को सूचना मिली थी कि राजस्थान-हरियाणा सीमा से सटे बडेर गाँव के पहाड़ पर अवैध खनन का काम हो रहा है। वहाँ बड़ी-बड़ी मशीनें लगी हुई हैं। इसके बाद पुलिस वहाँ छापेमारी करने पहुँची तो पहले ही भारी संख्या में मौजूद लोगों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया।

हालाँकि, इस दौरान पुलिस ने तीन पोकलेन मशीनों के अलावा कुछ विस्फोटक सामग्री को जब्त कर लिया। वहीं, आरोपितों को पकड़ने के लिए पुलिस ने कई टीमों का गठन किया है और उनकी गिरफ्तारी के लिए जगह-जगह छापेमारी की जा रही है। इसकी जानकारी नूँह की एसीपी उषा कुंडू ने दी है।

पुलिस शिकायत में कहा गया है कि पुलिस को देखते ही दो वर्कर अर्थमूवर को छोड़कर राजस्थान सीमा की ओर भाग गए। जब तीसरे ऑपरेटर को रुकने के लिए कहा गया तो उसने मशीन को पुलिसकर्मियों की ओर मोड़ दिया और उन पर चढ़ाने की कोशिश की। हालाँकि, पुलिसकर्मी रास्ते से हट गए और बच गए। वहीं, एक पुलिस कॉन्स्टेबल के बाएँ हाथ में चोट लगी है।

इसके बाद वहाँ आए 40-50 लोगों ने पुलिस को घेर लिया और पथराव शुरू कर दिया। भीड़ को तितर-बितर करने और हमले से बचने के लिए एक पुलिसकर्मी ने हवा में चार राउंड फायरिंग की। इसके बाद भीड़ तितर-बितर हो गई। एसपी वरुण सिंगला कहना है कि अवैध खनन को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन लोगों ने पुलिस टीम पर हमला किया है, उनसे सख्ती से निपटा जाएगा।

जिस समय पुलिस टीम पर हमला किया गया, उस समय जब तावडू क्षेत्र में डीएसपी सुरेंद्र सिंह बिश्नोई की हत्या की जाँच के लिए हरियाणा सरकार द्वारा गठित आयोग के जस्टिस एलएन मित्तल नूँह जिले के दौरे पर थे। वह नूँह के सर्किट हाउस में ही ठहरे हुए थे।

बता दें कि 19 जुलाई को खनन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने गए डीएसपी सुरेंद्र सिंह बिश्नोई पर अपराधियों ने ट्रक चढ़ाकर हत्या कर दी थी। इस मामले में अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। घटना के अगले दिन पुलिस ने मुख्य आरोपित शब्बीर उर्फ मटर को एक एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार कर लिया था। 

‘यीशु ही हैं असली भगवान… वह शक्ति जैसे नहीं’ : राहुल गाँधी के सामने पादरी ने हिंदू देवी-देवताओं का किया अपमान, कॉन्ग्रेस नेता ध्यान लगाकर सुनते रहे; Video

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान शुक्रवार (9 सितंबर 2022) को हिंदू विरोधी टिप्पणियों के लिए कुख्यात पादरी जॉर्ज पोन्नैया से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान हुई एक चर्चा की वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई है। इसमें देख सकते हैं कि जीसस के बारे में पूरी चर्चा हो रही है। पादरी राहुल गाँधी को समझा रहे हैं कि यीशु ही असल में ईश्वर हैं।

राहुल गाँधी को पानी की तीन अवस्थाओं का उदाहरण देकर समझाया जा रहा है कि राहुल गाँधी ईश्वर के पुत्र हैं। वहीं बीच में जॉर्ज पोन्नैया कहते हैं कि जीसस ही असली भगवान हैं, वो शक्ति और हिंदू देवताओं जैसे नहीं हैं। पोन्नैया को वीडियो में कहते सुना जा सकता है, “वह (जीसस) मानव के तौर पर जन्मे असली भगवान हैं। शक्ति (हिंदू देवी) और अन्य की तरह नहीं।”

खुद को जनेऊधारी बताने वाले राहुल गाँधी को हिंदू देवताओं के ऐसे अपमान पर वीडियो में चुपचाप बैठे पादरी की बातों को सुनते देखा जा सकता है। पादरी ये दर्शाते रहते हैं कि जीसस ही असली भगवान हैं जबकि हिंदू देवता काल्पनिक हैं। लेकिन राहुल इस पर कुछ नहीं बोलते।

बता दें कि राहुल गाँधी की पादरियों से यह बातचीत उस समय सामने आई है जब कॉन्ग्रेस अपनी राजनीति और भाग्य को बदलने के लिए भारत ‘जोड़ो यात्रा’ कर रही है। वहीं राहुल गाँधी एक ऐसे व्यक्ति से मिले हैं जो भारत माँ और हिंदू देवी-देवताओं के साथ हिंदुओं की सभ्यता और संस्कारों पर घृणित टिप्पणी कर रहा है।

पादरी जॉर्ज पोन्नैया का आपत्तिजनक बयानों का इतिहास

राहुल गाँधी से हिंदू देवताओं के बारे में हुई बातचीत ही पादरी जॉर्ज पोन्नैया का पहला हिंदू विरोधी बयान नहीं है। इस से पहले भी वो विभिन्न मौकों पर हिंदू धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक बातें करते आए हैं। जुलाई 2021 में ‘जनन्याग क्रिस्थुवा पेरवई अमाईपु’ नामक NGO के सलाहकार व ईसाई पादरी जॉर्ज पोन्नैया (George Ponniah) ने कन्याकुमारी के अरुमनई में कहा था,

“भाजपा विधायक एम आर गाँधी इसलिए चप्पल नहीं पहनते क्योंकि वो भारत माता को दर्द नहीं देना चाहते और हम लोग इसलिए चप्पल पहनते हैं ताकि हमारे पैर गंदे न हों और भारत माता के कारण हमें कोई बीमारी न हो।”

इसी सभा में उन्होंने PM नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ भी अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। तब उन्होंने कहा था, “नरेंद्र मोदी का आखिरी दिन सबसे दयनीय होगा। मैं लिखकर दे सकता हूँ। अगर जिन भगवान को हम पूजते हैं वो सच में जिंदा हैं तो इतिहास देखेगा कि मोदी और अमित शाह के सड़े शरीर को कुत्ते और कीड़े खाएँगे।”

पादरी ने ये तमाम बयान डीएमके पार्टी के पक्ष में चुनाव प्रचार के दौरान कही थी जिस पर विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने वीडियो को आधा अधूरा बताते हुए माफ़ी माँग ली थी। हालाँकि तब पादरी पर FIR भी दर्ज हुई थी और 18 जुलाई 2021 को उन्हें हिरासत में भी ले लिया गया था। जनवरी 2022 में पादरी जॉर्ज पोन्नैया ने अपने खिलाफ दर्ज इस FIR को रद्द करने की अपील को मद्रास हाईकोर्ट ने अस्वीकर कर दिया था। तब हाईकोर्ट ने पादरी के बयान को हिंदुओं के लिए बेहद अपमानजनक माना था।

दीपक सोनी पर कम्सुद्दीन अंसारी ने पेट्रोल डाल लगाई आग, गढ़वा में गिरफ्तार: झारखंड के ही दुमका में जलाई गई थी अंकिता

दुमका के बाद अब झारखंड के गढ़वा में कम्सुद्दीन अंसारी पर दीपक सोनी को जिन्दा जलाने की कोशिश का आरोप लगा है। आरोपित कम्सुद्दीन ने दीपक पर पेट्रोल छिड़क कर उसे जलाना चाहा था। घटना में दीपक बुरी तरह से झुलस गया है, जिसका इलाज अस्पताल में चल रहा है। हमले के बाद कम्सुद्दीन फरार हो था, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना शुक्रवार (9 सितम्बर 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला गरनउंटारी थाना क्षेत्र के चितविश्राम गाँव का है। पीड़ित दीपक का आरोप है कि कम्सुद्दीन किसी से झगड़ा कर रहा था, तब उसने वहाँ पहुँच कर झगड़े की वजह पूछी। आरोप है कि इसी बात से कम्सुद्दीन बेहद नाराज हुआ और उसने दीपक पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी। पीड़ित दीपक कार चला कर अपने परिवार का गुजारा करता है, जो घटना के समय अपने चाचा के घर पर कार खड़ी करके अपने घर लौट रहा था।

इस हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कम्सुद्दीन ने यह हमला कई लोगों की भीड़ के आगे किया। घायल दीपक सोनी के मुताबिक कम्सुद्दीन अपनी दुकान पर पेट्रोल भी बेचता है और हमले के लिए उसने उसी पेट्रोल का इस्तेमाल किया।

यह भी बताया जा रहा है कि आरोपित कम्सुद्दीन की किराने की दुकान है। उसके हमले में बुरी तरह से झुलस गए दीपक को अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहाँ से हालात गंभीर होने के चलते डॉक्टरों ने उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया।

जानकारी के मुताबिक हमले के दौरान आरोपित कम्सुद्दीन का पैर भी झुलस गया है। इस मामले में कम्सुद्दीन के परिवार वालों ने भी पुलिस में शिकायत करते हुए दीपक सोनी द्वारा झगड़ा किया जाना बताया है। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

गौरतलब है कि झारखंड के ही दुमका में 23 अगस्त 2022 को पुलिस ने शाहरुख़ नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया था, जिस पर अंकिता नाम की एक हिन्दू लड़की को जला कर मार डालने का आरोप लगा था। बुरी तरह से झुलसी अंकिता ने बाद में दम तोड़ दिया था।

JNU के प्रोफेसर ने यौन-शोषण किया… लेकिन गैर-ब्राह्मण था, इसलिए चुप रह गई: कॉन्ग्रेस समर्थक मीना कंडासामी की आपबीती

ब्राह्मण विरोधी और कॉन्ग्रेस के प्रति निष्ठावान डॉक्टर मीना कंडासामी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर स्वीकार किया था कि उन्होंने छेड़छाड़ करने वाले एक व्यक्ति के खिलाफ इसलिए शिकायत नहीं की, क्योंकि वह गैर-ब्राह्मण था।

कंडासामी ने ट्विटर पर JNU में 25 साल की उम्र में हुई छेड़छाड़ को लेकर अपनी चुप्पी को सही ठहराने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “साल 2010 में एक 25 वर्षीय लड़की के रूप में, जो JNU में यूजीसी की विजिटिंग फेलो थी, मैंने उस गैर-ब्राह्मण फैकल्टी (प्रोबेशन पर आए) पर आरोप नहीं लगाया, जिन्होंने मुझसे छेड़छाड़ की थी। हालाँकि, जेएनयू में GSCASH के कड़े नियम थे। मैंने जेएनयू में कई अकादमिक शुभचिंतकों, प्रोफेसरों और दिल्ली के लेखकों को बताया कि क्या हुआ, लेकिन मैंने कोई कार्रवाई नहीं की, क्योंकि मैंने दो चीजों के बारे में सोचा था।”

स्रोत: ट्विटर

अपने ऊपर हुए यौन हमले के बारे में चुप रहने का एक कारण यह भी है कि उन्हें कथित यौन करने वाली की पत्नी से अपने जीवन का पहला वेतन चेक मिलना था। हालाँकि, उन्होंने अपने साथ छेड़छाड़ के बारे में बात नहीं करने का प्राथमिक कारण छेड़छाड़ करने वाले का गैर-ब्राह्मण होना बताया। उन्हें डर था कि उत्पीड़क के खिलाफ आरोप लगाने के कारण उन्हें ‘ब्राह्मण के हाथों की कठपुतली’ कहा जाएगा।

उन्होंने लिखा, “मैं बहुत युवा थी। कोई भी मुझे उस युवती के रूप में नहीं देखता जो न्याय चाहती है। वे इसे केवल एक ब्राह्मण विभाग प्रमुख (प्रोफेसर जिसने मुझे आमंत्रित किया) द्वारा एक गैर-ब्राह्मण बुद्धिजीवी के खिलाफ मेरा इस्तेमाल करने के रूप में देखेंगे। मुझे एक एजेंट बताया जाएगा। अगर मुझे जेएनयू में किसी दलित या बहुजन ने आमंत्रित किया होता तो मैं अलग तरह से सोचती। मैंने अपनी चुप्पी बनाए रखने का फैसला किया, क्योंकि अपमान के साथ रहना ब्राह्मण के हाथों की कठपुतली कहलाने से बेहतर था।”

जाहिरा तौर पर, ब्राह्मणों के प्रति घृणा ने कंडासामी को इतना परेशान कर दिया था कि उन्होंने छेड़छाड़ करने वाले के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, क्योंकि वह एक गैर-ब्राह्मण था और न्याय दिलाने से ब्राह्मणवाद को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अपने खिलाफ यौन हमले को दृढ़ता से सहन किया, क्योंकि इसके खिलाफ बोलने से, उनकी विकृत समझ के अनुसार, ब्राह्मणवाद को बल मिलता।

कंडासामी ने अफसोस जताते हुए लिखा, “यह मैं ही हूँ। मैं 2.0 प्रकार के लोगों से अनुरोध करतीं हूँ कि जो भी नाम से आप मुझे बुलाना चाहें बुलाएँ। मैंने पहली बार ब्राह्मणवाद और उसके वर्चस्व की विषाक्तता देखी है। और हाँ, इस खबर के लिए मुझे के लिए खेद है, लेकिन मैं इसके वर्चस्ववादी परियोजना में शामिल होने वाली बच्ची नहीं हूँ।”

संभवत: वह ‘ब्राह्मणवादी वर्चस्व को खत्म करो’ गिरोह के सम्मानित सदस्यों में से एक हैं, जिनकी ब्राह्मणवाद और ब्राह्मणों पर सभी बुराइयों का दोष मढ़ने की आदत है। साल 2020 में कंडासामी ने अपने एक ट्विटर थ्रेड में ‘ब्राह्मणवादी वर्चस्व को नष्ट करने’ की आवश्यकता पर जोर दिया था।

स्रोत: ट्विटर

मीना कंडासामी ने ट्वीट किया था, “कई युवतियाँ आपकी ओर देख रही हैं। उन्हें जाति व्यवस्था को नष्ट करने के लिए कहो। उन्हें बताओ कि आत्मनिर्णय का अर्थ है जाति की अवज्ञा करना। उन्हें ब्राह्मणवादी वर्चस्व को तोड़ने के लिए कहो। मनुस्मृति में आग लगाने के लिए कहो। उन्हें डॉ अम्बेडकर को पढ़ने के लिए कहो। उन्हें विद्रोह करने के लिए कहो।”

मीना कंदासामी के इस ट्वीट से लगता है कि ब्राह्मणवाद शायद समाज को बुरी तरह से प्रभावित करने वाली सभी बुराइयों की जड़ है। शायद इसलिए उन्होंने खुद के साथ हुई छेड़छाड़ से उन्होंने आँखें मूँद लीं, ताकि उन पर ब्राह्मणवाद के एजेंट के रूप में कार्य करने का तोहमत ना लगे।

इकरा बनीं इशिका, गायत्री मंदिर में घर-वापसी कर प्रेमी राहुल से रचाई शादी: कहा- मुस्लिम मायके वाले हमें परेशान न करें

मध्य प्रदेश के मंदसौर में एक मुस्लिम लड़की ने हिन्दू युवक से शादी करके सनातन धर्म स्वीकार कर लिया है। दुल्हन का नाम इकरा था, जो अब इशिका बन चुकी है। शुक्रवार (9 सितम्बर 2022) को इकरा ने गायत्री मंदिर में विधि-विधान से घर वापसी की। इस शादी के बाद अब इशिका ने माँग की है कि उसके घर वाले उसे कुछ न करें।

इस शादी को सम्पन्न करवाने वाले चैतन्य सिंह राजपूत (पूर्व जफर) से ऑपइंडिया ने बात की। उन्होंने बताया कि दूल्हे का नाम राहुल वर्मा है, जो मूल रूप से मंदसौर का रहने वाला है। चैतन्य के अनुसार राहुल अपने परिवार सहित राजस्थान के जोधपुर में रहता है और वहीं पर पढ़ाई के साथ डांस क्लास चलाता है। बताया गया कि लड़की इकरा राहुल वर्मा की पड़ोसन थी और वहीं से दोनों का प्यार शुरू हुआ।

चैतन्य सिंह ने हमें आगे बताया कि लड़का और लड़की दोनों बालिग हैं और उन्होंने उदयपुर की कोर्ट में पहले से ही शादी का एग्रीमेंट कर लिया था। उन्होंने कहा कि अब दोनों का गायत्री परिवार में वैदिक पद्धति से भी मंदसौर में विवाह हो गया है लेकिन राजस्थान की पुलिस लड़के के परिवार वालों को परेशान कर रही है।

चैतन्य के मुताबिक लड़की के घर वालों ने राहुल पर जोधपुर में FIR दर्ज कर रखी है और इसी के चलते राजस्थान पुलिस ने पहले राहुल की माँ और बाद में राहुल के भाई को थाने में बिठाया और अभी भी परेशान कर रही है।

मंदसौर के भाजपा विधायक यशपाल सिसोदिया ने भी इकरा और राहुल को विवाह की शुभकामनाएँ दीं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इशिका (पुराना इस्लामी नाम इकरा) ने क्लास 9 तक पढ़ाई की है और उनकी उम्र 19 साल है। इशिका ने कहा कि उन्होंने अपनी मर्जी से ये कदम उठाया है। लड़की ने कहा कि वो चाहती हैं कि उनके घर वाले उसके पति और नए परिवार को कुछ न करें।

‘सिंगल लाइफ कचरा छानने जैसा’: स्वरा भास्कर बोलीं- शाहरुख और आदित्य चोपड़ा ने मेरी लव लाइफ बर्बाद कर दी

हिंदू विरोधी बयानों के लिए कुख्यात बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर (Swara Bhaskar) का कहना है कि सिंगल लाइफ कचरा छानने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिनेता शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) और फिल्म निर्माता आदित्य चोपड़ा (Aditya Chopra) ने उनकी लव लाइफ को बर्बाद कर दिया।

स्वरा ने कहा कि राज-सिमरन की जोड़ी में शाहरुख खान और काजोल की मुख्य भूमिका वाली फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे को आदित्य चोपड़ा ने अपने निर्देशन में पहली फिल्म बनाई थी। इस फिल्म ने उन्हें रोमांस का एक अलग विचार दिया, जो बाद में गलत साबित हुआ।

मिडडे से बात करते हुए स्वरा ने कहा, “मैं अपनी लव लाइफ को बर्बाद करने के लिए आदित्य चोपड़ा सर और शाहरुख खान को जिम्मेदार ठहराती हूँ। क्योंकि, मैंने छोटी सी उम्र में दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे देखी थी और तब से मैं उस राज की तलाश कर रही हूँ, जो शाहरुख की तरह दिखता है। मुझे यह महसूस करने में कई साल लग गए कि राज मौजूद नहीं है। मुझे नहीं लगता कि मैं रिश्तों के मामले में बहुत अच्छा हूँ।”

दरअसल, स्वरा ने अपनी आगामी फिल्म ‘जहाँ चार यार’ के प्रचार के दौरान एक साक्षात्कार में स्वरा ने यह बात कही है। स्वरा ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में प्यार और शादी को लेकर उनके सपने कैसे बदल गए हैं। यह फिल्म महिलाओं की दोस्ती पर आधारित है। इसमें स्वरा के साथ पूजा चोपड़ा, शिखा तलसानिया और मेहर विज मुख्य भूमिका में हैं।

फिल्म के प्रोमोशन के दौरान पूजा चोपड़ा ने कहा, “स्वरा सिंगल हैं और डेट पर जाने के लिए तैयार हैं।” इसके बाद स्वरा ने कहा, “मैं कर चुकी हूँ दोस्तों। अब नहीं कर सकती। मेरे पास अब एनर्जी नहीं है। सिंगल लाइफ कठिन है और कचरा छानने जैसा है।”

यह फिल्म 16 सितंबर को रिलीज होने वाली है। स्वरा की आखिरी वीरे दी वेडिंग (2018) भी महिला मित्रता पर आधारित थी। स्वरा की अगली फिल्म ‘मिसेज फलानी’ भी पाइपलाइन में हैं। वह फिल्म में नौ भूमिकाएँ निभाएँगी, जो नौ शॉर्ट स्टोरीज का कलेक्शन है।

पटना में RJD के पूर्व MLC अनवर अहमद ने भीड़ के साथ थाने को घेरा, बेटे ने अपराधी को नहीं छोड़ने पर DySP की वर्दी उतरवाने की दी धमकी

नीतीश कुमार भाजपा को छोड़कर महागठबंधन के साथ जब सरकार बनाए तो बिहार में जंगलराज की वापसी के कयास लगाए जाने लगे थे। अब इसके सबूत भी मिलने लगे हैं। राजधानी पटना में राजद के पूर्व MLC अनवर अहमद के बेटे अशफर अहमद ने एक डीएसपी के साथ बदतमीजी की और वर्दी उतरवा लेने की धमकी दी।

दरअसल, अनवर अहमद के बेटे और पूर्व वार्ड पार्षद अशफर अहमद पुलिस पर हमला करने के आरोपित दुकानदार सरफराज को छुड़वाने के लिए शुक्रवार (9 सितंबर 2022) को पीरबहोर थाना पहुँचा था। वहाँ अहमद ने राजद सरकार का धौंस देते हुए जमकर हंगामा किया।

इतना ही नहीं, उसने पुलिस वालों के सामने टाउन DySP अशोक प्रसाद सिंह के साथ बदतमीजी के साथ जमकर बदतमीजी की और वर्दी उतरवा लेने की धमकी दी। इसके बाद पुलिस ने अशफर को हिरासत में ले लिया। इसके बाद बेटे की तरह ही बाप अनवर अहमद भी सैकड़ों समर्थकों के साथ पहुँचकर थाने को घेर लिया और बेटे को छोड़ने का दबाव डालने लगे।

पूर्व MLC अनवर अहमद के साथ पहुँचे सैकड़ों लोगों ने पीरबहोर थाने के सामने अशोक राजपथ को जाम कर दिया। हालात को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल को बुलाना पड़ा। देर रात तक राजद नेता के समर्थक हंगामा करते रहे और राजद नेता के बेटे को छोड़ने की माँग करते रहे।

पटना के SSP डॉ मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि अशफर अहमद पर डीएसपी से बदतमीजी का आरोप है। अशफर और दुकानदार सरफराज पर केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है। उधर राजद नेता अनवर अहमद को देर रात तक थाने पर रोक कर रखा गया था।

कहा जा रहा है कि पुलिस पर हमला करने के आरोप में पुलिस दुकानदार सरफराज को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही थी। इसी दौरान राजद नेता का बेटा थाने पहुँचकर उसे छोड़ने का दबाव डालने लगा। इस पर पुलिस ने कहा कि पूछताछ हो जाने के बाद उसे छोड़ दिया जाएगा।

इसके बाद अशफर अहमद वहाँ से चला गया और अपने समर्थकों को लेकर वापस थाने पहुँचा और हंगामा करने लगा। जब डीएसपी ने रोकने की कोशिश की तो वह बदतमीजी करने लगा और वर्दी उतरवाने की धमकी देने लगा। इसके बाद पुलिसवालों ने उसे पकड़कर थाने में बैठा लिया।

इधर बेटे को बचाने पहुँचे पूर्व MLC पर भी कार्रवाई की जा सकती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पहले भी अनवर अहमद पर पुलिस के साथ उलझने को लेकर पीरबहोर थाने में केस दर्ज किया गया था।

पीरबहोर थाने के एसएचओ ने बताया कि पटना में कुछ दिन पहले एक वीडियो वायरल हुआ था। इसको लेकर पुलिस छानबीन करने पटना मार्केट के मीना बाजार गई थी। वहाँ मस्जिद के पास पुलिस को देखकर चार लोग भागने लगे थे। इनमें से दो लोगों को पुलिस ने पकड़ लिया था।

इसी दौरान स्थानीय लोगों ने पुलिस टीम पर हमला कर पकड़े गए लोगों को छुड़ा लिया था और पुलिसवालों को सड़कों पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा था। सिपाही को पीटने वाले सरफराज को टीम ने बाद में पकड़ लिया और पूछताछ के लिए थाने लेकर आई थी।

200 सालों की क्रूरता, 3.5 करोड़ भारतीयों की मौतें और ₹358191000 करोड़ की लूट: भारत से माफ़ी माँगेंगे ब्रिटेन के नए राजाजी? लौटाएँगे कोहिनूर?

70 वर्षों से ब्रिटेन की सर्वोच्च शासक रहीं महारानी एलिजाबेथ के निधन के बाद यूनाइटेड किंगडम सहित 14 अन्य कॉमनवेल्थ देशों को नया राजा मिला है। एलिजाबेथ के बेटे King Charles III नाम से गद्दी पर बैठेंगे और बकिंघम पैलेस की सर्वोच्च सत्ता होंगे। लेकिन, सवाल ये है कि क्या अब UK भारत को वो कोहिनूर हीरा लौटाएगा, जो वो यहाँ से लूट कर ले गया था? जो कभी महाराजा रणजीत सिंह की शान हुआ करता था, उस कोहिनूर की कीमत आज की तारीख़ में 8000 करोड़ रुपए से भी अधिक है।

लेकिन, यहाँ बात पैसे की नहीं है। भारत को कोहिनूर हीरा लौटते हुए अगर नए शासक King Charles III यहाँ अंग्रेजों द्वारा 200 वर्षों में मचाई गई तबाही के लिए माफ़ी माँगते हैं तो ये एक बड़ी बात होगी। लेकिन, क्या वो ऐसा करेंगे? इतिहास के लिए 75 वर्ष बहुत ज्यादा नहीं होते और भारत को आज़ाद हुए इतने ही साल हुए हैं। उसी साल महारानी एलिजाबेथ की शादी भी हुई थी। ऐसे में समय आ गया है जब ब्रिटेन भारत में किए गए अत्याचारों के लिए माफ़ी माँगे।

पहले सवाल यही उठ सकता है कि माफ़ी माँगने की ज़रूरत ही क्यों है? माफ़ी इसीलिए माँगनी है, क्योंकि अंग्रेजों के समय में 1.5-2 करोड़ के आसपास लोग भूख से मर गए। बंगाल 1943 में बंगाल में आया अकाल इसका एक उदाहरण है, जब अंग्रेजों ने लोगों को बचाने की बजाए अपना खजाना भरना ही उचित समझा। दूसरे विश्व युद्ध में अंग्रेजों की सेना में शामिल 54,000 भारतीयों को अपनी जान गँवानी पड़ी, इसीलिए अंग्रेजी मुल्क माफ़ी माँगे।

इंग्लैंड की सेना में उस युद्ध में लड़ने वाला हर छठा सैनिक भारतीय था, लगभग 13 लाख। उस युद्ध में अंग्रेजों ने न सिर्फ यहाँ के लोगों, बल्कि जानवरों से लेकर कपड़ों तक का इस्तेमाल किया। इंग्लैंड ने भारतीय कारीगरों और बुनकरों पर टैक्स लगाया। साथ ही उनके द्वारा बनाए गए कपड़ों को दुनिया भर में अपना उत्पाद बना कर बेचा और करोड़ों कमाए। नुकसान ये हुआ कि दुनिया भर को कपड़े देने वाले भारत को बाहर से कपड़े खरीदने पड़े।

आज का लिबरल गिरोह, यहाँ तक कि भारत का भी, ये अफवाह फैलाने में मगन रहता है कि हम भारतीयों को तो खाना-पीने और शौच तक करना नहीं आता था, सब अंग्रेजों ने सिखाया। हमें क्या आता था, ये हड़प्पा की खुदाई से दिख चुका है। अमेरिकी विशेषज्ञ जेटी संडरलैंड का कहना था कि एक सभ्य समाज के लिए जिन भी उत्पादों की ज़रूरत होती है, हाथों से या दिमाग से, वो सब भारत में बनते थे। उन्होंने बताया है कि यहाँ महान व्यापारी रहते थे, इंजीनियर थे, बैंकर थे।

जब 18वीं शताब्दी शुरू हुई थी, तब भारत विश्व की अर्थव्यवस्था का 23% हुआ करता था। उतना, जितना पूरे यूरोप को मिला कर होता था। जब अंग्रेजों ने भारत छोड़ा, उस समय तक ये मात्र 3% हो चुका था। एक ‘सोने की चिड़िया’ के अंग्रेजों ने सारे पर कतर लिए। अब वहाँ के लोग एक माफ़ी और प्रतीक के रूप में कोहिनूर हीरा लौटाने की माँग तो कर ही सकते हैं? बंगाल प्रेसिडेंसी में पहली बार गवर्नर बना रॉबर्ट क्लाइव अपने साथ 369 करोड़ रुपए (आज की मुद्रा में) लेकर गया था, जिससे वो यूरोप के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक बन गया था।

अपनी पुस्तक ‘An Era of Darkness: The British Empire in India’ में शशि थरूर लिखते हैं कि 19वीं सदी के अंत तक ब्रिटेन के पास 3.5 लाख सैनिक थे, जिनमें से एक तिहाई का खर्च भारत के पैसों पर चलता था। लेखक मिन्हाज मर्चेंट ने एक बार आकलन किया था कि अंग्रेजों ने भारत से आज की मुद्रा में 3 ट्रिलियन डॉलर लूटे हैं। ये कितनी बड़ी रकम है, इसे इसी से समझिए कि आज पूरी UK की GDP 2.71 ट्रिलियन डॉलर है।

एक आँकड़ा कहता है कि ब्रिटिश राज भारत में 3.5 करोड़ों मौतों के लिए जिम्मेदार है। जलियाँवाला बाग़ जैसे नरसंहार का तो जिक्र यहाँ आवश्यक है, जिसमें अंग्रेजों की गोली से लगभग डेढ़ हजार लोग मारे गए थे। इसके लिए भी तो कम से कम माफ़ी बनती है। मृतकों में महिलाओं-बच्चों और बुजुर्ग भी थे। हिटलर ने भी 60 लाख यहूदियों की हत्या की थी, उस हिसाब से आप समझ जाइए कि अंग्रेजों ने भारत में कितना कहर बरपाया था।

यूके के नए राजा King Prince Charles III प्रिंस रहते 10 बार भारत आ चुके हैं। उन्होंने केरल स्थित कुमारकोम झील रिसॉर्ट में अपना 65वाँ जन्मदिन पत्नी के साथ मनाया था, ऐसे में उन्होंने भारत की स्थिति और गरीबी देखी है। अब वो 73 वर्ष की उम्र में राजा बने हैं, तो उन्हें भारतवासियों से एक माफ़ी तो माँगनी ही चाहिए – 3.5 करोड़ मौतों के लिए, 23879625 करोड़ रुपए (3 ट्रिलियन डॉलर, 10 सितंबर 2022 की मुद्रा विनिमय दर से) की लूट के लिए। असल में पूरी लूट का आँकड़ा तो इससे भी अधिक है।

‘कोलंबिया यूनिवर्सिटी प्रेस’ द्वारा प्रकाशित अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक के रिसर्च के अनुसार, सन् 1765 से लेकर 1938 तक अंग्रेजों ने भारत से 45 ट्रिलियन डॉलर (₹358191000 करोड़, 10 सितंबर 2022 की मुद्रा विनिमय दर से) की लूट को अंजाम दिया। ये बहुत बड़ा आँकड़ा है, जिसकी पुष्टि केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर भी कर चुके हैं। ये ब्रिटेन की मौजूदा GDP से साढ़े 16 गुना ज्यादा है। असल में भारत से ही टैक्स लेकर अंग्रेज अपने लिए भारतीय सामान खरीदते थे। साथ ही उन्हें अपने इस्तेमाल में लाते थे, अन्य देशों में बेचते थे। ये एक तरह का बड़ा स्कैम था।

ब्रिटेन की ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ वैसे तो यहाँ मसलों का व्यापार करने आई थी, लेकिन 200 वर्षों में उन्होंने पूरे देश को लूट कर रख दिया। 1757 में प्लासी के युद्ध में बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला की रॉबर्ट क्लाइव के हाथों हार के साथ ही अंग्रेजों ने भारत में राज करने की शुरुआत कर दी। इसके बाद 1764 ईस्वी में बक्सर में बंगाल के मीर कासिम, अवध के सुजाउद्दौला और मुग़ल बादशाह शाह आलम II की संयुक्त सेना को कैप्टन मुनरो के नेतृत्व में अंग्रेजों ने हराया। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को कुचलने के बाद वो भारत में सबसे बड़ी सत्ता बन गए।