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परमाणु बम बनाने वाले ने भी मानी जिसकी ताकत, बॉलीवुड उस ब्रह्मास्त्र के बारे में नहीं बताएगा: यहाँ पढ़ें इस विध्वंसकारी अस्त्र का इतिहास

ब्रह्मास्त्र क्या है? मैं फिल्म की बात नहीं कर रहा हूँ, क्योंकि उसमें न तो ठीक से ब्रह्मास्त्र का इतिहास बताया गया है और न ही हमारे वेद-पुराणों या रामायण-महाभारत की कोई पुष्ट कथा उसमें है। ब्रह्मास्त्र क्या है, ये हमें हमारे सनातन साहित्य में ही मिलेगा। जब हमारे विद्वान ऋषि-मुनि सब लिख गए हैं, उन्हें पढ़े बिना भला कैसे बॉलीवुड वाले ‘ब्रह्मास्त्र’ बना सकते हैं? अगर वो बना रहे हैं, तो जनता को बेवकूफ बना रहे हैं। ब्रह्मास्त्र की असली कहानी हम आपको बताएँगे।

हम में से अधिकतर लोगों ने रामायण और महाभारत में इस विध्वंसकारी अस्त्र का जिक्र सुना है। इसका निर्माण स्वयं भगवान ब्रह्मा ने किया था। रामायण में तब, जब मेघनाद ने इसका प्रयोग रामभक्त हनुमान पर किया। महाभारत में तब, जब युद्ध ख़त्म होने के बाद कौरवों की तरफ से लड़ने वाले गुरु द्रोण के पुत्र अश्वस्थामा ने इसका प्रयोग किया। दोनों ही कथाएँ विस्तृत में वर्णित हैं। तुलसीदास रचित ‘रामचारितमानस’ में सुंदरकांड के इस 19वें दोहे को देखिए:

ब्रह्म अस्त्र तेहि साँधा कपि मन कीन्ह बिचार।
जौं न ब्रह्मसर मानउँ महिमा मिटइ अपार॥

अर्थात, जब रावण के पुत्र मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र का संधान किया, तब माँ सीता से मिलने लंका के अशोक वाटिका में राक्षसों का संहार कर रहे हनुमान जी ने सोचा कि अगर वो इसका सम्मान नहीं रखते हैं तो इस महान अस्त्र की महिमा मिट जाएगी। इसीलिए, उनके जैसा शक्तिशाली व्यक्ति भी ब्रह्मास्त्र लगने के बाद मूर्छित हो गया। इसके बाद नागपाश से बाँध कर वो हनुमान को रावण के दरबार में ले गया। ये है ब्रह्मास्त्र की महिमा, जिसके सम्मान का ख्याल रूद्र के रूप हनुमान भी करते हैं।

इसी तरह महाभारत में कथा आती है कि युद्ध में कौरवों की हार के बाद अश्वस्थामा ने बचने के लिए अर्जुन पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर दिया। श्रीकृष्ण की सलाह पर अर्जुन ने भी ब्रह्मास्त्र छोड़ा, क्योंकि इसकी काट कुछ और नहीं हो सकती थी। दोनों अस्त्रों के टकराने से प्रलय को रोकने के लिए देवर्षि नारद और वेद-व्यास प्रकट हुए और दोनों योद्धाओं को रोका। अश्वस्थामा को ब्रह्मास्त्र वापस लेना नहीं आता था, अतः उसने इसे उत्तरा (अभिमन्यु की पत्नी) के गर्भ की ओर छोड़ दिया और उसमें पल रहा अर्जुन का वंशज निष्प्राण हो गया।

ब्रह्मास्त्र के बारे में कहा जाता है कि ये संपूर्ण विश्व के विनाश की क्षमता रखता है। इतिहास में कुछ ही ऐसे योद्धा हुए हैं, जिनके पास ये अस्त्र था। इसका जो विवरण है, वो कुछ-कुछ परमाणु बम से भी मिलता है। क्योंकि, वर्णित है कि ब्रह्मास्त्र के प्रयोग के बाद उस क्षेत्र में वर्षों तक अकाल पड़ा रहता है और जीव-जंतुओं का विनाश हो जाता है। ये भी जानने वाली बात है कि परमाणु बम के जनक माने जाने वाले अमेरिकी वैज्ञानिक जे रॉबर्ट ओपनहाइमर का झुकाव हिन्दू धर्म की तरफ था।

जब अमेरिका ने जापान पर परमाणु बम का प्रयोग किया, तब उन्होंने क्षुब्ध होकर महाभारत की पंक्तियाँ इस्तेमाल करते हुए कहा था, “अब मैं मृत्यु बन गया हूँ, पूरे विश्व को तबाह करने वाला।” भगवद्गीता में ये पंक्ति खुद भगवान श्रीकृष्ण ने कही थी। उन्होंने कहा था कि वो लोकों का संहार करने वाले काल हैं और प्रतिपक्षी सेना के लोग अर्जुन के बिना भी मृत्यु को प्राप्त होंगे। असल में ये जो श्लोक (जो गीता के 11वें अध्याय का 32वाँ श्लोक है) है, वो इस प्रकार है:

श्री भगवानुवाच
कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो
लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः।
ऋतेऽपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे
येऽवस्थिताः प्रत्यनीकेषु योधाः।।

महर्षि विश्वामित्र जब महाराज कौशिक हुआ करते थे और ब्रह्मर्षि वशिष्ठ से उनकी दुश्मनी चलती थी, तब उन्होंने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर दिया था, लेकिन ब्रह्माण्डस्र अस्त्र के कारण इसका कोई असर नहीं हुआ। भगवान श्रीराम के पास भी ब्रह्मास्त्र था। राजस्थान में एक बड़े क्षेत्र में रेगिस्तान होने के पीछे भी रामायण में कथा है कि श्रीराम के ब्रह्मास्त्र से ध्रुम्तुल्य नाम का एक जगह ध्वस्त हो गया था, जिसे राजस्थान में चिह्नित किया गया।

ब्रह्मास्त्र का शाब्दिक अर्थ हुआ भगवान ब्रह्मा का बाण। पुराणों में हमें इसी तरह के ब्रह्मशीर अस्त्र का भी जिक्र मिलता है। अर्जुन को उनके गुरु द्रोण ने ही ब्रह्मास्त्र दिया था। ब्रह्मास्त्र से गर्भ की मृत्यु वैसी ही है, जैसे परमाणु बम के प्रभाव से होता है। जापान में कई वर्षों तक प्रभावित इलाकों में दिव्यांग बच्चों का जन्म होता रहा। आपको पढ़ने को मिला होगा कि भारत में कहीं-कहीं रेडिएशन काफी उच्च है, इसका कारण प्राचीन काल में चले किसी विध्वंसकारी हथियार को भी बताया जाता है।

तमिल कम्ब रामायण में वर्णन है कि मेघनाद जब मायावी शक्तियों का प्रयोग कर के बार-बार अदृश्य हो रहा था, तब लक्ष्मण ने ब्रह्मास्त्र के प्रहार की सोची, लेकिन भगवान श्रीराम ने प्रलय होने की आशंका के कारण उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। साइबेरिया में जून 1908 में 12 मेगा टन का एक भयंकर ब्लास्ट हुआ था, जो ‘Tunguska Event’ के नाम से जाना जाता है। इस तबाही के पीछे Asteroid को कारण बताया गया, लेकिन क्या प्राचीन काल में ऐसी क्षमता वाले हथियार हुए करते थे? वर्णनों से तो ऐसा ही लगता है।

ब्रह्मास्त्र का कोई निश्चित आकार नहीं होता था। उसे चलाने के लिए मन की शक्ति चाहिए थी, क्योंकि वो मंत्रों से संचालित होता था। प्राचीन साहित्य में वर्णन है कि इसे चलाने पर आकाश से उल्काएँ गिरने लगती हैं और जल में उफान आ जाता है। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि महाभारत में परमाणु बम जैसी किसी शक्ति का इस्तेमाल हुआ तो था, कहीं वो ब्रह्मास्त्र ही तो नहीं? महाभारत का युद्ध ही शायद इसीलिए हुआ था, ताकि दिव्य अस्त्रों को रखने वाले लोग और वो सभी अस्त्र, एक साथ ख़त्म हो जाएँ।

ब्रह्मास्त्र पाँचों तत्वों, अर्थात भूमि, जल, अग्नि, आकाश और वायु – इन सभी में उथल-पुथल मचाने की क्षमता रखता है। भगवान ब्रह्मा ने असुरों से संसार की रक्षा के लिए इसका निर्माण किया था, ताकि धर्म का राज बना रहे। ब्रह्मास्त्र से ही ब्रह्मशीर अस्त्र बना था, जो आज के हाइड्रोजन बम के बराबर हो सकता है। कहीं-कहीं तो लिखा है कि ब्रह्मास्त्र घास की पत्ती जितना पतला होता था, लेकिन अति भयंकर। फिल्म में शायद ही ये जानकारियाँ आपको मिले, खासकर बॉलीवुड की।

छात्राओं के कमर पर फेरता है हाथ, बच्चियों से अंडरगार्मेंट्स के बारे में पूछता है: सरकारी शिक्षक इश्तियाक अहमद पर आरोप, कई लड़कियों ने छोड़ा स्कूल जाना

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में सरकारी स्कूल के एक टीचर पर छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें करने का आरोप लगा है। आरोपित टीचर का नाम इश्तियाक अहमद है। शिकायत में बताया गया है कि इश्तियाक की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के कारण कई छात्राओं ने स्कूल जाना ही छोड़ दिया। पुलिस ने केस दर्ज कर के इश्तियाक की तलाश शुरू कर दी है। मामले की शिकायत 7 सितम्बर, 2022 (बुधवार) को की गई है।

घटना ठाकुरद्वारा थानाक्षेत्र के जूनियर हाईस्कूल काला झंडा की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक बच्ची के परिजन ने बताया कि जब बच्ची पढ़ने जाती थी तब वो (इश्तियाक) उनकी कमर में हाथ फेरता था और अकेले में मिलने के लिए बुलाता था। पीड़ित परिजन ने आगे बताया कि उनके बच्चे डरे हुए हैं और बड़े अधिकारियों को फोन करने पर हमारी सुनवाई हुई है। इसी के साथ बच्ची के परिजन ने कहा कि अब वो दुबारा उस स्कूल में बच्चों को पढ़ने के लिए भेजेंगे ही नहीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित छात्राओं के घर वालों का कहना है कि इश्तियाक गुरु कहने लायक नहीं है और उसे फ़ौरन जेल भेजा जाना चाहिए। छात्राओं के परिजनों के मुताबिक, वह 10 से 12 साल की बच्चियों से उनके अंडरगारमेंट्स के बारे में बातें करता है और पूछता है कि उन्होंने इसे कहाँ से खरीदा था। एक अन्य छात्रा की दादी ने कहा कि पढ़ाई के दौरान इश्तियाक अपनी कुर्सी छोड़ कर छात्राओं की बेंच पर बैठ जाता है और उनके साथ गलत हरकतें करता है। बताया जा रहा है कि वो ऐसा स्कूल की कई लड़कियों के साथ करता है।

कुछ अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्कूल जाने से मना करने वाली छात्राओं की संख्या 6 से अधिक है। एक अन्य छात्रा के परिजन ने बताया कि आरोपित टीचर बोर्ड पर उल्टा-सीधा लिखवाता था और गंदी-गंदी बातें किया करता था। पीड़ित परिजन ने की गई कार्रवाई को अपनी मजबूरी और अंतिम विकल्प बताया। पुलिस ने परिजनों की शिकायत का तत्काल संज्ञान लेते हुए आरोपित टीचर इश्तियाक के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

मुरादाबाद के एडिशनल SP संदीप मीणा ने बताया कि परिजनों की शिकायत के बाद आरोपित शिक्षक फरार हो गया था। इसी के साथ उन्होंने बताया कि पुलिस फरार इश्तियाक की लगातार तलाश में छापेमारी कर रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ के निधन पर भारत में भी 1 दिन का शोक, आधा झुका रहेगा राष्ट्रध्वज

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय (Queen Elizabeth II) का गुरुवार (8 सितंबर 2022) को स्कॉटलैंड के बाल्मोरल कैसल में निधन हो गया। उनकी उम्र 96 साल थी। महारानी एलिजाबेथ की मौत पर भारत ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है।

महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का जन्म 21 अप्रैल 1926 को हुआ था। अपने पिता जॉर्ज षष्टम की मौत के बाद वर्ष 1952 में वह ब्रिटेन की महारानी बनी थीं। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 25 साल थी। अब महारानी की मौत के बाद उनके बेटे प्रिंस चार्ल्स को ब्रिटेन का राजा बनाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में भी महारानी के मौत पर शोक व्यक्त करते हुए देश भर में एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। गृह मंत्रालय की ओर से जानकारी दी गई है कि भारत में 11 सितंबर को राष्ट्रीय शोक रहेगा। यानि की आने वाले रविवार के दिन महारानी एलिजाबेथ के सम्मान में भारत का राष्ट्रध्वज आधा झुका दिया जाएगा।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी मौत पर दुख जताया है। उन्होंने ट्वीट किया, “महामहिम महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को हमारे समय की एक दिग्गज के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने अपने राष्ट्र और लोगों को प्रेरक नेतृत्व प्रदान किया। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में गरिमा और शालीनता का परिचय दिया। उनके निधन से आहत हूँ। दुखद की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएँ उनके परिवार और ब्रिटेन के लोगों के साथ हैं।”

पीएम मोदी ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “2015 और 2018 में यूके की अपनी यात्राओं के दौरान महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के साथ मेरी यादगार मुलाकातें हुईं। मैं उनकी गर्मजोशी और दयालुता को कभी नहीं भूलूँगा। एक बैठक के दौरान उन्होंने मुझे वह रूमाल दिखाया जो महात्मा गाँधी ने उनकी शादी में उपहार में दिया था। मैं उस भाव को हमेशा संजो कर रखूँगा।”

गौरतलब है कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय न सिर्फ ब्रिटेन की महारानी थीं, बल्कि इसके अलावा वे 14 अन्य देशों की भी महारानी थीं। इस सूची में कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जमैका, बहामास, ग्रेनेडा, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन आइलैंड्स, तुवालू, सैंट लूसिया, सेंट विंसेट एंड ग्रेनेजियन्स, एंटीगुआ और बारबुडा, बेलिज, सेंट किट्स एंड नेविस शामिल हैं।

एलिजाबेथ द्वितीय इन देशों की सिर्फ सांकेतिक महारानी थीं। यहाँ के शासन या सरकार में उनका कोई हस्तक्षेप नहीं था। इनमें कुछ देश बाद में अलग होकर खुद को गणतंत्र घोषित कर दिया। जब एलिजाबेथ महारानी बनी थीं, तब वह 54 देशों की महारानी थीं। इन देशों में पाकिस्तान भी शामिल था।

‘हमारे बच्चों को इनसे दूर रखो’: बेटे जेह के साथ करीना कपूर ने शेयर की गणेश पूजा की तस्वीर तो भड़के कट्टरपंथी, कहा – इस्लाम में सिर्फ अल्लाह की इबादत

बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर खान (kKareena Kapoor Khan) ने शुक्रवार (10 सितंबर, 2022) को अपने छोटे बेटे जेह के साथ गणपति बप्पा की पूजा करते हुए कुछ तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर कीं। इस पोस्ट को लेकर उन्हें मुस्लिम कट्टरपंथियों ट्रॉल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर ट्रॉल्स उन्हें अल्लाह के अलावा किसी और की इबादत ना करने की सलाह दे रहे हैं।

फोटो साभार: करीना का इन्स्टाग्राम

जारू मलिक नाम के यूजर ने एक्ट्रेस की पोस्ट पर लिखा, “अब भी आप समझ नहीं रही हैं कि अल्लाह एक है और उसके सिवा कोई नहीं। बुरा मत मानिएगा। मैं आपको एक अभिनेत्री के रूप में प्यार करता हूँ, लेकिन तैमूर और आप दोनों को इस्लाम सीखना चाहिए और यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि कोई भी इसके लिए मजबूर नहीं कर रहा है।”

एक और यूजर ने लिखा, “मेरा मानना है कि मुहम्मद ही खुदा के पैगंबर हैं।”

सबा सिकंदर ने लिखा, “इसका बच्चा मुस्लिम होना चाहिए… सैफ अली खान के अनुसार।”

रोहा बैग नाम की यूजर ने लिखा, “हमारे मुस्लिम बच्चों को तो कम से कम इन सबसे दूर रखो। आपकी जो मर्जी हो वो करो।”

गौरतलब है कि इससे पिछले साल भी 10 सितंबर को करीना कपूर खान ने गणेश चतुर्थी के मौके पर अपने शौहर सैफ अली खान व बेटे तैमूर अली खान के साथ पूजा करते हुए कुछ तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर की थीं। इस पोस्ट को लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर खूब ट्रॉल किया गया था। ट्रॉल्स ने उन्हें काफिर तक कह दिया था। वहीं, कुछ यूजर्स ने उनकी पोस्ट पर ‘लानत है ऐसे मुस्लिमों पर’ लिखा था।

मोहम्मद अफताब आलम नाम के यूजर ने लिखा था, ”लानत है, उस बच्चे का कोई कसूर नहीं है, उसे तो जैसी तालीम देंगे वो वैसा ही करेगा। लेकिन सैफ पर लानत है अल्लाह इन्हें हिदायत अता फरमाए आमीन सुम्मा आमीन।” इस पर रिप्लाई देते हुए एक यूजर ने लिखा था, “उसको अच्छा तालीम देकर तालिबान बना देना चाहिए?”

बंगलोर यूनिवर्सिटी में गणेश मंदिर से कुछ छात्रों-प्रोफेसरों को दिक्कत, नींव को पहुँचाया नुकसान: कहा- संस्थान का हो रहा भगवाकरण

कर्नाटक के बंगलोर यूनिवर्सिटी के परिसर में गणेश मंदिर बनाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। छात्रों का एक समूह मंदिर निर्माण का लगातार विरोध कर रहा है। इनकी माँग है कि मंदिर की जगह कैंपस में पुस्तकालय बनाई जाए।

गुरुवार को छात्रों ने मंदिर बनाने के लिए खोदी गई नींव को भी नुकसान पहुँचाया। प्रदर्शनकारियों में यूनिवर्सिटी के कुछ फैकल्टी भी शामिल बताए जा रहे हैं। छात्रों का यह विरोध बुधवार और गुरुवार (7-8 सितंबर 2022) को और तेज हो गया, जब इनके खिलाफ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामला दर्ज करा दिया।

छात्रों का कहना है कि रजिस्ट्रार और कुलपति के विरोध के बावजूद ‘बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी)’ विश्वविद्यालय परिसर में मंदिर बनाने पर अड़ी है। छात्रों ने विश्वविद्यालय का भगवाकरण करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसकी इजाजत यूजीसी और सुप्रीम कोर्ट भी नहीं देता।

बंगलोर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ जयकारा शेट्टी ने कहा है कि मंदिर निर्माण का निर्णय उनके कार्यकाल के दौरान नहीं लिया गया था। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पहले लिया गया था और निर्माण कार्य अब शुरू हो हुआ है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के काम को रोकने का उन्होंने आग्रह किया था।

मामला सड़क चौड़ीकरण के बाद मंदिर को यूनिवर्सिटी परिसर में शिफ्ट होने से जुड़ा है। बेंगलुुरु के मैसूर रोड पर स्थित मल्लथहली में विश्वविद्यालय के जनभारती परिसर के पास एक गणेश मंदिर था। जब इस सड़क का चौड़ीकरण किया गया तो इस मंदिर को दूसरी जगह शिफ्ट करने की बात कहकर उसे तोड़ दिया गया था।

अब उस मंदिर को विश्वविद्यालय परिसर के अंदर बनाया जा रहा है। इसी बात को लेकर कुछ संगठन और छात्र समूह उसका विरोध कर रहे हैं। बता दें बंगलोर यूनिवर्सिटी राज्य सरकार द्वारा संचालित विश्वविद्यालय है और इसकी स्थापना सन 1964 में की गई थी। साल 2001 में इसे NAAC की 5-स्टार रेटिंग दी थी।

बंगलोर विश्वविद्यालय शिक्षक परिषद ने विश्वविद्यालय के उच्च अधिकारियों को लिखा था कि परिसर के अंदर बाहरी लोगों द्वारा गणेश मंदिर चलाया जा रहा है और विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट में मंदिर द्वारा एकत्र किए गए धन का कोई रिकॉर्ड नहीं है।

यूनिवर्सिटी के एक फैकल्टी तिलक डीएम का कहना है, “जो मंदिर ध्वस्त हुआ था वह अवैध था और बंगलोर यूनिवर्सिटी से उसका कोई संबंध नहीं था। उसे अनधिकृत लोगों द्वारा चलाया जा रहा था। यूनिवर्सिटी मंदिर के पुजारियों के वेतन या हुंडी के पैसे के लिए जिम्मेदार नहीं थे।”

छात्रों का कहना है कि स्थानीय विधायक के लोग इस मंदिर का निर्माण कराने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि अपने बॉस को खुश किया जा सके। उन्होंने कहा कि मंदिर की जगह अगर पुस्तकालय बनेगा तो इससे छात्रों को लाभ होगा।

देवी-देवताओं की आपत्तिजनक तस्वीरें शेयर करने वाले नज़र मोहम्मद का आतंकी कनेक्शन! AK-47 लिए Pak युवक के साथ तस्वीर, 6 साल सऊदी में रहा

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से धार्मिक भावनाएँ आहत करने के आरोप में गिरफ्तार नजर मोहम्मद उर्फ बादशाह का आतंकी कनेक्शन सामने आ सकता है। पुलिस को आरोपित के फेसबुक अकाउंट पर पाकिस्तानी युवक के साथ एक फोटो मिली थी, जिसमें उक्त युवक AK-47 राइफल लिए हुए दिखाई दे रहा है।

दरअसल, मेरठ के भावनगर क्षेत्र से पुलिस ने नजर मोहम्मद को फेसबुक पोस्ट द्वारा हिन्दुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद, जब आरोपित की अन्य फेसबुक पोस्ट देखी गई तो उसमें पाकिस्तानी युवक इब्राहिम के साथ उसकी कुछ तस्वीरें सामने आईं। इनमें से एक फोटो में इब्राहिम AK-47 राइफल के साथ नजर आ रहा है।

इस फोटो के सामने आने के बाद से पुलिस समेत तमाम जाँच एजेंसियाँ नजर मोहम्मद का आतंकी कनेक्शन तलाशने में जुटी हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है, पुलिस ने दावा किया है कि इब्राहिम का किसी आतंकी संगठन से संबंध हो सकता है।

इस मामले में एटीएस और एनआईए, एसटीएफ समेत कई अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने गुरुवार (8 सितंबर, 2022) की रात को भावनगर पुलिस स्टेशन में आरोपित नजर मोहम्मद उर्फ बादशाह से पूछताछ की है। सुरक्षा एजेंसियाँ नजर मोहम्मद और इब्राहिम का पूरा कनेक्शन जानना चाहती हैं।

बताया जा रहा है, इस पूछताछ में नजर मोहम्मद ने पुलिस को बताया है कि वह 6 साल सऊदी अरब में रहा है। इसी दौरान उसकी मुलाकात पाकिस्तान के पेशावर में रहने वाले इब्राहिम से हुई थी। इब्राहिम किसी आतंकी संगठन से जुड़ा है या नहीं, इस बारे में उसको कोई जानकारी नहीं है। 

इस पूरे मामले में, एसएसपी रोहित सिंह सजवाण का कहना है कि नजर मोहम्मद के फेसबुक पर देवी-देवताओं की आपत्तिजनक फोटो मिली थी। उसका पाकिस्तानी कनेक्शन भी सामने आया है, जिस पर जाँच एजेंसियाँ काम कर रही हैं। उसके परिवार की गतिविधियों की भी पड़ताल की जा रही है।

‘सबको अभिव्यक्ति की आज़ादी’: सुप्रीम कोर्ट ने UAPA के तहत गिरफ्तार ‘पत्रकार’ सिद्दीकी कप्पन को दी जमानत, हाथरस दंगों की साजिश का है आरोप

यूपी के हाथरस में दलित लड़की के साथ हुई रेप और हत्या के बाद दंगों की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार केरल के कथित पत्रकार सिद्दीकी कप्पन को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (9 सितंबर 2022) जमानत दे दी। सिद्दीकी को उत्तर प्रदेश पुलिस ने UAPA के तहत 6 अक्टूबर 2020 को गिरफ्तार किया था।

कोर्ट ने जमानत देते हुए कप्पन का पासपोर्ट जब्त कर लिया है। इसके साथ ही उसे अगले 6 सप्ताह तक दिल्ली में ही रहने और हर सप्ताह जंगपुरा थाने में हाजिर होने का आदेश दिया है। इसके बाद कोर्ट ने उसे केरल वापस जाने की अनुमति दी है और कहा है कि वहाँ स्थानीय थाने में उसे हर सप्ताह अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली जस्टिस एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है और अभियोजन द्वारा तैयार की गई सामग्री जिसे टूलकिट के रूप में कप्पन को जिम्मेदार ठहराया गया है, वह विदेशी भाषा में प्रतीत होती है।

पीठ ने कहा, “हर व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। वह यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि पीड़ित को न्याय की जरूरत है और एक लोग आवाज उठाएँ। क्या यह कानून की नजर में अपराध है।”

जिरह के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा कि हाथरस की घटना के नाम पर प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा था और कप्पन दंगा भड़काने के लिए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की साजिश का हिस्सा था।

उन्होंने तर्क दिया, “कप्पन सितंबर 2020 में PFI की बैठक में शामिल था, जिसमें कहा गया था कि फंडिंग बंद हो गई है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि वे संवेदनशील क्षेत्रों में जाएँगे और दंगे भड़काएँगे। यहाँ तक ​​कि सह आरोपी ने भी ये बयान दिया था। PFI के अधिकारियों में से एक और उसने साजिश का खुलासा किया।”

जेठमलानी ने तर्क दिया कि ये कुछ हाथरस की पीड़िता को न्याय दिलाने के नाम पर किया जा रहा था। प्रदर्शन का एजेंडा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा देने के बाध्य करना था। इसके लिए ईमेल तक भेजे गए थे।

इस पर न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति भट ने कहा, “2011 में भी निर्भया के लिए इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। कभी-कभी बदलाव लाने के लिए विरोध की आवश्यकता होती है। आप जानते हैं कि उसके बाद कानूनों में बदलाव हुआ था।”

बता दें हाथरस घटना के दौरान वहाँ जाते समय सिद्दीकी को गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा PFI से जुड़े अन्य 8 लोगों को भी SIT ने गिरफ्तार किया था। उस समय उसके साथ PFI का भी एक सदस्य था। गिरफ्तारी के बाद यूपी पुलिस की SIT ने सिद्दीकी कप्पन के खिलाफ 5000 पेज की चार्जशीट दाखिल की थी।

हलफनामे में कप्पन के उन 36 आर्टिकल्स को हाईलाइट किया है जो उसके लैपटॉप से बरामद हुए थे। इन लेखों में निजामुद्दीन मरकज, एंटी सीएए प्रोटेस्ट, दिल्ली दंगे, राम मंदिर, शरजील इमाम जैसे मुद्दों पर बात है।

हलफनामे में कहा गया था कि कप्पन जिम्मेदार पत्रकार की तरह नहीं लिखता था। उसका काम सिर्फ मुस्लिमों को भड़काने का था। उसकी संवेदनाएँ माओवादी और कम्युनिस्टों के साथ थीं। एएमयू में हुए सीएए प्रोटेस्ट पर लिखे लेख में उसने ऐसे दिखाया था जैसे पीटे गए मुस्लिम पीड़ित हों और पुलिस ने उन्हें पाकिस्तान जाने को कहा हो।

‘ये आपको आसान लग सकता है, लेकिन परिणाम दूरगामी’: सुप्रीम कोर्ट ने नहीं सुनी नूपुर शर्मा की गिरफ़्तारी की माँग वाली याचिका, कहा – वापस लीजिए

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार (9 सितंबर, 2022) को भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) की गिरफ्तारी की माँग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश यू यू ललित, जस्टिस रवींद्र भट और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने धारा 32 के तहत दायर की गई याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को इसे वापस लेने का सुझाव दिया।

मुख्य न्यायाधीश UU ललित ने कहा, “यह आपको आसान लग सकता है, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम हैं। अदालत को निर्देश जारी करते समय चौकस रहना चाहिए। हम आपको याचिका वापस लेने का सुझाव देते हैं।” इसके बाद इस याचिका को खारिज कर दिया गया। एडवोकेट अबू सोहेल ने अधिवक्ता चाँद कुरैशी के माध्यम से दायर याचिका में घटना की ‘स्वतंत्र, विश्वसनीय और निष्पक्ष जाँच’ के लिए निर्देश देने की माँग की थी।

देश भर में मुस्लिमों ने की थी हिंसा

बता दें कि नूपुर शर्मा पर पैगंबर मुहम्मद (Prophet Mohammad) के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने और मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया गया था। इसे लेकर देश भर में कट्टर मुस्लिमों ने हिंसा की थी। उदयपुर और अमरावती में नूपुर शर्मा का समर्थन करने वाले का गला रेत दिया गया। वहीं, नूपुर शर्मा के खिलाफ कई मामले दर्ज कराए गए थे और उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। जुलाई 2022 में शर्मा ने अपने खिलाफ सभी मामलों को क्लब करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दी थी। इसकी सुनवाई न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति पारदीवाला की खंडपीठ ने की थी।

यह महिला अकेले जिम्मेदार: न्यायमूर्ति सूर्यकांत

इस याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा था, “जिस तरह से उन्होंने पूरे देश में भावनाओं को भड़काया है, देश में जो हो रहा है उसके लिए यह महिला अकेले जिम्मेदार है।” अदालत ने यह भी कहा था कि उन्हें पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है और उन्होंने आम नागरिकों के लिए उपलब्ध न्यायिक अधिकार खो दिया है।

महाभियोग के लिए ऑनलाइन अभियान

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस टिप्पणी को अपने लिखित आदेश में शामिल नहीं किया था, फिर भी देश भर में इसका विरोध शुरू हो गया था। न्यायाधीशों की इस टिप्पणी के खिलाफ 15 सेवानिवृत्त जजों, 77 रिटायर्ड नौकरशाहों और 25 पूर्व सैन्य अधिकारियों ने खुला पत्र जारी कर इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण और गलत उदाहरण पेश करने वाला’ बताया था। वहीं, इन न्यायाधीशों के खिलाफ महाभियोग के लिए ऑनलाइन अभियान भी शुरू किया गया था। बाद में इसी पीठ ने उन्हें गिरफ़्तारी से राहत प्रदान करते हुए सभी FIR को दिल्ली ट्रांसफर करने का आदेश दिया।

जिस क्लब से जुड़ी है सोनाली फोगाट की मौत की गुत्थी, उसे ध्वस्त किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक: उधर सुनवाई, इधर चल गया बुलडोजर

सोनाली फोगाट की मौत के बाद चर्चा में आए गोवा के कर्लीज रेस्टॉरेंट पर शुक्रवार (9 सितंबर, 2022) को सरकारी बुलडोजर चल गया। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में शुक्रवार (9 सितंबर, 2022) को रेस्टोरेंट को ना गिराने के आदेश जारी किए थे, लेकिन जब तक सुनवाई हुई तब तक रेस्टोरेंट को गिराने का काम शुरू हो गया था। वहीं इस आदेश के बाद प्रशासन ने काम रोक दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तटीय नियमन क्षेत्र (सीआरजेड) के नियमों के उल्लंघन के कारण कर्लीज रेस्टोरेंट को गिराने की प्रक्रिया शुक्रवार की सुबह शुरू हुई थी। यह रेस्टोरेंट उत्तरी गोवा के मशहूर अंजुना बीच पर स्थित है। भाजपा नेता सोनाली फोगाट की मौत की गुत्थी भी इसी रेस्टोरेंट से जुड़ी हुई है। उल्लेखनीय है कि सोनाली फोगाट ने मौत से कुछ घंटों पहले इसी जगह पार्टी की थीं, जहाँ उनके साथ दोनों आरोपित भी थे।

इस रेस्टॉरेंट गिराया जाना था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की ओर से CJI यूयू ललित की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने ध्वस्तीकरण पर रोक के आदेश जारी कर दिए। वहीं इस बेंच में CJI के साथ ही जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस पीएस नरसिम्हा भी शामिल थे। उच्चतम न्यायालय ने गोवा सरकार और गोवा कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी को एक नोटिस जारी इस पर रोक लगाने के आदेश दिए। वहीं कोर्ट ने इस मामले में अगले शुक्रवार को जवाब माँगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि उस रेस्टॉरेंट में अब कोई कमर्शियल गतिविधि नहीं होनी चाहिए। इसी शर्त पर वहाँ बुलडोजर चलने पर रोक लगाई गई है। कोर्ट के मुताबिक, यदि बताई गई सर्वेक्षण संख्या के अलावा अन्य भूमि में अनाधिकृत निर्माण किया जाता है, तो इसे निश्चित रूप से ढहाया जाएगा।

गौरतलब है कि भाजपा की महिला नेता सोनाली फोगाट और उनके PA सुधीर सांगवान का सोनाली की मौत के बाद एक वीडियो सामने आया था। ये वीडियो सोनाली फोगाट की मौत से कुछ देर पहले का बताया गया। वीडियो में दिख रहा था कि सुधीर उन्हें लेकर वॉशरूम में जा रहा है। इस दौरान सोनाली फोगाट ने टॉप और हाफ पैंट पहन रखा है। इन दोनों का वायरल हुआ ये तीसरा वीडियो था। ये वीडियो इसी क्लब का थे।

कर्मचारियों को देने के लिए वेतन नहीं, ड्यूटी के घंटे 8 से बढ़ा कर कर दिया 12: वामपंथियों का ‘केरल मॉडल’, मजदूरों के नाम पर ढपली पीटता है लेफ्ट

वामपंथी गला फाड़कर चिल्लाते हुए ‘केरल मॉडल’ का दावा करते हैं। लेकिन, आज पिनराई विजयन के नेतृत्व में चल रही केरल की वामपंथी सरकार के पास राज्य परिवहन के कर्मचारियों को वेतन देने के लिए फंड नहीं है। जिसके बाद, केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) के कर्मचारियों की ड्यूटी 8 से बढ़ाकर 12 घण्टे करने का फैसला किया गया है।

गौरतलब है कि वामपंथी खुद को मजदूरों का हितैषी बताते फिरते हैं। लेकिन, सत्ता में आने के बाद अब मजदूरों की बात करने वाले वामपंथी राज्य परिवहन के कर्मचारियों के वर्किंग ऑवर में 4 घण्टे की बढ़ोतरी कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केरल राज्य परिवहन निगम (KSRTC) के करीब 25000 कर्मचारी वेतन न मिलने के कारण से पिछले कुछ महीनों से आंदोलन कर रहे थे। इस आंदोलन के चलते वेतन संकट को हल करने के लिए मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने केएसआरटीसी मैनेजमेंट और ट्रेड यूनियन के नेताओं की मंगलवार (5 सितंबर, 2022) को बैठक बुलाई थी। इस बैठक के बाद, सरकार ने परिवहन प्राधिकरण के लिए निर्धारित 100 करोड़ के बजट को रिलीज करने का आदेश दिया था। इसके अलावा, यह भी कहा गया है कि शेष फंड केएसआरटीसी द्वारा मैनेज किया जाएगा।

इस आदेश में सरकार द्वारा वेतन देने के लिए वकायदा शर्त रखी गई है। आदेश में कहा गया है कि सरकार यह फंड इस शर्त पर रिलीज कर रही है कि राज्य परिवहन के कर्मचारियों को 12 घण्टे की सिंगल ड्यूटी करनी होगी।

बताया जा रहा है केरल की वामपंथी सरकार कर्मचारियों की ड्यूटी 8 घण्टे से बढ़ाकर 12 घण्टे करके 1300 अतिरिक्त बसों को चलवाना चाहती है। ऐसा कहा जा रहा है कि ये बसें कर्मचारियों के अभाव में डिपो में खड़ी-खड़ी पड़ी हुई हैं। लेकिन, अब 12 घंटे की ड्यूटी के इन बसों का संचालन किया जा सकेगा। दरअसल, वामपंथी सरकार का मानना है कि कर्मचारियों की ड्यूटी बढ़ाकर करके वह राज्य परिवहन निगम के राजस्व में बढ़ोतरी कर सकती है।

बता दें कि केन्द्र सरकार ने जब नए श्रम कानून पेश किए थे, तब वामपंथियों ने इसका कड़ा विरोध किया था। इस विरोध में कम्युनिस्ट पार्टी भी शामिल थी। कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से कहा गया था कि यह कानून श्रमिकों के शोषण को बढ़ाएँगे। बता दें, श्रम कानून में किसी भी व्यक्ति से 1 दी में 8 घण्टे से अधिक समय की ड्यूटी कराने का प्रावधान नहीं है।