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मुस्लिम लड़की से किया प्यार, हिंदू लड़के को बदले में मिली मौत: बरेली में मार कर लटकाया, मुँह में ठूँसा था कपड़ा

उत्तर प्रदेश के बरेली में एक मुस्लिम लड़की से प्रेम प्रसंग होने पर सुनील कुमार नाम के एक हिंदू युवक की हत्या कर उसके शव को पेड़ से लटका दिया गया है। शव आम के पेड़ से लटका मिला। शव के मुँह में कपड़ा ठूँसा हुआ था और हाथ-पैर को रस्सी से बाँध दिया गया था।

शीशगढ़ थाना क्षेत्र के जियानगला गाँव के रहने वाले 22 वर्षीय मृतक के पिता आशा राम ने मामले में गाँव के ही 6 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट लिखवाई है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कुछ आरोपितों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ कर रही है।

अपनी शिकायत में मृतक के पिता ने कहा कि उनके बेटे सुनील कुमार का गाँव के ही निसार अहमद की बेटी से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इसको लेकर झगड़ा भी हो गया था। बाद में ग्राम प्रधान ने फैसला करा दिया था, लेकिन निसार अहमद अपने मन में रंजिश पाले हुए था।

उन्होंने अपनी शिकायत में आगे कहा कि शुक्रवार (2 सितंबर 2022) की रात 1 बजे बेटे के मोबाइल नंबर से ह्वाट्सग्रुप में एक ऑडियो और फोटो डाला गया। पिता का कहना है कि इस ऑडियो फाइल में उनका लड़का कह रहा था, “मुझे छोड़ दो। ग्राम प्रधान ने फैसला करा दिया है तो मुझे क्यों मार रहे हो।”

आशा राम ने कहा कि रात 11 बजे उन्होंने अपने बेेटे को कमरे में सोते हुए देखा था, लेकिन वह पड़ोसी के बाद में कैसे पहुँच गया इसकी उन्हें जानकारी नहीं। उन्होंने कहा कि फजल, यासीन, गुड्‌डू उर्फ अबरार, इसरार अहमद, अबरार अहमद, सरफराज अहमद निवासी कुतुकपुर ने उनके बेटे को मारा-पीटा और फिर उसका हाथ-पैर बाँधकर और मुँह में कपड़ा ठूंसकर फाँसी पर लटका दिया और मार दिया।

पिता ने कहा कि अगले सुबह 6 बजे जब रामधुन अपने खेत में सिंचाई करने गए तो बाग में एक व्यक्ति का शव लटका देख, उन्होंने ग्राम प्रधान को सूचना दी। वहाँ जाकर देखा गया तो वह सुनील का शव लटका था।

‘ये निचली जाति के, इनका छुआ खाना मत खाओ… फेंक दो’ – राजस्थान के स्कूल की घटना, मिड-डे मील पर बवाल, रसोइया गिरफ्तार

राजस्थान के उदयपुर में एक सरकारी स्कूल में दलित छात्राओं द्वारा मिड-डे मील परोसे जाने पर खाना फेंकने का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी होने के बाद, दलित छात्राओं के साथ भेदभाव किए जाने के आरोप में रसोइए को गिरफ्तार किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला उदयपुर के गोगुंडा तहसील अंतर्गत भरोड़ी गाँव के शासकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय का है। यहाँ दो छात्राओं- डिंपल मेघवाल और नीमा मेघवाल ने शुक्रवार (2 सितंबर) को स्कूल के रसोइए लालाराम गुर्जर पर भेदभाव करते हुए मध्याह्न भोजन फेंकने का आरोप लगाया।

बताया जा रहा है कि दलित छात्राओं द्वारा मिड डे मील परोसे जाने पर रसोइए लालाराम गुर्जर ने आपत्ति जताते हुए अन्य छात्रों से कहा कि इसे फेंक दो क्योंकि इसे दलित ने परोसा है। इसके बाद, छात्रों ने खाने को फेंक दिया। छात्राओं ने इस घटना के बारे में घर जाकर अपने परिजनों को बताया। इसके बाद छात्राओं सहित उनके परिजन स्कूल पहुँचे और कार्रवाई की माँग की। इसके बाद थाने जाकर शिकायत भी दर्ज करवाई।

स्थानीय मीडिया का रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में भेदभाव का शिकार हुई छात्रा डिंपल मेघवाल और नीमा मेघवाल का कहना है, “शुक्रवार को स्कूल के बाद लंच करने वाले बच्चों को बीन्स परोसा गया। लालाराम गुर्जर (रसोइया) दाल परोसे जाने पर क्रोधित हो गया और हमारे साथ दुर्व्यवहार किया। उसने दूसरी जाति के छात्रों से कहा कि हम लोग निचली जाति के हैं, इसलिए हमारे द्वारा छुआ हुआ खाना मत खाओ, फेंक दो। लालाराम के कहने पर सवर्ण बच्चों ने खाना फेंक दिया। लाल राम ने भीगे हुए आटे और दाल को भी फेंक दिया।”

इस मामले ने स्थानीय पुलिस ने कहा है, “अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत गोगुंदा थाने में रसोइए के खिलाफ मामला दर्ज कर जाँच की गई। शुरुआती जाँच में मामला सही पाए जाने पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपित की गिरफ्तारी की गई है।”

राजस्थान पुलिस का यह भी कहना है, “रसोइया अपनी पसंद के उच्‍च जाति के छात्रों को खाना परोसने को कहता था। लेकिन, खाना ढंग से नहीं परोसे जाने की श‍िकायत के बाद एक शिक्षक ने शुक्रवार को दलित लड़कियों को खाना परोसने को कहा था।”

भरोड़ी गाँव के शासकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रिंसिपल ने बताया कि उनके स्कूल में दोस्ताना माहौल है। जाति संबंधी ऊँच-नीच नहीं है और सभी बच्चे एक जगह से पानी पीते हैं, एक ही साथ खाते हैं। प्रिंसिपल ने यह भी स्पष्ट किया कि रसोइए की गलत हरकत की वजह से माहौल खराब नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए उन्होंने बातचीत करने और भ्रम दूर करने के लिए संबंधित बच्चों के अभिभावकों को स्कूल भी बुलाया है।

श्रीलंका में चीन को छात्रों की चुनौती: जाफना विश्वविद्यालय छात्र संघ ने कहा – ‘नरसंहार झेल चुके तमिलों का दर्द समझो चीनी राजदूत’

जाफना विश्वविद्यालय छात्र संघ ने युद्ध अपराधों पर श्रीलंका सरकार का समर्थन करने के लिए चीनी राजदूत क्यूई झेंगहोंग की आलोचना की है। दरअसल, इसी महीने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्र में तमिलों के खिलाफ युद्ध अपराध और नरसंहार को लेकर श्रीलंका की भूमिका पर चर्चा होना है।

छात्र संघ ने चीनी राजदूत से अपील की है कि वह तमिलों की माँगों और उनकी दुर्दशा को समझे और श्रीलंकाई सरकारों का समर्थन करना बंद करे। हालाँकि, छात्र संघ के नेताओं का यह भी कहा कि उन्हें विश्वास नहीं है कि चीन अपना रुख बदलेगा।

छात्र संघ का कहना है कि चीन को पता है कि तमिलों के खिलाफ श्रीलंका के युद्ध के अंतिम छह महीनों में 70,000 से अधिक तमिलों की मौत हुई है। हजारों महिलाओं का श्रीलंकाई सैनिकों द्वारा बलात्कार किया गया। छात्र संघ ने राजदूत से अपने ट्वीट को डिलीट करने और संयुक्त राष्ट्र में श्रीलंका के खिलाफ लाए जा रहे प्रस्ताव का समर्थन करने का आग्रह किया।

छात्र संघ ने ब्रिटेन की एक रिपोर्ट के आधार पर कहा कि आज 90,000 से अधिक तमिल विधवाएँ अभिशप्त जीवन जीने को मजबूर हैं। इसके अलावा, तमिल क्षेत्र के एक बड़े भूभाग पर आज भी श्रीलंकाई सेना का कब्जा है और वहाँ सिंहलियों को बसाया जा रहा है।

दरअसल, हाल ही में चीनी राजदूत ने एक बयान में कहा था कि चीन मानवाधिकार के मुद्दे पर उन कुछ देशों के विपरीत श्रीलंका का समर्थन करेगा, जिन्होंने अतीत में श्रीलंका पर शासन या आक्रमण किया था।

चीनी राजदूत ने चीन और श्रीलंका को ऐसे दो देश बताया, जो अभी भी बाहरी ताकतों के खतरों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने इस तरह के खतरों का विरोध करने के लिए चीन-श्रीलंका के बीच एक संयुक्त प्रयास का भी आह्वान किया। चीनी राजदूत का स्पष्ट इशारा पश्चिमी देशों और भारत की ओर था।

झेंगहोंग का इशारा ताइवान को अमेरिका सहयोग और श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर चीनी युद्धपोत की डॉकिंग से था। दरअसल, अमेरिका चीन की ‘वन चाइना’ पॉलिसी को स्वीकार करने के बाद भी ताइवान को हर तरह से मदद करता है। वहीं, पिछले दिनों चीनी पोत युआन वांग 5 के हंबनटोटा आने पर भारत ने सुरक्षा चिंता व्यक्त की थी।

श्रीलंका में जारी आर्थिक संकट के पीछे चीनी का ऋण जाल है। श्रीलंका के लोग इस बात को भली-भाँति समझते हैं। वहीं, श्रीलंकाई तमिलों को आशंका है कि उनके देश में चीन के प्रभाव बढ़ने के बाद स्वायत्ता वाली उनकी माँगों को नकारा जा सकता है और चीन इसके लिए श्रीलंका की सरकार को प्रोत्साहित कर सकता है।

चीन का रुख श्रीलंका के बहुसंख्यक सिंहलियों का समर्थक और तमिलों को परेशान करने वाला है। श्रीलंका चीन के सहयोग से तमिलों की माँगों को पहले ही बलपूर्वक कुचल चुका है। ऐसे में मानवाधिकार पर UNHRC में पश्चिमी देशों द्वारा श्रीलंका के खिलाफ लाए गए प्रस्तावों के खिलाफ वह मतदान कर चुका है। ऐसे में तमिलों को चीनी प्रभाव से शंका बढ़ रही है।

दुमका में अब अरमान अंसारी ने 14 साल की नाबालिग को बनाया हवस का शिकार: बलात्कार के बाद की हत्या, शव को पेड़ पर लटकाया

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गृह जिले दुमका में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। क्षेत्र में अभी एक हिंदू लड़की को जलाकर मारने का मामला शांत नहीं हुआ, कि वहीं एक और एसटी समुदाय की नाबालिग को बलात्कार के बाद मार दिया गया। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने ट्वीट कर बताया कि अरमान अंसारी ने 14 वर्षीय जनजातीय लड़की के साथ बलात्कार किया और फिर उसे पेड़ पर लटका दिया।

बाबूलाल मरांडी ने अपने इस ट्वीट में यह भी पूछा कि झारखंड में और कितनी आदिवासी युवतियाँ ऐसे दरिंदों का शिकार बनेंगी।

बाबूलाल मरांडी ने एक अन्य ट्वीट में जानकारी दी कि लड़की सिर्फ 14 साल की थी और अरमान अंसारी की ‘जिहादी’ इच्छाओं का शिकार हो गई। उन्होंने यह भी कहा कि यह लव जिहाद के इंटरनेशनल नेटवर्क से जुड़े होने की संभावना है, जो उसकी हत्या के पीछे है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीएम हेमंत सोरेन ऐसे अपराधों के अपराधियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

गौरतलब है, दुमका हेमंत सोरेन और उनके परिवार का लंबे समय से गढ़ रहा है। मुख्यमंत्री सोरेन ने ऐसी घटनाएँ होने के बाद जब भी उन्हें लगता है वह धारा 144 लगाकर विरोध प्रदर्शन होने पर रोक लगा देते हैं।

बताया जा रहा है कि इस बलात्कार और हत्या के मामले में आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है।

वैसे बता दें कि दुमका में हत्या की यह पहली घटना नहीं है। पिछले महीने के अंत में एक किशोरी को उसके घर में सोते समय शाहरुख हुसैन और उसके दोस्त ने जिंदा जला दिया था। रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश से प्रतिबंधित जिहादी संगठनों द्वारा प्रेरित किए जाने के कारण दुमका ऐसे मामलों का केंद्र बनता जा रहा है।

‘देवर या नंदोई से कर हलाला वरना घर से निकल’ : मुस्लिम महिला को भरी पंचायत में मिला था तीन तलाक, शिकायत में कहा- ससुर भी गलत नजर रखता है

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में तीन तलाक के बाद हलाला करने के लिए दवाब बनाने का मामला सामने आया है। वहाँ तसीमा खातून नाम की मुस्लिम महिला का आरोप है कि उसके ससुराल वालों ने उसे घर में रखने के लिए उससे कहा कि वो या तो अपने देवर या फिर ननद के शौहर के साथ संबंध बनाए।

बताया जा रहा है कि महिला का शौहर दहेज की माँग कर रहा था। लेकिन, महिला द्वारा दहेज न दे पाने के बाद शौहर ने उसे तीन तलाक दे दिया। अब, ससुराल वालों का कहना है कि यदि उसे फिर से ससुराल में रहना है तो देवर या नंदोई के साथ हलाला करना होगा। महिला ने हलाला के लिए साफ तौर से मना करते हुए मामले की शिकायत पुलिस और मानवाधिकार आयोग से की है।

पीड़िता का कहना है, “हमारी शादी के कुछ महीनों तक रिश्ता ठीक चल रहा था। मेरा एक बेटा भी है। लेकिन, कुछ समय बाद मेरे पति ने मुझसे दहेज की माँग की और फिर वह मुझे दहेज के लिए प्रताड़ित भी करने लगा। पति और उसके परिजन 10 लाख रुपए और सोने की माँग कर रहे थे।”

पीड़ित महिला ने कहा है कि दहेज नहीं मिलने पर अप्रैल 2021 में मारपीट कर ससुराल वालों ने घर से भगा दिया था। इस मामले में जब पंचायत बुलाई गई तो पति ने पंचायत में ही सबके सामने तीन बार तलाक कहकर रिश्ता खत्म कर दिया।

इसके बाद महिला गत 21 अगस्त को फिर से अपने ससुराल पहुँची तो ससुराल वालों ने उसे डाँटकर भगा दिया। अब शौहर के घर वाले कह रहे हैं यदि उसे घर में रहना है तो हलाला करना पड़ेगा। महिला ने यह भी कहा है कि उसके ससुर की नीयत खराब है और वो उसे गलत नजर से देखता है। 

ससुराल वालों द्वारा हलाला करने का दवाब बनाने के बाद महिला ने थाने में शिकायत की है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने ससुर, सास, ननद और देवर को आरोपित बनाया है और अब इस मामले की जाँच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि महिला की शिकायत के आधार पर बयान दर्ज किया जा रहा है। साथ ही, तलाक के समय पंचायत में मौजूद लोगों के भी बयान लिए जाएँगे। इसके अलावा महिला ने मानवाधिकार आयोग में भी इस मामले की शिकायत है।

केंद्र की जिस योजना से लाखों गरीबों का हुआ इलाज, उसे केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में लागू ही नहीं किया: RTI से खुलासा

दिल्ली में केजरीवाल सरकार की कई योजनाओं के फर्जी होने का भंडाफोड़ होने के बाद एक नई आरटीआई से नया खुलासा हुआ है। इस आरटीआई से पता चलता है कि केजरीवाल सरकार ने पहले तो प्रदेश में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना को लागू न करवा कर यहाँ की जनता को उनके अधिकारों से वंचित किया। इसके बाद 2020 में खुद से ऐलान किया कि वो इस योजना को लागू करेंगे, लेकिन बावजूद इसके उन्होंने दिल्ली वालों के लिए ये कल्याणकारी योजना को लागू नहीं किया।

जब इसका पता विवेक पांडे नाम के एक्टिविस्ट को चला तो उन्होंने योजना संबंधी जानकारी लेने के लिए आरटीआई डाली। इसमें उन्होंने 4 सवाल किए। ये सवाल इस प्रकार थे:

  1. दिल्ली राज्य में आयुष्मान भारत मिशन कब शुरू हुआ?
  2. दिल्ली सरकार द्वारा आयुष्मान भारत योजना के तहत जुलाई 2022 तक जारी की गई राशि का विवरण प्रदान करें?
  3. जुलाई 2022 तक आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभान्वित होने वाले लोगों की कुल संख्या का विवरण प्रदान करें?
  4. दिल्ली सरकार द्वारा जुलाई 2022 तक जारी किए गए आयुष्मान कार्ड की कुल संख्या का विवरण प्रदान करें?
आरटीआई में पूछे गए सवाल

इस आरटीआई के जवाब में स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (डीएचएस) ने बताया:

  1. दिल्ली में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई है। यह विचाराधीन है।
  2. लागू नहीं है क्योंकि योजना आज तक शुरू नहीं हुई है।
स्वास्थ्य निदेशालय से आया जवाब

क्या है आयुष्मान भारत योजना?

बता दें कि आयुष्मान भारत योजना या प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, भारत सरकार की एक स्वास्थ्य योजना है। इसे 23 सितंबर 2018 को पूरे भारत मे लागू किया गया था। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों (बीपीएल धारक) को स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराना है। इसके अन्तर्गत आने वाले प्रत्येक परिवार को 5 लाख तक का कैश रहित स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया जाता है। 10 करोड़ बीपीएल धारक परिवार (लगभग 50 करोड़ लोग) इस योजना का प्रत्यक्ष लाभ उठा रहे हैं। इसके अलावा बाकी बची आबादी को भी इस योजना के अन्तर्गत लाने की योजना है।

केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में नहीं लागू की सुविधा

ऐसे में केजरीवाल सरकार द्वारा इस योजना को लागू करने में लापरवाही दिखाना दर्शाता है कि कैसे दिल्ली सरकार जनता के साथ सौतेला व्यवाहर कर रही है। विवेक पांडे कहते हैं कि आयुष्मान भारत जैसी कल्याणकारी योजनाओं को लागू न करके सरकार ने दिल्ली की गरीब जनता को स्वास्थ लाभ पाने से वंचित रखा है। वर्ष 2020 में  दिल्ली सरकार के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली विधानसभा में बजट पेश करते हुए इसकी घोषणा की थी कि वह अगले वित्त वर्ष 2020-21 से राष्ट्रीय राजधानी में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना लागू करेगी।

गरीब जनता की केजरीवाल को नहीं है चिंता: विवेक पांडे

उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की घोषणा को आधार बना कर ही विवेक पांडे के द्वारा उक्त RTI स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (डीएचएस) को दायर की गई थी। लेकिन इसके बदले जो जवाब आया वो चौंकाने वाला था। विवेक के अनुसार,

“इस जवाब से साफ-साफ पता चल रहा है कि अरविंद केजरीवाल एवं उनकी आम आदमी पार्टी वाली सरकार दिल्ली के गरीब लोगों के स्वास्थ्य को लेकर जरा भी चिंतित नहीं है। वरना क्या कारण है जो इस जनकल्याणकारी योजना का लाभ लेने से दिल्ली की गरीब जनता को वंचित रखा गया? सरकार के इस तानाशाही रवैये का दुष्परिणाम दिल्ली की गरीब जनता को भुगतना पड़ रहा है।”

वह कहते हैं कि कोरोना कल में आयुष्मान भारत योजना गरीबो के लिए वरदान से कम नहीं थी। जहाँ प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम जेएवाई) के तहत, 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में, 9.70 लाख से अधिक लोगों ने 7 मार्च, 2022 तक कोविड के इलाज की माँग की थी। विवेक के अनुसार, ये आँकड़ों का खुलासा उनकी आरटीआई से हुआ था जिसमें बताया गया था कि सरकार ने अबतक इलाज पर ₹3,496 करोड़ खर्च किए हैं।

‘कॉन्ग्रेस हो रही है गायब, वामपंथी पार्टियों से मिल रहा छुटकारा’ : केरल में विपक्षियों पर गरजे अमित शाह, बताया- 1.11 करोड़ SC-ST लोगों को मोदी सरकार ने दिया घर

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में शनिवार (3 अगस्त 2022) को कॉन्ग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियों पर निशाना साधा। उन्होंने भाजपा के अनुसूचित जाति सम्मेलन में शामिल होने के दौरान कहा कि भारत में कॉन्ग्रेस पार्टी का सफाया होता जा रहा है। वहीं कम्युनिस्ट पार्टी को लेकर वह बोले कि इससे भी लोगों को छुटकारा मिल रहा है।

उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस भारत से गायब होने की कगार पर है और कम्युनिस्ट पार्टियों से भी दुनिया छुटकारा पा रही है। राज्य का भविष्य सिर्फ भाजपा पार्टी है।”

अमित शाह ने सम्मेलन में कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री ने कॉन्ग्रेस और कम्युनिस्टों को हमेशा से अनुसूचित जाति के लोगों और गरीब लोगों को अपना वोट बैंक माना है। अगर केरल का कोई भविष्य है तो वो सिर्फ भाजपा है।

केरल में बीजेपी कार्यकर्ताओं की तारीफ करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि पूरे देश में काम करने के लिए भाजपा को राष्ट्रभक्ति चाहिए लेकिन केरल के लिए राष्ट्रभक्ति के साथ साथ बलिदान करने की ताकत और बहादुरी तीनों की ही जरूरत बीजेपी को है।

उन्होंने आगे बताया कि कैसे भारतीय जनता पार्टी देश में सरकार बनाकर पिछड़े वर्ग को आगे लाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा, “जब हमारी पूर्ण बहुमत की सरकार बनी तो रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाया गया और अगले कार्यकाल में श्रीमति द्रौपदी मुर्मू को, वो एसटी समुदाय की है। लेकिन कॉन्ग्रेस या फिर कम्युनिस्टों की ओर से कभी कल्याणकारी काम नहीं किए गए।”

अमित शाह ने याद दिलाया कि कैसे कॉन्ग्रेस के रहते बीआर अंबेडकर को भारत रत्न नहीं मिला। ये केवल तभी संभव हुआ तब कॉन्ग्रेस सत्ता से हट पाई। बाबा साहेब की याद में पीएम मोदी के नेतृत्व में देश में पंच तीर्थ का भी निर्माण हुआ।

उन्होंने बताया कि पिछले 8 वर्षों में मोदी सरकार ने एससी-एसटी लोगों के कल्याण में 5 करोड़ गैस कनेक्शन दिए और 1.11 करोड़ लोगों को आवास दिया गया।

कभी था हिंदू बहुल गाँव, अब स्वस्तिक चिह्न वाले घर पर 786 का निशान: भारत के उस पार भी डेमोग्राफी चेंज, नेपाल में घुसते ही मस्जिद, मदरसा और इस्लाम – OpIndia Ground Report

हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल से लगी भारत की सीमा पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने भारत से लगे नेपाल के इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की पहली रिपोर्ट;

दांग नेपाल का एक जिला है। लुम्बिनी प्रदेश का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले की जरवा सीमा से हमने दांग में प्रवेश किया। गाड़ियों को सीमा पार करने की इजाजत नहीं थी। करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चल हम दांग की सीमा में पहुँचे।

यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

इस दौरान हमें सशस्त्र सीमा बल (SSB) और नेपाल पुलिस के सुरक्षा जाँच से होकर गुजरना पड़ा। यह बॉर्डर घने जंगलों से होकर जाता है। हमारा पहला पड़ाव दांग जिले का कोईलाबास गाँव था।

नेपाल के पहले ही गाँव का मुस्लिम प्रधान

कोईलाबास के ग्राम प्रधान अब्दुल खालिक हैं। स्थानीय लोगों ने हमें बताया कि चुनाव में कोई हिंदू प्रत्याशी खड़ा तक नहीं हुआ था। खालिक के अनुसार गाँव में लगभग 1100 वोटर हैं। वे कहते हैं, “पिछली बार सद्दाम चुनाव जीते थे। वे माओवादी पार्टी से हैं। यहाँ हिन्दुओं के बराबर मुस्लिमों की आबादी है।”

नेपाली गाँव कोईलाबास

मदरसों को सरकारी अनुदान

खालिक के मुताबिक नेपाल सरकार उनके गाँव में मौजूद मदरसे को अनुदान देती है। वे कहते हैं, “सामान्य कोर्स के अलावा मज़हबी तालीम भी जरूरी है आखिरियत को बनाने के लिए।” उन्होंने बताया की गाँव के मदरसे में टीचरों की नियुक्ति स्थानीय लोग करते हैं। उनका खर्च सरकार उठाती है।

मदरसों में भारतीय मौलवी

ग्राम प्रधान अब्दुल खालिक ने हमें बताया कि उनके गाँव के इस्लामिया मदरसे में बच्चों को पढ़ाने के लिए भारत के 2 मौलवी हैं। वे कहते हैं, “यहाँ से मजहबी तालीम हासिल कर कई मौलवी भारत में गए हैं। नेपाल में भी मौलवी हैं, लेकिन हमें भारतीय मौलवी सस्ते में मिल जाते हैं। उन्हें भी भारत से बेहतर सैलरी यहाँ मिलती है। दांग जिले के ही गढ़वा और लमही इलाके में तमाम मौलवी हैं। इन जगहों पर मदरसे और मस्जिदें भी हैं। नेपाल के अधिकतर मौलाना और मौलवी कई तरह के व्यापार में भी शामिल हैं।”

भारत से भी मदरसों में आते हैं बच्चे

कोईलाबास के प्रधान अब्दुल खालिक के मुताबिक नेपाली मदरसों में पढ़ने के लिए भारत से भी बच्चे आते हैं। खासकर, बिहार और पश्चिम बंगाल से। इनमें लड़कियाँ भी होती हैं। उनका रहना-खाना फ्री होता है।

कोईलाबास के प्रधान अब्दुल खालिक

खालिक के अनुसार सीमावर्ती इलाकों में ही नहीं, नेपाल के भीतरी हिस्सों में भी कई ग्राम प्रधान, विधायक मुस्लिम समुदाय से हैं। उदहारण के तौर पर उन्होंने लुम्बिनी प्रदेश के वर्तमान शिक्षा मंत्री नसरुद्दीन खान का नाम लिया। मोहम्मद लालबाबू राऊत गद्दी, फौजिया नसीम और मोहम्मद याकूब अंसारी लुम्बिनी प्रदेश के प्रमुख राजनैतिक चेहरे हैं।

योजनाओं का लाभ भी अधिकतर मुस्लिमों को

दांग जिले में सरकारी योजनाओं का लाभ पाने वालों का एक बोर्ड सरकार ने लगवाया है। उस बोर्ड के मुताबिक सरकार द्वारा चलाई गई ‘जलवायु उतथाशील योजना’ में गढ़वा क्षेत्र में कुल 839 लोगों को लाभान्वित किया गया है। इन 839 कुल लोगों में से लाभ पाने वाले मुस्लिमों की संख्या 602 है। इसके अलावा जनजाति वर्ग के 39 व अन्य की संख्या महज 198 है।

योजना के लाभार्थियों का विवरण वाला बोर्ड

100 साल पुरानी जामिया मस्जिद

दांग की सीमा शुरू होने के करीब 1 किलोमीटर बाद हमें एक बड़ी सी मस्जिद सड़क से सटी हुई दिखी। यह मस्जिद दांग के सबसे चर्चित पर्यटन स्थल झुलंगी पुल के ठीक बगल में है। स्थानीय निवासी अब्दुल अहद ने हमें बताया कि यह मस्जिद 100 साल से भी पुरानी है। अहद ने यह भी बताया कि कोईलाबास में कुछ और मस्जिद और मदरसा हाल ही में बने हैं।

कोईलाबास की जामिया मस्जिद

मस्जिद के बाहर अरबी में कुछ शब्द लिखे थे। अब्दुल अहद ने इसे मस्जिद में घुसने से पहले पढ़ी जाने वाली दुआ बताई। अब्दुल अहद के साथ उनके रिश्तेदार तौसीफ भी थे। इसी मस्जिद से कुछ आगे जाने के बाद हमें रात के अँधेरे में एक और इबादतगाह दिखी। वहाँ एक बल्ब जल रही थी। इबादतगाह मुख्य मार्ग से थोड़ी दूर स्थित थी। आसपास मुस्लिम बहुल बस्ती भी थी, जिसमें बकरियाँ और मुर्गियाँ घूमती दिखाई दे रहीं थी।

मज़ारनुमा इबादतगाह

अधिकतर दुकानदार मुस्लिम

कोईलाबास में अधिकतर दुकानें मुस्लिमों की है। झुलंगी पुल के ठीक बगल नियामत अली की चाय और कोल्ड ड्रिंक की दुकान है। अब्दुल अहद कपड़े का काम करते हैं। मुख्य हाइवे पर अब्दुल वकील की चिप्स और पान-मसाले की दुकान दिखी। दुकान चला रहीं अब्दुल वकील की बीवी ने बताया कि कोईलाबास की 2 मस्जिदों में एक अहले हदीस वालों की है। दूसरी सुन्नी मत वालों की।

कुछ आगे चलने पर मोहम्मद कमाल और मोहम्मद सद्दाम मिले। दोनों ने बताया कि वे मोबाइल का काम करते हैं। उनके अनुसार नेपाली टेलिकॉम कम्पनी ‘नमस्ते’ का सिम सबसे अधिक बिकता है।

वीरान पड़े शुभ-लाभ लिखे घर

दांग जिले में हमें कई वीरान और खंडहर हो चुके घर मिले। कभी यहीं रहने वाले बब्बू कसौधन ने बताया, “कभी कोईलाबास हिन्दू बहुल था। 1995 के बाद माओवादी हिंसा के कारण हमारे कारोबार को काफी नुकसान हुआ। जब व्यापार और काम-धंधे खत्म हो गए तो हम लोग भारत आ गए। हिंदू पूरे परिवार के साथ इलाका छोड़ कर भारत में बस गए। वहीं मुस्लिमों घरों के एकाध सदस्य ही परिवार को छोड़ बाहर कमाने गए। इसी वजह से अब वो क्षेत्र मुस्लिम बहुल हो चुका है। राम जानकी मंदिर की गली वाले क्षेत्र में एक लाइन से जितने भी खाली घर हैं, वे सब हिंदुओं के ही हैं।”

खाली पड़े घरों में अरबी के शब्द

हमें एक घर ऐसा भी दिखाई दिया जिस पर स्वस्तिक का चिन्ह बना था। शुभ-लाभ लिखा था। लेकिन उसी घर पर अरबी भाषा में कुछ लाइनें दीवाल को कुरेद कर भी लिख दी गईं थीं। दरवाजे पर लिखे हिन्दू नाम के ऊपर कालिख पोत दी गई थी। इसको लेकर बब्बू बताते हैं, “पिछले 3-4 बार से लगातार कोईलाबास का प्रधान मुस्लिम हो रहा है। अब जब वहाँ हिन्दू बचे ही नहीं तो उनके घरों पर कोई क्या लिख रहा किसे पता हो।”

NRC का डर

बब्बू कसौधन के मुताबिक हिन्दू समाज के कई लोगो को NRC का डर दिखाया गया और उन्हें बताया गया कि नेपाल में जमीन होने की वजह से उन्हें भारत में नहीं रहने दिया जाएगा। बब्बू के मुताबिक नेपाल से जमीनें बेच कर भारत आने वालों की एक बड़ी वजह ये भी रही।

माओवादी हिंसा के निशान

हमें एक पुलिस थाना खंडहर जैसी स्थिति में दिखा। वहाँ से गुजर रहे लोगों ने बताया कि 2002 में माओवादियों ने इस पुलिस पोस्ट पर बम फेंक दिया था। 6 पुलिसकर्मी मारे गए थे। तब से ये पोस्ट वीरान पड़ा है। हालाँकि खंडहर हो चुके पोस्ट पर नेपाल पुलिस के खुकरी का निशान अभी भी बना हुआ है।

माओवादी हमले के बाद वीरान पड़ा पुलिस पोस्ट

फोटो मत खींचो, हमारे इस्लाम में मना है

यात्रा के दौरान सड़क पर 2 युवक बैठे थे। वे हमसे कैमरा बंद करने को कहने लगे। उनमें से एक आसिफ सिद्दीकी ने कहा, “हम इस्लामिक स्टेट से हैं। हमारे यहाँ फोटो और वीडियो हराम है। आज तक मैंने एक भी फोटो या वीडियो नहीं खिंचवाई है। मैंने क्लास 8 तक मदरसे में पढ़ाई की है। नेपाल में सरकारी नौकरी मिलनी नहीं है, इसलिए मैं विदेश जाने की तैयारी में हूँ।”

कवरेज से हमें रोकने की कोशिश केवल कुछ स्थानीय मुस्लिमों ने ही नहीं की। नेपाल की पुलिस ने भी वीडियो और फोटोग्राफी से मना किया। ‘गौतम सर’ कहकर संबोधित किए जा रहे एक पुलिस अधिकारी ने हमसे किसी भी प्रकार की कवरेज न करने को कहा।

‘विपक्ष एकजुट हो जाओ, BJP को सबक सिखाओ’ : 5 विधायकों के पार्टी छोड़ने से CM नीतीश हुए परेशान, ताकत जुटाने दिल्ली जाएँगे

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी पार्टी के 5 विधायकों को भारतीय जनता पार्टी के पास जाता देख परेशान हो गए हैं। उन्होंने बीजेपी पर उनकी पार्टी तोड़ने का इल्जाम लगाया है। साथ ही विपक्ष से कहा है कि वो लोग इकट्ठा हो जाएँ और भाजपा को सबक सिखाएँ।

बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “जब हम एनडीए से अलग हो रहे थे, तो मणिपुर के हमारे 6 विधायक हमसे मिले और सुनिश्चित किया कि वो जेडीयू के साथ हैं। हमें सोचना होगा कि ये सब क्या चल रहा है। भाजपा हमारी पार्टी तोड़ रही है। क्या ये संवैधानिक है? विपक्ष 2024 के लिए एकजुट हो जाए।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीएम नीतीश कुमार ने ये भी कहा कि इस समय लोकतांत्रिक मूल्यों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। अगर 2024 में विपक्ष एकजुट होता है तो निर्णय बहुत अच्छा आएगा।

नीतीश ने विपक्ष को एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि 2024 का चुनाव जीतने के बाद भाजपा को सबक सिखाएँगे। उन्होंने कहा कि वो विपक्षी दलों से मिलने के लिए जल्द दिल्ली जाएँगे।

बता दें कि मणिपुर से जिन 5 जेडीयू विधायकों का भाजपा में विलय हुआ है, उनके नाम-  केएच जॉयकिशन, एन सनाते, मोहम्मद अछबउद्दीन, पूर्व पुलिस महानिदेशक एएम खाउटे और थांगजाम अरूण कुमार हैं।

कहा जा रहा है कि ये विधायक एनडीए को छोड़े जाने के नीतीश कुमार के फैसले से नाराज थे। उन लोगों को एनडीए के साथ गठबंधन में रहना था। यही कारण है कि इन विधायकों ने भाजपा में विलय कर लिया। जेडीयू के कुल 6 में विधायकों में मोहम्मद अब्दुल नासिर को छोड़कर 5 ने भाजपा में विलय कर लिया है।

रईस ने विकास बनकर हिंदू लड़की को फँसाया, सच खुलने पर दी ‘सर तन से जुदा’ की धमकी: बागपत पुलिस ने गिरफ्तार किया, डर से घर में बंद थी पीड़िता

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से लव जिहाद का मामला सामने आया है। बागपत के खेकड़ा कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत रईस नामक मुस्लिम युवक पर आरोप लगा है कि उसने विकास बनकर हिंदू लड़की से दोस्ती की और सच्चाई खुलने पर उसे घर आकर ‘सर तन से जुदा’ की धमकी देकर गया। अब पीड़िता के घरवालों ने इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई है जिसके आधार पर बागपत पुलिस ने रईस को गिरफ्तार किया है।

इस मामले में, लड़की ने बताया है कि रईस ने उसे अपना नाम विकास बताकर दोस्ती की थी। इसके बाद, जब दोस्ती गहरी हो गई तो रईस उस पर शादी का और बुर्का पहनने का दवाब बनाने लगा। धीरे-धीरे पीड़िता को रईस की सच्चाई पता चली तो उसने उससे दूरी बना ली। मगर, रईस लगातार उसको परेशान करता रहा। कई बार उसका पीछा करने की भी कोशिश की।

हालात ऐसी हो गई कि लड़की डेढ़ महीने से अपने घर से बाहर नहीं निकली। उसका कहना है कि जब उसे रईस की सच्चाई नहीं पता थी तो वो उसके साथ रहने भी गई थी। लेकिन अब सबकुछ जानते हुए वो उसके साथ नहीं रह सकती। वो चाहती है कि रईस के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो।

पीड़िता के परिवार ने अपनी शिकायत में बताया कि रईस एक दिन उनके घर आया और उनकी बेटी के बारे में पूछने लगा। इस पर परिवार वालों ने विरोध किया तो वह उन्हें धमकी देकर चला गया। इसके कुछ दिन बाद पीड़िता के माता-पिता को रास्ते पर रोक लिया और बेटी के अश्लील फोटो, वीडियो वायरल करने की धमकी देने लगा। परिवारवालों ने घबरा कर पुलिस से इन सबकी शिकायत की और माँग की कि रईस के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

पीड़िता के परिवार वालों की इन शिकायतों के बाद पुलिस ने आरोपित रईस को गिरफ्तार किया। बागपत के एएसपी नीरज कुमार जादौन ने कहा कि आरोपित रईस को पहले भी पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर जेल भेज जा चुका है। लेकिन, तब पीड़िता ने कोर्ट में आरोपित के पक्ष में बयान दिए थे, जिसके बाद वह छूट गया था।

एसपी ने यह भी कहा कि फिलहाल परिजनों ने जो आरोप लगाए है, उसकी जाँच के निर्देश दिए गए हैं और आरोपित रईस को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 506, 354 डी और आईटी एक्ट 67 ए के तहत केस दर्ज हुआ है।