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‘भाजपा में रहकर AAP के लिए काम करें, सरकार बनने पर आपका ख्याल रखा जाएगा’: दिल्ली के CM केजरीवाल ने गुजरात में BJP कार्यकर्ताओं को दिया लालच

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejriwal) विधानसभा चुनावों (Gujarat Assembly Election) को देखते हुए लगातार गुजरात के दौरे कर रहे हैं। केजरीवाल ने शनिवार को राजकोट में गुजरात भाजपा के कार्यकर्ता से AAP के लिए काम करने की अपील की।

राजकोट में बोलते हुए उन्होंने कहा कि इससे वे सत्ताधारी पार्टी से पेमेंट भी लेते रहेंगे और भीतरी तौर पर आम आदमी पार्टी के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार आती है तो भाजपा कार्यकर्ताओं को वो सारी सहूलियतें एवं फायदे मिलेंगे, जो उनके वादा किया गया है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा, “हमें बड़े-बड़े भाजपा नेताओं की जरूरत नहीं है। भाजपा अपने नेताओं को अपने पास रखे। हमें तो उनके पन्ना प्रमुख और गाँवों, बूथ एवं तालुका के कार्यकर्ता की जरूरत है। ये लोग AAP में शामिल हो रहे हैं।”

केजरीवाल यहीं नहीं रूके। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने कार्यकर्ताओं का ख्याल नहीं करती है। वह उनके बच्चों के मुफ्त एवं बढ़िया शिक्षा, मेडिकल फैसिलिटी और बिजली आदि नहीं देती है। आम आदमी अपने कार्यकर्ताओं को यह सब सुविधा देगी।

भाजपा कार्यकर्ताओं से उन्होंने कहा, “आप भाजपा में ही रहो, लेकिन आम आदमी पार्टी के लिए काम करो। उनमें से कई लोगों को पैसे मिलते हैं। उसे लेते रहिए, लेकिन हमारे लिए काम करते रहिए, क्योंकि हमारे पास पैसे नहीं हैं।”

उन्होंने राज्य में भाजपा को जिताने की अपील करते हुए कहा, “मैं एहसान फरामोश नहीं हूँ। आप सभी की सभी माँगों को एक महीने के अंदर पूरा करूँगा।” केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद 24 घंटे मुफ्त बिजली, बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा, परिवार के लिए मुफ्त चिकित्सा और महिलाओं को 1000 रुपए अलाउंस दिया जाएगा।

अरविंद केजरीवाल ने कहा, “हमने एक सर्वे कराया है। इसमें सूरत की 12 में से 7 सीटें आम आदमी पार्टी जीतने जा रही है। वक्त कम है, इसलिए आप सभी अपने-अपने स्तर पर प्रचार करो।” उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा कि 27 साल तक भाजपा ने उन्हें कुछ नहीं दिया। इसलिए उस पार्टी में बने रहने का कोई अर्थ नहीं है।

6 घंटों में 50 सवाल: ₹200 करोड़ के ठगी केस में नोरा फतेही से पूछताछ, पुलिस ने कहा- ‘एक्ट्रेस ने नहीं दिए कुछ जवाब, फिर बुलाएँगे’

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने सुकेश चंद्रशेखर ठगी केस में एक्ट्रेस नोरा फतेही से 6 घंटे तक पूछताछ की। अभिनेत्री शुक्रवार (2 सितंबर 2022) को सुबह 11 से तकरीबन 6 बजे तक मंदिर मार्ग स्थित EOW (इकोनॉमिक ऑफेंस विंग) ऑफिस में मौजूद थीं। पूछताछ के दौरान नोरा से लगभग 50 सवाल किए गए और उन्होंने इस दौरान पुलिस का पूरा सहयोग दिया।

प्राप्त जानकारियों के मुताबिक ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में बॉलीवुड एक्ट्रेस नोरा फतेही से दिल्ली पुलिस लंबी पूछताछ की। अभिनेत्री से पूछे गए 50 सवालों में- ‘सुकेश से आपने गिफ्ट कब लिए? आप उनसे कहाँ मिलीं?’ जैसे सवाल थे। बताया जा रहा है कि नोरा को जरूरत पड़ने पर फिर से बुलाया जाएगा।

दैनिक भास्कर के सूत्रों के अनुसार अभिनेत्री नोरा ने बताया, “मैं सुकेश की पत्नी से नेल आर्ट फंक्शन में मिली थी। यहीं उन्होंने मुझे एक BMW कार गिफ्ट की थी। मैं दोनों की क्रिमिनल हिस्ट्री के बारे में नहीं जानती थी।” इसके साथ-साथ एक्ट्रेस ने बताया कि अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस के साथ उनका कोई संबंध नहीं है। बता दें नोरा से इससे पहले भी इस मामले में ED ने 3 बार पूछताछ की है।

नोरा से हुई इस पूछताछ को लेकर दिल्ली पुलिस के अधिकारी रविंद्र यादव ने मीडिया को जानकारी दी कि नोरा ने कुछ ही सवाल के जवाब दिए हैं। पुलिस आगे भी नोरा को सवाल-जवाब के लिए बुला सकती है। इस मामले में अभी भी जाँच जारी है और पुलिस की टीम केस से जुड़े सभीं लिंक्स का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रहे हैं कि इस मामले के और कौन-कौन आरोपित हैं।

गौरलतब है कि इसी मनी लॉन्ड्रिंग केस में एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस को भी दिल्ली पुलिस ने 12 सितंबर को पूछताछ के लिए बुलाया है। इसके साथ-साथ ईडी ने भी इस मामले में अभिनेत्री को 26 सितंबर को पूछताछ के लिए हाजिर होने का समन भेजा है। बता दें कि जाँच एजेंसियों को दोनों अभिनेत्रियों के सुकेश के साथ कनेक्शन होने के कई सबूत भी मिले थे। इसके बाद से जाँच एजेंसियाँ इनके पूछताछ में लगी हैं।

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ से 22 साल का मौलवी गिरफ्तार: पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी और आतंकी संगठन को सेना से जुड़ी सूचनाएँ कराता था मुहैया

सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ से एक मस्जिद के मौलवी को गिरफ्तार किया है। यह मौलवी पाकिस्तान के एक आतंकी संगठन को गोपनीय सूचनाएँ भेजा करता था। मौलवी का नाम अब्दुल वाहिद है और उसकी उम्र 22 साल है।

अब्दुल वाहिद पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन कश्मीरी जांबाज फोर्स को भारतीय सेना की गोपनीय सूचनाएँ साझा कर रहा था। वाहिद की संदिग्ध गतिविधियों को मिलिट्री इंटेलिजेंस ने इंटरसेप्ट किया। इसके बाद पुलिस को इसकी जानकारी दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौलवी अब्दुल वाहिद किश्तवाड़ में एक मदरसे में पढ़ाता है और स्थानीय मस्जिद में मौलवी का काम करता है। वह आतंकी संगठन को सेना के प्रतिष्ठानों, अधिकारियों और उनकी गतिविधियों की जानकारी भेज रहा था। किश्तवाड़ वही इलाका है, जहाँ से पाकिस्तानी इस्लामी आतंकी ज्यादातर राज्य में घुसपैठ करते हैं।

मिलिट्री इंटेलिजेंस और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मौलवी अब्दुल वाहिद को गिरफ्तार लिया है और उससे पूछताछ कर रही है। उसके खिलाफ UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया है। गोपनीय सूचनाएँ साझा करने की बात मौलवी ने कबूल किया है।

कहा जा रहा है कि पिछले महीने अब्दुल वाहिद को किश्तवार पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया था। वाहिद ने बताया था कि दिसंबर 2020 में वह फेसबुक पर तैयब फारूकी उर्फ उमर खताब से जुड़ा था। वह खुद को कश्मीर जांबाज फोर्स का कमांडर बताता है।

खताब से दोस्ती के बाद वाहिद आतंकी संगठन से संबंधित फोटो और कंटेंट सोशल मीडिया पर साझा करने लगा। वह ISI के संपर्क में भी आया। वाहिद को कुछ वर्चुअल मोबाइल नंबर मुहैया कराया गए और व्हाट्सऐप पर नया अकांउट बनाया गया था।

सुरक्षा बल यह भी जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहे हैं कि किश्तवाड़ में हाल ही में जो सांप्रदायिक तनाव की घटना सामने आई थी, उसमें भी अब्दुल वाहिद का हाथ तो नहीं। इसके साथ ही उसके और कौन-कौन सहयोगी हैं, इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है।

बता दें कि पाकिस्तान और आतंकी संगठनों के लिए जासूसी की घटनाएँ लगातार आती रहती हैं। पिछले साल अक्टूबर में गुजरात आतंक निरोधी दस्ता (ATS) ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले ‘सीमा सुरक्षा बल (BSF)’ के जवान मोहम्मद सज्जाद को गिरफ्तार किया था।

गुजरात के भुज बटालियन में तैनात मोहम्मद सज्जाद व्हाट्सएप्प के माध्यम से पाकिस्तान को गुप्त व संवेदनशील सूचनाएँ मुहैया करा रहा था। वो जम्मू कश्मीर के राजौरी जिला स्थित सारोला गाँव का रहने वाला है।

गुजरात के गृह मंत्री को ‘ड्रग्स संघवी’ कहने वाले AAP नेता पर FIR दर्ज: भाजपा को कहा था- गुंडों की पार्टी, सांसद को ‘बूटलेगर’ बोला था

गुजरात में आम आदमी पार्टी और भाजपा आमने-सामने हैं। दोनों ही राजनीतिक दल एक-दूसरे पर हमलावर हैं। इसी क्रम में AAP के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया (Gopal Italia) पर गृह मंत्री हर्ष संघवी (Harsh Sanghvi) और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सीआर पाटिल (C.R. Patil) के खिलाफ गलत बयानबाजी करने के मामले में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

गोपाल इटालिया पर यह मुकदमा भाजपा कार्यकर्ता और ज्वैलर कारोबारी प्रताप भाई जीरावाल ने दर्ज करवाया है। प्रताप भाई ने इस बारे में कहा है कि गुजरात बीजेपी अध्यक्ष सीआर पाटिल को पूर्व बूटलेगर कहने और बीजेपी को गुंडों की पार्टी कहने के साथ ही हर्ष संघवी को ‘ड्रग्स संघवी’ कहने को लेकर उमरा पुलिस थाने में धारा 469, 500 (मानहानि), 504, 505 (1) B के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले की जाँच सूरत की क्राइम ब्रांच टीम को सौंपी गई है।

बता दें, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल के गुजरात दौरे से पहले बुधवार (31 अगस्त) को भाजपा और आप कार्यकर्ताओं के बीच सूरत में हाथापाई की खबर सामने आई थी। इस घटना के बाद, गोपाल इटालिया ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर AAP के कार्यकर्ताओं को घायल करने का आरोप लगाया था।

इस दौरान, बयान देते हुए आप प्रदेशाध्यक्ष गोपाल इटालिया ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सी आर पाटिल (C. R. Patil) को बूटलेगर तथा गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी को ड्रग्स संघवी कहकर संबोधित किया था, जिसके बाद, भाजपा की ओर से बयानबाजी की गई थी और अब केस दर्ज करवाया गया है।

गौरतलब है कि गुजरात में इस वर्ष के अंत या 2023 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों को मद्देनजर रखते हुए आम आदमी पार्टी के नेता लगातार एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। वहीं, केजरीवाल समेत अन्य नेता गुजरात का दौरा कर रहे हैं। गुजरात में साल 1995 से लेकर अब तक भाजपा की सरकार है।

‘ईदगाह में गणेश पूजा देख हम हो गए परेशान, दोबारा कभी ऐसा न हो’: अंजुमन-ए-इस्लाम ने दी कोर्ट जाने की धमकी, बोला- 999 साल तक जमीन हमारी

इस्लामी समूह अंजुमन-ए-इस्लाम कहना है कि वह कर्नाटक के हुबली जिले के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी उत्सव की अनुमति देने के लिए हुबली-धारवाड़ नगर निगम के आयुक्त के खिलाफ कर्नाटक उच्च न्यायालय में अवमानना ​​का मामला दर्ज करेगा। संस्था ने यह बात तब कही, जब कर्नाटक हाईकोर्ट ने उत्सव की अनुमति खुद दी थी।

अंजुमन-ए-इस्लाम के उपाध्यक्ष अल्ताफ नवाज ने कहा कि मुस्लिम समूह हुबली-धारवाड़ नगर निगम आयुक्त को अवमानना ​​के लिए अदालत में ले जाएगा। उन्होंने कहा, “हम ईदगाह मैदान में दूसरे समुदाय की धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्देश देने के लिए उच्च न्यायालय का रुख करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने हमारे संगठन को 999 साल की लीज के लिए ईदगाह मैदान दिया है।”

अल्ताफ नवाज ने कहा, “धार्मिक उद्देश्यों के लिए इस जमीन का उपयोग अगर कोई दूसरा समुदाय करता है तो वह अदालत की अवमानना ​​​​होगी। हम अन्य धार्मिक समुदायों के उत्सव के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ईदगाह मैदान में तीन दिवसीय गणेश उत्सव ने हमें वास्तव में परेशान कर दिया है।”

हुबली के ईदगाह मैदान में हिंदुओं द्वारा गणेश प्रतिमा की स्थापना 31 अगस्त को कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा अनुमति मिलने के बाद की गई थी। उसके बाद ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी का उत्सव मनाया गया था।

इसके पहले याचिका में अंजुमन-ए-इस्लाम ने धारवाड़ नगर निगम द्वारा गणेश पूजा के लिए साइट के उपयोग की मंजूरी के खिलाफ तर्क दिया था। हालाँकि, अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया था। इसमें कहा गया था कि यह नगर निगम की जमीन है और मुस्लिम दूसरे समुदायों को इसके इस्तेमाल से मना नहीं कर सकते, क्योंकि उन्हें साल में दो बार वहाँ पूजा करने की अनुमति थी।

बता दें कि कर्नाटक के हुबली जिले के ईदगाह मैदान में तीन दिवसीय गणेश उत्सव का समापन शुक्रवार को हुआ। समापन के दिन मूर्ति को सदाशिव नगर में तय स्थान पर विसर्जित कर दिया गया। समापन जुलूस का आयोजन रानी चेन्नम्मा मैदान गजानन उत्सव महामंडली द्वारा किया गया था। आयोजकों ने जुलूस से पहले एक महामंगलार्थी (अनुष्ठान) आयोजित किया और गणेश की मूर्ति को अलंकृत करने के लिए उपयोग किए जाने वाले आभूषणों और कपड़ों की नीलामी की। उसके बाद देवता को सदाशिव नगर में बने एक कृत्रिम तालाब में विसर्जित कर दिया गया।

महामंडली प्रमुख और विश्व हिंदू परिषद के नेता संजय भादस्कर ने जुलूस की आगवानी की। इस अवसर पर भाजपा नेता महेश तेंगिंकाई के अलावा विश्व हिंदू परिषद, श्रीराम सेना, आरएसएस, सोमवंशी सहस्रार्जुन क्षत्रिय समा, हिंदू जागरण वेदिक और हिंदुस्तान जनता पार्टी के सदस्य भी उपस्थित रहे।

शामली के मंदिर में यज्ञ-हवन से ठीक पहले 11 जगह फेंका गया माँस, ग्रामीण बौखलाए, पुलिस जाँच में जुटी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज (अगस्त 3, 2022) पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दौरे पर हैं। इस दौरे से पहले यहाँ के शामली जिले में दंगा कराने की साजिश सामने आई है। दरअसल, शामली जिले के सिक्का गाँव के भूमिया खेड़ा (ग्राम देवता) मंदिर में माँस के टुकड़े फेंके गए हैं, जिससे यहाँ का माहौल पूरी तरह से तनावपूर्ण हो गया है। स्थिति नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस द्वारा फोर्स तैनात की गई है।

बताया जा रहा है कि शामली जिले के सिक्का गाँव के भूमिया खेड़ा मंदिर में शनिवार (3 सितंबर 2022) को वार्षिक हवन, यज्ञ व प्रसाद वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया जाना था। ये कार्यक्रम हर वर्ष होता है, इसी की तैयारियाँ धूमधाम से चारो ओर थीं। लेकिन, इससे पहले ही मंदिर प्रांगण में 11 जगह माँस के टुकड़े फेंककर दंगा कराने की साजिश रची गई। माँस देखने के बाद लोगों में भारी आक्रोश है।

स्थानीय लोगों के पास से ऑपइंडिया को मिले वीडियो में ग्राम प्रधान ने कहा है, “यहाँ यज्ञ और पूजा होनी थी। इससे पहले ही किसी ने यहाँ पर माँस के टुकड़े फेंक दिए। पूर्व में गाँव में कभी भी ऐसी घटना सामने नहीं आई है। लेकिन आज भूमिया खेड़ा में 11 जगह पर माँस फेंका गया है। हम यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि किसने ये सब किया है।”

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि माँस के कुछ टुकड़े भूमिया खेड़ा गाँव की मुख्य सड़क पर भी फेंके गए थे। हालाँकि, सूचना मिलने के तुरंत बाद ही पुलिस द्वारा ये सभी माँस के टुकड़े हटवाते हुए पशु चिकित्सकों को बुलाकर माँस का परीक्षण कराया गया।

बता दें, भूमिया खेड़ा मंदिर में माँस मिलने की खबर मिलते ही गाँव के लोग इस मंदिर के पास एकत्रित हो गए। इसके बाद, पुलिस के सामने हंगामे जैसी स्थिति निर्मित हो रही थी। लेकिन, पुलिस ने मामले पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की बात कहते हुए ग्रामीणों को समझाकर शांत करवाया।

इस मामले में, ऑपइंडिया को मिले वीडियो में शामली के एएसपी ओपी सिंह ने कहा “सिक्का गाँव में ग्राम देवता के (भूमिया खेड़ा) मंदिर परसिर में माँस के टुकड़े फेंके जाने की जानकारी मिली है। पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है। फिलहाल अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। मुझे लगता है कि शरारती तत्व शामली जनपद के साम्प्रदायिक सौहार्द का परीक्षण कर रहे हैं कि कितने लोग जिम्मेदार हैं और कितने संवेदनशील हैं।”

ब्रह्मास्त्र नहीं ‘ड्रैगन’ था फिल्म का नाम, रणबीर कपूर को ‘शिव’ नहीं ‘मोहम्मद रूमी’ बनना था: फिल्म डायरेक्टर के पुराने बयान से खुलासा

‘ब्रह्मास्त्र’ के रिलीज होने से पहले सोशल मीडिया पर बॉयकॉट की माँग तेज हो गई है। इसी बीच फिल्म निर्देशक अयान मुखर्जी का एक पुराना बयान वायरल है। इसमें वह बता रहे हैं कि इस फिल्म का नाम पहले ‘ड्रैगन’ था और रणबीर कपूर उसमें पहले ‘शिव’ का नहीं बल्कि ‘जलाल अल-दीन मुहम्मद रूमी’ का रोल निभाने वाले थे।

हालाँकि अब इस फिल्म में अभिनेता का नाम शिव है और वे अग्निअस्त्र को प्रेजेंट करने वाले हैं। पहले वाला नाम 13 वीं शताब्दी के एक फारसी कवि जलाल अल-दीन मुहम्मद रूमी के नाम पर था।

बता दें कि फिल्म का नाम ‘ड्रैगन’ से ‘ब्रह्मास्त्र’ कर दिए जाने की खबर अब से करीब 5 साल पहले ही सामने आ चुकी थी। लेकिन अब ये बात हर जगह सार्वजनिक है। फिल्म के निर्देशक अयान मुखर्जी की साल 2019 में की गई एक पोस्ट वायरल हो रही है। यह पोस्ट उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर की थी और बताया था, “ब्रह्मास्त्र को शुरू हुए एक लंबा समय बीत गया है। फिल्म को शुरुआती दिनों में ड्रैगन कहा जाता था। मुझे वीएफएक्स के बारे में ज्यादा पता नहीं था, लेकिन फिर भी एक फिल्म का सपना देखा था।”

इसके कुछ दिनों के बाद निर्देशक ने एक और तस्वीर साझा की, जिसमें अभिनेता रणबीर कपूर दिखाई दे रहे हैं और उनके बाल काफ़ी लंबे दिखाई दे रहे हैं। इसको शेयर करते हुए उन्होंने लिखा कि पहले रणबीर का रूमी लुक ऐसा था। लंबे बालों वाला एक रूमी। यह तस्वीर फिल्म के शुरुआती लुक टेस्ट की है।

इसी पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा, “कई तरह के विचार और विमर्श के बाद ड्रैगन को ब्रह्मास्त्र बनाया गया। हमने रणबीर के बाल कटवाए और रूमी बन गया शिव।” बताया यह भी जा रहा है कि पिछले साल दिसंबर में अयान मुखर्जी ने सूचित किया कि फिल्म का पहले वाला नाम सुविचारित नहीं था। उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म का ‘ड्रैगन’ टाइटल अस्थायी है।

अयान मुखर्जी ने यह भी कहा, “मैंने इस पर ज्यादा विचार नहीं किया क्योंकि फिल्म में शिव के पास आग की ताकत है, मैंने इसे स्क्रिप्ट पर ‘ड्रैगन’ कहा है।” उन्होंने कहा, “लेकिन फिल्म हमेशा भारतीय संस्कृति और इतिहास से प्रेरित थी। जब इसे एक मुख्य और अंतिम शीर्षक देने का समय आया, तो ब्रह्मास्त्र ही सही शीर्षक लगा। लेकिन ड्रैगन नाम इसलिए दिया गया था क्योंकि यह आग, शक्ति से संबंधित था।”

झारखंड पुलिस को पता था अंकिता नाबालिग है, फिर भी बयान वाले उम्र को बढ़ा 19 साल किया: DSP नूर मुस्तफा पर शाहरुख को बचाने का लगा है आरोप

झारखंड के दुमका में बात नहीं करने पर जिंदा जलाकर मारी गई अंकिता के मामले में पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। झारखंड बाल कल्याण समिति ने कहा कि जब मृतक की हत्या की गई, तब वह नाबालिग थी। हालाँकि, पुलिस को इसकी जानकारी होने के बावजूद उसने रिपोर्ट में मृतक को बालिग दिखाया था।

रिपोर्टों के अनुसार, झारखंड पुलिस ने अपनी FIR में मृतक की उम्र 19 वर्ष की लिखी थी। दरअसल, अंकिता ने अपने बयान में अपनी उम्र 17 वर्ष बताई थी। इसके बाद पुलिस ने 17 साल को बढ़ाकर 19 साल कर दिया था। हालाँकि, गुरुवार (1 सितंबर 2022) को पुलिस ने माना कि लड़की की उम्र उस समय 15 वर्ष थी। इसके बाद आरोपितों के खिलाफ POCSO एक्ट की धाराएँ जोड़ीं।

माना जा रहा है कि मृतक की उम्र को बढ़ाकर उसे बालिग साबित करने की कोशिश की जा रही थी। इसके जरिए पुलिस एक तरह से आरोपित शाहरुख हुसैन और नईम खान उर्फ छोटू की मदद कर रही थी। बता दें कि इस मामले में डीएसपी नूर मुस्तफा पर आरोपितों की मदद करने का आरोप लगा है।

हालाँकि, मृतक लड़की ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में अपना बयान दिया था और अपनी उम्र 17 साल बताई थी, इसके बावजूद बयान वाले अंकित उम्र को काटकर वहाँ 19 वर्ष लिखा गया था। मामला सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने दुमका के डीआईजी को जाँच का निर्देश दिया है।

झारखंड बाल कल्याण समिति ने इस घटना का संज्ञान लिया था और खुलासा किया था कि 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली अंकिता नाबालिग थी। समिति ने कहा था कि मृतका की 10वीं की मार्कशीट में उसकी जन्मतिथि 26 नवंबर 2006 बताई गई है। इसके बाद पुलिस ने आनन-फानन में बताया कि लड़की की उम्र 15 साल थी।

बता दें कि DSP नूर मुस्तफा पर हिन्दू विरोधी आरोप लगने के बाद इस केस की जाँच से हटा दिया गया है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कुछ दस्तावेज साझा करते हुए कहा था कि उनके पास डीएसपी नूर मुस्तफ़ा के आदिवासी विरोधी एवं कम्यूनल होने के प्रमाण हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि आदिवासियों के एक शोषक ज़ुल्फ़िकार पर ST एक्ट का मामला दर्ज हुआ और वह जेल भी गया, लेकिन DSP नूर मुस्तफ़ा ने 90 दिनों तक चार्जशीट नहीं की। इसके आधार पर ज़ुल्फ़िकार को जमानत मिल गई। डीएसपी नूर मुस्तफ़ा ने जुल्फिकार के जेल से निकल जाने के कुछ ही देर बाद चार्जशीट दाखिल कर दिया था।

‘बॉलीवुड में KGF-2 किसी को नहीं आई पसंद’ : राम गोपाल वर्मा ने द कश्मीर फाइल्स को बताया- सबसे स्लो फिल्म, RRR को सर्कस कहा

साल 2022 में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली फिल्म द कश्मीर फाइल्स और केजीएफ-2 को लेकर बॉलीवुड निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने टिप्पणी की है। राम गोपाल वर्मा ने केजीएफ-2 के बारे में कहा कि ये फिल्म बॉलीवुड के बड़े निर्देशकों से आधे घंटे से ज्यादा नही झिल पाई। वहीं द कश्मीर फाइल्स को लेकर वह बोले कि ये फिल्म अब तक सबसे धीमी फिल्म बनाई गई।

बॉलीवुड हंगामा से बात करते हुए राम गोपाल वर्मा ने कहा, “दो फिल्म जिन्होंने सबकुछ गड़बड़ किया- KGF-2 और द कश्मीर फाइल्स हैं। इनमें KGF-2 तो ऐसी है जिसे बॉलीवुड में किसी ने पसंद नहीं किया। यही वजह है कि जब आपको फिल्म नहीं पसंद आती तो आप सोचते हैं कि इसके कामयाबी के पीछे क्या कारण है।”

उन्होंने कहा, “एक बहुत बड़े डायरेक्टर ने मुझसे कहा था- ‘रामू, मैंने ये फिल्म 5 बार देखने की कोशिश की, लेकिन आधे घंटे से ज्यादा नहीं देख पाया।” वर्मा कहते हैं, “आप KGF-2 को पसंद करें या न करें लेकिन आप इसकी कामयाबी को नजरअंदाज नहीं कर सकते। केजीएफ चैप्टर-2 बॉलीवुड पर मंडराते भूत जैसा है।”

उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि उन्हें फिल्म पसंद नहीं आई लेकिन उन्हें फिल्म देख हैरानी हुई। फिल्म निर्माता- फिल्म बनाने से पहले लॉजिक ढूँढते हैं, लेकिन जब केजीएफ-2 जैसी तर्कहीन फिल्म सारे रिकॉर्ड तोड़े, तब क्या कर लेंगे।

द कश्मीर फाइल्स सबसे स्लो फिल्म: राम गोपाल वर्मा

द कश्मीर फाइल्म पर बात करते हुए वह बोले, “ये फिल्म कम नहीं है। इसे एक गुमनाम डायरेक्टर ने बनाया जिसे बॉलीवुड में लोग गंभीरता से नहीं लेते। अनुपम खेर ही इस फिल्म का सबसे जाना-माना चेहरा थे। इसके बावजूद ये फिल्म 250 करोड़ रुपए कमा ले गई।”

वर्मा ने द कश्मीर फाइल्स को लेकर कहा, “ये फिल्म अब तक की सबसे धीमी फिल्म थी। फिल्म निर्माताओं के रूप में हमने अब तक जो कुछ बनाया, ये उसके विपरीत थी। इसमें कोई कहानी नहीं, कोई पहला-दूसरा स्क्रीनप्ले नहीं, कोई इंटरवल और कोई क्लाइमैक्स नहीं। लेकिन लोग फिर भी इसके लिए पागल हो रहे थे। मुझे नहीं लगता कि बीते 20 सालों में कोई फिल्म इतनी गंभीरता से देखी गई जितनी द कश्मीर फाइल्स को लोगों ने देखा।”

इसी तरह राम गोपाल वर्मा ने RRR पर कहा, “मैंने राजमौली को कहा कि RRR मेरे लिए एक सर्कस जैसी है। गलत ढंग में नहीं। सर्कस को लोग जोकर की वजह से याद रखते हैं। पर हकीकत में वहाँ बहुत कुछ होता है। RRR में जब राम चरण और जूनियर एनटीआर ने जब बच्चे को बचाया, तो मुझे जंगली सर्कस की याद आई, उसमें लोग इसी तरह रस्सी से लटक इधर-उधर जाते हैं।”

गुरुग्राम में यूनिवर्सिटी में नमाज, फुटबॉल खेलते हुए इबादत: नमाज के लिए अलग कमरा ‘अफवाह’ और आंतरिक मामला है विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए

सार्वजनिक स्थलों के बाद गुरुग्राम में अब जीडी गोयनका यूनिवर्सिटी कैम्पस के अंदर नमाज का मामला सामने आया है। आरोप है कि मुस्लिम छात्रों द्वारा कमरे में नमाज़ पढ़े जाने का हिन्दू छात्रों ने विरोध किया और जय श्री राम के नारे लगाए। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस पहुँची लेकिन किसी भी पक्ष द्वारा लिखित शिकायत न मिलने पर वापस लौट गई।

जीडी गोयनका यूनिवर्सिटी से जुड़ा यह मामला मंगलवार (30 अगस्त 2022) का बताया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मीडिया रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने नमाज के लिए अलग कमरा दिए जाने की बातों को अफवाह करार दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हंगामा कर रहे छात्रों का आरोप था कि यूनिवर्सिटी में मुस्लिम छात्रों को नमाज के लिए अलग से कमरा दिया गया है। विरोध कर रहे छात्रों का कहना था कि शिक्षा को किसी मत या मज़हब से नहीं जोड़ना चाहिए। इस दौरान छात्रों ने यूनिवर्सिटी की प्रॉक्टर तनूजा कौशिक को एक ज्ञापन भी सौंपा। छात्रों का कहना था कि उन्होंने इससे पहले भी कैम्पस में नमाज का विरोध किया था लेकिन उनकी शिकायत को अनसुना कर दिया गया था।

इस मामले पर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार धीरेंद्र सिंह परिहार के मुताबिक विश्वविद्यालय में कई सालों से सभी धर्म के लड़के पढ़ते हैं और वो एक दूसरे से मिल-जुल कर रहते हैं। उनका कहना है कि कैम्पस में न सिर्फ भारत के विभिन्न हिस्सों से बल्कि दूसरे देशों के छात्र भी पढ़ाई करते हैं। धीरेन्द्र सिंह के मुताबिक शायद फुटबॉल खेलते हुए अफ्रीकी महाद्वीप के विदेशी छात्रों ने नमाज पढ़ी थी। परिहार के अनुसार छात्रों ने आपस में मामले को सुलझा लिया है और अब विवाद जैसी कोई बात नहीं है।

इस घटना के वायरल हो रहे एक वीडियो में छात्रों का समूह एक जगह खड़े हो कर नमाज का विरोध दर्ज करवा रहा है। वहीं दूसरे वीडियो में लड़के कॉलेज कैम्पस में समूह बना कर घूम रहे हैं और नारेबाजी कर रहे हैं।

ऑपइंडिया से बात करते हुए गुरुग्राम के सोहना थाने के SHO इंस्पेक्टर उमेश कुमार ने बताया कि फोन पर मिली सूचना के बाद वो जीडी गोयनका यूनिवर्सिटी के अंदर गए थे लेकिन वहाँ कोई लिखित शिकायत किसी के भी तरफ से नहीं मिली। इंस्पेक्टर का कहना है कि हालात पूरी तरह से सामान्य हैं और यूनिवर्सिटी ने उन्हें बताया है कि यह उनका आंतरिक मामला था, जिसे उन्होंने सुलझा लिया है।

गौरतलब है कि विगत कुछ समय से सार्वजनिक स्थलों पर नमाज के विवाद को ले कर गुरुग्राम देश भर में चर्चा का केंद्र बना रहा था। मुख्यमंत्री खट्टर ने भी इस मामले में बयान देते हुए सार्वजानिक स्थल पर इबादत न करने की सलाह दी थी।