Home Blog Page 2460

1993 में मुंबई दहलाने का साजो-समान लेकर रायगढ़ ही आई थी ‘बिस्मिल्लाह’, फिर हथियार लेकर यहीं किनारे लगी दुबई से चली नाव

महाराष्ट्र के रायगढ़ में गुरुवार (18 अगस्त 2022) को एक संदिग्ध नौका मिली थी। इस नौका से हथियार और विस्फोटक बरामद हुए थे। हालाँकि इसके पीछे कोई आतंकी साजिश होने की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन एक तथ्य यह भी है कि 1993 में मुंबई सीरियल ब्लास्ट के लिए साजो-सामान लेकर ‘बिस्मिल्लाह’ नाम की नौका रायगढ़ ही आई थी। रिपोर्टों के अनुसार 93 बम धमाकों से पहले दुबई में गुप्त मीटिंग हुई थी। गुरुवार को मिली नौका भी आखिरी बार दुबई से ही रवाना हुई थी।

यही कारण है कि रायगढ़ जिले के श्रीवर्धन तालुके के हरिहरेश्वर में समुद्र से संदिग्ध नाव मिलने के बाद पुलिस ने जिले भर में हाई अलर्ट जारी कर दिया। नाव में 3 एके-47 राइफल्स, कारतूस और कुछ कागजात मिले हैं। नौका में हथियार होने के मकसद की पड़ताल चल रही है।

सीएनएन-न्यूज18 की रिपोर्ट में शीर्ष खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि गुरुवार को मिली नाव मई-जून में दुबई से रवाना हुई थी, जिसमें तीन क्रू मेंबर्स और पाँच यात्री सवार थे। 16 मीटर लंबी इस नाव ने 26 जून को ओमान की खाड़ी में मदद की गुहार लगाई थी। इसके बाद 27 जून को कंबाइंड टास्क फोर्स (CTF)-151 के कोरियाई नौसेना के पोत ROKS Dae Jo Yeon ने सभी को बचा लिया था।

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बताया था कि इस नौका का नाम लेडी हान है। इसका मालिक हाना लॉर्डऑर्गन नामक एक ऑस्ट्रेलियाई महिला के पास है। उन्होंने हाई टाइड के कारण नाव के रायगढ़ तट पर आने की संभावना जताई थी। 

तब रायगढ़ ही लाया गया था आरडीएक्स

12 मार्च 1993 को मुंबई में दो घंटे के भीतर सिलसिलेवार 12 बम धमाके हुए थे। सीरियल बम धमाकों में 257 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 713 लोग घायल हो गए थे। धमाकों के लिए रायगढ़ में ही आरडीएक्स, गोला-बारूद और अन्य हथियारों की खेप आई थी। इसके बाद मुंबई में अलग-अलग जगहों पर विस्फोटक प्लांट किए गए थे। ATS ने बताया था कि दुबई में एक सीक्रेट मीटिंग में इसका प्लान बना था। इस मीटिंग के बाद अल सदाबहार और बिस्मिल्लाह नाम की मछली पकड़ने वाली दो नौका एके-47, एके-56, पिस्टल, ग्रेनेड समेत तरह-तरह के हथियार और गोला-बारूद के साथ पाकिस्तान के कराची बंदरगाह से रवाना हुए थे।

कुछ दिनों बाद अल सदाबहार गुजरात के गोसबारा तट पर पहुँचा, जबकि बिस्मिल्लाह महाराष्ट्र की तरफ बढ़ गया और रायगढ़ जिले के शेखाड़ी तट पर ठहर गया। बिस्मिल्लाह में भरे विस्फोटक मुंबई लाए गए और 1993 के सीरियल ब्लास्ट को अंजाम दिया गया। उधर, अल सदाबहार से लाए गए हथियार और गोला-बारूद ट्रकों और कारों के जरिए मुंबई के वलसाड स्थित उमगग्राम लाया गया था। फिर वहाँ से उसे पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश भेजा गया।

‘₹1000 करोड़ के गिफ्ट लेकर Dolo-650 लिख रहे डॉक्टर’: दावे से सुप्रीम कोर्ट भी हैरान, बोले जस्टिस चंद्रचूड़- कोरोना में मैंने भी ली थी यही दवा

बुखार उतारने के लिए दी जाने वाली पैरासिटामोल दवा ‘डोलो-650’ बनाने वाली फर्मास्युटिकल कंपनी ने ब्रांडिंग के लिए डॉक्टरों के बीच घूस के रूप में एक हजार रुपए से अधिक के गिफ्ट बाँटे। यह सुनकर मामले की सुनवाई कर रहा सुप्रीम कोर्ट भी हैरान रह गया। कोर्ट ने इस मामले में केेंद्र सरकार से 10 दिनों में जवाब माँगा है।

मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएस बोपन्ना (Justices D.Y. Chandrachud and A.S. Bopanna) की बेंच ने इसे गंभीर मामला माना और कहा कि इस आरोप की तह तक जाना चाहिए। बता दें कि कंपनी पर एक संस्था ने यह आरोप लगाते हुए मामला दायर किया है।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “जो आप कह रहे हैं, वो मुझे सुनने में अच्छा नहीं लग रहा। ये वही दवाई है, जिसका कोविड के दौरान मैंने खुद इस्तेमाल किया। अगर ऐसा है तो ये वाकई गंभीर मसला है।”

फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FMSRA) की ओर से सीनियर एडवोकेट संजय पारिख ने यह दावा किया है। उन्होंने अपने इस दावे के पीछे सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT ) की जाँच रिपोर्ट का हवाला दिया है।

बता दें कि CBDT ने डोलो बनाने वाली कंपनी के 36 ठिकानों पर छापेमारी की थी। एजेंसी ने इसके बाद कहा था कि दवा निर्माता कंपनी कई तरह की अनैतिक गतिविधियों में शामिल है। इसके साथ ही उसने 300 करोड़ रुपए की टैक्स की चोरी भी की है। 

एडवोकेट पारिख ने बेंच को बताया कि 500 मिलीग्राम तक के किसी भी टैबलेट का बाजार मूल्य सरकार नियंत्रित होता है। इसमें डोलो 500 तक के टैबलेट भी शामिल हैं। वहीं, 500 मिलीग्राम से ऊपर की दवा की कीमत निर्माता कंपनी खुद तय कर सकती है। ऐसे में डोलो 650 मिलीग्राम टैबलेट को प्रेस्क्राइब करने के लिए डॉक्टरों को खूब फ्री गिफ्ट्स दिए गए और लाभ कमाया गया।

FMSRA ने अपनी याचिका में कहा है कि इस तरह के मामलों में रिश्वत के लिए डॉक्टरों पर तो केस चलता है, पर दवा कंपनियाँ बच जाती हैं। याचिका में डॉक्टरों को तोहफे देने वाली दवा कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग की गई है।

इसके साथ ही फार्मास्यूटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज के लिए यूनिफॉर्म कोड (UCPMP) बनाए जाने की माँग की गई है। याचिका में कहा गया है कि इसके कारण अक्सर इलाज करने वाले डॉक्टर महँगे गिफ्ट के लालच में मरीजों को वही दवाई पर्चे पर लिखते हैं, जो महँगी होती हैं। इससे मरीजों के सेहत पर भी प्रभाव पड़ता है।

बता दें कि डोलो-650 कोरोना काल के दौरान खूब चर्चा में था। उस दौरान लगभग हर डॉक्टर मरीजों को डोलो-650 को लिखते थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2022 को करेगा।

‘इसने मुझे ही नहीं, कई महिलाओं को पीटा है’: सलमान खान की एक्स गर्लफ्रेंड का दावा, कहा – वो मानसिक रूप से बीमार, उसे पूजना बंद करो

सलमान खान (Salman Khan) की एक्स गर्लफ्रेंड सोमी अली ने सोशल मीडिया के जरिए बॉलीवुड अभिनेता पर बिना नाम लिए एक बार फिर आरोप लगाए हैं। सोमी अली ने शुक्रवार (19 अगस्त, 2022) को अपने इंस्टाग्राम पर सलमान की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ का एक पोस्टर शेयर किया। इस पोस्टर में सलमान खान के साथ भाग्यश्री भी नजर आ रही हैं। उन्होंने लिखा है, “ये शख्स महिलाओं के साथ मारपीट करता है। इसने न सिर्फ मुझे, बल्कि कई महिलाओं को पीटा है। इसे पूजना बंद करो प्लीज। ये मानसिक रूप से बीमार है।”

यह पोस्ट वायरल हो गया है। हालाँकि, जिस इंस्टाग्राम अकाउंट से ये पोस्ट किया गया है, वो वेरिफाइड नहीं है, लेकिन इसे सोमी का रियल इंस्टा अकाउंट कहा जा रहा है।

बॉलीवुड की पूर्व अभिनेत्री सोमी ने पोस्ट के कैप्शन में किसी का भी नाम नहीं लिखा है। इसके साथ ही कमेंट्स को भी लिमिटिड रखा है। यानी, हर कोई उनके इस पोस्ट पर कमेंट नहीं कर सकता है। इस पोस्ट के सामने आने के बाद ऐसा कहा जा रहा है कि इस बार भी उन्होंने सलमान का नाम लिए बिना उन पर मारपीट का गंभीर आरोप लगाया है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी सोमी ‘दबंग’ फिल्म के अभिनेता पर कई गंभीर आरोप लगा चुकी हैं। उन्होंने इस साल मार्च में सलमान के ऊपर महिलाओं को एब्यूज करने का आरोप लगाया था। सोमी ने अपने सोशल मीडिया पर ‘मैंने प्यार किया’ फिल्म का पोस्टर शेयर करते हुए सलमान पर निशाना साधा और साथ में ऐश्वर्या राय बच्चन को भी टैग किया था।

सोमी ने लिखा था, “बॉलीवुड के हार्वे वेनस्टेन। तुम बेनकाब हो जाओगे। जिन महिलाओं का तुमने शोषण किया है, वे एक दिन जरूर दुनिया के सामने आएँगी और सच्चाई सबके सामने आएगी। जैसे ऐश्वर्या राय के साथ वाली आई थी।” कई मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया गया था कि रिलेशनशिप के दौरान सलमान खान ने ऐश्वर्या राय के साथ सेट पर मारपीट की थी। कथित तौर पर सलमान उन पर हावी हो जाते थे। उन्हें प्रताड़ित करते थे।

सलमान खान का गुस्सा उस समय भी देखा गया था, जब विवेक ओबरॉय के साथ उनका विवाद हुआ था। कहते हैं कि सलमान के गुस्सैल रवैये के कारण ही ऐश्वर्या ने उनसे अपना रिश्ता तोड़ा था।

‘वो हिन्दू क्रिकेटर है, उससे नहीं मिलना चाहता’: वीडियो से सामने आई मदरसे के नाबालिग छात्र की सोच, लोग बोले – बचपन से देते हैं कट्टरपंथ का इंजेक्शन

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे बांग्लादेश का बताया जा रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक नाबालिग बच्चा सिर्फ इसलिए बांग्लादेशी क्रिकेटर सौम्य सरकार से नहीं मिलना चाहता है, क्योंकि वो हिंदू हैं।

यह वीडियो ‘वॉइस ऑफ बांग्लादेशी हिंदू’ नाम के ट्विटर पेज से शेयर की गई है। इसके मुताबिक, वीडियो में दिख रहा बच्चा बांग्लादेश के एक मदरसे में पढ़ता है। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक रिपोर्टर बच्चे से पूछता है कि वह किस क्रिकेटर से मिलना चहता है? इसका जवाब देते हुए कहता है, “मैं मुश्फिकुर, मुस्तफिजुर रहमान, तासकीन अहमद और सैरिफुल से मिलना चाहता हूँ।” इस पर रिपोर्टर उससे सौम्य सरकार के बार में पूछता है। इस पर बच्चा कहता है, “सौम्य सरकार तो हिंदू क्रिकेटर है। मैं उससे नहीं मिलना चाहता।” 

इस वीडियो के सामने आने के बाद लोग मदरसा और उसमें दी जाने वाली कट्टरपंथी तालीम पर सवाल उठा रहे हैं और उसे शर्मनाक बता रहे हैं।

एक यूजर ने लिखा, “बांग्लादेश तो पाकिस्तान से भी बदतर लग रहा है। बस कभी उतना न्यूज में नहीं आता, जितना पाकिस्तान।”

एक अन्य सूजर ने लिखा, “यहाँ तक ​​कि मुस्लिम बच्चे भी अपने मजहबी जुड़ाव के बारे में काफी स्पष्ट हैं। केवल हिंदू ही भ्रमित हैं। इनका सदियों से ब्रेनवॉश किया जा रहा है। यह नहीं जानते कि शैतान कभी नहीं बदलता और अंततः मूर्ख हिंदुओं को खा जाएगा।”

वेदांत ने लिखा, “यह मुस्लिमों की सामान्य सोच है। वे अपने DNA के अंदर इसे कभी नहीं बदलेंगे। बहुत कम लोग इस बीमारी से उबर पाए हैं।”

एक यूजर ने लिखा, “यह एक तरह का जहर है जो इस्लाम मजहब में बच्चों में भरा जाता है। जितनी जल्दी लोग इसे समझ लें और दूसरे धर्मों में चले जाएँ, उतना ही अच्छा है।”

प्रशांत नाम के यूजर ने लिखा, “यही वह स्तर है जिससे वे बचपन से ही बच्चों में नफरत का इंजेक्शन लगाते हैं। इसलिए इस तरह के ब्रेनवॉश से दंगों और हिंदुओं की हत्या की उम्मीद की जाती है। फिर वे अपनी गरीबी के लिए दूसरों को दोष देते हैं।”

गौरतलब है कि बांग्लादेश में अराजकता तेजी से फैल रही है। कट्टरपंथियों के प्रदर्शन और हिंदुओं एवं हिंदू मंदिरों पर हमला वहाँ आम बात हो गई है। हाल ही में बांग्लादेश के केनमारी मंदिर में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों के साथ तोड़-फोड़ की गई। बताया गया कि मंदिर प्रशासन मे मदरसे के कुछ छात्रों को मंदिर से सटे मैदान में फुटबॉल खेलने से रोक दिया। इससे बौखलाए छात्रों ने मंदिर पर हमला कर दिया।

16 जुलाई को बांग्लादेश (Bangladesh) में नरैल के लोहागारा के सहपारा इलाके में एक फेसबुक पोस्ट से गुस्साए कट्टरपंथी मुस्लिमों (Radical Islam) की भीड़ ने हिंदुओं के एक मंदिर, किराने की दुकान और कई घरों को तोड़ दिया था। इतना ही नहीं उसमें आग भी लगा दी थी। इससे पहले मार्च 2022 में, बांग्लादेश के ढाका डिवीजन में वारी में लालमोहन साहा स्ट्रीट पर इस्कॉन मंदिर पर हमला किया गया था।

रोहिंग्या को फ्लैट में शिफ्ट करने का फैसला दिल्ली सरकार का: मनीष सिसोदिया के ‘प्रलाप’ पर गृह मंत्रालय का जवाब, बताया- रिफ्यूजी कार्ड भारत में अवैध

दिल्ली (Delhi) में अवैध रूप से रह रहे म्यामांर (Myanmar) के रोहिंग्या मुस्लिम (Rohingya Muslims) घुसपैठियों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए बने फ्लैटों में स्थानांतरित करने की खबरों के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जवाब दिया है। मंत्रालय ने कहा है कि रोहिंग्याओं को मदनपुर खादर से बकरवाला स्थित EWS फ्लैट में स्थानांतरित करने का निर्णय अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के नेतृत्व वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार (AAP Government) का था।

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है कि दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग और गृह विभाग की तरफ से ही यह प्रस्ताव दिया गया। 29 जुलाई 2022 को दिल्ली के मुख्य सचिव की बैठक में बकरवाला क्षेत्र में केवल अवैध रोहिंग्या मुस्लिमों को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया।

पत्र में राज्यमंत्री ने कहा कि है कि उस दौरान बैठक में उपस्थित गृहमंत्रालय के निदेशक और दिल्ली के FRRO ने दिल्ली सरकार को बताया कि भारत शरणार्थियों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन-1951 और 1967 के उसके प्रोटोकॉल का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है। इसलिए UNHCR के शरणार्थी कार्ड का भारत में कोई वैधता नहीं है। इस कार्ड के धारक भारत में अवैध हैं।

केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा द्वारा लिखा गया पत्र (साभार: नवभारत टाइम्स)

पत्र में आगे कहा गया है कि 17 अगस्त 2022 को रोहिंग्याओं को EWS फ्लैट में स्थानांतरित करने के दिल्ली सरकार के फैसले की जानकारी मिलने के बाद गृहमंत्रालय ने दिल्ली को पत्र लिखा और ऐसा नहीं करने के लिए कहा। इसके साथ ही इन घुसपैठियों के खिलाफ विदेशी अधिनियम-1946 एवं संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई करने के लिए कहा गया।

पत्र में यह भी कहा गया है कि गृहमंत्रालय समय-समय पर सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखकर रोहिंग्या सहित सभी अवैध विदेशियों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने के लिए लिखता रहा है। इसलिए इन अवैध घुसपैठियों के खिलाफ भी दिल्ली सरकार नियमानुसार कार्रवाई करे।

दरअसल, यह पूरा विवाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) के ट्वीट के बाद उठा। पुरी ने अपने ट्वीट में कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी (NCR) में रहने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों को EWS फ्लैटों में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोग इसकी आलोचना करने लगे। इसके बाद बुधवार (17 अगस्त 2022) को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने इस तरह का कोई निर्णय नहीं लिया है।

उधर विवाद बढ़ने के बाद दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने गुरुवार (18 अगस्त 2022) को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (MHA Amit Shah) को पत्र लिख था। इसमें उन्होंने आग्रह किया था कि इस बात की ‘निष्पक्ष जाँच’ की जाए कि किसके निर्देश पर यह निर्णय लिया गया था।

सिसोदिया ने इसे ‘साजिश’ बताया था और आरोप लगाया था कि यह निर्णय केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के कुछ अधिकारियों ने लिया था। उन्होने कहा था कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इस मामले में पूरी तरह ‘अंधेरे’ में रखा गया।

बता दें कि पिछले साल केजरीवाल सरकार ने रोहिंग्याओं को 240 फ्लैट्स दिलाने का प्रस्ताव नई दिल्ली नगर परिषद (New Delhi Municipal Council) के सामने रखा था। इसका खुलासा दिल्ली के भाजपा सांसद गौतम गंभीर (BJP MP Gautam Gambhir) ने किया था। इस पत्र के दाईं ओर ऊपर में ‘URGENT’ लिखकर उसे अंडर लाइन भी किया गया है।

भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने इसे शेयर करते हुए लिखा था, “आज दिल्ली के बेशर्म सीएम पूरी तरह बेनकाब हो गए हैं। उन्होंने रोहिंग्याओं के लिए बक्करवाल में फ्लैट माँगते हुए एक पत्र भेजा और अब वह वही कर रहे हैं जिसके लिए उन्हें जाना जाता है।” उन्होंने सीएम केजरीवाल को ‘गटर छाप राजनीति’ करने वाला मुख्यमंत्री भी बताया।

सीमावर्ती क्षेत्रों में डेमोग्राफी बदलाव को लेकर सतर्क रहें, जुटाएँ जानकारियाँ: राज्यों के पुलिस प्रमुखों से बोले अमित शाह, कई इलाकों में तेज़ी से बढ़े मुस्लिम

देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार हो रहे डेमोग्राफी बदलाव को लेकर अब केंद्रीय गृह मंत्रालय भी सख्त हो गया है। दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन (National Security Strategies Conference)’ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अधिकारियों को इस पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। अमित शाह ने सीमावर्ती राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को कहा है कि वो बॉर्डर एरियाज में हो रहे डेमोग्राफी बदलाव पर नजर रखें।

इसमें खासकर पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड के पुलिस प्रमुखों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। सम्मेलन के समापन समारोह में बोलते हुए अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि देश और युवाओं के भविष्य को लेकर लड़ाई मुख्य प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने DGP कॉन्फ्रेंस की रूपरेखा बदल दी है, जिसके बाद आतंरिक सुरक्षा की मजबूती और नई चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जाता है।

उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया कि सीमावर्ती जिलों में सभी तरह की तकनीकी और रणनीतिक जानकारियाँ हासिल की जाएँ। उन्होंने जम्मू कश्मीर में आतंकियों के सफाई और उत्तर-पूर्व में उग्रवादियों के प्रभाव को ख़त्म किए जाने को अपनी सरकार की सफलताओं में से एक गिनाया। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सभी राज्यों को आतंरिक सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बॉर्डर पर स्थित जिलों की जानकारियों को एक-दूसरे से साझा किए जाने पर भी बल दिया।

सीमावर्ती क्षेत्रों में डेमोग्राफी बदलाव चिंताजनक

आपको जानकर हैरानी होगी कि उत्तर प्रदेश और असम के ऐसे इलाकों में अचानक से साल 2011 के बाद 32% मुस्लिम बढ़ गए जबकि पूरे राज्य में मिलाकर ये दर 10-15 प्रतिशत की है। कथिततौर पर सीमावर्ती इलाकों में मुस्लिम आबादी 20% तेजी से बढ़ी है और साथ ही इनके मजहबी स्थलों की गिनती में भी वृद्धि देखी गई है। नेपाल और बांग्लादेश से लगे इलाकों में ये बदलाव देखा जा रहा है। माँग की गई है कि बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 50 किमी से बढ़ाकर 100 किमी किया जाए ताकि उन्हें जाँच में आसानी हो।

यूपी और असम से पहले राजस्थान में भी अचानक से मुस्लिम आबादी में हुई वृद्धि सुरक्षा एजेंसियों की चिंता का कारण बनी थी। बीएसएफ अध्य्यन में सामने आया था कि राजस्थान के इलाकों में हुआ जनसांख्यिक बदलाव में अजीब सा फर्क था। जहाँ बाकी समुदाय के लोगों में केवल 8-10 फीसद आबादी बढ़ी मिली थी। वहीं मुस्लिमों की जनसंख्या 20-25 फीसद तेजी से बढ़े थे। इसके अलावा अचानक से ज्यादा बच्चों को मदरसों में जाता देखा गया था और ये भी पता चला कि पोखरण, मोहनगढ़ और जैसलमेर जैसे सीमा वाले इलाकों में अचानक देवबंद के मौलवी आने लगे जो समुदाय को कट्टरपंथ की तालीम देते थे।

कर्नाटक के स्कूलों में अब वक्फ बोर्ड को चाहिए नमाज के लिए कमरा: गणेशोत्सव की अनुमति से भड़के, शिक्षा मंत्री से माँगा इस्तीफा

कर्नाटक के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश (BC Nagesh) मुस्लिम संगठनों के निशाने पर हैं। शैक्षणिक संस्थानों में गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) मनाने की अनुमति दिए जाने को लेकर उनके इस्तीफे की माँग कर रहे हैं। वक्फ बोर्ड ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए शैक्षणिक संस्थानों में नमाज पढ़ने के लिए अलग कमरा और मुस्लिम त्योहारों को मनाने की अनुमति देने की माँग की है। वहीं कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) के प्रदेश अध्यक्ष आठवुल्ला पुंजालकट्टे (Athavulla Punjalkatte) ने मंत्री के इस्तीफे की माँग की।

कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की छात्र शाखा CFI ने मंत्री के फैसले को एकतरफा और पक्षपातपूर्ण बताया है। ट्वीट कर कहा है, “शिक्षा मंत्री को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बुनियादी ढाँचे के विकास पर ध्यान देना चाहिए न कि सांप्रदायिक नीतियों और बयानों पर।”

दरअसल, बेंगलुरु (Bengaluru) में गुरुवार (18 अगस्त 2022) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नागेश ने कहा था, “स्कूलों को हर साल की तरह इस साल भी गणेश चतुर्थी मनाने की पूरी आजादी है। यह एक गैर-धार्मिक आयोजन है, जो समाज को एकजुट करता है।” उन्होंने स्कूलों में गणेश चतुर्थी मनाने की अनुमति देते हुए कहा कि देश की आजादी से पहले से भी स्कूलों में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। साथ ही उन्होंने स्कूलों में अन्य धार्मिक गतिविधियों की अनुमति देने से इनकार किया।

शिक्षा मंत्री ने कहा था, “गणेशोत्सव इस देश में स्वतंत्रता आंदोलन के हथियार के रूप में शुरू किया गया था। इससे पहले गणपति पूजा घरों के अंदर की जाती थी। बाल गंगाधर तिलक के आह्वान पर स्कूलों, छात्रावासों और सार्वजनिक स्थानों पर गणपति उत्सव शुरू किया गया था। इस तरह की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही हैं और इसे रोकने का कोई सवाल ही नहीं है। हमने धार्मिक प्रथाओं के लिए कोई नई अनुमति नहीं दी है।”

लेकिन मुस्लिम संगठनों को यह रास नहीं आ रहा। वे इसे हिजाब मामले में उच्च न्यायालय के फैसले से जोड़कर देख रहे हैं। हाई कोर्ट ने कक्षाओं के अंदर हिजाब और भगवा शॉल सहित सभी धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। कर्नाटक वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शाफी सादी (Shaafi Saadi) ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाते हुए कई माँगे रखी हैं। उन्होंने मुस्लिम त्योहार मनाने की इजाजत देने और छात्रों को हर रोज नमाज अदा करने के लिए एक अलग कमरा देने की माँग की है। उनका कहना है कि सभी धर्म के छात्रों को समान अवसर दिया जाना चाहिए। बच्चों के लिए धर्मों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। नैतिक शिक्षा की नींव मजबूत करने के लिए छात्रों को मजहबी पाठ पढ़ाया जाना चाहिए।

वहीं, श्रीराम सेना के प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने वक्फ बोर्ड के माँगों की निंदा करते हुए सरकार से इसे खारिज करने की माँग की है। मुतालिक ने कहा, “आज वे स्कूलों में नमाज की अनुमति माँग रहे हैं, कल शुक्रवार को छुट्टी की माँग करेंगे। स्कूलों के इस इस्लामीकरण की अनुमति सरकार को नहीं देनी चाहिए।”

‘अब नहीं दिखा पाएगा हवस’: घर में घुसकर 14 साल की लड़की से रेप की कोशिश, बेटी को बचाने के लिए 40 मिनट जूझी माँ फिर काट दिया गुप्तांग

उत्तर प्रदेश के लखीमपुरी खीरी (Lakhimpur Kheri) में एक माँ ने उस युवक का गुप्तांग काट दिया, जिसने घर में घुसकर उसकी 14 साल की बेटी से रेप की कोशिश की थी। युवक का लखनऊ में इलाज चल रहा है। महिला की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना लखीमपुर खीरी जिले के महेवागंज का है। महिला का आरोप है कि युवक ने बुधवार (17 अगस्त 2022) को उसकी बेटी से रेप का प्रयास किया। युवक पर धारदार हथियार से हमला करने के बाद महिला खुद पुलिस के पास पहुँच गई। कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हमला करने वाली 36 वर्षीय महिला और आरोपित युवक लिव इन पाटर्नर हैं। महिला बेटी को लेकर अपने पति से अलग रह रही थी।

आरोप है कि युवक ने जब रेप की कोशिश की उस समय महिला खेत में काम कर रही थी। अचानक ही वह घर पहुँची और आरोपित को रंगे हाथों पकड़ लिया। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार बेटी को बचाने के लिए महिला करीब 40 मिनट तक युवक से जूझी। जब उसे लगा कि वह युवक पर काबू नहीं पा सकती है तो उसने किचन से चाकू लाकर उसका गुप्तांग काट दिया। युवक को आठ टाँके लगने की बात कही जा रही है। महिला का कहना है, “मुझे उसका गुप्तांग काटने का अफसोस नहीं है। उस समय मैं उसकी हत्या भी कर सकती थी। दरिंदों को ऐसी ही सजा मिलनी चाहिए। अब वह किसी को हवस का शिकार नहीं बना सकेगा।”

लखीमपुर पुलिस स्टेशन के एसएचओ का कहना है कि महिला करीब दो साल से पति से अलग रह रही है। उसका पति शराबी है। महिला की शिकायत के आधार पर आरोपित युवक के खिलाफ धारा 376 और पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपित के ठीक होने के बाद उससे पूछताछ की जाएगी।

‘जिस दिन NYT ने फोटो छापी, उसी दिन मनीष के घर भेज दी CBI’: केजरीवाल का अलग ही ‘दर्द’, दारू वाली पॉलिसी को लेकर 21 जगहों पर छापे

दिल्ली में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) 21 ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर पर भी छापा मारा गया है। सीबीआई की ये कार्रवाई दिल्ली सरकार की एक्साइज पॉलिसी को लेकर है। बता दें कि दिल्ली का एक्साइज विभाग मनीष सिसोदिया के अधीन है। सीबीआई के एक अधिकारी ने कहा, “सीबीआई ने दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के आवास सहित आबकारी नीति मामले में दिल्ली-एनसीआर में 21 स्थानों पर छापेमारी की है।”

इस रेड को लेकर मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा है, “सीबीआई आई है। उनका स्वागत है। हम कट्टर ईमानदार हैं। लाखों बच्चों का भविष्य बना रहे हैं। बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश में जो अच्छा काम करता है उसे इसी तरह परेशान किया जाता है। इसलिए हमारा देश अभी तक नम्बर-1 नहीं बन पाया।”

सिसोदिया ने एक अन्य ट्वीट में लिखा है, “हम सीबीआई का स्वागत करते हैं। जाँच में पूरा सहयोग देंगे ताकि सच जल्द सामने आ सके। अभी तक मुझ पर कई केस किए, लेकिन कुछ नहीं निकला। इसमें भी कुछ नहीं निकलेगा। देश में अच्छी शिक्षा के लिए मेरा काम रोका नहीं जा सकता।”

उन्होंने कहा है, “ये लोग दिल्ली की शिक्षा और स्वास्थ्य के शानदार काम से परेशान हैं। इसलिए दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और शिक्षा मंत्री को पकड़ा है, ताकि शिक्षा स्वास्थ्य के अच्छे काम रोके जा सकें। हम दोनों के ऊपर झूठे आरोप हैं। कोर्ट में सच सामने आ जाएगा।”

छापेमारी से बिफरे अरविंद केजरीवाल

मनीष सिसोदिया पर सीबीआई की छापेमारी को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा है, ”जिस दिन अमेरिका के सबसे बड़े अख़बार NYT के फ़्रंट पेज पर दिल्ली शिक्षा मॉडल की तारीफ और मनीष सिसोदिया की तस्वीर छपी, उसी दिन मनीष के घर केंद्र ने CBI भेजी। CBI का स्वागत है। पूरा सहयोग करेंगे। पहले भी कई जाँच/रेड हुईं, लेकिन कुछ नहीं निकला। अब भी कुछ नहीं निकलेगा।”

उन्होंने आगे लिखा, “दिल्ली के शिक्षा और स्वास्थ्य मॉडल की पूरी दुनिया चर्चा कर रही है। इसे ये रोकना चाहते हैं, इसलिए दिल्ली के स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रियों पर रेड और गिरफ़्तारी की कार्रवाई चल रही है। 75 सालों में जिसने भी अच्छे काम की कोशिश की उसे रोका गया। इसलिए भारत पीछे रह गया। लेकिन हम दिल्ली के अच्छे कामों को रुकने नहीं देंगे।”

क्या है पूरा मामला?

यह मामला दिल्ली की आबकारी नीति यानी एक्साइज पॉलिसी 2021-22 से जुड़ा है। नीति में गड़बड़ी के आरोपों के बाद पिछले दिनों उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई जाँच की सिफारिश की थी। एलजी ने मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बाद यह कदम उठाया था। इस रिपोर्ट में मनीष सिसोदिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। 

रिपोर्ट में क्या है?

रिपोर्ट में दावा किया गया था कि GNCTD अधिनियम 1991, व्यापार नियमों के लेनदेन (TOBR)-1993, दिल्ली उत्पाद शुल्क अधिनियम-2009 और दिल्ली उत्पाद शुल्क नियम-2010 का प्रथम दृष्टया उल्लंघन किया गया। इसके अलावा एक्साइज पॉलिसी में नियमों को ताक पर रखकर शराब बेचने वालों को टेंडर बाँटे गए। इसी रिपोर्ट के आधार पर एलजी ने सीबीआई जाँच की सिफारिश की थी। जिसके बाद आम आदमी पार्टी की सरकार ने इसे वापस लेने का फैसला लिया था।

गौरतलब है कि नई आबकारी नीति 2021-22 को पिछले साल 17 नवंबर से लागू किया गया था, जिसके अंतर्गत दिल्ली को 32 जोन में बाँटा गया था। इसके तहत शहर भर में 849 दुकानों के लिए निजी बोलीदाताओं को खुदरा लाइसेंस दिए गए थे। आरोप है कि दिल्ली सरकार ने शराब कारोबारियों को टेंडर प्रक्रिया के जरिए 144.36 करोड़ रुपए का लाभ पहुँचाया।

ममता बनर्जी से मिले सुब्रमण्यम स्वामी, बंगाल की CM को बताया ‘साहसी और करिश्माई’: क्या सियासत के बुझे हुए कारतूसों का नया ठिकाना है TMC

ऐसा लगता है कि पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) इस समय भारतीय राजनीति के अप्रासंगिक चेहरों का पसंदीदा ठिकाना है। खासकर, वे नेता जो बीजेपी में किनारे किए जा चुके हैं। इस सूची में नया नाम सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanyam Swami) का बताया जा रहा है। उन्होंने गुरुवार (18 अगस्त 2022) को कोलकाता सचिवालय में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) से मुलाकात की।

ममता को साहसी और करिश्माई नेता बताते हुए स्वामी ने ट्वीट कर इस मुलाकात की जानकारी दी है। उन्होंने तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “आज मैं कोलकाता में था। वहाँ मैं साहसी और करिश्माई नेता ममता बनर्जी से मिला। मैंने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के खिलाफ उनकी लड़ाई की प्रशंसा की, जिसने कम्युनिस्टों का सफाया कर दिया था।”

इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में स्वामी के टीएमसी में शामिल की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालाँकि, पूर्व में स्वामी ऐसी खबरों का खंडन कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि उन्हें टीएमसी में शामिल होने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वह पहले से ही ममता बनर्जी के साथ हैं। इससे पहले भी कई मौकों पर वे ममता बनर्जी की तारीफ कर चुके हैं। 1 जुलाई 2022 को उन्होंने ममता को बुद्धिमान नेता बताते हुए कहा था, “हमें वैचारिक मतभेद होने पर भी प्रतिभा को पहचानना होगा।”

मालूम हो कि पिछले साल नवंबर में भी सुब्रमण्यम स्वामी टीएमसी चीफ ममता बनर्जी से मिले थे। दोनों नेताओं की यह बैठक दिल्ली में हुई थी। उस समय, उन्होंने जेपी (जयप्रकाश नारायण), मोरारजी देसाई, राजीव गाँधी, चंद्रशेखर और पीवी नरसिम्हा राव के साथ टीएमसी सुप्रीमो की तुलना करते हुए ट्वीट किया था। इस ट्वीट में कहा था कि ममता बनर्जी में बड़े नेताओं वाले गुण हैं।

सुब्रमण्यम स्वामी ने लिखा था, ”मैं जितने भी नेताओं से मिला और उनके साथ काम किया, उनमें ममता बनर्जी जयप्रकाश नारायण (जेपी), मोरारजी देसाई, राजीव गाँधी, चंद्रशेखर और पीवी नरसिंह राव से मेल खाती हैं। इन नेताओं की कथनी और करनी समान है। भारतीय राजनीति में यह दुर्लभ ही होता है।”

बीजेपी के पूर्व सांसद स्वामी से पहले यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बीजेपी के नेता भी मोदी सरकार को कोसते-कोसते टीएमसी का दामन थाम चुके हैं। यशवंत सिन्हा ने विपक्ष का राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने पर टीएमसी से इस्तीफा दे दिया था, जबकि शत्रुघ्न सिन्हा आसनसोल उपचुनाव में जीत हासिल कर लोकसभा पहुँचने में सफल हुए हैं। ऐसे में स्वामी पिछले कुछ समय से जिस तरह से ममता बनर्जी की सार्वजनिक प्रशंसा कर रहे हैं, उससे उनके भी टीएमसी में जाने की संभावना जताई जा रही है।