Home Blog Page 2460

वो मुगल मर्दिनी रानी, जिन्होंने छत्रपति शिवाजी के बाद मराठा साम्राज्य को सँभाला; औरंगजेब को बार-बार चटाई धूलः पर्दे पर आएगी ताराबाई की कहानी

मुग़ल आक्रांताओं में सबसे क्रूर शासक माने जाने वाले औरंगजेब के सम्पूर्ण भारत जीतने के सपने के बीच दीवार बनी रानी ताराबाई पर मराठी फिल्म बनने जा रही है। इसकी शूटिंग मंगलवार (23 अगस्त, 2022) से शुरू हो चुकी है। बताया जा रहा है कि यह फिल्म औरंगजेब के अत्याचारों का काला चिट्ठा खोलेगी। मराठा साम्राज्य की महारानी ताराबाई के इतिहास को फिल्म में दिखाया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म की रिलीज डेट को लेकर तो निर्माताओं ने अभी स्पष्ट बात नहीं की है। लेकिन फिल्म को 2023 में रिलीज कर दिया जाएगा, ऐसी खबरें सामने आ रही है। ‘रानी ताराबाई’ के जीवन पर बनी इस फिल्म का नाम ‘मोगल मर्दिनी छत्रपति ताराराणी’ रखा गया है। फिल्म में रानी ताराबाई का किरदार सोनाली कुलकर्णी निभाने वाली हैं।

रानी ताराबाई का इतिहास

आपने अक्सर भारत के उन वीर योद्धाओं के बारे में सुना होगा, जिन्होंने राष्ट्र और धर्म के लिए विदेशी आक्रांताओं को धूल चटाई। इस सूची में सम्राट पृथ्वीराज चौहान, महाराणा प्रताप, छत्रपती शिवाजी महाराज और पेशवा बाजीराव जैसे वीर सहित कई नाम शामिल हैं। इन सबके बारे में आप सभी जानते होंगे, लेकिन आप में से ज्यादातर लोग शायद मराठा साम्राज्य की वीरांगना ‘महारानी ताराबाई’ के इतिहास से परिचित नहीं होंगे।

‘स्टोरी टाइम्स’ में छपे एक लेख के मुताबिक, रानी ताराबाई ने अपनी वीरता और कौशल से मराठा साम्राज्य को मुगल आक्रांत औरंगजेब से कई सालों तक बचाकर रखा। रानी ताराबाई का जन्म 1675 में हुआ था। वो छत्रपति शिवाजी महाराज के सरसेनापति हंबीरराव मोहिते की पुत्री थीं। इनका विवाह संभाजी महाराज के सौतेले भाई और शिवाजी महाराज के छोटे बेटे छत्रपति राजाराम महाराज से हुआ था।

सन् 1700 में मराठा छत्रपती राजाराम महाराज की मृत्यु के बाद ताराबाई ने अपने 4 वर्षीय पुत्र शिवाजी द्वितीय का राज्याभिषेक करवाकर उन्हें मराठा साम्राज्य का महाराज घोषित किया। अपने पुत्र को राजगद्दी पर बैठाकर ताराबाई ने ही मराठा साम्राज्य को औरंगजेब और मुगलों से संरक्षित रखा। उन्होंने 1700 से 1707 ईस्वी तक औरंगजेब से सीधे लोहा लिया।

फोटो साभार: इंडिया टाइम्स

इन 7 सालों में ताराबाई लगातार मुगलों पर आक्रमण करती रहीं। वे सेना को उत्साहित करतीं और किले बदलती रहती। उन्होंने जनता और सेना का विश्वास जीतकर मराठों को बढ़ाना शुरू किया। इस दौरान ताराबाई ने औरंगजेब की नाक के नीचे से सूरत की तरफ से मुगलों के क्षेत्रों पर आक्रमण करना शुरू किया। औरंगजेब मरते दम तक ताराबाई से नहीं जीत पाया और 1707 में उसने दम तोड़ दिया।

‘पब्लिकेशन डिवीजन’ की पुस्तक ‘भारत की नारी रत्न‘ में इतिहासकारों के हवाले से जिक्र है, “वह मराठा रानी एक बाघिन के जैसी हैं। एक छोर से दूसरे छोर, एक किले से दूसरे किले तक दौड़ती रहती, सैनिकों की परेशानियों को भी वो अपना मानती हैं। असहनीय तेज धूप को सहती और भूमि पर ही सोती। अपने सिपाहियों का जोश बढ़ाती, मुगलों द्वारा कब्जा की गई सीमा में आक्रमण करने की रणनीति तैयार करती। उनकी सोच इतनी चौकस और निर्णय इतने अचूक होते थे कि युद्धक्षेत्र तथा दरबार दोनों ही जगहों पर कुशल योद्धा और अनुभवी राजनीतिज्ञ उसका सम्मान करते थे। शुरू में कमजोर दिखाई पड़ रहे मराठा आक्रमणों ने अब इतना जोर पकड़ लिया था की मुगल साम्राज्य की नींव हिल गई।”

आपको बताते चलें कि सन 1789 में छत्रपती शिवाजी महाराज के बड़े बेटे संभाजी महाराज और उनकी माता साईबाई की बेरहमी से हत्या करने के बाद औरंगजेब ने स्वराज (मराठा साम्राज्य का उपनाम) की राजधानी राजगढ़ पर हमला करवाया। जिसक लिए उसने 15000 सिपाहियों की फौज भेजी और उन्होंने इस किले पर कब्जा कर लिया।

8 वर्षों तक मुगलों से बचाकर रखा जिंजी किला

जिस समय मुगलों ने रायगढ़ पर कब्जा कर लिया था, तब वहाँ से ताराबाई और राजाराम महाराज सुरक्षित बच निकले थे। तब वे जिंजी किले आ पहुँचे, अब ये स्थान तमिलनाडु में है। दक्षिण में मराठा साम्राज्य का ये आखिरी किला था। इस पर भी मुगल कब्जा करना चाहते थे। इसके लिए मुगल सेनापति ज़ुल्फ़िकर अली खान ने 8 सालों तक संघर्ष किया।

बता दें कि ज़ुल्फ़िकर अली खान ने सितंबर 1690 में पहली बार जिंजी किले पर आक्रमण किया। वहीं राजाराम का स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण शासन को ताराबाई ने अपने हाथों में लिया। तब से लेकर जनवरी 1698 तक मुगल सेनापति इस किले को जीतने कोशिश करता और हर बार उसे पराजित होना पड़ता। ताराबाई ने अपने गढ़ के बचाने के साथ-साथ मुगलों को खदेड़ कर मराठा भूमि से भगा दिया था।

फोटो साभार: इंडिया टाइम्स

रानी ताराबाई के बारे में यह भी कहा जाता है कि वे गुरिल्ला युद्ध का बहुत प्रयोग करती थीं। वहीं उन्होंने औरंगजेब की रिश्वत नीति को भी अपनाया था। औरंगजेब शत्रु सेना के सेनापतियों को घूस देकर युद्ध में फायदा लेता था। इसके अलावा शाही सेना कि एक ओर तकनीक महारानी प्रयोग करती थीं। ताराबाई और उनके सेनापति दुश्मन साम्राज्य में घुसकर अपने टैक्स कलेक्टर नियुक्त करने लगे। इस तरह वे मुग़लों के इलाके से ही कर जोड़कर, मराठा धन में बढ़ोतरी कर रही थीं।

ताराबाई की वीरता के मुगल दरबारी भी थे कायल

‘बेटर इंडिया’ के एक आर्टिकल के मुताबिक महारानी ताराबाई की वीरता और युद्धनीति के मुगल भी कायल थे। मुगल सेना के एक अधिकारी भीमसेन ने ताराबाई को लेकर कहा, “अपने पति की तुलना में ताराबाई मजबूत शासक थीं। उन्होंने उस समय की परिस्थितियों को इतने अच्छे तरीके से नियंत्रित किया कि कोई मराठा नेता उनके आदेश के बिना कोई काम नहीं करता था।” बताते चलें कि वह तलवार की लड़ाई, तीरंदाजी, घुड़सवार सेना, सैन्य रणनीति, कूटनीति और राज्य के अन्य सभी विषयों में अच्छी तरह से निपूर्ण भी थी।

वहीं मुगल इतिहासकार खफी खान ने महारानी ताराबाई के बारे में लिखा, “मराठा अधिकारियों के दिलों पर उनका राज था। महारानी ताराबाई के संघर्ष, उनकी तमाम योजनाओं, उनके युद्ध अभियान और औरंगजेब के मरने तक उसकी मुग़ल फ़ौज को लगातार हराते रहने के कारण मराठों की शक्ति दिन प्रतिदिन बढ़ती ही चली गई।”

‘फिरोजपुर SSP ने बरती लापरवाही, पर्याप्त बल होने के बावजूद कानून-व्यवस्था में फेल’: PM मोदी की सुरक्षा चूक पर सुप्रीम कोर्ट, केंद्र को जाएगी जाँच रिपोर्ट

इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री के पंजाब दौरे में की सुरक्षा में बड़ी चूक हुई थी। ये घटना 5 जनवरी, 2022 की है। तब राज्य में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार थी। इस मामले में गुरुवार (25 अगस्त, 2022) को सुप्रीम कोर्ट का फैसला सामने आया है।

इस मामले में, सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय कमेटी द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के आधार पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पर्याप्त सुरक्षा बल उपलब्ध होने के बाद भी फिरोजपुर एसएसपी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में असफल रहे।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से यह भी कहा गया कि प्रधानमंत्री के दौरे के लिए 2 घण्टे पहले मिली सूचना के बाद भी फिरोजपुर एसएसपी द्वारा जरूरी कदम नहीं उठाए गए हैं। इसलिए पुलिस को वीवीआईपी सुरक्षा के लिए बेहतर ट्रेनिंग की आवश्यकता है।

इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि जाँच रिपोर्ट में पीएम मोदी की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कुछ उपाय सुझाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट सरकार को यह रिपोर्ट भेजेगा, ताकि उचित कदम उठाए जा सकें।

इस पूरे मामले में, पंजाब भाजपा सचिव तजिंदर सिंह सरन ने कहा है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाली सरकार ने अहंकार में भर कर पीएम मोदी की सुरक्षा प्रोटोकॉल का मजाक उड़ाया था। दोषी एसएसपी नहीं, बल्कि तत्कालीन साजिशकर्ता सीएम चन्नी हैं।

गौरतलब है कि यह पूरा मामला 5 जनवरी, 2022 का है। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब के हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक में भगत सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करनी थी। साथ ही पंजाब के ही फिरोजपुर में जनसभा को भी संबोधित करना था। इसके लिए पूरा रूट हेलीकॉप्टर द्वारा तय किया जाना था। लेकिन, मौसम खराब होने के कारण पीएम मोदी के काफिले को सड़क मार्ग से जाना पड़ा।

प्रधानमंत्री मोदी के काफिले को हुसैनीवाला पहुँचने में 2 घण्टे का समय लगने वाला था। इसके लिए, पंजाब डीजीपी ने सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद होने की पुष्टि भी की थी, जिसके बाद पीएम का काफिला फिरोजपुर के रास्ते हुसैनीवाला की ओर निकला था।

हालाँकि, इस रास्ते मे करीब 30 किलोमीटर पहले ही प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के काफिले को एक फ्लाई ओवर पर रोक लिया था। इस फ्लाईओवर पर ही पूरा काफिला 20 मिनट तक फंसा रहा। उनके इस काफिले में हुई रुकावट को सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक मानते हुए जाँच के आदेश दिए गए थे।

नोएडा वाली ‘गालीबाज’ महिला को कोर्ट ने दी जमानत, सिक्योरिटी गार्ड को दी थी खूब गालियाँ: वायरल हुआ था वीडियो

दिल्ली से सटे नोएडा की एक सोसाइटी में रहने वाली ‘गालीबाज’ महिला को स्थानीय कोर्ट ने जमानत दे दी है। महिला ने बीते रविवार को देरी से गेट खोलने को लेकर वहाँ मौजूद सिक्योरिटी गार्ड्स से जमकर गाली-गलौज की थी, जिसके बाद यूपी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। महिला का नाम भव्या रॉय है और वह पेशे से वकील है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गिरफ़्तारी के बाद कोर्ट ने महिला को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा था। महिला को भारतीय दंड संहिता यानि IPC की धाराओं 153-A (भाषा/नस्ल को लेकर अपमानजनक टिप्पणी), 323 (किसी को स्वेच्छा से चोट पहुँचाना), 504 (उकसाना), 505(2) (विभिन्न समुदायों में वैमनस्य पैदा करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत गिरफ्तार किया गया था।

आपको बताते चलें कि यह महिला नोएडा के थाना सेक्टर-126 के जेपी विशटाउन सोसायटी में कुछ महीना पहले ही रहने आई थी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए गाली वाले वीडियो के बाद ‘रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA)’ ने फ्लैट के मालिक को इस महिला से घर खाली करने को भी कह दिया है।

गेट देरी से खोलने पर दी गंदी-गंदी गालियाँ

जिन सिक्योरिटी गार्ड्स के साथ इस महिला ने गाली-गलौज किया था, उनमें से एक गार्ड अनूप कुमार ने बताया कि भव्या रॉय ने उनके साथ भी बदसलूकी की थी। गार्ड ने आगे बताया कि घटना वाले दिन वह गेट पर गाड़ी चेक कर रहे थे। गेट पर पहले से ही एक गाड़ी खड़ी थी, इसलिए उन्होंने महिला को बताया कि कुछ मिनट लगेंगे। इस पर भव्या रॉय बुरी तरह भड़क गई और गाड़ी से उतरकर गार्ड के साथ गाली-गलौज करने लगी।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। वीडियो में महिला ने बिहारियों को लेकर भी अपशब्द का इस्तेमाल किया। महिला ने कहा, “ये यहाँ जितने भी बिहारी हैं ना, Behen*h&d इनको सँभालो।”

महिला वीडियो में लगातार गाली देती रहती है। वह कहती है, “मैं तेरी $#ड फाड़ दूँगी। अबे भो%ड़ी के, तुम बहन%$द मेरी इज्जत करते हो? ये बोलेगा मेरे को माधर%$द? इसकी माँ की &त। तुमलोगों के ट* *ले बड़े हो गए हैं, बहन%$द, तुम सबके लं%# काट के मुँह में खिला दूँगी भो%ड़ी के। This Shit Doesn’t Work. खाल खींच लूँगी इस माधर%$द की।”

‘ये बर्दाश्त से बाहर, रद्दी है’: ‘Liger’ को साउथ के ही फिल्म समीक्षकों ने बताया सिरदर्द, कहा – कहानी और लेखन भी कचरे के डब्बे में डालने वाला

समीक्षकों ने विजय देवरकोंडा और अनन्य पांडे की फिल्म ‘Liger’ को नकार दिया है। फिल्म को नकारात्मक रिव्यूज मिल रहे हैं। इसका असर ये होगा कि भले ही हाइप और प्रमोशन के दम पर फिल्म को अच्छी ओपनिंग मिल जाए, लेकिन ये अपनी लागत नहीं निकाल पाएगी। ‘Liger’ का बजट 125 करोड़ रुपए है, जिसमें से 25 करोड़ रुपए तो सिर्फ लीड एक्टर विजय देवरकोंडा की फीस है। दर्शकों ने भी फिल्म को लेकर अच्छी प्रतिक्रिया नहीं दी है।

‘Liger’ के निर्देशक पुरी जगन्नाथ हैं, जिनके पास 23 वर्षों में 3 दर्जन फिल्मों के निर्देशन का अनुभव है। ‘मिर्ची 9’ ने अपनी समीक्षा में ‘Liger’ को बहुत-बहुत बुरी फिल्म करार दिया है। उसने लिखा कि ये एक ऐसा मौका है, जिसे पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया। उसने इस फिल्म की कहानी को स्वीकार करने के लिए पूरा का पूरा दोष विजय देवरकोंडा पर डाला है। साथ ही पूर्व अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज माइक टाइसन के कैमियों को भी उसने बेकार बताया है। उसने फिल्म को 5 में 1.75 स्टार दिए।

वहीं फिल्म समीक्षा पीटर ने 5 में 2 रेटिंग देते हुए ‘Liger’ के बारे में कहा है कि विजय देवरकोंडा को पैन-इंडिया से परिचय कराने के लिए ये सही फिल्म नहीं है। उन्होंने लीड अभिनेत्री के रूप में अनन्या पांडेय के किरदार को बेकार बताते हुए कहा कि फिल्म की कहानी और इसका लेखन भी बुरा है। हालाँकि, उन्होंने विजय देवरकोंडा की स्क्री प्रेजेंस को फिल्म के लिए एकमात्र अच्छी चीज बताया। म्यूजिक को लाउड बताते हुए उन्होंने लिखा कि इसमें कई बेकार दृश्य हैं।

दक्षिण भारत के फिल्म समीक्षक प्रशांत रंगास्वामी ने लिखा, “माफ़ कीजिए विजय देवरकोंडा, लेकिन आपकी सारी मेहनत कचरे के डब्बे में चली गई। स्क्रीन पर आपका हकलाना रास नहीं आया। बॉलीवुड से दूर रहें और तेलुगु की अच्छी फ़िल्में करें। फिर ये अपने-आप पैन-इंडिया प्रोजेक्ट बन जाएगा।”

‘वेंकी रिव्यूज’ ने फिल्म को 5 में 2.25 रेटिंग देते हुए लिखा, “एक ऐसी फिल्म जिसे अच्छा बनाया जा सकता था, लेकिन बर्बाद कर दिया गया है। बेहूदा लेखन और चापलूसी वाले दृश्यों के कारण ऐसा हुआ है। विजय देवरकोंडा ने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है और उनका बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन भी अच्छा है, लेकिन उनका हकलाना गुस्सा दिलाने वाला है। एकाध अच्छे दृश्यों के अलावा चर्चा करने लायक कुछ भी नहीं। विजय के लिए ये एक बुरा विकल्प है।”

वहीं कमाल आर खान ने दक्षिण भारत के समीक्षकों की समीक्षाएँ डालते हुए लिखा कि सभी ‘Liger’ को बर्दाश्त न होने लायक सिरदर्द बता रहे हैं। खासकर फिल्म के दूसरे हिस्से को लोग रद्दी बता रहे हैं और कह रहे हैं कि इसमें एक भी ऐसा दृश्य नहीं है, जिसका आनंद लिया जा सके। हो सकता है कि इसका फायदा अब पहले से अच्छी चल रही ‘कार्तिकेय 2’ को मिले, जो वर्ल्डवाइड 100 करोड़ रुपए की कमाई के आँकड़े को पार करने की तरफ बढ़ रही है।

राजू श्रीवास्तव को 15 दिन बाद आया होश, सेहत में लगातार हो रहा सुधार: AIIMS दिल्ली में भर्ती कॉमेडियन के ब्रेन डेड होने की उड़ी थी अफवाह

दिल्ली के एम्स (AIIMS, Delhi) में भर्ती देश के मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव (Comedian Raju Srivastava) को 15 दिन बाद गुरुवार (25 अगस्त 2022) को होश आ गया। डॉक्टरों द्वारा उनकी लगातार निगरानी की जा रही है।

राजू श्रीवास्तव के निजी सचिव गर्वित नारंग ने इसकी जानकारी देते हुए बताया, “राजू श्रीवास्तव को आज 15 दिन बाद होश आया। एम्स दिल्ली में डॉक्टरों द्वारा उनकी निगरानी की जा रही है। उनकी तबियत में सुधार हो रहा है।”

राजू श्रीवास्तव के PRO और एडवाइजर अजीत सक्सेना ने बताया, “राजू श्रीवास्तव को सुबह 8:10 बजे होश आ गया है।” बताया जा रहा है कि इसके बाद 9 बजे डॉक्टर्स की टीम ने राजू की कंडीशन को चेक किया। राजू के होश में आने से कॉमेडियन के परिवार के चेहरे की मुस्कान लौट आई है। राजू के तमाम फैंस, जो उनके जल्दी सेहतमंद होने की दुआएँ कर रहे थे, उन्होंने भी अब राहत की साँस ली है। 

मशहूर कॉमेडियन सुनील पाल ने भी राजू श्रीवास्तव के होश में आने पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा, “गुड न्यूज दोस्तों… राजू भाई को होश आ गया है। थैंक गॉड। मैं कहता था ना कि चमत्कार होगा। परमात्मा हँसाने वाले को नाराज नहीं कर सकता। सारे परिवार को, सारे दोस्तों को, पूरे संसार को जिसने भी दुआएँ कीं, हर किसी को प्यार। राजू भाई आप जियो हजारों साल।”

पिछले दिनों डॉक्टरों ने बताया था कि राजू के ब्रेन की तीन नसों में से एक नस अभी भी ब्लॉक है और इसका इलाज चल रहा है। राजू के इलाज के लिए डॉक्टर्स न्यूरो फिजियोथेरेपी की मदद ले रहे हैं। 

कब और कैसे बिगड़ी राजू श्रीवास्तव की तबीयत?

राजू श्रीवास्तव 10 अगस्त को होटल के जिम में वर्कआउट कर रहे थे। ट्रेडमिल पर एक्सरसाइज करते हुए उन्हें सीने में दर्द हुआ और वे नीचे गिर गए थे। इसके बाद राजू श्रीवास्तव को उनके जिम ट्रेनर फौरन अस्पताल लेकर गए। वहाँ डॉक्टरों ने बताया था कि उन्हें हार्ट अटैक आया था। इसके कारण उनका ब्रेन डैमेज हो गया और उन्हें एंजियोप्लास्टी करनी पड़ी। राजू तभी से दिल्ली के AIIMS में डॉक्टर्स की कड़ी निगरानी में हैं।

टीपू सुल्तान को फिर कहा ‘मुस्लिम गुंडा’ तो काट लेंगे जुबान: कर्नाटक में BJP विधायक केएस ईश्वरप्पा को धमकी, कहा- सावधान रहना

कर्नाटक में बीजेपी नेता केएस ईश्वरप्पा (KS Eshwarappa) को जुबान काटने की धमकी दी गई है। वे शिवमोगा से विधायक हैं और मंत्री भी रह चुके हैं। शिवमोगा (Shivamogga) में ही स्वतंत्रता दिवस पर वीर सावरकर और टीपू सुल्तान की तस्वीर को लेकर विवाद हुआ था।

ईश्वरप्पा को धमकी भरा पत्र मिला है। कन्नड़ में लिखे इस पत्र में कहा गया है कि यदि फिर उन्होंने टीपू सुल्तान को ‘मुस्लिम गुंडा’ कहा तो उनकी जुबान काट ली जाएगी। साथ ही उन्हें सावधान रहने की चेतावनी भी दी गई है।

धमकी मिलने की पुष्टि करते हुए ईश्वरप्पा ने बताया है कि वे इससे न आज तक डरे हैं और न डरेंगे। मैंने पुलिस से इस संबंध में संपर्क किया है। मुझे भरोसा है कि डाक से धमकी भरा पत्र भेजने वाले अज्ञात व्यक्ति का वे पता लगाकर कार्रवाई करेंगे।

मालूम हो कि शिवमोगा में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अमीर अहमद सर्कल पर वीर सावरकर का पोस्टर (Savarkar Poster Row) लगाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। कुछ देर बाद वहाँ टीपू सुल्तान सेना का झंडा लेकर दूसरे समुदाय के युवक पहुँच गए और वीर सावरकर का पोस्टर हटाने की कोशिश करने लगे। इसके बाद दोनों समुदाय में बहस शुरू हो गई थी। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया था। झड़प को देखते हुए पुलिस ने धारा 144 लगा दी थी। इस बीच धरम सिंह नाम के एक शख्स को चाकू भी मार दिया गया था।

उससे पहले कर्नाटक के हडसन सर्किल पर 13 अगस्त 2022 को अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के साथ कॉन्ग्रेस ने इस्लामी आक्रांता टीपू सुल्तान के पोस्टर लगाए थे। वे स्वतंत्रता दिवस पर फ्रीडम मार्च करने वाले थे। लेकिन कुछ लोगों ने मार्च से पहले ही टीपू सुल्तान के पोस्टरों को फाड़ दिया था। इस घटना के बाद कॉन्ग्रेस के राज्य प्रमुख डीके शिवकुमार ने कहा था, “राज्य में कुछ लोग अशांति फैलाने की कोशिशें कर रहे हैं। वे लोग कॉन्ग्रेस के फ्रीडम मार्च को नहीं पचा पा रहे। इस तरह पोस्टर फाड़ना महान स्वतंत्रता सेनानी का अपमान है।”

सुप्रीम कोर्ट पैनल को फोन में नहीं मिले पेगासस: 29 मोबाइल की जाँच की, 5 में जो स्पाइवेयर मिले उनके भी Pegasus होने के प्रमाण नहीं

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में गुरुवार (25 अगस्त 2022) को पेगासस (Pegasus) मामले में टेक्निकल कमेटी द्वारा दायर की गई रिपोर्ट पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने कमेटी की रिपोर्ट को नोट करते हुए कहा कि टेक्निकल कमेटी द्वारा जाँचे गए 29 मोबाइल फोन में पेगासस के उपयोग के बारे में कोई सबूत सामने नहीं आया है।

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने की। सीजेआई रमना ने कहा कि पेगासस मामले में बनी जस्टिस रवींद्रन की रिपोर्ट को गुप्त रखने की जरूरत नहीं है। रिपोर्ट कहती है कि 29 मोबाइल फोन में से 5 में मैलवेयर पाया गया है, लेकिन इससे ये नहीं कहा जा सकता कि ये पेगासस स्पाइवेयर है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस आरवी रवींद्रन की अगुवाई वाली कमेटी रिपोर्ट को तीन भागों में पेश किया गया। इनमें टेक्निकल कमेटी की दो रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आरवी रवींद्रन की देखरेख कमेटी की एक रिपोर्ट शामिल थी। इनमें से केवल एक ही रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा।

चीफ जस्टिस ने कहा, “हम सिफारिश के बाद जस्टिस रवींद्रन की रिपोर्ट का तीसरा हिस्सा वेबसाइट पर सार्वजनिक करेंगे।” चीफ जस्टिस ने आगे कहा, “हम पूरी रिपोर्ट देखे बिना फिलहाल इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं। 5 फोन में मैलवेयर मिला है, लेकिन जासूसी के कोई सबूत नहीं मिले हैं।”

बता दें इस मामले में केंद्र सरकार पर आरोप लगाया गया था कि सरकार पेगासस स्पाईवेयर के जरिए लोगों की जासूस कर रही है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जाँच कर रही टेक्निकल कमेटी को इस साल मई में 4 हफ्ते का समय दिया था। इस दौरान कमेटी को निर्देश दिए गए थे कि वो जाँच करें कि क्या लोगों के फोन या अन्य डिवाइस में जासूसी करने के लिए पेगासस स्पाईवेयर डाला गया था। फिलहाल, इस मामले की सुनवाई को अगले 4 हफ्तों के लिए टाल दिया गए है।

CM केजरीवाल की बैठक में नहीं पहुँचे AAP के 9 विधायक, पार्टी का दावा – सोमनाथ भारती सहित कइयों को BJP का ऑफर, ‘ऑपरेशन लोटस’ फेल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर गुरुवार (25 अगस्त, 2022) को आम आदमी पार्टी (AAP) विधायकों की बैठक हुई। इसमें AAP के 9 विधायक गायब रहे। AAP विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा, “दिल्ली में भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ फेल। आज हुई बैठक में 62 में से 53 विधायक मौजूद थे। स्पीकर देश से बाहर हैं और मनीष सिसोदिया हिमाचल में हैं। सीएम ने अन्य विधायकों से फोन पर बात की और सभी ने कहा कि वे अंतिम साँस तक सीएम केजरीवाल के साथ हैं।”

हालाँकि, अरविंद केजरीवाल की छवि इस तरह के ड्रामों के लिए ही मशहूर है। 9 विधायक गायब होने की घटना को मीडिया ऐसे दिखा सकता है जैसे कि ये एक बहुत बड़ी घटना हो और सही में ऐसा हुआ हो, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है कि AAP भी राजनीति न खेल रही हो। या फिर बात में हो सकता है कि ‘गायब’ विधायकों को वापस बुला लिया जाए और फिर मीडिया अरविंद केजरीवाल को ‘चाणक्य’ बता कर पेश करने लगे, जिन्होंने भाजपा के तथाकथित मिशन को फेल कर दिया। सब कुछ स्क्रिप्ट के अनुसार हुआ भी हो सकता है।

अरविंद केजरीवाल पर ये आरोप भी लगे हैं कि वो विधायकों को खुद के ही लोगों को ‘भाजपा का एजेंट’ बना कर अपने विधायकों को फोन करवाया, ताकि ये एक मुद्दा सके और वो भाजपा को घेर सकें। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी आरोप लगाया है कि खुद ही सीएम केजरीवाल विधायकों को फोन करवाया और दोष भाजपा के मत्थे मढ़ दिया।

इससे पहले AAP के 4 विधायकों ने बीजेपी पर ₹20 करोड़ में खरीदने और धमकाने का आरोप लगाया था। आप के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह का कहना था कि AAP के विधायक अजय दत्त, संजीव झा, सोमनाथ भारती और कुलदीप कुमार से बीजेपी नेताओं से संपर्क साधा है।

आम आदमी पार्टी को आशंका है कि कहीं BJP उनके विधायक ना तोड़ ले, इसलिए AAP की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक में तय हुआ था कि सभी विधायकों को बुलाया जाए।

विधायकों की बैठक से पहले दिल्ली के तिमारपुर से आम आदमी पार्टी के विधायक दिलीप पांडेय ने कहा था कि उनकी पार्टी के 40 विधायकों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्हें 20-20 करोड़ रुपए का ऑफर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा था कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस बात की जाँच करे कि 40 विधायकों को तोड़ने के लिए 20 करोड़ के हिसाब से 800 करोड़ कहाँ से आए हैं?

वहीं, AAP विधायक आतिशी मार्लेना ने कहा, “बीजेपी कई दिनों से दिल्ली सरकार को गिराने की कोशिश कर रही है। हमारे विधायकों को पैसे की पेशकश की जा रही है और धमकाया जा रहा है। दिल्ली के डिप्टी सीएम को भी धमकाया। यह इस तरह की पहली कोशिश नहीं है। भाजपा इससे पहले भी ‘ऑपरेशन लोटस’ का प्रयास कर चुकी है। वे हमेशा असफल रहे हैं, आगे भी असफल ही रहेंगे।”

बता दें कि सबसे पहले डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की तरफ से ये दावा किया गया था कि उन्हें बीजेपी वालों ने शामिल होने का ऑफर दिया है। ये भी कहा गया था कि अगर वे पार्टी को तोड़ने में मदद करेंगे तो उनके ऊपर लगे सभी मामले हटा दिए जाएँगे। वे सीबीआई जाँच से भी मुक्त हो जाएँगे। हालाँकि बीजेपी ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया लेकिन AAP दफ्तर में हलचल बढ़ गई। अरविंद केजरीवाल भी सक्रिय हो गए और उन्होंने अपने सभी विधायकों को एकजुट करने के लिए बैठक बुलाई।

गौरतलब है शराब नीति घोटाले पर दिल्ली में संग्राम जारी है। दिल्ली में जब से डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया पर कानून का शिकंजा कसा है, राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आबकारी नीति मामले में सीबीआई द्वारा दिल्ली के आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया समेत 15 लोगों पर नामजद एफआईआर दर्ज की गई थी। बता दें कि दिल्ली के उप-राज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा दिल्ली आबकारी नीति में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोपों की सीबीआई जाँच की सिफारिश करने के बाद दिल्ली सरकार ने जुलाई में नीति को वापस ले लिया था।

शबाना डाल रही थी धर्मांतरण का दबाव, परेशान पिता ने 2 साल की बेटी का ब्लेड से गला काटा: खुद पर भी किए वार, पुलिस को लिखकर बताई सारी बात

उत्तराखंड (Uttarakhand) में धर्मांतरण के दबाव के कारण दो साल की बेटी की ब्लेड से गला रेतकर हत्या करने वाले पिता को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित घटना को अंजाम देने के बाद से फरार चल रहा था। यह घटना हरिद्वार में सिडकुल थाना क्षेत्र की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लिव-इन पार्टनर शबाना के धर्मांतरण (Religious Conversion) के दबाव से तंग आकर पिता कुलदीप ने अपनी दो साल की बेटी की ब्लेड से गला रेतकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने खुद की जान देने के लिए अपने गले पर ब्लेड मारी, लेकिन वह बच गया। बुधवार (24 अगस्त 2022) को जख्मी हालत में गिरफ्तार किए गए आरोपित ने पूछताछ में यह खुलासा किया। पुलिस ने कुलदीप को एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया है।

बताया जा रहा है कि सिडकुल में गन्ने के एक खेत में मंगलवार (23 अगस्त 2022) दोपहर को दो साल की मासूम बच्ची का लहूलुहान शव मिला था। एसपी सिटी स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि बच्ची के पिता का नाम कुलदीप है। वह बागपत का निवासी है। घटनास्थल से पुलिस को मोबाइल, ब्लेड, जूते और टी शर्ट मिली थी। जाँच में सामने आया है कि कुलदीप सिडकुल में गाड़ी चलाता है और वहीं फैक्टरी में काम करने वाली शबाना के साथ 4 सालों से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा था।

पुलिस ने यह बताया कि बच्ची कुलदीप और शबाना की संतान थी। शबाना कुलदीप पर निकाह का दबाव बना रही थी। निकाह नहीं करने पर वह कुलदीप से अपनी बेटी माँग रही थी। इस बात को लेकर दोनों के बीच काफी विवाद हुआ, जिसके बाद शबाना बेटी को लेकर अपने घर बिजनौर चली गई। शबाना ने पुलिस पूछताछ में आशंका जताई कि कुलदीप ने ही उसकी बेटी की हत्या की है। इसके बाद पुलिस आरोपित की तलाश में जुट गई।

पुलिस को 23 अगस्त 2022 की देर रात डालूवाला गाँव में एक व्यक्ति के लहूलुहान हालत में घूमने की सूचना मिली। मौके पर पहुँची पुलिस ने कुलदीप को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित ने अपना जुर्म कबूलते हुए पुलिस को बताया कि वह शबाना के साथ चार साल से लिव-इन में रह रहा था। उनकी दो साल की बेटी थी, जिसे वह बहुत प्यार करता था।

आरोपित का कहना है कि शबाना बेटी के धर्मांतरण का दबाव बना रही थी, जिसके लिए लिए वह राजी नहीं था। उसे डर था कि शबाना साजिश रचकर बेटी का धर्मांतरण करा देगी। इसलिए उसने 22 अगस्त को बच्ची की गला रेतकर हत्या कर दी। फिर उसने खुद को भी मारने की कोशिश की, लेकिन वह बच गया। हरिद्वार के एसएसपी डॉ. योगेंद्र सिंह रावत ने कहा कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद आरोपित पर कार्रवाई की जाएगी।

संकट में हेमंत सोरेन की कुर्सी: चुनाव आयोग ने राज्यपाल को सौंपी रिपोर्ट, पत्नी कल्पना को झारखंड का मुख्यमंत्री बनाए जाने की अटकलें तेज

खनन लीज मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Jharkhand CM Hemant Soren) को लेकर चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को भेज दी है। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि चुनाव आयोग ने इस मामले में हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की रिपोर्ट दी है।

कहा जा रहा है कि हेमंत सोरेन अब मुख्यमंंत्री की कुर्सी अपनी पत्नी कल्पना सोरेन (Kalpna Soren) को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं। सोरेन ने अपने सभी विधायकों को शाम तक राँची पहुँचने का निर्देश दिया है।

मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि हालात को देखते हुए हेमंत सोरेन ने अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। बता दें कि कुछ दिन पहले ही महागठबंधन दलों की राँची में बैठक हुई थी, जिसमें कहा गया था कि हर परिस्थिति में सोरेन को समर्थन जारी रहेगा।

बता दें कि झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस गुरुवार (25 अगस्त 2022) को दिल्ली से राँची के लिए रवाना हो चुके हैं। सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि राज्यपाल 2 बजे राँची पहुँचेंगे और वहाँ 3 बजे इसे राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा।

झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने 18 अगस्त 2022 को ही कह दिया था कि हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता जाने वाली है। वे अगस्त का महीना पार कर लें, वही बड़ी बात है। दुबे ने अगले दिन कहा था, “झारखंड में भाभी जी के ताजपोशी की तैयारी, परिवारवादी पार्टी का बेहतरीन नुस्ख़ा गरीब के लिए।” उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन (Kalpna Soren) की ओर इशारा किया।

दरअसल, खनन लीज मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी को लेकर चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट दी है। सोरेन पर विभागीय मंत्री होते हुए अपने नाम से खनन लीज लेने का आरोप है। मामला राज्यपाल कार्यालय से होते हुए चुनाव आयोग तक पहुँचा और आयोग ने इस पर कई दिनों तक सुनवाई की।