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बात थी 10 लाख रोजगार की, जवाब में ‘चोटी-चिरकुट’ ले आए तेजस्वी यादवः क्या बिहार को याद दिला रहे ‘भूरा बाल साफ करो’

बिहार में ताजा-ताजा सत्ता परिवर्तन हुआ है। तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री बने हैं। मीडिया में छाए हुए हैं। 2020 विधानसभा चुनाव के समय उन्होंने 10 लाख रोजगार देने का वादा किया था, उसके बारे में सवाल पूछे जा रहे हैं। इससे ही जुड़े केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के एक ट्वीट के जवाब में तेजस्वी यादव ने ‘चोटी, चिरकुट, सड़कछाप’ जैसे विशेषणों का इस्तेमाल किया है।

गिरिराज सिंह बीजेपी के नेता हैं। बिहार के बेगूसराय से सांसद हैं। विधायक रहते नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में मंत्री भी रहे हैं। वे लंबी शिखा रखते हैं। शिखा रखने वाला वर्ग पहले भी तेजस्वी यादव की पार्टी राजद के निशाने पर रही है।

दरअसल, गिरिराज सिंह ने 12 अगस्त 2022 को तेजस्वी के एक इंटरव्यू का क्लिप ट्वीट किया। साथ ही लिखा, “10 लाख रोजगार देने का जो हमने वादा किया था, वह हम मुख्यमंत्री बनने पर पूरा करेंगे। अभी तो हम उपमुख्यमंत्री हैं।” 21 सेकेंड के इस वीडियो को सुनने से आभास होता है कि रोजगार वाले वादे से तेजस्वी पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

इसके जवाब में तेजस्वी यादव ने अपने इंटरव्यू का 54 सेकेंड का क्लिप शेयर करते हुए लिखा, “श्रीमान जी, इतना बेशर्म मत बनिए। एक फुट लंबी चोटी रखने से कोई ज्ञानी नहीं बन जाता, जैसे आप रखते है। आप लोगों की इन चिरकुट हरकतों, एडिटेड वीडियो व सड़क छाप बयानों की बदौलत ही भाजपा की यह दुर्दशा है। इन बेचारों का बिहार में कोई चेहरा ही नहीं।”

दोनों नेताओं ने ट्विटर पर जिस इंटरव्यू के अंश साझा किए हैं, वह जी न्यूज को दिया गया है। 6 मिनट 19 सेकेंड का यह इंटरव्यू जी न्यूज बिहार/झारखंड के लिए रवि त्रिपाठी ने लिया है। आप नीचे यह इंटरव्यू पूरा सुन सकते हैं। 1 मिनट 10वें सेकेंड से 10 लाख रोजगार के वादे को लेकर बात शुरू होती है। इसमें तेजस्वी एक तरफ रोजगार देने की बात भी कह रहे हैं, दूसरी तरफ यह भी बता रहे हैं कि उन्होंने यह वादा मुख्यमंत्री बनने की स्थिति में किया था। फिलहाल वे उपमुख्यमंत्री हैं।

वैसे राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है। नेताओं की भाषा में गिरावट भी कोई मुद्दा नहीं रही। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के समय तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी गिरिराज सिंह की ‘चोटी’ को राजनीतिक बयानबाजी में घसीटा था। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह कहते हैं कि ममता का गोत्र रोहिंग्याओं का है। हमें इस पर गर्व है। ये चोटीवाले राक्षस गोत्र से तो कहीं बेहतर है।”

2021 में महुआ मोइत्रा द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

लेकिन तेजस्वी यादव की राजनीतिक विरासत की वजह से ‘चोटी’ को निशाना बनाए जाने के मायने गहरे हो जाते हैं। दरअसल, कभी बिहार में ‘भूरा बाल साफ करो’ का नारा दिया गया था। भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण और लाला (कायस्थ) को केंद्रित कर दिए गए इस नारे ने राज्य में जातीय कटुता पैदा की थी। इसकी वजह से कई भीषण जातीय नरसंहार हुए। यह सब उसी दौर की बात है, जिसे हम जंगलराज के नाम से जानते हैं। यह कालखंड 1990 से 2005 का है। इस दौरान तेजस्वी यादव के पिता लालू प्रसाद यादव और माँ राबड़ी देवी राज्य की मुख्यमंत्री रहीं।

नीतीश कुमार की मौजूदा सरकार में वे वामपंथी दल भी साझेदार हैं जो वर्ग संघर्ष के लिए कुख्यात हैं। बिहार की कानून-व्यवस्था पहले से भी कोई बहुत दुरुस्त नहीं है। ऐसे में सत्ता परिवर्तन के बाद से लोगों में जंगलराज पैदा होने का डर है। इस बीच ‘चोटी’ को राजनीतिक बयानबाजी में घसीटे जाने से यह आशंका भी पैदा हो गई है कि क्या बिहार में फिर से जातीय संघर्ष का वही दौर वापस लाने की साजिशें रची जा रही है।

वैसे भी जातीय संघर्ष, जंगलराज वाले हालात मिलकर वो स्थिति पैदा कर सकते हैं, जिनमें भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की साजिशें दब जाए। इस वर्ग की चिंता तेजस्वी यादव के लिए इसलिए भी जरूरी लगती है, क्योंकि राजद का आधार आज भी वह ‘माई’ समीकरण ही है जो मुस्लिम और यादव मिलकर बनाते हैं।

खालिस्तानी झंडा के लिए उकसाने वाले आतंकी पन्नू के घर पर पंजाब के लोगों ने फहराया तिरंगा, पाकिस्तान के ISI के सहयोग से अलगाववाद को दे रहा हवा

पंजाब (Punjab) में युवाओं को खालिस्तान (Khalistan) का झंडा फहराने के लिए उकसाने वाले सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) के घर पर ही तिरंगा फहरा दिया गया है।

बता दें कि इस साल भारत अपनी स्वतंत्रता का 75वें स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आजादी के इस अमृत महोत्सव समारोह से पहले पंजाब के अमृतसर स्थित उसके गाँव में लोगों के एक समूह ने पन्नू के आवास पर तिरंगा फहराया।

अभी कुछ दिन पहले पन्नू ने एक वीडियो जारी कर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Punjab CM Bhagwant Mann) को धमकाया था। इसके साथ ही उसने खालिस्तानी झंडा फहराने वालों को इनाम की घोषणा की थी।

पिछले साल स्वतंत्रता दिवस से पहले एक वीडियो जारी कर पन्नू ने हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर को धमकी दी थी कि वह उन्हें 15 अगस्त को तिरंगा नहीं फहराने देगा। आडियो संदेश में ये भी कहा गया था कि पंजाब के बाद वे हिमाचल में भी कब्जा करेंगे, क्योंकि हिमाचल का कुछ क्षेत्र पहले पंजाब का हिस्सा था। इसको लेकर उस पर राजद्रोह का मामला भी दर्ज किया गया था।

अप्रैल 2022 में पन्नू ने एक वीडियो जारी हरियाणा के कलेक्टर ऑफिस पर खालिस्तानी झंडा फहराने की अपील की थी। उसने कहा था, “हरियाणा पर पंजाब का अधिकार है। यह अधिकार प्रदर्शित करने के लिए 29 अप्रैल को गुरुग्राम के DC कार्यालय पर खालिस्तान का झंडा लगाया जाएगा। यह खालिस्तान के 36वें घोषणा दिवस के मौके पर होगा।” 

इसके साथ ही उसने मई 2022 में कश्मीर के अलगाववादी एवं कट्टरपंथी नेता यासीन मलिक की सजा को लेकर एक बार फिर भड़काऊ बयान दिया था। यासीन मलिक को आइकॉनिक नेता बताते हुए उसकी सजा के विरोध में मुस्लिमों से अमरनाथ यात्रा रोकने की अपील की थी।

कौन है गुरपतवंत सिंह पन्नू

पन्नू का पुश्तैनी घर अमृतसर के खानकोट गाँव में है। इसी गाँव में पन्नू का जन्म हुआ था। बाद में वह विदेश चला गया। पन्नू के पिता महिंदर सिंह विभाजन के समय पाकिस्तान से खानकोट आए थे। महिंदर सिंह मार्कफैड में नौकरी करते थे। पन्नू अपने भाई मंगवंत सिंह के साथ विदेश जाकर बस गया।

बाद में वह अमेरिका पहुँचा और वहाँ उसने उसने सिख फॉर जस्टिस नाम से अमेरिका में अलगाववादी खालिस्तान बनाया है। इसके जरिए वह देश भर के युवाओं को खालिस्तान के लिए बरगलाने का काम करने लगा।

पाकिस्तान की बदनाम खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के सहयोग से पन्नू खालिस्तानी अलगाववादी को फिर से जिंदा करने की कोशिश करने में लगा हुए। उसकी देश विरोधी गतिविधियों को देखते हुए साल 2019 में भारत सरकार ने संगठन को बैन कर दिया। पन्नू भी भारत में वांछित आतंकी है।

खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के पिता की मौत बहुत पहले हो गई थी। भारत में रहने वाली अपनी माँ को उसने बताया था कि वह कनाडा में बहुत बड़ा वकील है। कुछ वर्ष पहले उसकी माँ की भी मौत हो गई। अब भारत में उसके परिवार का कोई सदस्य नहीं रहता।

काबुल के मदरसे में आत्मघाती हमला: मारा गया आतंकी विचारधारा का समर्थक रहीमुल्लाह हक्कानी

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में गुरुवार (11 अगस्त, 2022) को हुए एक आत्मघाती विस्फोट में तालिबान के प्रमुख मजहबी मौलवी शेख रहीमुल्लाह हक्कानी अपने मदरसे में मारा गया। रहीमुल्ला आतंकी विचारधारा का कट्टर समर्थक बताया जाता है।

विस्फोट की यह घटना काबुल के एक मदरसे में हुई। रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि जो आत्मघाती हमलावर ने नकली पैर लगाए हुए था और उसी में वह विस्फोटक छिपाए हुए था। उसने डेटोनेटर की मदद से विस्फोट की घटना को अंजाम दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान के उप प्रवक्ता बिलाल करीमी ने शेख रहीमुल्लाह हक्कानी के मारे जाने की पुष्टि करते हुए कहा, “ये बड़े दुख के साथ बताना पड़ रहा है कि देश की बड़ी अकादमिक शख्सियत शेख रहीमुल्लाह हक्कानी ने दुश्मन के क्रूर हमले में शहादत को गले लगा लिया है।”

गौरतलब है कि रहीमुल्ला हक्कानी पर पहले भी दो बार हमला हो चुका है, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। उस पर दूसरी बार हमला अक्टूबर 2020 में हुआ था। ये तीसरी बार है जब हक्कानी पर हमला हुआ है। वहीं सबसे पहले 2013 में पेशावर के रिंग रोड पर उसके काफिले पर बंदूकधारियों ने हमला किया था, लेकिन वह सुरक्षित बच कर निकल गया था।

बता दें कि पिछले 15 दिन में यह दूसरी बार काबुल में विस्फोट की घटना सामने आई है। हालाँकि, अभी तक यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस आत्मघाती हमले के पीछे कौन है। किसी भी संगठन ने अभी इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।

ना वंदे मातरम् के लिए श्रद्धा, ना ही भारतीय सेना को सैल्यूट… सवाल पूछने पर आमिर खान की टीम से रिपोर्टर को धमकी

एक अभिनेता के तौर पर आमिर खान (Aamir Khan) मुझे हमेशा अच्छे लगे हैं। उनकी अच्छी-बुरी, हिट-फ्लॉप शायद ही कोई ऐसी फिल्म होगी, जिसे मैंने देखा न हो, लेकिन पिछले रविवार को अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) के शो कौन बनेगा करोड़पति (Kaun Banega Crorepati- KBC) में आमिर खान की कुछ हरकतों से मैं अचंभित रह गया।

KBC के पहले शो में आमिर खान के अलावा कारगिल युद्ध के योद्धा मेजर डीपी सिंह और सेना पदक पाने वाली पहली महिला अफसर कर्नल मिताली मधुमिता भी आई थीं। हुआ यूँ कि कर्नल मिताली मधुमिता के शौर्य पर वंदे मातरम् के नारे लगे और सभी लोगों ने हाथ उठाकर वंदे मातरम् कहा।

उस समय खुद अमिताभ बच्चन ने वंदे मातरम् कहते हुए कई बार हाथ उठाया, लेकिन आमिर खान हाथ लटकाए रहे। वंदे मातरम् भी नहीं बोला। सिर्फ एक बार ‘मातरम्’ कहा और वो भी हँसते हुए। बात सिर्फ इतनी नहीं थी।

Posted by Vikas Mishra on Wednesday, 10 August 2022

सेना के सम्मान में सबने खड़े होकर सैल्यूट किया। अमिताभ बच्चन, मेजर डीपी सिंह समेत सभी लोग हाथ को माथे पर सटाकर सैल्यूट की मुद्रा में थे, लेकिन आमिर खान का हाथ ऊपर की तरफ उठा ही नहीं। यूँ ही वो ये सब देखते रहे। तो इसे हम क्या मानें, आमिर के मन में देश की सेना के प्रति सम्मान नहीं है या फिर वो लापरवाह हैं या फिर वो कट्टर मुसलमान हैं, जो मानते हैं कि हाथ उठाकर वंदे मातरम् कहने और देश को सैल्यूट करने से उनका इस्लाम खतरे में पड़ जाएगा?

यहाँ मैं साफ कर दूँ कि आमिर खान ने जो हरकत की, वो कानून के खिलाफ नहीं है। वंदे मातरम् आप किसी से जबरन नहीं कहलवा सकते और न ही सैल्यूट न करके उन्होंने कोई कानून तोड़ा है, लेकिन इमोशन भी तो कोई चीज होती है। खास तौर पर आमिर के लिए, क्योंकि आमिर अभिनेता हैं और फिल्मों में इमोशन ही सबसे ज्यादा बेचा जाता है।

फिल्म पीके ने लाख विरोध के बावजूद अगर करोड़ों की कमाई की तो उसके पीछे वजह ये है कि कई बार फिल्म ने भावनाओं को छुआ। कभी भावनाओं को गुदगुदी हुई तो हँसी छूटी तो कभी फिल्म देखते हुए आँख भी नम हुई। आमिर तो वैसे भी भावनाओं के माहिर खिलाड़ी हैं, फिर उन्होंने देशवासियों की भावनाओं से खिलवाड़ क्यों किया..? उनसे ये चूक कैसे हुई..? ये उनकी चूक है या फिर लापरवाही या फिर जानबूझकर की गई हरकत.. फैसला आमिर को करना है।

इस सीन का वीडियो निकालकर मैंने अपने इंटरटेनमेंट रिपोर्टर सौरभ शर्मा को भेजा था। दिल्ली में आमिर खान की प्रेस कॉन्फ्रेंस थी कल। हमारे रिपोर्टर ने आमिर से ये सवाल पूछा तो आमिर इधर-उधर झाँकने लगे। पहले तो उन्होंने कहा कि वो सोशल मीडिया पर नहीं हैं, इस नाते उन्होंने वीडियो देखा नहीं। हमारे रिपोर्टर ने कहा, “ये वीडियो वायरल नहीं है, मेरे पास है।”

तब आमिर ने कहा, “ओह अच्छा, मुझे याद नहीं है कि उस एपीसोड में सैल्यूट का कोई सीन था। मैंने भी किया होगा। मुझे याद नहीं है, सॉरी। वंदे मातरम् पर मैंने भी सैल्यूट किया था। हो सकता है कि जब मैं सैल्यूट कर रहा था तो कैमरे का फोकस मेरी तरफ न रहा हो।”

मेरे रिपोर्टर ने कहा कि आप इजाजत दें तो मैं आपको वो वीडियो आपके पास लाकर दिखा सकता हूँ। प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म हुई तो आमिर खान की टीम का एक सदस्य हमारे रिपोर्टर को ही धमकाने लगा कि ये सवाल हटा दीजिए। खैर, हमारे रिपोर्टर ने भी उसे खाने भर को दिया।

आमिर खान को मैं सजग इंसान मानता हूँ। अच्छी फिल्में देने के अलावा उन्होंने ‘सत्यमेव जयते’ जैसा मेगा शो किया है, जिसने समाज पर असर डाला। जब वे भगवान शिव पर दूध चढ़ाने की जगह 20 रुपये का दूध गरीब बच्चे को देने की बात कहते हैं तो मैं उनसे सहमत होता हूँ, लेकिन वंदे मातरम् पर उनकी चुप्पी और देश के नाम पर एक सैल्यूट करने के लिए उनका हाथ नहीं उठा, इसे मैं इत्तेफाक कैसे मान लूँ?

आमिर वैसे भी 2015 में ये बयान देकर हिंदुत्ववादियों के निशाने पर हैं कि उनकी पत्नी को इस देश में रहने में डर लगता है। अभी लाल सिंह चड्ढा में एक आतंकी को बचाकर उसका इलाज करवाने वाले सीन की खातिर एक बार फिर वो लोगों के निशाने पर आने वाले हैं।

शाहरुख खान हों, आमिर खान हों या फिर सलमान खान। सही बात ये है कि इन तीनों में मैं आमिर को अच्छा इंसान समझता था, लेकिन सच ये है कि ये तीनों बदमाश हैं। बाहर से कितने भी ये जन-जन के हीरो बनें, लेकिन भीतर से ये कट्टर मुसलमान ही हैं।

याद कीजिए शाहरुख खान और फरहा खान की फिल्म ‘ओम शांति ओम’ का वो सीन, जिसमें एक फिल्म का प्रीमियर होता है और उसमें देशभक्ति की फिल्में बनाने वाले मनोज कुमार जाते हैं। गार्ड उनसे आईकार्ड माँगता है तो आईकार्ड में जो तस्वीर होती है वो हाथों से छुपी होती है। गार्ड मनोज कुमार को डंडे मारकर भगाता है।

मनोज कुमार की अदाकारी का एक रूप ये भी था कि अक्सर वो अपने चेहरे पर हाथ रख लेते थे, लेकिन शाहरुख-फरहा ने इसका बहुत ही बेहूदे तरीके से मजाक उड़ाया। अब इस सीन के माध्यम से शाहरुख-फरहा क्या साबित करना चाह रहे थे? मनोज कुमार, जिन्हें लोग भारत कुमार कहकर पुकारते रहे, उनके लिए इतना अपमानजनक सीन रखने के पीछे कौन सी मानसकिता थी..? क्या मनोज कुमार का देशभक्त होना और देशभक्तिपूर्ण फिल्में बनाना इन्हें रास नहीं आया था..?

सलमान खान को ही लीजिए, हर साल उनकी गणपति पूजा वाली तस्वीरें आती हैं, लेकिन जब काले हिरण शिकार मामले में फँसे तो पुलिस की हिरासत में गोल टोपी पहनकर गए। संदेश दिया कि मुसलमान हूँ इस नाते कानून सता रहा है। इनसे दो हाथ आगे तो संजय दत्त थे, जिन्होंने समाजवादी पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करते हुए विलक्षण बात कही थी- “मैं जेल में बंद था, वहाँ पर मुझे लोग पीटते थे, क्योंकि मेरी माँ एक मुसलमान थी।”

अब ऐसी बेतुकी बात पर कोई भी माथा पीट लेगा। इन फिल्मी कलाकारों का कितना सम्मान है हिंदुस्तान में, लेकिन ये इसका ये बार-बार फायदा उठाते हैं। मेरी पत्नी सलमान खान की फैन हैं। देश की जानी मानी एंकर श्वेता सिंह भी सलमान खान की फैन हैं और अंजना ओम कश्यप शाहरुख खान की फैन हैं। मैं खुद इन तीनों की तमाम फिल्मों का प्रशंसक हूँ।

ये हिंदुस्तानी फिल्मप्रेमी ही हैं, जो आमिर खान की फिल्म ‘फना’ देखकर एक आतंकी की प्रेम कहानी को कबूल कर लेते हैं और ‘चक दे इंडिया’ में हॉकी कोच कबीर खान (शाहरुख खान) के साथ पूरा देश एक हो जाता है। आज मैं ये पोस्ट भारी मन से लिख रहा हूँ, क्योंकि मैं राजनीतिक पोस्ट और हिंदू-मुस्लिम पर पोस्ट लिखने से बचता हूँ। मेरे दोस्त हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई भी हैं।

मेरे गाँव में मुस्लिमों की अच्छी-खासी संख्या है और मेरा गाँव बहुत मेलजोल से रहता है। गाँव पर तो मैं कभी मजहबी आँच आने भी नहीं दूँगा। मैं उस सिद्धार्थनगर जिले का रहने वाला हूँ, जहाँ आमने-सामने दो गाँव हैं। एक अल्लापुर तो दूसरा भगवानपुर। भगवानपुर में कोई हिंदू नहीं है और अल्लापुर में कोई मुसलमान नहीं है।

आमिर खान, सलमान खान, शाहरुख खान की समय-समय पर बेहूदा हरकतें देखता हूँ तो महसूस होता है कि ये अपने मुस्लिम समाज के भी दुश्मन हैं। अपने समाज को कोई सीख नहीं देते, कोई उदाहरण प्रस्तुत नहीं करते, कट्टरता का विरोध नहीं करते। शादियाँ हिंदू लड़कियों से करते हैं, लेकिन सम्मान ये किसी भी धर्म का नहीं करते।

(खबर के लिए साभार: विकास मिश्र। 10 साल आजतक में रहने के बाद इन्होंने नई पारी की शुरुआत न्यूज नेशन चैनल में बतौर एक्जीक्यूटिव एडिटर की है। फेसबुक पर इन्होंने जो लिखा है, उसे यहाँ पढ़ सकते हैं।)

‘रेवड़ी कल्चर’ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बताया- गंभीर मामला, अगली सुनवाई 17 अगस्त को; बचाव में उतरी केजरीवाल सरकार

चुनाव प्रचार के दौरान जनता को राजनैतिक दलों द्वारा लोगों को फ्री गिफ्ट देने के वादों (रेवड़ी कल्चर राजनीति) पर दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर माना है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक सरकारी खजाने का उपयोग देश के विकास में होना चाहिए न कि ‘रेवड़ी कल्चर’ के लिए। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 17 अगस्त 2022 की तारीख़ तय की है। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी गुरुवार (11 अगस्त 2022) को दिया है। इस मामले में याचिकाकर्ता भाजपा नेता अश्वनी उपाध्याय हैं जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट से आम आदमी पार्टी की सदस्यता समाप्त करने की माँग की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने सरकारी खजाने और आर्थिक जरूरतों के बीच बैलेंस रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “इस बात का संतुलन बनाना होगा कि अर्थव्यवस्था में पैसा कितना गँवाना है और लोगों के कल्याण में कितना पैसा लगाना है।”

हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी की मान्यता ख़ारिज करने की माँग को ख़ारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा, “हम इस पर गौर नहीं करना चाहते। यह कदम लोकतान्त्रिक नहीं होगा। इस बात पर भी विचार किया जाना चाहिए कि ऐसे मामलों में अदालतें किस सीमा तक हस्तक्षेप कर सकती हैं।”

इस याचिका के जवाब में आम आदमी पार्टी ने रेवड़ी कल्चर और कल्याणकारी योजना में फर्क होने की बात कही। आम आदमी पार्टी की तरफ से अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने बहस की। उनके मुताबिक मुफ्त उपहार योजना को गलत तरीके से पेश किया गया है।

गौरतलब है कि मुफ्त उपहार के मामले में बुधवार (10 अगस्त) को प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष के कुछ नेताओं पर तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि हो सकता है कि कल कोई फ्री में डीजल पेट्रोल बाँटने का ऑफर दे दे। इस बयान का विरोध करते हुए भड़के अरविन्द केजरीवाल ने उद्योपतियों के कर्ज माफ़ करने का आरोप लगा कर जनमत संग्रह की चुनौती दी थी। इसके अलावा भी उन्होंने अपनी मुफ्त योजना को जायज ठहराने की पूरी कोशिश की।

‘मेरा पीछा छोड़ो बहन’ : क्या क्रिकेटर ऋषभ पंत ने उर्वशी रौतेला के लिए लिखा, जानें क्या है ये वायरल मामला

भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत का एक इन्स्टाग्राम पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि वह पोस्ट बॉलीवुड अभिनेत्री उर्वशी रौतेला के लिए लिखा गया था। जानकारी के मुताबिक ऋषभ पंत ने उस पोस्ट को लिखने के महज 10 मिनट बाद ही डिलीट कर दिया था। हालाँकि, तब तक कुछ लोगों द्वारा उसका स्क्रीनशॉट लिया जा चुका था जो बाद में वायरल हो गया।

वायरल हो रहे इस इन्स्टाग्राम पोस्ट में 24 वर्षीय विकेटकीपर बल्लेबाज ने लिखा, “यह देख कर हँसी आती है कि कुछ लोग सुर्ख़ियों में आने के लिए अपने इंटरव्यू में झूठ कैसे बोलते हैं। दुःख की बात है कि कुछ लोग नाम और प्रसिद्धि पाने के कितने भूखे हैं। भगवान उनका भला करें।” ऋषभ पंत ने इस पोस्ट के साथ #merapichachorhobehen (मेरा पीछा छोड़ो बहन) और ‘#jhutkibhilimithotihai (झूठ की भी लिमिट होती है) हैशटैग लगाया है।

बताया जा रहा है कि ऋषभ पंत ने यह पोस्ट उर्वशी रौतेला के द्वारा बॉलीवुड हंगामा नाम के चैनल को दिए गए उस इंटरव्यू के जवाब में किया है जिसमें उर्वशी ने एक दिन पहले उनका नाम लिया था। उस इंटरव्यू में उर्वशी ने ऋषभ पंत को ‘मिस्टर RP’ नाम से सम्बोधित किया था। उर्वशी ने कहा, “कोई मिस्टर RP मुझ से मिलने के लिए होटल की लॉबी में इंतज़ार कर रहे थे। उस समय मैं शूटिंग और सफर से थकी थी इसलिए गहरी नींद में सो रही थी।”

उर्वशी ने आगे बताया, “मेरी शूटिंग वाराणसी में चल रही थी। लेकिन मेरा एक शो दिल्ली में था जिसके लिए मैंने वाराणसी से फ्लाइट पड़की और दिल्ली आ गई। जब मैं लौटी तब मैं 10 घंटे की शूटिंग से आई थी। मुझे तैयार होने के लिए काफी समय चाहिए था। इसी बीच मिस्टर RP होटल की लॉबी में आए और उन्होंने काफी देर तक वहाँ मेरा इंतज़ार किया। वो मुझसे मिलना चाह रहे थे। मैं काफी थकी हुई थी। मुझे पता ही नहीं चला कि मेरे पास कई फोन भी आए थे।”

हालाँकि, उर्वशी रौतेला ने RP का पूरा नाम लेने से इंकार कर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा, “जब मैं सो कर उठी तब मेरे पास 16 से 17 मिस्ड कॉल पड़ी थी। मुझे काफी बुरा लगा कि किसी ने मेरा इंतज़ार किया लेकिन मैं उससे मिल नहीं पाई। कई लड़कियों को अपने लिए किसी के इंतज़ार से फर्क नहीं पड़ता। तब मैंने उनसे मुंबई में मिलने के लिए कहा। वो मुंबई आए और हम मिले। हमने हर ड्रामे को भुला दिया।” उर्वशी रौतेला ने इस मामले में मीडिया पर चीजों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2018 में उर्वशी और ऋषभ पंत को अक्सर साथ में खाना खाते और किसी कार्यक्रम में एक साथ हिस्सा लेते तस्वीरें वायरल हुईं थीं। बाद में अफवाह उड़ी कि ऋषभ पंत ने उर्वशी रौतेला को व्हाट्सएप पर ब्लॉक कर दिया है। बाद में ये जानकारी निकल कर सामने आई थी कि दोनों ने आपसी सहमति से एक दूसरे को मैसेंजर एप पर ब्लॉक किया था।

ताजिया के लिए तोड़ी मूर्तियाँ, JCB से उखाड़ा ब्रह्मदेव स्थान का पीपल: बरेली में मोईन, साकिर, इकरार सहित 7 को UP पुलिस ने दबोचा

बरेली में मुहर्रम जुलूस के दौरान भोजीपुरा में दुकानों में जमकर पत्थरबाजी का बवाल थमा भी नहीं था कि हिन्दुओं की आस्था पर चोट करने का एक दूसरा मामला भी सामने आया है। मंगलवार (9 अगस्त, 2022) की देर रात मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शेरगढ़ में ताजियों के लिए जेसीबी लगाकर वर्षों पुराने मंदिर के ब्रह्मदेव स्थान पर खड़े पीपल के पेड़ की मोटी शाखा तोड़वा दिया। मीडिया रिपोर्ट में यह बताया जा रहा है कि मंदिर में रखी मूर्तियाँ और दानपात्र फेंक दिया। जिससे हिन्दू समाज में जबरदस्त आक्रोश है। वहीं इस मामले में 7 मुस्लिम आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

क्या है पूरा मामला

रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि शेरगढ़ थानाक्षेत्र के मवई काजियान गाँव में किच्छा नदी के पार कई गाँवों के ताजिए आते हैं। बताया जा रहा है कि ताजिया के जुलुस के दौरान जहाँ पेड़ों की टहनियाँ पहले ही काँट-छाँट दी गई थीं। वहीं रात 12 बजे के बाद कुछ उपद्रवियों ने सड़क किनारे वर्षों पुराने मंदिर के ब्रह्मदेव स्थान पर खड़े पीपल के पुराने वृक्ष की मोटी डालियों को ट्रैक्टर और जेसीबी से बाँधकर उखाड़ दिया। साथ ही मंदिर को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। वहीँ मीडिया रिपोर्ट में मंदिर में रखी मूर्तियों को खंडित करने और दानपात्र बाहर फेंक देने की बात भी सामने आई है।

मामले में कंचनपुर के ग्रामीणों का आरोप लगाया है कि ब्रह्मदेव स्थल पर खड़े पीपल के मोटे टहने को साजिशन योजनाबद्ध तरीके से गिराया गया है। मंदिर में उपद्रव और तोड़फोड़ की सूचना से हिन्दू समुदाय के लोग भड़क गए उन्होंने इसकी जानकारी पुलिस को दी। वहीं हिन्दू समुदाय के लोग आरोपितों पर कार्रवाई के लिए सड़कों पर उतर आए। कहा जा रहा है कि माहौल बिगड़ता देखकर पुलिस ने तुरंत ही मुकदमा लिख लिया। इसके बाद एक्शन लेते हुए अंबरपुर के ग्राम प्रधान व जेसीबी के मालिक समेत 29 लोगों को हिरासत में लिया। इस मामले में पुलिस उनसे पूछताछ में जुटी है।

हालाँकि, इस मामले में कहा जा रहा है कि किसी भी दशा में हंगामा ना खड़ा हो, इसको लेकर अधिकारी तुरंत ही मौके पर पहुँच कर क्षतिग्रस्त हुए मंदिर की मरम्मत करा दी है। साथ कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया, “इस मामले में सम्बंधित थाना शेरगढ़ पर मामला दर्ज कर 07 आरोपितों बुन्दन, शक्खन खाँ, मोईन ख़ाँ, साकिर अली, इकरार अहमद, छोटे, रहीस खाँ को गिरफ्तार कर लिया गया है। आगे उनपर नियमानुसार विधिक कार्यवाही की गई है।”

गौरतलब है कि इस घटना के अलावा भी एक दूसरे मामले में बरेली में मुहर्रम जुलूस के दौरान भोजीपुरा के मझौआ गंगापुर में दुकानों में जमकर पत्थरबाजी की गई। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी सामने आया है। इसमें आप देख सकते हैं कि कैसे लोगों ने दूसरे समुदाय की दुकानों को निशाना बनाया है और वहाँ जमकर पथराव किया। पथराव करने वालों में महिलाएँ भी शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों पक्षों में करीब आधे घंटे तक पत्थरबाजी होती रही, जिसको लेकर वहाँ अफरा-तफरी मच गई थी।

वहीं एकदूसरे मामले में बरेली जिले के हाफिजगंज में रविवार (7 अगस्त, 2022) की शाम को काँवड़ियों को टक्कर मारकर भाग रहे बाइक सवार युवकों को पकड़ने के दौरान जमकर हंगामा हुआ था। जिसमें दो शिवभक्त घायल हो गए थे। एक्सीडेंट से गुस्साए काँवड़ियों ने सड़क पर काँवड़ रखकर तीन घंटे तक जाम लगा दिया था। बता दें कि मामले की सूचना मिलने पर पहुँची पुलिस जब काँवड़ियों को समझा रही थी, इसी दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पथराव कर दिया था।

तिरंगा यात्रा को लेकर हिंदू परिवार पर हमला, घर में घुसकर छेड़खानी और फायरिंग: सपा नेता रहमत अली, पूर्व अध्यक्ष रिजवान सहित 210 पर मुकदमा, 20 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में तिरंगा यात्रा को लेकर बुधवार (10 अगस्त 2022) को लेकर एक हिंदू परिवार पर हमले के मामले में पूर्व चेयरमैन रिजवान खान और समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला उपाध्यक्ष समेत 210 अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है। इसमें 10 नामजद, जबकि 200 अज्ञात हैं। मामले में 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

सांप्रदायिक तनाव को देखते हुए इलाके में पुलिस और PAC के जवानों को तैनात कर दिया या है। इस मामले में अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

मामला इमाम चौक का है। यहाँ की निवासी सिद्वेश्वरी रस्तोगी ने थाने में तहरीर देकर कहा था कि मुहर्रम के दिन शाम को मोहल्ला के मुन्ना, मारूफ, जुबैर, आरिफ, शमशाद आदि लोग उसके घर घुस आए और बेटी के साथ छेड़छाड़ करने लगे।

महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि जब वह अपनी बेटी को बचाने लगी तो आरोपितों ने उसकी छाती पर तमंचा भिड़ाकर फायर कर दिया। हालाँकि, फायर मिस हो गई और सिद्धेश्वरी की जान बच गई।

अपनी तहरीर में हिंदू महिला ने यह भी कहा, “वे लोग (आरोपित) कह थे कि तेरा बेटा कहाँ है? आज वो मेरे त्योहार (मुहर्रम) पर तिरंगा यात्रा की अगुवाई कर रहा था। उसे जान से मार डालेंगे।” महिला का कहना है कि जब वह चिल्लाने लगी और आस-पड़ोस के लोग इकट्ठा होने लगे तो आरोपित हवाई फायरिंग करते और जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गए।

उन्होंने कहा कि इस दौरान पुलिस आ गई और मामला शांत हो गया, लेकिन कुछ देर बाद बड़ी संख्या में लोग आए और पत्थरबाजी करने लगे। इस अचानक हमले में कुछ पुलिस वालों को भी चोट लगने की बात कही जा रही है।

इसके साथ ही, इमाम चौक के रहने वाले नाने रस्तोगी ने अपनी तहरीर में कहा कि शाम को पाली नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन रिजवान खान, सपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष रहमत अली मोनू, सेनियाज खां, शान वारिस, रिसालत के साथ लगभग 200 अज्ञात लोग घर के इकट्ठे हो गए।

उन्होंने कहा कि उस समय रिजवान के हाथ में पिस्टल थी। इसके अलावा, उसके साथ आए हुए लोग पथराव करने लगे। इस दौरान रिजवान और उसके साथ के कुछ लोगों ने फायरिंग भी की। उन्होंने अपनी तहरीर में कहा कि आरोपितों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी है।

कुछ रिपोर्ट के अनुसार, हालात को समझते हुए रस्तोगी परिवार ने इसकी सूचना पुलिस को दी। इसी बात से नाराज होकर फारुख और मुन्ना नाम के आरोपित सिद्धेश्वरी रस्तोगी के घर में तब घुस गए, जब वो अपनी 2 बेटियों के साथ थीं। आरोप है कि दोनों आरोपित उनकी बेटी को खींचने लगे और विरोध करने पर उनकी माँ के सीने पर तमंचा रख कर फायर कर दिया, जो मिस हो गया।

हालाँकि, पुलिस इसे आपसी विवाद बता रही है, लेकिन कहा जा रहा है कि झगड़े की जड़ तिरंगा यात्रा ही है। मोहल्ला इमाम चौक मुस्लिम बहुल इलाका है। यहाँ के रस्तोगी परिवार के एक सदस्य की बाइक मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति से टकरा गई। इसके बाद यह विवाद शुरू हुआ।

सितारे गर्त में… क्योंकि दूध का जला भारत अब दही भी फूँक-फूँक कर खा रहा: राजनीति हो या फिल्म आपका ‘चुनाव’ ही इनकी निर्लज्जता का जवाब है

भारत के वामपंथी-लिबरल जमात के लिए चीजें तीन तरह की होती हैं। एक सही, दूसरा गलत और तीसरा जो गलत है लेकिन उसकी वजह ‘जेन्युइन’ है। इन्होंने तीनों खाँचों में अपनी सहूलियत के हिसाब से चीजें भी फिट कर रखी है। पहले वर्ग में वे बातें हैं जो उनकी कही है। वह हमेशा सही ही होता है। भले वे युद्धिष्ठिर से पहले अशोक का अवतरण करवा दें।

दूसरे वर्ग में वे हैं जो उनके कहे को तर्क की कसौटी पर परखते हैं। जो हिंदुत्व की बात करते हैं। जो राष्ट्र की बात करते हैं। ऐसे लोग इनके लिए हमेशा गलत ही होते हैं। तीसरे वर्ग में वे इस्लामी आतंकी हैं, जिनके गलत करने की ‘जेन्युइन’ वजह है। जैसे, यदि नूपुर शर्मा नहीं होती तो कोई गौस मोहम्मद और मोहम्मद रियाज किसी कन्हैया लाल का गला ही नहीं काटता।

चीजों को परखने की इन्हीं तीन कसौटियों को अंतिम सत्य मानने वाले हमारे देश में हर क्षेत्र में भरे पड़े हैं। राजनीति हो या खेल। साहित्य हो या मनोरंजन। प्रशासन हो या न्यायपालिका। शिक्षा हो या खेती-किसानी… कोई क्षेत्र इनकी विशेषज्ञता से वंचित नहीं है। यही कारण है कि इनके लिए आतंकवाद भी गुड और बैड होता है।

अपनी इस निर्लज्ज्ता में ये केवल हिंदुओं को ही नीचा नहीं दिखाते। केवल भारत राष्ट्र की अवधारणा को ही चुनौती नहीं देते। हमारी महान परंपराओं और संस्कृति को ही तुच्छ नहीं बताते। वे उस नैतिकता, सामाजिक आदर्श और तय रिश्तों को भी बेहयाई से लाँघते हैं, जो सामाजिक प्राणी होने के नाते मनुष्यों से अपेक्षित है।

इसी निर्लज्जता की वजह से आज आमिर खान से लेकर नीतीश कुमार तक चर्चा में हैं। राजनीतिक निर्लज्जता की इसी परंपरा के कारण एक व्यक्ति 22 साल में आठवीं बार शपथ ले लेता है। हर बार मुख्यमंत्री वही होता है, बस पाटर्नर बदल जाते हैं। यही निर्लज्ज परंपरा बॉलीवुडियों को यह कहने का साहस देती है कि ‘मत देखो हमारी फिल्म, किसी ने जबर्दस्ती थोड़े की है।’

यह काबिलेगौर है कि जब-जब राष्ट्रवाद की भावना इस देश की नसों में गहरे से उतरती है, यह निर्लज्जता फड़फड़ाने लगती है। लाल सिंह चड्ढा से करीब 23 साल पहले 1999 में आमिर खान की एक फिल्म आई थी ‘सरफरोश’। इस फिल्म के रिलीज होने के चंद दिन के बाद ही कारगिल का युद्ध हुआ। ‘ऑपरेशन विजय’ ने राष्ट्रवाद के भाव को द्रुत गति प्रदान कर रखी थी। उसी साल एक इंटरव्यू में आमिर खान ने इस देश को यह समझाने की कोशिश की थी कि युद्ध के पीछे तो आईएसआई होता है। उन्होंने माना था कि पाकिस्तान के प्रति भारतीयों का विरोध उन्हें निराश करता है, जो ठीक नहीं है।

2014 में नरेंद्र मोदी के रथ पर सवार जब राष्ट्रवाद का यह भाव फिर से देश में लौटा तो इसी आमिर खान को इस देश में डर लगने लगा। तुर्की जब कश्मीर को पाकिस्तान का बताने लगा तो आमिर खान के भीतर का भी उम्माह जाग उठा।

भारत के प्रधानमंत्री ने वैश्विक मंच से पूरी दुनिया को संदेश दिया कि गुड और बैड टेररिज्म कुछ नहीं होता। टेररिज्म मतलब टेररिज्म ही होता है। अब ये गुड और बैड टेररिज्म नहीं चलेगा। इसके बाद अचानक से भारत की सेना को निशाना बनाने का चलन तेज हो गया। उसके पराक्रम और क्षमता पर सवाल उठाए जाने लगे। सिनेमाई पटल पर भारतीय सैनिकों को जोकर की तरह चित्रित किया जाने लगा।

लाल सिंह चड्ढा मैंने देखी नहीं है। वैसे भी मैं फिल्में न के ही बराबर देखता हूँ। लेकिन इस फिल्म की कहानी और किरदारों को लेकर जो तथ्य सामने आए हैं, वे बताते हैं कि इस फिल्म में भी भारतीय राष्ट्रवाद, हिंदू परंपराओं को नीचा दिखाने के चलन का निर्वाह किया गया है।

भले राजनीति से लेकर बॉलीवुड तक इन निर्लज्जों को सहूलियत से अपना शयन कक्ष बदलने की अनुमति देता हो। लेकिन, भारत का बहुसंख्यक समाज आज भी नैतिकता, सामाजिक आदर्श और तय रिश्तों के स्तंभों पर खड़ा है। इसलिए जरूरी है कि चुनावी अखाड़ा हो या मल्टीप्लेक्स, इसका प्रत्युत्तर भारतीय समाज भी निर्ममता से देता रहे। यह उत्तर शमशेरा और लाल सिंह चड्ढा की दुर्गति से ही नहीं रुकता। 2024 में एक बार फिर से मोदी की वापसी ही इसका विराम नहीं है। जब तक इनकी निर्लज्जता पर बार-बार प्रहार नहीं होगा ये नष्ट नहीं होंगे। इनके भीतर का डर गहरा नहीं होगा। इन्हें पता ही नहीं चलेगा कि शयनकक्ष बदलने के दिन बीत गए।

इन पर लगातार प्रहार इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि ये हमारे वोट, हमारे प्रेम, हमारे भरोसे, हमारे समय, हमारी जेब, श्रम से उपार्जित हमारे धन से खरीदे गए टिकट की कीमत पर खड़े हुए हैं। हमसे ये सितारे बने हैं। इन्हें बार-बार बताते रहिए कि आज का भारत जग चुका है। वह दूध से ऐसा जला है कि अब दही भी फूँक-फूँककर खाता है।

राष्ट्र-विरोधी एजेंडा चलाने वाले ‘सोशल मीडिया ग्रुप’ छोड़ें सरकारी कर्मचारी: मणिपुर सरकार ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम

सोशल मीडिया पर देशविरोधी एजेंडा चलाने वाले ग्रुपों से मणिपुर सरकार ने अपने कर्मचारियों को तत्काल निकल जाने के आदेश दिए हैं। सरकार के मुताबिक ऐसे कर्मचारी राज्य के सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा हैं। अलगाववादी सोच वाले सभी कर्मचारियों को समूह छोड़ने की अधिकतम समय सीमा 12 अगस्त शाम 6 बजे तय की गई है। यह आदेश बुधवार (10 अगस्त 2022) को जारी हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह आदेश विशेष सचिव (गृह) एच. ज्ञान प्रकाश द्वारा जारी किया गया है। इस पत्र के मुताबिक, “कई सीनियर व अन्य अधिकारी अनजाने या जानबूझ कर अलगाववाद या राष्ट्रविरोधी ग्रुपों में फेसबुक या व्हाट्सएप के जरिए जुड़े हुए हैं। ऐसे अधिकारी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। साथ ही इससे प्रदेश के कानून व्यवस्था पर बुरा प्रभाव भी पड़ता है। ऐसे अधिकारियों या कर्मचारियों को आदेश दिया जाता है कि वो 12 अगस्त (शुक्रवार) तक ऐसे तमाम ग्रुपों से अलग हो जाएँ।”

इस पत्र में देशविरोधी समूहों में जुड़े ऐसे अधिकारियों को चेतावनी भी दी गई है कि ऐसा न करने पर उनके खिलाफ अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968 और केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम 1964 के कुछ प्रावधानों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पत्र के मुताबिक कुछ ऐसे अधिकारी भी हैं जो उन ग्रुपों में ऐसी जानकारी शेयर करते हैं जो उन्हें नहीं करनी चाहिए। पत्र में विशेषकर फेसबुक और व्हाट्सएप ग्रुपों का जिक्र किया गया है।

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते अधिक स्वायत्ता की माँग के साथ आदिवासी बहुल पर्वतीय जिलों के कुछ हिस्सों में हिंसा फ़ैल गई थी। पुलिस को इस हिंसा को काबू करने के लिए काफी मशक्क्त करनी पड़ी थी। इसी के साथ एहतियातन 2 दिनों के लिए इंटरनेट को बंद करना पड़ा था।