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‘मैं ईसाई हूँ, तिरंगे को नहीं करूंगी सैल्यूट…’ : 15 अगस्त पर स्कूल की प्रिंसिपल की हरकत पर भड़के लोग, कर्नाटक की घटना

कर्नाटक से जहाँ स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगे के अपमान का मामला सामने आया है, वहीं तमिलनाडु से ईसाई प्रिंसिपल द्वारा तिरंगे को सलामी नहीं देने के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। उनका कहना है कि मैं ईसाई हूँ, तिरंगे को सलामी नहीं दूँगी। हमारा मजहब इस बात की इजाजत नहीं देता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह मामला तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले का बताया जा रहा है। जिले के एक सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और ध्वज को सैल्यूट करने से इनकार कर दिया था। इसके पीछे का कारण जानकर आप हैरान रह जाएँगे और इस बात पर विचार करने पर विवश हो जाएँगे कि ऐसे भी लोग हैं।

आपको बताते चलें कि तिरंगे को सैल्यूट करने से इनकार करते हुए महिला ईसाई प्रिंसिपल ने यह कारण दिया कि उसका मजहब उसे उसके गॉड के अलावा किसी और को सैल्यूट करने से मना करता है। बता दें कि यह सारी घटना 15 अगस्त के दिन स्कूल में आयोजित हुए समारोह के दौरान की है। वहीं प्रिंसिपल के तिरंगा नहीं फहराने की वजह से सहायक प्रधानाध्यापक द्वारा तिरंगा फहराया गया।

ईसाई प्रिंसिपल ने तिरंगा फहराने से किया मना

जानकारी यह भी सामने आ रही है कि स्कूल की महिला ईसाई प्रिंसिपल प्रिंसिपल तमिलसेल्वी ने तिरंगे को फहराने से भी मना कर दिया। बताया जा रहा है महिला ने पिछले वर्ष भी इसी तरह तिरंगा फहराने से मना कर दिया था। बता दें वह इसी वर्ष सेवा से रिटायर भी होने जा रही हैं। वहीं अब इस मामले को लेकर धर्मपुरी के मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) को शिकायत सौंपी गई है।

इस केस से जुड़े एक वायरल वीडियो में महिला ईसाई प्रिंसिपल यह तर्क देती भी नजर आ रही है कि उसका राष्ट्रीय ध्वज न फहराना या सलामी न देने के पीछे अनादर करना नहीं है। उसने कहा “हम केवल गॉड को सलाम करते हैं और किसी को नहीं। हम ध्वज का सम्मान करते हैं लेकिन हम केवल गॉड को सलाम करेंगे। इसलिए, हमने सहायक प्रधानाध्यापक को झंडा फहराने के लिए कहा।”

‘तालिबानी! सलमान रुश्दी को चाकू मरवाने में तेरा हाथ तो नहीं’: रोहिंग्या पर भिड़े AAP विधायक और प्रोपगेंडा पत्रकार, कहा- आओ मुस्लिमों का वोट लेने

प्रोपेगंडा पोर्टल ‘जनता का रिपोर्टर’ के संस्थापक रिफत जावेद ने रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर सवाल उठाने पर आम आदमी पार्टी के विधायक (AAP MLA) नरेश बाल्यान पर हमला बोला है। जावेद ने कहा कि आम आदमी पार्टी को वोट देने से बेहतर है कि दिल्ली में मुस्लिम भाजपा को जीतने दें।

जावेद के इस ट्वीट पर दिल्ली के उत्तम नगर से आम आदमी पार्टी के विधायक नरेश बाल्यान उखड़ हो गए जावेद को ‘तालिबानी’ बता दिया। उन्होंने रिफत जावेद से सवाल पूछ लिया कि प्रसिद्ध लेखक सलमान रुश्दी की हाल में अमेरिका पर हुए हमले में कहीं उनका हाथ तो नहीं।

दरअसल, ये मामला तब शुरू हुआ, जब रिफत जावेद ने बाल्यान के ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए उन्हें ‘संघी’ बता दिया। इसके साथ ही जावेद ने आम आदमी पार्टी को वोट देने के लिए मुस्लिमों को लताड़ा।

जावेद ने लिखा, “अगले चुनाव आओ। यह संघी मुस्लिमों से वोट माँगेगा, लेकिन इस्लामोफोब (मुस्लिमों से घृणा करने वाला) के इस घृणित ट्वीट को देखिए। दिल्ली के प्यारे मुस्लिमों, आप केजरीवाल के नेतृत्व में नफरत फैलाने वालों की सरकार के ही लायक हैं। आपके लिए कोई सहानुभूति नहीं।”

दरअसल, नरेश बाल्यान ने केंद्र सरकार को घेरने के लिए रोहिंग्या शरणार्थियों पर ट्वीट किए थे। बाल्यान के एक ट्वीट में लिखा है, “बीजेपी के भक्त कश्मीर फाइल्स के पोस्टर ही चिपकाते रह गए। उधर मोदी सरकार ने रोहिंग्या शरणार्थियों को 250 पक्के मकान, राशन और सिक्योरिटी भी दे दिया।” उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए पूछा कि इन फ्लैट्स में रहने वाले रोहिंग्या मुस्लिमों के घरों से कचरा कौन उठाएगा। उन्होंने तजिंदरपाल सिंह बग्गा और संबित पात्रा का नाम लेकर कटाक्ष किया।

वहीं, जावेद द्वारा बाल्यान ने एक अन्य ट्वीट में लिखा है, “केजरीवाल जी ने तो कम से कम अपने देश की जनता को रेवड़ी दी। ये भाजपाई तो रोहिंग्या को ही दिल्ली में 148 करोड़ रुपए का 250 फ्लैट कर दिया। कितने बड़े गद्दार हैं भाजपाई?” इसके बाद उन्होंने भाजपा पर सवाल उठाया।

ये दोनों ट्वीट नरेश बाल्यान ने 17 अगस्त को किए। रिफत इन्हीं रोहिंग्या को फ्लैट देने की बात AAP विधायक द्वारा उठाने पर चिढ़ गए। इसी आधार पर उन्होंने मुस्लिमों को कोसते हुए आम आदमी पार्टी को वोट देने के लिए लताड़ा।

रिफत ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “दिल्ली के मेरे मुस्लिम दोस्तों ने अक्सर तर्क दिया कि अगर वे AAP को वोट नहीं देेते तो बीजेपी जीत जाती। मैंने तब उनसे कहा था और अब दोहरा रहा हूँ कि ‘AAP को वोट देने से बेहतर है कि बीजेपी को जीतने दिया जाए’।”

इस पर नरेश बाल्यान ने लिखा, “और तालिबानी? तूम भी लंदन में और सलमान रसदी भी लंदन में। अमरीका में चाकू मरवाने में तुम्हारा तो हाथ नही कहीं?”

बता दें कि आम आदमी पार्टी के नेता रोहिंग्या को लेकर भाजपा पर जो आरोप लगा रहे हैं, उसका केंद्रीय गृह मंत्रालय ने खंडन किया है। बुधवार (17 अगस्त 2022) को गृह मंत्रालय ने कहा कि उसने रोहिंग्या मुस्लिमों को फ्लैट देने का निर्देश नहीं दिया है। मंत्रालय का कहना है कि वापस भेजने तक रोहिंग्या को डिटेंशन सेंटर में ही रखा जाएगा।

गौरतलब है कि ये वही रिफत जावेद हैं, जिन्होंने पिछले साल अक्टूबर में एक किस्सा सुनाया था। अपने किस्से में उन्होंने बताया था कि उनका राजेश नाम का एक दोस्त था, जिसका परिवार उन्हें अपने घर पर नमाज पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता था। जब वे नमाज पढ़ते थे तो वे देवी-देवताओं की मूर्तियों को ढंक देते थे।

रिफत ने बताया था कि वो पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक विश्वविद्यालय छात्र हुआ करते थे, तब वो अपने दोस्त राजेश के यहाँ अक्सर पढ़ने जाया करते थे, जिसका घर बड़ा बाजार में था। रिफत जावेद की मानें तो राजेश के दादाजी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का हिस्सा थे।

BBC के साथ 12 वर्षों तक काम कर चुके रिफत जावेद ने आगे लिखा था, “मेरे दोस्त राजेश का परिवार हमेशा मुझे अपने घर पर नमाज पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता था। इसके लिए वो हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरें ढक देते थे। अब ये नया भारत मुझे पहचान में ही नहीं आ रहा है।”

हालाँकि, रिफत ने आज तक ऐसी कोई स्टोरी नहीं बताई, जिसमें उन्होंने अपने किसी हिंदू दोस्त को अपने घर पर बुलाया हो और उसे वहाँ पूजा-पाठ करने के लिए प्रेरित किया हो। रिफत एकतरफा लिबर्टी चाहते हैं। शायद यही कारण है कि रोहिंग्या की बात उठाने पर वे नरेश बाल्यान ने खफा हो गए।

‘अरब की औरतें मोटी’ वाली रिपोर्ट में छापी जिस हिरोइन की तस्वीर वह भड़कीं, ‘द इकोनॉमिस्ट’ पर करेंगी केसः कहा- यह निजता का उल्लंघन, तस्वीर से छेड़छाड़ भी की

लंदन के जाने माने समाचार पत्र ‘द इकोनॉमिस्ट’ ने हाल ही में अरब की औरतों को ‘मोटी’ बताते हुए एक लेख छापा था। इस लेख में पुरुषों और महिलाओं के बीच मोटापे का अंतर समझाने के लिए एक इराकी अभिनेत्री की तस्वीर छापी गई थी। लेख का शीर्षक था ‘अरब जगत में पुरुषों की तुलना में महिलाएँ मोटी क्यों हैं?’

इस लेख में जिस इराकी अभिनेत्री की तस्वीर छापी गई थी उन्होंने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। साथ ही 42 वर्षीय अभिनेत्री ने कहा है कि वो ‘द इकोनॉमिस्ट’ के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज करेंगी। तालेब को ‘द इकोनॉमिस्ट’ के लेख का शीर्षक द्वेषपूर्ण लगा। लेख में ये भी लिखा गया कि इराकी लोग एक्ट्रेस एनास तालेब के कर्व को सुंदरता के आदर्श के रूप में देखते हैं।

इस लेख के प्रकाशित होने के बाद बलसम मुस्तफा ने ट्विटर पर आर्टिकल में प्रयोग की गई महिला कलाकार की तस्वीर पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि जो महिला तस्वीर में दिख रही है वो बहुत छोटेपन से हर टैबू को तोड़ती आई है। उसे तो सम्मान दिया जाना चाहिए, न कि उसे या किसी और अरब महिला को बॉडी शेम करना चाहिए।

बता दें कि इस लेख की जबरदस्त आलोचना हुई थी। कई लेखकों ने इस लेख को अरब महिलाओं के बारे में अपमानजनक रूढ़िवादिता के रूप में दर्शाया। इस लेख का निष्कर्ष था कि अरब में औरतें ज्यादातर घर में रहती हैं इसलिए वो मोटी होती हैं। लेख के अनुसार वहाँ औरतों को घर से बाहर खेलने कूदने का मौका नहीं मिलता जिसके कारण वो मोटी हो जाती हैं। जबकि मर्द घर से बाहर जाते हैं, काम करते हैं, मजदूरी करते हैं।

इस लेख को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूटा था। उन्होंने इसे तथ्यों से परे बताया था। अरब से जुड़े लोगों ने ‘द इकोनॉमिस्ट’ की जमकर आलोचना की थी। उन्होंने ये भी पूछा कि आखिर इस समाचार पत्र को उनसे क्या दिक्कत है। एक के बाद एक घटिया लेख उनके बारे में क्यों लिखे जाते हैं। इसी तरह अन्य यूजर्स भी ‘द इकोनॉमिस्ट’ पर गुस्सा उतारते हुए दिखे। कुछ ने आरोप लगाया कि ये विदेशी अखबर अरब वालों से चिढ़ता है क्योंकि वहाँ की औरतों के पास ज्यादा अधिकार हैं। अगर वहाँ उन्हें कोई परेशान करता है तो सीधे जेल में होगा।

नूपुर शर्मा पर फिदायीन हमले की योजना, PDF पढ़वाने देवबंद जाता था आतंकी नदीम; 3 महीने में 18 बार मिली मदरसे में लोकेशन: ATS खंगाल रही कुंडली

उत्तर प्रदेश पुलिस (Uttar Pradesh Police) की आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) द्वारा हाल ही में गिरफ्तार किए जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-E-Mohammad) के आतंकी मोहम्मद नदीम को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। नदीम पाकिस्तान (Pakistan) से उर्दू (Urdu) में आए फिदायीन हमलों से संबंधित PDF फाइल को पढ़वाने के लिए मदरसे तक आता था।

इस PDF में फिदायीन हमलों के बारे में जानकारी दी गई होती थी। इसी में भाजपा (BJP) की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) की हत्या का जिक्र था। नदीम अंग्रेजी और उर्दू भाषा नहीं जानता था। इसलिए वह मदरसे तक आता था। एजेंसियों को शंका है कि वह यहाँ आतंकवाद के लिए भी लोगों को उकसाता था।

सूत्रों के हवाले ने दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यही कारण है कि पिछले 3 महीने में उसकी लोकेशन 18 बार मदरसे में मिली है। पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि वह यहाँ किन-किन लोगों के संपर्क में था। रिपोर्ट के मुताबिक, नदीम उत्तर प्रदेश-बिहार सहित कई राज्यों के युवकों को झाँसे में लेकर आतंकी संगठनों में शामिल होने का दबाव बनाता था।

नदीम आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के साथ-साथ तहरीक-ए-तालिबान (TeT) और पाकिस्तान के TTP के भी संपर्क में था। वह फदायीन हमलों की ट्रेनिंग लेने के लिए पाकिस्तान जाने वाला था। उसके मोबाइल से फिदायीन हमले का PDF पुलिस को मिला है। बता दें कि कि ATS ने नदीम को कोर्ट में पेश किया था, जहाँ से उसे 12 दिन की रिमांड पर भेजा गया है।

ATS ने हाल ही में फतेहपुर से हबीबुल को गिरफ्तार किया था। वह फिदायीन हमले की तैयारी कर रहा था। इसके साथ ही वह मुस्लिम युवकों को दीन के नाम पर बहकाकर उन्हें आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार कर रहा था।

बता दें कि नदीम ने मदरसे से शिक्षा ली है। सहारनपुर गंगोह इलाके के गाँव कुंडाकला के रहने वाले नदीम की रिश्तेदारी पाकिस्तान में है। वह रात में जाग कर नूपुर शर्मा के हत्या की रूपरेखा बना रहा था।

NSA अजीत डोवाल की सुरक्षा में चूक पर एक्शन, 3 कमांडो बर्खास्त, DIG और कमांडेंट का ट्रांसफर: जानिए क्या है पूरा मामला

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल (Ajit Doval) की सुरक्षा में हुई चूक के मामले में केंद्र ने अब सख्त कार्रवाई करते हुए 3 कमांडो को निलंबित कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानि NSA अजीत डोवाल की सुरक्षा में हुई चूक से जुड़े एक मामले में कार्रवाई करते हुए केंद्र सरकार (Central Government) ने 3 कमांडो को नौकरी से हमेशा के लिए बर्खास्त कर दिया है। बताया जा रहा है कि ये तीनों कमांडो उस वक्त ड्यूटी कर रहे थे, जब डोवाल के सरकारी बंगले तक एक संदिग्ध गाड़ी पहुँच गई थीं।

वहीं इस मामले में VIP सुरक्षा से जुड़े DIG और कमांडेंट का ट्रांसफर किया गया है। बता दें कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल (National Security Advisor Ajit Doval) की सुरक्षा में चूक का मामला ज्यादा पुराना नहीं है। बल्कि इसी साल फरवरी महीने का है, इस मामले में तब एक व्यक्ति को हिरासत में भी लिया गया था।

अजीत डोवाल की सुरक्षा में हुई चूक का पूरा मामला

16 फरवरी 2022 को NSA अजीत के दिल्ली स्थित सरकारी बंगले के गेट तक एक अनजान व्यक्ति कार लेकर पहुँच गया था। उसकी इस हरकत के बाद सुरक्षा बल के जवानों ने उसे धर-दबोचा। बता दें कि यह व्यक्ति लाल रंग की एसयूवी कार लेकर डोवाल के घर तक आया था। तब उस व्यक्ति ने दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम को बताया कि उसकी बॉडी में चिप लगा दिया गया है और उसे रिमोट कंट्रोल से नियंत्रित किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि जाँच में उसके शरीर से कोई भी चिप नहीं पाई गई थी। उसने पूछताछ में यह भी माना कि वह कर्नाटक का रहने वाला है और किराए की कार चला रहा था। वहीं उसकी पहचान बेंगलुरु के शांतनु रेड्डी के तौर पर हुई थी। पुलिस ने भी अपनी आधिकारिक स्टेटमेंट में यह बताया कि वह व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर है।

गौरतलब है कि अजीत डोवाल आजाद भारत के पाँचवें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं और वे 30 मई 2014 से इस पद पर नियुक्त हैं। वहीं उनका सरकारी आवास दिल्ली के सबसे सुरक्षित इलाके लुटियंस जोन के 5 जनपथ में स्थित हैं। बता दें कि उनसे पहले पहले पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल यहीं रहते थे। डोवाल को Z+ कैटेगरी की सुरक्षा मिली है और उनकी सुरक्षा CISF के कमांडो करते हैं।

रूस में 10 बच्चे पैदा करने वाली माँ को मिलेगा सम्मानः यूक्रेन से युद्ध के बीच पुतिन का ऐलान, स्टालिन जमाने का ‘मदर हिरोइन’ अवॉर्ड लौटा

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 10 या इससे ज्यादा बच्चे पैदा करने वाली महिलाओं को सम्मानित करने का फैसला लिया है। 10 या उससे ज्यादा बच्चों को पैदा करके पालने वाली महिला को ‘मदर हीरोइन’ (Mother Heroin) अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच तेजी से गिरती जनसंख्या को देखते हुए ये फैसला लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस पुरस्कार के साथ माताओं को 16,138 डॉलर यानी एक मिलियन रूबल की एकमुश्त राशि दी जाएगी। 10 या उससे ज्यादा बच्चे पैदा करने वाली माँ का रूसी संघ की नागरिक होना जरूरी है। जिनका 10वाँ बच्चा एक साल की उम्र पूरी कर लेगा वो माताएँ भी इस पुरस्कार की हकदार होंगी। इसके अलावा युद्ध, आतंकवादी हमले या किसी आपात स्थिति में अगर माँ अपना बच्चा खो देती है तो भी वो इस अवॉर्ड की हकदार होंगी।

कब और क्यों हुई थी ‘मदर हीरोइन’ अवॉर्ड की शुरुआत

दरअसल, “मदर हीरोइन” अवॉर्ड की शुरुआत पहली बार 1944 में पूर्व सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन ने की थी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एक बड़ी आबादी के मारे जाने के कारण इसकी घोषणा की गई थी। हालाँकि, 1991 में सोवियत संघ के पतन के साथ ही इस अवॉर्ड से माताओं को सम्मानित किया जाना भी बंद कर दिया गया था।

मदर हीरोइन अवॉर्ड को ‘हीरो ऑफ रूस और ‘हीरो ऑफ लेबर’ जैसी उपाधियों के बराबर ही प्रतिष्ठित माना जाता है। रूस के बाल दिवस समारोह से एक दिन पहले 1 जून को, पुतिन ने मूल रूप से मदर हीरोइन की उपाधि की घोषणा करने का सुझाव दिया था।

बता दें कि हाल के दशकों में, रूस की जनसंख्या में लगातार गिरावट देखी गई है। 2022 की शुरुआत में 400,000 लोगों की गिरावट के बाद यहाँ कुल जनसंख्या गिरकर 145.1 मिलियन हो गई। इसी कारण से जनसंख्या को एक बार फिर से बढ़ाने के लिए रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ‘मदर हीरोइन’ अवॉर्ड की शुरुआत की है। जिससे महिलाओं को अधिक से अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित किया जा सके।

एक बिरादरी के मुस्लिम नहीं थे सानिया और वसीम, इसलिए भाई-बाप ने मिलकर गर्दन काट दी: मेरठ में मिली लड़की की सिर कटी लाश की गुत्थी सुलझी

मेरठ में जिस लड़की की सिर कटी लाश मिली थी, उसकी पहचान सानिया के तौर पर हुई है। उसकी हत्या उसके बाप और भाई ने मिलकर की थी। वजह गैर बिरादरी के मुस्लिम वसीम से उसका प्रेम करना था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने सानिया के अब्बा शाहिद कुरैशी के साथ उसकी अम्मी और भाई को हिरासत में लिया है। रिपोर्ट के अनुसार 18 साल की सानिया का वसीम से अफेयर चल रहा था। वह उसके साथ ही निकाह करना चाहती थी। लेकिन उसके परिजन इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे।

सानिया जब वसीम के साथ ही निकाह करने के लिए अड़ गई तो अब्बू और भाई ने मिलकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसका धड़ लक्खीपुरा नाले और सिर अंजुम पैलेस के पास नाले में फेंक दिया। पत्रकार सचिन गुप्ता ने ट्वीट कर बताया है कि पुलिस सिर की तलाश अभी भी कर रही है।

लड़की की सिर कटी लाश 12 अगस्त 2022 को मिला था। बदन पर काले रंग का पैंट और नीले रंग की छींट वाला टॉप था। सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार शाहिद ने अपने बयान में कहा है कि कुछ साल पहले वह मेरठ की शहजाद कॉलोनी में परिवार के साथ रहता था। वसीम का घर उसके पड़ोस में ही था। इसी दौरान जान-पहचान हुई थी। लेकिन वसीम सैफी बिरादरी से है, जबकि शाहिद कुरैशी बिरादरी से आते हैं। उन्हें जब इस रिश्ते की भनक लगी तो परिवार ने सानिया को पहले काफी समझाया। फिर भी वह वसीम से छिपकर मिलती रही। एक बार छत से कूदकर आत्महत्या की कोशिश भी की।

शाहिद ने हत्या की बात कबूलते हुए कहा, “सानिया सो रही थी। उसी समय अजीम (सानिया का भाई) ने उसे कसकर पकड़ लिया। मैंने जानवर काटने वाले चाकू से एक ही वार में उसका सिर काट दिया।” लाश को फेंकने के बाद बाप-बेटे घर में आकर सो गए थे। जब परिवार के लोगों ने सानिया की खोज की तो शाहिद ने उसे बुआ के घर भेजने की बात कही थी।

लिसाड़ी गेट इलाके के लक्खीपुरा में गली नंबर 28 के पास सुबह 4 बजे के आसपास जब कुछ लोग मॉर्निंग वॉक पर निकले तो उन्होंने सिर कटी लाश देखी थी। लाश चादर की गठरी में बाँधी गई थी। गठरी कब्रिस्तान की बाउंड्री के पास रखी हुई थी। गठरी से खून निकलता देख लोगों ने पुलिस को खबर दी थी। ऑपइंडिया से बात करते हुए मेरठ के DSP अरविन्द चौरसिया ने कहा था कि शायद लाश को कब्रिस्तान में फेंकने का प्रयास किया गया होगा, लेकिन बाउंड्री से टकरा कर वह बाहर ही रह गई।

अब फुटबॉल क्लब मैनचेस्टर यूनाइटेड खरीद रहे हैं एलन मस्क? ट्वीट से फिर मचाया हड़कंप: जानें क्या है सच्चाई

दुनिया के सबसे अमीर शख्स टेस्ला के मालिक एलन मस्क ने एक बार फिर से अपने ट्वीट से सबको चौंका दिया है। इस बार उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से बुधवार (17 अगस्त 2022) सुबह ट्वीट कर लिखा कि वो ब्रिटिश फुटबॉल क्लब मैनचेस्टर यूनाइटेड (Manchester United) को खरीद रहे हैं। इससे ठीक वैसे ही हलचल मची जैसे ट्विटर खरीदने के समय हुई थी।

हालाँकि, इसके बाद जल्द ही वे अपनी बात से पलट गए। उन्होंने कहा कि वो मजाक कर रहे थे। जब यूजर ने उनसे पूछा कि क्या वो सच में मैनचेस्टर यूनाइटेड खरीद रहे हैं तो उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ये ट्विटर पर लंबे समय से चला आ रहा एक मजाक है। वो कोई भी स्पोर्ट्स टीम नहीं खरीद रहे हैं। इस प्रकार के मजाक वो अक्सर करते रहे हैं। इससे पहले उन्होंने कोका कोला की कंपनी खरीदने की बात कही थी। तब उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि वो इस कोल्ड ड्रिंक में कोकीन मिलाकर बेचेंगे।

जब एलन मस्क ने मजाक में पूछी थी ट्विटर की कीमत

एलन मस्क के मजाक को कई बार समझना मुश्किल हो जाता है। वो मजाक में कही बात को कई बार सत्य भी कर देते हैं। उदाहरण के तौर पर 2017 में उन्होंने मजाक में ही पूछा था कि ट्विटर कितने का होगा? इसके बाद उन्होंने सच में इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को खरीदने की तैयारी कर ली थी। इस दौरान उन्होंने खूब सुर्खियाँ भी बटोरी थी। हालाँकि, बाद में डील पूरी न हो सकी।

वहीं टेस्ला कंपनी के सीईओ एलन मस्क ने अपने एक ट्वीट में ये भी कहा कि स्पष्ट तौर पर, मैं रिपब्लिकन पार्टी के आधे बाएँ और डेमोक्रेटिक पार्टी के आधे दाहिने हिस्से का समर्थन करता हूँ।

क्या है मैनचेस्टर यूनाइटेड

गौरतलब है कि मैनचेस्टर यूनाइटेड विश्व के सबसे फेमस फुटबाल क्लबों में से एक है। पुर्तगाल के स्टार प्लेयर क्रिस्टियानो रोनाल्डो भी इसी क्लब से खेलते हैं। इस क्लब का मालिकाना हक अमेरिका की ग्लेजर फैमिली के पास है। इन्होंने इसे साल 2005 में खरीदा था।

काम की तलाश में विनोद कांबली, इनकम केवल ₹30000: कहा- सचिन तेंदुलकर सब जानते हैं, पर मैं उनसे उम्मीद नहीं रखता

सचिन तेंदुलकर के जिगरी दोस्त और भारत के पूर्व क्रिकेटर विनोद कांबली (Former India cricketer Vinod Kambli) आज पैसे-पैसे को मोहताज हैं। वह केवल 30 हजार रुपए प्रतिमाह मिलने वाली पेंशन से मुंबई जैसे शहर में गुजारा कर रहे हैं।

50 वर्षीय खिलाड़ी अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए क्रिकेट से जुड़ा कोई भी काम करने के लिए तैयार हैं। कांबली ने मिड-डे से बातचीत में कहा कि उन्हें काम की जरूरत है। इस वक्त उनकी आय का एकमात्र स्रोत केवल बीसीसीआई की पेंशन है। कांबली को बीसीसीआई से पेंशन के रूप में हर महीने 30,000 रुपए मिलते हैं।

इन दिनों आर्थिक तंगी से जूझ रहे कांबली ने कहा, “मैं एक रिटायर क्रिकेटर हूँ, जो पूरी तरह से पेंशन पर निर्भर है। इसके लिए मैं भारतीय क्रिकेट बोर्ड का आभारी हूँ।” कांबली ने आखिरी बार 2019 में टी-20 मुंबई लीग के दौरान एक टीम को कोचिंग दी थी, लेकिन कोरोना के कारण वह टूर्नामेंट भी बंद हो गया और कांबली की कमाई घट गई। अभी उन्हें काम की सख्त जरूरत है।

बताया जा रहा है कि कांबली नेरुल में तेंदुलकर मिडलसेक्स ग्लोबल एकेडमी में युवा क्रिकेटरों को कोचिंग देते थे। लेकिन अब उनके लिए घर से नेरुल जाना बहुत मुश्किल हो रहा है।

विनोद कांबली ने इंटरव्यू में बताया, “मैं सुबह 5 बजे उठता था, डीवाई पाटिल स्टेडियम के लिए कैब लेता था और शाम को बीकेसी मैदान में कोचिंग करता था। यह पूरा शेड्यूल मेरे लिए बहुत मुश्किल था।”

जब कांबली से पूछा गया, “क्या आपके बचपन के दोस्त सचिन तेंडुलकर (Sachin Tendulkar) को आपकी स्थिति के बारे में पता है।” इस सवाल पर विनोद ने कहा, “सचिन सब कुछ जानते हैं, लेकिन मैं उनसे कुछ भी उम्मीद नहीं कर रहा हूँ। उन्होंने मुझे तेंडुलकर मिडलसेक्स ग्लोबल एकेडमी में काम दिया था। मैं बहुत खुश था। वह बहुत अच्छा दोस्त रहा है। वह हमेशा मेरे साथ है।”

बता दें कि विनोद कांबली ने भारत के लिए 17 टेस्ट मैच खेले हैं। इनमें उन्होंने 1084 रन बनाए हैं। वहीं 104 वनडे मैचों में उन्होंने 2477 रन बनाए हैं। टेस्ट मैच में उन्होंने 4 शतक और वनडे में 2 शतक लगाए हैं।

बिहार के नए कानून मंत्री का किडनैपिंग केस में नामः बोले नीतीश कुमार- मुझे नहीं पता, दावा- जब करना था कोर्ट में सरेंडर, तब ले रहे थे शपथ

बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता कार्तिकेय सिंह (Kartikeya Singh) उर्फ मास्टर साहब को मंत्री बनाने पर विवाद हो गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कार्तिकेय सिंह पर अपहरण का आरोप है और 16 अगस्त को उन्हें कोर्ट में सरेंडर करना था, लेकिन वे उसी दिन प्रदेश में कानून मंत्री की शपथ ले रहे थे।

कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी के नेता रहे बाहुबली अनंत सिंह के बेहद करीबी माने जाते हैं कार्तिकेय सिंह और वह राजद के विधान पार्षद हैं। कार्तिकेय सिंह पर केस को लेकर सीएम नीतीश ने अनभिज्ञता जाहिर की है।

अपहरण मामले में कार्तिकेय सिंह की गिरफ्तारी के खिलाफ वॉरंट पर जब सवाल किया गया तो नीतीश कुमार ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। बता दें कि इस मामले को भाजपा नेताओं ने जोर-शोर से उठाया है और नीतीश सरकार पर सवाल खड़ा किया है।

बिहार के उप-मुख्यमंत्री रह चुके भाजपा के वर्तमान राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने कहा, “मैं नीतीश से पूछता हूँ कि क्या वह बिहार को लालू के जमाने में वापस ले जाने की कोशिश कर रहे हैं? कार्तिकेय सिंह को तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए।”

केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कार्तिकेय सिंह को बर्खास्त कर तुरंत जेल भेजने की माँग की है। उन्होंने कहा कि गैंगस्टर अनंत सिंह के दाहिना हाथ कार्तिकेय सिंह को कानून मंत्री बना दिया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का सुशासन से दूर-दूर तक रिश्ता नहीं रह गया है।

कार्तिकेय सिंह पर अपहरण सहित कई आरोप

जिस आरोप को लेकर कार्तिकेय सिंह पर सवालों के घेरे में हैं, यह मामला साल 2014 का है। दानापुर थाना क्षेत्र के बिहटा इलाके में राजू सिंह का अपहरण हुआ था। इस मामले में बिहार के नए कानून मंत्री कार्तिकेय सिंह भी आरोपित हैं। कोर्ट ने उनके खिलाफ वॉरंट जारी किया था और उन्हें 16 अगस्त को पेश होना था।

हालाँकि, कार्तिकेय सिंह कोर्ट नहीं पहुँचे और उस दिन कानून मंत्री पद की शपथ लिए। उन्होंने इस मामले में ना ही कोर्ट के सामने सरेंडर किया है और ना ही जमानत के लिए अर्जी दी है। कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई एक सितंबर को करेगी। 

कार्तिकेय ने अपने चुनावी हलफनामे में अपने ऊपर चार केस दर्ज होने की जानकारी दी है। इनमें चोरी, अपहरण, दंगा करने, सरकारी काम में बाधा पहुँचाने, आपराधिक साजिश रचने, जबरन वसूली से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। इतना ही नहीं, उन पर सार्वजनिक सड़क, पुल, नदी को नुकसान पहुँचाने का भी आरोप है। 

अनंत सिंह के बेहद खास हैं कार्तिकेय सिंह

मोकामा के बाहुबली नेता अनंत सिंह एके-47 के मामले में अभी जेल में हैं। उनकी विधायकी भी चली गई है, लेकिन उनके खासम-खास कार्तिकेय सिंह कानून मंत्री बन गए हैं। कार्तिकेय सिंह मोकामा के शिवनार गाँव के रहने वाले हैं और भूमिहार जाति के दबंग नेता माने जाते हैं।

राजनीति में आने से पहले वह शिक्षक थे। वह साल 2005 में मोकामा के तत्कालीन विधायक अनंत सिंह के संपर्क में आए। बाद में वह उनके चुनावी रणनीतिकार बन गए। जब अनंत सिंह जेलों में जाते थे तो कार्तिकेय सिंह उनकी अनुपस्थिति में उनके सारे काम देखते थे। उनकी पत्नी रंजना कुमारी दो बार मुखिया भी रह चुकी हैं।

इस साल अनंत सिंह की विधायकी जाने के बाद मोकामा सीट पर उप-चुनाव होना है। यहाँ अनंत सीट की पत्नी नीलम सिंह चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। ऐसे में कार्तिके सिंह को उनके साथ चुनाव प्रचार करते भी देखा गया है। पिछले साल वह राजद के टिकट पर विधान पार्षद बने थे। कहा जाता है कि उनके नाम की पैरवी खुद लालू यादव ने अनंत सिंह के कहने पर की थी।

कई दागियों को कैबिनेट में जगह

राजद से हाथ मिलाते ही नीतीश कुमार सरकार की नई कैबिनेट में कई दागियों को जगह मिली है। इनमें कार्तिकेय सिंह के अलावा सुधाकर सिंह, चंद्रशेखर और सुरेंद्र यादव भी शामिल हैं। बक्सर के रामगढ़ से राजद के विधायक और अब मंत्री सुधाकर सिंह पर चावल घोटाले का आरोप है। कहा जाता है कि 2013-14 में उन्होंने चावल जमा नहीं कराया और उसे गबन कर गए। इसी तरह सुरेंद्र यादव पर भी कई आरोप हैं।

इसी तरह नीतीश कुमार की सरकार में एक और मंत्री बने हैं चंद्रशेखर यादव, जो मधेपुरा विधानसभा क्षेत्र से हैट्रिक लगा कर विधानसभा पहुँचे हैं। उन्हें 20 फरवरी, 2022 को दिल्ली स्थित इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (IGIA) से गिरफ्तार किया गया था। वो अपने सामान के साथ 10 कारतूस लेकर भी जा रहे थे। हालाँकि, बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था। पेशे से वो प्रोफेसर हैं। उन्हें शिक्षा मंत्रालय का दायित्व सौंपा गया है।