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सरकारी बैंकों ने 7 साल में वसूले ₹6.42 लाख करोड़ NPA और डूब गए कर्ज, 98.5% विलफुल डिफॉल्टरों पर मुकदमा

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) ने वित्तीय वर्ष 2015 के बाद से ₹6.42 लाख करोड़ के गैर-निष्पादित ऋण (NPA) और बट्टे खाते में डाले गए ऋण अर्थात डूब गए कर्जों की वसूली की है। इसके साथ ही 98.5% विलफुल डिफॉल्टरों पर मुकदमा दायर किया है। यह जानकारी सरकार के पास उपलब्ध आँकड़ों से सामने आई है।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2011 से वित्त वर्ष 2016 तक, सरकार ने पीएसबी में 3.36 लाख करोड़ रुपए की पूँजी डाली है, जबकि बैंकों ने खुद से अतिरिक्त 2.99 लाख करोड़ रुपए जुटाए हैं। वहीं पीएसबी का प्रोविजन कवरेज अनुपात, एक ऐसा उपाय है जो खराब ऋणों को कवर करने के लिए अलग रखी गई राशि को कैप्चर करता है। जो मार्च 2022 के अंत में मार्च 2015 के अंत 46% से बढ़कर 86.9% हो गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2015 से सरकारी बैंकों ने गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में ₹ 5.17 लाख करोड़ और बट्टे खाते में डाले गए खातों में ₹ 1.24 लाख करोड़ की वसूली की है।

बता दें कि पीएसबी का सकल एनपीए अनुपात 31 मार्च, 2018 को 14.6% से गिरकर 31 मार्च, 2022 को 7.4% हो गया, जबकि इस अवधि में शुद्ध एनपीए अनुपात 8% से घटकर 2% हो गया। स्ट्रेस्ड एसेट 15.3% से घटकर 8.7% हो गया है।

वहीं इस मामले में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, “बैंक विभिन्न उपलब्ध वसूली तंत्रों के माध्यम से बट्टे खाते में डाले गए खातों में शुरू की गई वसूली कार्रवाई को जारी रखे हुए हैं।”

इनमें दीवानी और दिवालियापन संहिता, 2016 के तहत नागरिक अदालतों या ऋण वसूली न्यायाधिकरण में वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण और सुरक्षा ब्याज अधिनियम, 2002 के तहत कार्रवाई नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 के तहत या बातचीत के जरिए निपटान/समझौता और एनपीए की बिक्री के जरिए शामिल हैं।

पीएसबी के सकल अग्रिम के अनुपात के रूप में धोखाधड़ी की घटना वित्तीय वर्ष 2013-14 के दौरान 1.32% से गिरकर वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान 0.05% हो गई है।

वहीं ऐसे मामलों में पीएसबी का प्रोवीजन कवरेज अनुपात, एक ऐसा उपाय है जो खराब ऋणों को कवर करने के लिए निर्धारित राशि को कैप्चर करता है, मार्च 2022 के अंत में 46% से बढ़कर मार्च 2015 के अंत में 86.9% हो गया है।

उपरोक्त अधिकारी ने कहा, “इस तरह की धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आई है क्योंकि बेहतर पहचान और रिपोर्टिंग के साथ धोखाधड़ी की जाँच के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं।”

गौरतलब है कि 31 मार्च, 2022 तक 12,265 नामित विलफुल डिफॉल्टरों में से 12,076 (98.5%) के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं, 40.2% के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और 75.5% के खिलाफ सरफेसी की कार्यवाही शुरू की गई है।

अधिकारी ने बताया, “सरकार ने एक अनुकूल कारोबारी माहौल और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा प्रदान की है, जिसने निजी क्षेत्र के बैंकों को 2021-22% में देश में फलने-फूलने के लिए प्रोत्साहित किया है।”

‘टाइम्स नाउ’ की एंकर नाविका कुमार को सुप्रीम कोर्ट से राहत, पुलिस को कार्रवाई न करने के निर्देश: बंगाल में हुई थी पहली FIR, नूपुर शर्मा डिबेट वाला मामला

सुप्रीम कोर्ट ने ‘टाइम्स नाउ’ की एंकर नविका कुमार को बड़ी राहत देते हुए पुलिस को उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने के आदेश दिए हैं। उच्चतम न्यायालय ने यह आदेश नविका कुमार की उस याचिका पर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने की माँग की थी। इस याचिका पर कोर्ट ने पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, दिल्ली व जम्मू-कश्मीर राज्य सरकारों को नोटिस भेजा है। इस मामले में सुनवाई के लिए 2 सप्ताह का समय दिया गया है। यह आदेश 8 अगस्त, 2022 (सोमवार) को आया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह आदेश जस्टिस कृष्णा मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने दिया है। राज्य सरकारों के अलावा इस केस से जुड़े अन्य लोगों को भी नोटिस भेजी गई है। नाविका कुमार की तरफ से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने बहस की। उन्होंने कहा, “टीवी डिबेट के दौरान नाविका चुप थीं। ज्ञानवापी की इस बहस में एक व्यक्ति ने दूसरे को कुछ कहा तो दूसरे ने उस पर पलटवार किया। नविका ने तो इस बहस को शांत करवाया था।”

पश्चिम बंगाल राज्य सरकार की तरफ से इस मामले में एडवोकेट मेनका गुरस्वामी पेश हुईं थीं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि पहली FIR पश्चिम बंगाल में दर्ज हुई थी। इस पर मुकुल रोहतगी ने सवाल किया कि इसमें बंगाल सरकार की अतिरिक्त रुचि क्यों थी ?

बता दें कि 26 मई, 2022 को ज्ञानवापी मुद्दे पर नूपुर शर्मा और तस्लीम अहमद रहमानी के बीच हो रही बहस में तस्लीम द्वारा बार-बार शिवलिंग का अपमान किया जा रहा था। नूपुर शर्मा द्वारा तस्लीम रहमानी को दिए गए जवाब को ऑल्ट न्यूज़ के कथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबेर ने काट-छाँट कर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया, जिस से देश में तनाव फ़ैल गया। इसके चलते देश के अलग-अलग हिस्सों में न सिर्फ हिंसक गतिविधियाँ हुईं थीं, बल्कि नूपुर समर्थकों की हत्या भी की जाने लगी। इस शो की एंकर नविका कुमार थीं, जिन पर कुछ इस्लामी समूहों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में FIR दर्ज करवाई थी।

1 जुलाई को नूपुर शर्मा अपने खिलाफ देश भर में हुए FIR के खिलाफ राहत माँगने सुप्रीम कोर्ट गईं तो उन्हें तल्ख़ टिप्पणियों का सामना करना पड़ा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मोहम्मद जुबेर और नूपुर शर्मा को देश भर में हुए केस में राहत दी थी और राज्य सरकारों से दंडात्मक कार्रवाई न करने के लिए कहा था।

कॉमनवेल्थ गेम्स में PV सिंधु ने जीता गोल्ड मेडल, PM मोदी ने बताया ‘चैंपियनों की चैंपियन’: मेडल तालिका में भारत ने न्यूजीलैंड को पीछे छोड़ा

कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG 2022) के अंतिम दिन भारत की स्टार शटलर पीवी सिंधु ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता। सोमवार (8 अगस्त, 2022) को बैडमिंटन विमेन्स के सिंगल्स मुकाबले में उन्होंने कनाडा की मिशेल ली को शिकस्त दी। फाइनल में सिंधु ने ली को 21-15, 21-13 से हराया। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने अब तक 56 मेडल अपने नाम कर लिए हैं। इनमें 19 गोल्ड, 15 सिल्वर और 22 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। सिंधु की इस जीत के साथ भारत पदक तालिका में न्यूजीलैंड को पछाड़ते हुए चौथे स्थान पर पहुँच गया है।

बैडमिंटन में सिंधु के बाद अब लक्ष्य सेन से पुरुष एकल में स्वर्ण की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीत की बधाई देते हुए उन्हें ‘चैम्पियनों की चैम्पियन’ बताया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गेम में शानदार शुरुआत करते हुए पीवी सिंधु ने पहले 4-2 से बढ़त बना ली थी, लेकिन मिशेल ली ने जबरदस्त वापसी करते हुए स्कोर को बराबरी पर ला दिया। इसके बाद दोनों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। पहले गेम में ब्रेक तक सिंधु 11-10 से आगे थीं। ब्रेक के बाद सिंधु ने तुरंत ही 5 अंकों की बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद स्कोर 17-12 हो गया। वहीं, मिशेल ली ने एक बार फिर वापसी की कोशिश की, लेकिन इस बार सिंधु के आक्रामक शॉट के आगे उनके पसीने छूट गए। इस तरह भारतीय खिलाड़ी ने पहले गेम को 21-15 से अपने नाम कर लिया।

इसके बाद दूसरे गेम में मिशेल ली ने पहला अंक हासिल किया, जिसके बाद सिंधु ने दमदार वापसी की। उन्होंने दो-तीन जबरदस्त स्मैश लगाए। ली कुछ समझ पाती, उससे पहले ही सिंधु ब्रेक तक 11-6 से आगे हो गईं। इसके बाद सिंधु ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ली को कोई मौका नहीं दिया और दूसरा गेम भी उन्होंने 21-13 से अपने नाम कर लिया।

बता दें कि कॉमनवेल्थ में विमंस सिंगल्स मुकाबलों में सिंधु का यह पहला गोल्ड है। इससे पहले 2018 में सायना नेहवाल ने कॉमनवेल्थ में विमेंस सिंगल्स का गोल्ड जीता था। फाइनल में उन्होने सिंधु को ही हराया था।

जर्जर अवस्था में पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर, कभी भी हो सकता है धराशायी: मरम्मत के लिए ASI और गहलोत सरकार से गुहार, सीवर से आचमन को मजबूर श्रद्धालु

राजस्थान के पुष्कर में स्थित ब्रह्मा मंदिर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में बदहाल है और ये धरोहर कभी भी धराशाई होने की कगार पर खड़ा है। सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा का ये मंदिर मरम्मत और पुनर्निर्माण की बाट जोह रहा है। मंदिर के मूल ढाँचे में कई दरार हैं और ये कई जगह से टूट-फूट गया है। दुनिया भर कई श्रद्धालु यहाँ आते हैं, लेकिन उनकी नजर 3 बड़े दरारों पर पड़ती है। जगह-जगह से फर्श भी धँस चुकी है। बता दें कि इस पृथ्वी पर भगवान ब्रह्मा के दुर्लभ मंदिरों में से ये एक है।

इस सम्बन्ध में ‘दैनिक भास्कर’ से बात करते हुए मंदिर कमिटी के सचिव और SDM सुखराम भिंडर का कहना है कि ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) को उन्होंने कई बार पत्र लिखा है, लेकिन उसका जवाब नहीं आता। उन्होंने कहा कि ASI की अनुमति के बिना यहाँ कोई कार्य नहीं हो सकता। परकोटे के बाहरी हिस्से में दो बड़ी दरारें और एक अंदर है। मुख्य मंदिर के गर्भ गृह का पलस्तर भी जड़ चुका है। 2 महीने पहले ASI और ‘राष्ट्रीय धरोहर प्राधिकरण’ की टीम ने यहाँ का दौरा किया था, तब उन्हें इसकी जानकारी दी गई थी।

मंदिर के भूतल में स्थित 2 प्राचीन शिव मंदिरों को पूजा के लिए बंद कर दिया गया है, क्योंकि उनका ड्रेनेज सिस्टम ही जाम हो चुका है। श्रद्धालु जल चढ़ाते हैं तो पानी बाहर ही नहीं जा पाता। नींव में रिसाव की भी आशंका है। लोग सीवर से आचमन करने को मजबूर हैं। सरोवर को सीवर मुक्त करने के लिए बजट का प्रावधान तो हुआ, लेकिन योजना का खाका ही तैयार नहीं हो पाया। परिक्रमा मार्ग धँसने के कारण एक तरफ झुक गया है।

साथ ही बरगद के एक विशाल पेड़ से भी मंदिर को नुकसान पहुँच रहा है। RTDC (राजस्थान पर्यटन विकास निगम) के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ ने यहाँ की दुर्दशा को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय संस्कृति मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के समक्ष रखा। दोनों राजस्थान से ही आते हैं। दिव्यांगों को दर्शन में दिक्कत होने के कारण जॉइंट कमिश्नर उमाशंकर शर्मा ने इसकी मरम्मत के लिए ASI को खाका भेजने का निर्देश भी दिया।

मध्यप्रदेश के भानपुरा में स्थित ज्योर्तिमठ की अवांतर पीठ के जगद्‌गुरु शंकराचार्य ज्ञानानंद तीर्थ भी हाल ही में पुष्कर पहुँचे थे, जहाँ उन्होंने इस मंदिर की जर्जर स्थिति को देखते हुए सरकार से मरम्मत की माँग की। सैकड़ों शिष्यों के साथ यहाँ पहुँचे ज्ञानानंद ने कहा कि मंदिर का कोई हिस्सा ढह गया तो जनहानि हो सकती है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार से भी लोग इसकी मरम्मत की माँग कर रहे हैं।

जामिया, AMU जैसे 5200 मुस्लिम संस्थान, 50% आरक्षण: पसमांदा मुस्लिमों के लिए BJP के OBC मोर्चा ने उठाई आवाज, कट्टरपंथी भड़के

भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लक्ष्मण (K. Laxman) ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया इस्लामिया और जामिया हमदर्द जैसे मुस्लिम संस्थानों में पसमांदा समुदाय (Pasmanda Community) के लिए 50% आरक्षण की माँग की है। हालाँकि, इस कदम ने समुदाय के एक वर्ग को नाराज कर दिया है। वहीं, कई लोगों ने इसे जाति के आधार पर समुदाय को विभाजित करने के लिए एक सोची समझी चाल बताया है।

नई दिल्ली में शनिवार (7 अगस्त 2022) को पसमांदा मुस्लिम स्नेह मिलन एवं सम्मान समारोह में लक्ष्मण ने कहा,

“मैं समुदाय के भीतर पसमांदा मुस्लिमों के सदियों पुराने अन्याय और शोषण की ओर आपका ध्यान केंद्रित करना चाहता हूँ। पसमांदा समुदाय सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से बेहद कमजोर हैं। आजादी के 75 साल बाद भी उनकी हालत में कोई सुधार नहीं आया है। पसमांदा का मुद्दा हिंदू-मुस्लिम एकता के शोर में दब गया है। पसमांदा मुस्लिमों को आज एएमयू (AMU), जामिया मिलिया (JMI) और जामिया हमदर्द (JH) में 50% आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।”

इससे पहले राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रमुख आतिफ रशीद (Atif Rasheed) ने एएमयू, जामिया और झामुमो के कुलपतियों को पत्र लिखकर विश्वविद्यालयों में पसमांदा मुस्लिमों के लिए आरक्षण का अनुरोध किया था।

15 जून को लिखे एक पत्र में रशीद ने ‘कोटा के भीतर कोटा’ के बारे में लिखा था। उन्होंने कहा था, “हमने अल्पसंख्यक संस्थानों के तीन वीसी को पत्र लिखकर पसमांदा मुस्लिमों के लिए मुस्लिम कोटे के भीतर 50% आरक्षण के लिए कहा। इससे किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए या विश्वविद्यालयों के भीतर समीकरण नहीं बदलना चाहिए, क्योंकि हम केवल कोटा के भीतर ही कोटा माँग रहे हैं जो पहले से ही चलन में है।”

बता दें कि अभी तक किसी भी विश्वविद्यालय ने इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया नहीं दी है। इसलिए, भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. लक्ष्मण ने नई दिल्ली में पसमांदा मुस्लिम स्नेह मिलन एवं सम्मान समारोह में इस मुद्दे को फिर से उठाया है।

आरक्षण की माँग केवल दो एएमयू, जामिया मिलिया और जामिया हमदर्द तक ही सीमित नहीं है। रशीद ने केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को भी पत्र लिखकर सामाजिक और आर्थिक रूप से संकटग्रस्त समुदाय की दुर्दशा की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

उन्होंने कहा, “हमने केंद्र सरकार के हर मंत्री और लगभग 250 सांसदों को पत्र लिखा है। ओबीसी मोर्चा के प्रमुख के. लक्ष्मण ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की और हमारा समर्थन किया। इसके अलावा उन्होंने संसद में यह मुद्दा उठाया है।” उन्होंने (रशीद) पसमांदा मुस्लिमों के लिए 50% आरक्षण की माँग करते हुए देश भर में 5,200 मुस्लिम संस्थानों को पत्र लिखा है।

बता दें कि पसमांदा मुस्लिम सामाजिक रूप से बहिष्कृत, उपेक्षित और दबे हुए हैं। इसमें दलित और बैकवर्ड मुस्लिम आते हैं, जो मुस्लिम समाज में एक अलग सामाजिक लड़ाई लड़ रहे हैं। वे कई आंदोलन भी कर चुके हैं। ऐसे में भाजपा का ओबीसी मोर्चा उनकी आवाज बना है जिसे देख कट्टरपंथी नाराज हैं।

लालू को जंगलराज का दिया मौका, फिर सुशासन के लिए BJP का साथ: जॉर्ज से RCP तक कई पर किए सितम, ‘पलटू कुमार’ भी कहलाते हैं नीतीश

बिहार की राजनीति में एक बार फिर से हलचल तेज़ हो गई है। जैसा कि पिछले 17 वर्षों से होता आया है, इस उथल-पुथल के केंद्र में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं। पिछले 17 वर्षों से सत्ता पर उनका ही कब्ज़ा है। इसके साथ ही मीडिया में सूत्रों का खेल भी शुरू हो गया है। कहीं कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार और सोनिया गाँधी में हाल ही में लंबी बातचीत हुई है, तो कोई जदयू प्रदेश अध्यक्ष की राजद सुप्रीमो लालू यादव से मुलाकात के दावे कर रहा है।

नीति आयोग की बैठक से नदारद रहने के बाद ही नीतीश कुमार को लेकर कयास लगने शुरू हो गए थे कि क्या वो अब फिर से पलटी मारेंगे? एक तरफ जदयू नेता उपेंद्र कुशवाहा कह रहे हैं कि गठबंधन में सब ठीक है और केंद्र की हर बैठक का हिस्सा होना ज़रूरी नहीं है, तो दूसरी तरफ जदयू अध्यक्ष ललन सिंह कह रहे हैं कि कहाँ से जदयू को तोड़ने का षड्यंत्र हुआ और किसने खुलासा किया, ये सब सामने आएगा। कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही नीतीश कुमार बेचैन हैं।

उन्हें डर है कि कहीं बिहार में भी कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र न दोहरा दिया जाए। हालाँकि, राजनीति के शातिर खिलाड़ी नीतीश कुमार के बारे में कहा जाता है कि वो हमेशा दो दरवाजे खोल कर रखते हैं और दबाव से बचने के लिए किसी भी तरफ झुकने का रास्ता खुला रखते हैं। शायद यही कारण है कि कभी विधायक और सांसद का चुनाव हारने के बावजूद लगभग 2 दशक से बिहार की राजनीति उनके ही इर्दगिर्द घूम रही है।

नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो उन्होंने सबसे ताज़ा पलटी तब मारी थी, जब राजद के साथ उन्होंने गठबंधन तोड़ कर भाजपा के साथ हाथ मिला लिया और मुख्यमंत्री बने रहे। इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ उनका स्टैंड बताते हुए भले ही प्रचारित किया गया हो, लेकिन क्या उन्हें लालू यादव के परिवार के बारे में जुलाई 2017 से पहले कुछ भी नहीं पता था? 20 वर्षों में 7 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार को तभी उनके विरोधी ‘पलटूराम’ कह कर सम्बोधित करते रहे हैं।

नीतीश कुमार की चुनावी शुरुआत अच्छी नहीं रही थी और उन्हें लगातार तीन बार विधायकी के चुनाव में हार के सामना करना पड़ा। आखिरकार उन्होंने 1985 में जीत का स्वाद चखा और नालंदा के हरनौत से ‘लोक दल’ के टिकट पर जीत दर्ज की। उससे पहले 80 के दशक के अंत में जब ‘जनता पार्टी’ टूटी थी, तब नीतीश कुमार सत्येंद्र नारायण सिन्हा के साथ हो लिए। लेकिन, उस दौरान भी वो किशन पटनायक के नेतृत्व वाले ‘लोहिया विचार मंच’ से जुड़े रहे थे।

उसी समय से उन्होंने दो तरफ वाली राजनीति खेलनी शुरू कर दी थी। पहली बार विधायक का चुनाव जीतने के 4 वर्षों बाद ही वो बाढ़ से सांसद भी निर्वाचित हो गए। ये वो दौर था, जब बिहार में लालू यादव का कद बढ़ता ही जा रहा था और अंततः वो मुख्यमंत्री के पद तक पहुँचे। लालू यादव को मुख्यमंत्री बनाने में नीतीश कुमार का भी योगदान था। ‘जनता पार्टी’ के भीतर उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में लालू यादव का समर्थन किया था।

हालाँकि, इसके कुछ ही वर्षों बाद लालू यादव से उनकी दूरी बढ़ती ही चली गई। 90 के दशक के मध्य में जब समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस ने समता पार्टी का गठन किया तो नीतीश कुमार उनके साथ हो लिए। फिर उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन किया और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रेल, सड़क परिवहन और फिर कृषि जैसे मंत्रालय सँभाले। 1994 में समता पार्टी के गठन के 9 साल बाद उन्होंने 2003 में जदयू बनाई।

नीतीश कुमार भले ही खुद को जातिवाद का विरोधी बताते हों और इससे खुद को अलग रखने की बातें करते हों, लेकिन ये भी जानने लायक बात है कि उन्होंने बिहार में अपना राजनीतिक दबदबा कायम करने के लिए एक जातीय रैली का ही सहारा लिया था। फरवरी 1994 की उस रैली को उन्हें लालू विरोध का मुख्य चेहरा बनाने के श्रेय जाता है। इसका नाम था ‘कुर्मी चेतना महारैली’, जिसमें पहले तो नीतीश कुमार शामिल नहीं होना चाहते थे लेकिन फिर पलट गए।

विधायक रहे सतीश कुमार सिंह के आग्रह के बाद उन्होंने इस रैली में शामिल होने के लिए हामी भर दी। कहते हैं, इस रैली में उनके शामिल होने के बाद से ही कुर्मी-कोइरी समाज उनके पीछे लामबंद होना शुरू हो गया और लालू यादव विरोधी राजनीति तेज़ होती चली गई। जदयू और समता पार्टी के बीच की भी एक कहानी है। जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार ने समता पार्टी का विलय शरद यादव के ‘जनता दल’ वाले धड़े में कर दिया था।

2005 में नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने और भाजपा के सहयोग से उन्होंने सरकार चलाना शुरू किया। अपराध पर अंकुश से लेकर विकास परियोजनाओं तक, इस गठबंधन सरकार के पहले कार्यकाल की खासी सराहना हुई। लेकिन, भाजपा के साथ रहते हुए नीतीश कुमार ने 2010 में भाजपा नेताओं को दिया भोज रद्द कर दिया था। कारण – तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी के साथ उनकी एक तस्वीर अख़बारों में छप गई थी।

लुधियाना की उस रैली में नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार का हाथ पकड़ कर उठा दिया था और जनता को सन्देश दिया था कि दोनों में अच्छे रिश्ते हैं, लेकिन इससे नीतीश भड़क गए। हिंदुत्व से खुद को अलग दिखाने की कोशिश में नीतीश कुमार ने भाजपा नेताओं को दिया रात्रिभोज रद्द कर दिया, जबकि इसके कटआउट्स पूरे पटना में लग गए थे। भाजपा नेताओं को शर्मिंदगी महसूस करनी पड़ी। इतना ही नहीं, बाढ़ राहत कार्य के लिए गुजरार सरकार द्वारा दी गई मदद राशि भी उन्होंने लौटा दी थी।

इसके बावजूद नीतीश कुमार भाजपा के साथ सत्ता में बने रहे। लेकिन, हिंदुत्व विरोधी कीड़े ने उन्हें ऐसा काटा कि नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के साथ ही उन्होंने भाजपा से गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया और बाहर से राजद के समर्थन से मुख्यमंत्री बन बैठे। जब 2014 के लोकसभा चुनाव में जदयू की बुरी हार हुई और मोदी पीएम बन गए, तब नीतीश कुमार ने नैतिक जिम्मेदारी की बातें करते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

लेकिन, उन्होंने अपने बदले जिन जीतन राम माँझी को पद पर बिठाया, उनके साथ उनके रिश्ते कुछ ही दिन बाद बिगड़ने लगे। फिर उन्होंने माँझी को हटा दिया और खुद मुख्यमंत्री बन बैठे। 2015 का चुनाव उन्होंने राजद-कॉन्ग्रेस के साथ मिल कर लड़ा और जीत दर्ज की। लेकिन, 3 साल सरकार चलाने के बाद उन्हें राजद फिर से भ्रष्टाचारी लगने लगी और उन्होंने भाजपा से हाथ मिला लिया। 2020 का चुनाव भाजपा के साथ लड़ कर उन्होंने जीत दर्ज की और फिर मुख्यमंत्री बने।

अब 2 साल सरकार चलाने के बाद उन्हें फिर से भाजपा बुरी लगने लगी है और वो एक बार फिर से राजद को डोरे डाल रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो ये कि जिन रामचंद्र प्रसाद सिंह के कारण ये पूरा बखेड़ा खड़ा हुआ है, वो उनके ही विश्वस्त हुआ करते थे। केंद्रीय मंत्री के कार्यकाल के दौरान RCP सिंह उनके सचिव थे। उन्हें समय-पूर्व रिटायर करा कर राजनीति में लाने के श्रेय भी नीतीश कुमार को ही जाता है। उन्होंने RCP सिंह को केंद्रीय मंत्री तक बनवा दिया।

नीतीश कुमार ने पहले मोदी मंत्रिमंडल में जदयू को शामिल किया, लेकिन फिर ऐलान करवा दिया कि जदयू अब मोदी मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं रहेगा। आज RCP सिंह नीतीश कुमार के दुश्मन नंबर एक हैं। वैसे जदयू अध्यक्षों के साथ उनकी दुश्मनी नई नहीं है। जॉर्ज फर्नांडिस को उन्होंने ही जदयू का अध्यक्ष बनाया, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के एक साल के बाद ही उनसे ये पद चीन लिया। इतना ही नहीं, 2009 के लोकसभा चुनाव में उनका टिकट भी काट दिया।

फिर नीतीश कुमार ने शरद यादव को जदयू के अध्यक्ष का पद दिया। कुछ सालों बाद उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखा कर खुद जदयू अध्यक्ष बन बैठे। उनका आवास भी छीन लिया। फिर RCP सिंह का भी वही हाल हुआ। मौजूदा जदयू अध्यक्ष ललन सिंह भले आज उनके विश्वासपात्र हों, लेकिन बीच में दोनों के बीच दुश्मनी हो गई थी। 2009 में उन्होंने ललन सिंह को पार्टी से निकाल दिया था। फिर दोनों दोस्त बन गए और ललन सिंह को मंत्री पद मिला।

जो नीतीश कुमार नरेंद्र मोदी के हिंदुत्व से खुद को अलग दिखाने के लिए भाजपा से नाता तोड़ लेते हैं, वही हिंदुत्व के फायरब्रांड की छवि रखने वाले योगी आदित्यनाथ के शपथग्रहण समारोह में शामिल होते हैं। कभी लालू के साथ होते हैं, कभी विरोधी। कभी जॉर्ज-RCP-शरद-ललन को अध्यक्ष बनाते हैं, कभी दुश्मनी करते हैं। कभी केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा बनते हैं, कभी नहीं बनते हैं। कभी जीतन राम माँझी को सीएम बना देते हैं, फिर उनसे छीन भी लेते हैं।

प्रशांत किशोर भी इसके गवाह हैं। कभी उनके सबसे बड़े विश्वस्त हुआ करते थे और जदयू की सदस्यता के साथ-साथ मंत्री का दर्जा तक मिल गया था, लेकिन फिर उन्हें भी बाहर का रास्ता देखना पड़ा। बिहार में तो प्रशांत किशोर के एक घर को भी अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्त कर दिया गया। नीतीश कुमार ने जिसे भी अपना विश्वस्त बनाया, उसे बाहर का रास्ता भी दिखाया ही दिखाया। अब देखना है कि उनका ताज़ा फैसला क्या होता है।

1 मिनट नहीं खुला VIP गेट तो दबंगई पर उतरे पंजाब के आप MLA, तोड़ डाला बैरियर: 10 मिनट तक फ्री में निकलवाई गाड़ियाँ

पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक कर्मवीर सिंह घुम्मन की दादागीरी का कर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि दसूहा से आप विधायक ने होशियारपुर के एक टोल प्लाज़ा पर लगभग 10 मिनट तक जबरन कई गाड़ियों को फ्री में निकाला। हालाँकि, विधायक के गुस्से की वजह VIP लेन का न खुलना और उनका 1 मिनट इंतज़ार करना बताया जा रहा है।

इस घटना के वायरल हो रहे CCTV फुटेज में विधायक टोल नाके के बैरियर पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। उनके पीछे पंजाब पुलिस के 2 सुरक्षाकर्मी भी दिखाई दे रहे हैं। वहीं पुलिस के जवान भी विधायक के काम में हाथ बँटवाते दिख रहे हैं जो लोगो से उस लेन से बिना टोल जाने को कह रहे जिसमें वो खुद हैं। इस दौरान बैरियर गिराने पर एक सुरक्षाकर्मी टोल प्लाजा के कर्मचारियों के साथ उलझता भी दिखाई दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला होशियारपुर के चौलांग टोल प्लाजा का है। टोल प्लाजा के मैनेजर मुबारक अली के मुताबिक, “विधायक ने हमारे टोलकर्मी हरदीप सिंह को गालियाँ दी। इसके बाद खुद विधायक ने अपने हथियार बंद अंगरक्षकों के साथ मिल कर गाड़ियों को फ्री में निकलवाना शुरू कर दिया। हमारे टोल बूथों पर विधायक के साथियों ने कब्ज़ा जमा लिया था। इस दौरान उन्होंने हमारे बूम बैरियर को भी तोड़ डाला। हमने नेशनल हाइवे अथॉरिटी को इसकी जानकारी दे दी है।”

वहीं इस घटना पर विधायक घुम्मन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “टोल प्लाजा पर कोई भी व्यक्ति VIP लेन खोलने को तैयार नहीं था। हमने ऐसा इसलिए किया। टोलकर्मी अपनी मनमानी करते हैं। कई बार तो मेरे कर्मचारियों को VIP टोल बूथ खोलना पड़ा था क्योंकि उसे खोलने के लिए टोलकर्मी मौजूद ही नहीं थे। मेरी इतनी चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि मैं विधायक हूँ।”

विधायक घुम्मन ने यह भी कहा कि वो अक्स्सर चंडीगढ़ और जालंधर उसी रास्ते से जाते हैं और हर बार उस टोल प्लाजा पर VIP लेन बंद मिली जिसे उन्हें खुद खोलना पड़ा। उनके मुताबिक, “घटना के दिन जब मैं टोल प्लाजा वालों से बात करने नीचे उतरा तब उनके कई गुंडों ने हमें घेर लिया था और हमसे गाली गलौज की थी।”

3 साल से प्रीति के साथ लिव इन में था फिरोज, शादी से मुकरा तो गला रेत सूटकेस में पैक कर दी बॉडीः हत्या से पहले के ‘हालात’ की पड़ताल कर रही पुलिस

फिरोज सलमानी करीब तीन साल से प्रीति शर्मा के साथ लिव इन में रहता था। लेकिन जब शादी की बात आई तो मुकर गया। नाराज प्रीति ने उस्तूरे से उसका गला काट दिया। घटना उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की है।

रविवार (7 अगस्त 2022) की रात पुलिस ने प्रीति को लाश के साथ गिरफ्तार किया। वह फिरोज की बॉडी सूटकेस में डाल उसे ठिकाने लगाने ऑटो से निकली थी। लेकिन पकड़ी गई। हालाँकि हत्या की वजह को लेकर फिलहाल पुलिस खुलकर कुछ भी कहने से इनकार कर रही है। वह उन परिस्थितियों की पड़ताल कर रही है, जिसकी वजह से ये हत्या हुई।

गाजियाबाद के SSP मुनिराज ने सोमवार को बताया, “कल रात टीला मोड़ पुलिस गश्त पर थी। उसी दौरान एक महिला के सूटकेस की जाँच करने पर लाश मिली। पूछताछ के दौरान महिला ने बताया कि वह मृतक के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहती थी। हम मामले की जाँच कर रहे हैं। मृतक के परिवार वालों को सूचना दे दी गई है। महिला के साथ मृतक के परिजनों से भी पूछताछ की जाएगी। घटनास्थल पर पुलिस की फील्ड यूनिट भेजी गई है। अभी जाँच प्राथमिक चरण में है। लिहाजा हत्या की वजह को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता।”

मिली जानकारी के मुताबिक घटना गाजियाबाद के टीला मोड़ थाना क्षेत्र की है। इसी थाना क्षेत्र के तुलसी निकेतन की रहने वाली 32 साल की प्रीति शर्मा की शादी काफी समय पहले दीपक यादव से हुई थी। विवाद के चलते 3 साल पहले प्रीति पति से अलग हो गई। इसी दौरान उसकी मुलाकात 23 साल के फिरोज सलमानी से हुई। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सम्भल जिले का रहने वाला था और एक सैलून में काम करता था। कुछ मुलाकातों के बाद दोनों लिव इन में रहने लगे। कुछ समय बाद जब प्रीति ने शादी के लिए कहा तो फिरोज इनकार करने लगा। इसको लेकर आए दिन दोनों में झगड़े होते थे।

मिली जानकारी के मुताबिक घटना के दिन भी दोनों के बीच काफी झगड़ा हुआ था। इसी दौरान प्रीति ने फिरोज की गर्दन को उस्तरे से रेत दिया। रात के करीब 2 बजे वह एक सूटकेस में लाश डाल गाजियाबाद रेलवे स्टेशन के लिए ऑटो से निकली। वह किसी ट्रेन में सूटकेस डाल देना चाहती थी। रास्ते में जब शक के आधार पर ऑटो को रोककर सूटकेस की तलाशी ली गई तो लाश बरामद हुई।

पुलिस ने इसके बाद प्रीति को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने हत्या की बात कबूली है। उस पर IPC की हत्या की धारा 302 और सबूत छिपाने की धारा 201 के तहत कार्रवाई की जा रही है।

झारखंड बन रहा ‘इस्लामिक स्टेट’, 1800 स्कूलों में जुमे को छुट्टी, वोट के लिए कॉन्ग्रेस-JMM की मिलीभगत: BJP सांसद ने की NIA जाँच की माँग

झारखंड के गोड्डा से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने राज्य में रविवार की जगह शुक्रवार को होने वाली छुट्टियों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि झारखंड को इस्लामिक स्टेट (मुस्लिम राज्य) में बदला जा रहा है।

बीजेपी सांसद ने दावा किया कि यह एक साजिश है। उन्होंने राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) से इसकी जाँच कराने की माँग की है। उन्होंने कहा कि देश को तोड़ने की साजिश हो रही है और इसमें कॉन्ग्रेस और झामुमो दोनों ही शामिल हैं। ये इनकी वोट बैंक की राजनीति है। जीत के लिए वे बांग्लादेश हो, पाकिस्तान हो या चीन के लोग, किसी की भी मदद ले सकते हैं।

इससे पहले बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने ट्वीट करके भी कॉन्ग्रेस और झामुमो पर निशाना साधा था। उन्होंने लिखा था, “राज्य के सत्ताधारी सफेद टोपी वाले नेता इस राज्य को इस्लामिक राज्य में बदलना चाहते हैं। इस तरह की राजनीति का जवाब हम देंगे, राज्य अपनी नीति में बदलाव लाए नहीं तो जनता बदलाव ला देगी।” 

वहीं निशिकांत दुबे ने शुक्रवार (5 अगस्त 2022) को लोकसभा में भी इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा था कि देश इस्लामीकरण की तरफ बढ़ रहा है। झारखंड के 1800 स्कूलों में रविवार की बजाय शुक्रवार को छुट्टी हो रही है। इस मामले की जाँच एनआईए से कराई जाए और उनकी फंडिंग रोकी जाए।

निशिकांत दुबे ने लोकसभा में कहा था, “राज्य के कुछ जिलों में जनसंख्या का संतुलन बदल गया है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि बांग्लादेश पास में ही है। अचानक देखने में आया कि झारखंड में 1800 ऐसे स्कूल हैं, जिन्होंने अपने नाम में उर्दू शब्द लगा लिया। इन स्कूलों में रविवार को छुट्टी नहीं होती है, बल्कि शुक्रवार को हो रही है। देश इस्लामीकरण की तरफ बढ़ रहा है। झारखंड उसे रास्ता दे रहा है। इसकी एनआईए से जाँच कराई जाए। यह कड़ा संदेश जाना चाहिए कि देश एक कानून, एक विधान से चलता है।”

गौरतलब है कि हाल के दिनों में झारखंड में इस्लामीकरण एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है। हाल ही में शिक्षा मंत्री के आदेश के बावजूद पलामू जिले में शुक्रवार को मुस्लिमों ने जबरदस्ती 5 सरकारी स्कूलों को बंद करवा दिया। समझाने के बाद भी वे नहीं माने और स्कूल में ताला जड़ दिया। 

पिछले दिनों खबर आई थी कि प्रदेश में जहाँ मुस्लिम बहुल इलाके हैं वहाँ जनसंख्या के आधार पर स्कूलों के नियम तय हो रहे हैं। अगर किसी स्कूल के बाहर उर्दू लिख दिया गया तो मतलब उसे उर्दू स्कूल मान लिया गया और वहाँ मुस्लिमों के हिसाब से छुट्टी का दिन और प्रार्थना का ढंग बदल दिया गया। पिछली रिपोर्ट्स में कई ऐसे स्कूलों और जगहों के नाम और वहाँ किए गए मनमाने बदलाव का खुलासा हुआ था। 

इस समस्या को लेकर झारखंड हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई। इस याचिका में स्कूलों के ‘इस्लामीकरण’ पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश देने की माँग की गई। याचिकाकर्ता पंकज यादव ने अपनी जनहित याचिका में उल्लेख किया कि झारखंड के मुस्लिम बहुल इलाकों जामताड़़ा, पाकुड और गढ़वा सहित कम-से-कम छह जिलों में स्कूलों का ‘इस्लामीकरण’ हो चुका है। यहाँ स्कूलों में जबरदस्ती उर्दू को जोड़ा जा रहा है। यहीं नहीं, स्कूल बोर्ड और रविवार के बजाय शुक्रवार (जुम्मा) को छुट्टी दे रहा है।

पंकज यादव ने अपनी याचिका में कहा था, “इस्लामी कट्टरपंथी नाबालिग स्कूली बच्चों पर शरीयत और इस्लामी प्रथाओं को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। स्कूली प्रार्थना को जबरदस्ती बदल दिया गया है और बच्चों को प्रार्थना के दौरान हाथ नहीं जोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।” 

प्रतीक पवार पर जिन कट्टरपंथियों ने चलाई तलवार, उनमें से 8 और गिरफ्तार, अब तक कुल 14 हिरासत में: नुपूर शर्मा की DP लगाने पर मुस्लिमों ने घेरकर किया था हमला

महाराष्ट्र के अहमदनगर (Ahmednagar) जिले में बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) का समर्थन करने वाले युवक पर जानलेवा हमला करने के मामले में रविवार (7 अगस्त 2022) को 8 और लोगों को गिरफ्तार किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है। ये सभी कर्जत के रहने वाले हैं। उन्हें आज (8 अगस्त 2022) कोर्ट में पेश किया जाएगा। कर्जत पुलिस के मुताबिक, युवक पर धारदार हथियारों से हमला करने के मामले में अब तक 14 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 6 अगस्त को पुलिस ने पाँच लोगों को गिरफ्तार किया था और हमले में शामिल एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया। इन पाँचों को 10 अगस्त तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

बता दें कि यह घटना 4 अगस्त 2022 की है। महाराष्ट्र के अहमदनगर के कर्जत में इस घटना को अंजाम दिया गया था। यह मामला तब सामने आया, जब शनिवार (6 अगस्त 2008) को महाराष्ट्र के बीजेपी विधायक नीतेश राणे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस हमले के बारे में बताया। पीड़ित युवक का नाम प्रतीक पवार उर्फ सनी है।

रिपोर्टों के अनुसार, करीब 15 मुस्लिम युवकों के समूह ने प्रतीक को घेरकर उस पर तलवार, दरांती और हॉकी स्टिक से जानलेवा हमला किया। उसके चेहरे पर थूका। हमलावर उसे मरा समझ छोड़कर चले गए थे। हमले में सनी के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं हैं। प्रतीक को 35 टाँके लगे हैं। वह अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है। राणे ने दावा किया है कि नूपुर शर्मा की डीपी लगाने के कारण प्रतीक पर हमला हुआ।

वहीं एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना उस समय हुई जब पवार और शिकायतकर्ता अमित माने अपनी बाइक पर एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे और मेडिकल दुकान के पास एक मित्र की प्रतीक्षा कर रहे थे। उसी समय मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग दुपहिया वाहनों से उनके पास पहुँचे और उस पर हमला कर दिया। एफआईआर के अनुसार, वे सभी तलवार, दरांती और हॉकी स्टिक लिए हुए थे।

गौरतलब है कि इससे पहले नूपुर शर्मा का समर्थन करने के कारण महाराष्ट्र के अमरावती में ही 21 जून 2022 को उमेश कोल्हे की हत्या कर दी गई थी। यह मामला कई दिनों तक मीडिया की सुर्खियों से दूर रहा। लेकिन जब उदयपुर में 28 जून 2022 को कन्हैयालाल का मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने गला काट दिया, उसके बाद इस मामले की भी परतें खुलने लगीं।