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पुजारियों को भी देते हो क्या वेतन? : तेलंगाना में इमामों-मुअज्जिनों की सैलरी के लिए KCR ने पास किए ₹17 करोड़, हिंदुओं ने उठाए सवाल

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने प्रदेश के मौलवियों और इमामों को बड़ी सौगात दी है। तेलंगाना के वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने बताया है कि सीएम ने प्रदेश के इमामों व मुअज्जिनों की 3 महीने से बकाया सैलरी के लिए 17 करोड़ रुपए पास कर दिए, बाकी बची रकम 18 जुलाई तक मिलेगी।

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष मोहम्मद मसीउल्लाह खान ने कहा, “मैं मुख्यमंत्री केसीआर को शुक्रिया कहता हूँ कि उन्होंने मुअज्जिनों और इमामों की पिछले 3 महीने से बकाया सैलरी के लिए 17 करोड़ रुपए पास किए। 2 महीने की सैलरी के लिए 10 करोड़ रुपए पहले ही रिलीज किए जा चुके हैं। बाकी के पैसे 18 जुलाई तक मिल जाएँगे।”

बता दें कि तेलंगाना सरकार लंबे समय से प्रदेश के इमामों और मुअज्जिनों को मानदेय के तौर पर 5000 हजार रुपए देती है। इससे प्रदेश के हजारों इमाम-मुअज्जिन फायदा पाते हैं। हालाँकि कुछ समय पहले ऑल इंडिया सूफी उलेमा काउंसिल के मौलाना हकीम सूफी खैरुद्दीन ने के चंद्रशेखर राव को पत्र लिखकर इमामों-मुअज्जिनों की बकाया सैलरी देने की गुहार लगाई थी। साथ ही पत्र में माँग की गई थी कि वक्फ बोर्ड के कर्मचारियों के विरुद्ध एक्शन लिया जाए। उनका आरोप था कि उनके साथ बदसलूकी हुई।

प्रदेश में 7000 मौलवियों की सैलरी बकाया: दावा

मौलाना हकीम ने बताया कि 7000 इमाम और मुअज्जिन 3 साल से पेंडिंग पड़ी सैलरी के लिए लगातार बोर्ड कार्यालय के चक्कर लगाते रहे, लेकिन बोर्ड अधिकारियों ने उनकी परेशानी का कोई समाधान नहीं दिया। उनकी शिकायत थी कि बोर्ड के कर्मचारी बोर्ड को अपनी निजी संपत्ति मानने लगे हैं और वहाँ भ्रष्टाचार ही फैला हुआ है। उन्होंने कहा था कि अगर 7000 इमामों की सैलरी नहीं दी गई तो वह लोग सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करेंगे।

उल्लेखनीय है कि मौलवियों और इमामों के लिए लंबे समय से की जा रही माँग के बाद 16 जुलाई को वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने 17 करोड़ की रकम को पास कर दिया है। इस खबर को सुनने के बाद जहाँ कुछ मुस्लिम केसीआर को धन्यवाद दे रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि आखिर मौलाना और इमाम कौन सी नौकरी कर रहे हैं जो देश के करदाताओं का पैसा उन्हें दिया जा रहा है। इसी तरह हिंदुओं का यह खबर पढ़ने का बाद पूछना है कि क्या पुजारी और पंडितों को भी केसीआर सैलरी देते हैं?

एक यूजर पूछता है, “क्या इमाम और मुअज्जिन कोई सरकारी नौकरी कर रह हैं, या मुअज्जिन होना कोई सरकारी पोस्ट है, ये शुद्ध रूप से तुष्टिकरण की राजनीति है जिस पर करदाताओं के पैसे खर्च हो रहे हैं। शर्म आनी चाहिए केसीआर तुम्हें… क्या तुम सैलरी और पेंशन हिंदू पुजारियों को भी दोगे या केवल मंदिरों से पैसा लेकर उन्हें मुस्लिमों को दिया जाएगा।”

‘उन्हें लगता है मुफ्त की रेवड़ी बाँट कर जनता को खरीद लेंगे’: बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर बोले PM – ये मोदी है, ये योगी है…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 16 जुलाई 2022 (शनिवार) को उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के दौरे पर हैं। इस अवसर पर उन्होंने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जालौन जिले में उनका स्वागत किया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी ने मंच पर प्रधानमंत्री को सूर्य मंदिर पर आधारित स्मृति चिन्ह दिया।

जालौन में हुई जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बुंदेलखंड के इतिहास को याद दिलाया। उन्होंने लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा, “जिस धरती ने अनगिनत शूरवीर पैदा किए। जहाँ के खून में भारतभक्ति बहती है। जहाँ के बेटे-बेटियों के पराक्रम और परिश्रम ने हमेशा देश का नाम रौशन किया है। उस बुंदेलखंड की धरती को आज एक्सप्रेसवे का ये उपहार देते हुए मुझे विशेष खुशी मिल रही है।”

पीएम मोदी ने कहा, “रेवड़ी कल्चर वाले कभी आपके लिए नए एक्सप्रेसवे नहीं बनाएँगे , नए एयरपोर्ट या डिफेंस कॉरिडोर नहीं बनाएँगे। रेवड़ी कल्चर वालों को लगता है कि जनता जनार्दन को मुफ्त की रेवड़ी बांटकर, उन्हें खरीद लेंगे। हमें मिलकर उनकी इस सोच को हराना है, रेवड़ी कल्चर को देश की राजनीति से हटाना है। एक समय था जब माना जाता था कि यातायात के आधुनिक साधनों पर पहला अधिकार सिर्फ बड़े-बड़े शहरों का ही है। लेकिन अब सरकार भी बदली है, मिजाज भी बदला है। ये मोदी है, ये योगी है। पुरानी सोच को पीछे छोड़कर, हम एक नए तरीके से आगे बढ़ रहे हैं।”

एक्सप्रेसवे बन जाने के बाद उन्होंने उस से हुए भौगोलिक परिवर्तन की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से चित्रकूट से दिल्ली की दूरी तो 3-4 घंटे कम हुई ही है, लेकिन इसका लाभ इससे भी कहीं ज्यादा है। ये एक्सप्रेसवे यहां सिर्फ वाहनों को गति नहीं देगा, बल्कि ये पूरे बुंदेलखंड की औद्योगिक प्रगति को गति देगा।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “देश विकास की नई ऊँचाईयों को छू रहा है और 296 किलोमीटर लम्बा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे उसी विकास का एक हिस्सा है।” प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश से अपना पुराना रिश्ता बताया।

वहीं UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस एक्सप्रेसवे को बुंदेलखंड के लिए कई मायनों में फायदेमंद बताया। उन्होंने लिखा, “इस एक्सप्रेस-वे से प्रदेश को आर्थिक मजबूती तो प्राप्त होगी ही, वीर भूमि बुंदेलखंड क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत भी समृद्ध होगी। वहां पर्यटन की अपार संभावनाओं को विस्तार मिलेगा।”

योगी ने आगे कहा, “बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को हरा-भरा बनाने हेतु इसके दोनों किनारों पर 7 लाख पौधे लगाए जाएँगे। UP के 7 जिलों से गुजरने वाला यह एक्सप्रेसवे आवागमन में सुधार करने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सहायक सिद्ध होगा।”

बांग्लादेश में हिन्दुओं के घरों-दुकानों में तोड़फोड़-पत्थरबाजी, मंदिरों को भी नहीं छोड़ा: फेसबुक पोस्ट से भड़के, हिन्दू युवक के पिता गिरफ्तार

बांग्लादेश में एक बार फिर मुस्लिम भीड़ ने उत्पात मचाया है। नरैल के लोहागारा के सहपारा इलाके में कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने हिन्दुओं के एक मंदिर, किराने की दुकान और कई घरों को तोड़ दिया। पुलिस का कहना है कि 18 साल के हिन्दू लड़के की फेसबुक पोस्ट ने मुस्लिमों को हिंसा के लिए उकसाया, जिसके बाद जुम्मे (15 जुलाई 2022) की नमाज के बाद इस घटना को अंजाम दिया गया।

हिन्दू लड़के की फेसबुक पोस्ट से नाराज उन्मादी भीड़ ने पहले तो हिन्दुओं के घरों पर पत्थरबाजी की। इसके बाद वे सहपारा मंदिर में घुस गए और अंदर रखे फर्नीचर को तोड़ दिया। इसके बाद मुस्लिमों ने फेसबुक पोस्ट करने वाले किशोर के पिता की किराने की दुकान में तोड़फोड़ की। मुस्लिमों का आरोप था कि फेसबुक पोस्ट से उनकी भावनाएँ आहत हुई हैं। हालाँकि, इतने पर भी इन लोगों का गुस्सा ठंडा नहीं हुआ। उन्मादी भीड़ ने हिन्दू किशोर के घर और आसपास के कई अन्य लोगों के घरों में तोड़फोड़ की।

मौके पर पहुँची पुलिस ने उन्मादी भीड़ को काबू करने के लिए आँसू गैस के गोले दागे। आखिरकार स्थिति को काबू करने में देर रात तक का समय लगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी तक पुलिस ने हमला करने वाले मुस्लिमों में से किसी को भी नहीं पकड़ा है और न ही इस्लामवादियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की है। जबकि, दूसरी ओर पीड़त हिन्दू युवक पिता को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान सहपारा के अशोक साहा के रूप में हुई है। वहीं कथित तौर पर फेसबुक पोस्ट लिखने वाला उनका बेटा आकाश वहाँ से भाग निकला।

हालात को देखते हुए उपजिला निर्बाही अधिकारी अजगर अली और लोहागरा पुलिस स्टेशन के प्रभारी हरन चंद्र पॉल ने गाँव का दौरा कर हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने कहा कि हिंसा को रोकने के लिए गाँव में अतिरिक्त पुलिसबलों को तैनात किया गया है। इस घटना को लेकर नरैल के एसपी प्रबीर कुमार रॉय ने कहा, “हम घटना की जाँच कर रहे हैं। हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी। फिलहाल स्थिति सामान्य है।”

बांग्लादेशी हिन्दू खतरे में रहने को मजबूर

ये कोई पहली बार नहीं है जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले हुए। इसी साल अप्रैल में कथित तौर पर पैगंबर मुहम्मद के अपमान के मामले में मुंशीगंज में एक हिन्दू शिक्षक हृदय चंद्र मंडल को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्होंने मुस्लिमों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। पिछले साल कथित तौर पर कुरान के अपमान का आरोप लगाकर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने कई हिन्दू घरों को जला दिया था।

मुफ्ती मोहम्मद नहीं चाहते थे, जल्दी रिहा हो बेटी रूबैया, सरकार गिराने के लिए रची थी साजिश: अपहरण कांड की कहानी

जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) की बहन और केंद्रीय गृहमंत्री रह चुके दिवंगत मुफ्ती मोहम्मद सईद (Mufti Mohammad Sayeed) की बेटी डॉक्टर रूबैया सईद (Dr. Rubaiya Sayeed) ने 32 साल पुराने अपने चार अपहरणकर्ताओं को कोर्ट में पहचान लिया है। रूबैया के अपहरणकर्ताओं में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) से जुड़ा यासीन मलिक (Yasin Malik) भी था।

साल 1989 के इस हाई प्रोफाइल अपहरण कांड ने देश को झकझोर कर रखा दिया था और सरकार घुटने पर आकर पाँच खूंखार आतंकियों को इसके बदले में रिहा कर रूबैया सईद को छुड़ाया था। इसके बाद से जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के हौसले इस कदर बुलंद हुए कि घाटी के हिंदुओं का खुलेआम नरसंहार हुआ और लाखों लोगों को अपनी घर-संपत्ति घाटी में ही छोड़कर जान बचाने के लिए पलायन करना पड़ा।

इस अपहरण कांड को लेकर शुरू से सवाल उठाए जाते रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री की बेटी का खुलेआम अपहरण हो जाना कोई साधारण बात नहीं थी। जिस राज्य में आतंकवाद अपना सिर उठा रहा था, वहाँ केंद्रीय गृहमंत्री की बेटी अकेली घूमे, इस पर भी सवाल उठाए गए और इसके पीछे गहरी साजिश बताया गया।

ऐसे ही एक राजनेता और लेखक ने अपनी किताब में इस साजिश के बारे में विस्तार से लिखा है। इंजीनियर हिलाल वार के आरोप को थोथा इसलिए नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वे हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रमुख घटकों में शामिल रहे हैं।

पीपुल्स पोलिटिकल पार्टी के चेयरमैन इंजीनियर हिलाल वार ने अपनी किताब ‘द ग्रेट डिस्क्लोजर, सीक्रेट अनमास्क्ड’ (The Great Disclosure, Secret Unmasked) में लिखा है कि जम्मू-कश्मीर की राजनीति में फारूक अब्दुल्ला को कमजोर करने के लिए पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के नेता और तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने अलगाववादी यासीन मलिक के साथ मिलकर अपनी ही बेटी के अपहरण की कहानी रची थी।

दरअसल, भाजपा के सहयोग से विश्वनाथ प्रताप सिंह (Vishwanath Pratap Singh) की सरकार को सत्ता सँभाले हफ्ता भी नहीं बीता था। 8 दिसंबर 1989 की दोपहर गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद मंत्रालय में पहली बार अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। ठीक उसी वक्त उनकी बेटी रूबैया सईद अपनी मेडिकल इंटर्नशिप की ड्यूटी खत्म कर एलडी हॉस्पिटल से अकेली बस स्टॉप पर पहुँची और एक मिनी बस में सवार हो गई।

वैन लाल चौक से श्रीनगर के बाहरी इलाके नौगाम की तरफ जा रही थी और वह चानपूरा चौक के पास जैसे ही पहुँची, वैन में सवार तीन लोगों ने गन प्वॉइंट पर वैन को रोकने के बाद रूबैया सईद को नीचे उतारकर मारुति कार में बैठा लिया। इस कार में JKLF का डॉ. गुरु पहले से बैठा था। उसके बाद मारुति कार रूबैया को लेकर चली गई। वह कहाँ गई, ये किसी को नहीं पता। उस दौरान प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया था कि गन प्वॉइंट पर होने के बाद बावजूद रूबैया के चेहरे पर डर या घबराहट के कोई निशान नहीं थे।

इंजीनियर हिलाल वार कहना है कि अपहरण के बाद रुबैया सईद को कहाँ रखना इसके बारे में तत्कालीन डीजीपी और मुफ्ती मोहम्मद सईद को पता था। दिसंबर 1989 की शुरुआत में मुफ्ती मोहम्मद सईद ने JKLF के कमांडर मियाँ सरवर की तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (DGP) गुलाम जिलानी पंडित के मकान पर एक गुप्त बैठक कराई थी। इस बैठक में ही रुबैया सईद के अपहरण साजिश रची गई।

हिलाल वार का सवाल वाजिब है कि जिस समय कश्मीर में आतंकी हिंसा लगातार बढ़ रही थी, उस समय देश के गृहमंत्री की बेटी बिना किसी सुरक्षा के अकेली ही अस्पताल से पैदल बस स्टॉप जाती है। मिनी बस में बैठती है और फिर कुछ आगे जाकर उसे अगवा कर लिया जाता है। यह सब प्री-प्लान्ड था।

जब रूबैया सईद रास्ते से गायब हुईं तो बवाल मच गया। अपहरण का आरोप JKLF के यासीन मलिक और एथलिट से चरमपंथी बने अशफाक वानी पर लगा। बाद में जावेद मीर नाम के चरमपंथी ने स्थानीय मीडिया को फोन कर अपहरण की जिम्मेदारी ली। उसने 20 आतंकियों को छोड़ने के बदले रूबैया को रिहा करने की माँग रखी।

इस दौरान हर तरफ चिंता और बेचैनी थी, लेकिन मुफ्ती मोहम्मद सईद के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। वह शांत रहते थे और कुछ भी नहीं बोलते थे। लोगों में इस बाद को लेकर खुसर-फुसर भी थी कि सईद जानते थे कि उनकी बेटी को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा और उसका अच्छे से ख्याल रखा जाएगा।

नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के पूर्व मेजर जनरल ओपी कौशिक ने भी साल 2012 में कहा था कि मुफ्ती मोहम्मद सईद नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी जल्द रिहा हो। कौशिक ने दावा किया था कि अपहरण की सूचना मिलने के पाँच मिनट के भीतर एनएसजी ने मालूम कर लिया था कि रूबैया को कहाँ रखा गया है।

जब कौशिक ने सईद को बताया था कि रूबैया को कुछ ही देर में सुरक्षित रिहा करा लिया जाएगा तो सईद भड़क गए और उन्हें तुरंत मीटिंग से बाहर निकलने के लिए कह दिया। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले से एनएसजी को अलग रखने को कहा।

दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने रूबैया को रिहा कराने के लिए डॉ. गुरु को एक चैनल बनाया। इसके अलावा भी कई माध्यमों से JKLF के आतंकियों से मध्यस्थता जारी रही। केंद्र की सरकार ने जम्मू-कश्मीर के फारूक सरकार पर आतंकियों को छोड़ने का दबाव बनाया।

इंजीनियर हिलाल वार कहना है कि मुफ्ती मोहम्मद सईद जम्मू-कश्मीर की फारूक अब्दुल्ला सरकार गिराने को किसी भी कीमत पर गिराना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने जगमोहन (Jagmohan) को राज्यपाल भी बनवाया। अब वह अपनी बेटी के अपहरण की साजिश को मोहरा बना रहे थे। फारूक अब्दुल्ला कई मौकों पर कह चुके हैं कि अगर उस समय वे आतंकियों को नहीं छोड़ते तो उनकी सरकार गिरा दी जाती।

बाद में लगभग सप्ताह भर विभिन्न मध्यस्थों के माध्यम से हुए समझौतों में JKLF पाँच आतंकियों की रिहाई पर राजी हुआ। जम्मू-कश्मीर की फारूक अब्दुल्ला सरकार ने पाँच आतंकियों को छोड़ दिया। इधर, 5 आतंकियों को रिहा किया और उधर रूबैया दिल्ली पहुँच गईं।

उधर मुफ्ती परिवार भी खुश और आतंकी भी खुश, लेकिन अब्दुल्ला पर इस रिहाई के दाग लग गए। आतंकियों की रिहाई का जश्न श्रीनगर में जमकर मनाया गया। लोग उन्माद में सड़कों पर उतर आए और घाटी अलगाववाद और देश विरोधी नारों से गूँज उठी। सड़कों पर खुलेआम नारे लगाए जा रहे थे- “हम क्या चाहते! आजादी” और “जो करे खुदा का खौफ, वो उठा ले क्लाश्निकोव”।

हिलाल वार का कहना है कि अपहरण में सहयोग के लिए मुफ्ती मोहम्मद सईद ने यासीन मलिक को प्रमुख अलगाववादी नेता के रूप मे प्रचारित कराया और बरसों तक इस मामले को अदालत में लटकाए रखा। उन्होंने कहा कि मुफ्ती मोहम्मद दो बार राज्य के मुख्यमंत्री बने, लेकिन इस कार्रवाई करने की कभी जहमत नहीं उठाई।

सूअर को खोजने में लापरवाही, कलकत्ता HC ने बंगाल पुलिस को फटकारा: जाँच अधिकारी पर कार्रवाई का आदेश, कहा – SP खुद देखें मामला

कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार (15 जुलाई, 2022) को कल्याणी कोर्ट परिसर से गायब हुए सूअर को खोजने के आदेश नडिया जिला पुलिस को दिए हैं। इस सूअर का नाम घाना है जिसको खोजने की याचिका कल्याणी कोर्ट के कुछ वकीलों ने हाईकोर्ट में दाखिल की थी। वकीलों के मुताबिक अदालत कैम्पस में रहने वाली इस सुअर को 25 मार्च, 2022 की सुबह 6 बजे किसी ने चुरा लिया था तबसे उसका कोई अता-पता नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से याचिकाकर्ताओं में से एक एडवोकेट शिवाजी ने बताया, “हम सब ग़ायब हुई घाना (सूअर) से बेहद प्यार करते थे। हम उसका पूरा ध्यान भी रखते थे और उसको खाना भी खिलाते थे। वो हमेशा कोर्ट कैम्पस में ही रहती थी और कभी बाहर नहीं जाती थी। एक सफाईकर्मी ने उसे चोरी होते देखा है। कोई सफ़ेद कार में आया और उसे ले कर भाग गया। स्वीपर द्वारा बनाए गए वीडियो में कार का नंबर भी दिखाई दे रहा है।”

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक घाना नाम की यह सुअर स्थाई तौर पर ACJM कोर्ट के ही आस-पास रहती थी। वहाँ पर कुछ कुत्ते भी रहा करते थे। 25 मार्च को घाना के गायब होते थी वकीलों और आस-पास के स्थानीय लोगों ने कल्याणी थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। कोर्ट की रात्रि ड्यूटी पर तैनात गार्डों में भी पुलिस को बताया कि घाना को कुछ अनजान लोग कार में लाद कर ले गए। कार का नंबर प्लेट पीले रंग में था।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने इस शिकायत पर कुछ नहीं किया। इसके बाद वकीलों का एक समूह अनुमिता भद्रा के नेतृत्व में सुअर की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाया। पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। वकीलों का आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। आखिरकार वकीलों ने हाईकोर्ट में घाना सूअर को खोजने की याचिका दाखिल कर दी।

वकीलों की इस याचिका पर जस्टिस शंपा शंकर ने नडिया पुलिस को उसकी लापरवाही पर लताड़ लगाई। जजों ने पुलिस से सवाल किया कि क्या वो उस कार को अब तक नहीं तलाश पाए जिस से घाना का अपहरण किया गया था। जज ने रानाघाट के SP को खुद इस मामले को गंभीरता से लेने के साथ कल्याणी थाना पुलिस के उस जाँच अधिकारी पर कार्रवाई करने को भी कहा जिन्होंने केस में पशु क्रूरता की धारा नहीं लगाई थी। हाईकोर्ट ने ACJM कोर्ट की सुरक्षा बढ़ाने के भी आदेश दिए। इस मुद्दे पर कल्याणी थाना पुलिस ने बिना कोर्ट का आदेश देखे किसी भी टिप्पणी से इंकार कर दिया।

‘तौहीद जमात’ के 7 सदस्यों को HC से अंतरिम जमानत, बुर्का जजमेंट के बाद जजों को दी थी हत्या की धमकी: हाईकोर्ट ने कहा – सभ्यता के दायरे में करें टिप्पणी

कर्नाटक में बुर्का विवाद के दौरान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करने और जजों को मौत की धमकी देने वाले ‘तौहीद जमात’ के 7 सदस्यों को मद्रास हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी है। अभियोजन पक्ष ने उनकी जमानत का विरोध ये कहते हुए किया कि उन्होंने जजों को धमकी दी थी। लेकिन उच्च न्यायालय ने बचाव पक्ष की इस दलील को स्वीकार कर लिया कि वो फिर से जजों के खिलाफ आंदोलन नहीं करेंगे। यह अंतरिम जमानत 15 जुलाई 2022 (शुक्रवार) को दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अंतरिम जमानत मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने दी है। सभी आरोपितों पर कर्नाटक बुर्का मामला में फैसला देने वाले हाईकोर्ट के जज पर अभद्र और धमकी भर्ती टिप्पणी करने का केस दर्ज था। यह टिप्पणी न सिर्फ हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ की गई थी बल्कि उस दौरान सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ भी अशोभनीय बातें कही गईं थीं।

बताया जा रहा है कि सभी 7 आरोपित तमिलनाडु तौहीद जमात (TNTJ) से जुड़े हुए हैं। इन सभी आरोपितों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस के मुरली शंकर ने कहा, “इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि कोई भी व्यक्ति अपनी भावनाओं और विचार को रखने के लिए स्वतंत्र है। यहाँ तक कि वो कोर्ट के फैसलों पर भी टिप्पणी कर सकता है। लेकिन वह टिप्पणी सभ्यता के दायरे में होनी चाहिए। इस सभ्यता के दायरे से बाहर निकलने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती है।”

फैसले में कहा गया, “इस मामले में मुख्य आरोपित पहले ही जमानत पा चुका है। बाकी अन्य आरोपित लिखित तौर पर बिना शर्त माफ़ी माँगने और आगे से फिर ऐसी गलती कभी न करने के लिए लिखित तौर पर आवेदन पेश कर रहे हैं। इसी के साथ आरोपित भविष्य में दुबारा ऐसी किसी भी मीटिंग या प्रदर्शन में हिस्सा न लेने का भी संकल्प दिखा रहे हैं। ऐसे में अदालत सभी आरोपितों की अंतरिम जमानत तमाम शर्तों के अधीन स्वीकार करती है।”

जिन आरोपितों की अंतरिम जमानत मंजूर हुई उनके नाम असन बाशा, हबीबुल्लाह, अल मलिक बैज़ुल, सैयद नैना, यासर अरबाथ, सीनी उमर और अल्ताफ उसैन हैं। जमानत के साथ इन सभी को शहर न छोड़ने और अपने लोकल पुलिस स्टेशन में नियमित रूप से हाजिरी लगाने के आदेश दिए गए।

गौरतलब है कि 17 मार्च 2022 को तमिलनाडु तौहीद जमात (TMTJ) नाम के संगठन ने मदुरै में एक आयोजन के दौरान जजों को मौत तक की धमकी दी थी। इस वीडियो में रहमतुल्लाह नाम के आरोपित ने धमकाते हुए कहा, “अगर हिजाब मामले में जज की हत्या हो जाती है तो वो अपनी मौत के खुद जिम्मेदार होंगे। कर्नाटक हाईकोर्ट ने ये आदेश अमित शाह के इशारे पर दिया है। फैसला देने वाले जज को अपने फैसले पर शर्म आनी चाहिए।”

इस दौरान धनबाद में मार्निंग वॉक पर निकले एक जज की ऑटो द्वारा धक्का दे कर की गई हत्या का भी जिक्र किया गया था। पुलिस ने इसी मामले में FIR दर्ज कर के आरोपितों को गिरफ्तार किया था।

भगत सिंह ‘आतंकवादी’: एक सिख सांसद ने कही ये बात, वो सांसद खालिस्तान का समर्थक है, भिंडरावाले को आदर्श मानता है

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के सांसद सिमरनजीत सिंह मान द्वारा भगत सिंह को ‘आतंकवादी’ कहने के बाद कड़ा विरोध जताया जा रहा है। पंजाब सरकार में मंत्री गुरमीत सिंह मीत ने संगरूर सांसद से अपने बयान पर बिना शर्त माफ़ी माँगने को कहा है। भगत सिंह के त्याग को सर्वोच्च बलिदान बताते हुए भगवंत मान सरकार द्वारा उन्हें शहीद का दर्ज देने का भी एलान किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री गुरमीत सिंह ने कहा, “शिरोमणि अकाली दल के सांसद ने उन भगत सिंह के बलिदान का अपमान किया है, जिन्होंने देश के लिए खुद को कुर्बान कर दिया। भगत सिंह मेरे भी आदर्श हैं। भगत सिंह के साथ राजगुरु और सुखदेव का भी बलिदान पूरे देश के युवाओं को गर्व की अनुभूति करवाता है।”

इसी बयान में मंत्री गुरमीत ने आगे कहा, “मैं स्पष्ट करता हूँ कि हमारी सरकार सरदार भगत सिंह को शहीद का दर्ज देगी। अगर जरूरत पड़ी तो हम शिरोमणि अकाली दल के सांसद के इस बेहद अपमानजनक और आपत्तिजनक बयान पर कानूनी कार्रवाई भी करवाएँगे।”

शिरोमणि अकाली दल के सांसद सिमरनजीत सिंह मान ने 14 जुलाई (गुरुवार) को यह बयान दिया था। उनके बयान का खुद उनकी ही पार्टी में विरोध हो रहा है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने अपनी ही पार्टी के इस सांसद के बयान की आलोचना की है।

गौरतलब है कि अकाली दल के सांसद सिमरनजीत सिंह हरियाणा के करनाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेस में हिस्सा ले रहे थे। इस दौरान एक पत्रकार ने सवाल किया कि देश के लिए बलिदान हुए भगत सिंह को इतिहास में आतंकी क्यों कहा जाता है? इसका जवाब देते हुए सांसद ने कहा, “भगत सिंह ने न सिर्फ जवान अंग्रेज अफसर की हत्या की थी बल्कि उसी के साथ उन्होंने एक अमृतधारी सिख सिपाही चन्नन सिंह को भी मार डाला था। बाद में उन्होंने संसद में बम फेंका। आप ही बताओ वो आतंकी हुए या नहीं?”

सांसद सिमरनजीत सिंह और खालिस्तान

सिमरनजीत सिंह मान की प्रोफाइल देखें तो पता चलेगा कि वो हमेशा से खालिस्तानी समर्थक रहे हैं। ऑपरेशन ब्लू स्टार के कारण उन्होंने पुलिस की नौकरी छोड़ दी थी। इतना ही नहीं उनकी पार्टी के ऊपर ब्लू स्टार की बरसी पर स्वर्ण मंदिर में खालिस्तानी नारे लगाने के इल्जाम भी लगते रहे हैं। उनके कई सोशल मीडिया पोस्ट में खुलेआम खालिस्तान की माँग की गई है।

एक सोशल मीडियो पोस्ट में तो सांसद सिमरनजीत ने ये भी दिखाने का प्रयास किया कि हिंदू राष्ट्र में सिखों के हाल बुरे हैं। उन्होंने कहा था कि हिंदुओं को लगता है कि वह सिखों को मशीन गन से डरा देंगे और इससे वह खालिस्तान की माँग नहीं करेंगे। लोकसभा उपचुनावों में संगरूर से जीत हासिल करने के बाद सांसद सिमरनजीत ने कहा था कि ये खालिस्तानी जरनैल सिंह भिंडरावाले की दी गई सीख की जीत है।

मोदी को फँसाने के लिए 5+25 लाख रुपए, सोनिया गाँधी के सलाहकार अहमद पटेल की साजिश: तीस्ता सीतलवाड़ को लेकर SIT का खुलासा

गुजरात दंगों में रची गई साजिश की जाँच कर रही SIT (विशेष जाँच दल) ने बताया कि नरेंद्र मोदी को फँसाने के लिए रची साजिश के सूत्रधार कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल थे। तीस्ता सीतलवाड़, IPS संजीव भट और पूर्व DGP आरबी श्रीकुमार को इस साजिश को अंजाम देने का जिम्मा सौंपा गया था। इस प्लानिंग के तहत गुजरात की तत्कालीन भाजपा सरकार को भी अस्थिर करना था। SIT ने यह जाँच रिपोर्ट अहमदाबाद के एक सेशन कोर्ट में शुक्रवार (15 जुलाई 2022) को दाखिल की है।

कॉन्ग्रेसी नेता और एक समय सोनिया गाँधी के राजनैतिक सलाहकार रहे अहमद पटेल की मृत्यु हो चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साजिश में मुख्य रूप से तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निशाने पर थे। उनके अलावा कई अन्य ऐसे लोगों को भी निशाने पर लिया गया था, जो बेगुनाह थे।

तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत याचिका का विरोध करते हुए SIT ने कोर्ट को बताया कि गुजरात की छवि को धूमिल करने के लिए तीस्ता सीतलवाड़ को तत्कालीन राज्यसभा सांसद और तब की कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के राजनैतिक सलाहकार अहमद पटेल से निर्देश मिले थे। तीस्ता की जमानत के विरोध में SIT ने कोर्ट में 2 गवाह भी पेश किए हैं। न्यायालय में दिए गए शपथपत्र में SIT ने कहा:

“तीस्ता की अहमद पटेल से मीटिंग हुई थी और पहली किश्त के तौर पर तीस्ता को 5 लाख रुपए मिले थे। अहमद पटेल ने ये रुपए एक गवाह के माध्यम से भिजवाए थे। 2 दिनों बाद तीस्ता सीतलवाड़ और अहमद पटेल फिर से अहमदाबाद के एक सर्किट हाउस में मिले, जहाँ तीस्ता को फिर से 25 लाख रुपए दिए गए। यह पैसा किसी भी राहत कार्य में प्रयोग नहीं हुआ।”

SIT ने कोर्ट को आगे बताया, “तीस्ता सीतलवाड़ ने मीटिंग के सप्ताह भर में ही दंगों के दौरान बने एक राहत कैम्प में राजनैतिक लोगों के साथ मीटिंग की थी। दंगों के 4 महीने बाद तीस्ता सीतलवाड़ और IPS संजीव भट ने अहमद पटेल से उनके दिल्ली आवास पर गुप्त मुलाक़ात की थी।” SIT का दावा है कि बाद में ये दोनों तत्कालीन केंद्र सरकार के कुछ अन्य नेताओं से भी मिले थे। इस मुलाकात का मकसद गुजरात भाजपा के सीनियर नेताओं को फँसाना था।

गुजरात दंगों में रची गई साजिश की जाँच कर रही SIT का दावा है कि 2007 में केंद्र सरकार ने तीस्ता सीतलवाड़ को पद्मश्री सम्मान उनके गुजरात सरकार पर दुर्भावनापूर्ण आरोपों के चलते दिया था। जाँच एजेंसी का ये भी दावा है कि तीस्ता ने ऐसा अपने राजनैतिक करियर को बनाने और राज्यसभा की सीट पाने के लिए किया था।

पेश किए गए गवाह का दावा है कि तीस्ता ने एक बड़े राजनेता से सवाल भी किया था कि जावेद अख्तर और शबाना आज़मी जैसे फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को सांसद बना दिया गया लेकिन उन्हें क्यों नहीं? तीस्ता की राजनैतिक मंशा के लिए SIT ने साल 2006 में उनके पंचमहल में मीडिया को दिए गए बयान को शामिल किया है, जिसमें उन्होंने 3 दिनों के भीतर गुजरात सरकार के इस्तीफे की बात कही थी।

SIT ने अपनी जाँच में गुजरात दंगों में मुख्य चेहरा बनाए गए कुतुबुद्दीन अंसार का भी जिक्र किया, जिनकी मीडिया के आगे परेड करवा कर लोगों से चंदा जुटाया गया था। जाँच एजेंसी के मुताबिक खुद कुतुबुद्दीन को जब लगा कि उनका पैसे जुटाने और राजनीति के लिए दुरूपयोग हो रहा तो वो वापस घर लौट आए थे।

शपथ पत्र के मुताबिक तीस्ता सीतलवाड़ ने दिवंगत पूर्व गृहमंत्री हिरेन पंड्या के पिता को भी सम्पर्क किया था, जिनकी हत्या कर दी गई थी। तीस्ता ने हिरेन के पिता विट्ठलभाई को भी अपने NGO सिटीजन फॉर जस्टिस एन्ड पीस (CJP) में शामिल होने का ऑफर दिया था। इस दौरान तीस्ता ने एडवोकेट सोहैल द्वारा बनाई गई एक शिकायत पर विट्ठलभाई से दस्तखत करने को भी कहा था लेकिन कई बेगुनाहों का नाम देख कर विट्ठलभाई ने मना कर दिया था।

SIT ने तीस्ता सीतलवाड़ पर चंदे से मिले पैसे का निजी कार्यों में उपयोग करने का भी आरोप लगाया है। तीस्ता पर फ़िरोज़ खान पठान नाम के एक व्यक्ति ने FIR भी दर्ज करवा रखी है। फ़िरोज़ के मुताबिक तीस्ता के खातों में लाखों रुपए दंगों में मारे गए लोगों के पुनर्वास और उनके म्यूजियम बनाने के लिए डाले थे लेकिन उन पैसों को कहीं और प्रयोग किया गया। SIT ने तीस्ता सीतलवाड़ पर ज़किया जाफरी को सिखाने-पढ़ाने का भी आरोप लगाया है, जो एक पूछताछ के दौरान निकल कर आए तथ्यों के आधार पर है।

बिहार में हुआ पैदा, परिवार वाले पाकिस्तान में, काम दुबई में… हिंदुओं का सफाया करने का सपना देखने वाले ताहिर की A2Z कहानी

पटना के फुलवारी शरीफ (Phulwari Sharif, Patna) में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के ट्रेनिंग कैंप पर छापेमारी के बाद उससे जुड़े संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी का सिलसिला जारी है। इस मामले में बिहार पुलिस ने गुरुवार (14 जुलाई 2022) को मरगूब अहमद दानिश उर्फ ताहिर उर्फ इलियास को गिरफ्तार किया है।

ताहिर को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस को उसकी मोबाइल ऐसी सामग्री मिलीं, जो जाहिर करती हैं कि उसके विदेशों में भी संपर्क हैं। वह न सिर्फ पाकिस्तान स्थित गजवा-ए-हिंद (Ghazwa-E-Hind) से जुड़ा हुआ है, बल्कि उसके तार बांग्लादेश से लेकर यमन तक जुड़े हुए हैं।

ताहिर आतंकी संगठन गजवा-ए-हिंद के WhatsApp ग्रुप से जुड़ा था। इस ग्रुप में कई पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और यमन के कट्टरपंथी जुड़े हुए थे। इस ग्रुप का फैजान नाम का शख्स लगातार उसके संपर्क में था। इस WhatsApp ग्रुप का आइकॉव और चैट देश विरोधी, संप्रदाय विरोधी और आपत्तिजनक हैं।

इसके अलावा, ताहिर पाकिस्तान के कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक के ग्रुप से भी जुड़ा था। इस ग्रुप में 181 लोग जुड़े हुए थे। इस ग्रुप का एडमिन जीशान नाम का एडमिन पाकिस्तानी है और उसने ताहिर को भी एडमिन बनाया था। इसका मकसद था भारत में 2023 में जिहाद के नाम डायरेक्ट एक्शन करना और खिलाफत का ऐलान करना।

पुलिस के अनुसार, ताहिर साल 1996 में फुलवारी शरीफ में पैदा हुआ। हालाँकि, उसका परिवार मूलत: गया जिले के बिठो शरीफ का रहने वाला है। उसके परिवार के कुछ लोग पाकिस्तान के कराची में भी बसे हुए हैं। वह साल 2006 से 2020 तक दुबई में काम करता था। इसने मदरसे से हाफिज बस्तानिया एवं फोकानिया की पढ़ाई की है।

पुलिस सूत्रों के हवाले के से आजतक का कहना है कि जाँच के दौरान यह बात सामने आई है कि ताहिर साल 2016 से ही पाकिस्तान में रहने वाले अपने रिश्तेदारों के संपर्क में था। वह WhatsApp, ईमेल और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया के माध्यम से उनसे जुड़ा हुआ था।

ताहिर के खिलाफ पुलिस भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 121, 121A, 120, 120B, 505 (1) (B), 153 (A) और आईटी एक्ट की धारा 66 के अंतर्गत केस दर्ज करके कार्रवाई कर रही है।

इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) की जाँच में पता चला है कि देश विरोधी साजिश रचने वालों में झारखंड पुलिस में पूर्व दारोगा मोहम्मद जलालुद्दीन, अतहर परवेज, अरमान मलिक, ताहिर अहमद, शब्बीर मलिक और शमीम अख्तर के अलावा और भी कई लोग शामिल हैं।

इस मामले में पुलिस ने रियाज मॉरिफ, सनाउल्लाह, तौसीफ, महबूब आलम, एहसान परवेज, मो. सलमान, मो. रसलान (सचिव, बिहार-बंगाल क्षेत्रीय समिति PFI), महबूब-उर-रहमान, इम्तियाज दाऊद, महबूब आलम, खलीकुर जमा, मो. अमीन आलम (टीचर ट्रेनिंग कॉलेज गोनपुरा फुलवारीशरीफ के कर्मचारी), जीशान अहमद, रियाज अहमद, मंजर परवेज, नुरुद्दीन जंगी उर्फ एडवोकेट नुरुद्दीन, मो. रियाज (PFI का राष्ट्रीय नेता), मो. अंसारुल हक (मिथिलांचल यूनिट का निदेशक प्रभारी), मंजहरुल इस्लाम, अब्दुर्रहमान, मो. मुस्तकीन, अरमान मलिक, परवेज आलम (राज्य कमेटी सदस्य PFI मिथिलांचल) के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

ये सभी फुलवारी शरीफ आते थे और यहाँ मुस्लिमों का ब्रेनवॉश कर उन्हें देश के खिलाफ जिहाद के लिए भड़काते थे और भारत को साल 2047 तक इस्लामिक मुल्क बनाने के लिए PFI से जोड़ने का काम करते थे। FIR में यह भी कहा गया है कि केरल और तमिलनाडु से 12 लोग आए थे, जो तलवार चलाने की ट्रेनिंग देेते थे।

गाँव में मुस्लिमों की आबादी 90%, झारखंड के इस सरकारी विद्यालय में हिन्दू बच्चों को नहीं मिलता प्रवेश, 5 छात्रों का नाम काट कर निकाला: रिपोर्ट

झारखंड (Jharkhand) से एक बार फिर से मुस्लिम बहुल इलाके (Muslim Dominated Area) में हिन्दुओं (Hindus) के साथ भेदभाव और अत्याचार की खबर सामने आई है। इस बार गढ़वा (Garhwa) जिले का है, जहाँ एक गाँव में मुस्लिम आबादी अधिक होने के चलते वहाँ के सरकारी स्कूल ने हिन्दू छात्रों को प्रवेश देना बंद कर दिया है। साथ ही पाँच हिंदू बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया है।

प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना रंका ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले मानपुर गाँव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, हथिया पत्थर का है। यहाँ पर बीते कई साल से स्कूल में हिन्दुओं का नामांकन ही नहीं किया जाता है। स्कूल की मैनेजमेंट कमिटी और प्रिंसिपल का कहना है कि गाँव में मुस्लिमों की जनसंख्या करीब 90 फीसदी से अधिक है, इसलिए यहाँ के स्कूलों में केवल मुस्लिमों का ही नामांकन किया जाएगा।

न्यूज के लिए साभार: प्रभात खबर

करीब चार साल पहले इसी स्कूल के पाँच हिन्दू छात्र-छात्राओं का नाम काटकर उन्हें बाहर निकाल दिया गया था। उसके बाद से स्कूल में किसी भी हिन्दू छात्र को प्रवेश नहीं दिया गया। निकाले गए बच्चों में कक्षा तीन के दिलीप कुमार, पंकज कुमार, रानी, कक्षा 2 की अमृता कुमारी और कक्षा एक की नेहा कुमारी है। स्कूल से बाहर किए जाने के बाद से ये छात्र मानपुर से दूर एक स्कूल में पढ़ने लगे।

मजदूरी करते हैं बच्चों के परिजन

जिन बच्चों का नाम काटकर उन्हें स्कूल से बाहर निकाला गया था, उनके पिता बाहर रहकर मजदूरी करते हैं और उनकी माँ ही अभिवावक के तौर पर घर में बची हैं। इन बच्चों की माँओं का आरोप है कि स्कूल का प्रिंसिपल महताब अंसारी मुस्लिम समुदाय से आते हैं। प्रिंसिपल का कहना है कि यहाँ केवल मुस्लिम ही पढ़ेंगे। इस मामले के सामने आने के बाद प्रखंड के शिक्षा अधिकारी कामता प्रसाद ने मामले की जाँच की बात कही है।

प्रिंसिपल का बयान

उत्क्रमित मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक महताब अंसारी का कहना है कि जिन छात्रों को बाहर किया गया है, उनकी स्कॉलरशिप आई थी। स्कूल ने इसका इस्तेमाल खराब हैंडपंप को बनवाने के लिए कर लिया। लेकिन बच्चों ने स्कॉलरशिप के लिए हंगामा करना शुरू कर दिया था। इसके बाद उनका नाम काटा गया था।