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बिजली-पानी के बाद अब रेवड़ी की तरह मिलेगा ‘अंग्रेजी का ज्ञान’: केजरीवाल सरकार लाई ‘फ्री इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स’, लोग बोले – श्रीलंका के हालातों से कुछ नहीं सीखा

हर जगह फ्री की ‘रेवड़ियाँ’ बाँट रहे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर से दिल्ली के युवाओं को लुभाने के लिए मुफ्तखोरी को बढ़ावा दिया है। सीएम केजरीवाल ने दिल्ली के 50 सेंटरों पर युवाओं के लिए स्पोकेन इंग्लिश कोर्स शुरू करने का ऐलान किया है। ये कोर्स पूरी तरह से मुफ्त होगा।

केजरीवाल ने कहा है कि इस कोर्स का संचालन दिल्ली स्किल एंड एंटप्रिन्योरशिप यूनिवर्सिटी करेगी। उनका मानना है कि इससे बच्चों की अंग्रेजी बोलने की क्षमता का विकास होगा और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट भी होगा। इसके पहले चरण के तहत एक लाख युवाओं को इंग्लिश बोलने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस कोर्स में 18-35 साल तक के युवा शामिल हो सकेंगे। ये कोर्स केवल 3-4 महीनों का ही होगा।

सीएम अरविंद केजरीवाल का कहना है कि वैसे तो ये कोर्स पूरी तरह से मुफ्त रहेगा, लेकिन सुरक्षा गारंटी के तौर पर युवाओं से 950 रुपए डिपॉजिट कराए जाएँगे और कोर्स खत्म होने के बाद उन्हें वापस कर दिया जाएगा। केजरीवाल के मुताबिक, गरीब और मध्यम परिवार के बच्चों की अंग्रेजी सही नहीं होती है, इस कारण से उन्हें नौकरियाँ नहीं मिल पाती हैं। लेकिन इस कार्यक्रम से इन बच्चों इंग्लिश अच्छी हो जाएगी।

उन्होंने ये भी बताया कि इस कोर्स के लिए मैकमिलन और वर्ड्सवर्थ के साथ करार किया गया है और इसके अलावा कैंब्रिज यूनिवर्सिटी इसका एसेसमेंट करेगी।

मुफ्त खोरी के नुकसान

गौरतलब है कि केजरीवाल सरकार जिस राज्य में है और आम आदमी पार्टी जहाँ भी प्रचार करती है वहाँ-वहाँ ये मुफ्तखोरी का लालच देकर वोटरों को लुभाने की कोशिश करते हैं। हाल ही केजरीवाल ने गुजरात के लोगों को लुभाने की कोशिश करते हुए कहा था, प्रदेश में अगर उनकी सरकार आती है तो 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाएगी। हालाँकि, केजरीवाल की सभा में बैठे लोगों ने ही मुफ्तखोरी से स्पष्ट इनकार कर दिया।

मुफ्तखोरी की पीड़ा श्रीलंका से अच्छा कौन जान सकता है, जहाँ सरकारों ने चीन से कर्ज लेकर जनाता को मुफ्त का लालच दिया। इसका असर ये हुआ कि आज श्रीलंका इतिहास की सबसे बुरी आर्थिक त्रासदी का सामना कर रहा है। अभी कुछ दिनों पहले विदेशमंत्री एस जयशंकर ने ‘फ्री कल्चर’ को खत्म करने की वकालत करते हुए श्रीलंका के हालात की तरफ इशारा किया था। वहीं लोगों ने भी इस तरह दिल्ली में हर चीज मुफ्त होता देख कहा है कि यहाँ श्रीलंका के हालात देख कुछ नहीं सीखा जा रहा।

बंगाल के गिरफ्तार मंत्री की एक और करीबी पर ED की नजर, 10 फ्लैट की मालकिन है किराए पर रहने वाली मोनालिसा: प्रोफेसरी पर भी सवाल

शिक्षक भर्ती घोटाले के आरोप में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी और सरकार में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी को दो दिन के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत में भेज दिया गया है। उन्हें आज ही (23 जुलाई 2022) की सुबह केंद्रीय एजेंसी ने गिरफ्तार किया था।

इसके अलावा, पार्थ चटर्जी की एक और करीबी मोनालिसा दास के बारे में ED पड़ताल कर रही है। पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी के अलावा, उनके करीबी अर्पिता मुखर्जी और सुकांत आचार्य को हिरासत में लिया गया है।

गिरफ्तार करने के बाद पार्थ चटर्जी को कोलकाता के एक अस्पताल में मेडिकल टेस्ट कराया गया और फिर एजेंसी के कोलकाता ऑफिस में ले जाकर पूछताछ की गई थी। दोपहर में उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ उन्हें दो दिन के लिए ED की हिरासत में भेज दिया गया।

गिरफ्तारी से पहले ED के अधिकारियों ने उनसे 24 घंटे तक पूछताछ की थी। इसके अलावा, उनके घर कई अन्य नेताओं के घरों पर छापेमारी की गई थी। वहीं, पार्थ चटर्जी के करीबी पूर्व एक्ट्रेस अर्पिता मुखर्जी के घर ED ने शुक्रवार (22 जुलाई 2022) को रेड डालकर 20 करोड़ रुपए नकद, सोना और कई दस्तावेज बरामद किए थे।

इधर पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर बिमान बनर्जी का कहना है कि पार्थ चटर्थी को गिरफ्तार करने से पहले उन्हें सूचित नहीं किया गया। उनका कहना है कि किसी भी विधायक की गिरफ्तारी की सूचना स्पीकर को देना ED का कर्तव्य है।

अब पार्थ की नजदीकी मोनालिसा दास रडार पर

पार्थ चटर्जी की एक और नजदीकी महिला का नाम सामने आ रहा है, जो ED की रडार पर है। इस महिला का नाम मोनालिसा दास (Monalisa Das) है। मोनालिसा के नाम पर 10 फ्लैट का पता चला है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि इनमें से 7 घर पार्थ चटर्जी के हैं और ये बीरभूम जिले के शांतिनिकेतन के फुलडांगा इलाके में हैं।

आजतक के अनुसार, मोनालिसा दास बांग्लादेश भी जुड़ी हुई हैं। वह पहले आसनसोल में एसबी गोराई रोड पर विवेकानंद पल्ली में किराए के एक मकान में रहती थीं। मोनालिसा इस इलाके में लगभग पाँच साल तक किराए पर अकेली रहती थीं।

जी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय लोगों का कहना है कि ये सारे घर मंत्री पार्थ चटर्जी के हैं और वे समय-समय पर इन घरों में आते रहते हैं। लोगों का यह भी कहना है कि मोनालिसा इन घरों का देखभाल करती हैं।

मोनालिसा के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने साल 2014 में आसनसोल के काजी नजरूल विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया था और वर्तमान में उसी विश्वविद्यालय में बंगाली भाषा की प्रोफेसर हैं। वह इस विभाग की प्रमुख हैं।

मोनालिसा दास के प्रोफेसर के तौर पर नियुक्ति पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। कहा जा रहा है कि पार्थ चटर्जी के प्रभाव के कारण ही उन्हें प्रोफेसर की नौकरी मिली है। मोनालिसा का घर भी शांतिनिकेतन में ही है। फिलहाल एक प्रोफेसर के पास इतनी संख्या में फ्लैट को लेकर ED जाँच कर रही है।

जेल भेजे गए मंसूरी, रफीक और आरिज: उर्दू को लेकर सरकारी स्कूल की प्रधानाध्यापिका को धमकाने का मामला, राजस्थान का वीडियो हुआ था वायरल

सरकारी विद्यालय की प्रधानाध्यापिका को उर्दू पढ़ाने को लेकर धमकी देने वाले 3 आरोपितों को राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। राजस्थान पुलिस ने धमकी के वायरल वीडियो पर स्वतः संज्ञान लेते हुए ये कार्रवाई की। जिला पुलिस अधीक्षक जय यादव ने सोशल मीडिया पर निगरानी के निर्देश पुलिस को दिए हे। गुरुवार (21 जुलाई, 2022) को आलोड़ स्थित राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रधानाध्यापिका को धमकी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपितों के नाम हैं – हुसैन मोहम्मद मंसूरी, रफीक मोहम्मद और मोहम्मद आरिज। इन तीनों को जेल भी भेज दिया गया है। बूँदी जिले की पुलिस ने कहा है कि पुलिस अधीक्षक का स्पष्ट निर्देश है कि जो भी कानून अपने हाथ में लेकर डराएगा-धमकाएगा, ऐसे हर शख्स पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में किसी ने शिकायत नहीं दी थी, इसीलिए पुलिस ने खुद ही संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की।

प्रिंसिपल को धमकी के मामले में राजस्थान पुलिस का बयान

राजस्थान में उर्दू पढ़ाने को लेकर सरकारी स्कूल की प्रधानाध्यापिका को धमकी: जानें क्या है पूरा मामला

राजस्थान के बूँदी जिले के वायरल वीडियो में कुछ लोगों को स्कूल में तीसरी भाषा के तौर पर उर्दू शामिल करने को लेकर प्रिंसिपल को धमकाते हुए देखा जा सकता है। शामिल न करने करने पर स्कूल में ताला लगाने की धमकी देता है। मामला बूँदी जिले के अलोद गाँव स्थित महात्मा गाँधी राजकीय विद्यालय (इंग्लिश मीडियम) का है। मामले पर स्कूल की प्रिंसिपल ने बताया था कि स्कूल की तरफ से इस बारे में अभी तक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

प्रिंसिपल ने कहा कि उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट इसलिए दर्ज नहीं करवाई थी, क्योंकि फिर उनको भी कुछ घटना होने की अंदेशा रहती। उन्होंने बताया था कि उन्हें अभी इसी गाँव में नौकरी करनी है तो वह इन सब झंझट में नहीं पड़ना चाहती। उन्होंने कहा कि धमकी देने वालों की भाषा इतनी निम्न स्तरीय थी कि वो किसी की बात नहीं सुनना चाहते थे, सिर्फ अपनी बात कहकर चले गए। वह जनवरी 2020 से इस विद्यालय में कार्यरत है। उन्होंने बताया कि धमकी देने वाले स्कूल में उर्दू पढ़ाने को लेकर धमका रहे थे।

‘जहाँ ज्यादा सम्मान मिलेगा, वहाँ चले जाइए’: अखिलेश यादव ने चाचा और राजभर को दिखाया बाहर का रास्ता, बोले सुभासपा अध्यक्ष – तलाक कबूल

समाजवादी पार्टी ने आज (23 जुलाई 2022) शिवपाल सिंह यादव और ओम प्रकाश राजभर के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए इन्हें खुला पत्र जारी किया। पत्र में कहा गया कि अगर इन दोनों नेताओं को लगता है कि इन्हें कहीं और किसी अन्य पार्टी में ज्यादा सम्मान मिलेगा तो ये वहाँ पर जा सकते हैं।

सपा के पत्र में शिवपाल यादव को कहा गया, “माननीय शिवपाल सिंह यादव जी, अगर आपको लगता है, कहीं ज्यादा सम्मान मिलेगा तो वहाँ जाने के लिए आप स्वतंत्र हैं।”

वहीं ओम प्रकाश राजभर को लिखे पत्र में कहा गया, “ओमप्रकाश राजभर जी, समाजवादी पार्टी लगातार भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ लड़ रही है। आपका भारतीय जनता पार्टी के साथ गठजोड़ है और लगातार भाजपा को मजबूत करते रहे हैं। अगर आपको लगता है, कहीं ज्यादा सम्मान मिलेगा तो वहाँ जाने के लिए आप स्वतंत्र हैं।”

बता दें कि समाजवादी पार्टी के पत्र के बाद शिवपाल सिंह यादव और ओम प्रकाश राजभर ने अपनी अपनी प्रतिक्रिया दी है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के नेता और अखिलेश यादव के चाचा ने इस पत्र की प्रतिक्रिया में कहा,

“मैं वैसे तो सदैव से ही स्वतंत्र था, लेकिन समाजवादी पार्टी द्वारा पत्र जारी कर मुझे औपचारिक स्वतंत्रता देने हेतु सहृदय धन्यवाद। राजनीतिक यात्रा में सिद्धांतों एवं सम्मान से समझौता अस्वीकार्य है।”

वहीं सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि उन्हें ये सियासी तलाक कबूल है। उनका अगला पड़ाव बसपा है। उन्होंने कहा, “अगर वो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलते हैं तो ये सबको बुरा लगता है, लेकिन अगर अखिलेश मिलते हैं तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होती। सबकुछ 2024 के चुनावों में स्पष्ट हो जाएगा। चुनाव आने दीजिए। हम दलितों और पिछड़ों के लिए लड़ेंगे और अपनी लड़ाई को जारी ही रखेंगे।”

उन्होंने ये भी कहा कि उनका गठबंधन समाजवादी पार्टी से ज्यादा समय नहीं चल सकता था। वह बताते हैं, “अख‍िलेश के साथ मैं दलितों, वंचितों और समाज में अतिपिछड़ों की लड़ाई लड़ने गया था लेकिन चुनाव में उन्‍होंने जैसा किया, जब पहले चरण का चुनाव हुआ तभी मैंने कहा कि अति पिछड़ों को टिकट दें। कश्‍यप, पाल, प्रजापति, नाई, गोंड, कुम्‍हार, कोहार, लोहार, धोबी, पासी, खटीक जैसी जातियों के नेताओं को टिकट दीजिए लेकिन हमारी बात उनको नहीं जमती थी।”

राजभर ने आरोप लगाया, “अखिलेश चाहते हैं कि मैं उनके सुर में सुर मिलाकर बात करूँ । लेकिन ओमप्रकाश राजभर किसी के सुर में सुर मिलाकर बोलने के लिए पार्टी नहीं बनाया है। हम जिनके लिए लड़ते हैं। उनके लिए बोलते रहते हैं। आज भी मैं कह रहा हूX। 2022 के चुनाव में हमने देखा कि सपा के पास कश्‍यप, राजभर जैसी जातियों को देने के लिए सीट नहीं है। इसलिए अखिलेश ने जो किया हम उसका स्वागत करते हैं।”

उन्होंने अखिलेश पर ये भी आरोप लगाया कि सपा अध्यक्ष हमेशा एसी में रहते हैं और उन्हें दलितों-पिछड़ों की लड़ाई धरातल पर कैसे लड़ी जा रही है, इसका पता तक नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि सपा के पत्र देखने के बाद भाजपा नेता केशव प्रसाद मौर्या ने अखिलेश यादव पर तंज कसा। उन्होंने कहा, “सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव आप पिछड़े वर्ग के किसी भी नेता के बढ़ते कद को बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। आप चाहते हैं, ओबीसी का कोई दूसरा बड़ा नेता न हो, आप पिछड़ों के विरोधी हैं। जब आप सीएम थे क्या आपने ओबीसी के किस नेता को डिप्टी सीएम बनाया। पिछड़ों का विश्वास नरेंद्र मोदी के साथ।”

‘तालिबान विरोधियों के सिर काट लिए जाएँ’: मौलवियों के फतवा के बाद तालिबान का फैसला – सरकार की आलोचना पर शरिया के तहत सज़ा

अफगानिस्तान में कब्जा करने के बाद से ही तालिबान वहाँ पर लगातार लोकतंत्र, लोगों की आजादी और बोलने के अधिकारों को कुचलने की कोशिश करता रहा है। ताजा मामले में तालिबानी सरकार ने एक नया तुगलकी फरमान जारी कर ‘इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान’, उसके कथित ‘स्कॉलर्स’ और अधिकारियों की आलोचना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।

तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने अपने नेता मुल्ला हेबतुल्लाह अखुंदज़ादा का हवाला देते हुए ये नए निर्देश जारी किए है। मुजाहिद ने तल्ख लहजे में कहा कि इन दिशानिर्देशों और ‘शरिया’ के पालन की जिम्मेदारी लोगों और मीडिया की है। तालिबान प्रशासन के द्वारा दिया गया ये निर्देश जनता को तालिबान कार्यकर्ताओं और अधिकारियों के खिलाफ आरोप लगाने से भी रोकता है।

तथाकथित निर्देश उन असंतुष्टों की गिरफ्तारी और प्रताड़ना की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें उन्होंने लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं और मानवाधिकारों को कुचलने रोकने के लिए तालिबान की आलोचना की थी। दरअसल, हेरात के एक इस्लामिक स्कॉलर मुजीबुर रहमान अंसारी द्वारा काबुल में मौलवियों की एक बैठक की थी, जिसमें शामिल होने वालों से तालिबान सरकार के विरोधियों के सिर काटने के लिए फतवा जारी करने के लिए कहने के हफ्तों बाद ये निर्देश जारी किए गए।

तालिबान नेता के दिशा-निर्देशों में उल्लेख किया गया है कि इस तरह की कार्रवाई ‘नकारात्मक प्रचार’ है, जिससे अनजाने में दुश्मनों की ही मदद होती है। तालिबानी आदेश में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी सैनिक को छूता है या उसके कपड़े खींचता है अथवा उससे बुरी बातें करता है तो तालिबानी कानून के मुताबिक उसे दंडित किया जाएगा।

गौरतलब है कि तालिबान मौजूदा वक्त में ‘नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट’ से लड़ाई लड़ रहा है, जिसने इस्लामिक कट्टरपंथियों पर नागरिकों को गिरफ्तार करने, मारने और उन्हें प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। इसी सप्ताह संयुक्त राष्ट्र ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसके मुताबिक, अफगानिस्तान में यातना और दुर्व्यवहार के 54 मामले और मनमाने ढंग से गिरफ्तारी और हिरासत के 113 मामले, इनकंपनीडो हिरासत के 23 मामले और राष्ट्रीय प्रतिरोध मोर्चा से जुड़े व्यक्तियों की 18 हत्याओं के मामले दर्ज किए गए हैं।

‘अग्निवीर’ बनने के लिए सिर्फ वायुसेना-नौसेना में 10.5 लाख आवेदन, हिंसा के कारण रेलवे को हुआ ₹260 करोड़ का नुकसान

भले ही राजनीतिक दलों और भाजपा विरोधी वामपंथी गिरोह ने जम कर ‘अग्निपथ योजना’ के खिलाफ प्रदर्शन और हिंसा की हो, लेकिन देश के युवाओं में इसे लेकर जोश देखने को मिल रहा है। केंद्रीय रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि भारतीय नौसेना में शुक्रवार (22 जुलाई, 2022) तक ‘अग्निपथ योजना’ के लिए 3,03,328 आवेदन आ चुके हैं। ये भी जानने वाली बात है कि इनमें से 20,499 महिलाएँ हैं। ये आँकड़े केवल इंडियन नेवी के हैं।

बता दें कि इसके लिए 1 जुलाई, 2022 को ही आवेदन लेने शुरू हो गए थे। तीनों सेनाओं के लिए इसके तहत भर्तियाँ निकाली गई हैं। भारतीय नौसेना इसके पहले चरण में 2800 नौकरियाँ ऑफर कर रही हैं। इन्हें ‘अग्निवीर’ के नाम से जाना जाएगा। इसके तहत योग्यता 12वीं पास की रखी गई है। साथ ही 200 ऐसे उम्मीदवारों का चयन भी किया जा रहा है, जिनकी योग्यता मैट्रिकुलेशन (10वीं) है। भारतीय वायुसेना ने भी बताया है कि युवाओं की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।

भारतीय वायुसेना के लिए इसके तहत अब तक 7.5 लाख आवेदन आ चुके हैं। यहाँ 3000 की वैकेंसी है। IAF ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस साल की वैकेंसियों के लिए ज्यादा आवेदन आए हैं। सबसे ज्यादा भारतीय थलसेना में 40,000 भर्तियाँ होनी हैं। उधर संसद में भारत सरकार ने जानकारी दी है कि ‘अग्निपथ योजना’ के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के कारण भारतीय रेलवे को 259.44 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

राज्यसभा में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ये जानकारी दी। कॉन्ग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि इस विरोध प्रदर्शन के कारण ट्रेनों के रद्द होने के बाद यात्रियों को रिफंड भी दिया गया, जिसके आँकड़े फ़िलहाल उपलब्ध नहीं हैं। लेकिन, 14 जून से लेकर 30 जून तक 102.96 करोड़ रुपए का कुल रिफंड दिया गया। उन्होंने बताया कि रेलवे की संपत्तियाँ तबाह करने के मामलों की जाँच GRP और स्थानीय पुलिस जगह-जगह कर रही हैं।

मेरठ में दूसरे समुदाय के युवकों ने काँवड़ियों पर थूका, काँवड़ को किया अपवित्र: नाराज हिन्दुओं का प्रदर्शन, पुलिस ने समझाया तब आगे बढ़ी यात्रा

यूपी के मेरठ (Meerut, UP) में सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने के लिए दूसरे समुदाय के युवकों ने काँवड़ यात्रा करने वाले काँवड़ियों पर थूक दिया। इससे काँवड़िए भड़क गए और युवक को जमकर कर पीट दिया। बाद में पुलिस ने मामले को शांत कराया।

घटना मेरठ के कंकरखेड़ा के पास NH 58 की है। काँवड़ियों के अनुसार, शनिवार (22 जुलाई 2022) को कुछ काँवड़िए अपने काँवड़ को रखकर शिविर में आराम कर रहे थे। तभी दूसरे समुदाय के दो युवक बाइक से आए और काँवड़ पर थूकने का प्रयास किया। आगे चलकर इनमें से एक युवक बाइक से उतरा और काँवड़ पर थूक कर अपवित्र कर दिया।

जब काँवड़ियों ने इन्हें देखा तो एक को पकड़ लिया, जबकि दूसरा भाग गया। पकड़ने के बाद काँवड़ियों ने उसे पीटना शुरू कर दिया। इसी बीच पुलिस मौके पर पहुँचकर आरोपित को भीड़ से छुड़ाकर अपने साथ लेकर चली गई।

इस घटना का पता जैसे ही काँवड़ियों के अन्य समूह को लगा, उन्होंने इसके खिलाफ प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। बाद में कई समूह जुड़ता चला गया। इसके बाद नाराज काँवड़ियों ने हाइवे पर जाम कर दिया। इतना ही नहीं, गुस्साए लोगों ने थाने में भी तोड़फोड़ की।

उन्होंने पुलिस से कहा जब तक दूसरे समुदाय के युवक को उनके हवाले नहीं किया जाएगा, तब तक जाम नहीं खोला जाएगा। मामले की नजाकत को देखते हुए SSP रोहित सिंह सजवाण भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और काँवड़ियों को समझाया।

एसएसपी ने हाथ में लाउडस्पीकर माइक लेकर खुद लोगों से शांत रहने की अपील की और बम भोले एवं भारत माता की जय के नारे लगाकर काँवड़ियों को आगे बढ़ने के प्रोत्साहित किया। इसके बाद काँवड़िए आगे बढ़े।

राजस्थान के भरतपुर तहसील गाँव सीकरी निवासी हनी मुखीजा, दिशांत, लोकेश आदि काँवड़ियों ने बताया कि 21 जुलाई की शाम को वे हरिद्वार से राजस्थान के लिए 40 काँवड़ियों के साथ चले थे। जैसे वे कंकरखेड़ा के पास पहुँचे, यह घटना हुई।

DM दीपक मीणा और SSP रोहित सिंह के समझाने के बाद यह तय हुआ कि जो काँवड़ खंडित हुई थी, उससे जुड़े चार काँवड़ियों को लेकर पुलिस हरिद्वार जाएगी। वहाँ से पवित्र गंगाजल लेकर वापस कंकरखेड़ा तक आएगी। इसके बाद उस गंगाजल को विशाल काँवड़ में रखकर वे राजस्थान जाएँगे।

केरल के मछुआरों को मिली स्पर्म व्हेल की उलटी, कीमत ₹28 करोड़, जानिए क्या है और क्यों इतना महँगा होता है Ambergris

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के नजदीक स्थित विज्हिंजम के मछुआरों को 28 करोड़ रुपए की कीमत की व्हेल की उलटी मिली है। उन्होंने इसे प्रशासन को सौंप दिया है। बता दें कि व्हेल की उलटी, जिसे Ambergris कहा जाता है, उसका उत्पादन स्पर्म व्हेल के पाचन तंत्र में होता है। हजारों वर्षों से ये चीज एक रहस्य रही है और इसकी कीमत हीरे-जवाहरातों से भी ज्यादा रही है। इसका इस्तेमाल परफ्यूम बनाने के लिए किया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्हेल की इस उलटी की कीमत 1 करोड़ रुपए प्रति किलोग्राम है। ये द्रव्य नहीं होता, बल्कि माँ की तरह का एक ज्वलनशील ठोस पदार्थ होता है। समय के साथ इसका सुगंध और अच्छा होते चला जाता है। इसका इस्तेमाल सेंट बनाने में होता है, जिससे वो सेंट लंबे समय तक टिकता है। कई बार ये समुद्र में तैरते हुए या किनारे पर पाया जाता है, तो कभी मरे हुए स्पर्म व्हेल के पेट में। इसे बनने की प्रक्रिया में वर्षों लगते हैं।

केरल के मछुआरों को इसी तरह का Ambergris मिला, जिसका वजन 28.4 किलो आँका गया है। शुक्रवार (22 जुलाई, 2022) की शाम इसे समुद्र तट पर पाया गया। उन्होंने इसे कोस्टल पुलिस को सौंप दिया। कोस्टल पुलिस ने इसकी सूचना फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को दी, फिर वो इसे लेकर चले गए। वहाँ से उसे ‘राजीव गाँधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी (RGCB)’ ले जाया गया। वहाँ पर इसकी पुष्टि हुई कि ये क्या है। बता दें कि भारतीय कानून के हिसाब से इसकी खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध है।

स्पर्म व्हेल को विलुप्त हो रही प्रजातियों के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है। ‘वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट’ के तहत इसके शिकार पर भी प्रतिबंध है। सामान्यतः व्हेल की इस तरह की उल्टियों को अटलांटिक महासागर में ज्यादा पाया जाता है। इसे कई आकर में पाया जाता है, जिसका वजन 15 ग्राम से लेकर 50 किलो तक हो सकता है। 18वीं-19वीं सदी में कम से कम 50,000 व्हेल्स को इसके लिए मार डाला गया था। इजिप्ट में इसका विशेष महत्व है।

‘मेरे केस की नहीं हो रही सही से जाँच’: तिहाड़ जेल में बंद आतंकी यासीन मलिक सरकार से खफा, शुरू की भूख हड़ताल, प्रशासन मनाने में जुटा

दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद होने के बावजूद जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का आतंकी यासीन मलिक इन दिनों भूख हड़ताल पर गया हुआ है। उसकी शिकायत है कि उसके ऊपर जो मामले विचाराधीन चल रहे हैं उनकी सही से जाँच नहीं हो रही।

जानकारी के मुताबिक, यासीन मलिक ने बीते शुक्रवार (22 जुलाई 2022) को हड़ताल चालू की थी, जिसकी जानकारी होने पर जेल के वरिष्ठ अधिकारी भी उससे मिलने पहुँचे और भूख हड़ताल खत्म करने को कहा। हालाँकि यासीन ने इससे इनकार कर दिया।

यासीन मलिक की माँग

इससे पहले जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक ने 13 जुलाई 2022 सीबीआई कोर्ट से कहा था कि वह पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण से जुड़े केस में सामने पेश होकर गवाहों से खुद बहस करना चाहता है। जेकेएलएफ अध्यक्ष ने कहा था कि अगर उसे ये अनुमति नहीं दी गई तो वह हड़ताल करेगा।

उसने अपनी हड़ताल को शुरू करने से पहले समय सीमा दी थी। उसने कहा था कि वह 22 जुलाई तक सरकार के जवाब का इंतजार कर रहा है। अगर उसे अनुमति नहीं मिली तो वह अनिश्चितकाल काल तक अपनी हड़ताल करेगा।

रुबैया सईद ने की यासीन मलिक नाम की पुष्टि

बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद का 8 दिसंबर 1989 को जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) ने अपहरण कर लिया था। उस समय जेकेएलएफ का नेतृत्व यासीन मलिक कर रहा था। जेकेएलएफ ने अपने पाँच सदस्यों को जेल से रिहा कराने की माँग को लेकर बंदूक की नोक पर रूबैया का अपहरण कर लिया था। उस समय 23 वर्षीया रुबैया उस समय लाल डेड मेमोरियल महिला अस्पताल में बतौर मेडिकल इंटर्न कार्यरत थीं।

अब इसी मामले की सुनवाई में 15 जुलाई 2022 को सामने आया कि जम्मू-कश्मीर की टाडा अदालत में रुबैया सईद ने खुद 4 उन लोगों की पहचान कर ली है जिन्होंने उनका अपहरण किया था। इन अपहरणकर्ताओं में एक यासीन मलिक भी था। सुनवाई में भाग लेने वाले वकीलों ने पुष्टि की थी कि सईद ने अदालत में अपना बयान दर्ज कराया। इस दौरान उन्होंने सीबीआई द्वारा जाँच के दौरान उन्हें उपलब्ध कराई गई तस्वीरों के आधार पर सभी की पहचान की।

25 को मिली थी यासीन मलिक को सजा

गौरतलब है कि यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार का आरोपित भी है। कुछ समय पहले उसे टेरर फंडिग केस में दोषी ठहराए जाने के बाद 25 मई सजा मुकर्रर की गई थी। यासीन मलिक को भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 121, 121ए और यूएपीए की धारा 13 और 15 के साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 17, 18, 20, 38 और 39 के अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 17, 18, 20, 38 और 39 के तहत अपराधों का दोषी ठहराया गया था। NIA कोर्ट ने तमाम धाराओं के तहत टेरर फंडिंग केस में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। साथ ही 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था।

काँवड़ यात्रा करने वाले बाबू खान का मुस्लिमों ने किया बहिष्कार, मस्जिद से बाहर निकाला: रोज सुबह करते हैं शिव मंदिर की सफाई

मुस्लिमों में भी बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्होंने अपने पुरखों और उनकी संस्कृति को आज तक नहीं भुलाया है। यही कारण है कि छठ जैसे महापर्व में और काँवड़ जैसी धार्मिक यात्रा में बड़ी संख्या में मुस्लिम शामिल होते हैं। हालाँकि, ऐसे लोगों को कट्टरपंथी मुस्लिमों की धमकियों का भी सामना करना पड़ता है।

उत्तर प्रदेश के बागपत के बाबू खान ऐसे ही व्यक्ति हैं, जो पिछले 5 सालों से सावन में काँवड़ यात्रा करते हैं। हालाँकि, इसको लेकर उन्हें कर तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। जब पहली बार 2018 में उन्होंने काँवड़ यात्रा की तो कट्टरपंथी मुस्लिमों ने उन्हें मस्जिद से बाहर निकाल दिया। कट्टरपंथियों की इस करतूत के बावजूद वे अभी भी काँवड़ यात्रा पर जाते हैं।

बाबू खान ने दैनिक भास्कर को बताया, “जब मैं पहली बार काँवड़़ लेकर गया तो घर में खूब लड़ाइयाँ हुईं, लेकिन परिवार को किसी तरह समझा लिया। 2018 में पुरा महादेव मंदिर पर जलाभिषेक करने के बाद अगले दिन सुबह नमाज पढ़ने के लिए 5 बजे मैं मस्जिद तो वहाँ मेरा बहिष्कार कर दिया गया और मुझे मस्जिद से बाहर निकाल दिया गया।”

बाबू खान ने बताया कि इस घटना के बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत की। मस्जिद से बाहर निकालने पर कानूनी कार्रवाई करते हुए हुए उन्हें मस्जिद से बाहर निकालने वाले कई लोगों को जेल भी भेजा।

बाबू खान का कहना है कि वह सबसे पहले सुबह 5 बजे गाँव की मस्जिद में नमाज पढ़ते हैं और फिर शिव मंदिर में जाकर उसकी सफाई करते हैं। बाबू खान का कहना है, “मैंने इस्लाम धर्म नहीं छोड़ा है, सिर्फ काँवड़ लाने में आस्था है। इसलिए हर साल काँवड़ लेने के लिए हरिद्वार आता हूँ।”

काँवड़ को लेकर अपनी शुरुआत को लेकर बाबू खान ने बताया कि साल 2018 में वह दिल्ली के आजादपुर मंडी से ट्रक लेकर जा रहे थे। जब यूपी में कैराना पुलिस चौकी के नजदीक पहुँचे तो वहाँ जाम लगा हुआ था। उन्होंने देखा कि हजारों काँवड़िए आगे चल रहे थे। उन्होंने बताया, “यहीं पर मेरे मन में ख्याल आया कि अगर मैं भी काँवड़िया होता तो इसी तरह काँवड़ लेकर आ रहा होता।”