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ब्रिटेन के PM की रेस में आगे चल रहे ऋषि सुनक, MBA के दौरान हुआ नारायणमूर्ति की बेटी से प्यार: यूके की महारानी से भी अमीर है ये कपल

बोरिस जॉनसन (Boris Johnson) द्वारा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद कंजर्वेटिव पार्टी के सांसदों ने पार्टी के नए नेता और देश के नए प्रधानमंत्री का चुनाव शुरू कर दिया है। दूसरे मतदान के बाद पाँच उम्मीदवार प्रधानमंत्री की रेस में हैं। वहीं, अगला मतदान सोमवार (18 जुलाई, 2022) को होना है।

इन पाँचों उम्मीदवारों में सबसे आगे बोरिस जॉनसन कैबिनेट में वित्त मंत्री रहे भारतीय मूल के ऋषि सुनक आगे हैं। दूसरे दौर की वोटिंग में 101 वोट के साथ वे सबसे आगे हैं। पहले दौर की वोटिंग में उन्हें सबसे अधिक 88 वोट मिले थे।

उधर जॉनसन लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे किसी को समर्थन करें, लेकिन सुनक को नहीं। उनका मानना है कि उनका प्रधानमंत्री पद जाने की वजह सुनक ही हैं। हालाँकि, जॉनसन के विरोध के बावजूद सुनक बढ़त बनाए हुए हैं।

अगर ऋषि सुनक पार्टी के नेता और अगले प्रधानमंत्री के रूप में चुने जाते हैं तो यह ब्रिटेन के लिए ऐतिहासिक दिन होगा। इससे पहले यह जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर कौन हैं भारतीय मूल के ऋषि सुनक, जिन्होंने सबको पीछे छोड़ दिया है।

कौन हैं ऋषि सुनक

ऋषि सुनक का जन्म 12 मई 1980 को ब्रिटेन के साउथेम्प्टन, हेम्पशायर में हुआ था। उनकी माँ का नाम ऊषा सुनक और पिता का नाम यशवीर सुनक है। उनके पिता डॉक्टर थे और उनकी माँ एक फार्मेसी की मालिक हैं। उनके दादा-दादी पंजाब के रहने वाले थे। वे 1960 में वे अपने बच्चों के साथ पूर्वी अफ्रीका चले गए और वहाँ से उनका परिवार इंग्लैंड पहुँच गया।

ऋषि अपने तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। उनके भाई संजय सुनक एक मनोवैज्ञानिक हैं और उनकी बहन राखी विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय में मानवीय, शांति निर्माण, संयुक्त राष्ट्र के फंड और कार्यक्रमों के प्रमुख के रूप में काम करती हैं।

42 वर्षीय ऋषि की स्कूली पढ़ाई ब्रिटेन के निजी विद्यालय विंचेस्टर कॉलेज में हुई। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। यहाँ उन्होंने दर्शनशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र की पढ़ाई की। इसके बाद साल 2006 में ऋषि ने अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए (MBA) की पढ़ाई की।

MBA करने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत इन्वेस्टमेंट कंपनी गोल्डमैन सैक्स से की। उसके बाद 2009 में उन्होंने नौकरी छोड़ अपना व्यवसाय शुरू किया और एक निवेश फर्म की स्थापना की। साल 2013 में नारायण मूर्ति की कंपनी ‘कैटामारन वेंचर्स यूके लिमिटेड’ में उन्हें और उनकी पत्नी को डायरेक्टर नियुक्त किया गया। हालाँकि, साल 2015 में उन्होंने इस फर्म से इस्तीफा दे दिया, लेकिन उनकी पत्नी इससे जुड़ी रहीं।

इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति के दामाद हैं सुनक

ऋषि सुनक भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति के दामाद हैं। ऋषि की पत्नी अक्षता मूर्ति नारायण मूर्ति की बेटी हैं। ऋषि और अक्षता की दो बेटियाँ हैं और इनका नाम अनुष्का सुनक और कृष्णा सुनक है। 

ऋषि की अक्षता से मुलाकात स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में एमबीए पढ़ाई करने के दौरान हुई थी। वहीं, वहीं दोनों के बीच प्रेम पनपा। साल 2009 में ऋषि ने बेंगलुरु में अक्षता से शादी कर ली। अक्षता इंग्लैंड में अपना फैशन ब्रांड भी चलाती हैं। वह इंग्लैंड की सबसे अमीर महिलाओं में से एक हैं।

राजनीतिक जीवन की शुरुआत

ऋषि को अक्टूबर 2014 में पार्टी के पूर्व नेता और विदेश सचिव विलियम हेग की जगह रिचमंड के लिए कंजर्वेटिव उम्मीदवार चुना गया था। उसके बाद 2015 के आम चुनाव में ऋषि 19,550 वोट पाकर 36.2% के बहुमत से जीत गए और सांसद चुने गए।

तब से ऋषि रिचमंड, यॉर्कशायर के सांसद चुने गए थे। बोरिस जॉनसन सरकार में वित्त मंत्री रहने से पहले वह 2018 में ब्रिटेन के आवास मंत्री बनाए गए थे। फिलहाल वह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद के लिए मैदान में हैं।

साल 2017 में जब वो दूसरी बार सांसद बने थे, तब उन्होंने ब्रिटिश संसद में श्रीमद्भगवतगीता पर हाथ रखकर अपने पद और गोपनीयता की शपथ ली थी। उन्होंने इस दौरान ईमानदारी से देश की सेवा करने की बात कही थी। 

ब्रिटेन की महारानी से अधिक अमीर

मार्च 2022 में आई ‘संडे टाइम्स रिच लिस्ट’ (Sunday Times Rich List) में ऋषि सुनक (Rishi Sunak) और उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति का नाम भी शामिल था। इस लिस्ट में वे दोनों 222वें स्थान पर थे। वहीं, सूची में लगभग 28.472 अरब पाउंड की संपत्ति के साथ पहले स्थान पर भारतीय मूल के हिंदुजा बंधु थे।

लिस्ट के मुताबिक, दोनों की कुल संपत्ति 73 करोड़ पाउंड (79 अरब रुपए) है। द टाइम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस दंपत्ति की अपनी निजी संपत्ति लगभग 430 मिलियन पाउंड (लगभग 41 अरब रुपए) है, जो ब्रिटेन की महारानी से अधिक है। ब्रिटेन की महारानी की कुल संपत्ति 350 मिलियन पाउंड (33.5 अरब रुपए) है।

हिंदू संगठनों ने लुलु मॉल के बाहर पढ़ी हनुमान चालीसा, 20 हिरासत में: पुलिस को करना पड़ा बल प्रयोग, खुलासा – साजिशन पढ़ी गई थी नमाज

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बने नवनिर्मित लुलु मॉल के अंदर नमाज़ के वीडियो वायरल होने के बाद विवाद ने तूल पकड़ लिया है। नमाज़ के विरोध में एक दिन पहले हुए सांकेतिक प्रदर्शन के बाद 16 जुलाई, 2022 (शनिवार) को हिन्दू संगठनों ने मॉल के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ी और प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने लगभग 20 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

प्रदर्शन के वायरल हो रहे वीडियो में प्रदर्शनकारियों की पुलिस से नोकझोंक हो रही है। हिरासत में लिए जाने के दौरान प्रदर्शनकारी जोर-जोर से हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। पुलिस उन्हें वाहनों में भर के ले जा रही थी। प्रदर्शनकरियों के हाथों में भगवा ध्वज दिखाई दे रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मॉल की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है। प्रदर्शनकारी मॉल में घुसने का प्रयास कर रहे थे लेकिन पुलिस की मुस्तैदी से ये नहीं हो पाया। पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इस प्रदर्शन में राष्ट्रीय हिन्दू संरक्षक दल, करणी सेना आदि शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि एक दिन पहले इसी जगह पर ‘हिन्दू समाज पार्टी’ ने प्रदर्शन किया था। उस दौरान भी हिन्दू संगठन के लोगों को हिरासत में लिया गया था। दिवंगत कमलेश तिवारी की पत्नी को हाउस अरेस्ट कर दिया गया था। विवाद को रोकने के लिए मॉल के मैनेजर समीर वर्मा हिन्दू महासभा के पदाधिकारी एडवोकेट शिशिर के घर भी गए। लेकिन, यह विवाद अभी भी बरकरार है।

नमाज़ नहीं बल्कि साजिश थी

इंडिया डॉट कॉम के मुताबिक, नमाज़ साजिशन पढ़ी गई थी। नमाज़ पढ़ने वालों की संख्या 8 बताई जा रही है जो मॉल से कुछ दूरी पर अपना वाहन खड़ा कर के मॉल के अंदर गए थे। वहाँ उन्होंने ग्राउंड फ्लोर पर नमाज़ पढ़नी चाही पर वहाँ उन्हें सिक्योरिटी स्टाफ ने रोक दिया। बाद में वो सभी पहले फ्लोर पर गए और नमाज़ पढ़ी। बाद में वो सभी वापस चले गए। माना जा रहा है कि वो सभी आरोपित नमाज़ पढ़ने ही वहाँ गए थे। फ़िलहाल पुलिस आरोपितों की तलाश कर रही है।

अफवाह फैलाते राजनीतिक दल, गुमराह करती विदेशी कंपनियाँ: फिर भी भारत ने पार किया 200 करोड़ कोरोना टीकाकरण का आँकड़ा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक महामारी कोरोना के लड़ाई में 200 करोड़ टीकाकरण का आँकड़ा पार कर लिया है। यह बोलने और सुनने में कितना आसान लगता है, लेकिन इस आँकड़े तक पहुँचने में जिन कठिनाइयों का सामना हमारे फ्रंटलाइन वर्कर्स, स्वास्थ्यकर्मियों और सरकार ने किया है – वह भारत के इतिहास में सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

इस टीकाकरण यात्रा को आज लगभग 1.5 वर्ष पूरे हो गए। शुरुआत धीमी रही लेकिन वक़्त के साथ रफ़्तार मिलती गई और कारवाँ बनता गया। आज भारत ने वो कर दिखाया है जो दुनिया के अन्य देशो के लिए अब भी कल्पना मात्र है, जो अपने आप को सबसे विकसित व बेहतरीन हेल्थ इंफ़्रास्ट्रक्चर का तमगा देते रहते है।

आज इस अभियान में भारत के मुकाबले कोई अन्य देश खड़ा होता नहीं दिखाई देता है। 200 करोड़ टीकाकरण की यह वह संख्या है जो तमाम यूरोपीय देशों की कुल आबादी से भी अधिक है और इसके लक्ष्य  के माध्यम से भारत ने एक ऐसा आयाम स्थापित किया है, जो कि अन्य सभी देशों के लिए एक मार्ग प्रशस्त करेगा।

भ्रम-भ्रांतियों का तिलिस्म और स्वास्थ्यकर्मियों का कमाल

भ्रम–भ्रांतियाँ, राजनैतिक हस्तक्षेप और अंधविश्वासों के मध्य वैक्सीनेशन को लेकर आम जनमानस का भरोसा जीतना भी सरकार के लिए आसान नहीं रहा। ये मोदी सरकार की उत्कृष्ट रणनीति और धरातल पर कार्य कर रहे स्वास्थकर्मियों का आत्मविश्वास ही था, जिसने सभी क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थों एवं अंधविश्वास के चक्रव्यूह को तोड़ते हुए भारत को आज इस मुकाम पर खड़ा किया है।

इस सफलता तक पहुँचने में हमारे लाखों कोरोना वॉरियर्स का सम्पूर्ण समर्पण शामिल है। उन्होंने देशवासियों की सुरक्षा हेतु अपना बलिदान तक दे दिया। हमने लगातार न्यूज़ चैनलों व सोशल मीडिया पर ऐसे तमाम वीडियो व खबरें देखी, जिनमें हमारे स्वाथ्यकर्मियों ने कैसे दुर्गम इलाकों में पहुँच कर भारत की कोशिशों को यशस्वी बनाया। इस दौरान उन्होंने अपने तमाम साथियों को भी खोया लेकिन ये देश के प्रति सच्ची निष्ठा व अपने कर्म के प्रति समर्पण ही था जो वे तमाम कठिनाइयों को पराजित कर सके।

आरोप-प्रत्यारोप का दौर

इस यात्रा में तमाम सफलता-असफलता के बीच सरकार जहाँ लगातार देशवासियों को जागरूक करने में जुटी रही, वहीं ऐसे विषम परिस्थितियों में भी देश के कई राजनीतिक दल व देश विरोधी ताकतों ने अपने स्वार्थ की रोटी सेंकने में कोई कसर न छोड़ी। विदेशी कंपनियाँ भी लगातार देश को गुमराह करने में जुटी रहीं ताकि भारत में निर्मित स्वदेशी टीके को लोग अस्वीकार कर दें और उनके विदेशी टीके मन मुताबिक दामों व शर्तों में बेचे जा सकें।

भारत एकमात्र देश रहा जहाँ इनकी दाल न गल सकी वरना इस महामारी के दौर में दुनिया के तमाम देशों ने इनके सामने घुटने टेक दिए। भारत का कुशल नेतृत्व एवं स्वास्थ्यकर्मियों का सामर्थ्य ही था कि इन सभी कुचक्रो को तोड़ते हुए आज हमने एक विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसके आगे सभी आरोप-प्रत्यारोप परास्त होते हुए दिखाई पड़ रहे है।

जंग जारी है

ये वक़्त निश्चित ही देश की इस उपलब्धि पर गर्व करने का है। लेकिन, इन सब के बीच ध्यान रहे अभी कोरोना ख़त्म नहीं हुआ है और छिटपुट मामले प्रतिदिन सामने आ रहे है, जो कि हमें आगाह कर रहे है चुनौतियाँ कम ज़रूर हुई हैं लेकिन समाप्त नहीं। ऐसे में हम अति उत्साहित होकर कोई ऐसा कार्य न करें जिससे देश को कोरोना के आगामी लहर के निकट दिखे। हालाँकि, इन गुजरते समय के साथ भरोसा भी कायम हुआ है। भरोसा है जैसे 200 करोड़ का लक्ष्य हम सभी ने जन भागीदारी से पूरा किया आने वाले दिनों में उसी तरह टीकाकरण से जुड़ी अन्य सभी गंभीर चुनौतियों को भी लड़कर पार कर लेंगे।

(लेखक श्रेयश सिंह उत्तर प्रदेश स्थित वाराणसी के रहने वाले हैं। वर्तमान में वो दार्जिलिंग के सांसद के सहयोगी के रूप में कार्यरत हैं।)

‘तुम्हारा सिर होगा तन से जुदा, अल्लाह का फरमान है’: APVP नेता को ‘गजवा-ए-हिंद’ ने भेजी जान से मारने की धमकी, कहा- भारत बनेगा इस्लामी मुल्क

पिछले कुछ दिनों में मजहब का हवाला देकर हिंदुओं को धमकी देने के मामले अचानक बढ़े हैं। हाल में बिहार के भागलपुर के बायपास थाना से एक मामला सामने आया है। वहाँ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के विभाग-संयोजक कुणाल पांडे को गजवा-ए-हिन्द नामक ‘आतंकी संगठन’ ने जान से मारने की धमकी दी। पत्र में कहा गया कि कुणाल ने कन्हैयालाल की हत्या के बाद जो विरोध किया उसका पता उन्हें चल गया है और अब वह लोग कुणाल को भी वैसे ही मारेंगे जैसे कन्हैया को मारा था।

कुणाल ने यह धमकी मिलने के बाद पुलिस में अपनी शिकायत दी। उन्होंने बताया कि ये धमकी वाला पत्र उन्हें डाक के माध्यम से 12 जुलाई 2022 को घर के पते पर मिला था। इस पत्र में लिखा था कि कुणाल ने कन्हैया लाल का समर्थन करके अपनी मौत को दावत दे दी है। अब कुणाल का सिर भी वैसे ही तन से जुदा होगा जैसे कि कन्हैया लाल का किया गया था। उन्होंने पत्र संबंधी जानकारी देते हुए कहा कि उनका परिवार डर गया है वह सुरक्षा चाहते हैं। इसके बाद पुलिस ने उन्हें एक गार्ड मुहैया कराया।

कुणाल पांडे को मिली 1 माह की सुरक्षा

ऑपइंडिया ने जब कुणाल से संपर्क किया तो उन्होंने इस खत को लेकर जानकारी दी। साथ ही गार्ड मिलने की पुष्टि की। लेकिन इसी के साथ उन्होंने ये भी कहा, 

“मुझे गार्ड एक महीने के लिए दिया गया है। एक महीने बाद क्या होगा? कन्हैया लाल भी जब दुकान गए थे तब उनके ऊपर हमला हुआ। हमें चाहिए कि जिसने पत्र भेजा है वो पकड़ा जाए। गार्ड की जरूरत ही नहीं होगी।”

उन्होंने बताया, “पुलिस प्रशासन से शिकायत के बाद हमें पता चला कि जिस पोस्ट ऑफिस से धमकी भेजी गई वहाँ का सीसीटीवी ही खराब है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि तरह प्रशासन लोगों की सुरक्षा करने में नाकाम है।”

कुणाल बताते हैं कि भले ही इस तरह धमकी उन्हें पहली बार मिली। लेकिन कुछ समय पहले एबीवीपी के कार्यक्रम में कोई मुस्लिम व्यक्ति उनके बारे में पूछता हुआ उनके दोस्त तक पहुँच गया था। तब उन लोगों ने इस तरह संदिग्ध व्यक्ति द्वारा की जा रही पूछताछ पर ध्यान नहीं दिया, पर 12 जुलाई अचानक पत्र प्राप्त हुआ जिसके बाद परिवार में डर है।

कुणाल ने मीडिया से बात करते हुए ये भी कहा,

“अगर मुझे डराने की कोशिशें हो रही हैं तो मैं बस ये कहना चाहता हूँ कि मैं सामाजिक कार्यकर्ता हूँ, 365 दिन समाज के बीच में रहता हूँ। मैं डरने वाला व्यक्ति नहीं हूँ।”

उन्होंने बताया कि इरफान खान नाम के व्यक्ति ने धमकी भेजी है जिसने अपना पता माछीपुर का बताया है। वह कहते हैं,

“पूरे भारत को तय करना होगा कि कन्हैया लाल जो नुपूर शर्मा का समर्थन एक स्टेटस के माध्यम से करते हैं उनकी हत्या कर दी जाती है। आज मैंने कन्हैया का समर्थन किया तो उस कन्हैया के समर्थन में एक लेटर मिल जाता है। ये आज भारत को तय करना होगा कि ये देश शरीयत से चलेगा या फिर संविधान से चलेगा। आज पूरे भारत की भूमि पर भारत माता की जय और जय श्रीराम कहने पर हत्या कर दी जाती है। क्या यही संविधान है, क्या यही लोकतंत्र है। ”

पत्र में दी गई धमकी

गौरतलब है कि कुणाल ने ऑपइंडिया के साथ इस पत्र को साझा किया है। इसमें इरफान नाम के व्यक्ति ने उन्हें कहा है,

“कुणाल पांडे तुमने कन्हैया लाल का साथ देकर अपनी मौत को दावत दी है। तुम हमारी नजरों में काफिर हो काफिर। ये कोई पहली बार नहीं है। इससे पहले भी तुमने ज्ञानवापी मस्जिद पर बोलकर गलती की थी। हमने सुना है कि तुम और मसलों पर भी मशवरा देते हो और सोशल मीडिया पर इस्लाम के खिलाफ बोलते हो। तुम जो इस मुल्क को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हो… ये तुम्हारा सपना ही रह जाएगा। अगर यह मुल्क कुछ बनेगा तो वह हमारे अल्लाह का पैगाम है कि यह इस्लामी मुल्क बनेगा।”

धमकी के अगले पन्ने में लिखा है,

“अब तुम्हारी मौत बहुत नजदीक है। यह हमारे अल्लाह का फरमान है। तुम्हें बता दूँ कि कन्हैया को अल्लाह के पास हम लोगों ने ही भेजा है और अब अगले तुम हो। तुम्हार सिर भी तन से जुदा होगा। यह पन्ना आगाह करने के लिए हहै कि अल्लाह के पास जाने के बाद तुम्हें अफसोस न हो कि तुम्हारा कत्लेआम क्यों हुआ।”

पत्र के अंत में लिखा है- ‘तुम्हारी मौत, गजवा-ए-हिंद, खुदा हाफिज।’

यूपी में असम की तरह भयंकर बाढ़ लाने की साजिश, वसीम-जीशान सहित नहर काट रहे 6 पर केस: डूबने से बची सैकड़ों हेक्टेयर जमीन

उत्तर प्रदेश (UP) के लखीमपुर खीरी नहर की पटरी काटने की कोशिश करते पुलिस ने 6 आरोपितों पर केस दर्ज किया है। इन सभी के खिलाफ सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर ने पुलिस में शिकायत और सूचना दी है। आरोपितों के नाम रिकशान शाह, सिकंदर शाह, वसीम खां, सरदार अली, जीशान अली और मुद्दरिक अली हैं। इसमें से जीशान को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना 13 जुलाई 2022 (बुधवार) की है।

पुलिस को जूनियर इंजीनियर सत्येंद्र वर्मा द्वारा दी गई तहरीर के मुताबिक, “13 जुलाई को मैं अपनी टीम के साथ अपने क्षेत्र में नहर का निरीक्षण कर रहा था। इसी दौरान मैंने बनकागाँव के पटरी नंबर 96.588 पर रिकशान शाह, सिकंदर शाह, वसीम खां, सरदार अली, जीशान अली और मुद्दरिक अली को नहर की पटरी काटते हुए पाया। उसी समय मैंने डायल 112 से पुलिस को इस कृत्य के बारे में सूचित किया।”

शिकायत की कॉपी

खीरी के पसगंवा थाने में दी गई शिकायत में आगे बताया गया, “हमें देख कर आरोपित अपनी 2 बाइकें वहीं छोड़ कर भाग गए। बाइकों के नंबर UP31 A C2673 और DL 75 W 6802 हैं।” शिकायत में सत्येंद्र वर्मा ने सभी आरोपितों पर FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की माँग की। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर IPC की धारा 427 के साथ सार्वजानिक सम्पत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा 2/3 के तहत सभी 6 आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।

FIR कॉपी

मीडिया रिपोर्ट्स में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अखिलेश गौतम के हवाले से बताया गया कि घटना के समय जहाँ कटाई हो रही थी वहाँ नहर 2946 क्यूसेक डिस्चार्ज से बह रही थी। यदि पटरी कट जाती तो कम से कम 3 गाँवों की सैकड़ों हेक्टेयर जमीन पानी में डूब जाती। इस भूमि में खेती की जमीन, स्थानीय लोगों की आबादी और रेलवे लाइनें भी शामिल हैं।” अधिशासी अभियंता ने किसी और को भी ऐसा न करने की अपील की। उन्होंने ऐसा करने वाले सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए शिकायतकर्ता जूनियर इंजीनियर सत्येंद्र कुमार ने कहा, “मैं मौके पर पहुँच गया वर्ना अगर पटरी कटती तो काफी नुकसान हो जाता। बाकी सभी आरोपित हमें देख कर भाग गए पर मौके से जीशान नाम के व्यक्ति को पकड़ लिया गया।” ऑपइंडिया ने अब तक की हुई गिरफ्तारी और अन्य कानूनी कार्रवाई की जानकारी के लिए SHO पसगवां को फोन किया तो उनका फोन लगातार नॉट रिचेबल आया। पुलिस से जानकारी मिलने के बाद उसको खबर में अपडेट किया जाएगा।

पहले दिन ₹50 लाख को भी तरस गई तापसी पन्नू की ‘शाबाश मिठू’, बॉक्स ऑफिस पर धड़ाम से गिरी: खूब किया था प्रमोशन

लेडी सचिन के नाम से विख्यात भारत की पूर्व महिला क्रिकेटर मिताली राज के जीवन पर बनी ‘शाबाश मिठू’ बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से पिट गई है। तापसी पन्नू (Tapsee Pannu) फिल्म में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज का किरदार निभा रही हैं। हालाँकि, रिलीज के साथ ही ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पिट गई है। पहले दिन शुक्रवार को फिल्म ने केवल 50 लाख रुपए की कमाई की। कहीं-कहीं इसके कलेक्शंस मात्र 40 लाख रुपए भी बताया जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, तापसी की फिल्म ‘शाबाश मिठू’ एक ऐसे दक्षिण भारतीय परिवार की कहानी है, जिसमें एक बेटी अपने करियर को बनाने के लिए बगावत करती है। फिल्म की कहानी की शुरुआत 8 वर्षीय मिताली राज से होती है। वो भरतनाट्यम सीख रही होती हैं। लेकिन इसके साथ ही उन्हें क्रिकेट में भी रुचि होती है। उनकी के रुचि उन्हें क्रिकेटर बनने के लिए प्रेरित करती है।

इस फिल्म को मिताली राज की बायोपिक के तौर पर प्रमोट किया गया। लेकिन, बावजूद इसके फिल्म पिट गई। फिल्म में तापसी पन्नू के अलावा दूसरे दमदार एक्टर विजय राज ही रहे। उल्लेखनीय है कि 30 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस फिल्म को डायरेक्टर सृजित मुखर्जी ने बनाया है। लेकिन फिल्म को वो जिस तरीके से बनाना चाहते थे, उसमें वो सफल नहीं हो सके।

वहीं शाबाश मिथु को लेकर इंडिया टुडे को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा था कि वो इस फिल्म के लिए शाहरुख खान की चक दे इंडिया देखने के बाद प्रेरित हुईं थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें कई लोगों ने इस फिल्म को करने से पहले चक दे इंडिया देखने का सुझाव दिया था।

हालाँकि, शुक्रवार को ही रिलीज हुई राजकुमार राव की ‘हिट: द फर्स्ट केस’ने ‘शाबास मिथु’ को पटखनी देते हुए बॉक्स ऑफिस पर 1.40 करोड़ रुपए की कमाई की है। गौरतलब है कि तापसी पन्नू की कई सारी फिल्म लगातार ओटीटी पर रिलीज हुई हैं। ऐसे में उनके प्रशंसक संभवत: इसके ओटीटी पर रिलीज होने का इंतजार कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि शाबास मिठू से पहले क्रिकेट पर बनी ’83’ और ‘जर्सी’ जैसी फिल्में भी फ्लॉप ही रही हैं।

पत्नी के साथ भक्ति पिच पर विराट कोहली: चलते बल्ले से हिंदुओं को दिया था ‘ज्ञान’, फॉर्म गिरते ही भजन-कीर्तन

लगता है कि खराब फॉर्म से जूझते भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली को अब ‘भगवान’ का ही सहारा है। तभी वो अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ लंदन में भजन-कीर्तन के कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए पहुँचे। नवंबर 2019 के बाद से विराट कोहली ने क्रिकेट के किसी भी फॉर्मेट में कोई शतक नहीं लगाया है, लगभग पिछले ढाई साल से। मौजूदा इंग्लैंड दौरे में भी उनके बल्ले ने कोई कमाल नहीं दिखाया।

इस दौरे में उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा भी साथ में गई हैं। टीम इंडिया वहाँ फ़िलहाल तीन मैचों की वनडे श्रृंखला खेल रही है, जो एक-एक की बराबरी पर है। अमेरिकी गायक कृष्णा दास ने उस कार्यक्रम को आयोजित किया था, जिस भजन-कीर्तन में हिस्सा लेने विराट और अनुष्का पहुँचे। भक्ति गीतों के मशहूर गायक कृष्णा दास के एक प्रमुख शिष्य ने सेलेब्रिटी कपल के साथ तस्वीरें शेयर की, जिसके बाद सोशल मीडिया को इसका पता चला।

हनुमान दास द्वारा शेयर किए गए पोस्ट से पता चला है कि लंदन के यूनियन चापेल में ये कार्यक्रम 14-15 जुलाई को आयोजित किया गया था। बता दें कि फरवरी 2022 के बाद से विराट कोहली ने अंतरराष्ट्रीय मैचों में एक अर्धशतक तक नहीं लगाया है। उनका पिछले शतक भी नवंबर 2019 में एक कमजोर टीम बांग्लादेश के विरुद्ध आया था। जहाँ कई दिग्गजों ने उनकी आलोचना की है, तो कई उनकी वापसी की उम्मीद जता रहे हैं।

बता दें कि हिन्दुओं को ज्ञान देने के लिए विराट कोहली और अनुष्का शर्मा कई बार निशाने पर आ चुके हैं। हाल ही में वेंकटेश प्रसाद ने कहा था कि किसी भी प्लेयर के फॉर्म में ना होने पर वे उसे ड्रॉप नहीं करते हैं, बल्कि रेस्ट देते हैं। वेंकटेश ने पूर्व खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए बताया है कि कैसे इससे पहले उन्हें खराब फॉर्म के कारण टीम से बाहर किया गया था। इससे पहले कपिल देव ने विराट कोहली को टीम से बाहर न करने को लेकर आपत्ति जताते हुए कहा था कि जब रविचंद्रन अश्विन को टेस्ट के प्लेइंग 11 से बाहर किया जा सकता है तो विराट कोहली को क्यों नहीं?

भारत के खिलाफ जंग की तैयारी कर रहा PFI: कैडर से हथियार जमा करने को कहा, इस्लामी मुल्कों से मदद में भी जुटा

इस्लामी कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने भारत को 2047 तक इस्लामी मुल्क बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए हर मुस्लिम को PFI से जोड़ना, विरोध करने वालों की हत्या और हिंदू नेताओं की सूची तैयार करना शामिल है। इसके बाद जरूरी हुआ तो सरकार के सशस्त्र विद्रोह करने का रोडमैप तैयार किया गया है। पटना में छापेमारी के बाद PFI के ‘इंडिया विजन 2047’ में इस बात का स्पष्ट खुलासा किया गया है।

PFI ने डॉक्यूमेंट में इसे ‘पूर्ण एवं अंतिम शक्ति प्रदर्शन’ कहा है। उसने कहा कि जब अंतिम शक्ति प्रदर्शन की बारी आएगी, उस समय कई इस्लामी मुल्क उसे सहयोग देंगे और अंत में भारत इस्लाम के ध्वज के नीचे आ जाएगा।

पीएफआई अपने डॉक्यूमेंट में कहता है कि उसे ‘अंतिम शक्ति प्रदर्शन’ से पहले हिंदुओं और हिंदू नेताओं के बारे में विवरण रखना चाहिए। इसका मतलब है कि वह इन हिंदुओं और हिंदू नेताओं की हत्या के लिए जानकारी अपने साथ तैयार रखना चाहता है।

पुलिस द्वारा बरामद PFI के डॉक्यूमेंट में कहा गया है, “अंतिम प्रदर्शन के चरण से पहले हिंदू/आरएसएस नेताओं और उनके कार्यालयों के स्थानों के व्यक्तिगत विवरण के बारे में विस्तृत जानकारी एकत्र करना और तैयार रखना अनिवार्य है। विभिन्न स्तरों पर सूचना विंगों को अपने डेटा-बेस का फॉलोअप और अपडेट करते रहना चाहिए। उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने से हमें उनके खिलाफ कार्रवाई करने में भी मदद मिलेगी। हमारे अंतिम लक्ष्य के रोडमैप में सूचना विंग के महत्व को ध्यान में रखते हुए सभी स्तरों पर विंग के कामकाज को मजबूत और तेज करने की जरूरत है।”

पीएफआई अपने ‘विज़न डॉक्यूमेंट’ को यह कहकर समाप्त करता है कि भारत सरकार के साथ पूर्ण रूप से टकराव की स्थिति में उसे तुर्की जैसे ‘दोस्ताना इस्लामी राष्ट्रों’ से मदद की आवश्यकता होगी। PFI कहता है कि उसने तुर्की के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित किए हैं, जबकि अन्य इस्लामी राष्ट्रों तक भी पहुँचने की आवश्यकता है।

दस्तावेज में आगे कहा गया है, “सरकार के साथ पूर्ण शक्ति प्रदर्शन की स्थित में अपने प्रशिक्षित PE कैडरों पर भरोसा करने के अलावा हमें मित्र इस्लामिक देशों से मदद की आवश्यकता होगी। पिछले कुछ वर्षों में PFI ने इस्लाम के ध्वजवाहक तुर्की के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित किए हैं। कुछ अन्य इस्लामी मुल्कों के साथ विश्वसनीय दोस्ती बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।”

दस्तावेज में कहा गया है, “हमारे अच्छी तरह से प्रशिक्षित PE प्रशिक्षकों को कैडरों को हथियारों और विस्फोटकों का प्रशिक्षण देने के लिए राज्य-दर-राज्य भेजा जा रहा है। हमारे पास प्रशिक्षकों की कमी है और संभावित प्रशिक्षुओं की संख्या बहुत बड़ी है। इसके लिए साधन संपन्न उम्मीदवारों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें बेसिक PE कोर्स इंस्ट्रक्टर, सेकेंडरी PE कोर्स इंस्ट्रक्टर और PE मास्टर्स बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।”

डॉक्युमेंट में ST/SC/OBC को मिलाकर सत्ता पर कब्जा करना है। उसके बाद सेना, पुलिस, कार्यपालिका और न्यायपालिका में मुस्लिमों की भर्ती की जाएगी। डॉक्यूमेंट कहता है, “एक बार सत्ता में आने के बाद कार्यपालिका और न्यायपालिका के साथ-साथ पुलिस और सेना में सभी महत्वपूर्ण पदों को वफादार कार्यकर्ताओं से भरा जाएगा। सेना और पुलिस सहित सभी सरकारी विभागों के दरवाजे वफादार मुस्लिमों और एससी/एसटी/ओबीसी को भरने के लिए खोले जाएँगे, ताकि पिछली भर्ती में उनके साथ हुए अन्याय और असंतुलन को ठीक किया जा सके।”

दस्तावेज में आगे कहा गया है कि जिन लोगों को हथियारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा था, वे इस समय ‘खुलकर’ सामने आ जाएँगे और जो मुस्लिमों के हितों के विरुद्ध होंगे उन्हें रास्ते से हटा दिया जाएगा। डॉक्यूमेंट के अनुसार, “इस समय हमारे PE विभाग की कार्रवाई अधिक स्पष्ट हो जाएगी और इस स्तर पर कैडरों की संख्या में तेजी से वृद्धि होगी। जो हमारे हित के खिलाफ होंगे, उन्हें खत्म किया जाएगा। ये PE कैडर हमारे विरोधियों द्वारा सुरक्षा बलों पर प्रभाव के खिलाफ एक सुरक्षा कवच के रूप में भी काम करेंगे।”

अंतिम चरण में हथियारों के भंडार और सशस्त्र कैडरों को प्रशिक्षित करने के बाद एक इस्लामी संविधान की स्थापना करने और इसके रास्ते में बनने वाले लोगों (खासकर हिंदू) को खत्म करना होगा। डॉक्युमेंट कहता है, “जब हमारे पास पर्याप्त प्रशिक्षित कैडर और हथियारों का भंडार हो जाएगा तो हम इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित एक नए संविधान की घोषणा करेंगे। इस समय बाहरी ताकतें भी हमारी मदद के लिए आ जाएँगी। हमारे विरोधियों का व्यवस्थित और व्यापक रूप से सफाया होगा और इस्लामी गौरव की वापसी होगी।”

(बिहार के फुलवारी शरीफ में PFI के ट्रेनिंग सेंटर से बरामद ‘इंडिया विज़न 2047’ के बारे में विस्तार से जानने के लिए इस लिंक को क्लिक करें।)

‘तेरे खून के प्यासे बैठे हैं’: नूपुर शर्मा की तस्वीर अपलोड करने पर गुजरात के कारोबारी को हत्या की धमकी, महिला समेत 3 गिरफ्तार

पैगंबर मुहम्मद पर भाजपा से निलंबित नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के कथित बयान को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस्लामिक कट्टरपंथी हर उन व्यक्तियों को लगातार धमकियाँ दे रहे हैं, जो भी उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं या उनकी तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं। ताजा मामला गुजरात के सूरत शहर का है, जहाँ इंस्टाग्राम पर नूपुर शर्मा की तस्वीर शेयर करने पर एक युवा बिजनेसमैन को हत्या की धमकियाँ देने का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में उमरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

पीड़ित व्यापारी शहर में एक मनोरंजन पार्क का संचालन करता है। उसने पार्क के आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज पर नूपुर शर्मा की तस्वीर को अपलोड किया था। इसके बाद इस्लामिक कट्टरपंथी मानसिकता वाले सात लोगों ने उन्हें हत्या की धमकियाँ दी। पहले तो उन्होंने इन धमकियों को अनदेखा कर दिया, लेकिन जब ये एक सिलसिला बन गया तो बिजनेसमैन ने पुलिस में शिकायत की। केस दर्ज कर तीन को गिरफ्तार भी कर लिया गया है।

गिरफ्तार किए गए आरोपितों में मोहम्मद अयान अताशबाजीवाला, राशिद भूरा और आलिया मोहम्मद नाम की महिला भी शामिल है। ये सभी सूरत के ही रहने वाले हैं। इन सभी के खिलाफ इंडियन पीनल कोड की धारा 504 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान), 506 और 507 के तहत केस दर्ज किया गया है।

इन सब के अलावा धमकी देने वालों में मुना मलिक, शहजाद कटपीसवाला, फैजान और एक अन्य है। इन सभी ने बिजनेसमैन की पोस्ट पर धमकी देते हुए कहा था, “सूरत में रहना है या जाना है, फिलहाल क्लोज कर के निकल, तेरे खून के प्यासे बैठे हैं, कहीं वहाँ न आ जाएँ।”

शर्मा का समर्थन करने वालों को धमकियाँ

ये कोई पहली बार नहीं है जब नूपुर शर्मा का समर्थन करने वालों को हत्या की धमकियाँ दी गई हैं। इससे पहले हाल ही में अहमदाबाद के एक वकील ने केवल 3 मिनट के लिए अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर नूपुर शर्मा की तस्वीर लगाई थी। जिसके बाद उन्हें लगातार सिर तन से जुदा वाली धमकियाँ दी जाने लगी। बाद में उन्होंने पुलिस केस किया।

इसी तरह से राजस्थान में बाड़मेर से बीजेपी की आईटी सेल के संयोजक भूर सिंह राजपुरोहित को परिवार समेत खत्म करने की धमकियाँ दी गई थीं। उन्होंने जिहादी शब्द का इस्तेमाल किया था।

औरंगाबाद बना छत्रपति संभाजीनगर और उस्मानाबाद हुआ धाराशिव: महाराष्ट्र की शिंदे सरकार की कैबिनेट ने दी मंजूरी, अब केंद्र के पास जाएगा प्रस्ताव

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (CM Eknath Shinde) ने शनिवार (16 जुलाई 2022) को कहा कि औरंगाबाद (Aurangabad) का नाम छत्रपति संभाजीनगर (Chhatrapati Sambhaji Nagar) और उस्मानाबाद का नाम धाराशिव (Dhara Shiv) करने के लिए कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।

सीएम शिंदे ने कहा कि उनके पूर्ववर्ती उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी (MVA) की सरकार द्वारा इन दोनों शहरों का नाम बदलने का निर्णय अवैध था, क्योंकि सरकार अल्पमत में थी।

बता दें कि उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से पहले 29 जून 2022 को औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी महाराज के बड़े बेटे छत्रपति संभाजी के नाम पर ‘संभाजीनगर’ और उस्मानाबाद का नाम बदलकर धाराशिव करने को मंजूरी दी थी। इसके साथ ही नवी मुंबई एयरपोर्ट का नाम बदलकर डीबी पाटिल करने की मंजूरी दी थी।

जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के बागी गुट और भाजपा के गठबंधन वाली सरकार बनी तो मुख्यमंत्री शिंदे ने इस फैसले को अवैध बताया था और कहा था कि इस फैसले को वे फिर से मंजूर करेंगे। अब महाराष्ट्र सरकार ने इस फैसले को नए सिरे से लागू किया है।

प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “हम नाम परिवर्तन से संबंधित महाराष्ट्र विधानसभा में एक प्रस्ताव लाएँगे, जिसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।”

बता देें कि औरंगाबाद का नाम संभाजीनगर करने की माँग शिवसेना लंबे समय से करती आ रही थी। शिवसेना और उद्धव ठाकरे अक्सर औरंगाबाद को संभाजीनगर कहकर ही संबोधित किया करते थे।

उद्धव ठाकरे के इस फैसले का AIMIM नेता और सांसद इम्तियाज जलील ने विरोध किया था। उन्होंने इसके खिलाफ लड़ने के लिए सड़कों पर उतरने की चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा था कि किसी के दादाजी की इच्छा के लिए नाम नहीं बदला जाना चाहिए। औरंगाबाद का नाम ‘मेरे मृत्यु प्रमाण पत्र’ पर होना चाहिए।

उन्होंने कहा था, “औरंगाबाद शहर की पूरी दुनिया में एक ऐतिहासिक पहचान है। लेकिन उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व के मुद्दे को दिखाने और बालासाहेब ठाकरे द्वारा किए गए वादे को पूरा करने के लिए ही निर्णय लिया था।”