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‘इस्लामी मुल्क बनते ही भारत से हिंदुओं का सफाया’: इराक के यजीदियों की तरह नरसंहार का PFI का इरादा

‘कायर हिंदुओं’ को सबक सिखाने की बात करते हुए कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का 8 पन्नों वाला रोडमैप का दस्तावेज बिहार पुलिस ने बरामद किया है। इसमें भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के लिए चरणबद्ध तरीकों के बारे में बताया गया है।

इन्हीं चरणबद्ध तरीकों में एक है ST/SC/OBC को साथ लेकर देश में मुस्लिमों की सरकार बनाना और फिर सेना और कार्यपालिका में न्यायपालिका पर कब्जा करना। इसके बाद हिंदुओं को पूरी तरह सफाया करना उसका उद्देश्य है।

हमें आतंकी संगठन ISIS (इस्लामिक स्टेट) द्वारा इराक में अल्पसंख्यक समुदाय के यजीदियों के साथ किए गए नरसंहार को याद करना चाहिए। PFI का मंसूबा भी हिंदुओं के लिए यही है और उसने अपने डॉक्यूमेंट में इसका उल्लेख भी किया है।

PFI के डॉक्यूमेंट में कहा गया है, “जब हमारे पास पर्याप्त प्रशिक्षित कैडर और हथियारों का भंडार हो जाएगा तो हम इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित एक नए संविधान की घोषणा करेंगे। इस समय बाहरी ताकतें भी हमारी मदद के लिए आ जाएँगी। हमारे विरोधियों (यानी हिंदुओं) का व्यवस्थित और व्यापक रूप से सफाया होगा और इस्लामी गौरव की वापसी होगी।”

इस्लामी राष्ट्र की अपनी अवधारणा को अंजाम देने के लिए PFI बड़े पैमाने पर मुस्लिमों को हथियारों और विस्फोटों की ट्रेनिंग दे रहा है। उसके दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि भारत सरकार के फिट इंडिया और ‘स्वस्थ लोग स्वस्थ राष्ट्र’ अभियान का फायदा उठाकर वह जगह-जगह अपने ट्रेनिंग कैंप स्थापित कर रहा है और हथियारों का प्रशिक्षण दे रहा है।

बरामद दस्तावेज में कहा गया है कि भारत का शासक रहा मुस्लिम वर्ग अब दोयम दर्जे का नागरिक बन कर रह गया है। उसमें कहा गया है, “अंग्रेजों के समय में संपत्ति के अधिकार आदि के मामले में पहले मुस्लिमों को प्राप्त विशेषाधिकारों को वापस ले लिया गया था, सरकारी नौकरियों से वंचित कर दिया गया था और व्यापार सुविधाओं को प्रतिबंधित कर दिया गया था।”

उसके दस्तावेज में लिखा है, “दुनिया भारतीय मुस्लिमों को एक मॉडल के रूप में देखती है और भारतीय मुस्लिम समुदाय असहाय होकर किसी चमत्कार का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। अभी या बाद में नेतृत्व को समुदाय के भीतर से उभरना होगा।”

दस्तावेज़ में आगे कहा गया है, “हम उस 2047 का सपना देखते हैं, जिसमें राजनीतिक सत्ता मुस्लिम समुदाय के पास लौटकर आती है, जिसे ब्रिटिश राज ने अन्यायपूर्ण तरीके से छीन लिया था।”

दस्तावेज में कहा गया है, “अगर हम इस्लाम के इतिहास में देखें तो मुस्लिम हमेशा अल्पसंख्यक थे और जीत के लिए हमें बहुमत की आवश्यकता नहीं है। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) को विश्वास है कि अगर कुल मुस्लिम आबादी का 10% उसके साथ आता है तो भी PFI कायर बहुसंख्यक समुदाय को उसके घुटनों पर ला देगा और भारत में इस्लाम के वैभव को वापस ला देगा।”

PFI खुले तौर पर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने की अपील करता है। इसमें कहा गया है कि मुस्लिमों की कष्टों को बार-बार दोहराया और उन्हें याद दिलाया जाना चाहिए। इसके साथ ही हिंसा का इस्तेमाल ‘चुनिंदा विरोधियों’ (हिंदुओं) को आतंकित करने और उनकी सामूहिक ताकत को देखने के लिए किया जाना चाहिए।

पीएफआई ने अपने कैडरों से इस स्तर पर हथियार जमा करने के लिए कहा है। वह अपने डॉक्यूमेंट में कहता है, “PE विभाग (संभवत: हमलावर विभाग) को अपने सदस्यों को यूनीफॉर्म में मार्च करना चाहिए और जहाँ कहीं भी आवश्यक हो समुदाय की रक्षा के लिए उन्हें हमला करके अपनी ताकत का प्रदर्शन करना चाहिए।”

दस्तावेज में आगे कहा गया है, “जिन लोगों को हथियारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा था, वे इस बिंदु पर (केंद्र में सत्ता हासिल करने के बाद) और अधिक ‘खुलकर’ सामने आ जाएँगे और जो हमारे हित के खिलाफ हैं उन्हें खत्म किया जाएगा। ये PE कैडर हमारे विरोधियों द्वारा सुरक्षा बलों पर प्रभाव के खिलाफ एक सुरक्षा कवच के रूप में भी काम करेंगे।”

डॉक्यूमेंट में आगे कहा गया है, “जब हमारे पास पर्याप्त प्रशिक्षित कैडर और हथियारों का भंडार हो जाएगा तो हम इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित एक नए संविधान की घोषणा करेंगे। इस समय बाहरी ताकतें भी हमारी मदद के लिए आ जाएँगी। हमारे विरोधियों (यानी हिंदुओं) का व्यवस्थित और व्यापक रूप से सफाया होगा और इस्लामी गौरव की वापसी होगी।”

पीएफआई कहता है कि कैडरों को ‘अंतिम शक्ति प्रदर्शन’ यानी सरकार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह से पहले हिंदुओं और हिंदू नेताओं का डिटेल अपने पास रखना चाहिए। PFI के डॉक्यूमेंट में कहा गया है, “अंतिम प्रदर्शन के चरण से पहले हिंदू/आरएसएस नेताओं और उनके कार्यालयों के स्थानों के व्यक्तिगत विवरण के बारे में विस्तृत जानकारी एकत्र करना और तैयार रखना अनिवार्य है।”

उसके डॉक्यूमेंट में आगे कहा गया है, “विभिन्न स्तरों पर सूचना विंगों को अपने डेटा-बेस का फॉलोअप और अपडेट करते रहना चाहिए। हिंदू नेताओं की गतिविधियों पर नज़र रखने से हमें उनके खिलाफ कार्रवाई करने में भी मदद मिलेगी। हमारे अंतिम लक्ष्य के रोडमैप में सूचना विंग के महत्व को ध्यान में रखते हुए सभी स्तरों पर विंग के कामकाज को मजबूत और तेज करने की जरूरत है।”

(बिहार के फुलवारी शरीफ में PFI के ट्रेनिंग सेंटर से बरामद ‘इंडिया विज़न 2047’ के बारे में विस्तार से जानने के लिए इस लिंक को क्लिक करें।)

पटना आतंकी केस में तीसरा आरोपित मारगुव अहमद दानिश गिरफ्तार, ‘गजवा-ए-हिन्द’ से है जुड़ाव, भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की थी साजिश

देश को तोड़ने वाली गतिविधियों में शामिल होने के मामले में 2 आरोपितों को गिरफ्तार किए जाने के बाद शुक्रवार (15 जुलाई 2022) को बिहार पुलिस ने खुलासा किया कि बिहार आतंकी मॉड्यूल मामले में पटना में एक और आरोपित मारगुव अहमद दानिश उर्फ ​​ताहिर को गिरफ्तार किया गया था। पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मानवजीत सिंह ढिल्लों ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि आरोपित फुलवारीशरीफ का रहने वाला है और गजवा-ए-हिंद समूह से जुड़ा था।

एसएसपी एमएस ढिल्लों के मुताबिक, ताहिर ने 2006 से 2020 तक दुबई में काम किया था। उन्होंने कहा, “हमने फोन नंबर को इंटरसेप्ट किया तो उसमें राष्ट्र विरोधी कंटेंट पाए गए। गिरफ्तार व्यक्ति ने 2 व्हाट्सएप ग्रुप बनाए थे। इनमें से एक पाकिस्तान से बनाया गया था और उसे इसका एडमिन बनाया गया था। इसमें खाड़ी देशों के कई लोग थे। दूसरा ग्रुप इसी साल जनवरी में बनाया गया था, जिसमें बांग्लादेशी लोग थे।”

मामले को लेकर आगे जानकारी देते हुए एसएसपी ने कहा कि ये व्हाट्सएप ग्रुप कश्मीर से संबंधित आतंकवाद समर्थक पोस्ट के साथ-साथ राष्ट्र विरोधी कंटेंट को बाँट रहे थे। ढिल्लों का कहना था, “उनकी 2023 में सीधे जिहाद में शामिल होने की योजना थी।” पुलिस अधिकारी ने कहा कि कल पुलिस ने एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया, जिसने 12 जुलाई को पीएम मोदी के दोरे के वक्त हमले की योजना बनाई थी।

एएनआई के ट्विटर का स्क्रीनशॉट

पुलिस ने मोहम्मद जलालुद्दीन और अतहर परवेज नाम के आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इन लोगों ने मंगलवार को पटना में पीएम मोदी के कार्यक्रम में हिंसा फैलाने के लिए लगभग 26 लोगों को प्रशिक्षित किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 11 जुलाई को जिस टेरर मॉड्यूल का खुलासा किया था, उसमें शामिल दोनों आऱोपितों में से एक झारखंड का पूर्व पुलिस अधिकारी है। जबकि अतहर परवेज है सिमी का सदस्य रह चुका है और फिलहाल पीएफआई और उसकी राजनीतिक शाखा एसडीपीआई का सदस्य है।

रिपोर्टों में उल्लेख किया गया है कि दो आरोपी मोहम्मद जलालुद्दीन और अतहर परवेज ने लगभग 26 लोगों को आतंकी मिशन के लिए प्रशिक्षित किया था और उन्हें बंदूकें, तलवार और चाकू का इस्तेमाल करना सिखाया था। बिहार पुलिस ने जाँच के दौरान यह भी पाया कि परवेज कई विदेशी संगठनों के सदस्यों के साथ लगातार संपर्क में था और भारत को तोड़ने वाली गतिविधियों को चलाने के लिए फंडिंग की माँग कर रहा था। पीएम मोदी के दौरे से 15 दिन पहले फुलवारी शरीफ में संदिग्ध आतंकी ट्रेनिंग भी शुरू हो गई थी। मामले में 26 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

दरअसल, 11 जुलाई को पीएफआई के खिलाफ कार्रवाई के दौरान भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के लिए ‘इंडिया विजन 2047’ नाम के दस्तावेज तैयार किए गए थे। इसे छापे के दौरान बिहार पुलिस ने 11 जुलाई को बरामद किया था। इसमें डरपोक बहसंख्यक समुदाय (हिन्दू) को काबू में करने और अपने गौरव को फिर से पास करने की बात कही गई है। पुलिस के अनुसार, इन आपत्तिजनक दस्तावेजों में ‘भारत में इस्लाम के शासन’ के बारे में बात की गई है। कुमार ने ‘इंडिया विजन 2047’ नामक आठ पेज के लंबे पेपर के एक अंश का हवाला देते हुए कहा, “पीएफआई को यकीन है कि भले ही पूरी मुस्लिम आबादी का 10% इसके पीछे इकट्ठा हो जाए पीएफआई डरपोक बहुसंख्यक समुदाय पर जीत हासिल कर अपने गौरव को वापस लेगा।”

गौरतलब है कि पटना में भारत विरोधी गतिविधियों की योजना बनाने के आरोप में पुलिस ने अब तक मोहम्मद जलालुद्दीन, अतहर परवेज और मारगुव अहमद दानिश उर्फ ​​ताहिर नाम के तीन इस्लामवादियों को गिरफ्तार किया है। हालाँकि 26 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए व्यापक छापेमारी शुरू कर दी है।

सावन के महीने में ज्ञानवापी में मिले ‘शिवलिंग’ की पूजा का मिले अधिकार: सुप्रीम कोर्ट में हिन्दू पक्ष ने दाखिल की याचिका

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर वजूखाने में मिले शिवलिंग की पूजा-अर्चना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इसमें कोर्ट से शिवलिंग की पूजा करने की अनुमति माँगी गई है। हिन्दुओं की ओर से ये याचिका श्री कृष्ण जन्म भूमि मुक्ति स्थल के अध्यक्ष राजेश मणि त्रिपाठी ने दायर की थी।

याचिका में त्रिपाठी ने कहा है कि सावन का पवित्र महीना शुरू हो रहा है और हिन्दुओं को पूजा करने और अपने अधिकार का प्रयोग करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

याचिका में कहा गया है, “याचिकाकर्ता को भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदान किए गए हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार अपनी धार्मिक प्रथाओं और अनुष्ठानों का प्रचार करने का अधिकार है और यह एक तथ्य है कि श्रावण का महीना शुरू हो रहा है, जिसमें भगवान शिव की पूजा की जाती है। इसलिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत गारंटी के रूप में श्रावण के महीने में पूजा करने, ‘अंतरात्मा की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पेशे, धर्म के अभ्यास और प्रचार’ के अधिकारों का प्रयोग करने की अनुमति माँगी है।”

याचिका में राजेश मणि त्रिपाठी ने कहा है कि 16 मई को सर्वे का काम पूरा हुआ और 19 मई को कोर्ट में रिपोर्ट पेश की गई। सर्वे में सामने आया था कि ज्ञानवापी के अंदर शिवलिंग मिला है। अब हम उसकी पूजा-अर्चना करना चाहते हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट अपने शिष्यों समेत शिवलिंग की पूजा करने की इजाजत माँगी है।

गौरतलब है कि काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी परिसर में स्थित माँ श्रृंगार गौरी और अन्य देव विग्रहों की पूजा अर्चना के मामले में मंगलवार (26 अप्रैल, 2022) को सीनियर डिवीजन के सिविल जज रवि कुमार ने फैसला सुनाया था। उन्होंने कहा था कि इस बार ईद के बाद 10 मई से पहले एडवोकेट कमिश्नर से मौके का मुआयना करा वहाँ की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। इसके बाद 6 और 7 मई को विवादित ढाँचे की वीडियोग्राफी कराई गई।

‘यासीन मलिक ने किया था मेरा अपहरण’: महबूबा मुफ्ती की बहन रूबैया सईद ने कोर्ट में की अपने 4 अपहरणकर्ताओं की पहचान

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) की बहन रुबैया सईद ने आतंकवादी यासीन मलिक (Yasin Malik) को साल 1989 में उनका अपहरण करने वाले अपराधियों में से एक के रूप में की है। रूबैया सईद ने शुक्रवार (15 जुलाई 2022) को जम्मू की टाडा अदालत (TADA Court) में मामले से जुड़े चार लोगों की पहचान की, जिसमें मलिक भी शामिल है।

रुबैया सईद मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी हैं। जिस समय रूबैया का अपहरण हुआ था, उस समय मुफ्ती मोहम्मद सईद केंद्रीय गृहमंत्री थे। तब रूबैया को सईद को छुड़ाने के लिए खूँखार आतंकियों को रिहा करने का उन्होंने निर्णय लिया था।

सुनवाई में भाग लेने वाले वकीलों ने पुष्टि की कि सईद ने अदालत में अपना बयान दर्ज कराया। इस दौरान उन्होंने सीबीआई द्वारा जाँच के दौरान उन्हें उपलब्ध कराई गई तस्वीरों के आधार पर सभी की पहचान की।

सीबीआई की वकील मोनिका कोहली ने बताया कि रुबैया ने यासीन मलिक और तीन अन्य की पहचान कर ली है और सुनवाई की अगली तारीख 23 अगस्त तय की गई है।

इस मामले को लेकर पीडीपी के प्रवक्ता और वकील अनिल सेठी ने कहा, “उन्होंने (रुबैया ने) यासीन मलिक की पहचान कर ली है। उन्होंने सभी अपहरणकर्ताओं की पहचान कर ली है। हाँ, मैं ज्यादा नहीं बता सकता, क्योंकि कार्यवाही जारी है। अगली सुनवाई 23 को है। यासीन मलिक की उपलब्धता के आधार पर उसे उपस्थित रहने के लिए कहा गया है। वह (रुबैया) सीबीआई को पहले दिए गए अपने बयान पर कायम हैं।”

जनवरी 2021 में टाडा अदालत ने अपहरण के मामले में यासीन मलिक और नौ अन्य के खिलाफ अपराध के 30 साल बाद आरोप तय करने का आदेश दिया था। रुबैया सईद को टाडा अदालत ने अपने ही अपहरण मामले में बयान दर्ज कराने के लिए तलब किया था। आतंकी फंडिंग मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे यासीन मलिक को भी कोर्ट ने तलब किया था।

आतंकी यासीन मलिक बुधवार (13 जुलाई 2022) को को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के लिए पेश हुआ। सुनवाई के दौरान उसने कोर्ट से अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का अनुरोध किया था। टाडा कोर्ट उसके खिलाफ दो मामलों की सुनवाई कर रहा है- रुबैया अपहरण का मामला और भारतीय वायु सेना के चार अधिकारियों की हत्या का मामला।

रुबैया सईद का 8 दिसंबर 1989 को जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) ने अपहरण कर लिया था। उस समय जेकेएलएफ का नेतृत्व यासीन मलिक कर रहा था। जेकेएलएफ ने अपने पाँच सदस्यों को जेल से रिहा कराने की माँग को लेकर बंदूक की नोक पर रूबैया का अपहरण कर लिया था। 23 वर्षीया रुबैया उस समय लाल डेड मेमोरियल महिला अस्पताल में बतौर मेडिकल इंटर्न कार्यरत थीं।

एक विवादास्पद फैसले में फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर सरकार ने उस समय माँगों को मान लिया था और जेल में बंद आतंकवादियों को रिहा कर दिया था। वहीं, मुफ्ती मोहम्मद सईद की दूसरी बेटी महबूबा मुफ्ती सक्रिय राजनीति में शामिल हो गईं और जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री बनीं। रुबैया सईद 13 दिसंबर 1989 को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से रिहा होने के बाद सुर्खियों से दूर हो गई थीं।

अपहरण और उसके बाद सरकार द्वारा पाँच आतंकवादियों की रिहाई कश्मीर में हिंसा के इतिहास की एक ऐतिहासिक घटना थी, क्योंकि इसने क्षेत्र में आतंक में वृद्धि और अलगाववादियों के लिए मंच तैयार किया था। कई लोगों का मानना ​​है कि अगर सरकार सख्त कार्रवाई करती तो राज्य में आतंकवाद इतना नहीं पनपता। उल्लेखनीय है कि फारूक अब्दुल्ला ने दावा किया था कि केंद्रीय गृह मंत्री की बेटी के बदले जेल में बंद आतंकवादियों को रिहा नहीं करने पर केंद्र सरकार ने उन्हें बर्खास्त करने की धमकी दी थी।

ट्रैफिक पुलिस के जवान को बुर्के वाली महिला ने पीटा, शौहर सोहैल के साथ बीच सड़क हंगामा, इंदौर का वीडियो वायरल: थाने में हाथ जोड़े आए नजर

मध्य प्रदेश (MP) के इंदौर में ट्रैफिक पुलिसकर्मी के साथ उलझते हुए एक बुर्के वाली महिला का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में एक अन्य युवक भी महिला के साथ पुलिसकर्मी से उलझता दिखाई दे रहा है। आरोपित युवक का नाम सोहैल है और बुर्के वाली महिला उसकी पत्नी। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना गुरुवार (14 जुलाई 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना के दिन शाम लगभग 6:30 पर आरोपित सोहैल अपनी पत्नी के साथ बाइक से भमौरी क्षेत्र में कहीं जा रहा था। उस दौरान उसी क्षेत्र में ट्रैफिक पुलिस स्टाफ रंजीत सिंह अपनी ड्यूटी कर रहे थे। उन्होंने रांग साइड से आ रहे सोहैल और उनकी पत्नी को रोका तो वो दोनों पुलिसकर्मी से हाथापाई पर उतारू हो गए।

बुर्के में दिखाई दे रही सोहैल की पत्नी बार-बार पुलिसकर्मी रंजीत को मारने दौड़ रही थी जिसका कुछ लोग बीच-बचाव कर रहे थे। महिला बार-बार रंजीत सिंह के गिरेबान को पकड़ने की कोशिश कर रही थी। वो तमाम अपशब्दों का प्रयोग भी कर रही थी। इस हाथापाई के चलते आस-पास भीड़ जमा हो गई थी। इसी दौरान आस-पास से किसी ने ये वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर वायरल का दिया।

वीडियो जब पुलिस के शीर्ष अधिकारियों के संज्ञान में आई तब उन्होंने दोनों आरोपितों के खिलाफ विजय नगर थाने में केस दर्ज करने के आदेश दिए। इंदौर के ट्रैफिक DCP बंसत कोल ने इस घटना और कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आरोपित इंदौर के रानीपुरा क्षेत्र के साउथ तोडा के रहने वाले हैं। आरोपित सोहैल की उम्र लगभग 27 साल है जिस पर पहले से ही 3 केस दर्ज हैं।

पुलिस हिरासत में सोहैल (चित्र साभार- दैनिक भास्कर)

बताया जा रहा है कि दोनों को लगा कि वो पुलिसकर्मी से बदतमीजी कर के आराम से भाग निकलेंगे लेकिन आख़िरकार पुलिस ने उन दोनों को खोज ही निकाला। पुलिस की हिरासत में आते ही दोनों का बर्ताव बदल गया। थाने में सोहैल की हाथ जोड़ते फोटो सामने आई है जबकि उनकी बीवी के भी व्यवहार में काफी बदलाव देखा गया।

आदिवासी युवक के गुप्तांग में डाला पेट्रोल, सद्दाम, आदिल सहित 4 ने बेरहमी से पिटाई के बाद घटना को दिया अंजाम: इंदौर प्रशासन को NCST का नोटिस, माँगी रिपोर्ट

मध्य प्रदेश के इंदौर (Indore, Madhya Pradesh) के आदिवासी युवक पंकज को 4 मुस्लिम युवकों द्वारा बाँध कर मारने और उसके गुप्तांग में पेट्रोल डालने के प्रकरण में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने इंदौर के DM और कमिश्नर को नोटिस देते हुए इस मामले में अब तक हुई कार्रवाई की पूरी जानकारी 3 दिनों के अंदर भेजने के लिए कहा है। आयोग ने यह नोटिस 14 जुलाई 2022 (गुरुवार) को जारी की है।

नोटिस भेजने के लिए अनुसूचित जनजाति आयोग ने दैनिक भास्कर की रिपोर्ट का हवाला दिया है। इस नोटिस में जारी निर्देश के अनुसार, “प्रेस क्लिपिंग का आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। अब आयोग अपने स्तर से इस मामले की जाँच करवाएगा। 3 दिनों के अंदर आरोपितों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट हमें प्रस्तुत करें।” इस रिपोर्ट में आरोपितों पर कार्रवाई के साथ पीड़ित को आर्थिक सहायता और अन्य सहूलियतों पर भी जानकारी माँगी गई है।

नोटिस

FIR में IPC की धारा 307 जोड़ने और NSA लगाने की माँग

पंकज की निर्ममता से हुई पिटाई और उनके साथ हुए अमानवीय अत्याचारों के खिलाफ हिन्दू संगठनों ने राज्य के कई हिस्सों में प्रदर्शन किया है। हिन्दू संगठन आरोपितों के खिलाफ दर्ज FIR में धारा 307 बढ़ाने के साथ सभी आरोपितों पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला

बकरीद के दिन 9 जुलाई 2022 को नाज़िम अपने किराएदार पंकज को बकरा खरीदने के बहाने बाजार ले गया। उसके साथ आदिल भी था। ये लोग एक मकान में गए, जहाँ सद्दाम और सलमान पहले से मौजूद थे।

इसके बाद उन लोगों ने पंकज को बेरहमी से पीटा और उसके गुप्तांग में पेट्रोल डाल दिया था। इस दौरान इन सभी ने आदिवासियों को चोर जैसे आपत्तिजनक शब्द बोले थे। इसके बाद इन्होंने किसी को न बताने की धमकी देकर पंकज को छोड़ दिया था।

इन सभी ने नाज़िम के बेटे का से 50 हजार रुपए लेकर अपने लिए लैपटॉप खरीदने का आरोप लगाया था। दरअसल, कुछ दिन पहले नाजिम का बेटा घर से 50 हजार रुपए लेकर गायब हो गया था। उसके कुछ दिन बाद पंकज ने लैपटॉप खरीदा था। इन लोगों ने आरोप लगाया था कि उसी पैसे से पंकज ने लैपटॉप खरीदा है।

बाद में पंकज ने अपने साथ हुई घटना की जानकारी अपने मित्रों और अपनी बहनों को दी। उन सभी ने पंकज को ले जाकर थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने सभी 4 आरोपितों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।

जम्मू में एक और हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़… महादेव की मूर्ति के हाथों और पैरों को किया क्षतिग्रस्त… हिन्दू संगठनों का प्रशासन को अल्टीमेटम

जम्मू-कश्मीर के डोडा (Doda, Jammu-Kashmir) क्षेत्र के एक और हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़ की गई है। यह मंदिर महादेव का है, जिसे स्थानीय लोग ‘छोटा मणि महेश’ के नाम से जानते हैं। घटना से नाराज लोगों ने प्रशासन से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। बताया जा रहा है कि ये घटना 14-15 जुलाई की रात की है। पुलिस ने FIR दर्ज कर अज्ञात आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मरमट क्षेत्र की है। तोड़ा गया मंदिर सड़क से लगभग 10 किलोमीटर अंदर है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फोटो में भगवान शिव की मूर्ति को खंडित करने का प्रयास किया गया है। मूर्ति के हाथों और पैरों को तोड़ा गया है। मंदिर में अन्य सामान बिखरे दिखाई दिए।

घटना के विरोध में हिन्दू संगठनों ने प्रदर्शन किया और उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा और केंद्र सरकार के पुतले जलाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा, “2-3 महीनों के ही अंदर 8 से ज्यादा मंदिर जम्मू-कश्मीर के अंदर तोड़े गए। सभी को पता है कि ये मंदिर हमारे आस्था के केंद्र बिंदु हैं। अभी तक किसी भी मंदिर तोड़ने वाले को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है। हिन्दुओं में आक्रोश है। केंद्र शासित सरकार हमें उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर न करे। अगर मंदिर तोड़ने वालों की गिरफ्तारियाँ नहीं हुईं तो प्रदर्शन उप-राज्यपाल भवन पर होगा।”

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में जम्मू के कई मंदिरों में मूर्तियों को तोड़ने के मामले सामने आए हैं। इसी माह 8 अप्रैल में सिद्धड़़ा क्षेत्र में आने वाले लक्ष्मी नारायण मंदिर की मूर्तियों को नुकसान पहुँचाया गया था। 5 मई 2022 में डोडा के ही वासुकी मंदिर में तोडफोड़ की गई थी। इस घटना के विरोध में हिन्दू संगठनों ने उग्र प्रदर्शन किया था तब प्रशासन ने आरोपितों को जल्द से जल्द पकड़ने का भरोसा दिया था।

इसी 11 जुलाई को जम्मू के कठुआ में एक हनुमान मंदिर में तोड़फोड़ की थी। इस घटना की जाँच के लिए पुलिस ने SIT का भी गठन किया था। हिन्दू संगठनों का आरोप है कि उपरोक्त मामलों में अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी पुलिस नहीं कर पाई है और यदि यही घटना किसी और वर्ग से जुड़ी होती तो अब तक प्रशासन सक्रिय होता।

‘पंडित तू मंदिर छोड़ दे, नहीं तो तेरा सिर काट देंगे’: अब भरतपुर में हनुमान मंदिर के पुजारी को मिली कन्हैयालाल की तरह हत्या करने की धमकी

राजस्थान के उदयपुर में हिन्दू टेलर की बेरहमी से की गई हत्या का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब भरतपुर में ‘सिर तन से जुदा’ वाली धमकी सामने आई है। ताजा मामले में महारानी श्री जया कॉलेज कैम्पस के अंदर स्थित भगवान हनुमान जी के मंदिर के पुजारी को ये धमकी दी गई है। मंदिर के पुजारी का नाम ताराचंद शर्मा है। उन्हें इसी साल अप्रैल में पुजारी का पद दिया गया था।

मंदिर के पुजारी को मंदिर छोड़ने की धमकी देते हुए कहा गया है कि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो 10 दिन के अंदर उदयपुर के कन्हैयालाल की तरह ही उनके सिर को भी धड़ से अलग कर दिया जाएगा। इस घटना के बाद पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है। वहीं पुजारी की सुरक्षा के लिए दो पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है।

क्या लिखा है पत्र में

हाथों से लिखे गए इस पत्र में धमकी दी गई है, “पंडित या तो तू मंदिर छोड़ दे, नहीं तो तेरा सिर काट देंगे, तेरे घरवालों को तेरा सिर नहीं मिलेगा, तू समझता है कि तेरे हिमायती हैं, वे कुछ नहीं कर पाएँगे, तेरा मरना निश्चित है। तेरा बाप तेरी पत्नी जब धड़ के पास बैठ कर रोएगी, तेरा मुँह भी नहीं देख पाएगी और रात में नहीं मारेंगे न सुबह मारेंगे, तुझे दिन में मंदिर में या रास्ते में मारेंगे। अगर जीना चाहता है तो मंदिर छोड़ दे। तेरे लिए 10 दिन का टाइम है। नहीं तो तेरी मौत निश्चित है। जैसे उदयपुर में कन्हैया के साथ हुआ है, वैसा ही तेरे साथ होगा। हम तेरा नाम नहीं जानते हैं पर तेरा चेहरा देख लिया है।” धमकी भरे इस पत्र में प्रेषक के तौर पर ‘कामा पहाड़ी’ नाम लिखा गया है।

इस घटना के बाद हिन्दू संगठनों में आक्रोश है। ABVP से जुड़े छात्रों ने इस धमकी के विरोध में प्रदर्शन भी किया। वहीं इस घटना की जाँच में मथुरा गेट पुलिस जुट गई है। इस घटना को लेकर एएसपी चंद्रप्रकाश दीक्षित ने कहा है कि रात में गश्त पर निकली टीम ने इस बात की सूचना दी थी कि कोई मंदिर के पुजारी को धमकी भरा लेटर दे गया है। मंदिर और पुजारी को लेकर विवाद चल रहा है, जिसे देखते हुए नए पुजारी को रखा गया है।

कन्हैयालाल मर्डर केस

मंदिर के पुजारी को कन्हैयालाल की तरह हत्या की धमकी दी गई है। गौरतलब है कि पैगंबर मुहम्मद पर कथित टिप्पणी करने के मामले में नूपुर शर्मा के बयान का सोशल मीडिया पर समर्थन करने पर उदयपुर में हिन्दू दर्जी कन्हैयालाल की मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने सिर काटकर हत्या कर दी थी। इसी तरह की धमकी कुछ दिन पहले भरतपुर में दो अन्य लोगों को भी दी गई थी।

‘बलूच बच्चियों को नंगा कर करते हैं टॉर्चर, लड़कियों के शरीर में मशीन से ड्रिल’: पाकिस्तानी फौज के ‘रेप हाउस’ से नायला कादरी ने उठाया पर्दा

पाकिस्तान से बलूचों की आजादी की संघर्ष काफी पुराना है। पाकिस्तानी फौजें इस इलाके में किस तरह मानवाधिकारों का दमन करती है, यह भी छिपी नहीं है। पाकिस्तनी फौज के अत्याचारों का जिक्र करते हुए डॉ. नायला कादरी (Dr. Naela Quadri Baloch) ने कहा है कि जो हालात हैं उसमें बलूचों के लिए जीना कठिन, जबकि मौत आसान लगती है।

नायला कादरी विश्व बलोच महिला संघ की अध्यक्ष और बलोच निर्वासित सरकार की प्रधानमंत्री हैं। 2012 में निर्वासित होने के बाद से उन्होंने कनाडा में शरण ले रखी है। इस समय वे बलूचिस्तान की आजादी के लिए समर्थन जुटाने को भारत दौरे पर हैं। इसी क्रम में वे शुक्रवार (15 जुलाई 2022) को राजस्थान की राजधानी जयपुर पहुँचीं।

दैनिक भास्कर को पाकिस्तानी फौज की प्रताड़नाओं के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “इस वक्त पाकिस्तान बलोच के साथ जो कर रहा है, उससे किसी की भी रूह काँप जाएगी। वहाँ लड़कियों की बॉडी को मशीन से ड्रिल किया जा रहा है।” नायला कादरी ने बताया कि पाकिस्तानी फौज ने रेप हाउस बना रखे हैं। जहाँ बलूचों की छोटी-छोटी बच्चियों को नंगा कर टॉर्चर किया जाता है।

उन्होंने बताया, “मुझे बलूचिस्तान की आजादी सबसे प्यारी है। आजादी की जंग में हमारे 2 लाख से ज्यादा बलूच युवा और महिलाएँ, बच्चे, बूढ़े शहीद हो चुके हैं। पिछले 15 सालों में पाकिस्तान और चीन की सेना ने बलूचिस्तान में लगभग 55 हजार से ज्यादा लोगों को गायब कर दिया है। इनमें 90 साल के बूढ़े से लेकर 7 दिन की बच्ची तक शामिल हैं। महिलाओं की हालत बद से बदतर है। वहाँ ना तो जिंदगी है और ना ही इज्जत। महिलाओं, बच्चियों को घरों से उठाकर ले जाते हैं। कोई पूछने वाला नहीं है। हम चाहते हैं हिन्दुस्तान की जनता बलूच के साथ जुड़कर आजादी के संघर्ष में हर लेवल पर हमारा साथ दे।”

बता दें कि इससे पहले डॉ. नायला कादरी उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा पहुँची थीं। वहाँ उन्होंने मीडिया से कहा था, “अगर भारत, बांग्लादेश, भूटान को अमन, चैन, शांति चाहिए तो बलूचिस्तान को आतंकवाद से आजाद कराना होगा। आतंकवाद की फैक्ट्री पाकिस्तान को खत्म करना होगा।”

‘चरित्र पर शक करना, दूसरों के सामने जलील करना, महिला सहकर्मियों से जोड़कर लांछन लगाना पति के प्रति क्रूरता’: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाई कोर्ट (Madras High Court) ने एक मामले की सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की है। हाई कोर्ट ने कहा कि अलग रह रही पत्नी द्वारा ‘थाली’ (मंगलसूत्र) को हटाया जाना पति के लिए मानसिक क्रूरता समझा जाएगा। साथ ही उन्होंने चरित्र पर शक, महिला सहकर्मियों के साथ पति को जोड़कर लांछन लगाने को भी पति के प्रति क्रूरता की श्रेणी में रखा। न्यायमूर्ति वी. एम. वेलुमणि और न्यायमूर्ति एस. सौंथर की एक खंडपीठ ने इरोड के एक मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर सी. शिवकुमार की अपील पर यह टिप्पणी करते हुए उनकी तलाक की अर्जी को स्वीकृति दे दी।

प्रोफेसर सी. शिवकुमार ने अपील में स्थानीय परिवार न्यायालय (Local Family Court) के 15 जून, 2016 के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया था, जिसमें तलाक देने से इनकार कर दिया गया था।

महिला ने स्पष्ट किया कि उसने केवल मंगलसूत्र की चेन हटाई थी। मंगलसूत्र को अभी भी अपने पास रखा हुआ है। इसे हटाने की खास वजह थी। वहीं महिला के वकील ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-7 का हवाला देते हुए कहा कि मंगलसूत्र (Mangalsutra) पहनना आवश्यक नहीं है। इसलिए पत्नी द्वारा इसे हटाने से वैवाहिक संबंधों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालाँकि, सुनवाई कर रही पीठ ने कहा कि यह सामान्य समझ की बात है कि दुनिया के इस हिस्से में होने वाले विवाह समारोहों में मंगलसूत्र बाँधना एक आवश्यक अनुष्ठान है।

अदालत ने हाई कोर्ट की एक खंडपीठ के आदेशों का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि रिकॉर्ड में उपलब्ध सामग्री से यह भी देखा जाता है कि याचिकाकर्ता ने थाली (मंगलसूत्र) को हटा दिया है और यह बात उसने स्वीकार की है कि उसने उसे बैंक लॉकर में रखा था। यह एक ज्ञात तथ्य है कि कोई भी हिंदू विवाहित महिला अपने पति के जीवित रहते हुए खुद से मंगलसूत्र नहीं हटाएगी।

बेंच ने आगे कहा कि एक महिला के गले में मंगलसूत्र एक पवित्र चीज है, जो उसके सुहागन होने का प्रतीक है और इसे पति की मृत्यु के बाद ही हटाया जाता है। इसलिए, याचिकाकर्ता/पत्नी द्वारा मंगलसूत्र हटाना का कृत्य पति के लिए मानसिक क्रूरता को दर्शाता है, क्योंकि इससे प्रतिवादी की पीड़ा और भावनाओं को ठेस पहुँच सकती है।

इसके अलावा, पीठ ने कहा कि महिला ने सहकर्मियों, छात्रों की मौजूदगी में और पुलिस के सामने भी अपने पति के खिलाफ अपनी महिला सहयोगियों के साथ विवाहेतर संबंधों के आरोप लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्णयों के आलोक में, न्यायाधीशों ने कहा कि उन्हें यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि पत्नी ने पति के चरित्र पर संदेह करके और दूसरों की उपस्थिति में विवाहेतर संबंध के झूठे आरोप लगाकर मानसिक क्रूरता की है।

वहीं जजों ने फैसला सुनाते हुए यह भी कहा, “सबूतों के आधार पर जो बातें हमें समझ आ रही हैं कि अपीलकर्ता और उसकी पत्नी 2011 से अलग रह रहे हैं और रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं है कि पत्नी ने इस अवधि के दौरान पुनर्मिलन के लिए कोई प्रयास किया है। इसलिए मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस निष्कर्ष पपर पहुँचा जा सकता है कि पत्नी ने अपने कार्यों से पति के साथ मानसिक क्रूरता की, हम याचिकाकर्ता और प्रतिवादी उनकी पत्नी के बीच 2008 में हुए विवाह को भंग करने की डिक्री देकर वैवाहिक बंधन को पूर्ण विराम देने का प्रस्ताव करते हैं।” इस मामले में पीठ ने निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए याचिकाकर्ता को तलाक दे दिया।