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हर घर में हो PFI की पहुँच, सेना से लेकर कोर्ट तक हो घुसपैठ: भारत को 25 साल में ‘इस्लामी’ बनाने की इस रणनीति पर हो रहा काम

पटना के फुलवारी शरीफ में कट्टरपंथी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के ट्रेनिंग सेंटर पर छापेमारी के बाद उसके खतरनाक इरादे का खुलासा हुआ है। PFI ने भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के लिए ‘इंडिया विजन 2047’ नाम से खाका भी तैयार किया है, जिसे पुलिस ने बरामद किया है।

आठ पृष्ठों वाले इस खतरनाक रोडमैप में PFI की कार्यशैली, उसके इरादों और उसके बाद के कामों का विस्तार से वर्णन किया गया है। भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के लिए सत्ता पर सबसे पहले कब्जा जरूरी है और इसके लिए ‘जय भीम, जय मीम’ के तहत ST/SC/OBC को जोड़ने की मुहिम रखी गई है।

लेकिन, भविष्य में किसी तरह के अड़चनों को खत्म करने के लिए PFI ने हर घर में घुसपैठ करने का लक्ष्य रखा है। बरामद दस्तावेजों के अनुसार, हर मुस्लिम के परिवार का हर सदस्य PFI का मेंबर होना चाहिए और यदि हर सदस्य नहीं बन पाया तो कम से कम एक सदस्य तो होना ही चाहिए।

PFI का कहना है कि अगर मुस्लिमों की सिर्फ 10 प्रतिशत आबादी भी उसके साथ आ गई तो वह ‘कायर हिंदुओं’ को उनके घुटने पर ला देगा और भारत में शरिया लागू करके इस्लाम के गौरव को फिर से स्थापित कर देगा।

दस्तावेज के अनुसार, “पीएफआई का उद्देश्य हर मुस्लिम घर से हर सदस्य की भर्ती करना है। हालाँकि, यदि यह संभव नहीं है तो 1) प्रत्येक मुस्लिम घर से कम से कम एक सदस्य की भर्ती करें, यदि नहीं तो 2) एक व्यक्ति को पार्टी में भर्ती करें। यदि नहीं, तो 3) उनमें से किसी को हमारे किसी भी फ्रंटल संगठन (SDPI या अन्य NGO के नाम पर चलने वाले संगठन) में भर्ती करें, यदि नहीं, तो 4) उन्हें हमारी पत्रिकाओं/लेखों का पाठक बनाएँ या कम से कम उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करें।”

PFI इस बात पर अफसोस जताता है कि भारत का शासक समुदाय मुस्लिम अब दोयम दर्जे का नागरिक बनकर रह गया है। इसमें कहा गया है कि देश में 9 जिले ऐसे हैं, जहाँ मुस्लिमों की आबादी 75% से ऊपर है। दस्तावेज में कहा गया है कि मुस्लिम समुदाय ‘मूर्खतापूर्ण मतभेदों’ से विभाजित है और इसलिए ‘हिंदुत्व ताकतों’ से लड़ना मुश्किल है।

इसमें आगे कहा कि मुस्लिमों को दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा समुदाय (भारतीय आबादी के मामले में) होने के नाते ‘दुनिया को एक मॉडल’ देने की जरूरत है कि कैसे समुदाय को ‘मुस्लिम विरोधी ताकतों’ से लड़ने की जरूरत है।

दस्तावेज में कहा गया है, “पीएफआई कैडरों और मुस्लिम युवाओं को बार-बार बताया जाना चाहिए कि वे सभी दीन (इस्लाम) के लिए काम कर रहे हैं। अल्लाह ने दुनिया/कायनात की रचना की थी और मुस्लिम दो वजहों से बने थे। पहला, अल्लाह का कानून स्थापित करने के लिए और दूसरा, मुस्लिम धरती पर दाई है। यह हमेशा ध्यान में रखा जाना चाहिए कि इस्लाम का शासन स्थापित करना है।”

भारत में इस्लामी शासन स्थापित करने के लेकर पहले चरण में PFI का कहना है कि हर क्षेत्र में और हर वर्ग के मुस्लिमों को पीएफआई के बैनर तले एकजुट होने की जरूरत है। वह और अधिक लोगों की भर्ती करेगा और उन्हें हथियारों का प्रशिक्षण देगा, जिनमें छड़, तलवार और अन्य हथियारों का उपयोग शामिल है। इस प्रशिक्षण में आक्रमण करने और खुद को बचाने की तकनीक भी शामिल होगी।

दस्तावेज में कहा गया है, “इसके लिए मुस्लिम समुदाय को उनके कष्टों को बार-बार याद दिलाने और जहाँ कोई शिकायत निवारण तंत्र (जहाँ मुस्लिमों की समस्याओं के लिए उनकी मदद की जा सके) नहीं है, वहाँ उसे स्थापित करने की जरूरत है। पार्टी सहित हमारे सभी फ्रंटल संगठनों को नए सदस्यों के विस्तार और भर्ती पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। साथ ही हमें भारतीय होने की अवधारणा से परे सभी के बीच एक इस्लामी पहचान स्थापित करनी होगी।”

PFI अपने दस्तावेज में जिस PE विभाग की बात करता है, संभवत: वह उसका लड़ाकू विभाग है। इसके बारे में दस्तावेज में कहा गया है, “PE विभाग में सदस्यों की भर्ती और प्रशिक्षण शुरू करेंगे, जिसमें उन्हें तलवारों, छड़ों और अन्य हथियारों के हमलावर और रक्षात्मक तकनीकों का प्रशिक्षण दिए जाएँगे।”

इतना ही नहीं, वह सेना, पुलिस, कार्यपालिका और न्यायपालिका में भी घुसपैठ करने की बात करता है। डॉक्यूमेंट कहता है, “एक बार सत्ता में आने के बाद कार्यपालिका और न्यायपालिका के साथ-साथ पुलिस और सेना में सभी महत्वपूर्ण पदों को वफादार कार्यकर्ताओं से भरा जाएगा। सेना और पुलिस सहित सभी सरकारी विभागों के दरवाजे वफादार मुस्लिमों और एससी/एसटी/ओबीसी को भरने के लिए खोले जाएँगे, ताकि पिछली भर्ती में उनके साथ हुए अन्याय और असंतुलन को ठीक किया जा सके।”

(बिहार के फुलवारी शरीफ में PFI के ट्रेनिंग सेंटर से बरामद ‘इंडिया विज़न 2047’ के बारे में विस्तार से जानने के लिए इस लिंक को क्लिक करें।)

17 अगस्त तक मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद सील करो, नहीं तो होगा हनुमान चालीसा पाठ: सुभाष चंद्र बोस की प्रपौत्री का अल्टीमेटम

अखिल भारत हिंदू महासभा ने मथुरा के शाही ईदगाह परिसर को सील करने की मॉंग की है। ऐसा नहीं होने पर परिसर में हनुमान चालीसा पाठ की चेतावनी दी है। महासभा ने कहा है कि अदालत से भी इसकी अपील की गई है। लेकिन इस संबंध में अभी निर्देश नहीं आया है। अब हम प्रशासन से भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पहले परिसर को सील करने की मॉंग कर रहे हैं।

महासभा की अध्यक्ष राजश्री चौधरी बोस ने गुरुवार (14 जुलाई 2022) कहा, “17 अगस्त तक विवादित स्थान शाही ईदगाह मस्जिद परिसर को सील कर दिया जाए। उसके अंदर किसी भी धर्म के लोगों को जाने की अनुमति नहीं दी जाए। यदि ऐसा नहीं होता है तो 6 दिसंबर को ​परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा।” उल्लेखनीय है कि राजश्री महान स्वतंत्रता सेनानी और आजाद हिंद फौज के संस्थापक सुभाष चंद्र बोस की प्रपौत्री हैं।

राजश्री चौधरी ने पूरे परिसर पर हिंदू महासभा का अधिकार बताया। मथुरा में 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर सिविल कोर्ट में मामला चल रहा है। इसमें से 11 एकड़ भूमि मंदिर के पास है और बाकी शाही ईदगाह मस्जिद के पास। हिंदू पक्ष का दावा है कि जिस स्थान पर शाही ईदगाह है, उसी स्थान पर भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि है। इसको लेकर अदालत में भी याचिकाएँ दायर की गई हैं। इस साल मई में उत्तर प्रदेश के शाही ईदगाह मस्जिद के अंदर गर्भगृह होने का दावा किया गया था। दिनेश कौशिक ने याचिका दायर कर शाही ईदगाह के शुद्धिकरण की माँग भी की थी।

अपनी याचिका में उन्होंने शाही ईदगाह में गर्भगृह होने के दावे के साथ भगवान लड्डू गोपाल के अभिषेक की अनुमति भी माँगी थी। इससे पहले 26 फरवरी 2021 को सिविल जज सीनियर डिवीजन की ही अदालत में वादी ने अपने वकील दीपक शर्मा के माध्यम से शाही ईदगाह को श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की जमीन पर बना हुआ बताते हुए इसे हटाने की माँग की थी। दिनेश ने अपनी याचिका में यूपी सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड, इंतजामिया कमेटी शाही मस्जिद ईदगाह, श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को प्रतिवादी बनाया है।

SC/ST-OBC को हिंदुओं से तोड़ो, साथ जोड़कर बनाओ इस्लामी राष्ट्र: ‘मिशन 2047’ के लिए भी ‘जय भीम-जय मीम’ को PFI ने बनाया हथियार

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) को लेकर लंबे समय से जो बातें कही जा रही थीं, वे पटना पुलिस की छापेमारी में बरामद हुए दस्तावेजों को देखने के बाद सच साबित हो रही हैं। PFI ना सिर्फ देश को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहता है, बल्कि इसके लिए वह हिंदू समाज में हर तरह से दरार पैदा करने की कोशिश भी करने की साजिश पर काम कर रहा था।

आज भारत में ‘जय भीम, जय मीम’ को जो नारा मुस्लिम नेताओं द्वारा बोले जा रहे हैं, इसकी पूरी पोल-पट्टी ने PFI के कार्यालय या कहें कि ट्रेनिंग सेंटर से बरामद हुए दस्तावेजों ने खोलकर रख दी है।

‘इंडिया विज़न 2047’ नाम के दस्तावेज़ में पीएफआई ने ‘कायर हिंदुओं’ पर पूरी तरह से हावी होने के लिए जो रूप-रेखा बनाई है, उसमें ST/ST/OBC के मन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रति नफरत भरकर उन्हें अपनी तरफ मिलाना शामिल है।

दस्तावेज़ में कहा गया है, “हमें यह दिखाकर आरएसएस और एससी/एसटी/ओबीसी के बीच एक विभाजन पैदा करने की जरूरत है कि आरएसएस केवल उच्च जाति के हिंदुओं के हित की बात करने वाला संगठन है।”

पीएफआई का कहना है कि पार्टी (PFI) को एससी/एसटी/ओबीसी समुदाय के साथ घनिष्ठ गठबंधन बनाना चाहिए और चुनाव में कम-से-कम कुछ सीटें जीतनी चाहिए। PFI जो गठबंधन बनाना चाहता है, उसमें 50% मुस्लिमों की हिस्सेदारी और 10% एससी/एसटी/ओबीसी की हिस्सेदारी होगी।

PFI के बरामद दस्तावेज में कहा गया है, “पार्टी (PFI) को ‘राष्ट्रीय ध्वज’, ‘संविधान’ और ‘अंबेडकर’ जैसी अवधारणाओं का उपयोग इस्लामी शासन स्थापित करने के वास्तविक इरादे को ढाल के रूप में और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ओबीसी तक पहुँचने के लिए करना चाहिए।”

पीएफआई एक विशुद्ध मुस्लिम पार्टी की आवश्यकता को आगे बढ़ाने के लिए सभी ‘धर्मनिरपेक्ष’ दलों को बदनाम करने की बात करता है। उसका कहना है कि इससे मुस्लिमों और एससी/एसटी/ओबीसी की जरूरतें पूरा होंगी।

PFI का मकसद साफ है कि इस्लामी शासन स्थापित करने के लिए एससी/एसटी/ओबीसी का इस्तेमाल करना चाहिए। संगठन का कहना है कि 50% एससी/एसटी/ओबीसी का विश्वास भी हासिल करना चाहिए और उनके प्रतिनिधि के रूप में भी उभरना चाहिए। उसका मानना है कि अगर वह इस समर्थन को हासिल कर लेता है तो उसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता हथियाना काफी आसान होगा।

डॉक्यूमेंट आगे कहता है, “जब हमारे पास पर्याप्त प्रशिक्षित कैडर और हथियारों का भंडार हो जाएगा तो हम इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित एक नए संविधान की घोषणा करेंगे। इस समय बाहरी ताकतें भी हमारी मदद के लिए आ जाएँगी। हमारे विरोधियों का व्यवस्थित और व्यापक रूप से सफाया होगा और इस्लामी गौरव की वापसी होगी।”

(बिहार के फुलवारी शरीफ में PFI के ट्रेनिंग सेंटर से बरामद ‘इंडिया विज़न 2047’ के बारे में विस्तार से जानने के लिए इस लिंक को क्लिक करें।)

आजमगढ़ के मंदिर में मुस्लिम लड़की ने हिंदू लड़के संग लिए फेरे: शादी से भड़के इस्लामी कट्टरपंथी, VHP ने ली सुरक्षा की जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में एक मुस्लिम लड़की ने हिन्दू लड़के से मंदिर में शादी कर ली। लड़की का नाम मोमिन खातून है। उसने सूरज से शादी की है। विवाह के समय लड़के के परिवार वाले और हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता मौजूद रहे। पुलिस ने भी नवदम्पति से मुलाकात कर उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया है। शादी 14 जुलाई 2022 (गुरुवार) को हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला अतरौलिया थाना क्षेत्र का है। फ़तेह गाँव के सूरज और हैदरपुर की मोमिन खातून के बीच लगभग 2 साल से प्रेम संबंध था। जब दोनों के रिश्ते की जानकारी परिवार वालों को हुई तो मोमिन के घर वालों ने सूरज को इस्लाम कबूलने के लिया कहा। सूरज ने इससे इनकार कर दिया। आख़िरकार मोमिन खातून ने किसी भी हाल में सूरज से शादी करने की ठानी और दोनों ने अतरौलिया के एक मंदिर में शादी कर ली।

मीडिया से बात करते हुए सूरज ने कहा, “हम अपनी मर्जी से बिना किसी दबाव के शादी कर रहे हैं।” इस शादी के दौरान सूरज के परिवार वाले मौजूद रहे। इस दौरान वेद मंत्रों के बीच सूरज और मोमिन के एक-दूसरे के गले में वरमाला डाली और फेरे लिए।

एक रिपोर्ट के मुताबिक मोमिन ने कहा कि उसने अपनी मर्जी से शादी की और वो खुश रहना चाहती है। अतरौलिया थाने के SHO इंस्पेक्टर रुद्रभान पांडेय ने भी नव दंपती से मुलाकात की है औश्र बताया है कि किसी भी प्रकार के लॉ एन्ड आर्डर की कोई समस्या नहीं है।

विश्व हिन्दू परिषद आजमगढ़ के पदाधिकारी गौरव सिंह ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “मोमिन खातून सनातन धर्म में आईं हैं। उनका स्वागत है। मोमिन के घर वालों ने सूरज पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया था, लेकिन खुद मोमिन ने हिन्दू बनकर शादी करने की रजामंदी जताई। ऐसी बहन का हम सम्मान करते हैं।” न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार नव दंपती को कट्टरपंथियों से खतरा देखते हुए गौरव सिंह ने उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी ली है।

कट्टरपंथी नाराज

सूरज और मोमिन खातून का निकाह कट्टरपंथी विचारधारा के लोगों को रास नहीं आ रहा है। हालत हाल TV नाम के यूट्यूब चैनल पर शेयर हुए 2:11 मिनट के वीडियो में 1:18 मिनट पर मोमिन को दीन-ए-इस्लाम छोड़ने पर नसीहत दी गई है और उसके विवाह को बगावत कहा गया है। इसी के साथ वीडियो में क़ुरान-हदीस की चर्चा करते हुए लड़की को इस्लाम से हमेशा के लिए ख़ारिज करते हुए उसके अब्बा पर अफ़सोस जताया गया है।

आतंकवाद और फिरकापरस्ती से लड़ने का दावा कर के बनी युवा मुस्लिम परिषद् NRI कमेटी के सदस्य मोहम्मद अफ़ज़ल ने फेसबुक पोस्ट में लिखा है, “आज भी जहालत में डूबे हुए बेशुमार मुसलमान जागने को तैयार नहीं हैं और अपनी लड़कियों को आँखों के सामने जहन्नुम में जाता देख कर भी उनकी न ग़ैरत जाग रही है न ईमान। अल्लाह ऐसी क़ौम को ऐसे ही ज़लील करेगा जो अपने रब के हुक्मों को भूल कर बेहयाई और गुमराही को अपना रास्ता बना चुकी है।”

जब मनमोहन सिंह थे PM तब भी संसद में धरने पर लगी थी रोक, अब शोर मचा रही वही कॉन्ग्रेस: विपक्ष के हंगामे पर उठे सवाल

संसद सदन के भीतर अंससदीय शब्दों को लेकर बुकलेट के एक दिन बाद राज्यसभा सचिवालय की बुलेटिन में संसद भवन परिसर के अंदर धरना, प्रदर्शन, हड़ताल या अनशन जैसे सभी तरह के विरोध प्रदर्शनों के आयोजन पर रोक लगा दी गई हैं। राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी ने ये बुलेटिन जारी कर सभी सदस्यों से सहयोग करने का अनुरोध किया है।

यह नया आदेश आने के बाद अब विपक्ष पूरी तरह से बिफर गया है। दरअसल, अब तक सदन के अंदर किसी भी बात को लेकर सहमति नहीं बनने पर विपक्ष अक्सर संसद के कैम्पस में महात्मा गाँधी की प्रतिमा के नीचे तख्तियाँ लेकर प्रदर्शन करता रहा है। लेकिन इस आदेश के तहत अब ये सब भी नहीं हो सकेगा।

इस घटना के विरोध में कॉन्ग्रेस के कम्युनिकेशन हेड जयराम रमेश ने सरकार पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया, “विषगुरू का ताजा प्रहार… धरना मना है।’’ माना जा रहा है कि अप्रत्यक्ष तरीके से उन्होंने पीएम मोदी को विषगुरू करार दिया है।

हालाँकि, विपक्ष भले ही इस पर चीख चिल्लाहट कर रहा हो, लेकिन इस तरह के आदेश साल 2009 में भी जारी किए गए थे। उस दौरान देश में कॉन्ग्रेस की सरकार थी और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे।

लोकसभा सचिवालय का स्पष्टीकरण

इस मामले में विवाद बढ़ने के बाद अब लोकसभा सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि ये एक रुटीन प्रक्रिया का हिस्सा है। सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए ये निर्णय लिए गए हैं। संसद की हर सत्र से पहले इस तरीके के दिशानिर्देश जारी किए जाते हैं।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले गुरुवार को सदन के भीतर असंसदीय शब्दों के इस्तेमाल को लेकर बुकलेट जारी किया गया था। इसमें जुमलाजीवी, बाल बुद्धि सांसद, शकुनि, जयचंद, विनाश पुरुष जैसे कई शब्दों को असंसदीय करार दिया गया था। विपक्ष के बवाल के बाद लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने ये स्पष्ट किया था कि इन शब्दों के बोलने पर प्रतिबन्ध नहीं है बस उस प्रक्रिया में जब भी संसद में संवाद के दौरान कोई सदस्य किसी चर्चा के दौरान किसी शब्द का इस्तेमाल करते हैं तो जो पीठासीन अधिकारी होते हैं वो उसे असंसदीय घोषित करते हैं।

‘सभी मोदी चोर हैं’: राहुल गाँधी को झारखंड हाई कोर्ट से झटका, मानहानि केस रद्द करने से किया इनकार

‘सभी मोदी चोर’ वाली टिप्पणी के मामले में मानहानि के केस का सामना कर रहे कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को झारखंड उच्च न्यायालय ने तगड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने राहुल गाँधी की मानहानि के केस को कैंसिल करने की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया। मोदी समुदाय को लेकर विवादित टिप्पणी करने के मामले में राँची के ही प्रदीप मोदी नाम के एक वकील ने उनके खिलाफ मानहानि का केस दायर किया था।

घटना 3 साल पहले 2019 की है। 2 मार्च को राँची और 13 अप्रैल 2019 को कर्नाटक के कोलार शहर में राहुल गाँधी ने लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार के दौरान मोदी उपनाम को लेकर विवादित बयान दिया था। दरअसल, राँची की रैली में उन्होंने कहा था, “आखिर मोदी चोर क्यों हैं?” इसी तरह से कर्नाटक की रैली में उन्होंने कहा था, “मेरा एक सवाल है। सभी चोरों के नाम में मोदी क्यों होते हैं, चाहे वह नीरव मोदी हों, ललित मोदी हों या नरेंद्र मोदी हों? मुझे नहीं पता कि ऐसे और कितने मोदी सामने आएँगे।” इसी बयान के बाद राँची के वकील ने उनके खिलाफ केस दर्ज कराया था।

इस मामले में सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए संजय कुमार द्विवेदी की पीठ ने कहा, “प्रतिष्ठा का अधिकार, जीवन के अधिकार का आयाम है। यह अनुच्छेद 21 के तहत भी आता है। पीठ ने कहा कि यह एक स्वीकृत तथ्य है कि बयान राँची में दिया गया था। ऐसे में इससे राँची का मोदी समुदाय भी प्रभावित हुआ।”

अदालत ने कहा, “दिनांक 07.06.2019 को दिए गए बयान को कोर्ट ने देखा और पाया कि अदालत ने प्रथम दृष्टया कंटेंट का खुलासा होने के बाद संज्ञान लिया है। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि मुकदमे में सभी तर्कों को साबित करना आवश्यक था और मानहानि के मुकदमे को रद्द करने की माँग वाली राहुल गाँधी की याचिका को खारिज कर दिया गया।”

गौरतलब है कि वकील प्रदीप ने शिकायत में दावा किया था कि राहुल गाँधी की टिप्पणी मोदी उपनाम या शीर्षक वाले सभी लोगों के प्रति अपमानजनक और मानहानिकारक थी। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा था, “इससे लोगों की नज़र में मोदी खानदान की प्रतिष्ठा कम हुई है और मोदी उपनाम वाले व्यक्तियों को बहुत दुख और पीड़ा हुई है।”

शिकायतकर्ता के मुताबिक, राहुल गाँधी ने आईपीसी की धारा 499 के अनुसार मोदी समुदाय को बदनाम किया था। उन्होंने ‘सभी मोदी चोर हैं’ कहकर मोदी समुदाय को बदनाम किया है। इसलिए वो जेल और जुर्माने की कड़ी से कड़ी सजा के हकदार हैं। इसमें जेल और जुर्माना दोनों ही शामिल हैं। इसके साथ ही आईपीसी की धारा 500 के तहत संज्ञान लिए जाने के बाद अब ये मामला राँची कोर्ट के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रहा है।

राहुल गाँधी के वकील का तर्क

वहीं हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान राहुल गाँधी के वकील ने अपने तर्क में उच्च न्यायालय को बताया कि I.P.C की धारा 499 के स्पष्टीकरण -2 के अनुसार इस मामले में वही व्यक्ति शिकायत कर सकता है, जो कि पीड़ित है। राहुल गाँधी के वकील ने तर्क दिया, “राहुल गाँधी की टिप्पणी किसी व्यक्ति विशेष या आसानी से पहचाने जा सकने वाले समूहों को टार्गेट नहीं करती। इसलिए ये शिकायत बरकरार रखने योग्य नहीं थी।”

हालाँकि, इसे खारिज करते हुए शिकायतकर्ता वकील ने राहुल गाँधी के वकील के दावों को खारिज कर दिया और कहा के याचिकाकर्ता मूल रूप से राँची का मूल निवासी है। इसलिए वो एक पार्टी है और वो इस टिप्पणी से आहत हुआ है। इसलिए शिकायतकर्ता इस मामले में केस दर्ज कराने के लिए स्वतंत्र है।

श्रीलंका के नाम पर NDTV ने फैलाया झूठ, कहा- भारत ने राजपक्षे के लिए निजी जेट भेजा: बाद में चुपके से ट्वीट किया डिलीट

श्रीलंका में जारी सियासी संकट के बीच वामपंथी चैनल एनडीटीवी ने दावा किया कि भारत सरकार ने गोताबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) को भगाया था। जबकि गुरुवार (14 जुलाई 2022) को भारत सरकार ने ये दोहराया था कि श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे की यात्रा में उसकी कोई भूमिका नहीं है और देश ने उन्हें श्रीलंका से भागने में कभी मदद नहीं की।

मीडिया चैनलों पर चलाई जा रही इन खबरों का मालदीव में विदेश मंत्रालय (MEA) और भारतीय उच्चायोग ने खंडन किया था। जिसमें ये दावा किया जा रहा था कि भारत ने मालदीव सरकार के अनुरोध पर राजपक्षे के लिए एक निजी जेट मालदीव भेजा था।

वहीं एनडीटीवी ने रिपोर्ट में झूठा दावा किया कि राजपक्षे को भारत द्वारा भेजे गए एक निजी जेट में मालदीव से सिंगापुर ले जाया गया था। चैनल ने ट्वीट किया, “#JustIn: राष्ट्रपति गोताबाया राजपक्षे इस समय वेलाना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हैं। वह एक निजी जेट से जाने की तैयारी कर रहे हैं, जो कि दिल्ली से आने वाली है।”

ट्विटर का स्क्रीनशॉट

एनडीटीवी ने ये भी झूठा दावा किया कि मालदीव सरकार ने इस मामले में भारत सरकार से मदद माँगी थी, जिसके बाद राजपक्षे के लिए ये व्यवस्था की गई थी। विदेश मंत्रालय ने कहा, “श्रीलंका के राष्ट्रपति राजपक्षे की देश से यात्रा या उसे सुविधाजनक बनाने में भारत की कोई भूमिका नहीं है।”

इस मामले में विवाद बढ़ने के बाद कथित तौर पर NDTV ने 14 जुलाई को झूठे दावों वाले अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया। इससे पहले भी कोलंबो में भारतीय उच्चायोग ने श्रीलंकाई राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को मालदीव भागने में मदद करने से इनकार कर दिया था। श्रीलंका की राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं के बीच वहाँ के लोगों के साथ खड़े होते हुए कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने राजपक्षे को श्रीलंका से भगाने में मदद करने की खबरों को खारिज कर दिया था।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत श्रीलंका के लोगों के साथ खड़ा रहेगा, क्योंकि वे लोकतांत्रिक साधनों और मूल्यों, स्थापित लोकतांत्रिक संस्थानों और एक संवैधानिक ढाँचे के जरिए समृद्धि और प्रगति के लिए अपनी आकांक्षाओं को साकार करना चाहते हैं।

हाउस स्पीकर कार्यालय के मुताबिक, श्रीलंका के राष्ट्रपति गोताबाया राजपक्षे ने सिंगापुर पहुँचने के बाद गुरुवार को इस्तीफा दे दिया। स्पीकर महिंदा यापा अभयवर्धने के प्रवक्ता ने कहा कि राजपक्षे ने ईमेल से अपने पद से इस्तीफा दिया। राजपक्षे को लेकर सऊदी एयरलाइंस की एक फ्लाइट सिंगापुर के चांगी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर लैंड हुई। मीडिया से बातचीत करते हुए सिंगापुर के विदेश मंत्रालय के एक प्रतिनिधि ने कहा कि उन्होंने सिंगापुर में शरण लेने के लिए कोई अनुरोध नहीं किया था। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि सिंगापुर आमतौर पर शरण लेने के अनुरोध को स्वीकार नहीं करता है।

गौरतलब है कि चीन के कर्ज के जाल में फँसकर श्रीलंका लगभग दिवालिया हो गया है। वहाँ सात दशकों में सबसे खराब आर्थिक मंदी है। लाखों लोग अपने लिए खाना, दवा और ईंधन समेत दूसरे सामानों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। वहीं देश के कार्यवाहक राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने देश में आपातकाल की घोषणा की है।

मदर मतलब ‘अम्मी’, फादर मतलब ‘अब्बू’: राजस्थान के इंग्लिश मीडियम स्कूल की ‘पढ़ाई’ से अभिभावक नाराज, बोले- घर में भी बच्चे माँगने लगे हैं बिरयानी

दंगों और कन्हैया लाल की इस्लामिक आतंकियों द्वारा हत्या के बाद राजस्थान (Rajasthan) एक बार फिर चर्चा में है। राज्य के कोटा जिले के प्राइवेट स्कूल के कक्षा-2 में ऐसे पाठ्य-पुस्तकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें उर्दू नामों और शब्दों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसको लेकर बवाल हो गया है। अभिभावकों का आरोप है कि छोटे-छोटे बच्चों के मन में उर्दू शब्द भरे जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि इस स्कूल में बड़ी संख्या में गैर-मुस्लिम छात्र पढ़ते हैं। इनके अभिभावकों ने इस तरह के स्कूली पुस्तकों के इस्तेमाल पर रोष जताया है। कहा जा रहा है कि किताब में माँ-पिताजी के बदले बच्चों को अम्मी-अब्बू बोलना और बिरयानी बनाना सिखाया जा रहा है।

इसको लेकर न्यूज24 ने कुछ बच्चों के अभिभावकों का एक वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में अभिभावक पाठ्य-पुस्तकों का विरोध कर रहे हैं। वीडियो में एक महिला कहती है, “बच्चों को ऐसी शिक्षा कैसे दे रहे हैं ये लोग? हम हिंदू लोग हैं। हम बिरयानी बनाना नहीं जानते। आप हर एक दिन के बाद बच्चों से कहते हो बिरयानी बनाकर लाओ, बिरयानी बनाकर खाओ। बच्चा बोलता है मम्मी, वहाँ सिखाया जाता है अम्मी बोलो… अब्बू बोलो। ये भाषा हमारे बच्चों को क्यों समझाते हैं आप?”

वीडियो में एक अन्य महिला एक किताब दिखाते हुए कहती है, “ये देखो, इसमें अम्मी-अब्बू कहना सीखा रहे हैं। ये अपनी संस्कृति की भाषा है क्या? इसमें देखो, बिरयानी बनाना सिखा रहे हैं। कहते हैं सप्ताह में एक बार बनाकर लाओ।”

इसमें माँ के लिए अम्मी और पिताजी के लिए अब्बू जैसे संदर्भों के अलावा पुस्तक में कहानी के पात्रों के लिए शानू, सानिया, शिरीन, आमिर, नसीम जैसे मुस्लिम नामों का इस्तेमाल किया गया है। अभिभावकों का कहना है कि एक निजी अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ने वाले उनके बच्चे अब्बू और अम्मी जैसे शब्दों का इस्तेमाल घर पर भी करने लगे हैं और खाने के लिए बिरयानी की माँग भी करने लगे हैं।

वीडियो में कक्षा-2 की जिस पुस्तक को अभिभावक दिखा रहे हैं, उसका नाम ‘गुलमोहर’ है। गुलमोहर पुस्तक का प्रकाशन हैदराबाद के एक प्रकाशक द्वारा किया गया है। इस पुस्तक में 113 पृष्ठ हैं और इसकी कीमत 352 रुपए है। यह किताब CBSE से संबद्ध इंग्लिश मीडियम स्कूल की कक्षा 2 की बताई जा रही है।

इस किताब किताब के पहले चैप्टर ‘टू बिग! टू स्मॉल’ में बच्चे को नए शब्द के रूप में मदर को अम्मी और फादर को अब्बू बताया गया है। दूसरा चैप्टर ‘ग्रैंडपा फारूक’स गार्डन (दादाजी फारूक का बगीचा)’ शीर्षक से है। इसमें मुस्लिम बच्चा आमिर और उसके दादा फारूक को दर्शाया गया है। वहीं, छठे चैप्टर में पेज नंबर 20 पर बताया गया है कि पेरेंट्स किचन में हैं और वे बिरयानी बना रहे हैं।

स्कूली बच्चों के माता-पिता ने किताब के बारे में बजरंग दल के स्थानीय प्रतिनिधियों से शिकायत की। इसके बाद संगठन ने राज्य के शिक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराई है। इस किताब को स्कूली शिक्षा के इस्लामीकरण के प्रयास बताया जा रहा है।

बता दें कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब झारखंड के कई इलाकों में सरकारी स्कूलों के नाम में उर्दू जोड़ दिया गया है और रविवार की जगह उनमें शुक्रवार (जुम्मे) की छुट्टी घोषित कर दी गई है। ऐसा स्थानीय लोगों ने खुद ही दवाब बनाकर कर दिया है। उनका कहना है कि उन इलाकों में 70 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है, इसलिए उनके अनुसार नियम-कायदे होने चाहिए।

‘हनीमून-हनुमान’ वाले ट्वीट में मोहम्मद जुबैर को जमानत, लेकिन जेल से नहीं आ पाएगा बाहर: UP में दर्ज मामलों में अभी राहत नहीं

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को आपत्तिजनक ट्वीट ‘हनुमान होटल’ के मामले में जमानत दे दी है। अदालत ने जुबैर को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके एवं इतने ही रुपए मूल्य के जमानती के आधार पर बेल मंजूर की है। इससे पहले जुबैर को यूपी के सीतापुर मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली थी। हालाँकि इसके बाद भी मोहम्मद ज़ुबैर की रिहाई नहीं हो पाएगी क्योंकि उन पर यूपी में कई मामलों में केस दर्ज है।

बता दें कि पटियाला हाउस कोर्ट ने गुरुवार 14 जुलाई, 2022 आपत्तिजनक ट्वीट के मामले में सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। जिसके बाद अब उन्हें जमानत देने का फैसला सुनाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने बीते माह 27 जून को मोहम्मद जुबैर को दुश्मनी को बढ़ावा देने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने, सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक अशांति फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने जुबैर के खिलाफ आईपीसी की धारा 153/295 के तहत केस दर्ज किया था।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, उसे जुबैर के खिलाफ ट्विटर के जरिए एक शिकायत मिली थी, जिसमें जुबैर के एक ट्वीट का जिक्र किया गया था। पुलिस ने इस संबंध में आईपीसी की धारा 153ए और 295ए के तहत केस दर्ज कर जुबैर को पूछताछ के लिए बुलाया था। इसके बाद जुबैर के खिलाफ पर्याप्त सबूत होने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

गौरतलब है कि यह मामला ट्विटर हैंडल हनुमान भक्त @balajikijaiin की एक पोस्ट के आधार पर दर्ज किया गया था, जहाँ उन्होंने, “2014 से पहले: हनीमून होटल” और “2014 के बाद: हनुमान होटल” पोस्ट के संबंध में मोहम्मद जुबैर के नाम से एक अन्य ट्विटर हैंडल के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।

दिल्ली पुलिस ने कहा था कि एक फोटो (ट्वीट में) दिख रहा है जहाँ होटल के साइनबोर्ड ‘हनीमून होटल’ को बदलकर ‘हनुमान होटल’ कर दिया गया है। हनुमान भक्त @balajikijaiin ने ट्वीट किया, “हमारे भगवान हनुमान जी को हनीमून से जोड़ना हिंदुओं का सीधा अपमान है क्योंकि वह ब्रह्मचारी हैं। कृपया इस आदमी के खिलाफ कार्रवाई करें।”

पुलिस ने बताया कि एक विशेष धार्मिक समुदाय के खिलाफ तस्वीर और भड़काऊ बयान वाली मोहम्मद जुबैर की उक्त पोस्ट जानबूझकर की गई है, जो लोगों के बीच नफरत को भड़काने के लिए पर्याप्त है, जो सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए हानिकारक हो सकती है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि उक्त पोस्ट के आधार पर उपरोक्त मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा भी मोहम्मद ज़ुबैर हिन्दुओं की धार्मिक भावना भड़काने के कई मामलों में लिप्त रहा है।

आज PFI से RSS की तुलना, कभी दुर्गा विसर्जन फायरिंग पर लीपापोती: पटना के आज के SSP ढिल्लों को कभी मुंगेर से हटाने का हाई कोर्ट ने दिया था आदेश

बिहार की राजधानी पटना से सटे फुलवारी शरीफ में आतंकी ट्रेनिंग चल रही थी। इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े आतंकी 2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के मिशन पर काम कर रहे थे। इस खुलासे के बाद पटना के एसएसपी मानवजीत सिंह ढिल्लों ने आश्चर्यजनक तौर पर पीएफआई की तुलना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से कर दी।

इस बयान पर विवाद खड़ा होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने गुरुवार (14 जुलाई 2022) को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर 48 घंटे के भीतर जवाब माँगा है। बीजेपी ने उनकी फौरन बर्खास्तगी की माँग की है। वहीं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जीतनराम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ढिल्लों के समर्थन में आगे आई है। ढिल्लों ने कहा था कि जिस तरह से आरएसएस अपनी शाखा ऑर्गेनाइज करते हैं और लाठी की ट्रेनिंग देते हैं। उसी तरह से ये लोग शारीरिक शिक्षा के नाम पर युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे थे।

वैसे यह पहला मौका नहीं है जब ढिल्लों विवादों में हैं। मुंगेर से उन्हें हाई कोर्ट की फटकार के बाद हटाया गया था। दरअसल, 26 अक्टूबर 2020 को मुंगेर में दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान फायरिंग में 18 साल के युवक अनुराग पोद्दार की मौत हो गई थी। पीड़ित पिता ने कहा था कि पुलिस की चलाई गोली से उनके बेटे की हत्या की गई। इस मामले में उस समय मुंगेर की एसपी रहीं लिपि सिंह की भूमिका भी सवालों के घेरे में थी। लोगों के आक्रोश को देखते हुए चुनाव आयोग ने डीएम राजेश मीणा और लिपि सिंह को उनके पद से हटा दिया था। ध्यान रहे कि उस समय बिहार में विधानसभा चुनाव हो रहे थे। अचार संहिता लागू थी।

इसके बाद ढिल्लों को मुंगेर भेजा गया। माना गया कि न केवल लोगों का आक्रोश शांत होगा बल्कि दोषियों पर कार्रवाई भी होगी। लेकिन इस पूरे मामले पर जिस तरह की लीपापोती की कोशिश की गई उस पर 7 अप्रैल 2021 को पटना हाई कोर्ट बेहद सख्त रवैया दिखाया।

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई थी कि अक्टूबर 2020 से लेकर फरवरी 2021 तक पुलिस जाँच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। कोर्ट ने जाँच पर असंतोष जताते हुए एसपी मानवजीत समेत कई पुलिस पदाधिकारियों के तबादले का आदेश दिया था। साथ ही पूरे मामले की जाँच हाई कोर्ट की निगरानी में सीआईडी को करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद ढिल्लों का मुंगेर से राज्य सरकार ने तबादला कर दिया था। 

ऐसे में ढिल्लों के ताजा बयान के बाद लोग मुंगेर गोलीकांड पर पुलिसिया लीपापोती को याद कर रहे हैं। आशंका जता रहे हैं कि बिहार में बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ और आतंकवाद से ध्यान हटाने के मकसद से तो उन्होंने ऐसा बयान नहीं दिया है। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि फुलवारी शरीफ से गिरफ्तार किए आतंकियों के निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी थे। हालाँकि बिहार पुलिस ने प्रधानमंत्री को सीधे कोई खतरा होने से इनकार किया था। लेकिन यह माना था कि प्रधानमंत्री के बिहार दौरे को लेकर वे अलर्ट पर थे और इसी दौरान इन आतंकियों की गतिविधियों का सुराग हाथ लगा था।