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Lulu मॉल से नमाज का एक और Video आया सामने, हिंदू संगठनों ने सुन्दर काण्ड और गायंत्री मंत्र जाप का किया ऐलान

UP की राजधानी लखनऊ में नव निर्मित लुलु मॉल में नमाज़ पढ़ने के विवाद ने तूल पकड़ लिया है। हिन्दू संगठनों ने कड़ी कार्रवाई की माँग करते हुए उसी जगह पर हनुमान चालीसा, सुन्दरकाण्ड और गायत्री मंत्र पढ़ने की अनुमति देने की माँग की है। नमाज़ के विरोध में हिन्दू महासभा ने मॉल के गेट पर प्रदर्शन भी किया। वहीं मॉल में नमाज़ पढ़ने वालों पर मॉल के जन संपर्क अधिकारी सिब्तैन हुसैन की शिकायत पर FIR दर्ज कर ली गई है। वहीं ABP न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, लुलु मॉल में नमाज का एक दूसरा वीडियो भी सामने आया है जिसमें दो लोग नमाज पढ़ते दिख रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लुलु मॉल में 12 जुलाई 2022 को वायरल हुए एक वीडियो में कुछ लोगों को नमाज़ पढ़ते देखा गया। इसके विरोध में अखिल भारतीय हिन्दू महासभा ने 14 जुलाई (गुरुवार) को मॉल के गेट पर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी ने कहा, “आज हम मॉल के गेट पर सांकेतिक रूप से बैठे हैं। कल यहाँ सुंदरकांड का पाठ किया जाएगा। लुलु मॉल लव जिहाद का अड्डा है। ये सरकारी छूट पर जमीनें प्राप्त करते हैं। योगी सरकार ने सार्वजानिक स्थानों पर नमाज़ पर रोक लगाई है। फिर भी यहाँ नमाज़ हुई जिसका हम विरोध कर रहे हैं। हम पुलिस के आदेश को मानते हुए अंदर नहीं जा रहे हैं। हमने नमाज़ पढ़ने वालों के खिलाफ थाने में तहरीर दी है।”

गायंत्री मंत्र पढ़ने का एलान

मॉल के खिलाफ प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे हिन्दू महासभा के पदाधिकारी और एडवोकेट शिशिर चतुर्वेदी ने आज 15 जुलाई को शाम 6 बजे लू लू मॉल में गायत्री मंत्र पढ़ने का ऐलान किया है। उन्होंने इसे अपना निजी आयोजन बताया है।

नमाज़ियों पर FIR दर्ज

एडीसीपी दक्षिण राजेश कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, लुलु मॉल के जनसंपर्क अधिकारी सिब्तैन हुसैन ने गुरुवार (14 जुलाई, 2022) शाम को सुशांत गोल्फ सिटी थाने में तहरीर दी। इसमें आरोप लगाया गया है कि मॉल परिसर में बिना अनुमति के कुछ लोगों ने नमाज पढ़ी जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो की जाँच कराई गई जो राजधानी के नवसृजित लुलु मॉल का निकला। इसके बाद जनसंपर्क अधिकारी सिब्तैन हुसैन ने पुलिस से शिकायत की।

लखनऊ पुलिस ने शिकायत की जाँच करते हुए बताया, “नमाज़ पढ़ने में लुलु मॉल का कोई अधिकारी या कर्मचारी शामिल नहीं था। मॉल के मैनेजमेंट ने अज्ञात नमाज़ियों के खिलाफ लिखित शिकायत दी है। इस शिकायत पर 14 जुलाई को IPC की धारा 153 A (1), 341, 505 और 295 A के तहत थाना सुशांत गोल्फ सिटी में अज्ञात नमाज़ियों के खिलाफ FIR दर्ज करके आगे की कार्रवाई की जा रही है।”

हम किसी भी धार्मिक गतिविधियों की अनुमति नहीं देते

लुलु मॉल लखनऊ के GM समीर वर्मा ने इस विवाद पर कहा, “हम यहाँ किसी भी संगठित धार्मिक कार्यक्रम या प्रार्थना की अनुमति नहीं देते। हम सभी धर्मों का आदर करते हैं। हम अपने फ्लोर और सुरक्षा स्टाफ पर ऐसी गतिविधियों पर नजर रखने की ट्रेनिंग देते हैं।”

गौरतलब है कि लुलु मॉल भारत के मूल निवासी व्यापारी युसूफ अली द्वारा संचालित है। इसका मुख्यालय दुबई में है। 10 जुलाई 2022 को इसका लखनऊ में उद्घाटन UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था।

33 सरकारी स्कूलों के नाम में जुड़ गया ‘उर्दू’, रविवार की जगह शुक्रवार को होने लगी छुट्टी: झारखंड सरकार को भनक तक नहीं लगी

दुमका झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का गृह जिला है। बावजूद इसके जिले के 33 सरकारी स्कूलों ने अपने नाम में ‘उर्दू’ जोड़ लिया ताकि रविवार की जगह शुक्रवार को छुट्टी दी जा सके। लेकिन प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। उसकी नींद तब टूटी जब मीडिया में यह मामला सामने आया और शिक्षा के कथित इस्लामीकरण को लेकर राज्य सरकार की किरकिरी शुरू हुई।

अब दुमका के जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) संजय कुमार दास ने इसकी जाँच की बात कही है। उन्होंने कहा है, “हमने 33 स्कूलों के BO को पत्र लिखकर इस मामले की जाँच को कहा है। सभी स्कूलों के नाम उर्दू हैं। इस बात की जाँच की जा रही है कि उर्दू इन स्कूलों के नाम से कैसे जुड़ी और सरकारी स्कूलों में किन परिस्थितियों में शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश दिया जाता है। शुक्रवार को स्कूल बंद रखने के लिए विभाग की ओर से कोई निर्देश नहीं है।”

हालाँकि, अभी यह साफ नहीं है कि जिले के स्कूलों में जुमे की छुट्टी कब से चल रही है। लेकिन, यह इस तरह का पहला मामला नहीं है। राज्य के जामताड़ा में भी 100 से ज्यादा सरकारी स्कूल ऐसे सामने आए थे जहाँ शुक्रवार को छुट्टी दी जा रही थी। इसकी वजह इन स्कूलों में मुस्लिम बच्चों की संख्या 70 प्रतिशत से ज्यादा होना बताया गया था। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि इलाके के कुछ मुस्लिम युवकों ने छुट्टी के दिन बदलने की शुरुआत दो-तीन स्कूलों से करवाई थी। फिर यह बढ़ते-बढ़ते 100 से ज्यादा स्कूलों तक पहुँच गई।

इसके बाद ही दुमका में 33 सरकारी स्कूलों के नाम में उर्दू जोड़े जाने का मामला सामने आया था। ख़बरों में बताया गया था कि इन स्कूलों में भी दूसरे स्कूलों की तरह हिंदी मीडियम में पढ़ाई होती है। लेकिन, छुट्टी जुमे को होती है। मुस्लिम बहुल इलाके में इन स्कूलों में सप्ताह की शुरुआत शनिवार से होती है। बच्चों को दिए जाने वाले मिड डे मिल का जो मेन्यू स्कूल की दीवारों में लिखा गया है, उसमें भी सप्ताह की शुरुआत शनिवार से दिखाया गया है। रविवार को मेन्यू में चावल, दाल व हरी सब्जी के प्रावधान का उल्लेख है। साथ ही शुक्रवार के दिन वाला कॉलम छुट्टी के चलते खाली है। यहाँ पर जुमा लिखा हुआ है।

गौरतलब है कि झारखंड के ही गढ़वा में एक स्कूल में मुस्लिम समुदाय द्वारा प्रिंसिपल पर इस्लामी नियम लागू करवाने के लिए दबाव बनाने का मामला भी सामने आया था। रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम समुदाय ने प्रिंसिपल को कहा था कि क्षेत्र में उनकी आबादी 75% है। इसलिए नियम भी उन्हीं के हिसाब से होंगे। पहले यहाँ ‘दया का दान विद्या का…’ प्रार्थना करवाई जाती थी। हालाँकि अब ‘तू ही राम है तू ही रहीम’ प्रार्थना स्कूल में होने लगी। इसके साथ स्कूल में बच्चों को हाथ जोड़ कर प्रार्थना करने से भी मना कर दिया गया था।

कनाडा में रिपुदमन सिंह की गोली मारकर हत्या, ISI का हाथ होने का अंदेशा: सिखों के लिए PM मोदी के कार्यों को सराहा था

कनाडा (Canada) के मशहूर सिख नेता 75 वर्षीय रिपुदमन सिंह मलिक (Ripudaman Singh Malik) की गुरुवार (14 जुलाई 2022) सुबह 9:30 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई। जब वह अपने ऑफिस के सामने कार में बैठे थे, तभी कुछ अज्ञात युवकों ने उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने प्राथमिक उपचार देकर उन्हें होश में लाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटनास्थल से एक जलती हुई कार बरामद की गई है।

यह घटना ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे शहर के 128 स्ट्रीट के 8200 ब्लॉक की घटना है। हत्यारे एक कार में आए थे। हत्या को अंजाम देने के बाद आरोपितों ने कार को आग के हवाले कर दिया। ऐसा बताया जा रहा है कि सुबूत मिटाने के लिए कार में आग लगाई गई। फिलहाल हत्या के कारणों का पता नहीं चला है। सीबीसी न्यूज ने चश्मदीदों का हवाला देते हुए बताया है कि उन्होंने 3 गोलियाँ चलने की आवाज सुनी और यह टारगेट किलिंग का मामला लगता है।

खबर की पुष्टि करते हुए मलिक के बहनोई जसपाल सिंह ने ANI से बात करते हुए कहा, “हमें इसके बारे में जानकारी नहीं है कि रिपुदमन को किसने मारा। उनकी छोटी बहन कनाडा जा रही है।”

शिरोमणि अकाली दल दिल्ली के अध्यक्ष और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के पूर्व प्रमुख परमजीत सिंह सरना ने एक बयान में कहा, “कनाडा में सरदार रिपुदमन सिंह मलिक की मौत पर मुझे काफी दुख हुआ है। क्षति अपूरणीय है। सरदार मलिक ने कई खालसा स्कूल चलाए और कनाडा में मानवीय प्रयासों में सबसे आगे थे। उनके परिवार के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना है। हमें उम्मीद है कि कनाडा के अधिकारी उनकी हत्या की गहन जाँच शुरू करेंगे और दोषियों को सजा दिलाएँगे।”

हाल ही में रिपुदमन सिंह ने की थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ

रिपुदमन सिंह मलिक भारतीय पीएम मोदी के प्रशंसक थे। उन्हें साल 2020 में सिंगल एंट्री वीजा और 2022 में मल्टीपल एंट्री वीजा दिया गया था। इस दौरान उन्होंने भारत में आंध्र प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और महाराष्ट्र में कई तीर्थ यात्रा की थी।

इस साल की शुरुआत में उन्होंने पीएम मोदी को एक खत लिखकर उनकी तारीफ की थी। खालसा स्कूल कनाडा के प्रधान, खालसा क्रेडिट यूनियन के संस्थापक रिपुदमन सिंह मलिक ने अपनी चिट्ठी में मोदी सरकार की ओर से सिख समुदाय के लिए उठाए गए कई अभूतपूर्व सकारात्मक कदमों के लिए ह्रदय से आभार व्यक्त किया था।

मोदी सरकार ने 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस घोषित कर दिया था। रिपुदमन ने इसके लिए भी पीएम मोदी की तारीफ की थी। उल्लेखनीय है कि 26 दिसंबर 1704 को सिखों के दसवें एवं अंतिम गुरु गोबिंद सिंह के 9 वर्ष और 6 वर्ष के दो बेटों को मुगल आक्रांता ने दीवारों में चुनवा दिया था।

मलिक ने पीएम मोदी और भारत सरकार के खिलाफ सिख समुदाय के कुछ सदस्यों के संगठित अभियान पर भी चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने पेंडिंग मुद्दों के समाधान के लिए सरकार के साथ काम करने का वादा करते हुए सिख समुदाय को एक अलग पत्र भी लिखा था। पत्र में उन्होंने कहा था, “पंजाब में हिंसा पंजाब और पूरे भारत और दुनिया भर में सिख समुदाय के हितों को नुकसान पहुँचाएगी। मैं विश्व शांति के लिए अपना दैनिक अरदास करता हूँ, क्योंकि मुझे अपने समुदाय या किसी समुदाय को हिंसा के कारण पीड़ित देखना पसंद नहीं है।”

उन्होंने पत्र में आगे कहा था, “मैं नहीं मानता कि सिख समुदाय के प्रति सकारात्मक संकेतों को देखते हुए प्रधानमंत्री की गलत तरीके से आलोचना करना सही है। आलोचना करने के बजाय हमें भविष्य के लिए सकारात्मक साझेदारी की दिशा में उनके नेतृत्व में भारत सरकार की सराहना और सार्थक रूप से जुड़ना चाहिए।”

खालिस्तानी विचारधारा से दूर हो गए थे रिपुदमन सिंह

बताया जाता है कि रिपुदमन सिंह पहले खालिस्तान हिमायती थे, लेकिन बाद में उनकी विचारधारा बदल गई थी। अंतिम समय तक वह सिख समुदाय के लोगों को अलगाववादी नेताओं से दूर रहने के लिए प्रेरित करते थे। रिपुदमन सिंह की हत्या कट्टरपंथियों द्वारा किए जाने की आशंका जताई जा रही है। वह खालिस्तान की विचारधारा से दूर होकर भारत सरकार के प्रति कनाडा के कट्टरपंथियों में अलख जगा रहे थे।

रिपुदमन सिंह मलिक श्री गुरु ग्रंथ साहिब की छपाई कर चर्चा में आए थे। रिपुदमन और बलवंत सिंह की ओर से प्रकाशित पावन स्वरूपों के मुद्दे पर कनाडा की सिख संगत में भारी रोष था। मामला श्री अकाल तख्त साहिब तक भी पहुँचा, इस कारण रिपुदमन सिंह ने छपाई बंद कर दी थी और पावन स्वरूप शिरोमणि कमेटी को सौंप दिए थे।

बता दें कि रिपुदमन सिंह मलिक उन व्यक्तियों में से एक थे, जिन पर साल 1985 में एयर इंडिया की फ्लाइट (Air India bombing Case) 182 ‘कनिष्क’ पर बम हमले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में उन पर 20 सालों तक मुकदमा भी चला था। हालाँकि, साल 2005 में उन्हें बरी कर दिया गया था।

क्या हो सकती है हत्या की वजह?

वैंकूवर सन ने 1985 के कनिष्क बम विस्फोट के बाद आतंकवाद की जाँच करने वाले रिटायर्ड आरसीएमपी डिप्टी कमिश्नर गैरी बास के हवाले से कहा कि बमबारी के बाद मलिक के कई दुश्मन थे। बास का कहना है कि एयर इंडिया बमबारी में उनकी कथित संलिप्तता उनकी हत्या के कारणों में से एक हो सकती है। हालाँकि, भारतीय रक्षा विश्लेषकों का मानना ​​​​है कि उनकी हत्या का एयर इंडिया बमबारी से नहीं, बल्कि पीएम मोदी की तारीफ करना हो सकता है।

वहीं पूर्व आर्मी मेजर और डिफेंस एनालिस्ट गौरव आर्य ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “खालिस्तानियों में निराशा की एक भावना है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई उन्हें पहले की तरह समर्थन नहीं दे रही है। यह धन की कमी और FATF के कारण भी हो सकता है। रिपुदमन सिंह ने हाल ही में पीएम मोदी की तारीफ की थी। ऐसा हो सकता है कि ISI ने इसे अपमान की तरह देखा और उन्हें खत्म कर दिया।”

रिपुदमन सिंह ने प्रधानमंत्री को सिख समुदाय के लाभ के लिए उनके और भारतीय अधिकारियों द्वारा किए गए कार्यों को बदनाम करने की कोशिश करने वाले खालिस्तानियों को लेकर भी चेतावनी दी थी। इसे भी हत्या की वजह के रूप में देखा जा रहा है।

बरेली में BJP नेता पर तलवार से हमला, सावन में मीट शॉप बंद करवाने की प्रशासनिक कार्रवाई से भड़के लोगों ने दिया अंजाम

उत्तर प्रदेश के बरेली में मीट शॉप बंद करवाने की कार्रवाई से नाराज कुछ लोगों ने भाजपा नेता अंकित भाटिया पर हमला कर दिया। जख्मी नेता का इलाज चल रहा है। घटना के विरोध में हिन्दू संगठनों द्वारा मस्ज्दि के आगे धरने की भी सूचना है। पुलिस ने FIR दर्ज करते हुए 4 आरोपितों को हिरासत में लिया है। घटना 14 जुलाई 2022 (गुरुवार) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना प्रेम नगर थाना क्षेत्र के रामजानकी रोड की है। यहाँ पर प्रशासन के आदेश पर सावन के पहले दिन नगर निगम की टीम माँस की दुकानें बंद करवाने पहुँची थी। इस दौरान वहाँ मौजूद भाजपा नेता अंकित भाटिया पर प्रशासन की मुखबिरी का आरोप लगा कर उन पर तलवारों से हमला कर दिया गया। भाजपा नेता को अस्पताल ले जाया गया और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

भाजपा नेता पर हमले का CCTV फुटेज सामने आया है। इसमें आप देख सकते हैं कि सड़क किनारे कुछ लोगों से बात कर रहे भाटिया पर अचानक ही करीब आधे दर्जन लोगों की भीड़ हमला कर देती है। कुछ के हाथों में हथियार भी दिखाई दे रहे हैं। उनसे बचने के लिए भाजपा नेता अंकित भाटिया भागते हैं तो उनका पीछा किया जाता है। इससे बाजार में अफरातफरी मच जाती है।

इस घटना के वायरल हो रहे एक अन्य वीडियो में अंकित भाटिया के कपड़े फ़टे दिखाई दे रहे हैं। कपड़ों पर खून के धब्बे भी हैं। आसपास हिन्दू संगठन के लोग और पुलिसकर्मी भी खड़े हैं। सामने की तरफ HDFC बैंक है। इस स्थान पर अल-हंब और अल-नवाब नाम की चिकन की दुकानें हैं।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक घटना की शुरुआत शाम 4 बजेहुई। बिरयानी बेचने वाले अल नवाज होटल द्वारा पक्के नाले पर अवैध अतिक्रमण किया गया था। उसी को हटाने के दौरान ये नोकझोंक हुई। हालाँकि नगर निगम की टीम ने इस अतिक्रमण को हटा दिया। इसी से नाराज हो कर नवाज और उसके साथियों ने अंकित भाटिया के साथ हिन्दू युवा वाहिनी के पदाधिकारी नरेंद्र राणा और कमल राणा पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। इस घटना के चलते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और बाद में पथराव भी हुआ।

2013 के ट्वीट्स दिखा ‘पुरानी करीबी’ बता रहे नेटिजन्स, रिपोर्ट में दावा- रोहमन से ब्रेकअप के बाद ललित मोदी के करीब आईं सुष्मिता सेन

IPL के पूर्व चेयरमैन और भगोड़े कारोबारी ललित मोदी (Lalit Modi) ने गुरुवार (14 जुलाई 2022) को एक ट्वीट से हलचल मचा दी। उन्होंने पूर्व मिस यूनिवर्स और अभिनेत्री सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) के साथ कुछ तस्वीरें साझा करते हुए उन्हें ‘बेटरहाफ’ बताया।

जब दोनों की शादी की खबरें मीडिया में आई तो कुछ देर बाद उनका एक और ट्वीट आया। इसमें सफाई देते हुए उन्होंने लिखा- स्पष्ट कर दूँ कि शादी नहीं हुई है, एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। शादी भी जल्द होगी। सुष्मिता सेन की अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई हैं। हालाँकि, निजी जिंदगी को लेकर वे लगातार चर्चा में रहती हैं। कुछ समय पहले तक वे अपने से 15 साल छोटे रोहमन शॉल (Rohman Shawl) के साथ लिव इन में रहने को लेकर चर्चा में थीं। दोनों के जल्द शादी की खबरें भी आई। फिर पता चला कि ब्रेकअप हो गया है।

ऐसे में ललित मोदी के ताजा ट्वीट के बाद 2013 के कुछ ट्वीट्स वायरल हो रहे हैं। इसके आधार पर नेटिजन्स अटकलें लगा रहे हैं कि दोनों काफी समय से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। कुछ ऐसी तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं जिनमें ललित मोदी और उनकी दिवंगत पत्नी मीनल के साथ भी सुष्मिता नजर आ रही हैं।

फोटो साभार: ईटाइम्स

हालॉंकि ईटाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि रोहमन के साथ रिश्ते से अलग होने तक सुष्मिता और ललित मोदी एक-दूसरे को डेट नहीं कर रहे थे। रिपोर्ट बताती है कि ललित मोदी की वाइफ मीनल साल 2018 तक जीवित थीं। दोनों बहुत खुश थे और अपने रिश्ते के प्रति कमिटेड भी थे। मीनल के निधन के बाद से ललित मोदी सिंगल थे। रोहमन से ब्रेकअप के बाद सुष्मिता भी अकेली थीं। इसके बाद ही दोनों करीब आए और अब जल्द शादी भी कर सकते हैं।

फोटो साभार: ईटाइम्स

बता दें कि सुष्मिता सेन और रोहमन शॉल का दिसंबर 2021 में ब्रेकअप हुआ था। रोहमन से पहले उनका कई हस्तियों के साथ नाम जुड़ा। इनमें विक्रम भट्‌ट, रणदीप हुड्‌डा, वसीम अकरम, ऋतिक भसीन और मुद्दसर अजीज शामिल हैं।

जिस पाकिस्तानी पत्रकार ने की भारत की जासूसी, उसे नहीं बुलाने पर भड़क गए थे हामिद अंसारी: आयोजक का दावा, कहा- झूठ बोल रहे पूर्व उपराष्ट्रपति, सरकार करे जाँच

पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा (Nusrat Mirza) द्वारा भारत आकर जासूसी करने के मामले में नया खुलासा हुआ है। ऑल इंडिया बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आदिश अग्रवाल ने एक विस्तृत बयान जारी कर पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर जानकारी छिपाने और झूठ बोलने का आरोप लगाया है। सरकार से इसकी जाँच की माँग की है। डॉ. अग्रवाल इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ ज्यूरिस्ट्स के अध्यक्ष भी हैं।

बयान में बताया गया है कि अंसारी का कार्यालय चाहता था कि मिर्जा को सम्मेलन में बुलाया जाए। इसे स्वीकार नहीं किए जाने पर वे नाराज भी हो गए थे। डॉ. अग्रवाल ने जिस सम्मेलन को लेकर यह दावा किया है ​वह दिल्ली के विज्ञान भवन में 11 और 12 दिसंबर 2010 को आयोजित हुआ ​था।

उन्होंने आतंकवाद के मसले पर जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम द्वारा 27 अक्टूबर 2009 को दिल्ली के ओबेरॉय होटल में आयोजित एक सम्मेलन की तस्वीर भी शेयर की है। इसमें अंसारी और मिर्जा को एक साथ मंच साझा करते हुए दिखाया है। बताया है कि इस सम्मेलन में हामिद अंसारी, दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला और अन्य मुस्लिम नेताओं ने भाग लिया था। डॉ अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि हामिद अंसारी और उनके दोस्त जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम के सम्मेलन में पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा के साथ दोस्ती कर रहे थे।

बयान में कहा गया है कि कि ऐसा लगता है कि हामिद अंसारी और कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकारी एजेंसियों और जनता को गुमराह करने के लिए जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम के सम्मेलन के बारे में खुलासा नहीं किया है। ऐसे में सरकार से अनुरोध है कि वह इस मामले की जाँच करे, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और जासूसी से संबंधित है।

बयान में कहा गया है कि अंसारी और रमेश ने केवल 11 और 12 दिसंबर 2010 को विज्ञान भवन में आयोजित न्यायविदों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का ही उल्लेख किया है। इस सम्मेलन में अंसारी ने हिस्सा लिया था। लेकिन नुसरत मिर्जा इसमें आमंत्रित नहीं थे। यहाँ तक ​​कि नुसरत मिर्जा ने भी अपने साक्षात्कार में इस सम्मेलन का उल्लेख नहीं किया है।

डॉ. अग्रवाल का दावा है कि जब इस सम्मेलन का आयोजन हो रहा था तो तत्कालीन हामिद अंसारी को इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था। अशोक दीवान उस समय उपराष्ट्रपति सचिवालय के निदेशक थे। बयान में कहा गया है, “दीवान ने मुझे बताया था कि उपराष्ट्रपति (हामिद अंसारी) चाहते हैं कि पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा को सम्मेलन में आमंत्रित किया जाए। लेकिन हम इस अनुरोध को स्वीकार नहीं कर सके क्योंकि मिर्जा पाकिस्तानी मीडिया से थे और हमने पाकिस्तान से जजों या वकीलों को आमंत्रित नहीं किया था।”

डॉ अग्रवाल के अनुसार जब दीवान को यह बात पता चली कि हमने मिर्जा को आमंत्रित नहीं किया है, तो उन्होंने सम्मेलन से एक दिन मुझे फोन कर नाराजगी जताई। यह भी बताया कि हामिद अंसारी को यह बुरा लगा है और अब वे केवल बीस मिनट के लिए समारोह में शामिल होंगे। अग्रवाल के अनुसार शुरुआत में अंसारी ने एक घंटे के लिए कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सहमति दी थी।

गौरतलब है नुसरत मिर्जा (Nusrat Mirza) ने 10 जुलाई, 2022 को एक इंटरव्‍यू में कई हैरान करने वाले खुलासे किए थे। पाकिस्तानी पत्रकार और YouTuber शकील चौधरी (Shakil Chaudhary) को दिए इंटरव्यू में नुरसत मिर्जा ने दावा किया था कि उन्होंने 2005 से 2011 के बीच भारत दौरे के दौरान पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के लिए कई जानकारियाँ एकत्र की थीं। उन्हें पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और ‘मिल्‍ली गैजेट’ अखबार के मालिक जफरुल इस्लाम खान ने भारत में आमंत्रित किया था।

जहाँगीरपुरी में हिंदुओं पर हमले की 6 दिन पहले ही हो गई थी तैयारी, छत पर जमा थे शीशे-पत्थर: दिल्ली की कोर्ट में चार्जशीट दाखिल, 8 दंगाई अब भी फरार

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में 16 अप्रैल 2022 को हनुमान जयंती शोभायात्रा में शामिल हिंदुओं पर हमला हुआ है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने रोहिणी कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसके मुताबिक हमले से 6 दिन पहले ही इसकी साजिश रची जा चुकी थी। छतों पर शीशे और पत्थर जमा कर लिए गए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 45 नामजद आरोपितों में 37 अब तक गिरफ्तार किए गए हैं। हमले की साजिश मुख्य रूप से तबरेज अंसारी, मोहम्मद अंसार और शेख इशर्फिल ने रची थी। मोहम्मद अंसार और तबरेज गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि शेख इशर्फिल की तलाश की जा रही है। काँच की बोतलें और पत्थर फेंकने के लिए शेख इशर्फिल की ही छत का प्रयोग किया गया था। पुलिस ने इन तमाम जानकारियों को जुटाने के लिए 2300 मोबाइल फोन के डाटा और 58 सीसीटीवी फुटेज की जाँच की।

शेख इशर्फिल को इलाके का पार्किंग माफिया भी कहा जाता है। उस पर CAA हिंसा में भी सक्रिय भागीदारी का आरोप है। उसके 2 बेटे भी आपराधिक सोच वाले बताए जा रहे हैं, जिनके नाम अशनूर और मोहम्मद अली हैं। पुलिस ने इस केस में 2 नाबालिगों को भी पकड़ा है जिनका मामला किशोर न्याय बोर्ड में अलग से चल रहा है।

पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक अब तक आरोपितों की निशानदेही पर हमले में प्रयोग कई हथियार बरामद कर लिए गए हैं। पुलिस के मुताबिक आरोपितों से 9 पिस्तौल, 9 तलवारें और कई कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस ने यह भी बताया है कि हमले के दौरान शोभायात्रा में शामिल लोगों को काफी नुकसान पहुँचाने का इरादा था जो पुलिस की सक्रियता से सफल नहीं हो पाया। 2063 पन्नों की इस चार्जशीट में बताया गया है कि 8 आरोपितों की तलाश की जा रही है। गिरफ्तार 37 आरोपितों में से 20 को CCTV में पहचान कर पकड़ा गया है।

पुलिस को अभी सद्दाम, सुलेमान, कलिया, अशनूर, जहाँगीर, हशमत और शेख सिकंदर की भी तलाश है। इस चार्जशीट में कुछ मीडियाकर्मियों को भी गवाह बनाया गया है। पुलिस ने 21 फोन जब्त करने का भी दावा करते हुए मामले में 132 गवाह पेश किए जिसमें 85 गवाह पुलिस विभाग से हैं। उनसे पुलिस ने 34 वायरल वीडियो जमा किए हैं। आरोप पत्र में यह भी बताया गया है कि जिस शोभायात्रा पर हमला किया गया था उसके लिए प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई थी, जिसकी जाँच अलग से की जा रही है।

PFI का खतरनाक एजेंडा ‘इंडिया विजन 2047’: इस्लामी सरकार बनाना, ‘कायर हिंदुओं’ की हत्या के लिए हथियार प्रशिक्षण, न्यायपालिका में घुसपैठ- एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

बिहार पुलिस ने आज गुरुवार (14 जुलाई 2022) को 8 पन्नों वाले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के दस्तावेज को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए, जो भारत के ‘कायर हिंदुओं’ को सबक सिखाने की बात करता है। यह दस्तावेज आने वाले वर्षों के लिए पीएफआई के लक्ष्य के बारे में बताता है।

‘इंडिया विज़न 2047’ नाम के दस्तावेज़ को पीएफआई ने अपने कैडर के बीच आंतरिक रूप से प्रसारित किया है। उसका लक्ष्य ‘कायर हिंदुओं’ पर पूरी तरह से हावी होना और उन्हें अपने अधीन करना है। यह लक्ष्य तब ही प्राप्त किया जा सकता है, जब पीएफआई के पीछे 10 प्रतिशत मुस्लिम एकजुट हों।

इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि PFI अपने प्रशिक्षित कैडरों और तुर्की जैसे इस्लामी देशों की मदद से भारत के खिलाफ एक पूर्ण सशस्त्र विद्रोह शुरू करने की योजना बना रहा है। इस कट्टरपंथी इस्लामी संगठन ने अन्य इस्लामी देशों से भी भारत सरकार और बहुसंख्यक हिंदुओं को ‘घुटनों पर’ लाने में मदद करने की अपील की है। पुलिस ने कहा कि सिमी (SIMI) के पूर्व आतंकवादी परवेज और पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए जलालुद्दीन नाम के पूर्व पुलिस अधिकारी ने इसके लिए लाखों रुपए जुटाए हैं।

ऑपइंडिया ने पूरे 8 पृष्ठ के दस्तावेज़ तक पहुँच प्राप्त कर ली है, जिसकी सामग्री पुलिस के अब तक के खुलासे से कहीं अधिक खतरनाक और चौंकाने वाली है। ‘इंडिया विजन 2047’ दस्तावेज़ में एक टैगलाइन है जो पीएफआई के लक्ष्य को रेखांकित करती है – “भारत में इस्लामी शासन की ओर”।

इस खतरनाक दस्तावेज़ में ‘भारत में मुस्लिमों की वर्तमान स्थिति’, ‘हर घर में पीएफआई’ तक की रणनीति, भारत 2047 योजना और भारत में मुस्लिम समुदाय के लिए कार्रवाई योग्य बिंदुओं की बारे में वर्णन डराने वाली है।

इस्लाम का शासन स्थापित करने और ‘कायर हिंदुओं’ को वश में करने के लिए आने वाले वर्षों में मुस्लिम आबादी क्या करना चाहती है, इसका बिंदु-दर-बिंदु विवरण निम्नलिखित है।

भारत में ‘मुस्लिमों की वर्तमान स्थिति’ के बारे में क्या कहता है दस्तावेज़

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के इस ‘विजन डॉक्युमेंट’ का पहला उपशीर्षक भारत में ‘मुस्लिमों की वर्तमान स्थिति’ है। दस्तावेज़ के इस खंड में मुस्लिमों के पीड़ित होने की उसी कहानी को आगे बढ़ाया गया है, जिसका उपयोग इस्लामवादियों ने अपने मजहबी साथियों को हथियार उठाने के लिए प्रेरित करने के लिए वर्षों से किया है।

  • PFI इस बात पर अफसोस जताता है कि भारत का शासक समुदाय मुस्लिम अब दोयम दर्जे का नागरिक बनकर रह गया है। इसमें कहा गया है कि देश में 9 जिले ऐसे हैं, जहाँ मुस्लिमों की आबादी 75% से ऊपर है।
  • पीएफआई का कहना है कि मुस्लिमों की वर्तमान स्थिति अंग्रेजों के समय से शुरू हुई थी। उसका दावा है कि अंग्रेजों ने मुस्लिमों के खिलाफ भेदभावपूर्ण नीतियाँ अपनाईं और हिंदुओं का ‘पक्ष’ लिया। दस्तावेज में कहा गया है, “संपत्ति के अधिकार आदि के मामले में पहले मुस्लिमों को प्राप्त विशेषाधिकारों को वापस ले लिया गया था, सरकारी नौकरियों से वंचित कर दिया गया था और व्यापार सुविधाओं को प्रतिबंधित कर दिया गया था। स्वतंत्रता की शुरुआत के बाद से उच्च जाति के हिंदुओं के प्रभुत्व वाली भारत सरकार ने मुस्लिमों के खिलाफ भेदभावपूर्ण कदम उठाए।”
  • दस्तावेज़ में कहा गया है कि मुस्लिम बच्चे दलित बच्चों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं और ‘सांप्रदायिक हिंदुत्ववादी ताकतों के उदय ने मुस्लिमों की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थितियों को और गंभीर कर दिया है। मुस्लिमों का राजनीतिक अस्तित्व इतना नीचे आ गया है कि भारत सरकार शरीयत से संबंधित मामलों पर भी मुस्लिमों से सलाह लेने की जहमत नहीं उठाती’।
  • इसमें कहा गया है कि मुस्लिम समुदाय ‘मूर्खतापूर्ण मतभेदों’ से विभाजित है और इसलिए ‘हिंदुत्व ताकतों’ से लड़ना मुश्किल है। इसमें आगे कहा कि मुस्लिमों को दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा समुदाय (भारतीय आबादी के मामले में) होने के नाते ‘दुनिया को एक मॉडल’ देने की जरूरत है कि कैसे समुदाय को ‘मुस्लिम विरोधी ताकतों’ से लड़ने की जरूरत है।
  • इस्लामी संगठन ने मुस्लिम समुदाय में अपनी भूमिका के बारे में भी बताया है। लिखा है, “दुनिया भारतीय मुस्लिमों को एक मॉडल के रूप में देखती है और भारतीय मुस्लिम समुदाय असहाय होकर किसी चमत्कार का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। अभी या बाद में नेतृत्व को समुदाय के भीतर से उभरना होगा, ताकि खुद को तत्कालिक खतरों से बचाया जा सके और स्वतंत्रता, सच्चाई और समानता के आधार पर समाज के वंचित वर्गों के लिए एक वास्तविक विकास मॉडल प्रदान किया जा सके। यह वह भूमिका है, जिसमें पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया खुद को देखता है।

PFI का विजन 2047

  • दस्तावेज़ में PFI का कहना है कि उसने भारत में इस्लामी शासक स्थापित करने के लिए खुद को वर्ष 2047 की तारीख दी है।
  • दस्तावेज़ में कहा गया है, “हम उस 2047 का सपना देखते हैं, जिसमें राजनीतिक सत्ता मुस्लिम समुदाय के पास लौटकर आती है, जिसे ब्रिटिश राज ने अन्यायपूर्ण तरीके से छीन लिया था।”
  • ध्यान देने वाली बात यह है कि कि PFI के दस्तावेज में कहा गया है कि मुस्लिम समुदाय हमेशा से अल्पसंख्यक रहा है और जीतने के लिए उसे बहुमत की जरूरत नहीं है। दस्तावेज में कहा गया है, “अगर हम इस्लाम के इतिहास में देखें तो मुस्लिम हमेशा अल्पसंख्यक थे और जीत के लिए हमें बहुमत की आवश्यकता नहीं है। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) को विश्वास है कि अगर कुल मुस्लिम आबादी का 10% उसके साथ आता है तो भी PFI कायर बहुसंख्यक समुदाय को उसके घुटनों पर ला देगा और भारत में इस्लाम के वैभव को वापस ला देगा।”
  • दस्तावेज़ स्पष्ट रूप से कहता है कि PFI कैडर और नेता भारत में एक इस्लामी सरकार की स्थापना की दिशा में काम कर रहे हैं। दस्तावेज में कहा गया है, “पीएफआई कैडरों और मुस्लिम युवाओं को बार-बार बताया जाना चाहिए कि वे सभी दीन (इस्लाम) के लिए काम कर रहे हैं। अल्लाह ने दुनिया/कायनात की रचना की थी और मुस्लिम दो वजहों से बने थे। पहला, अल्लाह का कानून स्थापित करने के लिए और दूसरा, मुस्लिम धरती पर दाई है। यह हमेशा ध्यान में रखा जाना चाहिए कि इस्लाम का शासन स्थापित करना है।”

PFI के दस्तावेजों के अनुसार, इस्लामी शासन के चरण

पीएफआई ने अपने दस्तावेज़ में भारत में इस्लामी शासन स्थापित करने की दिशा में प्रगति को चरणों में विभाजित किया है। पीएफआई ने इसके लिए 4 चरण निर्धारित किए हैं।

चरण-1

भारत में इस्लामी शासन स्थापित करने के लेकर पहले चरण में PFI का कहना है कि हर क्षेत्र में और हर वर्ग के मुस्लिमों को पीएफआई के बैनर तले एकजुट होने की जरूरत है। वह और अधिक लोगों की भर्ती करेगा और उन्हें हथियारों का प्रशिक्षण देगा, जिनमें छड़, तलवार और अन्य हथियारों का उपयोग शामिल है। इस प्रशिक्षण में आक्रमण करने और खुद को बचाने की तकनीक भी शामिल होगी।

दस्तावेज में कहा गया है, “इसके लिए मुस्लिम समुदाय को उनके कष्टों को बार-बार याद दिलाने और जहाँ कोई शिकायत निवारण तंत्र (जहाँ मुस्लिमों की समस्याओं के लिए उनकी मदद की जा सके) नहीं है, वहाँ उसे स्थापित करने की जरूरत है। पार्टी सहित हमारे सभी फ्रंटल संगठनों को नए सदस्यों के विस्तार और भर्ती पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। साथ ही हमें भारतीय होने की अवधारणा से परे सभी के बीच एक इस्लामी पहचान स्थापित करनी होगी। हम अपने PE विभाग में सदस्यों की भर्ती और प्रशिक्षण शुरू करेंगे, जिसमें उन्हें तलवारों, छड़ों और अन्य हथियारों के हमलावर और रक्षात्मक तकनीकों का प्रशिक्षण दिए जाएँगे।”

चरण-2

अपने चरण-2 में PFI खुले तौर पर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने की अपील करता है। इसमें कहा गया है कि मुस्लिमों की कष्टों को बार-बार दोहराया और उन्हें याद दिलाया जाना चाहिए। इसके साथ ही हिंसा का इस्तेमाल ‘चुनिंदा विरोधियों’ (हिंदुओं) को आतंकित करने और उनकी सामूहिक ताकत को देखने के लिए किया जाना चाहिए। वे आगे बड़े पैमाने पर लामबंदी और ‘सुरक्षा बलों के लिए प्रशिक्षित कैडर के एक्सपोजर’ को सीमित करने की बात करता है।

चरण 2 तब बताता है कि वह ‘अम्बेडकर’, ‘संविधान’ आदि जैसी पंच लाइनों का उपयोग करके अपनी नापाक गतिविधियों को कैसे आगे बढ़ाता है।

दस्तावेज कहता है, “उन सभी कैडरों से जिन्हें PE दिया जा रहा है, प्रतिभावान लोगों को देखा जाएगा और उन्हें हथियारों और विस्फोटकों का एडवांस प्रशिक्षण देने के लिए भर्ती किया जाएगा। इस बीच पार्टी को ‘राष्ट्रीय ध्वज’, ‘संविधान’ और ‘अंबेडकर’ जैसी अवधारणाओं का उपयोग इस्लामी शासन स्थापित करने के वास्तविक इरादे को ढालने के रूप में और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ओबीसी तक पहुँचने के लिए करना चाहिए। हम कार्यपालिका और न्यायपालिका के हर स्तर पर घुसपैठ करेंगे और सूचनाओं को एकत्र करने उसे अपने हित में इस्तेमाल कर अनुकूल परिणाम प्राप्त करने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा, फंडिंग और अन्य मदद के लिए विदेशी इस्लामी देशों के साथ संपर्क स्थापित करना है।”

चरण-3

हथियार का प्रशिक्षण देने, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका में घुसपैठ करने और विदेशी इस्लामी राष्ट्रों के साथ संपर्क करने की अपनी रणनीति की रूपरेखा तैयार करने के बाद आतंकवादी संगठन PFI अपने तीसरे चरण की बात करता है। इसमें वह कहता है-

  • इस चरण में पीएफआई का कहना है कि पार्टी (PFI) को एससी/एसटी/ओबीसी समुदाय के साथ घनिष्ठ गठबंधन बनाना चाहिए और चुनाव में कम-से-कम कुछ सीटें जीतनी चाहिए। PFI जो गठबंधन बनाना चाहता है, उसमें 50% मुस्लिमों की हिस्सेदारी और 10% एससी/एसटी/ओबीसी की हिस्सेदारी होगी।
  • पीएफआई आरएसएस और एससी/एसटी/ओबीसी के बीच विभाजन पैदा करने की बात करता है। दस्तावेज़ में कहा गया है, “हमें यह दिखाकर आरएसएस और एससी/एसटी/ओबीसी के बीच एक विभाजन पैदा करने की जरूरत है कि आरएसएस केवल उच्च जाति के हिंदुओं के हित की बात करने वाला संगठन है।”
  • पीएफआई एक विशुद्ध मुस्लिम पार्टी की आवश्यकता को आगे बढ़ाने के लिए सभी ‘धर्मनिरपेक्ष’ दलों को बदनाम करने की बात करता है। इससे मुस्लिमों और एससी/एसटी/ओबीसी की जरूरतें पूरा होंगी।
  • पीएफआई ने अपने कैडरों से इस स्तर पर हथियार जमा करने के लिए कहा है।
  • डॉक्यूमेंट में कहा गया है, “PE विभाग को अपने सदस्यों के अनुशासन, यूनीफॉर्म में मार्च और जहाँ कहीं भी आवश्यक हो समुदाय की रक्षा के लिए हमला करके अपनी ताकत का प्रदर्शन करना चाहिए। इस चरण में हथियारों और विस्फोटकों का भंडारण किया जाना चाहिए।”

चरण-4

  • इस चरण में पीएफआई का कहना है कि वह अन्य सभी मुस्लिम और धर्मनिरपेक्ष संगठनों को दरकिनार करते हुए सभी मुस्लिमों का निर्विवाद नेता बनेगा।
  • इसे 50% एससी/एसटी/ओबीसी का विश्वास भी हासिल करना चाहिए और उनके प्रतिनिधि के रूप में भी उभरना चाहिए।
  • पीएफआई का कहना है कि अगर वह इस समर्थन को हासिल कर लेती है तो उसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता हथियाना काफी आसान होगा।
  • डॉक्युमेंट कहता है, “एक बार सत्ता में आने के बाद कार्यपालिका और न्यायपालिका के साथ-साथ पुलिस और सेना में सभी महत्वपूर्ण पदों को वफादार कार्यकर्ताओं से भरा जाएगा। सेना और पुलिस सहित सभी सरकारी विभागों के दरवाजे वफादार मुस्लिमों और एससी/एसटी/ओबीसी को भरने के लिए खोले जाएँगे, ताकि पिछली भर्ती में उनके साथ हुए अन्याय और असंतुलन को ठीक किया जा सके।”
  • दस्तावेज में आगे कहा गया है, “जिन लोगों को हथियारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा था, वे इस बिंदु पर और अधिक ‘खुलकर’ सामने आ जाएँगे और ‘जो उनके (मुस्लिमों के) हितों के विरुद्ध होंगे उन्हें रास्ते से हटा (मार) देंगे’। हमारे PE विभाग की कार्रवाई अधिक स्पष्ट हो जाएगी और इस स्तर पर कैडरों की संख्या में तेजी से वृद्धि होगी। जो हमारे हित के खिलाफ हैं उन्हें खत्म किया जाएगा। ये PE कैडर हमारे विरोधियों द्वारा सुरक्षा बलों पर प्रभाव के खिलाफ एक सुरक्षा कवच के रूप में भी काम करेंगे।”
  • अंतिम चरण में हथियारों के भंडार और सशस्त्र कैडरों को प्रशिक्षित करने के बाद एक इस्लामी संविधान की स्थापना करने और इसके रास्ते में बनने वाले लोगों (खासकर हिंदू) को खत्म करना होगा। डॉक्युमेंट कहता है, “जब हमारे पास पर्याप्त प्रशिक्षित कैडर और हथियारों का भंडार हो जाएगा तो हम इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित एक नए संविधान की घोषणा करेंगे। इस समय बाहरी ताकतें भी हमारी मदद के लिए आ जाएँगी। हमारे विरोधियों का व्यवस्थित और व्यापक रूप से सफाया होगा और इस्लामी गौरव की वापसी होगी।”

PFI द्वारा उल्लेखित वर्तमान में कार्रवाई योग्य बिंदु

मुस्लिमों के लिए शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना: पीएफआई दस्तावेज़ कहता है कि बढ़ते हिंदुत्व की विचारधारा और आरएसएस समर्थित सरकार ने मुस्लिमों को यह विश्वास दिलाने के लिए पर्याप्त कारण दिए हैं कि यह सरकार इस्लाम के हित के खिलाफ काम कर रही है और सरकार एवं मुस्लिम समुदाय के बीच विश्वास की कमी है। इसके लिए पीएफआई के प्रयास बधाई के पात्र हैं।

दस्तावेज में कहा गया है, “मुस्लिम समुदाय को हमेशा बाबरी मस्जिद के विध्वंस, सांप्रदायिक दंगों और मुस्लिमों की लिंचिंग के दौरान उन पर किए गए अत्याचारों के बारे में याद दिलाया जाना चाहिए। सभी राज्य इकाइयों द्वारा मुस्लिमों को यह विश्वास दिलाने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए कि आरएसएस के नेतृत्व वाली सरकार भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने और मुस्लिमों को देश से बाहर निकालने की योजना बना रही है।”

सामूहिक लामबंदी: पीएफआई ने ‘इस्लाम की खोई हुई महिमा’ को वापस पाने के लिए सामूहिक लामबंदी को ‘प्राथमिकता वाले क्षेत्र’ के रूप में घोषित किया है। दस्तावेज़ के अनुसार, इसके 3 पहलू हैं – समावेशी, पहुँच और जुड़ाव।

दस्तावेज के अनुसार, “एक समावेशी संगठन होने का मतलब है कि पॉपुलर फ्रंट में उस समुदाय के सभी लोगों के लिए जगह होनी चाहिए, जो हमारे कारण में योगदान देना चाहते हैं। पहुँच का अर्थ है, समुदाय को मुद्दों के बारे में शिक्षित करके और उसकी प्राथमिकताएँ निर्धारित करके समुदाय से संपर्क करना। जुड़ाव का मतलब न केवल हमारी पहुँच को एकतरफा शिक्षा तक सीमित करना है, बल्कि हमारे एजेंडे में भाग लेने के लिए जनता को भी शामिल करना है। लोगों को उनके अधिकारों के लिए आगे लाना सामूहिक लामबंदी का होगा और इसके अपेक्षित परिणाम मिलेंगे। जनता को जोड़ने के लिए संगठन के भीतर के सभी मौजूदा प्लेटफार्मों का उपयोग किया जाना चाहिए और मौजूदा सामुदायिक प्लेटफार्मों को भी प्रभावित किया जाना चाहिए।”

हर घर में PFI: पीएफआई का उद्देश्य हर मुस्लिम घर से हर सदस्य की भर्ती करना है। हालाँकि, यदि यह संभव नहीं है तो 1) प्रत्येक मुस्लिम घर से कम से कम एक सदस्य की भर्ती करें, यदि नहीं, तो 2) एक व्यक्ति को पार्टी में भर्ती करें। यदि नहीं, तो 3) उनमें से किसी को हमारे किसी भी फ्रंटल संगठन में भर्ती करें, यदि नहीं, तो 4) उन्हें हमारी पत्रिकाओं/लेखों का पाठक बनाएँ या कम से कम उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करें।

मुस्लिमों की भर्ती और उनका प्रशिक्षण: चौंकाने वाली बात यह है कि इस समय PFI हिंदुओं के खिलाफ बेलगाम हिंसा करने की बात करता जा रहा है। वह कहता है कि वास्तव में वह भी नहीं जानता कि लोगों के बीच उसके कितने सशस्त्र जमीनी कैडर हैं और वह यह भी नहीं जानता है कि वे हिंदुओं में कितना भय पैदा करते हैं। इसलिए इसका परीक्षण करने की आवश्यकता है।

पीएफआई के दस्तावेज में कहा गया है कि योग कक्षाओं और ‘स्वस्थ लोग स्वस्थ राष्ट्र’ अभियान की आड़ में उसके PE कैडर को हथियारों की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। दस्तावेज में कहा गया है, “हमारे अच्छी तरह से प्रशिक्षित PE प्रशिक्षकों को कैडरों को हथियारों और विस्फोटकों का प्रशिक्षण देने के लिए राज्य-दर-राज्य भेजा जा रहा है। हमारे पास प्रशिक्षकों की कमी है और संभावित प्रशिक्षुओं की संख्या बहुत बड़ी है। इसके लिए साधन संपन्न उम्मीदवारों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें बेसिक PE कोर्स इंस्ट्रक्टर, सेकेंडरी PE कोर्स इंस्ट्रक्टर और PE मास्टर्स बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।”

दस्तावेज में आगे कहा गया है, “हमारे पास एडवांस PE पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए अभी तक उचित एवं एकांत प्रशिक्षण केंद्र/स्थान नहीं हैं। चुनौती का सामना करने के लिए राज्य इकाइयों को मुस्लिम बहुल इलाकों या दूरदराज के स्थानों में भूखंडों का अधिग्रहण करना चाहिए, ताकि हथियारों और विस्फोटकों के भंडार के लिए उचित प्रशिक्षण सुविधाएँ और डिपो स्थापित किए जा सकें। इन केंद्रों के बारे में केवल चुनिंदा लोगों को जानकारी होना चाहिए। हमारे पास सभी पीएफआई कैडरों और हमसे सहानुभूति रखने वालों को बुनियादी PE में प्रशिक्षित करने के साथ-साथ प्रशिक्षित PE कैडरों की अपनी समर्पित सेना बनाने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना है।”

हिंदुओं और उनके नेताओं के बारे में जानकारी जुटाना तथा विदेशों से मदद माँगना

इस ‘कार्रवाई योग्य बिंदु’ में पीएफआई यह कहता है कि उसे ‘अंतिम शक्ति प्रदर्शन’ से पहले हिंदुओं और हिंदू नेताओं के बारे में विवरण रखना चाहिए। इसका मतलब है कि वह इन हिंदुओं और हिंदू नेताओं की हत्या के लिए जानकारी अपने साथ तैयार रखना चाहता है।

पुलिस द्वारा बरामद PFI के डॉक्यूमेंट में कहा गया है, “अंतिम प्रदर्शन के चरण से पहले हिंदू/आरएसएस नेताओं और उनके कार्यालयों के स्थानों के व्यक्तिगत विवरण के बारे में विस्तृत जानकारी एकत्र करना और तैयार रखना अनिवार्य है। विभिन्न स्तरों पर सूचना विंगों को अपने डेटा-बेस का फॉलोअप और अपडेट करते रहना चाहिए। उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने से हमें उनके खिलाफ कार्रवाई करने में भी मदद मिलेगी। हमारे अंतिम लक्ष्य के रोडमैप में सूचना विंग के महत्व को ध्यान में रखते हुए सभी स्तरों पर विंग के कामकाज को मजबूत और तेज करने की जरूरत है।”

पीएफआई अपने ‘विज़न डॉक्यूमेंट’ को यह कहकर समाप्त करता है कि भारतीय राज्य के साथ पूर्ण रूप से टकराव की स्थिति में उसे तुर्की जैसे ‘दोस्ताना इस्लामी राष्ट्रों’ से मदद की आवश्यकता होगी। PFI कहता है कि उसने तुर्की के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित किए हैं, जबकि अन्य इस्लामी राष्ट्रों तक भी पहुँचने की आवश्यकता है।

दस्तावेज में आगे कहा गया है, “सरकार के साथ पूर्ण शक्ति प्रदर्शन की स्थित में अपने प्रशिक्षित PE कैडरों पर भरोसा करने के अलावा हमें मित्र इस्लामिक देशों से मदद की आवश्यकता होगी। पिछले कुछ वर्षों में PFI ने इस्लाम के ध्वजवाहक तुर्की के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित किए हैं। कुछ अन्य इस्लामी मुल्कों के साथ विश्वसनीय दोस्ती बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।”

कौन है गौहर चिश्ती जिसने दी थी नूपुर शर्मा का ‘सिर तन से जुदा’ करने की धमकी, अब हैदराबाद से हुआ गिरफ्तार, कन्हैयालाल के हत्यारों से भी है कनेक्शन

पैगंबर मुहम्मद को लेकर कथित बयान देने के मामले में नूपुर शर्मा को ‘सिर तन से जुदा’ की धमकी देने वाले अजमेर दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती को पुलिस ने हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया है। 17 जून को गौहर चिश्ती ने अजमेर दरगाह के बाहर सिर तन से जुदा के नारे लगवाए थे। गौहर चिश्ती का कन्हैयालाल की हत्या में भी नाम सामने आया था।

पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और अब उसे अजमेर लाया जा रहा है। दरअसल, भड़काऊ बयानबाजी के मामले में केस दर्ज होने के बाद से ही वो परिवार समेत फरार हो गया था। उसके इस्लामिक कट्टरपंथियों से संबंध भी बताए जा रहे हैं।

कौन है गौहर चिश्ती

उल्लेखनीय है कि अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती से कन्हैयालाल के हत्यारों के कनेक्शन सामने आए थे। गौहर चिश्ती 17 जून को उदयपुर गया था। उसने सर कलम करने के नारे लगवाए थे। वहाँ उसकी मोहम्मद रियाज से मुलाकात की बात भी कही जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि इसी दिन रियाज ने वह वीडियो शूट किया था, जिसमें नबी की शान में गुस्ताखी करने वालों का सिर काटने की बात कही गई थी।

बहिन यह भी बताया जा रहा है कि कन्हैयालाल की हत्या के बाद दोनों हत्यारे गौस मोहम्मद और मोहम्मद रियाज अजमेर में गौहर चिश्ती से मिलने के लिए आ रहे थे, लेकिन रास्ते में पकड़े गए। इसके अलावा गौहर चिश्ती कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पीएफआई का एक्टिव मेंबर भी बताया गया है। ज्ञात हो कि सरवर चिश्ती, गौहर चिश्ती औऱ आदिल चिश्ती एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। सरवर चिश्ती गौहर चिश्ती का चाचा है। जबकि, आदिल, सरवर का बेटा है।

वहीं आदिल चिश्ती ने भी गुरुवार (14 जुलाई 2022) को हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाया था। उसने हिन्दू धर्म की गलत व्याख्या करते हुए कहा, “अगर नुपुर शर्मा हिंदू हैं, तो मेरे पास उनसे कुछ सवाल हैं। 333 करोड़ खुदाओं का अस्तित्व कैसे माना जाएगा? यह कैसे तार्किक है? एक खुदा का तो समझ में आता है। विभिन्न धर्मों के लोगों की अलग-अलग व्याख्याएँ हो सकती हैं। लेकिन, 333 करोड़ खुदा, थोक में देवता (Wholesale of Gods), उसको कैसे माना जाएगा? मैं सोचता हूँ कि अगर व्यक्ति को हजार साल की जिंदगी मिले तो भी वह सभी 333 करोड़ खुदाओं को राजी नहीं कर सकता है।”

25 जून को गौहर चिश्ती पर दर्ज हुआ था FIR

गौरतलब है कि अजमेर पुलिस ने 25 जून को गौहर चिश्ती के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाने का केस दर्ज किया था। इसके बाद से वह फरार हो गया था। गौहर चिश्ती का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो कहता है, “हम अपने हुजूर की शान में गुस्ताखी कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। गुस्ताख ए रसूल की एक सज़ा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा। अपने आका की इज्जत के लिए हम सिर कटाने को तैयार हैं। नूपुर ने हमारे आका की शान में गुस्ताखी की है, इसलिए उसे जीने का हक नहीं है। नूपुर शर्मा मुर्दाबाद।”

पटना के एसएसपी ने RSS की तुलना इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन PFI से की, बीजेपी ने किया बर्खास्त करने की माँग, कहा- राजनीति करनी है तो पद से इस्तीफा दें

बिहार में पटना के फुलवारी शरीफ में गुरुवार (14 जुलाई 2022) को बिहार पुलिस ने इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के ऑफिस पर छापा मारा। इसके बाद इसको लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पटना पुलिस ने इसकी जानकारी दी। इस दौरान पटना के एसएसपी मानवजीत सिंह ढिल्लों ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तुलना पीएफआई से कर दी। इसको लेकर अब बीजेपी ने उनसे माफी की माँग की है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से एसएसपी को तुरंत बर्खास्त करने की माँग करते हुए बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता मनोज शर्मा ने कहा, “उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है और वो अब दिवालिया हो चुके हैं। ऐसे व्यक्ति को एसएसपी के रूप में मिनट भी नहीं रखना चाहिए। उन्होंने पुलिस अधिकारी पर अपनी मर्यादा के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने पुलिस अधिकारी को बड़बोला और बददिमाग करार दिया। साथ ही कहा कि इनके इस पद पर रहने से शहर की कानून व्यवस्था और माहौल बिगड़ रहा है। सीएम इस पर संज्ञान लें।”

मनोज शर्मा ने आरएसएस को राष्ट्र निर्माण करने वाली संस्था करार दिया और कहा कि शाखाओं में भारतीय संस्कृति और सभ्यता को मजबूत करने की ट्रेनिंग दी जाती है। वहीं भाजपा पिछड़ा वर्ग के राष्ट्रीय महामंत्री निखिल आनंद ने एसएसपी के बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राजनीति करना है तो पद से इस्तीफा दें और राजनीति में आएँ।

मनोज शर्मा ने आगे कहा, “आरएसएस एक राष्ट्र निर्माण करने वाली संस्था है। यहाँ भारतीय संस्कृति और सभ्यता सुदृढ़ करने की ट्रेंनिग दी जाती है। यहाँ लोगों में एकता और अहिंसा का पाठ पढ़ाया जाता है। पटना एसएसपी को एक बार आरएसएस के शाखा में जाकर ट्रेंनिग लेनी चाहिए, तब उन्हें पता चलेगा कि आरएसएस में किस तरह की ट्रेनिंग दी जाती है।”

एसएसपी ने क्या बोला

गौरतलब है कि पीएफआई के दफ्तर पर छापेमारी के बाद पटना पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। इस दौरान एसएसपी मानवजीत सिंह ढिल्लो ने कहा, “इसका जो मोडस था कि ये लोग, जैसे शाखा होती है, आरएसएस अपनी शाखा ऑर्गेनाइज करते हैं, और लाठी की ट्रेनिंग देते हैं, उसी तरह से ये लोग शारीरिक शिक्षा के नाम पर युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे थे। उसी के साथ अपना एजेंडा और प्रोपेगेंडा के जरिए युवकों का ब्रेनवाश कर रहे थे।”