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बच्चे ने ब्लैकबोर्ड पर लिख दिया ‘जय श्रीराम’, प्रिंसिपल अबुल कलाम ने बेरहमी से पीटा: फिर चर्चा में झारखंड का सरकारी स्कूल

झारखंड के सरकारी स्कूल इन दिनों चर्चा में हैं। पहले कई सरकारी स्कूलों में इस्लामी कायदे के हिसाब से रविवार की छुट्टी बदलकर शुक्रवार किए जाने की बात सामने आई थी। अब गिरिडीह जिले के एक स्कूल में छात्र की बेरहमी से पिटाई कक्षा के ब्लैकबोर्ड पर ‘जय श्रीराम’ लिखने के कारण किए जाने का मामला सामने आया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह घटना गिरिडीह जिले के पालमो पंचायत के उत्क्रमित मध्य विद्यालय की है। बताया जाता है कि चौथी कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र ने 8 जुलाई 2022 को ब्लैक बोर्ड पर जय श्रीराम लिख दिया। असके अगले दिन 9 जुलाई को प्रिंसिपल मोहम्मद अबुल कलाम ने उसे जमकर पीटा। इस स्कूल में कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई होती है।

इसके बाद 13 जुलाई को स्कूल में स्थानीय ग्रामीणों की एक बैठक बुलाई गई। इसमें पंचायत के कई प्रमुख लोग, प्रिंसिपल अबुल कलाम और स्कूल प्रबंधन समिति सहित दर्जनों लोग शामिल हुए। बैठक के दौरान अब्दुल कलाम पर कई बच्चों के अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल में उनके बच्चों से शौचालय साफ कराया जाता है और उनसे शौचालय का पानी ढुलवाया जाता है। माहौल गर्म होता देख पंचायत के सदस्यों ने स्थानीय थाने को इसकी सूचना दी। पुलिस पहुँची तो उन्होंने भीड़ को तितर-बितर किया और गुस्साए स्थानीय लोगों को शांत कराया। घटना की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी पुष्पा कुजूर को भी दी गई, जिन्होंने मामले की जाँच के आदेश दिए हैं। साथ ही दोषी पाए जाने पर प्रिंसिपल के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

इस घटना की निंदा करते हुए झारखंड भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अविनेश कुमार ने कहा कि जिस तरह से पूरे झारखंड में कट्टरपंथियों का मनोबल बढ़ाने का काम राज्य सरकार कर रही है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले समय में झारखंड में भी तालिबान का राज होगा।

बता दें कि हाल ही में गढ़वा से खबर आई थी कि बच्चों को हाथ जोड़कर प्रार्थना करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। उसके बाद झारखंड के जामताड़ा जिले के कुछ सरकारी स्कूलों में रविवार के बजाय शुक्रवार की छुट्टी दिए जाने की खबर सामने आई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गृह जिले दुमका के कई स्कूलों के नाम में उर्दू जोड़ने की बात सामने आई थी ताकि साप्ताहिक छुट्टी शुक्रवार को की जा सके।

चमचा, चेला, शकुनि, जयचंद… : जानिए कौन-कौन से शब्द-वाक्य का इस्तेमाल हुआ असंसदीय, विपक्ष को हुआ अपच

भारतीय संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में अक्सर देखा जाता है कि नेता एक दूसरे पर सियासी हमला करते वक्त अक्सर अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल कर जाते हैं। नेता एक दूसरे को जुमलाजीवी, बाल बुद्धि सांसद, शकुनि, जयचंद, विनाश पुरुष जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अब से ऐसा करने पर इन शब्दों को असंसदीय माना जाएगा।

वहीं लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि इन शब्दों के बोलने पर प्रतिबन्ध नहीं है बस उस प्रक्रिया में जब भी संसद में संवाद के दौरान कोई सदस्य किसी चर्चा के दौरान किसी शब्द का इस्तेमाल करते हैं तो जो पीठासीन अधिकारी होते हैं वो उसे असंसदीय घोषित करते हैं। हम उसका संकलन करते हैं। पहले इसकी किताब निकाली जाती थी, लेकिन कागज का उपयोग कम हो, इसके लिए इस बार ऑनलाइन निकाला गया है।

ओम बिरला ने कहा है कि ये लोकसभा की एक पुरानी प्रक्रिया है। ऐसे में ये बताना जरुरी है कि किसी भी शब्द को बैन नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि साल 1954, 1986, 1992, 1999, 2004, 2009 में भी संकलन निकाला गया है। साल 2010 के बाद वार्षिक रूप से ये संकलन निकलने लगा है।” उन्होंने कहा कि किसी भी सदस्य को बोलने का अधिकार कोई नहीं छीन सकता है, लेकिन मर्यादित चर्चा होनी चाहिए।

सदन में असंसदीय शब्दों के इस्तेमाल को लेकर लोकसभा सचिवालय ने हाल ही में एक पुस्तिका जारी की है। जिसमें उन शब्दों को सूचीबद्ध किया गया है, जिनका संसद के दोनों सदनों में उपयोग अब असंसदीय माना जाएगा। बुकलेट के मुताबिक, ‘अराजकतावादी’, ‘शकुनि’, ‘तानाशाही’, ‘तानाशाह’, ‘जयचंद’, ‘विनाश पुरुष’, ‘खालिस्तानी’ और ‘खून से खेती’ जैसे शब्दों का प्रयोग होने पर उन्हें कार्यवाही से हटा दिया जाएगा।

संसद की बुकलेट में शामिल किए गए असंसदीय शब्द

संसद में असंसदीय करार दिए गए शब्दों में शर्मिंदा, दुर्व्यवहार, भ्रष्ट, नाटक, पाखंड, अक्षम, दोहरा चरित्र, निकम्मा, नौटंकी, ढिंडोरा पीटना, बहरी सरकार, रक्तपात, खूनी, विश्वासघात, शर्मिंदा, दुर्व्यवहार, धोखा, चमचा, चमचागीरी, चेला, बचकाना, भ्रष्ट, कायर, अपराधी, मगरमच्छ के आँसू, अपमान, गधा, नाटक, चक्कर, धोखा, गुंडागर्दी, पाखंड, भ्रामक, झूठ, असत्य, अराजकतावादी, गदर, गिरगिट, गुंडे, घड़ियाली आँसू, अपमान, असत्य, अहंकार, भ्रष्ट, काला दिन, काला बाजार और खरीद फारोख्त जैसे शब्द लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी पुस्तिका में असंसदीय के रूप में शामिल किए गए हैं।

बुकलेट पर आक्रामक हुआ विपक्ष

इस बुकलेट पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया। उन्होंने न्यू इंडिया पर तंज कसते हुए लिखा, “न्यू इंडिया की न्यू डिक्शनरी, असंसदीय का मतलब चर्चा और बहस में इस्तेमाल होने वाले शब्दों से है, जो पीएम के कामकाज का सही वर्णन करता है, जिसे अब बोलने पर रोक लगा दी गई है।” उन्होंने लिखा, “जुमलाजीवी तनाशाह ने अपने झूठ और अक्षमता का खुलासा होने पर मगरमच्छ के आँसू बहाए।”

राहुल गाँधी के अलावा डेरेक ओ ब्रायन, महुआ मोइत्रा, प्रियंका चतुर्वेदी सहित विपक्षी नेताओं ने भी इस बुकलेट को लेकर मोदी सरकार आलोचना की है। टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन ने कहा, “सत्र कुछ दिनों में शुरू होने वाला है। सांसदों पर जारी इस आदेश के बाद अब हमें संसद में भाषण देते समय इन मूल शब्दों का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। शर्मिंदा, दुर्व्यवहार, विश्वासघात, भ्रष्ट, पाखंड, अक्षम आदि मैं इन सभी शब्दों का प्रयोग करूँगा, मुझे निलंबित करें। लोकतंत्र के लिए लड़ूँगा।”

वहीं शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “चूँकि इन शब्दों को बोलना असंसदीय माना जाएगा, बस इसे वाह मोदी जी वाह के साथ यहीं छोड़ दें।” टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, “बैठ जाइए, बैठ जाइए, प्रेम से बोलिए। संसद के लिए असंसदीय शब्दों की नई सूची में संघी शामिल नहीं है। सरकार विपक्ष द्वारा इस्तेमाल किए गए उन सभी शब्दों को बैन कर रही है जो ये बताते हैं कि भाजपा कैसे भारत को नष्ट कर रही है।”

क्या होता है असंसदीय शब्द

गौरतलब है कि असंसदीय शब्द को संसद की लिस्ट में साल 1999 में शामिल किया गया था। उस दौरान एक बुकलेट तैयार की गई थी, जिसका नाम असंसदीय अभिव्यक्ति रखा गया था। उसमें ऐसे कई शब्द शामिल किए गए थे, जिन्हें असंसदीय अभिव्यक्ति माना गया था।

संविधान के अनुच्छेद 105 (2) में स्पष्ट लिखा गया है कि दोनों सदनों के सांसदों को इस तरह की आजादी नहीं है कि वो ऐसे असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल करें। उल्लेखनीय है कि 18 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होगा।

हर महीने ₹25 लाख लो, मेरी बीवी बनकर रहो: अक्षय कुमार की हिरोइन का हैरान करने वाला खुलासा, सैलरीड वाइफ बनने का मिला था ऑफर

बॉलीवुड एक्ट्रेस नीतू चंद्रा (Nitu Chandra) इन दिनों अपने एक इंटरव्यू के कारण चर्चा में हैं। इस इंटरव्यू में उन्होंने एक हैरान करने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि एक बिजनेसमैन (Businessman) उन्हें सैलरी पर बीवी (Salaried Wife) रखना चाहता था। इसके लिए उस शख्स ने नीतू को प्रति माह 25 लाख रुपए देने की बात कही थी। इसी इंटरव्यू में नीतू चंद्रा ने उस ऑडिशन का भी जिक्र किया, जिसमें कास्टिंग डायरेक्टर ने उन्हें तुरंत ही रिजेक्ट कर दिया था।

नीतू चंद्रा ने एंटरटेनमेंट वेबसाइट बॉलीवुड हंगामा को ​दिए इंटरव्यू में अपने मुश्किल दिनों को याद करते हुए कहा, “मुझसे एक बड़े बिजनसमैन ने कहा था कि वो मुझे 25 लाख रुपए प्रति महीने देगा, लेकिन मुझे उसकी सैलरीड वाइफ बनना होगा। मेरी स्टोरी एक सक्सेसफुल एक्ट्रेस की फेलियर स्टोरी है। 13 राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं के साथ काम करने के बावजूद मेरे पास न तो पैसा है और न ही काम है। मुझे अब डर लगने लगा है। इतना काम करने के बाद भी इस इडंस्ट्री में मेरा कोई अस्तित्व नहीं है। ऐसा लगता जैसे मेरी यहाँ किसी को जरूरत नहीं है।”

नीतू चंद्रा ने आगे बताया कि एक कास्टिंग डायरेक्टर ने उनका ऑडिशन लेने के बाद एक घंटे के अंदर ही उन्हें रिजेक्ट कर दिया था। उस घटना को याद करते हुए एक्ट्रेस ने कहा, “एक कास्टिंग डायरेक्टर, जिसका काफी बड़ा नाम है, लेकिन मैं उसका नाम नहीं बोलना चाहती हूँ। उन्होंने ऑडिशन के टाइम पर ही मतलब एक घंटे के अंदर बोला कि मुझे माफ कर दो नीतू, बात नहीं बन पा रही है। आप मेरा ऑडिशन लेते हो और फिर रिजेक्ट कर देते हो ताकि आप मेरा आत्मविश्वास तोड़ सको?”

बता दें कि नीतू चंद्रा लंबे समय से बॉलीवुड से दूर हैं। हाल ही उन्होंने Never Back Down: Revot से हॉलीवुड में डेब्यू किया है। साल 2017 में वह दो तमिल फिल्मों में नजर आई थीं। नीतू चंद्रा (Neetu Chandra) ने अक्षय कुमार के साथ फिल्म ‘गरम मसाला’ से बॉलीवुड में अपना डेब्यू किया था। इसके बाद वह ‘ओय लकी, लकी ओय’, ‘ट्रैफिक सिग्नल’, ‘वन टू थ्री’, ’13B’, ‘अपार्टमेंट’ जैसी हिंदी फिल्मों में नजर आईं। बतौर प्रोड्यूसर नीतू चंद्रा ने ‘देसवा’ और Mithila Makhaan जैसी फिल्म बनाई है। मिथिला मखान को नेशनल अवॉर्ड भी मिला था।

PM मोदी के बिहार दौरे से अलर्ट हुई पुलिस तो उजागर हुआ ‘मिशन 2047’: 15 दिन पहले से चल रही थी ट्रेनिंग, अब तक 26 पर FIR-5 गिरफ्तार

बिहार की पटना पुलिस ने फुलवारी शरीफ से आतंकी गतिविधियों (Phulwari Sharif Terror Module) में शामिल में अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक झारखंड पुलिस का रिटायर्ड दरोगा मोहम्मद जलालुद्दीन और दूसरा कुख्यात चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का सदस्य अतहर परवेज है। इसके अलावा मरगूब दानिश, अरमान मलिक और शब्बीर आलम को गिरफ्तार किया गया है।

ये दोनो मार्शल आर्ट्स सिखाने के नाम पर मुस्लिम युवकों का ब्रेनवॉश कर रहे थे और उन्हें हथियार चलाना सिखा रहे थे। इनका मकसद 2047 तक भारत को मुस्लिम मुल्क बनाना था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन्होंने 12 जुलाई 2022 को हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की बिहार यात्रा के दौरान उनकी हत्या की साजिश रची थी।

पीएम मोदी के पटना दौरे से 15 दिन पहले से ही इन आतंकियों को फुलवारी शरीफ में ट्रेनिंग दी जा रही थी। पीएम मोदी को मारने की साजिश को लेकर उन्होंने 6 और 7 जुलाई को बैठकें कीं। हालाँकि, बिहार पुलिस का कहना है कि पीएम मोदी को सीधा खतरा नहीं था।

बता दें कि बिहार पुलिस ने फुलवारी शरीफ कार्यालय में छापेमारी की है। इस दौरान पुलिस को आपत्तिजनक दस्तावेज मिले, जिनमें से एक का शीर्षक था – ‘2047 इंडिया टुवर्ड्स रूल ऑफ इस्लामिक इंडिया’। इसके अलावा, इनके पास से पीएफआई के पर्चे भी बरामद किए गए हैं।

फुलवारी शरीफ के ASP मनीष कुमार का कहना है, “हम रूटीन काम के दौरान ऐसे संस्थानों (पीएफआई) पर नजर रखते हैं। पीएम के आते ही हम अलर्ट पर थे। हमें इसकी जानकारी मिली और बारीकी से जाँच शुरू की। 26 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिनमें से 3 को गिरफ्तार किया गया है। पीएम को लेकर कोई सीधी धमकी नहीं थी। आगे की जाँच जारी।”

पटना पुलिस को इंटेलिजेंस ब्यूरो से जानकारी मिली थी कि फुलवारी शरीफ इलाके में एक आतंकी मॉड्यूल सक्रिय है। इसके बाद पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने 11 जुलाई को नया टोला इलाके में छापेमारी कर दोनों संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया।

मनीष कुमार के अनुसार, “गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान झारखंड के एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी मोहम्मद जल्लाउद्दीन और अतहर परवेज के रूप में हुई है। उनके PFI के साथ संबंध हैं। जलाउद्दीन पहले स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) से जुड़ा था।”

उन्होंने आगे बताया, “वे स्थानीय लोगों को तलवार और चाकू का इस्तेमाल करना सिखा रहे थे और उन्हें सांप्रदायिक हिंसा के लिए भी उकसा रहे थे। एक जांच से पता चला है कि अन्य राज्यों के लोग पटना में उनके पास आ रहे थे। वे आगंतुक बिहार की राजधानी के होटलों में रहने के दौरान अपना नाम बदल लेते थे। अपनी पहचान छुपाएँ।”

एएसपी मनीष के अनुसार, पुलिस को इनके पास से 8 पन्नों का दस्तावेज मिला है। जो बताता है कि इनका मकसद 2047 तक भारत को इस्लामी राज्य बनाने का था। इन दस्तावेजों में लिखा था कि पीएफआई मानता है कि 10 फीसद मुस्लिम आबादी उनके साथ आ जाए तो वो कायर बहुसंख्यकों को दोबारा घुटने पर लाएँगे और उन्हें इस्लाम कबूल करवाएँगे।

एएसपी मनीष के अनुसार, पुलिस को इनके पास से 8 पन्नों का दस्तावेज मिला है। जो बताता है कि इनका मकसद 2047 तक भारत को इस्लामी राज्य बनाने का था। इन दस्तावेजों में लिखा था कि पीएफआई मानता है कि 10 फीसद मुस्लिम आबादी उनके साथ आ जाए तो वो कायर बहुसंख्यकों को दोबारा घुटने पर लाएँगे और उन्हें इस्लाम कबूल करवाएँगे।

पाकिस्तान में एक और नाबालिग हिन्दू लड़की का अपहरण, जबरन इस्लाम कबूल करवाकर खलील ने किया निकाह, हिन्दुओं ने जरदारी हाउस के सामने किया प्रदर्शन

पाकिस्तान (Pakistan) के सिंध प्रान्त में हाल ही में 16 साल की नाबालिग हिन्दू लड़की का मुस्लिमों ने अपहरण (Kidnap) कर लिया। इसके बाद जबरन उसका इस्लामिक धर्मान्तरण (Islamic Conversion) कराने के बाद एक मुस्लिम से उसका निकाह करा दिया गया। इस घटना के सामने आने के बाद हिन्दू समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए और उन्होंने नवाबशाह में जरदारी हाउस के सामने प्रदर्शन किया। लोगों ने पुलिस विरोधी नारेबाजी करते हुए पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से नाबालिग हिन्दू लड़की को ढूँढने में मदद करने के लिए हस्तक्षेप की माँग की।

रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता का नाम करीना है और करीब एक सप्ताह पहले दादू के काजी अहमद कस्बे के अंतर्गत आने वाले उन्नार मोहल्ले से उसका अपहरण कर लिया गया था। हालाँकि, लोकल पुलिस का दावा है कि करीना को एक मुस्लिम लड़के से प्यार हो गया था और वो उसके साथ भाग गई। इसके बाद उसने कराची की एक अदालत में निकाह के लिए आवेदन किया।

इस मामले में नवाबशाह के एसएसपी अमीर सऊद मगसी ने करीना के अपहरण की खबरों को दरकिनार करते हुए दावा किया कि हिन्दू नाबालिग का अपहरण नहीं किया गया। वो अपनी मर्जी से मीर मोहम्मद जोनो गाँव के रहने वाले खलील रहमान जोनो के साथ भाग गई थी। इसके बाद कराची की एक अदालत में उससे निकाह किया।

पुलिस अधिकारी का कहना है कि उन्होंने सुंदरमल की शिकायत पर धारा 365-बी के तहत प्राथमिकी दर्ज कर खलील के पिता असगर जोनो को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही कथित तौर पर एसएसपी ने करीना और खलील रहमान जोनो का एक निकाहनामा साझा किया और कहा कि लड़की को सिंध उच्च न्यायालय में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लड़की जहाँ चाहे वहाँ जाने का फैसला कर सकती है।

हिन्दू पंचायत ने एसएसपी के दावे को किया खारिज

वहीं एसएसपी के दावे को खारिज करते हुए हिन्दू पंचायत के उपाध्यक्ष लाजपत राय ने कहा है कि एसएसपी से एक प्रतिनिधि मंडल मिला था। लेकिन जबरन धर्मान्तरण की एफआईआर के बाद भी उन्होंने मदद नहीं की।

बेटा ही नहीं, माँ भी फेक न्यूज की मास्टरनी: AltNews वाले प्रतीक सिन्हा की तरह ही ‘कुख्यात’ हैं उनकी डायरेक्टर अम्मी निर्झरी सिन्हा

वैसे तो ऑल्ट न्यूज (Alt News) फैक्टचेक करने का दावा करती है। लेकिन फेक न्यूज फैलाने में वह किस कदर माहिर है, यह अब जगजाहिर है। इस संस्थान से जुड़े लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने और हिंदू घृणा फैलाने का कोई अवसर जाया नहीं करते। इन्हीं कारणों से इस वेबसाइट का सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर फिलहाल जेल में बंद है। एक अन्य संस्थापक प्रतीक सिन्हा भी पुराना फेक न्यूज पैडलर है। प्रतीक सिन्हा की माँ निर्झरी सिन्हा जो ऑल्ट न्यूज की डायरेक्टर हैं, वह भी सोशल मीडिया पर बेटे की तरह कारनामों के लिए ही कुख्यात हैं।

बेटे जैसी ही ‘कुख्यात’ निर्झरी सिन्हा भी

निर्झरी सिन्हा (Nirjhari Sinha) का फर्जी खबरें फैलाने और बेबुनियाद दावे करने का लंबा और घिनौना इतिहास रहा है। हाल ही में @Gujju_Er ट्विटर हैंडल ने निर्झरी सिन्हा के ऐसे कुछ कारनामों को सोशल मीडिया में शेयर किया है। सिन्हा को 2016 में गुजरात टूरिज्म एड का मजाक उड़ाने के लिए 2004 की एक तस्वीर साझा करते हुए पकड़ा गया था। इसी तरह एक तस्वीर ऐसे पेश की जैसे भगवान कृष्ण ईद मना रहे हों।

एक बार उन्होंने दक्षिणी दिल्ली में कानूनी फर्म टीएंडटी पर छापे का वीडियो यह बताते हुए शेयर किया कि चेन्नई में तमिलनाडु के मुख्य सचिव के आवास पर छापे पड़े हैं। गायक झवेरचंद मेघनानी की 125 वीं जयंती के अवसर पर गुजरात सरकार ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। सिन्हा ने इसके निमंत्रण कार्ड का कवर पेज साझा करते हुए दावा किया कि इसमें मेघनानी की ही तस्वीर नहीं है। जबकि हकीकत में कार्ड में गायक की 13 तस्वीरें थी।

निर्झरी सिन्हा ने भाजपा नेताओं के खिलाफ भी फर्जी खबरें फैलाती रहती हैं। एक बार दावा किया कि भाजपा नेता नक्सलियों को हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराती है। एक बार फेक तस्वीर से यह बताने की कोशिश की कि आर्थिक अपराधों में लिप्त लोग देश से सुरक्षित भाग सके इसके लिए एयर इंडिया नया काउंटर खोल रही है।

2020 में चीन से कोरोना वायरस भारत में आने के बाद इन्होंने पीएम से अपनी असहमति जाहिर करते हुए एक गरीब परिवार की फोटो शेयर की थी, जो बिना छत के बैठे थे। सिन्हा ने इस फोटो पर पीएम के लिए लिखा था कि पीएम इन्हें क्या कहना चाहेंगे घर में रहें, बाहर न घूमें। उन्होंने जो तस्वीर शेयर की थी वह 2016 की थी। लेकिन अपनी नफरत का प्रदर्शन करने के लिए सारी समझ को किनारे रखते हुए कोरोना से लड़ाई के समय लॉकडाउन पर ही सवाल उठा दिया था।

निर्झरी वहीं महिला हैं, जिन्होंने अपने पति मुकुल सिन्हा के साथ 2002 में गुजरात दंगों के ‘पीड़ितों’ के लिए लड़ाई लड़ी और गोधरा कांड को एक्सीडेंट बताने का भरसक प्रयास किया।

ऑल्ट न्यूज का सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा

ऑल्ट न्यूज का सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा भी माँ (निर्झरी सिन्हा) की तरह फेक न्यूज फैलाने में माहिर है। दिसंबर 2020 में सोशल मीडिया यूजर @BefittingFacts ने ट्विटर पर AltNews के प्रतीक सिन्हा को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी और भ्रामक जानकारी देने पर बेनकाब किया था। बताया था कि हिंदुओं से नफरत करने वाले सिन्हा ने ‘फैक्ट चेक’ के रूप में गुजरात के ट्रुथ, इओपिनियन और ऑल्ट न्यूज जैसे संदिग्ध पोर्टल पीएम मोदी को गाली देने और बदनाम करने के लिए बनाया है।

2016 में नोटबंदी के बाद सिन्हा ने वित्तीय संस्थानों में लंबी कतारों में खड़े लोगों की तस्वीरें साझा करते हुए आरोप लगाया था कि मोदी सरकार के फैसले के कारण लोगों कई परेशानियां उठानी पड़ी। हालाँकि, सिन्हा ने अपनी बात कहने की जल्दबाजी में नोटबंदी से लगभग दो साल पहले 2014 की एक तस्वीर साझा कर दी। इसी तरह 2016 में गुजरात में गायों की दुर्दशा बताने के लिए 2004 की एक तस्वीर का उपयोग करते हुए उसे पकड़ा गया था।

गौरतलब है कि प्रतीक सिन्हा ऑल्ट न्यूज का सह-संस्थापक है। लेकिन उसकी पहचान स्टॉकर सिन्हा के तौर पर भी होती है। यदि उसे कोई पसंद न आए तो वह साइबर स्टॉकिंग और डॉक्सिंग से भी गुरेज नहीं करता।

पंजाब में सरकारी बसों से नहीं हटेगी खालिस्तानी आतंकी भिंडरावाले की तस्वीरें, ‘धार्मिक भावनाओं’ का हवाला दे पीछे हटी AAP सरकार

पंजाब में सरकारी बसों पर से खालिस्तानी आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले और बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी जगतार सिंह हवारा की तस्वीरों को हटाने के मामले में परिवहन विभाग ने सोमवार (11 जुलाई 2022) को यू टर्न ले लिया है। पेप्सू सड़क परिवहन निगम (PRTC) ने 6 जुलाई को इन तस्वीरों को हटाने का ऑर्डर दिया था। पंजाब में सिख समूहों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया और मंगलवार (12 जुलाई 2022) तक आदेशों को रद्द नहीं करने पर विद्रोह करने की धमकी दी। जिसके बाद इसे सोमवार को वापस ले लिया गया। 

PRTC ने बसों से भिंडरांवाले की तस्वीरें हटाने का आदेश रद्द किया

पीआरटीसी पटियाला द्वारा जारी एक पत्र में कहा गया है कि निगम को सरकार द्वारा ईमेल के माध्यम से तस्वीरों के बारे में शिकायत मिली थी। राज्य सरकार ने पीआरटीसी को उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद निगम ने तस्वीरें हटाने के आदेश जारी किए थे। हालाँकि, नए जारी किए गए आदेशों में कहा गया है कि इस फैसले का कई धार्मिक संस्थाओं की ओर से विरोध किया गया। किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुँचे, इसलिए ऑर्डर वापस लिए जाते हैं।

‘हिंदू इसका इस्तेमाल सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने के लिए कर सकते हैं’

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर, पंजाब द्वारा जारी 28 जून के एक पत्र में कहा गया था कि पुलिस को सरकारी बसों में जगतार सिंह हवारा और जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीरों और भड़काऊ नारों के बारे में पता चला था। पत्र में आगे लिखा गया है कि चूँकि वे सरकारी बसें थीं, ऐसे चित्र और आपत्तिजनक नारे समाज के एक वर्ग को आहत कर सकते हैं। यदि यह मुद्दा हिंदू संगठनों के संज्ञान में आता है, तो वे इसका इस्तेमाल सरकार के खिलाफ कर सकते हैं। वे विरोध और ट्रैफिक जाम का आयोजन कर सकते हैं। इसके बाद पंजाब पुलिस ने सभी अधिकारियों से इस संबंध में सख्त कार्रवाई करने को कहा ताकि कानून-व्यवस्था बनाई रखी जा सके।

आदेश का दल खालसा, SGPC आदि ने विरोध किया था

दल खालसा, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC), अकाली दल (अमृतसर) और अन्य ने सरकारी बसों से तस्वीरें और नारे हटाने के आदेश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। अकाली दल (अमृतसर) के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को पटियाला में पीआरटीसी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। दूसरी ओर, दल खालसा के सदस्यों ने पीआरटीसी बसों पर भिंडरांवाले के पोस्टर लगाने की कोशिश की थी, जिसकी वजह से पंजाब पुलिसकर्मियों के साथ उनका भिड़ंत हो गया था।

आदेश रद्द होने के बाद, दल खालसा के प्रवक्ता परमजीत सिंह मंड ने कहा कि उन्हें पीआरटीसी से एक पत्र मिला है जिसमें कहा गया है कि आदेश वापस ले लिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि भिंडरावाले और हवारा दोनों की तस्वीरें पंजाब में पब्लिक डोमेन में आम बात है। दोनों की तस्वीरें पूरे पंजाब में टी-शर्ट और वाहनों पर दिखाई दे जाएँगी।

रिटायर्ड जस्टिस ढींगरा पर नहीं चलेगा अवमानना का मामला, कन्हैया लाल की हत्या से नूपुर शर्मा को जोड़ने पर सुप्रीम कोर्ट जजों को लगाई थी लताड़

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने सेवानिवृत जज एसएन धींगरा (SN Dhingra) के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की अनुमति देने से भारत के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल (KK Venugopal) ने इनकार कर दिया है। धींगरा के साथ-साथ वरिष्ठ वकील अमन लेखी और के रामकुमार के खिलाफ के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति माँगी गई थी।

इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद (Prophet Muhammad) के मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के दो जजों ने नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) की आलोचना की थी और राजस्थान के उदयपुर में हुई कन्हैया लाल की हत्या से उसे जोड़ा था। इसके बाद रिटायर्ड जज धींगरा सहति इन लोगों ने जजों की इस टिप्पणी को अवांछित बताया था।

वेणु गोपाल ने कहा कि इन लोगों द्वारा की गई टिप्पणी ‘निष्पक्षता’ के दायरे में आती हैं। इन्होंने किसी तरह की गाली-गलौज या अपमानजनक शब्दों का प्रयोग नहीं किया है, जो न्यायिक प्रशासन में हस्तक्षेप के दायरे में आते हैं।

अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने तर्क दिया कि सर्वोच्च न्यायालय ने बड़ी संख्या में अपने निर्णयों में यह माना है कि न्यायिक कार्यवाही की निष्पक्ष और उचित आलोचना अदालत की अवमानना नहीं होगी।

उन्होंने कहा, “मैं इस बात से संतुष्ट नहीं हूँ कि आपके पत्र में नामित तीन व्यक्तियों द्वारा की गई आलोचना दुर्भावना वाला या न्याय प्रशासन को बिगाड़ने का प्रयास वाला है या यह न्यायपालिका की छवि को खराब करने के लिए जानबूझकर किया गया प्रयास है।”

सुप्रीम कोर्ट के जजों पर टिप्पणियों को लेकर जया सुकिन नामक वकील ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन ढींगरा और वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी, राम कुमार के खिलाफ अवमानना ​​कार्यवाही शुरू करने की अनुमति माँगी थी।

तीनों ने उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या के बाद नूपुर शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला द्वारा की गई टिप्पणियों को लेकर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय न्यायपालिका पर सवाल उठाए थे।

जजों की टिप्पणी के बाद सेवानिवृत जज एसएन धींगरा ने कहा था, “मेरे ख्याल से ये टिप्पणी बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। उन्हें कोई अधिकार नहीं है कि वो इस तरह की टिप्पणी करें, जिससे जो व्यक्ति न्याय माँगने आया है उसका पूरा करियर चौपट हो जाए या जो निचली अदालतें हैं वो पक्षपाती हो जाएँ। सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर को सुना तक नहीं और आरोप लगाकर अपना फैसला सुना दिया। मामले में न सुनवाई हुई, न कोई गवाही, न कोई जाँच हुई और न नूपुर को अवसर दिया गया कि वो अपनी सफाई पेश कर सकें। इस तरह सुप्रीम कोर्ट का टिप्पणी पेश करना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि गैर कानूनी भी है और अनुचित भी। ऐसी टिप्पणी सर्वोच्च न्यायालय को करने का कोई अधिकार नहीं है।”

जस्टिस एसएन ढींगरा ने सवाल उठाया था कि आखिर सुप्रीम कोर्ट के जजों ने अपनी कही बातों को लिखित आदेश में क्यों नहीं शामिल किया। उन्होंने कहा था कि अगर इस तरह जजों को टिप्पणी देनी है तो उन्हें राजनेता बन जाना चाहिए वो लोग जज क्यों है।

जब जस्टिस से पूछा गया कि आखिर कैसे कोर्ट की टिप्पणी गैर कानूनी हो सकती है तो उन्होंने कहा, “कोर्ट कानून से ऊपर नहीं है। कानून कहता है कि अगर आप किसी व्यक्ति को दोषी बताना चाहते हैं तो पहले आपको उसके ऊपर चार्ज फ्रेम करना होगा और इसके बाद जाँचकर्ता सबूत पेश करेंगे, फिर बयान लिए जाएँगे, गवाही होगी तब जाकर सभी साक्ष्यों को ध्यान में रखकर अपना फैसला सुनाया जाएगा। लेकिन यहाँ क्या हुआ। यहाँ तो नुपूर शर्मा अपनी एफआईआर ट्रांस्फर कराने गई थी और वहीं कोर्ट ने खुद उनके बयान पर स्वत: संज्ञान लेकर उन्हें सुना दिया।”

उन्होंने ये भी बताया कि अगर अब सुप्रीम कोर्ट के जज को ये पूछा जाए कि नूपुर शर्मा का बयान कैसे भड़काने वाला है, इस पर वह आकर कोर्ट को बताएँ तो उन्हें पेश होकर ये बात बतानी पड़ेगी। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस ढींगरा ने ये भी कहा कि अगर वो ट्रायल कोर्ट के जस्टिस होते तो वो सबसे पहले इन्हीं जजों को बुलाते और गवाही लेते

उन्होंने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के इन जजों से पूछते, “आप आकर गवाही दीजिए और बताइए कैसे नूपुर शर्मा ने गलत बयान दिया और उसे आप किस तरह से देखते हैं। टीवी मीडिया और चंद लोगों के कहने पर आपने अपनी राय बना ली। आपने खुद क्या और कैसे महसूस किया, इसे बताएँ।”

‘333 करोड़ खुदा, जानवरों वाले गॉड्स, हनुमान, गणेश…’: अब अजमेर दरगाह के खादिम के बेटे आदिल चिश्ती ने हिंदू देवताओं पर की आपत्तिजनक टिप्पणी, वीडियो वायरल

अजमेर दरगाह के चिश्तियों और खादिमों ने पिछले कुछ दिनों में नूपुर शर्मा की टिप्पणियों और उनके समर्थन में किए गए सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर बार-बार नफरत भड़काई है। इसी सिलसिले को जारी रखते हुए अंजुमन कमेटी के सचिव सरवर चिश्ती के बेटे आदिल चिश्ती ने हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाया है। आदिल चिश्ती ने टाइम्स नाउ के साथ इंटरव्यू के दौरान हिंदू देवताओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की।

इस वीडियो में आदिल चिश्ती ने कहा, “अगर नुपुर शर्मा हिंदू हैं, तो मेरे पास उनसे कुछ सवाल हैं। 333 करोड़ खुदाओं का अस्तित्व कैसे माना जाएगा? यह कैसे तार्किक है? एक खुदा का तो समझ में आता है। विभिन्न धर्मों के लोगों की अलग-अलग व्याख्याएँ हो सकती हैं। लेकिन, 333 करोड़ खुदा, थोक में देवता (Wholesale of Gods), उसको कैसे माना जाएगा? मैं सोचता हूँ कि अगर व्यक्ति को हजार साल की जिंदगी मिले तो भी वह सभी 333 करोड़ खुदाओं को राजी नहीं कर सकता है।”

आदिल चिश्ती ने आगे कहा, “दूसरी बात, मैं नुपुर शर्मा से यह भी पूछना चाहूँगा कि हिंदू पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि भगवान विष्णु के 10 अवतार हैं। इनमें से कुछ अवतार इंसानों वाले हैं, कुछ जानवरों वाले हैं, और कुछ इंसान और जानवर से मिलकर बने हैं। मैं उनसे पूछना चाहता हूँ कि क्या ये 10 अवतार संभव हैं या विश्वसनीय हैं कि तुम कहते हो कि वह एक ईश्वर है और फिर वह दस अलग-अलग अवतारों में प्रकट होता है। कुछ इंसानों के रूप में, कुछ जानवरों के रूप में और फिर कुछ फ्यूज़न के रूप में।”

आदिल चिश्ती ने कहा, “तीसरा, हनुमान जी… उसका अस्तित्व, उनका वजूद कैसे साबित करेंगी आप? गणेश जी का वजूद कैसे साबित करेंगी आप? वजूद से मेरा क्या मतलब है वो आप समझ जाएँ, वो पूरी तरह से इंसान नहीं थे ना। आप खुद मानते हैं कि वह आपके भगवान हैं। गणेश हो या हनुमान… क्या ये बातें तार्किक लगती हैं? नहीं।” आदिल चिश्ती ने 23 जून 2022 को ये बातें कहीं थी।

उल्लेखनीय है कि आदिल चिश्ती ने अपने बयान में एक बड़ी तथ्यात्मक गलती करते हुए कहा कि हिंदू धर्म में 333 करोड़ देवी-देवता हैं। लोगों में यह एक आम भ्रांति है कि हिंदुओं में 33 करोड़ देवता है। पौराणिक वेदों के अनुसार हिंदू में 33 करोड़ नहीं बल्कि 33 ‘कोटि’ के देवी-देवता हैं। 33 कोटि का मतलब 33 करोड़ नहीं, बल्कि 33 प्रकार के देवी-देवता हैं।

हिंदू ग्रंथों में जिन 33 कोटि देवी-देवताओं का जिक्र है, उसमें 12 आदित्य, 11 रुद्र, 8 वसु और 2 अश्विनी कुमार हैं। 12 आदित्यों में अंशुमान, अर्यमन, इंद्र, त्वष्टा, धातु, पर्जन्य, पूषा, भग, मित्र, वरुण, ववस्वान और विष्णु हैं। 8 वसु में अहष, ध्रुव, सोम, धरा, अनिल, अनल, प्रत्यूष और प्रभाष हैं। 11 रुद्र में शम्भु, पिनाकी, गिरीश, स्थाणु, भर्ग, भव, सदाशिव, शिव, हर, शर्व और कपाली हैं। जबकि दो अश्विनी कुमारों में नासत्य और दस्त्र आते हैं। इन 33 देवताओं को सामूहिक रूप से 33 कोटि देवता कहा जाता है। मगर आदिल चिश्ती ने इन्हें 333 करोड़ देवी-देवता कहा।

गौरतलब है कि अजमेर दरगाह के चिश्तियों ने हाल के दिनों में इस तरह के कई घृणित बयान दिए हैं। आदिल चिश्ती के पिता सरवर चिश्ती ने कहा था कि भारत में एक ऐसा आंदोलन होगा, जिससे पूरा हिंदुस्तान हिल जाएगा। सरवर चिश्ती ने हिंदुओं के आर्थिक बहिष्कार का भी आह्वान किया था। पिछले दिनों उन्हें अजमेर के सद्भावना रैली में देखा गया था। सरवर चिश्ती के भतीजे गौहर चिश्ती ने भी नूपुर शर्मा और कथित तौर पर पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने वालों का सिर कलम करने की माँग करते हुए ‘सर तन से जुदा’ का नारा लगाया था। गौहर चिश्ती ने कन्हैया लाल के हत्यारों से भी मुलाकात की थी। बता दें कि कन्हैया लाल की उदयपुर में नूपुर शर्मा का समर्थन करने वाली एक सोशल मीडिया पोस्ट साझा करने के कारण गर्दन काटकर हत्या कर दी गई थी।

8 पन्ने, 2 आतंकी, विदेशी फंडिंग: जिसे बताते थे ‘मार्शल आर्ट’ की ट्रेनिंग, वो निकली भारत को 2047 तक ‘इस्लामी मुल्क’ बनाने की प्लानिंग

भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाने के लिए बिहार में चल रही आतंक की फैक्ट्री का खुलासा होने के बाद खबर है कि पुलिस ने 1 और संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले रिटायर्ड दरोगा मोहम्मद जलालुद्दीन और पीएफआई का सदस्य अतहर रियाज, फुलवारी शरीफ से अरेस्ट किए गए थे। इन्हें पुलिस अब जेल भेज चुकी है। आगे सुरक्षा एजेंसियों को इनकी रिमांड दी जाएगी।

बिहार पुलिस ने अपनी कार्रवाई के बाद बताया कि उन्हें संदिग्धों की गिरफ्तारी के दौरान मिशन-2047 नाम से एक 8 पन्नों का दस्तावेज मिला है जिसमें भारत में इस्लामी शासन लाने की बात साफ है। इसमें कहा गया है कि अगर पीएफआई के संग आबादी के 10 फीसद मुस्लिम हो जाएँ तो ये लोग हिंदुओं को दोबारा घुटने पर लाकर इस्लाम कबूल करवा देंगे।

पुलिस की जाँच बताती है कि अतहर बम ब्लास्ट के आरोप में जेल में बंद मंजर परवेज का भाई है और वो खुद भी लंबे समय से आतंकी संगठन सिमी का सदस्य था। हालाँकि अब पीएफआई-एसडीपीआई से जुड़कर देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। उसने पटना में जलालुद्दीन के साथ मिलकर एनजीओ के नाम पर 16 हजार रुपए में किराए पर फ्लैट लिया था, जिसे 2 माह पहले इन्होंने पीएफआई का कार्यालय बना दिया था और अंदर मार्शल आर्ट्स सिखाने के नाम पर कट्टरपंथियों को तैयार करने का काम करते रहे।

बिहार पुलिस जलालुद्दीन और अतहर परवेज
बिहार पुलिस ने गिरफ्तार किए दो आतंकी (तस्वीर साभार: दैनिक जागरण)

अतहर-जलालुद्दीन देश के कई राज्यों जैसे केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के लड़कों को प्रशिक्षण के लिए बुलाते थे। लेकिन उन सबकी टिकट बुकिंग व होटल किसी अन्य नाम से किए जाते थे। इन्हें कार्यालय के भीतर मजहबी उन्माद करने के लिए उकसाया जाता था। आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए भड़काया जाता था और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए इन्हें चाकू-तलवार चलाने की ट्रेनिंग भी दी जाती थी।

पुलिस की छानबीन में सामने आया है कि इन लोगों के संगठन को पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की जैसे इस्लामी देश करोड़ों की फंडिंग दे रहे थे, इसलिए अब इस मामले की छानबीन ईडी भी करेगी। पुलिस का कहना है कि उन्होंने पुख्ता सबूतों के अब अपनी कार्रवाई की है। उनके पास गवाह भी हैं और सबूत के तौर पर सीसीटीवी फुटेज भी है।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि ये लोग खतरनाक मंसूबों के साथ फुलवारी शरीफ में संगठन चला रहे थे। इसका मकसद आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने का ही था। पुलिस ने बताया कि लंबे समय से ये लोग दोनों सिमी के आतंकियों की जमानत कराते रहे थे। पुलिस को इनके बारे में 6-7 जुलाई को पता चला था। इसके बाद पुलिस ने इन पर शिकंजा कसा और हाल में जाकर उन्हें पकड़ लिया। इनके फ्लैट पर संदिग्ध दस्तावेज और साथ ही पीएफआई के झंडे मिले हैं।