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लिबरल गैंग के लिए अब ‘महान’ नहीं रहे सुनील गावस्कर, RSS प्रमुख मोहन भागवत के हाथों मानद डॉक्टरेट की उपाधि ग्रहण करने से भड़के

श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी फॉर ह्यूमन एक्सीलेंस का दीक्षांत समारोह बुधवार (13 जुलाई 2022) को हुआ। आयोजन कर्नाटक के चिकबल्लापुरा जिले के मुद्देनहल्ली स्थित सत्य साईं ग्राम में हुआ। इस मौके पर भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर सहित 6 जानी-मानी हस्तियों को डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की गई। लेकिन गावस्कर का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के हाथों उपाधि ग्रहण करना वामपंथी और लिबरल गैंग को रास नहीं आया।

भागवत के हाथों सुनील गावस्कर को सम्मान ग्रहण करते देख लिबरल्स भड़क उठे। सोशल मीडिया पर वे अपनी निराशा और खीझ जताने लगे।

ट्विटर का स्क्रीनशॉट

एक ट्विटर यूजर ने कहा, “मैंने सोचा था कि इस आदमी को आउट करना मुश्किल था, लेकिन अफसोस।” वहीं एक अन्य व्यक्ति ने रिप्लाई करते हुए कहा कि उसके मन गावस्कर के लिए बहुत सम्मान था, क्योंकि महान क्रिकेटर होने के साथ उन्होंने 1992 के दंगों के दौरान एक परिवार को भी बचाया था।

एक यूजर जिसे गावस्कर पहले केवल इसलिए महान लगते थे क्योंकि उन्होंने एक ‘मुस्लिम परिवार’ की मदद की थी, उसकी सोच भी इस तस्वीर ने बदल दी।

हिमांशु नाम के एक अन्य लिबरल ने गावस्कर को श्रीलंका के आर्थिक संकट से जोड़ दिया। यूजर ने कहा कि श्रीलंका में फैली अराजकता के बीच जयसूर्या और संगकारा जैसे क्रिकेटर लोगों के साथ खड़े हैं, जबकि गावस्कर जैसे खिलाड़ी सरकार के साथ हैं। वे आरएसएस जैसे फासीवादी संगठन के साथ खड़े हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में खबर आई थी कि मुंबई में 1992 में हुए दंगों के दौरान गावस्कर ने एक मुस्लिम परिवार को बचाया था। इस खबर के सामने आने के बाद लिबरलों और वामपंथियों ने उन्हें नायक बताया था। कई ने गावस्कर की तारीफ में कसीदे पढ़ते हुए ट्वीट किया। इस घटना का जिक्र स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सुनील गावस्कर के बेटे रोहन ने किया था। इसी कार्यक्रम के दौरान गावस्कर को 2016 में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

हालाँकि, यह पहला मौका नहीं है जब लिबरलों और वामपंथियों ने गावस्कर को इस तरीके से खारिज की है। 2020 में जब देश में सीएए विरोधी प्रदर्शन हो रहे थे तो एक कार्यक्रम के दौरान गावस्कर ने कहा था कि युवाओं को नए भारत के निर्माण पर अपना ध्यान लगाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर अफसोस व्यक्त किया था कि कुछ युवा अपनी पढ़ाई, करियर पर ध्यान देने की बजाय अपने साल को बर्बाद करने में लगे हैं। इसके बाद भी लिबरलों ने इसी तरह की प्रतिक्रिया दिखाई थी।

अब भागवत के हाथों मानद उपाधि ग्रहण करना उन्हें अपराध लग रहा है। अपनी घृणा में वे गावस्कर की उपलब्धियों को नकार रहे हैं।

असलम खान ने संजय बन कर माँ दुर्गा के मंदिर में किया हिन्दू लड़की से विवाह, दो साल बाद खुली पोल: फतेहपुर में लव जिहाद का मामला

UP के फतेहपुर जिले में असलम नाम के एक युवक पर खुद को संजय बता कर एक हिन्दू लड़की से 2 साल तक रेप का आरोप लगा है। बाद में सच सामने आने पर वो पीड़िता को छोड़ कर भाग गया। पीड़िता मध्य प्रदेश के जबलपुर की रहने वाली है। पीड़िता आरोपित असलम खान की तलाश में बुधवार (13 जुलाई 2022) को फतेहपुर आई। बताया जा रहा है कि वो आरोपित पर कार्रवाई की माँग कर रही है।

न्यूज़ 18 के रिपोर्ट मुताबिक आरोपित असलम खागा थानाक्षेत्र के गाँव उमरा भागलपुर का रहने वाला है। वह साल 2020 में मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर कमाने गया था। वहाँ पर वो एक सीमेंट की फैक्ट्री में काम करने लगा। इसी दौरान उसकी मुलाकात उसी फैक्ट्री में काम करने वाली सिमरन पटेल से हुई। सिमरन का आरोप है कि असलम ने उसे अपना नाम संजय बताया और उसको अपने प्रेमजाल में फँसा लिया।

अपने वीडियो में सिमरन ने कहा, “मेरे साथ मेरा पति असलम 3 साल से रहता था। अब उसका पता ही नहीं है कि वो कहाँ गया। पुलिस वाले बोल रहे कि आएगा तो बता देंगे। कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।”

सिमरन जबलपुर के महाराजपुर थानाक्षेत्र की मूलनिवासी है। शिकायत में सिमरन ने लिखा, “असलम ने संजू बन कर मेरे साथ 25 जुलाई 2020 को दुर्गा मंदिर में शादी की। इस दौरान वो मेरे साथ एक कमरा ले कर रहा और लगातार मेरा यौन शोषण किया। मुझे उसके मुस्लिम होने का पता 30 जून 2022 को चला। इसके बाद वो मुझे छोड़ कर अपने गाँव फतेहपुर भाग गया।”

असलम का पीछा करते हुए पीड़िता फतेहपुर आई और उसने खागा कोतवाली में असलम के खिलाफ तहरीर दी। आरोप है कि असलम के खिलाफ अभी तक FIR दर्ज नहीं किया गया है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने पीड़िता को वापस उसके घर भेज दिया है।

हमें नहीं मिली है शिकायत

ऑपइंडिया ने SP फतेहपुर IPS राजेश कुमार से इस घटना की जानकारी ली। उन्होंने कहा, “हालाँकि, पीड़िता द्वारा आरोपित पर लगाए गए सभी आरोप जबलपुर मध्य प्रदेश क्षेत्र से संबंध रखते हैं फिर भी हम इस मामले में कार्रवाई करने को तैयार हैं। अभी तक किसी भी प्रकार की लिखित शिकायत जिले के किसी थाने पर नहीं दी गई है। यदि हमें शिकायत मिलती है तो हम नियमानुसार कार्रवाई करेंगे। पुलिस पर शिकायत मिलने के बाद भी कार्रवाई न करने के आरोप असत्य हैं।”

हर शिकायत पर होती है जाँच और एक्शन

फतेहपुर जिले में लव जिहाद के अधिक मामले आने के सवाल पर SP फतेहपुर ने कहा, “हम छोटी से छोटी घटनाओं को भी अनदेखा नहीं करते। हर शिकायत पर बारीकी से जाँच करवा कर अगर कोई भी कमी निकलती है तो उस पर FIR दर्ज करवाते हैं और कड़ी कार्रवाई करवाते हैं। हम हर पीड़िता को न्याय दिलाने पर ध्यान देते हैं।”

गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल 2022 गाजियाबाद में एक सिख समाज की लड़की ने DM को शिकायत दे कर अपने साथ 10 साल से शाहनवाज नाम के व्यक्ति द्वारा सुमित यादव नाम से यौन शोषण किए जाने की शिकायत दर्ज करवाई थी। इसके अलावा जून 2022 में आगरा की एक अन्य पीड़िता ने इकरार कुरैशी द्वारा 9 साल तक सुमित जाट बन कर अपने साथ रेप और अप्राकृतिक कृत्य किए जाने की FIR दर्ज करवाई थी।

यूपी की हाथरस कोर्ट ने ऑल्ट न्यूज के मोहम्मद जुबैर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा, जुलाई 2022 में दर्ज हुई थी FIR

फैक्ट चेक के नाम पर एक धार्मिक समूह को निशाना बनाने वाले और अपमानजनक टिप्पणी करने के कारण में AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर (Mohammad Zubair) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। एक अन्य मामले में हाथरस की अदालत ने जुबैर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

बता दें कि मोहम्मद जुबैर के खिलाफ दिल्ली, उत्तर प्रदेश के सीतापुर सहित कई जगहों पर FIR दर्ज की गई है। इनमें हाथरस भी शामिल है। हाथरस में जुबैर के खिलाफ दो FIR दर्ज किए गए हैं। ये FIR जुलाई 2022 में दर्ज किए गए थे।

फैक्टचेक के नाम पर सांप्रदायिकता फैलाने के आरोपित मोहम्मद जुबैर (Mohammed Zubair) के खिलाफ उत्तर प्रदेश में एक और FIR सामने आई है। यह FIR चंदौली जिले में 27 अगस्त 2021 में IT एक्ट की धाराओं में दर्ज हुई थी। खास बात यह है कि जुबैर से जुड़े मामलों की जाँच के लिए गठित एसआईटी (SIT) ने जो बयान जारी किया था उसमें इसका जिक्र नहीं था।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के सीतापुर, लखीमपुरी खीरी, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, हाथरस से ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक जुबैर के खिलाफ दर्ज 6 मामले सामने आए थे। इनमें हत्या की धमकी से लेकर हिन्दू घृणा तक के मामले शामिल हैं। अब चंदौली का मामला सामने आने के बाद यूपी में दर्ज मामलों की संख्या 7 हो गई है। चंदौली में दर्ज FIR में शिकायतकर्ता प्रशांत सिंह हैं। वे वाराणसी क्षेत्र से सुदर्शन न्यूज़ के संवाददाता हैं।

प्रशांत सिंह ने अपनी शिकायत में कहा है, “हमें सोशल मीडिया से जानकारी मिली थी कि जुबैर ने ट्विटर पर सुदर्शन न्यूज के एक ग्राफिक्स के आधार पर 14 मई 2021 के ग्राफिक्स में मदीना की अल नवाबी मस्जिद होने की अफवाह उड़ाई थी। इसके साथ उसने दुनिया भर के मुस्लिमों से सुदर्शन न्यूज का विरोध करने की अपील की थी। हमने अपनी जाँच में जुबैर के दावे को गलत पाया। जुबैर ने महामारी के दौर में समाज में वैमनस्यता फैलाई है। वह उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ भी कई बार अपनी साजिशों में एक्सपोज हो चुका है।”

ऑपइंडिया से बात करते हुए शिकायतकर्ता प्रशांत सिंह ने बताया, “FIR लगभग 11 महीने पहले दर्ज हुई थी। कल (13 जुलाई 2022) मैंने जिले के पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल को इसके संबंध में कॉल किया तो उन्होंने इस पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने इसे SIT की जानकारी में लाने का भरोसा दिया है। हम जुबैर पर कड़ी कार्रवाई चाहते हैं।”

गौरतलब है कि हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करने के साथ भड़काऊ ट्वीट के आरोप में जुबैर पर दिल्ली के साथ UP में कई केस दर्ज हैं। उत्तर प्रदेश में दर्ज केसों की जाँच के लिए SIT का गठन किया गया है।

महात्मा गाँधी की प्रतिमा तोड़ लिखा ‘रेपिस्ट’ और ‘खालिस्तान’: कनाडा की घटना, ‘हेट क्राइम’ पर भारतीय दूतावास ने माँगा एक्शन

कनाडा की राजधानी टोरंटो में मोहनदास करमचंद गाँधी (महात्मा गाँधी) की प्रतिमा तोड़े जाने का मामला सामने आया है। पूरा मामला टोरंटो के रिचमंड हिल स्थित विष्णु मंदिर की है। घटना बुधवार (13 जुलाई) को करीब साढ़े 12 बजे की है। पुलिस का कहना है कि वह इस मामले की जाँच हेट क्राइम के रूप में कर रहे हैं।

बता दें कि योंगी स्ट्रीट और गार्डेन अवेन्यू स्थित विष्णु मंदिर के परिसर में महात्मा गाँधी की करीब 5 मीटर ऊँची प्रतिमा लगी थी, जिसे कुछ लोगों ने तोड़ दिया है। साथ ही इस पर ‘खालिस्तान’ एवं ‘रेपिस्ट’ जैसा आपत्तिनजक शब्द लिख दिया। यॉर्क रीजनल पुलिस के प्रवक्ता एमी बौद्रेउ ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि ये आपत्तिजनक शब्द महात्मा गाँधी की प्रतिमा को खराब करने के इरादे से इस्तेमाल किया गया था।

फोटो साभार: Vishnu Mandir website

cbc.ca की एक रिपोर्ट के अनुसार, बौद्रेउ ने कहा, “जो लोग दूसरे लोगों की नस्ल, जाति, देश, भाषा, धर्म, उम्र, लिंग आदि के आधार पर नफरत करते हैं उनके साथ भेदभाव करते हैं, उनका अपमान करते हैं, उन पर कानूनी सीमा में रहकर मुकदमा चलाया जाएगा। हम मानते हैं कि घृणा अपराधों का समुदाय-व्यापी प्रभाव बेहद दूरगामी है। इसलिए हम हेट क्राइम या इस तरह की सभी घटनाओं की सख्ती से जाँच करते हैं।”

वहीं मंदिर के अध्यक्ष डॉ. बुधेंद्र दूबे ने तोड़फोड़ पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मंदिर शांति पार्क में प्रतिमा 30 साल से अधिक समय से स्थापित था लेकिन ऐसा कृत्य कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि वह इतने सालों से यहाँ रिचमंड हिल में इतनी शांति से रहते हैं, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “अगर हम उस तरह से जीते हैं, जो गाँधी ने हमें जीना सिखाया था, तो हम किसी व्यक्ति या किसी समुदाय को चोट नहीं पहुँचाएँगे।”

भारत ने महात्मा गाँधी की प्रतिमा को तोड़े जाने की निंदा की

भारतीय अधिकारियों ने मामले में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे कनाडा में रहने वाले भारतीय समुदाय को आतंकित करने के लिए किया गया एक दुखद कृत्य बताया है। उन्होंने इस घटना पर दुख जाहिर करते हुए कहा कि इस घृणित घटना से कनाडा में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों की भावना को गहरी ठेस पहुँची है। 

ओटावा में भारतीय उच्चायोग ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। 14 जुलाई को एक ट्वीट में आयोग ने कहा कि इस घटना से काफी आहत है। यह हेट क्राइम है, जोकि भारतीय समुदाय के लोगों को डराने के लिए किया गया है। भारत ने इस मामले में कनाडा सरकार को संपर्क किया है और इस मामले की जाँच करने के लिए कहा है। साथ ही इस घटना के जो भी आरोपित हैं उन्हें सख्त सजा दिलाने की माँग की गई है।

बता दें कि इस पूरे मामले पर कनाडा के टोरंटो में भारत के महावाणिज्य दूतावास की ओर से भी ट्वीट किया गया है। महावाणिज्य दूतावास ने ट्वीट में लिखा, “हम रिचमंड हिल के विष्णु मंदिर में महात्मा गाँधी की प्रतिमा को तोड़े जाने से व्यथित हैं। बर्बरता के इस आपराधिक, घृणित कृत्य ने कनाडा में भारतीय समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है। हम इस हेट क्राइम की जाँच के लिए कनाडा के अधिकारियों के संपर्क में हैं।”

हरियाणा: दुबई से मिल रही विधायकों को धमकी, CM खट्टर ने बुलाई बैठक, दिए सख्त कार्रवाई के आदेश

हरियाणा (Haryana) के कुछ विधायकों को मिली धमकियों का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (CM Manohar Lal Khattar) ने बुधवार (13 जुलाई 2022) को सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया।

मामला सामने आने के बाद सीएम ने राज्य के वरिष्ठ पुलिस के साथ बैठक की। इस दौरान गृहमंत्री अनिल विज भी मौजूद रहे। सीएम खट्टर ने मामले की विस्तृत जानकारी ली और अधिकारियों को निर्देश दिया कार्रवाई में किसी भी तरह की ढिलाई ना बरती जाए।

सीएम मनोहर लाल ने मामले पर बात करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारी प्रदेश के सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और इस प्रकार के मामलों के लिए अपराधियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुँचाने का काम करें। सीएम ने कहा, “हरियाणा में अपराध और अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है।”

सीएम खट्टर ने ट्वीट करते हुए लिखा, “विधायकों को धमकी मिलने के मामले पर गृह मंत्री अनिल विज व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से जानकारी लेकर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में किसी को भी कानून व्यवस्था को बिगाड़ने नहीं दिया जाएगा और ऐसा करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।”

गृह मंत्री अनिल विज ने इसके बारे में जानकारी देते हुए बताया, “यह दूसरे देश का मामला है, क्योंकि जो कॉल आए हैं वे दुबई से हैं और एक ही नंबर से हैं। इसके लिए हमारी स्पेशल टास्क फोर्स राष्ट्रीय एजेंसियों से संपर्क बनाए हुए है। हम जल्द ही पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।”

इससे पहले अनिल विज ने रविवार (10 जुलाई 2022) को बताया था कि मामले की जाँच विशेष कार्य बल (STF) को सौंप दिया गया है। इसके साथ ही उनका कहना था कि वह जाँच से जुड़े घटनाक्रम की रोज मॉनिटरिंग कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि अधिकांश कॉल जबरन वसूली से संबंधित थे और अज्ञात नंबरों से नेताओं के मोबाइल फोन पर किए गए थे।

गौरतलब है कि बीते दिनों हरियाणा के पाँच-छह विधायकों को कथित रूप से धमकी भरे फोन आए थे। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने सोमवार (11 जुलाई 2022) को पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद जिन नेताओं को धमकी मिली है, उनकी सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है।

कमरे में 100 मर्द, चूहे की तरह दुबका वो, सिक्स पैक: पूजा भट्ट ने सुनाए जवानी के किस्से, टिंडर स्वाइप राइड में डेटिंग-सिंगल लाइफ सब पर की बात

बॉलीवुड अभिनेत्री और फिल्म निर्माता पूजा भट्ट (Pooja Bhatt) नई पीढ़ी के डेटिंग नियमों से काफी प्रभावित हैं। एक्ट्रेस ने नई पीढ़ी के डेटिंग नियमों और भारत में पिछले कुछ वर्षों में डेटिंग कैसे विकसित हुआ है इसको लेकर टिंडर इंडिया की स्वाइप राइड विद कुशा कपिला पर अपने अनुभव साझा किए।

दरअसल, दुनिया का सबसे लोकप्रिय डेटिंग ऐप टिंडर स्वाइप राइड के साथ वापस आ गया है। एक्ट्रेस कुशा कपिला इसे होस्ट कर रही हैं। यह एक ऐसा शो है, जिसमें भारतीय महिलाएँ अपने डेटिंग जीवन से वास्तव में क्या चाहती हैं, इसके बारे में बात करता है। एक्ट्रेस ने कहा, “भारत में डेटिंग निश्चित रूप से पिछले कुछ वर्षों में विकसित हुई है। आज के युवाओं के डेटिंग नियम देखना बेहद खास है। इस तरह के प्लेटफॉर्म होने से महिलाएँ प्यार और रिश्तों पर चर्चा करती हैं और अपनी पसंद के बारे में खुलकर बताती हैं।”

टिंडर इंडिया की स्वाइप राइड विद कुशा कपिला पर बोलते हुए, पूजा ने कहा, “अब मेरी सोच पहले से विकसित हो गई है…मुझे नहीं लगता कि मेरा कोई टाइप है। लेकिन जब मैं 20’s में जवान थी, तब का मुझे कोई भी पछतावा नहीं है। कोई पछतावा नहीं है मुझे बिंदास जीने का। मेरे अंदर इतनी क्षमता थी कि मैं 100 मर्दों से भरे कमरे में चली जाती थी। अगर उनमें 99 सामान्य हों और कोई एक चूहे की तरह दुबका हो तो मैं सीधे उसके पास जाती थी और उसे सहज करती थी।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं अभी सिंगल हूँ और अकेले ही जीवन का आनंद का आनंद ले रही हूँ। मुझे लगता है कि प्यार जीवन है और जीवन प्यार है। इसके बिना आपका कोई अस्तित्व नहीं। लेकिन मुझे केवल सिक्स-पैक में दिलचस्पी है, जो एक आदमी के दो कानों के बीच है।”

बता दें कि पूजा ने 17 साल की उम्र में डैडी (1989) से अभिनय की शुरुआत की। उन्होंने दिल है के मानता नहीं, सड़क, जुनून, जानम, फिर तेरी कहानी याद आई, सर, गुनेघर, बॉर्डर और ज़ख्म जैसी कई फिल्मों में अभिनय किया। इसके बाद उन्होंने अपने निर्देशन की दुनिया ​में कदम रखा। इसकी शुरुआत उन्होंने पाप (2004) के साथ की थी।

गौरतलब है कि पूजा भट्ट ने मनीष मखीजा से साल 2003 में शादी की थी लेकिन शादी के 11 साल बाद यानी 2014 में दोनों एक दूसरे अलग हो गए थे। उस समय उन्होंने ट्वीट कर बताया था, “मैं अपनी शर्तों पर जीवन जीना चुनती हूँ और सबके सामने दिखावा करने से इंकार करती हूँ। सर्टिफिकेट न तो शादी बनाते हैं और न उन्हें तोड़ते हैं। जिंदगी करती हैं। हर किसी के लिए जो इस बात की परवाह करते हैं और खासकर मेरे और मेरे पति मुन्ना के 11 साल बाद अलग होने पर पर बात कर रहे हैं… हमारा अलग होना सहमति से है। हम हमेशा एक दूसरे का सम्मान रखते हैं। लेकिन इसका कारण मैं समझती हूँ कि हम पब्लिक डोमेन में हैं। हमारे दोस्त, शुभचिंतक और दुश्मन सारे के सारे अटकलें लगाने के लिए स्वतंत्र हैं।”

मोहम्मद जुबैर के खिलाफ UP में निकली एक और FIR, अब चंदौली में 11 महीने पुरानी फाइल खुली: SIT ने बताए थे 6 ही केस

फैक्टचेक के नाम पर सांप्रदायिकता फैलाने के आरोपित मोहम्मद जुबैर (Mohammed Zubair) के खिलाफ उत्तर प्रदेश में एक और FIR सामने आई है। यह FIR चंदौली जिले में 27 अगस्त 2021 में IT एक्ट की धाराओं में दर्ज हुई थी। खास बात यह है कि जुबैर से जुड़े मामलों की जाँच के लिए गठित एसआईटी (SIT) ने जो बयान जारी किया था उसमें इसका जिक्र नहीं था।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के सीतापुर, लखीमपुरी खीरी, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, हाथरस से ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक जुबैर के खिलाफ दर्ज 6 मामले सामने आए थे। इनमें हत्या की धमकी से लेकर हिन्दू घृणा तक के मामले शामिल हैं। अब चंदौली का मामला सामने आने के बाद यूपी में दर्ज मामलों की संख्या 7 हो गई है। चंदौली में दर्ज FIR में शिकायतकर्ता प्रशांत सिंह हैं। वे वाराणसी क्षेत्र से सुदर्शन न्यूज़ के संवाददाता हैं।

प्रशांत सिंह ने अपनी शिकायत में कहा है, “हमें सोशल मीडिया से जानकारी मिली थी कि जुबैर ने ट्विटर पर सुदर्शन न्यूज के एक ग्राफिक्स के आधार पर 14 मई 2021 के ग्राफिक्स में मदीना की अल नवाबी मस्जिद होने की अफवाह उड़ाई थी। इसके साथ उसने दुनिया भर के मुस्लिमों से सुदर्शन न्यूज का विरोध करने की अपील की थी। हमने अपनी जाँच में जुबैर के दावे को गलत पाया। जुबैर ने महामारी के दौर में समाज में वैमनस्यता फैलाई है। वह उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ भी कई बार अपनी साजिशों में एक्सपोज हो चुका है।”

शिकायत की कॉपी

इस शिकायत पर चंदौली पुलिस ने IT एक्ट 2000 की धारा 67 के तहत FIR दर्ज करते हुए मोहम्मद जुबैर को नामजद किया है। FIR चंदौली कोतवाली में दर्ज है। FIR में जुबैर द्वारा किए गए अपराध का समय 14 मई 2021 दिखाया गया है।

FIR Copy

ऑपइंडिया से बात करते हुए शिकायतकर्ता प्रशांत सिंह ने बताया, “FIR लगभग 11 महीने पहले दर्ज हुई थी। कल (13 जुलाई 2022) मैंने जिले के पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल को इसके संबंध में कॉल किया तो उन्होंने इस पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने इसे SIT की जानकारी में लाने का भरोसा दिया है। हम जुबैर पर कड़ी कार्रवाई चाहते हैं।”

गौरतलब है कि हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करने के साथ भड़काऊ ट्वीट के आरोप में जुबैर पर दिल्ली के साथ UP में कई केस दर्ज हैं। उत्तर प्रदेश में दर्ज केसों की जाँच के लिए SIT का गठन किया गया है।

SSR नहीं कर सकते आत्महत्या, उनका मर्डर हुआ: सुशांत की बहन ने ‘बॉलीवुड नेक्सस’ पर लगाए आरोप, कहा- रिया को पीछे लगाया गया था

सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत के दो साल बाद अब दोबारा से उनके लिए न्याय की माँग उठने लगी है। हाल में रिया चक्रवर्ती का नाम एनसीबी की चार्जशीट में दायर होने के बाद सुशांत की बहन प्रियंका राजपूत मीडिया से मुखातिब हुईं और दावा किया कि उनका भाई आत्महत्या नहीं कर सकता था। वह जब तक जिंदा हैं तब तक इस केस को बंद नहीं होने देंगी।

इंडिया न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि सुशांत को न्याय दिलाने की जो मुहीम चल रही है उसे वो अपने जिंदा रहने तक रुकने नहीं देंगी। उनके मुताबिक, सुशांत का दुनिया से जाना सामान्य नहीं था। ये एक बहुत बड़ी साजिश का नतीजा है जो कि एक नेक्सस ने रची और उसका नाम बॉलीवुड है।

प्रियंका ने बताया कि जब सुशांत सफल होने लगे तो बॉलीवुड के नेक्सस को अपने वर्चस्व का डर सताने लगा। उन्होंने उसे अपने पाले में करने की कोशिश भी की थी। हालाँकि जब ऐसा नहीं हुआ तो सुशांत का करियर समाप्त करने की कोशिश की गई। प्रियंका के मुताबिक, उन लोगों (नेक्सस) को असुरक्षित महसूस होने लगा था कि जो काम वो लोग नेक्सस में रहकर नहीं कर पा रहे वो बिहार से आया कोई लड़का अकेले कैसे कर पा रहा है। उनका मकसद यही होता है कि ऐसा टैलेंट या तो उनके पास आए वरना इंडस्ट्री से जाए।

उन्होंने सुशांत के लिए ड्रगी जैसे शब्द प्रयोग किए जाने पर पूरे ब़ॉलीवुड नेक्सस को लताड़ लगाई और कहा कि आज बोला जा रहा है कि सुशांत ड्रग्स लेते थे जबकि रिया चक्रवर्ती की चैट से ये बात सामने आ चुकी है कि 35 आरोपित किस तरह से ड्रग सिंडिकेट से जुड़े थे। क्या ऐसे आरोपितों की बात से माना जाएगा सुशांत नशेड़ी थे।

प्रियंका ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि उनके भाई को आज ड्रग लेने वाला कहा जा रहा है और पहले कहा जा रहा था कि वो डिप्रेशन में हैं। उन्होंने कहा कि ये वो बातें हैं जो कभी नहीं भूलेंगी। सुशांत को उनकी जगह से हटाकर, उन्हें मारकर आज उनके बारे में बातें हो रही हैं।

वह पूछती हैं, “लोगों को क्या लगता है कि सुशांत ने सुसाइड की? ये बात मैं केस से जुड़े हर व्यक्ति से कहना चाहती हूँ कि सुशांत सुसाइड नहीं कर सकते थे… मैं ये केस आखिरी दम तक लड़ती रहूँगी ये पता लगाने के लिए कि उस दिन हुआ क्या था… अगर ये सुसाइड थी तो जाँच एजेंसियाँ हमें बताएँ कि उस दिन हुआ क्या था।”

उन्होंने दावा किया कि सुशांत की बॉडी से बिलकुल कोई ऐसे संकेत नहीं मिले कि लगे उन्होंने आत्महत्या की थी। प्रियंका बताती हैं कि वो खुद क्रिमिनल वकील हैं और उन्होंने केस देखे हैं जिनमें आत्महत्या के बाद शरीर से पता चल जाता है कि ये आत्महत्या है। उनके अनुसार उनके भाई के शव पर ऐसे कोई भी निशान नहीं थे।

इतना ही नहीं जब 8-9 दिन के बाद पुलिस ने उन्हें सुशांत के घर में जाने की इजाजत दी तो उन्होंने देखा कि जो पंखा है और जो बेड है, उसकी दूरी इतनी नहीं है कि सुशांत वहाँ से लटक सकें। उन्होंने कहा कि बेड और पंखे के बीच जो गैप था वो सुशांत की ऊँचाई से भी कम था। प्रियंका ने फौरन सीबीआई को कहा कि ये आत्महत्या नहीं हो सकती। मगर फिर भी कोई जाँच इस एंगल पर नहीं हुई।

प्रियंका ने इंटरव्यू के दौरान जानकारी दी कि उन्होंने 3 दिन पहले ही दोबारा सीबीआई को पत्र लिखकर कहा है कि आखिर कब वो लोग उनका दोबारा से बयान लेंगे। प्रियंका ने बताया कि उन्हें 2019 से संदेह था कि उनके भाई के साथ कुछ गलत होने वाला है क्योंकि उस समय रिया चक्रवर्ती सुशांत की जिंदगी में आ चुकी थीं और उसने मात्र छह दिन में दोनों भाई-बहन में विवाद पैदा कर दिया था। प्रियंका मानती हैं कि रिया को सुशांत के पास जानबूझकर भेजा गया था। नेक्सस को डर सताने लगा था कि एक बाहरी लड़का करियर में इतना अच्छा कर रहा है ऊपर से उसकी देख रेख करने के लिए उसकी बहन भी साथ आ गई है।

बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत केस में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने हाल में चार्जशीट का ड्राफ्ट कोर्ट में दाखिल किया। इसमें रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक समेत 35 लोगों पर 38 आरोप लगाए गए। रिया के ऊपर सुशांत को ड्रग्स मुहैया कराने का, उन्हें ड्रग के लिए पागल बनाने का और ड्रग्स खरीदने के लिए उनके (सुशांत के) बैंक अकॉउंट का प्रयोग करने का आरोप लगा है। प्रियंका ने इंटरव्यू में इस बात पर भी सवाल उठाए कि उनके भाई के लिए ‘एक्ट्रीम ड्रग एडिक्शन’ जैसे शब्द क्यों इस्तेमाल हो रहे हैं।

मिलिए 70 साल की ‘माँ कृष्णा बम’ से, शिव भक्ति में पाकिस्तान तक गईं: डाक बम बन 37 साल उस बाबा बैद्यनाथ को पूजा, जहाँ पहली बार पहुँचे PM

उनका नाम कृष्णा रानी है। उम्र 70 साल है। बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली हैं। शिक्षिका रही हैं। लेकिन शिव भक्तों के लिए वह ‘माँ कृष्णा बम’ हैं। ऐसी डाक बम जो 37 साल तक सावन के हर सोमवार देवघर में बाबा बैद्यनाथ का अभिषेक करती रहीं। इस यात्रा पर ब्रेक तभी लगा जब वैश्विक कोरोना महामारी ने मंदिरों के पट तक बंद कर दिए।

दो साल बाद 14 जुलाई 2022 से शुरू हुई काँवड़ यात्रा को लेकर देशभर के काँवड़ियों में उत्साह देखा जा रहा है। कृष्णा बम भी उत्साहित हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार वे 16 जुलाई को नर्मदा ओंकारेश्वर से जल लेकर उज्जैन जाएँगी और महाकाल की पूजा करेंगी। इसके बाद देवघर में बाबा बैद्यनाथ की पूजा करेंगी।

देवघर के बाबा बैद्यनाथ के दरबार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल में ही हाजिरी लगाई है। वे ऐसा करने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री हैं। लेकिन, कृष्णा बम की यह यात्रा 1982 में शुरू हुई। वे इसी साल पहली बार डाक बम सुल्तानगंज से काँवड़ में गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ का अभिषेक करने निकलीं थी। उसके बाद कोरोना के आने तक यह सिलसिला कभी नहीं टूटा।

देवघर में बाबा बैद्यनाथ की पूजा करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो साभार: @narendramodi)

आपको बता दें कि डाक बम ऐसे काँवड़िए होते हैं जो एक बार यात्रा शुरू करने के बाद शिव का अभिषेक करने तक कहीं आराम नहीं करते। यात्रा में विराम लेने पर माना जाता है कि डाक बम का गंगाजल अपवित्र हो जाता है और उनकी संकल्प तथा यात्रा खंडित हो जाती है। सुल्तानगंज से देवघर की दूरी करीब 105 किलोमीटर है। कृष्णा बम अपने पैरों से इस दूरी को पूरे 37 साल तक सावन के हर सोमवार को नापती रहीं। इस यात्रा में उन्हें 12 से 14 घंटे लगते थे। इस दौरान पूरा रास्ता बोल बम और कृष्णा बम के घोष से गुँजायमान रहता था। उनके पैर छूने के लिए लोगों का खड़ा होना सामान्य बात होती थी।

जानिए डाक बम कृष्णा को

कृष्णा रानी बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के चकवासु की रहने वाली हैं। उनका जन्म वैशाली में हुआ। वह तीन बहन और एक भाई हैं। पाँच नाती-पोतों से भरा-पूरा उनका परिवार है। शादी के बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई की और 1967 में मैट्रिक पास किया। इसके बाद उन्होंने अपनी आगे पढ़ाई जारी रखी और पॉलिटिकल साइंस से बीए करने के बाद टीचर की नौकरी करने लगीं।

डाक बम के तौर पर अपनी यात्रा के बारे में उन्होंने बताया, “डाक बम के रूप में मैं काँवड़ लेकर 1975 में पहली बार पहलेजा से गरीबनाथ पहुँची। 12 घंटे में मैंने 75 किमी की दूरी तय की। 1975 से 1982 तक लगातार सात साल तक मैं पैदल बाबा गरीबनाथ को जल चढ़ाती रही। इसके बाद 1982 से मैंने सुल्तानगंज से जल लेकर डाक बम के रूप में काँवड़ लेकर देवघर जाना शुरू किया। यह सिलसिला कोरोना आने से पहले तक चलता रहा।”

कृष्णा ने बताया, “मैं 37 सालों तक बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करती रही। इस तरह मैंने 160 सोमवार तक बाबा का जलाभिषेक किया है। इस दौरान मैंने कुल 17600 किमी की दूरी तय की।” इसके अलावा 1989 में उन्होंने गंगोत्री से रामेश्वरम 4500 किमी पैदल यात्रा भी तय की थी। 2014 में वह कैलाश मानसरोवर गईं।

यहाँ तक कि शिव भक्ति में पाकिस्तान में स्थित कटास राज तक गईं। अपनी इस यात्रा के बारे में वे कहती हैं, “जब मुझे कटास राज के बारे में पता चला तो मैंने विदेश मंत्रालय से संपर्क किया। मैंने आवेदन किया और मेरा सेलेक्शन हो गया। कुछ ही लोगों को दिसंबर 2018 में पाकिस्तान ले जाया गया था, जिसमें मैं भी थी। कटास राज धाम लाहौर से 280 किमी दूर है। वह ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल है।”

खास बात यह है कि कृष्णा महादेव के साथ माँ दुर्गा की भी आराधना करती रही हैं। उन्होंने साइकिल से 11 बार वैष्णो देवी की यात्रा की है। वह पति नंद किशोर के साथ साइकिल चलाकर 11 बार मुजफ्फरपुर से कटरा गई हैं। इसके अलावा वह मुजफ्फुरपुर से कामख्यादेवी भी साइकिल चलाकर गई हैं।

‘PFI के साथ आएँ 10% मुस्लिम, कायर बहुसंख्यकों (हिंदू) को घुटनों पर ला इस्लाम कबूल कराएँगे’: बिहार में चल रही थी ‘इस्लामी शासन’ की ट्रेनिंग

बिहार की पटना पुलिस ने फुलवारी शरीफ से आतंकी गतिविधियों में शामिल में 2 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान मोहम्मद जलालुद्दीन और अतहर परवेज के तौर पर हुई है। ये दोनो मार्शल आर्ट्स सिखाने के नाम पर युवकों का ब्रेन वॉश कर रहे थे। उन्हें हथियार चलाना सिखा रहे थे। इनका मकसद 2047 तक भारत को मुस्लिम देश बनाना था।

फुलवारी शरीफ के एएसपी मनीष कुमार सिन्हा ने इस संबंध में बताया, “भारत विरोधी गतिविधि में संलिप्त दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 2 माह से इनसे अलग-अलग जगह से लोग मिलने आते थे और अपनी टिकट व होटल की बुकिंग किसी और नाम से करते थे।”

उन्होंने जानकारी दी कि पुलिस ने जिन दो लोगों को पकड़ा उनमें मोहम्मद जलालुद्दीन तो झारखंड पुलिस का पूर्व सब इंस्पेक्टर रह चुका है जबकि अतहर परवेज आतंकी संगठन सिमी का सदस्य रहा है और फिलहाल वह पीएफआई-एसडीपीआई से जुड़ा है। ये दोनों मिलकर एक संगठन चला रहे थे। इस संगठन के जरिए ये अनपढ़ और भटके युवकों को संपर्क में लेकर उन्हें आतंकी गतिविधियों की ट्रेनिंग देते थे।

ट्रेनिंग में ये मार्शल आर्ट और शारीरिक शिक्षा के नाम पर तलवार और चाकू चलाना सिखाते थे। इसके अलावा धार्मिक उन्माद फैलाने के लिए उनका ब्रेनवॉश करते थे। पुलिस ने बताया है कि उनके पास इसके न केवल गवाह हैं बल्कि सीसीटीवी फुटेज भी हैं। वहीं अतहर परवेज का तो भाई 2001-02 में बम ब्लास्ट मामले में जेल भी जा चुका है।

एएसपी मनीष के अनुसार, पुलिस को इनके पास से 8 पन्नों का दस्तावेज मिला है। जो बताता है कि इनका मकसद 2047 तक भारत को इस्लामी राज्य बनाने का था। इन दस्तावेजों में लिखा था कि पीएफआई मानता है कि 10 फीसद मुस्लिम आबादी उनके साथ आ जाए तो वो कायर बहुसंख्यकों को दोबारा घुटने पर लाएँगे और उन्हें इस्लाम कबूल करवाएँगे।

अब पुलिस इनके पाकिस्तानी कनेक्शन तलाश रही है। इसके अलावा आगे की जाँच के लिए ईडी की मदद भी ली जाएगी। पुलिस को संदेह है कि ट्रेनिंग देने के लिए इन्हें पाकिस्तान ही पैसे देता था। जाँच में पाया गया कि इन लोगों के पास 14, 30 और 40 लाख रुपए के ट्रांजैक्शन प्रमाण भी हैं। पुलिस को पता चला है कि इन्हें पाकिस्तान, बांग्लादेश और केरल से भी फंडिंग होती थी