Home Blog Page 2610

हरियाणा को ‘धमकी’, खालिस्तान का समर्थन… YouTube ने हटाया सिद्धू मूसेवाला का नया गाना, हत्या के बाद किया गया था रिलीज

पंजाबी सिंगर और कॉन्ग्रेस के नेता सिद्धू मूसेवाला (Sidhu moosewala) का एक नया गाना SYL (सतलुज, यमुना लिंक नहर) रिलीज होने के बाद यूट्यूब से हटा दिया गया है। इस गाने के लेखक और गायक सिद्धू मूसेवाला ही थे। यूट्यूब (You Tube) द्वारा हटाए जाने के बाद इस गाने के लिंक पर लिखा दिख रहा है कि सरकार की शिकायतों के बाद इस कंटेंट को भारत के डोमेन से हटा दिया गया है।

सिद्धू मूसेवाला का यह गाना म्यूजिक प्रोड्यूसर MXRCI ने 23 जून 2022 को ही रिलीज किया था। वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर इसे अब तक रिलीज होने के बाद से अब तक इसे 2.3 करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है। इसे 31 लाख से अधिक लोगों ने लाइक किया है।

विवादों में घिरा ये गाना

सिद्धू मूसेवाला का ये गाना रिलीज के बाद से ही विवादों में घिर गया है। इसकी वजह गाने का मनोरंजक होने की बजाय पॉलिटिकल होना है। इस गाने का शीर्षक (एसवाईएल) पंजाब और हरियाणा के उस विवाद का जिक्र करता है, जो कि दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से खटास में है। दरअसल, एसवाईएल (सतलुज यमुना लिंक नहर) की कुल लंबाई 214 किलोमीटर की है। इसमें 122 किलोमीटर का काम पंजाब को पूरा करना था और 92 किलोमीटर का काम हरियाणा के हिस्से था। हरियाणा ने अपने हिस्से में नहर का निर्माण कर भी लिया है, लेकिन पंजाब में यह लटकी पड़ी है। सिद्धू मूसेवाला अपने गाने में कहते हैं ‘जब तक तुम हमें संप्रभुता की राह नहीं देते हो, तब तक पानी तो छोड़ो एक बूँद भी नहीं देंगे।’

गाने में दिवंगत सिंगर ने 1980 के दशक में पंजाब के उग्रवाद का भी जिक्र करते हुए आतंकी गतिविधियों के आरोप में जेल में बंद खालिस्तान समर्थकों की रिहाई की भी माँग करते हैं। (इन्हें पंजाब में बंदी सिख कहा जाता है)। इसके अलावा सिंगर ने एसवाईएल गाने में उन्होंने किसान आंदोलन और लाल किले के मुद्दे को भी उठाया था।

गौरतलब है कि 29 मई 2022 को सिद्धू मूसेवाला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या से एक दिन पहले ही पंजाब की भगवंत मान सरकार ने उनकी सुरक्षा वापस ले ली थी। उनकी हत्या के मामले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया था।

हिंदू प्रिंसिपल के गले में डाली जूतों की माला, बाइक को आग में झोंका: नूपुर शर्मा समर्थक छात्र की साइड लेने पर भड़के कट्टरपंथी

बांग्लादेश में कट्टरपंथी भीड़ द्वारा एक हिंदू स्कूल प्रिंसिपल को सैंकड़ों लोगों के बीच जूतों की माला पहनाकर अपमानित किया गया। घटना 17 जून को मिर्जापुर यूनाइटिड कॉलेज की है। प्रिंसिपल की गलती बस इतनी थी कि उन्होंने उस हिंदू छात्र को इस्लामी भीड़ से बचाया था जिसे नुपूर शर्मा की तस्वीर शेयर करने पर प्रताड़ित किया जा रहा था।

घटना के बाद भीड़ ने अपना गुस्सा प्रिंसिपल को सबके सामने जलील करके उतारा। पूरे मामले में हैरान करने वाली बात ये थी कि ये सब कुछ पुलिस के सामने हुआ लेकिन किसी ने चूँ तक नहीं की। नरेल सदर उपजिला के कॉलेज में घटित इस घटना के बाद कई अल्पसंख्यक सड़कों पर विरोध करने उतरे।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्रिंसिपल के साथ ऐसी बदसलूकी सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि वो हिंदू समुदाय के हैं। हकीकत में प्रिंसिपल का घटना से कोई लेना देना नहीं था। फिर भी पुलिस ने उनकी रक्षा नहीं कीं। प्रदर्शनकारियों ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि ये पूरी घटना सैंकड़ों लोगों के सामने घटी, जो बताती है कि बांग्लादेश का प्रशासन कट्टरपंथियों के आगे कितना मजबूर है।

बता दें कि ये पूरा मामला एक फेसबुक पोस्ट पर शुरू हुआ जब कॉलेज छात्र ने नुपूर शर्मा के समर्थन में फोटो को अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया। इस पोस्ट को देख कट्टरपंथियों ने हिंदू छात्र को परेशान करते हुए कहा कि वह पोस्ट डिलीट करें। इसी बीच प्रिंसिपल स्वप्न कुमार बिस्वास आए और उन्होंने हिंदू छात्र की साइड ले ली।

जब स्थानीय कट्टरपंथियों को इस बात का पता चला तो उन्होंने प्रिंसिपल की और दो शिक्षकों की बाइक में आग लगा दी और पुलिस से भी उनकी झड़प हो गई। बाद में प्रिंसिपल के गले में जूते की माला पहनी वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई। कट्टरपंथियों ने कहा कि टीचर ने इस्लाम का अपमान किया है।

कट्टरपंथियों ने आरोप लगाया कि कुछ मुस्लिम छात्र टीचर के पास हिंदू छात्र की शिकायत लेकर गए थे, लेकिन टीचर ने पुलिस बुला ली। इसी बात पर नाराज भीड़ ने उनको सबक सिखाने के लिए सबके सामने जलील किया। हाल इस तरह कर दिया गया कि प्रिंसिपल ने घटना के बाद सबसे दूरी बना दी शुरू कर दी है। वह डर से घर पर भी नहीं रहते। वहीं हिंदू छात्र के खिलाफ डिजिटल सिक्योरिटी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।

‘हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी बंद करो’: अजमेर में सड़क पर निकले आम लोग, व्यापारी और साधु-संत, नूपुर शर्मा का किया समर्थन

हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणियों के विरोध में राजस्थान का अजमेर में हिन्दुओं ने ‘शांति मार्च’ निकाला। साथ ही उन्होंने नूपुर शर्मा के समर्थन में भी आवाज़ बुलंद की। रविवार (26 जून, 2022) को निकाली गई इस यात्रा में सब कुछ शांतिपूर्ण ढंग से हुआ। इस दौरान पुलिस ने 20 SHO और 1000 से अधिक जवानों की तैनाती की थी। महिला संतों ने इस मौके पर कहा कि हिन्दुओं की भावनाओं का लगातार अपमान हो रहा है और अभद्र टिप्पणियाँ की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि हमारती बेटियाँ ‘ल जिहाद’ का शिकार हो रही हैं, उन्हें धमकी देकर मारा जाता है और उन पर तेजाब फेंक दिए जाते हैं। साधु-संतों ने कहा कि इन घटनाओं का विरोध करने के लिए वो लोग ये रैली निकाल रहे हैं। इस दौरान स्थानीय भाजपा विधायक अनीता भदेल भी वहाँ मौजूद रहीं। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज हमेशा सद्भाव से रहता है, ऐसे में इसकी भावनाओं को चोट नहीं पहुँचाई जानी चाहिए। ये ‘शांति मार्च’ अजंता पुलिया से लेकर कलेक्ट्रेट तक पहुँचा।

मार्च में कई संगठन शामिल थे और अधिकतर आम लोग थे। उन्होंने अपने हाथों में तिरंगा ले रखा था। भाजपा के भी कई नेता-कार्यकर्ता साथ थे। साधु-संतों ने भी भागीदारी दिखाई। लोको ग्राउंड के पास परशुराम मंदिर से इसका आगाज़ हुआ। कलेक्ट्रेट पहुँच कर हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इस दौरान 10 ड्रोन कैमरों से शहर में नजर रखी जाती रही। राष्ट्रपति के नाक सौंपे गए ज्ञापन में नूपुर शर्मा को धमकी देने वालों, हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करने वालों और देश को खंडित करने का प्रयास करने वालों पर कार्रवाई की माँग की गई।

व्यापार संघ ने भी इस शांति मार्च के समर्थन में अपनी दुकानें बंद रखीं। कुछ घंटों के लिए अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद कर के वो भी मार्च का हिस्सा बने। शांति मार्च में उपस्थित लोगों की संख्या हजारों में थी। बता दें कि काशी ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में शिवलिंग मिलने के बाद लगातार इस्लामी कट्टरपंथियों और भीम-मीम समर्थकों ने भगवान शिव का मजाक बनाया था। नूपुर शर्मा को इस्लामी चरमपंथियों ने हत्या से लेकर बलात्कार तक की धमकियाँ दी थीं।

नाइटक्लब से निकलीं 22 लाशें, किसी पर चोट या घाव के निशान नहीं: टेबल-कुर्सियों पर बिखरे पड़े थे शव, मरने वालों में 17 बच्चे

दक्षिण अफ्रीका (South Africa) के ईस्ट लंदन शहर के एन्योबेनी टैवर्न में रविवार (26 जून 2022) को एक नाइट क्लब में ‘मास प्वॉइजनिंग’ (Mass Poisoning) की घटना हुआ हुई है। इस घटना में कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई है। जहर से हुई मौत के बाद ‘टेबल और कुर्सियों पर शव बिखरे रहे’।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना सीनरी पार्क स्थित क्लब की बताई जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस हादसे में जिन लोगों की मौत हुई उनमें से अधिकतर 18-20 साल की उम्र के युवा हैं। इस घटना को लेकर ब्रिगेडियर टेम्बिंकोसी किनाना का कहना है कि जिन परिस्थितियों में वे मारे गए हैं, इसकी जाँच कर रहे हैं। हम इस स्तर पर कोई कयास नहीं लगाना चाहते।

पूर्व केप शहर के पुलिस कमिश्नर नोमथेलेली मेने के मुताबिक, शुरुआती रिपोर्ट में कार्यक्रम वाली जगह पर भगदड़ भी मची थी। हालाँकि, मारे गए लोगों के शरीर पर किसी भी तरह के घाव या चोट के कोई भी निशान नहीं थे। कई रिपोर्ट्स ये दावे जरूर किए गए हैं कि घटना के बाद भगदड़ मच गई और इस चक्कर में कइयों की मौत हुई। पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया है कि मरने वालों में 17 बच्चे थे।

घटना के मरने वालों के परिजन रोते-बिलखते पुलिस अधिकारियों से अंदर जाने देने की मिन्नते करते रहे। उन्होंने अपने बच्चों के नाम लेकर उन्हें बुलाया, लेकिन कोई जिंदा था ही नहीं। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बलों को तैनात किया गया है।

बताया जाता है कि एक या दो डीजे नाइटक्लब में बज रहे थे, जिससे आकर्षित होकर वहाँ बड़ी संख्या में युवाओं की भीड़ इकट्ठी हो गई थी।

22 साल पुराना जख्म ताजा हुआ

मार्च 2000 में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी। उस दौरान दक्षिण अफ्रीका के चैट्सवर्थ में थ्रोब नाइट क्लब में एक आँसू गैस के कनस्तर में विस्फोट के कारण भगदड़ मच गई थी। इसके कारण 13 बच्चों की मौत हो गई थी। 100 से अधिक घायल हुए थे। इससे सबसे कम उम्र के मृतक की आयु 11 साल थी।

कभी साइकिल तक नहीं थी, अब संसद में पहुँचे: सपा के गढ़ में मुलायम परिवार को दी पटखनी, संघर्षों के सुपरस्टार हैं निरहुआ

दिनेश लाल यादव निरहुआ – भोजपुरी बोलने या समझने वाले लोग इस नाम से जरा भी अनभिज्ञ नहीं हैं, क्योंकि 2010 का दशक शुरू होते-होते इस नाम ने भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में वो जगह बना ली थी, जो मनोज तिवारी और रवि किशन जैसे सुपरस्टार्स को ही नसीब था। अब 2019 लोकसभा चुनाव में अखलेश यादव से मिली हार का बदला उन्होंने उनके भाई धर्मेंद्र यादव को हरा कर चुकाया है। सपा के प्रभाव वाले आज़मगढ़ में निरहुआ ने भगवा लहराया है, भाजपा का झंडा बुलंद किया है।

दिनेश लाल यादव निरहुआ मूल रूप से गाजीपुर के बिरहा परिवार से ताल्लुक रखते हैं। निरहुआ को पहली फिल्म ‘हमका अइसा-वइसा न समझा’ मिली थी, लेकिन 2006 में ‘चलत मुसाफिर मोह लियो रे’ उनकी पहली रिलीज थी। इस फिल्म में उनका नाम ‘निरहुआ’ ही होता है। कुमार यादव और चंद्रज्योति यादव के बेटे दिनेश को असली पहचान मिली 2007 में आई ‘हो गइल बा प्यार ओढ़निया वाली से’ फिल्म के बाद। इस फिल्म के गाने उस जमाने में यूपी-बिहार और झारखंड के लोगों की जबान पर थे।

वो 27 मार्च, 2019 को भाजपा में शामिल हुए थे, लेकिन उसके बाद भी उनका फ़िल्मी सफर जारी रहा। 2021 की होली में उन्होंने एक गाना भी रिलीज किया था, जिसमें राम मंदिर के निर्माण की तारीफ़ की गई थी। कुछ गानों में उन्होंने राजनीति का छौंक भी लगाया था। बचपन में कराटे की ट्रेनिंग ले चुके निरहुआ का एक्शन लोगों को इतना पसंद आता था कि उनकी फ्लॉप फ़िल्में भी आराम से 3 सप्ताह चल जाती थीं। डेब्यू के 3 वर्षों के भीतर वो भोजपुरी के ‘जुबली स्टार’ बन गए थे।

उस दौर में उन्होंने फिजी, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में स्टेज शो भी किए। 2007 में ही उनकी फिल्म ‘निरहुआ रिक्शा वाला’ आई थी, जो सुपरहिट रही थी। साथ ही इसके गाने भी जबरदस्त हिट हुए थे। 2014 में आई ‘निरहुआ हिंदुस्तानी’ उनकी 50वीं फिल्म थी। ये फिल्म मल्टीप्लेक्सों तक पहुँची। 2016 में यूपी सरकार ने उनके योगदान को ‘यश भारती सम्मान’ देकर सराहा। 2018 में आई उनकी मूवी ‘बॉर्डर’ ने 19 करोड़ रुपए कमाए, जो भोजपुरी फिल्मों के लिए एक रिकॉर्ड है।

बेहद साधारण परिवार से आने वाले दिनेश लाल यादव निरहुआ के पिता कोलकाता में 3500 रुपए मासिक की एक नौकरी करते थे, जिससे उन्हें पत्नी के अलावा 5 बच्चों की परवरिश करनी होती थी। निरहुआ का एक भाई भी है। साथ ही उनकी 3 बहनें भी हैं। तब उनके पास एक साइकिल तक नहीं हुआ करती थी और कई किलोमीटर तक पैदल चलते थे। उनका मन बचपन से ही गीत-संगीत में लगता था और चचेरे भाई विजय लाल उनकी प्रेरणा थे, जो उस इलाके के एक प्रभावशाली बिरहा गायक थे।

आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव के प्रचार के दौरान मुक्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ दिनेश लाल यादव निरहुआ

वैसे निरहुआ ने फिल्मों में आने से पहले ही भोजपुरी गीत-संगीत सुनने वालों के बीच अपना नाम बना लिया था, क्योंकि 2003 में आया उनका एल्बम ‘निरहुआ सटल रहे’ खासा लोकप्रिय हुआ था। चुनावी हलफनामे उन्होंने उन्होंने अपनी संपत्ति लगभग 6 करोड़ रुपए बताई है। उनके पास रेन्ज रोवर और फॉर्च्यूनर गाड़ी भी है। 2019 में उन्होंने OTT डेब्यू भी किया और भोजपुरी की पहली वेब सीरीज ‘हीरो वर्दी वाला’ में अभिनय किया।

2012 में आई ‘गंगा देवी’ फिल्म में वो अमिताभ बच्चन के साथ भी काम कर चुके हैं। 2018 में आई ‘निरहुआ चलल लंदन’ पहली भजपुरी फिल्म थी, जिसकी शूटिंग विदेश में हुई। 2012 में वो ‘बिग बॉस’ संस्करण का हिस्सा भी रह चुके हैं। 2016 में आई उनकी मूवी ‘पटना से पाकिस्तान’ भी खासी लोकप्रिय हुई थी। उनकी आने वाली फिल्म ‘वीर योद्धा महाबली’ को हिंदी, बांग्ला, तमिल और भोजपुरी – 4 भाषाओं में रिलीज करने की तैयारी है।

‘गुप्तांगों पर मारी जाती लात, सैंडल से कुचला जाता’: मजीद ने अरब देशों में बेची केरल की औरतें, कुवैत से अब तक 4 का रेस्क्यू

खाड़ी देशों में मानव तस्करी (Human trafficking) को लेकर काफी कड़े कानून हैं, लेकिन इन सब के बावजूद वहाँ मानव तस्करी की समस्याएँ कम होने की बजाय बढ़ी हैं। कई सामाजिक संगठनों के प्रयासों से केरल (Kerala) की कई महिलाओं को (हाल ही में चार महिलाओं को) बचाया गया है। तस्कर इन महिलाओं को नौकरी दिलाने के बहाने उन्हें कुवैत ले जाते थे और वहाँ पर इन महिलाओं को बंधक बना लिया जाता था। हाल ही में कुवैत से चार महिलाओं को बचाया गया है, जिन्होंने मामले में शिकायत दर्ज कराई है।

हालाँकि, इससे पहले कि पुलिस तस्करी गिरोह के सरगना मजीद (एमके गसाली) को पकड़ती वो देश छोड़कर फरार हो गया। पीड़ित महिलाओं ने शिकायत में कहा कि मजीद ने अपनी पत्नी को घर वापस भेजने का अनुरोध करने वाले व्यक्ति से 3.5 लाख रुपए की डिमांड की थी। उसने धमकी दी थी कि अगर वो इतने पैसे नहीं देता है तो वो पत्नी को सीरिया ले जाएगा और वहाँ आतंकी समूह आईएसआईस को बेच देगा।

मजीद ने व्यक्ति को कहा था कि तुम्हारी पत्नी नौकरानी बनने के काबिल नहीं थी। उसने कहा था, “जो भी काम करने के लिए कहा गया है उसे करो और वहीं रहो। तुम्हारा एक पति है, ना? वो मेरे पैरों की सैंडल के लायक भी नहीं है। तुम कहीं भी पुलिस या सेना में शिकायत करो। मुझे पता है कि तुम्हारे साथ क्या करना चाहिए।” कुवैत से बचाई गई महिलाओं ने जिस वक्त कोच्चि पुलिस को शिकायत की, उस दौरान मजीद कोझीकोड में ही था। लेकिन लुक आउट सर्कुलर जारी होने से पहले ही वो विदेश चला गया और वहीं से मानव तस्करी के रैकेट को चला रहा है।

हालाँकि, केरल पुलिस ने मानव तस्करी के मामले में पथानामथिट्टा से अजुमोन नाम के एक अन्य आरोपित को गिरफ्तार किया है, जो कि मजीद के एजेंट के तौर पर काम कर रहा था। उसका काम नौकरी के बहाने महिलाओं की भर्ती कर उन्हें मजीद को सौंपने का था।

कुवैत में कैसी होती है महिलाओं की जिंदगी

हाल ही में कुवैत से बचाकर लाई गई तीन महिलाएँ फोर्ट कोच्चि की रहने वाली हैं। इन्हीं पीड़ितों में से एक बताती हैं कि उन्हें बेबी सिटर की नौकरी का लालच दिया गया था। दूसरी कोट्टायम जिले के चानागनचेरी के पास इथिथनम से थीं। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें मानवर तस्करी के रैकेट के जरिए गुलाम बनाकर कुवैत में बेच दिया गया था। उससे सिलाई की नौकरी के बदले 45000 रुपए की सैलरी का वादा किया गया था।

इथिथनम की मूल निवासी ने कहा, “मैंने दिन-रात नौकरानी का काम किया और गंभीर शारीरिक हमले सहे।” पीड़िता के मुताबिक, उसे वहाँ खाना पकाने, सफाई, हाउसकीपिंग और कपड़े धोने के साथ ही उस घर के 9 छोटे बच्चों भी देखभाल करनी थी। इसी साल जनवरी में 48 साल का एक एजेंट उसे कुवैत लेकर गया था। वो वहाँ उसे एक घर में छोड़कर नोटों का बंडल लेकर चला गया। पीड़िता उस प्रताड़ना को याद कर कहती है, “कुबू और सादा पानी ही एकमात्र भोजन दिया जाता था और वह भी मुझे मुश्किल से एक दिन में मिलता था। छोटी सी भी गलती के लिए थप्पड़ जड़ दिया जाता था। उन्होंने मेरे पेल्विक पर जोर से ठोकर मारी और हाई हील्स की सैंडल पहनकर मेरे पूरे शरीर पर चढ़ गए और पीट-पीट कर अधमरा कर दिया।”

पीड़िता के मुताबिक, कन्नूर के रहने वाले अली नाम के उसके एक दोस्त ने उसे कुवैत में नौकरी की संभावनाओं के बारे में आश्वस्त किया था। जल्द ही उसने तिरुवनंतपुरम से गायत्री के बैंक खाते में वीजा और टिकट खर्च के लिए 80,000 रुपए ट्रांसफर कर दिए। वहाँ जाने के बाद करीब दो महीने तक उसे प्रताड़ना झेलनी पड़ी। एक दिन किसी तरह वो अपने घर वालों से बात कर पाई और उनसे मदद माँगी। बाद में भारतीय दूतावास के जरिए उसे बचाया गया। इसी तरह की स्थिति खाड़ी देशों में बाकी महिलाओं की भी है, जिन्हें नौकरी के बहाने तस्करी किया गया है।

कौन है इस रैकेट का सरगना

मानव तस्करी के रैकेट का सरगना तालीपरंबा का रहने वाला एमके गसाली उर्फ मजीद है। इसका खुलासा तब हुआ जब अजुमोन नाम के उसके एजेंट को पुलिस ने पकड़ा। उसने बताया कि कई लोग उससे नौकरी के लिए संपर्क करते हैं, जिन्हें वहाँ भेजा जाता है। उसने इस बात को भी कबूल किया कि कई जवान लड़कियों को सीरिया भेज दिया गया है। उसका काम केरल में विदेशों में नौकरी का विज्ञापन देने का था। अजुमोन ने बताया कि वो मजीद के निर्देशों पर काम करता था। मजीद ने फँसाई गई महिलाओं को 60000 रुपए की सैलरी देने का वादा किया था।

गौरतलब है कि खाड़ी के अरब देशों में अभी भी 100 से ज्यादा मलयाली महिलाएँ फँसी हुई हैं।

आज़मगढ़ और आज़म का गढ़ – दोनों सीटों पर लहराया भगवा: निरहुआ ने अखिलेश यादव के भाई को हराया, और मजबूत हुआ ‘ब्रांड योगी’

आज़म खान के गढ़ कहे जाने वाले रामपुर की जनता ने वहाँ भगवा लहरा दिया है। वहीं सपा के संस्थापक परिवार के गढ़ से दिनेश लाल यादव निरहुआ ने बाजी मार ली है। दिनेश लाल यादव निरहुआ 2019 लोकसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से हार गए थे, लेकिन इस बार उन्होंने अखिलेश के भाई धर्मेंद्र को हरा कर अपना बदला पूरा किया है। वहीं रामपुर से भाजपा के घनश्याम सिंह ने जीत दर्ज की है। इससे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि और मजबूत हुई है।

सीए योगी ने उप-चुनाव के दौरान दोनों ही सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों के लिए प्रचार किया था। जहाँ तक धर्मेंद्र यादव का सवाल है, वो इससे पहले लगातार तीन बार सांसद रह चुके हैं। 2004 में जहाँ उन्होंने मैनपुरी से जीत दर्ज की थी, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में सपा ने उन्हें बदायूँ से उतारा था और उन्हें जीत भी मिली थी। इन दोनों चुनाव परिणामों से न सिर्फ समाजवादी पार्टी, बल्कि मुलायम सिंह यादव के परिवार को बड़ा झटका लगा है।

इस उपचुनाव के नतीजे इसीलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि अखिलेश यादव और आज़म खान, दोनों ने अपनी-अपनी सीटें खाली कर दी थीं। अखिलेश यादव ने करहल से और आज़म खान ने रामपुर से ही विधानसभा चुनाव जीतने के बाद विधायक रह कर राज्य की राजनीति को समय देने का फैसला लिया था। सपा दोनों सीटों पर जीत को लेकर आश्वस्त थी। आज़मगढ़ मुलायम परिवार का पुराना गढ़ रहा है और रामपुर में आज़म खान के परिवार की गुंडई चलती रही है।

वहीं मायावती ने बसपा की तरफ से गुड्डू जमाली को आजमगढ़ से उतारा था, जो तीसरे नंबर पर रहे। अब बात तो ये भी चल रही है कि मुलायम सिंह यादव गुट के धर्मेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाने का फैसला अखिलेश यादव ने दबाव में लिया था और इसीलिए उन्होंने उपचुनावों में रुचि नहीं दिखाई। आज़म खान से भी उनका टकराव चलता रहा। वोटिंग प्रतिशत भले ही कम रहा हो, लेकिन उपचुनावों में ये भी मायने रखता है।

‘लाखों शिवसैनिकों को हमारे एक इशारे का इंतजार’: संजय राउत की धमकी के बीच बागी विधायकों की केंद्र ने बढ़ाई सुरक्षा, 15 MLA को Y+ सिक्योरिटी

महाराष्ट्र में शिवसेना के बागी विधायकों को मिल रही धमकियों के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपनी कार्रवाई की है। खबर है कि गुवाहाटी में बैठे शिवसेना के 15 बागी विधायकों को केंद्र की ओर से वाई प्लस सिक्योरिटी मुहैया करवा दी गई है।

सामने आई जानकारी के अनुसार, वाई प्लस सिक्योरिटी (सीआरपीएफ की सुरक्षा) जिन विधायकों को दी गई हैं उनमें रमेश बोर्नारे, मंगेश कुदालकर, संजय शिरसत, लताबाई सोनवाणे, प्रकाश सुर्वे समेत 15 विधायकों के नाम हैं। केंद्र द्वारा यह फैसला उस समय लिया गया है जब उद्धव सरकार के समर्थक सड़कों पर उतरकर बागी विधायकों के पोस्टर फाड़ रहे हैं उन्हें धमकी दे रहे हैं। संजय राउत ने भी खुले में कहा है कि उनके लाखों शिवसैनिक एक इशारे के इंतजार में हैं।

एकनाथ शिंदे का पत्र और बेटे के ऑफिस पर हमला

बता दें कि शनिवार (25 जून 2022) को बागी विधायकों के परिवार की सुरक्षा हटाए जाने के मामले पर शिवसेना नेता व महाराष्ट्र सरकार में मंत्री एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र राज्य के गृह मंत्री, सीएम उद्धव ठाकरे, और राज्य के डीजीपी को पत्र लिखा था। इसके बाद राज्य के गृह मंत्रालय ने ये कहा कि उन्होंने सुरक्षा हटाने का निर्णय नहीं लिया है जबकि संजय राउत ने कहा कि जैसी सुरक्षा विधायकों को मिली है वैसी उनके परिजनों को नहीं दी जा सकती।

गौर देने वाली बात ये है कि एक ओर जहाँ बागी विधायकों के परिजनों की सुरक्षा हटने के मामले पर संजय राउत अपना बयान दे रहे थे। वहीं शिवसेना के गुंडों द्वारा बागी विधायकों के परिजनों पर हमले की खबर आ रही थी। एकनाथ शिंदे के बेटे के तो कार्यालय पर ही तोड़फोड़ कर दी गई थीं। वहीं एक अन्य बागी विधायक तानाजी के कार्यालय पर भी हमला हुआ था। इसके अलावा कई और जगह शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरने की धमकी दी थी।

संजय राउत की शिंदे गुट को धमकी

संजय राउत ने भी मीडिया में एकनाथ शिंदे गुट को खुले में चेतावनी देते हुए कहा है कि जो लोग बाहर गए हैं वो अपने बाप के नाम का इस्तेमाल करें, बालासाहेब का नहीं। राउत ने धमकी देते हुए कहा- “लाखों शिवसैनिक हमारे इशारे का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन हमने अब भी संयम बरता है।”

बागी विधायक एकनाथ शिंदे ने बयान जारी करते हुए कहा था कि अगर उनके परिवार को कुछ भी हुआ तो उसके जिम्मेदार उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे होंगे। इधर उद्धव ठाकरे ने  उद्धव ठाकरे ने भी हाई लेवल बैठक में शिंदे पर निशाना साधते हुए कहा था कि वो पहले नाथ थे, लेकिन अब दास हो गए हैं। उन्होंने कहा कि बालासाहब ठाकरे का नाम लेकर कोई भी बागी विधायक राजनीति नहीं कर पाएगा। वे सभी सुलग रहे बम पर बैठे हैं।

उद्धव ठाकरे का बहुमत शिंदे के पास

मालूम हो कि महाराष्ट्र की राजनीति में आया भूचाल केवल इसलिए है क्योंकि उद्धव सरकार से असहमत एकनाथ शिंदे अपने समर्थन में विधायकों को जुटाकर गुवाहाटी में हैं। उनका दावा है कि उनके पास शिवसेना के 55 में से 38 विधायक हैं। अब उद्धव सरकार को डर है कि अगर शिंदे गुट किसी को अपना समर्थन देगी तो उनकी सरकार गिर जाएगी। यही वजह है कि उन्होंने इन 38 में से 16 विधायकों को अयोग्य करार देने के लिए अर्जी दी है। 27 जून को इस पर निर्णय होगा। फिलहाल बागी विधायकों के विरुद्ध सड़कों पर उतरे हिंसक लोगों को देख गृह मंत्रालय ने उन्हें सुरक्षा दी है।

‘जब आपके माता-पिता से छीना गया था जीने का अधिकार’: PM मोदी ने युवाओं को सुनाया ‘आपातकाल’ का हाल, आज भारत के अंतरिक्ष में पहुँचने पर भी चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (26 जून 2022) मन की बात के 90वें कार्यक्रम के जरिए देश से एक बार फिर मुखातिब हुए। उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं को आपातकाल से लेकर स्पेस सेक्टर के बारे में बताया। उन्होंने खेल जगत पर चर्चा करते हुए नीरज चोपड़ा और मिताली राज की उपलब्धियों को गिनाया। इसके अलावा वह पर्यावरण पर व आने वाले धार्मिक उत्सवों पर भी बात करते सुनाई पड़े।

उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए आपातकाल पर बात की। पीएम मोदी ने 24-25 वर्ष के युवा लड़कों को बताया कि 1975 में एक समय वो भी आया था जब लोगों से उनके जीवन के हर अधिकार को छीन लिया गया था। न देश की अदालतें काम कर रही थीं, न प्रेस और न कोई संवैधानिक संस्था। सेंसरशिप के नाम पर बिन अनुमति कुछ भी नहीं छापने दिया जा रहा था। उन्होंने बताया कि कैसे उस दौर को भारतीयों ने हराया और वापस देश में लोकतंत्र आया।

इसके बाद उन्होंने स्पेस सेक्टर पर बात करते हुए इन-स्पेस नामक एजेंसी की चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस एजेंसी के लोकार्पण के दौरान उन्हें इसी सेक्टर में कई स्टार्ट-अप्स के आइडिया मिले। पीएम मोदी ने याद दिलाया कि एक समय में कोई स्पेस सेक्टर में स्टार्ट अप को लेकर सोचता भी नहीं था। लेकिन अब इनकी संख्या 100 से अधिक है। कोई छोटे पे लोड्स को अंतरिक्ष तक ले जाने के लिए काम कर रहा है तो कोई सस्ते फ्लैट एंटीना बनाने पर। स्कूल स्टूडेंट तन्वी तक एक सैटेलाइट पर काम कर रही है जो कुछ महीनों में लॉन्च होगी।

पीएम ने बताया कि कैसे नीरज चोपड़ा ने हाल के दिनों में अपने ही जैवलीन थ्रो के रिकॉर्ड को तोड़ा। खेलो इंडिया युवा खेलों में भी इस बार कई खिलाड़ी देश को मिले। आगे अपनी बात बढ़ाते हुए पीएम मोदी ने भारतीय महिला क्रिकेट की पूर्व कप्तान मिताली राज को शुभकामनाएँ दीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘वेस्ट टू वेल्थ’ पर चर्चा करते समय मिजोरम की राजधानी आइजवाल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि वहाँ नदी को बचाने के लिए काम में जुटी एक संस्था ने पॉलिथिन से सड़क बनाने का फैसला किया है। इसी तरह हिमाचल में भी स्वच्छता को लेकर साइकलिंग रैली हो रही है।

इसके बाद पीएम मोदी ने भारत के धार्मिक उत्सवों पर बात करते हुए भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध यात्रा पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि ये यात्रा आषाढ़ महीने की द्वितीया से शुरू होती है और वह लोग जब अहमदाबाद में थे तब वहाँ निकाली जाने वाली इस रथयात्रा में हमेशा भाग लेते थे। वहाँ इसे आषाढ़ी बिज कहते हैं और इसी दिन से कच्छ का अपना नया साल शुरू होता है। मन की बात के दौरान उन्होंने कच्छ की जनता को नए साल की शुभकामनाएँ दी।

तीस्ता सीतलवाड़ का ठिकाना अब अहमदाबाद, बोलीं – ‘मजिस्ट्रेट के आगे दूँगी बयान’: मुंबई से ले गई गुजरात ATS, क्राइम ब्रान्च को सौंपा

तीस्ता सीतलवाड़ (Teesta Setalvad) को लेकर गुजरात ATS मुंबई से अहमदाबाद पहुँच चुकी है। रास्ते में सुरक्षा के चाक-चौबंद प्रबंध किए गए थे। वहीं तीस्ता सीतलवाड़ ने अपना बयान अहमदाबाद कोर्ट में मजिस्ट्रेट के आगे देना बताया है। 25 जून 2022 (शनिवार) शाम को पुलिस तीस्ता को शांताक्रूज पुलिस स्टेशन से अहमदाबाद ले कर निकली थी।

टाइम्स नाउ नवभारत की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात ATS कोर्ट से तीस्ता सीतलवाड़ का रिमांड माँगेगी। तीस्ता के साथ गिरफ्तार हुए पूर्व IPS श्रीकुमार और पूर्व IPS संजीव भट्ट को भी आज कोर्ट में पेश किया जाएगा। संजीव भट्ट को जेल से लाया गया है।

इस केस की जाँच अहमदाबाद क्राइम ब्रान्च कर रही है। पुलिस इन सभी का अधिक से अधिक समय तक रिमांड लेने का प्रयास करेगी। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद तीनों के रिमांड की पूरी संभावना जताई जा रही है।

अहमदाबाद में पत्रकारों के सवाल पर तीस्ता ने कहा, “मैं कोर्ट सँख्या 11 में मजिस्ट्रेट के आगे अपना पूरा स्टेटमेंट दूँगी।”

गौरतलब है कि तीस्ता सीतलवाड़ पर NGO में आए पैसे के दुरुपोग के साथ अदालत में गलत जानकारी पेश करने का आरोप है। जाकिया जाफरी केस में सुप्रीम कोर्ट की तल्ख़ टिप्पणी के बाद उन पर कार्रवाई तय मानी जा रही थी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी तीस्ता सीतलवाड़ का नाम जकिया जाफरी के पीछे छिपे चेहरे के तौर पर लिया था।