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टेढ़ा मुँह, फूले होंठ, आँख बंद: सर्जरी ने बिगाड़ा एक और हिरोईन का चेहरा, एनेस्थीसिया की जगह डॉक्टर ने दिया सैलिसिलिक एसिड

साउथ की अभिनेत्री स्वाति सतीश हाल ही में रूट कैनाल सर्जरी करवाने के बाद पछता रही हैं। उनकी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं। तस्वीरों में उनका पूरा चेहरा टेढ़ा नजर आ रहा है। स्वाति के अनुसार, गलत ट्रीटमेंट के कारण उनके साथ ऐसा हुआ और इसके लिए पूरी तरह डॉक्टर जिम्मेदार है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वाति ने हाल में दाँतों के लिए रूट कैनाल सर्जरी करवाई थी लेकिन इसके बाद उनके पूरे चेहरे पर सूजन आ गई और दर्द शुरू हो गया। डॉक्टर से शिकायत की तो उसने कहा कि ये सामान्य बात है, दो-तीन दिन में चेहरा ठीक हो जाएगा। हालाँकि सर्जरी के 3 हफ्ते बीत जाने के बाद भी स्वाति का चेहरा वैसा का वैसा ही है। उनकी तस्वीरों में उनकी एक आँख बंद, मुँह टेढ़ा और होंठ फूले नजर आ रहे हैं।

कोई भी उनकी पहली और बाद की फोटो देखे तो नहीं कह सकता कि ये एक ही शख्स की है। स्वाति ने अपने चेहरे की हालत की वजह से घर से बाहर निकलना बंद कर दिया है। साथ ही तस्वीर शेयर करके डॉक्टर पर आरोप लगाया कि उसने एक्ट्रेस को ट्रीटमेंट के दौरान गलत और आधी-अधूरी जानकारी दी। ट्रीटमेंट के दौरान उन्हें एनेस्थीसिया न देकर सैलिसिलिक एसिड दिया गया था। इसका पता भी उन्हें तब चला जब वह दूसरे अस्पताल में गईं।

बता दें कि सर्जरी के कारण चेहरा बिगड़ने का ये कोई पहला मामला नहीं सामने आया है। पिछले महीने कन्नड़ धारावाहिकों की अभिनेत्री चेतना राज से जुड़ा केस भी खूब वायरल हुआ था जब उन्होंने चेहरे पर प्लास्टिक सर्जरी करवाई थी और उसके कारण उनकी मौत हो गई थी। खबर आई थी कि 16 मई को ‘फैट फ्री’ (fat-free plastic surgery) सर्जरी के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन शाम को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और उनके फेफड़ों में पानी जमा होने लगा, जिससे उनकी मौत हो गई।

एक्ट्रेस के माता-पिता ने भी बेटी की मौत के बाद डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि डॉक्टर की लापरवाही के कारण उनकी बेटी की असमय मौत हो गई। चेतना राज के माता-पिता ने अस्पताल के अधिकारियों के खिलाफ पास के थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी।

हिंदू महिला के शिशु का सिर काट गर्भ में छोड़ा, स्ट्रेचर पर तड़पते हुए Video बना किया वायरल: पाकिस्तान के सरकारी अस्पताल की घटना

पाकिस्तान में एक सरकारी अस्पताल के स्टाफ की घोर लापरवाही सामने आई है। सिंध प्रांत में एक ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने एक नवजात शिशु का सिर काटकर माँ के गर्भ में छोड़ दिया। इस वजह से महिला की जान खतरे में पड़ गई।

खबर मीडिया में आने के बाद जागी सरकार

पीड़ित हिंदू महिला भील है। उसकी उम्र 32 वर्ष है। इस घटना के मीडिया में आने के बाद सिंध सरकार ने जाँच के आदेश दिए हैं। साथ ही मामले की तह तक जाने और दोषियों का पता लगाने के लिए चिकित्सा जाँच बोर्ड का गठन किया है।

अनुभवहीन कर्मचारियों ने कर दी सर्जरी

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक प्रोफेसर राहिल सिकंदर ने बताया है कि पीड़ित हिंदू महिला थारपारकर जिले के एक दूर-दराज के गाँव की रहने वाली है। वह इलाज के लिए अपने क्षेत्र के एक ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र (RHC) गई थी। वहाँ कोई महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण उसकी सर्जरी अनुभवहीन कर्मचारियों ने कर दी, जिसकी वजह से उसकी जान पर बन आई।

मरने जैसी हो गई थी हालात

उन्होंने कहा कि आरएचसी के कर्मचारियों ने रविवार (19 जून 2022) को हुई सर्जरी के दौरान माँ के गर्भ में पल रहे नवजात शिशु का सिर काट दिया और उसके गर्भ में छोड़ दिया। इसके बाद महिला की तबियत बिगड़ती चली गई। जब महिला की मरने जैसी हालात हो गई तो उसे मीठी के नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। लेकिन वहाँ भी उसके इलाज के लिए कोई सुविधा नहीं थी। आखिरकार, उसका परिवार नेसे हैदराबाद के लियाकत यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल (LUH) ले आया, जहाँ गर्भ से शिशु का सिर निकाला गया और महिला की जान बच गई। 

बच्चे का सिर पेट में फँसा हुआ था

प्रोफेसर राहिल सिकंदर जमशोरो के लियाकत यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज (LUH) की स्त्री रोग इकाई के प्रमुख हैं। उन्होंने इस घटना के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। प्रोफेसर सिकंदर ने बताया कि बच्चे का सिर अंदर फँसा हुआ था और माँ के गर्भाशय की हालत भी खराब हो चुकी थी। इसलिए महिला की जान बचाने के लिए उसका पेट खोलना पड़ा और नवजात के सिर को बाहर निकाला गया। 

सिंध स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशक डॉ. जुमान बहोतो ने इस मामले में अलग से जाँच का आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जाँच समितियाँ पता लगा लगाएँगी कि क्या हुआ था, खासकर चाचरो के आरएचसी में स्त्री रोग विशेषज्ञ और महिला कर्मचारियों की अनुपस्थिति को लेकर जाँच होगी। मीठी के जिला स्वास्थ्य अधिकारी को 24 घंटे के भीतर जाँच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।

पीड़ित महिला का बनाया वीडियो

जुमान ने कहा कि जाँच समितियाँ उन रिपोर्टों पर भी गौर करेंगी, जिसमें महिला स्ट्रेचर पर तड़प रही थी और उसका वीडियो बनाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि अस्पताल के अंदर कुछ मेडिकल कर्मचारियों ने स्त्री रोग वार्ड में तड़पती महिला की तस्वीरें खींची, उसका वीडियो बनाया और फिर कई व्हाट्सएप ग्रुप में उसे शेयर किया गया। जाँच टीम इसकी भी जाँच करेगी, क्योंकि ये अमानवीयता है।

सचिन वाजे को बहाल करने के लिए उद्धव-आदित्य ने परमबीर सिंह पर डाला था दबाव, देशमुख की करतूतों के बारे में जानते थे पवार: ₹100 करोड़ की वसूली में CBI चार्जशीट

भ्रष्टाचार के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने CBI को बताया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और उनके बेटे तथा सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे ने निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को बहाल करने के लिए दबाव डाला था।

100 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार के मामले में CBI द्वारा दाखिल चार्जशीट में परमबीर सिंह के हवाले से यह भी कहा प्रदेश के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख और अन्य दो मंत्रियों ने भी वाजे के लिए उन पर दबाव बनाया था।

मुंबई के पूर्व सीपी सिंह ने यह भी कहा कि इस मामले में उन्होंने सीएम उद्धव ठाकरे, डिप्टी सीएम अजीत पवार, NCP प्रमुख शरद पवार और कुछ अन्य लोगों को महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के करतूत के बारे में सूचित किया था। हालाँकि, इसके बारे में वे सभी पहले से ही जानते थे।

अपने बयान में परमबीर ने कहा, “गृहमंत्री देशमुख ने एक प्रेस वार्ता के बाद वाजे की प्रशंसा की और मुझसे कहा कि उन्हें बहाल किया जाना चाहिए। यह 22-23 मार्च 2020 के आसपास का समय था। कुछ दिनों बाद आदित्य ठाकरे के पीए सूरज चौहान मुझसे मिलने आए और यह कहते हुए उन्होंने मुझ पर सचिन वाज़े को बहाल करने का दबाव डाला कि ऐसा आदित्य ठाकरे चाहते हैं।”

इसके बाद उन्होंने CM उद्धव ठाकरे से फोन पर बात की तो उन्होंने बहाल करने के लिए कहा। इसके बाद अप्रैल 2020 के पहले सप्ताह में गृहमंत्री अनिल देशमुख ने उन्हें वाजे को बहाल करने के लिए दबाव डाला और बहाली की चिट्ठी दी। इसके बाद परमबीर सिंह ने कहा कि निलंबन तुरंत रद्द नहीं किया गया था, क्योंकि समीक्षा समिति आमतौर पर हर तिमाही में केवल एक बार मिलती थी।

मार्च 2021 में पुलिस प्रमुख के पद से हटाए जाने के बाद परमबीर सिंह ने सीएम ठाकरे को एक पत्र लिखा था, जिसमें देशमुख द्वारा पुलिस तबादलों में हस्तक्षेप करने सहित कदाचार के कई आरोप लगाए थे। उन्होंने यह बताया कि पत्र भेजने से पहले उन्होंने ठाकरे को देशमुख के कुकृत्यों के बारे में जानकारी दी थी, तब ठाकरे ने कहा था कि वे आपके गृहमंत्री हैं।

इसके बाद परमबीर सिंह ने देशमुख के बारे में राकांपा अध्यक्ष शरद पवार, डिप्टी सीएम अजीत पवार, सिंचाई मंत्री जयंत पाटिल और परिवहन मंत्री अनिल परब शामिल को बताया। परमबीर सिंह ने बताया कि इन नेताओं की प्रतिक्रिया से उन्हें लगा कि देशमुख के बारे में उन्हें पहले से ही पता है।

इसके बाद परमबीर सिंह ने सीबीआई को एक सूची दी, जिसमें मुंबई से बाहर स्थानांतरित किए जाने वाले पुलिस सब-इंस्पेक्टर के रैंक से लेकर पुलिस इंस्पेक्टर तक के अधिकारियों के नामों की सिफारिश की गई थी। सिफारिश करने वालों में डिप्टी सीएम अजीत पवार, एनसीपी नेता नवाब मलिक और सांसद सुप्रिया सुले सहित कई एनसीपी नेता शामिल थे।

चार्जशीट में वाजे का बयान भी दर्ज किया गया है। वाजे ने अपने बयान में कहा है, “मुझ पर कई राजनीतिक व्यक्तियों ने दबाव डाला है और मैंने उक्त दबाव के आगे घुटने टेक दिए हैं।” वाजे ने यह भी बताया कि वह अपनी बहाली के लिए वह देशमुख के संपर्क में आए थे और 7 अप्रैल 2020 को मंत्री ने उन्हें परमबीर सिंह के पास आवेदन जमा करने के लिए कहा था। बाद में देशमुख ने उनसे बहाली के लिए 2 करोड़ रुपए भी माँगे थे।

बता दें कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने एंटीलिया टेरर केस का मास्टरमाइंड होने के आरोप में गिरफ्तार किया था और बाद में बल से बर्खास्त कर दिया गया था। वहीं, 100 करोड़ रुपए वसूली मामले की जाँच कर रही सीबीआई ने वाजे को सरकारी गवाह बना लिया है।

वहीं, मार्च 2021 में परमबीर सिंह ने लेटर बम फोड़ा था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि गृह मंत्री अनिल देशमुख सचिन वाज़े को हर महीने 100 करोड़ रुपए इकट्ठा कर उन्हें देने के आदेश दिए थे। इसके बाद ही सीबीआई ने केस दर्ज कर अनिल देशमुख को पूछताछ के लिए तलब किया था।

Alt News वाले मोहम्मद जुबैर ने 1 दिन में डिलीट किए 28 ट्वीट, फेसबुक के बाद ट्विटर पर भी वायरल हो रहे थे हिंदू घृणा वाले पोस्ट

फैक्टचेक के नाम पर प्रोपेगेंडा वेबसाइट चला रहे ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से दर्जनों ट्वीट को डिलीट कर दिया। जुबैर ने अपने हैंडल पर ये बदलाव ठीक उसी समय किया जब उनके हिंदूफोबिक ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हैं। 

जुबैर की ट्विटर एक्टिविटी के बारे में द हॉक आई ने ट्वीट करके जानकारी दी। अपने ट्वीट में द हॉक आई ने दिखाया है कि औसतन 44 ट्वीट करने वाला जुबैर अब रोज के 2 ट्वीट ही कर रहा है। ट्वीट में दिख रहे ग्राफ से पता चलता है कि 20 जून को जुबैर ने अपने अकॉउंट से 28 ट्वीट को डिलीट किया।

जब ऑपइंडिया ने इस दावे को क्रॉस चेक किया तो पाया कि वाकई जुबैर के अकॉउंट से 28 ट्वीट गायब थे। आगे की पड़ताल में हमने पाया कि कुछ नेटीजन्स के पास जुबैर के पुराने ट्वीट मौजूद थे जिन्हें वो अपने ट्विटर से डिलीट कर चुका है। जाहिर है ये सारे ट्वीट हिंदूघृणा में सने थे।

अब ये तो स्पष्ट नहीं है कि वो सारे ट्वीट कौन-कौन से थे जिन्हें जुबैर ने 20 जून को हटाया। लेकिन हमें एक जो ट्वीट मिला उसमें वो फर्जी फेसबुक पेज बनाकर मोदी समर्थकों पर निशाना साधने को जस्टिफाई करता दिख रहा है। नीचे उस पोस्ट का स्क्रीनशॉट है।

बता दें कि 13-14 जून को कई नेटीजन्स ने जुबैर के कुछ पोस्ट देखकर उसके ऊपर हिंदू देवी-देवताओं को निशाना बनाने का इल्जाम लगाया था। लगातार अपने पुराने पोस्ट के कारण ट्रोल होने पर जुबैर ने अपना फेसबुक तक डिलीट कर दिया था। उसके पुराने पोस्ट में  भगवान श्रीराम से लेकर शिवलिंग तक का मजाक उड़ाया गया था।

जुबैर के फेसबुक डिलीट की सूचना भी पहले द हॉक आई ने दी थी। उन्होंने जुबैर के कई पोस्ट के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा था, “दूसरों के भगवान, धर्म, संस्कृति और शास्त्रों का मजाक बनाना आसान है, क्योंकि इसका कोई अंजाम देखने को नहीं मिलता है। विडंबना यह है कि यह ट्वीट उसी शख्स ने किया, जिसने एक ऐसी घटना को अंजाम दिया जिसने पूरे देश को अशांत कर दिया और हिंसक तबाही अभी भी जारी है।”

‘योग जीवन में ही नहीं, समाज और विश्व में शांति लाता है’: 8वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर PM मोदी ने मैसुरु किले में 15 हजार लोगों के साथ किया योग

कर्नाटक (Karantaka) दौरे के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने 8वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2022 के अवसर पर मैसुरु पैलेस में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर करीब 15,000 लोगों के साथ योगाभ्यास किया।

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों को संबोधित भी किया। उन्होंने कहा, “मैसुरु जैसे भारत के आध्यात्मिक केन्द्रों ने जिस योग ऊर्जा को सदियों से पोषित किया, आज वह योग ऊर्जा विश्व स्वास्थ्य को दिशा दे रही है। योग वैश्विक सहयोग का आधार और मानव को निरोग जीवन का विश्वास दे रहा है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि योग की यह अनादि यात्रा अनंत भविष्य की दिशा में ऐसे ही चलती रहेगी। उन्होंने कहा, “हम ‘सर्वे भवंतु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया’ के भाव के साथ एक स्वस्थ और शांतिपूर्ण विश्व को योग के माध्यम से भी गति देंगे।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “योग हमारे जीवन में शांति लाता है। योग से शांति केवल व्यक्तियों के लिए नहीं है, यह हमारे समाज में शांति लाता है। योग हमारे राष्ट्रों और विश्व में शांति लाता है। योग ब्रह्मांड में शांति लाता है। यह पूरा ब्रह्मांड हमारे अपने शरीर और आत्मा से शुरू होता है। ब्रह्मांड हम से शुरू होता है और योग हमें अपने भीतर की हर चीज के प्रति जागरूक बनाता है।”

पीएम मोदी ने कहा, “हम कितने तनावपूर्ण माहौल में क्यों न हों, कुछ मिनट का ध्यान हमें relax कर देता है। हमारी productivity को बढ़ा देता है। इसलिए हमें योग को एक अतिरिक्त काम के तौर पर नहीं लेना है, बल्कि योग को जानना है, योग को जीना भी है। हमें योग को पाना भी है, हमें योग को अपनाना भी है।”

उन्होंने आगे कहा, “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हमने इस बार ‘Guardian Ring of Yoga’ का ऐसा ही अभिनव प्रयोग विश्व भर में हो रहा है। दुनिया के अलग-अलग देशों में सूर्योदय के साथ और सूर्य की गति के साथ लोग योग कर रहे हैं।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम #YogaForHumanity है। उन्होंने कहा, “मैं इस थीम के जरिए योग के इस संदेश को पूरी मानवता तक पहुँचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र का और सभी देशों का हृदय से धन्यवाद करता हूँ।”

बता दें कि पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस साल 2015 में 21 जून को मनाया गया था। इस दिन 35,000 से अधिक लोगों ने दिल्ली के राजपथ पर योगासन किया था। इस योगाभ्यास में 84 देशों के प्रतिनिधि शामिल थे। यह इवेंट गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।

दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्रसंघ की बैठक में साल में एक दिन योग के नाम करने का प्रस्ताव रखा था। उनके इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने स्वीकार कर लिया था और हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

मथुरा के इकरार ने अमित बनकर धोखे से रचाई आगरा की हिन्दू युवती से शादी, 9 साल बाद पत्नी और बच्चों को बनाना चाहता है मुस्लिम, गिरफ्तार

आगरा में लव जिहाद का एक नया मामला सामने आया है। हिन्दू महिला का आरोप है कि 9 साल पहले मथुरा के फरह के रहने वाले एक मुस्लिम युवक इकरार ने उसके साथ हिंदू अमित बनकर शादी की थी। अब इतने साल बाद उसकी सच्चाई खुली है कि वह एक मुस्लिम युवक है। महिला आरोप लगाया कि उसे झूठे प्रेम जाल में फँसा कर उससे शादी की अब वह जबरन मुस्लिम मुस्लिम बनने का दबाव डाल रहा है। यही नहीं वह अपने बच्चों का नाम भी बदलकर उनका खतना कराना चाहता है।

मामले में हिन्दू पीड़िता ने आगरा के जगदीशपुरा थाने में पति इकरार के खिलाफ धोखाधड़ी और धर्मांतरण अधिनियम की धारा के तहत मुकदमा दर्ज कराया।। वहीं FIR के आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आगरा के जगदीशपुरा थाना के प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र शंकर पांडेय ने बताया कि फरह निवासी इकरार ने वर्ष 2013 में जगदीशपुरा क्षेत्र की युवती से शादी की थी। तब अपना नाम अमित बताकर हिंदू रीति रिवाज से शादी की। उनके दो बेटे भी हैं। शादी के 9 साल बाद युवती को युवक का असली नाम इकरार पता चला।

पुलिस के अनुसार, मामला तब खुला जब इकरार हिन्दू युवती पर भी इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाने लगा। आरोपित कह रहा है कि वह अपने मजहब के अनुसार ही अपने समाज में रहेगा। यहाँ तक कि दोनों बेटों के नाम भी बदलने और खतना करवाने को कहने लगा। शनिवार (18 जून, 2022) को युवती थाने आई। युवती की तहरीर पर धोखाधड़ी, धर्मांतरण अधिनियम और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की गई। पुलिस ने आरोपित को हिरासत में ले लिया और उससे मामले में पूछताछ की।

वहीं एक दूसरे मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि पीड़िता को अपने पति के मुस्लिम होने की जानकारी वर्ष 2021 में हो गई थी। तभी से वह कई बार थाने के चक्कर काट रही थी। लेकिन उसे कई बार पूर्व इंस्पेक्टर ने थाने से भगा दिया गया था वहीं शनिवार को एक बार फिर महिला जब थाने आई तो उसकी सुनवाई हो सकी है।

पुलिस वाले को कॉलर पकड़ धमकाया, लात मारी, दी गंदी-गंदी गालियाँ: नशे में धुत लड़की का वीडियो वायरल, कैब ड्राइवर को भी नहीं छोड़ा

सोशल मीडिया पर एक महिला के कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में एक लड़की एक पुलिस कर्मी का कॉलर पकड़कर धमकाती है। उसके बाद उसे लात मारती और फिर उसके मुँह पर लगा हुआ मास्क खींच लेती है। इतना ही नहीं, वह वह गंदी-गंदी गालियाँ देती और नशे के हालत में कई अनाप-शनाप काम करती नजर आ रही है।

वीडियो में जिंस और टी-शर्ट में दिख रही लड़की एक क्लिप में एक कार के पास खड़ी है और अपने पास ही खड़े एक पुलिसकर्मी का कॉलर पकड़े हुए दिख रही है। इस दौरान पुलिसकर्मी अपने मोबाइल से किसी से बात कर रहा होता है। लड़की पुलिसकर्मी से अश्लीलता और बदतमीजी करती है।

वहाँ और भी कई लोग वहाँ खड़े दिखाई दे रहे हैं। लड़की जब किक मारती है तो कई लोग उसे डाँटते भी हैं। लड़की के हाव-भाव और उसके शब्दों को देखकर लगता है कि वह नशे में है। वीडियो में हालात को देखकर ऐसा लगता है कि पुलिसकर्मी ने उसे कागजात या अन्य किसी कारण से रोका होगा।

इस दौरान पुलिसकर्मी का मास्क खींचकर लड़की पास खड़े लोगों को दिखाते हुए कहती है, “हँँअअअअअअअ….. मास्क भी है इनके पास? मास्क भी है इनके पास?” इसके बाद उस मास्क को वह फाड़ने का प्रयास करती है।

दरअसल, इस लड़की के 11 वीडियो क्लिप सामने आए हैं, जिसमें वह कैब ड्राइवर और आम लोगों को गंदी-गंदी गालियाँ दे रही है। इसके साथ ही वह कभी रोड सो जा रही है, तो कभी किसी पर झपट पड़ रही है। वह लड़की नशे में एकदम धुत्त नजर आ रही है।

न्यूज 24 के अनुसार, वायरल वीडियो नवी मुंबई का है। वीडियो में नशे में धुत दिख रही महिला पुलिसकर्मी और कैब ड्राइवर गालियाँ दे रही है। इस वीडियो को कैब ड्राइवर और अन्य लोगों ने रिकॉर्ड किया है। इसके बाद से यह वायरल हो गया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 25 मार्च 2022 को महिला मुंबई में देर रात पार्टी करने के बाद अपने 2 दोस्तों के साथ ओला कैब में सवार हुई। नशे में धुत महिलाओं में से एक ने यात्रा के दौरान कैब चालक को गालियाँ देनी शुरू कर दी। इतना ही नहीं, उसने ड्राइवर को धक्का देकर ड्राइविंग सीट पर बैठने की कोशिश की। जब घटनास्थल पर पुलिस पहुँची तो महिला उसके साथ भी बदतमीजी करने लगी।

इस मामले में पुलिस ने तीनों लड़कियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन तीनों लड़कियों पर शराब के नशे में सार्वजनिक कानून व्यवस्था को बिगाड़ने का आरोप लगाया गया है।

गाड़ी से लटकता पंजाब का CM: सुरक्षा-प्रोटोकॉल सब जीरो, AAP में केजरीवाल ही इकलौता ‘हीरो’

सोशल मीडिया पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के साथ पंजाब के सीएम भगवंत मान (Bhagwant Mann) की एक तस्वीर खूब वायरल हो रही है। इस तस्वीर में अरविंद केजरीवाल जहाँ गाड़ी के अंदर खड़े हैं और लोगों का अभिवादन कर रहे हैं। वहीं भगवंत मान गाड़ी के गेट पर लटके हुए हैं।

बीजेपी नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इस फोटो को अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान को टैग करते हुए लिखा, “अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के सीएम को चपरासी बना कर रख दिया है। भगवंत मान जी कम से कम अपनी नहीं तो अपने पद का तो सम्मान करो।” उधर, इस तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स भगवंत मान और केजरीवाल पर तंज कस रहे हैं। एक यूजर लिखते हैं, “केजरीवाल ने एक राज्य के चुने हुए मुख्यमंत्री की औकात एक बॉडीगार्ड से भी गई गुजरी बना दी है।”

मंथन शाह इस तस्वीर पर लिखते हैं, “एक खड़ा हुआ नेता और एक झूलता हुआ नेता।”

ट्विटर पर राकेश श्रीवास्तव लिखते हैं, “मनमोहन सिंह 2:0।”

एक और यूजर ने केजरीवाल पर निशाना साधते हुए लिखा, “शाबाश पंजाब, सिखों के लिए क्या गर्व की बात है। केजरीवाल ने एक राज्य के चुने हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान की औकात एक बॉडीगार्ड से भी गई गुजरी बना दिया। शर्म करो सरदार।”

इसके जवाब में नेगी लिखते हैं, “मुफ्तखोरी की सीढ़ी लगाकर मक्कारी और गद्दारी, एक दूसरे का हाथ पकड़ सियासत के कपड़े उतार रही हैं।”

एक यूजर ने दोनों पर निशाना साधते हुए कहा, “ये दूसरा मनमोहन है, जिसका रिमोट केजरीवाल के हाथ में है।”

अमित कुमार लिखते हैं, “भगवंत मान को भी केजरीवाल ने गार्ड रख लिया क्या, CM होकर बाहर लटक रहा।”

दरअसल, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार (20 जून 2022) को संगरूर में रोड शो किया। इस दौरान उनके साथ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी उपस्थित रहें। यह रोड शो AAP प्रत्याशी गुरमेल सिंह के समर्थन में किया गया। धूरी निर्वाचन क्षेत्र से विधायक बनने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लोकसभा सीट खाली कर दी थी।

भारत में कंपनियों के लिए सेंसेक्स की तरह शरिया इंडेक्स भी: ‘इस्लामी बैंकिंग’ को RBI की अनुमति नहीं, पर फल-फूल रहा ‘इस्लामी निवेश’

शरिया कानून के अनुसार किसी भी निवेश में ब्याज हासिल करना मुस्लिमों के लिए हमेशा से हराम माना गया है। यह एक अहम कारण है जिसके वजह से कई मुस्लिम बैंकिंग प्रणाली से दूर रहते हैं, और इसी कारण से, भारतीय रिजर्व बैंक ने भारत में शरिया बैंकिंग विंडो खोलने का सुझाव दिया है। हालाँकि, 2017 में इस विचार को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।

लेकिन, क्या आप जानते हैं कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की कंपनियों के लिए भारत में ‘शरिया इंडेक्स’ है? क्या आप इस तथ्य से अवगत हैं कि शरिया-अनुपालन वाले म्यूचुअल फंड हैं जिन्हें मुस्लिम निवेशकों के लिए ‘हलाल’ माना जाता है? आइए शेयर बाजारों की ‘हलाल’ दुनिया के बारे में जानते हैं।

शरिया सूचकांक क्या है?

आसान शब्दों में बात की जाए तो शरिया सूचकांक को उन कंपनियों के सूचकांक के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो शरिया कानून के अनुरूप हैं। सूचकांक में सूचीबद्ध होने से पहले इन कंपनियों की एक अधिकृत बोर्ड द्वारा जाँच की जाती है। इस तरह के सूचकांक दुनिया भर में मौजूद हैं, और भारत में, चार मुख्य सूचकांक हैं जो शरिया कानून का पालन करने वाली कंपनियों को इंडेक्स करते हैं जो एसएंडपी बीएसई 500 शरिया इंडेक्स, बीएसई टैसिस शरिया 50 इंडेक्स, निफ्टी 500 शरिया इंडेक्स और निफ्टी 50 शरिया इंडेक्स हैं। शरिया सूचकांकों में कंपनियों को शामिल करने के लिए कंपनियों की स्क्रीनिंग करने वाले बोर्डों को मुस्लिम पर्सनल लॉ या शरिया को नियंत्रित करने वाले कुरान के सिद्धांतों से अच्छी तरह वाकिफ होना चाहिए।

भारत में शरिया-अनुपालन सूचकांक (Shariah-compliant indices) 2000 के दशक के अंत से काम कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, एनएसई के शरिया सूचकांकों को 2008 में लॉन्च किया गया था।

स्क्रीनिंग की प्रक्रिया क्या है?

स्क्रीनिंग एक अधिकृत बोर्ड द्वारा की जाती है। एनएसई (NSE) और बीएसई (BSE) दोनों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया के लिए तक्वा एडवाइजरी (Taqwaa Advisory) और शरिया इन्वेस्टमेंट सॉल्यूशंस (TASIS) का उपयोग करते हैं। स्क्रीनिंग के तहत, बोर्ड यह जाँचता है कि क्या कंपनी किसी ऐसे व्यवसाय में लिप्त है जिसे शरीयत द्वारा अनुमति नहीं है।

उदाहरण के लिए, गैर-हलाल खाद्य और पेय पदार्थ, शराब, तंबाकू और अन्य वस्तुओं के उत्पादन, बिक्री और विपणन में शामिल कंपनियों को शरिया सूचकांक में सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा। गैर-हलाल उत्पाद और जुआ सहित मनोरंजन प्रदान करने वाले होटल और रेस्तरां को लिस्टिंग से दूर रखा जाएगा।

व्यावसाय के अतिरिक्त, बोर्ड यह भी जाँचता है कि क्या ऐसे शेयरों में निवेश से प्राप्त ब्याज शरिया विद्वानों द्वारा निर्धारित अधिकतम सहनशीलता सीमा के भीतर है, जो सामान्य रूप से 3% है। शरिया सूचकांक पर निफ्टी के दस्तावेज़ीकरण के अनुसार, “TASIS ने वित्तीय स्क्रीनिंग मानदंडों को अपनाया है जो अपने साथियों की तुलना में अधिक रूढ़िवादी हैं और भारतीय माहौल के हिसाब से भी उचित हैं।”

निर्धारित इस्लामिक मानदंडों के अनुसार, ब्याज-आधारित निवेश कुल आय के 3% से कम होना चाहिए, और मिलने वाली राशि और नकद और बैंक शेष में राशि कुल संपत्ति के 90% से कम या उसके बराबर होनी चाहिए।

इसके बाद आय शुद्धिकरण अनुपात (ncome Purification Ratio) आता है, जिसमें कहा गया है कि निवेशकों को किसी कंपनी में शेयरों की हिस्सेदारी पर अर्जित ब्याज पर आय के अनुपातिक हिस्से को शुद्ध करने की आवश्यकता होती है।

विशेष रूप से, लिस्टेड शेयरों की स्क्रीनिंग मासिक आधार पर की जाती है, और यदि कोई कंपनी ‘शरिया कोड’ को तोड़ती हुई पाई जाती है, तो उसे सूचकांक से हटा दिया जाता है।

शरिया म्यूचुअल फंड

न केवल सूचकांक बल्कि बाजार में ऐसे म्युचुअल फंड भी उपलब्ध हैं जो शरिया के अनुरूप हैं। इस खंड में शीर्ष तीन म्यूचुअल फंड टाटा एथिकल फंड (1996 में लॉन्च), टॉरस एथिकल फंड (2009 में लॉन्च) और निप्पॉन इंडिया ईटीएफ शरिया बीस (Nippon India ETF Shariah Bees) (2009 में लॉन्च) हैं।

हालाँकि, ये सभी शरिया-अनुपालन वाले फंड हैं, लेकिन निवेशक के लिए मुस्लिम होना अनिवार्य नहीं है। ये फंड खुद को ‘नैतिक’ बताते हैं और दावा करते हैं कि वे ‘मानवता’ को नुकसान नहीं पहुँचाते हैं। इसमें खुद को अपने मानकों पर दृढ़ रखते हुए वे ज्यादातर उन कंपनियों को शामिल किया जाता है जो ‘हलाल’ के तहत निर्धारित सिद्धांतों के अनुरूप हैं, एक मज़हबी रूप से भेदभावपूर्ण रिवायत जो गैर मुस्लिमों के लिए पूर्वाग्रहपूर्ण है।

ये फंड केवल उन कंपनियों में निवेश करते हैं जो “शरिया-अनुपालन” नामक किसी चीज़ से संबंधित हैं। इस्लामिकली नाम के एक ऐप के मुताबिक, दुनिया भर में 45,000 से ज्यादा शरिया कंप्लेंट स्टॉक हैं। ये स्टॉक शरिया शिकायत प्रकोष्ठ का हिस्सा हैं, जिसका अर्थ है कि वे शरिया कानून के दिशानिर्देशों का पालन करते हैं। हलाल स्टॉक ने भारत में ऐसे 1,100 से अधिक शेयरों को सूचीबद्ध किया है।

मुस्लिम शरीयत आधारित म्यूचुअल फंड क्यों चुनते हैं?

शरिया कानून के अनुसार, उन्हें ऐसे फंड में निवेश करने की अनुमति नहीं है जो किसी भी तरह से किसी भी व्यवसाय से जुड़े हों जिन्हें इस्लामिक शरिया कानूनों द्वारा ‘हराम’ माना गया हो। ये म्यूचुअल फंड उन्हें शरिया कानून द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर रहते हुए शेयरों में निवेश करने की अनुमति प्रदान करते हैं।

फंड उन व्यवसायों में निवेश नहीं करते हैं जो तंबाकू, शराब, हथियार, सूअर का मांस, अश्लील साहित्य, जुआ और अन्य सैन्य उपकरण बेचकर लाभ कमाते हैं। रीबा की अवधारणा के बाद, शरिया कानूनों के अनुसार चलाए जाने वाले म्यूच्यूअल फण्ड किसी भी और सभी प्रकार के इंटरेस्ट (ब्याज) को मना करता है। निवेश से जो भी ब्याज कमाया जाता है वह जकात (दान) में जाता है। इन फंडों में जोखिम का स्तर बहुत कम होता है क्योंकि इसमें उच्च ऋण कंपनियाँ शामिल नहीं होती हैं।

क्या मुस्लिम शरिया शेयरों और फंडों में निवेश कर रहे हैं?

सलाम गेटवे की मार्च 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम वित्तीय विशेषज्ञ मुस्लिमों को शरीयत के अनुरूप स्टॉक और फंड में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने में आगे कदम बढ़ा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि ऐसे कई विशेषज्ञ हैं जो मुस्लिम निवेशकों का मार्गदर्शन करने और सिखाने के लिए विशेष पाठ्यक्रम भी चला रहे हैं कि कैसे वे शरिया कानून को तोड़े बिना शेयर मार्किट में प्रवेश कर सकते हैं।

इदाफा इन्वेस्टमेंट्स के सीईओ अशरफ मोहम्मदी ऐसे ही विशेषज्ञों में से एक हैं। उनके पास लगभग 30 वर्षों का अनुभव है, और उनकी कंपनी शरिया कानूनों के तहत वित्तीय प्रबंधन सेवाएँ प्रदान करती है। सलाम गेटवे ने उनके हवाले से कहा कि लॉकडाउन के दौरान मुस्लिमों ने शरिया आधारित शेयर बाजार में दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी है।

मोहम्मदी ने कहा, विशेष रूप से, आईटी पेशेवरों और व्यापारियों ने ऐसे अवसरों में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन के दौरान डीमैट खातों की संख्या में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पहले भारत की कुल आबादी के 3% के पास डीमैट खाते थे, लेकिन अब 7 फीसदी भारतीयों के पास डीमैट खाते हैं ताकि वे शेयर बाजारों में निवेश कर सकें। निवेशक के धर्म और मज़हब के आधार पर कोई विशिष्ट आँकड़ा बेशक उपलब्ध नहीं है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि बड़ी संख्या में मुस्लिम पेशेवरों ने ऐसे खाते खोले।

ऑपइंडिया ने मोहम्मदी तक पहुँचने की कोशिश की लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

आरबीआई ने शरिया बैंकिंग के विचार को नकारा

बता दें कि 2016 में, भारतीय रिजर्व बैंक ने मुस्लिमों के लिए बैंकों में शरिया आधारित विंडो खोलने का विचार रखा, जिसे इस्लामिक बैंकिंग या शरिया बैंकिंग के रूप में भी जाना जाता है। तब इसकी भारी आलोचना हुई और बाद में 2017 में केंद्र द्वारा इसमें रुचि नहीं दिखाने के बाद इस विचार को ही छोड़ दिया गया। उसी वर्ष, एक आरटीआई दायर की गई थी जिसमें शरिया बैंकिंग के संबंध में आंतरिक विभाग समूह की सिफारिशों पर वित्त मंत्रालय द्वारा भेजे गए पत्र की एक प्रति थी। हालाँकि, मंत्रालय ने इसे आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(सी) के तहत खारिज कर दिया था।

कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को गौतस्करों पर हमले से जोड़ा था, अब अभिनेत्री ने दी सफाई: मिला प्रकाश राज का समर्थन

कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार पर विवादित टिप्पणी करने के बाद चौतरफा आलोचनाओं का सामना कर रहीं दक्षिण भारतीय अभिनेत्री साई पल्लवी (Sai Pallavi) का अभिनेता प्रकाश राज (Prakash Raj) ने खुलकर समर्थन किया है। दरअसल, पल्लवी ने सोशल मीडिया पर अपना स्पष्टीकरण जारी किया था, जिसके बाद प्रकाश राज ने कहा, “हम आपके साथ खड़े हैं साई पल्लवी।”

साई पल्लवी ने शनिवार (18 जून 2022) को अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया था।

वीडियो के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा था, “यहाँ मेरा स्पष्टीकरण है। मैं आप के लिए प्यार, मोहब्बत और शांति की कामना करती हूँ।” इसके बाद वह वीडियो में कहती हैं, “यह पहली बार है जब मैं मुझे अपनी सफाई देने के लिए आप सभी के सामने आना पड़ा। मुझे लगता है कि यह पहली बार होगा, जब मैं अपने दिल की बात कहने से पहले दो बार सोचूँगी, क्योंकि मुझे इस बात का डर है कि मेरे शब्दों का गलत अर्थ निकाला जा सकता है। मुझे माफ कर दो, अगर मैं अपने विचारों को ठीक से स्पष्ट नहीं कर पाई।” उन्होंने कहा, “हाल ही में एक इंटरव्यू में मुझसे पूछा गया कि आप वामपंथी या दक्षिणपंथी किसका समर्थन करती हैं। इस पर मैंने उन्हें स्पष्ट रूप से कहा कि मैं तटस्थ हूँ और हम सभी को तटस्थ रहना चाहिए। मैंने खुलकर बता दिया कि मैं दोनों की तरफ नहीं हूँ और अच्छी इंसान बने रहना चाहती हूँ। आखिर हमारी पहचान अब विचारधारा के आधार पर क्यों की जा रही है? जिसे दबाया जा रहा है उसे बचाया जाना ठीक है। मैंने कश्मीर फाइल्स भी देखी थी। मैंने कभी ऐसा नरसंहार नहीं देखा और मैं उससे प्रभावित भी हुई थी। लेकिन मुझे नहीं पता था कि लोग अभी भी इससे (फिल्म से) प्रभावित हो रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “यहाँ तक कि कुछ जानी-मानी हस्तियों और वेबसाइट ने भी मेरा पूरा इंटरव्यू देखे बिना और इसके पीछे की सच्चाई को जाने बिना ही काफी कुछ कह दिया। मैं उन लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहती हूँ, जो मेरे साथ खड़े हैं, क्योंकि इस वक्त मैं खुद को अकेली महसूस कर रही हूँ। मैंने बहुत सारे लोगों को अपने समर्थन में आवाज उठाते हुए देखा, जो दिल को छू लेने वाला है। मैं आप सभी के सुख, शांति और प्रेम की कामना करती हूँ।”

उन्होंने यह भी कहा, “मैं इससे मॉब लिंचिंग की तुलना नहीं कर रही, बल्कि मुझे याद है कि मैंने लॉकडाउन में क्या देखा है। मुझे लगता है कि हिंसा हर मायने में गलत है और हमारे धर्म में तो पाप है।” इस वीडियो को उन्होंने अपने ट्विटर ​हैंडल पर भी शेयर किया था। प्रकाश राज ने साई के इस पोस्ट के सपोर्ट में कमेंट किया है। अभिनेता ने लिखा, “मानवता सबसे पहले, हम आपके साथ हैं साई पल्लवी।”

गौरतलब है कि पल्लवी ने हाल ही में तेलुगू में दिए अपने इंटरव्यू में वामपंथ और दक्षिणपंथ से लेकर कश्मीरी हिंदुओं और गौतस्करों पर अपनी बात की थी। इस इंटरव्यू में जब उनसे विवेक अग्निहोत्री की ‘द कश्मीर फाइल्स’ को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे कश्मीरी पंडित मारे गए। इस दौरान उन्होंने अपनी अपनी बात रखते हुए आतंकवादियों द्वारा की गई हिंदुओं की निर्मम हत्याओं को, स्थानीय लोगों द्वारा गौतस्करों पर किए गए हमलों से जोड़ा।

उन्होंने कहा था, “हाल में कोविड के समय में कुछ मुस्लिम लोग गाय को गाड़ी में ले जा रहे थे तो उन हमला हुआ और ‘जय श्रीराम’ के नारे लगे। तो अगर आप मजहबी विवाद पर बात करते हैं तो फिर इन दोनों घटनाओं में अंतर क्या रह गया? वो तब हुआ। ये अब हुआ। क्या फर्क इसमें है?”