Home Blog Page 2625

जब ‘बाल शिव’ की अभिनेत्री से काम के बदले माँगा गया सेक्स, सुनाया कास्टिंग काउच का अनुभव: कहा – जब ‘प्रोड्यूसर’ के कमरे में गई, तब…

टीवी सीरियल ‘बाल शिव’ में पार्वती का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री शिव्या पठानिया ने अपने कास्टिंग काउच अनुभवों को शेयर किया है। उन्होंने कहा कि वो आत्मविश्वास से लबरेज हैं और मानती हैं कि केवल कड़ी मेहनत से ही आपको काम मिलता है। एक बड़ी सौंदर्य प्रतियोगिता और टीवी शो का हिस्सा रहने के बावजूद उनका इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। उन्होंने बताया कि ये तब की बात है, जब उनका पहला टीवी शो ‘हमसफर्स’ बंद कर दिया गया था।

इसके बाद उन्होंने करियर का एक बुरा दौर देखा। हाल ही में ‘फ़िदा’ म्यूजिकल वीडियो में नजर आने वाली अभिनेत्री ने बताया कि उस समय 8 महीने तक उन्हें कोई काम नहीं मिला था। इस दौरान वो एक जालसाज के चक्कर में आ गई थीं, जिसने उनसे काम से बदले सेक्सुअल फेवर्स माँगे थे। उन्हें तब मुंबई के सांताक्रुज में ऑडिशन के लिए बुलाया गया था। एक व्यक्ति उनसे मिला था, जो उस एडवर्टाइजमेंट का प्रोड्यूसर होने वाला था।

शिव्या पठानिया ने बताया, “उस प्रोड्यूसर ने मुझसे कहा कि अगर तुम किसी बड़े सेलेब्रिटी के साथ विज्ञापन करना चाहती हो तो तुम्हें कॉम्प्रोमाइज करना पड़ेगा। सबसे हास्यजनक बात जो मैं कभी नहीं भूल सकती, वो ये है कि उसके लैपटॉप में हनुमान चालीसा बज रहा था। मुझे हँसी आ गई। मैं वहीं हँसने लगी। मैंने उससे कहा – आपको शर्म नहीं आ रही है? भजन सुन रहे हो और आप क्या बोल रहे हो?” बाद में पता चला कि वो व्यक्ति जालसाज था।

31 वर्षीय शिव्या पठानिया ने बताया कि इस घटना के बाद उन्होंने अपने दोस्तों-परिचितों को उस आदमी के बारे में बताया। वो चाहती थीं कि कोई और उसके जाल में न फँसे। उन्होंने कहा कि उन्हें अब तक पता नहीं कि ऐसा करने की उसकी हिम्मत कैसे हुई थी। शिव्या पठानिया का जन्म हिमाचल प्रदेश में हुआ था। उनका पिता वहाँ सरकारी अधिकारी थे। वो ‘राम-सिया के लव कुश’ और ‘राधा कृष्ण’ के अलावा ‘लाल इश्क’ में भी दिख चुकी हैं।

इस्लाम के नाम पर हिंदू का गला काटा, सेकुलर मीडिया ने नुपूर शर्मा-टेलर-कस्टमर की आड़ में मजहबी आतंक के खतरों को छिपाया

राजस्थान के उदयपुर जिले के धानमंडी थानाक्षेत्र में मंगलवार (28 जून, 2022) को दर्जी कन्हैयालाल तेली की दिनदहाड़े गला काटकर हत्या कर दी गई। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस घटना के वीडियो में हत्यारा मोहम्मद रियाज अंसारी उन पर धारदार हथियार से हमला करते हुए दिखाई दे रहा है। वारदात के बाद एक दूसरा वीडियो जारी करके हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए अपने गुनाह खुद कबूल रहा है और साथ ही प्रधानमत्री मोदी और नूपुर शर्मा की भी गर्दन काटकर हत्या की धमकी दे रहा है लेकिन तथाकथित सेक्युलर-लिबरल मेन स्ट्रीम मीडिया का एक धड़ा हत्या और हत्यारे के कबूलनामें का वीडियो होते हुए भी उसके गुनाहों को छिपाने या कमतर दिखाने में लगा है जिसे हम आज के न्यूज़ पेपर में हुए कवरेज में देख सकते हैं।

किसी ने कहीं कोने में जगह दी तो कोई हैडलाइन में ही खेल कर हत्यारों और उनके मजहब को छिपाता रहा। जैसे यह कोई वीभत्स घटना न होकर कोई मामूली अपराध हो। इस जघन्य हत्या को कवर करते हुए हिंदुस्तान टाइम्स लिखता है, “Hindu Tailor Murderd in gruesome hate crime.” अर्थात “जघन्य हेट क्राइम में हिंदू दर्जी की हत्या”- बाकी किसने की, क्यों की? वो सब गायब या अंदर छोटे में है जिसे खोजकर पढ़ना हो पढ़े।

वहीं राजस्थान पत्रिका लिखता है, “उदयपुर में दरिंदों ने दिनदिहाड़े काट डाली गर्दन, पुलिस और प्रशासन सोते रहे! दैनिक जागरण लिखता है, “उदयपुर में बर्बरता, नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने पर दिनदहाड़े काटा गला”, हिंदुस्तान लिखता है, “नूपुर शर्मा समर्थक का गला रेता” इसके अलावा इंडियन एक्सप्रेस हो या ओडिशा पोस्ट सबने या तो सिंपल टेलर की हत्या लिखा या उसे हेट क्राइम से जोड़ते हुए कहीं न कहीं नूपुर शर्मा और उनके तथाकथित समर्थन में लगाए गए व्हाट्सप्प स्टेटस को ही सबसे बड़ा गुनाह साबित करने की कोशिश की।

जबकि यह बात भी सामने आ चुकी है कि पोस्ट कन्हैयालाल के 8 साल के मासूम बच्चे ने शेयर किया था जिसे उसका अर्थ भी पता नहीं होगा और किसी की बात का समर्थन करना जो पहले से ही इस्लामी हदीसों में लिखा गया है गुनाह कैसे हो गया? लेकिन मेन स्ट्रीम मीडिया में किसी ने भी हैडलाइन में न हत्यारों का नाम लिखा न यह पता लगने दिया कि वह किस मजहब का है।

यहाँ आगे बढ़ने से पहले एक बार यह याद कर लीजिए कि इस्लामी हत्यारों ने मजहबी नारे लगाते हुए न सिर्फ कल वारदात और उसके बाद का वीडियो रिलीज कर उसके बारे में मुस्कराते हुए बताया बल्कि करीब 10 दिन पहले 17 जून को ही वीडियो रिलीज कर वह कन्हैयालाल की गर्दन काटकर हत्या की धमकी दे चुका है। लेकिन, पुलिस सुरक्षा देने की बजाय इसे नजरअंदाज करती रही। जबकि जिस पोस्ट पर इन इस्लामी हत्यारों ने उसकी हत्या की वह भी कन्हैयालाल के 8 वर्षीय मासूम बच्चे ने गलती से किया था। यह बात भी वो कई बार प्रशासन से बता चुके थे। क्योंकि कन्हैयालाल खुद कायदे से लिखना-पढ़ना भी नहीं जानते थे। न उन्हें हाल ही में ख़रीदे गए स्मार्टफोन की कोई खास समझ थी। यह बात कई मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है।

जबकि कई इंग्लिश न्यूज़ पेपर जिन गौस मोहम्मद और मोहम्मद रियाज अंसारी जैसे हत्यारों को हैडलाइन में कोई कस्टमर तो कोई बदमाश लिखकर उनकी असली पहचान छिपा रहा है। जबकि वो खुद ही हत्या के समय और बाद में तलवार पर खून और चेहरे पर हँसी के साथ वीडियो में कहता है, ”मैं मोहम्मद रियाज अंसारी और ये हमारे गौस मोहम्मद भाई, उदयपुर के अंदर जो माता स्टेट वाला है उसका सर कलम कर दिया है।” आगे मजहबी नारा लगाते हुए कहता है, ”हम जिएँगे आपके लिए और मरेंगे आपके लिए।”

हमलवार आगे पीएम मोदी की गर्दन काटने और नूपुर शर्मा को धमकी देते हुए कहता है, ”ये नरेंद्र मोदी सुन ले, आग तूने लगाई है और बुझाएँगे हम, इंसाअल्लाह मैं रब से दुआ करता हूँ कि यह छुरा तेरी गर्दन तक भी जरूर पहुँचेगा। और उस कुति** तक भी पहुँचेगा। उदयपुर वालों नारा लगाओ गुस्ताखे नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा। दुआओं में याद रखना।”

लेकिन ऐसे दरिंदे हत्यारे हमारे तथाकथित सेक्युलर न्यूज़पेपर को मासूम, भटके हुए, बदमाश या सामान्य सा शब्द कस्टमर नजर आ रहे हैं। जबकि हत्यारा वारदात के 10 दिन पहले ही खुलेआम सिर तन से जुदा की धमकी देते हुए नजर आ रहा है।

10 दिन पुराने वीडियो में वह कह रहा है, “मैं मोहम्मद रियाज अंसारी राजस्थान के उदयपुर, खांजीपीर से, ये वीडियो में जुम्मे के दिन बना रहा हूँ। माशाल्लाह और 17 तारीख है। मैं इस वीडियो को उस दिन वायरल ​करूँगा, जिस दिन अल्लाह की शान में गुस्ताखी करने वाला का सिर कलम कर दूँगा। आपको एक मैसेज देता हूँ रियाज ने सिर कलम करने की शुरुआत तो कर दी है। बाकी के जो बचे हैं उन सभी का सिर आपको कलम करना है। इस बात का ध्यान रखना।”

उसने आगे कहा, “ये चिंता मत करना मेरे भाई कि तुम्हारी फैमिली का क्या होगा, कारोबार का क्या होगा। मेरी भी फैमिली है। मैं भी नौकरी करता हूँ, लेकिन मुझे इसकी कोई चिंता नहीं है। क्योंकि मैं अपने रसूले पाक के लिए जी रहा हूँ। मेरा सब कुछ आप पर कुर्बान रसूल अल्लाह।”

अभी आपने जो पढ़ा यह उस वीडियो में कही गई बातों का बहुत छोटा सा हिस्सा है। वह जिस तरह से नूपुर शर्मा और उनका समर्थन करने वालों की गर्दन कलम करने की खुलेआम धमकी दे रहा है वह कोई मामूली या सामान्य अपराध की बात नहीं है। यहाँ तक कि अब घटना की भयावहता का अंदाजा कन्हैयालाल के पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी लगाया जा सकता है जिसमें उनके शरीर पर 26 निशान मिले हैं, जिसमें से 8 से 10 बार गर्दन पर ही वार किया गया है। वहीं पीएम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कन्हैया का गला रेत कर अलग कर दिया गया था।

अब ऐसे में यह आपको सोचना है कि जितने गुनहगार ऐसे जघन्य वारदात करने वाले इस्लामी हत्यारे हैं उतने ही उन्हें बचाने वाले या उनके क्रूरतम अपराधों पर पर्दा डालने वाले ये मीडिया गिरोह के लोग भी। जो हर हाल में इस्लामी हत्यारों के बचाव में कूद पड़ते हैं। ऐसे ही कल लिबरलों और इस्लामी कट्टरपंथियों का भी वह चेहरा सामने आया था जो कन्हैयालाल की हत्या पर हाहाहा रिएक्ट करके अपनी ख़ुशी का इजहार कर रहा था।

लैपटॉप में ऐसा क्या है जिसे छुपाना चाहता है AltNews वाला जुबैर: बरामदगी के लिए बेंगलुरु ले जाएगी दिल्ली पुलिस, फोन कर चुका है फॉर्मेट

इस्लामिक कट्टरपंथ को हवा देने वाले ऑल्ट न्यूज (Alt News) के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर (Mohammad Zubair) को गिरफ्तार करने के बाद अब दिल्ली पुलिस (Delhi Police) उसके लैपटॉप की तलाश में जुट गई है। इसके लिए पुलिस उसे बेंगलुरू ले जाएगी, ताकि उसके खिलाफ सबूतों को इकट्ठा किया जा सके।

रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि जुबैर किसी एक समुदाय को नाराज करने के लिए धर्म का इस्तेमाल कर रहा था। वह एक समुदाय को दूसरे से लड़ाकर लोकप्रियता हासिल करना चाहता था। वह पूछताछ में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सहयोग भी नहीं कर रहा है। जुबैर ने दिल्ली पुलिस की पूछताछ में केवल गुमराह करने वाले जवाब ही दिए हैं।

जुबैर को जब इस बात का आभास हुआ कि उसकी गिरफ्तारी हो सकती है तो उसने अपने फोन को फॉर्मेट कर दिया था। पुलिस के मुताबिक, ये उसकी अरेस्ट की बड़ी वजह बनी। पुलिस को उम्मीद है कि उसके लैपटॉप से कई सारी संवेदनशील जानकारियाँ हासिल हो सकती हैं। बरामदगी के बाद लैपटॉप को फोरेंसिक जाँच के लिए लैब में भेजा जाएगा।

पुलिस इस बात से और सतर्क हो गई है कि आखिर लैपटॉप में ऐसी क्या जानकारियाँ हैं, जिन्हें जुबैर पुलिस से छिपाना चाहता है और वह लैपटॉप उसे देना नहीं चाहता है। पुलिस को लैपटॉप से 50 लाख रुपए के लेनदेन सहित अन्य लेनदेन और उसके संपर्कों के बारे में जानकारियाँ मिल सकती हैं।

अपनी वकील वृंदा ग्रोवर के जरिए जुबैर ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया है कि उसे इसलिए परेशान किया जा रहा है, क्योंकि वह सत्ता में बैठे कुछ लोगों को चुनौती दे रहा था। बहरहाल पुलिस आज (बुधवार) को जुबैर को बेंगलुरू ले जा सकती है। हालाँकि, वहाँ भी उसे अपने वकील से मिलने की इजाजत होगी।

वृंदा ग्रोवर की दलील है कि जुबैर की जिस ट्वीट के आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया है, वह ‘किसी से ना कहना (1983)’ फिल्म का है। हालाँकि, कोर्ट इस दलील को खारिज कर चुका है और कहा कि यह तर्क आरोपित के लिए मददगार नहीं है।

वहीं, दिल्ली पुलिस ने अपने तर्क में कहा था, “इस तरह के ट्वीट को रीट्वीट किया जा रहा था और ऐसा लग रहा था कि वह उसकी ब्रिगेड बन गई है, जो सांप्रदायिक सद्भाव और सार्वजनिक शांति को बिगाड़ने के लिए किसी को बदनाम करने के काम में लिप्त है।”

उधर दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए लोक अभियोजक (PP) ने तर्क दिया था कि मशहूर होने के लिए हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आजकल चलन बन गया है। उन्होंने यह कहा कि जुबैर के तीन-चार मीडिया पोस्ट संदिग्ध थे।

4 दिन की पुलिस रिमांड पर है जुबैर

गौरतलब है कि मोहम्मद जुबैर को 27 जून 2022 को दिल्ली पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को भड़काने और विभिन्न समुदायों के खिलाफ नफरत फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस पर IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-153 और 295 के तहत कार्रवाई की गई है। उसे वहाँ से पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया था, जहाँ से उसे 4 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।

रिमांड का आदेश देते हुए कोर्ट ने कहा था कि जुबैर का व्यवहार असहयोगी वाला रहा है और उसे अपने मोबाइल फोन एवं लैपटॉप की बरामदगी के लिए बेंगलुरु ले जाना होगा। कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया था कि जुबैर को दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 41 A के तहत नोटिस नहीं दिया गया था।

जुबैर के एक पोस्ट का जिक्र करते हुए पीपी ने कहा था, “महाभारत के चरित्र संजय को लैपटॉप का उपयोग करते हुए दिखाया गया है। मोबाइल फोन से सभी एप्लिकेशन हटा दिए गए हैं। वह एक खाली फोन लेकर आया था। उसका जानबूझकर किया गया कृत्य रिकॉर्ड में है, जो धार्मिक भावनाओं को आहत करता है। इसलिए पुलिस रिमांड की जरूरत है।”

क्या है पूरा मामला

बता दें कि जुबैर ने ‘हनीमून होटल और हनुमान होटल’ से संबंधित एक ट्वीट किया था। जिसको लेकर एक सोशल मीडिया यूजर ने पुलिस से शिकायत की थी और कहा था कि इससे उसकी धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं। इसके आधार पर ही पुलिस ने मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था।

गला काटने से पहले कन्हैया लाल की दुकान की CCTV किसने बंद की? माँ-पत्नी की चीत्कार से रोया उदयपुर, कहा- फाँसी दो, वरना कल किसी और को मारेंगे

राजस्थान के उदयपुर में टेलर कन्हैया लाल तेली का सिर कलम कर के आतंकियों ने हत्या कर दी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने घटना की जाँच NIA को सौंप दी है, वहीं पूरे राजस्थान में धारा-144 लागू कर दी गई है। उनके परिजनों के रो-रो कर बुरा हाल है। उनकी भतीजी ने सिसकते हुए कहा कि गुनहगारों को सिर्फ सज़ा नहीं, फाँसी मिलनी चाहिए। NIA की 4 सदस्यीय टीम उदयपुर पहुँच गई है और IB के साथ मिल कर घटना की छानबीन की जा रही है।

उदयपुर के 7 थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। कन्हैया लाल तेली की पत्नी और माँ का भी रो-रो कर बुरा हाल है। उनकी पत्नी लगातार छाती पीट-पीट कर रो रही हैं। उनकी चीत्कार सुन कर आसपास खड़े पुलिस वाले अभी अपनी आँखों में आँसू आने से नहीं रोक पाए। पत्नी की माँग है कि आरोपितों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले। उनका कहना है, “सरकार इन हैवानों को फाँसी दे। इन्होने आज एक को मारा है, कल ये दूसरों को मारेंगे।”

कन्हैया लाल के पार्थिव शरीर के पास भी पुलिस ने परिजनों और करीबी रिश्तेदारों के अलावा किसी को भी नहीं जाने दिया। पत्नी और माँ के अलावा उनकी भतीजी भी दहाड़ मार-मार कर रो रही हैं। पुलिस और परिजनों में तनातनी भी हुई, क्योंकि पुलिस पास के श्मशान में अंतिम संस्कार की बात कह रही थी, जबकि परिवार अशोक नगर श्मशान में अंतिम क्रिया-कर्म करवाना चाहता था। अंत में पुलिस को राजी होना पड़ा। उनकी अंतिम यात्रा में कई स्थानीय लोग भी पहुँचे।

कन्हैया लाल की पत्नी जसोदा साहू ने कहा कि कई दिनों से वो चिंतित रहते थे, लेकिन परिवार को कुछ बताते नहीं थे। परिजनों का कहना है कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी और दुकान में CCTV को बंद कर दिया गया था। भांजी ने बताया कि दुकान में सीसीटीवी बंद करने का काम वैसे किसी व्यक्ति ने किया था, जो पहले से संपर्क में हो। उन्होंने कहा कि जैसे मामा को मारा है, वैसे ही उन्हें मारा जाना चाहिए।

कन्हैया लाल की अंतिम यात्रा में उमड़ा उदयपुर, आनाकानी के बाद पुलिस ने दी श्मशान घाट ले जाने की इजाजत: शरीर पर 26 घाव के निशान, 10 तो गर्दन पर ही

कन्हैया लाल का अंतिम संस्कार उदयपुर के अशोक नगर श्मशान घाट में होगा। उनकी अंतिम यात्रा में बुधवार (29 जून 2022) को जन सैलाब उमड़ पड़ा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में में उनके शरीर पर घाव के 26 निशाने मिलने की बात कही गई है। इनमें से करीब 10 उनके गर्दन पर मिले।

इससे पहले खबर आई थी कि पुलिस और परिजनों के बीच अंतिम संस्कार को लेकर विवाद की खबरें सामने आई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि पुलिस चाहती है कि कन्हैया लाल का अंतिम संस्कार उनके घर के पास ही हो, जबकि परिजन अशोक नगर श्मशान घाट में अंतिम संस्कार चाहते थे। शुरुआती आनाकानी के बाद पुलिस इसके लिए तैयार हो गई और शव परिजनों को सौंप दिया।

इसके बाद कन्हैया लाल की अंतिम यात्रा निकली तो लोगों को हुजूम उमड़ पड़ा। पुलिस के भारी बंदोबस्त के बीच कन्हैया लाल की अंतिम यात्रा निकाली गई। लोगों ने ‘कन्हैया लाल अमर रहे’ के नारे लगाए। इस दौरान कन्हैया की माँ और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। पत्नी यशोदा का कहना है कि उन्होंने पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत नहीं सुनी। उन्होंने कहा, “आरोपितों को फाँसी दो, आज उसने हमें मारा है, कल दूसरों को मारेगा।”

गौरतलब है कि 28 जून को मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद कपड़ा सिलवाने के बहाने से कन्हैया लाल की दुकान में घुसे थे और उनका गला काट डाला था। इसके बाद से उदयपुर में तनाव की स्थिति है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स तैनात है। एनआईए और एसआईटी की टीम भी जाँच के लिए पहुँच चुकी है।

जिस ईश्वर ने देखा कन्हैया लाल का गला कटते, उस पर भी हुआ हमला: रिपोर्ट में दावा- उदयपुर के 2 और लोग भी इस्लामी दरिंदों के टारगेट पर

राजस्थान के उदयपुर (Udaipur, Rajasthan) में कन्हैया लाल साहू (Kanhaiya Lal Sahu) की निर्मम हत्या ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। वहीं, कन्हैया लाल को बचाने की कोशिश करने वाले उनके साथी ईश्वर सिंह (Ishwar Singh) भी इस्लामी आतंकियों के हमले में घायल हो गए हैं। वे फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं।

अब तक जो कहानी सामने आ रही है, वो यही है कि हत्या इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ टिप्पणी करने वाली नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने पर की गई है। उदयपुर शहर के धानमंडी थाना क्षेत्र की मालदीस स्ट्रीट में टेलर का करने वाले कन्हैया लाल का सिर दो इस्लामी आतंकियों ने कलम कर दिया।

इसके साथ ही खबर यह भी सामने आ रही है कि कन्हैया लाल के बाद दो और लोगों की हत्या हो सकती है। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपितों के निशाने पर कन्हैया लाल सहित तीन लोग थे। जिन अन्य दो लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की जा रही है, उनमें से एक का जिक्र आरोपित मोहम्मद रियाज अत्तारी ने अपने 17 जून वाले वीडियो में भी किया है।

दरअसल, भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट को लेकर 10 जून को कुछ लोगों ने धानमंडी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कन्हैया लाल के अलावा 2 और लोगों का नाम था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया था। हालाँकि, 13 जून को कोर्ट ने तीनों को जमानत दे दी थी।

जमानत पर बाहर आने के बाद तीनों को लगातार धमकियाँ मिल रही थी। तीनों ने ही पुलिस से सुरक्षा की माँग की थी, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस ने कन्हैया और आरोपित पक्षों को बुलाकर आपस में समझौता करा दिया था। परिणाम ये हुआ कि कन्हैया लाल की दिन-दहाड़े सरेआम हत्या हो गई। वहीं, दो अन्य लोगों की जान भी खतरे में है।

कन्हैया लाल की हत्या की घटना के संबंध में उनकी दुकान में काम करने वाले ईश्वर सिंह ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए बताया कि मालदास स्ट्रीट पर कन्हैया लाल टेलरिंग का काम करते थे। इस दौरान दुकान में झब्बा-पायजामा सिलवाने के लिए दो व्यक्ति (गौस मोहम्मद और मोहम्मद रियाज अत्तारी) आए (कुछ मीडिया रिपोर्टों में आरोपितों का नाम रफीक मोहम्मद और मोहम्मद गौस बताया जा रहा है।)। वे दोनों कन्हैया लाल से इस सिलसिले में बात करने लगे।

ईश्वर सिंह ने आगे बताया कि रियाज नाप देने लगा और गौस वहाँ खड़ा रहा। इस दौरान वो भी अपने एक और साथी राजकुमार के साथ वहाँ मौजूद थे। अचानक चिल्लाने की आवाज आई और उन्होंने मुड़कर देखा तो रियाज कन्हैया लाल पर धारदार हथियार से लगातार हमला कर रहा था। 

ईश्वर सिंह ने बीच-बचाव किया तो उन पर भी हमला किया गया। आरोपितों के हथियार लगने से उनके सिर और बाएँ हाथ से खून निकल रहा था। फिलहाल उन्हें एमबी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। ईश्वर सिंह ने बताया कि कन्हैया लाल कहा करते थे कि कपड़े ऐसे सिलो कि आदमी सज जाए। क्या पता था कि जिन्हें सजाने के लिए वे नाप ले रहे थे, वहीं कफन में बँधवा जाएँगे।

वहीं, कन्हैया लाल के पड़ोसी यशवंत का कहना है कि अगर उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती तो उन्हें बचाया जा सकता था। यशवंत ने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा, “उन्होंने पाँच दिनों के बाद दुकान खोली थी, उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही थीं। अगर पुलिस ने सुरक्षा दी होती तो शायद उसकी जान बच जाती।”

गौरतलब है कि कन्हैया लाल ने 15 जून को पुलिस में शिकायत दी थी और सुरक्षा की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है। हालाँकि पुलिस ने सिर्फ दोनों पक्षों के बीच समझौता कराकर मामला रफा-दफा कर दिया।

मंगलवार (28 जून 2022) को दोनों आरोपित कपड़ा सिलवाने के बहाने से कन्हैया लाल की दुकान में घुसे थे। एक आरोपित वीडियो बनाता रहा, जबकि दूसरा अपना नाप देने लगा। कन्हैया नाप लेने में व्यस्त हो गए। फिर अचानक से आरोपितों ने उन पर हमला कर दिया। कन्हैया चीखते रहे लेकिन आरोपितों ने दबोच कर उनका सिर कलम कर दिया। खून से लथपथ कन्हैया ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

कन्हैया लाल तेली का सिर कलम किए जाने पर केंद्रीय गृह मंत्रालय सख्त, NIA को सौपी जाँच: अंतरराष्ट्रीय लिंक की होगी छानबीन, पूरे राजस्थान में धारा-144

राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल तेली का सिर कलम कर हत्या किए जाने की घटना की जाँच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) को सौंप दिया है। HMO ने इसे क्रूर हत्या करार देते हुए कहा कि इस घटना में किसी भी संगठन या अंतरराष्ट्रीय तार की मौजूदगी की पूर्णरूपेण जाँच की जाएगी। NIA की टीम घटनास्थल पर पहुँच भी चुकी है और उसने छानबीन शुरू कर दी है। जिहादियों ने धान मंडी स्थित कन्हैया लाल तेली की दुकान में घुस कर उनका सिर कलम कर दिया था।

बुधवार (29 जून, 2022) की सुबह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गृह सचिव के साथ एक आपात बैठक की, जिसके बाद ये निर्णय लिया गया। MHA ने हत्या वाले दिन ही NIA की टीम को घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया था। इससे पहले राजस्थान की सरकार ने भी इस घटना की जाँच के लिए SIT का गठन किया था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि ये कोई साधारण मामला नहीं है। नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर जिहादियों ने इस घटना को अंजाम दिया।

उधर अब उदयपुर में कन्हैया लाल के अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही है, जिसके लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। एक महीने के लिए पूरे प्रदेश में धारा-144 लागू कर दी गई है। हालाँकि, भाजपा ने बंद भी बुलाया है। पोस्टमॉर्टम के बाद कन्हैया लाल तेली का पार्थिव शरीर परिजनों के हवाले कर दिया गया है। दोनों हत्यारों गौस मोहम्मद और रियाज जब्बार से SIT ने उदयपुर पहुँच कर पूछताछ भी की है।

राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने भी उदयपुर पहुँच कर कन्हैया लाल के परिजनों से मुलाकात की है। उन्होंने राज्य सरकार के ख़ुफ़िया तंत्र को विफल बताते हुए कहा कि अपराधियों में कानून का कोई भय ही नहीं है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर दौरे को बीच में काट कर राजधानी जयपुर में अधिकारियों के साथ राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई है। प्रशासन ने मृतक के परिजनों को 31 लाख रुपए और एक सरकारी नौकरी का आश्वासन दिया है।

महाराष्ट्र के राज्यपाल ने फ्लोर टेस्ट के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया, ​शिवसेना आदेश के खिलाफ पहुँची सुप्रीम कोर्ट

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Maharashtra Governor Bhagat Singh Koshyari) ने गुरुवार (30 जून 2022) को पत्र जारी कर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। इस दौरान मुख्यमंत्री उद्धव सरकार को बहुमत साबित करना होगा। सत्र सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा। साथ ही पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की जाएगी।

फोटो साभार: दैनिक भास्कर

इसी बीच राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के आदेश के खिलाफ शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है। शिवसेना के मुख्य सचेतक सुनील प्रभु ने फ्लोर टेस्ट पर रोक की माँग की है। कहा गया है कि अभी 16 विधायकों (बागी) के खिलाफ अयोग्य ठहराए जाने की कार्रवाई पूरी नहीं हुई है। शिवसेना ने कहा कि यह कार्रवाई पूरी होने से पहले फ्लोर टेस्ट नहीं हो सकता।

वहीं, महाराष्ट्र में जारी सियासी संकट के बीच शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे बुधवार (29 जून 2022) को चार अन्य विधायकों के साथ गुवाहाटी के कामाख्या मंदिर पहुँचे। उन्होंने कामाख्या देवी की पूजा-अर्चना की। इस दौरान शिंदे ने कहा, “मैं यहाँ महाराष्ट्र की शांति और खुशी के लिए प्रार्थना करने आया हूँ। फ्लोर टेस्ट के लिए कल (30 जून 2022) मुंबई जाऊँगा और सभी प्रक्रिया का पालन करूँगा।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुवाहाटी के जिस रेडिसन ब्लू होटल में सभी बागी विधायक ठहरे हुए हैं, उसकी बुकिंग भी 12 जुलाई तक बढ़ाने की बात सामने आई है। उस दिन तक बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला भी आ जाएगा। शिंदे गुट की पूरी कोशिश है कि NCP के डिप्टी स्पीकर को अयोग्य ठहराया जाए।

बुधवार (29 जून 2022) को भाजपा ने भी अपने विधायकों को मुंबई बुलाया है। दल बदल कानून के तहत एकनाथ शिंदे को किसी दूसरे दल में शिवसेना का विलय करने के लिए 37 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है, जिसका वो दावा कर रहे हैं। मंगलवार (28 जून 2022) देर रात भाजपा के देवेंद्र फडणवीस, गिरीश महाजन और चंद्रकांत पाटील उद्धव सरकार के खिलाफ फ्लोर टेस्ट की माँग को लेकर राजभवन पहुँचे थे।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने शिंदे गुट को बड़ी राहत देते हुए 26 जून को अयोग्य ठहराए जाने वाले नोटिस पर जवाब देने के लिए अब 12 जुलाई की शाम 5:30 तक का समय दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने शिंदे गुट की अर्जी पर सभी पक्षों को नोटिस भेजा है और सभी से पाँच दिन में नोटिस का जवाब माँगा है।

हिंदू हित में पहली बार गिर रही सरकार… अब तक सेकुलर ढोंग के नाम बिकती थी कुर्सी: महाराष्ट्र में लिखा जा रहा राजनीतिक इतिहास

राज्य में शिवसेना के नेतृत्व में बनी महा विकास अघाड़ी की उद्धव सरकार का बचना अब तकरीबन असंभव है। नई सरकार किसकी होगी और कौन इसका मुखिया होगा, फिलहाल इसके सिर्फ अनुमान लगाए जा सकते हैं। मगर महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना में जो उखाड़-पछाड़ हो रही है, उसका असर यहीं तक सीमित नहीं रहेगा। उसके परिणाम भारतीय राजनीति पर दूर तक पड़ेंगे।

देखा जाए तो ये देश में उभरी नई राजनीतिक वास्तविकता का परिणाम है। स्वतंत्र भारत में यह पहला मौका है, जब ताल ठोक कर ये कहकर एक सरकार को गिराया जा रहा है कि वह हिन्दू विरोधी है। शिवसेना से विद्रोह करने वाले एकनाथ शिंदे ने उद्धव की अघाड़ी सरकार को साफ-साफ ‘हिन्दू विरोधी’ कहा है। यही शिवसेना से बाहर आने का उनका मूल तर्क भी है। नहीं तो इतने नेताओं का शिवसेना जैसी पार्टी में एकसाथ होकर नेतृत्व को खुली चुनौती देना एक तिलिस्म जैसा ही लगता है। अगर जमीनी हकीकत बदली नहीं होती तो गठजोड़ों की राजनीति के उस्ताद शरद पवार के नेतृत्व वाले एमवीए को ऐसे ललकारना कोई आसान बात नहीं थी।

ये बात सही है कि राजनीति में सब कुछ सीधा-सीधा नहीं होता इसलिए शिवसेना से अलग होने के कई और भी कारण ज़रूर हैं। मगर अघाड़ी सरकार का ‘हिन्दू विरोधी’ चरित्र वह धागा है, जो इतने शिवसेना विधायकों और मंत्रियों को एकसाथ जोड़ रहा है। इससे पहले छगन भुजबल और नारायण राणे जैसे नेता भी सेना से अलग हुए थे। लेकिन वह कुछेक नेताओं का ही पार्टी से अलग होना था। अबकी बार तो जनता के वोट से चुने तकरीबन सभी बड़े नेता अगर शिवसेना से अलग हो रहे हैं तो बात कुछ गहरी है।

ये सब शिवसेना के उस बीज की उपज है, जो प्रखर और व्यक्त रूप से हिन्दू हितों की बात करता रहा है। बाल ठाकरे का स्पष्ट हिंदुत्व इनके ही नहीं बल्कि उस जनता के भी डीएनए में भी है, जिसने इन्हें चुना है। ये समझते हैं कि उद्धव सरकार के मौजूदा रवैये को जिसे ये हिन्दू विरोधी मानते हैं, लेकर वे जनता के बीच नहीं जा सकते।

ये सही है कि राजनीति में लोग पाला और दिशा दोनों बदलते हैं। लेकिन सौ की रफ़्तार से तेज़ी से दौड़ता हुआ व्यक्ति यदि अचानक पलटे तो वह धड़ाम से गिर ही जाएगा। ऐसी रफ़्तार में मुड़ने से पहले गति कम करनी होती है और एक अर्धकार गोल चक्कर लगाना पड़ता है। इन खाँटी शिवसैनिकों के लिए आक्रामक हिंदुत्व छोड़कर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की राजनीति करना कुछ ऐसे ही हो गया था।

ये कैसे अपने वोटरों और जमीन पर काम करने वाले शिवसैनिकों को समझा पाएँगे कि हनुमान चालीसा पढ़ने के ‘जुर्म’ में एक सांसद और उनके विधायक पति को इनकी सरकार ने जेल भेजा? ये उन्हें कैसे बताएँगे कि एक सोशल मीडिया पोस्ट साझा करने के लिए अभिनेत्री केतकी चिताले को एक महीने से अधिक जेल में क्यों रहना पड़ा? क्यों पालघर में दो साधुओं और उनके चालक की भीड़ ने सरेआम पीट-पीट कर हत्या कर दी और बालासाहब के पुत्र के नेतृत्व में चल रही सरकार बस दाएँ-बाएँ करती रही? इन विधायकों को लगता है कि इस तरह उनका दोबारा चुनना ही मुश्किल नहीं होगा, बल्कि उनकी अब तक जमा की हुई सारी राजनीतिक जमापूँजी सिर्फ इस ‘यू टर्न’ को समझाते-समझाते हवा में फुर्र हो जाएगी।

अब तक कथित ‘साम्प्रदायिकता’ का सवाल जिसे मूलतः हिन्दू विरोध के रूप में देखा जा सकता है, भारतीय राजनीति के कई गठजोड़ों की जड़ में रहा है। पर ये पहली बार हो रहा है जब हिन्दू हितों के समर्थन में महाराष्ट्र जैसे बड़े और महत्वपूर्ण राज्य में एक सरकार गिरने की कगार पर है। अल्पसंख्यकवाद की राजनीति का सिक्का देश में खूब चलता रहा है। लेकिन ये सिक्का अब खोटा हो चला है। महाराष्ट्र का घटनाक्रम इसकी पुष्टि कर रहा है।

अल्पसंख्यकों को भावनात्मक मुद्दों पर भड़का कर राजनीति कोई नई बात नहीं है। 1979 में जब चौधरी चरणसिंह और समाजवादियों ने मिलकर जनता पार्टी तोड़ी थी तो उन्होंने दोहरी सदस्यता को मुद्दा बनाया था। याद रहे कि 1977 में विपक्षी दलों ने मिलकर जनता पार्टी बनाई थी। जनता पार्टी में तत्कालीन भारतीय जनसंघ (जो अब भारतीय जनता पार्टी है) भी शामिल था। समाजवादियों ने ये कह कर पार्टी तोड़ी थी कि जनसंघ के सदस्य पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दोनों से जुड़े नहीं रह सकते। इसका सीधा साधा मतलब था कि आप अन्य सामाजिक सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े रह सकते हैं लेकिन हिन्दू हितों की बात करने वाले संघ से सम्बन्ध नहीं रख सकते।

जनता पार्टी उस आपातकाल की देन थी, जिसकी बरसी गए 25 जून को देश ने मनाई। हर साँस में मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करने वाले दल, एनजीओ, एक्टिविस्ट और सोशल मीडिया वीर कॉन्ग्रेस द्वारा देश पर थोपे इस काले अध्याय पर चुप ही रह जाते हैं। और तो और पालघर के साधुओं की हत्या में उन्हें ‘लिंचिंग’ नजर नहीं आती। जुबैर की गिरफ्तारी उन्हें अभिव्यक्ति की आज़ादी का गला घोंटने जैसी लगती है पर केतकी के जेल में रहने को वे एक सामान्य घटना मानते हैं। सवाल अब दोहरी सदस्यता का नहीं बल्कि इन दोहरे मानदंडों का बन गया है।

इस लिहाज से महाराष्ट्र की घटनाएँ और उत्तर प्रदेश के आजमग़ढ और रामपुर लोकसभा उपचुनावों के नतीजे एक नए जमीनी रुख और राजनीतिक वास्तविकता की और इशारा करते हैं। रामपुर में 50% से अधिक आबादी मुसलमानों की है तो आज़मगढ़ में 40% से अधिक मुस्लिम-यादव जनसंख्या है। इन दोनों सीटों को अल्पसंख्यक लामबंदी और मुस्लिम-यादव गठजोड़ के कारण समाजवादी पार्टी की बपौती माना जाता रहा है। लेकिन उपचुनाव के नतीजे अब नई कहानी कह रहे हैं। ये कहानी है कि चाहे वह उत्तर प्रदेश हो या फिर महाराष्ट्र, मुस्लिम तुष्टिकरण और जातिगत समीकरण की राजनीति एक नए तरह के ज़मीनी ध्रुवीकरण को जन्म दे रही है।

बनावटी, क्षद्म और सुविधा के अनुसार ओढ़ी गई एकतरफा सेकुलरवाद की चादर अब सिर्फ मैली ही नहीं बल्कि तार-तार हो गई है। हिन्दू हितों की बात करने वालों को साम्प्रदायिक बताकर अल्पसंख्यक वोट बटोरने का राजनीतिक खेल अब उलटे राजनीतिक और चुनावी परिणाम दे रहा है। इस मायने में एकनाथ शिंदे के विद्रोह ने एक नई राजनीतिक इबारत लिख दी है। इस नए राजनीतिक यथार्थ को जो दल झुठलाएगा, वह राजनीतिक इतिहास के पन्नों में ही सिमट कर रह जाएगा। एक तरह से शिंदे और उनके साथियों ने हिन्दू विरोध की राजनीति के ताबूत में एक मोटी कील ठोक दी है।

कन्हैया लाल ने बताया था- पड़ोसी नाजिम और उसके साथी कर रहे रेकी-बाँट रहे फोटो, पर पुलिस ने कहा- समझौता हो गया, अपना ध्यान रखो: उदयपुर में क्या, कब, कैसे हुआ

राजस्थान के उदयपुर में 28 जून 2022 को इस्लामी दरिंदों ने कन्हैया लाल को काट डाला। इसकी आशंका उन्हें पहले से ही थी। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा था कि दुकान खोलने पर उनकी हत्या की जा सकती है। इस डर से उन्होंने 6 दिन दुकान भी बंद रखी थी। शिकायत में उन्होंने बताया था कि उनका पड़ोसी नाजिम और उसके साथी उनकी रेकी कर रहे हैं। उनका फोटो अपने समाज के लोगों को भेज रहे हैं। बावजूद इसके पुलिस की नींद नहीं टूटी। उसने कार्रवाई की बजाए एक समझौता कराकर खानापूर्ति कर ली। कन्हैया लाल से कहा कि समझौता हो गया है, अब बस अपना ध्यान रखना।

एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) हवा सिंह घुमरिया के अनुसार 10 जून को कन्हैया लाल के खिलाफ एक रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इसमें कहा गया था कि पैगंबर मोहम्मद पर जो आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी उसे उसने आगे बढ़ाया है। इस शिकायत पर ऐक्शन लेते हुए उदयपुर पुलिस ने कन्हैया लाल को 11 जून को थाने में बुलाया और गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि, कन्हैया लाल को उसी दिन कोर्ट से जमानत मिल गई।

जमानत मिलने के बाद कन्हैया लाल को कट्टरपंथियों से धमकियाँ मिलने लगी। उन्हें अलग-अलग नंबरों से फोन और मैसेज के जरिए जान से मारने की धमकी दी जाने लगी। घुमरिया ने भी पुष्टि की है कि खुद की जान पर खतरे को देखते हुए 15 जून को कन्हैया लाल ने शिकायत की थी। लेकिन कन्हैया को गिरफ्तार करने में देर ना करने वाली पुलिस ने धमकी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत नहीं समझी। कार्रवाई के नाम पर कुछ लोगों को थाने में बुलाकर कथित समझौता करवा दिया गया। कन्हैया लाल को सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई। घुमरिया ने कहा है कि इस बात की जाँच की जाएगी कि समझौता होने के बाद ऐसी घटना क्यों घटी।

बताया जा रहा है कि कन्हैया लाल के मोबाइल से नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट किया गया था। हालाँकि कन्हैया लाल के परिजनों का कहना है कि यह पोस्ट कन्हैया के 8 साल के मासूम बच्चे ने अनजाने में कर दिया था। 15 जून को दी शिकायत में भी कन्हैया ने इसके बारे में कहा था, “करीब 6 दिन पहले मेरे बेटे से मोबाइल पर गेम खेलते हुए कुछ पोस्ट हो गया था। इसकी जानकारी मुझे नहीं थी। पोस्ट व डीपी लगाने के दो दिन बाद दो लोग मेरी दुकान पर आए। मोबाइल की माँग की। बोले- आपके मोबाइल से आपत्तिजनक पोस्ट डाली गई है। मैंने कहा कि मुझे मोबाइल चलाना नहीं आता है। मोबाइल से मेरा बच्चा गेम खेलता है। उसी से हो गया होगा। इसके बाद पोस्ट भी डिलीट कर दी गई थी। उन लोगों ने कहा कि आइंदा से ऐसा मत करना।”

कन्हैया लाल ने शिकायत में यह भी कहा था कि रिपोर्ट दर्ज कराने वाले उनके पड़ोसी नाजिम और उसके साथ 5 लोग उनकी दुकान के चक्कर लगा रहे थे। वो उन्हें दुकान नहीं खोलने दे रहे थे। इसमें कहा गया, “मुझे पता चला है कि दुकान खुलते ही ये लोग मुझे जान से मारने की कोशिश करेंगे। नाजिम ने मेरा फोटो वायरल कर दिया है। सबसे कह दिया है कि ये व्यक्ति अगर कहीं रास्ते पर दिखे या दुकान पर आए तो इसे जान से मार देना।” कन्हैया लाल ने नाजिम समेत अन्य आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी। साथ ही सुरक्षा की माँग की थी।

28 जून को मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद कपड़ा सिलवाने के बहाने से कन्हैया लाल की दुकान में घुसे थे। एक आरोपित वीडियो बनाता रहा, जबकि दूसरा अपना नाप देने लगा। कन्हैया नाप लेने में व्यस्त हो गए। फिर अचानक से आरोपितों ने उन पर हमला कर दिया। कन्हैया चीखते रहे लेकिन आरोपितों ने दबोच कर उनका सिर कलम कर दिया। खून से लथपथ कन्हैया ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।