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पश्चिम बंगाल विधानसभा ने नूपुर शर्मा के खिलाफ पास किया ‘निंदा प्रस्ताव’, मौलवी ने कहा था – मुस्लिमों के कारण CM की कुर्सी पर हैं ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की विधानसभा ने भाजपा की निलंबित नेता नूपुर शर्मा की निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित किया है। सदन में 220 सीटों के साथ तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) बहुमत में है। सोमवार (20 जून, 2022) को ये प्रस्ताव पारित किया गया। नूपुर शर्मा भाजपा की प्रवक्ता के पद पर थीं, लेकिन पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी के आरोप के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। संसदीय मामलों के मंत्री पार्था चटर्जी ने इस प्रस्ताव को टेबल पर रखा।

वो ‘मेंशन ऑवर’ के दौरान इस प्रस्ताव को लेकर आए। ये एक अनशेड्यूल्ड मोशन था और इसमें किसी और का नाम नहीं था। विधानसभा में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वो ‘कुछ नेताओं’ द्वारा दिए गए बयानों की निंदा करती हैं। उन्होंने इन बयानों को लोकसभा चुनाव 2024 से पहले विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य कायम करने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा करार दिया। इस दौरान विपक्षी दल भाजपा ने सदन से वॉकआउट किया।

इस दौरान भाजपा विधायकों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। बता दें कि TMC नूपुर शर्मा की गिरफ़्तारी की भी माँग कर चुकी है। पश्चिम बंगाल में उनके खिलाफ मामला भी एक TMC ने ही दर्ज कराया है। कोलकाता पुलिस ने उन्हें पेश होने के लिए भी कहा है, लेकिन महिला नेता ने जवाब देने के लिए 4 हफ़्तों का समय माँगा है। पश्चिम बंगाल में नूपुर शर्मा के विरोध में भयंकर दंगे भी हुए। सीएम ममता ने दंगाइयों को यूपी-गुजरात और दिल्ली में विरोध प्रदर्शन की सलाह दी थी।

याद दिलाते चलें कि एक मौलवी ने इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान कहा था, “हम ममता बनर्जी को याद दिलाना चाहते हैं कि आप मुख्यमंत्री की कुर्सी पर मुस्लिमों के दिए गए भीख के कारण बैठी हैं। मुस्लिम समुदाय के वोट बैंक ने आपको बचाया, वरना याद कीजिए कैसे शुभेंदु अधिकारी ने आपके राजनीतिक अभियान का अंत कर दिया था। ये CM का अपमान नहीं, वास्तविकता का वर्णन है। जब सबके पास अभिव्यक्ति की आज़ादी है तो मस्जिद के इमाम के पास क्यों नहीं?

राष्ट्रपति चुनाव से पहले विपक्ष को झटकों की हैट्रिक, पवार-अब्दुल्ला के बाद महात्मा गाँधी के पोते ने भी ठुकराया प्रस्ताव: कहा- दूसरा नाम खोजिए

केंद्र की भाजपा सरकार (BJP Government) के खिलाफ एकजुटता का दिखावा करने वाले विपक्षी दलों को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार नहीं मिल रहे हैं। शरद पवार और फारूक अब्दुल्ला के बाद अब महात्मा गाँधी के पोते गोपाल कृष्ण गाँधी ने राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष का उम्मीदवार बनने से इनकार कर दिया है। इसके बाद ममता बनर्जी की आस टूट गई है।

गोपाल कृष्ण गाँधी ने बयान जारी कर कहा कि संयुक्त विपक्ष की ओर से नाम प्रस्तावित किए जाने के लिए वे आभारी हैं। इसके साथ ही उन्होंने से इनकार करते हुए कहा, “मैं विपक्ष से आग्रह करूँगा कि वह किसी और नाम पर विचार करे, जो मुझसे कहीं बेहतर राष्ट्रपति साबित हो सकता हो।”

इससे पहले 2017 में वेंकैया नायडू के मुकाबले में विपक्ष ने उन्हें उप-राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया था। हालाँकि, वे हार गए थे। गोपाल कृष्ण गाँधी पूर्व राजनयिक हैं और वे दक्षिण अफ्रीका तथा में भारतीय उच्चायुक्त रह चुके हैं। इसके अलावा, वह 2004 से 2009 तक पश्चिम बंगाल के गवर्नर रह चुके हैं।

77 वर्षीय गोपाल कृष्ण गाँधी के मना करने के बाद विपक्षी दल मंगलवार (21 जून 2022) को नए नाम पर विचार करने लिए बैठक करेंगे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्ष सपा के मुलायम सिंह यादव, राजद के प्रमुख लालू यादव, केरल से सांसद एनके प्रेमचंद्रन, यशवंत सिन्हा के नाम पर विचार कर रहा है। इसके अलावा, बड़े अर्थशास्त्रियों, शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, पूर्व राजनयिकों के नाम पर भी चर्चा हो सकती है। यह बैठक शरद पवार बुला रहे हैं।

हालाँकि, इस बार बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल नहीं होंगी और अपनी जगह वह अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को भेजेंगी। कहा जा रहा है कि कई विपक्षी दल उनका नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। इसलिए अब वह बैठक से दूर ही रहना चाहती हैं। 

बता दें कि दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 15 जून को विपक्षी दलों ने घंटों मंथन करने के बाद विपक्ष के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में फारूक अब्दुल्ला और महात्मा गाँधी के पोते गोपाल गाँधी का नाम आगे बढ़ाया था। इसमें फारूक अब्दुल्ला का नाम ममता बनर्जी ने खुद आगे किया था। इस बैठक में कॉन्ग्रेस, शिवसेना सहित कुल 16 पार्टियाँ शामिल हुई थीं। वहीं, AAP, अकाली दल, TRS, BJD और AIMIM ने हिस्सा नहीं लिया था।

हालाँकि, 18 जून को एक बयान जारी कर फारूक अब्दुल्ला ने अपना नाम वापस लेते हुए कहा था, “मैं भारत के राष्ट्रपति पद के लिए संभावित संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार के रूप में प्रस्तावित अपने नाम को वापस लेता हूँ। जम्मू-कश्मीर इस समय संक्रमण काल से गुजर रहा है और इस समय में मेरे प्रयासों की यहाँ जरूरत है।”

राष्ट्रपति पद के लिए उनका नाम प्रस्तावित करने के लिए उन्होंने ममता बनर्जी और अन्य विपक्षी दल के नेेताओं को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी द्वारा उनका नाम प्रस्तावित करने के बाद उनके पास कई विपक्षी दलों के फोन आए और अपना समर्थन व्यक्त किया।

अपने बयान में उन्होंने कहा कि सक्रिय राजनीति में अभी उनकी जरूरत है और जम्मू-कश्मीर एवं देश के लिए उन्हें बहुत कुछ करना है। इसलिए वे अपना नाम इस पद के उम्मीदवार से वापस ले रहे हैं।

उम्मीदवार के रूप में संयुक्त उम्मीदवार के रूप में शरद पवार के नाम की चर्चा आगे बढ़ाने की बात सामने आई थी, लेकिन कहा जाता है कि जीत की संभावना को कम देखते हुए पवार ने मना कर दिया था। उसके बाद इन दो नामों को आगे बढ़ाया गया था। हालाँकि, शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में दबे शब्दों में इन नामों की आलोचना की थी। वहीं, JDS के एचडी देवगौड़ा ने भी राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने से मना कर दिया था।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव का नामांकन 29 जून 2022 तक होना है, जबकि 18 जुलाई को मतदान होना है। 21 जुलाई को परिणाम की घोषणा की जाएगी। वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई 2022 तक है।

जिन मोर्चों से भागती रही कॉन्ग्रेस, उन पर डटे रहे PM मोदी: OROP से अग्निपथ तक सेना को दी ताकत, 2014 में गोला-बारूद का भी था टोटा

भारतीय सेना में एक महत्वपूर्ण सुधार के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Pm Narendra Modi) की सरकार ने अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) की शुरुआत की है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस सहित विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस का कहना है कि कृषि कानूनों की तरह ही इसे भी वापस लेना पड़ेगा है।

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि युवाओं को भाजपा कार्यालयों में चौकीदार नहीं बनाना है, कि वे अग्निवीर बनें। कॉन्ग्रेस इसे सेना को खत्म करने की साजिश बताया है। वहीं, भाजपा इसे सेना में सुधार की प्रक्रिया में उठाया गया एक क्रांतिकारी कदम कहा है।

आज कॉन्ग्रेस भाजपा पर सेना को कमजोर और खत्म करने का आरोप लगा रही है तो हमें देखना होगा कि कॉन्ग्रेस ने सेना को मजबूत और देश की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए क्या किया है। इस देश में कॉन्ग्रेस ने लंबे समय, लगभग 40 सालों तक शासन किया है।

साल 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में पहली बार केंद्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी, तब देश के हालात बहुत बढ़िया नहीं थे। हम खासतौर पर सुरक्षा हालातों की बात कर रहे हैं। उस समय देश के पास ना तो पर्याप्त गोला-बारूद थे और ना ही अत्याधुनिक हथियार। पुराने पड़ चुके लड़ाकू विमान अपनी अंतिम साँसें गिन रहे थे।

कॉन्ग्रेस शासन में सेना के पास गोला-बारूद तक नहीं थे

साल 2012 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार में रक्षा मामलों की संसदीय समिति ने एक रिपोर्ट दी थी। इस रिपोर्ट ने देश में सनसनी मचा दी थी। समिति की रिपोर्ट में कहा गया था कि सेना के पास गोला बारूद, सैन्य यंत्र, हेलीकॉप्टर, टैंकों के गोले आदि की भारी कमी है। सैनिकों के पास बुलेट प्रूफ जैकेट और साजो-सामान तक नहीं हैं।

इसको लेकर तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने प्रधानमंत्री मनमोहन को पत्र भी लिखा था और इस पर तुरंत संज्ञान लेने की बात कही थी। तब रक्षा मंत्री एके एंटनी ने इसे अफवाह बताते हुए इसे खारिज कर दिया था। संसदीय समिति की रिपोर्ट आने के बाद एंटनी के पास देने के लिए जवाब नहीं था।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि थल सेना के विमानन प्रभाग में 18 चीता, 1 चेतक, 76 एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर (एएलएच) और 60 एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर (हथियार प्रणाली युक्त) की कमी है। गोला बारूद से जुड़ी समस्याएँ और भी बढ़ गई हैं और इतने गोला-बारूद में सिर्फ कुछ दिन ही लड़ाई लड़ी जा सकती है।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में सैनिकों के लिए 1,86,138 बुलेटप्रूफ जैकेट की कमी बताई और कहा था कि सेना की ओर से इसे बार-बार उठाया गया, लेकिन सरकार ने कभी ध्यान नहीं दिया। समिति ने यह भी कहा था कि वायु सेना के पास 42 की जगह सिर्फ 31 फाइटर स्क्वैड्रन रह गए हैं। इनमें से अधिकांश लड़ाकू विमान 30 साल से अधिक पुराने हैं।

कंपनियों को कॉन्ग्रेस ने किया था ब्लैकलिस्ट

रिपोर्ट में कहा गया था कि सीबीआई ने छह कंपनियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी, जिसके कारण इन्हें पिछले 10 सालों से काली सूची में डाल रखा गया था। इजराइल मिलिट्री इंडस्ट्री जैसी कंपनी को काली सूची में डाल देने से गोला-बारूद का संकट बढ़ गया है।

ये वो दौर था जब तुष्टिकरण के लिए सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को ताक पर रखकर फिलीस्तीन और उसके समर्थकों की गोद में खेलती नजर आती थी। भारतीय वैज्ञानिकों की लगातार हत्याएँ हो रही थीं और नंबी नारायण जैसे वैज्ञानिक पर देशद्रोह के मुकदमे चल रहे थे, लेकिन सरकार को इन सब चीजों से कोई विशेष फर्क पड़ने वाला नहीं था।

कारगिल में पाकिस्तानी हमले के बाद कारगिल पर गठित समिति ने कई सिफारिशें की थीं, लेकिन कॉन्ग्रेस सरकार ने उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया था। कॉन्ग्रेस का लक्ष्य सिर्फ वोट की राजनीति करना रह गया और देश की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता में कभी रहा ही नहीं।

तख्ता पलट का आरोप लगाकर सेना को बदनाम करने की कोशिश

कश्मीर में लगातार सैनिक मारे जा रहे थे, देश भर में आतंकी हमले हो रहे थे, चीन अरुणाचल में घुसपैठ कर रहा था, फिर भी कॉन्ग्रेस सरकार राजनीति करने में व्यस्त थी। यहाँ तक कॉन्ग्रेस ने उसकी बात नहीं मानने वाले सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह पर तख्ता पलट करने का आरोप लगाकर सेना को बदनाम करने की कोशिश की थी।

विश्व को लोकतंत्र देने वाला भारत बीसवीं सदी के अंत में लोकतंत्र की अकर्मण्य सरकारों की त्रासदी का शिकार बन गया था। 21वीं सदी का पहला दशक बीतते-बीतते भारत तुष्टिकरण, लोक-लुभावन वादों और राजनीति के कारण हर क्षेत्र में पिछड़ता चला गया। दो तरफ से उत्पाती पड़ोसी मुल्कों से घिरे होकर भी वह दृष्टिहीन सरकारों के कारण सुरक्षा के लिए भगवान भरोसे रह गया था।

साल 2014 में पीएम मोदी के सामने चुनौतियाँ

साल 2014 में जब भाजपा की सरकार बनी तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमा पर घात लगाए खड़े दुश्मनों से देश की सुरक्षा के लिए प्रयास करने शुरू कर दिए। मोदी सरकार ने सबसे पहले चीन सीमा और पाकिस्तान सीमा पर सड़क और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास पर जोर देना शुरू कर दिया। इसके अलावा, हथियारों की पर्याप्त खरीद के लिए बजट का आवंटन किया।

मोदी सरकार ने चीन से लगी 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा पर सड़क से लेकर रेल, वायुमार्ग का तेज गति से विकास किया गया। दुर्गम रास्तों पर सेना को पहुँचाने के नदियों पर पुलिस और पर्वतों पर सुरंगें एवं सड़कें बनाई गईं। विमानों को लैंड कराने के लिए एयरपोर्ट डेवलप किए गए।

आत्मनिर्भरता के लिए मेक इन इंडिया प्रोग्राम

मोदी सरकार ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए भारत में मेक इन इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की। सरकार ने रक्षा क्षेत्र को निजी उद्यमियों के लिए खोला। इसके साथ ही विदेशी कंपनियों के साथ तकनीकी साझेदारी को लेकर पार्टनरशिप पर फोकस किया। रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने FDI को 100 प्रतिशत कर दिया।

मोदी सरकार ने अग्नि सीरीज की कई मध्यम रेंज और ब्रह्मोस जैसी मध्यम एवं दूर रेंज की मिसाइलों का सफल परीक्षण कर इन्हें सेना में शामिल किया। इसके अलावा आकाश मिसाइल को सफलतापूर्वक शामिल किया गया है। भारत ने स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन को विकसित किया। इसके अलावा, स्वदेशी स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर को वायुसेना में शामिल किया जा चुका है। 

भारत में निर्मित जंगी जहाजों और पनडुब्बियों के माध्यम से नौसेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाया गया। सेना के पास अब भारत में बने टैंक, मिसाइल और हैंड ग्रेनेड हैं। इसके साथ ही DRDO द्वारा विकसित मारीच सिस्टम का सफलतापूर्वक परीक्षण हो चुका है। यह भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड 850 करोड़ की लागत से नौसेना के लिए तैयार करेगा।

सरकार ने सेना के लिए 1.86 लाख बुलेट प्रुफ जैकेट्स स्वदेशी रक्षा निर्माताओं से खरीदे। इसके साथ ही यूपी के अमेठी में 5100 करोड़ का प्रोजेक्ट लगाया, जिसमें एके-203 राइफलें बनायीं जाएँगी। ये मेक इन इंडिया के लिए शानदार उपहार है। 

आईएनएस कलवारी एस-21 स्कोर्पीन क्लास पनडूब्बी, करंज और वेला पनडूब्बी नौसेना को देकर उसके हाथ मजबूत किए गए। इसके अलावा, रक्षा क्षेत्र में स्टार्टप्स को सरकार ने बढ़ावा दिया। परिणाम ये हुआ कि ड्रोन बनाने के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।

अत्याधुनिक हथियारों की खरीद

पिछले आठ सालों में सेन को सबल बनाने में मोदी सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी। पिछले साल मोदी सरकार ने 6,000 करोड़ रुपए की रक्षा खरीद और घरेलू क्षेत्र से खरीद के लिए 70,000 करोड़ रुपए की मंजूरी दी। सेना की वायु रक्षा बंदूकों के आधुनिकीकरण मंजूरी दी गई।

मोदी सरकार ने अमेरिका से चिनूक और रोमियो जैसे खतरनाक हथियार खरीदे। वहीं, फ्रांस से राफेल फाइवर जेट खरीदा गया। भारत ने वायु रक्षा प्रणाली S-400 खरीदने के लिए रूस के साथ समझौता किया। इसके अलावा, भारत ने रूस से ही 70,000 AK-203 असॉल्ट राइफलों की खरीद के लिए एक समझौता किया, जिन्हें अमेठी में बनाया जाएगा।

सेना में मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री के लिए 156 कॉम्बैट वाहन बीएमपी-2 का अधिग्रहण किया गया। नौसेना के जहाजों की एंटी-सबमरीन वारफेयर क्षमता बढ़ाने के लिए एडवांस्ड टॉरपीडो डेकॉय सिस्टम के अधिग्रहण की मंजूरी दी गई। ये तमाम ऐक्शन सेना के हथियारों को उन्नत बनाने और एक शक्तिशाली सेना बनाने की दिशा में किया गया काम था।  

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना आज के आधुनिक तकनीकों से लैस विश्व की बेहतर सैन्य व्यवस्था है। भारत के पास अमेरिका, रूस, फ़्रांस और इसराइल में बने अत्याधुनिक हथियार मौजूद हैं। इतना ही नहीं, भारत अब सैन्य साजो-सामान का प्रमुख निर्यातक देश के रूप में भी उभरा है।

सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए सैन्य ताकत का प्रदर्शन

उरी पर आतंकी हमले के ठीक मोदी सरकार ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान सहित दुश्मनों को चेतावनी दी और साथ ही सेना के मनोबल को उठाया। साल 2016 में सितंबर 28-29 को इस स्ट्राइक में भारत ने आतंकियों के कई शिविरों को नष्ट कर दिया था।

इसके बाद लद्दाख में चीनी सैनिकों के साथ झड़प में काफी हानि उठाने के बाद भी चीन किसी तरह का दुस्साहस करने की कोशिश नहीं कर सका। हालाँकि, इस झड़प में भारत को भी नुकसान हुआ था, लेकिन ताकत का प्रदर्शन एक मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

CDS की नियुक्ति और आपातकाल में रक्षा खरीद का अधिकार

मोदी सरकार ने तीनों सेना के बीच समन्वय के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की नियुक्ति का एक बड़ा फैसला लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में स्‍वतंत्रता दिवस के दिन लाल किले से इस पद के सृजन की घोषणा की थी। तब पीएम मोदी ने कहा था कि CDS सेना के तीनों अंगों- थल सेना, वायु सेना और नौसेना के अध्यक्षों से वरीयता क्रम में ऊपर होगा। 

जनवरी 2020 में थलसेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत के सेवानिवृत होने के बाद उन्हें पहला CDS नियुक्त किया गया था। दिसंबर 2021 में एक दुर्घटना में निधन होने तक वे इस पद पर बने रहे थे। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद हाईब्रिड वारफेयर की दुनिया में अहम माना जाता है। इस पद के सृजन की बात 1999 में कारिगल युद्ध के बाद दी गई थी।

ऑर्डिनेंस कंपनियों का एकीकरण

मोदी सरकार ने आपातकाल में कल-पुर्जे और गोला-बारूद की खरीद करने की ताकत भी सेना को दे दी। अब कोई भी सर्विस हेडक्वार्टर्स 300 करोड़ रुपए तक की खरीद खुद कर सकता है। वहीं, अब रक्षा मंत्रालय को भी 2,000 करोड़ रुपए तक की रक्षा खरीद के लिए कैबिनेट की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है।

अक्टूबर 2021 में 41 ऑर्डिनेस कंपनियों को एकीकृत कर 7 नयी कंपनियाँ बनायी गईं, जिनमें से 6 कंपनियों ने मुनाफा कमाना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, मोदी सरकार ने 100 करोड़ रुपए का एक कॉर्प्स फंड बनाया है। इसका प्रयोग रक्षा उत्पादन में लगे भारतीय उद्योग, खासकर मध्यम और सूक्ष्म उद्योग रक्षा उत्पादों के भारतीयकरण पर काम कर सकें।

वन रैंक वन पेंशन को लागू करना

एक महत्वपूर्ण सुधार के तहत मोदी सरकार ने दशकों से लंबित वन रैंक वन पेंशन को लागू कर दिया। इसके तहत 20.6 लाख पेंशन धारकों या उनके परिवार वालों को बकाया राशि दी गयी। इस योजना पर सरकार सालाना लगभग 7,123 करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

इसके साथ ही सरकार ने स्पर्श योजना शुरुआत की, जिसके तहत पेंशन धारकों को उनके बैंक खाते में सीधे पैसा मिलने लगा। इस स्पर्श प्लेटफॉर्म पर 5 लाख से ज्यादा पेंशन धारक है, जिन्हें 2021-22 में 11,600 करोड़ रुपए दिए गए।

अग्निपथ: सेना को जवान बनाए रखने की कोशिश

कारगिल समीक्षा समिति की रिपोर्ट के आधार पर सैन्य सुधारों को आगे बढ़ाते हुए मोदी सरकार ने अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की नियुक्ति की मंजूरी दी है। यह सुधार तीन मायनों में प्रमुख है। पहली बात, सेना पर से खर्च का दबाव कम करना ताकि वह अपने आधुनिकीकरण पर ध्यान दे सके। दूसरे, सेना की औसत आयु को कम करना, ताकि सेना हमेशा जवान और फिट बनी रहे। तीसरा, आपातकालीन स्थिति में देश में प्रशिक्षित लोगों की तैयार करना, जो जरूरत पर देश के काम आए।

अग्निपथ योजना के तहत सरकार ने तीनों सेनाओं में अग्निवीरों की भर्ती का ऐलान किया है। यह भर्ती सिर्फ 4 वर्षों के लिए की जाएगी। इसके लिए 17.5 साल से 21 साल की उम्र निर्धारित की गई है। इन चार वर्षों में अग्निवीर सेवा से अलग नहीं हो सकते। अगर ऐसा करने की कोशिश करते हैं तो उन्हें शीर्ष अधिकारियों की स्वीकृति लेनी पड़ेगी।

सैन्य सुधार के लिए करगिल रिव्यू कमिटी की सिफारिशें

सैन्य सुधारों की दिशा में करगिल रिव्यू कमिटी की सिफारिशें महत्वपूर्ण थी। कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था, “सेना को हर समय जवान और फिट रहना चाहिए। इसलिए 17 साल की सेवा (जैसा कि 1976 से नीति रही है) की वर्तमान प्रथा के बजाय, यह सलाह दी जाएगी कि सेवा को सात से दस साल की अवधि तक कम कर दिया जाए। इसके बाद अधिकारियों और जवानों को देश के अर्धसैनिक बलों में सेवा के लिए मुक्त कर दिया जाए।”

समिति ने महसूस किया था कि 1999-2000 में सेना का ₹6,932 करोड़ का पेंशन बिल कुल वेतन बिल का लगभग दो-तिहाई था और यह हर साल तेजी से बढ़ रहा था। इस वर्ष के बजट में रक्षा के लिए ₹5.25 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं। इनमें से ₹1,19,696 करोड़ अकेले पेंशन के लिए आवंटित किए गए हैं। इसका अर्थ है कि रक्षा बजट का लगभग 25% केवल पेंशन के भुगतान के लिए खर्च किया जाता है। वन रैंक वन पेंशन (OROP) योजना के लागू होने के बाद सेना की पेंशन में तेजी से वृद्धि हुई है।

कारगिल समिति ही नहीं, भारतीय सेना ने भी जनशक्ति लागत को बचाने के लिए अग्निपथ योजना के समान एक भर्ती योजना का प्रस्ताव दिया था। सेना ने 2020 में युवाओं को 3 साल के लिए भर्ती करने के लिए ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ योजना का प्रस्ताव दिया था। मौजूदा योजना में इस प्रस्ताव के साथ कई समानताएँ हैं। हालाँकि, सेना द्वारा प्रस्तुत योजना में सेवा अवधि 4 साल के बजाय 3 साल तय की गई थी।

मूसेवाला हत्याकांड में गुजरात से दिल्ली पुलिस ने 2 शूटर को दबोचा, मास्टरमाइंड भी गिरफ्तार: हथियार और विस्फोटक भी बरामद

दिल्ली पुलिस ने सिद्धू मूसेवाला की हत्या (Sidhu Moosewala Murder) के मामले में तीन गिरफ्तारी की है। इनमें से दो शूटर हैं, जबकि तीसरा उस मॉड्यूल का सरगना है जिसने पंजाबी गायक और कॉन्ग्रेस मूसेवाला की हत्या को अंजाम दिया।

दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की स्पेशल सेल ने गुजरात के कच्छ से इन्हें गिरफ्तार किया। पुलिस ने सोमवार (20 जून 2022) को बताया कि इनके पास से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी बरामद किए गए हैं। जिनमें 8 ग्रेनेड, 3 पिस्तौल और लगभग 50 गोलियाँ शामिल हैं।

पुलिस के मुताबिक हत्या से पहले बदमाश गोल्डी बराड़ के संपर्क में थे। रेकी करने वालों ने बताया था कि मूसेवाला बिना किसी सुरक्षा के खुलेआम घूम रहा है। हत्या के बाद बदमाशों ने फोन कर काम पूरा होने की खबर दी थी।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के हत्थे चढ़े तीन बदमाशों में से एक का नाम प्रियव्रत उर्फ फौजी है। वह मूसेवाला की हत्या करने वाले मॉड्यूल का सरगना बताया जा रहा है। आरोप है कि प्रियव्रत ने ही हत्या की साजिश रची थी। हत्या के समय प्रियव्रत गोल्डी बराड़ के संपर्क में था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मूसेवाला की हत्या से पहले प्रियव्रत फतेहगढ़ के एक पेट्रोल पंप में लगे सीसीटीवी में भी नजर आया था।

प्रियव्रत के अलावा जो दो शूटर गिरफ्तार किए गए हैं, उनमें से एक कशिश उर्फ कुलदीप है और दूसरा केशव कुमार है। कुलदीप हरियाणा के झज्जर का रहने वाला है। कुलदीप भी फतेहगढ़ में सीसीटीवी में नजर आया था। वहीं केशव कुमार ने मूसेवाला की हत्या के बाद सभी शूटर्स को भागने में मदद की थी।

गौरतलब है कि मूसेवाला की 29 मई, 2022 को पंजाब के मानसा जिले में हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उन पर ताबड़तोड़ 30 गोलियाँ चलाई गई थीं। पंजाब की भगवंत मान सरकार द्वारा सिद्धू मूसेवाला की सुरक्षा वापस लिए जाने के एक दिन बाद ही उनकी हत्या कर दी गई थी।

5 हाईवे-7 रेल प्रोजेक्ट, PM मोदी ने कर्नाटक को दी ₹27000 करोड़ की सौगात: मैसूर पैलेस मैदान से करेंगे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सोमवार (20 जून, 2022) अपने दो दिवसीय दौरे पर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु पहुँचे। जहाँ उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में नवनिर्मित सेंटर फॉर ब्रेन रिसर्च और डॉ बीआर अंबेडकर की एक प्रतिमा का अनावरण किया। इसके बाद पीएम मोदी ने बेंगलुरु में कई 27000 करोड़ रुपए से अधिक की रेल और सड़क परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान उनके साथ कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई भी मौजूद रहे।

वहीं पीएम मोदी ने बेंगलुरु में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “आज कर्नाटक में 5 नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स, 7 रेलवे प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास किया गया है। कोंकण रेलवे के शत प्रतिशत बिजलीकरण के महत्वपूर्ण पड़ाव के हम साक्षी बने हैं। ये सभी प्रोजेक्ट कर्नाटक के युवाओं, मध्यम वर्ग, किसानों, श्रमिकों, उद्यमियों को नई सुविधा देंगे, नए अवसर देंगे।”

पीएम ने अपने संबोधन के दौरान आगे कहा, “भारतीय रेल अब तेज़ भी हो रही है, स्वच्छ भी हो रही है, आधुनिक भी हो रही है, सुरक्षित भी हो रही है और सिटीजन फ्रेंडली भी बन रही है। हमने देश के उन हिस्सों में भी रेल को पहुँचाया है, जहाँ इसके बारे में कभी सोचना भी मुश्किल था। भारतीय रेल अब वो सुविधाएँ, वो माहौल भी देने का प्रयास कर रही है जो कभी एयरपोर्ट्स और हवाई यात्रा में ही मिला करती थीं। भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया के नाम पर बैंगलुरू में बना आधुनिक रेलवे स्टेशन भी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।”

जनता को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा, “बेंगलुरू, देश के लाखों युवाओं के लिए सपनों का शहर है। बैंगलुरू, एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना का प्रतिबिंब है। बैंगलुरु का विकास, लाखों सपनों का विकास है, इसलिए बीते 8 वर्षों में केंद्र सरकार का ये निरंतर प्रयास रहा है कि बैंगलुरू के सामर्थ्य को और बढ़ाया जाए।”

पीएम मोदी ने कहा, “बैंगलुरू को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए रेल, रोड, मेट्रो, अंडरपास, फ्लाईओवर, हर संभव माध्यमों पर डबल इंजन की सरकार काम कर रही है। बैंगलुरू के जो पिछड़े इलाके हैं, उनको भी बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है।”

मैसूर पैलेस मैदान में सामूहिक योग प्रदर्शन में शामिल होंगे पीएम

बता दें कि कल मंगलवार, 21 जून, 2022 को, आठवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर सुबह पीएम मोदी मैसूर पैलेस मैदान में सामूहिक योग प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे। पीएमओ ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के तहत यह कार्यक्रम 75 केंद्रीय मंत्रियों के नेतृत्व में देश भर में 75 स्थानों पर आयोजित किया जा रहा है।

पीएम मोदी ने ट्वीट कर बताया कि 2015 से, हर साल 21 जून को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (IDY) मनाया जा रहा है। इस वर्ष के योग दिवस का विषय “मानवता के लिए योग” है। यह विषय दर्शाता है कि कैसे योग ने कोविड महामारी के दौरान पीड़ा को कम करने में मानवता की सेवा की।

प्रधानमंत्री के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए बोम्मई ने उनका स्वागत किया और कहा, “समृद्ध जीव एवं वनस्पति से नवाजी गई हमारी भूमि को आजादी के अमृत महोत्सव में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए चुनने के वास्ते मैं उनका आभार व्यक्त करता हूँ।”

‘4 साल की नौकरी में कौन अपनी बेटी देगा, दहेज कैसे मिलेगा’: बिहार में आगजनी-हिंसा को जायज बताने का कारण सुन कपार पीट लेंगे

केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के विरोध में सबसे ज्यादा हिंसा बिहार में देखने को मिली है। सैन्य बहाली की चार साल की इस योजना के विरोध में राज्य के कई जिलों में हिंसा और आगजनी हुई है। कई ट्रेनों को उपद्रवियों ने फूँक दिया था। अब एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवा हिंसा और आगजनी को इस आधार पर जायज बताने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि चार साल की नौकरी में शादी नहीं होगी। न दहेज मिलेगा।

कृष्णा यादव नाम के इस लड़के का दावा है कि वह 3 साल से आर्मी की तैयारी कर रहा था। मगर, अब वह तैयारी करना छोड़ देगा। उसे कहते सुना जा सकता है, “चार साल के लिए कौन जाएगा, कोई बीवी देगा क्या। औरत देगा। बाप अपनी बेटी देगा। कोई दहेज देगा।” लड़के की बात सुन प्रोपेगेंडाबाज यूट्यूबर वेदप्रकाश उससे कहता है दहेज लेना गलत है। हालाँकि लड़का इस बात पर अड़ा रहता है कि दहेज गलत नहीं है।

इसके बाद वीडियो में आगे कुछ अन्य लोग भी आगजनी को जायज ठहराते हैं और कहते हैं कि सरकार जब गूँगी-बहरी हो जाए तो क्या करना चाहिए। सरकार को समझाने के लिए तो आगजनी करनी ही पड़ेगी न।

वीडियो द एक्टिविस्ट नाम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड की गई है। यह चैनल वेद प्रकाश चलाता है जो खबरों के नाम पर जाति का जहर बोने के लिए कुख्यात है। वीडियो में दानारपुर में युवाओं से बात करते हुए वेदप्रकाश बीच-बीच में यह भी बता रहा है कि प्रदर्शनकारियों ने उन गाड़ियों को जला दिया जो सरकारी भी नहीं हैं।

वेद प्रकाश ऐसा दिखाने की कोशिश करता है कि वह इस आगजनी के विरोध में है। लेकिन मोदी सरकार के प्रति अपनी घृणा वह नहीं छिपा पाता है। इस मामले में भी बीच-बीच में राम मंदिर का जिक्र करते हुए कहता है कि अगर मोदी सरकार की नीति से कोई दुखी है तो वो दो साल बाद मोदी को वोट न दे।

यह भी दिलचस्प है कि वेद प्रकाश का यह वीडियो तब सामने आया है जब बिहार में अग्निपथ विरोधी हिंसा के लिए युवाओं को भड़काने में यूट्यूब चैनल्स का सक्रिय हाथ पाया गया है। गलत जानकारी और निराधार दावों के लिए युवाओं को गुमराह करने के आरोप यूट्यूब चैनल्स पर लगे हैं। किसी ने कैप्शन के के साथ खेल करके लाइक व्यूज पाए तो किसी ने थंबनेल भ्रामक लगाकर। लेकिन इस सबके बीच ये यूट्यूबर ये भूल गए कि उनके ये ज्यादा रीच के प्रयास कितने युवाओं को भड़का देगा।

‘डिलीवरी बॉय ने दी बहन की गाली, कहा था – दिखाता हूँ मैं कौन हूँ’: जिस खबर में मीडिया ने ढूँढा दलित एंगल, वो निकला कुछ और

UP की राजधानी में लखनऊ में 19 जून, 2022 (रविवार) को आशियाना थाने में एक FIR दर्ज करवाई जाती है। केस दर्ज करवाने वाले व्यक्ति का नाम विनीत कुमार रावत है जो SC समुदाय से हैं। उन्होंने अजय सिंह के खिलाफ खुद के मुँह पर थूकने, जातिसूचक शब्द बोलने, गालियाँ देने और मारपीट करने का आरोप लगाया। घटना एक दिन पहले 18 जून की बताई गई।

FIR Copy

इस शिकायत के मुताबिक, “18 जून को मैं जोमैटो का आर्डर देने आशियाना में अजय सिंह के पास देने गया। तभी बाहर आए एक व्यक्ति ने मेरा नाम पूछा। मेरे द्वारा अपना नाम बताने पर उसने मुझे जातिसूचक शब्द बोलते हुए कहा कि वो दलित होने के नाते मेरे हाथ से सामान नहीं लेगा। इस पर मैंने आर्डर कैंसिल करने को कहा तब उसने मेरे मुँह पर तम्बाकू थूक दिया। साथ ही मुझे गालियाँ देने लगा। तभी घर के अंदर से लगभग 1 दर्जन लोग निकले और अजय सिंह आदि ने मिल कर मुझे लाठी-डंडे से मारा। मैं जान बचा कर भागा और 112 पर पुलिस को बुलाया। पुलिस ने मुझे मेरी गाड़ी दिलवाई। मुझे चोटें भी आईं हैं।”

आरोपित और धाराएँ

मीडिया संस्थानों ने लगाया जातिवाद का तड़का

इस खबर में बिना पुलिस की जाँच रिपोर्ट आए ही इसमें मीडिया संस्थानों ने जातिवाद का तड़का लगा दिया। इस तड़के के लिए आधार आरोपों को बनाया गया। दैनिक भास्कर ने हेडलाइन दी, “लखनऊ में दलित डिलीवरी बॉय से खाना लेने से इनकार:मुंह पर थूका, गालियां देकर पीटा; 2 नामजद समेत 14 पर केस”

दैनिक भास्कर

बोलता हिंदुस्तान नाम के हैंडल से फोटो सहित ट्वीट हुआ, “‘दलितों के हाथ का छुआ खाना नहीं खाते हम’. ये कहते हुए लखनऊ में Zomato के दलित डिलीवरी बॉय के ‘मुंह पर थूंका’

चित्र साभार- ट्विटर

आज तक ने हेडलाइन दी, “दलित हूँ। इसलिए खाना नहीं लिया और मुँह पर थूका। डिलीवरी बॉय का आरोप”

आज तक

इंडिया TV ने लिखा, “UP लखनऊ में डिलीवरी बॉय के दलित होने से शख्स ने नहीं लिया खाना, कर दी पिटाई”

इंडिया TV

द क्विंट ने बताया, “डिलीवरी बॉय का आरोप- दलित होने की वजह से नहीं लिया खाना, मुँह पर थूका”। इसी के सब हेड में क्विंट ने लिखा, “विरोध करने पर घर से 12 से ज्यादा लोग डंडे ले कर निकल आए और डिलीवरी बॉय को दौड़ा कर पीटने लगे।”

द क्विंट

एशिया नेट, ABP , अमर उजाला और न्यूज़ 18 ने भी इसी एंगल से खबरें पब्लिश कीं।

मीडिया रिपोर्ट्स

जातिवादी नेताओं ने भी मुद्दे को दी हवा

कुछ ही देर बाद इन्ही मीडिया रिपोर्ट्स को आधार बना कर चंद्रशेखर रावण, दिलीप मंडल और कुछ अन्य कथित दलित हित चिंतकों ने ट्वीट करने शुरू कर दिए। किसी के निशाने पर देश, किसी के निशाने पर सरकार और कुछ के निशाने पर अन्य जातियाँ थीं।

साभार- ट्विटर

शिकायतकर्ता विनीत ने नहीं उठाया फोन

ऑपइंडिया ने इस मामले में शिकायतकर्ता विनीत को कई बार फोन किया लेकिन उनका फोन नहीं उठा। उनकी कॉलर ट्यून है, “जानी, तुमने एक शेर को फोन किया है। तो सब्र रख। शेर अपने हिसाब से फ़ोन उठाएगा। जब मूड होगा तब जवाब देगा। वरना फोन काट देगा। क्योंकि हम मोबाइल फोन शौक के लिए रखते हैं। वरना हमने बात करने के लिए हमसे रूबरू आना पड़ता है। अब तो तुम हमें जान गए होंगे।”

आरोपित ने कहा, “हम सवर्ण नहीं बल्कि OBC”

ऑपइंडिया ने इस मामले की जानकारी आरोपित अजय सिंह से ली। उन्होंने बताया, “शायद मेरे ट्रू कॉलर पर देख कर कुछ लोगों को शक हो गया हो कि मैं सवर्ण हूँ। जबकि मैं OBC समुदाय से हूँ। जब आर्डर दिया गया तब मैं अपने घर पर था ही नहीं। मैं तो बाद में आया। तब तक मेरा भाई डिलीवरी बॉय से मिला और उस से ऑर्डर खुद को देने के लिए कहा। उसमें मोमोज थे जो मैंने अपने बच्चों के लिए मँगवाए थे। जोमैटो वाले ने मेरे भाई को आर्डर देने से मना कर दिया। मेरा भाई पान-मसाला खाता है। उसने बात करने के लिए पीक जमीन में थूका तो कुछ छींटे डिलीवरी बॉय की स्कूटी पर गिरे। इस बार उसने मेरे भाई को अंधा कहा और गाली देने लगा।”

अजय सिंह ने आगे कहा, “तब तक मैं घर आ चुका था। मैंने डिलीवरी बॉय से अपने भाई के साथ की गई बदतमीजी की वजह पूछी तो उसने मुझे बहन की गाली दी। थोड़ी देर बाद वो मुझ से खुद से ही धक्का-मुक्की करने लगा। जब उसने मुझे धक्का दिया तब मैंने भी उसको धक्का दिया। कुछ देर बाद वो ये कहता हुआ चला गया कि अभी थोड़ी देर में तुम्हें पता चल जाएगा कि मैं कौन हूँ।”

मेरे घर में कुल 4 ही लोग, 10-12 का आरोप गलत

अजय सिंह ने बताया, “मेरे घर में मेरे बच्चों के अलावा मेरी बीवी और मेरा भाई पति-पत्नी रहते हैं। कुल वयस्क 4 लोग ही हैं मेरे परिवार में। फिर 12 लोगों के घर से निकलने का आरोप कैसे सही होगा? बाद में डिलीवरी बॉय 112 नंबर पर पुलिस को बुला कर लाया। तब तक मेरे मोहल्ले के आस-पास के लोग भी आ चुके थे। वो सब उसी डिलीवरी बॉय को ही गलत कह रहे थे। पुलिस ने मुझसे थूकने की बात पूछी तो मैंने डिलीवरी बॉय के चेहरे, शर्ट या कहीं भी एक बूँद भी पान, तम्बाकू आदि के छींटे दिखाने को कहा तब वो नहीं दिखा पाया। साथ ही उसको कहीं चोट भी नहीं लगी थी। इसलिए पुलिस के आगे ही वो अपनी गाडी ले कर चलगा गया।”

अगर गलत होता तो पुलिस देख कर भाग न जाता?

अजय सिंह ने आगे कहा, “अगर हम गलत होते तो उसी समय डायल 112 पर पुलिस को आता देख कर भाग न गए होते? हम अभी भी अपने कारोबार में ज्यों के त्यों लगे हुए हैं। हमने गलत नहीं किया है इसलिए हमें प्रशासन पर पूरा भरोसा है कि हमारे साथ भी गलत नहीं होगा।”

छुआछूत मानते तो जोमैटो से खाना मँगवाते?

आरोपित किए गए अजय ने आगे बताया, “हम पर छुआछूत मानने का आरोप लगाया जा रहा है। अगर हम छुआछूत को मानते तो क्या जोमैटो से खाना मँगवाते? क्या तब हम ये न सोचते कि न जाने इसको किसने बनाया हो? इस से पहले भी हम कई बार खाना ऑर्डर कर चुके हैं। लेकिन कभी भी किसी और न हम पर ऐसा आरोप नहीं लगाया।”

आरोपित के घर के एक अन्य रसोइए ने भी डिलीवरी बॉय के खिलाफ पुलिस में शिकायत देते हुए उस पर अजय सिंह के घर बदतमीजी करने, धक्कामुक्की और धमकी देने का आरोप लगाया है।

शिकायत

हमारे बच्चों को देखने वाली आया और ऑफिस में कुक दलित ही

अजय सिंह ने आगे कहा, “हमारे घर में बच्चों को देखने वाली आया और ऑफिस में हमारा खाना बनाने वाली कुक दोनों दलित हैं। अगर हम ये सब मानते तो क्या उन्हें काम पर रखते?” ऑपइंडिया से बात करते हुए कुक माधुरी ने कहा, “हम 6 साल से अजय सिंह के घर काम कर रहे है। हमारी पूरी मदद करते हैं ये। हमारे घर बनवाने, शादी ब्याह और बीमारी में इन्होंने हमारी कई बार मदद की है।” इसी के साथ अजय सिंह के घर काम करने वाली दलित समुदाय की आया आरती रावत ने भी जोमैटो के डिलीवरी बॉय द्वारा लगाए गए आरोपों को झूठ बताया और खुद मौके पर होना स्वीकार किया।

“अभी जाँच जारी, हम किसी निष्कर्ष पर नहीं” : पुलिस

लखनऊ पुलिस के ADCP पूर्व एस एम कासिम आबिदी ने बताया, “अभी हमारी जाँच जारी है। आरोपित पक्ष ने भी अपने पक्ष में काफी सबूत दिए हैं। हम CCTV आदि की भी पड़ताल कर रहे हैं। आरोपित के घर और ऑफिस में भी दलित स्टाफ हैं। फ़िलहाल हम हर पहलू पर जाँच कर रहे हैं।

5 औरत-4 मर्द, एक डॉक्टर के परिवार के सभी लोग अलग-अलग घरों में मृत मिले: पुलिस को कर्ज के कारण जहर पीने की आशंका, महाराष्ट्र के सांगली की घटना

महाराष्ट्र (Maharashtra) के सांगली (Sangli) जिले से दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। मिराज तालुका के म्हैसाल में सोमवार (20 जून 2022) को एक ही परिवार के नौ सदस्य अपने घर में मृत पाए गए। जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। पुलिस ने संदेह जताया है कि कर्ज के चलते परिवार ने सामूहिक आत्महत्या की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आशंका जताई जा रही है कि परिवार के सभी सदस्यों की मौत जहर खाने से हुई है। परिवार के छह सदस्य अंबिका नगर वाले घर में मृत मिले, जबकि अन्य तीन के शव राजधानी कॉर्नर के दूसरे घर से बरामद किए गए हैं। पुलिस ने कहा कि परिवार कर्ज के बोझ तले दबा हुआ था, इसलिए हो सकता है कि कर्ज चुकाने में असमर्थ होने पर उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया हो।

मुंबई से 350 किलोमीटर दूर सांगली जिले के म्हैसल में अपने घर में मृत पाए गए लोगों की पहचान कर ली गई है। मृतकों की पहचान पेशे से वेटनरी डॉक्टर पोपट यालप्पा वनमोरे (52), संगीता पोपट वनमोरे (48), अर्चना पोपट वनमोरे (30), शुभम पोपट वनमोरे (28), माणिक यालप्पा वनमोरे (49), रेखा माणिक वनमोरे (45), आदित्य माणिक वन (15), अनीता माणिक वनमोरे (28) और अक्कताई वनमोरे (72) के रूप में हुई है। डॉ. वनमोरे का शव उनके परिवार के छह अन्य सदस्यों के साथ महिसाल में नरवाड़ रोड के पास अंबिका नगर वाले घर में मिला था।

रिपोर्ट के अनुसार, परिवार का एक घर अंबिका नगर में और दूसरा राजधानी कॉर्नर में है। सोमवार सुबह से ही दोनों घरों के दरवाजे नहीं खुले थे। पड़ोसियों ने जब दरवाजा खटखटाया तो किसी ने कोई जवाब नहीं दिया, कुछ देर बाद उन्होंने दरवाजा तोड़ दिया। इसके बाद पता चला कि एक ही घर में छह लोगों ने आत्महत्या कर ली है। वहीं अन्य तीन के शव बाद में राजधानी कॉर्नर के दूसरे घर में मिले।

योग दिवस पर UAE के मंत्री भी करेंगे योग, अबुधाबी स्टेडियम के लिए चलेंगी विशेष बसें: दुबई में सप्ताह भर से चल रहे आयोजन

पूरा विश्व 21 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ मनाता है और अरब जगत भी इसका अपवाद नहीं है। इन इस्लामी मुल्कों में भी ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ का खुमार छाया हुआ है। UAE के अबुधाबी में तो एक ‘फुल मून योग सत्र’ की शुरुआत भी हो गई है। जब ‘स्ट्रॉबेरी फुल मून’ (जून का पहला पूर्णिमा) के अवसर पर मंगलवार (14 जून, 2022) से ही कार्यक्रमों की शुरुआत हो गई। कई लोगों ने इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और योग किया।

हालाँकि, लोगों को उस दिन बादलों के कारण चाँद नजर नहीं आया, लेकिन बुर्जिल मेडिकल सिटी में ‘VPS हेल्थकेयर’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में लोगों के उत्साह में इससे कोई कमी नहीं आई। इस सप्ताह में अबुधाबी में ऐसे कई योग वर्कशॉप आयोजित किए गए हैं। मुसाफह स्थित लाइफकेयर हॉस्पिटल में भी इसी तरह के सेशन का आयोजन किया गया था। साईदू रहमान नाम के साइट सुपरवाइजर ने कहा कि इस दौरान उन्हें योग के कुछ तकनीक सीखने को मिले, जो रोजाना के जीवन में उनके काम आ रहे हैं।

अबुधाबी के अलावा अल ऐन, दुबई और शारजाह में भी ‘योग फेस्ट’ आयोजित किए जा रहे हैं। UAE के लगभग 2000 लोग अब तक हालिया योग कार्यक्रमों में हिस्सा ले चुके हैं। वहीं 21 जून को अबुधाबी क्रिकेट स्टेडियम में मुल्क का सबसे बड़ा योग कार्यक्रम आयोजित किया जाने वाला है। UAE में भारतीय राजदूत संजय सुधीर ने कहा कि बुर्जिल के प्रयासों से स्वस्थ जीवन जीने की चाहत रखने वालों को बड़ा फायदा हो रहा है। 21 जून को लोकप्रिय योग शिक्षक विकास हेगड़े कार्यक्रम में प्रशिक्षण देंगे।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दिन भारतीय दूतावास ने बस सेवाओं की सुविधा का भी ऐलान किया है। अबुधाबी के शेख जायद क्रिकेट स्टेडियम में आने के लिए लोगों को बस की सुविधा दी जाएगी, ताकि वो योग दिवस कार्यक्रम में शिरकत कर सकें। UAE के सहिष्णुता एवं सह-अस्तित्व मंत्री शेख नाहयान बिन मुबारक अल नाहयान इस दौरान मुख्य अतिथि होंगे। अबुधाबी स्पोर्ट्स काउंसिल इस कार्यक्रम का पार्टनर है। बच्चों और परिवारों के लिए योग के कार्यक्रमों की योजना है।

दुबई में बॉलीवुड के सेलेब्स भी पहुँच रहे हैं। अनुष्का और आकांक्षा रंजन ने लोगों को एक कार्यक्रम में योग सिखाया। आकांक्षा रंजन ने कहा कि दुबई में इतने अतिथियों को योग करते देखना सुखद है और वो इस कार्यक्रम को गंभीरता से लेती हैं। ‘द पाम’ के होटल पैरामाउंट में उन्होंने 100 लोगों को योग सिखाया। दोनों बहनें मुंबई से वहाँ पहुँची थीं। इस बार का थीम ‘मानवता के लिए योग’ है। ‘गल्फ न्यूज़’ मीडिया संस्थान भी योग से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करवा रहा है।

केजरीवाल के आने से पहले संगरूर में काली माता मंदिर की दीवार पर लिखे मिले ‘खालिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे, 23 जून को होना है उपचुनाव

पंजाब के संगरूर में लोकसभा उपचुनाव के बीच केजरीवाल के पहुँचने से पहले काली माता मंदिर की दीवार पर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लिखे मिले हैं। इसका पता चलते ही जहाँ पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। वहीं पंजाब में खालिस्तानी ताकतों के लगातार मुखर होकर सामने आने की घटनाएँ तेजी से बढ़ती जा रही हैं। हालाँकि, प्रशासन ने केजरीवाल और भगवंत मान के रोड शो से पहले आनन-फानन में पेंट कर नारे मिटवा दिए।

बता दें कि संगरूर में चुनाव आचार संहिता लागू हैं और 23 जून, 2022 को मतदान होना है। संगरूर शहर के काली माता मंदिर के गेट और दीवारों पर “पंजाब हल खालिस्तान एस.एफ.जे” और “रेफरेंडम 26 जनवरी 2023” के नारे लिखे गए है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना बीती रात बताई जा रही है और अब संगरूर प्रशासन की तरफ से यह सभी नारे मिटा दिए गए हैं। जिन जगहों पर नारे लिखे गए थे वहाँ पर पेंट कर दिया गया है और पंजाब पुलिस इस मामले में कुछ भी बोलने से इनकार कर रहा है।

हालाँकि, पंजाब में खालिस्तान समर्थक नारे लगना और उसकी माँग नया नहीं है लेकिन आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार बनने से पंजाब में खालिस्तान की माँग तेज हो गई है। ऐसा विभिन्न रिपोर्टों में दावा किया जाता रहा है। ऐसे में पंजाब में खालिस्तानी तत्वों की इस तरह हरकतों से कानून व्यवस्था को लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, काली माता मंदिर की दीवार पपर जिस जगह नारे लिखे गए थे, उसके सामने कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा हुआ है। इस वजह से नारे किसने लिखे, इसके बारे में फ़िलहाल खुलासा नहीं हो सका है।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह फरीदकोट और फिरोजपुर में भी खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लिखे जा चुके हैं। फरीदकोट में पहले बाजीगर बस्ती के पार्क और फिर जज की कोठी की दीवार पर यह नारे लिखे गए थे। इसके बाद फिरोजपुर में डिविजनल रेलवे मैनेजर (DRM) की कोठी के बाहर यह नारे लिखे गए थे।

बता दें कि पिछली बार भी केजरीवाल और सीएम भगवंत मान के जालंधर में होने वाले कार्यक्रम से पहले ही खालिस्तान समर्थकों ने लिखे थे। वहीं पंजाब में आए दिन खालिस्तान समर्थकों की ओर से अलगाववाद के माहौल बनाए जा रहे हैं। कभी भारत के विरुद्ध नारेबाजी होती है तो कभी दीवारों पर आपत्तिनजक नारे लिखे जाते हैं।