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श्रीलंका में पेट्रोल पंप पर लोगों को चाय पिलाते नजर आए वर्ल्ड चैंपियन क्रिकेटर: ईंधन संकट के बीच रोशन महानामा की तस्वीरें वायरल

श्रीलंका इन दिनों अपने इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय संकट (Sri Lanka Economic Crisis) से जूझ रहा है। इसी बीच श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर रोशन महानामा की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। ये तस्वीरें उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर की हैं। इन तस्वीरों में 1996 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रह चुके महानामा पेट्रोल पंप पर लोगों को चाय और बन परोसते हुए नजर आ रहे हैं।

दरअसल, इस संकट की घड़ी में महानामा लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। पूर्व क्रिकेटर महानामा पेट्रोल पंप पर लोगों को उनकी जरूरतों का सामान उपलब्ध करा रहे हैं। साथ ही उन्होंने श्रीलंका के लिए इस बेहद मुश्किल वक्त में लोगों से एक-दूसरे की मदद करने की अपील की है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “हमने वार्ड प्लेस और विजेरामा मावथा के आसपास पेट्रोल के लिए लाइन में लगे लोगों के लिए चाय और बन परोसने का काम किया। ये कतारें हर दिन लंबी होती जा रही हैं। ऐसे में लोगों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। कृपया, पेट्रोल की कतारों में लगे लोग अपना ध्यान रखें और एक-दूसरे की मदद करें।”

उल्लेखनीय है कि चीनी (China) कर्ज के जाल में फँसकर श्रीलंका (Sri Lanka) में हालत हर बीतते दिन के साथ बदतर होती जा रही है। लोगों को मूलभूत चीजों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। विदेसी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो चुका है। महँगाई इतिहास के सभी रिकॉर्ड तोड़ती जा रही है। देश ईंधन के आयात लिए भी संघर्ष कर रहा है। अनुमान है कि यहाँ पेट्रोल और डीजल का मौजूदा स्टॉक कुछ वक्त में खत्म हो सकता है।

‘अल्लाह हिदायत दे’: बुर्के में नाचती मंदाना करीमी को देख कट्टरपंथियों ने बकी गालियाँ, पूछा – क्यों उड़ाया हिजाब का मजाक?

सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी अक्सर किसी न किसी लड़की को निशाना बनाकर उसे इस्लाम का ज्ञान देते दिखते हैं। फिर वो चाहे कोई सामान्य यूजर हो या फिर कोई सेलीब्रिटी। इस बार उनके निशाने पर मंदाना करीमी आई हैं। लॉक अप शो में नजर आईं मंदाना ने अपने इंस्टाग्राम पर बुर्का पहन कर एक वीडियो शेयर की थी। इस वीडियो में वह डांस स्टेप करते और हाथ में छोटा टॉप लिए नजर आईं। वीडियो देख कट्टरपंथी इतना खफा हुए कि उन्हें मजहबी ज्ञान दिया जाने लगा।

वीडियो के कैप्शन में मंदाना ने लिखा था, “काश बुर्का पहनकर नाचना इतना आसान होता जितना इन बीटीएस में दिख रहा है। यहाँ कोई नफरत नहीं थी। बस कुछ लोग फिल्म बना रहे थे।”

एक अलबलूशी नाम के यूजर ने कहा, “मैं अल्लाह से दुआ करूँगा कि तुम्हें हिदायत दे। तब तुम्हें पता चलेगा कि जो कुछ भी तुम कर रही हो वो गलत है।”

अगले यूजर ने लिखा, “शर्म आनी चाहिए तुम्हें। हिजाब की इस तरह बेइज्जती मत करो। कम से कम एक बार ये सब करने से पहले सोचो।”

इसी तरह कुछ यूजर आहत होकर मंदाना से पूछते दिखे हैं- “आखिर तुमने हिजाब या नकाब का मजाक क्यों उड़ाया।”

कुछ कट्टरपंथी इस तरह बुर्के में मंदाना का डांस देख इतना खफा हुए कि उन्होंने मंदाना को गालियाँ देनी शुरू कर दीं। स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं कि उन्हें कितने अपशब्द कहे गए। सैम नाम के यूजर ने लिखा, “हरा@^% कु^%* बुर्के की तो इज्जत रख बेशर्म इंसान।”

इसी तरह मंदाना का पोस्ट खंगालने पर पता चला कि उनके फैन्स ने आहत होकर उन्हें अनफॉलो तक कर दिया है। एक ने उन्हें छिनाल कहा। वहीं कुछ ने मंदाना के अकॉउंट को बंद कराने की अपील भी की। मुजामिल असलम ने उन्हें लिखा, “बेगैरत औरत मजाक बना रही बुर्के का कमीनी औरत।”

बता दें कि मंदाना करीमी के अलावा भी कई एक्ट्रेस हैं जिन्हें कट्टरपंथी अपने निशाने पर लेते हैं। इन लोगों को अक्सर सारा अली खान की तस्वीरों पर अभद्र टिप्पणी करते देखा जा सकता है। इसके अलावा सोहा अली खान की तस्वीरें देख भी कट्टरपंथियों का गुस्सा फूटता है।

‘हिन्दुओं ने मौलवी का सिर कलम कर दिया’: बिहार की घटना पर फेक न्यूज़ फैला रहा ‘अल जज़ीरा’, जानें क्या है सच्चाई

मीडिया हाउस अल जज़ीरा अरबी (Al Jazeera Arabic) ने हिंदुओं को दोषी ठहराते हुए ​रविवार (19 जून 2022) को मौलवी की मौत के बारे में फर्जी खबर फैलाई। उसने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि बिहार के सीवान में हिंदुओं ने एक मौलवी को मार डाला। अल जज़ीरा अरबी ने ट्विटर पर एक पोस्ट शेयर की है। इसमें अरबी में लिखा है, “सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक मस्जिद के इमाम की फोटो वायरल हो रही है, जिन्हें हिंदुओं ने मार डाला। सीवान के खालिसपुर गाँव की एक मस्जिद में जब वह सो रहे थे, तभी हिंदुओं द्वारा उनका सिर कलम कर दिया गया।”

मीडिया संस्थान ने इस मामले की जाँच करने और हत्यारों को जल्द से जल्द पकड़ने के लिए अपनी पोस्ट में ‘जस्टिस फॉर इमाम सीवान’ और ‘जस्टिस फॉर सिवान मौलवी’ हैशटैग भी लिखा है। (Google अनुवाद)

अज जज़ीरा अरबी ने हिंदुओं को दोषी ठहराते हुए मौलवी की मौत के बारे में फर्जी खबर प्रकाशित की थी। फोटो साभार: ट्विटर

सीवान में मौलवी की हत्या के पीछे का सच

बिहार के सीवान जिले में मौलवी की मौत के पीछे की सच्चाई अज जज़ीरा के दावे से कोसों दूर है। यह घटना सीवान जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के खालिसपुर गाँव में 9-10 जून की दरम्यानी रात की है। मौलवी की पहचान 85 वर्षीय सफी अहमद के रूप में हुई है, जिसकी स्थानीय लोगों ने मस्जिद में हत्या कर दी थी।

‘दैनिक जागरण’ की रिपोर्ट के अनुसार, मौलवी सफी अहमद का पाटीदारों के साथ जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। थाना प्रभारी विनोद कुमार सिंह ने कहा कि सफी अहमद का गाँव में ही कुछ लोगों के साथ पारिवारिक विवाद चल रहा था। परिवार के सदस्यों की शिकायत के आधार पर इस मामले में केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है। पुलिस का मानना है कि जमीन के एक टुकड़े को लेकर उसकी हत्या की गई है। स्थानीय लोगों को घटना की जानकारी 10 जून की सुबह तब हुई, जब जुमे की नमाज के लिए मस्जिद को साफ करने सफाईकर्मी वहाँ पहुँचा। मौलवी का शव देख उसने शोर मचाया, तब आसपास लोग वहाँ एकत्रित हो गए। इसके बाद घटना की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर शव काे कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया।

जमीन विवाद पर मौलवी के बेटे का बयान

मौलवी के बेटे अशफाक अहमद ने एक बयान में कहा कि गाँव में उनका पुश्तैनी घर है। सफी के बड़े भाई के पोते का 22 मई को निकाह होना था। इसके लिए उनके अब्बा के बड़े भाई उमर अहमद ने मेहमानों को घर में रखने के बहाने उनसे घर खाली करा लिया। इसके बाद से उसके अब्बा रात को मस्जिद में ही सोते थे। निकाह के बाद जब वे अपने घर लौटे तो उनके एक कमरे में ताला लगा हुआ था।

उन लोगों ने ताला खोलने से इनकार कर दिया और अशफाक व उसके अब्बा को जान से मारने की धमकी दी। बाद में यह मामला पंचायत तक पहुँचा, लेकिन उन्हें यहाँ भी न्याय नहीं मिला। जबकि पाँच महीने पहले ही अदालत ने उनके परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया था। यह केस कोर्ट में पाँच साल तक चला था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कमरे में ताला लगे होने की शिकायत लेकर सफी शनिवार को पुलिस थाने में लगने वाले जनता दरबार में जाने वाले थे। परिवार के लोगों ने बताया कि इसकी सारी तैयारी उन्होंने कर ली थी और सारे कागजात भी इकट्ठे कर लिए थे। गुरुवार को उन्होंने इसकी सारी जानकारी अपने परिवार के बेटों के साथ शेयर की थी। घटना की रात गर्मी अधिक होने के कारण सफी नमाज पढ़ने के बाद मस्जिद की छत पर सोने चले गए थे। इसके बाद सोची-समझी साजिश के तहत अज्ञात हमलावरों ने उनकी हत्या कर दी। ऑपइंडिया ने इस मामले से जुड़ी अन्य जानकारी प्राप्त करने के लिए सीवान के मुफस्सिल पुलिस स्टेशन से सम्पर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

‘मोदी हिटलर की मौत मरेगा’: मनमोहन सरकार में मंत्री रहे सुबोधकांत सहाय की PM पर आपत्तिजनक टिप्पणी, अग्निपथ पर मर्यादा भूले कॉन्ग्रेस नेता

कॉन्ग्रेस नेता सुबोधकांत सहाय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। झारखंड की राजधानी राँची से 3 बार सांसद रहे कॉन्ग्रेस नेता ने कहा, “मुझे तो लगता है कि हिटलर का सारा इतिहास इसने पार कर लिया। हिटलर ने भी ऐसी ही एक संस्था बनाई थी, उसका नाम था खाकी। सेना के बीच में उसने बनाया था। मोदी हिटलर की राह चलेगा, तो हिटलर की मौत मरेगा। ये याद रखो। ये देश कॉन्ग्रेस पार्टी के शहीदों की परंपरा की पार्टी है।”

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस में ‘शहीदों’ की लंबी सूची है, लेकिन किसी ने कभी लक्ष्मण रेखा पार नहीं की। उन्होंने बताया कि जब सोनिया गाँधी प्रधानमंत्री पद को नकार रही थीं, तब उन्होंने उनका माइक छीनते हुए कहा था कि आपके नाम से हमलोग चुन कर आए हैं, ऐसे में हमलोग आपको पीएम पद नहीं ठुकराने देंगे। सुबोधकांत सहाय ने कहा कि ऐसे नेहरू-गाँधी परिवार पर उँगली उठाने का काम किया जा रहा है। इस बयान के बाद उनकी चौतरफा आलोचना हो रही है। इस दौरान मंच पर सचिन पायलट और प्रमोद तिवारी जैसे बड़े कॉन्ग्रेस नेता भी मौजूद थे।

उन्होंने ‘अग्निपथ’ योजना का विरोध करते हुए मंच से एक रैली के सम्बोधन के दौरान ये अमर्यादित टिप्पणी की। उन्हें केंद्र की यूपीए सरकार ने फूड प्रोसेसिंग और फिर पर्यटन मंत्री भी बनाया था। तब उन पर कोयला घोटाले में अपने भाई को फेवर करने के आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। कॉन्ग्रेस से पहले वो जनता पार्टी में हुआ करते थे। उन्हें सोनिया गाँधी के विश्वस्तों में से एक माना जाता है। वो विधायक भी रहे हैं।

झारखंड के ही कॉन्ग्रेस विधायक इरफ़ान अंसारी भी लगातार ऐसी टिप्पणियों के कारण सुर्ख़ियों में हैं। झारखंड के जामताड़ा से कॉन्ग्रेस के विधायक इरफान अंसारी ने अग्निपथ योजना का विरोध करते हुए कहा था, “देश खून से लथपथ हो जाए, लेकिन अग्निपथ लागू नहीं होने देंगे।” कॉन्ग्रेस ने इरफान अंसारी के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया था। कॉन्ग्रेसियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूँका था। इस मौके पर जैसा कि सामान्यतया कॉन्ग्रेसी करते हैं, मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की थी।

अग्निपथ के विरोध में ‘भारत बंद’ का असर कम, हुड़दंग अधिक: ED के सामने राहुल गाँधी की पेशी से सड़क पर कॉन्ग्रेसी

केंद्र की ‘अग्निपथ’ सैन्य भर्ती योजना के विरोध में हो रहे प्रदर्शन के बीच कुछ संगठनों ने आज सोमवार (20 जून, 2022) को भारत बंद का ऐलान किया है। इसके चलते जहाँ राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। वहीं यूपी के नोएडा और राजस्थान के जयपुर समेत देश के अन्य कई बड़े शहरों में धारा 144 लागू कर दी गई है। रेलवे स्टेशनों और सरकारी दफ्तरों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। रैपिड एक्शन फोर्स को भी विभिन्न जगहों पर फ्लैग मार्च कर रही है। वहीं राहुल गाँधी के खिलाफ ईडी की कार्रवाई और अग्निपथ योजना के विरोध में कॉन्ग्रेस भी आज देशभर में विरोध प्रदर्शन कर रही है। लेकिन पूरे देश में बंद का असर कम और हुड़दंग ज़्यादा नजर आ रहा है।

बता दें कि बीते दिनों प्रदर्शनकारियों ने कई राज्यों में रेलवे संपत्तियों को काफी नुकसान पहुँचाया था। कई जगह रेल पटरियों को क्षतिग्रस्त किया गया था। इसको देखते हुए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।

रेल मंत्रालय ने बताया कि अग्निपथ योजना को लेकर प्रदर्शन के कारण NTES पोर्टल के मुताबिक, सोमवार दोपहर तक 742 ट्रेनों को पूरी तरह से कैंसिल कर दिया गया है। 28 ट्रेनों को आंशिक रूप से रद्द किया गया है। जबकि रविवार को भी 483 ट्रेनों को रद्द करना पड़ा था। हालाँकि, इस दौरान किसी भी ट्रेन को डायवर्ट नहीं किया गया है। वहीं दिल्ली में शिवाजी ब्रिज पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा ट्रेन रोके जाने की खबर है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन का चूँकि सबसे अधिक असर बिहार में रहा इसलिए आज भारत बंद के चलते बिहार के 20 जिलों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है।

ED के सामने पेश हुए राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन

नेशलन हेराल्ड केस में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी आज फिर से करीब 11 बजे ईडी के सामने पेश हुए। जहाँ उनसे आज ED पूछ्ताछ कर रही है वहीं बता दें कि ED के अधिकारी अभी तक राहुल गाँधी से 5 से 17 जून बीच करीब 30 घंटे की पूछताछ कर चुके हैं। इस बीच कॉन्ग्रेस नेता दिल्ली में जुट रहे हैं, तो वहीं अग्निपथ योजना के विरोध में भी कॉन्ग्रेस देश भर में विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी में है। इस बीच कॉन्ग्रेस प्रतिनिधिमंडल आज राष्ट्रपति से भी मुलाकात कर सकता है।

बता दें कि इससे पहले भी राहुल गाँधी से ईडी ने जब 3 दिन पूछताछ की थी। तब तीनों ही दिन कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता विरोध में सड़कों पर उतर आए थे। कॉन्ग्रेस वर्कर्स की ओर से राहुल गाँधी से पूछताछ का विरोध कई दिनों से किया जा रहा है और इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस अलर्ट पर है। राजधानी दिल्ली के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है।

वहीं आज राहुल गाँधी से ED के पूछ्ताछ और अग्निपथ योजना के खिलाफ जंतर-मंतर पर कॉन्ग्रेस सत्याग्रह कर रही है। जानकारी के मुताबिक, मल्लिकार्जुन खड़गे, सलमान खुर्शीद, के सुरेश, वी नारायणस्वामी व अन्य नेता जंतर-मंतर पहुँच चुके हैं।

गौरतलब है कि आज अग्निपथ योजना पर कॉन्ग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगते हुए कहा, “46 हजार युवकों को तैयार करके आरएसएस में लाना चाहती है। क्या किसी देश में ऐसा हुआ है कि साल-साल ट्रेनिंग देकर उसके बाद उन्हें छोड़ दिया जाए। भाजपा 4 साल तक ट्रेनिंग और स्टाइपेंड देकर युवाओं को चुनाव तक व्यस्त रखने के लिए यह काम कर रही है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, जिससे युवा महंगाई व बेरोजगारी के खिलाफ विरोध न करें।”

बता दें कि वहीं मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राहुल गाँधी से ईडी की पूछताछ का विरोध कर रही कॉन्ग्रेस पर भाजपा नेता संबित पात्रा ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा है, “देश में कोई महारानी विक्टोरिया या राजकुमार नहीं है कि उनकी जाँच नहीं होगी। कानून सभी के लिए समान है। भ्रष्टाचार के लिए सभी की जाँच की जा रही है। जनता नेशनल हेराल्ड घोटाले में एक परिवार की संलिप्तता और देश के धन के दुरुपयोग के बारे में जानती है।”

4 में से 1 अग्निवीर सेना में रह जाएँगे, बाकी 3 यहाँ हो सकते हैं बहाल: अग्निपथ पर 4 साल, फिर खुलेंगे सरकारी से लेकर निजी क्षेत्रों तक के दरवाजे

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (PM Narendra Modi) की महत्वाकांक्षी अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) का हिंसक विरोध जारी है। विपक्षी दलों ने इस योजना के विरोध में सोमवार (20 जून 2022) को भारत बंद का ऐलान किया है। वहीं, किसान आंदोलन की तर्ज पर इस बार भी अराजकता फैलाने के लिए दिल्ली तक ट्रैक्टर रैली का आयोजन किया गया है।

हालाँकि, तमाम धमकियों के बाद भी सेना (Army) ने स्पष्ट कर दिया है कि यह योजना किसी भी कीमत पर वापस नहीं होगी। वहीं, भारतीय वायुसेना से इस योजना के तहत अग्निवीरों (Agniveer) की बहाली से संबंधित गाइडलाइन भी जारी कर दी है। थल सेना ने भर्ती की अधिसूचना जारी कर दी है। अग्निवीरों की भर्ती के लिए जुलाई से पंजीकरण शुरू होगा।

कारगिल कमिटी की सिफारिश

दो दशक पहले कारगिल समीक्षा समिति की रिपोर्ट में सैनिकों के लिए इतनी छोटी सेवा का सुझाव दिया गया था। कारगिल युद्ध के कारण हुई घटनाओं के क्रम का अध्ययन करने और सिफारिशें करने के लिए गठित समिति ने देश की रक्षा में सुधार के लिए कई सुझाव दिए थे। उनमें से कुछ को पहले ही लागू किया जा चुका है।

समिति ने कहा था, “देश के सामने आने वाले छद्म युद्ध और बड़े पैमाने पर आतंकवाद की नई स्थिति को ध्यान में रखते हुए अर्ध-सैन्य बलों की भूमिका और कार्यों को पुनर्गठित किया जाना चाहिए, खासकर कमान एवं नियंत्रण तथा नेतृत्व के संदर्भ में। उन्हें प्रदर्शन के उच्च मानकों के लिए प्रशिक्षित करने और आतंकवादी खतरों से निपटने के लिए बेहतर ढंग से सुसज्जित करने की आवश्यकता है। सशस्त्र बलों, अर्ध-सैन्य बलों और केंद्रीय पुलिस बलों के लिए एक एकीकृत जनशक्ति नीति अपनाने की संभावना की जाँच होनी चाहिए।”

रिपोर्ट में आगे कहा गया था, “सेना को हर समय जवान और फिट रहना चाहिए। इसलिए 17 साल की सेवा (जैसा कि 1976 से नीति रही है) की वर्तमान प्रथा के बजाय, यह सलाह दी जाएगी कि सेवा को सात से दस साल की अवधि तक कम कर दिया जाए। इसके बाद अधिकारियों और जवानों को देश के अर्धसैनिक बलों में सेवा के लिए मुक्त कर दिया जाए।”

समिति ने महसूस किया था कि 1999-2000 में सेना का ₹6,932 करोड़ का पेंशन बिल कुल वेतन बिल का लगभग दो-तिहाई था और यह हर साल तेजी से बढ़ रहा था। इस वर्ष के बजट में रक्षा के लिए ₹5.25 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं। इनमें से ₹1,19,696 करोड़ अकेले पेंशन के लिए आवंटित किए गए हैं। इसका अर्थ है कि रक्षा बजट का लगभग 25% केवल पेंशन के भुगतान के लिए खर्च किया जाता है। वन रैंक वन पेंशन (OROP) योजना के लागू होने के बाद सेना की पेंशन में तेजी से वृद्धि हुई है।

कारगिल समिति ही नहीं, भारतीय सेना ने भी जनशक्ति लागत को बचाने के लिए अग्निपथ योजना के समान एक भर्ती योजना का प्रस्ताव दिया था। सेना ने 2020 में युवाओं को 3 साल के लिए भर्ती करने के लिए ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ योजना का प्रस्ताव दिया था। मौजूदा योजना में इस प्रस्ताव के साथ कई समानताएँ हैं। हालाँकि, सेना द्वारा प्रस्तुत योजना में सेवा अवधि 4 साल के बजाय 3 साल तय की गई थी।

किन-किन देशों में लागू है अग्निपथ जैसी योजना

अग्निपथ योजना अपने आप में नई योजना नहीं है। ऐसी ही योजना पहले से ही कई देशों में संचालित हो रही हैं। इजरायल में सभी स्त्री और पुरुषों के लिए इस योजना में भाग लेना अनिवार्य है। इसरायल में पुरुषों के लिए यह अनिवार्य सेवा 2.5 साल और महिलाओं के लिए 2 साल निश्चित है।

ब्राजील में युवाओं को 18 साल पूरा करते ही एक साल सैन्य सेवा देनी होती है। हालाँकि, स्वास्थ्य कारणों एवं विश्वविद्यालय के छात्रों को इसमें छूट दी गई है। यूनाइटेड किंगडम का विदेशी क्षेत्र बरमूडा अपने स्थानीय बलों की भर्ती में 18 साल से 32 साल के युवाओं को बरमूडा रजिमेंट में 3.15 साल तक सेवा देनी होती है।

साइप्रस में 17 साल से 50 साल के सभी पुरुषों को दो साल तक सेना में सेवा देनी होती है। वहीं, ग्रीस में 19 साल से 45 साल के पुरुषों को सेना में सेवा देना अनिवार्य किया गया है। वहीं, सिंगापुर में भी नागरिकों को सैन्य सेवा देना अनिवार्य है। इसमें चूक होने पर 10 हजार सिंगापुरियन डॉलर या तीन साल की सजा का प्रावधान किया गया है।

इसी तरह उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, रुस, स्विट्जरलैंड, थाईलैंड, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान जैसे कई देशों में अलग-अलग रूपों अलग-अलग आयु वर्ग और अलग-अलग अवधि के लिए सैन्य सेवा को लागू किया गया है।

पूरी करनी होगी सेवाकाल

सरकार ने तीनों सेनाओं में सैनिकों की भर्ती के लिए 14 जून 2022 को अग्निपथ योजना की घोषणा की थी। इस योजना के तहत 17.5 वर्ष से 21 वर्ष के युवा अग्निवीर के रूप में सेना के तीनों में अंगों में 4 वर्ष तक तक के लिए अपनी सेवा दे सकेंगे।

अग्निवीरों को अपनी चार साल की नौकरी पूरी करनी होगी। इससे पहले वे फोर्स नहीं छोड़ सकेंगे। ऐसा करने के लिए उन्हें अधिकारी की सहमति लेनी होगी। इसके साथ ही 18 साल से कम उम्र के अग्निवीरों को अपने माता-पिता या अभिभावक की सहमति आवश्यक होगी। अग्निवीरों की ड्रेस तय होगी और उन्हें अपनी वर्दी में ही ड्यूटी करनी होगी। किसी भी ड्यूटी के लिए कहीं भी भेजा जा सकता है।

क्या मिलेगा अग्निवीरों को

पहले साल अग्निवीरों को 30,000 रुपए मासिक वेतन मिलेगा, जिसमें 30 प्रतिशत हिस्सा यानी 9,000 रुपए अग्निवीर कॉरपस फंड में जाएगा। वहीं, 30 प्रतिशत हिस्सा सरकार अपनी ओर से भी इस फंड में योगदान देगी।

इस तरह पहले साल अग्निवीरों को कुल 21,000 रुपए वेतन हाथ में मिलेगा। दूसरे साल हाथ में 23,100 रुपए, तीसरे साल 25,580 रुपए और चौथे साल 28,000 रुपए मिलेगा। इसके अलावा, उन्हें 48 लाख रुपए का बीमा भी दिया जाएगा, जो उनके सेवा काल तक हासिल रहेगा।

अग्निवीर इन्हें साल में तीस दिन की छुट्‌टी दी जाएगी। इसके अलावा, बीमार होने पर डॉक्टर की सलाह पर सिक लीव भी मिलेगी। इस दौरान उन्हें मेडिकल फैसिलिटी और कैंटीन की सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा, वेतन के साथ-साथ रिस्क, हार्डशिप, ड्रेस एवं ट्रैवल अलाउंस भी दिया जाएगा। वहीं, ये पेंशन, गैच्युटी और एनपीएस (इसमें अंशदान की जरूरत नहीं है) के हकदार नहीं होंगे।

इसके साथ ही अग्निवीरों को 12वीं और स्नातक का सर्टिफिकेट दिया जाएगा, ताकि आगे चलकर ये उच्च शिक्षा या किसी अन्य परीक्षा में बैठ सकें। इसके अलावा, इन्हें कौशल विकास (Skill Development Course) और अग्निवीर का भी सर्टिफिकेट दिया जाएगा।

अगर कोई अग्निवीर अपनी सेवाकाल के दौरान वीरगति को प्राप्त होता है तो उसके परिवार को बीमा समेत करीब एक करोड़ रुपए से अधिक की राशि दी जाएगी। विकलांगता पर एक्स-ग्रेशिया और बची हुई नौकरी की वेतन और सेवा निधि की लगभग 11 लाख रुपए सहित राशि दी जाएगी।

अगर सेवाकाल के दौरान किसी अग्निवीर की मौत हो जाती है तो उसे 48 लाख रुपए की बीमा राशि, सेवा निधि और बाकी बचे सेवा काल का वेतन दिया जाएगा। चार साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद ऐसे लोगों को अग्निवीर का प्रमाण पत्र दिया जाएगा।

चार वर्ष की सेवा अवधि के बाद जो सेना में अपनी नौकरी जारी रखना चाहते हैं, उन्हें फिर से आवेदन देना होगा और एक केंद्रीयकृत बोर्ड द्वारा अग्निवीर के रूप में उनके चार साल के परफॉर्मेंस और फिटनेस के आधार पर चुना जाएगा। ये कुल अग्निवीर के 25 प्रतिशत हिस्सा होंगे।

पहली भर्ती पर उम्र सीमा में छूट

सरकार ने अग्निवीरों की भर्ती की अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 23 वर्ष कर दी है। योजना के लिए उम्र सीमा 17 से 21 वर्ष निर्धारित की गई है, लेकिन रक्षा मंत्रालय ने इसमें आंशिक बदलाव करते हुए पहली बार के लिए अधिकतम आयु सीमा 23 साल कर दी है।

यानी, युवाओं को अधिकतम आयु सेवा में दो साल छूट का यह फायदा सिर्फ पहले साल में ही मिलेगा। उल्लेखनीय है कि कोरोना वैश्विक महामारी के कारण पैदा हालातों की वजह से सेना में भर्ती दो साल से रुकी हुई थी।

सेवाकाल पूरा करने वाले अग्निवीरों को आरक्षण

रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि आवश्यक पात्रता पूरा करने वाले अग्निवीरों को रक्षा मंत्रालय की नौकरियों में 10 प्रतिशत तक आरक्षण दिया जाएगा। यह आरक्षण भारतीय तटरक्षक बल, अन्य सिविलयन पोस्ट और रक्षा मंत्रालय के 16 उपक्रमों में लागू किया जाएगा। यह वर्तमान पूर्व सैनिकों की कोटा के अतिरिक्त होगा।

वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि उसके केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और असम राइफल्स में अग्निवीरों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा, इन बलों में अग्निवीरों की आयुसीमा में 3 वर्ष की छूट दी जाएगी। वहीं, पहले वर्ष की भर्ती में यह छूट 5 वर्ष की होगी।

मंत्रालयों, PSU और राज्य पुलिस में वरीयता के आधार पर नौकरी

इसके अलावा नागरिक उड्डयन मंत्रालय, बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय, आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय मंत्रालयों सहित विभिन्न मंत्रालयों ने अपने यहाँ और सरकारी उपक्रमों (सरकारी कंपनियों) में अग्निवीरों को वरीयता देने की बात कही है।

वहीं, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, कर्नाटक, असम सहित भाजपा शासित राज्यों ने घोषणा की है कि वे राज्य की पुलिस एवं उससे संबंधित सेवाओं में अग्निवीरों को वरीयता देगी।

अग्निवीरों के लिए उद्योगपति भी आगे आए

प्रसिद्ध उद्योगपति और महिंद्रा समूह के मालिक आनंद महिंद्रा ने कहा है कि इस प्रकार के प्रशिक्षित, सक्षम और अनुशासित युवाओं को उनकी कंपनी में नौकरी दी जाएगी। उम्मीद है कि देश के अन्य उद्योगपति भी जल्दी ही अग्निवीरों के लिए आगे आएँगे।

आनंद महिंद्रा ने ट्वीट किया, “अग्निपथ स्कीम के ऐलान के बाद जिस तरह हिंसा हुई उससे दुखी और निराश हूँ। पिछले साल जब इस स्कीम पर विचार किया गया था तब मैंने कहा था कि अग्निवीर को जो अनुशासन और कौशल मिलेगा वह उन्हें उल्लेखनीय रूप से रोजगार के लिए योग्य बनाएगा। महिंद्रा ग्रुप ऐसे प्रशिक्षित और सक्षम युवाओं को अपनी कंपनी में नौकरी देगा।”

जब आनंद महिंद्रा से पूछा गया कि उनकी कंपनी अग्निवीरों को किस पोस्ट पर नियुक्त करेगी? इसके जवाब में उन्होंने कहा, “लीडरशिप क्वालिटी, टीम वर्क और शारीरिक प्रशिक्षण की वजह से अग्निवीर के रूप में उनकी इंडस्ट्री को बाजार के लिए तैयार पेशेवर मिलेंगे। ये लोग एडमिनिस्ट्रेशन, सप्लाई चेन मैनेजमेंट कहीं भी काम करने में योग्य होंगे।”

‘मुसलमान बादशाह को काफिरों की सहायता नहीं करनी चाहिए’: माँ काली का ‘चंपानेर’ तबाह कर सके सुल्तान बेगड़ा, इसलिए रास्ते से लौटा था खिलजी

चांपानेर, गुजरात की प्राचीन राजधानियों में से एक है। यहाँ पावागढ़ नामक एक ऊँची पहाड़ी है जहाँ हिन्दुओं के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माँ काली का प्रसिद्ध मंदिर है। शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी ने यहाँ लगभग 500 वर्षों बाद ध्वजा फहराई थी।

मंदिर के मूल शिखर को 15वीं सदी में सुल्तान महमूद बेगड़ा ने ध्वस्त कर दिया था और कुछ ही समय बाद उस शिखर पर सदनशाह की दरगाह बनवा दी गई। तबसे यहाँ ध्वजा नहीं फहराई गई थी। लेकिन कुछ वर्षों पूर्व पावागढ़ मंदिर का पुनर्विकास कार्य प्रारंभ हुआ और दरगाह को स्थानांतरित कर दिया गया। अब एक बार पुनः शिखर से माँ काली की ध्वजा लहरा रही है। 

चंपानेर का इतिहास

कहा जाता है चावड़ा वंश के सबसे प्रख्यात राजा वनराज चावड़ा ने माँ काली की छत्रछाया में रहने की इच्छा से यहाँ एक नगर की स्थापना की थी। नगर का नाम उन्होंने उनके परममित्र एवं सेनापति चांपाराज के नाम पर से ‘चांपानेर’ रखा।

यह क्षेत्र लम्बे समय तक राजपूत राजाओं के संरक्षण में रहा और 15 वीं शताब्दी में गुजरात के सबसे मज़हबी सुल्तान ‘महमूद बेगड़ा’ ने इसे नष्ट किया।

‘मुहम्मद मंझू’ जिसने गुजरात के सुल्तानों का इतिहास लिखा वह ‘मिरआते सिकन्दरी’ में लिखता है कि ‘सुल्तान बेगड़ा के समान गुजरात में कोई भी बादशाह नहीं हुआ। उसने चांपानेर का किला और उसके आसपास के स्थान विजय किए और कुफ्र (अल्लाह को नहीं मानने वालों) की प्रथाओं का अंत कर वहाँ इस्लाम की प्रथाएँ चालू कराईं।’

बेगड़ा के लिए चूँकि जिहाद सबसे मुबारक काम था इसलिए चांपानेर उसकी आँखों में बहुत पहले से ही खटक रहा था। ‘मिरआते सिकन्दरी’ के पृष्ठ संख्या 110 पर मंझू लिखता है कि ‘रमज़ान में उसने अहमदाबाद से चांपानेर पर चढ़ाई की और आसपास के स्थानों को नष्ट करने के लिए सेना भेजी। सेना आसपास के स्थानों को नष्ट करके लौट आई। लेकिन वर्षा ऋतू के आ जाने से सुल्तान अहमदाबाद लौट आया और वर्षा ऋतू वहीं व्यतीत की।’

अहमदाबाद लौटने के बाद बेगड़ा रात दिन बस चांपानेर को नष्ट नहीं कर पाने के अफ़सोस में ही रह रहा था। कुछ ही वर्षों बाद सुल्तान के विशेष गुलाम ‘मलिक अहमद’ ने चांपानेर में लूट-मार करना प्रारम्भ कर दिया। लेकिन तत्कालीन चांपानेर के ‘राजा रावल’ ने उससे युद्ध किया और उसे बुरी तरह से पराजित कर दिया।

राजा रावल ने इस्लाम नहीं कबूला

मलिक अहमद की हार से बेगड़ा इतना रुष्ट हुआ कि उसने चांपानेर पर चढ़ाई संकल्प ले लिया। उस समय राजा रावल ने अपनी सेना को सशक्त करने के लिए ने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी को चांपानेर आने के लिए आमंत्रित किया।

खिलजी ने राजा रावल की बात मानते हुए तुरंत ही चांपानेर के लिए प्रस्थान किया लेकिन बीच में ही वह दाहोद से वापस लौट गया। लौटने के कारण को लेकर मंझू लिखता है कि ‘खिलजी ने बड़े-बड़े आलिमों और काज़ियों को बुलवा कर राय ली कि उसे चांपानेर के राजा का साथ देना चाहिए या नहीं? तब सभी ने एकमत होकर कहा- “मुसलमान बादशाह(खिलजी) को इस समय काफ़िरों की सहायता नहीं करनी चाहिए।”

इसके बाद राजा रावल और महमूद के सेना के बीच एक भीषण युद्ध हुआ। मंझू लिखता है- ‘काफिर परेशान हो गए और वे परिवार को अग्नि में जला कर युद्ध के लिए कटिबद्ध हो गए।’ (संभवतः स्त्रियों ने बच्चों सहित जौहर कर लिया था।)

युद्ध के बाद रावल को बंदी बना लिया गया और दरबार में उन्हें सुल्तान को अभिवादन करने के लिए कहा गया लेकिन उन्होंने स्वीकार नहीं किया। 5 मास तक उन्हें कैद में रखा गया और एकबार फिर से उन्हें सुल्तान के सामने पेश किया गया। तब सुल्तान ने उनसे इस्लाम कबूलने के लिए कहा लेकिन राजा रावल टस से मस नहीं हुए। अंततः आलिमों और काज़ियों के आदेशानुसार राजा रावल के सिर को कटवा कर सूली पर लटका दिया। राजा रावल के वंश में मात्र दो पुत्रियाँ और एक पुत्र ही बच गए थे। दोनों पुत्रियों को उसने अपने हरम का शिकार बनाया और पुत्र को किसी मुसलमान को पालने के लिए दे दिया।

धर्म की ध्वजा लहरा रही है

मलेच्छों ने जब माँ काली के सनिध्य में चांपानेर को देखा तो वे इस नगर की सुंदरता और वैभव पर इतने मोहित हो गए कि अहमदाबाद को भी भूल गए। सुल्तान ने चांपानेर को अपनी राजधानी बना लिया और वहाँ एक बहुत बड़ा नगर बसा कर उसका नाम ‘मुहमदाबाद’ रखा। मंझू लिखता है- “सुल्तान के अमीर, वज़ीर, व्यापारी तथा बक्काल(सब्जी बेचने वाले) इस बात से सहमत थे कि यह नगर अद्वितीय है और मुहमदाबाद के समान गुजरात में कोई स्वास्थ्यवर्धक स्थान नहीं अपितु संसार में भी कोई ऐसा स्थान न होगा।”

वहाँ के फलों में उन्होंने ऐसे आम देखें जिसके सामने मिश्री की मिठास भी लज्जित हो जाती थी। अनार, अंजिर, अंगूर, बादाम, सेब, नारियल को देखकर वे हक्के-बक्के रह गए। सुगन्धित फूलों की लता, चमेली, चंपा, बेला, मोगरा जैसे फूलों को देखकर वे दरूद(किसी सुन्दर वस्तु को देखकर मुहम्मद और उनकी संतान तथा मित्रों को दी जाने वाली शुभकामना) पढ़ने को आदि हो जाते थे। उस समय चांपानेर में इतने अधिक चन्दन के वृक्ष होते थे कि नगरवालें भवनों के निर्माण में चन्दन ही उपयोग में लेते थे। 

1484 में चांपानेर मुस्लिम सुल्तानों के कब्जे में चला गया। उन्होंने पहले माँ काली के मंदिर के शिखर को ध्वस्त किया और कुछ ही समय बाद शिखर पर सदनशाह की दरगाह बनवा दी ताकि हिन्दू कभी ध्वजा न फहरा सकें। लेकिन कहते हैं अधर्म बहुत लम्बे समय तक जीवित नहीं रहता। आज पावागढ़ के शिखर से माँ काली की ध्वजा, धर्म की विजय पताका के रूप में लहरा रही है।

शादी से भागे BJD विधायक को गर्लफ्रेंड ने सेक्स रैकेट में लपेटा: FIR के बाद लौटे, कहा- माँ बीमार, 60 दिन में करूँगा शादी

ओडिशा में बीजू जनता दल (BJD) के विधायक बिजय शंकर दास (Bijaya Shankar Das) अपनी ही शादी में नहीं पहुँचने के बाद से विवादों में हैं। बीजद विधायक बिजय शंकर दास की गर्लफ्रेंड ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद वह सोमालिका से शादी करने के लिए तैयार हो गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तिरटोल से विधायक दास ने दावा किया है कि वो अगले 60 दिनों में अपनी गर्लफ्रेंड सोमालिका (Somalika) के साथ विवाह करने वाले हैं। महिला के आरोपों के बाद बिजय शंकर ने इस मामले पर कहा कि उन्होंने किसी को धोखा नहीं दिया है। शादी के पंजीकरण के लिए आवेदन किए एक महीना बीत चुका है। अभी भी उनके पास 60 दिन बचे हुए हैं।

दास ने रविवार (19 जून, 2022) को कहा, “मैं सोमालिका से शादी करने के लिए तैयार हूँ। मैंने उससे शादी करने से कभी भी इनकार नहीं किया है। अभी मेरी माँ बीमार है इस कारण और समय माँगा है। मैं अगले 60 दिनों में उससे शादी करूँगा।” उन्होंने कहा, “मुझ पर आरोप है कि मैं एक सेक्स रैकेट चला रहा हूँ, यह गलत और बेबुनियाद है।”

इससे पहले, सोमालिका ने कहा था, “हमने 17 मई को सब-रजिस्ट्रार के कार्यालय में विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। उसने मुझसे वादा किया था कि वह वहाँ शादी करने के लिए जरूर पहुँचेगा, लेकिन उसने अपना वादा नहीं निभाया।” इसके बाद सोमालिका ने विधायक के खिलाफ धोखाधड़ी और उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उसने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया था कि विधायक अवैध गतिविधियों में लिप्त है और उसने सेक्स रैकेट के माध्यम से जमा किए गए धन का इस्तेमाल चुनाव संबंधी खर्चों के लिए किया था। आरोप है कि विधायक के भाई और परिवार के अन्य सदस्य उसे धमकी दे रहे हैं। बिजय ने वकीलों को भी डराया धमकाया है और उसके फोन कॉल का भी जवाब नहीं दे रहा है।

शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में बिजय शंकर दास सहित छह लोगों के नामों का उल्लेख किया था। सोमालिका की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर जगतसिंहपुर पुलिस ने आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

क्या है पूरा मामला

बीजद विधायक बिजय शंकर दास और उनकी गर्लफ्रेंड ने 17 मई को मैरिज रजिस्ट्रार कार्यालय में आवेदन किया था। विधायक की गर्लफ्रेंड तय 30 दिनों के बाद शादी करने के लिए सब रजिस्ट्रार कार्यालय पहुँची थी, लेकिन विधायक इस दौरान नदारद रहे। महिला करीब तीन घंटे तक विधायक का इंतजार करने के बाद वापस लौट आई और पुलिस में उसके खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी। बताया जा रहा है कि इस साल पंचायत चुनाव के दौरान दोनों की इंटीमेट तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। घटना के बाद सोमालिका ने मई के पहले सप्ताह में जगतसिंहपुर के एसपी से मुलाकात की थी और विधायक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि बिजय शंकर ने उसे धोखा दिया है।

‘नूपुर शर्मा को BJP में वापस लो’: नेपाल और बिहार के बाद राजस्थान में सड़क पर उतरे हिन्दू, विशाल रैली के बाद हनुमान चालीसा का पाठ

भाजपा से निलंबित पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में राजस्थान के अजमेर जिले में रैली निकाली गई। यह रैली हिन्दू संगठनों और कुछ सामाजिक समूहों ने साझा रूप से निकाली। रैली के दौरान हाथों में तिरंगा ले कर हजारों नूपुर का मौन समर्थन किया। रविवार (19 जून, 2022) को निकली इस रैली को ‘शांति मार्च’ का नाम दिया गया था। इस रैली का आयोजन और समापन पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रैली की शुरुआत किशनगढ़ के लक्ष्मीनारायण मंदिर से हुई थी। यहाँ सुबह निकला जुलूस मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित रविंद्र रंगमंच तक पहुँचा। जुलूस में वन्देमातरम और जय श्रीराम का उद्घोष हुआ और किसी के प्रति कोई व्यक्तिगत नारेबाजी नहीं हुई। रैली का आयोजन सकल समाज की तरफ से बताया जा रहा है। इस दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। ड्रोन के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही थी।

रैली के समापन में हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। इसी रैली के एक आयोजक के मुताबिक, “ये कोई राजनैतिक नहीं बल्कि सर्व समाज की रैली थी। नूपुर शर्मा को देश-विदेश से धमकी भरे कॉल आ रहे हैं। हमारी सबसे बड़ी माँग है कि नूपुर शर्मा की सुरक्षा बढ़ाई जाए। दूसरी माँग है कि देश में शांति बनी रहे। जब मुकदमा दर्ज कर के कार्रवाई की जा रही है तो धमकी दे कर देश का माहौल क्यों खराब किया जा रहा है ? इसे किसी भी हाल में सहन नहीं किया जाएगा। इस रैली शामिल हर किसी के मन में देश में हो रहे हंगामे को देख कर आक्रोश था। हमारी तीसरी माँग है कि नूपुर शर्मा को पार्टी में वापस लिया जाए क्योंकि उन्होंने कोई भी गलत बात नहीं की है।”

गौरतलब है कि नूपुर शर्मा के खिलाफ देश भर में हो रहे चरमपंथी और हिंसक प्रदर्शनों के बीच नेपाल के बीरगंज शहर में इसी माह नूपुर के समर्थन में रैली निकाली गई थी। इस रैली के बाद 14 जून को को बिहार के आरा और वैशाली जिले के हाजीपुर जिलों में नूपुर शर्मा के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए गए। इन प्रदर्शनों में ‘नुपुर शर्मा संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं’ का नारा लगाया। साथ ही ‘पाकिस्तान परस्त मुर्दाबाद’, ‘लव जेहाद मुर्दाबाद’, ‘इस्लामिक जेहाद मुर्दाबाद’ के नारे लगे थे।

थूक से जान लेने वाला महमूद बेगड़ा, जिसके साथ सेक्स करता वो मर जाती थी: जिस मंदिर को तोड़ा, उस पर 500 साल बाद PM मोदी ने फहराई धर्म ध्वजा

गुजरात के पावागढ़ में जिस प्राचीन मंदिर के शिखर को तोड़कर एक सुल्तान ने दरगाह का निर्माण करवाया था, वहाँ दोबारा काली माता का मंदिर बनकर तैयार हो गया है। 500 साल बाद शनिवार (18 जून 2022) को प्रधानमंत्री मोदी ने यहाँ ध्वज को फहराया तो ये मंदिर दोबारा चर्चा में आया।

जानकारी के मुताबिक, इस मंदिर पर महमूद बेगड़ा नाम के सुल्तान ने 15 वीं सदी में हमला किया था। महमूद गुजरात का छठा सुल्तान था और उसका पूरा नाम अबुल फत-नासिर-उद-दीन महमूद शाह प्रथम था। मात्र 13 साल की उम्र में सुल्तान की गद्दी पर बैठने के बाद उसने गुजरात में 52 साल राज किया।

1459-1511 ई के बीच कई लोगों ने इस सुल्तान का खूँखार रूप कई बार देखा। वह इलाकों को कब्जाने के लिए जंग लड़ता और जब जीत हासिल होती तो वहाँ के राजाओं से इस्लाम कबूल करने को कहता। जैसे ही कोई राजा इस्लाम मानने से मना करता वह उन्हें मौत के घाट उतार देता।

उसने जूनागढ़ और पावागढ़ में भी अपना कब्जा बहुत जल्दी कर लिया था। इसके बाद उसने महाकाली के मंदिर और द्वारका मंदिर को तुड़वाया। हिंदू मंदिरों पर हमले से उसका उद्देश्य साफ था कि हिंदुओं की अपने भगवान के प्रति आस्था कम हो जाए और वह इस्लाम कबूलें।

राक्षसों की तरह खाता था महमूद बेगड़ा

हिंदुओं पर तमाम अत्याचार करने वाला बेगड़ा अपनी राक्षसी भूख के चलते भी कुख्यात रहा। दावा किया जाता है कि बेगड़ा अपने नाश्ते में प्याला भप के शहद, मक्खन और 100-150 केले खा जाता था। उसे रात में सोते समय भी भूख लगती थी इसलिए वह रात में सोने से पहले अपने खाने का इंतजाम करता था और तकिए के पास माँस से भरे समोसे रखवाता था।

जहरीला सुल्तान

महमूद बेगड़ा को लोगों ने जहरीला सुल्तान नाम दिया हुआ है। इसके पीछे भी एक कहानी है जिसका जिक्र ‘द बुक ऑफ ड्यूरेटे बबोसा वॉल्यूम 1’ में मिलता है। किताब में बताया गया कि बेगड़ा का अब्बा नहीं चाहता था कि उसकी औलाद को कोई जहर देकर मारे। इसलिए उसने बेगड़ा को बचपन से जहर का सेवन करवा-करवा कर इतना आदि बना दिया कि उसके शरीर पर जहर ने काम करना बंद कर दिया।

बचपन से जहर खाने की आदत ने बेगड़ा को इतना जहरीला बनाया कि मक्खी तक उसके शरीर को छूकर मर जाती थी। वहीं यदि कोई औरत उसके साथ संबंध बना ले तो वह औरत भी ज्यादा दिन बच नहीं पाती थी। सुल्तान के थूक तक में इतना जहर था कि यदि वो किसी को मारना चाहता था तो पहले पान चबाता था फिर मुँह में थूक बना कर उसकी पिचकारी सामने वाले पर मार देता था। इस तरह जिस पर सुल्तान का थूक गिरता वह आधे घंटे में मर जाता था।

उसकी दाढ़ी और मूछें इतनी बड़ी थीं कि इन्हें लेकर भी तरह तरह की कहानियाँ सुनने में आती है। बताया जाता है कि महमूद ने दाढ़ी इतनी बढ़ा रखी थी कि अगर वो चाहता तो उनके सिर पर साफा भी बाँध लेता था। उसके दरबार में उन लोगों को खास एहमियत दी जाती थी जिनकी दाढ़ी मूँछ लंबी-लंबी हों। कई मंत्री उसके लंबी दाढ़ी वाले थे।

प्राचीन मंदिर को लेकर मान्यता

बता दें कि 15वीं शताब्दी के खूँखार इस्लामी सुल्तान ने पावागढ़ में जिस महाकाली मंदिर को अपना निशाना बनाया था उसे लेकर मान्यता है कि यहाँ पर ऋषि विश्वामित्र ने माता काली की कठोर तपस्या की थी। इसके अलावा श्रीराम भगवान और माता सीता के पुत्रों ने भी पावागढ़ में ही मोक्ष प्राप्त किया था। आज इस स्थान पर बने काली मंदिर का परिसर 30 हजार वर्ग फीट में फैला है। इसके पुननिर्माणग में 120 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।