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‘सीएम पिनराई विजयन को UAE दौरे पर नोटों से भरा बैग भेजा, मंत्री केटी जलील भी इसमें शामिल’: केरल सोना तस्करी मामले में स्वप्ना सुरेश ने खोले कई और राज

केरल सेना तस्करी (Kerala Gold Smuggling Case) के मामले में स्वप्ना सुरेश (Swapna Suresh) ने केरल हाई कोर्ट में राज्य के सीएम पिनराई विजयन (Pinarayi Vijayan) के खिलाफ एफिडेविट फाइल किया है। उन्होंने विजयन के परिवार और पूर्व मंत्री केटी जलील (KT Jalil) के कथित संबंधों को उजागर किया है। स्वप्ना सुरेश का आरोप है कि दिसंबर 2016 में सीएम पी विजयन के UAE के दौरे के दौरान उन्हें करेंसी से भरा एक बैग भेजा गया था। बाद में सीएम के सचिव शिवशंकर ने दावा किया था कि कुछ इमरजेंसी के कारण ये पीछे छूट गया था।

स्वप्ना सुरेश ने आरोप लगाया, “सीएम के सचिव शिवशंकर ने मुझसे संपर्क कर कहा कि मुख्यमंत्री यूएई के दौरे पर हैं और उनका बहुत ही महत्वपूर्ण पार्सल छूट गया है। उन्होंने (सीएम) हमसे किसी तरह से इसे भेजने को कहा है। उन्होंने (शिवशंकर) मुझसे कहा कि इस पार्सल को संयुक्त अरब अमीरात में किसी अमीराती को दे देना। वहाँ हमारा आदमी इसे ले लेगा। असल में वाणिज्य दूतावास ने अबुधाबी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री को सभी अतिरिक्त राजनयिक सुविधा की व्यवस्था की थी।” स्वप्ना सुरेश ने आरोप लगाया कि उस दिन डिप्लोमैट अहमद अल डौखी जो कि अभी शारजाह में हैं, उन्हें उसी रात एयर शारजाह के लिए उड़ान भरने के लिए कहा गया था।

गोल्ड स्मगलिंग केस की मुख्य आरोपित ने दावा किया कि वाणिज्य दूतावास के पीआरओ सरित पीएस को शिवशंकर ने उनसे पार्सल लेने के लिए कहा था। जब दूतावास ले जाकर सरित ने उसे स्कैन किया तो उसमें करेंसी दिखी। उन्होंने मुझे इसके बारे में तुरंत बताया, लेकिन ऑर्गनाइजेशन में नई होने के कारण मैं कुछ नहीं कर सकती थी।

केटी जलील पर भी तस्करी में शामिल होने का आरोप

स्वप्ना सुरेश ने पूर्व मंत्री केटी जलील की सीएम पी विजयन के परिवार के साथ कथित संलिप्तता को भी एफिडेविट में उजागर किया है। महावाणिज्य दूतावास के साथ जलील के मधुर संबंध थे। सुरेश के मुताबिक, विदेश मंत्रालय की जानकारी के बिना ही उनके बीच कई बैठकें हुई थीं। यहीं नहीं क्लिफ हाउस में महावाणिज्य दूत को शिवशंकर ने बुलाया था। बैठक में सीएम की पत्नी के साथ उनकी बेटी भी थी। दावा है कि ये बैठक शारजाह के राजा और रानी के कहने पर की गई थी।

मंगलवार (14 जून) को स्वप्ना सुरेश ने कहा था मेरे खिलाफ चाहे जितने भी मामले आ जाएँ, मैं अपना 164 बयान वापस नहीं लूँगी। सीएम ने ही शाज किरण को मेरे ऑफिस में भेजा था और वो उनका खास है। अब उन्होंने मेरे खिलाफ एक और मामला दर्ज किया है। वो आगे कहती हैं कि सीएम ने कहा कि वो मुझे नहीं जानते। सीएम और मैंने, उनकी पत्नी, उनकी बेटी और बेटे ने क्लिफ हाउस में बैठकर कई मामलों पर चर्चा की थी। अगर वो सब भूल गए हैं तो मैं उन्हें और उनके परिवार को आपके (मीडिया) के जरिए याद दिलाऊँगी।

क्या है गोल्ड स्मगलिंग केस

केरल में सोना तस्करी का मामला जुलाई 2020 में सामने आया था। डिप्लोमेटिक बैगेज की आड़ में सोने की तस्करी का मामला स्वप्ना सुरेश से शुरू हुआ और फिर इसके तार मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के दफ्तर तक पहुँच गए। स्वप्ना सुरेश पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी डाक्यूमेंट्स पेश कर 2 जुलाई 2020 को ‘डिप्लोमेटिक इम्युनिटी’ का प्रयोग कर खाड़ी देशों से 30 किलो सोने की तस्करी की। इसका खुलासा 6 जुलाई को तब हुआ, जब कस्टम के अधिकारियों ने यूएई कॉन्सुलेट के एक अधिकारी से पूछताछ की, जो PRO के पद पर तैनात था।

जाने कौन हैं ये पाकिस्तानी सिंगर? जिसने सोनम कपूर के बेबी शावर में दाढ़ी-मूँछ के साथ वन पीस ड्रेस में किया परफॉर्म: वीडियो वायरल

बॉलीवुड अभिनेत्री सोनम कपूर (Sonam Kapoor) और उनके पति आनंद आहूजा इन दिनों अपने पहले बच्चे के आने की तैयारी कर रहे हैं। हाल ही में सोनम कपूर का लंदन में धमाकेदार बेबी शावर किया गया। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज में बेबी शावर की तस्वीरें और वीडियो भी शेयर की हैं। इस फंक्शन में उन्होंने अपनी बहन रिया, उनके पति के अलावा कई लोगों को बुलाया था, लेकिन शेयर की गई तस्वीरों में सबसे ज्यादा सभी का ध्यान अगर किसी शख्स पर गया, तो वह सोनम के मुस्लिम ब्रिटिश पाकिस्तानी म्यूजिशियन लियो कल्याण हैं। इस खास मौके पर लियो कल्याण को अनिल कपूर की फिल्म ‘1942: अ लव स्टोरी’ के गाने ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ और सोनम की फिल्म ‘दिल्ली 6’ के गाने ‘मसकली’ पर परफॉर्म करते हुए देखा गया।

साभार: सोनम कपूर की इंस्टाग्राम स्टोरी

देखते ही देखते ये तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं। इसमें लियो कल्याण वन पीस स्कर्ट, दाढ़ी और मूँछ में गाना गाते हुए दिख रहे हैं। वहीं फंक्शन में मौजूद लोग उनकी परफॉर्मेंस को देखकर काफी खुश नजर आ रहे हैं।

कौन हैं लियो कल्याण

असल में लियो कल्याण (Leo Kalyan) एक ब्रिटिश-पाकिस्तानी सिंगर, सॉन्ग राइटर, मॉडल, म्यूजिक कंपोजर हैं। इसके अलावा वह गे आर्टिस्ट भी हैं। सोशल मीडिया पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं। खबरें हैं कि लियो ने 13 साल की उम्र से गाना शुरू कर दिया था, लेकिन उनका परिवार इस प्रोफेशन के सपोर्ट में नहीं था। उन्हें साल 2019 में लंदन फैशन वीक में फैशन डिजाइनर रहमुर रहमान के लिए मॉडलिंग करते हुए भी देखा गया था।

लियो कल्याण को उनके मेलेडी सॉन्ग (Leo Kalyan Songs) के लिए जाना जाता है। उन्होंने गेट यॉर लव, डे ड्रीम, फिंगरटिप्स से लेकर करीब 25 गानों पर काम किया है। वह सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा बॉलीवुड के गाने गाते हैं। इनके इंस्टाग्राम पर कई ऐसे वीडियो मौजूद हैं, जिनमें वह हिंदी गाने गा रहे हैं।

एक इंटरव्यू में लियो कल्याण (Leo Kalyan Faimly) ने बताया था, “मैं 13 साल की उम्र से गाना गा रहा हूँ। मैं बचपन से ही सिंगर बनना चाहता था। मैंने शुरुआत में अपने परिवार से इस प्रोफेशन को छुपा कर रखा। एक बार उन्होंने मुझे मेरे कमरे में उमराव जान का गाना गाते हुए पकड़ लिया। मेरे परिवार ने मुझे सपोर्ट नहीं किया। आज भी मेरे पिता कहते हैं कि तुम म्यूजिक लॉयर और म्यूजिक जर्नलिस्ट क्यों नहीं बन जाते हो?”

बता दें कि लियो शायद बीस साल के हैं। उनकी सही उम्र की सटिक जानकारी नहीं है, क्योंकि उन्होंने इसके बारे में कहीं पर भी सार्वजनिक रूप से अपनी डिटेल साझा नहीं ​की हुई है। बताया जाता है कि कल्याण 10 से 17 साल तक साउथ लंदन में बड़े हुए हैं। उन्होंने कहा है कि वह पाकिस्तान की तुलना में लंदन में काफी अच्छा और सुरक्षित महसूस करते हैं।

वासिफ हसनैन ने फेसबुक पर शेयर किया माँ दुर्गा का अपमान करने वाला वीडियो, पटना HC ने अग्रिम जमानत देने से किया इनकार

पटना हाई कोर्ट ने मल्लिक वासिफ मोहम्मद हसनैन बासु को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। हसनैन पर आरोप है कि उसने अपने फेसबुक अकाउंट पर देवी दुर्गा का अपमान करने वाला एक वीडियो साझा किया है। लॉ बीट की रिपोर्ट के अनुसार, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की पीठ ने वासिफ हसनैन को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, हसनैन ने आईपीसी की धारा 153 (ए), 295 (ए), 505 (2) और आईटी अधिनियम की धारा 66 के तहत उनके खिलाफ दायर एक मामले में अग्रिम जमानत की माँग करते हुए पटना उच्च न्यायालय का रुख किया था।

हसनैन की ओर से पेश हुए वकील ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल को इस मामले में झूठे आरोप लगाकर फँसाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि हसनैन अपने फेसबुक अकाउंट पर अपलोड किए गए देवी दुर्गा के अपमानजनक वीडियो के बारे में नहीं जानते हैं। वकील ने यह भी दलील दी कि हसनैन का फेसबुक अकाउंट हैक कर लिया गया था और उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने आगे दावा किया कि हसनैन का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उनके खिलाफ गवाह से छेड़छाड़ का भी कोई आरोप नहीं लगाया गया है।

इस बीच, राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत में कहा कि हसनैन द्वारा अपलोड किए गए वीडियो में देवी दुर्गा के संबंध में अपशब्दों का प्रयोग किया गया है। उन पर अपमानजनक टिप्पणी की गई है। उन्होंने तर्क दिया कि हसनैन का कृत्य और कुछ नहीं बल्कि समाज में सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने वाला था।

इस मामले पर विचार करने के बाद कोर्ट ने फैसला किया कि हसनैन का कृत्य अग्रिम जमानत के लिए उपयुक्त नहीं है। फिर भी यह कहा गया कि यदि हसनैन अदालत में आत्मसमर्पण करता है और सामान्य जमानत का अनुरोध करता है, तो एक बार फिर से इस मामले में विचार किया जा सकता है।

7 राज्यों में प्रदर्शन, बिहार में 5 ट्रेनों में लगाई आग, हरियाणा में खुद की जान ली: अग्निपथ पर आपके सारे सवालों का जवाब यहाँ है

युवाओं में राष्ट्रवाद, अनुशासन और संयम सिखाने के लिए इस्रायल (Israel) की तर्ज पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) द्वारा शुरू की गई महात्वकांक्षी परियोजना ‘अग्निपथ’ का की जगहों पर विरोध हो रहा है। इस विरोध प्रदर्शन में अपना हित साधने वाले राजनीतिक दलों का भी बड़ा हाथ है।

सेना में युवाओं की भर्ती को लेकर केंद्र की अग्निपथ योजना का विरोध बिहार से शुरू होकर 7 राज्यों में फैल चुकी है। इनमें यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों में छात्रों ने जबरदस्त विरोध किया है।

बिहार में प्रदर्शनकारियों ने 5 ट्रेनों को आग के हवाले कर दिया है। वहीं, संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचाया गया है। हरियाणा के पलवल में प्रदर्शनकारियों ने DC पर पथराव किया और पुलिस की 5 गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। नेशनल हाइवे को कब्जे से मुक्त कराने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोल छोड़ने पड़े और हवाई फायरिंग करनी पड़ी।

वहीं, हरियाणा के रोहतक में एक पीजी हॉस्टल में रहने वाले एक युवक ने इस योजना के विरोध में आत्महत्या कर ली। सचिन नाम का यह युवक जींद जिले के लिजवाना गाँव का रहने वाला था। बताया जा रहा है कि वह सेना भर्ती की नई पॉलिसी से परेशान था। वहीं, राज्यों में भी युवा तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

यह विरोध तक शुरू हुआ है, जब कुछ राजनीतिक दलों ने इस इस योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि सेना में पेंशन को खत्म करने के लिए ही सरकार यह पॉलिसी लेकर आई है। इतना ही नहीं नेताओं ने इस योजना के तहत युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का भी आरोप लगाया।

क्या है अग्निपथ की अग्निवीर योजना

अग्निपथ योजना भारतीय सेना के लिए एक देशव्यापी शॉर्ट-टर्म यूथ रिक्रूटमेंट स्कीम है। इस स्कीम के तहत भर्ती होने वाले युवाओं को अग्निवीर कहा जाएगा। इन्हें सेना के मानकों के तहत भर्ती किया जाएगा और उन्हें 4 वर्षों तक सेना में सेवा देनी होगी। इसके बाद इनमें से 25 प्रतिशत युवाओं को सेना में नियमित कर लिया जाएगा, जबकि बाकी के 75 प्रतिशत वापस लौट जाएँगे।

इस दौरान सरकार ने युवाओं को प्रशिक्षण और उन्हें तय मानदेय देने का भी निर्णय लिया है। इसके साथ ही चार वर्ष की अवधि पूरा होने के उपरांत उन्हें एकमुश्त देय राशि का भी प्रावधान किया गया है।

इन सबके बावजूद युवाओं के मन में कई तरह के सवाल हैं। ऐसे ही कुच महत्वपूर्ण सवालों और सरकार द्वारा दिए गए उनके जवाबों को हम रख रहे हैं।

  1. चार साल सेना में बिताकर लौटे युवाओं का भविष्य क्या होगा? उनकी शिक्षा पर क्या असर होगा?

अग्निपथ योजना के तहत सेना में शामिल होने वाले अग्निवीरों में से 25 प्रतिशत को नियमित किया जाएगा। बाकी 75 प्रतिशत युवकों को सरकार CRPF और असम राइफल्स में प्राथमिकता के आधार पर बहाल करेगी। इसके अलावा, यूपी और उत्तराखंड जैसी सरकारों ने भी इन्हें राज्य पुलिस में प्राथमिकता देने की बात कही है। वहीं, कई मंत्रालय, सरकारी कंपनियाँ ने भी अग्निवीरों को नौकरी देने में सहमति जताई है।

इसके अलावा, इन चार सालों बाद उनके युवाओं के पास 11.7 लाख रुपए की एकमुश्त राशि रहेगी। इससे वे इसका उपयोग पेशेवर पढ़ाई या किसी तरह के व्यवसाय के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

इस चार वर्षों के दौरान अग्निवीरों की शिक्षा के लिए केंद्र सरकार ने विशेष डिग्री की अनुमति दी है। इस डिग्री कोर्स का संचालन इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) द्वारा किया जाएगा। अग्निवीरों को पहले साल ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट, दूसरे साल ग्रेजुएशन डिप्लोमा और तीसरे साल ग्रेजुएशन डिग्री मिल जाएगी।

इसका 50 प्रतिशत हिस्सा कौशल विकास, जो अग्निवीरों के अनुभव से जुड़ा होगा और बाकी का 50 प्रतिशत हिस्सा विषय से जुड़ा होगा। यह कोर्स UGC-AICTE सहित सभी नियामकों तथा देश-दुनिया में भी मान्य होगा।

2. क्या अग्निवीरों को हर ट्रेड के लिए अलग-अलग उम्र सीमा होगी और भर्ती की प्रक्रिया क्या होगी?

आर्मी के अनुसार, सेना में सारी भर्तियाँ अब अग्निपथ योजना के तहत ही होंगी और इन भर्तियों की आयु सीमा 17.5 साल से 21 साल तक की सीमा के बीच होंगी। इसके लिए 90 दिन में भर्ती रैली होगी और योग्यता पूरा करने वाले उम्मीदवार इसमें भाग ले सकते हैं।

अग्निपथ योजना के अंतर्गत सेना के तीनों अंगों- थल सेना, वायुसेना और नौसेना में भर्ती प्रक्रिया होगी। पहले के सारे नोटिफिकेशन अब मान्य नहीं होंगे। अगर तीनों सेनाओं के किसी भी भर्ती में कोई अभ्यर्थी फिजिकल या मेडिकल टेस्ट पास कर चुका है तो भी वह मान्य नहीं होगा।

3. एक वक्त ऐसा भी आएगा, जब सेना में अग्निवीर अधिक और स्थायी सैनिक कम हो जाएँगे?

इंडियन आर्मी के वाइस चीफ ने कहा कि सेना में अधिकतम 50 प्रतिशत ही अग्नवीर होंगे। यानी अग्निवीर और स्थायी सैनिकों का अनुपात 50:50 का होगा, इससे ज्यादा का नहीं। सेना का कहना है कि आगे अगर कोई दिक्कत आती है तो वह आवश्यक बदलाव के लिए तैयार है।

4. पिछले 2 साल से सेना में कोई भर्ती नहीं हुई है, तो क्या सेना में जाने के इच्छुक लोगों को उम्र में छूट का प्रावधान है?

अग्निपथ योजना के शुरू करने के बाद इसमें उम्र को लेकर किसी भी तरह की छूट का प्रावधान नहीं किया गया है। सरकार का मानना है कि कोविड को लेकर पिछले सालों के दौरान भर्तियाँ नहीं हुई हैं, इसके बावजूद उम्र में छूट नहीं दी गई है।

5. अग्निवीरों को सेना की तरह पेंशन और एक्स सर्विसमैन को मिलने वाली दूसरी सुविधाएँ मिलेंगी?

अग्निपथ योजना में इसका प्रावधान नहीं किया गया है। चार साल की सेवा के बाद ना तो पेंशन मिलेगी और ना ही पूर्व सैनिक वाली दूसरी सुविधाएँ। इस सेवा काल के दौरान अग्निवीरों को 30 हजार रुपए से लेकर 40 हजार रुपए तक की सैलरी मिलेगी। सेवा निधि स्कीम के तहत जो पैसे जमा होंगे वह उन्हें मिलेंगे।

6. अस्थायी नौकरी को लेकर सेना के प्रति युवा कितने उत्सुक होंगे?

इस विषय पर एयरफोर्स चीफ का कहना है कि युवाओं को एक साथ तीन मौके दिए जा रहे हैं। उन्हें अच्छा वेतन दिया जाएगा, चार साल में ठीक-ठाक बैक बैलेंस दिया जाएगा और स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी। सेना में ट्रेनिंग के क्रेडिट पॉइंट भी मिलेंगे। यह चार साल बाद हायर एजुकेशन लेने में सहायता करेगा।

इसके अलावा, राज्य सरकार की पुलिस और मंत्रालयों एवं PSUs में में वरीयता मिलने के कारण यह नौकरी अस्थायी जैसी नहीं रहेगी। यह एक तरह से सेना का प्रशिक्षण जैसा हो जाएगा। जो 25 प्रतिशत शानदार काम करेंगे, उन्हें नियमित किया जाएगा।

7. अग्निपथ के तहत भर्ती कब शुरू होगी और कितने लोगों की होगी?

सेना की भर्तीय रैली 90 दिन में होगी। करीब 180 दिन बाद पहले चरण के अग्निवीर सेंटर में पहुँच जाएँगे। एक साल में अग्निवीर भारतीय सेना की बटालियन का हिस्सा हो जाएँगे। पहले साल आर्मी में 40 हजार, नेवी में 3 हजार और एयरफोर्स में करीब 3,500 अग्निवीरों की भर्ती होगी।

8. अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीर ‘ऑल इंडिया ऑल क्लास’ बेस पर आएँगे। ऐसे में पुराना रेजीमेंटेशन सिस्टम खत्म होगा?

नहीं ऐसा नहीं होगा। इंडियन आर्मी के वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू के अनुसार, रेजीमेंटेशन का मतलब सिर्फ एक समुदाय से आने वाले लोग नहीं है। इसका मतलब है कि साथ रहना, खाना, बैठना, ट्रेनिंग करना और साथ लड़ना।

अग्निवीर साढ़े तीन साल साथ रहेंगे और 25 प्रतिशत जो नियमित होंगे वह बटालियन में ही रहेंगे। राजू के अनुसार, सेना में अभी भी 75 प्रतिशत यूनिट में ऑल इंडिया ऑल क्लास ही हैं। फाइटिंग फॉर्मेंशन में कुछ फिक्स्ड क्लास हैं। जैसे राष्ट्रीय राइफल में अलग-अलग रेजिमेंट से आकर लोग लड़ते हैं।

9. अग्निवीरों के स्थायी होने का कितना चांस है?

अग्निवीरों में से सिर्फ 25 प्रतिशत ही स्थायी होंगे। बाकी के 75 प्रतिशत लोग वापस सिविल के तौर पर लौट जाएँगे। हालाँकि, कई भर्तियों में उन्हें वरीयता दी जाएगी।

10. अग्निपथ योजना का उद्देश्य क्या है?

सैन्य बजट का एक बड़ा हिस्सा सेवानिवृत सैनिकों के पेंशन में खर्च हो जाता है। सेना को आधुनिक बनाने के लिए पेंशन खर्च को कम करने पर कई बार चर्चा हुई है। हालाँकि, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, अग्निपथ योजना का उद्देश्य बचत करना नहीं है। इसके पीछे युवाओं में अनुशासन, देशभक्ति और आंतरिक गुणों का विकास भी बताया जा रहा है।

शंका, हंगामा, हिंसा… सोचा है जब सेना से लौटेंगे ‘अग्निवीर’ तो कितना सबल होगा समाज: घर के भीतर साजिशों का भी जवाब होगा ‘अग्निपथ’

केंद्र सरकार ने युवाओं के लिए अग्निपथ/अग्निवीर योजना (Agnipath/Agniveer scheme) की घोषणा की है। जितना इस योजना का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है, उससे अधिक इसकी आलोचना आरम्भ हो गई है। विपक्ष को तो मजबूरन विरोध करना ही होता है, इस बार सेना के कुछ भूतपूर्व अफसर भी इसकी आलोचना कर रहे हैं। कुछ लोगों को ठीक भी लग रही है।

यह योजना युवाओं के लिए है जिसके अनुसार उन्हें चार वर्ष तक सेना में सेवा का अवसर प्राप्त होगा। आर्थिक दृष्टि से देखा जाए युवाओं के लिए पैकेज अच्छा है और अवसर की दृष्टि से देखा जाए तो इससे अच्छा अवसर हो नहीं सकता। बहुत समय से एक वर्ग का विचार था कि सभी नागरिकों के लिए दो या तीन वर्ष के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य कर दी जाए। किन्तु हमारे यहाँ जनसंख्या इतनी है कि सभी के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य होना असंभव है। फिर सरकार का यह सोचना कि एक वर्ष में पचास हजार बच्चे लेकर उन्हें ट्रेनिंग देकर चार वर्ष तक अवसर मिले, उनमें से पच्चीस प्रतिशत को सेना में ले लिया जाए बाकी को बाहर जाना होगा। इसको लेकर लोगों ने तरह तरह की शंकाएँ व्यक्त की हैं।

पहली यह कि यह एक अनुबंध की तरह है और सेना अनुबंध के आधार पर नहीं चलती। इससे सेना कमजोर होगी। इस पर तर्क यह दिया जा सकता है कि सामान्य नियुक्तियाँ तो चलती ही रहेंगी, यह एक अलग दिशा है। अनुबंध चार वर्ष का है। उसके बाद जो सेना में जाएँगे वे तो नियमित ही रहेंगे।

दूसरा लोगों का मत है कि इस तरह से आए हुए लोग सेना के प्रति समर्पण नहीं रखेंगे। वे शत-प्रतिशत नहीं देंगे। प्राण दांव पर नहीं लगाएँगे। जहाँ तक सेना का सवाल है, यह एक कठोर सत्य है कि सेना में जाने के विषय में हर कोई नहीं सोचता और जो सोचता है उसके समर्पण पर शंका नहीं की जानी चाहिए। इन पचास हजार अग्निवीरों के लिए भी प्रतियोगिता निश्चित है। अयोग्य तो वैसे भी नहीं आएँगे, और जो आएँगे उनके समर्पण और निष्ठा पर प्रश्न उठाना कहाँ तक सही है?

एक वर्ग वह है जो सेना में जाना ही चाहता है। वही उसके जीवन का लक्ष्य है। अगर ऐसे सभी युवा अग्निवीर बनते हैं, तो उनमें से अधिकतर को बाहर निकलने का भय रहेगा। युवाओं के विरोध का एक कारण बस यही हो सकता है। उनको ये भी तो सोचना चाहिए, अग्निवीर योजना से उनके सेना में नियमित होने की सम्भावना अधिक होगी और न भी हुए तो चार साल का अनुभव उन्हें वैसे भी बहुत काम आएगा और फिर भी शंका है तो उन्हें सामान्य भर्तियों की प्रतीक्षा करनी चाहिए। सामान्य भर्तियाँ बंद करने की कोई घोषणा नहीं हुई है, बल्कि एक नई, वैकल्पिक व्यवस्था की नींव डाली गई है। पच्चीस प्रतिशत तो सेना में ले लिए जाएँगे। संभवतः चुने गए लोगों के लिए अतिरिक्त ट्रेनिंग दी जाने की योजना हो और सेना के स्तर के हिसाब से दी भी जानी चाहिए, क्योंकि प्रारम्भिक छह महीने की ट्रेनिंग में कोई परिपक्व सैनिक नहीं बन जाता। अगर यह स्पष्टीकरण आता है तो भूतपूर्व सैनिकों की अग्निवीर सैनिकों के समर्पण को लेकर व्यक्त की जाने वाली शंका का समाधान हो जाएगा।

लोगों की शंका है कि चार वर्ष बाद ये बचे हुए लोग क्या करेंगे? क्या वो सभी हाई स्कूल पास रह जाएँगे? आगे जीवन-यापन कैसे करेंगे? अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि सरकार की इन चार वर्षों में इन सभी लोगों को उच्च शिक्षा दिलवाने का कोई विचार है या नहीं। अगर प्रशिक्षण के साथ इनको पढ़ने का भी अवसर मिले तो बेहतर होगा। सेना के अनुशासन में रहते हुए शिक्षा प्राप्त करने वाले युवा कितने बेहतरीन नागरिक होंगे, यह कल्पना पता नहीं किसी ने की है या नहीं। यहाँ सरकार को शायद बेहतर प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता थी।

शिक्षा का यह पक्ष सरकार स्पष्ट कर दे तो बहुत सी शंकाओं का समाधान हो जाएगा, क्योकि उसके बाद ये युवा जिन भी क्षेत्रों में जाएँगे, वहाँ बेहतर ही साबित होंगे। वे एक ऐसे वर्ग का निर्माण करेंगे जो राष्ट्रभक्त, अनुशासित, मानसिक और शारीरिक रूप से दृढ़ होगा। साथ ही कुछ वर्षों में आपातकालीन स्थितियों के लिए उपलब्ध निष्क्रिय सैन्य बल देश के पास होगा, जिसे आवश्यकता पड़ने पर सक्रिय किया जा सकेगा। UGC ने पहले ही इस योजना का समर्थन किया है। इसमें IGNOU महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

एक संभावना यह भी है कि कुछ क्षेत्रों जैसे पुलिस, प्रशासन, शिक्षा, अग्निशमन, आपदा प्रबंधन में उन्हें वरीयता मिले। असम और उत्तर प्रदेश ने ऐसे संकेत दिए हैं। राज्य सरकारों को पुलिस जैसी संस्थाओं के लिए अगर पहले से ही प्रशिक्षित लोग मिल जाएँ तो इससे अच्छा क्या होगा? किन्तु ऐसा रोडमैप केंद्र सरकार को ही बनाना होगा।

एक शंका कुछ वोक-वामपंथी गिरोह ने भी व्यक्ति की है कि सरकार प्रशिक्षित राष्ट्रवादियों का दल बनाने का प्रयास कर रही है। जो सत्य ही है, देश को राष्ट्रवादियों की आवश्यकता भी है। उनकी दूसरी शंका यह है कि प्रशिक्षित युवाओं को चरमपंथी बहका सकते हैं और ऐसे युवा कट्टरपंथी बन सकते हैं। सेना के प्रशिक्षण के पश्चात अगर कोई कट्टरता किसी व्यक्ति में आ सकती है तो वह राष्ट्र के प्रति ही आ सकती है। अगर ऐसा कोई व्यक्ति राष्ट्र या समाज विरोधी कट्टरपंथ से फिर भी प्रभावित होता है तो वह सेना के योग्य कभी था ही नहीं।

शंका तो यह भी है कि समय के साथ अगर इस योजना में आरक्षण लाया गया तो भविष्य में सेना में निश्चित रूप से फूट पड़ जाएगी। अतः चयन योग्यता के आधार पर ही किया जाए, और जैसे सेना में कोई आरक्षण नहीं है वैसे ही इस योजना को इससे दूर रखा जाए। सेना को जाति-धर्म की राजनीति से दूर रखना ही उचित है।

इस योजना का जो सामजिक पक्ष है, वह यही है कि वर्तमान युवा वोक संस्कृति का शिकार हो रहा है। राष्ट्रप्रेम पर तरह-तरह की पट्टियाँ बाँधी जा चुकी हैं। कानून की सीमाओं में रहना अलग बात है, किन्तु समाज में होती घटनाओं को देखकर आँख पर पट्टी बाँध लेना अलग बात है। जिस प्रकार की परिस्थितयाँ हमारे सामने हैं, उसमें अधिकतर लोग केवल सरकार से कानून का पालन करवाने की अपेक्षा करते हैं, स्वयं कुछ नहीं करते। जब ढाई मोर्चे के युद्ध की बात होती है तब ऐसे दृढ़ निश्चयी राष्ट्रभक्तों की बहुत आवश्यकता है, जो समाज के अंदर से आधा मोर्चा संभाल सकें, ताकि सेना बाकी दो मोर्चे ठीक से संभाल सके। केवल सीमाओं पर खड़ी सेना के बल पर न तो युद्ध लड़े जाने हैं, न जीते जाने हैं। समाज के बीच में ऐसे लोगों का रहना बहुत आवश्यक है जो स्वयं प्रतिबद्ध, अनुशासित नागरिक बनकर उदाहरण बन सकें।

सीधे शब्दों में कहें तो भारत के अंदर और बाहर पर्याप्त शत्रु हैं जो भारत को कभी भी सिविल वार की और धकेलने का प्रयास कर सकते हैं। वहाँ केवल सेना काम नहीं आएगी। आज नहीं तो कुछ वर्षों के पश्चात संघर्ष निश्चित है। ऐसे संकेत समाज के एक वर्ग से स्पष्ट हो रहे हैं। समय-समय पर उनका शक्ति परीक्षण होता रहता है। छतों पर रखी फिलिस्तीन की तरह बड़ी बड़ी गुलेलें, बच्चों के पीछे से पुलिस पर पथराव और बात-बात पर गुंडागर्दी पर उतर आने वाले उस हिंसक वर्ग के सामने सबल नागरिकों की आवश्यकता है। मध्यम वर्ग का व्यापारी या नौकरीपेशा व्यक्ति सभी प्रकार की हिंसा से बचना चाहता है, जो सही भी है। किन्तु भविष्य में सब ठीक रहेगा यह कैसे कहा जा सकता है। कोई नहीं चाहेगा की उसका बच्चा सड़क पर निकले, पर दूसरी तरफ सिर्फ इसी की तैयारी हो रही है। इन अग्निवीरों के समाज के बीच रहने से समाज में आत्मबल बढ़ेगा। यह अपेक्षा इन अग्निवीरों से नहीं होगी कि बिना किसी आपात परिस्थिति के इन्हें सीमाओं पर जाना पड़े। जहाँ तक अनुमान है इन्हें आरम्भ में आपदा प्रबंधन में ही काम करना होगा। इनसे पहले चार वर्षों में युद्ध की अपेक्षा नहीं होगी, किन्तु इनका होना अपने आप में एक बड़ी शक्ति होगी।

बाकी सरकार ने यह एक विकल्प दिया है, न किसी पर थोपा है, न अन्य व्यवस्थाएँ द की हैं, तो चाहें तो विवेक से काम भी ले सकते हैं और चाहें तो टायर वगैरह जलाने की परंपरा का निर्वाह कर सकते हैं।

कॉन्ग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने पुलिसकर्मी का कॉलर पकड़ा, लोगों ने कहा- इसकी चौधराहट पर लगाम लगनी चाहिए, गिरफ्तार करके जेल भेजो

नेशनल हेराल्ड मामले में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) से ईडी लगातार पूछताछ कर रही है। इसको लेकर पार्टी के कार्यकर्ता और नेता आगबबूला हो रहे और जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रेणुका चौधरी (Renuka Choudhary) का एक पुलिसकर्मी से बदसलूकी करने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। हैदराबाद में पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान वह एक पुलिसकर्मी का कॉलर पकड़ते हुए नजर आ रही हैं। इस दौरान 7 से 8 महिला पुलिसकर्मियों ने मिलकर उन्हें काबू किया। इस घटना के बाद से वह यूजर्स के निशाने पर आ गई हैं।

एक राजेंद्र शर्मा लिखते हैं, “रेणुका चौधरी को तुरंत गिरफ्तार करके जेल भेजो, सरकार के काम में बाधा पहुँचाना गंभीर अपराध है, इसकी चौधराहट पर लगाम लगाना चाहिए।”

शिवम त्यागी लिखते हैं, “पुलिसकर्मी का कॉलर पकड़ कर अभद्रता करती रेणुका चौधरी। अहंकार देख रहे हैं…।ये है कॉन्ग्रेस मतलब रस्सी जल गई, लेकिन बल नहीं गया।”

अनिला सिंह लिखती हैं, “ED के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने में कॉन्ग्रेस ने सारी हदें पार कर दी हैं। कॉन्ग्रेस की महिला नेता रेणुका चौधरी ने पुलिसकर्मी से बदसलूकी की और कॉलर पकड़कर खींचा। हद है, कुछ तो शर्म कीजिए।”

एक और यूजर ने लिखा, “कॉन्ग्रेस की सरकार न रहने पर इतनी हेकड़ी पुलिस वाले पर दिखा रही हैं रेणुका चौधरी, सोचिए जब कॉन्ग्रेस की सरकार थी तब ये क्या करती होगी। मुझे तो पूतना की याद आ गई।”

गौरतलब है कि दिल्ली में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर ईडी की कार्रवाई के विरोध में जमकर प्रदर्शन किया। उन्होंने भाजपा और पीएम मोदी पर भी हमला बोला। उनका कहना है कि राहुल गाँधी को इस मामले में जानबूझकर फँसाया जा रहा है। राहुल गाँधी हर मोर्चे पर सरकार से सवाल करते रहे हैं, इसलिए सरकार उनको परेशान कर रही है।

बता दें कि नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राहुल गाँधी से लगातार तीसरे दिन बुधवार (15 जून 2022) को कई घंटों तक पूछताछ की। इस दौरान राहुल ने ईडी को बताया कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) और यंग इंडिया लिमिटेड (YIL) के अधिग्रहण से संबंधित सभी लेन-देन कॉन्ग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा ही देखते थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने यंग इंडिया लिमिटेड द्वारा लिए गए लोन की कोई भी जानकारी होने से इनकार किया। बताया जा रहा है कि उन्होंने इसकी सारी जिम्मेदारी वोरा पर डाल दी। कॉन्ग्रेस सचिव प्रणव झा ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि ईडी की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत है और उसे लीक करना अपराध है। इसलिए हम इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। ईडी राहुल से अब तक कई सत्रों में करीब 30 घंटे पूछताछ कर चुकी है। एजेंसी ने केरल के वायनाड से सांसद राहुल गाँधी को 17 जून 2022 को भी पूछताछ के लिए तलब किया है।

कानपुर में पहले बिरयानी खिलाई, फिर पत्थरबाजी करवाई: उस बाबा बिरयानी पर सप्लाई का आरोप जिसके राम-जानकी मंदिर पर खड़े होने का दावा

पिछले दिनों यह बात सामने आई थी कि उत्तर प्रदेश के कानपुर में जो जगह सरकारी रिकॉर्ड में राम-जानकी मंदिर के तौर पर दर्ज है, वहाँ आज बाबा बिरयानी नाम से रेस्टोरेंट की चल रही है। अब खबर आई है कि शहर में 3 जून 2022 को जुमे की नमाज के बाद जो हिंसा भड़की थी, उस दिन पत्थरबाजों को बिरयानी खिलाई गई थी। इसकी सप्लाई बाबा बिरयानी ने ही की थी। पिछले मौके की तरह ही इस बार भी बाबा बिरयानी ने आरोपों को नकार दिया है।

दरअसल 3 जून को हुई हिंसा में कम उम्र के बच्चों द्वारा पथराव के CCTV फुटेज सामने आए थे। ताजा खुलासे के मुताबिक आरोपितों को न सिर्फ कुछ बिल्डरों द्वारा फंडिंग की गईए बल्कि शहर की चर्चित और विवादित बाबा बिरयानी की भी हिंसा में संलिप्तता थी। आरोप है कि बाबा बिरयानी ने न सिर्फ हिंसा के लिए फंड जुटाए, बल्कि पथराव से पहले हमलावरों को बिरयानी भी खिलाई थी।

बाबा बिरयानी के मालिक का नाम मुख्तार अहमद बाबा है। उस पर मंदिर की जमीन को कब्ज़ा कर वहाँ बिरयानी की दुकान खोल लेने के आरोप पहले से हैं। मुख़्तार कभी राम-जानकी मंदिर के एक हिस्से में साइकिल रिपेयरिंग का काम करता था। अब नए आरोपों के मुताबिक पड़ोसी जिले उन्नाव से बुलाए गए हमलावरों के खाने-पीने का इंतज़ाम बाबा बिरयानी ने ही करवाया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हिंसा के मुख्य आरोपित जफर हयात ने पुलिस पूछताछ में बाबा बिरयानी के मुख्तार अहमद के साथ बिल्डर हाजी वसी का भी नाम लिया है।

न्यूज़ 18 और MSB न्यूज़ में भी जफर हयात के कबूलनामे में बाबा बिरयानी का नाम होने की बात कही है। ऑपइंडिया ने कानपुर पश्चिम के DCP और जाँच अधिकारी ACP केमलगंज से इसकी पुष्टि का प्रयास किया। लेकिन दोनों ने बैठक में व्यस्त होने का हवाला दे बात करने से इनकार कर दिया। हिंसा के बाद फौरी तौर पर कानपुर भेजे गए IPS अजयपाल शर्मा ने कहा कि वे इस मामले में मीडिया से बात करने को अधिकृत नहीं हैं। कानपुर पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा से भी उनके बैठक में होने के कारण संपर्क नहीं हो सका। पुलिस का वर्जन आने के बाद खबर को अपडेट किया जाएगा।

अवैध कब्ज़ा कायम रहे इसलिए करवाई गई हिंसा

कानपुर के स्थानीय हिन्दू नेता प्रभात कुमार ने ऑपइंडिया को बताया, “बाबा बिरयानी और उसके साथियों की कानपुर में हिंसा करवाने की लम्बे समय से तैयारी थी। जब से उन्हें पता चला है कि उनके द्वारा कब्ज़ा की गई मंदिर की जमीन और शत्रु सम्पत्तियों पर सरकार कार्रवाई करने वाली है, तब से वे साजिश रचने में लगे थे। अभी तो शुरुआत है, सही से जाँच हुई तो आगे कई और भी खुलासे होंगे।”

अपराधियों का संरक्षक है बाबा बिरयानी वाला

बजरंग दल के कानपुर जिला संयोजक कृष्णा तिवारी ने ऑपइंडिया को बताया, “हमने बाबा बिरयानी द्वारा मंदिर की जमीन पर कब्जा करने की कई बार शिकायत प्रशासन में की है। इसका मालिक मुख़्तार कानपुर के कई बड़े अपराधियों का संरक्षक रहा है। साल 2017 में कानपुर गैंगवार में मारे गए डी-2 गैंग के दुर्दांत अपराधी गुलाम नबी से मुख़्तार के सम्पर्क पाए गए थे। गुलाम नबी के फंडिग सोर्स भी कुछ बिल्डर ही बताए गए थे।” उन्होंने बताया, “मुख्तार अहमद बाबा ने बेकनगंज में ही दारुल शफा नाम से अपनी एक बिल्डिंग बना रखी है, जिसमे चमड़े का कारोबार होता था। अचानक 25 सालों में उसके पास इतना रुपया कहाँ से आ गया, इसकी भी जाँच होनी चाहिए।”

मंदिर गिराने का भी शक

कृष्णा तिवारी ने आगे बताया, “साल 2021 में कानपुर के चमनगंज में एक मंदिर अचानक ही गिर गया था। बात फैला दी गई कि मंदिर पुराना था और जर्जर होकर गिर गया। लेकिन कई लोगों का मानना है कि वो बाबा बिरयानी वाले मुख्तार की ही साजिश थी। कुछ लोग तो ये भी बताते हैं कि मंदिर में हल्का सा विस्फोट भी हुआ था।” कानपुर नगर के ही एक अन्य हिन्दू संगठन से जुड़े कार्यकर्ता प्रांजल राय का दावा है, “दंगे में बाबा बिरयानी वाले ने ही मुख्य तौर पर फंडिग की थी।”

महमूद उमर ने आरोपों को नकारा

ऑपइंडिया ने बाबा बिरयानी के मालिक मुख़्तार अहमद के बेटे महमूद उमर से बात की। महमूद ने बताया, “हम पर लगे तमाम आरोप गलत हैं। हम शहर के इज्जतदार लोग हैं। हम से अब तक इस हिंसा में किसी भी पुलिस वाले ने कोई बात नहीं की है। मेरे अब्बू आराम से घर पर हैं और मीडिया में चल रही खबरों से चिंतित हैं। जो कुछ भी चल रहा वो मीडिया में है। हमारे खिलाफ अगर किसी के पास कोई भी सबूत हो तो दिखाए। हमारा परिवार इन खबरों से परेशान है। ये असल में हमारे नाम को खराब करने की साजिश है। हम पर पहले भी मंदिर कब्ज़ा करने जैसे आरोप लगे थे जो बेबुनियाद हैं। कोर्ट से हमारे पास पक्के कागजात के साथ स्टे ऑर्डर भी है।”

3 दिन में एफिडेविट दें, अवैध निर्माण तोड़ने में नियम का पालन हो: योगी सरकार के बुलडोजर पर ब्रेक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

कानपुर दंगे के बाद दंगाइयों के अवैध कब्जों पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे बुलडोजर (Buldozer) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार (16 जून 2022) को अहम फैसला सुनाया। इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन जमीयत-ए-उलेमा हिन्द (Jamiat-Ulema-E-Hind) की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

इसके साथ ही कोर्ट ने यूपी सरकार को जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द की याचिका पर अपनी आपत्ति दर्ज करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस AS बोपन्ना और जस्टिस बिक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वो राज्य सरकार से बुलडोजर एक्शन को रोकने के लिए नहीं कह सकता, लेकिन कोर्ट सरकार को नियम के तहत ऐसा करने को कह सकता है।

ऐसे में कोर्ट ने कोई आदेश जारी नहीं किया, लेकिन अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को जरूर कहा है कि मंगलवार (21 जून) को मामले की अगली सुनवाई होने तक कुछ भी न करें। कोर्ट ने कहा कि वे भी समाज का हिस्सा हैं।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे पैरवी कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार की ओर से जो भी विध्वंस किए गए हैं, उनमें सभी तरह की उचित प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। इसके साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले में एफिडेविट फाइल करने का भी समय माँगा था।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि भाजपा से निलंबित चल रहीं नूपुर शर्मा के पैगंबर मुहम्मद पर कथित बयान के बाद 3 जून को कानपुर में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने बड़े पैमाने पर हिंसा की। इसके बाद 10 जून को कई जगहों पर कट्टरपंथियों ने जमकर उत्पात मचाया। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने दंगा करने वालों के अवैध ठिकानों को ढहाने का नोटिस जारी किया और बाद में उसे ढहा दिया था।

इन्हीं दंगाइयों के बचाव में उतरते हुए जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द ने कानपुर दंगे के मुख्य साजिशकर्ता जफर हयात हाशमी का समर्थन किया था। इस्लामिक संगठन ने ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

हेमंत सोरेन की खनन पट्टे की फाइल मंत्री हेमंत सोरेन ने क्लियर की, CM हेमंत सोरेन ने मुहर लगाई: झारखंड में करप्शन की नई खुदाई

संवैधानिक पद पर रहकर उसका दुरुपयोग करने के मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Jharkhand CM Hemant Soren) ने भ्रष्टाचार की नई कहानी नई तरीके से लिखी है। यह मामला आप में अनोखा मामला है, क्योंकि यहाँ आवेदक से लेकर स्वीकृति देने वाला और घोटाला करने वाला व्यक्ति एक ही है और वह है राज्य का मुख्यमंत्री है। यानी सीएम का सीएम के लिए सीएम द्वारा किया गया अनोखा काम।

खनन पट्टा मामले में भ्रष्टाचार को अगर हम सरल शब्दों में परिभाषित कर पद के दुरुपयोग को समझने की कोशिश करें तो कुछ इस तरह से कर सकते हैं। हेमंत सोरेन नाम का एक कारोबारी खनन पट्टे के लिए गाँव के लोगों के साथ एक समझौता करता है। फिर उसे पर्यावरण की अनुमति के लिए आवेदन करता है। यह आवेदन राज्य सरकार के पर्यावरण संरक्षण विभाग के पास जाता है, जिसका प्रमुख हेमंत सोरेन नाम का व्यक्ति होता है। यह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार के अंतर्गत आता है। इस तरह हेमंत सोरेन की सरकार में हेमंत सोरेन नाम के कारोबारी को हेमंत सोरेन वाले विभाग द्वारा खनन की स्वीकृति दे दी जाती है।

हाईकोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँची झारखंड सरकार

हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार (17 जून 2022) को सुनवाई होने वाली है। खनन पट्टा का मामला सीएम सोरेन के लिए गले की हड्डी बन चुका है और उनकी कुर्सी को भी खतरे में डाल दिया है। खनन मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल 2022 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को नोटिस जारी कर विस्तृत एवं बिंदुवार जानकारी माँगा था।

इस मामले में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सीएम सोरेन के खिलाफ नाराजगी भी दिखा चुका है। चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह को पत्र लिखकर कहा था कि दस्तावेजों के ‘प्रमाणीकरण’ कर वे बताएँ कि सोरेन ने राँची के अंगारा ब्लॉक में खनन पट्टा लेने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया है या नहीं।

इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री पर अपने परिवार के सदस्यों और करीबी लोगों को भी फायदा पहुँचाने का आरोप लगा है। हेमंत सोरेन और उनके परिजनों पर आय से अधिक संपत्ति जमा करने को लेकर ED की भी जाँच का आदेश हाईकोर्ट द्वारा दिया जा चुका है। वहीं, हेमंत सोरेन की सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट ने सोरेन के खिलाफ दायर याचिका को तत्काल सुनवाई योग्य बताया था।

सीएम हेमंत के भ्रष्टाचार का मामला कैसे आया सामने?

शिवशंकर वर्मा नाम के एक व्यक्ति ने हेमंत सोरेन द्वारा खनन पट्टा अपने नाम करने को लेकर 11 फरवरी 2022 को हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की थी। अधिवक्ता राजीव कुमार की ओर से दाखिल उस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ. रवि रंजन और न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई की थी। अदालत ने सरकार को लताड़ लगाते हुए कहा था कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि हेमंत सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री और वन एवं पर्यावरण विभाग के विभागीय मंत्री हैं। ऐसे में उन्होंने खुद ही पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए आवेदन दिया और खुद ही क्लीयरेंस लेकर खुद ही खनन पट्टा हासिल कर लिया। ऐसा करना पद का दुरुपयोग और जनप्रतिनिधि कानून का उल्लंघन है।

हेमंत सोरेन पर खनन पट्टा लेने का आरोप

मुख्यमंत्री सोरेन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने नाम पर पत्थर खदान का पट्टा लिया। यह खदान राँची जिले के अनगड़ा मौजा, थाना नं-26, खाता नं- 187, प्लॉट नं- 482 में स्थित है। आरोप है कि इस पट्टे की स्वीकृति के लिए हेमंत सोरेन साल 2008 से ही प्रयास कर रहे थे।

मुख्यमंत्री बनने के बाद पत्रांक संख्या 615/M, दिनांक 16-06-2021 के जरिए पट्टा की स्वीकृति का आशय पत्र (LOI) विभाग द्वारा जारी कर दिया गया। यह विभाग मुख्यमंत्री के पास ही है। स्टेट लेबल इंवायरमेंट इंपेक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (SEIAA) ने 14-18 सितम्बर 2021 को अपनी 90वीं बैठक में पर्यावरण स्वीकृति की अनुशंसा भी कर दी।

दबाव बनाकर ली गई पर्यावरण मंजूरी

रिपोर्ट के मुताबिक, 14 मार्च 2021 को अनगड़ा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गाँव के कुछ लोगों के बीच भूमि के पट्टा का एक समझौता हुआ। इसके बाद खनन के लिए मुख्यमंत्री ने 28 मई 2021 को तत्कालीन जिला खनन पदाधिकारी (DMO) को आवेदन दिया। 16 जून 2021 को DMO ने कुछ शर्तों के साथ खनन लीज की सैद्धांतिक मंजूरी दी। नौ सितंबर 2021 को मुख्यमंत्री ने पर्यावरण मंजूरी के लिए SEIAA को आवेदन दिया। इस पर 22 सितंबर को मंजूरी दे दी गई।

मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच के दौरान ED को जानकारी मिली कि अनगड़ा में सीएम सोरेन द्वारा पत्थर खदान का पट्टा लेने के मामले में दबाव बनाकर पर्यावरण मंजूरी ली गई थी। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से जुड़े एक प्रभावशाली व्यक्ति ने राज्यस्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) के अधिकारी को फोन कर स्वीकृति देने के लिए कहा था। जब जानकारी मिली कि आवेदक खुद मुख्यमंत्री ही हैं तो पर्यावरण मंजूरी दे दी गई।

सोरेन पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप

सीएम सोरेने द्वारा खुद खनन पट्टा लेने का आरोप लगाने वाले याचिकाकर्ता शिवशंकर वर्मा ने मुख्यमंत्री पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप लगाया था और इसकी जाँच कराने की माँग की थी। वर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने ED को जाँच का आदेश दिया था। जाँच में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज भी शामिल रही, जो 300 से अधिक कंपनियों की क्रेडिंशयल जाँच की।

रिपोर्ट के मुताबिक, जाँच के दायरे में आने वाली 28 कंपनियों में हेमंत सोरेन और उनके भाई बसंत सोरेन का पैसा लगा हुआ है। याचिकाकर्ता के मुताबिक इस शेल कंपनियों ने इस मामले में बड़ी भूमिका निभाई है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद ED यह जाँच करेगी कि इन कंपनियों ने पैसों का किस रूप में निवेश कर के कैसे फायदा कमाया है। इसी केस में बसंत सोरेन के महाराष्ट्र निवासी संबंधी सुरेश नागर की भूमिका की भी जाँच शामिल है।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया था कि हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन ने झारखंड राज्य के कई जिलों में खुद को उसी संबंधित थाने का निवासी बताते हुए सैकड़ों एकड़ जमीनों को खरीदा। हेमंत सोरेन के मुताबिक, हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना मुर्मु सोरेन ओडिशा राज्य की आदिवासी वर्ग से आती हैं। उन्होंने साल 2009 में राँची के महत्वपूर्ण माने जाने वाले इलाके अरगोड़ा में कल्पना सोरेन ने 13 कट्टा, 14 छटाक और 17 कट्ठा व 8 छटाक आदिवासियों की जमीन को खरीदा था।

पूर्व सीएम रघुवर दास ने कल्पना सोरेन पर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनके द्वारा 13 कट्ठा 14 छटाक जमीन को लेकर मामले हैं। रघुवर दास कहते हैं कि जिस वक्त इस जमीन को खरीदा गया था तो उस वक्त इसका सरकारी मूल्य 34 लाख 93 हजार रुपए दिखाया गया है, लेकिन इसको बेचने की कीमत केवल 4,16,000 रुपए बताई गई थी। जबकि, दूसरी डीड 17 कट्ठा 8 छटाक को लेकर है। क्रय के क्रम में 5,25,000 रुपए बताया गया है।

कोर्ट ने हेमंत सरकार को याद दिलाया राजधर्म

सीएम सोरेन उनके भाई बसंत सोरेन एवं करीबियों के शेल कंपनी में निवेश के मामले में सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार को राजधर्म याद दिलाया। हालाँकि, अदालत में खनन पट्टा और मनरेगा घोटाला से संबंधित मामले में सुनवाई नहीं की है। इस दौरान ईडी के अधिवक्ता तुषार मेहता ने कहा कि राज्य खनिज संपदाओं से भरा है और उसके रक्षक ही भक्षक बन गए हैं। ऐसे में जरूरी कार्रवाई हो। यह कई आपराधिक गतिविधियों का मुख्य कारण है।

ईडी ने कोर्ट में हलफनामा देकर साफ कहा है कि आईएएस पूजा सिंघल समेत कई लोगों के यहाँ हुई छापेमारी में ऐसे गोपनीय दस्‍तावेज हाथ लगे हैं, जिनसे भ्रष्‍टाचार के तार हेमंत सोरेन से जुड़े होने की पुष्टि हुई है। वहीं, झारखंड सरकार का बचाव कर रहे अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।

हेमंत सोरेन की संपत्ति 5 साल में दोगुनी और 10 साल में 11 गुनी हुई

झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान साल 2019 में साहेबगंज में बरहेट से पर्चा भरने के दौरान दिए गए शपथ पत्र में शपथ पत्र में अपनी कुल संपत्ति 8 करोड़ 11 लाख 14 हजार 388 रुपए बताई थी। वहीं, 2014 के विधानसभा चुनाव में अपनी कुल संपत्ति 3 करोड़ 50 लाख 76 हजार 527 रुपए बताई थी।

वहीं 2009 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी और पत्नी की कुल संपत्ति 73 लाख 57 हजार रुपए बताई थी। 2009 के विवरण के हिसाब से दस साल में हेमंत सोरेन की संपत्ति 11 गुना से अधिक हो गई। वहीं 2014 के हिसाब से 5 साल में इनकी संपत्ति दो गुना से अधिक हो गई। अब 2019 में इनकी चल-अचल संपत्ति बढ़कर 2 करोड़ 29 लाख 29 हजार 153 हो गई, वहीं उनकी पत्नी की चल-अचल संपत्ति 5 करोड़ 81 लाख 85 हजार 235 हो गई।

झारखंड में खुद को दोहरा रहा है इतिहास

ऊपर की पूरी कहानी कहानी पढ़ने के बाद स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ना सिर्फ खनन पट्टा अवैध तरीके से अपने नाम लिया, बल्कि उन्होंने अपने परिजनों और करीबियों को भी अनुचित लाभ दिया। इस अनुचित लाभ के लिए कई तरह की शेल कंपनियों का गठन किया गया और मनी लॉन्ड्रिंग की गई। मनरेगा जैसे घोटोले किए गए।

यह पहली बार नहीं है कि हेमंत सोरेन की सरकार भ्रष्टाचार के घेरे में है। इसके पहले शिबू सोरेन और मधु कोड़ा की सरकार भी भ्रष्टाचार में आकंठ लिप्त रही है और उन्हें कोर्ट की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ी बात यह है कि इन सब मुख्यमंत्रियों के काल में कॉन्ग्रेस पार्टी सरकार की महत्वपूर्ण साझेदार रही है। कॉन्ग्रेस या तो सरकार में शामिल रही है या फिर सरकार को समर्थन दे रही होती है।

शिबू सोरेन के मुख्यमंत्रित्व काल में कई राजनेताओं और नौकरशाहों पर भ्रष्टाचार के छींटे पड़े। बाद में शिबू सोरेन खुद कोयला घोटाले में फँसे। जब झारखंड के मुख्यमंत्री मधु कोड़ा बने तब उन्होंने 4,000 करोड़ रुपए के हवाला कांड में जेल की हवा खाई।

हेमंत सोरेन की सरकार में एक बार फिर इतिहास दुहराता दिख रहा है। इस दौरान भाजपा का ही एक ऐसा शासनकाल रहा, जिसमें घोटाले का आरोप नहीं लगे। अब देखना है कि हेमंत सोरेन मामले में कोर्ट का क्या फैसला होता है।

जिस नेशनल लेवल शूटर की हत्या में गिरफ्तार हुई HC जज की बेटी, उससे ही था अफेयर: जिस पार्क में मिलने बुलाया वहीं मारी गई थी गोली

तारीख थी 20 सितंबर 2015। चंडीगढ़ के एक पार्क में गोलियाँ चली। राष्ट्रीय स्तर के एक शूटर की मौत हो गई। यह शूटर थे सुखमनप्रीत सिंह सिद्धू उर्फ सिप्पी सिद्धू। हत्या के इस मामले (Sippy Sidhu Murder Case) में करीब सात साल बाद कल्याणी सिंह नाम की एक महिला को गिरफ्तार किया गया है।

कल्याणी हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट की मौजूदा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सबीना की बेटी हैं। यह बात भी सामने आई है कि कल्याणी का सिप्पी से अफेयर चल रहा था। उसने सिप्पी को पार्क में मिलने के बहाने बुलाया था और उसकी हत्या करवा दी। 35 साल के सिद्धू कॉरपोरेट वकील भी थे और हत्या से दो दिन पहले ही कनाडा से लौटे थे

CBI ने आरोपित कल्याणी सिंह की रिमांड के लिए IPC की धारा 167 के तहत दायर आवेदन में इसका खुलासा किया है। इसमें कहा गया है कि सिद्धू और कल्याणी रिश्ते में थे। दोनों शादी करना चाहते थे ,लेकिन सिद्धू के माता-पिता ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। इस बीच, सिद्धू ने कल्याणी की कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें उसके माता-पिता और दोस्तों को लीक कर दीं, जिससे उसके परिवार को शर्मिंदगी उठानी पड़ी।

CBI के मुताबिक, इसके बाद कल्याणी ने सिद्धू को चंडीगढ़ के सेक्टर-27 के एक पार्क में मिलने के लिए बुलाया। यहीं उसने 20 सितंबर 2015 को एक अन्य हमलावर के साथ मिलकर गोली मार उसकी हत्या कर दी। सिप्पी को 12 बोर की बंदूक से 4 गोलियाँ मारी गई थी।

2016 में सीबीआई को ट्रांसफर किया गया केस

सिप्पी सिद्धू की हत्या के केस को जनवरी 2016 में CBI को ट्रांसफर किया गया था। जाँच के दौरान एजेंसी को इसमें किसी महिला की संलिप्तता का संदेह हुआ। इस संबंध में सुराग देने वाले को 5 लाख का इनाम देने की घोषणा सीबीआई ने सितंबर 2016 में की। इस संबंध में अखबार में प्रकाशित विज्ञापन में कहा गया था, “यह मानने का कारण है कि हत्या के समय एक महिला सिप्पी के हत्यारे के साथ थी। उक्त महिला को भी आगे आकर निर्दोष होने पर संपर्क का मौका दिया जा रहा है। अन्यथा मान लिया जाएगा कि वह अपराध में शामिल थी।”

फिर भी सुराग नहीं मिलने पर एजेंसी ने दिसंबर 2021 में इनाम राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपए कर दी। बावजूद हाथ खाली ही रहे। फिर सीबीआई ने 2020 में कोर्ट में ‘अनट्रेस्ड रिपोर्ट’ दायर करते की जो खारिज कर दिया गया। 7 दिसंबर 2020 को अदालत से कल्याणी सिंह की भूमिका की जाँच की अनुमति माँगी गई। उसी साल 14 दिसंबर को इसकी अनुमति मिलने के बाद अब सीबीआई ने कल्याणी सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। कल्याणी सिंह चंडीगढ़ के सेक्टर-42 स्थित एक कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।