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हिंदुओं का ‘स्वयंभू ठेकेदार’ बना संगीतकार विशाल ददलानी, मुस्लिमों से कहा- आपका दर्द हमारा दर्द: नुपूर शर्मा को धमकी, पत्थरबाजी का जिक्र तक नहीं किया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के पैगंबर मोहम्मद पर बयान के बाद उन्हें इस्लामी कट्टरपंथियों की तरफ से लगातार धमकी मिल रही है। इस्लामी कट्टरपंथी लगातार नूपुर शर्मा का सिर तन से जुदा करने की माँग कर रहे हैं। 

इस बीच सिंगर और म्यूजिक कंपोजर विशाल ददलानी (Vishal Dadlani) ने ट्वीट कर भारतीय मुस्लिमों को विश्वास दिलाया है कि वो भी इस देश का हिस्सा हैं और उनका दर्द हमारा दर्द है। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि वो देश की राजनीति पर शर्मिंदा हैं। 

विशाल ने लिखा, “मैं भारतीय मुसलमानों को बहुसंख्यक भारतीय हिंदुओं की ओर से ये कहना चाहता हूँ। आपको देखा और सुना जाता है, प्यार किया जाता है और सराहा भी जाता है। आपका दर्द हमारा दर्द है। आपकी देशभक्ति पर कोई सवाल नहीं है, आपकी पहचान भारत या किसी और के धर्म के लिए खतरा नहीं है। हम एक राष्ट्र, एक परिवार है।”

एक अन्य ट्वीट में विशाल ददलानी ने लिखा, “मैं सभी भारतीयों से ये भी कहना चाहता हूँ। मुझे भारतीय राजनीति की कुरूप प्रकृति के लिए वाकई में खेद है, जो हमें खुशी-खुशी छोटे-छोटे समूहों में बाँट देगी, जब तक कि हम अकेले खड़े नहीं हो जाते। ये सब निजी फायदे के लिए किया जा रहा है, लोगों के लिए नहीं। उन्हें जीतने ना दें।”

विशाल ददलानी के इस ट्वीट पर तमाम लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। कई लोगों ने उनकी खिंचाई भी की है।

संजय कुमार नाम के एक शख्स ने लिखा, “मुस्लिम शरीया का पालन करते हैं, यहाँ तक ​​कि हमारे लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी। वे यहाँ केवल एक इरादे से रहते हैं। वह जिहाद करने के लिए गजवा ए हिंद के निर्माण के लिए रहते हैं। आप जैसे लोग उनके सपने को पूरा करने में उनकी मदद करते हैं। हमारी लड़ाई इस्लामवादी और आप जैसे तथाकथित सेक्युलर के साथ है।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “विशाल भैया हम सब एक हैं तो नूपुर दीदी से कब सॉरी बोलोगे मुस्लिम की तरफ से। उनके माफी माँगने के बाद भी रेप, मर्डर की धमकी मिल रही है रोज। कमलेश तिवारी के घरवालों से कब माफी माँगोगे।”

एक यूजर ने लिखा, “ये तेरी सोच है टकले, कुछ भी निजी लाभ लेने के लिए नहीं हो रहा है। हर फ्राइडे को ये नल्ले क्यूँ पत्थरबाजी करते हैं। किसने कहा है इन्हें।”

एक यूजर लिखता है, “दम है तो महा विकास अघाड़ी सरकार, बॉलीवुड खान माफिया, करण जौहर गैंग के खिलाफ एक ट्वीट करो। पता चलेगा कि फ्रीडम ऑफ स्पीच की क्या कीमत है।”

गौरतलब है कि नूपुर शर्मा द्वारा पैगंबर मुहम्मद के कथित अपमान के नाम पर भारत में जगह-जगह दंगे किए गए। इस दौरान दंगाइयों ने पुलिस पर हमला किया। तोड़फोड़, आगजनी और पथराव की कई गंभीर एवं चिंताजनक घटनाएँ भी सामने आईं। नूपुर शर्मा को हत्या और रेप की लगातार धमकी दी जा रही है।

‘जुमे पर जो रोके उस पर करो हमला’: प्रयागराज वाले जावेद पंप के घर से मिला पर्चा, फरार दंगाइयों ने सरेंडर नहीं किया तो घर की होगी कुर्की

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 10 जून 2022 को जुमे पर हुई हिंसा के सुनियोजित होने को लेकर पुलिस को तगड़ा सुराग हाथ लगा है। रिपोर्टों के अनुसार हिंसा के मास्टरमाइंड जावेद पंप के घर से एक पर्चा मिला है। इसमें कथित तौर पर अटाला में बड़ी संख्या में जुटने और रास्ते में बाधक बनने वाले लोगों पर हमला करने की बात कही गई है।

रिपोर्ट के अनुसार पंप की घर की तलाशी के दौरान यह पर्चा मिला था। पर्चे को जाँच के लिए पुलिस ने सीज कर दिया है। SSP प्रयागराज अजय कुमार के मुताबिक, “जावेद पंप के घर से आधे पेज के कुछ फ़टे पर्चे में काफी आत्तिजनक बातें लिखी हुई हैं। हम जाँच कर रहे हैं कि कितने पर्चे किसको और कहाँ बाँटे गए हैं।” अमर उजाला के अनुसार इस पर्चे पर लिखा था, “सुनो साथियों, जुमे के दिन में दो बजे हम सबको मिलजुलकर अटाला पहुँचना होगा। जो भी अड़चन बनेगा, उस पर वार करना होगा। बाकी बातें हम मिलकर समझाएँगे। हमें अदालत पर भरोसा नहीं है।”

गौरतलब है कि जावेद पंप का करेली स्थित घर प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने 12 जून को बुलडोजर से ढहा दिया था। उससे पहले पंप के घर से अवैध हथियार और अरबी व पाकिस्तानी इस्लामी साहित्य बरामद होने की बात भी सामने आई थी। हालाँकि जावेद पंप की बेटी सुमैया ने पर्चे की बरामदगी को झूठ बताया है। उसने कहा है कि ये मेरे अब्बा को फँसाने की साजिश है और अगर कोई पर्चा मिला था उसी दिन क्यों नहीं बताया गया।

सरेंडर नहीं करने पर घर होंगे कुर्क

प्रयागराज SSP अजय कुमार ने जुमे की नमाज़ के बाद भड़की हिंसा के फरार आरोपितों जल्द से जल्द सरेंडर करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, “10 जून को हुई घटना में 29 गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ है। अब तक 92 लोग न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा लगभग 40 लोग बाद में जाँच के दौरान प्रकाश में आए हैं। वे अपने घरों को बंद कर फरार हैं। उनकी पुलिस तलाश कर रही है। यदि वे जल्द से जल्द पुलिस या अदालत के सामने हाजिर नहीं हुए तो उनके खिलाफ वारंट जारी किया जाएगा। साथ ही उनके घरों की कुर्की भी करवाई जाएगी।”

प्रयागराज पुलिस ने आरोपितों के पोस्टर छपवा कर सार्वजानिक स्थलों पर भी चिपकवा दिए हैं।

गौरतलब है कि प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) पथराव और हिंसा में शामिल 37 आरोपितों के बारे में भी जानकारी जुटा रहा है। यदि उनके मकान में नियमों की अनियमितता मिली वहाँ भी बुलडोजर चल सकता है।

ट्रक से आए-घर को फूँक दिया, 3 जिंदा जले- 1 को छत से फेंक मार डाला: सिख दंगों में 38 साल बाद कानपुर से 4 गिरफ्तार, योगी सरकार ने 2019 में बनाई थी SIT

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद साल 1984 में देश में भड़के सिख विरोधी दंगों (Anti Sikh Riots) मे कई सिखों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) में भी हुए दंगों में 127 लोगों की मौत हो गई थी। उस घटना के 38 साल बाद बुधवार (15 जून 2022) को 4 आरोपितों को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में कुल 96 आरोपितों की पहचान की गई थी, जिनमें से 22 की मौत हो चुकी है। बाकी के बचे 74 को न्याय के दायरे में लाया जाना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सिख दंगों के मामले में फाइनल रिपोर्ट सबमिट की जा चुकी थी, लेकिन कुछ सिख संगठनों की सक्रियता चलते मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में गया। कोर्ट के आदेश के बाद मामले को दोबारा से खोला गया। इस मामले में फरवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सिख दंगों की जाँच के लिए UP सरकार ने एक SIT का गठन किया था। SIT के DIG बालेंदु भूषण सिंह के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए चारों आरोपितों का मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराया जा चुका है।

अधिकारी के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए चारों आरोपितों की पहचान सफीउल्लाह (65), योगेंद्र सिंह (65), विजय नारायण सिंह (62) व अब्दुल रहमान (65) हैं। ये चारों पूर्व राज्यमंत्री शिवनाथ सिंह कुशवाहा के खास गुर्गे थे। शिवनाथ सिंह कुशवाहा के भतीजे राघवेंद्र सिंह कुशवाहा के साथ मिलकर ही ये सभी घाटमपुर से ट्रक के जरिए निराला नगर गए। वहाँ पर आरिपितों ने भूपेंद्र सिंह, रक्षपाल सिंह और मकान मालिक के बेटे सतपाल सिंह की बेरहमी से हत्या कर दी थी। इन आरोपितों ने पूरे घर को आग लगा दी थी, जिसमें तीन लोगों की जलकर मौत हो गई थी, जबकि एक को छत के नीचे फेंककर मार डाला था।

SIT की जाँच पूरी

SIT ने 11 मामलों की जाँच पूरी कर ली है। अब 74 में से 70 अन्य आरोपितों पर कार्रवाई होनी है। उल्लेखनीय है कि सिख दंगों में 20 ऐसे केसों को एसआईटी ने फिर से री-ओपेन किया था, जिसमें फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई थी। बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद कहा है।

मुस्लिम कर्मचारियों के विरोध में हिंदू ड्राइवरों ने ओढ़ी भगवा शॉल: कन्नड़ चैनल का दावा BMTC की जाँच में निकला झूठा

कर्नाटक में पिछले दिन हिजाब का मुद्दा काफी चर्चा में रहा। इसके बाद एक प्राइवेट कन्नड़ चैनल ने आरोप लगाया कि बैंगलोर मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (BMTC) के हिंदू ड्राइवरों ने मुस्लिम कर्मचारियों का विरोध करने के लिए भगवा शॉल ओढ़ रखा था। चैनल ने हाल ही में बीएमटीसी ड्राइवरों के मोंटाज दिखाते हुए जोर देकर कहा था कि कुछ हिंदू कर्मचारियों ने मुस्लिम सहयोगियों द्वारा काम के दौरान टोपी पहनने का विरोध भगवा रंग की शॉल पहनकर दर्ज कराया था। हालाँकि, BMTC ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि विस्तृत जाँच के बाद पता चला कि न्यूज चैनल के दावे झूठे थे।

बीएमटीसी के एक अधिकारी ने TNM को बताया, “उन्होंने अलग-अलग क्लिपिंग का एक कोलाज दिखाया और फिर दावा किया कि हिंदू कर्मचारियों ने मुस्लिम कर्मचारियों के टोपी पहनने का विरोध करने के लिए भगवा शॉल ओढ़ रखी थी। यह बिल्कुल भी सच नहीं है। जिस ड्राइवर से उन्होंने बात की, उसके पास भगवा रंग का कपड़ा था और जब रिपोर्टर ने उससे इसके बारे में पूछा, तो ड्राइवर ने जवाब दिया कि वह इसका इस्तेमाल अपना चेहरा पोंछने के लिए कर रहा है। लेकिन उन्होंने आगे बढ़कर इसे मुस्लिम कर्मचारियों के विरोध के रूप में रिपोर्ट किया। यह खबर फर्जी है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं मीडिया से अनुरोध करता हूँ कि इस खबर को तूल न दें। बीएमटीसी का पुलिस विभाग की तरह एक यूनिफॉर्म कोड है। कर्मचारियों को समान यूनिफॉर्म नियम का उसी तरह पालन करना होगा जैसे वे इन दिनों कर रहे हैं। उन्हें अनुशासित रहना होगा। इसमें कोई संशय नहीं है।”

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि भगवा का समर्थन करने वाले कर्मचारियों ने एक संगठन भी बनाया था। इसमें करीब 1,500 रजिस्टर्ड सदस्य थे। बीएमटीसी का एक यूनिफॉर्म है जिसे उसके ड्राइवरों और कंडक्टर और अन्य कर्मचारी पहनते हैं।

बीएमटीसी के अनुसार, उनमें से कुछ कर्मचारी यूनिफॉर्म के साथ जालीदार टोपी (Skull Cap) पहनते हैं। यह अब कई वर्षों से चलन में है। टीएनएम से बात करते हुए, केएसआरटीसी स्टाफ एंड वर्कर्स फेडरेशन के अध्यक्ष एचवी अनंत सुब्बाराव ने बताया कि उन्हें भी घटना के बारे में मीडिया रिपोर्टों से ही पता चला था। हालाँकि, जब उन्होंने इसके बारे में कर्मचारियों से पूछा तो उन्हें कोई शिकायत नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटना राज्य में कहीं नहीं हुई है।

नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने पर तमिलनाडु में ABVP कार्यकर्ता गिरफ्तार: कोयंबटूर पुलिस ने कहा- दो समुदायों को बीच नफरत बढ़ाने वाला

BJP की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट करने के कारण तमिलनाडु की कोयंबटूर (Coimbatore, Tamil Nadu) पुलिस ने मंगलवार (14 जून 2022) को एक ABVP कार्यकर्ता को गिरफ्तार कर लिया। कोयंबटूर के बाहरी इलाके सेनानूर से गिरफ्तार किए गए एबीवीपी कार्यकर्ता की पहचान 24 वर्षीय कार्ति के रूप में हुई है। 

पुलिस ने कहा कि कार्ति ने पिछले महीने एक टीवी न्यूज डिबेट के दौरान नूपुर शर्मा द्वारा इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के बारे में की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों का वीडियो शेयर किया था। वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा था, “मैं इसे रोज कहूँगा। नूपुर शर्मा ने वही कहा जो लिखा हुआ है। उन्होंने क्या गलत कहा?”

कोयंबटूर पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट ने कार्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153ए और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि इस पोस्ट से दो समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ सकती है, इसलिए केस दर्ज किया गया। कार्ति के सोशल मीडिया पोस्ट को भी डिलीट कर दिया गया है।

कार्ति को गिरफ्तार करने के बाद उन्हें न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और फिर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। कई दक्षिणपंथी संगठनों ने कार्ति को गिरफ्तार करने के लिए तमिलनाडु सरकार पर सवाल उठाया है। इससे पहले नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने के आरोप में साद अशफाक अंसारी नाम के एक 19 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र को महाराष्ट्र के भिवंडी में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 

गौरतलब है कि नूपुर शर्मा द्वारा पैगंबर के कथित अपमान के नाम पर भारत में जगह-जगह दंगे किए गए। इस दौरान दंगाइयों ने पुलिस पर हमला किया। तोड़फोड़, आगजनी और पथराव की कई गंभीर एवं चिंताजनक घटनाएँ भी सामने आईं।

रेनबो कलर्स के खिलौने, LGBT फ्लैग वाले कपड़े सऊदी अरब कर रहा जब्त, कहा- ये रंग बच्चों को जहरीले संदेश देते हैं, समलैंगिकता को मिलता है बढ़ावा

सऊदी अरब (Saudi Arabia) में समलैंगिकता गैरकानूनी है। इसके तहत अधिकारियों ने राजधानी रियाद में रेनबो कलर्स के खिलौने और एलजीबीटी फ्लैग जैसे दिखने वाले कपड़ों को दुकानों से जब्त कर लिया है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, अधिकारी समलैंगिकता को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं, जिसके चलते उन्होंने दुकानों से रेनबो कलर्स के खिलौने और कपड़े जब्त किए हैं।

सऊदी अरब के न्यूज चैनल अल-एखबरिया (Al-Ekhbariya News Channel) की रिपोर्ट के अनुसार, जब्त किए गए सामान में रेनबो कलर की स्कर्ट, टोपी और पेंसिल हैं। इनमें ज्यादातर सामान छोटे बच्चों के खेलने का है।

जानकारी के मुताबिक वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने रियाद के अलग-अलग क्षेत्रों की दुकानों में जाँच अभियान चलाने के आदेश दिए हैं। अभियान से जुड़े वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है, “हम उन लोगो और डिजाइन का पता लगा रहे हैं, जो इस्लाम विरोधी, यौन उत्पीड़न, युवा पीढ़ी को निशाना बनाने वाले और समलैंगिकता को बढ़ावा देने के लिए प्रयोग में लाए जा रहे हैं।”

रेनबो फ्लैग की ओर इशारा करते हुए एक पत्रकार कहता है, “एलजीबीटी का फ्लैग रियाद के बाजारों में उपलब्ध है।” रिपोर्ट में कहा गया है कि ये कलर बच्चों को ‘Poisoned Message’ भेजते हैं।

बता दें कि सऊदी अरब में समलैंगिक रिश्ते बनाना इस्लामी शरिया कानून के तहत बहुत बड़ा अपराध है। सऊदी अरब के अलावा कतर, सुडान, ईरान, यमन में समलैंगिक रिश्ता बनाने के लिए मौत की सजा दी जाती है।

गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में कतर ने अपने यहाँ बच्चों के कुछ खिलौनों को प्रतिबंधित कर दिया था। इसकी वजह इनका रंग बताया गया था, जो कथित तौर पर इस्लामी मूल्यों के खिलाफ हैं। उस वक्त रंगे बिरंगे खिलौनों को कतर की दुकानों से जब्त किया गया था। देश के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा था कि उन्हें रंग-बिरंगे खिलौनों पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन रेनबो कलर्स के कुछ खिलौने LGBTQ फ्लैग जैसे दिखते हैं। इसलिए उन खिलौनों को बैन किया गया है।

गाँधी परिवार की वफादारी करते-करते दुनिया छोड़ गए मोतीलाल वोरा, ED के सामने राहुल गाँधी ने सारा दोष उनके ही मत्थे मढ़ा

मोतीलाल वोरा का 93 साल की उम्र में 20 दिसंबर 2020 को निधन हो गया था। जब तक जीवित रहे गाँधी परिवार के वफादार रहे। उन्हें परिवार का राजदार भी माना जाता था। नेशनल हेराल्ड में वे भी आरोपित थे। अब कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने इस मामले में सारा दोष दिवंगत वोरा के मत्थे मढ़ने की कोशिश की है।

नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राहुल गाँधी से लगातार तीसरे दिन बुधवार (15 जून 2022) को कई घंटों तक पूछताछ की। इस दौरान राहुल ने ईडी को बताया कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) और यंग इंडिया लिमिटेड (YIL) के अधिग्रहण से संबंधित सभी लेन-देन कॉन्ग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा ही देखते थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने यंग इंडिया लिमिटेड द्वारा लिए गए लोन की कोई भी जानकारी होने से इनकार किया। बताया जा रहा है कि उन्होंने इसकी सारी जिम्मेदारी वोरा पर डाल दी। कॉन्ग्रेस सचिव प्रणव झा ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि ईडी की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत है और उसे लीक करना अपराध है। इसलिए हम इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। ईडी राहुल से अब तक कई सत्रों में करीब 30 घंटे पूछताछ कर चुकी है। एजेंसी ने केरल के वायनाड से सांसद राहुल गाँधी को 17 जून 2022 को भी पूछताछ के लिए तलब किया है।

आपको बता दें कि वोरा AJL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हुआ करते थे। वे AICC (ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमिटी) के कोषाध्यक्ष भी रहे। राहुल गाँधी और उनकी माँ सोनिया गाँधी की यंग इंडियन में 76 फीसदी हिस्सेदारी है। शेष 24 फीसदी वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस (प्रत्येक 12 फीसदी) के पास थी। फर्नांडीस का भी 13 सितंबर 2021 में निधन हो गया थी। वोरा की तरह ऑस्कर फर्नांडिस भी AJL और YIL के डायरेक्टर रहे थे।

गौरतलब है कि पूरा मामला नेशनल हेराल्ड अखबार से जुड़ा है। ‘नेशनल हेराल्ड’ की स्थापना 1937 में हुई थी। AJL तब उर्दू में ‘कौमी आवाज़’ और हिंदी में ‘नवजीवन’ नामक अख़बार निकालता था। नेहरू के लेख इसमें अक्सर आया करते थे। अंग्रेज सरकार ने इसे 1942 में बैन कर दिया था। नेहरू स्वतंत्रता के बाद इसके बोर्ड के अध्यक्ष पद से तो हट गए, लेकिन अख़बार कॉन्ग्रेस से ही चलता रहा। 1963 में इसके सिल्वर जुबली कार्यक्रम में नेहरू ने सन्देश जारी किया। 2016 में इसे फिर से डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में लॉन्च किया गया था।

कई वर्षों से सर्कुलेशन कम होने और घाटे में जाने के कारण 2008 में ‘नेशनल हेराल्ड’ अख़बार को बंद कर दिया गया था। इसने अपने ऑपरेशन्स बंद कर दिए। लेकिन, दिल्ली, लखनऊ और मुंबई जैसे महानगरों में इसके पास अकूत संपत्ति थी। अख़बार के पास 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति होने का अंदाज़ा लगाया गया था।

असली खेल यहीं से शुरू हुआ, जब कॉन्ग्रेस ने अपने पार्टी फंड से अख़बार को 90 करोड़ रुपए का लोन दिया। 2010 में कॉन्ग्रेस ने अपनी नई कंपनी YIL को AJL वाला ऋण असाइन कर दिया। जब AJL ऋण चुका नहीं पाया तो उसकी सारी संपत्तियों को YIL को ट्रांसफर कर दिया गया। इस तरह 50 लाख रुपए के बदले AJL की सारी संपत्तियों का मालिकाना हक़ गाँधी परिवार के स्वामित्व वाली YIL के पास चली गई।

इसको लेकर 2013 में भाजपा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने शिकायत दर्ज कराते हुए पूछा कि 1000 शेयरधारकों वाली 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति किसी कंपनी से मात्र 50 लाख रुपए का लोन देकर कैसे हड़पी जा सकती है? कुल लोन 90.25 करोड़ रुपए का था, जिसके माध्यम से स्वामी ने गाँधी परिवार पर धोखाधड़ी के करने के आरोप लगाए। कॉन्ग्रेस के इन 4 बड़े नेताओं के अलावा पार्टी की ओवरसीज शाखा के अध्यक्ष सैम पित्रोदा और ‘राजीव गाँधी फाउंडेशन’ के पत्रकार सुमन दुबे भी इस मामले में आरोपित हैं।

पुलिस लगे बर्बर-मुस्लिम पीड़ित, इसलिए विदेशी लेखक ने 2 साल पुराना वीडियो शेयर किया: कट्टरपंथियों ने कहा- 1992 जैसा मुंबई ब्लास्ट करने की जरूरत

ऑस्ट्रेलियाई लेखक सीजे वर्लमैन अपनी हिंदूफोबिया के लिए कुख्यात हैं। मुस्लिमों को पीड़ित बताने और भारत विरोधी प्रोपेगेंडा को वे आए दिन हवा देते रहते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने बुधवार (15 जून 2022) को ट्विटर पर दो साल पुराना वीडियो शेयर कर हिंदुओं और यूपी पुलिस के खिलाफ घृणा को बढ़ावा देने की कोशिश की।

इस वीडियो में एक मुस्लिम पर पुलिस लाठीचार्ज करती दिख रही है। वर्लमैन ने पुलिस को हिंदू कट्टरपंथ से ग्रसित बताते हुए लिखा कि एक बुजुर्ग मुस्लिम को बेरहमी से मारा जा रहा है। इस ट्वीट को लिबरलों और कट्टरपंथियों ने हाथों​हाथ लिया। कई ने तो संयुक्त राष्ट्र संघ और अरब देशों को टैग भी कर दिया।

कभी अरबी मुस्लिमों की आँधी से काफिरों को मिटाने की बात करने वाले जफरुल इस्लाम के ‘मिली गैजेट’ ने वर्लमैन के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए कहा कि ऐसा लगा रहा जैसे वर्दीधारी की कोई निजी खुन्नस हो।

चित्र साभार- ट्विटर

जम्मू-कश्मीर की नेशनल कांफ्रेंस पार्टी के नेता और पूर्व विधायक डॉ. गगन भगत ने लिखा, “ये मोदी के नेतृत्व में भारत की कानून-व्यवस्था है। उत्तर प्रदेश पुलिस विश्व की सबसे क्रूर और मानवाधिकार का उल्लंघन करने वाली फ़ोर्स बन चुकी है।”

चित्र साभार- ट्विटर

खुद को राकेश टिकैत के भारतीय किसान यूनियन का गोरखपुर मंडल अध्यक्ष बताने वाले अतुल त्रिपाठी ने इसे रिट्वीट करते हुए लिखा,”उत्तर प्रदेश की पुलिस का बर्बर चेहरा देखिए।” उसने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया।

चित्र साभार- ट्विटर

खालिद बेडौन ने लिखा, “हिंदुत्ववादी पुलिस को खत्म करो।”

चित्र साभार- ट्विटर

एंटी RSS मुस्लिम (@SaudiChina10) नाम के ट्विटर हैंडल ने लिखा, “बहुत जल्द 1992 मुंबई कांड जैसा करने की जरूरत है।”

चित्र साभार- ट्विटर

2 साल से भी ज्यादा पुरानी है वीडियो

जब ऑपइंडिया ने वर्लमैन द्वारा शेयर किए गए वीडियो की पड़ताल की तो वह 6 अप्रैल 2020 का निकला। यह वीडियो बरेली जिले के इज्जतनगर थाना क्षेत्र का है। इस हिंसा को काबू करते हुए IPS अभिषेक वर्मा घायल हो गए थे।

लड़के को पीटने की उसी अफवाह मेडिकल परीक्षण में निकली थी झूठ

इस घटना पर तत्कालीन SSP बरेली IPS शैलेश पांडेय ने कहा था, “लॉकडाउन का पालन करवाने के लिए पुलिस टीम गश्त कर कर रही थी। इस दौरान नई उम्र के कुछ लड़कों को सड़क पर देख कर टोका गया। बाद में 70-80 लोगों की भीड़ पुलिस चौकी पर लड़के की पुलिस द्वारा पिटाई का आरोप लगाकर हंगामा करने लगी। लड़के को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसको कोई चोट नहीं पाई गई। भीड़ को सोशल डिस्टेंस का पालन करवाने के लिए हटने को कहा गया तो उसने इनकार कर दिया। बाद में पुलिस ने बल प्रयोग कर के भीड़ को तितर-बितर किया।”

तलवार और भालों ने पुलिस पर हुआ था हमला

इस घटना में दर्ज FIR के मुताबिक भीड़ ने पुलिस कस्टडी से आरोपितों को छुड़ाने के लिए पुलिस फ़ोर्स पर तलवार, भालों और अन्य अवैध अस्त्रों से हमला किया था। हिंसक भीड़ से न सिर्फ कोरोना फैलने, बल्कि दूसरों की जान खतरे में भी डालने का डर फ़ैल गया था। तब हमलावरों के हमले से न सिर्फ लॉ एंड ऑर्डर छिन्न-भिन्न हो गया था, बल्कि मेडिकल सेवाएँ भी प्रभावित हुई थीं। हमले में औरतें भी शामिल थीं। FIR में दर्ज कुल 43 नामजद आरोपित मुस्लिम समुदाय से ही हैं। इसी के साथ 200 अन्य अज्ञात पर भी केस दर्ज हुआ था।

FIR Copy

FIR लिखा गया है, “शुरू में जब पुलिस ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने को कहा तो पुलिस को माँ-बहन की गाली दी गई और कहा गया कि हमारा जो मन होगा वो करेंगे।”

FIR Copy

स्पष्ट है कि दो साल से अधिक पुराने वीडियो को वर्लमैन ने जुमे पर इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा पर पर्दा डालने और मुस्लिमों को पीड़ित बताने के मकसद से शेयर किया है। वे ऐसा पहले भी करते रहे हैं। इसी तरह उन्होंने बिहार में जेडीयू नेता खलील आलम की हत्या के बाद भी मामले को सांप्रदायिक एंगल देने की कोशिश की थी।

जामा मस्जिद को नोटिस भेजने वाले SHO को हटाया, केरल की वामपंथी सरकार ने कहा- मस्जिदों से नहीं हो रहा सांप्रदायिक दुष्प्रचार

केरल सरकार ने ‘सांप्रदायिक भाषण पर रोक’ लगाने वाले नोटिस को अनुचित करार देते हुए कन्नूर के मय्यिल पुलिस स्टेशन के एसएचओ बीजू प्रकाश को उनके पद से हटा दिया है। पिनराई विजयन सरकार (Pinarayi Vijayan) ने बुधवार (15 जून 2022) को स्पष्ट किया कि उसे नहीं लगता कि राज्य की मस्जिदों में कोई सांप्रदायिक दुष्प्रचार किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कन्नूर जिले की जामा मस्जिद को पुलिस द्वारा जारी नोटिस को अनुचित करार दिया, जिसमें मस्जिद को जुमे की नमाज के दौरान ‘सांप्रदायिक रूप से विभाजनकारी’ तकरीर देने से बचने के लिए कहा गया था।

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि इस तरह का नोटिस पूरी तरह से अनुचित और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार की नीतियों के खिलाफ है। सीएमओ ने कहा कि मय्यिल थाने के प्रभारी ने सरकारी नीति को समझे बिना गलत नोटिस जारी किया] इसलिए डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) ने उन्हें पद से हटा दिया है।

दरअसल, बीजू प्रकाश ने पैगंबर मुहम्मद पर कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में इस्लामवादियों द्वारा हाल ही में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों और उसके बाद हुए दंगों को देखते हुए यह नोटिस जारी किया था। एसएचओ (बीजू प्रकाश) ने इलाके की जामा मस्जिद कमेटी को नोटिस भेजकर जुमे की नमाज के दौरान भड़काऊ भाषण देने से परहेज करने को कहा था। उन्होंने मस्जिद कमेटी से कहा था कि मस्जिद में जुमे की नमाज़ का इस्तेमाल सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और नफरत फ़ैलाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। नोटिस में यह भी कहा गया था कि इस एडवाइजरी का उल्लंघन करने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

हालाँकि, मस्जिद को नोटिस मिलने के तुरंत बाद एसएचओ के खिलाफ आक्रोश फैल गया। मुस्लिम लीग (Muslim League) और एसडीपीआई (SDPI) जैसी पार्टियों सहित मुस्लिम समुदाय ने इस सर्कुलर का विरोध किया। मुस्लिम लीग कन्नूर के जिला महासचिव अब्दुल करीम चेलेरी ने मुख्यमंत्री से इस मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट करने को कहा। यही नहीं मुस्लिम नेताओं ने कन्नूर शहर के पुलिस आयुक्त के पास पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई।

नोटिस का विरोध किए जाने के बाद इसे वापस ले लिया गया और एसएचओ को उनके पद से हटा दिया गया। सरकारी कार्रवाई के बाद अधिकारी ने कहा कि यह मस्जिद कमेटी के लिए केवल एक सलाह थी। सर्कुलर को वापस लेते हुए पुलिस कमिश्नर ने एसएचओ बीजू प्रकाश से स्पष्टीकरण भी माँगा।

केरल प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के उपाध्यक्ष वीटी बलराम ने हाल ही में एक मंदिर में वरिष्ठ नेता पीसी जॉर्ज के कथित नफरती भाषण का जिक्र करते हुए सवाल पूछा था कि क्या एलडीएफ सरकार नफरत फैलने वालों पर लगाम लगाने के लिए मंदिर समितियों को भी नोटिस जारी करेगी? बता दें कि सीएमओ ने नोटिस के संबंध में सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार किए जाने का दावा करते हुए अपने बयान में कहा है कि ऐसे समय में जब स्वार्थी लोग राज्य में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे है, विभिन्न धर्मों, धार्मिक संस्थानों और आम जनता के बीच मित्रता और शांति को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

झारखंड के गिरिडीह में पथराव के बाद दहशत में हिंदू, 150 मकान-दुकान पर लगे ‘बिक्री’ के पोस्टर: पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई के आरोपों को नकारा

झारखंड के गिरिडीह में पचंबा थाना क्षेत्र के हटिया रोड पर करीब 150 मकान-दुकानों पर ‘बिक्री है’ के पोस्टर लगे हैं। ये मकान-दुकान हिंदुओं के बताए जा रहे। रिपोर्टों के अनुसार 12 जून 2022 की रात पथराव की घटना के बाद पुलिस की एकतरफा कार्रवाई ने हिंदुओं को पलायन के लिए मजबूर किया है। हालाँकि पुलिस ने इन आरोपों को नकार दिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक 12 जून को छेड़खानी को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने पर पथराव शुरू हो गया। भारी पुलिस बल ने हालत को काबू किया था। इसके अगले दिन सोमवार (13 जून 2022) को पुलिस ने 2 नाबालिगों सहित कुल 7 को गिरफ्तार कर हजारीबाग रिमांड होम और गिरिडीह जेल भेज दिया। इस कार्रवाई को हिन्दुओं ने एकतरफा बता कर पलायन का एलान किया है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे आए दिन होने वाली छेड़छाड़, पत्थरबाजी और विरोध करने वालों पर होने वाली FIR की घटनाओं से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि गुनाहगार आराम से घूम रहे हैं, जबकि बेगुनाह जेल भेजे जा रहे हैं। पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने बुधवार (15 जून 2022) को धरना भी दिया। धरने में शामिल लोगों के मुताबिक उन लोगों पर भी केस दर्ज हो गए हैं जो पथराव के दौरान अपनी दुकानों और घरों को बचाने की कोशिश कर रहे थे।

भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन गिरिडीह के जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्रा ने लिखा है, “झारखंड राज्य के गिरिडीह जिला के पचंबा में मुस्लिमों से परेशान होकर बहुसंख्यक समुदाय के निवासी दहशत में हैं। आलम यह है कि उन्होंने अपने दुकान और मकान पर बेचने का बोर्ड लगा कर यहाँ से भागने विचार कर लिया है।”

वहीं गिरिडीह पुलिस ने इन आरोपों को नकार दिया है। पुलिस के मुताबिक FIR CCTV फुटेज के आधार पर दर्ज की गई है। गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक अमित रेणु ने कहा, “धरना दे रहे लोगों से बातचीत के लिए अधिकारी नियुक्त कर दिए गए हैं। एकतरफा कार्रवाई के आरोप निराधार हैं। मामले में शामिल अन्य आरोपितों की भी गिरफ्तारी के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।”