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श्रीलंकाई कंपनी को बेच दी करोड़ों की मछलियाँ, मछुआरों को बड़ा नुकसान: NCP सांसद मोहम्मद फैज़ल रिश्तेदार सहित CBI की रडार पर

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के लोकसभा सांसद मोहम्मद फैज़ल की जाँच टूना मछली कथित घोटाले में कर रही है। इस केस में सांसद के रिश्तेदार अब्दुल रज़्ज़ाक भी कोलंबो की एक कम्पनी के साथ CBI के रडार पर बताए जा रहे हैं। सीबीआई के साथ इस जाँच में लक्ष्यद्वीप प्रशासन का विजलेंस विभाग भी शामिल है। इस घोटाले में संबंधित विभाग के कुछ स्थानीय अधिकारियों की संलिप्तता की भी आशंका जताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक DIG रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में CBI की 25 सदस्यीय टीम इस कथित भ्रष्टाचार की जाँच कर रही है। टूना मछली की अंतर्राष्ट्रीय मार्किट में कीमत लगभग 400 रुपए प्रति किलो है। इसे LCMF (लक्ष्यद्वीप कॉर्पोरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन) द्वारा स्थानीय मछुआरों से खरीदा गया। बाद में इसे श्रीलंका की राजधानी कोलंबो स्थित SRT जनरल मर्चेंट नाम की कम्पनी को बेचा गया था। लेकिन बदले में ART कम्पनी ने LCMF को पैसे नहीं दिए। इस से स्थानीय मछुआरों को काफी नुकसान उठाना पड़ा।

CBI का मानना है कि मछुआरों के इस नुकसान के पीछे कुछ सरकारी कर्मचारी और अधिकारी भी जिम्मेदार हो सकते हैं। जाँच एजेंसी का मानना है कि मछलियों को SRT कम्पनी को बेचने के दौरान नियमों का उललंघन हुआ है और LCMF ने स्थानीय मछुआरों से भारी मात्रा में मछलियों खरीदने के लिए NCP सांसद मोहम्मद फैज़ल के प्रभाव का प्रयोग किया। फैज़ल का रिश्तेदार अब्दुल रज़्ज़ाक श्रीलंका की उसी कम्पनी में प्रतिनिधि था जिस पर मछलियों के बदले LCMF का पैसा न देने का आरोप है।

फिलहाल CBI की टीम मछलियों के इस डील की सभी नई और पुरानी फाइलें खँगाल रही है। इसी के साथ NCP सांसद मोहम्मद फैज़ान के श्रीलंका की कम्पनी से रिश्तों की भी पड़ताल चल रही है। CBI की जाँच के दायरे में LCMF के अलावा मत्स्य विभाग, PWD, खादी बोर्ड और पशुपालन विभाग भी हैं। वहीं इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए NCP सांसद मोहम्मद फैज़ल ने CBI जाँच की जानकारी होने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में कोई भ्र्ष्टाचार नहीं है और CBI की जाँच यदि हो रही होगी तो उसमें सच निकल कर सामने आएगा।

‘हमारा शरीर, हमारा अधिकार’: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात पर लगाया बैन तो सड़क पर उतरीं महिलाएँ, बायडेन और ओबामा की पत्नी भी नाराज़

अमेरिका (America) में गर्भपात (Abortion) के कानूनों पर पर बड़ा फैसला लेते हुए वहाँ के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गर्भपात पर प्रतिबंध लगा दिया है। शीर्ष अदालत ने 50 साल पुराने रो बनाम वेड के फैसले को पलट दिया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सैमुअल ए अलिटो ने अपने फैसले में कहा कि देश का संविधान गर्भपात की इजाजत नहीं देता है।

कोर्ट ने रो वी वेड मामले में 49 साल पुराने कानूनी फैसले को पलट दिया, जिसमें गर्भपात को कानूनी संरक्षण दिया गया था। इस फैसले को सुनाने वाली बेंच में कुल 6 जज शामिल थे, जिसमें से पाँच पुरुष थे। जबकि, दो महिला जजों समेत तीन लिबरल जजों ने अबॉर्शन को बैन करने के फैसले के विरोध में वोट किया। फिलहाल कोर्ट के इस फैसले का अमेरिका में विरोध भी शुरू हो गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना करते हुए कहा, “देश के लिए दुखद दिन है। करीब 50 साल पहले रो बनाम वेड का फैसला हुआ था। आज संयुक्त राज्य के सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से अमेरिकी लोगों से एक संवैधानिक अधिकार को छीन लिया। ये व्यक्तिगत स्वतंत्रता के हनन है।”

वहीं पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस फैसले को लाखों अमेरिकियों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कुचलने वाला करार दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी महिलाएँ इस लड़ाई में आगे रहेंगी।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने ट्वीट किया, “गर्भपात सभी महिलाओं का मौलिक अधिकार है। इसे संरक्षित किया जाना चाहिए। मैं उन महिलाओं के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करना चाहता हूँ, जिनकी स्वतंत्रता को संयुक्त राज्य के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कम किया जा रहा है।”

विरोध में उतरी महिलाएँ

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की पत्नी मिशेल ओबामा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ‘दिल तोड़ने वाला’ बताया। उन्होंने एक ट्विटर पोस्ट के जरिए कहा, “मैं इस देश के उन लोगों के लिए दुखी हूँ, जिन्होंने अपने शरीर के बारे में निर्णय लेने का मौलिक अधिकार खो दिया है।”

इसी तरह से एक्ट्रेस और कॉमेडियन एमी शूमर ने गर्भपात के अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर कहा कि हमारे शरीर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। एमी ने दावा किया कि गर्भपात एक हेल्थ सर्विस है। सुप्रीम कोर्ट गलत दिशा में जा रहा है। उन्होंने कहा, “महिलाएँ अधिक अधिकार चाहती हैं, गर्भपात तक अधिक पहुँच और अधिक स्वतंत्रता चाहती हैं, कम नहीं।”

अमेरिकन सुपर स्टार ओलिविया रोड्रिगो ने गर्भपात पर बैन का विरोध करते हुए कहा, “हमारे शरीर कभी भी राजनेताओं के हाथों में नहीं होने चाहिए।” उन्होंने कहा कि हम सुरक्षित गर्भपात की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठा सकते हैं।

धोखाधड़ी कर के 12 निकाह करने वाला शमशाद गिरफ्तार, खुद को बताता था कुँवारा: नाबालिग का अपहरण, अब 13वीं की फिराक में था

बिहार के पूर्णिया जिले में पुलिस ने शमशाद नाम के एक व्यक्ति को नाबालिग लड़की के अपहरण मामले में गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि जाँच के दौरान उसकी 12 बीवियाँ होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस को शमशाद उर्फ़ मनोवर की 6 साल से तलाश थी। शमशाद हर बार खुद को कुँवारा बता कर एक नई लड़की से निकाह कर रहा था। बताया जा रहा है कि आरोपित 13वाँ निकाह करने की फिराक में था लेकिन उस से पहले ही वो पकड़ा गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित शमशाद पूर्णिया जिले के ही थाना कोचाधामन क्षेत्र में आने वाले गाँव अनारकली का रहने वाला है। उस पर 8 दिसंबर 2015 में अनगढ़ थानाक्षेत्र के गाँव बिजवार निवासी एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण की FIR दर्ज करवाई थी। तब पुलिस ने सप्ताह भर के अंदर लड़की को बरामद कर लिया था, लेकिन शमशाद फरार हो गया था। यह बरामदगी बिहार के ही जिला किशनगंज के LRP चौक से हुई थी।

तब से, शमशाद फरार ही चल रहा था। हालाँकि पुलिस उसकी खोज लगातार कर रही थी। केस के इन्वेस्टिगेशन पुलिस अधिकारी सुमन सौरभ के मुताबिक उन्हें आरोपित के गाँव कोइडांगी में होने की सूचना मिली जो कि थाना बहादुरगंज में स्थित है। इस सूचना पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान शमशाद ने अपने एक दर्जन निकाह की जानकारी पुलिस को दी।

खास बात ये रही कि शमशाद से निकाह करने वाली सभी लड़कियों को उसके पहले से शादीशुदा होने की जानकारी नहीं थी। पुलिस अब तक शमशाद की 7 बीवियों से सम्पर्क कर के जानकारी जुटा चुकी है। उन सभी ने ये माना कि शमशाद ने उन्हें प्रेमजाल में फँसा कर झूठ बोल कर निकाह किया था। जिस नाबालिग लड़की के अपहरण करने का उस पर केस दर्ज हुआ था उस से वो शमशाद निकाह करना चाहता था। पुलिस ने शमशाद को जेल भेज दिया है।

‘बच्चों को आगे कर पुलिस पर बरसाए पत्थर’: प्रयागराज के दंगाई जावेद पंप को कोर्ट ने 2 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा, कहा – थर्ड डिग्री न दें

नूपुर शर्मा के पैगंबर मुहम्मद को लेकर कथित बयान के विरोध में प्रयागराज में दंगा (Prayagraj Riots) फैलाने के मुख्य आरोपित जावेद अहमद उर्फ ​​जावेद पंप (Javed Ahmed Pump) को कोर्ट ने दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। पुलिस की माँग पर सुनवाई करते हुए अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अमित कुमार ने अभियोजन अधिकारी किसलय पांडेय, अविनाश सिंह की दलीलें के आधार पर पुलिस को ये आदेश दिया। हालाँकि, इस दौरान दंगाई जावंद पंप पर एक रहम दिखाते हुए कोर्ट ने पुलिस को किसी भी तरह की थर्ड डिग्री टॉर्चर नहीं करने को कहा है।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस ने जो आवेदन दिया है वो स्वीकार करने योग्य है। दंगे के मुख्य आरोपित जावेद पंप को इस शर्त के साथ दो दिन की पुलिस कस्टडी दी जा रही है कि इस दौरान पुलिस कोई कठोर कदम नहीं उठाएगी। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस ने अपनी अपील में कहा कि अभी भी मामले की जाँच की जा रही है और सबूतों का पता लगाने के लिए जावेद को हिरासत में लिया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि पैगंबर मुहम्मद के कथित अपमान के विरोध में 10 को जुमे के बाद प्रयागराज में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने बड़े पैमाने पर हिंसा की थी। इसके बाद इसके मुख्य साजिशकर्ता जावेद को गिरफ्तार कर लिया गया था। ऐसी खबरें सामने आई थीं कि जावेद ने ही मुस्लिमों को उकसाया और उनके साथ मिलकर पुलिस और अधिकारियों पर पथराव करने के लिए बच्चों को आगे कर दिया। SSP प्रयागराज के अनुसार, जावेद अहमद की बेटी आफरीन फातिमा, जो कि जेएनयू की पूर्व स्टूडेंट है, वो भी इसमें शामिल है।

ये हिंसा प्रयागराज के करेली थाने के अटाला क्षेत्र में हुई थी। जहाँ जुमे की नमाज के बाद नूपुर शर्मा विरोध में निकाली गई रैली हिंसक हो गई, प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाने के बाद सुरक्षा बलों पर पथराव किया। विरोध प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और प्रान्तीय सशस्त्र कॉन्स्टेबल (PAC) ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। सुरक्षाकर्मियों की लाख कोशिशों के बावजूद लगातार पथराव होता रहा। पथराव में भी प्रयागराज एडीजी की गाड़ी भी क्षतिग्रस्त हो गई है।

जावेद का अवैध घर तोड़ा

12 जून, 2022 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हिंसा के मामले के मुख्य साजिशकर्ता जावेद अहमद के अवैध घर को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया था। तोड़फोड़ के दौरान पुलिस ने जावेद के घर से अवैध असलहे भी बरामद हुए थे। उसके घर से पुलिस ने दो पिस्टल बरामद की थी। इसमें दो हथियार 12 बोर की पिस्टल और 315 बोर की पिस्टल हैं। इसके अलावा आरोपी ने अन्य कारतूस अपने घर में छिपा कर रखे थे। परिसर से हथियारों और बारूद के अलावा, विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज और पोस्टर पाए गए।

‘कु%$# ने इस्लाम बर्बाद कर रखा है’ : हिना खान की बोल्ड तस्वीरें देख कट्टरपंथियों को आया गुस्सा, कहा- भिखारी भी तुमसे अमीर लगते हैं

हिना खान (Hina Khan) भारतीय टीवी इंडस्ट्री के सबसे लोकप्रिय नामों में से एक हैं। ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ टीवी सीरियल से अलग पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस मुस्लिम होते हुए भी बोल्ड तस्वीरों को पोस्ट करने से कोई परहेज नहीं करती हैं। वो फिलहाल दुबई में छुट्टियाँ मना रही हैं, जहाँ से उन्होंने बिकनी या मोनोकिनी में इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीर पोस्ट की। लेकिन उनका ये अंदाज इस्लामवादियों को रास नहीं आया। अब उन्हें बुरी तरह से ट्रोल किया जा रहा है।

इसी क्रम में सईदा रुकसार जैदी नाम की एक यूजर ने हिना खान के पहनावे पर सवाल उठाते हुए कमेंट किया, “इस लड़की को शर्म नाम की कोई चीज नहीं है क्या?”

फोटो साभार: हिना खान का इंस्टाग्राम अकाउंट

हिना खान को ट्रोल करते हुए जिया फातिमा (Ziyafatima421) नाम की यूजर ने कहा, “अल्लाह आपको सही रास्ते पर चलने का तौफी अता फरमाए।” इसके साथ ही यूजर ने रोने की इमोजी भी लगाई।

फोटो साभार: हिना खान का इंस्टाग्राम अकाउंट

तुश्मी तहसीन (Tushmitahsin 274) नाम की एक अन्य यूजर ने हिना खान की मोनोकिन तस्वीर पर कमेंट किया कि आप को मुस्लिम कहते हुए भी शर्म आती है।

फोटो साभार: हिना खान का इंस्टाग्राम अकाउंट

एक अन्य इस्लामिक कट्टरपंथी अरमान अहमद ने हिना के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया। यूजर ने कहा, “इस कुत्ती ने इस्लाम को बर्बाद कर रखा है। काश तेरे अब्बू बच गए होते और उनकी जगह तू मर गई होती।”

फोटो साभार: हिना खान का इंस्टाग्राम अकाउंट

एक अन्य यूजर ने एक्ट्रेस के कपड़ों पर तंज कसते हुए कहा, “आपके कपड़ों को देखने के बाद मेरी गली के भिखारी मुझे आपसे अधिक अमीर लगते हैं।”

फोटो साभार: हिना खान का इंस्टाग्राम अकाउंट

इस्लामिक कट्टरपंथी आरजू शेख ने हिना खान को धमकाते हुए पूछा, “मौत से डर नहीं लगता है क्या?”

फोटो साभार: हिना खान का इंस्टाग्राम अकाउंट

गौरतलब है कि हिना कान्स फिल्म फेस्टिवल समेत कई अन्य कार्यक्रमों में प्रतिनिधित्व करके देश को गौरवान्वित करती रही हैं। वो खतरों के खिलाड़ी रियलिटी शो का भी हिस्सा रह चुकी हैं। एक्ट्रेस फिलहाल दुबई में अपनी छुट्टियाँ इंज्वॉय कर रही हैं और अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर अपलोड करती रहती हैं।

उधर कट्टर मुस्लिम भीड़ ने 59 हिन्दुओं को ज़िंदा जलाया, इधर नैरेटिव सेट करने में लगा मीडिया: अंदर के लोगों से ही जानिए 2002 को लेकर कैसे हुआ ‘खेल’

वो 27 फरवरी, 2002 की सुबह थी, जब गोधरा में मुस्लिम भीड़ द्वारा एक ट्रेन में आग लगा दी गई। मंशा थी – हिन्दुओं को निशाना बनाना। भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या से जो तीर्थयात्री लौट रहे थे, उन्हें ज़िंदा जला दिया गया। 1000-2000 की मुस्लिम भीड़ द्वारा किए गए इस जघन्य करतूत में 59 हिन्दुओं की मौत हो गई, जिनमें 27 महिलाएँ और 10 बच्चे शामिल थे। मीडिया ने इसके बाद हुए हिन्दू-मुस्लिम दंगों को खूब चलाया, लेकिन गोधरा की घटना को छिपाने में पूरी ताकत लगा दी।

गुजरात दंगा मामले में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को जाँच के नाम पर प्रताड़ित करने के लिए यूपीए सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें क्लीन चिट दे दी, और अब इस क्लीन चिट को बरकरार रखने का आदेश आया है। नरेंद्र मोदी ने जाँच एजेंसियों के समन, न्यायपालिका की सुनवाई और राजनीतिक विरोध का भरसक सम्मान किया। लेकिन, गुजरात दंगों में उन्हें दोषी दिखाने के लिए विपक्षियों ने मर्यादा की सारी हदें लाँघ दीं।

NGO, भाजपा विरोधी पार्टियों और पत्रकारों का ‘त्रिकूट’, जिसने 2002 के नैरेटिव में गोधरा की घटना को हटा दिया

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि कैसे भाजपा विरोधी राजनीतिक पार्टियाँ, कुछ आइडियोलॉजिकली राजनीति में आए हुए पत्रकार और कुछ NGO ने मिल कर, इस त्रिकूट ने इन आरोपों को इतना प्रचारित किया और इनका ईकोसिस्‍टम भी इतना मजबूत था कि धीरे-धीरे लोग झूठ को ही सत्‍य मानने लगे। उन्होंने तीस्ता सीतलवाड़ का जिक्र किया, जिसका NGO इस पूरे प्रकरण में खासा सक्रिय था। जाकिया जाफरी किसके इशारे पर लगातार सुर्खियाँ बनती रहीं?

उस समय ‘तहलका’ पत्रिका ने भी स्टिंग के नाम पर मोदी को बदनाम करने की कोशिश की, लेकिन उसे भी न्यायपालिका ने खारिज कर दिया। इसी तरह अमित शाह ने याद दिलाया कि कैसे यूपीए सरकार ने तीस्ता के NGO की जम कर मदद की। गुजरात दंगों में मारे गए कॉन्ग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जकिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि तीस्ता ने उनकी भावनाओं का फायदा उठाया। राना अय्यूब ने ‘गुजरात फाइल्स’ लिख कर किताब के जरिए प्रोपेगंडा फैलाने की कोशिश की।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें मीडिया चैनलों में बहस के लिए बुलाया जाने लगा और उनके द्वारा कही गई बातों को सत्य माना जाने लगा। भले ही आज वो चंदा चोरी के आरोपों में फँसी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी पुस्तक को शंकाओ, अनुमानों और कल्पनाओं पर आधारित बताते हुए ख़ारिज कर दिया था। देश की सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया था कि किसी व्यक्ति की राय सबूत नहीं हो सकती। अमित शाह ने याद दिलाया कि कैसे दो दशक तक एक नेता दर्द झेलते हुए इस लड़ाई को लड़ता रहा, उन्होंने ये करीब से देखा है।

हर इंटरव्यू से लेकर लेखों और मोदी से जुड़े सभी खबरों में उनके नाम के साथ मीडिया ने ‘2002’ लगा दिया। लेकिन, इसमें गोधरा का कहीं जिक्र क्यों नहीं किया गया? 59 हिन्दुओं को ज़िंदा जलाने वाली मुस्लिम भीड़ को बचाने के लिए कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इसे ‘दुर्घटना’ करार दिया। सोनिया गाँधी ने मोदी को ‘मौत का सौदागर’ बता दिया। राहुल गाँधी ने ‘ज़हर की खेती’ के आरोप लगाए। सच में, एक पूरा इकोसिस्टम गोधरा को छिपाने के लिए नरेंद्र मोदी के पीछे पड़ा था।

वरिष्ठ पत्रकार ने उदाहरण देकर बताया, रिपोर्टिंग में निष्पक्षता के नाम पर कैसे किया गया ‘खेल’

लंबे समय तक कई प्रमुख मीडिया चैनलों में काम कर चुके प्रखर श्रीवास्तव ने इस मुद्दे पर बोलते हुए बताया कि सच दिखाना चाहिए, लेकिन सच दिखाने का तरीका क्या होना चाहिए? उन्होंने कहा कि मीडिया में दोनों तरफ की बातें दिखाने की बात की जाती है, लेकिन दोनों पक्ष दिखाने के नाम पर क्या खेल होता है और क्या नैरेटिव सेट होता है, 2002 के दंगों के समय ‘देश के सबसे बड़े टीवी पत्रकार’ ने स्पष्ट रूप से गोधरा की रिपोर्टिंग के समय कहा था कि एक भीड़ ने, जिसका कोई चेहरा नहीं है, एक बोगी पर हाला दिया।

प्रखर श्रीवास्तव ने कहा कि भले ही इसके पीछे की मंशा को एक आम आदमी न समझ पाए, लेकिन एक पत्रकार इसे समझ सकता है। अब प्रखर श्रीवास्तव ने उसी पत्रकार की रिपोर्टिंग का दूसरा उदाहरण दिया। जब वो गुजरात दंगों में नरोडा पाटिया से रिपोर्टिंग कर रहा होता है, तब खुल कर कहता है कि ‘हिन्दुओं की भीड़ ने मस्जिद पर हमला किया।’ प्रखर श्रीवास्तव कहते हैं कि सवाल पूछने पर वो पत्रकार कहेगा कि मैंने तो दोनों पक्ष लिखा है, गोधरा और नरोडा पटिया – दोनों की रिपोर्टिंग की।

प्रखर श्रीवास्तव ने इस घटना का उदाहरण देने के बाद कहा, “नरोडा पाटिया की रिपोर्टिंग और गोधरा की रिपोर्टिंग में शब्दों का जो अंतर है, आपने जो नैरेटिव सेट किया 2002 में, उसकी सज़ा हम आज भुगत रहे हैं। इसीलिए, किसी को भी ये नहीं कहना चाहिए कि 2014 से ही सब बदला है।” प्रखर श्रीवास्तव की बातों से स्पष्ट है कि मीडिया के कितने ही पत्रकारों ने इस तरह के खेल कर के कितने ही नैरेटिव 2002 को लेकर सेट किए होंगे, तभी आज ‘गुजरात दंगों’ की बात कर के हिन्दुओं को दोष दिया जाता है, लेकिन गोधरा की घटना के बारे में नई पीढ़ी को कुछ पता ही नहीं।

एक युवा पत्रकार के अनुभव से समझिए कैसे मीडिया ने 2002 को लेकर अपना नैरेटिव सेट किया

राहुल रौशन ने अपनी पुस्तक ‘Sanghi Who Never Went To A Shakha‘ के एक हिस्से में उस दौर को याद किया है, जब वो एक युवा पत्रकार हुआ करते थे। वो बताते हैं कि जब ये हमला हुआ, तब वो दिल्ली में बेर सराय से झंडेवालान के लिए DTC की बस लेने जा रहे थे, जहाँ ‘आज तक’ का दफ्तर हुआ करता था। वो जब तक दफ्तर पहुँचे, तब तक गोधरा की घटना सुर्खियाँ बन चुकी थीं, लेकिन इसे कहीं भी आतंकी हमला या यहाँ तक कि हिंसक भी नहीं बताया जा रहा था।

सूचनाएँ अभी आ ही रही थीं, ऐसे में उन्हें भी ऐसा लगा कि पैंट्री कार में आग लगने के कारण ये हादसा हो गया था। अगले एक घंटे के अंदर गुजरात से ग्राउंड रिपोर्टरों ने अतिरिक्त सूचनाएँ भेजनी शुरू कर दी और न्यूज़रूम में सबको पता चला गया कि ये दुर्घटना नहीं है। प्रशासन और ट्रेन के अन्य यात्रियों से बातचीत कर के रिपोर्टरों को पता लगा कि एक भीड़ ने ये किया है। ग्राउंड से ‘इनपुट डेस्क’ तक सूचनाएँ आ रही थी, वहाँ से ‘कॉपी एडिटर्स’ को, फिर वहाँ से उन्हें खबरों में चलाया जा रहा था।

राहुल रौशन बताते हैं कि एक कॉपी एडिटर और इनपुट डेस्क के व्यक्ति की बातचीत सुनने के लिए वो पास खड़े हो गए और ऐसा दिखाने लगे जैसे वो टीवी पर खबर देख रहे हों। कॉपी एडिटर ने पूछा, “पता चला कौन किया?” इनपुट डेस्क के व्यक्ति ने जवाब दिया, “मुसलमान सब, और कौन।” थोड़ी देर रुक कर कॉपी एडिटर ने कहा, “अब ये तो नहीं लिख सकते ना?” इनपुट डेस्क के व्यक्ति के चेहरे पर गुस्सा दिख रहा था, लेकिन वो शांति से कुछ फैक्स फोटोकॉपीज टेबल पर रख कर वहाँ से निकल गया।

राहुल रौशन लिखते हैं कि इस 10 सेकेंड की बातचीत ने काफी कुछ बता दिया। मेनस्ट्रीम मीडिया ‘अनियंत्रित हिन्दू भीड़ ने 16वीं शताब्दी की मस्जिद को ध्वस्त किया’ और ‘दबंग राजपूतों ने दलित दूल्हे को घोड़ी से उतारा’ जैसे हेडलाइंस लिख सकता है, लेकिन यहाँ आरोपितों के जाति-धर्म को बता सकता है, लेकिन आरोपित मुस्लिम हो तो इसे उसका मजहब लिखने में खासी असुविधा होती है। गोधरा में वो भीड़ का मजहब स्पष्ट दिख रहा था।

‘मुस्लिम भीड़ ने हिन्दू तीर्थयात्रियों को ले जा रही ट्रेन को आग के हवाले किया’ – ये सत्य होने के बावजूद मेनस्ट्रीम मीडिया में एक ‘जिम्मेदार’ और वैध हैडिंग नहीं मानी जाएगी। दशकों से ये यही ट्रेंड लेकर चल रहे हैं और इससे अलग हटने पर नैतिकता की दुहाई दी जाती है। जाति को हाइलाइट कर के इस बारे में चिल्लाना न्याय की लड़ाई कहा जाता है और अपराधियों के मजहब को छिपाना जिम्मेदार व्यवहार। हाँ, आरोपित हिन्दू हों तो ये सब नियम-कानून नहीं चलते।

ऐसे मामलों में तो यही पत्रकार ‘बीफ’ और ‘जय श्री राम’ बुलवाने जैसे झूठे आरोप लगा कर दोगुनी ताकत से प्रोपेगंडा फैलाने में जुट जाते हैं। मीडिया के इसी रवैये ने हमें इस कदर ढाल दिया कि हम ये सोचते हुए बड़े हुए कि एक हिन्दू कभी अन्याय या घृणा का पीड़ित हो ही नहीं सकता। हाँ, अगर वो दलित है तो इसे बढ़ा-चढ़ा कर बताया जाएगा। इस देश में हिन्दू-मुस्लिम का रिश्ता ऐसा बना दिया गया, जहाँ डिफ़ॉल्ट रूप से हिन्दू अत्याचारी है और मुस्लिम पीड़ित।

राहुल रौशन लिखते हैं कि इसी कारण एक औसत हिन्दू में खुद के दोषी होने की भावना आ जाती है, जिससे वो मुस्लिमों को खुश करने के लिए कुछ भी करने लगता है। वो अपनी सोच को ही इस्लामी बना लेता है। हमने देखा कि कैसे CAA का विरोध करने के लिए हजारों हिन्दू सड़क पर उतरे और जिन्ना के प्रशंसकों और मोपला नरसंहार के नेता को अपनी प्रेरणा मानने वालो के साथ कंधा से कंधा मिला कर विरोध प्रदर्शन किया।

ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं, जब मीडिया ने इसी तरह का खेल किया। ये सोशल मीडिया का जमाना है, जहाँ लोगों को किसी न किसी माध्यम से कड़वी सच्चाई का पता लग ही जाता है। सोचिए, दशक पहले क्या स्थिति रही होगी। रिपोर्टिंग कितना पक्षपाती रहा होगा। जब लोगों ने मीडिया के झूठ का पर्दाफाश करना शुरू कर दिया तो उन्होंने इसे ‘पोस्ट ट्रुथ’ बता दिया। राहुल रौशन लिखते हैं कि अधिकतर पत्रकारों को पता था कि 2002 में गोधरा में क्या हुआ।

पुस्तक में उन्होंने लिखा है, “पत्रकारों को पता था कि ये आतंकी हमला है और निहत्थे व निर्दोष हिन्दुओं पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया। फिर भी इसके ढाई साल बाद जब कॉन्ग्रेस ने केंद्र सरकार में वापसी के बाद कमिटी गठित की और इस कमिटी ने इसे ‘दुर्घटना’ बता दिया, तब शायद ही किसी पत्रकार ने विरोध में स्वर उठाए हों। न्यूज़रूम में वो बातचीत सुनने के बाद मुझे ये भी अनुभव हुआ कि भले ही हम एक पत्रकार के रूप में कड़वी सच्चाई को बोलना चाहते हों, हमें उनके बने-बनाए नैतिकता के मापदंडों के सामने आत्म-समर्पण करना पड़ेगा।”

महाराष्ट्र: शिवसेना के गुंडों ने बागी MLA के ऑफिस में की तोड़फोड़, शिंदे गुट बोला- बालासाहेब के नाम पर बन सकती है नई पार्टी

महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे सियासी घमासान के बीच जहाँ एकनाथ शिंदे ने उद्धव सरकार पर कई बागी विधायकों के परिजनों की सुरक्षा छीनने का इल्जाम लगाया है। वहीं दूसरी ओर खबर आई है कि शिंदे को समर्थन देने वाले एक विधायक के कार्यालय पर शिवसैनिक हमला भी कर चुके हैं। इस बीच पार्टी के दिग्गज नेता संजय राउत हालात कंट्रोल करने की बजाय कहते सुने गए अगर शिवसैनिकों को भड़काया तो आग लग जाएगी।

बता दें कि कई शिवसैनिकों ने एकनाथ शिंदे को समर्थन देने पर बागी विधायक तानाजी सावंत के पुणे कार्यालय में तोड़फोड़ की। साथ ही वहाँ जय शिवाजी के नारे भी लगाए। ये घटना ठीक उस समय घटित हुई जब एकनाथ शिंदे ने पत्र लिखकर बताया था कि उनके समर्थन में आए 38 विधायकों के परिवार के सदस्यों की सुरक्षा सरकार ने वापस ले ली है। अपने ट्वीट में विधायकों के नाम जारी कर उन्होंने कहा था कि सरकार की जिम्मेदारी है विधायकों को और उनके परिवारों की रक्षा करना।

शिंदे के इस आरोप पर महाराष्ट्र के गृह मंत्रालय ने बयान जारी किया है कि उन्होंने या मुख्यमंत्री ने किसी विधायक की सेक्योरिटी वापस लेने का कोई ऑर्डर नहीं दिया है। लेकिन पार्टी के संजय राउत ने शिंदे द्वारा लिखे पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायकों को कहा, “आप एक विधायक हैं इसलिए आपको सुरक्षा मिली है। आपके परिवार के सदस्यों को वैसी ही सुरक्षा मुहैया नहीं कराई जा सकती।”

बन सकती है नई पार्टी: शिंदे गुट

बता दें कि शिवसैनिकों में पिछले दिनों हुई दो फाड़ के बाद बागी जहाँ बैठकों और जनसभाओं को संबोधित करने की खबरें लगातार आ रही हैं। राउत ने शिवसेना का भविष्य आदित्य ठाकरे को बता दिया है। वहीं बागी विधायकों में से एक दीपक केसरकर ने कहा है कि शिंदे गुट बालासाहेब ठाकरे के नाम पर नई पार्टी बना सकता है।

इसी तरह दूसरे कोरेगाँव सतारा के बागी विधायक ने एनसीपी पर शिवसेना पार्टी को खत्म करने का आरोप लगाया है। उनकी शिकायत है कि उन्होंने कई बार उद्धव ठाकरे से एनसीपी की शिकायक की लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। अब वह लोग बालासाहेब की विचारधारा को बचाने के लिए अपना स्टैंड लेंगे।

उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ महाराष्ट्र में सरकार बचाने के लिए आज शिवसेना राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक कर रही है। वहीं भारतीय जनता पार्टी भी सहयोगी दलों से बातचीत में जुट गई है। उधर खबर आई है कि उद्धव सरकार ने डिप्टी स्पीकर को एक अर्जी दी है जिसमें 16 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने की बात है। इस अर्जी को जिरवाल ने स्वीकार लिया है जिसकी वजह से गुवाहाटी में बैठे विधायकों ने उनके ऊपर सरकार को समर्थन देने का इल्जाम लगाया है।

जूते पहन कर शिवलिंग पर बियर उड़ेला, बगल में दूसरा पी रहा था… तीसरा शूट करता रहा वीडियो… चंडीगढ़ पुलिस में शिकायत, विरोध-प्रदर्शन का एलान

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो से शिवलिंग के अपमान का मामला प्रकाश में आया है। वायरल वीडियो में 2 युवक जूते पहन कर एक नदी के किनारे शिवलिंग पर कथित रूप से बियर बहा रहे हैं जबकि तीसरा व्यक्ति वीडियो बना रहा है।

यह वायरल वीडियो कब और कहाँ का है, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। बजरंग दल और भाजपा ने इस मामले की शिकायत चंडीगढ़ पुलिस से की है। चंडीगढ़ पुलिस की साइबर सेल ने वीडियो की जाँच शुरू कर दी है।

इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि नदी के किनारे कच्चे घाट पर 2 शिवलिंग हैं। वीडियो में 2 युवकों के हाथ में बियर की केन दिखाई दे रही है। उन्होंने जूते भी पहन रखे हैं। उसमें से एक नीली टी-शर्ट वाले युवक ने शिवलिंग पर बियर चढ़ाई। बगल ही एक अन्य युवक बियर पी रहा है। वायरल वीडियो के बैकग्राउंड में महादेव शिव का गाना भी बज रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस व्यक्ति ने शिवलिंग पर बियर चढ़ाई है, उसका नाम नरेश उर्फ़ कालिया है। हिन्दू संगठन के लोग आरोपित युवक के घर भी गए, जहाँ उसकी माँ ने उसके घर न होने की जानकारी दी। इसी के साथ 2 अन्य आरोपित युवकों में से एक पंचकुला का विनोद और तीसरा बापूधाम का रहने वाला विवेक बताया जा रहा है।

इस संबंध में हिन्दू संगठनों और भाजपा नेताओं ने मामले की शिकायत चंडीगढ़ के IT पार्क थाने में दर्ज करवाई है। वहाँ से यह केस साइबर सेल को ट्रांसफर कर दिया गया। बजरंग दल ने आरोपितों पर कठोर कार्रवाई न होने पर विरोध प्रदर्शन का एलान किया है।

भगवान राम कैरेक्टरलेस, नूपुर शर्मा के साथ रेप (अप्राकृतिक यौन क्रिया) की सजा: यूट्यूबर वली अहमद का वीडियो, हिंदू-घृणा से भरे कॉमेंट

पटना का एक यूट्यूबर है। नाम है – वली अहमद। 3 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं इसके। अब वली अहमद फँस रहा है। कारण है इस वीडियो में नूपुर शर्मा और उनके समर्थकों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा, और तो और… हिन्दू देवी-देवताओं पर भी बेहद अभद्र टिप्पणी। राजनैतिक विश्लेषक नवीन सिंह ने अपने ट्विटर हैंडल @HackIndia पर 24 जून 2022 (शुक्रवार) को इसके यूट्यूब वीडियो का लिंक शेयर किया।

यह वीडियो 16 जून 2022 को ‘नूपुर शर्मा के अंध भक्त’ नाम की हेडलाइन से बनाया गया है, जिसे अब तक 730000 से अधिक बार देखा जा चुका है। इस पर 3 हजार से भी अधिक कमेंट आ चुके हैं, जिसमें अधिकतर हिन्दू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले हैं। वीडियो कुल 9 मिनट 47 सेकेंड लंबा है।

इस वीडियो के 50वें सेकेंड, 2:25 मिनट, 3:00 मिनट, 4:40 मिनट के बीच वली अहमद नूपुर को ‘शर्मा जी के लौंडिया’ कहता है। वीडियो के 1:37 मिनट पर वली अहमद नूपुर शर्मा के लिए ‘जाहिल औरत’ शब्द का प्रयोग करता है। 3:01 मिनट से 3:09 मिनट के बीच वली अहमद बोला, “उनके भगवान राम की शादी जब सीता माँ से हुई थी तब सीता माँ की उम्र 6 साल थी। फिर तो नूपुर शर्मा के हिसाब से भगवान राम भी कैरेक्टरलेस हुए।”

वली अहमद यहीं खामोश नहीं हुआ। वीडियो के 3:15 मिनट से 3:23 मिनट के बीच वली बोला, “नूपुर शर्मा को जानलेवा न सही पर गाँ$#लेवा सजा जरूर मिलनी चाहिए थी।” वीडियो के 4:06 मिनट से 4:12 मिनट के बीच नूपुर शर्मा के एक समर्थक के बयान पर वली ने कमेंट किया, “इसके हिसाब से आज के बाद जो भी BJP को वोट देगा, वो मियाँ का जना है।” इसी वीडियो के 5:00 मिनट से 7:00 मिनट के बीच वली कई बार नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर व्यंग्य करता है।

वली ने वीडियो के 7:10 मिनट पर एक लड़के को नूपुर शर्मा का ‘नपुंसक भक्त’ कहा। 7:25 मिनट से 7:30 मिनट के बीच वली ने कहा कि नूपुर शर्मा से बड़ा ‘चूतिया’ उनका सपोर्टर है। 7:56 और 8:21 मिनट पर वली अहमद महामंडलेश्वर यति नरसिंहानन्द को ‘पाखंडी बाबा’ कहता है।

8:15वें मिनट पर वली अहमद एक बार फिर यति नरसिंहानंद को ‘सुअर रूपी इंसान, बोलता है। वीडियो के 8:25 से 8:34 मिनट पर वली अहमद ने यति नरसिंहानंद को धमकाते हुए कहा, “तुम अपना तन, मन और बाहुबल नूपुर के बजाय अपनी सुरक्षा में लगाओ क्योंकि तुमने हमारे नबी की शान में नूपुर शर्मा से बड़ी गुस्ताखी की है।”

वली अहमद ने वीडियो के 8:52 से 9:03 मिनट तक यति नरसिंहानंद को फिर से धमकी देते हुए कहा, “इस जानवर के जने को इसकी सजा जल्द मिलेगी। अगर भारत की सरकार से सजा नहीं दे पाई तो उम्मत ए मुसलमां इसे इसके हिस्से की सजा देगा। वीडियो के 9:04 से 9:20 मिनट तक वली अहमद सामूहिक धमकी देते हुए बोला, “आज जो अंधभक्त इन गुस्ताखों का सपोर्ट कर रहे हैं, वो ज़रा सोच समझ कर इनका सपोर्ट करो क्योंकि गुस्ताख़-ए-रसूल का सपोर्ट करने वाला भी गुस्ताख़-ए-रसूल ही होता है। इस्लाम में गुस्ताख़-ए-रसूल की क्या सज़ा है, वो आप इस वीडियो के कमेंट में पढ़ सकते हैं।”

वली अहमद का यूट्यूब कमेंट सेक्शन

इस वीडियो में वली की सोच से सहमति रखने वालों ने उनका पूरा समर्थन किया है। इसी के साथ हिन्दू देवताओं को फर्जी ID बना कर अपमानित भी किया गया है।

गोधरा में जलाए गए कारसेवकों की 59 लाशों को अपनी आँखों से देखा था अमित शाह ने: गुजरात दंगों और उसके पीछे की साजिश पर गृहमंत्री ने बोला सब कुछ

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने 2002 के गुजरात दंगों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने अपने और भाजपा के खिलाफ तमाम बातों को विरोधी पार्टियों के साथ मीडिया का प्रोपोगेंडा बताया। इसी के साथ उन्होंने गोधरा में जलाए गए रामसेवकों पर कॉन्ग्रेस की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने जाकिया जाफ़री को तीस्ता सीतलवाड़ के इशारे पर काम करने वाला बताया।

अमित शाह ने कहा, “PM मोदी की छवि को बदनाम करने के लिए ये पूरी साजिश रची गई थी। लेकिन आख़िरकार सत्य की जीत है। दंगों का राजनैतिक उपयोग करना ही गलत है। मोदी जी की विदेश यात्रा के दौरान उनके खिलाफ लेख लिखे जाते थे। सुप्रीम कोर्ट ने भी ये मान लिया है कि जाकिया जाफ़री किसी और के निर्देश पर काम कर रही है।”

समाचार एजेंसी ANI को दिए वीडियो इंटरव्यू में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुजरात दंगों के अलावा आरक्षण, GST, सर्जिकल स्ट्राइक, किसान आंदोलन, आतंकवाद, पाकिस्तान आदि से संबंधित मसलों पर भी अपनी बात रखी।

अमित शाह ने आगे कहा, “हमने झूठ के सामने लड़ाई लड़ी क्योंकि इतिहास कई हजार सालों तक जीवित रहता है। हमने GST, सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कई लड़ाइयाँ लड़ी हैं। मेरी पार्टी के सर्वोच्च नेता को बदनाम करने की साजिश रची गई। लेकिन उनकी हार हुई। ये PM मोदी के लिए आत्मसंतोष का विषय हो सकता है लेकिन पार्टी के बाकी कार्यकर्ताओं के लिए ये आत्मगौरव की बात है।”

अपनी बात को बढ़ाते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आगे कहा, “दंगा होने का मूल कारण गोधरा में ट्रेन को जला देना था। 16 दिन की बच्ची, जो माँ की गोद में थी… उसे भी जला दिया गया। अपने हाथों से अग्नि-संस्कार किया है मैंने गोधरा में। उस ट्रेन में जले लोगों का अंतिम संस्कार अपनी आँखों से देखा। उनके शवों को एम्बुलेंस से लाया गया। उससे लोगों में दुःख और आक्रोश था। गोधरा में ट्रेन में जले लोगों के शवों की परेड निकाली गई टाइप की बातें साजिश है। गोधरा में ट्रेन को जला देने के कारण दंगे हुए थे। उसके बाद के तमाम दंगे राजनैतिक साजिश से हुए। गुजरात दंगों का कोई आधिकारिक इनपुट भी नहीं था। उस समय के जिम्मेदार लोगों ने अच्छा काम किया था।”

अमित शाह के मुताबिक, “PM मोदी को ये पहली क्लीन चिट नहीं है। नानावटी कमेटी की क्लीन चिट के बाद SIT बनी और सुप्रीम कोर्ट तक मामला गया। फिर भी हमने न्यायिक प्रक्रिया में पूरी आस्था रखी। हम न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ प्रदर्शन नहीं कर सकते। हम खुद चाहते थे कि हमें न्यायालय भी क्लीन चिट दे। मेरा जेल जाना मेरा सौभाग्य है। जो भी हुआ, वो भले के लिए हुआ और उसके परिणाम अच्छे आए।”