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नौकरी के नाम पर केरल की महिलाओं को कुवैत में बंधक बनाया, भूखे रखकर पीटा: अब आतंकी संगठन ISIS के हाथों बेचने की दे रही धमकी

कड़े कानूनों के बावजूद खाड़ी देशों में मानव तस्करी में कमी नहीं आ रही है। हाल ही में कुवैत में कुछ सामाजिक संगठनों के हस्तक्षेप के बाद केरल की तीन महिलाओं को मानव तस्करी नेटवर्क के चंगुल से बचाया गया, लेकिन अभी भी वहाँ सैकड़ों महिलाओं के फँसे होने की खबर है। इसी बीच कुवैत में कई महीनों तक फँसी रही केरल की दो महिलाओं का दिल दहला देने वाला एक ऑडियो क्लिप सामने आया है। अपने वतन वापस लौट चुकी इन महिलाओं ने अपनी आप बीती बताई ​है कि कैसे मानव तस्करी रैकेट ने उन्हें नौकरी का झाँसा दिया और बाद में उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें कुवैत ले जाकर बेच दिया गया।

मानव तस्करी रैकेट ने केरल की दो महिलाओं की कीमत 3,50,000 रुपए लगाई थी। उन्हें कोच्चि स्थित एक ‘भर्ती’ एजेंसी द्वारा कुवैत में घरेलू नौकरानी के लिए बेचा गया था। खाड़ी देश में उन्हें दर्दनाक दौर से गुजरना पड़ा। महीनों बाद यहाँ से बच निकलने में कामयाब रहीं रेखा और उषा (बदले हुए नाम) के पास कई रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानियाँ हैं। इन दोनों को परिवार के भरण-पोषण के लिए विदेश में नौकरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा। बेहद गरीब परिवार से होने के कारण उनके पास कम दिनों में ज्यादा पैसे कमाने का और कोई विकल्प नहीं था। लेकिन उनकी गरीबी का फायदा उठाया गया और उन्हें अपने घरों से बहुत दूर एक अंजान देश में प्रताड़ित किया गया। नौकरी की चाह में झूठे दावों की शिकार हुई महिलाओं ने किसी तरह व्हाट्सएप पर एक ऑडियो क्लिप शेयर किया, उसमें उनके साथ हो रहे दुर्व्यवहार के बारे बताया और उन्हें रैकेट के चंगुल से बचाने की माँग की। इस ऑडियो क्लिप में ये महिलाएँ रो रही हैं और मलयाली भाषा में अपनी दर्दनाक कहानी बता रही हैं कि किस तरह उन्हें कुवैत में शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

द न्यूज मिनट के मुताबिक, ऑडियो में उन्होंने बताया, “हमें यहाँ लाकर कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया, भूखा रखा गया, हमारे साथ मारपीट और गाली गलौच की गई। जबरन श्रम के लिए मजबूर किया गया। इसके अलावा धमकी दी गई कि अगर हमने उनकी बात मानने से इनकार किया तो उन्हें आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) को बेच दिया जाएगा।”

रेखा बताती हैं, “जब मैंने जनवरी 2022 में कुवैत में बेबी सिटर्स और होम नर्स की नौकरी के लिए एक विज्ञापन देखा, तब मैंने उस पर लिखे फोन नंबर पर संपर्क किया। नंबर आनंद नाम के एक व्यक्ति का था, उसने मुझे चलिक्कवट्टम में अपने ऑफिस आने को कहा।”

वह कहती हैं, “गोल्डन वाया नाम की एजेंसी के कर्मचारियों ने उसे एक अच्छा सैलरी पैकेज ऑफर किया। उसे बताया गया कि अगर वह एक ‘दाई’ (नैनी) के रूप में काम करती है, तो उसे 60,000 रुपए मासिक वेतन और रहने के लिए घर दिया जाएगा। उसे यह भी बताया गया कि उसका एकमात्र काम बच्चों की देखभाल करना होगा, क्योंकि उन घरों में अन्य कामों के लिए नौकर हैं। इसके साथ ही उसे फ्लाइट का टिकट और वीजा भी एजेंसी की तरफ से दिया जाएगा।” रेखा ने बताया कि एजेंसी में दो महिलाएँ भी थीं, जिससे उन्हें एजेंट की बात पर पूरा विश्वास हो गया।

वहीं, उषा मानती हैं कि अगर उन्होंने एजेंसी के वादों को ठुकरा दिया होता तो बहुत अच्छा था। वह ​कहती हैं, “जब मैंने उनसे पूछा कि वीजा और टिकट मुफ्त क्यों हैं, तो उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि महिलाओं की भर्ती मोदी सरकार की योजना के तहत हो रही है। हमें बताया गया कि जाने से पहले हमें केवल अपने मेडिकल चेक-अप और आरटी-पीसीआर परीक्षणों के लिए भुगतान करना होगा। उन्होंने मुझे भरोसा दिलाया कि मुझे एक अच्छी प्रतिष्ठित फर्म में भेजा जा रहा है।”

वह बताती हैं कि उसे समीर नाम के एक व्यक्ति से अपना टिकट, वीजा और पासपोर्ट लेने के लिए कहा गया था। इस पर उषा पूछती हैं कि वह उस पर कैसे विश्वास कर सकती हैं? उससे कहा गया कि समीर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में कार्यरत है। वह केरल के नेदुंबसेरी में स्थित होटल रॉयल विंग्स में उनका इंतजार कर रहा है।

रेखा का कहना है कि जब उन्होंने अपने वीजा पर ‘हाउसमेड’ लिखा हुआ देखा तो वह शुरुआत में घबरा गई थीं। बाद में रेखा उनसे इसके बारे में पूछती हैं, तो उन्होंने कहा कि वह यह सब अडजस्ट कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें इस वीजा के लिए पैसे देने हैं। वह कहती हैं, “उन्होंने मुझसे वादा किया था कि उनका एजेंट मुझे केवल बच्चों की देखभाल के काम के लिए भेज रहा था, इसलिए मैंने खुद को समझाया।” इसके बाद रेखा 6 और उषा 15 फरवरी को कुवैत पहुँची। हवाई अड्डे पर जैद जहर अल-दवसारी मैनपावर रिक्रूटमेंट एजेंसी के एमके गसाली नाम के एक व्यक्ति ने उनका स्वागत किया, जिसे मजीद के नाम से भी जाना जाता है। इसके बाद सब कुछ शीशे की तरह साफ होता गया।

रेखा कहती हैं, “जब मैंने गसाली से उस बच्चे के बारे में पूछा, जिसकी देखभाल के लिए मुझे यहाँ लाया गया था। उसे बताया कि तुम्हें यहाँ बच्चा सम्भालने के लिए नहीं लाया गया है। उन्होंने दावा किया कि ऐसा कोई वीजा नहीं है, जो कुवैत में श्रमिकों को सिर्फ बच्चों की देखभाल करने के लिए यहाँ आने की अनुमति देता हो।” वह आगे बताती हैं, “उसने मुझसे कहा कि तुम्हारे साथ क्या हुआ, इसके प्रति मेरी कोई जवाबदेही नहीं है। तुम्हे यह सब उस व्यक्ति से पूछना चाहिए, जिसने यहाँ भेजा है। रेखा कहती हैं, “कुवैत में उनका बाकी समय धमकियों और अमानवीय व्यवहार के साथ बीता। गसाली ने यह भी बताया था कि उन्होंने उसे 3.5 लाख रुपए में खरीदा है। इसलिए कुवैत में घरेलू काम करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।”

रेखा ने बताया कि उसे ऐसे परिवार में नौकर बनाकर भेजा गया, जहाँ आठ लोग रहते थे। वह रोते हुए याद करती हैं, “मुझे वहाँ सुबह 7 बजे से रात 11 बजे तक काम करना पड़ता था, बिना खाना खाए और आराम किए। कभी-कभी, वे मुझे एक या दो चपाती और काली चाय देते थे। उनके लिए यह मेरे जिंदा रहने के लिए पर्याप्त था। एक दिन, जब मैं थकान के कारण खड़ी नहीं हो पा रही थी, तभी उस घर की मालकिन ने आकर मुझे लात मारी, चप्पल से मारा और बहुत पीटा। मेरे सिर पर पानी डाल दिया और मुझे तेज धूप में खड़ा कर दिया। कह रही थी अभी तक तेरा काम नहीं हुआ। मैं इससे बहुत डर गई थी कि मैंने किसी तरह काम फिर से शुरू कर दिया।”

केरल की महिला ने बताया, “इस घटना के पाँच दिन बाद मेरी तबीयत बहुत खराब हो गई। नाक से खून बहने लगा था। मैंने अपनी स्थिति के बारे में एजेंसी को लगातार अपडेट किया। मैंने वीडियो पर गसाली को फोन किया और उसे मेरी नाक से खून बहने की तस्वीरें भेजीं, लेकिन उसने कोई ध्यान नहीं दिया।” वह कहती हैं, “मुझे बाद में एक क्लिनिक ले जाया गया, लेकिन क्लिनिक में कहा गया कि गम्भीर स्थिति है, मुझे अस्पताल ले जाना होगा। इसके बजाय अरब लोग मुझे एजेंसी के पास ले गए, क्योंकि वे मेरी देखभाल नहीं करना चाहते थे।”

उन्होंने अपनी बात को जारी रखते हुए बताया, “यह आतंक अभी खत्म नहीं हुआ था। अगले दिन मुझे अस्पताल ले जाने की बजाय एजेंसी के लोगों ने मुझे अपने कार्यालय में ले गए और मुझे वहाँ बंद कर दिया। एजेंसी के लोगों ने मुझे धमकाना शुरू कर दिया और बेल्ट से मारा। उन्होंने कहा कि हम अरब लोगों ने तेरी कीमत दी है। इसलिए मुझे वापस जाकर वहाँ काम करना होगा। उन्होंने ऐसा नहीं करने पर मुझे ISIS (आतंकवादियों) के पास भेजने की धमकी दी, मुझे याद दिलाया कि मेरा पासपोर्ट अभी भी उनके पास है। उसी रात वे मुझे वापस उस घर में ले गए जहाँ मुझे पीटा गया था।”

रेखा की तरह उषा को भी कुवैत में कई बार प्रताड़ना दी गई। चप्पलों, बेल्ट से पीटा गया, भूखा रखा गया। शराफुद्दीन, हबीब और रफीक ये वे लोग थे, जिन्होंने रेखा और उषा की घर वापस आने में मदद की। दोनों महिलाओं का कहना है कि अगर एसोसिएशन ने मदद नहीं की होती, तो हमारे बचने की कोई उम्मीद नहीं थी। रेखा कहती हैं, “हो सकता है कि उन्होंने मेरे खराब स्वास्थ्य के कारण मुझे जाने दिया हो। लेकिन दूसरी महिलाएँ एसोसिएशन की मदद से यहाँ से निकलने में कामयाब रहीं। रेखा ने सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की उम्मीद जताई है। उसने कहा कि अभी वहाँ और भी लोग फँसे हुए हैं, जो नरक से भी बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

गौरतलब है कि रैकेट के चंगुल से भागी दोनों महिलाओं के कुवैत पहुँचने पर पासपोर्ट जब्त कर लिए गए थे। बीते दिनों एक ने मीडिया में बताया था, “वहाँ पहुँचने के बाद हमें पता चला कि वे हमें अरब परिवारों के घर की नौकरानी बनाने के लिए यहाँ पर लेकर आए थे। जब हमने इसका विरोध किया तो उन लोगों ने हमें फर्जी मामलों में फँसाकर जेल में डालने की धमकी दी। हम इससे काफी डर गए थे। यह भी नहीं जानते थे कि किसी अनजान जगह पर क्या करें।”

मैनपुरी के खेत से मिले ताम्र अस्त्र 4000 साल पुराने, क्या महाभारत के युद्ध में हुआ था इस्तेमाल: तेजी और आकार ने पुरात्वविदों की बढ़ाई उत्सुकता

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मैनपुरी (Mainpuri) के एक खेत से मिले अस्त्र (हथियार) करीब 4000 साल पुराने हैं। इनमें तलवार, भाला, कांता, त्रिशूल आदि शामिल हैं। ये अस्त्र ताम्र (तांबे​) के हैं। द्वापर युग के बताए जा रहे इन हथियारों का उपयोग महाभारत की लड़ाई में होने की संभावना भी जताई जा रही है। इन अस्त्रों ने पुरातत्वविदों की उत्सुकता बढ़ा दी है। जाँच के बाद उन्होंने इसे ‘रोमांचक’ करार दिया है।

जंग लगे इन हथियारों की जाँच के बाद जो परिणाम सामने आए हैं उसके मुताबिक, प्राचीन काल में भी भारतीय लड़ाकों के पास उन्नत हथियार हुआ करते थे। वे लड़ाई में बड़े अस्त्रों और तलवारों का इस्तेमाल करते थे। उस समय भी करीब चार फीट के तेज हथियार होते थे और स्टारफिश के आकार के हथियारों का प्रयोग किया जाता था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जून महीने की शुरुआत में मैनपुरी के गणेशपुर गाँव में एक किसान अपने खेत की जुताई करा रहा था। खेत को समतल कराने के दौरान उसे ये हथियार मिले थे। किसान ने इस बारे में किसी को नहीं बताया और उन्हें अपने घर ले गया। उसे लगा कि ये हथियार सोने या चाँदी के हो सकते हैं। लेकिन, कुछ दिनों बाद खेत से हथियार मिलने की बात पूरे गाँव में फैल गई। इसी बीच किसी ने पुलिस को सूचित कर दिया। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की आगरा सर्किल टीम 13 जून को गणेशपुर पहुँची। प्रशासन ने सभी 39 ताम्रनिधि पुरातत्व विभाग को सौंप दिया।

इन हथियारों की जाँच करने के बाद विशेषज्ञों ने बताया कि 4000 साल पुराने तांबे के हथियारों के गहन अध्ययन से यह द्वापर युग का लगते हैं। आर्कियोलॉजी के निदेशक भुवन विक्रम का दावा है कि तांबे के ये हथियार ताम्र पाषाण काल (कॉपर एज) के हैं। वहीं, आगरा सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद राजकुमार पटेल ने बताया कि यह बड़ी खोज साबित हो सकती है। उन्होंने बताया है कि प्रारंभिक तौर पर देखने में यह ताम्रनिधियाँ ईसा पूर्व 1800 की लगती हैं। एटा, मैनपुरी, आगरा और गंगा बेल्ट इस तरह की ताम्रनिधियों की संस्कृति वाले क्षेत्र रहे हैं। यह 3800 साल से ज्यादा पुरानी हैं।

₹60,000 करोड़ दान करेगा गौतम अडानी का परिवार: स्कूली बच्चों के साथ फोटो शेयर कर बताया- शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर होगा खर्च

उद्योगपति गौतम अडानी (Gautam Adani) आज (24 जून 2022) अपना 60वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। यह उनके पिता शांतिलाल अडानी की 100वीं जयंती का भी साल है। इसे देखते हुए उनके परिवार ने 60 हजार करोड़ रुपए दान करने का संकल्प लिया है। यह रकम शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर खर्च किया जाएगा।

जन्मदिन से एक दिन पहले अडानी ने एक ट्वीट के जरिए इसकी जानकारी दी। इस ट्वीट में वे स्कूली बच्चों के साथ नजर आ रहे हैं। साथ ही लिखा है, “मेरे​ पिता की 100वीं जयंती और मेरे 60वें जन्मदिन पर अडानी परिवार ने देश भर में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कौशल विकास के लिए 60 हजार करोड़ रुपए दान करने का संकल्प लिया है।”

इस पैसे का इस्तेमाल अडानी फाउंडेशन के जरिए किया जाएगा। ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में अडानी ने बताया है कि भारत में किसी फाउंडेशन के लिए किया गया यह सबसे बड़ा दान है। उन्होंने कहा कि बड़े प्रोजेक्ट प्लानिंग और उन्हें जमीन पर उतारने में हमारा अनुभव, अडानी फाउंडेशन के कार्यों से मिली सीख इन तीन क्षेत्रों में काम करने और भारत का भविष्य तैयार करने की कोशिशों में योगदान के लिए मददगार होगी। इन तीनों सेक्टरों में फंड एलोकेशन को लेकर एक्सपर्ट कमेटियों का गठन करने की बात भी उन्होंने कही है। अडानी फाउंडेशन भारत के 16 राज्यों के 2,409 गाँव में 37 लाख लोगों के बीच काम करता है।

अडानी समूह ने एक बयान जारी कर कहा है, “भारत के डेमोग्राफिक एडवांटेज की क्षमताओं का उपयोग करने के लिए, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। इनमें से प्रत्येक क्षेत्र में कमी ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए बड़ी बाधा है। अडानी फाउंडेशन को इन सभी क्षेत्रों में काम करने का अनुभव है।”

इस मौके पर गौतम अडानी की पत्नी प्रीति अडानी ने भी कहा कि करीब 36 साल पहले उन्होंने अपने कैरियर को किनारे कर गौतम अडानी के साथ शादी की थी। वो कहती हैं कि आज जब वो अपने अतीत में पीछे मुड़कर देखती हैं तो उन्हें उस वक्त लिए गए अपने फैसले पर फक्र होता है।

जन्मदिन पर पत्नी प्रीति अडानी ने भी उद्योगपति को बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि करीब 36 साल पहले उन्होंने अपने कैरियर को किनारे कर गौतम अडानी के साथ शादी की थी। आज जब वह पीछे मुड़कर देखती हैं तो उन्हें इस फैसले पर फक्र होता है।

‘इस्लाम में लौटो, वरना दोजख की आग में जलोगे’: चैतन्य को फिर से जफर शेख बनने के लिए कैसे धमका रही हूर बानो, सब कुछ ऑपइंडिया को बताया

मध्य प्रदेश के मंदसौर में 27 मई, 2022 को जफर शेख नाम के व्यक्ति ने घर वापसी करते हुए हिन्दू धर्म को स्वीकार किया था। और उनको नया नाम मिला चैतन्य सिंह उर्फ़ चेतन सिंह। अभी महीना भर भी नहीं बीता कि चैतन्य पर फिर से इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया जा रहा है। चैतन्य के मुताबिक यह दबाव कोई और नहीं बल्कि उन्हीं की एक पूर्व परिचित हूर बानो सैफी नाम की लड़की बना रही है। वहीं हूर बानो ने भी ऑपइंडिया से बातचीत में चैतन्य को कॉल करने और उन्हें फिर से इस्लाम कबूलने के लिए कहने की बात कबूली है।

बता दें कि हूर बानो पहले एक केबल न्यूज़ चैनल में पत्रकार थी। वहीं चैतन्य सिंह ने इस पूरे मामले में न झुकते हुए इसकी शिकायत पुलिस में करने का फैसला किया है। हालाँकि, चैतन्य सिंह के ही मुताबिक उनकी हिन्दू धर्म में घर वापसी के बाद शहर में कई मुस्लिम उनको नफरत की नजर से देखते हैं।

क्या है पूरा मामला

ऑपइंडिया से बात करते हुए चैतन्य सिंह (पूर्व जफर शेख) ने बताया, “मेरे घर वापसी के 3 दिन बाद से ही हूर बानो मुझे लगातार फोन करके फिर से मुस्लिम बनने का दबाव डाल रही है। वो लगातार मज़हबी किताबों में लिखी बातों को मुझे बता कर डराती है। कभी वो दोखज की आग में जलने का हवाला देती है तो कभी खुदा के कहर का। लेकिन कभी-कभी वो इमोशनल हो कर रोने भी लगती है।”

शहर क़ाज़ी से कब मिलवाऊँ?

चैतन्य सिंह ने ऑपइंडिया को एक रिकार्डिंग भी भेजी है जिसे उन्होंने अपनी और हूर बानो के बीच हुई बातचीत बताया है। इस रिकॉर्डिंग में लड़की ने कहा, “मैंने शहर काज़ी और युवाओं से बात कर ली है। बोलो कब मिलवाऊँ उनसे तुम्हे? अल्लाह की कसम तुम बहुत आसानी से वापस आ सकते हो। कोई तुम पर ऊँगली नहीं उठाएगा। तुम्हें मैं बताऊँगी कि क्या बोलना है। तुम्हें लोग (हिन्दू) शक की नजर से देख रहे हैं। आप वापस लौट कर जन्नती बन जाओ। आप अल्लाह को बहुत प्यारे हो। अल्लाह ने तुम्हारी वापसी की जिम्मेदारी मुझे दी है।”

एक दिन हम लोगों को मारा और काटा जाएगा

ऑडियो में आगे लड़की कहती है, “आपके पीछे के लोग मौकापरस्त हैं। एकाध इंसान के जाने से हमारा मज़हब कमजोर नहीं होता है। न ही हमारा इस्लाम झुक जाएगा। लेकिन मैं नहीं चाहती कि आप जहन्नमी बनिए। अगर आपने मेरी बात मान ली तो मैं जिंदगी भर आपका साथ निभाऊँगी। एक बार मोमिन बनो तो सही हर मुस्लिम आपके लिए मरने को तैयार है। शहर क़ाज़ी ने आपके इस्तकबाल का ऐलान किया है। ज्यादा देर हो जाएगी तो लौटना मुश्किल होगा। सबसे अच्छा और सच्चा मज़हब इस्लाम है। एक बार मुझसे मिलो तो तुम समझ क्यों नहीं रहे हो कि एक दिन हम सबको चुन-चुन कर मारा और काटा जाएगा। मैं छोटी भले हूँ पर अल्लाह ने मुझे अक्ल दी है।”

एक केबल चैनल में साथ कर चुकी है काम

चैतन्य सिंह के मुताबिक, “हूर बानो साल भर पहले मेरे साथ एक लोकल केबल चैनल SRM टुडे में काम करती थी। तब मैं वहाँ स्क्रिप्ट लिखता था। यह चैनल विश्व हिन्दू परिषद के एक नेता युवराज सिंह का था जिनकी बाद में हत्या हो गई थी। अब ये चैनल बंद हो चुका है। हमारी तब से बातचीत होती रही।”

CAA प्रदर्शन में रह चुकी है शामिल

चैतन्य ने आगे हूर बानो के बारे में बताते हुए कहा, “मुझे दबाव दे रही हूर बानो लगभग 30-35 साल की अविवाहिता है। उसका ब्रेनवाश हो चुका है। वो CAA प्रदर्शनों के दौरान मंदसौर में काफी एक्टिव थी और यहाँ हुए प्रदर्शनों में उसकी बड़ी भूमिका रही है। इस दौरान उसने बेहद उग्र भाषण दिए थे। उसके पीछे कुछ अन्य कट्टरपंथी लोग भी हैं। मुझसे बातचीत के दौरान हूर बानो ने मुस्लिम महासभा के मज़हर और एक अन्य साबिर का नाम लिया है।”

नफरत भरी निगाह से देख रहे हैं मुस्लिम

चैतन्य के मुताबिक, “हिन्दू बनने के बाद मैं बाजार आदि जाता हूँ तो मुझे अन्य मुस्लिम नफरत भरी निगाह से देखते हैं। कुछ तो मेरे खिलाफ बातें भी करते हैं। फ़िलहाल मैंने पूरे मामले को लेकर पुलिस से शिकायत करने का फैसला किया है। मैं SP को अपनी सुरक्षा का प्रार्थना पत्र देने जा रहा हूँ।”

वापस जाने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता

चैतन्य सिंह ने आगे किसी भी दबाव से इनकार करते हुए कहा, “दबाव या किसी भी हालत में अब वापस जाने का सवाल ही नहीं पैदा होता। मेरे घर वाले पढ़े लिखे लोग हैं। उन्हें मेरे हिन्दू होने से कोई दिक्क्त नहीं है। पत्नी पहले से ही हिन्दू थी। बचपन से ही मैं जिस धर्म में आस्था रख कर मंदिर बना कर पूजा करता था अब हमेशा उसी में रहना है।”

सोशल मीडिया पर हूर बानो की सेना विरोधी पोस्ट

ऑपइंडिया ने जब सोशल मीडिया पर हूर बानो की प्रोफ़ाइल को खंगाली तब 27 मार्च 2022 को उन्होंने सेना विरोधी एक पोस्ट की है। इस पोस्ट में उन्होंने रियल कश्मीर फाइल्स टैग देते हुए एक व्यक्ति के बयानों के आधार पर भारतीय सेना पर एक व्यक्ति के साथ अमानवीय अत्याचार का आरोप लगाया है। ऐसे और भी कई पोस्ट हैं जिससे देश और सेना के प्रति उसके रवैए के बारे में साफ पता लगता है।

ऑपइंडिया ने की हूर बानो से भी बात

सामने आए रिकॉर्डिंग और चैतन्य के दावों को लेकर ऑपइंडिया ने हूर बानो से भी संपर्क किया। उन्होंने बताया, “हाँ, मैंने उन्हें इस्लाम में फिर से आने की दावत दी और मुझे इसका कोई गम नहीं है। इस्लाम में लिखा है कि मजहब छोड़ने वाले जहन्नुम की आग में जलाए जाते हैं। मैंने उनकी भलाई सोची थी। उन्होंने भी मुझसे पूछा था कि यदि वे वापस लौटेंगे तो क्या मुस्लिम लोग उन्हें कबूल करेंगे। लेकिन यदि अब वे पुलिस में इसकी शिकायत करते हैं तो मेरा उनसे कोई वास्ता नहीं होगा।”

धमकी पर उतरा उद्धव गुट, संजय राउत ने दिखाया सड़क का डर: गुवाहाटी से मुंबई कूच कर सकते हैं एकनाथ शिंदे, दिखाए शिवसेना के 38 MLA

महाराष्ट्र की सत्ता हाथ से निकलते देख मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का गुट अब धमकी पर उतर आया है। पार्टी सांसद संजय राउत ने कहा है कि हमें चुनौती देने वाले शिंदे समर्थकों को समझ आ जाना चाहिए कि शिवसैनिकों का अभी सड़क पर उतरना बाकी है। वहीं, शिंदे का दावा है कि उनके साथ शिवसेना के 38 विधायक हैं। इनकी तस्वीर भी गुवाहाटी के रेडिसन ब्लू होटल से सामने आई है। इसी होटल में शिंदे समर्थकों के साथ डेरा डाले हुए हैं। उनके समर्थक विधायकों की संख्या 50 के करीब बताई जाती है, जिनमें कुछ निर्दलीय हैं।

न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में राज्यसभा सांसद राउत ने कहा, “हमें चुनौती देने वाले एकनाथ शिंदे गुट को पता होना चाहिए कि शिवसैनिक अभी सड़क पर नहीं उतरे हैं। इस तरह की लड़ाई या तो कानूनी तरीके से लड़ी जाती है या सड़क पर। जरूरत पड़ी तो हमारे कार्यकर्ता सड़क पर उतरेंगे।”

इस बीच महाराष्ट्र विधानसभा के डिप्टी स्पीकर नरहरि झिरवाल ने अजय चौधरी को शिवसेना विधायक दल के नेता के तौर पर मान्यता दे दी है। उद्धव गुट ने बगावत के बाद शिंदे को इस पद से हटाकर चौधरी को नेता चुना था और इस संबंध में डिप्टी स्पीकर को पत्र भेजा था। इसके बाद गुवाहाटी में कैंप किए विधायकों ने शिंदे को अपना नेता चुनते हुए भी झिरवाल को पत्र भेजा था। इस पर 37 शिवसेना विधायकों के हस्ताक्षर थे जो दलबदल कानून के हिसाब से जरूरी है। इस पत्र में आम सहमति से एकनाथ शिंदे को शिवसेना विधायक दल का नेता और भारत गोगावले को व्हिप ​चुनने की जानकारी दी गई थी।

ऐसे में अब कयास लगाए जा रहे हैं कि शिंदे शायद मुंबई के लिए कूच करें और डिप्टी स्पीकर से मुलाकात करें। इससे पहले ​उद्धव गुट ने शिंदे समेत कुछ शिवसेना विधायकों को अयोग्य ठहराने को लेकर भी डिप्टी स्पीकर के पास याचिका दी थी। इसके जवाब में शिंदे ने कहा था, “12 विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की अर्जी देकर आप हमें डरा नहीं सकते, क्योंकि हम शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के असली शिवसेना और असली शिव सैनिक हैं। इसके अलावा, हम कानून भी जानते हैं। इसलिए हम इस तरह की धमकियों पर ध्यान नहीं देते। नंबर्स नहीं होने के बावजूद अवैध समूह बनाने के लिए हम आपके खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हैं।”

राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू ने भरा नामांकन, PM मोदी बने प्रस्तावक: आंध्र के CM जगन मोहन भी थे मौजूद, लगातार बढ़ रहा समर्थन का सिलसिला

राष्ट्रपति पद के लिए NDA की उम्मीदवार और झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू (Draupdi Murmu) ने राष्ट्रपति पद के लिए अपना नामांकन फाइल कर दिया है। उन्होंने संसद भवन में राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल के ऑफिस में फॉर्म भरा। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi), गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) समेत BJP के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे।

रिपोर्ट के मुताबिक, द्रौपदी मुर्मू ने 4 सेट का नामांकन फाइल किया, जिसके पहले सेट के प्रस्तावक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रहे और इसके अनुमोदक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बने। इसके अलावा इस सेट में बीजेपी की संसदीय बोर्ड की सदस्य समेत केंद्रीय मंत्री शामिल रहे। इस सेट में अभी तक 60 प्रस्तावकों और 60 अनुमोदकों का नाम शामिल है। उल्लेखनीय है कि मुर्मू के नामांकन के दौरान कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों समेत जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और जगन मोहन रेड्डी वाईएसआर कॉन्ग्रेस के नेता भी मौजूद रहे।

ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक और वाईएसआर कॉन्ग्रेस पहले ही द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने का ऐलान कर चुके हैं।

बता दें कि 21 जून को भाजपा ने मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया था। इसके अगले दिन मुर्मू ने पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में पूजा अर्चना की थी। उन्होंने मंदिर में झाड़ू भी लगाया था। ओडिशा की रहने वाली मुर्मू अगर जीतती हैं तो वे देश की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति होंगी।

यशवंत सिन्हा को मिली जेड+ सुरक्षा

इस बीच विपक्ष के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को भी केंद्र सरकार ने जेड+ सुरक्षा मुहैया करा दी है। 84 वर्षीय सिन्हा अब कहीं भी जाते हैं तो हर वक्त साए की तरह 8-10 कमांडो उनके साथ रहेंगे। जवानों ने उनकी सुरक्षा के जिम्मे को संभाल भी लिया है। बताया जाता है कि सिन्हा 27 जून को राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन फाइल करेंगे। वहीं NDA की राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को दो दिन पहले ही जेड+ सुरक्षा दे दी गई है।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति पद के लिए 18 जुलाई को वोटिंग होगी और 21 जुलाई को इसकी काउंटिंग होगी। वहीं 25 जुलाई, 2022 को देश को अगला राष्ट्रपति मिलेगा।

अब इस्लामी राष्ट्र नहीं रहेगा ट्यूनीशिया: नए संविधान में नहीं होगा मजहब, 80% आबादी कट्टरपंथ के खिलाफ

अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया में तख्तापलट के एक साल बाद देश के राष्ट्रपति कैस सैईद एक ऐसे संवैधानिक मसौदे को मंजूरी देने जा रहे हैं, जिसके बाद इस्लाम को राज्यधर्म की मान्यता खत्म हो जाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संविधान के मसौदे को शनिवार (25 जून 2022) को जनमत संग्रह के लिए पेश किया जाएगा।

मोरक्को वर्ल्ड न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक देश के राष्ट्रपति ने एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “ट्यूनीशिया के अगले संविधान में इस्लाम राज्य के आधिकारिक धर्म के तौर पर नहीं रहेगा, बल्कि ये एक उम्माह (समुदाय) के रूप में होगा।”

गौरतलब है कि उत्तरी अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया मुस्लिम बहुल आबादी वाला देश है और अब तक यहाँ के संविधान ने इस्लाम को राज्य धर्म के रूप में अपनाया था। लेकिन अब देश के राष्ट्रपति कैस सईद इसे राज्य के धर्म से बाहर करना चाहते हैं। ट्यूनीशिया ऐसा देश है, जहाँ बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी होने के बाद भी वहाँ शरिया का पालन नहीं किया जाता है। इसका कानूनी स्ट्रक्चर अधिकतर यूरोपीय सिविल लॉ पर आधारित है।

दरअसल, कैस सईद ने पिछले साल ही ट्यूनीशिया की संसद को भंग कर दिया था और जुलाई 2021 में देश की सत्ता पर पूरी तरह से अधिकार कर लिया। इस्लामिक देश के कई राजनेता सईद के इस्लाम को राज्य से अलग करने की कोशिशों का विरोध करने लगे हैं। ट्यूनीशिया की इस्लामिक पार्टी एन्हाडा के नेता रचेड घनौनी ने कहा, “राजनीति में सबसे बड़ा भ्रष्टाचार अत्याचार है और इसका इलाज लोकतंत्र की ओर लौटना और शक्तियों को अलग करना है।”

नए संविधान में नहीं होगा इस्लाम

संवैधानिक मसौदा समिति का नेतृत्व कर रहे ट्यूनिस लॉ स्कूल के पूर्व डीन सदोक बेलैड का कहना था कि देश के नए संविधान में इस्लाम का कोई संदर्भ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ट्यूनीशिया के 80% से अधिक लोग इस्लामिक पॉलिटिक्स के विरोधी हैं और कट्टरपंथ के खिलाफ हैं।

उल्लेखनीय है कि 2011 में अरब स्प्रिंग के बाद ट्यूनीशिया ने 2014 में औपचारिक रूप से अपने वर्तमान संविधान को अपनाया था, जिसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि इस्लाम धर्म है और अरबी ट्यूनीशिया की भाषा है। वहीं इस महीने एक बड़ा फैसला लेते हुए राष्ट्रपति सईद ने देश के 57 जजों को आतंकवादियों को बचाने और भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाकर बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद जजों ने सईद के फैसले के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल शुरू कर दी थी।

कंगाल पाकिस्तान में कागज का संकट: सिलेबस की किताबों की भी नहीं होगी छपाई, मंत्री दे चुके हैं ‘चाय कटिंग’ का नुस्खा

आर्थिक बदहाली से जूझ रहे पाकिस्तान के बच्चों को अब सिलेबस की किताबें नहीं मिलेंगी। देश में कागज का संकट है। आसमान छूती कीमतों की वजह से प्रकाशकों के लिए छपाई करना मुमकिन नहीं है। पेट्रोल-डीजल, अनाज और दूसरी चीजों की पहले से ही किल्लत चल रही है। कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी से गिरावट हो रही है। इसे देखते हुए पिछले दिनों एक मंत्री ने लोगों को चाय कम पीने की सलाह भी दी थी।

पाकिस्तान पेपर एसोसिएशन ने कहा है कि देश में कागज का संकट है। इसके कारण अगस्त 2022 से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र में छात्रों के लिए किताबें उपलब्ध नहीं होंगी। बताया जा रहा है कि वैश्विक मुद्रास्फीति, सरकारों की गलत नीतियों और स्थानीय कागज उद्योगों के मनमानी से यह संकट पैदा हुआ है।

ऑल पाकिस्तान पेपर मर्चेंट एसोसिएशन, पाकिस्तान एसोसिएशन ऑफ प्रिंटिंग ग्राफिक आर्ट इंडस्ट्री (PAPGAI) और पेपर उद्योग से जुड़े अन्य संगठनों ने देश के प्रमुख अर्थशास्त्री डॉ. कैसर बंगाली के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसके बारे में बताया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चेतावनी दी कि नए शैक्षणिक वर्ष में पेपर संकट के कारण छात्रों को किताबें उपलब्ध नहीं होंगी। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान में कागज काफी महँगा हो गया है और इसकी कीमत रोज बढ़ती जा रही है। प्रकाशक किताबों की कीमत निर्धारित नहीं कर पा रहे हैं। इसके कारण सिंध, पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा का पाठ्यपुस्तक बोर्ड किताबों की छपाई नहीं कर पाएगा।

इस बीच, पाकिस्तानी स्तंभकार अयाज आमिर ने दुनिया डेली में प्रकाशित एक लेख में ‘अक्षम और असफल शासकों’ पर सवाल उठाया है। उनसे पूछा है कि जब पुराने कर्ज चुकाने के लिए नए कर्ज लेने पड़ रहे हैं तो सरकारें इन आर्थिक समस्याओं का समाधान कैसे करेंगी। उन्होंने कहा कि ये कभी न खत्म होने वाला सिलसिला अभी भी चल रहा है और अब पाकिस्तान उस मुकाम पर पहुँच गया है, जब कोई भी देश कर्ज देने को तैयार नहीं है।

गौरतलब है कि इससे पहले पाकिस्तान के एक मंत्री ने लोगों से कम चाय पीने के लिए कहा था, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके। देश के योजना एवं विकास मंत्री अहसान इकबाल ने कहा था कि पाकिस्तानी अपनी चाय की खपत को प्रति दिन ‘एक या दो कप’ कम कर सकते हैं, क्योंकि इसका आयात सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डाल रहा है। इसके पहले एक एयरपोर्ट कर्मचारी ने देश में बढ़ते पेट्रोल के दामों को लेकर गधा गाड़ी से ऑफिस पहुँचने की अनुमति माँगी थी।

‘ओवैसी साहब, आपका नाम लेकर जफर जुल्म कर रहा’: पत्रकार का दावा- AIMIM विधायक के ड्राइवर ने पीटा, पुलिस ने भी धमकाया

हैदराबाद के एक वायरल वीडियो में 21 जून 2022 (मंगलवार) को खुद को पत्रकार बताते मोहम्मद अली ने AIMIM विधायक के ड्राइवर पर खुद और अपने परिजनों पर हमले का आरोप लगाया है। विधायक का नाम मुमताज अहमद है जो चारमीनार विधानसभा से चुनाव जीते हैं। पुलिस ने इस घटना में FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। साथ ही घटना में AIMIM विधायक के नाम को राजनैतिक लाभ लेने के लिए प्रयोग किया जाना बताया है।

इस वीडियो में युवक खुद को मोहम्मद अली बता रहा है। वह अपना परिचय HS न्यूज़ चैनल में कैमरामैन के तौर पर दे रहा है। उसके कहना है कि उसने पानी सप्लाई में किल्लत का एक वीडियो बनाया था जिसके बाद उसको AIMIM पार्टी के विधायक के ड्राइवर ने बुरी तरह से पीटा। इसी वीडियो में पीड़ित के पिता भी घायल दिखाई दे रहे हैं। पीड़ित ने आगे कहा कि वो एक ईमानदार पत्रकार है और इस पेशे को बदनाम नहीं कर सकता।

इसी वीडियो में उसने कहा, “असद साहब (असदुद्दीन ओवैसी) हदीस-ए-रसूल से सुन लीजिये कि जुल्म सहना और करना दोनों गुनाह है। नबी फरमाते हैं कि जालिम जहन्नुम में जाएँगे। आपका नाम ले कर जफर हम पर जुल्म कर रहा है। वो हमें झूठे केसों में बुक करवाता है और मारता भी है। मौत तो सबको आनी है। मैं मरने से नहीं डरता। पुलिस वाले उसके ऊपर केस बुक करने के बजाय मुझे धमका रहे हैं।”

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक घायलों का इलाज उस्मानिया अस्पताल में चल रहा है। पीड़ित मोहम्मद अली तालाब कट्टा खान नगर के निवासी हैं। उन्होंने खान नगर इलाके में रमज़ान के महीने में पानी सप्लाई की शिकायत पर रिपोर्टिंग की थी। उस रिपोर्ट में कई महिलाओं के भी बयान दर्ज किए थे। आरोप है कि इसी बात से नाराज हो कर AIMIM कार्यकर्ताओ ने उन पर हमला किया। इस हमले में मोहम्मद अली के हाथ और नाक की हड्डी में चोटें आईं हैं। इसी हमले में मोहम्मद अली के अब्बा मोहम्मद अहमद पर भी धारदार हथियार से हमला हुआ है

पीड़ित ने बताया, “मुझ पर हमले का आरोपित रफीक नाम का एक पुलिस मुखबिर है। रफीक का एक भाई जफर है जो विधायक मुमताज का ड्राइवर है। हमें इनके पूरे परिवार ने मिल कर पुलिस के आगे ही मारा है। हमले में महिलाएँ भी शामिल थीं। लेकिन विधायक के चलते ही मेरे केस को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। यहाँ तक कि पुलिस वाले हमलावरों के ही पक्ष में बातें कर रहे हैं। मेरे अब्बा की हालत सीरियस है। मुझे जबरदस्ती अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।”

पुलिस ने मुताबिक विधायक का नाम राजनैतिक लाभ के लिए

ऑपइंडिया ने इस घटना पर भवानी नगर थाने के SHO से बात की। उन्होंने बताया, “मामले में केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी गई है। मामला 2 पक्षों के बीच विवाद का है जिसमें AIMIM विधायक की कोई संलिप्तता नहीं पाई गई है। विधायक का नाम आरोपों को सनसनीखेज बनाने और राजनैतिक लाभ हासिल करने के लिए लिया गया है। आरोपित ड्राइवर फ्री लांसर वाहन चलाने का काम करता है जिसने कई लोगों की गाड़ियाँ चलाईं हैं। इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।”

SC ने खारिज की जाकिया जाफरी की याचिका, गुजरात दंगों में मोदी को मिली SIT क्लीनचिट को दी थी चुनौती

गुजरात में 2002 में हुए दंगों के मामले में राज्य के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को एसआईटी की क्लीन चिट को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। पूर्व कॉन्ग्रेस सांसद एहसान जाफरी की विधवा जाकिया जाफरी ने यह अर्जी दाखिल की थी। उन्होंने दंगे की साजिश के मामले में मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी थी।

मजिस्ट्रेट ने तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी समेत 64 लोगों को दंगों की साजिश रचने के आरोप से मुक्त करने वाली SIT की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया था। हाई कोर्ट भी इस फैसले को सही करार दे चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जाकिया की याचिका में मेरिट नहीं है।

जाकिया जाफरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 9 दिसंबर 2021 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार (24 जून 2022) को जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने इस मामले में सुनवाई पूरी की। 

जस्टिस एएम खानविलकर ने फैसला देते हुए कहा, “हम एसआईटी द्वारा प्रस्तुत अंतिम रिपोर्ट दिनांक 08.02.2012 को स्वीकार करने और अपीलकर्ता (जकिया जाफरी) द्वारा दायर विरोध याचिका को खारिज करने के मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखते हैं।”

उन्होंने कहा, “हम जाँच के संबंध में कानून के शासन के उल्लंघन और अंतिम रिपोर्ट को खारिज करने के लिए मजिस्ट्रेट और उच्च न्यायालय के दृष्टिकोण के संबंध में याचिकाकर्ता के अपील का समर्थन नहीं करते हैं। हमारा मानना है कि इस अपील में मेरिट नहीं है। इसलिए इसे खारिज किया जाता है।”

बता दें कि 2002 में हुए दंगों की जाँच के लिए एसआईटी गठित की गई थी। इस एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 64 लोगों को क्लीन चिट दी थी। जकिया के पति और कॉन्ग्रेस नेता एहसान जाफरी की 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में हिंसा के दौरान मौत हो गई थी।

जाकिया ने दंगों के पीछे की बड़ी साजिश होने का दावा किया और 2006 में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों के मामलों की निगरानी के दौरान 2011 में एसआईटी को आरोपों की जाँच करने का निर्देश दिया था। फरवरी 2012 में एसआईटी ने शिकायत पर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। इसके बाद याचिकाकर्ता ने निचली अदालत में अर्जी देकर क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया।

क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ एक अपील गुजरात उच्च न्यायालय के समक्ष भी लाई गई, जिसने 5 अक्टूबर 2017 को इसे ठुकरा दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने 2018 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई 14 दिनों तक चली और याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने किया। राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने किया जबकि वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी एसआईटी की ओर से पेश हुए। 27 फरवरी 2002 को गोधरा ट्रेन जलाने की घटना में अयोध्या से लौट रहे 59 कारसेवकों के मारे जाने के एक दिन बाद दंगे भड़क उठे थे।