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फटेहाल पाकिस्तान में चाय कटिंग: मंत्री ने कहा- रोज 2 कप चाय पीना कम करो, हम कर्ज लेकर लेकर चाय ला रहे हैं

कंगाली के कगार पर खड़े पाकिस्तान (Pakistan) ने अब अपने लोगों से कम चाय पीने के लिए कहा है, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके। इसके पहले एक एयरपोर्ट कर्मचारी ने देश में बढ़ते पेट्रोल के दामों को लेकर गधा गाड़ी से ऑफिस पहुँचने की अनुमति माँगी थी।

देश के योजना एवं विकास मंत्री अहसान इकबाल ने मंगलवार (14 जून 2022) को पत्रकारों से कहा कि पाकिस्तानी अपनी चाय की खपत को प्रति दिन ‘एक या दो कप’ कम कर सकते हैं, क्योंकि इसका आयात सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डाल रहा है।

अहसान इकबाल ने कहा, “हम जो चाय आयात करते हैं, वह कर्ज लेकर आयात की जाती है।” उन्होंने यह भी कहा कि देश में बिजली बचाने के लिए व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को समय से पहले ही बंद करना चाहिए।

बता दें कि पाकिस्तान विश्व का सबसे बड़ा चाय आयातक देश है। ऑब्जर्वेटरी ऑफ इकोनॉमिक कॉम्प्लेक्सिटी के अनुसार, 22 करोड़ की जनसंख्या वाला पाकिस्तान साल 2020 में $640 मिलियन (5,001 करोड़ रुपए) से अधिक मूल्य का चाय का आयात किया था।

पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। वहाँ खाद्य, तेल, गैस से लेकर तमाम चीजों की कीमतों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। इस बीच विदेशी मुद्रा भंडार में भी तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। वहाँ का विदेशी मुद्रा भंडार अब सिर्फ दो महीने के आयात के बराबर रह गया है।

रॉयटर्स के अनुसार, पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के पास फरवरी के अंत में विदेशी मुद्रा भंडार $16.3 बिलियन (1274 अरब रुपए) से गिरकर मई में $10 बिलियन (781 अरब रुपए) रह गया है।

वहीं, पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए लोगों से कम चाय पीने की मंत्री इकबाल द्वारा की गई अपील का लोगों ने खूब उपहास उड़ाया। लोगों ने कहा कि चाय की खपत में कटौती करने से देश के आर्थिक संकट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला।

खेत में घुस आया कुत्ता, किसान ने मारी 22 गोली: 2 घंटे तक तड़पने के बाद मर गया, राजस्थान की घटना

राजस्थान के जयपुर में एक किसान ने कुत्ते पर एयर गन से 22 गोलियाँ दाग दीं, जिससे उसकी मौत हो गई। वह कुत्ते के बार-बार खेत घुसने से गुस्साया था। किसान के खिलाफ तूंगा थाने में FIR दर्ज कराई गई है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक किसान ने बेजुबान जानवर पर अपनी एयर गन से ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। इससे कुत्ते की बॉडी में 22 छर्रे घुस गए थे। कुत्ता खेत में करीब 2 घंटे तक दर्द से कराहता रहा। लेकिन किसान को दया नहीं आई। तभी वहाँ से जाते हुए एक शख्स की नजर कुत्ते पर पड़ी। वह तपड़ते कुत्ते को हिंगोनिया गौशाला ले गया, जहाँ उसकी गंभीर स्थिति देखते हुए डॉक्टरों ने उसे पाँच बत्ती स्थित एनिमल हॉस्पिटल रेफर कर दिया है। इलाज के दौरान करीब 2 घंटे बाद कुत्ते की मौत हो गई।

पुलिस का कहना है कि मंगलवार (14 जून 2022) की सुबह करीब 7 बजे बस्सी के निकट मालूकपूरा निवासी सावंत सिंह (55) के खेत में कालू नाम का कुत्ता घुस गया था। जैसे ही सावंत ने खेत में कुत्ते को देखा उसने अपनी एयर गन निकाली और उस पर ताबड़तोड़ गोलियाँ दाग दीं।

गौरतलब है कि पिछले महीने भी राजस्थान के भरतपुर से एक दिल दहलाने वाला वीडियो सामने आया था। यहाँ एक व्यक्ति ने मामूली सी बात पर पालतू कुत्ते को जमीन पर पटक-पटक कर बेहरमी से मार डाला था। वह कुत्ता बाबूलाल गर्ग नाम के एक व्यक्ति का था। पड़ोस के मोहल्ले में रहने वाला अजय कोली जब भी उस रास्ते से गुजरता था, तभी वह कुत्ता उस पर भौंकने लग जाता था। अजय को यह बात बेहद बुरी लगती थी। एक रात शराब के नशे में धुत्त कोली ने कुत्ते के गले में रस्सी बाँधकर उसे जोर-जोर से जमीन पर पटकना शुरू कर दिया। वह तब तक कुत्ते को जमीन पर पटक-पटक कर मारता रहा, जब तक बेजुबान जानवर की मौत नहीं हो गई।

भारत, भगवा और हिंदुत्व का मजाक उड़ाने वाले वीर दास का गुजरात में विरोध, कई शो रद्द होने के बाद बोला हिन्दूफोबिक कॉमेडियन- कोरोना हो गया है

विदेशों में अपने शो के जरिए भारत का अपमान करने वाले कॉमेडियन वीर दास (Vir Das) के गुजरात में होने वाले कुछ शो रद्द कर दिए गए हैं। गुजरात के लोगों ने हिंदूफोबिक कॉमेडियन के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया है, जिसके चलते उनके एक के बाद एक शो कैंसिल हो रहे हैं। उनके शो वापी समेत राज्य के चार शहरों में आयोजित किए गए। एबीवीपी और अन्य हिंदू संगठनों ने इन शो का कड़ा विरोध किया है, जिसके कारण कॉमेडियन के कुछ शो रद्द कर दिए गए हैं, जबकि अन्य को रद्द करने की माँग शुरू हो गई।

वीर दास का 15 जून को वापी में होने वाला शो रद्द कर दिया गया है। वडोदरा में भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने 17 जून को होने वाले शो को रद्द करने को कहा है। वहीं, सूरत में भी एबीवीपी ने कार्यक्रम में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। वडोदरा में एबीवीपी ने कलेक्टर, नगर आयुक्त और पुलिस आयुक्त को ज्ञापन देकर 17 जून को कॉमेडियन वीर दास का शो रद्द करने की माँग की है।

इस संबंध में ऑपइंडिया से बात करते हुए एबीवीपी वडोदरा शहर के प्रभारी व्रज भट्ट ने कहा, “वीर दास ने इससे पहले अपने शो में भारत के लिए अपमानजनक टिप्पणी की है। अब उनका शो वडोदरा में आयोजित किया जा रहा है। हिंदू मंदिरों पर अपमानजनक टिप्पणी करना और सस्ते प्रचार के लिए कॉमेडी के नाम पर भारत के खिलाफ बोलना यहाँ स्वागत योग्य नहीं है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने शो को रद्द करने की माँग की है। हमने इस संबंध में कलेक्टर, पुलिस आयुक्त और नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपा है। अगर यह शो रद्द नहीं किया गया तो हम विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाएँगे।”

वडोदरा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामले की जाँच की गई है और एबीवीपी द्वारा इसे रद्द करने का अनुरोध किए जाने के बाद आयोजकों से भी संपर्क किया जा रहा है। यदि शहर में लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला ऐसा कोई शो आयोजित किया जाता है, तो पुलिस देश में पहले से ही व्याप्त सांप्रदायिक तनाव को देखते हुए इस शो को प्रतिबंधित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।

वापी में VHP सदस्यों ने अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन (फोटो साभार: ऑपइंडिया)

विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों ने वापी प्रशासन के अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपा, जिसके बाद वीर दास का शो रद्द कर दिया गया। बुधवार (15 जून 2022) को विहिप ने वापी में आयोजित होने वाले कॉमेडियन के कार्यक्रम को रद्द करने के लिए वलसाड जिला कलेक्टर को भी एक ज्ञापन सौंपा। विश्व हिंदू परिषद ने शो को रद्द करने की माँग करते हुए कहा कि कॉमेडियन के कार्यक्रम में राष्ट्र विरोधी टिप्पणी और देवताओं को लेकर जोक्स किए जा सकते हैं। इससे न केवल वापी में बल्कि वलसाड जिले में भी सद्भाव खराब कर सकता है। वीएचपी के हस्तक्षेप के बाद वीर दास का वापी शो बंद कर दिया गया है। ऑपइंडिया से बात करते हुए, वापी में हॉल के प्रबंधन ने भी इसकी पुष्टि की है।

सूरत में भी एबीवीपी के सदस्यों ने वीर दास के शो के विरोध में आवाज उठाई है। ऑपइंडिया से बात करते हुए, एबीवीपी नेता हिमालय सिंह जाला ने कहा, “यदि कार्यक्रम में किसी भी तरह से हिंदू विरोधी या भारत विरोधी गतिविधियाँ हुईं, तो एबीवीपी के साथ-साथ अन्य हिंदू संगठन कानूनी कार्रवाई करेंगे। देश का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सूरत में 16 जून को वीर दास का कार्यक्रम आयोजित किया गया है।”

हालाँकि, 15 जून को होने वाला वापी शो रद्द होने के बाद वीर दास ने अपने फॉलोअर्स को ट्वीट करके बताया कि उन्हें कोरोना हो गया है। इसलिए वह गुजरात में होने वाला शो नहीं कर पाएँगे। उन्होंने लिखा, “गुजरात। अब कोरोना के लक्षण दिखने लगे हैं। मैं RTPCR टेस्ट कराने जा रहा हूँ। हमारी टीम गुजरात के लिए नई डेट्स पर काम कर रही है, जब भी वेन्यू उपलब्ध होंगे। आपके टिकट वापस कर दिए जाएँगे। सॉरी गुजरात! मुझे आशा है कि आप नई डेट्स पर वापस आएँगे।”

बता दें कि वीर दास वही विवादित कॉमेडियन है जिसने पिछले साल 16 नवंबर को अमेरिका के जॉन एफ केनेडी सेंटर में 7 मिनट तक भारत विरोधी प्रोपगेंडा को जमकर हवा दी थी। अपने वन लाइनर्स की मदद से उसने भारत को, भारत की राजनीति को, स्थानीय मुद्दों को, पीएम मोदी को खूब कोसा था और हर प्रोपगेंडाबाज की तरह उसने भारत में नारी को पूजने की जो परंपरा है उसे रेप से जोड़ा था।

इसके अलावा मंच पर खड़े होकर वीर दास ने कहा था, “मैं उस भारत से आता हूँ जहाँ महिला को सुबह पूजा जाता है और रात में गैंगरेप होता।” वीर दास की वन लाइनर्स में अजीब बात ये थी कि उसने अमेरिका में खड़े होकर भारत में हो रहे रेपों के बारे में बात की थी, लेकिन ये भूल गया था कि अमेरिका रेप मामलों में कई देशों से बहुत आगे है। वीर दास ने अपनी कॉमेडी के जरिए हिंदुओं को असहिष्णु दिखाते हुए भगवा रंग का भी मखौल उड़ाया था। साथ ही साथ भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर क्रिकेट पर भी तंज कसा था। इसके बाद वैश्विक स्तर पर पीएम केयर फंड पर वीर दास ने सवाल उठाए थे और स्थानीय मुद्दों को भी उठाने से वीर दास ने गुरेज नहीं किया था।

जानलेवा मोमोज: दिल्ली में 50 साल के व्यक्ति की मौत के बाद AIIMS ने किया अलर्ट, कहा- अच्छे से चबाए बिना निगला तो घोंट सकता है दम

दिल्ली में एक 50 साल के व्यक्ति की मौत मोमोज (Momos) खाने से होने की बात सामने आई है। इस तरह मौत का यह देश की राजधानी में पहला केस बताया जा रहा है। दक्षिणी दिल्ली से इस व्यक्ति को मृत अवस्था में एम्स लाया गया था। पुलिस की पड़ताल से पता चला कि रेस्टोरेंट में खाना खाते वक्त वह गिर गया था।

दरअसल इस व्यक्ति की मौत गला चोक होने की वजह से हुई थी। पोस्टमार्टम से पता चला कि ऐसा मोमोज खाने की व​जह से हुआ। गले 5×3 सेंटीमीटर साइज का मोमोज फँसने के बाद दम घुटने से उसकी मौत हुई। शव के CT स्कैन से साँस की नली में कुछ फँसने की बात सामने आई थी।

जर्नल ऑफ फॉरेंसिक इमेजिंग के नवीनतम संस्करण में इस संबंध में रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। मिंट ने AIIMS के फोरेंसिक विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता के हवाले से बताया है, “यह निष्कर्ष चिकित्सकीय राय के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। लेकिन इसका पता केवल CT Scan से ही चल सकता है। परंपरागत विजुअल पोस्टमार्टम में इसका पता नहीं लगाया जा सकता है।”

AIIMS की चेतावनी

मोमोज से मौत के पहले मामले के सामने आने के बाद दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के विशेषज्ञों ने खाना खाते समय सावधानी बरतने की चेतावनी दी है। एम्स के फोरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि मोमोज एक लोकप्रिय स्ट्रीट फूड है। लेकिन मैदे और तेल के इस्तेमाल की वजह से यह काफी स्लिपरी (चिकना) होता है। यदि अच्छी तरह चबाए बिना इसे निगला जाए तो यह गले में फँस सकता है। ऐसा होने पर दम घुटने से व्यक्ति की मौत भी हो सकती है।

AIIMS के फोरेंसिक डिपार्टमेंट के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. अभिषेक यादव कहते हैं, “स्टीमी मोमोज दिल्ली के पसंदीदा स्ट्रीट फूड में से एक हैं। मोमोज ऊपर से फिसलन भरा और मुलायम होता है, जिसे अगर सही से चबाए बिना ही निगल लिया जाए तो ये घातक हो सकता है। इस मामले में मौत का कारण न्यूरोजेनिक कार्डिएक अरेस्ट था, जो मोमोज खाने के बाद दम घुटने से हुआ था।”

डॉ. यादव ने आगे कहा, “मोमोज 5×3 सेंटीमीटर आकार के होते हैं, जो काफी बड़ा है। लोगों को इसे खाने को लेकर सतर्क रहना चाहिए। जब भी ऐसी घटना हो तो मोमोज खाने वाले के पेट पर तेज दबाव डालने की जरूरत होती है। यह तब तक किया जाना चाहिए, जब तक फँसा भोजन मुँह से बाहर न आ जाए।”

कश्मीरी हिंदू और गौ तस्करों में अंतर क्या, दोनों की मौत एक जैसी: साउथ की हिरोइन साई पल्लवी के विवादित बोल, नक्सली बनकर आ रही पर्दे पर

साउथ की मशहूर अदाकारा साई पल्लवी की एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस वीडियो को लेकर दावा है कि उन्होंने कश्मीर में हुए हिंदुओं के नरसंहार की तुलना गौतस्करों पर होते हमलों से की। उन्होंने कहा कि ये दोनों ही चीजें नहीं होनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद अब सोशल मीडिया पर लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं।

पल्लवी ने तेलुगु में दिए अपने इंटरव्यू में वामपंथ और दक्षिणपंथ से लेकर कश्मीरी हिंदुओं और गौतस्करों पर अपनी बात की। इस इंटरव्यू में जब उनसे विवेक अग्निहोत्री की ‘द कश्मीर फाइल्स’ को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे कश्मीरी पंडित मारे गए। उन्होंने अपनी बात रखते रखते आतंकवादियों द्वारा की गई हिंदुओं की हुई उन निर्मम हत्याओं को, स्थानीयों द्वारा गौतस्करों पर किए गए हमलों से जोड़ा।

उन्होंने कहा, “हाल में कोविड के समय में कुछ मुस्लिम लोग गाय को गाड़ी में ले जा रहे थे तो उन हमला हुआ और जय श्रीराम के नारे लगे। तो अगर आप मजहबी विवाद पर बात करते हैं तो फिर इन दोनों घटनाओं में अंतर क्या गहै? वो तब हुआ। ये अब हुआ। क्या फर्क है? जो बात है वो ये कि हमें हमेशा सही रहना चाहिए बस। अगर हम अच्छे इंसान नहीं हैं। तो ऐसा नहीं हो सकता। अगर आप हैं तो आप न्याय के साथ खड़े होंगे और निष्पक्ष रहेंगे।”

साई पल्लवी के इस बयान को सुनने के बाद अब नेटीजन्स उनके ऊपर भड़के हुए हैं। लोगों का कहना है कि पूरी बातचीत को संभालते-संभालते, खुद को निष्पक्ष दिखाते हुए इन्होंने कश्मीरी पंडितों की तुलना गौतस्करों से कर ही दी। आखिर कौन इन्हें बताएगा कि कश्मीरी पंडित क्यों मारे गए।

कश्मीरी हिंदू नाम के यूजर ने साई को कहा, “पल्लवी, किसी रैंडम मुस्लिम के पीटे जाने में और पूरे समुदाय को जड़ से उखाड़ फेंक देने में फर्क होता है। हमारे दर्द को और गहरा मत करो। आओ और देशो हमारे टूटे घर और दिल। हमने नरसंहार देख लिया पर न्याय का अब भी इंतजार हैं। हर चीज प्रोपेगेंडा नहीं होती।”

बता दें कि साई पल्लवी की आने वाली विराटा परवम है। इस फिल्म में वह नक्सली का रोल निभाएँगे। फिल्म में बाहुबली फेम राणा दग्गूपति भी हैं। उन्होंने नक्सल लीडर का रोल निभाया है।

मुस्लिमों के 2 हथियार- भीड़ और हिंसा: 5 ऐसे मौके जब इस्लामवादियों की बातें कबूल करने को मजबूर हुई भारत सरकार

इस्लामवादियों ने किसी को झुकाने, अपने आधिपत्य को साबित करने और अपने आलोचकों को चुप कराने के लिए हिंसा को रणनीतिक टूल के रूप में हमेशा से इस्तेमाल किया है। सदियों से हिंसा को संस्थागत रूप देकर अपनी धार्मिक हठधर्मिता और मजहब के आलोचनात्मक मूल्यांकन को रोक दिया है।

जब भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने इस्लामिक हदीसों का उदाहरण देकर इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी की तो इस्लामवादियों ने हिंसा करने में कोई हिचकिचाहट नहीं हुई। इतना ही नहीं, इस हिंसा का उपयोग उन्होंने आलोचकों में डर पैदा करने और सरकार पर दबाव बनाने के लिए भी किया।

इस्लामवादी कभी नहीं चाहते कि इस्लाम की शिक्षाओं या पैगंबर मुहम्मद के जीवन की कभी खुली चर्चा की जाए। जो कोई भी इस्लाम या पैगंबर मुहम्मद पर बात करता है, उसे इस्लामवादियों से कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ता है और वे सड़कों पर हिंसा करते हैं। उनके लिए इस्लाम अहिंसक और उनके पैगंबर आलोच्य नहीं हैं।

अगर किसी ने इस्लाम या पैगंबर के बारे में कुछ कहा तो सड़कों पर उतर पर हिंसा का विद्रुप खेल खेलने से परहेज नहीं करते। ये इस्लामवादी झुंड और प्रचंड हिंसा के इस्तेमाल से सरकारों और अधिकारियों को अपनी बोली मनवाने के लिए मजबूर करने में काफी सफल रहे हैं। उन्होंने इस्लामी सिद्धांतों के सार्वजनिक बहस के किसी भी प्रयास को दबाने और भारत की सहस्राब्दी पुरानी बहुलतावादी संस्कृति को दबाने के लिए हिंसा को वीटो के रूप में इस्तेमाल करने के कौशल में महारत हासिल कर ली है।

भारतीय तटों पर इस्लामी आक्रमणकारियों के आगमन ने खानाबदोश जनजातियों की आदिम संस्कृति को नष्ट किया, जो ‘काफिरों’ और गैर-इस्लामियों के खिलाफ दमन के साधन के रूप में हिंसा का उपयोग करने से नहीं कतराते थे। हिंदुओं, जैनियों, बौद्धों और अन्य धर्मों के लोगों पर अत्याचार किया गया, उन्हें सताया गया और मार डाला गया, क्योंकि उन्होंने अपने धर्म को छोड़ने और इस्लाम को अपनाने से इनकार कर दिया था।

भारत के अधिकांश इतिहास में हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच संघर्ष जारी रहा, क्योंकि मुस्लिम शासकों ने हिंदुओं का नरसंहार किया, उनके पूजा स्थलों को ध्वस्त कर दिया और उनकी महिलाओं को गुलाम के रूप में लिया। पिछली शताब्दी में इस्लामवादियों ने अपनी राजनीतिक और सामाजिक ताकत को मजबूत करने के लिए सड़कों पर हिंसा को एक रणनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया। इस हथियार पर उन्होंने क्या हासिल किया, ऐसे पाँच प्रमुख बिंदुओं की चर्चा करेंगे।

भारतीय दंड संहिता में धारा 295A को शामिल करना

इस्लामवादियों ने अपनी माँगों को आगे बढ़ाने और मौजूदा सरकार से रियायतें हासिल करने के लिए लंबे समय से हिंसा का इस्तेमाल करते रहे हैं। हालाँकि, उनकी पहली सबसे बड़ी उपलब्धि भारतीय दंड संहिता (IPC) में धारा 295A को शामिल करने के साथ आई। धारा 295A किसी भी धर्म या उसके विश्वासों का अपमान कर धार्मिक भावनाओं को आहत करने संबंधित है।

धारा 295A की जड़ें 1927 से जुड़ी हैं, जब हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने वाले इस्लामवादियों के लगातार उकसावे के जवाब में ‘रंगीला रसूल’ नामक एक पुस्तक प्रकाशित की गई थी। ‘रंगीला रसूल’ शीर्षक से एक पैम्फलेट लॉन्च किया, जो मुहम्मद के घरेलू जीवन पर एक व्यंग्य है।

इसे पैगंबर मुहम्मद का अपमान बताते हुए अविभाजित भारत के मुस्लिमों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। इसके विरोध में इस्लामवादी सड़कों पर उतर आए और इसके लेखक और प्रकाशक की गिरफ्तारी की माँग की। प्रकाशक महाशय राजपाल को शुरू में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में अदालत ने उन्हें रिहा कर दिया।

इसके बाद कई जगहों पर मौलानाओं द्वारा भड़काऊ भाषण दिए गए, जिसके बाद दंगे भड़क उठे। जमीयत-उलेमा-ए-हिंद की एक आधिकारिक शाखा अल-जमीयत ने एक लेख में चेतावनी दी थी कि ‘शरिया के तहत पैगंबर का अपमान करने की सजा मौत है और पैगंबर का अपमान करने वालों को मारना कानूनी रूप से जायज है’।

महाशय राजपाल की रिहाई के बाद विरोध और प्रदर्शनों को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने धार्मिक भावनाओं का अपमान करने के खिलाफ एक कानून बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके बाद साल 1927 में भारतीय दंड संहिता में धारा 295A को सम्मिलित किया गया। हा

हालाँकि, कानून बनने के बाद भी इस्लामवादी ‘गुस्ताख-ए-रसूल की एक ही सजा, सर तन से जुदा’ का का पालन करते रहे और दो साल बाद 1929 में एक 19 वर्षीय इल्म उद दीन नाम के इस्लामवादी ने चाकू मारकर महाशय राजपाल की हत्या कर दी।

भारत का बँटवारा

भारत का विभाजन इतिहास का एक और खूनी अध्याय है, जब इस्लामवादियों ने हिंसा के और हिंदू विरोधी दंगों के जोर पर भारत का बँटवारा कर अपने लिए पाकिस्तान ले लिया। भारत की स्वतंत्रता के वर्षों पहले द्वि-राष्ट्र सिद्धांत देने वाली मुस्लिम लीग ने कट्टरपंथी मुसलमानों को शरिया द्वारा शासित एक इस्लामी देश का वादा करके संगठित किया।

हालाँकि, जब कॉन्ग्रेस ने मुस्लिम लीग की भारत विभाजन के माँग को खारिज कर दिया तो देश भर में हजारों और लाखों इस्लामवादी हिंसा के लिए सड़कों पर उतर आए। इस दौरान दंगे, हिंसा और बर्बरता करके उन्होंने अपनी माँगों को मनवाने के लिए बाध्य किया। अंत में कॉन्ग्रेस भारत विभाजन के लिए सहमत हो गई।

सैटेनिक वर्सेज के कारण छुपने के लिए बाध्य हुए सलमान रुश्दी

लेखक सलमान रुश्दी की 1989 में लिखित ‘द सैटेनिक वर्सेज’ को ईशनिंदा बताकर मुस्लिम समुदाय बड़े पैमाने पर बवाल कर दिया। इस्लामवादियों ने इस किताब को लेकर रुश्दी पर इस्लाम को ‘धोखेबाज, अज्ञानी और यौन रूप से विचलित धर्म’ के रूप में चित्रित करने का आरोप लगाया।

भारत भी रुश्दी की इस किताब से प्रभावित था। इस्लामवादियों के आगे झुकते हुए खुद को लोकतांत्रिक कहने वाला भारत द सैटेनिक वर्सेज पर पहले प्रतिबंध लगाकर कुछ चुनिंदा देशों में से एक बन गया। भारत के गृह मंत्रालय ने तब राजीव गाँधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार से सिफारिश की थी कि उक्त पुस्तक के प्रकाशन और बिक्री से भारत में दंगों जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

राजीव गाँधी सरकार ने गृह मंत्रालय की सिफारिश को स्वीकार कर लिया और किताब पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी। उधर ईरान के अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने मुस्लिमों से रुश्दी को मारने का फातवा जारी कर दिया था। यहाँ तक ​​कि कॉन्ग्रेस ‘उदारवादी मुस्लिम’ सलमान खुर्शीद ने भी किताब पर प्रतिबंध को सही ठहराया था।

इस्लामवादियों के आगे आत्मसमर्पण करते हुए सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया। हालाँकि, कई इस्लामी मुल्कों ने पुस्तक पर प्रारंभिक प्रतिबंध हटा दिया, लेकिन भारत ने प्रतिबंध को जारी रखा। इस पूरे प्रकरण ने कट्टरपंथी को अपने फैसलों को प्रभावित करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षता के लिए अपनी पुरानी प्रतिबद्धता को कमजोर करने की अनुमति देकर भारत सरकार उनकी आगे की रणनीति को आसान कर दिया।

शाह बानो मामले में राजीव गाँधी द्वारा घुटने टेकना

1986 में राजीव गाँधी की सरकार ने मुस्लिम कट्टरपंथियों के सामने आत्मसमर्पण कर एक खतरनाक मिसाल कायम की। मोहम्मद अहमद खान बनाम शाह बानो बेगम एवं अन्य मामले को लेकर कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा पारित कानून को भारत के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण के रूप में याद किया जाता है।

दरअसल, 62 वर्षीय मुस्लिम महिला शाह बानो ने अप्रैल 1978 में अदालत में एक याचिका दायर कर अपने तलाकशुदा पति और इंदौर (मध्य प्रदेश) के वकील मोहम्मद अहमद खान से गुजारा भत्ता की माँग की। शाह बानो के पति खान ने कहा कि वह किसी भी हर्जाने के लिए भुगतान के लिए बाध्य नहीं हैं, क्योंकि वह इस्लामी कानून के तहत उनकी पत्नी नहीं हैं।

दोनों की शादी 1932 में हुई थी और उनके पाँच बच्चे थे- तीन बेटे और दो बेटियाँ। शाह बानो ने अदालत में अपने पाँच बच्चों के लिए भरण-पोषण का दावा दायर किया। अगस्त 1979 में शाह बानो ने स्थानीय अदालत में भरण-पोषण का मामला जीता, जो खान को 25 रुपये प्रति माह के रखरखाव के साथ प्रदान करने का आदेश दिया। हालाँकि, खान ने इस आधार पर दावे को चुनौती दी कि भारत में मुस्लिम पर्सनल लॉ में पति को तलाक के बाद इद्दत अवधि के लिए केवल रखरखाव प्रदान करने की जरूरत होती है।

मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुँचा तब अप्रैल 1985 में एक ऐतिहासिक फैसले में कोर्ट ने शाह बानो के पक्ष में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के फैसले को यह कहते हुए बरकरार रखा कि वह अपने पति द्वारा भरण-पोषण के लिए भुगतान की हकदार थी।

इसके बाद इस्लामवादियों ने हिंसा की अपनी कला का इस्तेमाल करते हुए एक बार फिर हिंसा और डराने-धमकाने का सहारा लिया। मुस्लिम कट्टरपंथियों ने फैसले को मुस्लिम पर्सनल लॉ को कमजोर करने के प्रयास के रूप में इसके खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए।

मुस्लिम कट्टरपंथियों और मौलवियों ने 1984 में चुनी गई तत्कालीन राजीव गाँधी सरकार को मुस्लिम महिला (तलाक पर संरक्षण अधिनियम), 1986 पारित करने के लिए बाध्य किया। इस कानून ने शाह बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को उलट दिया। इस कानून ने तलाकशुदा मुस्लिम महिला को केवल इद्दत की अवधि के दौरान या तलाक के 90 दिनों तक भरण-पोषण की व्यवस्था की।

इस्लामी कट्टरपंथियों के दबाव में नरसिम्हा राव सरकार ने पूजा स्थल अधिनियम बनाया

1990 के दशक की शुरुआत में राम जन्मभूमि आंदोलन हिंसा और दंगों के साथ जुड़ गया, क्योंकि मुस्लिम कट्टरपंथियों ने विवादित बाबरी ढाँचे को लेकर हिंदू पक्ष की माँग के विरोध में सड़कों पर उतर गए। चूँकि आंदोलन अपने चरम पर था तो इस्लामवादियों का यह दबाव काम नहीं आया और वे रियायत की बात करने लगे।

नतीजतन, केंद्र में नरसिम्हा राव सरकार ने भारत में हिंदुओं द्वारा राम जन्मभूमि जैसे सुधार आंदोलनों को रोकने के उद्देश्य से एक नया कानून बनाया। यह कानून पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 था।

इस अधिनियम के उद्देश्यों में कहा गया है कि 15 अगस्त 1947 के दिन के स्वरूप वाले किसी पूजा स्थल के रूप या चरित्र में बदलाव से संबंधित को कोई भी वाद मान्य नहीं होगा और न्यायालय ऐस किसी वाद पर विचार नहीं कर सकता। हालाँकि, इसमें अयोध्या के राम मंदिर के मुद्दे को अलग रखा गया था।

इसका मतलब है कि यदि पूजा स्थल 15 अगस्त 1947 को एक मस्जिद है, तो इसका चरित्र एक मस्जिद ही रहेगा, भले ही वह मूल रूप से एक मंदिर क्यों ना हो। इस अधिनियम में पूजा स्थल के स्वरूप में किसी भी तरह के बदलाव की कोशिश के लिए सजा का प्रावधान किया गया है।

इस प्रकार, इस्लामवादी सरकार से अनुकूल कानून हासिल करने में सफल रहे, ताकि भविष्य में उनके कब्जे वाले हिंदू धार्मिक स्थलों को पुनः प्राप्त करने के लिए राम जन्मभूमि जैसा कोई आंदोलन न हो सके।

जब वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद के वुज़ुखाना के अंदर शिवलिंग की खोज की गई तो इस्लामवादियों ने हिंदुओं को पूजा स्थल अधिनियम- 1991 के प्रावधानों का हवाला दिया और कहा कि वे इस पर दावा नहीं कर सकते।

‘ब्रह्मास्त्र’ के ट्रेलर में मंदिर में जूते पहन कर घंटी बजाते दिखे रणबीर कपूर, VFX देख बोले लोग – इससे अच्छी शक्तिमान

बॉलीवुड में एक के बाद एक फिल्म सुपरफ्लॉप हो रही है। बड़े बजट और दिग्गज सुपरस्टार्स की फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल नहीं दिखा पा रही हैं। इसी बीच स्टार किड्स रणबीर कपूर और आलिया भट्ट (Alia Bhatt) की फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र पार्ट 1: शिवा’ का ट्रेलर (Brahmastra Trailer) रिलीज ​हुआ है। बुधवार (15 जून 2022) को धर्मा प्रोडक्शंस के ट्रेलर रिलीज करते ही ट्विटर पर मीम्स की बाढ़ आ गई।

अयान मुखर्जी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ का ट्रेलर अमिताभ बच्चन की आवाज और रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) की झलक के साथ शुरू होता है। ट्रेलर में महाबली और सर्व शक्तिशाली अस्त्र को ढूँढने की कहानी बताई गई है। फिल्म में अस्त्रों के देवता ‘ब्रह्मास्त्र’ की शक्तियों का एहसास कराने की कोशिश की गई है। ट्रेलर में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, आलिया भट्ट, रणबीर कपूर के अलावा साउथ के सुपरस्टार नागार्जुन और मौनी रॉय की झलक भी देखने को मिल रही है।

ट्रेलर में ‘ब्रह्मास्त्र’ को ‘ शस्त्रों का देवता’ कहा गया है। फिल्म में रणबीर ‘शिवा’ का किरदार निभा रहे हैं। इस ‘ब्रह्मास्त्र’ से रणबीर कपूर का सीधा कनेक्शन दिखाया गया है, जिसे शुरुआत में अपनी शक्तियों का एहसास नहीं होता है। उसे आग भी नहीं जला पाती है, जिसकी वजह से रणबीर कपूर को लगता है कि आग के साथ उसका पुराना रिश्ता है। इसके बाद से नेटिजन्स सोशल मीडिया पर आग की तस्वीर शेयर करते हुए ब्रह्मास्त्र में रणबीर कपूर के किरदार पर चुटकी ले रहे हैं।

ट्विटर पर ब्रह्मास्त्र के ट्रेलर से खासा निराश एक यूजर ने लिखा, “शक्तिमान से ज्यादा अच्छा नहीं है। गारंटी के साथ कहता हूँ फिल्म सुपरफ्लॉप होगी।” फिल्म के एक दृश्य में रणबीर कपूर जूते पहन कर उछल कर मंदिर का घंटा बजाते हुए दिख रहे हैं, जिसे लोगों ने हिन्दू धर्म का अपमान भी करार दिया है। फिल्म के निर्माताओं में करण जौहर भी हैं।

शिंदे लिखते हैं, “मार्वेल, अलिफलैला, हातिमताई और वारक्राफ्ट सब का VFX चोरी करने के बाद बनी ब्रह्मास्त्र फ्लॉप साबित होगी।”

एक और यूजर ब्रह्मास्त्र का ट्रेलर देखने के बाद कहता है कि उसने इससे पहले ऐसा हिंदी सिनेमा में कभी नहीं देखा।

सुशांत सिंह राजपूत के फैंस ने हैरानी जताई कि दिवंगत अभिनेता की दूसरी पुण्यतिथि के एक दिन बाद ही इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया।

वहीं हर्षित करण जौ​हर के धर्मा प्रोडक्शन को टैग करते हुए लिखते हैं, “लिखकर रख लोग फ्लॉप होगी।”

बता दें कि ब्रह्मास्त्र की कहानी फिल्म निर्माता व डायरेक्टर अयान मुखर्जी ने लिखी है। स्टार स्टूडियो के सहयोग से करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन, प्राइम फोकस और स्टारलाईट पिक्चर्स ने इस फिल्म प्रोड्यूस किया है। 9 सितंबर 2022 को यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में अमिताभ बच्चन, रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, मौनी रॉय और नागार्जुन अक्किनेनी मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर से हिन्दू पलायन को मजबूर, बेच रहे घर: बताया- महाजनी टोला में घरों पर मुस्लिम करते हैं पत्थरबाजी

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नरसिंहपुर जिले (Narsinghpur) के मुस्लिम बहुल मोहल्ले ‘महाजनी टोला’ में हिन्दुओं पर पत्थरबाजी (Stone Pelting) करने का मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित का कहना है कि इलाके में हिन्दुओं की संख्या बहुत ही कम है। इसका फायदा उठाकर कट्टरपंथी मुस्लिम लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं। ताकि हिन्दू उस जगह को छोड़कर पलायन के लिए मजबूर हो जाएँ।

मामला नरसिंहपुर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र का है। इसी के अंतर्गत महाजनी टोला आता है। यहीं पर नया बाजार में रहने वाले दलित हिन्दू इमरत प्रजापति ने पुलिस में शिकायत की है कि सोमवार (14 जून) की रात को को अपने घर में सो रहे थे। कि अचानक से पत्थरबाजी शुरू हो गई। नींद खुलते ही जब आँगन में जाकर देखा तो वहाँ पर पत्थर पड़े थे। घर के खपड़े टूट गए थे। इमरत का कहना है कि उसने कुछ लोगों को बुलाकर उन्हें ये दिखाया और पुलिस को फोन किया। थाने से दो सिपाही आए, जब देख के चले गए तो अचानक फिर से पत्थरबाजी शुरू हो गई।

पीड़ित द्वारा उपलब्ध कराया गया शिकायती पत्र

इमरत का आरोप है कि इलाके में मुस्लिम कट्टरपंथी आए दिन ऐसा करते हैं। इसी कारण से इससे पहले भी कई हिन्दू परिवार मजबूरन पलायन कर गए हैं। पीड़ित ने इलाके में गश्त कराने की माँग प्रशासन से की है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़ित इमरत प्रजापति ने कहा, “रात में मेरे घर पर पत्थरबाजी हुई थी। लेकिन, अँधेरा होने के कारण किसी को देख नहीं पाया। मेरे तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं, आँगन में ही खेलते रहते हैं और पत्थर कभी भी उन्हें लग सकता है। यहाँ पर हिन्दू केवल 4-5 घर ही हैं। डेढ़ साल पहले भी पत्थरबाजी की थी। लेकिन शिकायत की थी, तो पत्थरबाजी बंद हो गई थी। अब तक यहाँ से 2-3 हिन्दू परिवार अपना घर बेचकर चले गए हैं। हम सब लोग यहाँ डर में जी रहे हैं।”

हल्द्वानी में पैसे और जमीन का लालच दे महिला पर डाला ईसाई बनने का दबाव, गाजियाबाद से लापता 12वीं की छात्रा के धर्मांतरण का भी अंदेशा

उत्तराखंड (Uttarakhand) के कुमायूँ जिले के हल्द्वानी में एक महिला के धर्मांतरण (Religious Conversion) का मामला सामने आने के बाद आक्रोशित भीड़ राजपुरा पुलिस चौकी जा पहुँची। वहाँ लोगों एक युवक को पीट दिया। दूसरी घटना उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गाजियाबाद की है, जहाँ 12 कक्षा की एक छात्रा लापता हो गई। अब उसकी माँ ने अपनी बेटी के धर्मान्तरण की आशंका जताई है।

हल्द्वानी मामला

घटना हल्द्वानी के राजपुरा पुलिस चौकी क्षेत्र की बताई जा रही है। मंगलवार (15 जून) को राजपुरा के गौला किनारे रहने वाले हिन्दू समुदाय के लोग पुलिस थाने पहुँचे। इनका आरोप था कि एक दिन पहले, यानी की सोमवार को ईसाई मिशनरियों का एक समूह इलाके में आया था। उन लोगों ने इलाके की हिन्दू आबादी को बरगलाया और एक हिन्दू महिला पर जबरन ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाया।

हिन्दुओं का आरोप इलाके में आए दिन ईसाई मिशनरी आते हैं और लोगों को धर्मांतरण के बदले जमीन, पैसे और सुखी जीवन का लालच देते रहते हैं। ऐसे में हिन्दू संगठनों ने इन आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की। आरोप है हिन्दू लोगों ने एक शख्स को भी पीट दिया। इसके बाद पुलिस पुलिस अधिकारी ने महिला की शिकायत पर तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

माँ को सताया धर्मान्तरण का डर

गाजियाबाद के मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र की रहने वाली 12वीं की छात्रा बीते 25 मई को अपने घर से लापता हो गई थी। उसकी माँ की शिकायत पर पुलिस लड़की की तलाश कर रही है। इस बीच उसकी माँ ने बेटी को बहला-फुसलाकर उसके धर्मान्तरण की आशंका जताई है। पीड़िता की माँ का दावा है कि उनकी बेटी घर में दूसरे धर्म के तौर तरीकों को मानने लगी थी। जब उससे इसका कारण पूछा तो उसने कुछ नहीं बताया।

वहीं पुलिस को मामले की जाँच के दौरान पता चला है कि छात्रा बालिग है और बीते कुछ समय पहले अपनी एक दोस्त के जरिए दिल्ली के युवक से मिली थी।

‘नूपुर शर्मा का बाल भी बाँका हुआ तो 100 करोड़ लोगों को झेल नहीं पाओगे’: बिहार में भगवा झंडों के साथ सड़क पर उतरे हिन्दू, गूँजा ‘जय श्री राम’

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) द्वारा पैग़ंबर मोहम्मद पर की गई विवादित टिप्पणी का मामला देश के अलग-अलग हिस्सों से होते हुए बिहार (Bihar) में भी आ पहुँचा है। इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा सड़कों पर हिंसक प्रदर्शन और आगजनी करने के बाद अब नूपुर शर्मा के समर्थन में लोग सामने आने लगे हैं। मंगलवार को बिहार के आरा और वैशाली जिले के हाजीपुर (Hajipur) में नूपुर शर्मा के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया।

हाजीपुर में मंगलवार (14 जून 2022) को हिंदू पुत्र संगठन की ओर आयोजित आरती कार्यक्रम के बाद संगठन के कार्यकर्ताओं के द्वारा मस्जिद (Mosque) के बाहर जमकर प्रदर्शन किया गया। कार्यकर्ताओ ने ‘नुपुर शर्मा संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं’ का नारा लगाया। साथ ही ‘पाकिस्तान परस्त मुर्दाबाद’, ‘लव जेहाद मुर्दाबाद’, ‘इस्लामिक जेहाद मुर्दाबाद’ के नारे भी लगाए। मस्जिद के पास जाकर हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदर्शन किए जाने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई और हालात ना बिगड़े इसके लिए डीएम एसपी खुद मौके पर पहुँच गए।

इसके अलावा मस्जिद चौक पर भारी संख्या में पुलिस बल को भी तैनात किया गया था। हालाँकि, शांतिपूर्ण तरीके से ‘हिंदू पुत्र’ संगठन के कार्यकर्ताओं ने आरती की, प्रसाद बाँटा और नूपुर शर्मा के समर्थन में नारेबाजी की।

वहीं बिहार के आरा के रमना मैदान में नूपुर के समर्थन में विशाल सभा की गई। यह सबा विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और ABVP के लोगों ने संयुक्त रूप से की थी। इस सभा के बाद रैली भी निकाली गई और कहा गया कि हमारी चुप्पी को कमजोरी ना समझिए। इस दौरान लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगाए। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने कहा, “कोई भी नूपुर शर्मा का बाल भी बाँका नहीं कर सकता। अगर नूपुर शर्मा को कुछ भी होता है तो 100 करोड़ लोगों को तुम झेल नहीं पाओगे।”

साथ ही उन्होंने कहा, “अगर तुम हिंदुओं को छेड़ोगे तो तुम्हें कोई नहीं बचाएगा।” सभा के दौरान हिंदू संगठनों के लोग टार्च और भगवा झंडा लेकर रातभर झूमते नजर आए। आरा में नूपुर के समर्थन में हुई इस रैली का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 

इसके साथ ही बजरंग दल 16 जून को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेगा और विवादास्पद धार्मिक टिप्पणियों पर हिंसा की हालिया घटनाओं के खिलाफ राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को एक ज्ञापन सौंपेगा।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इस संबंध में प्रेस रिलीज भी जारी किया है। इसमें कहा गया है कि देश में बढ़ती इस्लामिक जिहादी कट्टरपंथियों की अतिवादी घटनाओं के विरुद्ध विश्व हिंदू परिषद की युवा ईकाई बजरंग दल अब सड़कों पर उतरेगा। मस्जिदों से निकलने वाले कट्टरपंथी लगातार हिंदुओं के घरों को जला रहे हैं, उन पर जानलेवा हमला कर रहे हैं। इन हिंसक घटनाओं के खिलाफ बजरंग दल आगामी गुरुवार 16.6.2022 को देश भर के जिला मुख्यालयों में धरने देकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी देगा।

इससे पहले बिहार के गोपालगंज में नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्टर लगाए गए थे। पोस्टर शहर के तमाम हिस्सों में दिखाई दे रहे थे। पोस्टर में नूपुर शर्मा की फोटो के साथ ‘आई सपोर्ट नुपूर शर्मा’ लिखा हुआ था। ये पोस्टर 12-13 जून के बीच आधी रात को लगाए गए। वहीं पाताल पुरी मठ के प्रमुख महंत बालक दास ने कहा कि नूपुर शर्मा की रक्षा के लिए 18 लाख नागा साधु सड़क पर उतरेंगे।

पिछले दिनों पड़ोसी देश नेपाल में भी बड़ी रैली आयोजित की गई थी। नेपाल में रह रहे हजारों हिंदुओं ने नूपुर शर्मा के समर्थन में सड़कों पर रैली निकाली। यह रैली राजधानी काठमांडू के अलावा बीरगंज, पीरगंज और अन्य शहरों में भी निकाली गई थी। इस दौरान ‘जय हिंदू’, ‘जय हिंदुत्व’ और ‘जय श्री राम’ जैसे नारे लगाए गए। रैली में “जो हिंदू शिव और राम का नही वो किसी काम का नही” जैसे पोस्टर भी दिखाई दिए।