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सिगरेट का धुआँ उड़ाते अबुल कलाम, बैठक में सोते कॉन्ग्रेस अध्यक्ष, गाँधी से लड़ते नेहरू: विभाजन को ऐसे राजी हुई थी कॉन्ग्रेस, गई 20 लाख जानें

भारत का विभाजन – ये एक ऐसा अध्याय है जिसने आज़ादी के जश्न को भी फीका कर दिया था। हमें अंग्रेजों की दासता से मुक्ति तो मिली, लेकिन भारत माँ बँट गईं। अंग्रेजों ने सिरिल रेडक्लिफ को आज़ादी से पहले इसकी जिम्मेदारी देकर भेजा, जिसे इस इलाके कोई समझ ही नहीं थी। उसने एक लाइन खींच दी और कॉन्ग्रेस राजी हो गई। 20 लाख लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी। करोड़ों का पलायन हुआ। 200 वर्षों की गुलामी के बाद मिली क्या तो 20 लाख लाशें।

भारत के विभाजन ने 20 लाख ज़िंदगियों को लील लिया

सड़क पर मानव अंग पड़े रहते थे। रेलगाड़ियों में लाशें भर कर भेजी जाती थीं। क्षत-विक्षत शव मिलते थे। कई महिलाओं का बलात्कार हुआ। करीब 2 करोड़ लोगों को पलायन करना पड़ा था। बंगाल और पंजाब पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा, जो उस समय तक अखंड था। लोगों को अपनी संपत्तियाँ छोड़ कर पलायन को मजबूर होना पड़ा। जिस रेडक्लिफ ने कभी पेरिस से पूर्व की ओर देखा तक नहीं था, उसने भारतीय उपमहाद्वीप का नक्शा बदल डाला।

जिस मोहम्मद अली जिन्ना ने मुस्लिमों के भीतर कट्टरता भर कर अलग मुल्क की माँग को अभियान बनाया, वो भी कभी कॉन्ग्रेस का ही नेता हुआ करता था। जो पाकिस्तान भारत से बँट कर अलग हुआ था, 1971 में भारत से भीषण युद्ध के बाद उसका भी विभाजन हुआ और बांग्लादेश एक अलग देश बना। जिस तरह मालाबार हुआ था, वैसे ही बंगाल में जमींदारी के नाम पर हिन्दुओं और उनकी संपत्ति को निशाना बनाया गया। 1937 के प्रांतीय चुनाव में मुस्लिम बहुल इलाकों में जिन्ना की ‘मुस्लिम लीग’ की बड़ी जीत ने ही इसकी पटकथा तैयार की थी।

वो 15 जून, 1947 का ही दिन था जब कॉन्ग्रेस भारत के विभाजन के लिए तैयार हुई थी। ‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU)’ के संस्थापक सर सैयद अहमद खान ने सन् 1876 में ही कह दिया था कि एक देश में हिन्दू-मुस्लिम साथ-साथ नहीं रह सकते, क्योंकि दोनों अलग हैं। बाद में भी उन्होंने कहा कि एक ही गद्दी से भारत में हिन्दू-मुस्लिम शासन नहीं कर सकते। सन् 1906 में कॉन्ग्रेस के ही मुस्लिम नेताओं ने मिल कर ‘ऑल इंडिया मुस्लिम लीग’ पार्टी बनाई थी।

1930 ईस्वी में ‘मुस्लिम लीग’ के कवि अल्लामा इकबाल ने मुस्लिमों के लिए एक अलग मुल्क की माँग की। हिन्दू-मुस्लिम एकता की बात करते रहे जिन्ना के नेतृत्व में अलग इस्लामी मुल्क के लिए प्रस्ताव पारित किया गया। ब्रिटश सरकार ने भारत के अंदर की एक स्वायत्त तरह के इस्लामी राज्य के गठन की बात कही, लेकिन जिन्ना और नेहरू ने इसे नकार दिया। जिन्ना ने ‘कांस्टीट्यूएंट असेंबली’ की माँग को भी खारिज कर दिया।

मुस्लिम लीग के सामने कॉन्ग्रेस ने कर दिया था समर्पण

3 जून, 1947 को भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने अलग मुल्क की बात रखी, जिसे कॉन्ग्रेस और मुस्लिम लीग ने स्वीकार कर लिया। माउंटबेटन ने भी सारे काम जल्दी-जल्दी में किया, क्योंकि उसे वापस जाकर अपने नौसेना के करियर को आगे बढ़ाना था। जिन्ना ने ‘डायरेक्ट एक्शन’ का ऐलान किया और हिन्दुओं का कत्लेआम शुरू हो गया। कॉन्ग्रेस हिंसा नहीं रोक पाई। महात्मा गाँधी ने भी कॉन्ग्रेस का समर्थन किया और विभाजन के लिए हिन्दुओं और सिखों को जिम्मेदार ठहराया।

कई देशों में भारत के राजदूत रहे नरेंद्र सिंह सरीला अपनी पुस्तक ‘विभाजन की असली कहानी’ में लिखते हैं कि उन्हें अंग्रेजों के गुप्त दस्तावेजों से पता चला था कि सोवियत संघ के विस्तार को रोकने और ईरान के तेल के कुओं पर उसके कब्जे की आशंका से अंग्रेजों ने भारत को बाँटा, ताकि पाकिस्तान में सैन्य बेस बना कर नजर रख सके। उन्होंने विभाजन में अमेरिका का भी हाथ माना है। साथ ही कहा है कि अंग्रेजों की नींव हिलाने में बोस का हाथ था, उनके देहांत के बाद भी।

इसी तरह मुनीश त्रिपाठी अपनी पुस्तक ‘विभाजन की त्रासदी‘ में लिखते हैं कि माउंटबेटन मुस्लिमों को एक विजेता समाज मानता था, जबकि हिन्दुओं पराजित। मुस्लिम नेताओं से उसकी तुरंत दोस्ती हो जाती थी और उसका कहना था कि मुस्लिम अंग्रेजी शासन को बनाए रखना चाहते हैं। उसका मानना था कि भारत को अंग्रेजों ने ही अखंड बनाया है। जिन्ना के भड़काने के बाद देश भर में 7000 से अधिक हिन्दुओं का नरसंहार हो गया था।

त्रिपाठी लिखते हैं कि विभाजन का सबसे बड़ा कारण पृथक निर्वाचन वाली व्यवस्था थी, जिसे कॉन्ग्रेस ने मान लिया था। 1916 में मुस्लिम लीग से उसने समझौता किया, जिसके तहत मुस्लिमों में भारत से अलग होने की भावना राजनीतिक रूप से भी भर गई। इसे ‘मार्ले मिंटो सुधार’ नाम दिया था, जिसने भारत का बिगाड़ ही किया। एक तरह से कॉन्ग्रेस ने मुस्लिम लीग के आगे समर्पण कर दिया। सर सैयद अहमद खान खुद एक अंग्रेज कर्मचारी हुआ करते थे और उन्होंने मुस्लिमों को अंग्रेजी शिक्षा ग्रहण कर सरकारी नौकरियों के लिए उकसाया था, क्योंकि उन्हें पढ़े-लिखे हिन्दू समाज से द्वेष था।

कॉन्ग्रेस और नेहरू विभाजन को हो गए थे राजी

उन्होंने ही मुस्लिमों को कॉन्ग्रेस के आंदोलन से न जुड़ने की सलाह दी थी। बंगाल में भी सरकारी नौकरियों से लेकर कारोबार तक में हिन्दुओं की प्रतिष्ठा थी, जिससे मुस्लिमों को ईर्ष्या होने लगी। कॉन्ग्रेस के तीसरे ही अध्यक्ष बदरुद्दीन तैयब ने ही लिखा था कि कोई भी भारत को एक राष्ट्र नहीं मानता है, वो भी सन् 1888 में। मुस्लिम लीग के दबाव में महात्मा गाँधी और कॉन्ग्रेस ने खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया, जो खलीफा के शासन की वापसी के लिए हुआ था और इसकी आड़ में हिन्दुओं का नरसंहार हुआ।

इस पुस्तक में ये भी लिखा है कि अबुल कमाल आज़ाद मानते थे कि जवाहरलाल नेहरू ने विभाजन के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, क्योंकि इसके पीछे उनकी पत्नी एडविना माउंटबेटन का हाथ था। एडविना ने नेहरू के सामने पंजाब में हुए दंगों को लेकर आँसू बहाए और नेहरू पिघल गए। इसमें बताया गया है कि एडविना और उनकी बेटी पामेला को नेहरू को मनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। जवाहरलाल नेहरू ने कॉन्ग्रेस में विभाजन के प्रस्ताव को रखा और उस समय बिहार-बंगाल के दौरे पर गए महात्मा गाँधी को इसकी सूचना नहीं दी।

राम मनोहर लोहिया ने अपनी पुस्तक ‘भारत विभाजन के गुनहगार‘ ने इसके बाद हुई बैठक का जिक्र किया है, जिसमें गाँधी की आपत्ति के बाद नेहरू आवेश में आए गए और कहा कि वो तो हर बात की जानकारी गाँधीजी को देते रहते हैं, लेकिन दूर नोआखली में होने के कारण उन्हें विस्तार से नहीं बता पाए। लोहिया ने तत्कालीन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष आचार्य कृपलानी का जिक्र किया है जो बैठकों में सोए रहते थे और मौलाना अबुल कलम आज़ादी सिगरेट का धुआँ उड़ाते रहते थे।

टीवी एक्टर करणवीर बोहरा ने महिला से ब्याज पर लिए ₹1.99 करोड़: दावा- पैसे माँगे तो पत्नी के साथ धमकाया, कहा- हत्या कर देंगे

टीवी के मशहूर एक्टर करणवीर बोहरा (Karanvir Bohra) पर धोखाधड़ी का आरोप लगा है। बुधवार (15 जून 2022) को 40 साल की एक महिला ने बोहरा पर 1.99 करोड़ रुपए ठगने का आरोप लगाया है। महिला का आरोप है कि बोहरा ने उससे पैसे उधार लेते वक्त 2.5% ब्याज के साथ उसे वापस करने का वादा किया था।

पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में महिला ने कहा है कि एक्टर बोहरा ने केवल एक करोड़ रुपए वापस किए। बाकी का मूलधन और ब्याज वो नहीं चुका रहे हैं। इस मामले में बोहरा समेत 6 लोगों के खिलाफ मुंबई के ओशिवारा पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि टीवी एक्टर मनोज बोहरा उर्फ ​​करणवीर बोहरा और उसकी पत्नी तजिंदर सिद्धू ने उसे धमकी दी है कि अगर उसने पैसे वापस माँगे तो वे उसकी हत्या कर देंगे।

उल्लेखनीय है कि बीते कुछ सालों में बोहरा टीवी शो नच बलिए 4, झलक दिखला जा 6, खतरों के खिलाड़ी 5, बिग बॉस 12 और आखिरी बार कंगना रनौत की रियलिटी शो ‘लॉकअप’ में नजर आए थे। ‘लॉकअप’ के शो में उन्हें दूसरे कंटेंस्टेंट से ये कहते हुए देखा गया था कि वह कर्ज में हैं और उसे चुका नहीं पा रहे हैं। इस कारण उनके मन में आत्महत्या के खयाल आ रहे हैं।

एक्टर ने कहा था कि वो एक बड़ी ही गंभीर आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं और उनके खिलाफ कर्ज के पैसे वापस नहीं करने के कई केस दर्ज किए हैं। उन्होंने कहा था कि अगर परिवार में उनकी देखभाल करने वाला कोई न होता तो शायद वो सुसाइड कर चुके होते। उन्होंने ये माना है कि 2015 के बाद से उन्होंने जो भी रियलिटी शो किए हैं वो सभी कर्ज उतारने के लिए थे।

खास बात ये है कि इतने कर्जे में डूबे होने के बाद भी एक्टर और उनकी पत्नी अपने बच्चों को हमेशा एक अच्छी लाइफ स्टाइल देते रहे हैं। हाल ही में दंपति ने अपनी जुड़वाँ बेटियों को भारत के बजाय कनाडा के एक स्कूल में एडमिशन दिलाने का फैसला किया था। साथ ही, वर्ष 2019 में दोनों ने बेला और विएना नाम की अपनी जुड़वाँ बेटियों के लिए हैलोवीन-थीम वाली स्पेशल जन्मदिन की पार्टी रखी थी।

बहरहाल, मुंबई पुलिस ने मामले में करणवीर बोहरा के नाम से मशहूर मनोज बोहरा के खिलाफ आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल इस मामले की जाँच पुलिस कर रही है। इस मामले में दोनों आरोपितों के बयान जल्द ही दर्ज किए जाएँगे।

ऐसी बीवी ना मिले दोबारा: पीड़ित पतियों ने 108 बार पीपल की उलटी परिक्रमा की, ‘पत्नी पीड़ित आश्रम’ में कौए की पूजा

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में एक कार्यालय है। नाम है- पत्नी पीड़ित आश्रम। इसी औरंगाबाद में 14 जून 2022 को वट सावित्री पूर्णिमा पर कथित पीड़ित पतियों ने एक अनूठा प्रदर्शन किया। उन्होंने पीपल के पेड़ की 108 बार उलटी परिक्रमा की। भगवान से पत्नी से बचाने की प्रार्थना की। फिर से ऐसी बीवी नहीं मिलने का आशीर्वाद माँगा।

आश्रम के संस्थापक भरत फुलारे ने बताया, “वट सावित्री पूर्णिमा के अवसर पर महिलाएँ बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं और सुखी वैवाहिक जीवन और सात जन्मों के लिए एक ही पति पाने की प्रार्थना करती हैं। हम अपनी पत्नियों से परेशान हैं और उनसे छुटकारा पाने के लिए हमने पीपल के पेड़ की पूजा करते हुए प्रार्थना की है कि कभी ऐसी जीवनसंगिनी ना मिले।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई कानून बनाए गए हैं, लेकिन उनका दुरुपयोग भी हो रहा है। इसका डर दिखाकर पुरुषों को प्रताड़ित किया जा रहा है। अब पुरुषों के लिए भी कानून बनाने की जरूरत है ताकि वे अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकें।

फुलारे ने कहा कि उन्होंने पत्नी पीड़ित आश्रम की स्थापना इसलिए की है ताकि पत्नियों से पीड़ित पुरुषों को सुकून मिल सके। हालाँकि इस आश्रम में प्रवेश उतना आसान नहीं है। यहाँ दाखिल होने के लिए पत्नी द्वारा पति पर कम से कम 20 केस दर्ज होने चाहिए या फिर पत्नी की वजह से पति जेल की हवा खा चुका हो। अब पीपल की पूजा करके नई शुरुआत की गई है। 

रोजाना होती है कौए की पूजा

इस आश्रम में प्रवेश करते ही पहले कमरे में कार्यालय है। यहाँ पत्नी पीड़ितों को कानूनी सलाह दी जाती है। कार्यालय में थर्माकोल से बना एक बड़ा सा कौआ भी है। रोजाना सुबह-शाम उसकी पूजा की जाती है। आश्रम में रहने वाले बताते हैं कि मादा कौआ अंडा देकर उड़ जाती है, लेकिन नर कौआ चूजों का पालन-पोषण करता है। ऐसी ही कुछ स्थिति पत्नी पीड़ित पति की होने की वजह से कौए की प्रतिमा का पूजन किया जाता है।

‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से राँची में हिंसा फैलाने वाला नवाब चिश्ती गिरफ्तार: दंगा भड़काने में 2 बार पहले भी जा चुका है जेल, अब तक 29 पकड़ाए

झारखंड की राजधानी राँची (Ranchi) में 10 जून को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा में अब तक 29 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, गैंग्स ऑफ वासेपुर व्हाट्सएप ग्रुप में भड़काऊ मैसेज को वायरल करने के आरोपित नवाब चिश्ती को पुलिस ने मंगलवार (14 जून 2022) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) द्वारा इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ की गई कथित विवादित टिप्पणी के मामले में 10 जून को प्रदर्शन का मैसेज इसी व्हाट्सएप ग्रुप से वायरल किया गया था। आरोपित नवाब ने ग्रुप में लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी।

जाँच में यह भी सामने आया है कि नवाब ही इस ग्रुप का एडमिन है। यूनुस चौक डोरंडा का नवाब सोशल मीडिया पर तरह-तरह के मैसेज भेजकर धार्मिक उन्माद और दंगे भड़काता रहा है। राँची हिंसा में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। नवाब दंगा भड़काने के आरोप में दो बार जेल भी जा चुका है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में पुलिस ने 43 अन्य लोगों को हिरासत में भी लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने बताया कि हिंसा के बाद सीसीटीवी फुटेज और फोटो की जाँच के आधार पर आरोपितों की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस के मुताबिक, कई और आरोपितों की पहचान की गई है और उन्हें भी जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।

गौरतलब है कि वासेपुर झारखंड का ही एक स्थान है, जो राँची के बगल के धनबाद जिले में स्थित है। इस स्थान के नाम पर जून 2012 में बॉलीवुड में फिल्म भी बन चुकी है, जिसमें इस जगह को अपराधियों का गढ़ बताया गया है।

वहीं, राँची हिंसा के दौरान मारे गए मुदस्सिर की अम्मी ने पुलिस को धमकी देते हुए एक इंटरव्यू में कहा था, “गुंडई अब नहीं चलने वाली। वो वर्दी में गुंडा बनेंगे? क्या सोच कर रखा है कि FIR नहीं लिखेगा? ईंट से ईंट बजा देंगे। उन्हें FIR हर हाल में लिखनी होगी, वरना हम उन्हें शांति से नहीं रहने देंगे। मेरे बाबू को कैसे मारा? वो सिर्फ इस्लाम जिंदाबाद बोला था। क्या सरकार ने उन्हें (पुलिसवालों) को आदेश दिया था कि जो इस्लाम जिंदाबाद बोले उसे गोली मार देना ? मेरा बेटा अभी 10 वीं का एग्जाम दिया था और कम्प्यूटर भी पढ़ रहा था।”

दलित से शादी करने पर सबरीना को ताना मारता था जीजा फरहान, कहासुनी का झगड़ा इतना बढ़ा कि मारा गया

आईपी ​​एस्टेट थाना क्षेत्र के टाकिया काले खाँ इलाके में रविवार (12 जून, 2022) की देर रात साली को ताना मारने पर एक शख्स ने अपने ही साढ़ू 32 वर्षीय फरमान की बेरहमी से हत्या कर दी गई। मामले में पुलिस ने हत्या और हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपित बाल्मीकि समाज के राजकुमार उर्फ़ भोला और उसके साथी मुस्तकीम उर्फ ​​मोटा को गिरफ्तार कर लिया है।

क्या है मामला

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि रविवार की रात 10:45 बजे एलएनजेपी अस्पताल से 32 वर्षीय फरमान नामक व्यक्ति को मृत लाए जाने की खबर मिली। फरमान की चाकू से गोदकर बेरहमी से हत्या की गई थी। मामले में सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट डीसीपी ने बताया कि शुरुआती जाँच में पता चला कि मृतक फरमान दिल्ली के मीर दर्द रोड का निवासी था और रविवार रात राजकुमार नामक शख्स ने चाकू से गोदकर हत्या कर दी। दोनों साढ़ू भाई बताए जा रहे हैं।

कहा जा रहा है कि फरमान का निकाह पास में रहने वाली आलिया से दो साल पहले हुई थी और आलिया की बहन सबरीना ने पड़ोस में रहने वाले राजकुमार उर्फ़ भोला से 1 साल पहले शादी की थी। फरमान और राजकुमार बाइक मकैनिक हैं। राजकुमार के दलित हिंदू होने की वजह से फरमान और उसके अब्बू इद्रीश को यह रिश्ता पसंद नहीं था। दोनों आलिया की बहन सबरीना को हमेशा ताना मारते थे। सबरीना के हिन्दू लड़के राजकुमार से शादी करने पर अक्सर इनमें लड़ाई-झगड़ा होता था।

जीजा ने साढ़ू को उतारा मौत के घाट

कहा जा रहा है रविवार रात भी दोनों परिवारों के बीच में कहासुनी हुई। और उनके बीच आपसी विवाद इतना बढ़ गया कि राजकुमार चाकू लेकर फरमान की हत्या करने निकल गया। घर के पास ही उसे फरमान मिल गया तो उसने चाकू से ताबड़तोड़ कई वार किए। इस दौरान फरमान के अब्बू इद्रीस बेटे को बचाने पहुँचे तो आरोपित ने उन्हें भी चाकू से घायल कर दिया। वारदात के बाद लोगों ने घायलों को एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ फरमान की मौत हो गई।

घटना पर तुरंत कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ने हत्या के मुख्य आरोपित राजकुमार उर्फ़ भोला निवासी मिरदर्ड रोड, दिल्ली और साथी मुस्तकीम उर्फ ​​मोटा निवासी तुर्कमान गेट, दिल्ली को महज 8 घंटे में हरिद्वार से धर दबोचा। मामले में सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट डीसीपी श्वेता चौहान ने बताया कि लगभग 400 किलोमीटर तक फोन लोकेशन के आधार पर आरोपित पकड़े गए। आरोपितों के पास से वाहन, एक स्विफ्ट कार को जब्त कर लिया गया और अपराध के लिए इस्तेमाल किया गया हथियार (एक चाकू) भी बरामद किया गया। मामले में हत्या और हत्या के प्रयास की धाराओं को जोड़ते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है।

बंगाल पुलिस अक्षम तो सेंट्रल फोर्स बुलाइए: हिंसा पर ममता बनर्जी की सरकार को हाईकोर्ट ने फटकारा, कहा- CCTV फुटेज इकट्ठा कर दंगाइयों की पहचान करो

इस्लाम के पैगंबर (Islamic Prophet Mohammad) के कथित अपमान को लेकर पश्चिम बंगाल (West Bengal) में मचाए जा रहे उत्पात को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) की सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि यदि राज्य की पुलिस स्थिति को नियंत्रित करने में अक्षम है तो केंद्रीय बलों को सरकार बुलाए।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस राजर्षि भारद्वाज की बेंच ने कहा कि ने हिंसा वाले इलाकों का CCTV फुटेज इकट्ठा करने के लिए कहा है, ताकि हिंसा में शामिल दंगाइयों की पहचान की जा सके और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके।

बेंच ने यह भी कहा कि राज्य के महाधिवक्ता को उन लोगों को मुआवजा देने के मुद्दे पर भी राज्य सरकार का रुख स्पष्ट करना चाहिए, जिनकी हिंसा के दौरान संपत्ति का नुकसान हुआ है। हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को 15 जून तक पोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

अदालत की खंडपीठ ने कहा कि राज्य के अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाएँ कि कोई अप्रिय घटना न हो और शांति व्यवस्था कायम रहे। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा, “यदि राज्य की पुलिस किसी भी स्थान पर स्थिति को नियंत्रित करने में असफल रहती है तो प्राधिकारी तत्काल कदम उठाते हुए केंद्रीय बलों को बुलाएँ।”

अदालत अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा दाखिल अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। नीलाद्री साहा नाम के व्यक्ति ने अपनी याचिका में कहा है कि जब भाजपा का कार्यालय जलाया जा रहा था, तब पुलिस मूकदर्शक बनकर खड़ी थी। याचिका में सैन्य या केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की माँग की गई थी।

वहीं, एक अन्य याचिका में 9 जून 2022 को हावड़ा अंकुरहाटी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध करने और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने वाले व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और उन पर भारी जुर्माना लगाने की माँग की गई है।

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता एसएन मुखर्जी ने अदालत को बताया कि यह घटना दो व्यक्तियों द्वारा की गई दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणी के कारण हुई और उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना जैसे अन्य राज्यों में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं।

बता दें कि पैगंबर के अपमान के नाम पर बंगाल के हावड़ा, मुर्शिदाबाद, 24 परगना जैसे कई जिलों में दंगाइयों द्वारा भारी उत्पात किया गया। इस दौरान दंगाइयों ने ना सिर्फ पुलिस पर पथराव किया, बल्कि कई हिंदू परिवारों के घरों में आग लगा दी थी।

वहीं, नदिया जिले में स्थित बेथुआडहरी में 1000 मुस्लिमों की भीड़ ने भारतीय रेलवे को निशाना बनाया गया और ट्रेन को क्षतिग्रस्त कर दिया था। इस दौरान कई यात्रियों को भी चोटें भी आईं। मुस्लिम भीड़ ने रेलवे स्टेशन और ट्रेन पर जम कर पत्थरबाजी की थी।

‘लिखो कैसे कश्मीरी हिंदुओं को मारा, माताओं-बहनों से बलात्कार किया’: दैनिक भास्कर के ‘लिबरल पत्रकार’ को अनुपम खेर ने लताड़ा, वाराणसी में करेंगे त्रिपंडी श्राद्ध

बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर की आज (15 जून 2022) सुबह दैनिक भास्कर के एक लिबरल पत्रकार से ट्विटर पर कहासुनी देखने को मिली। अपने ट्वीट में अभिनेता ने राजेश साहू नामक पत्रकार को फटकार लगाते हुए कश्मीरी हिंदुओं पर हुए अत्याचार पर लेख लिखने की सलाह दी। खेर ने राजेश को कहा कि वह दूसरों को ज्ञान देने का बजाय आतंकवाद पर लिखने की कोशिश करें या उन औरतों के बारे में बताएँ जिनका कश्मीर में बलात्कार किया गया। ट्विटर पर राजेश साहू को ये जवाब अनुपम खेर ने साहू के एक ट्वीट के बदले दिया जिसमें वह कह रहे थे कि अनुपम खेर पहले पूजा पाठ छोड़ें और पहले जाकर कश्मीरी हिंदुओं के लिए सुरक्षा माँगें।

ये पूरा विवाद अनुपम खेर के कल (14 जून 2022) रात किए गए ट्वीट पर शुरू हुआ। अपने ट्वीट में उन्होंने जानकारी दी थी, “मैं कल वाराणसी जा रहा हूँ। द कश्मीर फाइल्स की शूटिंग के दौरान मैंने निर्णय लिया था कि मैं उन सभी कश्मीरी हिन्दुओं की आत्मा की शांति का पाठ करवाऊँगा, जिनकी ‘हिंदुओं के नरसंहार’ के दौरान आतंकवादियों द्वारा निर्मम हत्या की गई थी। इस पूजा को त्रिपंडी श्राद्ध पूजा कहते है। आयोजकों का आभार!”

इसी ट्वीट पर राजेश साहू बीच में आए और अनुपम खेर से कहा, “आपको वाराणसी आने से पहले कश्मीर जाने की जरूरत है। वहाँ के हालात खराब हैं। वहाँ जाकर राज्यपाल महोदय से पंडितों की सुरक्षा को लेकर बात करें। फिर महादेव के पास पंडितों की आत्मा की शांति के लिए पाठ करवाएँ।”

राजेश साहू के ट्वीट पर कई यूजर्स का रिएक्शन आया और उसके बाद खुद अनुपम ख्रेर ने भी इस पर जवाब दिया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “कुछ आप भी कर लो! आप दैनिक भास्कर में पत्रकार है! लिखिए एक लेख कि कैसे कश्मीर में पिछले 35 सालों से आतंकवादियों ने कश्मीरी हिंदुओं को बेरहमी से मारा, उनकी माताओं, बहनों से बलात्कार किया! आतंकवाद की भी बुराई कर लो, जिनकी पूजा के लिए जा रहा हूँ। वो उनकी गोलियों के ही शिकार हुए थे।”

राजेश साहू ने अनुपम खेर के इस ट्वीट के बाद पूरी बात सरकार की ओर घुमा दी और देश में फैली नेगेटिविटी के लिए द कश्मीर फाइल्स को जिम्मेदार दिखाया। ट्वीट में लिखा गया, “हम तो लिखते ही हैं कि कश्मीर में अत्याचार हुआ। लेकिन कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हुई हिंसा के वक्त वहां की तत्कालीन सरकार को दोषी क्यों न माना जाए? आपकी फिल्म में भी चालाकी से इस हिस्से को छिपा दिया गया। आपकी फिल्म से सिर्फ निगेटिविटी फैली है। कश्मीर में भी और देश में भी।”

बता दें कि द कश्मीर फाइल्स के रिलीज होने के बाद से कई फारूख अब्दुल्ला जैसी हस्तियाँ इस फिल्म को हिंदुओं की मौत की वजह बता चुके हैं। उनके अलावा सोशल मीडिया का लिबरल समुदाय भी कभी इस फिल्म में दिखाई गई चीजों को हज्म नहीं कर पाया था। अनुपम खेर और राजेश साहू के ट्वीट के नीचे भी देख सकते हैं कि कई कट्टरपंथियों ने अनुपम खेर को निशाना बनाते हुए द कश्मीर फाइल्स में उनकी एक्टिंग पर सवाल उठाए हुए हैं।

‘जैसे कुत्ते की मौत होती है, ऐसे नरेंद्र मोदी की मौत होगी’: कॉन्ग्रेस नेता शेख हुसैन के बिगड़े बोल, राहुल गाँधी से ED पूछताछ पर CM बघेल ने भी धमकाया

नेशनल हेराल्ड मामले में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी से प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पूछताछ शुरू होने के बाद से ही कॉन्ग्रेसी सड़क पर हुड़दंग करते नजर आ रहे हैं। कॉन्ग्रेस नेता लगातार अनर्गल टिप्पणी कर रहे हैं। महाराष्ट्र के एक पार्टी नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आपत्तिजनक बातें की है तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ईडी को धमकाया है।

नागपुर में ईडी कार्यालय के बाहर कॉन्ग्रेस के विरोध-प्रदर्शन के दौरान शेख हुसैन ने कहा, “नरेंद्र मोदी तेरा वही हाल होगा, जैसे कुत्ते की मौत होती है, ऐसे नरेंद्र मोदी की मौत होगी। हो सकता है कि इसके खिलाफ मुझे 1000 नोटिस मिल जाए, लेकिन इसकी हमें परवाह नहीं है। हम लड़ते आए हैं, आगे भी लड़ेंगे।” नागपुर शहर कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे हुसैन के इस बयान का वीडियो वायरल हो रहा है।

भाजपा नेताओं ने हुसैन के इस बयान को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। इस संबंध में गिट्टीखदान थाने में मामला भी दर्ज किया है। बीजेपी ने हुसैन की गिरफ्तारी की माँग करते हुए कहा है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो पार्टी आंदोलन करेगी।

वहीं कॉन्ग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है, “हम अब अपने कर्मचारियों को AICC कार्यालय में नहीं ला सकते हैं। हमें बताया गया है कि केवल 2 सीएम ही यहाँ आ सकते हैं और किसी और को अनुमति नहीं है। उन्होंने राहुल गाँधी के मुँह में हाथ डालने की कोशिश की है, उनको बहुत महँगा पड़ेगा।”

उन्होंने आगे कहा, “पूरे देश में जो हालात है वो सबके सामने हैं। तीन दिन से हमलोग दिल्ली में है और पहले दिन 200 लोगों को अनुमति दी गई, कल कुछ नेताओं को अनुमति दी गई और आज तो हद हो गई कि हम अपने स्टाफ को भी नहीं ला सकते हैं।”

ये 8 साल का काला अध्याय है: अशोक गहलोत

इधर राजस्थान के मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता अशोक गहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इसे काला अध्याय बताया। उन्होंने कहा, “ये 8 साल का काला अध्याय है, इतिहास में इस 8 साल को अगर देखा जाएगा तो ये काला अध्याय के रूप मे देखा जाएगा क्योंकि इसमें संवैधानिक धज्जियाँ उड़ रही है, लोकतंत्र खतरे में हैं और पूरे देशवासी बहुत दुखी और तनाव में हैं।”

नेशनल हेराल्ड मामले में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी से ED की पूछताछ के खिलाफ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता पार्टी मुख्यालय में प्रदर्शन कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता ‘राहुल गाँधी जिंदाबाद’ के नारे भी लगा रहे हैं। मंगलवार को भी राहुल से पूछताछ के बीच कॉन्ग्रेस ने प्रदर्शन किया था, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में लिया था।

जालंधर में मंदिर के पास दीवारों पर खालिस्तानी नारे, केजरीवाल के पंजाब दौर से पहले भड़काऊ हरकत: हफ्ते में दूसरी ऐसी घटना

दिल्ली के मुख्यमंत्री और ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) और सीएम भगवंत मान (Bhagwant Mann) के जालंधर दौरे से पहले शहर की दीवारों पर अराजक तत्वों ने खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लिख दिए। खालिस्तान (Khalistan) समर्थक नारे देवी तालाब मंदिर के आसपास के क्षेत्रों की कुछ दीवारों पर लिखे हैं। पुलिस ने कहा, “हम नारे लगाने वालों का पता लगाने में जुट गए हैं। इसके लिए सभी सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।”

बताया जा रहा है कि खालिस्तान के समर्थन में नारे काले रंग की पेंट स्प्रे के साथ लिखे गए हैं। यह काम अराजक तत्वों ने रातोंरात किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दीवारों पर खालिस्तान के समर्थन में नारे लिखे हुए थे। यह नारे पहले के नहीं लिखे हुए हैं, बल्कि पिछली रात ही किसी ने यह कारनामा किया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले एक हफ्ते में पंजाब में खालिस्तान के समर्थन में नारे लिखे जाने का यह दूसरा मामला सामने आया है। 11 जून को फरीदकोट में जिला व सेशन जज के घर के बाहर दीवार पर खालिस्तानी समर्थक नारे लिखे गए थे। इस बात की जानकारी पंजाब के फरीदकोट की एसएसपी अवनीत कौर सिद्धू ने दी थी। उन्होंने कहा था कि आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू का एक वीडियो सामने आया है और दीवारों पर नारे लिखे गए हैं।

गौरतलब है कि पंजाब में खालिस्तान की माँग को लेकर 6 जून को ऑपरेशन ब्लू स्टार (Operation Blue Star) की बरसी पर स्वर्ण मंदिर (Golden Temple) के गेट तक पहुँचे सैकड़ों की संख्या में लोगों ने खालिस्तान के समर्थन में नारेबाजी की थी। इस दौरान लोगों ने अपने हाथों में नंगी तलवारें और खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाले (Jarnail Bhindranwale) के पोस्टर लिए हुए थे। उन्होंने जरनैल सिंह भिंडरावाले के बैनर और पोस्टरों को लहराते हुए स्वर्ण मंदिर के अंदर घुसने की कोशिश की, लेकिन उन्हें गेट पर ही रोक दिया गया था। 

ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी के बीच कट्टरपंथी संगठनों ने अमृतसर में बंद का आह्वान किया था। दल खालसा नाम के कट्टरपंथी संगठन ने हर जगह ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में पोस्टर चस्पा किए थे। मामले की गंभीरता के मद्देनजर अमृतसर में 7000 जवानों की तैनाती की गई थी। बावजूद इसके खालिस्तानी समर्थक स्वर्ण मंदिर तक पहुँच गए थे।

जम्मू-कश्मीर में जमात से जुड़े 300 स्कूल बंद करने का आदेश, सरकारी स्कूलों में होगा 11000 छात्रों का एडमिशन: ‘फलाह-ए-आम’ पर कसा शिकंजा

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने जमात-ए-इस्लामी से जुड़े फलाह-ए-आम ट्रस्ट की ओर से चलाए जा रहे सभी स्कूलों को बंद कराने का आदेश दिया है। प्रशासन ने कहा है कि ये सारे स्कूल प्रशासन की देखरेख में 15 दिन के अंदर सील किए जाएँगे। इनमें पढ़ रहे 11000 छात्रों को पास के सरकारी स्कूलों में एडमिशन दिया जाएगा।

1990 के एक आदेश का हवाला देते हुए केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन ने कहा कि इन प्रतिबंधित संगठनों में कोई नई भर्ती नहीं होगी और न ही कोई पंजीकरण किया जाएगा। ये स्कूल सरकार द्वारा पंजीकृत नहीं हैं, इस बात को सार्वजनिक जिला और जोनल लेवल के एजुकेशन ऑफिसर द्वारा किया गया। 

प्रमुख सचिव (शिक्षा) बीके सिंह द्वारा जारी सरकारी आदेश में कहा गया कि जम्मू-कश्मीर ने फलाह-ए-आम ट्रस्ट के स्कूलों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिए हैं। अब इन प्रतिबंधित संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों को पास के स्कूलों में शिक्षा पूरी करने के लिए भेजा जाएग। हर सीईओ, प्रिंसिपल और जोनल अधिकारियों को इन छात्रों के एडमिशन में हर संभव मदद करने को कहा गया है। साथ ही इन स्कूलों में व्यापक पैमाने पर जागरूकता फैलाने की भी बात है।

बता दें कि फलाह-ए-आम को जमात-ए-इस्लामी द्वारा 1972 में स्थापित किया गया था। ये ट्रस्ट पूरे प्रदेश में 323 से ज्यादा स्कूल कश्मीर में और जम्मू के कुछ क्षेत्रों में चलाता है। स्कूलों में हजारों छात्र पढ़ते हैं। ट्रस्ट दावा करता है कि वह गैर राजनीतिक ईकाई है और उनका मकसद सिर्फ शिक्षा व सेवा देना ही है। हालाँकि, एक सच यह भी है कि एफएएटी एनआईए की जाँच के कारण पहले भी विवादों में रहा है। इस ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे संस्थानों पर अवैध कार्य किए जाने, धोखाधड़ी,  बड़े पैमाने पर सरकारी भूमि अतिक्रमण करने के आरोप लगे हैं। ऐसे में एनआईए के पास इनके खिलाफ पहले ही प्राथमिकी दर्ज है। अब एजेंसी भी इस ट्रस्ट के खिलाफ अपनी जाँच को बढ़ा रही है। उनका मकसद धोखाधड़ी, अनाधिकृत संस्थाओं और जालसाजी का पता लगाना जो 30 वर्षों में आतंवादियों के इशारे पर  की गई।

1990 में जब तत्कालीन राज्यपाल जगमोहन ने जमात-ए-इस्लामी पर पाबंदी लगाया था तो उसके साथ इन स्कूलों को भी बंद कर दिया था और इसके ज्यादातर स्कूल मोहल्ला और ग्राम प्रशासन कमेटी को सौंप दिए गए थे। इसी तरह साल 2019 में जब जमात ए इस्लामी को प्रतिबंधित किया गया तो भी इस ट्रस्ट को एक नोटिस भेजा गया था और इन्हें शिक्षा संस्थान बंद करने को कहा गया था। हालाँकि बाद में ये मामला टल गया। लेकिन अब सरकार की ओर से आदेश है कि ये मदरसे,स्कूल बंद होने चाहिए।