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बॉलीवुड की महिला सिंगर की फोटो पोर्न साइट्स पर, लंच बॉक्स में टट्टी: सलमान खान के खिलाफ बोलने पर गैंगरेप-हत्या तक की दी गई धमकी

सिंगर सोना मोहपात्रा (Sona Mohapatra) ने उस दौर के बारे में बताया है, जब उन्हें सलमान खान (Salman Khan) के खिलाफ बोलने पर भयानक ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ा था। उन्हें गैंगरेप और हत्या तक की धमकी दी गई थी। उनकी तस्वीरें मॉर्फ कर पोर्न साइट्स पर डाल दी गई थी। स्टूडियो में उन्हें मल से भरे लंचबॉक्स भेजे गए थे।

सोना मोहपात्रा ने ई-टाइम्स को हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में इसका खुलासा किया है। उन्होंने कहा, “मैं सबसे भयानक ट्रोलिंग से गुजरी हूँ। इसमें जान से मारने और रेप की धमकी से लेकर मेरे स्टूडियो में डब्बे (लंच बॉक्स) में टट्टी (Shit) भेजने जैसी घटिया घटनाएँ तक शामिल हैं। ये सब इसलिए हुआ, क्योंकि मैंने सलमान खान को उनकी महिला विरोधी बयानबाजी के लिए लताड़ लगाई थी। मेरा यह बयान वायरल हो गया था।”

सोना ने कहा कि उनके साथ यह सब दो महीने तक चलता रहा और फिर महिला एवं बाल विकास मंत्री को महिलाओं और बच्चों की बेहतर सुरक्षा के लिए ऑनलाइन कैंपेन लॉन्च करना पड़ा। महिला एवं बाल विकास मंत्री को ‘I am being trolled’ हैशटैग निकालना पड़ा। सोना ने बताया कि उनकी प्रताड़ना का सिलसिला यहीं नहीं रुका। पॉर्न साइट्स पर उनकी तस्वीर मॉर्फ्ड कर डाली जाती थी और हर रोज उन्हें गैंगरेप की धमकी जी जाती थी, जो बेहद डरावना था। सिंगर ने कहा कि तब उन्हें एहसास हुआ कि ये सब प्लान्ड था और यह काम एक मजबूत डिजिल आर्मी का था, जरूरी नहीं कि एक्टर के फैंस ने ही ऐसा किया हो।

उन्होंने कहा, “उस वक्त डराने और धमकाने के कल्चर को ये बढ़ावा दे रहे थे ताकि महिलाएँ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से दूर रहे, पर ये सब कुछ सोचा-समझा हुआ प्लान था। बहुत सारे पेड बोट्स थे, जिन्होंने इस खेल को शुरू किया था।” सोना ने बताया कि उनके साथ हुईं घटनाओं का असर उनके परिवार पर भी पड़ा था। उनके पति राम सपंत इन सभी बातों से इतना परेशान हो गए थे कि कई बार वह स्टूडियो से वापस आकर सिसकने लगते थे। परिवार वाले भी काफी परेशान रहते थे।

क्या था पूरा मामला?

सलमान खान ने 2016 एक विवादित बयान दिया था। फिल्म सुल्तान की शूटिंग के बाद कहा था कि उन्हें एक रेप की हुई महिला जैसा महसूस हो रहा है। इस पर उन्हें लताड़ लगाते हुए सोना मोहपात्रा ने कहा था, “महिलाओं की पिटाई, लोगों पर चढ़ाई कर देना, वाइल्ड लाइफ कत्लेआम और फिर देश का हीरो। ये सही नहीं है। ऐसे फैंस से भरा है भारत। सुना है कि सलमान ने अपने बयान को वापस लेने की कोशिश की थी। सॉरी बोलने से दुख नहीं होगा, करोड़ों लोगों के आइडल। अपने पापा से हर रोज सॉरी बुलवाना अच्छी बात नहीं है। अपने फैंस को प्लीज कुछ अच्छा सिखाएँ।” उल्लेखनीय है कि सलमान के इस बयान को लेकर उनके पिता सलीम खान को माफी माँगनी पड़ी थी।

इसके बाद भी कई मौकों पर सलमान के खिलाफ सोना बोल चुकी हैं। प्रियंका चोपड़ा ने जब शादी के लिए ‘भारत’ का ऑफर ठुकरा दिया था तो सलमान ने कहा था कि प्रियंका ने सिंगर-एक्टर निक जोनस से शादी करने के लिए अपने करियर की सबसे बड़ी फिल्म छोड़ दी है, जबकि लोग इसके लिए अपने पति को छोड़ देते हैं।” तब सोना मोहपात्रा ने सलमान खान को जवाब देते हुए ट्वीट किया था, “प्रियंका चोपड़ा के पास जीवन में करने के लिए बेहतर चीजें हैं। खास तौर पर वह अपनी जर्नी से महिलाओं को प्रेरित कर रही हैं।”

अब्बा लगाते थे पंचर, बेटा पत्थरबाजों पर लगाने लगा पैसा: कानपुर के चंद्रेश्वर हाता पर कब्जा करना चाहता था मुख्तार, जुमे पर हुई थी हिंसा

कानपुर में 3 जून 2022 को जुमे पर हिंसा हुई थी। इस मामले में मुख्तार अहमद की गिरफ्तारी हुई है। वह बाबा बिरयानी के नाम से रेस्टोरेंट चलाता है। उस पर पत्थरबाजों को फंडिंग का आरोप है। बताया जा रहा है कि हिंसा की आड़ में वह चंद्रेश्वर हाते पर कब्जा करना चाहता था।

दरअसल, अवैध कब्जा और मुख्तार का पुराना नाता रहा है। पिछले दिनों यह बात भी सामने आई थी कि जिस जगह बाबा बिरयानी चल रही, वह जगह सरकारी दस्तावेजों में राम जानकी मंदिर के नाम पर है। इसके दम पर ही उसके अकूत संपत्ति जुटाने की बात कही जाती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुख़्तार के अब्बा मोहम्मद इशहाक अहमद उर्फ बाबा साल 1968 में बेकनगंज के राम-जानकी मंदिर के पास साइकिल का पंचर लगाया करते थे। शुरुआत में मुख्तार भी इस पंचर शॉप में काम करता था। बाद में वह इसी जगह पर बिस्किट और मिठाई बेचने लगा। 1990 के दशक में उसने कथित तौर पर कानपुर गैंगस्टर लाला हड्डी के साथ मिलकर प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू किया। बाद में वह विवादित जमीनों को खरीदने और कब्ज़ा हटवाने जैसे अवैध कामों में भी शामिल हो गया। इस काम में उसकी मदद करने वाले SBI के एक मैनेजर को नौकरी भी गँवानी पड़ी थी।

बजरंग दल के कानपुर जिला संयोजक कृष्णा तिवारी के मुताबिक, “मुख़्तार अहमद कानपुर के कई बड़े अपराधियों का संरक्षक रहा है। साल 2017 में कानपुर गैंगवार में मारे गए डी-2 गैंग के दुर्दांत अपराधी गुलाम नबी से मुख़्तार के सम्पर्क पाए गए थे। मात्र 25 सालों में वो एक सामान्य आदमी से करोड़पति कैसे हो गया इसकी जाँच हर हल में होनी चाहिए।”

प्रॉपर्टी के क्षेत्र में मुख़्तार अहमद अहमद का नया साथी मोहम्मद वसी है। उस पर भी दंगाइयों को फंडिंग का आरोप है। माना जा रहा है कि मुख्तार अहमद ने कागजों में फेरफेरी करते हुए कई शत्रु संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की है। मुख़्तार अहमद उर्फ़ बाबा पर न सिर्फ अपराधियों से गठजोड़ बल्कि मंदिरों की जमीनों पर भी कब्ज़े के आरोप लगे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार कानपुर के बेकनगंज स्थित डॉक्टर बेरी चौराहा का भवन संख्या 99/14ए रिकॉर्ड में राम-जानकी मंदिर ट्रस्ट का है। यहाँ भगवान श्रीराम का मंदिर था। अस्सी के दशक तक यहाँ पूजा हुआ करती थी। लेकिन अब मंदिर का कुछ ही हिस्सा बचा हुआ है। वह भी जर्जर हाल में है। मंदिर के अन्य हिस्सों को तोड़कर उसका इस्तेमाल रेस्टोरेंट की रसोई के तौर पर किया जा रहा है। 

मुख़्तार से SIT की पूछताछ में हुए खुलासे के मुताबिक चंद्रेश्वर हाते पर मुख़्तार के कुछ बिल्डर साथियों की नजर थी। हिंसा के दौरान मुख़्तार के ही एक सहयोगी ने रुमाल लहराते हुए भीड़ को चंद्रेश्वर हाते की तरफ आने का इशारा किया था। माना जा रहा है कि चंद्रेश्वर हाते को कब्ज़ा कर वहाँ आपर्टमेंट बनाने की प्लानिंग थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस की पूछताछ में मुख़्तार ने बताया कि 500 रुपए से 1000 रुपए दे कर बाहर से पत्थरबाज बुलाए गए थे। हिंसा की साजिश बाबा बिरयानी में रची गई थी। इस साजिश में 15 से 16 युवकों को हिंसा फैलाने के लिए अलग-अलग टास्क दिए गए थे। पथराव के दौरान वह वीडियो कॉल कर पूरे हंगामे को देख रहा था। पूछताछ में उसने कई अन्य आरोपितों के नाम भी पुलिस को बताए हैं। उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। 

बोले एकनाथ शिंदे- हमें डरा नहीं सकते… हम असली शिवसैनिक: गुवाहाटी के होटल में विधायकों का आना जारी, क्या उद्धव बाप-बेटे ही बचेंगे

क्या एकनाथ शिंदे 37 का वो मैजिक फिगर हासिल कर पाएँगे जो उन्हें और उनके समर्थक शिवसेना विधायकों को दलबदल कानून के तहत कार्रवाई से बचा पाएगा?

ये वो सवाल है जो महाराष्ट्र में सियासी बवंडर की शुरुआत के बाद से लगातार पूछा जा रहा था। इसका जवाब मिल गया है। 37 शिवसेना विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष नरहरि झिरवाल को भेजा जा चुका है। इसमें बताया गया है कि इन विधायकों ने आम सहमति से एकनाथ शिंदे को अपना नेता और भारत गोगावले को व्हिप ​चुना है।

दलबदल कानून के प्रावधानों के अनुसार शिंदे दो तिहाई विधायकों का समर्थन मिलने पर पार्टी पर अपना दावा कर सकते हैं। महाराष्ट्र में फिलहाल शिवसेना के 55 विधायक हैं। ऐसे में एकनाथ शिंदे को 37 पार्टी विधायकों के समर्थन की जरूरत थी। डिप्टी स्पीकर को भेजे गए पत्र के बाद स्पष्ट है कि अब शिवसेना के नाम, निशान, झंडे और रंग पर उनका दावा बनता है।

इस पत्र के बाद भी महाराष्ट्र के विधायकों का असम के गुवाहाटी पहुँचना जारी है। यहीं के रेडिसन ब्लू होटल में शिंदे अपने समर्थक विधायकों के साथ हैं। इनमें कुछ निर्दलीय भी है। मीडिया रिपोर्टों में अब शिंदे समर्थक विधायकों की संख्या 50 के करीब बताई जा रही है। साथ ही कई और विधायकों के उनके साथ आने की बात कही जा रही है। इस सिलसिले को देखते हुए अब यह पूछा जाने लगा है कि आखिर में क्या उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे अकेले रह जाएँगे?

इधर शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) समेत 12 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने की अर्जी दी है। याचिका पर एकनाथ शिंदे ने पलटवार किया है। एकनाथ शिंदे ने मराठी में ट्वीट कर कहा, “आप धमकी देकर किसे डराने की कोशिश कर रहे हैं? हम आपकी चाल के साथ-साथ कानून भी जानते हैं। संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार विधायी कार्यों के लिए व्हिप की आवश्यकता होती है न कि विधायक दल की बैठकों के लिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले हैं।”

उन्होंने कहा, “12 विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की अर्जी देकर आप हमें डरा नहीं सकते, क्योंकि हम शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के असली शिवसेना और असली शिव सैनिक हैं। इसके अलावा, हम कानून भी जानते हैं। इसलिए हम इस तरह की धमकियों पर ध्यान नहीं देते। नंबर्स नहीं होने के बावजूद अवैध समूह बनाने के लिए हम आपके खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हैं।”

अरविंद सावंत ने कहा था कि उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा के डिप्टी स्पीकर के समक्ष याचिका दायर कर माँग की है कि 12 विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी जानी चाहिए, क्योंकि वे कल की बैठक में शामिल नहीं हुए थे। उन्होंने कहा कि बैठक से पहले नोटिस जारी किया गया था, जिसमें कहा गया था कि अगर वह बैठक में शामिल नहीं हुए तो संविधान के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जिन विधायकों की सदस्यता रद्द करने की माँग की गई है उनमें एकनाथ शिंदे, प्रकाश सुर्वे, तानाजी सावंतो, महेश शिंदे, अब्दुल सत्तारी, संदीप भुमरे, भरत गोगावाले, संजय शिरसातो, यामिनी यादव, अनिल बाबरी, बालाजी देवदास और लता चौधरी का नाम शामिल है।

शरद पवार ने फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार रहने को कहा, इधर उद्धव ठाकरे के दूत रवींद्र पाठक ने भी मारी पलटी: शिंदे बोले- राष्ट्रीय पार्टी हमारे साथ

महाराष्ट्र में आए सियासी संकट के कारण शिवसेना की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। एक के बाद एक शिवसेना के बागी विधायक उसका साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे के साथ मिलते जा रहे हैं। इस बीच एनसीपी के मुखिया शरद पवार ने कहा है कि फ्लोर टेस्ट से ही तय होगा कि किसके पास बहुमत है और किसके पास नहीं। उन्होंने एनसीपी को फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार रहने को कहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कथित तौर पर मुंबई में अपने ‘सिल्वर ओक’ आवास पर अपनी पार्टी के प्रमुख नेताओं की बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने फ्लोर टेस्ट की संभावनाओं पर बात की। उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी पूरी तरह से उद्धव ठाकरे का समर्थन करेगी। सूत्रों का कहना है कि शरद पवार को इस बात की उम्मीद है कि गुवाहाटी गए शिवसेना के कुछ विधायक अपना मन बदल लेंगे और वापस शिवसेना में लौट आएँगे।

बागियों को मनाने गुवाहाटी गए शिवसेना विधायकों ने मारी पलटी

हालाँकि, पवार के दावे के उलटा ही होता दिख रहा है। रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने शिवसेना विधायक रवींद्र पाठक को एकनाथ शिंदे को मनाने का काम सौंपा था। हालाँकि, पाठक ने अपना पाला बदल लिया है। उनके साथ शिवसेना के दो अन्य विधायक मिलिंद नारवेकर और संजय राठौर अब गुवाहाटी चले गए हैं।

गौरतलब है कि गुवाहाटी में एकनाथ शिंदे जिस होटल में बागी विधायकों के साथ ठहरे हुए हैं, उसका एक वीडियो भी सामने आया था। इसमें शिंदे समेत 42 विधायकों को देखा गया था। अब अगर शिवसेना के ये तीन और विधायक शिंदे के साथ मिल जाते हैं तो एकनाथ शिंदे का समर्थन करने वाले विधायकों की संख्या बढ़कर 45 हो जाएगी।

इस बीच एकनाथ शिंदे ने जबरन बंधक बनाने का आरोप लगाने वाले नितिन देशमुख के आरोपों पर पलटवार किया है। शिंदे ने उनके साथ नितिन देशमुख के साथ तस्वीरों को जारी किया है।

राष्ट्रीय पार्टी हमारे साथ

इसी क्रम में एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें बागी विधायकों से शिंदे कहते हैं कि वे एक राष्ट्रीय पार्टी हैं और उन्होंने मुझे अपना समर्थन दिया है। राष्ट्रीय पार्टी ने हमें कहा है कि मैंने ऐतिहासिक फैसला लिया है। शिंदे के मुताबिक, वो महाशक्ति उनके पीछे खड़ी है और आवश्यकता पड़ने पर वो मदद करेगी। इसके साथ ही उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक का उदाहरण देकर बीजेपी की तारीफ भी की।

हालाँकि, शिंदे ने खुलकर बीजेपी नाम तो नहीं लिया, लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा बीजेपी की ही तरफ था।

NDTV के पूर्व पत्रकार ने शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे पर की अपमानजनक टिप्पणी, चैनल की भी उधेड़ी बखिया, ये है मामला

महाराष्ट्र में जारी सियासी उठापटक के बीच पत्रकार नदीम अहमद काजमी ने ट्विटर पर शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे का अपमान किया और उनका मजाक उड़ाया। हालाँकि, जब यह बताया गया कि वह NDTV के लिए काम नहीं करता है, तो पत्रकार अपने पूर्व चैनल की ही बखिया उधेड़ने लगा। दरअसल, काजमी इस वक्त एनडीटीवी में काम नहीं करते हैं। चैनल ने उन्हें (काजमी) वर्ष 2017 में ही निकाल दिया था, लेकिन उनके ट्विटर बायो में अभी भी वर्किंग विद एनडीटीवी लिखा हुआ है, जिससे किसी को भी भ्रम हो सकता है कि वह इस विवादास्पद चैनल के लिए काम कर रहे हैं।

नदीम अहमद काजमी ने बुधवार (22 जून 2022) को शिंदे के खिलाफ एक अपमानजनक ट्वीट किया था, जो इस वक्त अपने सभी विधायकों के साथ असम के गुवाहाटी में रेडिसन ब्लू होटल में डेरा जमाए हुए हैं। पत्रकार ने ट्वीट किया, “शालीनता मायने रखती है… शिंदे फिर से एक ऑटो चालक बनेंगे… बस मेरे शब्दों पर गौर करें।”

एनडीटीवी के तथाकथित पूर्व पत्रकार ने शिंदे को नीचा दिखाने के लिए उनके अतीत का सहारा लिया। एकनाथ शिंदे कभी मुंबई से सटे ठाणे शहर में एक ऑटो-रिक्शा चालक थे। 1980 में, वह शिवसेना सुप्रीमो बालासाहेब ठाकरे से प्रभावित हुए थे। वह राज्य की राजनीति में अपनी सफलता के पीछे पार्टी संस्थापक बाला साहेब ठाकरे का कई बार आभार जता चुके हैं। शिंदे ने एक कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। वह अपने संगठनात्मक कौशल और जनसमर्थन के बल पर शिवसेना के शीर्ष नेताओं में शुमार हो गए। चार बार विधायक रह चुके शिंदे, महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार में शहरी विकास और पीडब्ल्यूडी विभागों को संभालते हैं। 58 वर्षीय शिंदे ने राजनीति में कदम रखने के बाद बेहद कम समय में महाराष्ट्र के ठाणे-पालघर में शिवसेना के प्रमुख नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई। उन्हें जनता से जुड़े मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने के लिए पहचाना जाता है।

एक यूजर वरुण शर्मा (@LogicalHindu_) ने अपने ट्विटर हैंडल पर काजमी के ट्विटर बायो के स्क्रीनशॉट के साथ उसका अपमानजनक ट्वीट का स्क्रीनशॉट साझा किया है। इस बायो में वह खुद को अभी भी एनडीटीवी का पत्रकार बताता है। वरुण शर्मा ने चैनल की एडिटोरियल डायरेक्टर सोनिया सिंह, कंसल्टिंग एडिटर निधि राजदान और न्यूज एंकर गार्गी रावत अंसारी को टैग करते हुए लिखा, “नदीम काजमी NDTV के पत्रकार हैं। अपने साथियों को शालीनता, शिष्टाचार और नैतिकता सिखाने वाली सोनिया सिंह, निधि राजदान और गार्गी रावत आप पर गर्व है।”

ट्विटर यूजर वरुण शर्मा ने अपने दूसरे ट्वीट में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया को टैग करते हुए पूछा कि क्या वे अपने महासचिव नदीम अहमद काजमी द्वारा की गई टिप्पणी का समर्थन करते हैं।

NDTV की एडिटोरियल डायरेक्टर सोनिया सिंह ने वरुण शर्मा के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा, “नदीम अहमद काज़मी 2017 से एनडीटीवी के साथ नहीं हैं।”

सोनिया सिंह के जवाब से काजमी का चैनल को लेकर पुराना जख्म फिर से ताजा हो गया और उन्होंने एनडीटीवी के लिए बेहद निम्नस्तरीय भाषा का प्रयोग किया। काजमी ने लिखा, “मामला विचाराधीन है। अदालत में पेश नहीं होने पर एनडीटीवी पर 10 हजार जुर्माना लगाया गया है कृपया अपने वकीलों से पता करें। धन्यवाद।” एक अन्य ट्विटर यूजर ने उनसे पूछा कि उनके और एनडीटीवी के बीच ऐसा क्या गलत हुआ है? इस पर काजमी ने दावा किया कि 2017 में चैनल ने ​उन्हें निकाल दिया था, जबकि उन्होंने दो दशक तक चैनल में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया।

वह यही नहीं रुके उन्होंने अपने दर्द बयाँ करते हुए आगे कहा, “मैं संस्थान के साथ पूरी ईमानदारी के साथ 2 दशक तक मजबूती से खड़ा रहा। अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हटा। लेकिन आप जानते हैं.. उस वक्त मुझे बहुत कष्ट हुआ जब मुझे दिल्ली छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। 58 साल की उम्र में जीवन के अंतिम पड़ाव पर मेरे पास आय का कोई साधन नहीं है।”

नदीम अहमद काज़मी के ट्विटर बायो का स्क्रीनशॉट

काजमी ने खुद शिकायत की थी कि चैनल ने उन्हें गलत तरीके से निकाल दिया था। ऐसे में यह बेहद हैरान करने वाली बात है कि वह फिर भी खुद को एनडीटीवी का पत्रकार बताते हैं। उनके ट्विटर बायो में 2017 के बाद से यानी 5 सालों से एनडीटीवी लिखा हुआ है। यही नहीं उनके लिंक्डइन प्रोफाइल में भी लिखा है कि वह ‘एनडीटीवी में असाइनमेंट‘ पर हैं।

नदीम काजमी के लिंक्डइन प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट।

बता दें कि महाराष्ट्र में शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे से लेकर उद्धव ठाकरे के खास मानें जाने वाले एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे का सारा खेल बिगाड़ दिया है। विधायकों के पाला बदलने से शिवसेना प्रमुख एक तरफ छटपटा रहे हैं और विधायकों की तलाश में मुंबई का चप्पा-चप्पा छान मार रहे हैं। उद्धव ठाकरे की नाक के नीचे से निकल बागी नेता एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हो रहे हैं, लेकिन शिवसेना प्रमुख को इसकी भनक भी नहीं लग पा रही है। इस बौखलाहट में शिवसेना को समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करें और क्या बोले? शिवसेना ने अपने मुख पत्र ‘सामना’ के संपादकीय में मौजूदा सियासी तूफान को ‘स्वप्न दोष’ की तरह बताया है। पार्टी ने अपने बागियों को चेताया है कि समय रहते सावधान हो जाएँ, वरना उन्हें कचरे में फेंक दिया जाएगा।

जमात-ए-इस्लामी से जुड़े IAMC ने द वायर, न्यूजलॉन्ड्री, स्क्रॉल और कारवां के पत्रकारों को बाँटे नकद पुरस्कार: भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा है ‘मुख्य एजेंडा’

इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) एक कट्टरपंथी इस्लामी समूह है। इसका कथित तौर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठनों जैसे स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के साथ गहरा संबंध है। वहीं, सिमी का भारत के खिलाफ साजिश रचने का पुराना इतिहास है। इस कट्टरपंथी संगठन (IAMC) ने द वायर, न्यूज मिनट, न्यूज़लॉन्ड्री और अन्य संस्थानों के ‘पत्रकारों’ को अपने प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने के लिए नकद पुरस्कार वितरित किए हैं।

अपने वार्षिक ह्यूमन राइट्स एंड रिलिजियस फ्रीडम जर्नलिज़्म अवार्ड्स-2022 (HRRF) के लिए IAMC ने दुष्प्रचार करने वाले संस्थानों से अपने पसंदीदा पत्रकारों को चुना है। IAMC अमेरिका में भारतीय मुस्लिमों की पैरवी करने वाला सबसे बड़ा संगठन होने का दावा करता है। यह अक्सर शरिया कानून की वकालत करता है और भारत के खिलाफ गलत सूचना देता है। उसने अपने कुछ पसंदीदा ‘पत्रकारों’ के लिए लाखों रुपए नकद पुरस्कार के रूप में दिया है।

विभिन्न नकद पुरस्कारों के लिए चुने गए नामों में द कारवां मैगज़ीन के शाहिद तांत्रे, स्क्रॉल की ऐश्वर्या एस अय्यर, द वायर की इस्मत आरा, द कारवां की सुमेधा मित्तल, द वायर की नाओमी बार्टन, द न्यूज़ मिनट की प्रियंका तिरुमूर्ति और न्यूज़लॉन्ड्री की आकांक्षा कुमार शामिल हैं। सर्वश्रेष्ठ मीडिया संस्थानों के पुरस्कार लिए इस्लामिक आतंकवाद की पैरवी करने वाले द स्क्रॉल, न्यूज़लॉन्ड्री, मकतूब मीडिया, आर्टिकल 14 और ‘मूकनायक’ जैसे पोर्टलों को शॉर्टलिस्ट किया है।

लोकप्रिय ट्विटर हैंडल The Hawkeye ने शॉर्टलिस्ट किए गए सभी नामों के स्क्रीनशॉट साझा किए हैं, जिसमें विभिन्न कैटेगरी में विजेताओं की घोषणा की गई है।

मानवाधिकारों एवं धार्मिक स्वतंत्रता पर सर्वश्रेष्ठ रिपोर्टिंग के लिए न्यूज़लॉन्ड्री की आकांक्षा शर्मा के नाम की घोषणा की है। इनकी ज्यादातर स्टोरी यूपी में धर्मांतरण के मास्टरमाइंड मौलाना उमर गौतम के बारे में थीं।

फोटो साभार: आईएएमसी की वेबसाइट से लिया गया स्क्रीनशॉट

वीडियो स्टोरी कैटेगरी में न्यूज मिनट की प्रियंका तिरुमूर्ति और कारवां मैगजीन के शाहिद तांत्रे ​को विनर घोषित किया गया।

फोटो साभार: आईएएमसी की वेबसाइट से लिया गया स्क्रीनशॉट

यूके स्थित एक मैगजीन का सैयद शहरियार सर्वश्रेष्ठ फोटो कैटेगरी में विजेता है। द वायर की इस्मत आरा, जो हाल ही में मनाफ नाम के एक चाय विक्रेता की ‘स्टोरी’ के लिए सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। वह ‘यंग जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर’ कैटेगरी में स्क्रॉल की ऐश्वर्या एस अय्यर के साथ विजेता घोषित की गई हैं। ये सभी पुरस्कार उन मीडिया संस्थानों को दिए गए हैं, जो इस्लामवादी और पाकिस्तान के समर्थक हैं। ये संस्थान भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करते हैं। ये दावा करते हैं कि भारत के मुस्लिमों को मोदी सरकार में डराया जा रहा है।

सर्वश्रेष्ठ मीडिया संस्थान की कैटेगरी में आर्टिकल 14 और मूकनायक विजेता हैं। अवॉर्ड शो में अमेरिका स्थित पत्रकार और शो ‘डेमोक्रेसी नाउ’ के निर्माता एमी गुडमैन पुरस्कार समारोह में मुख्य वक्ता थे। IAMC वेबसाइट के अनुसार, इस दौरान ब्रिटिश पत्रकार यवोन रिडले ने कहा, “नरेंद्र मोदी सरकार में भारत के अहम पहलुओं के बारे में चर्चा करना और इस पर लिखना यहाँ के पत्रकारों के लिए जोखिम भरा है।”

गौरतलब है कि IAMC एक जमात-ए-इस्लामी समर्थित लॉबिस्ट संगठन है। यह भारतीय मुस्लिमों के अधिकारों की वकालत करने का दावा करता है। इस साल जनवरी में भारत के पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी और बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर के ‘इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC)’ के एक कार्यक्रम में अतिथि के रूप में जाने को लेकर उन पर कई सवाल उठ रहे थे, क्योंकि अब तक IAMC का रुख भारत विरोधी रहा है और मुस्लिमों के हित के नाम पर वो देश के विरुद्ध प्रोपेगेंडा चलाता रहा है। अमेरिका में ‘भारत में मुस्लिम खतरे में हैं’ में वाला माहौल बनाने में उसका हाथ है। साथ ही वो अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी ये नैरेटिव चलाता है। यही नहीं आईएएमसी भारत को ब्लैकलिस्ट करने की पैरवी की थी।

‘आपसी सहयोग कोरोना के दुष्प्रभावों से वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाएगा’: BRICS की बैठक में बोले पीएम मोदी, दुनिया के 16% व्यापार को कंट्रोल करता है संगठन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने गुरुवार (23 जून 2022) को ब्रिक्स (BRICS) देशों की मीटिंग को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कोरोना का संकट भले ही टल गया हो, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसके दुष्प्रभाव अभी भी दिख रहे हैं। ब्रिक्स के सदस्य देशों का वैश्विक अर्थव्यवस्था के गवर्नेंस के लिए समान दृष्टिकोण है। इसलिए सदस्यों का आपसी सहयोग आर्थिक सुधार में उपयोगी योगदान दे सकता है।

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले सालों में हमने ब्रिक्स में कई संस्थागत सुधार किए हैं जिससे इस संगठन की प्रभावशीलता बढ़ी है। हमारी न्यू डेवलपमेंट बैंक की सदस्यता में भी वृद्धि हुई है। ऐसे कई क्षेत्र हैं जहाँ हमारे आपसी सहयोग से हमारे नागरिकों को सीधा लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही पीएम ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को सफल बनाने के लिए ब्रिक्स के देशों का आभार भी व्यक्त किया।

इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा, “मुझे विश्वास है कि आज हमारे विचार-विमर्श से हमारे संबंधों को और मजबूत करने के लिए सुझाव मिलेंगे।”

ये बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बैठक में पीएम मोदी के अलावा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के शीर्ष नेता उपस्थित रहे। ये ब्रिक्स की 14वीं मीटिंग है। इस साल का मेजबान चीन रहा है।

उल्लेखनीय है कि ब्रिक्स (ब्राजील-रूस-भारत-चीन-दक्षिण अफ्रीका) दुनिया के पाँच सबसे बड़े विकासशील देशों का संगठन है, जो कि वैश्विक आबादी का 41 फीसदी, वैश्विक जीडीपी का 24 फीसदी और 16% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है।

पुतिन ने भारत को लेकर कही बड़ी बात

ब्रिक्स की बैठक के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मुश्किल वक्त में भारत द्वारा रूस से तेल खरीदकर उसकी मदद करने को लेकर अब भारत की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि रूस में भारतीय स्टोर्स खोलने के लिए बातचीत की जा रही है। पुतिन ने कहा कि इस साल के शुरुआती तीन महीनों में ब्रिक्स देशों का व्यापार 38% तक बढ़ा है।

‘ईसाइयों और मुस्लिमों को फ्री ड्रोन पायलट ट्रेनिंग और प्लेसमेंट’: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन रेड्डी की एक और तुष्टिकरण योजना, बीजेपी नेता ने शेयर किया पोस्टर

आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) की वाईएस जगन मोहन रेड्डी (YS Jagan Mohan Reddy) सरकार ने एक ड्रोन पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसको लेकर राज्य भाजपा महासचिव विष्णु वर्धन रेड्डी ने निशाना साधा है। उन्होंने ट्विटर के जरिए बताया कि कैसे वाईएस जगन मोहन रेड्डी सरकार ने कथित तौर पर केवल दो अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के लिए ही ड्रोन पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है।

भाजपा नेता द्वारा साझा किए गए पोस्टर के अनुसार, आंध्र प्रदेश में ड्रोन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (डीआईटी) द्वारा पाठ्यक्रम की पेशकश की जा रही है। ऑफ़लाइन पाठ्यक्रम के कैंडिडेट वाले विज्ञापन में केवल ईसाई और मुस्लिम उम्मीदवारों को ही फ्री ट्रेनिंग और प्लेसमेंट देने की बात कही गई है।

आंध्र के सीएम के हिन्दू विरोधी पूर्वाग्रह पर सवाल उठाते हुए भाजपा नेता ने ट्वीट किया, “संसाधनों पर सभी का समान अधिकार है फिर आंध्र प्रदेश सीएम ने विशेष रूप से केवल 2 समुदायों के छात्रों के लिए प्रशिक्षण क्यों रखा है? इससे सांप्रदायिक तनाव हो सकता है, आंध्र सरकार हमारे छात्रों के साथ बहुत गंदी राजनीति कर रही है। उन्हें यह फैसला वापस लेना चाहिए।”

जिस पोस्टर को भाजपा नेता ने शेयर किया है उसमें देखा जा सकता है कि आंध्र प्रदेश के प्रतीक के साथ सीएम वाईएस जगन मोहन रेड्डी की तस्वीर है। इसमें मोटे अक्षरों में उल्लेख किया गया है कि पाठ्यक्रम को ड्रोन उड़ान में मुफ्त प्रशिक्षण और बाद में मुफ्त प्लेसमेंट की पेशकश केवल ईसाइयों और मुसलमानों के लिए की गई है। इसमें दो नंबर भी पूछताछ के लिए दिए गए हैं, जिस पर ऑपइंडिया ने कॉल किया तो वो पहुँच से बाहर थे।

उल्लेखनीय है कि लंबे वक्त से विपक्षी पार्टियाँ ईसाई समुदाय से आने वाले वाईएस जगन रेड्डी पर ईसाईयों पर जमकर खर्च करने का आरोप लगाती रही हैं। आरोप है कि जब से जगन मोहन रेड्डी राज्य के सीएम बने थे, तभी से वो धर्मान्तरण को प्रमोट करते रहे हैं। आंध्र के सीएम का हिन्दू विरोधी पूर्वाग्रह और धर्मान्तरण पर उनका नरम रुख अल्पसंख्यक तुष्टिकरण को बढ़ाता है। विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जाहिर की है।

बीजेपी नेता के द्वारा शेयर किया गया पोस्टर

पिछले साल ही राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर राज्य में अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के जबरन धर्मान्तरण के खिलाफ की गई कार्रवाई के संबंध में रिपोर्ट माँगी थी। एनसीएससी ने ये संज्ञान हिन्दू कानूनी-कार्यकर्ता समूह ‘कानूनी अधिकार संरक्षण मंच’ और एससी-एसटी अधिकार मंच, व एक एनजीओ के जनवरी 2020 के पत्र के बाद लिया था।

इसी तरह से 2019 में जगन सरकार ने 3 लाख रुपए तक की वार्षिक आय वाले लोगों के लिए यरुशलम जाने वाले ईसाई तीर्थयात्रियों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को 40,000 रुपए से बढ़ाकर 60,000 रुपए कर दिया था। वहीं सालाना 3 लाख रुपए से अधिक कमाने वालों को दी जाने वाली सहायता राशि को बढ़ाकर 30,000 रुपए कर दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने अगस्त 2019 में ईसाई पादरियों को प्रति माह 5,000 रुपए का मानदेय देने का ऐलान किया था।

2011 की जनगणना के मुताबिक, राज्य में ईसाइयों की संख्या कुल आबादी का लगभग 1.4% है, हालाँकि, धर्मान्तरण के कारण अब ये संख्या अधिक होने का अनुमान है।

बदला लेने के लिए 10 लोगों को जिंदा जलवा दिया, TMC नेता अनारुल हुसैन के इशारे पर हुई बीरभूम हिंसा: CBI ने पेश की 1192 पन्नों की चार्जशीट

पश्चिम बंगाल (West Bengal) के बीरभूम जिले (Birbhum Violence) में हुई हिंसा के मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को बीरभूम जिले की रामपुरहाट अदालत में चार्जशीट फाइल की। इसमें सीबीआई ने आरोप लगाया कि तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के रामपुरहाट कम्युनिटी ब्लॉक-1 इकाई के पूर्व अध्यक्ष अनारुल हुसैन (Anarul Hossain) ने ही हत्याएँ करने का आदेश दिया था। इसके बाद 21 मार्च 2022 को हुई बोगतुई गाँव में 10 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई और पुलिस को भी इससे दूर रखा गया था।

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीआई ने 1192 पन्नों की चार्जशीट में इसका जिक्र किया है। ये आरोप पत्र चश्मदीद गवाहों, सीसीटीवी फुटेज और रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में जल कर मरने वाली दो महिलाओं के बयानों के आधार पर तैयार किया गया है।

इस मामले में अनारुल हुसैन को 24 मार्च 2022 को गिरफ्तार किया गया था, जो कि फिलहाल ज्युडिशियल कस्टडी में है। सीबीआई ने उसे कस्टडी में लेने से पहले उस पर हत्या, आगजनी, घातक हथियारों से दंगा करने और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया था।

कैसे हुआ बीरभूम नरसंहार

21 मार्च 2022 की 8:20 बजे NH-114A पर बोगटुई चौराहे पर बमबारी हुई, जिसमें टीएमसी समर्थित बरशाल ग्राम पंचायत के उप प्रधान भादू शेख की मौत हो गई। चार्जशीट के मुताबिक, बदला लेने के लिए अनारुल हुसैन ने हमले का आदेश दिया। सीबीआई ने दो अलग-अलग अपराधों में आरोप तय किए हैं, लेकिन जाँच एजेंसी ने ये भी रेखांकित किया कि दोनों घटनाएँ आपस में जुड़ी हुई हैं। भादू शेख हत्याकांड में चार लोग आरोपित हैं, जबकि शेख की हत्या के बाद भड़की हिंसा में अनारुल हुसैन समेत 18 अन्य आरोपित हैं।

उल्लेखनीय है कि टीएमसी नेता के आदेश पर हुई हिंसा में 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जन भर घरों को जलाकर राख कर दिया गया। हमलावरों ने लोगों को घरों में बंद कर दिया था, जिससे वो अपनी जान न बचा सकें। घटना पर संज्ञान लेते हुए 25 मार्च 2022 को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भादू शेख और बीरभूम हिंसा की जाँच का आदेश सीबीआई को दिया।

चार्जशीट में सीबीआई ने दावा किया है कि शेख और उनके सहयोगियों के बीच संदिग्ध भूमि सौदों, धोखाधड़ी वाली कंपनियों और जबरन वसूली के पैसे के हिस्से को लेकर झगड़ा हुआ, जिसमें उसकी हत्या कर दी गई। चार्जशीट में दावा किया गया है कि हुसैन ने भीड़ को सोना शेख और फातिक शेख के घरों पर हमला करने को कहा था।

उसके आदेश के बाद रामपुरहाट शहर से महज 150 मीटर की दूरी पर बोगतुई गाँव के रहने वाले सोना शेख और फातिक शेख के घर पर हमले किए गए। वहाँ पास के एक स्टोर से एक ई-रिक्शा में ईंधन पहुँचाया गया, जिसके चालक को सीबीआई ने हिरासत में लिया था। इस दौरान कम से कम आठ अन्य घरों में रहने वाले परिवारों पर हमला किया गया था। लेकिन वे बाहर निकलने में सफल रहे। 10 पीड़ित तीनों भाइयों मिहिलाल, शेखलाल और बनिरुल शेख के परिवारों के साथ-साथ सोना और फातिक शेख के परिवार के सदस्य हैं।

अनारुल हुसैन की भूमिका

अनारुल हुसैन ही वो शख्स है, जिसने हमलावरों को बोगतुई गाँव में हमले का निर्देश दिया था। सीबीआई ने चार्जशीट में दावा किया है कि हुसैन ने ही हमलावरों को निश्चिंत कर दिया था कि घटनास्थल पर एक घंटे तक पुलिस नहीं आएगी। जबकि, बोगतुई गाँव थाने से एक किमी से भी कम दूरी पर स्थित है। कई गवाहों ने सीबीआई को सूचित किया कि जब उन्होंने हुसैन को सहायता के लिए फोन किया, तो उन्होंने उनसे कहा कि उन्हें एक टीएमसी नेता पर हुए हमले के नतीजे भुगतने होंगे। चार्जशीट के मुताबिक, हुसैन ने सबूत मिटाने के लिए अपने फोन से कॉल लॉग्स डिलीट कर दिए।

कौन है अनारुल हुसैन

रामपुरहाट ब्लॉक नंबर 1 से अनारुल हुसैन टीएमसी अध्यक्ष है। इंडिया टुडे के मुताबिक, टीएमसी में शामिल होने से पहले हुसैन कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़ा था। TV9 बांग्ला की एक रिपोर्ट के अनुसार, हुसैन 1998 में तृणमूल कॉन्ग्रेस में शामिल हुआ और एक दशक से अधिक समय तक पार्टी के ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। पार्टी रैंक के भीतर एक ‘कुशल आयोजक’ के रूप में जाना जाता है, वह रामपुरहाट क्षेत्र में नगर निगम और रेत खनन व्यवसाय को नियंत्रित करता है।

एबीपी आनंद के मुताबिक, गरीबी में पला बढ़ा हुसैन राजमिस्त्री के तौर पर काम करता था। वो अपने परिवार के साथ कच्चे घर में रहता था। 2011 के बाद उसका ‘भाग्य’ बदल गया। आज वो हुगली जिले में स्थित संधिपुर गाँव में एक बंगले में रहते हैं। वह कई घरों और कारों के मालिक भी हैं।

रमीज तुमने बहुत बुरा किया… आयशा की तरह नदी में कूद नहीं पाई तो नफीसा ने लगा ली फाँसी: Video वायरल, निकाह के नाम पर धोखा दुनिया को बता गई

गुजरात के वडोदरा की रहने वाली नफीसा ने प्रेमी के निकाह से मुकरने के बाद 20 जून को फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या करने से पहले उसने भी अहमदाबाद की आयशा की तरह अपना एक वीडियो बनाया है। इसमें उसने बताया कि रमीज ने पहले उसे निकाह के लिए हाँ कहा, फिर बाद में वह मुकर गया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, नफीसा ने आयशा की तरह अहमदाबाद की साबरमती नदी में कूदकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी, लेकिन आसपास लोगों की भीड़ होने के कारण वह ऐसा नहीं कर पाई। इसलिए उसने वापस वडोदरा आकर घर में फाँसी लगा ली।

नफीसा ने अपनी वीडियो में कहा था, “रमीज तुमने मेरे साथ बहुत बुरा किया है। बहुत मतलब बहुत बुरा किया है। निकाह के लिए हाँ कहकर मुझे बेवकूफ बनाते रहे। आए ही नहीं, ये तो गलत है ना यार। बहुत गलत, ऐसा नहीं करना चाहिए था। जिंदगी में मैंने तुमसे सबसे ज्यादा प्यार किया, और तुमने ये किया मेरे साथ। मुझे बहुत धोखा दिया। मुझे लगा तुम सबसे अलग हो, लेकिन तुम भी सभी के जैसे ही हो। तुममें और और सभी में कोई फर्क नहीं है।”

25 साल की नफीसा ने रोते हुए कहा था, “पूरी दुनिया को पता चल जाने के बाद भी तुमने मेरा हाथ नहीं थामा। बहुत बुरे हो तुम। मुझे नहीं आता समझ में। तुम्हारे घरवाले कहते हैं कि हमारा उससे कोई कॉन्टैक्ट नहीं। लेकिन, तुम्हें परसों ही देखा था वहाँ पर। तुम्हारे कपड़े सूख रहे थे वहाँ पर। कितनी बुरी हालत कर दी है मेरी। न घर की रही न घाट की। चार दिनों से तुम्हारे लिए यहाँ भटक रही हूँ। तुम्हें ढूंढ़ रही हूँ। मैंने तो पुलिस को भी नहीं बताया। मैं क्या बोलूँ?”

बताया जा रहा है कि नफीसा खोखर नूरजहाँ पार्क इलाके में अपने परिवार के साथ रहती थी। वह अहमदाबाद के शेख रमीज अहमद से प्यार थी। रमीज ने भी नफीसा से निकाह का वादा किया था। यह बात नफीसा और रमीज के परिवार वालों को भी पता थी। लेकिन, अचानक ही रमीज ने उससे बात करना बंद कर दी, जिसके चलते नफीसा पिछले कई दिनों से उससे मिलने की कोशिश कर रही थी। उससे मिलने के लिए वह अहमदाबाद भी गई, लेकिन युवक के परिवार वालों ने उसे मिलने नहीं दिया। रमीज के धोखा देने से वह बुरी तरह टूट गई थीं, जिसके चलते उसने सुसाइड जैसा कदम उठाया। नफीसा के परिवार वालों ने रमीज के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवाई है।

गौरतलब है कि बीते साल मार्च में अहमदाबाद की आयशा ने साबरमती नदी में हँसते-हँसते कूद कर आत्महत्या कर ली थी। आयशा ने उससे ठीक पहले एक वीडियो बनाया था। आत्महत्या से पहले बनाए गए वीडियो में आयशा ने कहा था, “प्यार करते हैं आरिफ से। उसे परेशान थोड़े न करेंगे। उसे आज़ादी चाहिए, आज़ाद रहे वो। चलो, अपनी ज़िंदगी तो यहीं तक है। मैं खुश हूँ कि मैं अल्लाह से मिलूँगी। मैं उनसे पूछूँगी कि मुझसे क्या गलती हुई। अच्छे माँ-बाप मिले, दोस्त भी बहुत अच्छे मिले- फिर भी कमी कहाँ रह गई? सुकून के साथ जाना चाहती हूँ। और अल्लाह से मैं ये भी कहूँगी कि मुझे दोबारा इंसानों की शक्ल न दिखाए।” कोर्ट ने भी आयशा के वीडियो को पुख्ता सबूत मानते हुए आरिफ को 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी।