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गाँधी परिवार की वफादारी करते-करते दुनिया छोड़ गए मोतीलाल वोरा, ED के सामने राहुल गाँधी ने सारा दोष उनके ही मत्थे मढ़ा

मोतीलाल वोरा का 93 साल की उम्र में 20 दिसंबर 2020 को निधन हो गया था। जब तक जीवित रहे गाँधी परिवार के वफादार रहे। उन्हें परिवार का राजदार भी माना जाता था। नेशनल हेराल्ड में वे भी आरोपित थे। अब कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने इस मामले में सारा दोष दिवंगत वोरा के मत्थे मढ़ने की कोशिश की है।

नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राहुल गाँधी से लगातार तीसरे दिन बुधवार (15 जून 2022) को कई घंटों तक पूछताछ की। इस दौरान राहुल ने ईडी को बताया कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) और यंग इंडिया लिमिटेड (YIL) के अधिग्रहण से संबंधित सभी लेन-देन कॉन्ग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा ही देखते थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने यंग इंडिया लिमिटेड द्वारा लिए गए लोन की कोई भी जानकारी होने से इनकार किया। बताया जा रहा है कि उन्होंने इसकी सारी जिम्मेदारी वोरा पर डाल दी। कॉन्ग्रेस सचिव प्रणव झा ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि ईडी की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत है और उसे लीक करना अपराध है। इसलिए हम इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। ईडी राहुल से अब तक कई सत्रों में करीब 30 घंटे पूछताछ कर चुकी है। एजेंसी ने केरल के वायनाड से सांसद राहुल गाँधी को 17 जून 2022 को भी पूछताछ के लिए तलब किया है।

आपको बता दें कि वोरा AJL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हुआ करते थे। वे AICC (ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमिटी) के कोषाध्यक्ष भी रहे। राहुल गाँधी और उनकी माँ सोनिया गाँधी की यंग इंडियन में 76 फीसदी हिस्सेदारी है। शेष 24 फीसदी वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस (प्रत्येक 12 फीसदी) के पास थी। फर्नांडीस का भी 13 सितंबर 2021 में निधन हो गया थी। वोरा की तरह ऑस्कर फर्नांडिस भी AJL और YIL के डायरेक्टर रहे थे।

गौरतलब है कि पूरा मामला नेशनल हेराल्ड अखबार से जुड़ा है। ‘नेशनल हेराल्ड’ की स्थापना 1937 में हुई थी। AJL तब उर्दू में ‘कौमी आवाज़’ और हिंदी में ‘नवजीवन’ नामक अख़बार निकालता था। नेहरू के लेख इसमें अक्सर आया करते थे। अंग्रेज सरकार ने इसे 1942 में बैन कर दिया था। नेहरू स्वतंत्रता के बाद इसके बोर्ड के अध्यक्ष पद से तो हट गए, लेकिन अख़बार कॉन्ग्रेस से ही चलता रहा। 1963 में इसके सिल्वर जुबली कार्यक्रम में नेहरू ने सन्देश जारी किया। 2016 में इसे फिर से डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में लॉन्च किया गया था।

कई वर्षों से सर्कुलेशन कम होने और घाटे में जाने के कारण 2008 में ‘नेशनल हेराल्ड’ अख़बार को बंद कर दिया गया था। इसने अपने ऑपरेशन्स बंद कर दिए। लेकिन, दिल्ली, लखनऊ और मुंबई जैसे महानगरों में इसके पास अकूत संपत्ति थी। अख़बार के पास 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति होने का अंदाज़ा लगाया गया था।

असली खेल यहीं से शुरू हुआ, जब कॉन्ग्रेस ने अपने पार्टी फंड से अख़बार को 90 करोड़ रुपए का लोन दिया। 2010 में कॉन्ग्रेस ने अपनी नई कंपनी YIL को AJL वाला ऋण असाइन कर दिया। जब AJL ऋण चुका नहीं पाया तो उसकी सारी संपत्तियों को YIL को ट्रांसफर कर दिया गया। इस तरह 50 लाख रुपए के बदले AJL की सारी संपत्तियों का मालिकाना हक़ गाँधी परिवार के स्वामित्व वाली YIL के पास चली गई।

इसको लेकर 2013 में भाजपा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने शिकायत दर्ज कराते हुए पूछा कि 1000 शेयरधारकों वाली 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति किसी कंपनी से मात्र 50 लाख रुपए का लोन देकर कैसे हड़पी जा सकती है? कुल लोन 90.25 करोड़ रुपए का था, जिसके माध्यम से स्वामी ने गाँधी परिवार पर धोखाधड़ी के करने के आरोप लगाए। कॉन्ग्रेस के इन 4 बड़े नेताओं के अलावा पार्टी की ओवरसीज शाखा के अध्यक्ष सैम पित्रोदा और ‘राजीव गाँधी फाउंडेशन’ के पत्रकार सुमन दुबे भी इस मामले में आरोपित हैं।

पुलिस लगे बर्बर-मुस्लिम पीड़ित, इसलिए विदेशी लेखक ने 2 साल पुराना वीडियो शेयर किया: कट्टरपंथियों ने कहा- 1992 जैसा मुंबई ब्लास्ट करने की जरूरत

ऑस्ट्रेलियाई लेखक सीजे वर्लमैन अपनी हिंदूफोबिया के लिए कुख्यात हैं। मुस्लिमों को पीड़ित बताने और भारत विरोधी प्रोपेगेंडा को वे आए दिन हवा देते रहते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने बुधवार (15 जून 2022) को ट्विटर पर दो साल पुराना वीडियो शेयर कर हिंदुओं और यूपी पुलिस के खिलाफ घृणा को बढ़ावा देने की कोशिश की।

इस वीडियो में एक मुस्लिम पर पुलिस लाठीचार्ज करती दिख रही है। वर्लमैन ने पुलिस को हिंदू कट्टरपंथ से ग्रसित बताते हुए लिखा कि एक बुजुर्ग मुस्लिम को बेरहमी से मारा जा रहा है। इस ट्वीट को लिबरलों और कट्टरपंथियों ने हाथों​हाथ लिया। कई ने तो संयुक्त राष्ट्र संघ और अरब देशों को टैग भी कर दिया।

कभी अरबी मुस्लिमों की आँधी से काफिरों को मिटाने की बात करने वाले जफरुल इस्लाम के ‘मिली गैजेट’ ने वर्लमैन के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए कहा कि ऐसा लगा रहा जैसे वर्दीधारी की कोई निजी खुन्नस हो।

चित्र साभार- ट्विटर

जम्मू-कश्मीर की नेशनल कांफ्रेंस पार्टी के नेता और पूर्व विधायक डॉ. गगन भगत ने लिखा, “ये मोदी के नेतृत्व में भारत की कानून-व्यवस्था है। उत्तर प्रदेश पुलिस विश्व की सबसे क्रूर और मानवाधिकार का उल्लंघन करने वाली फ़ोर्स बन चुकी है।”

चित्र साभार- ट्विटर

खुद को राकेश टिकैत के भारतीय किसान यूनियन का गोरखपुर मंडल अध्यक्ष बताने वाले अतुल त्रिपाठी ने इसे रिट्वीट करते हुए लिखा,”उत्तर प्रदेश की पुलिस का बर्बर चेहरा देखिए।” उसने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया।

चित्र साभार- ट्विटर

खालिद बेडौन ने लिखा, “हिंदुत्ववादी पुलिस को खत्म करो।”

चित्र साभार- ट्विटर

एंटी RSS मुस्लिम (@SaudiChina10) नाम के ट्विटर हैंडल ने लिखा, “बहुत जल्द 1992 मुंबई कांड जैसा करने की जरूरत है।”

चित्र साभार- ट्विटर

2 साल से भी ज्यादा पुरानी है वीडियो

जब ऑपइंडिया ने वर्लमैन द्वारा शेयर किए गए वीडियो की पड़ताल की तो वह 6 अप्रैल 2020 का निकला। यह वीडियो बरेली जिले के इज्जतनगर थाना क्षेत्र का है। इस हिंसा को काबू करते हुए IPS अभिषेक वर्मा घायल हो गए थे।

लड़के को पीटने की उसी अफवाह मेडिकल परीक्षण में निकली थी झूठ

इस घटना पर तत्कालीन SSP बरेली IPS शैलेश पांडेय ने कहा था, “लॉकडाउन का पालन करवाने के लिए पुलिस टीम गश्त कर कर रही थी। इस दौरान नई उम्र के कुछ लड़कों को सड़क पर देख कर टोका गया। बाद में 70-80 लोगों की भीड़ पुलिस चौकी पर लड़के की पुलिस द्वारा पिटाई का आरोप लगाकर हंगामा करने लगी। लड़के को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसको कोई चोट नहीं पाई गई। भीड़ को सोशल डिस्टेंस का पालन करवाने के लिए हटने को कहा गया तो उसने इनकार कर दिया। बाद में पुलिस ने बल प्रयोग कर के भीड़ को तितर-बितर किया।”

तलवार और भालों ने पुलिस पर हुआ था हमला

इस घटना में दर्ज FIR के मुताबिक भीड़ ने पुलिस कस्टडी से आरोपितों को छुड़ाने के लिए पुलिस फ़ोर्स पर तलवार, भालों और अन्य अवैध अस्त्रों से हमला किया था। हिंसक भीड़ से न सिर्फ कोरोना फैलने, बल्कि दूसरों की जान खतरे में भी डालने का डर फ़ैल गया था। तब हमलावरों के हमले से न सिर्फ लॉ एंड ऑर्डर छिन्न-भिन्न हो गया था, बल्कि मेडिकल सेवाएँ भी प्रभावित हुई थीं। हमले में औरतें भी शामिल थीं। FIR में दर्ज कुल 43 नामजद आरोपित मुस्लिम समुदाय से ही हैं। इसी के साथ 200 अन्य अज्ञात पर भी केस दर्ज हुआ था।

FIR Copy

FIR लिखा गया है, “शुरू में जब पुलिस ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने को कहा तो पुलिस को माँ-बहन की गाली दी गई और कहा गया कि हमारा जो मन होगा वो करेंगे।”

FIR Copy

स्पष्ट है कि दो साल से अधिक पुराने वीडियो को वर्लमैन ने जुमे पर इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा पर पर्दा डालने और मुस्लिमों को पीड़ित बताने के मकसद से शेयर किया है। वे ऐसा पहले भी करते रहे हैं। इसी तरह उन्होंने बिहार में जेडीयू नेता खलील आलम की हत्या के बाद भी मामले को सांप्रदायिक एंगल देने की कोशिश की थी।

जामा मस्जिद को नोटिस भेजने वाले SHO को हटाया, केरल की वामपंथी सरकार ने कहा- मस्जिदों से नहीं हो रहा सांप्रदायिक दुष्प्रचार

केरल सरकार ने ‘सांप्रदायिक भाषण पर रोक’ लगाने वाले नोटिस को अनुचित करार देते हुए कन्नूर के मय्यिल पुलिस स्टेशन के एसएचओ बीजू प्रकाश को उनके पद से हटा दिया है। पिनराई विजयन सरकार (Pinarayi Vijayan) ने बुधवार (15 जून 2022) को स्पष्ट किया कि उसे नहीं लगता कि राज्य की मस्जिदों में कोई सांप्रदायिक दुष्प्रचार किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कन्नूर जिले की जामा मस्जिद को पुलिस द्वारा जारी नोटिस को अनुचित करार दिया, जिसमें मस्जिद को जुमे की नमाज के दौरान ‘सांप्रदायिक रूप से विभाजनकारी’ तकरीर देने से बचने के लिए कहा गया था।

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि इस तरह का नोटिस पूरी तरह से अनुचित और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार की नीतियों के खिलाफ है। सीएमओ ने कहा कि मय्यिल थाने के प्रभारी ने सरकारी नीति को समझे बिना गलत नोटिस जारी किया] इसलिए डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) ने उन्हें पद से हटा दिया है।

दरअसल, बीजू प्रकाश ने पैगंबर मुहम्मद पर कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में इस्लामवादियों द्वारा हाल ही में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों और उसके बाद हुए दंगों को देखते हुए यह नोटिस जारी किया था। एसएचओ (बीजू प्रकाश) ने इलाके की जामा मस्जिद कमेटी को नोटिस भेजकर जुमे की नमाज के दौरान भड़काऊ भाषण देने से परहेज करने को कहा था। उन्होंने मस्जिद कमेटी से कहा था कि मस्जिद में जुमे की नमाज़ का इस्तेमाल सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और नफरत फ़ैलाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। नोटिस में यह भी कहा गया था कि इस एडवाइजरी का उल्लंघन करने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

हालाँकि, मस्जिद को नोटिस मिलने के तुरंत बाद एसएचओ के खिलाफ आक्रोश फैल गया। मुस्लिम लीग (Muslim League) और एसडीपीआई (SDPI) जैसी पार्टियों सहित मुस्लिम समुदाय ने इस सर्कुलर का विरोध किया। मुस्लिम लीग कन्नूर के जिला महासचिव अब्दुल करीम चेलेरी ने मुख्यमंत्री से इस मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट करने को कहा। यही नहीं मुस्लिम नेताओं ने कन्नूर शहर के पुलिस आयुक्त के पास पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई।

नोटिस का विरोध किए जाने के बाद इसे वापस ले लिया गया और एसएचओ को उनके पद से हटा दिया गया। सरकारी कार्रवाई के बाद अधिकारी ने कहा कि यह मस्जिद कमेटी के लिए केवल एक सलाह थी। सर्कुलर को वापस लेते हुए पुलिस कमिश्नर ने एसएचओ बीजू प्रकाश से स्पष्टीकरण भी माँगा।

केरल प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के उपाध्यक्ष वीटी बलराम ने हाल ही में एक मंदिर में वरिष्ठ नेता पीसी जॉर्ज के कथित नफरती भाषण का जिक्र करते हुए सवाल पूछा था कि क्या एलडीएफ सरकार नफरत फैलने वालों पर लगाम लगाने के लिए मंदिर समितियों को भी नोटिस जारी करेगी? बता दें कि सीएमओ ने नोटिस के संबंध में सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार किए जाने का दावा करते हुए अपने बयान में कहा है कि ऐसे समय में जब स्वार्थी लोग राज्य में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे है, विभिन्न धर्मों, धार्मिक संस्थानों और आम जनता के बीच मित्रता और शांति को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

झारखंड के गिरिडीह में पथराव के बाद दहशत में हिंदू, 150 मकान-दुकान पर लगे ‘बिक्री’ के पोस्टर: पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई के आरोपों को नकारा

झारखंड के गिरिडीह में पचंबा थाना क्षेत्र के हटिया रोड पर करीब 150 मकान-दुकानों पर ‘बिक्री है’ के पोस्टर लगे हैं। ये मकान-दुकान हिंदुओं के बताए जा रहे। रिपोर्टों के अनुसार 12 जून 2022 की रात पथराव की घटना के बाद पुलिस की एकतरफा कार्रवाई ने हिंदुओं को पलायन के लिए मजबूर किया है। हालाँकि पुलिस ने इन आरोपों को नकार दिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक 12 जून को छेड़खानी को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने पर पथराव शुरू हो गया। भारी पुलिस बल ने हालत को काबू किया था। इसके अगले दिन सोमवार (13 जून 2022) को पुलिस ने 2 नाबालिगों सहित कुल 7 को गिरफ्तार कर हजारीबाग रिमांड होम और गिरिडीह जेल भेज दिया। इस कार्रवाई को हिन्दुओं ने एकतरफा बता कर पलायन का एलान किया है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे आए दिन होने वाली छेड़छाड़, पत्थरबाजी और विरोध करने वालों पर होने वाली FIR की घटनाओं से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि गुनाहगार आराम से घूम रहे हैं, जबकि बेगुनाह जेल भेजे जा रहे हैं। पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने बुधवार (15 जून 2022) को धरना भी दिया। धरने में शामिल लोगों के मुताबिक उन लोगों पर भी केस दर्ज हो गए हैं जो पथराव के दौरान अपनी दुकानों और घरों को बचाने की कोशिश कर रहे थे।

भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन गिरिडीह के जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्रा ने लिखा है, “झारखंड राज्य के गिरिडीह जिला के पचंबा में मुस्लिमों से परेशान होकर बहुसंख्यक समुदाय के निवासी दहशत में हैं। आलम यह है कि उन्होंने अपने दुकान और मकान पर बेचने का बोर्ड लगा कर यहाँ से भागने विचार कर लिया है।”

वहीं गिरिडीह पुलिस ने इन आरोपों को नकार दिया है। पुलिस के मुताबिक FIR CCTV फुटेज के आधार पर दर्ज की गई है। गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक अमित रेणु ने कहा, “धरना दे रहे लोगों से बातचीत के लिए अधिकारी नियुक्त कर दिए गए हैं। एकतरफा कार्रवाई के आरोप निराधार हैं। मामले में शामिल अन्य आरोपितों की भी गिरफ्तारी के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।”

‘नबी पर हमला मतलब सुसाइड नोट पर हस्ताक्षर, कोई नहीं बचा सकता’: महाराष्ट्र में इस्लामी स्कॉलर की धमकी, कमलेश तिवारी की दिलाई याद

पैगंबर मुहम्मद (Prophet Muhammad) को लेकर नूपुर शर्मा के कथित बयान को लेकर देश में मचे सियासी बवाल के बीच इस्लामिक कट्टरपंथी लगातार उन्हें हत्या की धमकियाँ दे रहे हैं। इसी क्रम में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें इस्लामिक विद्वान मोहम्मद हामिद इंजीनियर (Hamid Engineer) प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुलेआम हत्या की धमकियाँ दे रहा है।

मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट (MEMERI) द्वारा शेयर किए गए वीडियो में हामिद इंजीनियर को खुलेआम धमकी देते देखा गया। इसके मुताबिक, पैगंबर मुहम्मद पर जारी विवाद को लेकर 5 जून, 2022 को नागपुर में ‘अल्पसंख्यक डेमोक्रेटिक पार्टी’ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया था। कॉन्फ्रेंस में उपस्थित ईमान तंजीम के राष्ट्रीय अध्यक्ष कथित इस्लामी स्कॉलर मोहम्मद हामिद इंजीनियर ने नूपुर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल के कथित बयानों को लेकर बात की।

नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल पर बात करते हुए हामिद इंजीनियर ने बीजेपी से निलंबित दोनों नेताओं को खुलेआम मंच से हत्या की धमकी दी। इस्लामिक विद्वान कहा, “क्योंकि नबी एक करीम सल्लाहुताला ओसल्लम हमारे पैगंबर मुहम्मद पर हमला करना, उनकी इज्जत पर हमला करना इसका एक ही परिणाम है, और वो है मौत। तुम्हें कोई नहीं बचा सकता। तुम सुसाइड नोट पर हस्ताक्षर कर रहे हो। कमलेश तिवारी पाँच साल बाद मर चुका है। तुम ये न समझो कि आज मामला हल हो गया तो कल तुम्हें छोड़ दिया जाएगा। उस तार को मत छेड़ो।”

गौरतलब है कि साल 2019 में हिन्दू महासभा के नेता कमलेश तिवारी की इस्लामिक कट्टरपंथियों ने गला रेतकर हत्या कर दी थी।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों एक टीबी डिबेट के दौरान नूपुर शर्मा ने कथित तौर पर पैगंबर मुहम्मद को लेकर बयान दिया था। उनके इस बयान की क्लिप को ‘ऑल्ट न्यूज’ वाले जुबेर ने वायरल कर इस्लामिक कट्टरपंथियों को उकसाया। इसके बाद से एक तरह से शर्मा की हत्या को लेकर फतवे और इनामों की बारिश होने लगी।

इंजीनियरिंग पढ़ने गई, ड्राइवर से कर ली शादी: मनुस्मृति का जिक्र कर बोला HC – जो माँ-बाप के साथ किया, कल तुम्हारे बच्चे भी कर सकते हैं

कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने अपने प्रेमी संग शादी रचाने वाली एक लड़की के मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि प्यार अंधा होता है और यह माता-पिता व परिवार और समाज से मिलने वाले स्नेह से अधिक शक्तिशाली हथियार भी बन जाता है। हालाँकि, कोर्ट ने मनुस्मृति का उदाहरण देकर सलाह भी दिया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने किशोरी को अपने प्रेमी के साथ रहने की अनुमति तो दे दी, लेकिन बेहद कठोर टिप्पणी भी की। कोर्ट ने कहा कि उसने अपने माता-पिता के साथ जो किया है, कल को उसके बच्चे भी उसके साथ वैसा ही व्यवहार कर सकते हैं।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान किशोरी के पिता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि कानून भले ही वैध विवाह की शर्तों को विनियमित कर सकता है, लेकिन ‘जीवनसाथी चुनने में माता-पिता सहित समाज की कोई भूमिका नहीं है’।

पिता ने याचिका में कहा था कि उसकी 19 साल की बेटी हॉस्टल में रहकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही थी। एक दिन वह हॉस्टल से गायब हो गई और पता चला कि कॉलेज में ही वैन चलाने वाला निखिल नाम का ड्राइवर उसे अपने साथ भगा ले गया है।

पिता ने दावा किया कि वैन ड्राइवर ने उसकी लड़की से दोस्ती की और उसकी मासूमियत का फायदा उठाकर उसे अपने प्यार के जाल में फँसा लिया। पिता ने आरोप लगाया कि वैन ड्राइवर ने उसकी बेटी को उकसाया और मंदिर में शादी कर ली।

जस्टिस बी वीरप्पा और जस्टिस केएस हेमलेखा की खंडपीठ के सामने लड़की ने कहा कि वह 28 अप्रैल 2003 को पैदा हुई थी और उम्र के हिसाब से बालिग है। वह निखिल से प्यार करती है और अपनी मर्जी से उसके साथ गई थी।

लड़की ने कहा कि दोनों ने 13 मई को एक मंदिर में शादी करने के बाद साथ रहे हैं। वह अपने पति के साथ रहना चाहती है और अपने माता-पिता के पास वापस नहीं जाना चाहती।

इस पर पीठ ने अपने माता-पिता के प्रति दयालु होने और बुढ़ापे में उनकी देखभाल करने के महत्व को उजागर करने को लेकर धर्म की अवधारणा के बारे में विस्तार बताया। कोर्ट ने महाराज मनु द्वारा प्रतिपादित हिंदू कानून ‘मनुस्मृति’ का भी उदाहरण दिया।

पीठ ने कहा, “मनुस्मृति के अनुसार, कोई भी व्यक्ति 100 वर्षों में भी अपने माता-पिता की उन सभी परेशानियों का भुगतान नहीं कर सकता है, जिन्हें वे उसे जन्म देने से लेकर वयस्क करने तक के दौरान उठाते हैं। इसलिए, हमेशा वही करने की कोशिश करें जो आपके माता-पिता और आपके शिक्षक को पसंद हो, तभी आपके द्वारा की गई कोई भी धार्मिक पूजा कुछ फल देगी।”

इस दौरान पीठ ने कहा कि हमारे इतिहास में ऐसे अनेकों उदाहरण हैं जब माता-पिता ने बच्चों के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया और बच्चों ने भी अपने माता-पिता के लिए अपने जीवन को उत्सर्ग कर दिया।

पीठ ने आगे कहा, “अगर दोनों के बीच प्रेम और स्नेह है तो परिवार में कोई विवाद नहीं हो सकता है। इसके साथ ही अपने अधिकारों की रक्षा के लिए बच्चों को माता-पिता के खिलाफ या अभिभावकों को बच्चों के खिलाफ अदालत जाने का कोई सवाल नहीं पैदा होता।”

पीठ ने अपने फैसले में कहा, “वर्तमान मामले के अजीबोगरीब तथ्य और परिस्थितियाँ स्पष्ट करती हैं कि प्रेम अंधा होता है तथा माता-पिता, परिवार के सदस्यों और समाज के प्यार एवं स्नेह की तुलना में वह अधिक शक्तिशाली हथियार बन जाता है।”

कोर्ट ने लड़की को आगाह करते हुए कहा, “बच्चों को भी यह जानने का समय आ गया है कि जीवन में प्रतिक्रिया, प्रतिध्वनि और प्रतिबिंब शामिल होते हैं। वे आज अपने माता-पिता के साथ जो कर रहे हैं, कल उनके साथ भी वही होगा।”

फिल्मों में नक्सली आतंकियों का समर्थन करते तेलुगु अभिनेता: युवा भारतीयों को भटकाने की साजिश, वामपंथ लेकर आता है नरसंहार

SS राजामौली की बाहुबली 1 और बाहुबली 2 में भल्लालदेव की भूमिका के साथ राणा दग्गुबाती (Rana Daggubati) पूरे भारत में घर-घर पहुँच गए। राणा एक बेहतरीन अभिनेता हैं और बाहुबली से उन्हें अखिल भारतीय पहचान मिलने तक उन्होंने कई फिल्में की हैं। राणा की आने वाली फिल्म का नाम ‘विराट पर्वम’ (‘Virata Parvam’) है, जो 17 जून को रिलीज होने वाली है। फिल्म में साईं पल्लवी, नंदिता दास और प्रियामणि भी अन्य भूमिकाओं में हैं।

फिल्म के ट्रेलर से पता चलता है कि राणा का केंद्रीय चरित्र रावण, एक नक्सली नेता जबकि साई पल्लवी गाँव की एक चहेती लड़की की भूमिका में हैं, जिसे रावण के लेखन से प्यार हो जाता है और अंततः खुद रावण से प्यार हो जाता है, फिर वह इसमें शामिल होने के लिए एक नक्सली बन जाती हैं।

अब नक्सलियों की कहानियाँ सुनाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन कोई भी जागरूक भारतीय जानता है कि इस आंदोलन ने कितनी हिंसा, रक्तपात और भ्रष्टाचार किया है। नक्सलवादी अक्सर नक्सल आंदोलन को न्याय और समानता के लिए एक धर्म युद्ध के रूप में चित्रित करने की कोशिश करते हैं, कुछ ऐसा ही है जो विराट पर्वम के ट्रेलर में बहुत नाटकीय संगीत और दृश्यों के साथ परोसा गया है, लेकिन वे यह भूलने का नाटक करते हैं कि नक्सली आतंकवादियों ने भी आदिवासियों का शोषण, हत्या और बलात्कार किया है। ये वही लोग हैं जो इनके अधिकारों की रक्षा का दावा करते रहे हैं।

विराट पर्वम के ट्रेलर में साईं पल्लवी

इन्हीं नक्सलियों ने सरकार के दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सड़क, स्वास्थ्य सेवा, नौकरी, स्कूल और अन्य सुविधाएँ मुहैया कराने के विचार को खारिज कर दिया। वे चाहते हैं कि उन क्षेत्रों में रहने वाले लोग हमेशा अंधविश्वास, बीमारियों और अराजकता के अंधेरे में रहें, एक आम भारतीय को मिलने वाले अवसरों से भी वंचित रहें।

वामपंथी राजनीतिक दल, जो इनके लिए विक्टिम कार्ड और भीतरी इलाकों में सक्रिय नक्सली आतंकवादियों के शहरी मुखौटा हैं। ये हर एक बुनियादी ढांचा परियोजना का विरोध करते हैं, चीन के लिए समर्थन की घोषणा करते हैं और युवाओं को अराजकतावादी आंदोलनों में भर्ती करने का प्रयास करते हैं जहाँ निराशा और अँधेरे में जीवन खो जाता है।

पिछले दशकों के राजनीतिक चाहे समीकरण जो भी हों, पर वास्तविकता यह है कि नक्सली आतंकवादी हैं, क्षेत्रीय आतंकवादी हैं जो भारतीय राष्ट्र के खिलाफ काम करते हैं, विदेशी शक्तियों से सहायता प्राप्त कर भारत को कमजोर करने का काम करते हैं।

तो क्यों मुख्यधारा के टॉलीवुड सितारे अपने लाखों समर्पित प्रशंसकों के साथ एक मृत, विघटित विचारधारा का रोमांटिककरण करने पर आमादा हैं, जो इस विचारधारा पर चलने वाले हर एक देश के लिए निराशा और विनाश के अलावा कुछ नहीं लाया है? वामपंथियों ने आधुनिक समय में किसी भी अन्य राजनीतिक शक्ति की तुलना में अधिक हत्याएँ की हैं, यहाँ तक ​​​​कि इस्लामी आतंकवादियों और परमाणु हथियारों से ज़्यादा लोगों को मार डाला है। वामपंथी विचारधाराएं देश दर देश तानाशाहों को हमेशा सत्ता में लाती रही हैं, जो जब-तब नरसंहार करते रहते हैं और अपनी प्रजा को सख्त निगरानी में रखते हैं। कंबोडिया हो, उत्तर कोरिया हो, दक्षिण अमेरिका हो, चीन हो या सोवियत रूस, कम्युनिस्ट वामपंथी विचारधाराएं हमेशा कयामत और सामूहिक हत्याएँ लेकर आई हैं।

तो यह असफल, अस्वीकृत, परित्यक्त विचारधारा क्यों है जिसमें मुख्यधारा के फिल्म निर्माताओं द्वारा मृत्यु और भ्रष्टता का रोमांटिक प्रदर्शन क्यों?

राम चरण और मेगास्टार चिरंजीवी की हालिया फिल्म आचार्य

जबकि अधिकांश भारत राजामौली द्वारा सुपर ऊर्जावान, नेत्रहीन असाधारण आरआरआर का आनंद और जश्न मना रहा है, जहाँ मेगास्टार चिरंजीवी के बेटे तेलुगु सुपरस्टार राम चरण स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीतारामराजू से प्रेरित भूमिका निभाते हैं, राम चरण ने एक और फिल्म आचार्य में भी अभिनय किया है, जहाँ उनके पिता चिरंजीवी ने भी मुख्य भूमिका निभाई है।

आचार्य और कुछ नहीं बल्कि एक ऐसी फिल्म के रूप में पैक किए गए नक्सलवाद को महिमामंडित करती है, जो भारतीय, हिंदू दृश्यों से भरपूर है। फिल्म हिंदू पारंपरिक दृश्यों के पर्दे के पीछे नक्सल विचारधारा को छुपाती है और यह चित्रित करने की कोशिश करती है कि यह केवल नक्सली हैं जो पारंपरिक आयुर्वेदिक प्रथाओं और ग्रामीणों और गाँव की रक्षा करते हैं जो जैव विविधता में समृद्ध हैं और गर्व से अपनी हिंदू प्रथाओं का पालन करते हैं।

फिल्म में ऐसे भी कई दृश्य हैं जब नक्सल नेता, पुलिस और अर्धसैनिक बलों को मारने वाले नायक के रूप में परिभाषित किया जाता है, जिसे प्राचीन आयुर्वेद की रक्षा करने वाली माँ दुर्गा की दिव्य शक्तियों द्वारा ‘चुना’ दिखाया जाता है।

माना कि कहानी सुनाना महत्वपूर्ण है, कहानी सुनाना सुंदर भी है। लेकिन क्या यह आवश्यक है कि झूठी कहानियाँ सुनाई जाए जो एक झूठ को बढ़ावा दें और पहले से पिछड़ी हुई जनसंख्या समूह को एक ऐसी विचारधारा की ओर धकेलें जो मृत्यु और निराशा के अलावा कुछ नहीं लाती है?

माना कि बताने लायक कहानियों को कहने की जरूरत है। लेकिन यह नियम किसने बनाया कि लोगों को बेवकूफ बनना है? माना कि सिस्टम के खिलाफ काम करने वाले एंग्री यंग मैन पर फोकस करने वाली फिल्में हमेशा लोकप्रिय रही हैं। चाहे वो पुष्पा, केजीएफ, या यहाँ तक ​​​​कि कई हॉलीवुड हिट्स को ही ले लें, लेकिन ऐसी राजनीति को आगे बढ़ाना जिसने भारत के पिछड़े क्षेत्रों को दशकों तक असुरक्षित और गरीबी में रखा है? कहाँ तक तर्कसंगत है? ऐसे में राणा दग्गुबाती, राम चरण और चिरंजीवी जैसे सुपरस्टार ऐसी फिल्मों के माध्यम से वास्तव में क्या हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं?

‘परिवार को ख़त्म करने की मिल रही धमकियाँ’: नवीन जिंदल ने महाराष्ट्र पुलिस के सामने पेश होने में जताई असमर्थता, माँगा 1 माह का समय

मुहम्मद पैगंबर पर कथित टिप्पणी के मामले में दिल्ली बीजेपी के पूर्व नेता नवीन जिंदल को महाराष्ट्र की भिवंडी पुलिस द्वारा जारी किए गए समन पर जबाव दिया है। जिंदल ने भिवंडी पुलिस के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर को पत्र लिखकर पूछताछ के लिए उपस्थित होने के लिए एक महीने का समय माँगा है।

जिंदल ने भिवंडी पुलिस को लिखे पत्र में कहा है कि पैगंबर विवाद शुरू होने के बाद से लगातार उन्हें और उनके परिवार को हत्या की धमकियाँ दी जा रही हैं। पत्र में जिंदल ने लिखा, “हालात को देखते हुए मैं अपने घर दिल्ली से महाराष्ट्र में आपके समक्ष पेश होने की स्थिति में नहीं हूँ। इसलिए मुझे एक महीने का समय दें।”

इसके साथ ही उन्होंने भिवंडी पुलिस को एक सुझाव दिया है कि अगर फिर भी महाराष्ट्र पुलिस उनसे पूछताछ करना चाहती है तो पत्राचार के इसी माध्यम से वो अपना सवाल भेज दें और वो (जिंदल) अपना जबाव महाराष्ट्र पुलिस को भेज देंगे। जिंदल ने कहा है कि पुलिस के किसी भी तरीके की जाँच में सहयोग के लिए तैयार हैं।

महाराष्ट्र पुलिस को भाजपा के निलंबित नेता नवीन जिंदल का जवाब

क्या है पूरी मामला

गौरतलब है कि महाराष्ट्र पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी के पूर्व नेता नवीन जिंदल को पैगंबर मुहम्मद पर उनकी टिप्पणी से संबंधित एक मामले में पूछताछ के लिए समन जारी किया था। इसके मुताबिक, जिंदल को पुलिस ने 15 जून को सुबह 11:30 बजे महाराष्ट्र के भिवंडी पुलिस स्टेशन में पेश होने को कहा गया था। उन्हें पुलिस की ओर से कहा गया था कि इस अवधि में वो ऐसा कोई भी काम नहीं करें, जिससे जाँच में बाधा पैदा हो। साथ ही सबूतों को नष्ट नहीं करने और उससे छेड़छाड़ नहीं करने को भी कहा गया था।

उधर इसी मामले में नूपुर शर्मा ने भी भिवंडी पुलिस से पूछताछ के लिए पेश होने के लिए एक महीने की मोहलत माँगी है। उल्लेखनीय है कि नवीन जिंदल और नूपुर शर्मा दोनों के ही खिलाफ भिवंडी पुलिस स्टेशन में केस दर्ज है।

राष्ट्रपति चुनाव पर CM ममता बनर्जी की बैठक को झटका, विपक्ष एकता फुस्स: फारूक अब्दुल्ला के लिए चला रहीं गोलबंदी?

देश में राष्ट्रपति चुनाव के लिए बिगुल बज चुका है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार (15 जून, 2022) को एक संयुक्त रणनीति तैयार करने के लिए विपक्ष की बैठक दिल्ली के ‘कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया’ में बुलाई। बैठक में पहले राष्ट्रपति चुनाव पद के लिए एनसीपी चीफ शरद पवार के नाम का प्रस्ताव रखा गया। हालाँकि, जब उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया तो विपक्ष ने एक कॉमन उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर दिया।

बैठक के बाद ममता बनर्जी ने कहा, “आज कई दल यहाँ थे। हमने तय किया है कि हम केवल एक आम सहमति वाले उम्मीदवार को चुनेंगे। हर कोई इस उम्मीदवार को अपना समर्थन देगा। हम दूसरों के साथ परामर्श करेंगे। यह एक अच्छी शुरुआत है। कई महीनों के बाद हम एक साथ बैठे थे और हम इसे फिर से करेंगे।” सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी उम्मीदवारों के रूप में फारूक अब्दुल्ला और गोपालकृष्ण गाँधी के नामों का सुझाव दिया।

बैठक में कौन-कौन सी पार्टियाँ रहीं शामिल

इस बैठक में कम से कम 16 दलों के नेता शामिल रहे। इसमें कॉन्ग्रेस, समाजवादी पार्टी, एनसीपी, द्रमुक, राजद, शिवसेना, भाकपा, माकपा, भाकपा (माले), नेशनल कॉन्फ्रेंस, PDP, JD (S), RSP, IUML, RLD और JMM शामिल थी। वहीं इस बैठक में पवार के अलावा NCP नेता प्रफुल्ल पटेल, मल्लिकार्जुन खड़गे, कॉन्ग्रेस के जयराम रमेश और रणदीप सुरजेवाला, JD (S) के एचडी देवेगौड़ा और एचडी कुमारस्वामी, SP के अखिलेश यादव, पीडीपी के महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला बैठक में प्रमुख नेताओं में नेशनल कॉन्फ्रेंस भी शामिल थी।

गौरतलब है कि इस बैठक में निमंत्रण मिलने के बावजूद AAP, चंद्रबाबू नाडू की तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) और ओडिशा की सत्तारूढ़ बीजेडी ने इस मीटिंग से किनारा बनाए रखा। इसके अलावा शिरोमणि अकाली दल ने भी इस मीटिंग में नहीं शामिल होने का फैसला लिया। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, टीआरएस कॉन्ग्रेस के साथ एक मंच साझा नहीं करना चाहती। वहीं AAP ने कहा, “आगामी राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार की घोषणा के बाद ही इस मुद्दे पर विचार करेगी।”

ममता की मीटिंग हुई बेदम

उल्लेखनीय है कि इलेक्टोरल कॉलेज में एनडीए का वोट प्रतिशत आधे से अधिक है। इस चुनाव में किंग मेकर की भूमिका में बीजेडी, वाईएसआरसीपी, टीआरएस हैं। इन्ही पार्टियों ने ममता की मीटिंग से किनारा कर लिया है। ऐसे में एक बार फिर से भाजपा के खिलाफ एक मंच बनाने की ममता बनर्जी की कोशिश बेकार हो गई है। इसे इस तरह से भी समझा जा सकता है कि पिछले सप्ताह ममता बनर्जी ने देशभर की 22 पार्टियों को बैठक के लिए निमंत्रण भेजा था, लेकिन इसमें शामिल केवल 16 पार्टियाँ ही हुईं।

इस बीच सूत्रों के हवाले से खबर है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं को फोन किया और उनसे राष्ट्रपति चुनाव के लिए नाम सुझाने का अनुरोध किया। सूत्रों ने बताया कि जब उनसे राष्ट्रपति चुनाव के लिए सरकार द्वारा प्रस्तावित नाम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और इसलिए विपक्षी नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया में कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखाई।

चुनाव आयोग के अनुसार, राष्ट्रपति चुनाव 2022 के लिए 18 जुलाई से वोटिंग की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसके बाद वोटों की गिनती 21 जुलाई को होगी। वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में देश के नए राष्ट्रपति 25 जुलाई को अपने पद की शपथ लेंगे। लेकिन ये चुनाव सत्तारूढ़ बीजेपी के लिए भी किसी परीक्षा से कम नहीं होने वाला है।

याद हो कि 2019 लोकसभा चुनाव से पहले चंद्रबाबू नायडू भी विपक्ष को एकजुट करने निकले थे और बैठकें पर बैठकें कर रहे थे, लेकिन लोकसभा और विधानसभा चुनाव में उन्हें ऐसी हार मिली कि वो राष्ट्रीय के साथ-साथ राज्य की राजनीति से भी अप्रासंगिक हो गए।

राँची हिंसा में शामिल दंगाइयों के लिए उमड़ा कॉन्ग्रेस का प्यार: मंत्री उराँव बोले- तस्वीर नहीं लगानी चाहिए, MLA अंसारी ने माँगा ‘शहीद’ का दर्जा

इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद (Prophet Mohammad) के नाम पर देश की सड़कों पर उत्पात मचाने वाले दंगाइयों के लिए कॉन्ग्रेस नेताओं (Congress Leaders) का दर्द उभरकर सामने आ रहा है। झारखंड सरकार (Jharkhand Government) में मंत्री कॉन्ग्रेस के दो नेताओं ने दंगाइयों की तस्वीरों को लगाना गलत बताया। वहीं, एक अन्य मंत्री ने हिंसा के दौरान मारे गए एक दंगाई को शहीद का दर्जा देने की माँग की है।

राँची हिंसा को लेकर झारखंड के वित्त मंत्री रामेश्वर उराँव (Rameshwar Oraon) ने कहा कि हिंसा करने वाली भीड़ के सदस्यों की तस्वीरें प्रदर्शित करना मेरी निजी राय में गलत है। जनता की नजर में भले ही उन पर आरोप लगे हों, लेकिन कानून की नजर में वे अभी तक आरोपित नहीं हैं।

वहीं, झारखंड के जामताड़ा से कॉन्ग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने मारे गए दंगाई के लिए शहीद के दर्जे की माँग, 50 लाख रुपए का मुआवजा और उसके परिजनों को सरकारी नौकरी देने की माँग की है। इसके साथ ही उन्होंने फायरिंग की मजिस्ट्रियल जाँच की भी माँग की है।

इरफान ने कहा, “मैं मजिस्ट्रियल जाँच की माँग करता हूँ। मेरी माँग है कि सरकार मरने वालों को ‘शहीद’ का दर्जा दे। उन्हें 50 लाख रुपये अनुग्रह राशि के साथ-साथ उनके परिवारों को सरकारी नौकरी भी दी जानी चाहिए। मैं इसके लिए लड़ूँगा।”

इरफान अंसारी ने आगे कहा, “मैं घटना की निंदा करता हूँ। झारखंड एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है। यहाँ सब एक साथ रहते हैं। राँची की घटना जाँच का विषय है। मेरी माँग है कि इसकी जाँच हो और सरकार निष्पक्ष जाँच करे।”

बता दें कि पैगंबर के कथित अपमान को लेकर राँची में हिंसा को अंजाम देने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस की गोली से दो मुस्लिमों की मौत हो गई थी। जिन 2 दंगाइयों की मौत हुई है, उनके नाम मुदस्सिर उर्फ कैफी और मोहम्मद साहिल हैं। पुलिस को मजबूरन गोली तब चलानी पड़ी, जब उन पर पथराव होना शुरू हुआ और वाहनों को तोड़ा जाने लगा। दंगाइयों की तरफ से भी गोली चलने की बात कही गई है।

झारखंड में जामताड़ा से कॉन्ग्रेस विधायक इरफ़ान अंसारी (Congress MLA Irfan Ansari) ने दंगाइयों की बजाय पुलिस पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने गोली चलाने पर पुलिस की निंदा करते हुए राँची SP सिटी पर कार्रवाई और मरने वालों के परिवार को 50 लाख रुपए तथा सरकारी नौकरी की माँग की है।