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पैगंबर पर कार्टून प्रतियोगिता और कुरान पर लगे प्रतिबंध – जिस सांसद की यह चाहत, वो नूपुर शर्मा के साथ खड़ा

इस्लामिक कट्टरवाद के खिलाफ अक्सर अपने देश में कड़ा रुख अख्तियार करने वाले डच सांसद गीर्ट वाइल्डर्स (Geert Wilders) ने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में बात की है। वाइल्डर्स ने एक सीरीज में कई ट्वीट्स करते हुए कहा कि पैगंबर मुहम्मद के बारे में नूपुर शर्मा का बयान एक तथ्य है न कि कुछ झूठे आरोप।

“यह हास्यास्पद है कि अरब और इस्लामी देश भारतीय राजनेता नुपुर शर्मा के पैगंबर मुहम्मद के बारे में बोले गए सच से नाराज हैं, जिन्होंने वास्तव में आयशा से जब वह 6 साल की थी तब शादी की थी और जब वह 9 साल की थी तब शादी का उपभोग किया था। भारत माफी क्यों माँगता है?”

एक अन्य ट्वीट में, वाइल्डर्स ने कहा, “तुष्टिकरण कभी काम नहीं करता। यह केवल चीजों को और खराब करेगा। इसलिए भारत के मेरे प्यारे दोस्तों, इस्लामिक देशों से डरो मत। आजादी के लिए खड़े हों और अपने राजनेता नूपुर शर्मा का बचाव करने में गर्व और दृढ़ रहें जिन्होंने पैगंबर मुहम्मद के बारे में सच बोला था।”

वाइल्डर्स ने एक पाकिस्तानी मुस्लिम व्यक्ति द्वारा धमकी भरे मैसेज का स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसने उन्हें मारने और ‘अमेरिका और यूरोपीय संघ को नष्ट करने’ की धमकी दी थी। वाइल्डर्स ने कहा कि उन्हें पाकिस्तानी और तुर्की मुस्लिमों से हर दिन ऐसी मौत की धमकी मिलती है जो ‘तथाकथित पैगंबर मुहम्मद’ के नाम पर मारना चाहते हैं और वह कभी भी सच बोलना बंद नहीं करेंगे।

गौरतलब है कि पैगंबर मुहम्मद के जीवन के बारे में नूपुर शर्मा के बयान को ‘ईशनिंदा’ और कई इस्लामी नेताओं द्वारा पैगंबर का अपमान माना गया था, जब ऑल्ट न्यूज़ के मोहम्मद जुबैर ने इसके खिलाफ अफवाह उड़ाते हुए लोगों को उकसाया था। उसका ऑनलाइन कैम्पेन और सोशल मीडिया टार्गेटिंग एक विवाद में परिणत हुआ और अंततः, खाड़ी के इस्लामी राष्ट्रों ने बयान की निंदा करना शुरू कर दिया। तब भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह बयान उनका अपना था और सरकार का इसमें कोई हिस्सा नहीं है। वहीं इस विवाद के बाद शर्मा को भाजपा से निलंबित कर दिया गया है।

गीर्ट वाइल्डर्स और इस्लामी कट्टरवाद के खिलाफ उनका रुख

गीर्ट वाइल्डर्स लंबे समय से अपने देश में इस्लामी कट्टरवाद और कट्टरपंथियों के खिलाफ मुखर रहे हैं। एक सांसद के रूप में वह मॉस माइग्रेशन के भी विरोधी रहे हैं और संसद के अंदर कहा था कि बड़े पैमाने पर प्रवास (माइग्रेशन) के माध्यम से, सरकार “इस्लाम नामक एक मॉन्स्टर को देश में निमंत्रण दे रही है”।

एक साक्षात्कार में, वाइल्डर्स ने पहले भी कहा था, “मैं मुस्लिमों से नफरत नहीं करता, मैं इस्लाम से नफरत करता हूँ।” उन्होंने उसी साक्षात्कार में कहा, “इस्लाम कोई धर्म नहीं है, यह एक विचारधारा है, एक मंद संस्कृति की विचारधारा है।” जून 2018 में, वाइल्डर्स ने अपनी पार्टी के संसदीय कार्यालयों में आयोजित होने वाली ‘पैगंबर मुहम्मद कार्टून प्रतियोगिता’ की भी घोषणा की थी। बाद में अगस्त में, आतंकवादी हिंसा की धमकियों के बहुत फ़ैल जाने के बाद उन्हें इस कार्यक्रम को रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उनकी हत्या के लिए कई इस्लामी नेताओं ने फतवा जारी किया था।

गीर्ट वाइल्डर्स ने फितना (Fitna) नाम की एक शॉर्ट फिल्म भी बनाई है। 17 मिनट की इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे कुरान अपने सभी अनुयायियों को घृणा करना सिखाता है। आतंकवाद, मूर्तिपूजा-विरोधी, महिलाओं के खिलाफ हिंसा, काफिरों के खिलाफ हिंसा, समलैंगिकों से नफरत आदि को इस फिल्म में मीडिया क्लिपिंग्स के जरिए दिखाया गया है।

फितना (Fitna) में कुरान के सुरा के चुनिंदा अंशों को लेकर इन पर बात की गई है। इस फिल्म की स्क्रीनिंग ब्रिटेन की संसद हाउस ऑफ लॉर्ड्स में की गई थी। गीर्ट वाइल्डर्स की इस फिल्म और उनकी राजनीति को देखें तो आप समझ जाएँगे कि क्यों वो कुरान को बैन करने की माँग करते हैं।

वहीं 2019 में, जुनैद नाम के एक पाकिस्तानी मुस्लिम व्यक्ति को वाइल्डर्स के खिलाफ हत्या की साजिश के लिए 10 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। जुनैद ने एक फेसबुक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा था कि वह वाइल्डर्स को जहन्नुम में भेजना चाहता है।

बता दें कि 58 वर्षीय डच सांसद वाइल्डर्स नीदरलैंड की संसद में पार्टी फॉर फ्रीडम के अध्यक्ष हैं। वह एक दक्षिणपंथी नेता हैं, जो विशेष रूप से मुस्लिम देशों से डच सरकार की आव्रजन नीतियों का मुखर रूप से विरोध करते रहे हैं, और उन्होंने यहाँ तक ​​​​कहा है कि वह चाहते हैं कि उनका देश यूरोपीय संघ को छोड़ दे। उन्होंने यूरोपीय संघ की संसद में एक संसदीय समूह बनाने के लिए फ्रांस के मरीन ले पेन जैसे अन्य रूढ़िवादी यूरोपीय नेताओं के साथ काम किया है, जिसमें अब 9 यूरोपीय संघ के देशों की पार्टियाँ हैं।

‘सोना तस्करी में शामिल हैं केरल CM पिनाराई विजयन और उनका परिवार’: स्वप्ना सुरेश का खुलासा, कहा – मेरी जान को ख़तरा

केरल सोना तस्करी (Gold Smuggling) मामले की मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश ने मंगलवार (7 जून, 2022) को मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। कोच्चि की एक अदालत में पेश होने के बाद सुरेश ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि विजयन डिप्लोमेटिक बैगेज की आड़ में सोने की तस्करी घोटाले में शामिल थे। उन्होंने दावा किया कि जब विजयन 2016 में दुबई में थे, तब उन्हें करंसी से भरा एक बैग भेजा गया था।

स्वप्ना सुरेश ने कहा, “इस मामले में मैंने अदालत से केरल के मुख्यमंत्री, उनके पूर्व प्रमुख सचिव एम. शिवशंकर, विजयन की पत्नी कमला, बेटी वीणा, उनके अतिरिक्त निजी सचिव सी.एम. रवींद्रन, पूर्व नौकरशाह नलिनी नेट्टो और पूर्व मंत्री के.टी. जलील की संलिप्तता के बारे में भी बताया है। साथ ही मैंने कोर्ट में अपनी सुरक्षा की माँग करते हुए याचिका भी दायर की है।”

इससे पहले सुरेश ने सोमवार (6 जून 2022) को कहा था, “मेरी जान को खतरा है। इसलिए मैंने अदालत को एक बयान देने का फैसला किया है। मैं सभी तथ्यों (सोने की तस्करी से संबंधित) और इसमें शामिल लोगों के नाम का खुलासा करूँगी।’’ गिरफ्तारी के 16 महीने बाद सुरेश को पिछले साल नवंबर में जेल से रिहा किया गया था। सुरेश को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने एक अन्य आरोपित संदीप नायर के साथ 11 जुलाई, 2020 को बेंगलुरु से हिरासत में लिया था।

खाड़ी देशों से 30 किलो सोने की तस्करी

केरल में सोना तस्करी का मामला जुलाई 2020 में सामने आया था। डिप्लोमेटिक बैगेज की आड़ में सोने की तस्करी का मामला स्वप्ना सुरेश से शुरू हुआ और फिर इसके तार मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के दफ्तर तक पहुँच गए। स्वप्ना सुरेश पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी डाक्यूमेंट्स पेश कर के 2 जुलाई, 2020 को ‘डिप्लोमेटिक इम्युनिटी’ का प्रयोग कर के खाड़ी देशों से 30 किलो सोने की तस्करी की। इतना सारा सोना डिप्लोमैटिक बैग में भर कर लाया गया था। इसका खुलासा 6 जुलाई को तब हुआ, जब कस्टम के अधिकारियों ने यूएई कॉन्सुलेट के एक अधिकारी सरित से पूछताछ की, जो PRO के पद पर तैनात था। मीडिया में यह कहा जाता रहा है कि स्वप्ना को आईटी विभाग में इतना बड़ा पद दिए जाने के पीछे एम शिवशंकर का हाथ था।

उसको एक संवेदनशील स्पेस पार्क प्रोजेक्ट में काम दिया गया था, बावजूद इसके कि उनके खिलाफ पहले से ही क्राइम ब्रांच का एक मामला चल रहा था। साथ ही इंटेलिजेंस विंग ने भी उनके खिलाफ बयान दिया था, जिसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया। कॉन्ग्रेस और भाजपा, राज्य के दोनों ही विपक्षी दलों ने कम्युनिस्ट सरकार पर स्वप्ना को बचाने का आरोप लगाया है। हालाँकि, कस्टम अधिकारियों ने स्वप्ना के आवास पर छापेमारी की थी।

‘लाइफ मिशन प्रोजेक्ट’ के लिए 1 करोड़ का कमीशन

उस वक्त स्वप्ना ने कहा था कि उनके अकाउंट से जो 1 करोड़ रुपए जब्त किए गए हैं, वो उन्हें केरल सरकार से ‘लाइफ मिशन प्रोजेक्ट’ के एजेंट के रूप में काम करने के लिए बतौर कमीशन मिले थे। ये केरल सरकार का फ्लैगशिप प्रोजेक्ट है जिसे 2017 में लॉन्च किया गया था। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य था कि भूमिहीन और जिनके पास आवास नहीं है, ऐसे परिवारों को बसाया जाए और उनके लिए घर बनाए जाएँ। अब इसमें केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का नाम इसीलिए आता है क्योंकि इस प्रोजेक्ट के मुखिया वही हैं और उन्होंने UAE की यात्रा भी की थी, ताकि इसके लिए 20 करोड़ का डोनेशन जुटा सकें।

UAE के ‘Red Crescent’ से उन्हें 20 करोड़ रुपए मिले थे, जिस पर सवाल उठाए गए थे। कॉन्ग्रेस का तो यहाँ तक आरोप था कि केरल सीएम के UAE जाने के बाद ही स्वप्ना सुरेश और IT सचिव एम शिवशंकर भी दुबई चले गए थे। ऐसे में विपक्षी नेताओं का सवाल था कि विजयन ने जो MoU पर हस्ताक्षर किए, वो कहाँ और किसकी मौजूदगी में किए। क्या उस समय वहाँ स्वप्ना सुरेश भी उपस्थित थी?

आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए तस्करी

गौरतलब है कि इस मामले को लेकर NIA ने अगस्त 2020 में खुलासा किया था कि पिछले 10 महीनों में केरल में लगभग 150 किलोग्राम सोने की तस्करी की गई थी। एजेंसी ने अदालत को बताया था कि जाँच में यह भी पता चला है कि तस्करी मुख्य रूप से आभूषण बनाने के लिए नहीं बल्कि आतंकी गतिविधियों के लिए की जाती थी, क्योंकि नकदी में लेन-देन करना मुश्किल हो गया था। एनआईए ने अदालत में यह भी बताया था कि आरोपितों ने सोना तस्करी के लिए यूएई दूतावास की सील और राजकीय चिन्ह से छेड़छाड़ कर अपराध को अंंजाम दिया।

‘बाबा की सरकार है, इसीलिए सब सही रहा’: हरी मस्जिद के आगे नहीं बढ़ पाई भीड़, कानपुर दंगे की ग्राउंड रिपोर्ट, चप्पे-चप्पे पर पुलिस

UP के कानपुर जिले के बेकनगंज इलाके में 3 जून 2022 को हिंसा भड़क गई थी। यह हिंसा भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के उस बयान के विरोध में भड़की जिसमें उन्होंने कथित रूप से इस्लाम के पैगंबर का अपमान किया था। पुलिस जाँच में उपद्रव में PFI की संलिप्तता भी संभावित मिली। इसी के साथ पूरे केस में अब तक 50 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। कानपुर के शहर काजी ने दंगाइयों के घर पर बुलडोजर चलने की दशा में घरों से कफ़न बाँध कर निकलने का एलान किया है। ऑपइंडिया ने घटनास्थल बेकनगंज पर जा कर जमीनी पड़ताल की।

6 जून, 2022 को ऑपइंडिया की टीम सुबह लगभग 4 बजे कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुँची। वहाँ हालात सामान्य थे। रिश्ते और ऑटो वाले अलग-अलग स्थानों की सवारियाँ भरने में व्यस्त थे। साथ ही स्टेशन के बाहर चाय की दुकानों पर लोग बातचीत करते नजर आए।

कानपुर सेंट्रल स्टेशन के बाहर का दृश्य

बाहर चौराहे पर पुलिस की तैनाती थी। ढाबे और होटल वाले सुबह की तैयारी में बर्तनों को साफ करते दिखाई दिए। फ़िलहाल तब तक सड़क पर वाहनों की आवाजाही काफी कम थी।

चौराहा और तैनात पुलिसकर्मी

इस टाइम नहीं ले जा सकते बेकनगंज

हमने स्टेशन के बाहर खड़े एक बुजुर्ग रिक्शेवाले से घटनास्थल बेकनगंज चलने के लिए कहा। रिक्शेवाला ने हमें बड़ी हैरानी से देखा और बोला, “वहाँ PAC और पुलिस लगी हुई है। इस टाइम बहुत सवाल-जवाब करेंगे। तुम्हे जाना है तो हम सुबह पहुँचा देंगे। तब तक यहीं रुको। इस टाइम मै नहीं जाऊँगा वहाँ।” स्टेशन से बेकनगंज लगभग 2.5 किलोमीटर था। हम वहीं खड़े रहे। थोड़ी देर बाद वो हमसे आ कर बोला, “20 रुपए लेंगे पर सब्ज़ी मंडी तक ही चलेंगे।” हम तैयार हो गए। सब्ज़ी मंडी घटनास्थल से लगभग 1 किलोमीटर पहले है।

सब्जी मंडी के बाहर खड़े ठेले

रास्ते में हमने रिक्शेवाले से घटना की जानकारी ली तो उसने बताया, “अपनी दुकानों को बंद कर दिया उन्होंने, फिर दूसरों की दुकानों को तोड़ डाला।” बातों ही बातों में हम सब्ज़ी मंडी तक पहुँच गए जो थाना बादशाही नाका के ठीक सामने है। वहाँ चहल-पहल थी। लेकिन बेकनगंज की तरफ से पुलिस के वाहनों का लगातार आना-जाना लगा रहा। मंडी में हमने दुकानदारों से घटना के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की पर सभी ने कैमरे पर बोलने से मना कर दिया।

छोटू की चाय की दुकान पर चल रही थी घटना की चर्चा

सब्जी मंदिर के दूसरी दिशा में प्रसिद्ध छोटू चाय वाले हैं। उनकी दुकान पर कई लोग चाय पीने के लिए जमा थे। उनमें से कई लोग बेकनगंज हिंसा पर चर्चा कर रहे थे। उन्ही में से एक ने कहा, “रात में फिर से दबिश पड़ी है। कुछ लोग पकड़े गए।” हमने उनमे से कुछ लोगों से बात की। उनका कहना था, “जहाँ आप खड़े हैं यहाँ तक हिन्दू अच्छी संख्या में रहते हैं। थोड़ी देर बाद आपको लगभग 500 मीटर बाद सड़क पर ही हरी मस्जिद दिखाई देगी। उसके बाद बेकनगंज तक हिन्दू न के बराबर हैं। भीड़ और हमला उसी हरी मस्जिद तक सीमित रहा। इधर उनकी (मुस्लिमों) की आबादी कम है। पुलिस भी लग गई थी इधर। इसलिए यहाँ तक वो (उपद्रवी) नहीं पहुँच पाए।”

छोटू की चाय की दुकान

उन लोगों में से एक अन्य ने कहा, “बाबा (योगी आदित्यनाथ) की सरकार है। इसलिए सब सही रहा।” छोटू टी स्टॉल पर भी हमें अंधेरे में घटनास्थल पर न जाने की सलाह दी गई इसलिए हमने वहीं पर उजाला होने की प्रतीक्षा की।

सड़क के ठीक किनारे है हरी मस्जिद

हिंसा और उपद्रव की जिस सीमा को हरी मस्जिद तक सीमित बताया गया वो हमें आगे चल कर दिखी। मस्जिद सड़क से सटी हुई बनी है। आम लोगों का आवागमन काफी कम दिखा वहाँ पर। रास्ते में जगह-जगह पुलिसकर्मी तैनात दिखे।

हरी मस्जिद

हरी मस्जिद के ठीक सामने ही समाजवादी पार्टी के नेता हाजी जियाउल हक के घर का बोर्ड लगा है। इस इलाके में बिजली के तार काफी अस्त व्यस्त हो कर इस दूसरे को क्रॉस करते दिखाई दिए।

परेड चौराहे पर भारी पुलिस बल तैनात

जिस परेड चौराहे पर भीड़ जमा हुई थी वहाँ भारी पुलिस बल तैनात था। पुलिस के साथ मौके पर एम्बुलेंस खड़ी दिखाई दी। सुबह लगभग 6 बजे के समय पर पुलिस बल को डिप्टी SP रैंक के 2 अधिकारी लीड करते नजर आए। उस क्षेत्र के चौकी प्रभारी सब इंस्पेक्टर नसीम अख्तर के कार्यालय में दोनों अधिकारी बैठे दिखे। PAC की 26 वीं बटालियन का वाहन भी मौके पर दिखा। इस इलाके के ACP मोहम्मद अकमल खान है। साथ ही SHO बेकनगंज का नाम इंस्पेक्टर नवाब अहमद है। साथ ही चौकी प्रभारी का नाम नसीम अख्तर है।

परेड चौराहा पर तैनात पुलिस बल

स्थानीय लोगों से जानकारी मिली कि चौराहे का नाम परेड ग्राउंड ब्रिटिश काल से है। उस जगह पर ब्रिटिश फौजें परेड किया करती थीं। तब से अब तक वही नाम चला आ रहा है।

यतीमखाना के गेट पर फ़ोर्स तैनात

इस पूरे प्रकरण में जिस यतीमखाना का जिक्र लगभग सभी मीडिया रिपोर्ट्स में है, उसका गेट बंद मिला। बाहर पुलिस बल तैनात था। बगल में एक किराने की दूकान खुली थी जिस से कुछ पुरुष खरीदारी कर रहे थे। मौके पर सिर्फ पुलिस और PAC दिखी। पैरामिलिट्री के जवान नहीं दिखाई दिए। यद्यपि इन तमाम तैनात पुलिसकर्मियों और अधिकारियों में से किसी ने भी स्वयं को आधिकारिक बाइट देने के लिए अधिकृत नहीं बताया।

यतीमखाना

यतीमखाना के बारे में लोगों ने बताया कि यहाँ मुस्लिम समुदाय के अनाथ बच्चों को पाला जाता है। एक व्यक्ति ने ऑफ कैमरा बताया, “ये काफी पुराना है। मेरी उम्र लगभग 60 साल है और मैं इसे तब से देख रहा हूँ।’

इस घटना के बारे में स्थानीय लोगों द्वारा दी गई जानकारी हम अपनी अगली रिपोर्ट में प्रकाशित करेंगे।

जहीर इकबाल संग प्रेम में डूबी सोनाक्षी सिन्हा का ‘Love You’ पोस्ट वायरल: कभी ‘रामायण’ से जुड़ा जवाब न दे पाने पर पिटी थी भद्द, आज भी लोग लेते हैं मजे

बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल (Zaheer Iqbal) पिछले कुछ समय से अपनी लव लाइफ को लेकर सुर्खियों में है। अब उन्होंने अपने रिलेशनशिप की खबरों पर चुप्पी तोड़ी है। दोनों ने सोशल मीडिया पर खुल्लम-खुल्ला अपने प्यार का इजहार किया है।

हाल ही में सोनाक्षी सिन्हा (Sonakshi Sinha) ने अपना बर्थडे सेलिब्रेट किया। एक्ट्रेस के बर्थडे के कुछ दिन बाद जहीर ने इंस्टाग्राम पर एक खास वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में सोनाक्षी सिन्हा फ्लाइट में स्नैक्स का लुत्फ उठाती हुई नजर आ रही हैं। जहीर ने वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा है, “जन्मदिन मुबारक हो सोन्ज…शुक्रिया मुझे ना मारने के लिए… आई लव यू.. आपको ढेर सारा खाना, फ्लाइट्स, प्यार और खुशियाँ यूँ ही मिलती रहें।” इसके जरिए जहीर इकबाल ने पूरी दुनिया के सामने खुल्लम-खुल्ला अपने प्यार का इजहार कर डाला।

वहीं दूसरी ओर दबंग गर्ल ने भी बॉयफ्रेंड के इस पोस्ट पर रिप्लाई किया है। सोनाक्षी ने लिखा, “थैंक यू..लव यू और अब मैं तुम्हें मारने आ रही हूँ।” जहीर इकबाल और सोनाक्षी सिन्हा का ये पोस्ट देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। बॉलीवुड एक्ट्रेस पत्रलेखा, सिद्धार्थ मल्होत्रा, वरुण शर्मा, तारा सुतारिया और हुमा कुरैशी समेत कई सेलिब्रिटी ने उनके पोस्ट को लाइक किया है।

बता दें कि सोनाक्षी ने साल 2010 में सलमान खान के साथ ‘दबंग’ फिल्म से बॉलीवुड में अपना डेब्यू किया था और कुछ समय पहले वह केबीसी में रामायण से जुड़े सवाल का जवाब न दे पाने के कारण चर्चा में आई थीं। केबीसी में उनसे पूछा गया था कि हनुमान जी संजीवनी बूटी किसके लिए लाए थे? इस सवाल का जवाब सोनाक्षी नहीं दे सकी थीं जिसे देख यूजर्स ने उनका मजाक उड़ाया था।

दूसरी ओर, जहीर इकबाल ने 2019 में ‘नोटबुक’ फिल्म से बॉलीवुड में एंट्री की थी। अब ये दोनों ‘Double XL’ में एक साथ मुख्य भूमिका में नजर आएँगे। इस फिल्म में उनके साथ हुमा कुरैशी भी लीड रोल में होंगी। सतराम रमानी के निर्देशन में बनने वाली फिल्म इसी साल सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

गौरतलब है कि एक इंटरव्यू में सोनाक्षी सिन्हा ने जहीर इकबाल को अपना सबसे अच्छा दोस्त बताते हुए ‘नोटबुक (2019)’ फिल्म में उनके प्रदर्शन की सराहना की थी। उन्होंने अभिनेता को काफी प्रतिभावान बताते हुए उनके उज्जवल भविष्य की बात की थी और कहा था कि ‘Double XL’ उनकी डेब्यू फिल्म से काफी अलग होगी। उस दौरान दोनों ने अपने रिश्ते की पुष्टि नहीं की थी।

₹2.82 करोड़ कैश, 1.80 kg के सोने के सिक्के: जिस सत्येंद्र जैन के लिए ‘पद्म विभूषण’ चाहते थे केजरीवाल, उनके घर छापेमारी में ED को बड़ी सफलता

आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता व दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन (Satyendra Kumar Jain) के ऊपर मनी लॉन्ड्रिंग केस में शिकंजा कसता जा रहा है। सोमवार (6 जून 2022) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आम आदमी पार्टी के नेता के घर सहित उनके 7 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस दौरान ईडी ने 2.82 करोड़ की अघोषित नकदी व 1.80 किग्रा सोना बरामद किया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आज दी गई सूचना में बताया गया है कि प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन और उनके सहयोगी के परिसरों में 6 जून को की गई एक दिन की छापेमारी के दौरान अस्पष्ट स्रोतों से पीएमएलए के तहत 2.82 करोड़ रुपए नकद और 1.80 किलोग्राम वजन वाले 133 सोने के सिक्के जब्त किए। आगे की जाँच जारी है।

बता दें कि ED ने मंगलवार को मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को दिनभर चली यह कार्रवाई पीएमएलए के तहत की गई थी। इस बरामदगी के बाद दिल्ली की केजरीवाल सरकार और मुख्य विपक्षी भाजपा में घमासान बढ़ गया है। वहीं सत्येंद्र जैन कोलकाता की एक कंपनी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 9 जून तक ईडी की हिरासत में हैं।

पूरे मामले में भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर कहा, “सीएम केजरीवाल इन्हें (सत्येंद्र जैन) पद्मश्री देने की बात कर रहे थे। केजरीवाल के हिसाब से ये ईमानदार हैं। सत्येंद्र जैन का भ्रष्टाचार सिर्फ झलक है। असली चेहरा तो कोई और है।”

गौरतलब है कि सत्येंद्र जैन को ईडी ने 30 मई को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था। बाद में निचली अदालत ने उन्हें 31 मई को ईडी की हिरासत में भेज दिया था। इससे पहले लोअर कोर्ट ने पूछताछ के दौरान एक वकील की मौजूदगी की अनुमति दी थी। वकील को कुछ दूरी पर रहने की इजाजत दी गई थी, जहाँ से वह कुछ भी नहीं सुन सकता था, लेकिन देख सकता था कि क्या हो रहा था। हालाँकि बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने लोअर कोर्ट के इस आदेश पर रोक लगा दी थी।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि साल 2017 में आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत सत्येंद्र जैन के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इसी शिकायत के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने AAP नेता के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था। इसमें ये आरोप लगाया गया था कि जिसमें जाँच एजेंसी ने ये आरोप लगाया था कि जैन चार कंपनियों से मिली फंडिंग के स्त्रोत का के बारे में नहीं बता सके थे। जबकि, वो उसमें शेयर होल्डर थे। इन कंपनियों ने कथित तौर पर 2010 से 2014 तक 16.39 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग की थी।

साल 2019 में नवंबर में गृह मंत्रालय ने आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मामलों में दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी थी।

इसी साल अप्रैल 2022 में ED ने कार्रवाई करते करते हुए अकिंचन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और इंडो मेटल इंपेक्स प्राइवेट लिमिटेड व अन्य की 4.81 करोड़ रुपए की संपत्तियों को PMLA एक्ट 2002 के तहत जब्त कर लिया था। ED ने ये कार्रवाई आप मंत्री सत्येंद्र जैन, उनकी पत्नी पूनम जैन और अन्य के खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग मामले के संबंध में की थी।

‘क्यों करते हो प्राइवेट पार्ट्स की पूजा’ : मौलवी इलियास ने फिर शिवलिंग का अपमान करके लगाए जोर-जोर ठहाके, वायरल Video देख उठी कार्रवाई की माँग

ज्ञानवापी मुद्दे पर होने वाले टीवी शो में शिवलिंग का अपमान अब सामान्य होता जा रहा है। मौलवी इलियास शराफुद्दीन ने एक बार फिर से ऑन टीवी शिवलिंग को प्राइवेट पार्ट बताकर उसके पूजन पर सवाल खड़े किए हैं और हिंदुओं की भावना आहत करके ठहाके भी लगाए हैं।

जी न्यूज के ही एक शो में ठाकुर देवकी नंदन के साथ इलियास ने ज्ञानवापी के वीडियो लीक मामले में कहा, “क्यों कर रहे हो तुम लोग प्राइवेट पार्ट्स की पूजा। मैं ये पूछना चाहता हूँ कि क्यों कर रहे हो। वेदा-गीता के खिलाफ जाकर, श्रीराम श्रीकृष्णा के खिलाफ जाकर प्राइवेट पार्ट्स की पूजा क्यों कर रहे हो, तुम्हारा प्राइवेट पार्ट्स से क्या लेना-देना है।”

वीडियो में देख सकते हैं कि इलियास शिवलिंग को प्राइवेट पार्ट बता कर कितना खुश होता है और लगातार हँसता रहता है। थोड़ी देर में शांत होने के बाद इलियास दोबारा वही शब्द कहता है, “क्यों कर रहे हो प्राइवेट पार्ट्स की पूजा। क्यों लिंग और योनि की पूजा कर रहे हो। क्यों जहन्नुम में ले जा रहे हो बेचारे करोड़ों हिंदुओं को… श्रीराम और श्रीकृष्ण के रस्ते पर आओ। रावण और कंस का रास्ता छोड़ दो।”

जी न्यूज के शो से इलियास के बयान की क्लिप को काटकर अब सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। भाजपा नेता तजिंदर पाल बग्गा ने यूपी पुलिस से इस मामले में कार्रवाई की माँग की है। सामान्य यूजर भी इसे शेयर करके पूछ रहे हैं कि जब नुपूर शर्मा पर कार्रवाई हो सकती है तो इस पर क्यों नहीं? वीडियो को शेयर करके ध्यान दिलाया जा रहा है कि किस प्रकार महादेव का अपमान करके भी इलियास राक्षसों वाली हँसी हँसता रहा और उसपर किसी ने संज्ञान नहीं लिया।

बता दें कि इलियास की एक वीडियो पिछले दिनों भी सामने आई थी। उस समय उसने ताल ठोक के शो में बहस करते हुए कहा था, “हिंदुओं को मूर्तियों और पुरुषों के गुप्तांग की पूजा करने की आदत है।” शराफुद्दीन ने तर्क दिया था कि हिंदू ग्रंथों में उल्लेख किया गया है, “जो लोग मूर्तियों की पूजा करेंगे, उन्हें नरक में भेजा जाएगा। इसलिए हिंदुओं को मूर्ति, लिंग और पुरुषों के गुप्तांगों की पूजा नहीं करनी चाहिए।” इस वीडियो में भी शराफुद्दीन को हँसते हुए देखा गया था। शो के दौरान शराफुद्दीन ने हिंदू देवी देवताओं की पूजा करने वाले हिंदुओं को ‘बुद्धिहीन, अक्ल के अंधे’ कहा था और एक अन्य पैनलिस्ट को गाली भी दी थी, जिसके बाद चैनल को उसे शो के बीच से ही हटाना पड़ा था।

‘बुलडोजर चला तो फिर कफन बाँध कर निकलेंगे’: कानपुर में दंगे के बाद शहर के काजी का ऐलान, अब तक 50 गिरफ्तार, 147 अवैध संपत्ति चिह्नित

कानपुर में पिछले जुमे के दिन हिंसा के बाद यूपी पुलिस द्वारा अब तक 50 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं इस मामले में पत्थरबाजी और हिंसा में शामिल आरोपितों के 147 अवैध सम्पत्तियों की पहचान प्रशासन ने कर ली है। जिन पर बुलडोजर चलाए जाने की आशंका के बीच शहर के काजी हाजी अब्दुल कुद्दूस ने विवादित बयान देते हुए पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, काजी कुद्दूस ने कहा कि इस मामले में योगी सरकार की पुलिस एकतरफा ऐक्शन ले रही है। इतना ही नहीं बल्कि प्रशासन को धमकी देते हुए कहा कि यदि इसी तरह से ऐक्शन हुआ और बुलडोजर चलाने जैसी कार्रवाई हुई तो लोग कफन बाँध कर मैदान में आएँगे। उन्होंने कहा कि अगर यही होना है तो हम मरने के लिए निकल पड़ेंगे। इस बीच, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने भी आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश प्रशासन पक्षपाती है और मुसलमानों को निशाना बना रही है।

काजी ने वहीं यह भी कहा कि अब तक जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें 90 से 95 फीसदी तक मुसलमान हैं। काजी का यह भी कहना है कि मुस्लिमों पर भी पत्थर फेंके जाने का वीडियो मौजूद है। उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल मुसलमानों की ही गलती नहीं है। इन लोगों की सिर्फ यही गलती थी कि जुलूस निकाला था और बाजार बंद करवाया।

वहीं यूपी के एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार का कहना है, “पुलिस इस बारे में जल्दी ही नया पोस्टर जारी करेगी। इसमें कुछ और आरोपियों की तस्वीरें होंगी। उन्होंने कहा कि जो लोग इस मामले में दोषी थे, उन पर ही कार्रवाई होगी। पुलिस के ऊपर पथराव करने वाले लोगों पर ऐक्शन लिया जाएगा। लेकिन किसी भी निर्दोष पर ऐक्शन नहीं होगा।”

उन्होंने कहा कि हिंसा के आरोपितों के ऊपर गैंग्सटर ऐक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा सार्वजनिक संपत्ति को जो नुकसान पहुँचा है, उसकी भरपाई भी दंगाइयों से की जाएगी। उन्होंने कहा कि जानबूझकर हिंसा कराई गई थी। यह सभी बातें जाँच में सामने आ जाएँगी कि किसने हिंसा का आदेश दिया था और कौन लोग ले जाए गए।

बता दें कि पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और वीडियो के जरिए फोटो हासिल किए थे। इन फोटो के जरिए उन सभी दंगाइयों को पहचानने का काम किया जा रहा है।

गौरतलब है कि कानपुर हिंसा मामले में पुलिस की तरफ से पत्थरबाजों और उपद्रवियों के पोस्टर जारी करने का असर भी साफ़ दिखाई देने लगा है। पोस्टर चस्पा होने के बाद से ही पत्थरबाज योगी सरकार के डर से खुद ही सरेंडर कर रहे हैं। अब तक कुल 50 दंगाइयों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

दो और सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी FIR

कानपुर हिंसा में कुछ उपद्रवियों ने सोशल मीडिया के जरिए भी माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हुए भड़काऊ पोस्ट कर लोगों को उकसाया था। वहीं इस मामले में पुलिस ने पहले ऐसे आठ लोगों के एकाउंट चिह्नित किए थे। और अब दो अन्य हैंडल्स पर भी एफआईआर दर्ज की गई है। इनके खिलाफ आईटी एक्ट व धार्मिक भावनाएँ आहत करने समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

होगी सख्त कार्रवाई

वहीं टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, कानपुर के सांसद सत्यदेव पचौरी ने कहा कि प्रशासन केवल उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है जो मजहब के नाम पर लोगों को भड़का रहे हैं, सांप्रदायिक तनाव भड़का रहे हैं, आगजनी कर रहे हैं और कानून-व्यवस्था की स्थिति को चुनौती दे रहे हैं।

भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा कि प्रशासन किसी धर्म विशेष को निशाना नहीं बना रही है। सरकार की नीति है कि राज्य में दंगाइयों के लिए कोई जगह नहीं है, उसका पालन कर रही है। शर्मा ने जोर देकर कहा, “हम ‘दंगा मुक्त’ उत्तर प्रदेश चाहते हैं।”

जिस शख्स ने हैदराबाद गैंगरेप में AIMIM नेता के बेटे के शामिल होने के दिए थे सबूत, उस पर तेलंगाना पुलिस ने दर्ज किया केस

तेलंगाना की हैदराबाद पुलिस ने बीजेपी विधायक रघुनंदन राव ( BJP MLA M Raghunandan Rao) के खिलाफ केस दर्ज किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने जुबली हिल्स में नाबालिग लड़की के साथ हुए गैंगरेप की फोटो और वीडियो शेयर कर उसकी पहचान उजागर की है। 6 जून को दर्ज प्राथमिकी के आधार पर भाजपा विधायक एम रघुनंदन राव पर फोटो और एक वीडियो क्लिप जारी कर नाबालिग लड़की की पहचान सार्वजनिक करने के आरोप में आईपीसी की धारा 228-ए के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस अधिकारी ने कहा कि मामला सोमवार देर रात दर्ज किया गया और कानूनी राय लेने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि 4 जून को तेलंगाना के दुब्बक से विधायक रघुनंदन राव ने भाजपा प्रदेश कार्यालय, कट्टेलमंडी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित ​की थी। इस दौरान उन्होंने घटना से संबंधित एक वीडियो क्लिप और तस्वीरें शेयर की थी। आरोप है कि इसमें नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर हुई है।

मामला दर्ज होने के बाद विधायक ने कहा कि वह केवल गैंगरेप मामले में AIMIM नेता के बेटे की संलिप्तता के सबूत सार्वजनिक करना चाहते हैं। पुलिस विधायक के बेटे को क्लीन चिट दे रही है, इसलिए उन्होंने वह वीडियो क्लिप जारी किया। उन्होंने मीडियाकर्मियों से कहा कि वह मामले का सामना करने के लिए तैयार हैं। पेशे से वकील राव ने दावा किया कि वह उचित समय आने पर अपने पास मौजूद सभी सबूतों को अदालत में पेश करेंगे।

क्या है पूरा मामला

गौतलब है कि यह घटना 28 मई 2022 की है। तब 17 साल की पीड़िता पार्टी के बाद अपने घर लौट रही थी। उसी वक्त हैदराबाद के जुबली हिल्स इलाके में उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। यह मामला तब सामने आया जब पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने 5 लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और 323 और पॉक्सो एक्ट की धारा 9 और 10 के तहत मामला दर्ज किया था।

रिपोर्ट की मानें तो आरोपितों ने पहले पीड़िता से उसके घर छोड़ने की बात कही थी। बाद में एक पार्क की हुई कार के अंदर उसके साथ मारपीट की गई और फिर बारी-बारी से सभी ने उसके साथ बलात्कार किया। इस दौरान दूसरे आरोपित कार के बाहर पहरा दे रहे थे। भाजपा प्रवक्ता के कृष्णसागर राव ने हैदराबाद पुलिस पर AIMIM और TRS के राजनीतिक दबाव में जाँच करने का आरोप लगाया था।

हिन्दुओ, लट्ठ की पूजा के जमाने में किसी को ठेकेदारी सौंप चैन की बंसी मत बजाओ: मुस्लिम खुद तय करते हैं खेल के मैदान और नियम… आप भी कीजिए

ये बात सौ फीसदी सही है कि किसी को भी किसी मजहब के आस्था प्रतीकों को लेकर हल्की टिप्पणी करने की इजाजत नहीं होनी चाहिए। संस्कृत वांङ्गमय में तो कहा भी गया हैं कि अगर सत्य अप्रिय है तो उसे बोलने से बचना चाहिए। ‘सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्, न ब्रूयात् सत्यम् अप्रियम्।’ सन्दर्भ नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल प्रकरण का है। मगर क्या ऐसा एकतरफा होना चाहिए? जो नूपुर शर्मा ने कहा वह सत्य था अथवा नहीं यह तो इस विवाद से उठे शोर में कहीं दब ही गया है।

मूल बात है कि पैगम्बर मोहम्मद को लेकर जो बात एक टीवी बहस के दौरान नूपुर शर्मा ने कही, उस पर मुस्लिम समाज ने आपत्ति जताई। उसके बाद कई देशों के मुस्लिम इकट्ठे हो गए और दबाव में अपनी प्रवक्ता नूपुर को भाजपा ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता और पत्रकार नवीन जिंदल का भी यही हश्र हुआ क्योंकि कुछ ऐसी ही बातें उन्होंने अपनी ट्ववीट में कहीं थी। लेकिन, इससे भी कहीं अपमानजनक बातें हिन्दू आस्था प्रतीकों को लेकर कई लोगों ने की हैं।

ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग निकलने के बाद ऐसे कई बयान और सोशल मीडिया पोस्ट आपको मिल जाएँगी जो सिरे से भद्दी, निर्लज्ज, अश्लील, लम्पटतापूर्ण और अनर्गल है। ये सभी हिन्दुओं, विशेषकर महादेव के भक्तों को बेहद उद्वेलित करने वालीं हैं। ऐसी बयानबाजी करने वालों में कई नेता, अल्पसंख्यक समुदाय के लोग, पत्रकार और अन्य लोग भी शामिल हैं। इन टीका-टिप्पणियों को न तो सोशल मीडिया से हटाया गया, न ही इन लोगों पर कोई कानूनी कार्रवाई हुई और न ही कोई बड़ा बवाल मचा है।

इस्लाम और हिन्दू प्रतीकों को लेकर मचे इस घमासान में सत्य-असत्य, तर्क-वितर्क, साक्ष्य-असाक्ष्य, तार्किक-अतार्किक, ऐतिहासिक-अनैतिहासिक आदि मूल बातों में जाने का कोई मतलब नहीं है। क्योंकि, मौजूदा बहस इनमें से किसी धरातल पर तो ही नहीं रही। इसके प्रभाव और असर को सिर्फ और सिर्फ ताकत की तराज़ू पर तोला जा सकता है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने तो कहा ही था – ‘समरथ को नहिं दोष गुसाईं।’ आज की दुनिया में ये ताकत सिर्फ भुजबल से नहीं नापी जाती बल्कि इसके अनेक प्रकार हैं जो इस मुद्दे में सामने दिखाई पड़ रहे हैं।

भीड़ की ताकत, मीडिया विमर्श को अपने हित में इस्तेमाल करने का सामर्थ्य, व्यापार संतुलन का बल, तेल से कमाए धनबल की ताकत और कूटनीतिक ताकत। इस घटनाक्रम की क्रमबद्धता देखिए। टीवी बहस में जैसे ही बयान आता है, कुछ लोग इसे सोशल मीडिया पर आगे बढ़ाते है, एक शहर में भीड़ जुट कर दंगा करती है, देश के मीडिया का एक वर्ग इसे ‘इस्लाम पर हमले’ के रूप में प्रचारित करता है, क़तर में भारत के उपराष्ट्रपति का एक रात्रिभोज मेजबान इस खबर के आधार पर रद्द करते हैं और आखिरकार भाजपा अपनी राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा को हटाने को विवश होती है।

अब नूपुर और नवीन निहत्थे अभिमन्यु जैसे कौरवों की सेना के बीच में खड़े नज़र आते हैं। ये सिलसिला यहीं थमता नहीं है। पड़ोसी देश पाकिस्तान इसे इस्लामोफोबिया का रंग देकर प्रचारित करता है। अन्य इस्लामी संगठन और देश भी इसमें कूद पड़ते हैं। सोशल मीडिया पर भारत और हिंदू विरोधी ट्रेंड चलते हैं। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया को तो मानो भारत पर टूट पड़ने का मौका मिल जाता है। कट्टर इस्लामी संगठन नूपुर शर्मा के सर पर इनाम घोषित कर देते हैं।

वैसे ये स्क्रिप्ट कोई नई नहीं हैं। चार्ली हेब्डो कार्टून के मामले में और एक फ्रांसीसी शिक्षक के मामले में लगभग इसी तरह के कथानक को चित्रित होते हम हाल ही में देख चुके हैं। मूल बात है कि मुस्लिम अपने मजहब के सवाल को किसी व्यवस्था के हाथ में छोड़ कर चुप नहीं रह जाते। वे किसी कोतवाल पर भरोसा करके सो नहीं जाते बल्कि खुद ही मुद्दई, वकील और मुंसिफ बन जाते हैं। अपनी बात मनवाने के लिए जब जैसा बन पड़े वे भीड़तंत्र, राजदंड, राजतंत्र, धनतंत्र, बलतंत्र और मीडियातंत्र का उपयोग करते हैं।

वे गलत-सही के पचड़े में पड़ते ही नहीं। देश कोई भी हो, वे किसी व्यवस्था के अंतर्गत नहीं रहते और न ही उस तंत्र को अपने बारे में किसी मुद्दे को कानूनी/गैरकानूनी तय करने का अधिकार देते है । इस मजहबी खेल में खेल का मैदान, खिलाड़ी, नियम, रेफरी वे खुद ही तय करते हैं। किसी भी कारण से, जब किसी भी मुस्लिमों को लगे तो किसी भी मसले को ईशनिंदा का मुद्दा बनाकर उसे खुद सजा भी दे देते हैं। याद कीजिए, गत दिसंबर में किस तरह पाकिस्तान के सियालकोट में एक श्रीलंकाई नागरिक को ईशनिंदा के नाम पर कुचलकर मार डाला गया था।

अथवा, कैसे पिछली दुर्गा पूजा में बांग्लादेश में सैकड़ों पूजा पंडालों, मंदिरों और प्रतिमाओं को ध्वस्त कर दिया था। या फिर कैसे कमलेश तिवारी को लखनऊ में उनके ही घर में ढाई साल पहले नृशंसता पूर्वक क़त्ल कर दिया गया था। ये अलग बात है कि फिर भी मीडिया का एक बड़ा वर्ग अल्पसंख्यक अधिकारों के नाम पर इन्हें सताए हुए/पीड़ित वर्ग के रूप में प्रचारित कर इस्लामोफोबिया का विमर्श दुनिया पर थोपता जाता है।

हिन्दू समाज इसके विपरीत अपनी आस्था के सवालों को व्यवस्था और तंत्र के हाथों में सौंपकर चैन की नींद सोना चाहता है। उसे लगता है कि संसार भलमनसाहत, व्यवस्था और कायदे कानूनों के हिसाब से चलता है। भाई लोगो, जब इस दुनिया में जब लट्ठ की ही पूजा होती हो तो आप अपनी आस्था के मुद्दों की ठेकेदारी दूसरे हाथों में सौंप कर कैसे चैन की बंसी बजा सकते हैं? कुछ हो जाता है तो फिर आप प्रलाप करते फिरते हैं।

हिन्दू आस्था के प्रतीकों पर निंदापूर्ण टिप्पणियों को लेकर सोशल मीडिया पर इन दिनों खूब रुदन हो रहा है। एक के बाद एक व्हाट्सएप ग्रुप में नूपुर शर्मा प्रकरण की तुलना करते हुए कई पोस्ट साझा की जा रही हैं जो हिन्दू देवी देवताओं के प्रति अशिष्ट, गाली गलौच से भरी और अपमानजनक हैं। इनके बहाने कहीं सरकार को, कहीं हिन्दू संगठनों को, कहीं बीजेपी को तो कहीं मीडिया को उलाहने दिए जा रहे हैं। भारत सरकार की खाड़ी देशों की नीति को लेकर खूब टीका-टिप्पणियाँ भी हो रहीं है।

इस बात से भी तुलना की जा रही है कि कैसे फ़्रांस के राष्ट्रपति इस्लामी कट्टरपंथियों की धमकियों के आगे झुके नहीं थे। भाई, कल तक जिस विदेश नीति की आप तारीफ करते नहीं अघाते थे वो रातोंरात कैसे गलत हो गई? सरकारें, संगठन और तंत्र कुछ मर्यादाओं से बंधे होते है। वे तो आज की जमीनी हकीकत के आधार पर फैसले लेंगे ही। उनके तकाजों को लेकर रोना क्यों? वे धरातल की वास्तविकता से बंधे हो सकते हैं पर बृहत् समाज तो इनसे बंधा हुआ नहीं है। समाज की साझा ताकत ही इन वास्तविकताओं को बदल सकती है।

अपनी आँखे खोलिए। सरकार और तंत्र से इसे बदलने की अपेक्षा करना सिर्फ एक खामख्याली और अपनी जिम्मेदारियों से मुँह मोड़ना है। सोशल मीडिया पर हल्ला मचाने वाले वाचालवीरों से पूछना बनता है कि क्या आप अपनी धार्मिक संवेदनाओं की रक्षा की ‘आउटसोर्सिंग’ किसी संगठन, सरकार और तंत्र को कर चुके हैं? क्या ये आउटसोर्सिंग का मॉडल कहीं भी चलता है? आज तक दुनिया में क्या खुद बिना मरे कोई स्वर्ग गया है क्या?

अपने धर्म को लेकर हिन्दू समाज में भड़क रहे इस रोष, क्रोध और गुस्से को समझा जा सकता है। पर रुदाली बनने और उलाहने देने से काम नहीं चलने वाला। रहीमदास जी ने संभवतः इन्हीं परिस्थितियों के लिए लिखा था :

रहिमन निज मन की बिथामन ही राखो गोय।
सुनि अठिलैहैं लोग सब, बाँटि न लैहैं कोय॥


देवी देवताओं के नित हो रहे अपमान से पैदा हुए इस क्रोध की अग्नि का संचय कीजिए। इस दर्द को झेलिये और आत्मसात कीजिये। इस ज्वाला में स्वयं को भस्म करने की ज़रूरत नहीं है। देश और अपने दूरगामी हितों का ध्यान करिये। इस समय भावनाओं में रहकर प्रतिक्रिया से किसी का भला नहीं होगा बल्कि ये देश के लिए रणनीतिक सोच विकसित करने का समय है। समझ लीजिए, इस विश्व में सिर्फ शक्ति की पूजा होती है। सिर्फ नवरात्रि में शक्ति की उपासना करके बाकी समय इसकी ठेकेदारी किसी और को सौपने का समय अब लद गया।

हर तरह की शक्ति का संधान, संचय, संवर्धन और उसका बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग ही एक लोकतांत्रिक और सर्व समावेशी भारत के सुरक्षित भविष्य की गारंटी दे सकता है। दुनिया का ये नक्कारखाना किसी नियम, विधान और कानून के साजों से सजाया हुआ नहीं है बल्कि इसकी शोभा है शक्तिबल। इसलिए रोते रहकर किसी और की तरफ ताकने से बेहतर है शक्ति का संधान, अन्यथा इस नक्कारखाने में आप अपनी तूती को खुद ही बजायेंगे और खुद ही सुनेंगे। इसे सुनने कोई नहीं आने वाला, ये पक्का है।

TV पर जब गिलानी को प्रोफेसर कह रहा था एंकर, नूपुर शर्मा ने कहा था आतंकी: डंके की चोट पर सच कहने वाला वीडियो वायरल

हाल ही में पैगम्बर मुहम्मद पर कथित टिप्पणी को लेकर बीजेपी ने प्रवक्ता नूपुर शर्मा को पार्टी की सदस्यता से बाहर कर दिया। वहीं उसके बाद से ही सोशल मीडिया पर शर्मा के समर्थन की बाढ़ आई हुई है। लोग उनके सच और साहस को यह कहते हुए सराह रहे हैं कि जो बोला है वह सच खुद उन्हीं की पाक किताबों में लिखा है। इसी बीच टाइम्स नाउ पर अर्नब गोस्वामी के साथ डिबेट का उनका एक पुराना वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने SAR गिलानी को आतंकी कहा था और एक दिन पहले ही DU के एक सेमिनार में उनपर थूके जाने की माफ़ी माँगने से इनकार कर दिया था।

बता दें कि जहाँ रविवार (5 जून 2022) को बीजेपी ने नूपुर शर्मा को पार्टी की सदस्यता से बाहर करते हुए जारी प्रेस रिलीज में कहा कि पार्टी सभी धर्मों का सम्मान करती है और यह उस विचारधारा के खिलाफ है, जो किसी भी संप्रदाय या धर्म का अपमान या फिर नीचा दिखाती है। वहीं यह वही नूपुर शर्मा है जो 2008 में ही दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यक्ष का चुनाव जीतने के बाद से ही अपने तीखे तेवरों के लिए जानी जाती रही हैं।

वायरल वीडियो में भी उनकी सच बोलने की ताकत को साफ देखा जा सकता है। जब वह ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद्) को बीजेपी से अलग करते हुए RSS से सीधे जोड़ती है। वहीं गिलानी को भी ‘आतंकी’ कहकर मुहतोड़ जवाब देती हैं।

क्या है 2008 के वायरल वीडियो का मामला

बता दें कि 2008 में DUSU में अपने अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान, नूपुर शर्मा ने DU के प्रोफेसर S.A.R गिलानी के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के लिए खूब सुर्खियाँ बटोरीं थी। डीयू कला संकाय द्वारा आयोजित एक सेमिनार के दौरान, SAR गिलानी को सांप्रदायिकता पर बोलने के लिए बुलाया गया था। तब एबीवीपी के छात्रों के एक समूह ने उस कार्यक्रम का विरोध किया था। यहाँ तक कि मंच पर जाकर एक छात्र ने गिलानी पर कथित तौर पर थूक भी दिया था। तब ABVP ने यह आरोप लगाया था कि गिलानी ‘हिंदुत्व विरोधी’ पर्चे बाँट रहा था।

बाद में, अर्नब गोस्वामी के साथ टाइम्स नाउ की डिबेट में नूपुर शर्मा ने न सिर्फ एबीवीपी का बचाव किया बल्कि गिलानी को आतंकवादी कहते हुए कहा था कि ‘आतंकवादी’ को आमंत्रित नहीं किया जाना चाहिए था। हमने शांति से विरोध किया। मैंने विनम्रता से उनसे कार्यक्रम स्थल छोड़ने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। वहीं तस्वीरों में वह अपनी बात पूरी सच्चाई के साथ रखते हुए गिलानी को डाँटते हुए भी दिखीं।

नूपुर शर्मा ने तब स्पष्ट कहा था, “2003 के संसद हमले के मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा बरी किए गए गिलानी को संगोष्ठी के लिए आमंत्रित नहीं किया जाना चाहिए था। गिलानी एक आतंकवादी है और मैंने विनम्रता से उससे कार्यक्रम स्थल से चले जाने का अनुरोध किया था। लेकिन उसने मना कर दिया। और तब हमें विरोध के आना पड़ा।”

हालाँकि, टेलीविजन बहस में नूपुर शर्मा ने स्पष्ट रूप से इनकार किया था कि गिलानी पर थूकने वाला छात्र एबीवीपी का था, लेकिन बहस के दौरान गुस्से में उन्होंने कहा था, “पूरे देश को गिलानी पर थूकना चाहिए।”

इस वीडियो को देखकर लगता है कि नूपुर शर्मा आज से नहीं बल्कि वह उस समय के अन्य छात्र नेताओं से बिलकुल अलग थीं। वह तब भी सत्य के प्रति उतनी ही मुखर थीं।

आज के समय में भी जो मंच कथित ईशनिंदा के विवाद का कारण बना वह भी टाइम्स नाउ का ही डिबेट शो था। जहाँ उन्होंने लगातार भगवान शिव और ज्ञानवापी में पाए गए ‘शिवलिंग’ का फव्वारा कहकर मजाक उड़ाने और किसी भी तरह से हिन्दू धर्म को अपमानित करने से आहत होकर सवाल करते हुए कहा था यदि कोई आपके मजहबी मसलों का मजाक बनाए तो।

वहीं हाल ही में ऑपइंडिया के साथ एक इंटरव्यू में नूपुर शर्मा ने कहा था कि उन्होंने पैगंबर मुहम्मद पर कोई अपनी राय नहीं दी थी, उन्होंने जो कुछ भी कहा, उसका उल्लेख उनकी अपनी हदीस में पहले से ही है। शिवलिंग पर टिप्पणियों से नाराज होने के बाद, मैंने केवल इतना ही पूछा था कि क्या उनको भी उनकी मजहबी आस्था का मजाक उड़ाना शुरू कर देना चाहिए, जैसे वे हमारा मजाक उड़ाते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर कोई स्थापित इस्लामी विद्वान उसे ठीक करने के लिए आगे आएगा तो उन्हें अपनी टिप्पणी वापस लेने में खुशी होगी। उन्होंने कहा था, “अगर मैं तथ्यात्मक रूप से गलत हूँ, तो मुझे अपने बयान वापस लेने में खुशी होगी।”

नूपुर शर्मा के खिलाफ धमकी और अब समन का सिलसिला

गौरतलब है कि नूपुर शर्मा को उस डिबेट वीडियो के क्लिप के वायरल होने के बाद (27 मई 2022) से ही मौत की धमकियाँ मिलनी शुरू हो गईं थीं। जिसे ध्यान में रखते हुए आज दिल्ली पुलिस ने उन्हें सुरक्षा भी प्रदान कर दी है। वहींइस बीच कई राज्यों ने उन्हें पूछताछ के लिए समन भी किया है।

बता दें कि टाइम्स नाउ की हालिया डिबेट में उन्होंने कहा था कि हिन्दू धर्म की आस्थाओं का मजाक उड़ाने पर लोग इस्लामी मान्यताओं का भी मजाक उड़ा सकते हैं। वहीं इस पूरे बहस की एक छोटी सी क्लिप निकाल कर ऑल्ट न्यूज़ के कथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबेर ने वायरल कर दी थी। जिसके बाद थोड़ी ही देर में नूपुर शर्मा को मौत और बलात्कार की धमकियाँ मिलनी शुरू हो गई थी। इस मामले में लोगों को नूपुर के खिलाफ भड़काने में मोहम्मद जुबेर का साथ राणा अयूब ने भी दिया। हालाँकि मोहम्मद जुबैर के खिलाफ अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि वह लगातार पूरे वैश्विक मुस्लिम उम्माह को भड़काने में लगा है।

रिपोर्ट के अनुसार, नूपुर शर्मा के खिलाफ तीन प्रमुख FIR दर्ज की गई हैं। पहली FIR 29 मई को संदिग्ध इस्लामिक संगठन रजा अकादमी की शिकायत के आधार पर मुंबई में दर्ज की गई थी। जिस पर उन्हें अभी समन किया गया है। दूसरी FIR उनके खिलाफ मुंब्रा के एक मोहम्मद गुरफान की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी। तीसरी FIR हैदराबाद में दर्ज की गई थी और इसे एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया गया था।

वहीं जानकारी के लिए बता दें कि नूपुर शर्मा को न केवल भारत बल्कि पाकिस्तान से भी जान से मारने की धमकी मिली है। उनके खिलाफ लाखों-करोड़ों के ईनाम की भी घोषणा की गई है। वहीं खाड़ी और OIC के मुस्लिम देशों ने भी भारत से इस मसले पर माफ़ी की माँग की है। जिसका भारत ने आतंरिक मामलों में न घुसने की सलाह के साथ विरोध किया है।