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पुलिस वालों को जान से मारने के लिए चलाए बम-पत्थर, बाइक में लगाई गई आग: प्रयागराज में कट्टरपंथियों ने ऐसे मचाया आतंक

जुमे की नमाज के बाद प्रयागराज में भड़की हिंसा मामले में करेली थाना में 11 जून को दर्ज एफआईआर से घटना संबंधी कई खुलासे हुए हैं। 11 लोगों के विरुद्ध एक प्राथमिकी उप निरीक्षक अरविंद कुमार ने दर्ज करवाई है। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन उनकी ड्यूटी शौकत अली तिराहा व आसपास के क्षेत्रों में लगाई गई थी। लेकिन जुमे की नमाज खत्म होते ही अचानक 3 बजे असगरी तिराहे से भीड़ नारेबाजी करते हुए शौकत अली तिराहे पर आ गई और उपद्रव मचना शुरू हुआ।

एफआईआर में कहा गया कि भी़ड़ जब तिराहे पर पहुँची तो पुलिस ने उन्हें रोका, मगर उनके हाथों में पुलिस को मारने के लिए बम-पत्थर थे। प्राथमिकी के अनुसार, उपद्रवियों ने गाली-गलौच के बाद क्षेत्र में हिंसा को भड़काया था और पुलिस की काफी कोशिशों के बावजूद उपद्रवी हिंसा कर रहे थे। इस दौरान धक्का-मुक्की हुई, पत्थर चलाए गए, नाबालिग बच्चों को उकसाकर हिंसा में लाया गया और उनसे भी पत्थरबाजी करवाई गई। घटना में शौकत अली तिराहे पर खड़ी मोटरबाइक को भी आग में झोंका गया व पुलिस वालों को मारने का भी प्रयास हुआ।

अरविंद कुमार ने बताया कि उन्हें इस हिंसा की सूचना फोन के जरिए मिली। जिसके बाद पहले पुलिस ने उन उपद्रवी को समझाने का प्रयास किया, शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन जब उपद्रवियों की ओर से कोई सुनवाई नहीं हुई तो आँसू गैस के गोले छोड़े गए व पुलिस की ओर से भी बल का प्रयोग किया गया।

प्राथमिकी में फरहान, शमशाद, अयूब, अली रिजवी, सुफियान, फैजान, इमरान, नाजिम, बदरुद्दीन, फैज खान, इफ्तखार को नामजद किया गया है व 250 से ज्यादा अज्ञात लोगों पर आईपीसी की धारा 143, 144, 145, 147, 148, 149, 153-ए, 153 बी, 295-ए, 307, 332, 353, 435, 427, 504, 505 (2), 506, 120 बी के तहत केस दर्ज हुआ है। इसके अलावा आरोपितों के ऊपर विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 908 की धारा 4, 5; आपराधिक कानून (संशोधन अधिनियम 1932) की धारा 7; किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 83; सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की धारा 3,4 लगाई गई है।

5000 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शुक्रवार (10 जून, 2022) को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा के मामले में यूपी पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। आज प्रयागराज के SSP अजय कुमार ने घटना की जानकारी देते हुए बताया था कि जावेद अहमद नाम का एक मास्टरमाइंड गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा कई और मास्टरमाइंड हो सकते हैं, उनके बारे में पूछताछ की जा रही है और आरोपितों के ऊपर 29 अहम धाराओं के तहत केस दर्ज कर गैंगस्टर एक्ट और एनएसए के तहत कार्रवाई होगी। 70 नामजद और 5000 अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

‘भारत में भी नहीं काम कर रहा राइट साइड’: जस्टिन बीबर की बीमारी पर मुनव्वर फारूकी की ‘कॉमेडी’, जुमे के दंगों पर चुप्पी

स्टैण्डअप कॉमेडिन मुनव्वर फारुकी (Munawar Faruqui) हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने और दक्षिणपंथियों से नफरत के लिए कुख्यात रहा है। इसी क्रम में इस बार उसने हॉलीवुड के फेमस पॉप सिंगर जस्टिन बीबर (Justin Bieber) के चेहरे के पैरालाइज होने का मजाक उड़ाया है। इसके साथ ही उसने इस ट्वीट के बहाने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। फारुकी ने अप्रत्यक्ष तरीके से सरकार पर सही ढंग से काम नहीं करने का आरोप लगाया।

पॉप गायक जस्टिन बीबर को पैरालिसिस वाली खतरनाक बीमारी होने की खबर को लेकर फारुकी ने ट्वीट किया। इस्लामी कट्टरपंथ की मानसिकता से सने फारुकी ने लिखा, “प्रिय जस्टिन बीबर मैं समझ सकता हूँ, यद्यपि भारत में भी राइट साइड अच्छे से काम नहीं कर रहा है।” जानने वाली बात ये भी है कि जुमे के दिन हुए देश भर के कई शहरों के दंगों पर मुनव्वर फारूकी ने एकदम चुप्पी साध रखी है।

मुनव्वर फारूकी ने जस्टिन बीबर की बीमारी पर किया संवेदनहीन ट्वीट

मुनव्वर फारुकी के इस ट्वीट से उसकी मानसिकता का पता चलता है। जस्टिन बीबर के प्रति अपनी संवेदना जताने के बहाने न केवल उनका मजाक उड़ा रहा है, बल्कि वो सरकार पर भी निशाना साधने की कोशिश कर रहा है।

गौरतलब है कि फेमस पॉप सिंगर जस्टिन बीबर (Justin Bieber) को रामसे हंट सिंड्रोम ( Ramsay Hunt Syndrome) नाम की एक दुर्लभ बीमारी हो गई है। इसके चलते उनका आधा चेहरा पैरालाइज हो गया है। इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर बीबर ने बताया कि वे एक तरफ की आँख झपका नहीं सकते हैं। एक साइड से स्माइल भी नहीं कर पा रहे हैं और उनकी नाक भी नहीं हिल रही है।

वीडियो में वह कहते हैं, “इस समय मैं स्टेज पर परफॉर्म नहीं कर सकता, क्योंकि मेरा शरीर काम नहीं कर रहा है। यह वायरस बेहद गंभीर है, जैसा कि आप मेरे शरीर को देख सकते हैं। डॉक्टर्स ने भी मुझे पूरी तरह से आराम करने के लिए कहा है। मैं उम्मीद कर रहा हूँ कि आप लोग समझेंगे और मैं यह समय आराम करने और रिलैक्स करने में लगाने वाला हूँ, ताकि मैं 100 प्रतिशत ठीक होकर वापस लौटूँ और वो करूँ, जो करने के लिए मैं पैदा हुआ हूँ।”

रामसे हंट सिंड्रोम ऐसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो कि वैरिकाला-जोस्टर वायरस के कारण होती है। इस बीमारी में कान के चारों ओर त्वचा पर चकत्ते के साथ ही चेहरे पर लकवा मार जाता है। ये वायरस बच्चों में चिकनपॉक्स और वयस्कों में दाद के कारण बनता है।

आगजनी को फूल बरसाना कह देंगे, नैरेटिव उनके हाथों में है: महादेव का अपमान चर्चा से गायब, एक बयान पर देश भर में दंगे

नैरेटिव, आज के अर्थ में कह लीजिए कि चर्चा का एंगल तय करना। दुनिया भर में भले ही आग लग जाए, लेकिन अगर 4 लोगों के पास नैरेटिव सेट करने की ताकत है तो वो ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि कोई इस आग की चर्चा ही न करे। या फिर वो ये भी फैला सकते हैं कि ये आग नहीं, पानी है। नैरेटिव की ताकत ये होती है कि अपवाद सामान्य लगने लगता है और जो रोज होता है, उसे अपवाद की श्रेणी में डाल दिया जाता है। हमने ‘पीके (2014)’ जैसी फिल्मों में महादेव के अपमान को बर्दाश्त नहीं किया होता तो आज ऐसी नौबत ही नहीं आती।

ताज़ा मामला देख लीजिए। नूपुर शर्मा वाला मामला देख लीजिए। चर्चा इस बात पर होनी चाहिए थी कि नूपुर शर्मा ने जो कहा वो सही है या गलत, वो इस्लाम की पवित्र पुस्तकों में लिखा है या नहीं। चर्चा इस पर होनी चाहिए थी कि जाकिर नाइक ने अगर यही बात कही तो उसकी बात पर हंगामा क्यों नहीं हुआ। चर्चा इस पर होनी चाहिए थी कि नूपुर शर्मा ने शिवलिंग का मजाक बनाए जाने वाले बयानों के जवाब में ऐसा कहा। चर्चा का विषय ये होना चाहिए था कि उनके ऐसा कहने के पहले महादेव को लोगों ने क्या-क्या कहा।

लेकिन, चर्चा इस पर होने लगी कि नूपुर शर्मा ने पैगंबर मुहम्मद का अपमान कर दिया। उन्हें पहले ही दोषी ठहरा दिया गया, चैनल को वीडियो हटाने पर मजबूर करते हुए उससे स्पष्टीकरण जारी करने करवाया गया, मुस्लिम मुल्कों के सरकारों पर दबाव डाल कर आपत्तियाँ जारी करवाई गईं, क़तर जैसे मुल्कों ने भारतीय राजदूत को तलब किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब करने वालों के दबाव में भाजपा ने ‘गुडविल’ दिखाते हुए अपने दो प्रवक्ताओं को निलंबित भी कर दिया।

मामला यहाँ थम जाना चाहिए था। यद्यपि इससे मुस्लिम कट्टरपंथियों का मनोबल बढ़ा कि वो इस्लामी मुल्कों और इस्लामी मुल्कों के संगठनों से दबाव डलवा कर भारत में कुछ भी करा सकते हैं, लेकिन फिर भी मामला यहाँ रुक जाना चाहिए था। नूपुर शर्मा के कथन में कितने प्रतिशत की सच्चाई है, डर से इसकी चर्चा नहीं हुई – लेकिन, फिर भी इस कार्रवाई के बाद सब ख़त्म हो जाना चाहिए था। शिवलिंग का मजाक बनाने वालों पर कहीं कोई ,लेकिन हिन्दुओं के ही ज़हर का घूँट पीने के बाद नूपुर शर्मा मामले को थम जाना चाहिए था।

लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। प्रयागराज में नाबालिगों को आगे कर के दंगे हुए। राँची में पुलिस पर हमला किया गया। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जुमे की नमाज के बाद हिंसा हुई। नवीं मुंबई में बुर्कानशीं महिलाएँ सड़क पर उतरीं। आम लोग निशाना बने। पुलिसकर्मी घायल हुए। जम्मू कश्मीर में युट्यूबर ने VFX के माध्यम से नूपुर शर्मा का सिर कलम करने का वीडियो भी दिखा दिया। AIMIM सांसद ने उन्हें फाँसी दिए जाने की बात कह डाली।

नैरेटिव का खेल देखिए। शिवलिंग के अपमान वाले और भगवान महादेव पर अश्लील टिप्पणी वाले सैकड़ों बयान और मीम्स शेयर करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और ये चर्चा का विषय तक नहीं बना, लेकिन मुहम्मद जुबैर के एक वीडियो शेयर करने से पूरे भारत में दंगे हुए और इस्लामी मुल्कों ने हमारी सरकार पर दबाव बनाया। नैरेटिव सेट करने वालों ने नूपुर शर्मा के कथन की सत्यता पर चर्चे को गौण कर दिया। दंगों को विरोध प्रदर्शन कह दिया, हिंसा को शांतिपूर्ण मार्च कह दिया और पत्थरबाजी करने वालों पर चुप्पी साध ली।

जबकि, होना क्या चाहिए था? दुनिया भर में ये चर्चा होनी चाहिए थी कि राँची में थाना प्रभारी का सिर फोड़ने वाले कौन लोग थे? चर्चा ये होनी चाहिए थी कि अपनी महिलाओं-बच्चों को हिंसा में कौन आगे कर रहा है? चर्चा ये होनी चाहिए थी कि मंदिर में पूजा के बाद लोग प्रसाद लेकर निकलते हैं, लेकिन मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद लोग हाथों में पत्थर लिए बाहर क्यों आते हैं? बहस का बिंदु ये होना चाहिए था कि नूपुर शर्मा के पुतले को दरगाह के पास फाँसी के फंदे पर लटका कर तालिबानी मानसिकता का खुलेआम प्रदर्शन भारत जैसे लोकतंत्र में क्या स्थान रखता है।

चर्चा इस पर होनी चाहिए थी कि नूपुर शर्मा की तस्वीर पर पेशाब करने वाले बच्चों के परिवार वाले कौन हैं। बहस का विषय ये होना चाहिए था कि एक डच सांसद को नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर हत्या की धमकियाँ मिलने लगती हैं। मीडिया में ख़बरें ये होनी चाहिए थीं कि नवीन जिंदल को सिर कलम करने की धमकियों के कारण परिवार सहित दिल्ली से पलायन को मजबूर होना पड़ा। बातचीत इस पर होनी चाहिए थी कि नवीन जिंदल को उनके पूरे परिवार का सिर कलम करने की धमकी देने वाले कौन लोग हैं।

उदाहरण के लिए नैरेटिव की ताकत देखिए। सबा नकवी शिवलिंग के खिलाफ बयान देती हैं। उन पर FIR दर्ज होती है तो महिला पत्रकारों का संगठन एक लंबा-चौड़ा बयान जारी कर के इसे ‘महिला’ और ‘मीडिया’ पर हमले का रूप देता है। ये अलग बात है कि इस संस्था की ही कई पत्रकार इसके विरोध में उतर आती हैं। लेकिन, कहीं भी बयान में शिवलिंग के अपमान की चर्चा नहीं की जाती। इसे गौण कर दिया जाता है। ये नैरेटिव में फिट नहीं बैठता।

लेकिन, नूपुर शर्मा के मामले में यही महिला होने वाली बात की चर्चा तक नहीं की जाती। कुछ मुस्लिम बच्चे हँसी-ठहाके लगाते हुए अपने प्राइवेट पार्ट्स बाहर निकाल कर एक महिला की तस्वीर पर पेशाब करते हैं, लेकिन नैरेटिव में फिट न बैठने के कारण इस पर चर्चा नहीं होती। ऐसा दर्जनों बार हुआ है। अर्णब गोस्वामी को महाराष्ट्र पुलिस केवल आलोचना के लिए गिरफ्तार कर ले तो एडिटर्स गिल्ड चूँ तक नहीं करता, बंगाल में पत्रकार मारे जाते हैं तो आह नहीं निकलती, लेकिन प्रोपेगंडा गिरोह के पत्रकार झूठ फैलाएँ और एक FIR भी दर्ज हो जाए तो लंबा-चौड़ा बयान आ जाता है।

जैसे आज किसी के पुतले को फाँसी पर लटकाना आम हुआ है, कल को अफगानिस्तान की तरह हिन्दुओं को लटकाना आम हो जाएगा। भारत के इतिहास में ऐसा हो चुका है। हिन्दुओं के कटे हुए सिरों से पहाड़ बनाए जा चुके हैं, 2000 भालों पर सिखों के कटे हुए सिर लेकर मुग़ल बादशाह को पेश किया जा चुका है, हिन्दू महिलाओं को थोक में सेक्स स्लेव बनाया जा चुका है और ये सब कुछ इस्लामी शासनकाल में ही हुआ है। फिर इस्लामी भीड़ हावी हो रही है, इसकी कोई गारंटी तो है नहीं कि ऐसा नहीं होगा।

हिन्दुओं को नैरेटिव सेट करने की ताकत रखनी होगी। एक घटना को अपने एंगल से पेश करने के लिए 10 विदेशी भाषाओं में अनुवाद कर के ट्विटर ट्रेंड चलाना होगा। हर देश के राजनेताओं को टैग कर के सही स्थिति बतानी होगी। प्रोपेगेंडा फैला रहे विदेशी संगठनों को तस्वीरों-वीडियोज के जरिए चुप कराना होगा। जब झूठ 100 बार बोलने से सच प्रतीत हो सकता है तो सच 10 बार बोलने से ताकतवर सच क्यों नहीं बनेगा? नैरेटिव सेट कीजिए।

दंगों की बात नहीं हो रही अब भी, जहाँ दंगाइयों पर पुलिस ने कार्रवाई की है उसकी बात हो रही, क्योंकि नैरेटिव को यही चाहिए। उनका नैरेटिव कहता है कि 100 पत्थर अगर कोई इस्लामी कट्टरपंथी मारता है तो उसकी बात मत करो, लेकिन उसे शांत करने के लिए पुलिस एक लाठी उसे लगा दे तो इसको पूरी दुनिया में फैला दो। सीजे वर्लमैन जैसे लोग यही कर रहे। ऐसे ही झूठ फैलता है। ये किसे नहीं पता कि दंगाइयों को शांत करने के लिए पुलिस बल प्रयोग करने को मजबूर होती है, लेकिन ये ऐसा दबाव बनाने की क्षमता रखते हैं कि अगली बार से पुलिस उनका फूल-मालाओं से स्वागत करने लगे।

तिरुपति बालाजी मंदिर में चप्पल में घूमती दिखीं ‘लेडी सुपरस्टार’, शादी के बाद कराया फोटोशूट: विवाद के बाद पति ने माँगी माफ़ी

साउथ इंडियन फिल्मों की ‘लेडी सुपरस्टार’ नयनतारा (Nayantara) ने हाल ही में अपने ब्वॉयफ्रेंड विग्नेश शिवन से शादी की। शादी के बाद शुक्रवार (10 जून 2022) को वो पति के साथ आंध्र प्रदेश में तिरुपति मंदिर (Tirupati Temple) में भगवान बालाजी का आशीर्वाद लेने पहुँची। हालाँकि, इस दौरान माडा में उन्हें चप्पल पहनकर पति के साथ टहलते देखा गया। इससे अब विवाद खड़ा हो गया है।

सोशल मीडिया पर नयनतारा की तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें वो पति शिवन के साथ घूम रहीं थीं और उन्होंने चप्पल पहनी हुई थी। वीडियो वायरल होने के बाद उनकी जमकर आलोचना की जा रही है। आरोप है कि ऐसा करके उन्होंने भक्तों की भावनाओं को आहत किया है।

इस मामले में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड के मुख्य सतर्कता सुरक्षा अधिकारी नरसिम्हा किशोर ने कहा कि एक्ट्रेस नयनतारा माडा स्ट्रीट पर पति के साथ चप्पलों में घूमती देखी गईं हैं। उन्होंने कहा कि नव विवाहित जोड़े ने माडा स्ट्रीट में जूते पहनकर फोटो खिंचवाए, जो कि मंदिर के नियमों के खिलाफ है। नरसिम्हा ने आगे कहा, “वह माडा स्ट्रीट्स में फुटवियर के साथ घूमती नजर आ रही हैं। हमारी सिक्योरिटी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। हमने सीसीटीवी में भी देखा है कि उन्होंने वहाँ एक फोटोशूट किया था।”

फोटो साभार: बॉलीवुड शादी.कॉम

मंदिर के अधिकारी ने कहा, “हम नयनतारा को नोटिस दे रहे हैं। हमने उनसे बात भी की है और वह एक वीडियो जारी कर भगवान बालाजी, टीटीडी और तीर्थयात्रियों से माफी माँगना चाहती हैं। हालाँकि, हम उन्हें नोटिस देने जा रहे हैं।”

गौरतलब है कि नयनतारा ने अपने प्यार निर्देशक विग्नेश शिवन से 9 जून, 2022 को दक्षिण भारतीय हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार महाबलीपुरम में शादी की थी। यह जोड़ा अपने-अपने परिधानों में बहुत ही खूबसूरत लग रहा था। नयनतारा ने एक सिंदूरी रंग की साड़ी पहनी थी और विग्नेश ने एक सिग्नेचर वेशती, कुर्ता और शॉल पहना था। उनके पति ने इस विवाद के बाद माफीनामा जारी किया है।

वहीं अगर हम नयनतारा के वर्क फ्रंट की बात करें तो वे अपनी अगली फिल्म ‘जवान’ में शाहरुख खान के साथ दिखाई देंगी।

‘कु&*% की औलाद, तू जल्द मारा जाएगा’ : नुपूर शर्मा का समर्थन करने वाले डच सांसद को कट्टरपंथियों की धमकी, कहा- गर्दन काट मीनार पर लटकाएँगे

पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी करने के मामले पर नुपूर शर्मा के साथ खड़े लोगों में एक सबसे बड़ा नाम डच सांसद रॉबर्ट गीर्ट वाइल्डर्स का है। गीर्ट ने बीते दिनों ट्वीट करके खुलेआम नुपूर शर्मा के बयान पर उन्हें समर्थन दिया। मगर, अब इसी समर्थन के कारण उन्हें धमकियाँ आने लगी हैं। संदेशों में उन्हें कहा गया है कि उनके खिलाफ फौज तैयार कर ली गई है जो जल्द ही उनका सिर तन से जुदा करेगी।

इन धमकियों की जानकारी गीर्ट वाइल्डर्स ने अपने ट्वीट में दी। उन्होंने लिखा, “…तो बहादुर नुपूर शर्मा को समर्थन देने के बदले मुझे ये सब मिल रहा है। सैंकड़ों मौत की धमकियाँ। ये सब मुझे और भी ज्यादा गर्व महसूस कराता है कि मैंने नुपूर को समर्थन दिया। शैतान कभी नहीं जीतेगा। कभी नहीं।” इस ट्वीट में गीर्ट वाइल्डर्स ने एक बार फिर #Isupportnupursharma टैग का प्रयोग किया और साथ में कट्टरपंथियों की धमकियों के कुछ स्क्रीनशॉट भी लगाए।

एक स्क्रीनशॉट में कट्टरपंथी बंदूक के साथ सेल्फी लेता दिखा और कहा, “कु&*% की औलाद तुझे जल्दी मारा जाएगा। हम तुम्हें लोगों में डर बनाने के लिए वो चिह्न बनाएँगे जिसे लोग याद रखेंगे।”

एक धमकी में लिखा है, “इंशाल्लाह, एक दिन आएगा जब मैं अपनी कतार से तुम्हारा सिर काटूँगा और पाकिस्तान की मीनार पर टाँग दूँगा, तब हम नारेबाजी करेंगे। मुमताज कादरी चला गया है लेकिन उसकी बंदूक अब भी यही हैं। तुम्हारे पास ज्यादा दिन नहीं बचे हैं।”

एक कट्टरपंथी ने बंदूक की फोटो शेयर कर लिखा, “मैं आ रहा हूँ मा*&^%”

अगले कट्टरपंथी ने लिखा, “अपनी मौत के लिए तैयार हो जा शैतान, तू जल्द ही हमारे गाजी से मिलेगा और गर्दन अलग होगी तब परिणामों को देखेगा। फौजें तैयार हो गई हैं और तुझे मारने के लिए रास्ते पर हैं।”

बता दें कि पैगंबर मोहम्मद से जुड़े मामलों में अपना पक्ष साफ रखने वाले हॉलैंड सांसद गीर्ट वाइल्डर्स ने भारत में फैलाई गई हिंसा को लेकर भी इससे पहले बयान दिया था। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “केवल अपराधी और आतंकवादी अपनी धार्मिक असहिष्णुता और घृणा व्यक्त करने के लिए सड़क पर हिंसा का उपयोग करते हैं। असहिष्णु के प्रति सहिष्णु होना बंद करो। हम जीवन को संजोते हैं, वे मृत्यु को संजोते हैं।” उन्होंने नूपुर शर्मा को समर्थन देने का आह्वान करते हुए कहा था कि अभिव्यक्ति की आजादी की कीमत होनी चाहिए। वह बोले थे, “हम आजादी का समर्थन करते हैं। साहसी नूपुर शर्मा हमारी ताकत की प्रतीक हैं। उसका समर्थन करो!”

शिवलिंग अपमान मामला: सबा नकवी के समर्थन में महिला पत्रकारों के संगठन ने जारी किया बयान, विरोध में उतरीं संस्था की ही मेंबर्स

देश में ईशनिंदा को लेकर चल रहे विवाद के बीच भारतीय महिला प्रेस कोर की सदस्य कई महिला पत्रकारों ने विवादित पत्रकार सबा नकवी का समर्थन करने से इनकार कर दिया है। इन महिला पत्रकारों का कहना है कि वे भी IWPC की सदस्य हैं, लेकिन कोर ने उनसे सलाह लिए बिना ही ये बयान जारी किया है और वे सबा द्वारा हिंदू धर्म का अपमान करने के कृत्य का समर्थन नहीं करती हैं।

शुक्रवार (10 जून 2022) को भारतीय महिला प्रेस कॉर्प्स ने एक बयान जारी कर दिल्ली पुलिस द्वारा सबा नकवी के खिलाफ अशांति पैदा करने के इरादे से झूठी सूचना को बढ़ावा देने के आरोप में दर्ज किए गए केस की निंदा की थी। दरअसल, दिल्ली पुलिस ने नूपुर शर्मा, नवीन कुमार जिंदल, मौलाना नदीम, असदुद्दीन ओवैसी, यति नरसिंहानंद सरस्वती और कई अन्य सहित हिंदू धर्म और इस्लाम पर विभिन्न टिप्पणियाँ करने के मामले में केस दर्ज किया है। इन्हीं लोगों में से एक हैं सबा नकवी।

दिल्ली पुलिस द्वारा केस दर्ज करने पर IWPC ने कहा था, “भारतीय महिला प्रेस कॉर्प्स स्तब्ध है। हमारी मेंबर और वरिष्ठ पत्रकार सबा नकवी के खिलाफ उनके पोस्ट के लिए केस दर्ज करने के मनमाने तरीके से चिंतित है। ऐसा लगता है कि सेलेक्टिव तरीके से लोगों को उनके विचारों के लिए टार्गेट किया जा रहा है। ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। समय-समय पर हमने देखा है कि सब्जेक्टिव आधार पर लोगों का अनुचित उत्पीड़न किया जाता है। हम उम्मीद करते हैं कि कानूनी व्यवस्थाएँ और अधिक विवेकपूर्ण होगी। हम दिल्ली पुलिस की एफआईआर को वापस लेने और अदालत में इसे रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने की माँग करते हैं।”

IWPC के बयान को सबा नकवी ने ट्विटर पर पोस्ट किया।

लेकिन अब संगठन के ही कई मेंबरों ने इससे दूरी बनानी शुरू कर दी है। इसी क्रम में पत्रकार आशा खोसा ने ट्वीट किया कि वह IWPC प्रबंधन समिति की एक निर्वाचित सदस्य हैं और वो सबा नकवी के इस बयान का समर्थन नहीं करती हैं। उन्होंने ट्वीट में हैशटैग #NotInMyName जोड़ते हुए कहा, “जबकि सबा एक महत्वपूर्ण सहयोगी हैं मैं भगवान शिव पर उनके घृणित बयानों का समर्थन नहीं करती और अपमानित महसूस करती हूँ।”

इसी तरह से एक अन्य पत्रकार चित्रा नारायणन ने कहा कि सबा के खिलाफ केस दर्ज करने की जरूरत नहीं थी, लेकिन एक सदस्य के रूप में बिनी किसी सलाह या चर्चा के यह बयान जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि एक पत्रकार निकाय के रूप में IWPC को सभी सदस्यों से समान रूप से अरुचिकर/आग लगाने वाले कंटेंट पोस्ट न करने का अनुरोध करना चाहिए।

वहीं टाइम्स ऑफ इंडिया की पत्रकार भारती जैन ने ट्वीट किया कि वह भी इस बयान का समर्थन नहीं करती हैं। उन्होंने लिखा, “कानून को अपना काम करने दें। #NotInMyName।”

IWPC की ही एक अन्य निर्वाचित सदस्य मोना पार्थसारथी ने भी अपने आपको इस बयान से अलग कर लिया और कहा कि उन्होंने कभी भी इस बयान का समर्थन नहीं किया।

टीओआई की लक्ष्मी अय्यर, एएनआई की पायल मेहता, अदिति कपूर और कई अन्य सहित कई अन्य महिला पत्रकारों ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त किए। IWPC की सदस्य लेखक और पत्रकार संध्या जैन ने बताया कि ‘एकतरफा बयान’ से कितनी महिला पत्रकार परेशान हैं। उन्होंने कहा कि यह बिना किसी जानकारी या चर्चा के जारी किया गया था। कुछ IWPC मेंबर्स ने सबा नकवी के हिंदूफोबिक ट्वीट की निंदा की और खुद को उनके बयान से अलग कर लिया।

उल्लेखनीय है कि सबा नकवी ने ज्ञानवापी विवाति ढाँचे के अंदर मिले शिवलिंग का मजाक उड़ाते हुए यह साबित करने की कोशिश की कि वो एक फव्वारा है न कि शिवलिंग। इसी को लेकर उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। उन्होंने 18 मई 2022 को भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की एक तस्वीर साझा की थी, जिसके कैप्शन में लिखा था, “भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में खोजा गया विशाल शिवलिंग।” विवाद बढ़ने पर कुतर्क दिया कि ये उन्हें किसी ने व्हाट्सएप पर फॉरवर्ड किया था। बाद में नकवी ने अपनी पोस्ट को डिलीट कर दिया था।

इस मामले में नकवी के खिलाफ एफआईआर पर IWPC के अलावा प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने भी आपत्ति जताई है। निकाय ने दावा किया कि सबा ने जो किया वो ईशनिंदा नहीं था।

सेना भर्ती की तैयारी कराते हैं भल्लू गुर्जर, करौली हिंसा में राजस्थान पुलिस ने डाला था जेल में: बताया – कस्टडी में था, फिर भी कर दी आगजनी की FIR

राजस्थान के करौली में 2 अप्रैल 2022 (शनिवार) को हिन्दू नववर्ष पर निकली शोभायात्रा पर मुस्लिम भीड़ के हमले के बाद हिंसा भड़क गई थी। इस हमले में कई हिन्दू कार्यकर्ताओं के साथ कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। पुलिस ने दोनों पक्षों पर केस दर्ज किया था जिसके बाद दोनों पक्षों के लोगों को गिरफ्तार किया गया था। हमले का मास्टरमाइंड मतलूब अहमद बताया गया था। साथ ही इसके तार PFI से जुड़े बताए गए थे। ऑपइंडिया ने 10 जून 2022 (शनिवार) को इस घटना पर वर्तमान हालातों की जानकारी ली।

पूछताछ के लिए बुलाया फिर कर लिया गिरफ्तार

इस घटना में जेल से 44 दिनों बाद छूट कर आए भल्लू सिंह गुर्जर ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया, “मैंने कुछ गलत किया ही नहीं था इसलिए मैं कहीं भागा नहीं था। हम खुद ही पीड़ित थे। मेरे पास पुलिस वाले पूछताछ के नाम पर 3 अप्रैल 2022 को आए और मुझे ले कर कोतवाली गए। 1 पूरा दिन मुझ से कुछ पूछा ही नहीं गया। 5 अप्रैल को पुलिस वालों ने मेरा फोन जमा कर लिया और मुझ से रैली में शामिल लोगों के बारे में पूछताछ की। मैंने सिर्फ रैली में शामिल हिन्दू सेना के प्रदेश अध्यक्ष साहब सिंह गुर्जर का नाम बताया। पर मेरी कोई बात मानी ही नहीं गई।”

SHO के नीचे का प्रशासन काफी अच्छा था पर ऊपर के अधिकारी नहीं

भल्लू सिंह गुर्जर ने आगे बताया, “थाने में हमारे साथ कोई मारपीट नहीं की गई। TI से नीचे का पुलिस स्टाफ काफी अच्छा था। उन्होंने हमारा ध्यान रखा। लेकिन ऊपर के अधिकारी उतने ही बुरे। खास तौर पर वो अधिकारी जो जाँच कमेटी के साथ बाहर से आए थे। असल में उन्हें कॉन्ग्रेस सरकार ने भेजा था।”

3 दिनों तक रखा कस्टडी में

भल्लू गुर्जर के आगे कहा, “हमें 3 अप्रैल को ले जाया गया और 6 अप्रैल को जेल भेजा गया। ऑन रिकार्ड पुलिस ने मेरी गिरफ्तारी 4 अप्रैल को दिखाई है। मेरे CCTV में बस 15 दिनों की फुटेज आती है इसलिए शायद मेरे पास मेरी गिरफ्तारी का वीडियो सबूत न मिल पाए। लेकिन थानों के अंदर लगे कैमरों से सबूत मिल जाएगा। जबकि पुलिस को बिना अदालत को बताए किसी को भी 24 घंटे से ज्यादा कस्टडी में रखने का अधिकार नहीं है।”

इधर मैं कस्टडी में, उधर मुझ पर ही आगजनी की FIR

भल्लू सिंह गुर्जर ने आगे बताया, “3 अप्रैल, 2022 को शाम 5 बजे पुलिस मुझे कटड़ी में ले चुकी थी। जब मैं थाने में था तब उसी दिन रात 10 बजे रिहान नाम के एक व्यापारी की दुकान में आगजनी हुई। इस आगजनी की भी FIR पुलिस ने मुझ पर ही कर दी। जबकि मैं उस समय उसी पुलिस की कस्टडी में था। मैं आज भी उस झूठे मुकदमे को झेल रहा हूँ।”

मेरे साथ कुल 8 हिन्दू भेजे गए थे जेल

भल्लू सिंह ने आगे बताया, “मेरे साथ कुल 8 हिन्दू जेल भेजे गए थे। उनके नाम वीरेंद्र बैंसला, गजेंद्र सिंह गुर्जर, रविंद्र जाट, पुष्पेंद्र मुद्गल, विपिन शर्मा, राजा पराशर, नीरज योगी है। बाद में भी कुछ हिन्दू जेल आए। जेलर और डिप्टी जेलर का व्यवहार हमारे लिए ठीक रहा। इसके अलावा जेल के बाकी स्टाफ में जातिवाद हो रहा था। भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा एक बार और मनोज राजौरिया 2 बार जेल में मिलने आए। इस से हम लोगों को काफी सपोर्ट मिला। भाजपा ने हमारी काफी मदद की।”

बेहद घटिया था जेल का खाना

भल्लू सिंह ने आगे बताया, “जेल का खाना काफी बेकार था। मैं लगभग 44 दिनों तक जेल में रहा। मेरी जमानत में भी हिन्दू संगठनों ने काफी सहयोग किया। जिले की अदालत में ख़ारिज होने के बाद मेरी जमानत हाईकोर्ट से हो पाई थी। हमारे साथ मुस्लिम आरोपित भी जेल में बंद थे लेकिन उनकी बैरकें अलग थीं। उनकी संख्या लगभग 19 थी। उनसे मिलने कौन-कौन आया ये हम नहीं जान पाए। हालाँकि सबको मिली सुविधाएँ एक जैसी थीं। जेल में कोई वाद-विवाद नहीं हुआ। मुस्लिम आरोपितों को हमारी तरफ आने नहीं दिया जाता था।”

भल्लू सिंह गुर्जर ने खुद को धार्मिक प्रवृत्ति का बताया। स्थानीय कैला देवी धाम आने वाले देश भर के श्रद्धालुओं का वो अपनी यथाशक्ति रहने आदि का इंतजाम भी करते हैं। हिंसा से ठीक पहले 29 मार्च, 2022 को उन्होंने कई श्रद्धालुओं के रहने की व्यवस्था अपने पते पर करवाई थी।

कैलादेवी के दर्शन करने आए गरीब श्रद्धालु भल्लू सिंह के ऑफिस पर

जेल से छूटने के बाद कोई धमकी या दबाव नहीं

भल्लू सिंह गुर्जर ने बताया, “मैं 19 मई 2022 को जेल से छूट कर आया। तब से अब तक मुझे किसी प्रकार की धमकी या कोई दबाव नहीं आया। तब से आराम से हूँ। थाने में फोन लेने गया था तब पुलिस वालों ने कहा कि कुछ दिन शाँत रहना। हालाँकि मैंने उनसे कहा कि हम पहले से शाँत है। हमें हमारा फोन वापस मिल गया। फोन में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई थी। पुलिस वालों का व्यवहार भी संतोषजनक था।”

3 हिन्दू बनाए गए मुख्य आरोपित

भल्लू सिंह ने बताया, “हमारे केस में हिन्दुओं की तरफ से 3 लोग मुख्य आरोपित बनाए गए हैं। इनके नाम साहिब सिंह, राजाराम गुर्जर और नीरज शुक्ला हैं। ये तीनों फिलहाल अभी नहीं पकड़े गए हैं। इसके अलावा हिन्दुओ की तरफ से कई अन्य लड़के फरार चल रहे हैं। मेरे साथ जेल गए सभी 8 लोग जमानत पा चुके हैं। इसी केस में मुस्लिमों की तरफ से जो जेल गए थे वो भी छूट चुके हैं।”

टूट चुका कारोबार फिर से खड़ा करने की कोशिश में हूँ

भल्लू सिंह ने बताया, “मैं पुलिस और सेना में भर्ती के दौरान फिजिकल टेस्ट की तैयारी करवाता हूँ। इसके लिए मैंने 40 हजार रुपए प्रतिमाह पर हॉस्टल ले रखा है। कोचिंग का नाम चेतक डिफेन्स अकादमी है जो 3 साल से चल रही है। साथ ही स्टाफ का खर्च भी अलग। मेरे सेंटर से तैयारी कर के निकले कई लड़के दिल्ली पुलिस, राजस्थान पुलिस, सेना और पैरामिलिट्री में पोस्टेड हैं। मेरी फीस बस 6 हजार रुपए प्रतिमाह है जिसमें कैंडिडेट का रहना, खाना और तैयारी फीस शामिल हैं।”

भल्लू सिंह गुर्जर अपने अकादमी में ‘भारत माता की जय’ के नारों के साथ अभ्यर्थियों के दिन की शुरुआत करवाते हैं।

भल्लू गुर्जर के मुताबिक, “मेरी अकादमी का नाम चेतक डिफेन्स अकादमी है जो 3 साल से चल रही है। इस पूरे विवाद के बाद लगभग 2 माह तक मेरे कारोबार पर बहुत बुरा असर पड़ा। कई लड़के मेरे केस की वजह से मेरे हॉस्टल से चले गए। इसके चलते मुझे आर्थिक संकट से गुजरना पड़ा। पहले मेरे यहाँ सीटें फुल रहा करती थीं। फ़िलहाल मैं कोशिश कर के अपने टूट चुके उसी कारोबार को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहा हूँ।”

‘हम प्रसाद बाँटने वाले लोग, मजबूर किया तो सड़क पर उतरेंगे’: जुमा हिंसा पर बोले काशी के संत- जिस-जिस मस्जिद से पत्थर चले, सबको सील करो

भाजपा से निलंबित नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के पैगंबर मुहम्मद (Prophet Muhammad) को लेकर दिए गए बयान के विरोध में शुक्रवार (10 जून 2022) को इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा की गई हिंसा के खिलाफ शनिवार (11 जून 2022) को वाराणसी में काशी धर्म परिषद (Kashi religious Council) की बैठक हुई। इस दौरान जुमे की हिंसा के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। संतों ने माँग की कि जिस भी मस्जिद से पत्थर चले थे, उसे पूरी तरह से सील किया जाए।

संतों की बैठक सुदामा कुटी हरतीरथ में पातालपुरी मठ के महंत बालक दास की अध्यक्षता में हुई। संतों ने इस्लामिक कट्टरपंथियों की हिंसा के खिलाफ 16 प्रस्तावों को पास किया। संतों ने एक सुर में कहा कि भारत में किसी भी तरह से तालिबानी मानसिकता को फैलने नहीं दिया जाएगा। धर्म परिषद में नूपुर शर्मा को रेप और हत्या की धमकी देने वालों को भी जेल भेजने की माँग की गई।

ऑपइंडिया से बात करते हुए महंत बालक दास ने कहा, “काशी में इस तरह की कोई घटना न घटे, इसको लेकर शांति की अपील की गई है। लेकिन, ये सोचने का विषय है कि आखिर जुमे की नमाज में ऐसा क्या पढ़ाया जा रहा है कि वहाँ से निकलते ही लोग उतने उग्र हो जा रहे हैं। 15-16 साल के उन्मादी लड़के पत्थरबाजी कर रहे हैं।”

उन्होंने इसके पीछे के उद्देश्यों पर आशंका जताते हुए कहा, “विरोध के नाम पर हिंसा कोई एक शहर नहीं, ऐसा कई शहरों में हो रहा है। कहीं ऐसा तो नहीं कि नूपुर शर्मा के बहाने ये लोग देश में अशांति फैलाने के लिए कुछ और तैयारी कर रहे हों?”

महंत ने आगे कहा, “नूपुर शर्मा ने तो माफी माँग लिया, लेकिन ये लगातार हमारे भगवान को अपमानजनक शब्द कह रहे हैं। नूपुर शर्मा ने वही बोला है, जो जाकिर नाइक ने बोला था। बैठक में हम लोगों ने ये निर्णय लिया है कि अगर दोबारा ऐसा कुछ होता है तो संत समाज कानूनी कार्रवाई करेगा। हम लोग पत्थर तो चला नहीं सकते, हम लोग तो प्रसाद बाँटने वाले लोग हैं। लेकिन, अगर मजबूर किया गया तो हमको सड़क पर उतरना ही पड़ेगा।”

पारित किए गए प्रस्ताव

बैठक में कट्टरपंथी नमाजियों की संपत्ति जब्त करने, उकसाने वाले संस्थानों पर प्रतिबंध लगाने, पथराव करने या कराने वाली मस्जिदों को सील करने, ज्ञानवापी से जुड़े मुस्लिम अफसर बाबा को सुरक्षा देने, नूपुर शर्मा को धमकी देने वालों पर NSA लगाने, फिल्मों में हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाने वालों को जेल भेजने, नफरत फैलाने वाले मौलानाओं को गिरफ्तार करने, हर मस्जिद में सीसीटीवी कैमरा लगाने की माँग की गई।

इसके अलावा, इस्लामिक देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों को तोड़ने, शहर स्तर पर संत समाज की इकाई गठित करने और इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा राँची में हनुमान मंदिर में की गई तोड़फोड़ को लेकर निंदा प्रस्तावों को पारित किया गया।

नूपुर शर्मा की तस्वीर पर मुस्लिम बच्चों ने किया पेशाब, चेहरे पर फाँसी के फंदे का निशान: वीडियो देख लोगों को याद आए ‘ब्रिगेडियर रूद्र प्रताप’

सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें मुस्लिम बच्चों को भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा की तस्वीर पर पेशाब करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे ये मुस्लिम बच्चे हँसते और ठहाके लगाते हुए नूपुर शर्मा की तस्वीर पर पेशाब कर रहे। इन वीडियोज को देख कर लोग ‘शौर्य (2008)’ फिल्म में ‘ब्रिगेडियर रूद्र प्रताप सिंह’ के डायलॉग को याद कर रहे हैं। इस किरदार को अभिनेता केके मेनन ने निभाया था।

सोशल मीडिया पर ‘द प्लाकार्ड गाय’ नाम से मशहूर मधुर ने इस वीडियो को शेयर किया। इस वीडियो में नूपुर शर्मा की तस्वीर पर उनके चेहरे के सामने फाँसी का फंदा बना हुआ देखा। साथ ही उनकी तस्वीर पर क्रॉस का निशान भी लगाया हुआ है। इस दौरान आसपास मौजूद लोग उन बच्चों को उत्साहित करते हुए सुनाई देते हैं और सब हँसी-ठहाके लगाते रहते हैं। हालाँकि, फ़िलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि ये वीडियो किस इलाके का है।

ये वीडियो तब सामने आया है, जब प्रयागराज में मुस्लिम भीड़ द्वारा किए गए दंगों में भी नाबालिगों को आगे रखने की घटनाएँ सामने आईं। हिंसक प्रदर्शनों में बच्चों के इस्तेमाल पर ‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR)’ ने भी आपत्ति जताई है। पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी का आरोप लगाते हुए मुस्लिम भीड़ ने देश के कई शहरों में जुमे की नमाज के बाद दंगे किए, जिनमें यूपी के प्रयागराज और झारखंड की राजधानी राँची में स्थिति सबसे ज्यादा बिगड़ गई।

इसी तरह नवीं मुंबई में बुर्का पहनी कई महिलाओं के साथ-साथ बच्चियों को भी नूपुर शर्मा के विरोध में प्रदर्शन में शामिल किया गया। बुजुर्गों से लेकर युवा तक सड़कों पर उतर कर माहौल बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। एक वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे तीन युवक खुलेआम नुपूर शर्मा की हत्या की बात बेखौप कर रहे हैं। इन युवकों की उम्र ज्यादा नहीं है लेकिन रील्स में ये कहते सुनाई पड़ते हैं, “जिसने नबी की शान में गुस्ताखी की है। कानून का काम है उसे फाँसी देना और अगर हम इंसाफ पर उतर आए तो हमें आतंकवादी मत कहना।”

‘CM का नाम क्यों… तुम बलि का बकरा हो’: स्वप्ना सुरेश ने जारी किया पूर्व पत्रकार का ऑडियो, केरल गोल्ड स्मलिंग केस में लिया था विजयन का नाम

डिप्लोमैटिक रूट के जरिए विदेशों से सोना की तस्करी करने की स्वप्ना सुरेश (Swapna Suresh) ने शुक्रवार (10 जून 2022) को एक पूर्व विजुअल जर्नलिस्ट शाज किरण (Shaj Kiran) के साथ हुई अपनी बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी की। इसमें शाज स्वप्ना को केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (Kerala CM Pinarayi Vijayan) और उनके परिवार के सदस्यों का नाम लेने को लेकर धमकी दे रहा है। हालाँकि, इस ऑडियो की सत्यता की पुष्टि होनी बाकी है।

बताते चले कि इससे एक दिन पहले यानी गुरुवार (9 जून 2022) को स्वप्ना ने आरोप लगाया था कि कोर्ट में CrPC की धारा 164 के तहत दिए अपने बयान में केरल के सीएम विजयन और उनके परिवार के सदस्यों का नाम लेने के कारण शाज ने उन्हें धमकी दी थी।

स्वप्ना ने इस ऑडियो को पलक्कड़ में जारी किया है। रिकॉर्डिंग के अनुसार, इस बातचीत में शाज किरण, पीएस सरित और स्वप्ना शामिल थीं। शाज इसमें सीएम विजयन और मुख्य सचिव कोडियेरी बालकृष्णन को पूरे खेल का मास्टरमाइंड बताता है, लेकिन बयान में सीएम और उनके परिवार के लोगों का नाम लेने से मना करता है।

स्वप्ना का कहना है कि शाज किरण द्वारा धमकी देने के बाद उन्होंने इस बातचीत को रिकॉर्ड किया है। स्वप्ना ने कोर्ट में कहा था कि इस मामले में राज्य के मुख्यमंत्री विजयन, पत्नी कमला और बेटी वीणा भी शामिल हैं। इसके अलावा उनके पूर्व प्रमुख सचिव एम. शिवशंकर, उनके अतिरिक्त निजी सचिव सी.एम. रवींद्रन, पूर्व नौकरशाह नलिनी नेट्टो और पूर्व मंत्री के.टी. जलील की संलिप्तता के बारे में भी बताया था।

रिकॉर्डिंग में शाज स्वप्ना से कहता है कि इसमें सीएम की बेटी वीणा को घसीटने की क्या जरूरत थी। इस पर पीएस सरित कहता है कि वह लड़ाई लड़ेगा। फिर शाज कहता है कि लड़ाई लड़ने से फायदा क्या है, इसमें पहला व्यक्ति सीएम हैं।

बता दें कि स्वप्ना ने आरोप लगाया था कि कोर्ट में सीएम और उनके परिवार का नाम लेने के कारण इस तस्करी कांड के प्रथम आरोपित पीएस हरित का उनके अपार्टमेंट से अपहरण कर लिया गया है। पुलिस के रूप में चार लोग आए उसे उठा ले गए।

ऑडियो जारी करने के दौरान स्वप्ना ने आरोप लगाया कि सीएम पिनाराई विजयन और कोडियेरी बालकृष्णन के फंड को बिलीवर्स चर्च के जरिए भेजा जा रहा है। बिलीवर्स चर्च एक प्रोटेस्टेंट चर्च है, जो FCRA के उल्लंघन के आरोप में सवालों के घेरे में है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि शाज ने पहले कहा था कि उसकी पत्नी इस चर्च में काम करती थी।

द न्यूज मिनट के अनुसार, बातचीत के दौरान शाज स्वप्ना से कहता है कि इसके बाद अब कोई भी खुलासा नहीं करने के लिए कहता है। वह कहता है कि हीरो बनने की क्या जरूरत है। शिवशंकर (स्मगलिंग मामले में जेल में बंद सीएम के प्रमुख सचिव) को सजा मिले या ना मिले, इससे तुम्हें क्या? या तुम्हें कुछ फायदा हो तो बोलो।

इसके बाद स्वप्ना पूछती है किससे पैसे लूँ? इस पर शाज कहता है कि ‘तुम्हारे बयान से जिसको नुकसान हुआ है उससे लो’। तुम्हें उस अपराध के लिए जेल गई, जो तुमने किया ही नहीं। उसका मुआवजा माँगो। शाज कहता है, “कोई तुम्हें इस्तेमाल करके पैसे कमा रहा है। वह जानता है कि गेम कैसे खेला जाता है। तुम सिर्फ बलि का बकरा हो।”

ऑडियो जारी करने के दौरान स्वप्ना ने आरोप लगाया कि 164 बयान देने के बाद शाज ने उससे मिलने के लिए कहा था। इसके बाद वह 7 जून को अपने बेटे के साथ उसके द्वारा बताई गई जगह पर मिली। इस दौरान इब्राहिम नाम का एक अन्य व्यक्ति था, जो शाज ​​का दोस्त बताया गया।

स्वप्ना के अनुसार, शाज ने भी उसे चेतावनी दी थी कि सरित को उठा लिया जाएगा और अगले दिन वही हुआ। स्वप्ना ने यह भी आरोप लगाया कि शाज ने उससे कहा था कि उसे पता होना चाहिए कि उसने किसके साथ खिलवाड़ किया है। उसने चेतावनी दी थी कि बयान में अपनी बेटी का नाम पिनाराई कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।

सरित के अपहरण से घबराई स्वप्ना ने शाज को अगले दिन 8 जून को पलक्कड़ के HRDS इंडिया कार्यालय में मिलने के लिए बुलाया और वहीं पर बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग कर ली। स्वप्ना ने कहा, “मैंने उसे मदद लेने के लिए बुलाया था और उसे फंसाने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन शाजी ने मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था।”