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‘भगवान विश्वेश्वर प्रकट हुए हैं, उनका स्नान, शृंगार, पूजा हमारा कर्तव्य’: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 4 जून को ज्ञानवापी में शिवलिंग पूजन का किया ऐलान

वाराणसी (Varanasi) में ज्ञानवापी विवादित ढाँचे (Gyanvapi Controversial Structure) के अंदर शिवलिंग मिलने के बाद अब संत समाज ने काशी (Kashi) में ज्ञानवापी के शिवलिंग (Gyanvapi Shivling) की पूजा करने का ऐलान किया है। ये ऐलान गुरुवार (2 जून 2022) को केदार घाट स्थित विद्या मठ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने की।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती (Swami Swaroopanand Saraswati)) के शिष्य हैं। उन्होंने कहा है कि उन्हें उनके गुरू ने ज्ञानवापी में आकर शिवलिंग की पूजा करने का आदेश दिया है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मुताबिक, जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती फिलहाल मध्य प्रदेश में हैं और उनके आदेश पर वो खुद वाराणसी आए हैं। उन्होंने ज्ञानवापी परिसर के वजूखाने में मिले शिवलिंग पर जारी विवाद को लेकर कहा, “कुछ लोग कह रहे हैं कि परिसर में मिले स्वरूप को शिवलिंग होने का अभी निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन हमारा मानना है कि इस बात का भी तो निर्णय नहीं हुआ है कि ये शिवलिंग नहीं है।”

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि एक पक्ष इसे शिवलिंग कह रहा है और एक पक्ष फव्वारा कह रहा है। इसका अर्थ ये है कि दोनों पक्ष एक ही बात कह रहा है। शिव ही एक मात्र देवता है, जिन्होंने अपने माथे पर गंगा को धारण किया है। जो शिव और उनकी कथाओं या उनके महत्व को नहीं जानता, वो शिवलिंग को फव्वारा ही कहेगा।

हिन्दू संत का कहना है कि ज्ञानवापी में स्वयं विश्वेश्वर भगवान प्रकट हुए हैं और अब उनका स्नान, श्रृंगार, पूजा और राग-भोग बहुत की आवश्यक है। जो भगवान की प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति है वो तीन साल के बच्चे की तरह होती है। जिस प्रकार 3 वर्ष के बालक को बिना स्नान-भोजन आदि के अकेले नहीं छोड़ा जा सकता, उसी प्रकार ये भी हैं।

उन्होंने कहा, “अब जब भगवान प्रकट हुए हैं तो हमारा कर्तव्य है कि हम उनकी सेवा करें, अन्यथा हम पाप के भागी होंगे।” वहीं, 4 जून को पूजा को लेकर संत ने कहा कि हमारे शास्त्रों में ‘स्थाप्यं समाप्यं शनि-भौमवारे’ कहकर शनिवार को सबसे अधिक शुभ दिन माना गया है।

वामपंथी पोर्टल ‘द वायर’ ने असम के सीएम की पत्नी पर लगाए पीपीई किट घोटाले के आरोप, रिंकी भुयान सरमा ने खोली पोल, कहा- ‘ये दान था, एक पैसा नहीं लिया’

वामपंथी एजेंडा चलाने वाला ऑनलाइन पोर्टल ‘द वायर’ ने असम के मुक्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) और उनकी पत्नी रिंकी भुइयाँ सरमा (Riniki Bhuyan Sarma) पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। बुधवार (1 जून 2022) को विवादित पोर्टल ने एक रिपोर्ट पब्लिश की, जिसमें उसने आरोप लगाया कि कथित तौर पर रिंकी भुइयाँ के मालिकाना हक वाली वाली एक कपंनी को कोरोना से निपटने के लिए पीपीई किट और दूसरे कोविड से जुड़े सामानों की आपूर्ति का ऑर्डर मिला था। रिपोर्ट के मुताबिक, असम में जब सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री थे और हिमंता बिस्वा सरमा राज्य के स्वास्थ्य मंत्री थे, तो उनकी पत्नी रिंकी भुइयाँ सरमा की कंपनी को बिना किसी अनुभव के ही 5,000 पीपीई किट, मेडिकल उपकरण और अन्य सुरक्षा के सामानों की आपूर्ति करने का ऑर्डर दिया गया था।

हालाँकि, वामपंथी पोर्टल का एजेंडा ज्यादा देर टिक नहीं सका। सीएम सरमा की पत्नी ने ‘द वायर’ के आरोपों का खंडन किया और कहा कि उन्होंने पीपीई किट की आपूर्ति के लिए एक पैसा भी नहीं लिया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि सीएसआर के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को पीपीई किट दान की थी।

‘द वायर’ ने गुवाहाटी स्थित समाचार पोर्टल ‘द क्रॉस करंट’ के साथ मिलकर सूचना के अधिकार (आरटीआई) से मिले जबावों के जरिए ये दावा किया था कि राज्य में कोरोना संकट के दौरान टेंडर ऑर्डर के नियमों का पालन किए बिना ही इमरजेंसी मेडिकल सप्लाई के लिए चार फर्मों को ऑर्डर दिए गए थे। द वायर का आरोप है कि जिन चार फर्मों को ये ऑर्डर दिए गए थे, उनमें से तीन सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयाँ सरमा और उनके व्यापारिक साझेदारों से जुड़ी हैं।

वामपंथी मीडिया ने दावा किया है कि जिस जेसीबी इंडस्ट्रीज को 5,000 पीपीई किट की तत्काल आपूर्ति का ऑर्डर मिला था, उसकी मालकिन रिंकी भुइयाँ सरमा हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गुवाहाटी स्थित ये कंपनी सैनिटरी नैपकिन बनाने के लिए प्रसिद्ध है और इसका किसी भी तरह के मेडिकल इक्विपमेंट के प्रोडक्शन का कोई इतिहास नहीं है। बावजूद इसके राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) असम ने सरमा की कंपनी को ये ऑर्डर दिया। इसमें दावा किया गया है कि रिंकी भुइयाँ की कंपनी को ये ऑर्डर 18 मार्च 2020 में दिया गया था। ये वो दौर था, जब भारत में कोरोना संक्रमण में तेजी से बढ़ोतरी हुई थी।

जेसीबी के अलावा जिन दो फर्मों को लेकर द वायर ने दावा किया है वो फर्म जीआरडी फार्मास्युटिकल्स और मेडिटाइम हेल्थकेयर हैं। आरोप है कि ये दोनों कंपनियों का मालिकाना हक सरमा के ही व्यापारिक सहयोगी घनश्याम धानुका के पास है। रिपोर्ट के अनुसार, बाद की फर्मों ने असम में कॉन्ग्रेस के सत्ता में आने के बाद से राज्य सरकार को चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति की है।

ये आरटीआई द क्रॉस करंट ने फाइल की थी, जिसके जरिए मिले जबावों का इस्तेमाल द वायर ने अपनी रिपोर्ट में किया। शुरुआती आरोप ये लगाए गए हैं कि जेसीबी इंडस्ट्रीज और मेडिटाइम हेल्थकेयर तय समय पर ऑर्डर की डिलिवरी ही नहीं कर पाए। दूसरा आरोप द वायर ने ये लगाया है कि पीपीई किटों को ऊँचे दामों (990 रुपये प्रति पीस) पर कंपनियों से खरीदे गए। जबकि उसी दिन उसने असम की एक अन्य फर्म एनई सर्जिकल इंडस्ट्रीज से 600 रुपए प्रति पीस की दर से पीपीई किट खरीदी।

रिंकी भुइयाँ सरमा ने द वायर के प्रोपेंगेंडा का किया खंडन

द वायर की प्रोपेगेंडा रिपोर्ट का खंडन करते हुए सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयाँ इसे दुष्प्रचार का हिस्सा करार दिया। उन्होंने कहा कि ये दुर्भावनापूर्ण प्रचार प्रचार का हिस्सा है और द वायर एक बार फिर से निराधार आरोप लेकर सामने आ गया है।

पीपीई किट मामले को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि जब असम में कोविड -19 महामारी फैली थी, उस दौरान राज्य में एक भी पीपीई किट नहीं थी। जबकि ये कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सबसे बड़ा सेफ्टी यूनिट था। हालात को देखते हुए उन्होंने (रिंकी भुइयाँ सरमा) अपने एक व्यवसायिक परिचित के जरिए कुछ पीपीई किटों की व्यवस्था करके उसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को दान दे दिया। हालाँकि, बाद में एनएचएम ने इसके लिए एक वर्क ऑर्डर जारी किया, ताकि वो आपूर्ति के लिए एक चालान जमा कर सकें। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि ये एक दान था और इसके लिए वो कोई पैसे नहीं लेंगी।

रिंकी भुइयाँ सरमा ने कहा, “महामारी के पहले सप्ताह में असम में एक भी पीपीई किट उपलब्ध नहीं थी। उसी का संज्ञान लेते हुए मैं एक व्यावसायिक परिचित के पास गई और काफी कोशिशों के बाद करीब 1500 पीपीई किट को अरेंज कर एनएचएम को दिया। बाद में मैंने इसे अपने सीएसआर के हिस्से के रूप में मानने के लिए एनएचएम को लिखा। ये उसकी रसीद संलग्न है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने इस आपूर्ति में एक पैसा भी नहीं लिया। मैं समाज को वापस देने में अपने विश्वास के बारे में हमेशा पारदर्शी रही हूँ। फिर चाहे मेरे पति की राजनीतिक स्थिति कुछ भी हो। मेरे संगठन ने भी आरोग्य निधि में दान देकर COVID के खिलाफ लड़ाई में NHM का समर्थन किया है।” उल्लेखनीय है कि आरोग्य निधि राज्य सरकार की वित्तीय सहायता योजना है।

इसके साथ ही रिंकी भुइयाँ सरमा ने असम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के एक प्रशंसा पत्र को भी साथ में अटैच किया, जिससे ये पता चलता है कि उन्होंने पीपीई किट का दान किया था। इसके लिए उन्होंने कोई पैसा नहीं लिया था। एनएचएम असम मिशन के निदेशक द्वारा जेसीबी इंडस्ट्रीज को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि वह 1485 पीपीई किट के साथ सरकार की मदद करने के लिए उनके संगठन के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं। लेटर के सब्जेक्ट में सीएसआर का जिक्र है।

NHM डायरेक्टर के द्वारा लिखा गया पत्र

एनएचएम के पत्र से यह स्पष्ट है कि रिंकी भुइयाँ सरमा की कंपनी ने असम सरकार को 1485 पीपीई किट दान किए थे। इससे ये स्पष्ट होता है कि सरमा की कंपनी को किसी भी तरह का कोई अवैध ऑर्डर नहीं दिया गया।

अचंभे की बात ये है कि जब द वायर आरटीआई से इतने सारे दस्तावेजों को इकट्ठा कर पाया तो वो एनएचएम के दान वाले पत्र को क्यों नहीं ढूँढ पाया। इसके अलावा प्रोपेगेंडा पोर्टल ने दावा किया कि जेसीबी इंडस्ट्रीज को 5000 पीपीई किट की आपूर्ति का आदेश जारी किया गया था, इसे रद्द कर दिया गया था क्योंकि केवल 1485 किट की आपूर्ति की गई थी। ऐसे में अब द वायर को जवाब देना होगा कि अगर ऑर्डर कैंसिल कर दिया गया था तो किस बात का घोटाला, क्योंकि नो ऑर्डर का मतलब कोई भुगतान नहीं है।

रिंकी भुइयाँ सरमा ने द वायर पर तंज कसते हुए कहा, “अगर इस तरह की प्रोपेगेंडा वेबसाइटें संकट के वक्त में केवल बकवास करने की जगह कुछ और करतीं तो भारत एक बेहतर जगह पर होगा। सुनियोजित तरीके से टार्गेट किए जाने बाद भी मैं हमेशा देश की सेवा करने के अपने विश्वास पर कायम रहूँगी।”

‘फिरकापरस्तों को औरंगजेब से नफरत, उनसे बेहतर किरदार दूसरा नहीं’: मौलाना तौकीर रजा खान ने मुगल आक्रान्ता का किया महिमामंडन

बॉलीवुड के सुपरस्टार अक्षय कुमार (Bollywood Superstar Akshay Kumar) की फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज चौहान’ (Samrat Prithviraj Chouhan) को लेकर उत्तर प्रदेश (UP) में सियासत शुरू हो गई है। इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के मौलाना तौकीर रजा खान (Tauqeer Raza Khan) ने मुगल आक्रान्ता औरंगजेब (Aurangzeb) का महिमामंडन किया है।

मौलाना तौकीर रजा खान ने दावा किया कि पूरी दुनिया में औरंगजेब से बेहतर कोई दूसरा किरदार नहीं हो सकता है। मौलाना के मुताबिक, अक्षय कुमार केवल पब्लिसिटी के लिए ये सब कर रहे हैं। बता दें कि अक्षय कुमार ने काशी में कहा था कि इतिहास की किताबों में हमारे राजाओं के बारे में नहीं बताया जाता, जबकि वो भी महान थे। देश के बच्चों को महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान के बारे में जानना चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक तौकीर रजा खान ने कहा, “फिरकापरस्तों को नफरत औरंगजेब से है। मैं तो कहता हूँ कि उनसे नफरत की जानी चाहिए, क्योंकि उन्होंने हिन्दुओं को नवाजा, उन्होंने मंदिरों को जायदादें दीं। इस वजह से हिन्दू उनसे नाराज है। मैं कहता हूँ जिस तरह से सम्राट पृथ्वीराज फिल्म बनाई है, इसी तरह से ईमानदारी से औरंगजेब के बारे में पढ़कर देखो। हिन्दुस्तान में उनसे बेहतर दूसरा किरदार नहीं मिलेगा। बाकी हिन्दुस्तान में जो कुछ भी है, आपने आज तक क्या बनाया है और क्या किया है, वो हमें बताइए। हमारे दौर-ए-हुकूमत में या अंग्रेजों के दौर-ए-हुकूमत में जो कुछ भी बना है……।”

मौलाना ने ये भी कहा कि हिन्दुस्तान में अंग्रेजों का बनाया हुआ पुलिस मैनुअल आज तक काम कर रहा है। तौकीर रजा खान ने कहा, “आज तक आप अपनी पुलिस मैनुअल तक नहीं बना सके तो और क्या बना सकोगे? आपको बनाने में नहीं, बाँटने में विश्वास है।”

अक्षय कुमार ने मुगलों को कहा था ‘आक्रमणकारी’

गौरतलब है कि हाल ही में वाराणसी का दौरा करने के बाद समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में एक्टर अक्षय कुमार ने इतिहास की किताबों पर सवाल उठाया था। एएनआई की एडिटर स्मिता प्रकाश से बात करते हुए अक्षय कुमार ने अफसोस जताते हुए कहा था कि देश के राजाओं को बारे में लोगों को नहीं पढ़ाया जाता।

उन्होंने कहा था, “मैं सम्राट पृथ्वीराज चौहान के बारे में और जानना चाहता था। मैंने उनसे (निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी) बहुत सारी कहानियाँ सुनीं, लेकिन दुर्भाग्य से हमारी इतिहास की किताबों में उनके बारे में केवल 2 या 3 लाइन ही लिखा है। किताबों में बाकी सब कुछ है। आक्रमणकारियों के बारे में बहुत सारे विवरण हैं, लेकिन हमारी संस्कृति और हमारे महाराजाओं का शायद ही कोई उल्लेख है।”

उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री हुई ‘सम्राट पृथ्वीराज चौहान’

शुक्रवार (3 जून 2022) को देश भर की सिनेमा में रिलीज होने जा रही अक्षय कुमार स्टारर फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ को सीएम योगी ने राज्य में ट्रैक्स फ्री करने का ऐलान कर दिया। गुरुवार (2 जून 2022) को लखनऊ (Lucknow) स्थित लोक भवन में इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने कैबिनेट के सभी मंत्रियों के साथ सम्राट पृथ्वीराज (Samrat Prithviraj) फिल्म देखी।

Maulana Tauqir Raza Khan glorifies mughal invader Aurangzeb samrat Prithviraj Akshay Kumar

₹100 करोड़ की वसूली मामले में NCP नेता अनिल देशमुख के खिलाफ CBI ने दाखिल की 59 पन्नों की चार्जशीट, सचिन वाजे को बनाया सरकारी गवाह

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और NCP के नेता अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) की 100 करोड़ रुपए की वसूली के मामले में मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। गुरुवार (2 जून 2022) को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने सेशन कोर्ट में 59 पन्नों की चार्जशीट फाइल की है। इसमें जाँच एजेंसी ने बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को माफी दे दी है और उसे सरकारी गवाह बना लिया है।

वाजे को मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एँटीलिया के बाहर विस्फोटकों से भरी कार खड़ी करने के मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने गिरफ्तार किया था। पिछले सप्ताह सचिन वाजे ने स्पेशल कोर्ट में एक अपील दायर कर खुद को अनिल देशमुख के खिलाफ सरकारी गवाह बनाने की माँग की थी। इसके बाद सीबीआई ने अभियोजन पक्ष का गवाह बनने के वाजे की माँग को मान लिया था। ताकि इस मामले में शामिल सभी आरोपितों के चेहरे से झूठ और फरेब के नकाब को उतारा जा सके।

एक दिन पहले अदालत में सुनवाई के दौरान मामले में दलीलें सुनीं और जेल अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सचिन वाजे को पेश करने को कहा। स्पेशल जस्टिस डीपी शिंगडे ने वाजे से कहा, “मैंने आपके आवेदन की अनुमति दी है, लेकिन मैंने कुछ शर्तें लगाई हैं। मुझे बताएँ कि क्या यह आपको स्वीकार्य है।”

जस्टिस शिंगडे ने शर्तों को पढ़ा। उन्होंने कहा कि वाजे को भ्रष्टाचार के पूरे मामले का खुलासा करना है। उन्हें आईपीसी की धारा धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए सभी तथ्यों का खुलासा करना होगा। उन्हें उन सवालों का सच्चाई से जवाब देना चाहिए जो लोक अभियोजक द्वारा मुकदमे के दौरान पूरे मामले को सुलझाने के लिए कहा जाएगा। कोर्ट की शर्तों को मानने के बाद ही वाजे को सरकारी गवाह बनाया गया।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि 20 मार्च 2021 को मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखकर आरोप लगाया था कि पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने सचिन वाजे को हर महीने 100 करोड़ रुपए इकट्ठा कर उन्हें देने के आदेश दिए थे। परमबीर सिंह ने चिट्ठी में ये भी कहा कि सचिन वाजे ने उन्हें बताया था कि अनिल देशमुख ने उससे हर महीने जेल से, रेस्ट्रां, होटल, बार आदि जगहों से 100 करोड़ रुपए इकट्ठा करने को कहा था। इन्हीं आरोपों के बाद सीबीआई ने 24 अप्रैल 2022 को अनिल देशमुख के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।

‘नौसेना का एक साथी रेप कर रहा था और दूसरा देख रहा था’: कनाडा की सेना में यौन हिंसा की शिकार महिला कर्मी, रिपोर्ट में खुलासा

कनाडा की सेना (Canadian Army) में होने वाले यौन शोषण पर एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस खुलासे के मुताबिक, कुछ महिला सदस्यों को दुश्मनों के मुकाबले अपने ही साथियों से ज्यादा यौन हिंसा झेलनी पड़ी है। यह रिपोर्ट कुल 404 पन्नो की है, जिसे कनाडाई सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस लुईस आर्बॉर ने कई सालों से पीड़िताओं के बयान के आधार पर तैयार की है। इस रिपोर्ट के बाद CAF (कनाडियन आर्म्ड फोर्सेस) में इस चलन की आलोचना हो रही है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, “यौन हिंसा के मामलों की जाँच और उसके समाधान की दिशा में विचार करते हुए CAF के सीनियर अधिकारी ये नहीं जान पाते हैं कि असल में समस्या की जड़ कहाँ है। सिस्टम के नियमों के अनुसार CAF कर्मी अपने काम को जारी रखती हैं, लेकिन इससे कई बार उन्हें अपने साथियों से वो सब झेलना पड़ता है जो दुश्मनों के मुकाबले कहीं अधिक बुरा और हानिकारक होता है।”

लुईस अर्बोर द्वारा तैयार की गई ये रिपोर्ट कनाडा की सेना में होने वाली यौन हिंसा की घटनाओं की जाँच के लिए अब तक की तीसरा सबसे बड़ा सर्वे है। साल 1992 में नौसेना की दिग्गज डॉन मैकइलमॉयल का एक साथी नाविक उन्हें रेप कर रहा था और दूसरा साथी देख रहा था। तब मैकइलमॉयल महज 19 साल की थीं। मैकइलमॉयल ने गार्जियन को बताया, “जब मैंने आगे आकर इसका विरोध करना चाहा तब मुझ पर पुरुषों के फ्लोर पर जाने का आरोप लगाकर राष्ट्रीय रक्षा कानून के तहत कार्रवाई कर दी गई थी। जबकि, मैं उस फ्लोर पर खुद नहीं गई थी बल्कि ले जाई गई थी।”

अर्बोर ने अपनी रिपोर्ट में सेना के अंदर होने वाले यौन उत्पीड़न के मामले की निष्पक्ष जाँच के लिए नागरिक अधिकारियों को ट्रांसफर करने की सिफारिश की है। इसी के साथ उन्होंने सेना में भर्ती और ट्रेनिंग प्रक्रिया में भी सुधार की सिफारिश की है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा सरकार की रक्षा मंत्री अनीता आनंद ने यौन हिंसा के ऐसे मामलों में बदलाव लाने और उस पर सरकारी द्वारा नजर रखने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन उसका सही से पालन होगा या नहीं इस पर संदेह बना हुआ है।

गुजरात कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भरत सोलंकी की पत्नी और ‘प्रेमिका’ की मारपीट का नया वीडियो आया सामने, पार्टी ने साधी चुप्पी

पूर्व कैबिनेट मंत्री और गुजरात कॉन्ग्रेस (Gujarat Congress) के वरिष्ठ नेता भरत सोलंकी (Bharat Solanki) और उनकी अलग हो चुकी पत्नी रेशमा पटेल (Reshma Patel) का वैवाहिक विवाद आजकल वायरल वीडियो को लेकर सुर्खियों में है।

यह वीडियो 1 जून को सामने आया, जिसमें रेशमा पटेल अपने पति को आणंद स्थित बंगले में एक लड़की के साथ रंगे हाथों पकड़ने के बाद हंगामा करती दिख रही हैं। वायरल हुए वीडियो में रेशमा पटेल उस लड़की के साथ हाथापाई करती नजर आ रही हैं, जिसके साथ कॉन्ग्रेस नेता का कथित तौर पर विवाहेतर संबंध है।

अब एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें रेशमा पटेल गुस्से में निर्दयता के साथ अपने पति की कथित प्रेमिका के बाल खींच रही हैं और उसे कमरे के एक कोने से दूसरे कोने में ले जाती दिख रही हैं। यह वीडियो उसी वीडियो का हिस्सा लगता है, जो कल वायरल हुआ था।

@jimmyvyas हैंडल नाम के एक ट्विटर यूजर ने कल वायरल हुए वीडियो के चार स्निपेट साझा किए। रेशमा पटेल को लड़की के बालों को खींचते हुए और उसके द्वारा दिए गए आखिरी स्निपेट में गुस्से में चिल्लाते हुए देखा गया था, जो कल दिखाई नहीं दिया।

बाद वाला स्निपेट में लड़की अपना चेहरा छिपाने है और रेशमा पटेल की मारपीट से खुद को बचाने की कोशिश करती दिख रही है। सफेद शर्ट और नीली जींस पहने एक आदमी लड़की का हाथ उसके चेहरे से हटाने की कोशिश करता है ताकि उसे फिल्माया जा सके, लेकिन लड़की अपना चेहरा छिपाती रहती है।

खुद को महिलाओं की मसीहा के रूप में पेश करने की कोशिश करने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी ने न तो रेशमा के अधिकारों के लिए बात की है और न ही उस लड़की के लिए, जिस पर बेरहमी से हमला किया जा रहा है। पार्टी ने घटना पर चुप्पी साध रखी है।

कॉन्ग्रेस नेता भरत सोलंकी की पत्नी और उनकी कथित प्रेमिका की हाथापाई का वीडियो वायरल

कॉन्ग्रेस नेता का हाल ही में एक वीडियो मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसमें भरत सिंह सोलंकी के होने का दावा किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जब कॉन्ग्रेस नेता आणंद स्थित बंगले पर थे तब रेशमा पटेल उनके घर पहुँचीं, और रेशमा पटेल की उनसे हाथापाई हो गई और वे उन पर चिल्लाने लगीं।

पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई। वायरल वीडियो के बारे में कहा जा रहा है कि इसे रेशमा पटेल के साथ आए लोगों में से एक ने मोबाइल में रिकॉर्ड किया था। हालाँकि, अभी इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि वायरल वीडियो में दिख रहा शख्स भरत सिंह है या नहीं।

जैसा कि वीडियो में देखा जा सकता है कि जब रेशमा पटेल घर का दरवाजा खोलती हैं तो भरत सिंह दौड़ते हुए आते हैं और रेशमा पटेल को अंदर आने से रोकते हैं और पुलिस को बुलाने के लिए कहते हैं। हालाँकि, रेशमा पटेल और उनके साथ आए लोग घर में घुस जाते हैं और रेशमा पटेल तेजी से लड़की को पकड़ लेती है और उसे पीटना शुरू कर देती है। यहाँ तक कि उसके बाल भी खींच लेती है। इस बीच वीडियो में भरत सिंह उन्हें रोकते नजर आ रहे हैं।

वीडियो में “तुम मेरे पति के साथ बैठी हो, मैं तुम्हे नहीं छोडूँगी… डाउनलोड करो इस वीडियो को.. अपना मुँह दिखाओ” जैसी कई आवाजें आ रही हैं। जबकि इस दौरान लड़की कैमरे से अपना चेहरा छिपाने की कोशिश करती नजर आ रही है। इस मामले पर अभी तक भरत सिंह सोलंकी या गुजरात कॉन्ग्रेस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। साथ ही, ऑपइंडिया भी इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।

गौरतलब है कि भरत सिंह सोलंकी और उनकी पत्नी रेशमा पटेल के बीच काफी समय से अनबन चल रही है। इससे पहले रेशमा पटेल और भरत सिंह ने भी एक-दूसरे को पब्लिक नोटिस भेजा था। जिसमें रेशमा पटेल ने आरोप लगाया था कि उन्हें परेशान किया जा रहा है और घर से निकाला जा रहा है। साथ ही भरत सिंह पर उनके साथ छेड़खानी करने और राजनीति में अपने पद का दुरुपयोग करके उन्हें तलाक देने के लिए मजबूर करने का भी आरोप लगाया गया था।

बता दें कि रेशमा पटेल की नोटिस के जवाब में भरत सिंह सोलंकी ने भी नोटिस भेजकर कहा कि वह पिछले चार साल से रेशमा पटेल के साथ नहीं रह रहे हैं। उन्होंने आगाह किया था कि उनकी पत्नी के साथ वित्तीय लेन-देन करने के लिए किसी को भी उनके नाम और पहचान का उपयोग नहीं करना चाहिए और अगर कोई करता है तो इसके लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

इसके बाद इस साल रेशमा पटेल ने भी इस मामले की शिकायत कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी से की थी, जिसके बाद इस मामले पर फिर चर्चा हुई। उन्होंने पुलिस से सुरक्षा की माँग करते हुए शिकायत किया था कि उन्हें अपने घर से बाहर निकाला जा रहा है।

पंजाब में फिर से बहाल होगी 423 VVIP की सिक्योरिटी, HC ने लगाई भगवंत मान सरकार को फटकार, सुरक्षा हटा कर सोशल मीडिया पर फैला दी खबर

पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को उन सभी VVIP की सुरक्षा बहाली का आदेश दिया है जिनकी सुरक्षा भगवंत मान सरकार ने हटा ली थी। गुरुवार (2 जून 2022) को जारी इस आदेश के बाद अब पंजाब सरकार उन सभी 423 VVIP की सुरक्षा फिर से बहाल करेगी। सरकार के मुताबिक सभी VVIP लोगों की सुरक्षा 7 जून 2022 से बहाल कर दी जाएगी। बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट से मान सरकार को फटकार भी लगी है।

हालाँकि, इस बहाली का आदेश 423 लोगों पर ही लागू होगा क्योकि 1 व्यक्ति सिद्धू मुसेवाला अब जीवित नहीं हैं। इस से पहले 29 मई 2022 को भगवंत मान ने 424 VVIP लोगों की सुरक्षा हटा ली थी। इन 424 लोगों में कई पुलिसकर्मी, राजनेता और गायक शामिल थे। यह याचिका पिछली पंजाब सरकार में उपमुख्यमंत्री ओम प्रकाश सोनी ने दाखिल की थी। हाईकोर्ट में सोनी ने कहा था कि किसी की भी सुरक्षा हटाने से पहले कोई कमेटी आदि नहीं बनाई गई। इसलिए हड़बड़ी में किए गए फैसले से उनके जैसे तमाम लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।

पूर्व उपमुख्यमंत्री की याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी करते हुए सुरक्षा हटाए जाने का आधार पूछा था। इसके जवाब में भगवंत मान सरकार ने हाईकोर्ट से VVIP लोगों की सुरक्षा कुछ समय के लिए ही हटाना बताया था। हाईकोर्ट ने पूछा कि सुरक्षा हटाए जाने की खबर लीक कैसे हुई तब पंजाब सरकार ने आगे से पुख्ता इंतजाम करने और दोबारा रिपोर्ट लीक न होने का भरोसा दिया।

यहाँ गौर करने लायक बात ये है कि पंजाब सरकार द्वारा हटाई गई सुरक्षा में कहीं भी ये नहीं लिखा था कि ये कदम सिर्फ कुछ समय के लिए है। आदेश में स्थाई तौर पर सुरक्षा हटाना बताया गया था। इस रिपोर्ट के लीक होने में भी आम आदमी पार्टी के नेताओं को जिम्मेदार बताया जा रहा है। आरोप है कि आप पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर इसका खूब प्रचार किया था कि उनकी सरकार ने VVIP कल्चर खत्म करने के लिए कई लोगों की सुरक्षा हटा दी है। आम आदमी द्वारा प्रकाशित पोस्टरों में भगवंत मान के इस कदम को फिजूलखर्ची से रोकने वाला बताया गया था।

चित्र साभार- ट्विटर

याचिकाकर्ता कॉन्ग्रेस नेता सोनी की Z श्रेणी की सुरक्षा श्रेणी को पंजाब सरकार ने घटाने का निर्णय लिया था। सिद्दू मूसेवाला के अलावा अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, गुरदर्शन बराड़, आईपीएस गुरदर्शन सिंह और उदयबीर सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ उनके परिवार की VIP सुरक्षा में कटौती की गई थी।

सबकी जात गिनेगा बिहार, पर जातीय जनगणना में कैसे रोकेगा रोहिंग्या-बांग्लादेशियों की घुसपैठ: डेमोग्राफी बदली, अब मुस्लिम गलियारे की साजिश

राजनीति में कोई भी कदम बिना फायदे के नहीं उठाए जाते। यह सत्ता के गलियारों की दुनिया का शाश्वत सत्य है। हालाँकि, अपवाद हर समय और हर जगह रहा है, इसलिए इसमें भी हो सकता है। बिहार की राजनीति के चिर प्रतिद्वंद्वी लालू यादव (Lalu Yadav) की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल- राजद (RJD) की लंबे समय से की जा रही माँग पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Bihar CM Nitish Kumar) द्वारा जातीय गणना या जातीय सर्वे (Caste Census) कराने का निर्णय लोकोपकारी कम, राजनैतिक हित वाला ज्यादा साबित होता है। हालाँकि, इस गणना को इस्तेमाल राजनीति से हटकर किया जाए तो लंबे समय में इसके फायदे भी नजर आएँगे।

जातीय गणना में भाजपा की माँग पर मुस्लिमों सहित सभी धर्मों की जातीय और उप-जातीय गणना को शामिल किया गया है। हालाँकि, इस जातीय गणना से उन मुल्ले-मौलवियों का यह भ्रम भी दूर होगा कि मुस्लिमों में जाति आधारित व्यवस्था नहीं है। लेकिन, इस लेख का विषय दूसरा है। इस लेख में हम चर्चा करेंगे कि जातीय गणना के दौरान बिहार की नीतीश सरकार अवैध बांग्लादेशियों और घुसपैठिए रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर क्या रुख अपनाएगी।

जातीय गणना को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में बिहार की राजधानी पटना में सर्वदलीय बैठक संपन्न हुई और सभी दलों ने इसके लिए सहमति दी। अवैध मुस्लिम घुसपैठियों को लेकर सरकार की नीति क्या होगी इस पर चर्चा सिर्फ भाजपा ने की। जातीय गणना की लंबे समय से माँग करने वाले अन्य दलों ने इस मुद्दे को विचार योग्य ही नहीं समझा।

भाजपा ने रोहिंग्या और अवैध बांग्लादेशियों को लेकर रखी माँग

सर्वदलीय बैठक में भाजपा ने स्पष्ट रूप से कहा कि इसमें अवैध बांग्लादेशी मुस्लिमों और घुसपैठी रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर बाहर रखना होगा। इसका लाभ उन्हें किसी भी तरह नहीं मिलना चाहिए। इसके अलावा, उच्च जाति वाले मुस्लिम खुद को निम्न जाति का बताकर इसका लाभ ना ले सकें, यह भी सरकार को सुनिश्चित करना होगा।

ऑपइंडिया से बात करते हुए बिहार के भाजपा अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने कहा, “कल (बुधवार, 1 जून 2022) जो सर्वदलीय बैठक हुई, उसमें हमने तीन मुद्दे उठाए। पहला कि जब जातीय सर्वे हो तो कोई अवैध बांग्लादेशी या रोहिंग्या इसका हिस्सा ना बने। दूसरी बात कि इसमें पिछड़ों की हकमारी ना हो। सीमांचल में बहुत सारे ऐसे मुस्लिम हैं, जो शेख (उच्च मुस्लिम जाति) हैं और बाद में शेखरा बोलकर वो OBC का लाभ उठाते हैं या कुलहरिया बोलकर OBC का लाभ उठाते हैं।”

उदाहरण देते हुए डॉ. जायसवाल ने कहा, “तस्लीमुद्दीन शेख कम्युनिटी के थे, अगर उनका पुराना रिकॉर्ड चेक किया जाए तो, लेकिन उन्होंने कुलहरिया बोलकर रिजर्वेशन का लाभ लिया। ऐसा ना कि सर्वे के दौरान दूसरे मुसलमान अपने आपको OBC या EBC कहकर इसमें शामिल हो जाएँ। इसको भी देखना होगा।”

जातीय गणना में खरच दलों वामपंथियों और अन्य दलों की जातीय गणना पर की जा रही राजनीति को लेकर भाजपा नेता जायसवाल ने कहा, “जातिगत सर्वे भी हो और हम कराएँगे भी नहीं- इस पॉलिसी के तहत वामपंथी और कुछ अन्य दलों ने चाहा कि पैसे केंद्र सरकार दे। ताकि, इन्हें जातीय गणना भी ना हो और उनका क्लेम भी बन जाए और वे इसका लाभ उठा सकें।”

वहीं, एक विधान परिषद के सदस्य और भाजपा नेता ने कहा कि यह बेहतर होता कि जातीय गणना के बजाए राज्य सरकार गरीबों और आर्थिक रूप से पिछड़ों की गणना कराती। इससे यह फायदा होता कि जो सरकारी योजनाओं से वंचित हैं, उन्हें उनका लाभ मिलता।

जातीय गणना का कोई मैकेनिज्म नहीं, NRC लागू करने से CM ने किया था मना

इस तरह राज्य में रह रही अवैध आबादी न सिर्फ कानून-व्यवस्था के लिए समस्या उत्पन्न कर रही है, बल्कि देश के मुस्लिमों के विकास का बड़ा हिस्सा खा जा रही है। इनकी पहचान के लिए अब तक सरकार की तरफ से ना ही कोई प्रयास किए गए और ना जातीय गणना में इनकी पहचान करने के लिए किसी मसौदे या मैकेनिज्म अपनाने की बात कही गई है। ये पार्टी विशेष के लिए वोटबैंक का काम करते हैं, इसलिए अधिकतर पार्टियाँ इनको लेकर चुप्पी साधे रहती है।

इस मसले पर बिहार के भाजपा अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने ऑपइंडिया से कहा कि अभी इस सर्वे को लेकर किसी तरह का मैकेनिज्म नहीं बना है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी दलों की बातों को सुना और कहा कि इस पर जो भी निर्णय लिया जाएगा, इसको लेकर सबको सूचित कर दिया जाएगा।

बता दें कि जब इन अवैध घुसपैठियों की पहचान के लिए केंद्र की भाजपा सरकार ने राष्ट्रीय पंजीयन रजिस्टर (NRC) को देश भर में लागू करने की बात कही, तब वोटबैंक को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे लागू करने से साफ मना कर दिया। नीतीश कुमार ने कहा था दरभंगा में हायाघाट ब्लॉक के चंदनपट्टी में मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय में एक समारोह को संबोधित कहा था कि बिहार में NRC लागू नहीं किया जाएगा।

बिहार के 66 लाख लोगों के रोजगार खा गए अवैध घुसपैठिए

बिहार में मुस्लिम घुसपैठियों की एक बड़ी आबादी है, जो म्यांमार और बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल के रास्ते अवैध रूप से रहकर आबादी में घुलमिल गए हैं। माना जाता है कि इनकी संख्या 66 लाख से 1 करोड़ के बीच है। इनमें से लगभग 66 लाख अवैध घुसपैठिए बिहार के लोगों के हक के रोजगारों पर कब्जा जमाए हुए बैठे हैं।

इनमें से अधिकतम के पास पहचान पत्र, राशन कार्ड और आधार कार्ड बने हुए है। हाल में कई ऐसे ऑपरेटरों का फंडाफोड़ हो चुका है, जो अवैध घुसपैठियों को फर्जी कागजातों पर उनका पहचान पत्र बनवाने में संलग्न रहे हैं।

पश्चिम बंगाल के जरिए पूरे देश में घुसपैठ

बांग्लादेश और म्यामांर से आए ये घुसपैठिए पहले पश्चिम बंगाल में रहते हैं और फिर वहाँ फर्जी कागजात बनाकर खुद को बंगाली मुस्लिम बताकर देश के अन्य हिस्सों में बस जाते हैं। आज पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में मुस्लिम आबादी 69.5 प्रतिशत, मालदा में 53.3 प्रतिशत, उत्तरी और दक्षिणी दिनाजपुर में 42.8 प्रतिशत, बीरभूम में 39.6 प्रतिशत, उत्तरी और दक्षिणी 24 परगना में 36.1 प्रतिशत, हावड़ा में 30 प्रतिशत और नदिया में 26.76 प्रतिशत है।

बिहार की सीमा पश्चिम बंगाल से सटी होने के कारण ये घुसपैठिए आसानी से बिहार के सीमावर्ती जिलों में बस जाते हैं। इसमें इनकी मदद स्थानीय स्तर के लोग करते हैं। मुस्लिम हितों को नाम पर सामूहिक रूप से सड़कों पर निकलने वाला मुस्लिम समुदाय कभी अवैध घुसपैठियों को लेकर सामने नहीं आया। और नहीं तो उनके पक्ष में अपनी आवाज ही बुलंद करते रहा है। यही कारण है कि राज्य के सीमांचल, मिथिलांचल और कोसी क्षेत्र में मुस्लिमों की आबादी में बहुत तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है।

देश में बांग्लादेश से पाकिस्तान तक मुस्लिम गलियारा बनाने की साजिश

हाल ही में यह बात भी सामने आ चुकी है कि देश में अवैध रूप से बांग्लादेश और रोहिंग्या मुस्लिमों को लाकर उन्हें सुनियोजित तरीके से बसाने का काम किया जा रहा है, ताकि डेमोग्राफी में बदलाव करते हुए एक मुस्लिम गलियारा विकसित किया जा सके। यह मुस्लिम गलियारा मुस्लिम मुल्क बांग्लादेश को इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान से जोड़ेगा।

बिहार के पूर्व विधान पार्षद हरेंद्र प्रताप ने अपने एक लेख में बताया था कि उत्तर भारत में मुस्लिम षड्यंत्रकारियों ने जिस मुस्लिम गलियारे को तैयार करने की साजिश रची है, वो बांग्लादेश से सटे पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा होते हुए पाकिस्तान से मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस गलियारे में मुस्लिमों को बड़ी संख्या में बसाने का काम शुरू किया जा रहा है और असम में घुसपैठियों के खिलाफ हुए आंदोलन के बाद वहाँ के कई मुस्लिमों को भी इधर ही बसाया गया है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में शासन के संरक्षण और भाषाई अनुकूलता के कारण वो खुले रूप से अपना काम कर रहे हैं, लेकिन यूपी-बिहार में इसकी अनदेखी आश्चर्यजनक है। उन्होंने कैराना से हिन्दुओं के पलायन की खबर याद दिलाते हुए लिखा है कि 2011 की जनगणना में जहाँ हिंदू जनसंख्या वृद्धि दर राष्ट्रीय से आधा यानी 9.19% तथा मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि हिंदू से तीन गुना यानी 29.81% थी।

उन्होंने आँकड़ा पेश किया कि 2001-11 में पश्चिम बंगाल से 35 लाख हिन्दुओं के पलायन की बात सामने आई है। उन्होंने पूर्णिया के बायसी विधानसभा में एक दलित बस्ती को जलाए जाने की घटना को भी याद किया और कहा कि वहाँ से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने जीत दर्ज की है। बकौल हरेंद्र प्रताप, ओवैसी हैदराबाद को कश्मीर बनाना चाहते हैं और वहाँ हिन्दू जनसंख्या पहले से घटी है।

‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव हरेंद्र प्रताप ने अपने लेख में नेपाल सीमा पर मरदसों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण गिरोह की सक्रियता को भी इसी साजिश का हिस्सा बताया। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम बहुल इलाकों मुजफ्फरनगर (50.14%), मुरादाबाद (46.77%), बरेली (50.13%), सीतापुर (129.66%), हरदोई (40.14%), बहराइच (49.17%) और गोंडा (42.20%) से ‘मुस्लिम पट्टी’ बनाने की साजिश है। 

राज्यसभा चुनाव में भी ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’: कॉन्ग्रेस ने हरियाणा के 28 विधायकों को चार्टेड प्लेन से रायपुर भेजा, राजस्थान में भी सुभाष चंद्रा ने बिगाड़ी गणित

राजस्थान में राज्यसभा की चार सीटों और हरियाणा में 2 सीट के लिए 10 जून को मतदान है। चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियाँ जोर पकड़ती जा रही हैं।

इस बीच हरियाणा कॉन्ग्रेस ने अपने 31 में से 28 विधायकों को एक चार्टर्ड विमान से छत्तीसगढ़ भेज दिया है ताकि वो क्रॉस वोटिंग न कर सकें। दिल्ली में गुरुवार (2 जून 2022) को हरियाणा कॉन्ग्रेस के सभी विधायकों को बुलाया गया था, जहाँ सब इकट्ठा हुए और उसके बाद एक बस के जरिए सभी दिल्ली एयरपोर्ट गए। एयरपोर्ट पर एक प्राइवेट चार्टर्ड विमान पहले से ही खड़ा था, जिसमें सवार होकर ये सभी विधायक रायपुर गए, जहाँ एक रिसॉर्ट में ठहराया जाएगा। बस में इन विधायकों के साथ दीपेंद्र हुडडा भी बैठे थे, जिन्हें विधायकों को इकट्ठा रखने की जिम्मेदारी दी गई है।

हरियाणा कॉन्ग्रेस प्रभारी विवेक बंसल ने बताया, “सभी विधायक पहुँचेंगे। हम सभी जहाँ जाएँगे वो आपको पता चल जाएगा। सभी एकजुट हैं। सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा के आवास पर पहुँचे हैं। बस यहीं है, हम सब कहीं जाएँगे लेकिन मंजिल तो बाद में पता चलेगी। सभी विधायक एकजुट हैं। कोई विधायक नाराज नहीं है। 28 विधायक ‘चिंतन और प्रशिक्षण शिविर’ के लिए जा रहे हैं। 28 विधायकों में से विधायक किरण चौधरी और दो अन्य भी बाद में हमसे जुड़ेंगे।”

वहीं दिल्ली में कॉन्ग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, “सभी विधायक वहाँ (छत्तीसगढ़) जाएँगे। मैं बीजेपी से कहना चाहता हूँ कि वह अपने हरियाणा के विधायकों को सुरक्षित रखे।”

हरियाणा से अजय माकन को कॉन्ग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया है। पार्टी इस बार पहले से ही सचेत है ताकि कोई खेल न होने पाए। पिछले राज्य सभा चुनाव में दूध का जला कॉन्ग्रेस नेतृत्व इस बार छाछ भी फूँक-फूँक कर पी रहा है। हरियाणा से राज्यसभा की दो सीटें अगस्त में खाली हो जाएँगी क्योंकि भाजपा के समर्थन से निर्दलीय चुने गए मीडिया दिग्गज सुभाष चंद्रा और भाजपा नेता दुष्यंत गौतम का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। जननायक जनता पार्टी (जजपा) के प्रमुख अजय सिंह चौटाला ने कहा कि उनकी पार्टी के 10 विधायक निर्दलीय के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल करने वाले कार्तिकेय शर्मा का समर्थन करेंगे।

हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा में, भाजपा के पास 40 जबकि कॉन्ग्रेस के पास 31 विधायक हैं। भाजपा की सहयोगी जजपा के पास 10 विधायक हैं, जबकि इंडियन नेशनल लोक दल और हरियाणा लोकहित पार्टी के एक-एक और सात निर्दलीय विधायक हैं। नाम वापस लेने की आखिरी तारीख तीन जून है।

राज्यसभा की दो सीटों के लिए मतदान 10 जून को होगा। राजस्थान से राज्यसभा की चार सीटों के लिए अब कुल पाँच प्रत्याशी मैदान में हैं जिनमें कॉन्ग्रेस के तीन, भाजपा का एक व एक निर्दलीय उम्मीदवार है। मतदान 10 जून को होगा। राजस्थान में भाजपा ने निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा को समर्थन देकर कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है। इस कारण से कॉन्ग्रेस पार्टी ने क्रॉस वोटिंग से बचने के लिए रिजॉर्ट पॉलिटिक्स का सहारा लेना शुरू कर दिया है। जिससे सत्तारूढ़ कॉन्ग्रेस ने अपने विधायकों को उदयपुर भेजने का फैसला किया है।

2010 में ₹5 लाख से शुरु करके ₹800 करोड़ की संपत्ति: जानिए क्या है ‘यंग इंडियन’ से गाँधी परिवार का नाता, क्यों राहुल-सोनिया हैं ED के घेरे में?

नेशनल हेराल्ड (National Herald) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी (Sonia Gandhi) और उनके बेटे राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) को तलब किया है। ईडी के अनुसार, गाँधी परिवार द्वारा नियंत्रित एनजीओ, जिसकी शुरुआत 2010 में केवल 5 लाख रुपए से हुई थी, अब उसकी संपत्ति 800 करोड़ रुपए से अधिक है। इस समय हेराल्ड हाउस के बाहर एक पासपोर्ट कार्यालय है।

यह कहानी 2008 में शुरू होती है, जब नेशनल हेराल्ड की प्रकाशक कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) लगभग बंद होने की कगार पर थी। यह वह समय था, जब AJL के मालिक कॉन्ग्रेस ने छपाई और प्रकाशन व्यवसाय को बंद कर दिल्ली, मुंबई, पंचकूला, लखनऊ और पटना के प्रमुख स्थानों पर मौजूद इसकी प्रॉपर्टी से कमाई का दूसरा विकल्प तलाशा। कंपनी ने अखबार छापना भी बंद कर दिया। कॉन्ग्रेस पार्टी ने इन शहरों के प्राइम लोकेशनों पर मौजूद इसकी प्रॉपर्टी को उस समय औने-पौने दामों में खरीदी थी, जब संबंधित राज्यों में उसकी सरकारें हुआ करती थीं। 

2010 के नवंबर में सोनिया गाँधी, ऑस्कर फर्नांडीज और गाँधी परिवार के कुछ अन्य करीबियों ने एक नई कंपनी ‘यंग इंडियन’ बनाई। जब यह कंपनी अस्तित्व में आई तो इसके पास सिर्फ 5 लाख रुपए की पूँजी थी। कुछ ही समय बाद कथित रूप से इसने कोलकाता स्थित एक शेल कंपनी से 1 करोड़ रुपए का लोन लिया, ताकि यह कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ एजेएल और उसकी सभी संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए लेन-देन कर सके। आज की तारीख में सोनिया गाँधी, उनके बेटे राहुल गाँधी और बेटी प्रियंका गाँधी यंग इंडियन कंपनी के सबसे बड़े शेयरहोल्डर हैं। इसकी अब पूरे देश में 800 करोड़ रुपए की संपत्ति है। 2017 में आयकर विभाग ने यंग इंडियन द्वारा एजेएल के अधिग्रहण को चुनौती दी। आईटी विभाग के आरोपों को खँगालने के बाद सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी की आयकर रिटर्न की फाइल फिर सवालों के घेरे में आ गई थी।

आयकर विभाग ने भी यंग इंडियन के द्वारा एसोसिटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) की खरीद को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने आयकर विभाग के आरोपों की पुष्टि की थी और उसे सोनिया और राहुल गाँधी के आईटी रिटर्न खोलने की इजाजत भी दी थी, जिनके पास यंग इंडियन का अधिकांश शेयर है। 

दरअसल, यंग इंडियन को सेक्शन 25 के तहत एक चैरिटेबल संस्था बनाई गई थी, जिसे टैक्स से छूट दी गई थी। गाँधी परिवार की कंपनी ने आयकर विभाग में इस छूट के लिए मार्च 2011 को आवेदन दिया था, जब केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस की सरकार थी और 9 मई 2011 को बिना किसी दिक्कत के इसे मंजूरी भी दे दी गई।

बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित नेशनल हेराल्ड का ऑफिस (फोटो साभार: Live Law)

एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में पंजीकृत होने के बावजूद यंग इंडियन ने पब्लिशिंग हाउस होने की आड़ में संपत्तियों का अधिग्रहण करना शुरू कर दिया। इसे वर्ष 2010-11 में भी टैक्स में छूट प्राप्त हुआ। यंग इंडियन अपनी बेशकीमती संपत्तियों पर नियंत्रण के लिए संघर्ष कर रही है, जिसमें दिल्ली का हेराल्ड हाउस भी शामिल है। इसकी अनुमानित कीमत करोड़ों में है। आवास और शहरी विकास मंत्रालय ने इसकी लीज इस आधार पर रद्द कर दिया था कि अखबार छापने की जगह इसका इस्तेमाल वित्तीय फायदे के लिए किया जा रहा है, जो कि लीज के नियमों का उल्लंघन है। 

गाँधी परिवार ने इस आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे खारिज किया जा चुका है। पंचकूला की प्रॉपर्टी भी पहले ही ईडी जब्त कर चुकी है। सोनिया और राहुल गाँधी को प्रवर्तन निदेशालय अधिकारियों के सामने कंपनी की इन्हीं के बारे में बताना है। बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस, एजेएल द्वारा अधिग्रहित पहली संपत्तियों में से एक था। इमारत वर्तमान में भारत सरकार को किराए पर दी गई है, जो अपने परिसर में एक पासपोर्ट सेवा केंद्र चलाती है। आवास और शहरी विकास मंत्रालय ने वर्तमान में सैकड़ों करोड़ की कीमत के आवंटन खंड के उल्लंघन का हवाला देते हुए अपनी लीज डीड रद्द कर दी है।

संपत्ति के कब्जे को लेकर गाँधी परिवार पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगने के बाद 2019 में ईडी ने पंचकूला में एजेएल द्वारा अधिग्रहित 65 एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया। गाँधी परिवार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला एजेएल के स्वामित्व वाली संपत्तियों के अधिग्रहण के बाद यंग इंडियन को ट्रांसफर किए जाने के बाद शुरू हुआ। ईडी ने जमीन की जानकारी का खुलासा करते हुए बताया कि प्लॉट नंबर सी-17, सेक्टर 6, पंचकूला को एजेएल को तत्कालीन हरियाणा के सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा ने 1982 में पहली बार आवंटित किया था।

कंपनी द्वारा वाणिज्यिक हितों के लिए भूमि का उपयोग करते पाए जाने के 10 साल बाद आवंटन रद्द कर दिया गया था। हालाँकि, वही जमीन कंपनी को 2005 में महज 59.39 लाख रुपए में आवंटित की गई थी। इसी तरह मई 2020 में ईडी ने मुंबई के बांद्रा में एजेएल की संपत्ति को कुर्क किया, जिसमें एक 9 मंजिला इमारत भी शामिल है। इसकी कीमत 16.38 करोड़ रुपए है। ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से संबंधित कुर्की आदेश एजेएल और उसके चेयरमैन-सह-मैनेजिंग डायरेक्टर रहे मोती लाल वोरा के खिलाफ जारी किया गया था।