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जानवरों के लिए आ गया कोरोना का पहला मेड इन इंडिया वैक्सीन, Anocovax के बारे में जानिए सब कुछ

देश में कोरोना वायरस का खतरा अभी कम नहीं हुआ है। महाराष्ट्र, केरल के अलावा कई राज्यों में हालात फिर से चिंताजनक दिख रहे हैं। पिछले कुछ समय से इंसानों के साथ-साथ जानवरों में भी तेजी से कोरोना संक्रमण फैलने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच भारत में जानवरों को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए ‘एनोकोवैक्स (Anocovax)’ टीका लॉन्च किया गया है।

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने देश में पहली बार जानवरों के लिए विकसित की गई कोरोना वैक्सीन ‘एनोकोवैक्स’ को गुरुवार (9 जून 2022) को जारी किया। इस वैक्सीन को हरियाणा स्थित आईसीएआर-नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन इक्विन्स (एनआरसी) द्वारा विकसित किया गया है।

कई रिसर्च से खुलासा हुआ ​है कि इंसानों ने पालतू जानवरों को कोविड-19 वायरस से संक्रमित किया है। कई कुत्ते और बिल्लियाँ पीसीआर टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए हैं। पालतू जानवरों के लिए वैक्सीन आने से कुत्ते और बिल्लियाँ पालने वाले मालिक बेहद खुश हैं। खासकर ऐसे समय में जब कोविड-19 के मामले एक बार फिर बढ़ रहे हैं। पहले वह चाहकर भी उन्हें बचा नहीं पाते थे, लेकिन अब वह अपने पालतू जानवरों को यह वैक्सीन लगवाकर खतरनाक वायरस से बचा सकेंगे।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने एक बयान में कहा है कि एनोकोवैक्स जानवरों के लिए निष्क्रिय सार्स-कोव-2 डेल्टा (कोविड-19) टीका है। एनोकोवैक्स से मिलने वाली प्रतिरक्षा सार्स-कोव-2 डेल्टा और ओमिक्रोन दोनों वैरिएंट को बेअसर करती है। आईसीएसआर के मुताबिक, वैक्सीन में निष्क्रिय सार्स-कोव-2 (डेल्टा) एंटीजन हैं। इसमें अलहाइड्रोजेल एक सहायक के रूप में है। ऐसे में ये वैक्सीन जिन जानवरों को लिए सबसे ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है उनमें कुत्ते, शेर, तेंदुआ, चूहे और खरगोश प्रमुख रूप से शामिल हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा (University Of Florida) के वैज्ञानिकों को ताजा अध्ययन में इस बात के सबूत मिले हैं कि कुछ कोरोना वायरस, जो पहले केवल जानवरों को संक्रमित कर रहे थे, वे अब और खतरनाक हो गए हैं। अब यह सूअरों और कुत्तों से इंसानों में फैल सकता है।

वैज्ञानिकों ने SARS-CoV-2 को 29 अलग-अलग जानवरों में पाया है, जिनमें सफेद पूँछ वाले हिरण, बिल्ली, कुत्ते, फेरेट्स (ferrets), चूहे, ऊदबिलाव (Otters) और बाघ शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर मामलों में जानवरों से लोगों को वायरस फैला है। नवंबर 2020 में, वैज्ञानिकों ने पाया कि मिंक ने लोगों में वायरस फैलाया है। उत्तरी अमेरिका में बड़ी संख्या में सफेद पूँछ वाले हिरण लोगों के करीब रहते हैं। जनवरी से मार्च 2021 के बीच मिशिगन, पेंसिल्वेनिया, इलिनोइस और न्यूयॉर्क राज्यों में जिन हिरणों का परीक्षण किया गया, उनमें से 40% में एंटीबॉडी पाए गए। वहीं 2020 में मिंक से कम से कम 4 अमेरिकी लोगों में कोरोना वायरस फैला था।

कोलकाता के पार्क सर्कस में फायरिंग, महिला की हत्या कर खुद को भी मारी गोली: पुलिस ने कहा- नुपूर शर्मा पर हुए प्रदर्शन से नहीं ताल्लुक

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के पार्क सर्कस इलाके में शुक्रवार (10 जून 2022) को फायरिंग की घटना हुई। कोलकाता आर्म्ड फोर्स के एक कॉन्स्टेबल ने इस घटना को अंजाम दिया। एक महिला की हत्या करने के बाद उसने खुद को भी गोली मार ली।

इस कॉन्स्टेबल की पहचान चाडुप लेप्चा के तौर पर हुई है। पुलिस ने बताया है कि शुरुआती पड़ताल से पता चला है कि इस मामले का नुपूर शर्मा के बयान के खिलाफ पार्क सर्कस इलाके में हुए प्रदर्शन से कोई ताल्लुक नहीं है। उल्लेखनीय है कि जुमे की नमाज के बाद देश के विभिन्न शहरों की तरह ही इस इलाके में भी प्रदर्शन हुआ है।

लेप्चा बांग्लादेश के डिप्टी हाई कमीशन में ही तैनात था। रिपोर्ट के मुताबिक, वह कोलकाता आर्म्ड पुलिस फोर्स की पाँचवी बटालियन से था। शुक्रवार को ही वह छुट्टी से वापस ड्यूटी पर लौटा था। बताया जाता है कि लेप्चा डिप्रेशन में था। पुलिस का कहना है, “हम इलाके के सीसीटीवी से फुटेज को जुटा रहे हैं। हमारे कॉन्स्टेबल की मौत हो गई है। दो अन्य घायल हैं।”

इस घटना में जिस महिला की मौत हुई है वो एक राहगीर थी, जो वहाँ से गुजरते वक्त इस गोलीबारी का शिकार हो गई। हालाँकि, पुलिसकर्मी ने ऐसा क्यों किया, ये स्पष्ट नहीं हो सका है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मिशन के पास पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी ने कम से कम 10 राउंड फायरिंग की। गैरेज चलाने वाले एक स्थानीय भी इसमें घायल हुआ है और उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है।

घटना के बाद वहाँ अफरा-तफरी मच गई और लोग भागने लगे। दुकानदारों ने भी अपनी दुकानों के शटर गिरा दिए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे के आला अधिकारी भी मौके पर पहुँचे। बाबू शेख नाम के चश्मदीद ने बताया कि सारा घटनाक्रम करीब पाँच मिनट तक चला। एक अन्य स्थानीय निवासी अराफात मुल्ला ने कहा कि उसने मिशन के पास पुलिसकर्मी को अंधाधुंध फायरिंग करते देखा। मुल्ला ने कहा, “मेरे भाई को चोटें आईं और उसे अस्पताल ले जाना पड़ा। मैं जान बचाने के लिए गैरेज में भागा।”

जम्मू की मस्जिद से मौलाना ने नूपुर शर्मा और आशीष कोहली का सिर कलम करने की धमकी दी: जाने TOI, HT ने सच छिपाकर पाठकों को कैसे किया गुमराह

मेन स्ट्रीम मीडिया संस्थान लंबे समय से इस्लामवादियों और चरमपंथियों के लिए नरम रुख अख्तियार करते रहे हैं। तथ्यों को छिपाने और पाठकों को अंधेरे में रखने की इनकी पुरानी आदत है, जिसके चलते पिछले कुछ सालों से इस्लामवादियों के हौसले बुलंद हुए हैं।

हाल ही में द टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) और हिंदुस्तान टाइम्स (HT) जैसे मुख्य धारा के प्रमुख मीडिया संस्थानों ने जम्मू की एक मस्जिद में एक मौलाना द्वारा दी गई धमकियों को अपने पाठकों तक नहीं पहुँचाने का फैसला किया।

इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी के मामले में बीते दिनों जम्मू-कश्मीर से एक बेहद खतरनाक मंसूबों वाला वीडियो सामने आया था, जिसमें भीड़ के सामने एक मुल्ला हिंदुओं के लिए अपशब्द कह रहा था और उनका गला काटने की बात कह रहा था। यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया था।

गला काटकर हत्या करने की धमकी देते हुए मौलाना वीडियो में कहता है, “भाइयों, वक्त हमें सर कलम करना भी सिखाता है। इसलिए बातों को जेहन में बिठा दो कि हम खामोश तब तक हैं, जब तक कि हमारा बर्दाश्त कायम है। बर्दाश्त के बाहर निकल गए तो फिर नूपुर शर्मा क्या, वो आशीष कोहली कुत्ता क्या, वो नूपुर शर्मा ‘गंदी’ क्या, उनके सर कहीं और धड़ कहीं और मिलेंगे।”

मौलाना ने हिंदुओं का मजाक उड़ाते हुए यह भी कहा था, “गाय का पेशाब पीने वालों का, गोबर के अंदर नहाने वालों की हैसियत ही क्या है दुनिया में? इनको जो रिस्क मिलता है हमारी दहशत से मिलता है। इनको जो हवा मिलती है हमारी बरकत से मिलती है। इनको जो दरिया से पानी मिलता है, हमारी बरकत से मिलता है। वरना इनका वजूद क्या है?”

मौलवी ने अपनी तकरीर में आशीष कोहली के सिर को धड़ से अलग करने की बात इसलिए कही, क्योंकि कोहली ने नूपुर शर्मा को अपना समर्थन था। उसके जहरीले भाषण के बाद भड़के सांप्रदायिक तनाव के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया गया।

हिंदुस्तान टाइम्स और टाइम्स ऑफ इंडिया ने तथ्यों को छिपाया

इसी बीच टाइम्स ऑफ इंडिया और हिंदुस्तान टाइम्स जैसे मीडिया संस्थानों को अपने पाठकों को अधूरी और भ्रामक जानकारी एक और मौका मिल गया। इस मौके को भुनाते हुए हिंदुस्तान टाइम्स (HT) ने अपना लेख, ‘कर्फ्यू लगाया, सेना को फ्लैग मार्च के लिए बुलाया गया’ इस शीर्षक के साथ प्रकाशित किया।

इस लेख में संस्थान ने मौलवी द्वारा हिंदुओं का मजाक उड़ाया गया, उन्हें अपशब्द कहे गए, जहरीला भाषण दिया गया आदि बातों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। हालाँकि, भड़काऊ भाषण का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया है। इसके बावजूद संस्थान या कह लें संपादक ने अपने पाठकों तक इस सच को पहुँचना जरूरी नहीं समझा।

साभार: हिंदुस्तान टाइम्स

वीडियो में साफ दिख रहा है कि मुल्ले के चारों तरफ सैकड़ों लोग मौजूद हैं। वीडियो में सामने मस्जिद दिख रही है और अगल-बगल के मकानों की छतों पर भी लोग खड़े नजर आ रहे हैं। उसकी भड़काऊ तकरीर के बीच में भीड़ अल्लाह-हू-अकबर और या रसूल के नारे लगा रही है। इस दौरान नूपुर शर्मा और उनका समर्थन करने वाले आशीष कोहली लिए ‘सर तन से जुदा’ के नारे भी लगाए गए।

इसी तरह, टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) ने भी तथ्यों और सच्चाई से परे एक लेख प्रकाशित किया। टाइम्स ऑफ इंडिया ने ‘सांप्रदायिक तनाव के बाद जम्मू-कश्मीर में कर्फ्यू’ शीर्षक वाले अपने लेख में लिखा, “जम्मू की एक मस्जिद में एक मौलवी ने हिंदुओं का अपमान किया, उन्हें गाय का पेशाब पीने वाला बताया। बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा और पत्रकार आशीष कोहली को मौत की धमकी जारी कर सांप्रदायिक उन्माद को बढ़ावा दिया।”

साभार: टाइम्स ऑफ इंडिया

टाइम्स ऑफ इंडिया के लेख ने एक कदम आगे बढ़कर नूपुर शर्मा और आशीष कोहली के खून के प्यासे इस्लामवादियों का बचाव करते हुए कहा कि विवादित टिप्पणी के बाद समुदाय को उकसाया गया। हालाँकि, जम्मू में मस्जिद के बाहर क्या हुआ, इस पर विस्तार से नहीं बताया गया कि कहीं ऐसा न हो कि लोगों का ध्यान विवादित टिप्पणी से हटकर इस्लामवादियों के ‘सर तन से जुदा’ की धमकी देने और गौमूत्र के साथ हिंदुओं का अपमान करने पर चला जाए।

बता दें कि वीडियो में मौलाना ने यह भी कहा था, “नबी का कलमे पढ़ने वाला मुसलमान खुद मैदान में आए। ये भगवे भी हमारे दुश्मन, RSS भी हमारी दुश्मन तो मैं इसलिए अंजुमन इस्लामिया की तरफ से तमाम आवाम का शुक्रिया करता हूँ। मैं इनको (हिंदुओं) बताना चाहता हूँ कि सबसे कम दर्जे का मुसलमान इतना ईमान रखता है कि दुनिया के किसी भी ताकत गुस्ताख-ए-नबी का सर कलम कर सकता है।”

खुद को शांतिप्रिय बताते हुए मौलाना ने यह भी कहा था, “हम इंसाफ पसंद हैं। हमारा मजहब अमनपसंद मजहब है। प्रशासन को चाहिए कि जो अजान के खिलाफ बोले, उसका गला पकड़े। जो पर्दे के खिलाफ बोले उनका गला पकड़े। ये गला नहीं पकड़ सकते तो हम गला काटने के लिए तैयार हैं।”

मुंबई में सड़क पर निकलीं बुर्कानशीं महिलाएँ, राँची में थाना प्रभारी का सिर फोड़ा: जुमे की नमाज के बाद यूपी के भी कई जिलों में हिंसा

महाराष्ट्र के नवीं मुंबई में मुस्लिम महिलाओं ने सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया। बुर्के में महिलाओं को सड़क पर मार्च करते हुए देखा गया। पैगंबर मुहम्मद पर भाजपा के निलंबित प्रवक्ताओं नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल द्वारा टिप्पणी किए जाने के आरोप में जुमे की नमाज के बाद शुक्रवार (10 जून, 2022) को देश भर में हिंसा हुई। आगजनी और पत्थरबाजी कर के दंगे किए गए। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हालात सबसे ज्यादा बिगड़ गए।

झारखंड में पुलिस को मुस्लिम भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी। राँची के हनुमान मंदिर के पास भी भीड़ पहुँच गई थी। वो सभी नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल की गिरफ़्तारी की माँग कर रहे थे। सुबह से ही नारेबाजी शुरू हो गई थी। कई दुकानें बंद रखी गई थीं। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों ने भी आगजनी कर के विरोध प्रदर्शन किया। मुंबई में मुस्लिमों ने नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल की गिरफ़्तारी के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया।

प्रयागराज के अलावा सहारनपुर, मोरादाबाद, लखनऊ और रामपुर में भी मुस्लिम भीड़ ने सड़क पर निकल कर नारेबाजी की। लखनऊ की टीले वाली मस्जिद से हजारों की भीड़ निकली, जिसे रोकने के लिए पुलिस को बड़ी संख्या में बैरिकेड्स लगाने पड़े। स्थिति नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल लगाए गए हैं। राँची के मुस्लिम दुकानदारों ने पहले से दुकानें बंद रखी थीं। मार्च कर रही भीड़ वापस जाने को कहने पर भड़क गई। डेली मार्किट के थाना प्रभारी अवधेश कुमार का सिर फोड़ दिया गया।

वो लहूलुहान हो गए। राँची में पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा। प्रयागराज में जख्मी पुलिसकर्मियों में RAF के मनीष कुमार नाम का एक जवान चोटिल हो गया। दिल्ली के जामा मस्जिद के बाहर भी बड़ी संख्या में भीड़ जुटी। कश्मीर में भी शटडाउन का माहौल है। राँची में कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया और पत्थरबाजी में सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुँचाया गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल लगाया गया है।

जिन्हें कभी पीठ पर लाद अस्पताल ले गए थे नानाजी देशमुख, वे पद्मश्री बाबा योगेंद्र नहीं रहे: संस्कार भारती के थे संस्थापक, लोक कलाकारों को मंच से जोड़ा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचारक और संस्कार भारती (Sanskar Bharti) के संरक्षक पद्मश्री से सम्मानित बाबा योगेंद्र का शुक्रवार (10 जून 2022) को लगभग 98 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले कुछ महीनों से बीमार चल रहे थे और लखनऊ के राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) सहित भाजपा (BJP) और संघ ने नेताओं ने गहरा दुख व्यक्ति किया है।

पीएम मोदी ने कहा, “देश सेवा में समर्पित पद्मश्री बाबा योगेंद्र जी के देहावसान से अत्यंत दुख हुआ है। उनका जाना संपूर्ण कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दे। ओम शांति!”

संघ की ओर से सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा, “संस्कार भारती के संरक्षक श्री योगेंद्र जी एक तपस्वी थे। उनके निधन से एक ज्येष्ठ प्रचारक के साधक जीवन का अंत हुआ। संगीत और कला क्षेत्र के राष्ट्रनिष्ठ साधकों को एक मंच पर लाना उनके जीवन की साधना थी। उनका जीवन सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।”

इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने ट्वीट कर कहा, “बाबा योगेंद्र भारतीय संस्कृति की विरासत को सहेजने के जीवंत प्रतीक थे। वे ऐसे प्रवासी थे, जिनका हर पग देश की सांस्कृतिक चेतना को नया जीवन प्रदान करता था। वे कहते थे कि ‘कला मिट्टी में प्राण फूँकती है, कला से संस्कारों का सृजन होता है व कला ही समाज को प्रेरित करने का कार्य करती है’।”

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा (JP Nadda) ने कहा, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं संस्कार भारती के संस्थापक ‘पद्मश्री’ बाबा योगेन्द्र जी को भावभीनी श्रद्धांजलि। भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने की दिशा में उनके अद्वितीय योगदान को सदैव याद किया जाएगा। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान प्रदान करे।”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा, “संस्कार भारती के संस्थापक, असंख्य कला साधकों के प्रेरणास्रोत, कला ऋषि, ‘पद्मश्री’ बाबा योगेंद्र जी का निधन अत्यंत दुःखद है। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान व उनके असंख्य प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति दें। ॐ शांति!”

बाबा योगेंद्र और उनका जीवन

बाबा योगेंद्र का जन्म 7 जनवरी 1924 को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में वकील विजय बहादुर श्रीवास्तव के घर हुआ था। जानकारों के अनुसार, बाबा योगेंद्र घर छह बहनों के इकलौते भाई थे। इससे पहले उनके जितने भाई पैदा हुए, सभी चल बसे। इसलिए उनके पिता ने इनके जीवन को बचाने के लिए रीति निभाते हुए पड़ोसी को बेच दिया था। इसलिए वे अपने पड़ोसी के यहाँ शुरुआत के पाँच-छह साल तक रहे।

बाबा योगेंद्र बचपन से ही संघ की शाखाओं में जाते थे। पढ़ाई के लिए जब वह गोरखपुर आए तो उनका संपर्क संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख से हुआ। इसके बाद नानाजी देशमुख के आह्वान पर वह 1960 में संघ के प्रचारक बने। उनका जीवन बहुत ही साधारण और सरल था।

संस्कार भारती के अखिल भारतीय साहित्य संयोजक रहे राज बहादुर सिंह के अनुसार, एक बार बाबा योगेंद्र बीमार पड़े तो अस्पताल तक ले जाने के लिए साधन की कमी को देखते हुए नानाजी देशमुख उन्हें अपनी पीठ पर लादकर ले गए। नानाजी के इस निस्वार्थ भाव को देखकर वह प्रभावित हो गए प्रचारक बनने का निर्णय लिया।

प्रचारक के रूप में उनकी प्रतिभा को देखकर संघ ने 57 वर्षीय बाबा योगेंद्र को 1981 में ‘संस्कार भारती’ के निर्माण कार्य का कार्यभार सौंपा। उन्होंने अथक परिश्रम करते हुए 41 वर्षों में संस्कार भारती को कला क्षेत्र का अग्रणी संस्थान बना दिया। उनके इस कलाप्रेम को देखते हुए पद्मश्री से पुरस्कृत किया गया था।

बाबा योगेंद्र ने कई कलाकारों, लोक कला के जानकारों को संस्कार भारती से जोड़ा। देश भर में कहीं की भी लोक कला हो, बाबा योगेंद्र ने उसको संस्कार भारती का हिस्सा बनाया। बड़े कलाकारों की जगह वे छोटे-छोटे कलाकारों को संगठन से जोड़ते थे। उन्होंने कला और संस्कृति से जुड़े सैकड़ों आयोजन किए। इस तरह संस्कार भारती के आजीवन संरक्षक रहते हुए उन्होंने इसे कला के क्षेत्र का उत्कृष्ठ संस्थान बना दिया।

जुमे की नमाज के बाद प्रयागराज में दंगा और आगजनी, ADG की गाड़ी को भी नहीं छोड़ा: कई पुलिसकर्मी घायल, DM-SSP पर भी चले पत्थर

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शुक्रवार (10 जून, 2022) को जुमे के दिन दंगे भड़क गए। नमाज के बाद मस्जिदों से निकली भीड़ ने जम कर पत्थरबाजी और आगजनी की। ऐसा तब हो रहा है, जब प्रदेश भर में अलर्ट जारी था और मस्जिदों के आसपास सुरक्षा कड़ी थी। आगजनी और पत्थरबाजी के अलावा गोलीबारी भी हुई है। ये घटनाएँ अटाला से शुरू हुईं। पुलिस ने रोका तो उन पर पत्थर चलाए गए। जब लाठीचार्ज से भी बात नहीं बनी तो पुलिस को आँसू गैस के गोले छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।

हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी। खुद आईजी राकेश सिंह घायल हो गए। कई अन्य पुलिसकर्मी भी जख्मी हुए हैं। एक ट्रॉली को आग के हवाले कर दिया गया। DM और SSP के अलावा कई पत्रकारों को भी पत्थरबाजी में चोट पहुँची है। RPF के कई जवान भी जख्मी हुए हैं। कई घंटे तक ये पत्थरबाजी चलती रही। प्रशासन सख्त चेतावनी दिए जा रहा है। इंटरनेट से लेकर सड़क तक पर सख्ती के बावजूद प्रयागराज में कानपुर जैसे हालात बन गए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दंगाइयों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया है। प्रदेश के DGP डीएस चौहान, ADG (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार और अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय के कंट्रोल रूम में मौजूद हैं। पुलिस दंगे के दौरान लगातार कहती रही कि ‘अब बहुत हो गया’, लेकिन दंगाई नहीं रुके। लाउडस्पीकर से दंगाइयों को समझाने की कोशिश की गई। भगदड़ के बाद सड़कों पर चप्पल बिखरे हुए मिले।

प्रयागराज में ADG की गाड़ी को भी तोड़फोड़ में क्षतिग्रस्त कर दिया गया। भाजपा के निलंबित प्रवक्ताओं नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल द्वारा पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी के विरोध में ये सब किया जा रहा है। स्थिति नियंत्रित करने पहुँचे ADG की गाड़ी को ही नुकसान पहुँचाया गया। इन सबके अलावा हैदराबाद के मक्का मस्जिद के बाद भी जुमे की नमाज के बाद विरोध प्रदर्शन हुआ। लुधियाना में भी शाही इमाम के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुआ। आगजनी भी की गई। महाराष्ट्र के सोलापुर में भी मुस्लिमों ने बड़ी संख्या में जुटान कर के एक रैली निकाली।

‘सच बोलना बगावत है तो मैं भी बाग़ी’: नूपुर शर्मा विवाद के बाद बोली MP साध्वी प्रज्ञा – असलियत बताने से क्यों होती है तकलीफ?

भाजपा की निलंबित नेता नूपुर शर्मा के पैगंबर मुहम्मद को लेकर कथित विवादित बयान का भोपाल से बीजेपी की सांसद साध्वी प्रज्ञा ने समर्थन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सदा से हिन्दुओं का देश रहा है। सनातन जिंदा रहेगा और इसे जिंदा रखना हम सभी का कर्तव्य है। इसके साथ ही उन्होंने ट्वीट किया, “सच कहना अगर बगावत है, तो समझो मैं भी बागी हूँ।”

भाजपा सांसद के बयान का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो पत्रकारों से बात करते हुए कहती हैं, “मैं इस नाम से बदनाम हूँ कि मैं सत्य बोलती हूँ, फिर चाहे कहीं भी हो, चाहे कुछ भी हो। ये भी एक सत्य है कि ज्ञानवापी में शिव मंदिर था, है और रहेगा। हमारे हिन्दू देवी-देवता और सनातन के जो मूल धर्मों पर जो भी कुठाराघात करेगा तो हम भी किसी की असलियत को उजागर करेंगे। आप हमारी असलियत तुम बता दो हमें स्वीकार है, लेकिन अगर आपकी असलियत को हम बताते हैं तो तुम्हें तकलीफ क्यों होती है। इसका अर्थ ये है कि कहीं न कहीं इतिहास गंदा है।”

वहीं पैगंबर मुहम्मद पर कथित टिप्पणियों के बाद उन्हें इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा दी जा रही धमकियों को लेकर साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि विधर्मियों ने तो सदा से ऐसा ही किया है। बीजेपी सांसद ने कमलेश तिवारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए कहा कि कमलेश तिवारी ने कुछ कहा, उससे इन्हें तकलीफ हुई और इन्होंने उन्हें काट डाला। अगर कोई कुछ कहता है तो उसे धमकियाँ दी जाती हैं।

साध्वी प्रज्ञा ने कहा, “हमारे देवी देवताओं पर ये फिल्में बनाते हैं, उसका डायरेक्शन करते हैं और गालियाँ देते हैं। ये सब आज से नहीं, इनका एक पूरा वामपंथी इतिहास रहा है। पूरी तरह से ये अपनी विधर्मी मानसिकता को दिखाते हैं। ये भारत है। हिन्दुओं का है। यहाँ सनातन जिंदा रहेगा। इसे जिंदा रखना हम लोगों की जिम्मेदारी है और हम रखेंगे।”

नूपुर शर्मा के कथित बयान पर इस्लामिक देशों के ऐतराज पर टिप्पणी करते हुए बीजेपी सांसद ने कहा कि विधर्मी लोग हर जगह अपनी मानसिकता को स्थापित करना चाहते हैं। जबकि सनातन धर्म अपने धर्म को स्थापित करता है, जो कि मानवीय हितों के लिए है।

गौरतलब है कि नूपुर शर्मा के कथित बयान पर कतर समेत कई इस्लामिक मुल्कों ने अपनी नाराजगी भारत के समक्ष जताई थी। इस पर भारत सरकार ये स्पष्ट कर चुकी है कि किसी व्यक्ति की निजी टिप्पणी सरकार के रुख को नहीं दर्शाती। बहरहाल नूपुर शर्मा के कथित बयान के बाद बीजेपी ने उन्हें और नवीन जिंदल को पार्टी से बाहर कर दिया था।

जुमे की नमाज के बाद प्रदर्शन, पथराव: दिल्ली की जामा मस्जिद से लेकर सहारनपुर तक नूपुर शर्मा-नवीन जिंदल के खिलाफ लगे नारे, देखिए Video

इस्लामिक देशों की प्रतिक्रिया के बाद देश के कट्टरपंथी दबाव की राजनीति पर काम करते हुए जगह-जगह प्रदर्शन के नाम पर उकसाने और हिंसा भड़काने के काम में लग हैं। कथित ईशनिंदा के नाम पर दिल्ली से लेकर बंगाल और कर्नाटक तक विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं और भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल की गिरफ्तारी और फाँसी की माँग करते हुए सरकार पर दवाब बनाया जा रहा है।

दरअसल, कट्टरपंथियों ने टीवी पर बहस के दौरान हिंदू देवी-देवताओं के लिए इस्तेमाल की जा रही अपमानजनक भाषा के विरोध में भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा द्वारा बोले गए सच को इन अपने मतलब का मुद्दा बना दिया। हालाँकि, सच बोलने के बावजूद भी नूपुर शर्मा ने माफी माँगी और पार्टी ने भी उन्हें बाहर किया, फिर भी देश के अलग-अलग हिस्सों में इसका विरोध प्रदर्शन के नाम पर दंगा भड़काने की कोशिश की जा रही है।

शुक्रवार (10 जून 2022) को जुमे की नमाज के बाद दिल्ली की जामा मस्जिद में पहुँचे हजारों नमाजियों ने विरोध प्रदर्शन किया और पूर्व भाजपा नेता के लिए फाँसी की माँग की। इस दौरान अल्लाह-हू-अकबर और नूपुर शर्मा मुर्दाबाद और नवीन जिंदल मुर्दाबाद के नारे लगाए गए।

शाही इमाम का कहना है, “हम नहीं जानते हैं कि कौन लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। मुझे ऐसा लगता है कि ये लोग ओवैसी और उनकी पार्टी AIMIM से जुड़े लोग हैं। हमने पहले ही कह दिया था कि अगर वे प्रदर्शन करना चाहते हैं तो वे कर सकते हैं, लेकिन हम उनका समर्थन नहीं करेंगे।”

इमाम के बयान के बयान से स्पष्ट है कि उन्होंने प्रदर्शन की इजाजत तो दे दी, लेकिन गड़बड़ी होने की दशा में खुद को कानून के पंजे से बचाने के लिए यह कहते हुए अलग कर लिया कि वे इस प्रदर्शन का समर्थन नहीं करेंगे, लेकिन प्रदर्शनकारी चाहें तो प्रदर्शन कर सकते हैं।

बता दें कि इसको लेकर ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भड़काऊ पोस्ट डालकर समुदायों के बीच द्वेष फैलाने का सिलसिला जारी है। इसको ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने दो अलग-अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। 

वहीं, कर्नाटक (Karnataka) में एक दरगाह के पास रस्सी से एक मानव आकृति के गले में फंदा डालकर लगाया गया है। उस पर नूपुर शर्मा की तस्वीर लगाई गई है। यह घटना बताती है कि कट्टरपंथी नूपुर शर्मा की हत्या के लिए मुस्लिमों को उकसा रहे हैं।

दिल्ली के अलावा, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर (Saharanpur, Uttar Pradesh) में भी मुस्लिमों की भीड़ ने नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल के खिलाफ प्रदर्शन की। इस दौरान हजारों की भीड़ उकसाऊ नारे लगाती रही। दिल्ली के जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी में भी प्रदर्शन किया गया।

सहारनपुर के नवाबगंज में जुमे की नमाज के बाद मुस्लिमों ने जुलूस निकाला। नवाबगंज से घंटाघर तक निकाले गए जुलूस जमकर भड़काऊ नारे लगाए गए। इसके बाद लौटती हुई जुलूस की भीड़ ने नेहरू मार्किट में खुली दुकानों पर जमकर पथराव किया। इसके बाद इलाके की दुकानें धड़ाधड़ बंद हो गईं। 

यूपी के देवबंद, लखनऊ, मुरादाबाद, प्रयागराज, कानपुर सहित कई शहरों में भी जुमे की नमाज के बाद नारेबाजी की गई। हालाँकि, देवबंद में पुलिस ने हंगामा कर रहे कई नमाजियों को हिरासत में ले लिया। वहीं, पश्चिम बंगाल के कोलकाता सहित कुछ अन्य शहरों और तेलंगाना के हैदराबाद में भी प्रदर्शन की खबरें आ रही हैं।

सेक्स के लिए करते थे चेन स्नैचिंग: गिरोह के सारे झपटमार HIV संक्रमित, 90 से बना चुके हैं शारीरिक संबंध

कर्नाटक पुलिस ने बेंगलुरु में चेन स्नैचिंग (Chain Snaching Gang) गिरोह का खुलासा किया है। इस गिरोह में तीन झपटमार हैं। तीनों एचआईवी से संक्रमित पाए गए हैं। पुलिस ने शुक्रवार (10 जून 2022) को बताया कि तीनों चेन स्नैचिंग के बाद गहनों को बेच देते थे। इससे मिले पैसे सेक्स वर्करों और लक्जरी लाइफ स्टाइल पर खर्च करते थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपित आदतन अपराधी हैं। इससे पहले भी तीनों को चेन स्नेचिंग के मामलों में गिरफ्तार किया गया था। 26 मई 2022 को जयनगर थाना क्षेत्र में आरोपितों ने नित्या नाम की महिला की सोने की चेन छीन ली थी। मामले की जाँच के दौरान पुलिस ने CCTV फुटेज और मोबाइल फोन कॉल्स को ट्रेस कर तीनों को मगदी के पास से गिरफ्तार किया।

पुलिस का कहना है कि इनको पकड़ने के लिए लंबे समय से प्रयास किया जा रहा था। इस अभियान के दौरान 2000 से अधिक फोन कॉल्स को ट्रेस किया गया। पुलिस का दावा है कि कुछ वक्त पहले इन तीनों की मुलाकात बेंगलुरु के परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में हुई थी। यहीं पर तीनों ने एक गैंग बनाने का फैसला किया।

गिरफ्तार किए गए आरोपितों के पास से 140 ग्राम सोने की 6 चेन और दो बाइक बरामद की गई है। जाँच अधिकारियों के मुताबिक, ये आरोपित सोने की चेन पहनी हुई अकेली महिलाओं को शिकार बनाते थे। ये महिला का पीछा करते थे और सुनसान जगह देख कर झपटमारी करते थे।

90 सेक्स वर्कर्स से बनाए संबंध

पुलिस के मुताबिक तीनों आरोपित 20-30 साल के हैं और एचआईवी संक्रमित हैं। यह बात इनको पता थी। बावजूद इसके ये सेक्स वर्कर्स को इसकी जानकारी दिए बिना उनके साथ संबंध बनाते थे। पूछताछ में इन्होंने खुलासा किया कि तीनों अब तक करीब 90 सेक्स वर्कर्स के साथ संबंध बना चुके हैं। इस जानकारी के सामने आने के बाद अब जयनगर पुलिस उन सभी सेक्स वर्कर महिलाओं की तलाश में जुट गई है, जिनके साथ इन्होंने संबंध बनाए थे।

PUBG के लिए माँ को गोली मारने के बाद नाबालिग ने दोस्तों संग की थी पार्टी, 10 घंटे तक तड़पती रही; कमरा खोल कर देखता था ज़िंदा है या मर गई

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में PUBG गेम खेलने से रोकने पर 16 साल के लड़के ने अपनी माँ को पिता के लाइसेंसी गन से गोली मार दी। माँ को गोली मारने के बाद उसने उसे एक कमरे में बंद कर दिया और लगातार यह देखता रहा कि वह जिंदा है या मर गई। उसे अपनी माँ को गोली मारने पर कोई पछतावा भी नहीं है।

माँ को गोली मारने के बाद उसने तीन दिनों तक घर में जमकर पार्टी की। शव से बदबू न आए इसके लिए वह लगातार रूम फ्रेशनर का छिड़काव करता रहा। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, उसने तीन दिनों तक माँ के शव को लखनऊ में अपने घर के अंदर ही छिपा रखा था। पुलिस ने खुलासा किया कि जब वह अगली सुबह उस कमरे में गया तो उसकी माँ की साँस चल रही थी। उसने खुलासा किया कि वह यह देखने के लिए बार-बार दरवाजा खोल रहा था कि वह जिंदा है या मर गई।

पुलिस ने कहा कि अगर उसने सुबह किसी को इसके बारे में बताया होता, तो उसकी माँ की जान बचाई जा सकती थी। बता दें कि लड़के ने लखनऊ में अपनी माँ की हत्या करके शव को एक कमरे में बंद कर दिया और छोटी बहन को दूसरे कमरे में बंद कर दिया। पूछताछ के दौरान उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया और कहा कि वह अपनी माँ से पबजी नहीं खेलने देने से नाराज हो गया और रविवार आधी रात को अपने पिता की लाइसेंसी बंदूक से उसकी गोली मारकर हत्या कर दी।

इसके बाद उसने अपने दोस्त को भी फोन किया था और बंदूक की नोक पर उसे धमकाया था कि वह शव को ठिकाने लगाने में मदद करे। लड़के ने उसे 5000 रुपए का ऑफर भी दिया और कहा कि वह इस घटना के बारे में किसी को न बताए। ये भी पता चला है कि उसकी माँ 10 घंटे तक तड़पती रही थी और बेटा मरने का इंतजार करता रहा।

गौरतलब है कि घटना लखनऊ के पीजीआई इलाके की है। यहाँ एल्डिको कॉलोनी में 40 वर्षीय साधना अपने 16 साल के बेटे और 10 साल की बेटी के साथ रहती थीं। साधना के पति आर्मी ऑफिसर हैं, जो कोलकाता में रहते हैं। साधना का बेटा पबजी गेम का आदी है। जब उसे गेम खेलने से रोका जाता तो वह अपनी माँ से झगड़ा करने लग जाता था। इसके बावजूद उसकी माँ उसे पबजी नहीं खेलने के लिए लगातार टोकती रहती थी। माँ ने रविवार (5 जून, 2022) को एक बार फिर बेटे को पबजी गेम खेलने से रोका। इस पर आगबबूला बेटे ने अपने पिता की लाइसेंसी पिस्टल से माँ के सिर में गोली दाग दी।