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मदरसे के मौलवियों ने बेहोशी का इंजेक्शन लगा नाबालिग का किया यौन शोषण, मारपीट और गुदा में चोट के निशान

गुजरात (Gujarat) के अहमदाबाद जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बापूनगर इलाके में स्थित मदनी मदरसा के दो मौलवियों ने 13 वर्षीय एक नाबालिग लड़के का यौन शोषण (Sexual Harassment) किया है। पीड़ित बच्चे का इलाज पास के ही शारदाबेन अस्पताल में किया जा रहा है। पीड़ित बच्चे के परिजनों की शिकायत पर आरोपितों के खिलाफ पुलिस ने POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज मामले की छानबीन शुरू कर दी है।

विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से ऑपइंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक, गोमतीपुर में रहने वाले दिहाड़ी मजदूर के एक परिवार ने घर के 6 बच्चों में से सबसे बड़े बच्चे (13) को 29 मई 2022 को बापूनगर के मदनी मदरसे में इस्लाम के बारे में पढ़ने के लिए भेजा था। जब इसके अगले दिन बच्चे ने अपने अम्मी-अब्बू को मदरसे में मौलवियों द्वारा की गई अमानवीय हरकतों के बारे में बताया तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

पीड़ित बच्चे ने बताया कि वहाँ मदरसे में उसके साथ मारपीट भी की गई। इसके बाद इलाज के लिए उसे शारदाबेन अस्पताल ले जाया गया। उसके शरीर पर मारपीट के साथ ही उसके गुदा पर भी यौन उत्पीड़न वाले चोट के निशान थे। पीड़ित के पिता ने कहा कि पीड़ित बच्चा सरकारी स्कूल नंबर-2 में कक्षा सात का छात्र है। अभी गर्मी की छुट्टियाँ चल रही है तो उन्होंने उसे इस्लामिक शिक्षा के लिए मदरसे में भेजा था। 29 मई की सुबह वो बच्चे को लेकर सुंदरमनगर के मदीना मदरसे में भी जानकारी के लिए ले गए थे। उसके बाद मदनी मदरसा में नाम लिखवा दिया।

अगले दिन 30 मई को जब वो सुबह करीब 3 बजे काम से लौटे तो देखा कि बच्चा घर पर आराम कर रहा था। जब उससे पूछताछ की गई तो उसने अपने साथ हुई बर्बरता की कहानी बताई। पीड़ित बच्चे के मुताबिक, रात करीब 10 बजे मदनी मदरसा का मुख्य मौलवी एक अन्य मौलवी के साथ उसके पास आया। बिना किसी कारण उसने उसके दाहिने पैर पर लकड़ी के डंडे से 7 बार मारा और दूसरे हाथ पर एक अन्य मौलवी ने इंजेक्शन लगा दिया। इससे वो बेहोश हो गया।

बच्चे ने अपने अब्बू से बताया कि जब उसे 30-35 मिनट बाद होश आया तो उसे गुदा में तेज दर्द हो रहा था। वो डरकर वहाँ से भाग निकला। मदरसे के 3 लोग उसे पकड़ने के लिए पीछे दौड़े, जिनसे बचने के लिए वह राजेंद्र पार्क के पास स्थित एक होटल में छिप गया। कुछ देर बाद वहाँ से निकलने के बाद एक बाइक पर लिफ्ट लेकर वो अपने घर आ गया।

इस मामले को लेकर बापूनगर थाने में दी गई शिकायत में कहा गया, “बापूनगर के सुंदरमनगर स्थित मदनी मदरसा के प्रमुख मौलवी और एक अन्य मौलवी ने मेरे बेटे के दाहिने पैर के टखने पर सात बार मारा और उसके बाएँ कंधे के पास इंजेक्शन लगा दिया, जिससे वह बेहोश हो गया। फिर उसका अप्राकृतिक यौन शोषण किया।” बच्चे के पिता का कहना है कि उसके बेटे को दूसरे मौलवी का नाम तो नहीं पता, लेकिन उसे देखकर वो पहचान लेगा।

पहले भी आते रहे हैं ऐसे मामले

गौरतलब है कि ये कोई पहली बार नहीं है, जब किसी मदरसे के मौलाना पर नाबालिग बच्चों का यौन शोषण करने का आरोप लगा हो। इससे पहले साल 2015 से 2019 तक 14 साल की बच्ची से नखतराना के धोरो गाँव के एक मदरसे के मौलवी शमसुद्दीन हाजी सुलेमान जाट ने कई बार रेप किया था। इस मामले में भुज कोर्ट ने 2020 में उसकी दो बार जमानत याचिका खारिज की थी।

इसी तरह से जनवरी 2022 में उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में 52 साल के मौलाना जमाल अहमद ने 8 साल की एक बच्ची के साथ रेप किया था। इसके बाद प्रदेश की पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।

इसी तरह से पिछले महीने (मई 2022) में 6 साल की बच्ची से रेप के मामले में राजस्थान के कोटा स्थित एक POCSO अदालत ने दोषी मौलवी अब्दुल रहमान को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

बहरहाल अहमदाबाद का 13 साल का नाबालिग अभी भी अस्पताल में भर्ती है और उसका इलाज किया जा रहा है। उसकी हालत में सुधार हो रहा है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने ‘नस्लीय शुद्धता’ के नाम पर आनुवंशिक शोध को लेकर फैलाया झूठ, संस्कृति मंत्रालय के खारिज करने बाद भी राहुल गाँधी ने दिया प्रोपेगेंडा का साथ

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस (TNIE) ने हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें उसने यह भ्रामक दावा किया गया था कि केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय ‘भारतीयों की नस्लीय शुद्धता’ का अध्ययन करने जा रहा है। इस रिपोर्ट में संस्कृति मंत्रालय द्वारा आनुवंशिक इतिहास का पता लगाने और ‘भारत में नस्लों की शुद्धता का पता लगाने’ के लिए अत्याधुनिक डीएनए प्रोफाइलिंग किट और मशीनों पर भी बात की गई है।

लेख में ‘प्यूरिटी ऑफ रेस’ वाला एंगल प्रो. वसंत शिंदे, जो बेंगलुरु में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्य करते हैं, वहाँ से लिया गया था। जबकि TNIE लेख में, भारतीय आबादी के आनुवंशिक इतिहास का पता लगाने के लिए जाँच की खबर को भारत में नस्लों की ‘शुद्धता’ का अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं के साथ जोड़ दिया गया था। जबकि ‘जाति’ की अवधारणा विशुद्ध रूप से एक सामाजिक अवधारणा है और इसका कोई जैविक आधार नहीं है।

यहाँ शुद्धता का मतलब भारतीय आबादी के बीच डीएनए हैलोग्रुप की उत्पत्ति का पता लगाना है। दोनों के बीच जानबूझकर पैदा किए संघर्ष से उन पाठकों को काफी परेशानी हुई जो लेख के अवैज्ञानिक दावों से हैरान थे। हालाँकि, जल्द ही, संस्कृति मंत्रालय ने लेख को स्पष्ट रूप से ‘भ्रामक’ बताते हुए खारिज कर दिया।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने ख़ारिज होने के बाद भी उस रिपोर्ट को ट्वीट किया, जिस पर पहले से ही ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ का लेबल लगाया गया था और परोक्ष रूप से नाजी जर्मनी में हिटलर की नस्लवादी नीतियों के साथ जोड़ा गया था। फिर भी TNIE के भ्रामक अंश को टैग करते हुए राहुल गाँधी ने ट्विटर पर लिखा, “पिछली बार जब किसी देश में ‘नस्लीय शुद्धता’ का अध्ययन करने वाला संस्कृति मंत्रालय था, तो यह अच्छी तरह से समाप्त नहीं हुआ था। भारत नौकरी की सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि चाहता है, ‘नस्लीय शुद्धता’ नहीं, प्रधानमंत्री।”

बता दें कि संस्कृति मंत्रालय ने 28 मई, 2022 को टीएनआईई के मॉर्निंग स्टैंडर्ड संस्करण में छपे लेख को ‘भ्रामक, शरारती और तथ्यों के विपरीत’ करार दिया। मंत्रालय ने अपने बताया कि यह प्रस्ताव आनुवंशिक इतिहास की स्थापना और ‘भारत में नस्लों की शुद्धता का पता लगाने’ से संबंधित नहीं है बल्कि भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण (एएनएसआई) के प्रस्ताव की योग्यता के तहत जाँच की जा रही है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

इस पूरे मामले में जाने-माने जेनेटिक साइंटिस्ट नीरज राय ने जानबूझकर भ्रामक लेख प्रकाशित करने के लिए द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की आलोचना की है। लेख को ‘शरारती’ बताते हुए उन्होंने कहा कि डीएनए अनुसंधान में मानव स्वास्थ्य और इतिहास के बारे में हमारी समझ में सुधार की काफी संभावनाएँ हैं, इसका इस तरह से दुष्प्रचार में उपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने राहुल गाँधी को टैग करते हुए लिखा, “नस्लीय शुद्धता कोई चीज नहीं है और नस्ल जैविक रूप से समर्थित संदर्भ भी नहीं है। यह राजनेताओं के लिए नस्लवाद का प्रचार करने का बस एक उपकरण रहा है और इसे आनुवंशिक वंश से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।”

लेखक और अर्थशास्त्री संजीव सान्याल, जिन्होंने भारतीय इतिहास और भूगोल पर कई किताबें लिखी हैं, ने कहा है कि यह जानबूझकर एक वैज्ञानिक अध्ययन को गुमराह करने का एक उत्कृष्ट मामला है। ” उन्होंने लिखा, “आर्कियो-जेनेटिक्स एक सुस्थापित क्षेत्र है और मानव यात्रा का पता लगाने का प्रयास करता है। और यह स्थापित करता है कि ‘शुद्ध जाति’ जैसी कोई चीज नहीं है। वास्तव में, हम एक ‘शुद्ध’ प्रजाति भी नहीं हैं।”

JNU के लेखक और वैज्ञानिक आनंद रंगनाथन ने जोर देकर कहा कि नस्ल एक जैविक अवधारणा नहीं है, बल्कि एक सामाजिक अवधारणा है। उन्होंने ट्वीट किया, “जाति कोई वैज्ञानिक अवधारणा नहीं है, शुद्धता तो और भी कम है। न केवल 8 बिलियन मानव बल्कि 99.97% आनुवंशिक रूप से समान हैं, बल्कि आधुनिक मानव जीनोम भी प्राइमेट, प्लांट, बैक्टीरिया, परजीवी और वायरल डीएनए का एक मिशमाश है।”

जोधपुर में मारेंगे उसको, सब पता चल जाएगा: सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद बढ़ाई गई सलमान खान की सुरक्षा, लॉरेंस बिश्नोई का धमकी वाला Video वायरल

पंजाबी सिंगर और रैपर सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद बॉलीवुड एक्टर सलमान खान की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है। अभिनेता की सुरक्षा बढ़ाई जाने की जानकारी मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दी है।

मुंबई पुलिस के अधिकारी ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया, “हमने सलमान खान की सुरक्षा बढ़ा दी है। पुलिस उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सलमान खान के अपार्टमेंट के आसपास मौजूद रहेगी ताकि राजस्थान से गिरोह कोई हरकत न करें।”

बता दें कि सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड की लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गे गोल्डी बरार ने जिम्मेदारी ली थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बिश्नोई ने कई साल पहले सलमान को जान से मारने की धमकी दी थी। दरअसल सलमान खान ‘हम साथ साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान काला हिरण शिकार मामले को लेकर बिश्नोई के रडार पर थे। आपको बता दें कि बिश्नोई समुदाय काले हिरण को पवित्र मानते हैं।

इसी को लेकर बिश्नोई ने 2018 में सलमान को जान से मारने की धमकी दी थी। हत्या की साजिश के आरोप में 2020 में गिरफ्तार बिश्नोई के करीबी सहयोगियों में से एक राहुल उर्फ सुन्नी ने कबूल किया था कि उन्होंने सलमान को मारने की योजना बनाई थी और यहाँ तक कि हत्या की रेकी करने के लिए मुंबई भी गए थे। हालाँकि किसी वजह से वह अपनी योजना में कामयाब नहीं हो सके थे। बताया जा रहा है कि सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद पुलिस को सलमान खान पर हमले की खुफिया जानकारी मिली थी। जिसके बाद पुलिस ने सलमान की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। एक वीडियो वायरल हो रही है जिसमें लॉरेंस बिश्नोई द्वारा पुलिस को साफ तौर पर कहता सुना जा सकता है कि जब करेंगे तब पता चल ही जाएगा। जोधपुर में मारेंगे। अभी को कुछ किया ही नहीं है बिन मतलब नाम जोड़ा जा रहा है।

गौरतलब है कि पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने तिहाड़ जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई को 5 दिन की हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि स्पेशल सेल बिश्नोई को लेकर मूसेवाला हत्याकांड मामले में पूछताछ करेगी।

बता दें कि कनाडा के गैंगस्टर गोल्डी बरार द्वारा हत्या की जिम्मेदारी लेने के बाद लॉरेंस बिश्नोई गिरोह पुलिस के रडार पर आ गया। जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के करीबी सहयोगी बरार ने दावा किया था कि उसने विक्की मिड्दुखेरा की मौत का बदला लेने के लिए गायक मूसेवाला की हत्या की।

‘ज्ञानवापी में शिवलिंग ही है, मक्का में भी मक्केश्वर महादेव बनना चाहिए’: बोले स्वामी निश्चलानंद- ताजमहल भी तेजो महालय है

गोवर्धन मठ पुरी के पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती (Nishchalanand Saraswati) ने बुधवार (1 जून 2022) को कहा कि मक्का (Mecca) में मक्केश्वर महादेव (Makkeshwar Mahadev) बनना चाहिए। उन्होंने आगरा के ताजमहल (Taj Mahal) को भी तेजो महालय (Tejo Mahalay) घोषित करने की माँग की। उन्होंने कहा कि यह माँग नहीं आदेश है।

शंकराचार्य ने कहा कि वाराणसी के ज्ञानवापी (Gyanvapi, Varanasi) में शिवलिंग ही है और वो आदि विश्वेश्वर हैं। उन्होंने कहा कि पूरा काशी शिवलिंग है और इसमें किसी प्रकार का संशय नहीं होना चाहिए। बता दें कि विरोधी पक्ष इस शिवलिंग को लगातार फव्वारा साबित करने पर तुला है और इसके लिए शिवलिंग को अपमानित भी किया है।

वाराणसी के अस्सी स्थित मठ में हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा कि ज्ञानवापी परिसर को जितनी जल्दी हो सके, अब हिंदुओं को सौंप देना चाहिए, ताकि शिवलिंग का जो पूर्व स्वरूप था उसमें फिर से लाया जा सके।

निश्चलानंद सरस्वती ने भारतीय मुस्लिमों से अपील की कि वे मुस्लिम आक्रांतों से खुद को अलग करें। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों के पूर्वजों द्वारा मानवाधिकारों का हनन करके जो कदम उठाए गए उसे भारतीय मुस्लिमों को आदर्श नहीं मानना चाहिए। मुस्लिम समाज को अपने पूर्वजों की गलतियों को मानकर सहिष्णुता का परिचय देना चाहिए और मिलकर रहना चाहिए।

उन्होंने यहाँ तक कहा कि सऊदी अरब के मक्का में मक्केश्वर महादेव हैं और उसे वही बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से आगरा के ताजमहल को तेजो महालय घोषित करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि मंदिरों को संरक्षित करने के लिए काशी में तमाम शंकराचार्यों, प्रमुख पीठों के महंत एवं धर्माचार्यों का जल्दी ही सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

मौलवी इलियास ने शिवलिंग को बताया पुरुषों के गुप्तांग जैसा, कहा- लिंग और योनि की पूजा कर देश को बर्बाद कर रहे हिंदू

वाराणसी में विवादित ज्ञानवापी ढाँचे (Disputed Gyanvapi Structure) के अंदर शिवलिंग मिलने के बाद से विवाद जारी है। इसी बीच विवादित छवि वाले इस्लामिक स्कॉलर इलियास शराफुद्दीन ने विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने शिवलिंग की तुलना पुरुषों के गुप्तांग से की है। इलियास शराफुद्दीन ने जी न्यूज के ‘ताल ठोक के’ शो में बहस के दौरान कहा, “हिंदुओं को मूर्तियों और पुरुषों के गुप्तांग की पूजा करने की आदत है।”

ज्ञानवापी सर्वेक्षण के वीडियो में शिवलिंग दिखाई देने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने वेदों, गीता और उपनिषदों का हवाला दिया। शराफुद्दीन ने तर्क दिया कि हिंदू ग्रंथों में उल्लेख किया गया है, “जो लोग मूर्तियों की पूजा करेंगे, उन्हें नरक में भेजा जाएगा। इसलिए हिंदुओं को मूर्ति, लिंग और पुरुषों के गुप्तांगों की पूजा नहीं करनी चाहिए।” शो में अन्य लोगों के तर्कों को अनसुना कर​ वह जोर से हँसे और कहा, “प्राइवेट पार्ट की पूजा नहीं होनी चाहिए।”

महंत योगेश पुरी ने शिवलिंग और हिंदू धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए मौलवी को शो के बीच में फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि शराफुद्दीन की टिप्पणी से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है। महंत पुरी ने बहस के दौरान मौलवी से महंत ने कहा, “आपको शिवलिंग के बारे में कुछ भी कहने का कोई अधिकार नहीं है। इसके बारे में आप क्या जानते हैं? शिवलिंग पुरुष के गुप्तांग के समान नहीं है। इसका आपकी घटिया मानसिकता से कुछ भी लेना-देना नहीं है।” इसके बाद भी मौलवी हँसता रहा और कहा, “हिंदुओं को मानव अंगों की पूजा करना बंद कर देना चाहिए।” शो में अपने कुतर्कों को सही ठ​हराते हुए शराफुद्दीन ने आसाराम बापू का उदाहरण देते हुए कहा कि आसाराम बापू जैसे कितने लोगों ने आश्रम में कई महिलाओं के साथ बलात्कार किया है। इसके बाद इस्लामिक स्कॉलर ने कर्नाटक के उडुपी में हिजाब पहनने वाली लड़कियों प्रशंसा करते हुए ‘हिजाब लाओ, बेटी बचाओ’ का नारा लगाया।

यही नहीं शराफुद्दीन ने हिंदू देवी देवताओं की पूजा करने वाले हिंदुओं को ‘बुद्धिहीन, अक्ल के अंधे’ कहा। उसने इस बार शिवलिंग की तुलना पत्थर से करते हुए कहा, “हिंदू लिंग और योनि की पूजा करके देश को बर्बाद कर रहे हैं।” उन्होंने इस दौरान अन्य पैनलिस्ट को गाली भी दी, जिसके बाद चैनल को उन्हें शो के बीच से ही हटाना पड़ा। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इलियास शराफुद्दीन की विवादास्पद टिप्पणी की निंदा की करते हुए शो में पूछा क्या अब मौलवी के खिलाफ फतवा जारी किया जाएगा? हिंदू धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों और हिंदू प्रथा का मजाक उड़ाने वाले शराफुद्दीन को नेटिज़न्स ने भी सोशल मीडिया पर आड़े हाथों लिया।

रणवीर राठौर नाम के एक यूजर ने 31 मई को ट्विटर पर कहा कि इलियास शराफुद्दीन द्वारा लाइव शो में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। उसने कहा कि हिन्दू मूर्ति पूजा, योनि की पूजा करते हैं। राष्ट्रीय प्रवक्ता ने इसका कड़ा विरोध दर्ज कराया और मौलाना से पूछा कि ऐसे लोगों पर फतवा जारी होगा क्या?

गौरलतब है कि इससे पहले भी ये इस्लामिक बुद्धिजीवी कोरोना को चीन में जारी उइगर मुस्लिमों के उत्पीड़न से जोड़ चुका है। इलियास शराफुद्दीन ने मार्च 2020 में कहा था कि उइगर मुस्लिमों से क्रूरता करने के कारण अल्लाह ने चीन पर इस वायरस का कहर बरपाया है और इन लोगों को दंडित किया है। एक वायरल ऑडियो में धर्मगुरु को कहते सुना गया था, “याद करो कैसे उन्होंने मुस्लिमों को धमकी दी थी और दो करोड़ मुस्लिमों की जिंदगी बर्बाद करने की कोशिश की। मुस्लिमों को शराब पीने के लिए मजबूर किया गया, उनकी मस्जिदों को तोड़ दिया गया और उनकी पवित्र पुस्तकों को जला दिया गया।” उन्होंने कहा था कि चीन ने सोचा कि कोई भी उन्हें चुनौती नहीं दे सकता, लेकिन अल्लाह सबसे शक्तिशाली है, अल्लाह ने चीन को सजा दी।

AltNews वाले मोहम्मद जुबैर पर UP में FIR, बजरंग मुनि और यति नरसिंहानंद को लेकर उगला था जहर

फैक्ट चेक के नाम पर प्रोपेगेंडा फैलाने वाले AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर (Mohammad Zubair) पर महंतों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करने को लेकर उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के खैराबाद थाने में बुधवार (1 जून 2022) को मुकदमा दर्ज किया गया है। मोहम्मद जुबैर ने धर्म संसद में दिए गए बयानों को लेकर यति नरसिंहानंद, बजरंग मुनि और आनंद स्वरूप को (घृणा फैलाने वाला) हेट मोंगर कहा था।

मोहम्मद जुबैर ने 27 मई 2022 को किए गए अपने ट्वीट में टाइम्स ऑफ इंडिया के विनीत जैन को टैग करते हुए लिखा था, “बहुत बढ़िया! हमें यति नरसिंहानंद सरस्वती या बजरंग मुनि या आनंद स्वरूप जैसे हेट मोंगर को किसी समुदाय या मजहब के खिलाफ बोलने के लिए धर्म संसद आयोजित करने की क्या जरूरत है, जब उससे बढ़िया काम करने के लिए स्टूडियो में एंकर मौजूद हैं।”

मोहम्मद जुबैर के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

महंतों को हेट मोंगर कहने पर राष्ट्रीय हिंदू शेर सेना के सीतापुर जिलाध्यक्ष भगवान शरण ने खैराबाद थाने में IPC की धारा 295-A और IT ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया है। भगवान शरण का कहना है कि जुबैर ने महंतों को हेट मोंगर कहकर उनकी धार्मिक भावनाएँ भड़काई हैं। प्राथमिकी में कहा गया है कि जुबैर का बजरंग मुनि के साथ किसी तरह की पुरानी रंजिश या मुकदमा नहीं है। इसके बावजूद समाज में विद्वेष फैलाने और हिंदू-मुस्लिम विवाद कराने की उसने सोची-समझी साजिश की।

प्राथमिकी में यह भी कहा गया है कि मोहम्मद जुबैर देश के हिंदूवादियों के खिलाफ मुस्लिमों को भड़काता है और उनकी हत्या कराने के लिए उकसाता है। इनमें कमलेश तिवारी, यति नरसिंहानंद या अन्य लोग है, जिनकी या तो हत्या कर दी गई या जिनकी हत्या करने की कोशिश की जा रही है। जुबैर लगातार सांप्रदायिक टिप्पणी करते रहता है और उसके खिलाफ दिल्ली में पॉक्सो ऐक्ट में मामला भी दर्ज है।

बता दें कि मोहम्मद जुबैर के उकसाने के बाद से भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता नुपुर शर्मा को मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा लगातार हत्या की धमकी दी जा रही है। उनकी हत्या करने वालों को एक करोड़ रुपए ईनाम देने तक की घोषणा कर रखी गई है। जुबैर के भड़काने के बाद कट्टरपंथियों ने उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल करना भी शुरू कर दिया है।

दरअसल, टाइम्स नाउ पर विवादित ज्ञानवापी ढाँचे पर बहस के दौरान नुपुर शर्मा ने तर्क दिया कि चूँकि लोग बार-बार हिंदू आस्था का मजाक उड़ा रहे हैं, तो वे इस्लामी मान्यताओं का जिक्र करते हुए अन्य धर्मों का भी मजाक उड़ा सकती हैं। उनके इस तर्क वाले वीडियो की कटिंग को जुबैर ने इसे अपने 464,000 ट्विटर फॉलोअर्स के साथ साझा किया, जिसमें उसने नुपुर को अतिवादी, सांप्रदायिक नफरत फैलाने वाली और दंगे भड़काने वाली घोषित कर दिया।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब ऑल्ट न्यूज़ के संस्थापकों द्वारा उकसाए जाने के बाद किसी को धमकियाँ मिली हों। इससे पहले, एक नाबालिग लड़के को ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा द्वारा परेशान किए जाने के बाद भी धमकी दी गई थी। जुबैर से इस महीने की शुरुआत में दिल्ली पुलिस ने एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में पूछताछ की थी।

पृथ्वीराज चौहान पर 3 लाइन, आक्रांताओं पर पूरी किताब: अक्षय कुमार ने इतिहास की पढ़ाई पर उठाए सवाल

बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार (Akshay Kumar) अपनी आगामी फिल्म पृथ्वीराज चौहान (Prithviraj Chouhan) को लेकर काशी के दौरे पर पहुँचे थे। उन्होंने भारत सरकार से इतिहास की किताबों को फिर से लिखने की अपील की है। एक्टर ने कहा कि इतिहास की किताबों में राजाओं के बारे में नहीं बताया जाता, जबकि वो भी महान थे। देश के बच्चों को महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान के बारे में जानना चाहिए।

ANI को दिए इंटरव्यू में अक्षय कुमार ने किताबों में से गायब शूरवीर राजाओं की गाथा पर कहा, “कोई भी ऐसा नहीं था, जो हमारी इतिहास की किताबों में इसको लिख सके। हमें इसके बारे में जानना चाहिए था। आपके (एंकर से कहा) भी बच्चों ने नहीं पढ़ी होगी।” एक्टर ने भारत के शिक्षा मंत्री से अपील की कि वो इस मामले में ध्यान दें। ताकि ये जानकारी बैलेंस हो सके।

एक्टर ने कहा, “मैं ये नहीं कहता कि हमें मुगलों के बारे में नहीं जानना चाहिए, लेकिन हमारे राजाओं के बारे में भी जानें, क्योंकि वो भी महान थे। हमारे बच्चों को महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान के बारे में भी जानना चाहिए। मैं मेरे बच्चे की ही बात करता हूँ, उसे अंग्रेजों और मुगलों के बारे में पता है। लेकिन उसे सम्राट पृथ्वीराज चौहान के बारे में नहीं जानता क्योंकि उसने वो नहीं पढ़ा।”

एएनआई की एडिटर स्मिता प्रकाश से बात करते हुए अक्षय कुमार ने अफसोस जताया, “मैं सम्राट पृथ्वीराज चौहान के बारे में और जानना चाहता था। मैंने उनसे (निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी) बहुत सारी कहानियाँ सुनीं, लेकिन दुर्भाग्य से हमारी इतिहास की किताबों में उनके बारे में केवल 2 या 3 लाइन ही लिखा है। किताबों में बाकी सब कुछ है, आक्रमणकारियों के बारे में बहुत सारे विवरण हैं, लेकिन हमारी संस्कृति और हमारे महाराजाओं का शायद ही कोई उल्लेख है।”

उन्होंने कहा, वो काशी में एक सम्मान प्रकट करने के लिए गए थे, न कि हाथ जोड़कर ये मन्नत माँगने की फिल्म चला दो। इसके साथ ही एक्टर ने ये भी कहा कि फिल्म करने से पहले डायरेक्टर चंद्र प्रकाश द्विवेदी ने उन्हें ये बताया था कि कैसे गुजरात का सोमनाथ मंदिर और काशी दोनों ही पृथ्वीराज चौहान से संबंधित हैं।

हिंदू नेशनलिज्म नहीं, कल्चरल नेशनलिज्म: पृथ्वीराज के निर्देशक चंद्र प्रकाश द्विदेदी

डायरेक्टर चंद्र प्रकाश द्विवेदी ने काशी के दौरे को हिन्दू नेशनलिज्म से जोड़ने पर कहा, “हिन्दू नेशनलिज्म कहा जा रहा है, मैं उसे कल्चरल नेशनलिज्म (सांस्कृतिक राष्ट्रवाद) कहूँगा। क्योंकि, इस देश की प्रकृति हिन्दू है और जब मैं हिन्दू कहता हूँ, तो इसका अर्थ संस्कृति से होता है। भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक राजधानी वाराणसी है। गंगा और हिमालय ये भावना की बात है। गंगा ने कभी कुछ लिखा नहीं। लेकिन, हम सब की ये भावनाएँ हैं कि ये वो धारा बहती आ रही है, जिसने इस इतिहास को देखा है।”

ज्ञानवापी के मुद्दे पर देश में चल रही बहस पर बयान देते हुए द्विवेदी कहते हैं, “भगवान काशी विश्वनाथ के मंदिर को पहली बार जिसने तोड़ा था, वो कुतुबुद्दीन ऐबक था। कुतुबुद्दीन ऐबक मोहम्मद गौरी का सेवक था। सोमनाथ मंदिर का जिक्र भी हमारी फिल्म में है। सोमनाथ को कई बार तोड़ा गया। इस देश के सामने प्रश्न था कि जिसका भी विध्वंश किया गया था, उसे ऐसे ही छोड़ दें। 1947 में देश आजाद होने के बाद सरदार पटेल, केएन मुंशी, मोहन झा आदि ने मिलकर ये तय कि हमारी ऊर्जा का केंद्र सोमनाथ मंदिर है। ये हमारे सांस्कृतिक पुनरोत्थान की बात है। 1500 से अधिक सालों (1192) से हमारे ऊपर कई तरह आक्रमण हुए। लेकिन अब हमारे पास आजाद भारत में मौका है। इसके बाद 1948 में सोमनाथ के मंदिर को फिर से खोला गया।”

मंदिरों में चढ़ावे पर अक्षय कुमार का बयान

एंकर के मंदिरों पर चढ़ावे के सवाल पर अक्षय कुमार ने कहा कि वो हाल ही में सोमनाथ मंदिर गए थे। वहाँ उन्हें दूध चढ़ाना था, लेकिन उन्होंने दूध चढ़ाने के बजाय उसे मंदिर के ट्रस्ट को दिया और उसे जरूरतमंदों को देने को कहा।

बंजर भूमि को खेती लायक बनाया, अब ‘छीन’ रही KCR सरकार: तेलंगाना में भूमिहीनों को आवंटित जमीन पर पैदा होंगे प्रोजेक्ट्स

तेलंगाना (Telangana) की के चंद्रशेखर राव सरकार (K Chandra Shekhar Rao Government) ने सरकारी प्रोजेक्ट के नाम पर लगभग 50 साल पहले भूमि सुधार अधिनियम के तहत दलितों और आदिवासियों को दी गई जमीनों का अधिग्रहण करने की करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन बंजर जमीनों को खेती योग्य बनाने में इन किसानों ने अपना जीवन खपा दिया, लेकिन विकास के नाम पर सरकार ने इन परिवारों को तबाही के मुहाने पर लाकर छोड़ने वाली है।

1970 के दशक में तत्कालीन आंध्र प्रदेश राज्य में भूमि सुधार अधिनियम के तहत लाखों लोगों को भूमि आवंटित की गई थी। तेलंगाना में लगभग 1 करोड़ 50 लाख एकड़ खेती की जमीन है, जिनमें से कम-से-कम 30 लाख एकड़ जमीन भूमिहीन गरीबों को आवंटित की गई है। वर्तमान में हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HMDA) की सीमा से लगी हजारों एकड़ जमीन का सर्वेक्षण राजस्व विभाग द्वारा किया जा रहा है। राज्य सरकार यहाँ कई रियल एस्टेट सहित विभिन्न प्रोजेक्ट स्थापित करने की योजना बना रही है।

द न्यूज मिनट के अनुसार, राजस्व अधिकारी यह सर्वेक्षण हैदराबाद के नए प्रस्तावित छह-लेन के एक रिंग रोड के लिए कर रहे हैं। यह रिंग रोड 300 किलोमीटर लंबा है, जो हैदराबाद शहर के आसपास के 20 से अधिक कस्बों और 200 गाँवों से होकर गुजरेगा। परियोजना के पहले चरण में संगारेड्डी से शुरू होने वाले और नरसापुर, थूपरान, गजवेल, जगदेवपुर और भोंगिर सहित विभिन्न कस्बों से होकर गुजरने वाले 158 किलोमीटर की सड़क को सरकार ने अनुमोदित किया गया है।

ऐसे एक दलित किसान हैं इस्लामपुर के रहने वाले चेरलापल्ली बलिया। इनकी जमीन का भी सरकारी अधिकारियों ने सर्वे किया है। इनका कहना है, “हमें यह जमीन मिलने से पहले मेरे माता-पिता गाँव के जमींदार रेड्डी के लिए जीतगल्लु (नौकर जो न्यूनतम मजदूरी पर घरेलू और कृषि कार्य करते हैं) के रूप में काम करते थे। मेहनत के हिसाब से फसल उगाने से पहले हमारे परिवार को इस जमीन पर कम से कम 20 साल तक मेहनत करनी पड़ी और दो कुएँ खोदने पड़े।”

जब ये जमीनें भूमिहीनों को आवंटित की गई थीं, तब इनमें से अधिकांश बंजर और चट्टानों से भरे पड़े थे। जिन लोगों को ये जमीनें आवंटित की गई, उन्होंने मेहनत करके इसे खेती योग्य बनाया और चार दशक के बाद अब सरकार उन्हें इन जमीनों से बेदखल करने जा रही है।

इस्लामपुर में आवंटित भूमि वाले 200 किसानों में से 60% से अधिक मडिगा जाति के हैं, जो पहले अछूत थे। बाकी लोग पिछड़ा वर्ग (बीसी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समूह के हैं। उस दौरा प्रत्येक परिवार को एक से चार एकड़ भूमि के बीच भूमि आवंटित की गई थी।

सिर्फ हैदराबाद के बाहर ही नहीं, बल्कि वारंगल जैसे टियर टू शहरों में काकतीय शहरी विकास प्राधिकरण (KUDA) द्वारा भूमि को अधिग्रहण करने के लिए एक अधिसूचना जारी की गई थी। KUDA के अधिकारियों ने 27 गाँवों में लगभग 21,510 एकड़ भूमि का अधिग्रहण करने का प्रस्ताव रखा था, जिनमें से अधिकांश को भूमि आवंटित गई है। बाद में विरोध को देखते हुए इसे अधिसूचना को रदद् कर दिया गया।

दरअसल, 1970 के दशक के उत्तरार्ध में जब आंध्र प्रदेश भूमि सुधार (कृषि जोत की सीमा) अधिनियम, 1973 को लागू करने और भूमि वितरित किया गया था। इससे भूमि के मालिक रेड्डी, वेलामा और कापू जाति नाराज हो गए थे। उस समय इनके सहयोग के बिना सरकार चलाना मुश्किल था। तब सरकार ने कहा था कि यह अस्थायी प्रावधान है। इसमें भूमिहीनों को आवंटित की गई जमीनों को उनके द्वारा बेचने या किसी को देने से रोकने का प्रावधान किया गया था।

पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस अधिनियम ने इन लाभार्थियों को केवल ‘किसान’ में बदलने का काम किया है, उन्हें इसका अधिकार नहीं सौंपा गया है। हालाँकि, साल 2007 और 2017 के कानूनी संशोधनों में इन जमीनों को बेचने का अधिकार इन्हें मिल गया है। कोई भी व्यक्ति जो ढाई एकड़ से कम आर्द्रभूमि या पांच एकड़ शुष्क भूमि का मालिक है, उसे यहां ‘भूमिहीन गरीब व्यक्ति’ माना गया है।

‘क्या AAP देश के गद्दार को पनाह दे रहे हैं’: केजरीवाल से स्मृति ईरानी ने पूछे 10 सवाल, मनी लॉन्ड्रिंग में सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी का मामला

प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार किए गए दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन (health minister satyendra jain) के मामले को लेकर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर कड़े तेवर दिखाए हैं। जैन की गिरफ्तारी का बचाव करने पर स्मृति ईरानी ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं। मीडिया से चर्चा करते हुए स्मृति ईरानी ने कई चौंकाने वाली बातें कहीं।

मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सवाल पूछे हैं। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने की। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल जी ने कल एक भ्रष्ट व्यक्ति को क्लीन चिट दी। अपने प्रेस के उद्बोधन में उन्होंने यह घोषणा की कि सतेंद्र जैन के खिलाफ जो आरोप हैं, वो सभी तथ्यों से बहुत दूर हैं। अपने आप को जज की उपाधि देते हुए अरविंद केजरीवाल ने सतेंद्र जैन को जनता की अदालत में बरी कर दिया। इसलिए आज मैं कुछ प्रश्न पूछने के लिए विवश हूँ।”

स्मृति ईरानी ने आगे प्रश्न किया, “मेरा पहला सवाल अरविंद केजरीवाल जी से ये है कि क्या वो इस बात को इनकार कर सकते हैं, नकार सकते हैं कि सत्येंद्र जैन ने 4 शैल (फर्जी) कंपनियों को अपने परिवार के कुछ सदस्यों के माध्यम से 16.39 करोड़ रुपए की, 56 शैल कंपनियों के माध्यम से, हवाला ऑपरेटर्स के सहयोग से, 2010-16 तक मनी लॉन्ड्रिंग की?”

उन्होंने अपने दूसरे सवाल में अरविंद केजरीवाल से पूछा कि क्या यह सत्य है कि सत्येंद्र जैन ने खुद इनकम डिस्क्लोजर 2016 के तहत घोषणा की थी कि वे 16.39 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग में लिप्त हैं? इसके लिए माध्यम अंकुश जैन और वैभव जैन बने थे।

स्मृति ईरानी ने अपने अगले सवाल में पूछा कि क्या यह सच है कि मुख्य आयकर आयुक्त ने इस बात को खारिज कर दिया कि 16.39 करोड़ रुपए के असली मालिक न तो अंकुश जैन थे और न ही वैभव जैन, बल्कि सत्येंद्र जैन खुद इस काले धन के मालिक थे? उन्होंने चौथे प्रश्न में पूछा कि ये सत्य है कि डिविजन बेंच दिल्ली हाईकोर्ट ने अगस्त 2019 के अपने एक ऑर्डर में इस बात की पुष्टि की कि सत्येंद्र जैन ने 16.39 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग की है?

केंद्रीय मंत्री ने पाँचवाँ सवाल पूछा कि क्या ये सच है कि सत्येंद्र जैन शैल कंपनीज के मालिक हैं? इन शैल कंपनीज का नाम हैं- इंडो मैटेलिक इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड, अकिंचन डेवेलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, प्रयास इन्फो सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, मंगलायतन प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड। ये कंपनियाँ वो अपनी धर्मपत्नी के साथ शेयर होल्डिंग के माध्यम से कंट्रोल करते हैं। एक और कंपनी जे जे आइडियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड है, जिसमें अधिकतर शेयर होल्डिंग सत्येन्द्र जैन, उनकी पत्नी व परिवार की है जिसको केजरीवाल प्रेस के माध्यम से ढांढस बँधा रहे थे, भाभीजी आपको डरने की जरूरत नहीं है।”

आगे छठा सवाल पूछते हुए उन्होंने कहा कि क्या ये सत्य है सत्येन्द्र जैन ने 200 बीघा जमीन कराला, औचंदी, निजामपुर, उधम, नॉर्थ और नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के इलाके के अनधिकृत कॉलोनियाँ में ली है। इस काले धन के माध्यम से 200 बीघा जमीन का मालिकाना हक इन शेल कंपनियों के माध्यम से सत्येन्द्र जैन के बेनेफिट में आया।

केंद्रीय मंत्री ने सातवाँ सवाल पूछा, “क्या ये सत्य है कि जो 200 बीघा की जमीन है वो उन अनधिकृत कॉलोनियाँ के आसपास है जिसके संदर्भ में सतेन्द्र जैन और आम आदमी पार्टी के माध्यम से वो अनधिकृत कॉलोनियाँ नियमित हुईं।” उनका आठवाँ प्रश्न था कि क्या ये सत्य है कि सतेंद्र जैन आज प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत चार्जशीट में मुख्य आरोपित हैं?

उन्होंने नौवाँ सवाल किया कि क्या ये सत्य है कि 16 करोड़ 39 लाख मनी लॉन्ड्रिंग की जो सत्येंद्र जैन की आय है उस पर इनकम टैक्स डिपार्ट्मन्ट टैक्स लगाए। ये प्रस्ताव स्वयं सत्येंद्र जैन की कंपनियों का था।

केंद्रीय मंत्री ने आखिरी सवाल पूछते हुए कहा, “जिस सत्येन्द्र जैन ने स्वयं स्वीकार किया कि 16 करोड़ 39 लाख की मनी लॉन्ड्रिंग हवाला ऑपरेटर्स के माध्यम से की गई उन कंपनियों में, जिनमें सत्येंद्र जैन व उनके परिवार की भागीदारी है। क्या वो व्यक्ति आज भी AAP द्वारा संचालित सरकार का मंत्री बना रहना चाहिए? आप कहते हैं कि भ्रष्टाचार करने वाला देश का गद्दार है, क्या आप देश के गद्दार को पनाह दे रहे हैं।”

उल्लेखनीय है कि सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि उनके खिलाफ दर्ज मामला पूरी तरह से फर्जी हैं। उन्हें झूठे केस में फँसाया गया है। उन्होंने कहा था, ”मैंने सत्येंद्र जैन के मामले के सारे कागज देखे हैं। केस बिल्कुल फर्जी है। हम कट्टर ईमानदार और देश भक्त लोग हैं, हम भ्रष्टाचार को देश के साथ गद्दारी मानते हैं, सर कटा सकते हैं लेकिन भ्रष्टाचार नहीं करेंगे।” 

इसके साथ ही उन्होंने सत्येन्द्र जैन को कट्टर देशभक्त, ईमानदार और बेहद साहसी बताया था। इससे पहले दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा था कि सत्येंद्र जैन को एक फर्जी और निराधार मामले में गिरफ्तार किया गया है। वो जल्द ही इस मामले में बरी होंगे। बता दें कि सत्येंद्र जैन को ईडी ने मंगलवार (31 मई 2022) को कोर्ट में पेश किया था। वे 9 जून तक के लिए कस्टडी में भेजे गए हैं। ED की जाँच में सामने आया कि जैन 2015-16 में कोलकाता की एक फर्म के साथ हवाला लेनदेन में शामिल थे।

कौन हैं योगीराज, जिनको मिला है इंडिया गेट पर ‘नेताजी’ को तराशने का टास्क: केदारनाथ में आदि शंकराचार्य को भी कर चुके हैं तैयार

मैसूरु के मशहूर मूर्तिकार अरुण योगीराज (Arun Yogiraj) महान स्वतंत्रता सेनानी और आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 30 फुट ऊँची प्रतिमा को तैयार करेंगे। नेताजी की इस प्रतिमा (Subhash Chandra 30 Ft Statue) को इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति के पीछे भव्य छत्र के नीचे स्थापित किया जाएगा। केदारनाथ में आदि शंकराचार्य की 12 फुट ऊँची प्रतिमा को भी योगीराज ने ही तैयार किया था, जिसका अनावरण पिछले साल नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।

प्रतिमा के लिए एक बड़े काले जेड ग्रेनाइट पत्थर का चयन किया गया है, जिसे नक्काशी का काम पूरा होने से पहले दिल्ली ले जाया जाएगा। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, प्रतिमा का डिजाइन संस्कृति मंत्रालय के तहत नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (एनजीएमए) की एक टीम द्वारा तैयार किया गया है, जिसकी अध्यक्षता इसके महानिदेशक अद्वैत गडनायक (Adwaita Gadanayak) ने की है। अप्रैल में योगीराज ने पीएम मोदी से मुलाकात की थी और उन्हें बोस की दो फीट की मूर्ति भेंट की थी। पीएम ने इस मुलाकात की फोटो ट्वीट करते हुए योगीराज को नेताजी बोस की असाधारण मूर्ति को शेयर करने के लिए धन्यवाद दिया था।

मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि योगीराज एनजीएमए टीम के साथ मिलकर काम करेंगे और विशेष रूप से प्रतिमा के चेहरे की विशेषताओं पर काम करेंगे, क्योंकि वह चित्र मूर्तियाँ बनाने में माहिर हैं। वह 1 जून को दिल्ली आएँगे और बोस की प्रतिमा पर काम 15 अगस्त की समय सीमा से पहले पूरा होने की उम्मीद है। योगीराज ने अपने ट्विटर हैंडल पर भी कई तस्वीरें शेयर की हैं, जिसमें वह बहुत ही बारीकी से मूर्तियों को आकार देते हुए नजर आ रहे हैं।

सोशल मीडिया पर योगीराज की काफी फैन फॉलोइंग है। प्रसिद्ध मूर्तिकार योगीराज शिल्पी के बेटे, 37 वर्षीय अरुण योगीराज मैसूरु महल के शिल्पकारों के परिवार से आते हैं। अरुण के पिता गायत्री और भुवनेश्वरी मंदिर के लिए भी कार्य कर चुके हैं। MBA तक पढ़ाई कर चुके योगीराज पाँचवीं पीढ़ी के मूर्तिकार हैं। एमबीए की डिग्री लेने के बाद उन्होंने एक प्राइवेट कंपनी में भी काम किया, लेकिन 2008 में मूर्तिकार बनने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी।

केदारनाथ में स्थापित आदि शंकराचार्य की प्रतिमा के निर्माण के अलावा, योगीराज ने मैसूरु में महाराजा जयचामराजेंद्र वडेयार की 14.5 फुट की सफेद संगमरमर की प्रतिमा, महाराजा श्री कृष्णराज वाडियार-IV और स्वामी रामकृष्ण परमहंस की सफेद संगमरमर की प्रतिमा भी बनाई है।

गौरतलब है कि इस साल 21 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ग्रेनाइट की प्रतिमा स्थापित किए जाने की जानकारी दी थी। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “ऐसे समय जब पूरा देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती मना रहा है, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि ग्रेनाइट से बनी उनकी भव्य प्रतिमा इंडिया गेट पर स्थापित की जाएगी। यह उनके प्रति भारत के ऋणी होने का प्रतीक होगा।” इसके बाद नेताजी की बेटी अनीता बोस ने प्रधानमंत्री आभार जताते हुए कहा था कि आजादी के सात दशक बाद नेताजी के आदर्शों और मूल्यों को पहचान मिल रही है। इससे देश में एक अच्छा संदेश जाएगा।