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मुंबई, हैदराबाद और अब पुणे का कोंढवा: बीजेपी नेता नुपूर शर्मा पर एक और FIR, इस बार NCP नेता ने दी शिकायत

भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ एक और FIR दर्ज की गई है। अबकी बार मामला पुणे के कोंढवा थाने में दर्ज हुआ है। नूपुर शर्मा के खिलाफ NCP नेता और पूर्व पार्षद अब्दुल गफूर अहमद पठान ने शिकायत की है। मामला 1 जून 2022 (बुधवार) को दर्ज किया गया।

FIR में PFI के भी सहयोग का दावा

सामाजिक कार्यकर्ता रफीक शेख के मुताबिक नूपुर शर्मा के खिलाफ FIR में NCP के साथ PFI भी सहयोगी है। शिकायतकर्ता के मुताबिक नूपुर के बयान से उनकी धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं। शिकायतकर्ता अशोका म्यूज सोसायटी कोंढवा के निवासी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नूपुर पर IPC की धारा 153A, 153B, 295A, 298 और 505 के तहत केस दर्ज हुआ है।

महाराष्ट्र इमाम काउंसिल के महासचिव मुफ़्ती वहीदुज़्ज़मान ने भी FIR करवाने के दौरान PFI के सदस्यों की तस्वीरें शेयर की हैं।

पहले से दर्ज हैं 3 केस

नूपुर शर्मा पर तमाम तरह की हिंसक वारदातों में आरोपित रज़ा एकेडमी ने पहली FIR मुंबई में दर्ज करवाई थी। इसके बाद एक मदरसे के मौलवी ने दूसरा केस मुंबई के ही मुम्ब्रा थाने में दर्ज करवाया था। नूपुर पर तीसरी FIR हैदराबाद के साइबर क्राइम थाने में 31 मई 2022 दर्ज हुई थी। इस FIR में नूपुर के अलावा टाइम्स नाउ चैनल पर भी कार्रवाई की माँग की गई है।

क्या हैं पूरा विवाद

गौरतलब है कि ज्ञानवापी शिवलिंग मामले में 26 मई 2022 की शाम को टाइम्स नाउ पर एक बहस हुई थी। इस डिबेट में नुपूर ने ज्ञानवापी के शिवलिंग पर मजाक बनाने वाले से सवाल किया था कि जैसे उनके भगवान का मजाक उड़ रहा है, क्या वो भी दूसरे मजहब पर इस तरह बात रख सकती हैं ? इसी के बाद AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने नुपूर शर्मा पर पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने का आरोप लगाते हुए एक ऑनलाइन कैंपेन चलाया था। इसी कैंपेन के बाद कट्टरपंथी नुपूर को और उनके परिवार को जान से मारने और रेप की धमकियाँ दे रहे हैं। इस दौरान हैदराबाद पुलिस द्वारा एआईएमआईएम (इंकलाब) के पार्टी अध्यक्ष अब्बासी पर भी FIR दर्ज हुई थी। अब्बासी ने नूपुर की हत्या करने वाले को 1 करोड़ रुपए इनाम देने का ऐलान किया था।

पंजाब के खालसा वीमेन कॉलेज के बाहर लड़की को लेकर दो गुटों में झड़प, एक की मौत, मूसेवाला हत्याकांड में गैंगस्टर मिंटू प्रोडक्शन गिरफ्तार

पंजाब के अमृतसर (Amritsar, Punjab) स्थित खालसा कॉलेज फॉर वीमेन के आगे में बुधवार (1 जून 2022) को दो गुटों में झड़प हो गई, जिसमें दो लोगों को गोली लग गई। इसमें से एक व्यक्ति की मौत हो गई है। यह लड़ाई कथित तौर पर एक लड़की की तस्वीर को लेकर हुई।

बता दें कि रविवार (29 मई 2022) को पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में एक और आरोपित सराज सिंह उर्फ मिंटू को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

खालसा कॉलेज में हुई गोलीबारी को पुलिस ने गैंगस्टर एंगल से इनकार किया है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुँची और स्थिति को नियंत्रित कर लिया। ADCP गुरमीत सिंह विर्क ने बताया कि छात्रों के दो गुट आपस में भिड़ गए और गोलीबारी की, जिसमें से एक की मौत हो गई है और दूसरा घायल है। इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर लिया है।

पुलिस के अनुसार, इस झड़प में लड़की का एंगल सामने आया है। अमृतसर के DCP रशपाल सिंह ने बताया कि लड़ाई कथित तौर पर एक लड़की की तस्वीर को लेकर हुई थी। इनमें एक गुट जंडियाला और दूसरा बटाला का है। बताया जा रहा है कि जिस युवक की मौत हुई है, वह बटाला गुट का था। घटना की सही जानकारी के लिए और तथ्यों का पता लगाने के लिए पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।

सिद्धू मूसेवाला की कर दी गई थी हत्या

सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में पुलिस ने कुख्यात गैंगस्टर सिराज सिंह उर्फ मिंटू को अमृतसर जेल से प्रोडक्शन वॉरंट पर गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ हत्या से लेकर रंगदारी माँगने और ड्रग तस्करी के लगभग डेढ़ दर्जन मामले दर्ज हैं। मिंटू ने साल 2017 में हिंदू नेता विपिन शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

गैंगस्टर मिंटू पर आरोप है कि मूसेवाला के हत्यारों ने जिस वाहन का इस्तेमाल किया था, जिसे मिंटू ने ही उपलब्ध करवाया था। पुलिस को आशंका है कि इसके कहने पर इस छात्रों को इस हत्याकांड में शामिल किया गया था। बता दें कि मूसेवाला की हत्या में 6-7 लोगों के शामिल होने की आशंका है, जिसमें 5 लोगों की पहचान हो गई है। वहीं, इनमें से एक आरोपित गोल्डी बरार कनाडा में है।

दरअसल, 29 मई को पंजाब के मनसा में लोकप्रिय पंजाबी गायक, रैपर और कॉन्ग्रेस नेता सिद्धू मूसेवाला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनके वाहन पर कई राउंड फायरिंग की गई, जिससे उसकी मौत हो गई। इस हत्याकांड की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के गोल्डी बरार ने ली है। उसका आरोप है कि मूसेवाला उसके गिरोह के एक सदस्य की हत्या में शामिल था और पुलिस ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

ताजमहल को तेजोमहालय बताने वालों पर केस करेंगे प्रिंस तुसी, दर्ज कराई शिकायत: खुद को बताते हैं मुगल आक्रान्ता बहादुर शाह जफर का वंशज

मुगलों के आखिरी वंशज याकूब आफिरुद्दीन तुसी ने ताजमहल को तेजोमहालय बताने पर ऐतराज जताते हुए धमकी दी है कि वो ऐसा करने वालों के खिलाफ केस दर्ज कराएँगे। प्रिंस तुसी का कहना है कि हिन्दू साधु संत और कई हिन्दूवादी नेता ताजमहल को भगवान का घर बताने से धार्मिक माहौल बिगड़ने का खतरा उत्पन्न हो गया है। तुसी का दावा है कि इससे दंगे भड़ सकते हैं।

इस मामले में याकूब आफिरुद्दीन तुसी ने अयोध्या के संत परमहंस आचार्य, उनके शिष्य और नेताजी सुभाषचंद्र बोस की पौत्री राज्यश्री के खिलाफ थाना ताजगंज में केस दर्ज कराया है। ये शिकायत ईमेल के जरिए की गई है। प्रिंस तुसी का कहना है कि अगर ताजमहल को मंदिर बताने वालों के खिलाफ एक्शन नहीं लिया गया तो वो पीएम मोदी और सीएम योगी से इसकी शिकायत करेंगे।

तुसी का कहना है कि हिन्दूवादी संगठनों ने ताजमहल में स्वास्तिक का निशान बने हुए होने का दावा कर सांप्रदायिक दंगे को भड़काने की कोशिशें की जा रही हैं। खुद को मुगल आक्रान्ता बहादुरशाह जफर की छठी पीढ़ी बताने वाले प्रिंस तुसी का कहना है कि ताजमल राष्ट्रीय धरोहर है। यहाँ पर पर हंगामा करने से आसानी से कोई भी प्रसिद्ध हो जाएगा। आखिरी मुगल का कहना है कि ताजमहल पर विवाद करने वालों को पब्लिसिटी चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि भाईचारे को खत्म करने की कोशिशें करने वाले जगद्गुरू नहीं हो सकते।

गौरतलब है कि 26 अप्रैल 2022 को अयोध्या से आए जगद्गुरु परमहंस आचार्य को ताजमहल के पश्चिमी गेट से सीआईएसएफ के जवानों ने भगवा वस्त्र और ब्रह्मदंड के चलते प्रवेश नहीं करने दिया था। उन्होंने दावा किया था कि ताजमहल में भगवान शिव की पिंडी है।

राम मंदिर के लिए सोने की ईंट देने वाले बयान पर प्रिंस तुसी का कहना है कि उन्हें अपना वादा याद है, लेकिन वो ये सोने की ईंट राम मंदिर के ट्रस्ट को नहीं पीएम मोदी को देंगे। उल्लेखनीय है कि प्रिंस तुसी फिलहाल हैदराबाद में रहते हैं और वहीं से उन्होंने अपनी शिकायत मेल की थी।

AC नहीं चलने, पसीने से तर-बतर होकर भी गाने वाले KK ने बोतल फेंकती भीड़ के सामने गाया था गाना

मशहूर गायक कृष्णकुमार कुन्नथ उर्फ केके अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनकी यादें अब भी ताजा हैं। जिस तरह केके की मौत हुई है। इस बीच उनके एक शो का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो स्टेज पर गाना गाते दिख रहे हैं, लेकिन उग्र भीड़ उनके ऊपर बोतलें फेंकती रही। हालाँकि, लोगों के इस रवैये के बाद भी वो परफॉर्मेंस देते रहे।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा ये वीडियो करीब 23 साल पुराना वर्ष 1999 का बताया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना महाराष्ट्र के पुणे के रंग भवन में इंडिपेंडेंस रॉक गिग के दौरान हुई थी। इसकी शुरुआत ‘स्ट्रेंजर्स’ नामक एक स्थानीय बैंड के एक एक्ट के साथ हुई। इसके बाद नंबर आया भारतीय मेटल के दिग्गज ‘मिलेनियम’ का। मिलेनियम का सेट खत्म होते ही केके अपने पहले एल्बम ‘पल’ के प्रचार के लिए स्टेज पर पहुँचे।

फोटो साभार: इंस्टाग्राम

हालाँकि, चूँकि वहाँ बैठे लोग अपने मनपसंद बैंड मिलेनियम को और अधिक सुनना चाहते थे और इसी कारण उन्हें इस तरह से केके का आना अच्छा नहीं लगा। केके ने अपने गाने को शुरू ही किया था कि उग्र लोगों ने उन पर पानी की खाली बोतलें फेंकनी शुरू कर दी। हालाँकि, भीड़ के इस रवैये से निराश या हताश हुए बिना ही केके लगातार गाते रहे।

केके की मौत

गौरतलब है कि सिंगर केके की मौत 31 मई 2022 को हो गई। वो कोलकाता में एक शो करने के लिए आए थे। बताया गया कि उनकी मौत कार्डिएक अरेस्ट (हार्ट अटैक) की वजह से हुई। हालाँकि, उनके चेहरे और सिर पर चोट के निशान मिले थे, जिसके बाद कोलकाता पुलिस ने मामले में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया है।

उनकी मृत्यु के बाद खबर आई कि जहाँ वह अपनी आखिरी स्टेज परफॉर्मेंस दे रहे थे वहीं से उनकी तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई थी। भीड़ से भरे बंद ऑडिटोरियम में किसी एसी का इंतजाम नहीं था। केके ने इसे लेकर शिकायत भी की थी। मगर फिर भी कार्यक्रम प्रबंधकों ने इंतजाम नहीं किया।

कश्मीर में टारगेट किलिंग को देखते हुए सरकार का बड़ा फैसला: जिला मुख्यालयों पर होगा हिन्दू कर्मचारियों का स्थानांतरण, आवास की भी होगी सुरक्षा

जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में टारगेट किलिंग (Target Killing) के शिकार हिंदुओं को राहत देने के लिए प्रशासन ने सभी हिंदू कर्मचारियों को जिला मुख्यालय पर स्थानांतरण करने का निर्णय लिया है। यह फैसला आतंकियों द्वारा लगातार दी जा रही घटनाओं को देखते हुए उप-राज्‍यपाल मनोज सिन्‍हा (Lieutenant Governor Manoj Sinha) द्वारा बुलाई गई बैठक में लिया गया है।

यह निर्णय कश्मीरी हिंदुओं के प्रदर्शन के बीच आया है, जिसमें उन्होंने घाटी से पलायन की धमकी दी थी। कश्मीरी हिंदुओं ने कहा था कि अगर प्रशासन ने उन्हें 24 घंटे के अंदर सुरक्षित स्थानों पर नहीं पहुँचाया तो वो घाटी छोड़ कर कहीं और पलायन कर जाएँगे। उनकी माँग है कि उन्हें सिर्फ जम्मू में पोस्टिंग दी जाए। उनका कहना था कि जम्मू में वे कम-से-कम जिंदा तो रहेंगे।

वहीं, कुलगाम में एक हिंदू शिक्षक रजनी बाला की हत्या पर बुधवार (1 जून 2022) को भी विरोध प्रदर्शन रहा। रजनी की अंतिम यात्रा में प्रदर्शनकारियों ने ‘हमें न्याय चाहिए’ के नारे लगाए। उन्होंने सरकार के प्रति अपनी नाराजगी भी जाहिर की।

घाटी में हालात को देखते हुए प्रशासन सकते में आ गया। उसके बाद आनन-फानन में उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने उच्च अधिकारियों की बैठक बुलाई। इस बैठक में निर्णय लिया गया कि दूर-दराज या अन्य जगहों पर पदस्थापित हिंदू कर्मचारियों को जिला मुख्यालय में स्थानांतरित की जाए। इसके साथ इन कर्मचारियों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने का निर्णय भी लिया गया है।

इसके अलावा, जो कश्मीर घाटी के जिला मुख्यालय में ट्रांसफर के इच्छुक नहीं हैं, ऐसे कर्मचारियों को जम्मू में ट्रांसफर लेने का विकल्प दिया गया है। इसके अलावा जम्मू कश्मीर प्रशासन ने जम्मू-कश्मीर में हिंदू सरकारी कर्मचारियों के लिए उचित सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा है। नोडल अधिकारियों को कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों की शिकायतों का भी समय पर समाधान करने के लिए कहा गया है।

बता दें कि मंगलवार (31 मई 2022) की सुबह कुलगाम के गोपालपोरा इलाके में हाईस्कूल की टीचर रजनी बाला की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। 36 वर्षीय रजनी के सिर में गोलियाँ मारी गई थीं। अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में उन्होंने वक्त दम तोड़ दिया था।

जिस समय यह घटना हुई उस समय स्कूल में कई अन्य टीचर भी थे, लेकिन आतंकियों ने पूरे स्कूल में उन्हें अलग से चुन कर मारा। वह सांबा जिले की मूल निवासी थी, लेकिन कुलगाम के गोपालपोरा के एक सरकारी स्कूल में तैनात थीं। घटना के बाद घायल रजनी बाला को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। उनकी हत्या की खबर सुनने के बाद उनके परिजनों और छात्रों के आँसू नहीं रुक रहे।

हत्या से पहले ट्रांस्फर ऑर्डर को लेकर खुश थीं रजनी बाला

जानकारी के मुताबिक हत्या से एक दिन पहले सोमवार (30 मई 2022) की रात को रजनी को ट्रांसफर की सूचना मिली थी। इससे वह काफी खुश थीं। उन्होंने इसके बारे में स्कूल के पास के एक दुकानदार को भी बताया था, जिसे वह अपना भाई मानती थीं। रजनी और उनके पति राजकुमार की कुलगाम के ही चवलगाम स्थित सरकारी स्कूल में ट्रांसफर हो गया था। मंगलवार को आदेश की कॉपी मिलने वाली थी, लेकिन इससे पहले ही आतंकियों ने उनकी निर्मम हत्या कर दी। राजकुमार भी सरकारी टीचर हैं और वह गोपालपोरा से कुछ ही दूरी पर स्थित सरकारी मिडिल स्कूल मिरहामा में तैनात हैं।

पिछले महीने राहुल भट नाम के एक कश्मीरी हिंदू की बडगान के सुदूर इलाके चंडूरा में स्थित तहसील परिसर में घुसकर आतंकियों ने हत्या कर दी थी। भट वहाँ राजस्व अधिकारी के तौर पर तैनात थे और हिंदू शरणार्थियों के लिए सरकारी योजनाओं का काम देख रहे थे। जिस वक्त उन्हें मौत के घाट उतारा गया, उस वक्त ऑफिस में अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे।

आईडी देख जब हिंदू टीचर उतारे गए मौत के घाट

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी लगातार गैर-मुस्लिम समुदाय को टारगेट कर हमले कर रहे हैं। पिछले दिनों श्रीनगर में दो शिक्षकों की हत्या कर दी गई। आतंकियों ने श्रीनगर के ईदगाह इलाके में स्थित एक स्कूल में शिक्षकों को लाइन में खड़े कराकर पहचान करने के बाद दो गैर-मुस्लिम शिक्षकों की हत्या कर दी थी।

बता दें कि आतंकियों ने स्कूल के सभी शिक्षकों को पंक्ति में खड़ा किया, उसके बाद उनके पहचान पत्र और मोबाइल फोन की जाँच की। इसके साथ ही आतंकियों ने उनसे पूछताछ भी की और उनमें से अधिकतर को छोड़ दिया। माना जा रहा है कि जिन शिक्षकों को आतंकियों ने जाने दिया, वे सभी मुस्लिम थे। वहीं, आतंकियों ने सिख समुदाय से संबंध रखने वाली शिक्षिका सतिंदर कौर और हिंदू समुदाय से संबंध रखने वाले शिक्षक दीपक चंद की गोली मारकर हत्या कर दी।

प्रवर्तन निदेशालय ने PFI के 33 बैंक अकाउंट्स को किया फ्रीज: मनी लॉन्ड्रिंग के तहत हुई कार्रवाई

कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) एक्ट के तहत बड़ी कार्रवाई की है। जाँच एजेंसी ने इस्लामिक संगठन के बैंक अकाउंट्स को फ्रीज कर दिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन अकाउंट्स को अटैच किया गया है उनमें PFI के 23 और इसके फ्रंट ऑर्गनाइजेशन RIF (रिहैब इंडिया फाउंडेशन) के 10 बैंक अकाउंट हैं। इन खातों में 68,62,081 रुपए हैं।

पीएफआई के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज

पिछले महीने की शुरुआत में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पीएफआई के दो नेताओं अब्दुल रजाक पीडियाक्कल उर्फ ​​अब्दुल रजाक बीपी और अशरफ खादिर उर्फ ​​अशरफ एमके के खिलाफ 22 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में अभियोजन मामला (एक आरोप पत्र के समान) दायर किया था। ये दोनों ही केरल स्थित पीएफआई के पदाधिकारी हैं।

चार्जशीट के मुताबिक, पीएफआई के इन नेताओं ने केरल के मुन्नार एक बिजनेस शुरू किया था, ताकि विदेशों से होने वाली फंडिंग को व्हाइट करके उनका इस्तेमाल इस्लामिक संगठन की कट्टरपंथी गतिविधियों को अंजाम देने में किया जा सके। दावा तो यह भी किया जाता है कि दोनों पीएफआई के पदाधिकारी संगठन के कथित तौर ‘आतंकवादी समूह’ के गठन में शामिल थे।

इसमें दावा किया गया कि ये दोनों अन्य पीएफआई नेताओं और विदेशी संस्थाओं से जुड़े सदस्यों के साथ मुन्नार में एक आवासीय परियोजना – मुन्नार विला विस्टा प्रोजेक्ट (MVV) विकसित कर रहे थे। इसका केवल एक ही उद्देश्य विदेशों से एकत्र किए गए धन को सफेद करना था। ताकि देश के अंदर पीएफआई के चरमपंथ को बढ़ावा दिया जा सके।

इसी साल मार्च में मलप्पुरम में पीएफआई की पेरुम्पडप्पू इकाई के मंडल अध्यक्ष रजाक को उस वक्त पकड़ लिया गया था, जब वो कोझीकोड हवाई अड्डे से देश से भागने की फिराक में था। अशरफ एमके को पिछले महीने दिल्ली में गिरफ्तार किया गया था।

ईडी का दावा है कि पीएफआई के फ्रंट ऑर्गनाइजेशन रिहैब इंडिया फाउंडेशन को रजाक ने यूएई से लगभग 34 लाख रुपए ट्रांसफर किए थे। इसके अलावा कथित तौर पर उसने पीएफआई की पॉलिटिकल ब्रांच सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के नेता एमके फैजी को भी 2 लाख रुपए ट्रांसफर किए थे।

केंद्रीय जाँच एजेंसी के अनुसार, पीएफआई के दोनों ही मेंबर अंशद बदरुद्दीन को 3.5 लाख रुपए (अगस्त 2018 से जनवरी 2021 तक) के भुगतान मामले से भी जुड़े हुए हैं। बदरुद्दीन को पिछले साल 2021 में यूपी एटीएस ने पीएफआई मेंबर फिरोज खान के साथ पकड़ा था। इनके पास से होम मेड विस्फोटक उपकरण, एक 32-बोर की पिस्तौल और सात जिंदा गोलियाँ बरामद की गई थीं।

‘राज्य में उत्तर भारत के छात्र फैला रहे कोरोना’: तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री का विवादित बयान, हिंदी भाषी छात्रों को किया टारगेट

तमिलनाडु के स्‍वास्‍थ्‍य में मंत्री ने उत्तर भारतीय छात्रों को लेकर एक विवादित बयान दिया है। राज्‍य के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री मा सुब्रमण्‍यम ने तमिलनाडु में कोरोना वायरस केस बढ़ने के लिए उत्तर भारत के हिंदी भाषी छात्रों को जिम्‍मेदार ठहराया है।

तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री मा सुब्रमण्यम ने कहा कि उत्तर भारतीय छात्र तमिलनाडु में कोरोना वायरस फैला रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि केलमबक्कम वीआईटी कॉलेज और सत्यसाई कॉलेज के छात्र हॉस्टल और कक्षाओं में कोविड से प्रभावित हुए हैं। कुछ उत्तर भारतीय राज्यों में कोविड के मामले अभी भी बढ़ रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री का बयान ऐसे समय में आया है जब केलमबक्कम में वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) के 42 छात्रों का कोरोना टेस्ट मंगलवार (31 मई 2022) को पॉजिटिव आया है। इसके साथ ही कैंपस में कुल मामलों की संख्या 74 हो गई। इस संस्थान में छात्रों की संख्या 5000 है। 30 मई तक इसमें 33 छात्र कोरोना पॉजिटिव आए थे। रिपोर्टों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने कॉलेज के अधिकारियों को एक अलग मंजिल पर आइसोलेट करने और उनका सैचुरेशन टेस्ट करने का निर्देश दिया है। इसके अनुसार 1200 छात्रों के सैंपल जाँच के लिए भेजे गए हैं।

31 मई को, तमिलनाडु के स्वास्थ्य सचिव राधाकृष्णन ने कहा था कि सरकार वायरस के प्रसार को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “जिसमें लक्षण पाया जाएगा, उनका पहले परीक्षण किया जाएगा और पॉजिटिव पाए जाने वाले छात्रों को आइसोलेट किया जाएगा।”

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक राज्य भर में सर्वेक्षण के दौरान चेन्नई और चेंगलपेट में कोरोना के 88 फीसदी मामले पाए गए हैं। VIT के अलावा, अन्ना विश्वविद्यालय, IIT मद्रास और श्री सत्यसाई मेडिकल कॉलेज और रिसर्च इंस्टीट्यूट के छात्र भी अप्रैल 2022 से फैले कोविड से पीड़ित हैं।

रिपोर्टों में उल्लेख किया गया है कि इन संस्थानों के रूप में, कई राज्यों से 14 मई को छात्रों के एक बैच के कैंपस में आने के बाद वीआईटी परिसर में एक साथ भारी संख्या में छात्र एकत्रित हुए। फ्लू जैसे लक्षण वाले छात्रों में से एक का 21 मई को कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया।

फिलहाल राज्य में 542 सक्रिय कोविड मामले हैं। मंगलवार (31 मई 2022) को, राज्य से 98 नए कोविड मामले सामने आए, जिनमें चेंगलपेट और चेन्नई में अधिकांश मामलों में क्रमशः 46 और 44 मामले दर्ज किए गए। पिछले 24 घंटों में कुल 12,356 सैंपल्स की टेस्टिंग की गई है। राज्य में मरने वालों की संख्या 38,025 है। हालाँकि इसमें पिछले 24 घंटों में हुई मौत की संख्या शामिल नहीं है।

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेता सोमनाथ कदम की गुंडई, बुजुर्ग किसान और उसके बेटे को लोहे की रॉड और डंडों से पीटा: वीडियो वायरल

महाविकास अघाड़ी शासित महाराष्ट्र (Maharashtra) में कॉन्ग्रेस (Congress) की गुंडई सामने आई है। यहाँ सोलापुर जिले के तेम्भुरनी में सोमवार (30 मई 2022) को कॉन्ग्रेस के नगर अध्यक्ष सोमनाथ कदम ने एक वृद्ध किसान पर हमला कर दिया। जिस वक्त ये हमला किया गया उस दौरान वो वृद्ध किसान एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने के लिए गया था। घटना सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गई, जिसमें कदम को बूढ़े किसान, उसके बेटे और एक अन्य व्यक्ति को लोहे के रॉड और डंडों से बेरहमी से पीटते देखा जा सकता है।

स्थानीय रिपोर्ट्स से पता चला है कि आरोपित कॉन्ग्रेस नेता सोमनाथ कदम ने एक मजदूर को बुजुर्ग किसान और उसके बेटे के खेत में दिहाड़ी के तौर पर काम करने से रोका था। दोनों ही कदम के रिश्तेदार भी हैं और उन्होंने उससे इस तरह की पाबंदी लगाने का कारण पूछा था। लेकिन जब कदम से इसको लेकर पूछा गया तो उनको गुस्सा आ गई और उसने बूढ़े किसान और उसके बेटे पर खेत में लोहे के रॉड और डंडों से हमला किया।

इस हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद किसान को इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस हमले बाद भी जब आरोपित कदम का गुस्सा ठंडा नहीं हुआ तो वो अपने पाँच साथियों के साथ अस्पताल पहुँच गए और वहाँ भी किसान के साथ बेरहमी से मारपीट की। इस दौरान किसान के साथ आए एक अन्य व्यक्ति पर भी कॉन्ग्रेसी गुंडों ने हमला किया। मारपीट की ये घटना सीसीटीवी फुटेज में रिकॉर्ड हो गई, अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इसमें किसान को जमीन पर पटककर बेरहमी से मारते देखा जा सकता है।

इस बीच वृद्ध किसान के साथ मारपीट की घटना को लेकर सोलापुर के माधा शहर के यूनियन ने इसकी कड़ी निंदा की। यूनियन ने आरोपित कॉन्ग्रेस के नगर अध्यक्ष सोमनाथ कदम और पाँच अन्य लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की माँग की है। कथित तौर पर किसान को पीटने, अस्पताल में हंगामा करने के मामले में कदम और उनके साथियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामले में पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार भी किया है।

राज्यसभा? BJP? TMC? – सौरव गांगुली ने अपने जीवन के ‘नए अध्याय’ पर किया ट्वीट, सोशल मीडिया पर गर्म हुआ अटकलों का बाजार

बीसीसीआई अध्यक्ष और पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली ने बुधवार (1 जून 2022) को ट्विटर पर घोषणा की कि वह अपने जीवन में एक ‘नया अध्याय’ शुरू कर रहे हैं। सौरव गांगुली के इस ट्वीट ने सोशल मीडिया पर हलचल पैदा कर दी है। उनके ट्वीट में उन्होंने साफ तौर पर लिखा है कि वो लोगों की भलाई के लिए अब आगे कुछ करना चाहते हैं।

उन्होंने ट्वीट में लिखा, “साल 1992 में मैंने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी। 2022 इसके 30 साल पूरे होने का वर्ष है। तब से अब तक क्रिकेट ने मुझे काफी कुछ दिया है। मुझे आप सभी का समर्थन मिला है। मैं आज अपने हर एक फैन का शुक्रिया करना चाहता हूँ, जिन्होंने भी मेरी इस यात्रा में भागीदारी दी और मुझे यहाँ तक पहुँचाया। आज मैं ऐसी चीज की शुरुआत करने की योजना बना रहा हूँ, जिससे मुझे उम्मीद है कि काफी सारे लोगों को फायदा पहुँचेगा। मैं उम्मीद करता हूँ कि मेरे जीवन के इस नए अध्याय में आपका साथ मिलेगा।”

लेकिन लोग उनके ट्वीट को लेकर अटकलें लगा रहे हैं कि सौरव गांगुली आखिर करने क्या जा रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि गांगुली अब क्रिकेट के बाद राजनीति में भी अपना करियर शुरू करने जा रहे हैं।

कुछ लोगों ने अटकलें लगाई कि क्या उन्हें राज्यसभा, संसद के उच्च सदन के लिए नामित किया जा रहा है।

कुछ लोगों ने तो उनके भाजपा में शामिल होने पर राजनीति में आने की स्थिति में भी उनका समर्थन किया।

कई अन्य ने यह भी कहा कि अगर वह टीएमसी में शामिल होते तो वे उनका बहिष्कार करेंगे।

कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी कि उन्होंने बीसीसीआई प्रमुख के पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन बीसीसीआई सचिव जय शाह ने इन अफवाहों का खंडन किया है।

अपना ही मुस्लिम मुल्क बनाना चाहते थे सैफ अली खान के पुरखे, पाकिस्तान भेज दिया था खजाना: जानिए कैसे भारत का हुआ भोपाल

तारीख थी 1 जून। साल था 1949। आज के मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पहली बार औपचारिक तौर पर तिरंगा लहराया गया था। देश के स्वतंत्र होने के बावजूद भोपाल को यह दिन देखने के लिए करीब दो साल का इंतजार करना पड़ा। इसकी वजह थे, नवाब हमीदुल्ला। नवाब हमीदुल्ला आज के बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान के पुरखे थे। इस रिश्ते पर जाने से पहले जानते हैं कि नवाब के मोहम्मद अली जिन्ना, पाकिस्तान, मुस्लिम लीग और इस्लाम प्रेम ने कैसे हिंदू बहुल भोपाल के भारत में विलय के इंतजार को लंबा किया था।

स्वतंत्र होने के बाद अनेक रियासतों का भारत में विलय हुआ। लेकिन भोपाल के नवाब हमीदुल्ला खान इसके लिए तैयार नहीं थे। वे भारत की बजाय पाकिस्तान को तरजीह दे रहे थे। ऐसा नहीं होने पर उनका इरादा मुस्लिम रियासतों को मिलाकर एक अलग देश ‘प्रिंसिस्तान’ बनाने का था। पाकिस्तान में भोपाल का विलय भौगोलिक रूप से असंभव था। वहीं ‘प्रिंसिस्तान’ के लिए उन्हें अन्य रियासतों का सहयोग नहीं मिला। इसी बीच पाकिस्तान के जनक मोहम्मद अली जिन्ना भोपाल के नवाब हमीदुल्ला का पाक के प्रति प्रेम भाँप चुके थे। जिन्ना ने नवाब को प्रलोभन दिया कि अगर वे भोपाल समेत अन्य मुस्लिम रियासतों को पाकिस्तान में मिलाते हैं, तो उन्हें पाकिस्तान का गवर्नर जनरल बना दिया जाएगा, लेकिन देसी रियासत हमीदुल्ला के साथ आने को तैयार नहीं हुए।

भोपाल को लेकर जिन्ना और नबाव के बीच हुए संवाद का गोपनीय पत्र आज भी भोपाल स्वतंत्र्य आंदोलन स्मारक समिति के सचिव डॉ.आलोक गुप्ता ने अपने पास संभालकर रखा हुआ है। इतिहासकार डॉ. गुप्ता के अनुसार, 14 अगस्त 1947 भोपाल रियासत के भारत में विलय की अंतिम तिथि थी। इससे कुछ दिन पहले ही हमीदुल्ला ने पाकिस्तान में जाने के लिए हाथ-पैर मारना शुरू कर दिया था। उन्होंने दो अगस्त 1947 को जिन्ना को पत्र लिखा था।

हमीदुल्ला ने जिन्ना को माय डियर, कायदे आजम संबोधित करते हुए लिखा था, “आठ-दस साल से मैं पाकिस्तान का प्रबल समर्थक और मुस्लिम लीग का समर्पित अनुयायी हूँ। मेरी पाकिस्तान में विलय की प्रबल इच्छा है। भोपाल में 80 प्रतिशत हिंदू हैं और हम चारों ओर से हिंदू स्टेट से घिरे हुए हैं। मैं चाहता हूँ कि नवाब की गद्दी छोड़ दूँ और आपकी, इस्लाम और पाकिस्तान की सेवा करूँ। इसीलिए संविधान सभा में भी मैंने अपना प्रतिनिधि नहीं भेजा है। आपकी इजाजत से ही मैंने चेंबर ऑफ प्रिसेंस स्टेट (नरेश मंडल) की चांसलरशिप छोड़ी है। मैंने भोपाल सहित सभी मुस्लिम रियासतों को स्वतंत्र रखें जाने की पूरी कोशिश की, लेकिन इस काम में हिंदू रियासतों का सपोर्ट नहीं मिला और इसकी मुझे उम्मीद भी नहीं थी।”

पत्र में हमीदुल्ला ने जिन्ना से यह भी पूछा था कि अगर पाकिस्तान में मेरा कोई काम नहीं है तो भी मुझे बताया जाए। उन्होंने पत्र में यह भी लिखा था, “मैं आपसे मिलना चाहता हूँ। मेरा भविष्य अगले दिनों में तय होना है, इसलिए आपकी तरफ से पक्का आश्वासन चाहता हूँ। आपके प्रति मेरा गहरा विश्वास है। मैं कभी भी आपका साथ नहीं छोड़ूँगा। यदि पाक में मेरी जरूरत नहीं है तो मैं कहीं और चला जाऊँगा, लेकिन भारत में नहीं रहूँगा।”

नवाब हमीदुल्ला की भारत से नफरत और पाकिस्तान से प्रेम का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक झटके में भोपाल की करीब आधी आबादी को कंगाल कर दिया था। बताया जाता है कि भारत को लेकर नवाब के इरादे इतने खतरनाक थे कि उन्होंने भोपाल बैंक का पैसा पाकिस्तान भेज दिया था। साल 1948 में नवाब ने बैंक ऑफ भोपाल की एक ब्रांच पाकिस्तान के कराची शहर में खोल दी और यहाँ का सारा पैसा वहाँ भेज दिया। इसके बाद इस बैंक को दिवालिया घोषित कर दिया गया था। उस समय शहर के अधिकांश लोग इसी बैंक में अपने पैसे रखते थे। नवाब ने उन हजारों लोगों की खून-पसीने की कमाई को डुबो दिया था।

दरअसल, भोपाल रियासत को भारत में मिलाने के लिए 4 जनवरी 1949 से प्रयास शुरू हो गए थे। सरदार पटेल की काफी कोशिशों के बाद भी हमीदुल्ला खान ने मर्जर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर टालने का प्रयास किया। 30 अप्रैल 1949 को जब भोपाल रियासत के मर्जर एग्रीमेंट पर साइन हुए तो भी नवाब ने बीमारी का बहाना बनाया, लेकिन उनसे बिस्तर में ही साइन कराकर भोपाल को भारत का हिस्सा बना लिया गया। इसके बाद भोपाल 1 जून 1949 को भारत का पूरी तरह से हिस्सा बना।

कहा जाता है कि भारत में भोपाल के विलय के बाद नवाब इंग्लैंड चले गए। वहीं उनकी बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान ने पाकिस्तान में रहने का फैसला किया। उनकी शादी कुरवाई के नवाब से हुई थी। पाकिस्तान जाने के बाद वहाँ की सरकार ने उन्हें ब्राजील में अपना राजदूत नियुक्त कर दिया। इसके बाद भी वे पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय में वरिष्ठ पदों पर रहीं। नवाब की छोटी बेटी साजिदा सुल्तान का निकाह हरियाणा के पटौदी रियासत के नवाब से हुआ। नवाब के जाने के बाद साजिदा सुल्तान ने गद्दी सँभाली। क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी साजिदा सुल्तान के बेटे थे। बाद में उन्हें ही भोपाल के नवाब के तौर पर मान्यता मिली थी। टाइगर पटौदी ने बॉलीवुड अभिनेत्री शर्मिला टैगोर से निकाह किया था। सैफ अली खान उन्हीं के बेटे हैं। इस तरह भोपाल के नवाब हमीदुल्ला रिश्ते में सैफ अली खान के परनाना लगे।