कर्नाटक के बेंगलुरु में सहकर्मी महिला के चेहरे पर एसिड फेंकने के आरोप में अहमद नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि अहमद ने महिला द्वारा निकाह का प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद ये कदम उठाया। महिला तलाकशुदा और 3 बच्चों की माँ है। अहमद की गिरफ़्तारी शुक्रवार (10 जून 2022) को हुई।
Karnataka | A woman suffered minor injuries after her lover threw bathroom cleaning liquid having mild acid on her face. The accused wanted to marry the victim. Her right eye was hurt in the attack. The accused will be arrested soon: Harish Pandey, DCP (South) Bengaluru (10.06) pic.twitter.com/TxZRZJ6RJ2
पुलिस के मुताबिक आरोपित अहमद ने महिला के चेहरे पर बाथरूम साफ़ करने वाला केमिकल फेंका है। इस हमले से पीड़िता की आँखों को नुकसान पहुँचा है और उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। आरोपित अहमद 36 साल और पीड़िता की उम्र 32 साल बताई जा रही है। घटना बेंगलुरु के सरककी इलाके की है।
The #Karnataka police arrested a man for throwing acid on a woman within hours of the crime in #Bengaluru. The arrested person was identified as Ahmad, a resident of Goripalya. pic.twitter.com/3YnMuLXOm0
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गोरीपाल्या क्षेत्र का रहने वाला अहमद और पीड़िता एक साथ ही फैक्ट्री में काम करते थे। पीड़िता पर अहमद निकाह का दबाव बना रहा था, जबकि पीड़िता लगातर मना कर रही थी। आरोपित ने ये हरकत तब की जब पीड़िता कुमारस्वामी लेआउट से जेपी नगर जा रही थी। इस दौरान सरककी स्टेशन के पास छिपा अहमद एसिड फेंक कर भाग गया। मौके पर पहुँच कर बेंगलुरु पुलिस ने पीड़िता को अस्पताल भेजा और आरोपित को खोज निकाला।
गौरतलब है कि अप्रैल 2022 में भी इसी प्रकार की घटना बेंगलुरु में घटी थी। तब पश्चिम बेंगलुरु के सुनकादाकट्टे इलाके में एक अन्य व्यक्ति ने शादी का प्रस्ताव ठुकराए जाने पर 24 साल की एक लड़की पर तेज़ाब फेंक दिया था। कुछ महीने पहले कर्नाटक के गृहमंत्री लड़कियों पर तेजाब फेंकने की घटनाओं को बेहद गंभीर बताते हुए प्रदेश में तेजाब की बिक्री पर बैन लगाने की बात कही थी।
जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के एक यूट्यूबर ने भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) का सिर कलम करते हुए एक ग्राफिक वीडियो डाला है। इस यूट्यूबर का नाम फैसल वानी (Faisal Wani) है। हालाँकि, चारों तरफ से आलोचना और पुलिस से कार्रवाई की माँग के बाद उसने माफी माँग ली है।
नूपुर शर्मा के सिर कलम करने से संबंधित ग्राफिक्स वीडियो में कहता है, “नो ऐक्शन, नो वॉरंट… सिर्फ और सिर्फ गुस्ताख-ए-रसूल की एक सजा… सर कलम।” इसके बाद वीडियो में ग्राफिक्स के जरिए बनाई गई नूपुर शर्मा की तस्वीर में वह कुल्हाड़ी से गर्दन काट देता है। इसके बाद घृणा के साथ उस कटे गर्दन को उठाता है और दूर फेंक देता है।
इस पूरे वीडियो में वानी ने तुर्की की इस्लामिक प्रोपेगेंडा सीरीज ‘एर्तुगरुल गाजी’ का म्यूजिक बैकग्राउंड में इस्तेमाल करता है। गाजी के बारे में सीरीज में कहा गया है कि उसने ईसाइयों और अन्य काफिरों को हराकर ऑटोमन साम्राज्य (इस्लामी उस्मानिया सल्तनत) की नींव रखी थी। यह सीरीज पाकिस्तान में खूब प्रचलित हुआ था।
पत्रकार आदित्यराज कौल ने इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर कर कश्मीर पुलिस से कार्रवाई की माँग करते हुए लिखा, “डीप पेन फिटनेस के यूट्यूब अकाउंट के साथ कश्मीर के यूट्यूबर फैसल वानी ने सबसे हिंसक ग्राफिक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उसे नूपुर शर्मा का सिर कलम करते हुए दिखाया गया है। आशा है कि @KashmirPolice आगे हिंसा और दंगा भड़काने से पहले समय पर कार्रवाई करे। ब्रेनवॉश किया हुआ बेवकूफ। यह डरावना है।”
Kashmir based YouTuber Faisal Wani with YouTube Account of Deep Pain Fitness shares most violent graphic video showing him beheading Nupur Sharma. Hope @KashmirPolice acts in time before he provokes further violence and rioting. Brainwashed idiot. This is scary. @JmuKmrPolicepic.twitter.com/cJL1VRIW79
तालिबान और इस्लामिक स्टेट (ISIS) की तरह वानी ने सिर कलम करने का जो वीडियो साझा किया, उसकी हर तरफ आलोचना हुई और उसे गिरफ्तार करने की माँग उठने लगी। इसके बाद उसने यूट्यूब पर एक वीडियो शेयर करते हुए इसके लिए माफी माँगी।
अपने माफीनामा वीडियो में फैसल वानी ने कहा, “कल रात को मैंने एक वीडियो अपलोड किया था, जो नूपुर शर्मा के बारे में था और VFX से बनाया था। वो वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो गया। इसकी वजह से मैं ‘बेगुनाह’ फँस गया। मेरा कोई भी इंटेंशन (इरादा) नहीं होता है कि मुझे किसी दूसरे धर्म को हर्ट (ठेस पहुँचाऊँ) करूँ, क्योंकि हमारा इस्लाम हमें सिखाता है कि दूसरे धर्म की रेस्पेक्ट (आदर) करो।”
अपने माफीनामे वाली वीडियो में वानी आगे कहता है, “हाँ, मैंने वो बना लिया था, लेकिन ऐसा कोई इरादा नहीं था कि किसी तरह की हिंसा हो। उस वीडियो को मैंने कल रात को ही डिलीट भी कर दिया था। उसके लिए मैं आप लोगों से सॉरी बोलता हूँ, क्योंकि अगर मेरी वजह से कोई हर्ट हो गया होगा तो उसके एक्सट्रीमली सॉरी फॉर डैट। इस वीडियो को लोगों ने गलत समझ लिया था। मैं एक सिंपल लड़का हूँ। मैं नहीं चाहता हूँ मैं बेगुनाह फँस जाऊँ। मेरी माँ है, मेरे पापा हैं तो मैं नहीं चाहता कि किसी तरह प्रॉब्लम हो जाए।”
महाराष्ट्र के AIMIM सांसद इम्तियाज जलील ने खुलेआम कहा है कि नूपुर शर्मा को फाँसी के फंदे से लटका दिया जाना चाहिए। भाजपा पहले ही नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल को पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी के आरोप लगने के बाद निलंबित कर चुकी है। इम्तियाज जलील ने साथ-साथ इस्लाम को एक शांतिपूर्ण मजहब भी करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर नूपुर शर्मा को आसानी से जाने दिया गया तो ऐसी चीजें कभी नहीं रुकेंगी।
इम्तियाज जलील ने ये भी कहा कि लोग आक्रोशित हैं और कानून को उन सबके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, जो किसी बी धर्म/मजहब के विरुद्ध ऐसी टिप्पणी करते हैं। हालाँकि, इस दौरान उन्होंने कई हफ़्तों तक सोशल मीडिया में शिवलिंग का लगातार मजाक बनाने वालों के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा। उन्होंने कहा, “इस्लाम अमन और शांति का मजहब है, यकीनन लोगों के बीच गुस्सा है। किसी भी जाति-धर्म, गुरु या नबी के खिलाफ कोई कुछ बोलता है तो कार्रवाई होनी चाहिए।”
उन्होंने दावा किया कि तजा मामले में कार्रवाई नहीं हो रही है और सिर्फ पार्टी से निकाल दिया जाना कार्रवाई नहीं है। इम्तियाज जलील महाराष्ट्र के औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। उससे पहले वो औरंगाबाद सेन्ट्रल विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रहे हैं। AIMIM ने उन्हें महाराष्ट्र में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष भी बना रखा है। कभी ‘लोकमत’ और ‘NDTV’ के पत्रकार रहे सैयद इम्तियाज जलील के नेतृत्व में AIMIM को 2015 औरंगाबाद स्थानीय निकाय के चुनावों में 25 सीटें मिली थीं।
#WATCH Islam is a religion of peace, people are angry…Nupur Sharma should be hanged. If she’s allowed to let-go easily, then such things won’t stop. Law should be brought to take action against those who make such remarks against any religion, sect…: AIMIM MP Imtiaz Jaleel pic.twitter.com/jUKkmvDb4V
नूपुर शर्मा के विरोध में जुमे के दिन भारी हिंसा हुई और खासकर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और पश्चिम बंगाल के हावड़ा के अलावा राँची में मुस्लिम भीड़ ने जम कर तांडव मचाया। झारखंड हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई। एक पुलिस अधिकारी के सिर को फोड़ दिया तो बिहार के मंत्री नितिन नवीन की गाड़ी पर भी हमले किए गए। राँची सदर के एसडीओ के आदेश के बाद कुछ इलाकों में धारा 144 लगा दी गई है। कई जगह राँची में हर तरह की इंटरनेट सेवा को बंद करने की तैयारी है।
कुख्यात इस्लामी आतंकी संगठन अल कायदा (Al Qaeda) देश में लोगों को भड़काने के बाद अब अपने खतरनाक मंसूबे को पूरा करने के फिराक में लग गया है। आतंकी संगठन द्वारा भारत के कई शहरों में फिदायीन हमला (Suicide Attack) करने की धमकी देने के बाद देश को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
कर्नाटक में बुर्का-हिजाब के विवाद के बीच मौका देखकर अल कायदा कट्टरपंथियों के समर्थन में कूद गया था। अब उसने इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के कथित अपमान को लेकर देश भर में लोगों को भड़काने के बाद आत्मघाती हमले करने की चेतावनी दी है।
दरअसल, कर्नाटक के स्कूलों में हिजाब और यूपी में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध के बाद देश में मंदिरों को गिराकर अवैध रूप से बनाए मस्जिदों को लेकर कोर्ट में मामले बढ़े तो पैगंबर को लेकर मुद्दा बनाया गया। कट्टरपंंथियों को लगता है कि इस तरह उपद्रव करने से लोग और अदालतें डर जाएँगी और उनके दबाव में काम करेंगी।
अपने पक्ष में महौल बनाने के चक्कर में कट्टरपंथियों ने देश का माहौल खराब कर दिया और इस्लामिक स्टेट (ISIS) और अल कायदा जैसे इस्लामिक आतंकी संगठन इसी के इंतजार में बैठे थे। 6 जून को अल कायदा ने धमकी पत्र जारी करते हुए कहा था कि वह ‘पैगंबर के सम्मान के लिए लड़ने’ के लिए दिल्ली, मुंबई, उत्तर प्रदेश और गुजरात में आत्मघाती हमले शुरू करेगा।
अल कायदा की आधिकारिक वेबसाइट पर कहा गया है, “भगवा आतंकवादियों को अब दिल्ली, बॉम्बे, यूपी और गुजरात में अपने अंत का इंतजार करना चाहिए। उन्हें न तो अपने घरों में और न ही अपनी गढ़वाली सेना की छावनियों में शरण लेना है।”
CNN News18 ने खुफिया सूत्रों के हवाले से अपने रिपोर्ट में कहा है कि इस धमकी को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। इसलिए सभी राज्यों की पुलिस को आपस में जोड़ने के लिए कहा गया है। यह पहली बार है जब अल कायदा ने स्पष्ट रूप से जगहों का नाम लिया है।
उसी दिन बांग्लादेश को भी अल कायदा को धमकी मिला। खुफिया सूत्रों का कहना है कि उसकी वेबसाइट के स्थान के बारे में पता लगाया जा रहा है। फिलहाल इसके बारे में कुछ कहना मुश्किल है। यह अफ्रीका, ईरान या अफगानिस्तान में स्थित हो सकता हैं। पाकिस्तान को भी इससे खारिज नहीं किया जा सकता।
अल कायदा के कैडर भारत में मौजूद हैं। आतंकी संगठन चाहता है कि वर्तमान हालात को देखकर कुछ असामाजिक तत्व उसके बहकावे में आकर लोन-वुल्फ अटैक को अंजाम दें। सूत्रों का कहना है कि इसके लिए इसके कैडर मिलकर धन का इंतजाम कर सकते हैं।
बता दें कि भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा पर कट्टरपंथियों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने पैगंबर मुहम्मद का अपमान किया है। उनके खिलाफ शुक्रवार (10 जून 2022) को देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन के नाम पर आगजनी, पथराव और तोड़फोड़ की घटनाओं को अंजाम दिया गया।
पंजाब (Punjab) में भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार में परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर (Laljit Singh Bhullar) ने एक अलग ही स्वैग दिखाने की कोशिश की है। वो हाईवे पर तेज रफ्तार से चल रही अपनी एसयूवी कार के सनरूफ से बाहर निकलकर हाथ हिलाते हैं। वहीं उनकी सुरक्षा में तैनात दो पुलिसकर्मियों को कार की दोनों तरफ की खड़कियों पर बैठे देखा गया है।
लालजीत सिंह भुल्लर के इस स्टंट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि ये वीडियो नेशनल हाईवे का है। आप के मंत्री का वीडियो शेयर करते हुए मानिक गोयल नाम के ट्विटर यूजर ने कहा कि पंजाब के ट्रांसपोर्ट मंत्री लालजीत भुल्लर इस तरह के स्टंट करके खुद कानून को तो तोड़ ही रहे हैं। अपने साथ ही इन्होंने दो सुरक्षाकर्मियों की जान को भी दाँव पर लगा दिया है।
देखिए कैसे @AAPPunjab के ट्रांसपोर्ट मंत्री लालजीत भुल्लर कैसे तेज स्पीड चलती गाड़ी की सनरूफ खोल कर स्टंट कर रहे हैं।
इस बीच स्टंट वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लालजीत भुल्लर ने दावा किया कि ये वीडियो 3 महीने पुराना है। उन्होंने कहा कि ये उस वक्त का वीडियो है जब वो चुनाव जीतकर आए थे। वो कुतर्क देते हैं कि विपक्षी पार्टियाँ उनके अच्छे काम को पचा नहीं पा रही हैं। इसी कारण इस वीडियो को वायरल कर दिया।
हालाँकि, भुल्लर का वीडियो को 3 महीने पुराना नहीं प्रतीत होता। इसकी वजह ये है कि उनकी कार के आगे पीछे पुलिस की कार उन्हें एस्कॉर्ट कर रही हैं और ऐसा पद मिलने के बाद ही होता है।
हो सकती है एक साल की जेल
इस बीच मंत्री के स्टंट को लेकर नेशनल रोड सेफ्टी काउंसिल के सदस्य डॉ कमलजीत सोई ने मंत्री के वीडियो को मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह का स्टंट मोटर व्हीकल एक्ट के सेक्सन 184F के तहत आता है। इसके तहत मंत्री और उनके गनमैनों को एक साल की सजा हो सकती है।
देशभर में शुक्रवार (10 जून 2022) को इस्लामिक कट्टरपंथियों ने पैगंबर मुहम्मद (Prophet Muhammad) पर कथित बयान को लेकर जमकर उत्पात मचाया। कहीं नूपुर शर्मा के पुतले को फाँसी पर लटका दिया तो कहीं पुलिस के जवानों पर पत्थरबाजी की गई। लेकिन इन सब में झारखंड के राँची (Ranchi) में इस्लामवादियों ने जमकर हिंसा की। हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई। एक पुलिस अधिकारी के सिर को फोड़ दिया तो बिहार के मंत्री नितिन नवीन की गाड़ी पर भी हमले किए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, जुमे की नमाज के बाद इकरा मस्जिद इलाके में बीजेपी की पूर्व नेता नूपुर शर्मा के खिलाफ इस्लामिक कट्टरपंथियों सड़कों पर उतरा और आगजनी व तोड़फोड़ की। पुलिस पर भी हमले किए गए। पत्थरबाजी के साथ ही गोलियाँ भी चलीं। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि करीब 24 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। दंगे के दौरान वहाँ पर तैनात एक पुलिसवाले को भी गोली लगी है।
दंगाइयों ने बजरंगबली मंदिर पर भी जमकर पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की। इस दौरान मजहबी नारेबाजी भी की गई। इस्लामिक दंगे में करीब दो दर्जन से भी अधिक गाड़ियों को चकनाचूर कर दिया गया है। इस्लामिक दंगाइयों ने एसएसपी को भी पत्थर मारा, लेकिन उन्होंने जो हेलमेट पहना हुआ था, उसने उन्हें बचा लिया। हालाँकि, हेलमेट जरूर टूट गया। इस दौरान हनुमान मंदिर में छिपे हिन्दुओं पर भी पत्थरबाजी हुई। मंदिर को भी नहीं बख्शा गया।
राँची सदर के एसडीओ के आदेश के बाद कुछ इलाकों में धारा 144 लगा दी गई है। कई जगह राँची में हर तरह की इंटरनेट सेवा को बंद करने की तैयारी है। बहरहाल संवेदनशील इलाकों में भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात कर दिया गया है।
बिहार के मंत्री पर राँची में हमला
भाजपा नेता और बिहार सरकार में मंत्री नितिन नवीन पर भी राँची में इस्लामी दंगाइयों ने हमला कर दिया। उनकी गाड़ी को क्षतिग्रस्त दिया गया। हालाँकि, वो इस घटना में बाल-बाल बचे। वो यहाँ एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आए थे। हालाँकि, बाद में राँची पुलिस ने उन्हें बचाकर सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया।
भाजपा से निलंबित चल रहीं नूपुर शर्मा के पैगंबर मुहम्मद पर कथित टिप्पणी के खिलाफ देशभर में शुक्रवार (10 जून, 2022) को हिंसक प्रदर्शन किए गए। इसी क्रम में तेलंगाना में कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने देश की आन के प्रतीक भारतीय तिरंगे के साथ छेड़छाड़ कर दी। राज्य में दंगाइयों ने तिरंगे के बीच में अशोक चक्र को हटाकर इस्लामिक कलमा लिख दिया।
‘टाइम्स नाउ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उक्त घटना महबूबनगर में मस्जिद-ए-रहमत मस्जिद के बाहर हुई, जहाँ सैकड़ों इस्लामवादी पैगंबर मुहम्मद पर की गई टिप्पणियों के विरोध में एकत्र हुए थे। भीड़ ने कथित तौर पर नूपुर शर्मा और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की और पूर्व भाजपा प्रवक्ता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग करते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
हालाँकि, इस दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों ने भारतीय तिरंगे से छेड़छाड़ कर अशोक चक्र को हटाकर उसकी जगह इस्लामिक कलमा को पेंट कर तिरंगे का अनादर किया।
गौरतलब है कि जब इस्लाम को कबूला जाता है तो कलमा पढ़वाया जाता है। ये एक घोषणा, या विश्वास का बयान है, जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘शब्द’। शाहदाह या कलमा पढ़ना ‘शपथ / गवाही’ मुस्लिमों के लिए इस्लाम के पाँच स्तंभों में सबसे महत्वपूर्ण है।
देशभर में विरोध प्रदर्शन
शुक्रवार (10 जून) को पूर्व भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ देश भर के कई शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। इस्लामिक कट्टरपंथी पैगंबर मुहम्मद पर इस्लामिक हदीसों को उजागर करने से नाराज हैं। जुमे की नमाज के बाद दिल्ली की जामा मस्जिद के बाहर नूपुर शर्मा के विरोध में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। सामने आए विजुअल्स में मुस्लिमों को नूपुर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल के खिलाफ नारे लगाते और उनकी गिरफ्तारी की माँग करते देखा गया।
इस बीच कर्नाटक के बेलगावी में तो नुपुर शर्मा के पुतले को फोर्ट रोड पर फाँसी से लटका दिया गया। ये हंगामे की गंभीरता को दिखाने के लिए पर्याप्त है। इस मामले की शुरुआत फैक्ट चेक के नाम पर प्रोपेगेंडा फैलाने वाले ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर द्वारा इस्लामिक कट्टरपंथियों को उकसाने के बद हुई।
इसी तरह का विरोध प्रदर्शन उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भी जुमे की नमाज के बाद किया गया। इस दौरान कट्टरपंथियों ने पत्थरबाजी भी की। झारखंड का राँची भी इससे अछूता नहीं रहा। राँची में भी आज (10 जून) नूपुर शर्मा के खिलाफ इस्लामवादियों ने हिंसक प्रदर्शन किया।
क्या आपने कर्नाटक के बेलगावी (Belagavi, Karnataka) में ऊँची तार से साड़ी में लटके हुए एक पुतले की तस्वीरें देखी? अगर आपने देखी होगी तो इसे देखकर आप जरूर परेशान हुए होंगे, क्योंकि यह तस्वीर खौफ पैदा करने वाली ही है। जिन्होंने ऐसा किया है, उन्होंने उस पुतले पर भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की तस्वीर भी लगाई है। इस धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश में उनके ऊपर इनाम की घोषणा कर कहा गया है कि उनका सिर काट दिया जाना चाहिए।
तार से लटकाया हुआ नूपुर शर्मा का पुतला
यह असली लग रहा है, है ना? अगर आप इसके बारे में सोचते हैं तो यह बेहद डरावना है। बहुत सारे लोग एक महिला के साथ ऐसा करना चाहते हैं। एक अकेली महिला, जिसकी बातें उन्हें पसंद नहीं आई। जिस तरह से हमें सोचने और व्यवहार करने के लिए ढाला गया है उसके तहत हम कुछ सेकंड के लिए तस्वीर को देखते हैं और फिर हम खुद से ही कहते हैं, “नहीं, यह भारत है अफगानिस्तान या सीरिया नहीं। ऐसी चीजें यहाँ नहीं हो सकतीं”।
इसमें कुछ सच्चाई है। हाँ, अफगानिस्तान में ऐसी चीजें आम हैं। साल 2021 में सत्ता हथियाने के कुछ ही समय बाद तालिबान ने शवों को क्रेन से लटकाना शुरू कर दिया। वे तस्वीरें भी इसी तरह डरावनी थीं। एक तस्वीर सामने आई थी, जिसमें तालिबान ने एक शव को हेलीकॉप्टर से लटका दिया था। वे पुतले नहीं थे, वाकई हत्या करने के बाद लोगों में एक संदेश भेजने के लिए उनके शव को फाँसी लगाकर तमाशा बनाया गया था।
सितंबर 2021 में तालिबान ने हेरात में क्रेन से 4 शव लटकाए थे (फोटो साभार: द पायनियर)
अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में लटकाए गए शव पुतले नहीं थे। वे वास्तविक लोग थे। ‘अपहरण’ के आरोपित 4 लोगों को पहले मार दिया गया और फिर जनता के सामने उनके शव को फाँसी पर लटका दिया गया। दूर के युद्धग्रस्त देशों में डरावनी चीजें हो रही हैं, यही सोच रहे हैं न आप?
दरअसल, बात यह है कि यह लेख लिखे जाने तक पूरे भारत में लाखों लोग उपद्रव कर रहे थे और नूपुर शर्मा को फाँसी पर लटकाने, बिना सिर के उनके धड़ देखने के की माँग कर रहे थे। उनमें से कई चाहते हैं कि पहले नूपुर शर्मा का बलात्कार हो, फिर सिर कलम किया जाए। वह डरावना पुतला इसी इरादे की खुलेआम घोषणा है।
अभी कल (9 जून 2022) को ही जम्मू की एक मस्जिद में मौलवी ने लाउडस्पीकर से आवाज लगाई गई कि नूपुर शर्मा का सिर कलम कर देना चाहिए। उसने यह भी घोषणा की कि हिंदू, चूँकि वे ‘गोमूत्र पीते हैं’, इसलिए वे मुस्लिमों के बराबर समझे जाने के योग्य नहीं हैं। इसी तरह पश्चिम बंगाल में भी मुस्लिमों की भीड़ ने नूपुर शर्मा का सिर कलम करने की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था।
दिल्ली की जामा मस्जिद, यूपी के सहारनपुर, प्रयागराज, झारखंड के राँची और कई अन्य जगहों पर भीड़ घोषणा कर रही है कि वे असली नूपुर शर्मा को फाँसी देना या सिर कलम करना चाहती है। मौलाना, उलेमा और नेताओं ने एक हफ्ते से भी अधिक समय से खुले तौर पर घोषणा की है कि नूपुर शर्मा जीने के लायक नहीं हैं।
शासन-प्रशासन चुप है। कानून-व्यवस्था तोड़ने के आरोप में यहाँ-वहाँ कुछ गिरफ्तारियाँ हुई हैं और धार्मिक नफरत फैलाने के आरोप में कुछ एफआईआर भी दर्ज हुई हैं, लेकिन क्या ये काफी हैं? क्या हम पालघर के साधुओं का चेहरा भूल गए हैं?
महाराष्ट्र के पालघर में कल्पवृक्ष गिरि को पुलिस के सामने बेरहमी से पीट-पीट कर मार डाला गया था
कल्पवृक्ष गिरि महाराज 70 वर्ष के थे। अपने कमजोर हाथों से को जोड़ते हुए एक पुलिस अधिकारी से बचाने की गुहार लगाई थी और अपने झुर्रीदार चेहरे के साथ इस उम्मीद में वे मुस्कुराए थे कि राज्य की शक्ति के रूप में कई वर्दीधारी पुलिस अधिकारी उनके सामने मौजूद हैं, जो खून की प्यासी भीड़ से उनकी रक्षा कर लेगी। लेकिन, वह कुछ कुछ ही सेकंड में गलत साबित हो गया। जब भीड़ उन्हें और उनके सहयोगी को पीट-पीट कर मार डाला और उनके शवों को भी नहीं छोड़ा तब भी पुलिस देख रही थी।
पालघर की घटना के 2 साल हो चुके हैं। इस घटना में सरकार असफल साबित हुई थी। सत्ताधारी दल के नेताओं ने कभी भी इस मामले में कुछ नहीं कहा। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को छोड़कर किसी भी प्रमुख नेता ने कभी उनका जिक्र नहीं किया और ना ही उन साधुओं के लिए शोक व दुख व्यक्त किया। कल्पवृक्ष गिरि महाराज यह विश्वास लिए हुए भीड़ के हाथों मारे गए कि सरकार उन्हें बचा लेगी।
लखबीर सिंह शायद इतना साक्षर या जागरूक नहीं था कि उसे विश्वास हो जाए कि उसे बचा लिया जाएगा। जबकि उसका खंडित शरीर उसके ही खून के कुंड में पड़ा था। उसकी आँखें सदमे से फैल गई थीं। वह इशारे से बोलने की कोशिश करता रहा। संभवत: वह बचाए जाने, मदद करने या कुछ पानी दिए जाने की याचना कर रहा था।
लखबीर के हमलावरों ने उसकी हत्या का तमाशा भी बना लिया था। उन्होंने निष्प्राण पड़े उसके शरीर के चारों ओर अपनी तलवारें लहराते हुए क्रूरता का नृत्य किया। उन्हें सरकार का कोई डर नहीं था। हेरात की अनाम लाशों की तरह ही लखबीर को पुलिस के बैरिकेड्स के मचान से बाँध दिया गया और सभी लोगों के देखने के लिए छोड़ दिया गया था।
आधुनिक तकनीक, देश चलाने के लिए जबरदस्त जनादेश, ताकतवर सुरक्षाबल और सूचनाएँ उपलब्ध होने के बावजूद सरकार पालघर में साधुओं की हत्या और किसान आंदोलन के दौरान सिंघु-कोंडली बॉर्डर पर लखबीर सिंह की निर्मम हत्या के मामले में राज्य की सत्ता विफल साबित हुई।
मार कर लटकाया हुआ लखबीर सिंह का शव
महीनों तक लोगों ने पीएम को मारने और काटने की धमकी दी, बलात्कार की घटनाएँ सामने आईं, यातायात रोक दिया गया और किसानों के विरोध के नाम पर पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया और सरकार देखती रही। जब लाल किले में तिरंगा फहराया गया और पीला झंडा लगा दिया गया, तब भी सरकार देखती रही।
चूँकि सरकार का अपमान और दुर्बलता सभी को दिखाई दी थी और जब लाल किले की ऊँची दीवारों से दर्जनों पुलिस अधिकारियों को नीचे गिराया गया तब पूरी दुनिया इसे देख रही थी। सरकार ने अराजकतावादियों के सामने हार मान ली थी। जिस दिन गणतंत्र अपना संविधान मनाता है, उसी दिन लोकतंत्र के प्रतीकों को अशुद्ध कर दिया गया था।
तस्वीरें शक्तिशाली होती हैं। ये मन-मस्तिष्क में बैठ जाती हैं। तस्वीरें कहानियाँ बताती हैं। दुर्भाग्य से हमारे लिए ऐसी बहुत सी तस्वीरें हैं, जो किसी सरकार के कमजोर होने और भीड़ के सामने बेबस एवं लाचार होने की कहानी बयाँ कर सकती हैं। जब सरकार कमजोर होती है तो उस स्थान पर अराजकतावादी, कट्टरपंथी और शैतान कब्जा कर लेते हैं। अराजकता महामारी की तरह फैलती है। निराशा टिड्डियों की तरह पैदा होती है।
कट्टरता एक फिसलन भरी ढलान है। अराजकता एक अंधकारमय स्थान है। यहाँ कानून और व्यवस्था का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कट्टरपंथी किस किताब से आदेश लेते हैं या अराजकतावादी किस टूलकिट का पालन करते हैं।
राज्य की शक्ति ही जनता को कट्टरता और अराजकता के खतरे से बचा सकती है। जब उस राज्य की शक्ति अराजकता को रोकने में विफल हो जाती है तो कट्टरता बढ़ जाती है। मानव पर भ्रष्टता हावी हो जाती है और मनुष्य शैतान बन जाते हैं। उसके बाद पुतलों को वास्तविक शरीर बनने में केवल कुछ ही समय लगता है।
पैगंबर मुहम्मद पर नूपुर शर्मा के कथित बयान को लेकर NDTV (नई दिल्ली टेलीविज़न लिमिटेड) पर एक डिबेट के दौरान चैनल के पत्रकार विष्णु सोम ने विवाद खड़ा कर दिया है। सोम ने दावा किया कि इस्लामी आतंकवाद पर बात करने से आम मुस्लिमों की भावनाओं को ठेस पहुँच सकती है।
दरअसल, वामपंथी चैनल पर डिबेट के दौरान वकील और पैनलिस्ट के तौर पर उपस्थित देश रतन निगम ने संयुक्त राष्ट्र के डाटा का हवाला देते हुए तथ्यों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “घोषित आतंकवादियों में से 95% इस्लाम से हैं। और 95% आतंकवादी संगठन इस्लामिक हैं।” इस पर इस्लामिक आतंकवाद का बचाव करते हुए विष्णु सोम ने कहा, “तो क्या हम हर उस व्यक्ति को टाइपकास्ट करते हैं जो मुस्लिम हैं (उनमें से अरबों दुनिया भर में मौजूद हैं)?” इसका जबाव देते हुए निगम तंज कसते हुए कहा, “बीजेपी ये तथ्य पैदा नहीं कर रही है।”
देश रतन निगम ने नूपुर शर्मा मामले का जिक्र करते हुए जोर देकर कहा, ”मामला कोर्ट में जा चुका है। एफआईआर दर्ज कर ली गई है।” अब अदालतें तथ्यों के साथ न्याय करेंगी और ये तय करेंगी कि उनका बयान उकसावे के जवाब में था या नहीं।
नूपुर शर्मा के बयान की अलग से जाँच की जा सकती है
निगम के तीखे जबाव से असहज विष्णु सोम डिफेंसिव मोड में आते हुए कहा, “आप मुझे उकसा सकते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं जो चाहूँ कह सकता हूँ।” न्यूज एंकर ने कहा कि लोगों को अपने भाषण में संयम बरतना चाहिए। उन्होंने ये भी माना कि दूसरों को भी उकसाना नहीं चाहिए। खास बात ये है कि इन लोगों को इस्लामिक पैनलिस्ट द्वारा नूपुर शर्मा और हिन्दुओं को उकसाना स्वीकार्य है, लेकिन जब शर्मा ने इस पर रिएक्ट कर दिया तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिमिट का उल्लंघन माना जाता है।
डिबेट के दौरान एनडीटीवी के पत्रकार ने उन परिस्थितियों को अनदेखा कर दिया, जिस कारण से टाइम्स नऊ पर डिबेट के दौरान नूपुर शर्मा को इस्लामिक धर्म की पेचीदगियों पर चर्चा करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इस मामले में ऑपइंडिया ने इसके लेकर रिपोर्टिंग की थी कि किस तरह से वाराणसी स्थित ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर मिले शिवलिंग को इस्लामवादी फव्वारा बता रहे हैं। वो शिवलिंग वाली जगह को वर्षों से ‘वुजुखाना’ के तौर पर इस्तेमाल करते रहे हैं। डिबेट के दौरान हिन्दू प्रतीकों को लेकर अपमानजनक टिप्पणियाँ की गईं। इसी कारण से मजबूरन नूपुर शर्मा ने पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी की।
विष्णु सोम आतंकवाद से ज्यादा ‘टाइपकास्टिंग’ की चिंता
डिबेट के दौरान अधिकतर समय विष्णु सोम मुस्लिमों का बचाव करते रहे। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के कार्यों के कारण पूरे समुदाय को बदनाम नहीं करना चाहिए। हालाँकि, देश रतन निगम ने जोर देकर कहा कि 95% आतंकी संगठन इस्लामिक हैं।
इस पर सोम ने माफी माँगने के अंदाज में कहा, “जिस वक्त आप कहते हैं कि दुनिया भर के 95% आतंकवादी मुस्लिम हैं या इस्लामी आस्था से हैं – मैं आँकड़े नहीं जानता, लेकिन भले ही वे सही हों। लेकिन, क्या वो नहीं कर रहे हैं, जिसके लिए हम आपको मना कर रहे हैं?” न्यूज एंकर ने आगे कहा, “आप पूरे इस्लाम को टाइपकास्ट कर रहे हैं। दुनिया में अरबों मुस्लिम हैं। वे लगभग सभी शांतिपूर्ण लोग हैं … अगर आपका इरादा पूरे आस्था को टाइपकास्ट करने का नहीं है, तो ऐसा बयान क्यों दें? यह इतना गलत नंबर है सर।” हालाँकि, निगम ने संयुक्त राष्ट्र का हावाला देते हुए बार-बार ये दावा किया कि उनका तथ्य सही है।
एनडीटीवी पत्रकार ने मजबूरन स्पष्ट करते हुए कहा, “मुझे यकीन है कि आँकड़े सही हैं, ऐसा क्यों कहते हैं? क्योंकि जिस वक्त हम ये कहते हैं ये ट्विटर पर वायरल हो जाता है”। विष्णु सोम के कुतर्कों पर फटकार लगाते हुए निगम ने कहा, “तो आप तथ्यों से भाग रहे हैं।”
बचाव की मुद्रा में एनडीटीवी पत्रकार ने कहा, “मैं डिबेट के संदर्भ में केवल इतना कह रहा हूँ कि इंटरनेट पर बहुत नफरत फैली हुई है। एक सम्मानित व्यक्ति के तौर पर जैसे ही आप ये बातें कहते हैं तो यह एक पूरे समुदाय को टाइपकास्ट करता है। क्या ऐसा नहीं है, जिससे हम भारतीय बचना चाहते हैं?”
निगम ने कहा, “तथ्यों को सामने रखना हमारा कर्तव्य है और वकील हर रोज अदालतों में ईशनिंदा करते हैं।”
इतना सुनने के बाद निगम को अनसुना कर सोम दूसरे पैनलिस्ट की तरफ सरक लिए। हालाँकि, उन्होंने स्वीकार किया कि 95% आतंकवादी (या कम से कम अधिकांश आतंकवादी) इस्लामी आस्था से संबंधित हैं। लेकिन वो उदारवादी छवि दिखाने के चक्कर में सच को स्वीकार करने से बच रहे थे।
नोट: ऑपइंडिया ‘आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र डेटा’ को सत्यापित नहीं कर सका, जिसका उल्लेख देश रतन निगम ने NDTV पर बहस के दौरान किया था।
मध्य प्रदेश के रतलाम में 18 मुस्लिमों द्वारा घर वापसी करते हुए हिन्दू धर्म अपनाने की खबर है। इन सभी के द्वारा गोमूत्र से स्नान करते हुए जनेऊ धारण किए जाने का दावा किया जा रहा है। घर वापसी करने वाले परिवार के मुखिया मोहम्मद शाह हैं जो जड़ी-बूटी बेचने का कमा करते हैं। सभी ने अपने धर्म परिवर्तन का न्यायालय में शपथ पत्र भी दिया है। यह मामला गुरुवार (9 जून, 2022) का है।
Madhya Pradesh News
18 Muslims from one family adopted Hinduism in Ratlam.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घर वापसी करने वाले परिवार के मुखिया का नाम मोहम्मद शाह है जिन्हें अब राम सिंह नाम से जाना जाएगा। इन सभी ने आम्बा के भीमनाथ मंदिर में शिवपुराण सुना और वहीं पर पूर्णाहुति के बाद हिन्दू धर्म में वापसी का फैसला किया। स्वामी आनंदगिरी महराज ने विधि-विधान से इनकी हिन्दू धर्म में वापसी की औपचारिकताएँ पूरी करवाई। इसी क्रम में सभी ने गाय के गोबर और गोमूत्र में स्नान किया।
परिवार के मुखिया राम सिंह (पूर्व मोहम्मद शाह) के परिवार में उनका बेटा मौसम शाह भी है जो अब अरुण सिंह नाम से जाना जाएगा। इसके अलावा उसी परिवार के शाहरुख़ अब संजय, नजर अली अब राजेश, नवाब अब मुकेश और हीरो शाह अब सावन सिंह नाम से जाने जाएँगे। इसी परिवार की महिलाओं में मीनू बी अब मीना, रुखसाना अब रुक्मिणी और मुमताज अब माया नाम से जानी जाएँगी।
घर वापसी के बाद पूरे परिवार ने एक साथ जय श्रीराम और हर हर महादेव के नारे लगाए। परिवार के मुखिया ने बताया, “2-3 पीढ़ी पहले हमारे पुरखे हिन्दुओ में बेदी समुदाय से थे। इस दौरान वो ताबीज और जड़ी बूटी आदि बेचने का काम करने लगे। इसी बीच उन सभी ने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया था। पिछले कुछ सालों से हमारी आस्था हिन्दू धर्म की तरफ होने लगी। हम गाँव में जा कर शिव महापुराण कथा सुनने लगे। इसी बीच हमने स्वामी जी से हिन्दू धर्म में वापसी का निवेदन किया था। स्वामी जी मान गए और हमने अपने परिवार और कुछ रिश्तेदारों के साथ हिन्दू धर्म अपना लिया।”
हालाँकि उसी परिवार की एक महिला आशा ने कहा, “हमारी आस्था हिन्दू धर्म में ही थी। हम बस नाम के मुसलमान थे और मन से हिन्दू थे। हम कभी नमाज़ भी नहीं पढ़ते थे। न ही मस्जिद जाते थे। अब अब हिन्दू हैं।”